Thursday, September 3, 2026



 


कनीना में पेयजल समस्या, पानी के लिए इधर उधर भटक रहे उपभोक्ता
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कनीना की आवाज।
गर्मी के दिनों में भी उपभोक्ता पेयजल के लिए मारे मारे फिर रहे हैं। या तो पेयजल आता ही नहीं या फिर गंदा आता है। मोटर जलने से भी समस्या बनी हुई है।
 कनीना में गोशाला रोड के पास लगती ढाणी में पिछले एक सप्ताह से पेय जल समस्या हो रही है। जिस कारण ढाणी उमस भरी गर्मी में इधर उधर पानी के लिए भटक रहे है। पिछले एक सप्ताह से मोटर खराब है लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई सुध नहीं ली है। ढाणी वासी महिला बबीता, सुमन, रूबी, कमलेश , सोनम , हेमंत ने बताया कि एक सप्ताह से पानी के लिए निजी घर तो कभी बाबा राधे दास मंदिर की टंकी तो कभी गोशाला से पानी  भर कर ला रहे है। लेकिन अब तक जल विभाग से कोई भी कर्मचारी सुध लेने नहीं आया है। हमने वार्ड पार्षद को भी सूचना दी लेकिन सब ने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि यह हमारा क्षेत्र नहीं है। ढाणी वासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की अपील की है।
  उधर रेवाड़ी सड़क मार्ग पर स्थित मुख्य पेयजल केंद्र पर एक मोटर जली हुई थी जो बार बार उच्चाधिकारियों से संपर्क साधकर गुरुवार को ठीक करवाई गई है। उधर नहर पर आधारित पेयजल गत दिनों से न के बराबर आ रहा था। दूषित पेयजल सप्लाई की शिकायत आ रही थी वहीं कनीना मंडी नहर के साथ साथ रेवाड़ी रोड़ तक थाना पेयजल लाइन के उपभोक्ता गत दिनों से परेशान हैं। पेयजल प्राप्त करना बिना मोटर के संभव नहीं हैजबकि विगत दिनों तक बिना मोटर के अधिक प्रेशर वाला जल सप्लाई हो रहा था।
  इस संबंध में जेई जनस्वास्थ्य विभाग पवन कुमार का कहना है कि हम समस्या को ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं।
फोटो कैप्शन 11: पानी के लिए तरसती महिलाएं




गोगा पर्व को लेकर ट्रेनों में चल रही है भारी भीड़
-पूरे सितंबर माह इसी प्रकार चलेगी भीड़
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कनीना की आवाज।
 5 सितंबर जाहरवीर गोगा देव के पूजन के लिए राजस्थान में भारी भीड़ पहुंच रही है। कनीना खास होकर जाने वाली सभी ट्रेनों में जमकर भीड़ होती है। हर वर्ष यह भीड़ देखने को मिलती है किंतु रेलवे विभाग कनीना-महेंद्रगढ़ होकर  अलग से कोई ट्रेनों की सुविधा उपलब्ध नहीं करवाता है, यही कारण है कि कनीना से जो भी ट्रेन होकर गुजरती है उनमें जमकर भीड़ देखने को मिलती है। इन ट्रेनों में गोगा भक्तों के अलावा बैठने एवं खड़े होने तक की जगह भी नहीं मिलती है। यात्री नरेंद्र, जमुना, कैलाश से बात की तो उन्होंने बताया कि यदा कदा महेंद्रगढ़ या रेवाड़ी जाना होता है तो भाद्रपद माह में गोगा भक्तों की भीड़ को देखते हुए ट्रेनों में सफर करना मुश्किल हो जाता है।
मिली जानकारी अनुसार जाहरवीर गोगा चौहान वंश के थे और राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी में उनकी पूजा होती है। सभी धर्म के लोग गोगा महाराज के नाम से पूजा करने के लिए वहां पर जाते हैं। गोगा गुरु गोरखनाथ के शिष्य थे, जिनका जन्म चुरू जिले के ददरवा गांव में हुआ था। उन्हें जाहर वीर गोगा नाम से जाना जाता है। लोग मन्नत मांगने वहां जाते हैं और वहां जाने वाले सभी पीले वस्त्र पहन कर जाते हैं यही कारण है कि गोगाजी जाने वाले सभी यात्रियों को दूर से पहचाना जा सकता है। जहां कनीना में पहले उनके लिए रेलवे स्टेशन पर भंडारा आयोजित होता था किंतु इस बार कोई भंडारा नहीं लगाया गया है। यूं तो पूरे ही देश में जन्माष्टमी के अगले दिन गोगा पर्व मनाया जाता है परंतु गोगामेड़ी मेेले की अलग ही पहचान होती है। गोगामेड़ी में गोगा जी की समाधि बनी हुई है जहां लोग जाकर धोक लगते हैं। यह एकमात्र ऐसा मेला है जहां पर जाने वाले कुछ भक्त तो सरीसृपों जैसे सांप एवं गोह आदि लेकर जाते हैं। यह माना जाता है कि सांप का विश्व भी वहां जाने से जहरीले जीव का विष भी उतर जाता है। यही कारण है कि इस मेले में कुछ भक्त सरीसृपों को लेकर जाते हैं। क्योंकि गोगा की उत्पत्ति बाछल देवी के गर्भ में गूगल नामक फल के प्रसाद खाने के बाद ही हुई थी। इसलिए नाम गोगा रखा था जो चौहान वंश के संबंध रखते थे। जाने वाले यूपी के भक्त चंदनदास, कपिला, सोमदेव से बात हुई तो उन्होंने बताया कि वे हर वर्ष गोगामेड़ी जाते हैं और वापसी इसी माह में हो जाएगी।
फोटो कैप्शन 10: गोगामेड़ी मेले में ट्रेन से जाते हुए भक्त।




जिला स्तरीय सांस्कृतिक उत्सव में सुंदरह स्कूल की छात्राओं ने जीता सांत्वना पुरस्कार                 ******************************************************
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कनीना की आवाज।
राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नारनौल में जिला स्तरीय सांस्कृतिक उत्सव 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुंदरह की कक्षा पांचवी से आठवीं तक की छात्राओं ने पारंपरिक हरियाणवी लोकगीत दस जनी का झुमला जी सारी पाणी न जाए पर शानदार एवं मनमोहक समूह नृत्य प्रस्तुत किया ।
प्रस्तुति की विशेषता यह रही की छात्राओं ने पीतल की टोकनी को सिर पर रखकर संतुलन एवं आकर्षक स्टंट के साथ नृत्य प्रस्तुत किया। इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए विद्यालय की छात्राओं को सांत्वना पुरस्कार मिला।
इस उपलब्धि में एक्टिविटी  इंचार्ज चेतन शर्मा के मार्गदर्शन तथा मंजू यादव के सहयोग का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विद्यालय के प्राचार्य श्री बाबूलाल यादव ने सभी प्रतिभागी छात्राओं ,एक्टिविटी इंचार्ज तथा सहयोगी शिक्षिका को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
फोटो कैप्शन 07: सामूहिक नृत्य करते हुए सुंदराह की छात्राएं





गुढ़ा में गोगामेड़ी यात्रियों के लिए लगा जल पान और भंडारा
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कनीना की आवाज।
उपमंडल के गांव गुढ़ा में गोगामेड़ी जाने वाले यात्रियों के लिए ग्रामीणों द्वारा सुबह जल पान और दोपहर व रात को भोजन की व्यवस्था की गई है। अमित दुलौठिया ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से हर वर्ष भादप्रद में शिविर का आयोजन किया जाता है और गांव वासी तन मन और धन से सहयोग करते है। उन्होंने बताया कि आज तीसरा दिन है और लगभग ढाई से तीन हजार श्रद्धालु अब तक आ चुके है। इस मौके पर मंगतू राम साहब, रमेश दुलौठिया, महावीर नंबरदार, हरभगवान, जीवन प्रजापत, अमित कुमार इत्यादि ग्रामीण उपस्थित थे
फोटो कैप्शन 08: गोगामेडी में जाने वाले भक्तों के लिए गुढ़ा में कैंप




कृष्ण जन्माष्टमी आज , लड्डू गोपाल पोशाक और शृंगार सामान की लगने लगी भीड़
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कनीना की आवाज।
क्षेत्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बड़ी धूम धाम से मनाई जाएगी । इस अवसर पर मंदिरों को सजाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बाजार में लड्डू गोपाल के शृंगार की खरीद दारी भी बढऩी शुरू हो चुकी है और दुकानों पर महिलाओं की भीड़ भी बढऩे लग गई है। इस समय बाजार में शृंगार के सामन की रौनक हर दुकान पर सजी हुई है । कनीना में  जनरल स्टोर पर लड्डू गोपाल की रंग बिरंगी पोशाक से लेकर सिंहासन , झूले, मुकुट, जरीदार मोरपंखी और अन्य सजावटी सामग्री की कई वैरायटी उपलब्ध रही। इस बार खास आकर्षण कस्टमाइज ड्रेस बनी हुई है जिसे श्रद्धालु अपनी पसंद के रंग , डिजाइन, और साइज के अनुसार तैयार करवा रहे है।दुकान पर भी अलग अलग डिजाइन और साइज की एक से एक कपड़े आए हुए है। कृष्ण जन्माष्टमी पर श्रद्धालु मंदिरों में लड्डू गोपाल को सजा कर साथ लेकर जाते है और हर्षोल्लास से जन्मोत्सव मनाते है।
फोटो कैप्शन 09: लड्डू गोपाल खरीदते हुए भक्त




जन्माष्टमी एवं गोगा नवमी पर होती है पेड़ों की पूजा
-वर्षों से चला आ रहा रीति रिवाज    
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कनीना की आवाज।
बेशक वर्ष भर हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ा चलता रहता हो तथा पेड़ पौधों की बेकद्री होती हो किंतु वर्ष में एक बार हर घर में पौधों की पूजा की जाती है तथा उनको सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
 हर वर्ष साथ साथ आने वाले जन्माष्टमी एवं गोगा पर्व बेशक किसी देवों से जुड़े हुए पर्व होते हैं किंतु इन दोनों दिनों में एक एक पौधे की पूजा इन देवों के साथ साथ की जाती है। यही नहीं अपितु पूजा किए गए पौधों को विधि विधान से जल में प्रवाहित किया जाता है। यही कारण है कि कई गांवों में तो मेले भी आयोजित होते हैं ताकि उन मेलों के माध्यम से पौधों को जल में प्रवाहित किया जा सके।
  जन्माष्टमी के दिन यूं तो भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है तथा इस पर्व को ग्रामीण क्षेत्र में जाटी नाम से ही जाना जाता है। यही कारण है कि इस दिन जाटी पेड़ की पूजा की जाती है। वैसे तो जाटी राजस्थान में खेजड़ी नाम से जाना जाता है और इसे राज्य पौधा का दर्जा दिया गया है। पूर्वज बताते हैं कि वर्षों से जन्माष्टमी के दिन सुख दु:ख का साथी जाटी अर्थात खेजड़ी की पूजा चली आ रही है। पूर्वजों के अनुसार जब कुकिंग गैस सिलेंडर नहीं होते थे उस वक्त किसानों का सुख दु:ख का साथी जाटी ही थी। खेतों से जाटी को उखाड़कर लकड़ी को ही सुख दु:ख में जलाकर काम में लेते थे वहीं हवन में इसी वृक्ष की लकड़ी का प्रयोग आज भी हो रहा है। जाटी के पत्तों एवं फलों पर इंसान से लेकर पशु तक आश्रित हैं और जाटी पेड़ खाद की पूर्ति कर अपने नीचे फसल पैदावार को बढ़ाता है। ऐसे में जाटी की पूजा करके उसे जोहड़ में प्रवाहित किया जाता है।
  गोगा पर्व जाहर वीर गोगा देव की याद में भाद्रपद कृष्ण नवमी को मनाया जाता है जिसका राजस्थान में विशेष महत्व होता है किंतु हरियाणा में भी कम नहीं होता है। राजस्थान के हनुमानगढ़ में गोगा का बहुत बड़ा मेला लगता है जहां पूरे देश के लोग पीतांबर धारण कर आते हैं।
गोगा जिसे जाहर वीर गोगा कहा जाता है। उस देव के गुणों की चर्चा हर जगह है। हरियाणा में गोगा एक पेड़ को कहते हैं जो शाक है जिसे अपामार्ग, लटजीरा, चिरचिटा आदि नामों से जाना जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे अचिरांथिस अस्पेरा कहते हैं। इसमें इतने अधिक औषधीय गुण है कि इसे गोगा देव के रूप में पूजा जाता है। यही कारण है कि गोगा देव के साथ साथ गोगा पौधे की भी पूजा की जाती है जो कई बीमारियों में सहायक है वहीं घर के आस पास मिल जाता है।
कौन है जाहरवीर गोगा--
गोगाजी राजस्थान के लोक देवता हैं। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले का एक शहर गोगामेड़ी है। जहां भाद्रपद शुक्लपक्ष की नवमी को गोगा का मेला भरता है।
गोगा जी गुरु गोरक्षनाथ के शिष्य थे। उनका जन्म चुरू जिले के ददरेवा गांव में हुआ था।  ददरेवा में सभी धर्म और सम्प्रदाय के लोग मत्था टेकने के लिए दूर-दूर से आते हैं। मुस्लिम उन्हें पीर नाम से जानते हैं। गोगाजी का जन्म राजस्थान के ददरेवा (चुरू) चौहान वंश के राजपूत शासक जेवरसिंहकी पत्नी बाछल के गर्भ से गुरु गोरक्षनाथ के वरदान से भादो सुदी नवमी को हुआ था। चौहान वंश में राजा पृथ्वीराज चौहान के बाद गोगा वीर और ख्याति प्राप्त राजा थे। वे प्रसिद्ध शासक थे जिनका राज्य हांसी (हरियाणा) तक था।
उन्हें सांपों के देवता के रूप में भी पूजा जाता है। लोग उन्हें गोगाजी, गुग्गा वीर, जाहर वीर,राजा मण्डलिक व जाहर पीर के नामों से पुकारते हैं।
गोगादेव की जन्मभूमि पर आज भी उनके घोड़े का अस्तबल है। उनके जन्म स्थान पर गुरु गोरक्षनाथ का आश्रम भी है और वहीं है गोगादेव की घोड़े पर सवार मूर्ति है। ग्रामीण क्षेत्रों में गोगाजी के प्रतीक के रूप में पत्थर या लकड़ी पर सर्प मूर्ती उत्कीर्ण की जाती है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष तथा कृष्ण पक्ष की नवमी को गोगा की स्मृति में मेला लगता है।
हनुमानगढ़ जिले के नोहर उपखंड में स्थित गोगाजी के पावन धाम गोगामेड़ी स्थित है।  प्रतिवर्ष लाखों लोग गोगा जी के मंदिर में मत्था टेक तथा छडिय़ों की विशेष पूजा करते हैं।
राजस्थान के महापुरूष गोगाजी का जन्म गुरू गोरखनाथ के वरदान से हुआ था। गोगाजी की माँ बाछल देवी नि:संतान थी। संतान प्राप्ति के सभी यत्न करने के बाद भी संतान सुख नहीं मिला। गुरू गोरखनाथ गोगामेडी के टीले पर तपस्या कर रहे थे। बाछल देवी उनकी शरण में गईं तथा गुरू गोरखनाथ ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया और एक गुगल नामक फल प्रसाद के रूप में दिया। प्रसाद खाकर बाछल देवी गर्भवती हो गई और तदुपरांत गोगाजी का जन्म हुआ। गुगल फल के नाम से इनका नाम गोगाजी पड़ा।
 नृत्य करती टोली अपने साथ गोगा पीर की छड़ी लेकर जब घर-घर आती है तो पर्व की याद ताजा हो जाती है। यूं तो मेले तथा दंगल गांवों में लगते हैं किंतु त्योहार पर अनोखे रिवाज प्रचलित हैं। इस पर्व पर वृक्षों की पूजा भी की जाती है।
     जन्माष्टमी का दिन और रात कृष्ण उत्सव,व्रत व लीलाओं में व्यतीत होने के बाद गोगा पर्व शुरू होता है। प्रात:काल से ही पर्व की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। किसान के खेतों में खड़ी जाटी पौधे की टहनी तथा गोगा नामक पौधे को उखाड़कर प्रत्येक घर में लाया जाता है जिसकी विधि विधान से पूजा की जाती है। ग्रामीण महिलाओं का कहना है जाटी किसानों की सुख-दु:ख की साथी होने के बाद ही इसे पूजा जाता है। हरियाणा में जाटी हर किसान के खेत में मिलता है जो हर सुख एवं दु:ख में काम आता रहा है और इसके इतने अधिक उपयोग हैं कि इसे कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा जाता है। राजस्थान का राज्य पेड़ खेजड़ी भी जाटी ही है।
   तत्पश्चात प्रत्येक घर में पूजा का स्थान निर्धारित होता है जो अक्सर रसोई में होता है। दीवार पर हल्दी व चंदन से गोगा पीर व जाटी पौधे की तस्वीर बनाई जाती हैं। तवे की कालिख से तस्वीरों को रंग भरा जाता है। गोगा व जाटी पौधों की टहनी तस्वीर के पास रख दी जाती हैं और विधि विधान से पूजा की जाती है। शाम होने के बाद उन्हें जोहड़ में बहा दिया जाता है। रक्षा बंधन पर बहन द्वारा भाई की कलाई पर बांधा गया धागा भी जोहड़ में बहाने का रिवाज है। तीज उत्सव पर शुरू हुआ पतंग उड़ाने का कार्य भी इसी दिन पूर्ण किया जाता है।
 इस पर्व से पूर्व  एक जाति विशेष के लोग लंबी बांस पर मोर पंख, रंगीन वस्त्र,गोटा आदि से सजाकर गोगा पीर की छड़ी बनाते हैं। गोगा पर्व से 10-12 दिन पूर्व ही इस छड़ी को लेकर पांच सात जनों की एक टोली, ढ़ोल और ताशों के साथ नृत्य करती द्वार-द्वार तक पहुंचती है और छड़ी की मुबारक देते हैं। त्योहार पर मेले की धूम मची होती है जहां विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। वर्तमान में रिवाज और पर्व की महक कुछ फीकी जरूर पडऩे लगी है किंतु वृद्ध त्योहार के प्रति अधिक उत्सुक रहते हैं।
फोटो कैप्शन 05: जाटी एवं गोगा पौधों की फोटो।



शराब के ठेके का ताला तोड़कर शराब की चोरी
-पुलिस ने दर्ज किया केस
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कनीना की आवाज।
 जगदीश वाइन बेवल के ठेके का ताला तोड़कर चोर भारी मात्रा में शराब ले गया। सीसीटीवी फुटेज से चोर का पता लग गया है और सेल्समैन ने चोर के विरुद्ध केस दर्ज करवा दिया है। केस दर्ज करवाते हुए विनोद कुमार खरकड़ाबास ने कहा है कि वह बेवल स्थित शराब के ठेके पर सेल्समैन है।एक व दो सितंबर की रात को शराब के ठेके को बाहर से लाक करके सोने के लिए चला गया। उसे सूचना मिले की रात को दो से 2:30 बजे ठेका शराब का ताला टूटा हुआ है। जब उन्होंने जाकर देखा तो ताला टूटा पड़ा था और भारी मात्रा में शराब गायब मिली। जब सीसीटीवी फुटेज चेक किया तो संजय नामक व्यक्ति ठेके का ताला तोड़कर चोरी करता नजर आया। उन्होंने संजय के विरुद्ध केस दर्ज करवा दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।


शर्मा दंपति ने करवाया मौसम मानिटरिंग डिवाइस का पेटेंट
-दोनों ही शोधार्थी हैं
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव झगड़ोली के विशाल शर्मा और उसकी पत्नी अंकित ने पोर्टेबल एयर एवं मौसम मानिटरिंग डिवाइस पेटेंट करवाया है। भारत सरकार ने दोनों के नाम पर इस यंत्र का पेटेंट कर दिया है।
  उनके पिता डा. अजीत शर्मा ने बताया कि विशाल शर्मा ग्वालियर विश्वविद्यालय से शोधार्थी है वहीं अंकित झुंझुनू विश्वविद्यालय से शोधार्थी है। दोनों ने एक ऐसा यंत्र पेटेंट करवाया है जो छोटा होने के साथ-साथ वायु और मौसम को नियंत्रित करेगा। विशाल शर्मा ने एमटेक मुरथल से की है।
  विशाल शर्मा बताते हैं कि इस डिवाइस को कहीं भी और किसी भी जगह ले जाया जा सकता है। इस से वायु की गुणवत्ता का भी पता लगाया जा सकेगा। जिसके लिए बड़े उपकरणों की जगह ये एक डिवाइस ही काम मौसम और वायु की गुणवत्ता को मापने में सक्षम रहेगी। ये एक हैंडी डिवाइस है जिसे एक छोटे से बैग में भी ले के जा सकते हो इसका आइडिया 2022 में जब सरकार ने दिवाली के बाद ग्रैप नार्म लागू किए तब आया था कि कोई ऐसे उपकरण हो जो हर जगह के वायु की गुणवत्ता का मापन कर सके। वैसे भी हमेशा दिल्ली का ही एयर इंडेक्स दिखाया जाता है।
इसमें परेशानी सबसे बड़ी ये थी कि इसका आकार कैसे छोटा किया जाए। क्योंकि मौसम मानीटरिंग के साथ साथ इसमें वायु की गुणवत्ता का मापन भी करना था। इन दोनों के लिए बहुत सारे सेंसर और माइक्रोप्रोसेसर की जरूरत रहती है। इसमें प्रेरणा स्त्रोत रही मेरी मुरथल यूनिवर्सिटी की गाइड सुदेश चौधरी रही है।
फोटो कैप्शन: विशाल एवं अंकिता




नपा के सफाई कर्मियों की काम छोड़ हड़ताल 29वें दिन भी जारी
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कनीना की आवाज।
नगर पालिका सफाई कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर नगर पालिका सफाई कर्मचारी 29वें दिन भी हड़ताल पर रहे। ।  कर्मियों का कहना है कि सरकार ने अभी तक उनकी मांगें नहीं मानी हैं जिसके कारण हड़ताल जारी है।
  यूनिट कनीना प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि सभी कर्मी हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, ठेका प्रथा बंद करने, एचकेआरएन खत्म करने, समान काम का समान वेतन लागू करने की प्रमुख हैं। लेकिन सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है।
उनका कहना है कि सरकार ने अभी तक कोई मांग पूरी नहीं की है। उधर कनीना के विभिन्न स्थानों पर गंदगी के ढ़ेर लग गए हैं।  लोग बेहद परेशान हैं। जगह जगह गंदगी के ढेरों में आवारा जंतु मंडराते रहते हैं।
  इस मौके पर अशोक कुमार उप प्रधान, योगेश कुमार, राकेश कुमार, जमादार नवीन कुमार, कर्मवीर, सुभाष, सोनू, शशि बाला, रतनलाल, राजेश, प्रदीप, पवन, संजय व अन्य हड़ताल पर रहे।
फोटो कैप्शन 04: सफाई कर्मी कनीना हड़ताल पर



खरकड़ाबास में भंडारा लगाया
-भक्तों ने किया प्रसाद ग्रहण
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव खरकड़ाबास में भगवान देवनारायण हीरामल बाबा का वार्षिक भंडारा आस्था, श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम से आयोजित किया गया। रात्रि को जागरण में दिनेश एवं पार्टी ने भगवान देवनारायण की महिमा का गुणगान कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में धोक लगाकर मन्नत मांगी और प्रसाद ग्रहण किया।
 अतरलाल ने कार्यक्रम में पहुंचकर भगवान देवनारायण के मंदिर में पूजा अर्चना कर बाबा से समाज में सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि जागरण, भंडारा, कीर्तन, कलश यात्रा भारत की सनातन समृद्ध परंपराएं हैं। इनसे समाज में समरसता, भाईचारा, सेवा और समर्पण की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि जो सच्चे मन से बाबा के दरबार में आता है उसकी मनोकामना पूरी होती है। इस अवसर पर भागमल, कंवर सिंह, जगदीश , भगत जगदीश, पाल सिंह, सूबे सिंह, सुंदरपाल, विनोद, राजू, रामबिलास, नरेश, बलवान, अजीत, धर्मसिंह, राजपाल, ताराचंद, रोहताश आदि सैकड़ों भक्तजन उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 03: भंडारा में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु।


पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में चार दिवसीय विज्ञान शिविर का समापन  
-डा. रेणु वर्मा रही मुख्य अतिथि

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कनीना की आवाज।
पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, करीरा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के विज्ञान ज्योति टीसी कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित चार दिवसीय विशेष शिविर का आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस चार दिवसीय आयोजन में दो दिन विज्ञान शिविर और दो दिन अटल टिंकरिंग गतिविधि का आयोजन किया गया था। शिविर के समापन समारोह में उप-मंडलीय अस्पताल कनीना की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा. रेणु वर्मा ने मुख्य अतिथि भूमिका निभाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य बीएम रावत ने की।
 अपने संबोधन में मुख्य अतिथि डा. रेणु वर्मा ने छात्राओं को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दैनिक जीवन में विज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य और अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। विद्यालय के प्राचार्य बीएम रावत ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और छात्राओं को विज्ञान ज्योति कार्यक्रम का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस चार दिवसीय शिविर के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने अटल टिंकरिंग लैब में रोबोटिक्स, कोडिंग और आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। विज्ञान शिविर के दौरान विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों की तार्किक और खोजी क्षमता को बढ़ावा दिया गया। विज्ञान ज्योति प्रभारी शिक्षका रजनी यादव ने छात्राओं को विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया।   
फोटो कैप्शन 01: विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन करते एसएमओ कनीना डा. रेणु वर्मा एवं प्राचार्य बीएम रावत


एसडी विद्यालय ककराला में मनाया श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव
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कनीना की आवाज।
एसडी विद्यालय ककराला में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में विद्यालय उपनिदेशक पी एस यादव ने स्टाफ सदस्यों के साथ भगवान श्री कृष्ण फोटो के सामने द्वीप प्रज्ज्वलित कर पूजा अर्चना की। इसके बाद कार्यक्रम शुभारम्भ हुआ जिसमें नन्हे बच्चों ने स्वयं को भगवान श्री
कृष्ण की बाल लीलाओं के साथ-साथ अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत कर उनकी
शिक्षाओं को उजागर किया। विद्यार्थियों ने सुदामा, बलराम, नन्द बाबा,
माता यशोदा एवं माता देवकी के पात्रों को भी प्रदर्शित किया। विद्यार्थियों द्वारा भगवान श्री कृष्ण एवं राधा रानी से जुड़े गीतों पर
नृत्य कर अपनी भावनाओं को प्रदर्शित किया। विद्यालय निदेशक ओमप्रकाश यादव ने जन्माष्टमी के अवसर पर सभी प्रतिभागियों के साथ व अन्य विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं दी तथा भगवान श्री कृष्ण के
जीवन पर प्रकाश डाला कि भगवान श्री कृष्ण एक बच्चे, सारथी, योद्धा,
शिष्य, चरवाहा, गोपियों का प्रिय आदि भूमिकाओं में सम्पूर्ण मानव जाति को
सन्देश देते रहे। वे जीत और हार, सुख-दुख स्थितियों में समान अनुभव करते
हैं। उन्होंने कर्म की प्रधानता के महत्व को बताया तथा हमेशा प्रसन्न रहने का सन्देश दिया। यह भी बताया गया कि पांच हजार वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण द्वारा गीता उपदेश के माध्यम से जो सन्देश दिया वो परम सत्य है।
उन्हें अपनाकर हम दुख-कलेश से मुक्त होकर सफल-सुखद जीवन जी सकते हैं।
मनुष्य का संघर्ष जितना बाहरी होता है उतना ही आन्तरिक भी चलता रहता है
इसलिए विचार एवं कर्म का संतुलन ही सफलता का मूल मन्त्र है।
इस अवसर पर निदेशक ओमप्रकाश, सीईओ आरएस यादव, स्नेह यादव, ईश्वर सिंह,


















प्रियंका यादव, बिंदु व समस्त स्टाफ  उपस्थित रहे।                           
फोटो कैप्शन 02: जन्माष्टमी मनाते हुए एसडी स्कूल के ककराला के बच्चे


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