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Monday, September 28, 2026
युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति राष्ट्र निर्माण में निभाएं सक्रिय भूमिका
-युवाओं को सकारात्मक क्षेत्र में बढऩा चाहिए आगे -सिगड़ा
-आज होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन-नित्यानंद यादव
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कनीना की आवाज। मेरा युवा भारत, नारनौल द्वारा राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवकों के लिए जाट सभा नांगल चौधरी में आयोजित 6-दिवसीय आवासीय अभिमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम के पांचवें दिन विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं व्यवहारिक सत्र आयोजित किए गए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीएमडी क्लब कनीना के लक्की राव सिगड़ा एवं डा. होशियार सिंह यादव लेखक कनीना ने विचार रखे। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई।
कार्यक्रम में लक्की राव सिगड़ा ने स्वयंसेवकों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता का सकारात्मक दिशा में उपयोग समाज एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं कौशल को अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाएं तथा उन्हें सामाजिक एवं राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोडऩे का कार्य करें।
इस मौके पर डा. होशियार सिंह यादव लेखक ने सृजनात्मकता विषय पर विचार व्यक्त किए और पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में युवाओं का उत्साह उनकी कौशलता के अहं बताते हुए लेखन कार्य की बारीकियों की जानकारी दी। उन्होंने लेखन कार्य में रुचि जाग1त कर आस पास के समाचार संकलन कर प्रकाशन हेतु तैयार करने के तरीके भी बताए।
जिला युवा अधिकारी नित्यानंद यादव ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवकों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए आवश्यक ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें राष्ट्र निर्माण के विभिन्न अवसरों से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04:कार्यक्रम में संबोधित करते लक्की राव सिगड़ा।
किसान जुटे रबी फसल की तैयारी में
-खेतों की चल रही है सिंचाई
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र की बावनी अर्थात 52 हजार हेक्टेयर भूमि मानी जाती है। इस पर खरीफ फसल किसानों द्वारा लेने के पश्चात रबी फसल की तैयारी में किसान जुट गए हैं। त्वरित गति से अपने खेतों की सिंचाई फव्वारों द्वारा कर रहे हैं क्योंकि रबी फसल पूर्ण रूप से ट्यूबवेलों पर निर्भर करती है। किसान सरसों और गेहूं और गेहूं उगते हैं। सरसों की अच्छी पैदावार लेने के लिए अच्छे बीजों एवं खादों की तलाश कर रहे हैं। 10 अक्टूबर से सरसों की बीजाई प्रारंभ हो जाती है जबकि 1 नवंबर से गेहूं की बिजाई शुरू कर दी जाती है। वर्तमान में किसान बीजों की दुकानों पर जहां खाद एवं बीज लाकर खेतों में डाल रहे हैं वही बीजों को बीजाई करने के लिए अपने घर में सुरक्षित रख रहे ताकि समय आते ही बिजाई कर दी जाए।
किसान सुरेंद्र सिंह, सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि जल्द ही बिजाई का समय आने वाला है। अभी दिन के समय तापमान अधिक होने से बीजाई संभव नजर नहीं आ रही है।
क्या कहते हैं पूर्व कृषि अधिकारी-
पूर्व कृषि अधिकारी डा. देवराज यादव बताते हैं कि सरसों की बिजाई 10 अक्टूबर से प्रारंभ हो जाती है जो 25 अक्टूबर तक जारी रहती है। इसके लिए तापमान 28 से 30 डिग्री होना चाहिए। तत्पश्चात 1 नवंबर से गेहूं की बिजाई शुरू हो जाती है। देसी किस्म सी-306 सात नवंबर तक बीजाई की जा सकती है तथा बाद में गेहूं की बीजाई 25 नवंबर तक जारी रहेगी जिसके लिए तापमान 22 डिग्री चाहिए। गेहूं के लिए सरसों के मुकाबले तापमान कम चाहिए। अभी मौसम में बदलाव नहीं हुआ है, आने वाले समय में मौसम में बदलाव होने की संभावना है। तत्पश्चात किसान तेजी से बीजाई का काम करेंगे। वर्तमान समय में किसान खेतों की तैयारी कर रहे और खेतों की सिंचाई करके बीजाई के लिए तैयार रहेंगे।
कई समस्याओं से जूझ रहे हैं किसान--
क्षेत्र के किसान कई समस्याओं से जूझते आ रहे हैं। पैदावार लेने के लिए बिजली, पानी, खाद, गिरते जलस्तर, बीजों की जानकारी अभाव तथा कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में रबी फसल पैदावार लेना तलवार की धार के समान है।
कनीना क्षेत्र का किसान यूं तो सदा ही मेहनत के बलबूते पर जीवित रहा है। कठिन परिश्रम करके अपनी आजीविका कमा रहा है। उसकी मुख्य फसलें खरीफ एवं रबी की होती है। खरीफ की फसल वर्षा पर आधारित होती है। पहले ही भू-स्तर गिरता जा रहा है ऊपर से डार्क जोन घोषित होने से नलकूप खोदना आसान नहीं रहा है। वैसे भी नलकूप लगाना लाखों रुपये का खर्चा होता है। यह भी सत्य है कि प्रतिवर्ष उसके बिजली के उपकरण जलने की समस्या रहती है। जैसे तैसे उपकरण ऋण लेकर लगा भी देता है तो पानी की समस्या फिर भी आड़े आ जाती है क्योंकि बिजली कम आती है जिसके चलते पर्याप्त खेतों की सिंचाई नहीं हो पाती है। इस संबंध में कुछ किसानों से चर्चा की गई जिनके विचार निम्र हैं--
**कनीना क्षेत्र में नहरों की संख्या काफी है किंतु या तो उनमें पानी आता ही नहीं या फिर वह पानी पीने के लिए ही सप्लाई होता है। इस पानी को किसान ले नहीं सकते। खादों की कमी विगत वर्ष से अधिक चल रही है। बीज और दवाइयां भी तो अच्छे नहीं मिलते हैं। मिल भी जाते हैं तो अति महंगे होते हैं। किसान रूढि़वादी होने के कारण भी परेशान हैं क्योंकि वे नए बीजों का उपयोग करने की बजाए पूर्व में उपयोग करते आ रहे बीजों का ही उपयोग करना श्रेष्ठ समझते हैं।
---सूबे सिंह
किसानों के सामने गिरते जलस्तर की समस्या भी तो विकराल बन रही है क्योंकि किसान प्रत्येक वर्ष डीप बोर करवाता है किंतु अगले वर्ष वह जलस्तर भी घट जाता है। ऐसे में दक्षिण हरियाणा का किसान हताश व निराश लगता है। उससे बात करने पर कृषि को घाटे का सौदा बताता है। इन हालातों में उसके लिए फसल पैदावार लेना तलवार की धार पर चलने के समान है।
---राजेंद्र सिंह
फोटो कैप्शन: सूबे सिंह एवं राजेंद्र सिंह
नि:स्वार्थ गोसेवा की मिसाल, 13 महीने सेवा की, बदले में नहीं लिया एक रुपया
-आर्य समाज भडफ़ के प्रधान ओमप्रकाश आर्य ने बिना पारिश्रमिक निभाई गोसेवा; पूर्व प्रधान भगत सिंह बोले- -ऐसे समाजसेवी और गोभक्त को भविष्य में गौशाला की जिम्मेदारी मिलनी चाहिए
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कनीना की आवाज। सेवा का वास्तविक मूल्य तब सामने आता है, जब उसके पीछे किसी आर्थिक लाभ या पद की अपेक्षा न हो। श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में आर्य समाज गांव भडफ़ के प्रधान ओमप्रकाश आर्य ने 13 महीने तक नि:स्वार्थ भाव से सेवा कर ऐसी ही प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। उन्होंने इस अवधि में बिना वेतन अथवा पारिश्रमिक के प्रतिदिन गौशाला पहुंचकर गोसेवा के साथ व्यवस्थाओं में अपना योगदान दिया। उनके सेवाभाव के सम्मान में गौशाला परिसर में सम्मान समारोह आयोजित कर उन्हें सम्मानित किया गया।
ओमप्रकाश आर्य प्रतिदिन सुबह करीब 8 बजे गौशाला पहुंचते और शाम 5 बजे तक गोसेवा सहित विभिन्न कार्यों में सहयोग करते रहे। इस दौरान गौशाला में हुए निर्माण कार्यों की देखरेख और निगरानी में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निर्माण कार्यों से लेकर रोजमर्रा की व्यवस्थाओं तक उन्होंने जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ योगदान दिया।
13 माह में नहीं लिया एक रुपया पारिश्रमिक
ओमप्रकाश आर्य की सेवा की खास बात यह रही कि 13 माह की पूरी अवधि में उन्होंने गौशाला से एक रुपया भी वेतन अथवा पारिश्रमिक के रूप में नहीं लिया। सेवा के दौरान उन्होंने गौशाला की चाय तक ग्रहण नहीं की। उनका उद्देश्य केवल गोसेवा करना और गौशाला के विकास में अपना समय, श्रम और अनुभव देना रहा।
गौशाला के पूर्व प्रधान भगत सिंह ने ओमप्रकाश आर्य के सेवाभाव की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने ईमानदारी, अनुशासन और गोभक्ति के साथ सेवा की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे समाजसेवी और गोभक्त व्यक्ति को गौशाला की जिम्मेदारी देने पर विचार किया जाना चाहिए। 13 माह की सेवा में उन्होंने अपने कार्य और व्यवहार से अपनी निष्ठा साबित की है।
गौशाला प्रबंधन ने भी ओमप्रकाश आर्य की नि:स्वार्थ सेवा को विशेष योगदान बताया। प्रबंधन के अनुसार उनके समर्पण से गौशाला की व्यवस्थाओं और निर्माण कार्यों को मजबूती मिली। सम्मान समारोह में प्रबंधन एवं श्रद्धालुओं ने उन्हें सम्मानित कर उनके प्रति आभार जताया।
इस अवसर पर गौशाला प्रधान नरेंद्र ठेकेदार, प्रशासक एवं पूर्व प्राचार्य कृष्ण सिंह, मास्टर भूप सिंह, बलवान सिंह आर्य, कृष्ण प्रकाश , सूबेदार लक्ष्मीनारायण, रमेश कुमार, अमीर सुपरवाइजर, डॉ. महेश, रामप्रताप मास्टर, आर्य समाज के प्रधान मोहर सिंह आर्य, बाबा मोल्डनाथ मंदिर कमेटी के प्रधान दिनेश यादव, श्री आदर्श रामलीला कमेटी के प्रधान मोहित जैलदार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सचिन कुमार बने विश्व हिंदी परिषद के हरियाणा प्रदेश समन्वयक
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कनीना की आवाज।।सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ मंच संचालन तथा हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं संवर्धन के क्षेत्र में सक्रिय कनीना निवासी प्रवक्ता सचिन कुमार को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए विश्व हिंदी परिषद का हरियाणा प्रदेश समन्वयक नियुक्त किया गया है। नियुक्ति के बाद सचिन कुमार ने दिल्ली स्थित परिषद के केंद्रीय कार्यालय में पहुंचकर अपना कार्यभार ग्रहण किया।
सचिन कुमार शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाओं के साथ विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर तक मंच संचालन के क्षेत्र में भी उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में अपनी प्रभावी भूमिका निभाई है। हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं संवर्धन के प्रति उनकी रुचि और योगदान को देखते हुए उन्हें परिषद में यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
विश्व हिंदी परिषद की ओर से उन्हें हरियाणा प्रदेश में परिषद की गतिविधियों को आगे बढ़ाने तथा हिंदी के प्रचार-प्रसार एवं संवर्धन के लिए कार्य करने का दायित्व सौंपा गया है। सचिन कुमार ने कहा कि वे परिषद के उद्देश्यों के अनुरूप हिंदी को जन-जन तक पहुंचाने तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।
इस अवसर पर प्रवक्ता सचिन कुमार ने अपनी नियुक्ति पर परिषद के मुख्य संरक्षक श्री डॉ इंद्रेश कुमार, वित्त एवं ऊर्जा मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं राष्ट्रीय महासचिव डॉ. बिपिन कुमार, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य श्री देवी प्रसाद मिश्रा तथा पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित और पूर्व राज्यसभा सांसद आचार्य यारलागड्डा लक्ष्मी प्रसाद का आभार व्यक्त किया ।
विश्व हृदय दिवस 29 सितंबर
नियमित
रूप से रक्तचाप की जांच करवाई जाये- डा. यादव
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कनीना की आवाज। विश्व हृदय दिवस का उद्देश्य हृदय रोगों से बचने के लिए तथा रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। हृदय रोग दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं। इंसान के पास काम अधिक है फुर्सत कम है। हर साल लगभग 1.7 करोड़ लोग हृदय घात के कारण मरते हैं जो विश्व की मृत्यु दर का 31 प्रतिशत भाग होता है। स्वस्थ हृदय के लिए जीवन जीवन शैली में बदलाव करना जरूरी है। आज के दिन हृदय रोग दुनिया भर में मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण बन गया है। दिल का दौरा, स्ट्रोक, क्रोनोलाजी हृदय रोग के प्रमुख कारण है। कुल मौतों में से 85 प्रतिशत हृदय विकारों के कारण हो रही है। विश्व हृदय दिवस वर्ष 2000 से मनाया जा रहा है जो लगातार मनाया जाता आ रहा है। हृदय रोग विशेषज्ञ से इस संबंध में बात की गई।
अपने ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर की जांच नियमित रूप से करवाएं, कोलेस्ट्राल लेवल और बीएमआई को सही रखे, धूम्रपान किसी भी हालत में ना करें, तली हुई चीजों का सेवन कम से कम करें, शुगर वसा, रक्तचाप जांच करवाये, प्रतिदिन व्यायाम करें। 6 से 7 घंटे नींद ले, फलाहार जरूर करें जिनमें अनार, संतरा आदि का सेवन करें। अपने फैमिली डॉक्टर से भी समय-समय पर सलाह ले। शरीरिक रूप से फिट रहना बहुत जरूरी है। कोलेस्ट्राल, मधुमेह, अधिक वजन, मोटापा, पारिवारिक इतिहास ध्यान में रखे। शराब का सेवन अधिक हृदय रोगों को जोखिम का कारण बनता है, व्यायाम हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करने, बीएमआई को नियंत्रित रखने, उच्च कोलेस्ट्राल ,उच्च शर्करा ,उच्च रक्तचाप के कारण धमनी क्षति के जोखिम को कम करता है। हृदय घात की घटना से बचने में मदद करता है। चलना, दौडऩा, तैरना, साइकिल चलाना, टेनिस खेलना, रस्सी कूदना, एरोबिक व्यायाम, रक्त परिसंचरण में सुधार करते हैं। इसके कारण रक्तचाप रक्तचाप कम हो जाता है।
हृदय घात रोग का प्रमुख कारण गतिहीन जीवन शैली, गलत खानपान एवं आवश्यकता से अधिक तनाव है। इसके कारण घबराहट महसूस होती है, सीने में दर्द होता है। यह दर्द बाहों कंधे से लेकर जबड़े तक हो सकता है। सांस लेने में दिक्कत आती है, जी मचलाता है, पसीना आना, चक्कर आना आदि प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। धूम्रपान करने वाले, शुगर के रोगी, अत्यधिक रक्त दाब, अत्यधिक वजन वाले व्यक्ति को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना, धूम्रपान का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना,समुचित वजन पर नियंत्रण रखना, तनाव मुक्त जीवन शैली आदि जरूरी हैं।
अपने हृदय को स्वस्थ बनाए रखने का अर्थ है अधिक उम्र जीना। लाइफ़स्टाइल में बदलाव करना चाहिए, नियमित खान-पान करके हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है। हृदय रोग का सबसे प्रमुख कारण कोलेस्ट्रोल का बढऩा है, फिजिकल एक्टिविटी न करने के कारण मोटापा बढ़ता चला जाता है जो हृदय रोग का कारण बनता है। अच्छी आदतें डालकर भी रोगों से बचा जा सकता है। जिन लोगों को कोविड का गंभीर रूप था उन्हें सावधानी बरतनी की जरूरत है। कोविड संक्रमण होने के बाद कुछ जोरदार व्यायाम नहीं करें, हल्के व्यायाम करने जरूरी है।
-डा. होशियार सिंह यादव
फोटो कैप्शन: डा. होशियार सिंह यादव







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