Monday, March 23, 2026



 



भगत सिंह हैं युवाओं के लिए
आदर्श प्रेरणा स्रोत
-प्राध्यापक पहुंचा हुसैनी वाला, हुआ भव्य स्वागत
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कनीना की आवाज।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में अंग्रेजी के प्रवक्ता एवं झगडोली  निवासी मदन मोहन कौशिक ने आज राष्ट्रीय बलिदान स्मारक हुसैनी वाला फिरोजपुर भारत-पाकिस्तान बार्डर पर जाकर भारत की आजादी के महानायकों शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
   उन्होंने कहा कि भगत सिंह के आदर्श आज के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे भगत सिंह के जीवन से प्रेरणा ग्रहण करें, उनके बताए हुए मार्ग पर चलें तथा देश के लिए सर्वस्व अर्पण करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने बताया कि भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी सदियों में जन्म लेते हैं जिनकी एक नहीं वरन् तीन-तीन पीढिय़ां आजादी के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल रही। उन्होंने बताया कि 23 मार्च को हुसैनीवाला में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आजादी के इन दीवानों को नमन करने के लिए आते हैं। जगह-जगह लंगर तथा खेलकूद का आयोजन चलता रहता है तथा शाम को बार्डर पर भारतीय सीमा सुरक्षा बल की परेड देखने लायक होती है। इसी दिन फिरोजपुर से हुसैनी वाला के लिए स्पेशल ट्रेन का संचालन किया जाता है।
फोटो कैप्शन 05: हुसैनीवाला में प्राध्यापक का अभिन्नंदन करते हुए








अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि दिवस-24 मार्च
-कई बार विश्व रिकार्ड बुकों में नाम दर्ज है होशियार सिंह कनीना का
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कनीना की आवाज।
हर साल 24 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन व्यक्तियों के दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और समर्पण का जश्न मनाता है जिन्होंने अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है और अपने संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की है।
यह उन लोगों को सम्मानित करने का दिन है, जिन्होंने कला, विज्ञान, खेल, स्वास्थ्य या सामाजिक कार्यों में मेहनत से उपलब्धि हासिल की है। यह लोगों को अपने सपनों को पूरा करने और लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करता है, जिससे समाज और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाया जा सके। यह दिवस सिर्फ सफल लोगों की प्रशंसा नहीं, बल्कि उपलब्धि हासिल करने के लिए आवश्यक मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति का उत्सव है।
  ऐसी ही शख्सियत कनीना जिला महेंद्रगढ़, हरियाणा के डा. होशियार सिंह यादव हैं।  कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव पूर्व शिक्षक, साहित्यकार ,लेखक का नाम एक बार कई विश्व रिकार्ड बुक में दर्ज हो हुआ है। 25 जनवरी 2026 को एक साथ दो विश्व रिकार्ड बुकों भारत विश्व रिकार्ड बुक तथा इंफ्लुएंस विश्व रिकार्ड बुक में नाम दर्ज हुआ है। देश की जानी मानी हस्थियों जायेश भ_, मनीषा, अदिल शेख,किशन सहाय आइपीएस ने उन्हें सर्टिफिकेट, गोल्ड मेडल, विश्व रिकार्ड बुक की प्रति, बैज तथा स्मृति चिह्न से जयपुर में नवाजा गया था।
जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में उन्हें विभूषित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विदेशों तक विश्व बुक रिकार्ड में नाम दर्ज हो चुका है। इसी कड़ी में इनफ्लुएंस बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज हो चुका है। यह अवार्ड राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर जयपुर में दिया गया। विगत करीब 40 सालों से साइकिल चलाते आ रहे हैं और लगभग हर काम साइकिल पर चलकर करते हैं। वे ताउम्र साइकिल चलाना चाहते हैं। वे प्रतिदिन 50 से 60 किमी तक साइकिल चला लेते हैं।
 अब तक हजारों की संख्या में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त, डा. होशियार सिंह यादव के 3 शोध प्रकाशित तथा तीन बार राज्यपाल से, राज्य शिक्षक पुरस्कार तथा अनेकों अवार्डोंं से सम्मानित डाक्टर यादव लंबे समय से साइकिल चला रहे हैं। करीब 40 सालों से साइकिल चला रहे और ताउम्र चलने का संकल्प ले रखा है। यही नहीं कावड़ यात्रा, खाटू श्याम पदयात्रा ,जैतपुर पदयात्रा तथा अन्य किसी धाम की यात्रा पर पैदल जाकर नाम कमा चुके हैं। यही कारण है कि उनका नाम एक बार फिर से विश्व रिकार्ड बुक में दर्ज हो चुका है।
कई विश्व रिकार्ड धारक हैं-
कुर्सी प्रयोग किये बगैर 40 वर्षों तक सदा खड़े रहकर पढ़ाने के कारण डा. होशियार सिंह, कनीना का इंडियन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम पहले ही दर्ज हो चुका था और इंफ्लुअंस बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज हो चुका है।
 इससे पहले उन्होंने लंदन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज करवाया था। यही नहीं इंटरनेशनल बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड, इलाइट बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड,इंडियन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज हो चुका है वहीं आईकानिक अवार्ड भी मिल चुका है। साथ में ओरिएंट बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज हो चुका है। इसके अलावा चैंपियन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड, भारत विश्व रिकार्ड बुक में भी नाम दर्ज हो चुका है। यही नहीं कई विश्व रिकार्ड बुकों में भी उनका नाम दर्ज हो चुका हैं।
फोटो कैप्शन: डा. होशियार सिेंह यादव


 अंतर राष्ट्रीय शो में चयन हुआ कारोली गौशाला का सोमनाथ नंदी
---संस्थापक सन्नी शर्मा कारोली सम्मानित

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कनीना की आवाज।
23 मार्च को बीफा संस्था जो की अपने देसी हरियाणा नस्ल को बचाने के लिए कार्य कर रही है। सेंस्था ने पहले अंतरराष्ट्रीय देशी नस्ल की गायों का हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश, राजस्थान से चुनिंदा श्रेष्ठ नस्ल के गोवंश लिए शो करवाया जिसमें रेवाड़ी के कारोली गांव स्थित भगत सिंह गो चिकित्सालय एवं देसी गो संवर्धन केंद्र के सोमनाथ नदी का चयन हुआ। संस्थापक सन्नी शर्मा कारोली ने बताया कि सोमनाथ नामक नंदी पहले भी अखिल भारतीय स्तर पर आठ बार चैंपियन रह चुका है। गौशाला के डाक्टर रोहित ने बताया हर गोशाला के लिए गो संवर्धन बड़ा जरूरी है। हमारी गौशाला से 23 नंदी अलग-अलग गौशाला एवं पंचायतों में गौ संवर्धन के लिए दे चुके हैं। ये अंतर्राष्ट्रीय मेला बहु अकबरपुर के वेटरनरी कालेज में हुआ जिसमें मुख्य अतिथि गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत ,गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष और भी सम्मानित नेता गणों ने सोमनाथ को सम्मानित किया और बड़ी प्रशंसा की। इस मौके पर सभी ग्रामवासियो में खुशी का माहौल है।  इस आयोजन पर ईश्वर पंडित, रामोअवतार, रामनिवास, डा. रोहित, देशराम देशप्रेमी, सचिन, अंशु, रोहित आदि गौ सेवक उपस्थित रहे। गो संवर्धन के लिए नदियों की सेवा गौशाला में बिल्कुल मुफ्त है।
फोटो कैप्शन 05: सन्नी शर्मा को सम्मानित करते हुए




विश्व टीबी दिवस- 24 मार्च
टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है
-नियमित जांच एवं दवा लेने से दूर कर सकते हैं बीमारी को-डा. मोरवाल
-24 मार्च को मिलेगा 3 टीबी फ्री गांवों को गोल्ड मेडल
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कनीना की आवाज।
 टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। सही समय पर जांच एवं दवा लेने से दूर कर सकते हैं।  
ट्यूबरकुलोसिस को आम बोलचाल की भाषा में टीबी कहते हैं। यह शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, फेफड़ों में होने वाला टीबी सबसे आम प्रकार का होता है।
टीबी एक संचरणीय रोग है जो एक भी खांसी और छींक के द्वारा एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। टीबी का खतरा उन लोगों को सबसे अधिक होता है जो जिन्हें पहले से कोई बड़ी बीमारी जैसे कि एड्स या डायबिटीज आदि होती है। साथ ही, जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है उन्हें भी इस बीमारी का खतरा अधिक होता है।
कनीना में टीबी के मरीज-
वरष्टि टीबी सुपरवाइजर पवन यादव ने बताया जिला महेंद्रगढ़ में टीबी के चार यूनिट हैं जिनमें कनीना, महेंद्रगढ़ अटेली एवं नारनौल आते हैं। कनीना यूनिट के 85 गांव ाामिल किए गए हैं।  कि अकेले कनीना यूनिट में वर्ष 2025 में 356 मरीज थे जिनमें से 271 का सफल ईलाज हो चुका है। शेष का अभी जारी है। कनीना टीबी यूनिट जिसमें धनौंदा, सेहलंग, मालड़ाबास, भोजावास, दौंगड़ा अहीर, मुंडिया खेड़ा एवं कनीना सब यूनिट आते हैं। वर्ष 2026 में अब तक तीन माह में 76 केस टीबी के आ चुके हैं।  डाटस टीबी को दूर करने का बेहतर तरीका है। नियमित रूप से दवा लेने से यह रोग दूर हो जाता है। उन्होंने बताया कि अब तक कनीना यूनिट के 30 गांव टीबी फ्री गांव वर्ष 2025 के थे तथा 2026 में 24 गांव टीबी फ्री हैं। भालखी, मानपुरा, कपूरी गांवों में तीन सालों से टीबी का कोई केस नहीं आया इसलिये इनको गोल्ड मेडल 24 मार्च को नारनौल में मिलेगा। वहीं कनीना के दस गांवों को सिल्वर मेडल तथा 11 गांवों को ब्रांज मेडल के तहत आते हैं। उन्होंने बताया कि रेणू वर्मा एसएमओ कनीना के तत्वावधान में सभी गतिविधियां सुचारु रूप से जारी हैं।
टीबी के प्रकार -
डा. जितेंद्र मोरवाल ने बताया कि टीबी मुख्यता दो प्रकार के होते हैं जिसमें लेटेंट टीबी और सक्रिय टीबी शामिल हैं। टीबी को अन्य दो भागों में बांटा जा सकता है जिसमें पल्मोनरी और एक्स्ट्रा पल्मोनरी नाम दिया गया है।
टीबी के कारण
टीबी से पीडि़त मरीज जब छींकता, खांसता और थूकता है तो उसके द्वारा छोड़ी गई सांस से वायु में टीबी के बैक्टीरिया फैल जाते हैं। यह बैक्टीरिया कई घंटों तक वायु में जीवित रहते हैं और स्वस्थ व्यक्ति भी आसानी से इसका शिकार बन सकते हैं। जब टीबी का बैक्टीरिया सांस के माध्यम से फेफड़ों तक जाता है तो वह कई गुना बढ़ जाता है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। हालांकि, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इसे बढऩे से रोकती है, लेकिन जैसे-जैसे यह क्षमता कमजोर होती है, टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है।
टीबी के लक्षण -
डा. ने बताया कि टीबी के प्रमुख लक्षणों में तीन सप्ताह से अधिक समय तक खांसी होना, सांस फूलना,सांस लेने में तकलीफ होना, शाम के दौरान बुखार का बढ़ जाना, सीने में तेज दर्द होना,   अचानक से वजन का घटना, भूख में कमी आना, बलगम के साथ खून आना,फेफड़ों का संक्रमण होना,लगातार खांसी आना,बुखार आना प्रमुख हैं।
इनके लक्षणों के अलावा भी कुछ अन्य लक्षण मिल सकते हें। जिनमें लकवा लगना,पेट में दर्द होना,ग्रंथियों में स्थिर सूजन होना,डायरिया की शिकायत होना,पीठ में अकडऩ होना,प्रभावित हड्डी में दर्द और उसकी कार्यशीलता में कमी आना आदि प्रमुख हैं।  
टीबी की जांच-
उन्होंने बताया कि टीबी की जांच के लिए बलगम जांच, छाती एक्सरे, सीबी नाट, टर्यू नाट प्रमुख हैं। ये जांच महेंद्रगढ़ तथा नारनौल में संभव हैं।
फोटो कैप्शन: डा. जितेंद्र मोरवाल एवं पावन यादव टीबी सुपरवाइजर


कनीना क्षेत्र में हुई बूंदाबांदी
-किसानों का लावणी का काम प्रभावित
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में सोमवार सुबह बूंदाबांदी हुई जिसके चलते किसानों का लावणी का काम प्रभावित हो गया है। जहां विगत दिनों वर्षा होने के बाद दो दिनों मौसम साफ रहा है। इसके बाद सोमवार को सुबह बूंदाबांदी हुई। बूंदाबांदी करीब आधे घंटे तक धीरे-धीरे चलती रही। जिसके चलते कि सानों की सरसों की लावणी तथा पैदावार लेने का कार्य प्रभावित हो गया है। किसान मुश्किल से अपनी फसल को सुखाकर फिर से लावणी तथा पैदावार लेने के कार्य में लगे थे किंतु वर्षा ने फिर से विघ्र डाल दिया। आए दिन मौसम बदल रहा है जिसके चलते किसानों की चिंता की रेखाएं बढ़ रही है। किसानों कहना है कि किसी प्रकार उनकी फसल पैदावार घर तक पहुंच जाए तत्पश्चात वर्षा होती तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं रहेगी। परंतु घर तक फसल पैदावार पहुंचना एक कठिन कार्य  हो गया है। किसान देर सवेर समय निकाल कर अपनी फसल कटाई कर रहे हैं। वैसे भी अब मजदूर मिलना कठिन हो गया है क्योंकि मजदूर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार आदि से आते हैं। इस बार कम मजदूर आने से किसानों के सामने लावणी की समस्या बनी हुई है। समस्या उस समय विकराल बन जाएगी जब गेहूं की लावणी आ जाएगी। करीब एक सप्ताह बाद गेहूं की लावणी आने की संभावना जताई जा रही। इसके बाद मजदूर मिलना बहुत कठिन हो जाएगा।
 फोटो कैप्शन 03: कनीना क्षेत्र में होती हुई बूंदाबांदी




गायों की सेवा हम सभी का परम धर्म-भगत सिंह
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कनीना की आवाज।
 गायों की सेवा हम सभी का परम धर्म बनता है। गायों की सेवा नित्य प्रति करनी चाहिए। ये विचार श्रीकृष्ण गौशाला के प्रधान भगत सिंह ने उस समय व्यक्त किया जब गौशाला में मनोज कुमार तथा उसकी पत्नी शिक्षिका उर्मिला यादव अपना जन्मदिन पूरे परिवार सहित श्री कृष्ण गौशाला में मनाने के लिए पहुंची।
  उन्होंने गायों को हरा चारा, खल, बिनौला खिलाया तथा 5100 रुपए का दान दिया। भगत सिंह ने उनका अभिनंदन किया और कहा कि गायों की सेवा से पाप दोष सब मिट जाते हैं। हमें वैसे तो हर घर में एक-एक गाय जरूर रखनी चाहिए ताकि  दूध और घी जैसा अमृत प्राप्त हो सके। किंतु जो व्यक्ति अपने घरों में गाय नहीं रख सकते उन्हें गौशाला में आकर गायों की सेवा करनी चाहिए। इस मौके पर प्रधान की अतिरिक्त सह-सचिव रामपाल यादव, उप-प्रधान दिलावर सिंह, उप प्रधान रविंद्र बंसल, ओम प्रकाश ठेकेदार भडफ़, मा. राम प्रताप यादव, राज ,सत्यवीर गुगनवाला आदि उपस्थित रहे।
 फोटो कैप्शन 02:कनीना श्रीकृष्ण गौशाला में जन्मदिन मनाते हुए





सुखदेव भगत सिंह राजगुरु आज अधिक प्रासंगिक है- सत्यव्रत शास्त्री
-शहीदी दिवस पर  चर्चा का आयोजन
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कनीना की आवाज।
सांस्कृतिक अहीरवाल के कार्यालय में आज शहीदी दिवस पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य कंवर सिंह  यादव ने की। इस अवसर पर परिचर्चा में उपस्थित सभी लोगों ने शहीदों को याद करते हुए भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी  और उन्हें गौरवपूर्ण ढंग से याद किया। सांस्कृतिक अहीरवाल के निदेशक सत्यव्रत  शास्त्री ने  चर्चा में भाग लेते हुए कहा आज देश में बलिदान दिवस के उपलक्ष्य  में अनेको कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं। लेकिन इन तीनों शहीदों के जीवन चरित्र,  उनके किए कार्यों की चर्चा कम है । दुर्भाग्यवश उनके खिलाफ गवाही करने वाले लोगों को न तो चिन्हित किया जाता और नहीं जन सामान्य में उनके जीवन के विषय में जानकारी ही प्रकाशित की जा रही। आज देश भर में एक प्रतिशत लोग भी इन तीनों शहीदों के जीवन को  नहीं जानते ।और न बातों को जानते कि इनको फांसी के फंदे पर चढऩे के लिए किन लोगों ने गवाही दी थी और इन भरी जवानी में देश पर बलिदान होने की इच्छा रखने वाले युवकों को अंग्रेजों से फांसी की सजा से छुड़ाने के लिए किन लोगों ने प्रयास किये थे । सजा में कुछ कमी आज भी युवाओं के धधकते हृदय में  प्रश्न है कि  क्या उनकी फांसी को टालने में कौन सहायक हो सकते थे ।वे  कौन लोग थे? जो यह नहीं चाहते थे की भगत सिंह राजगुरु सुखदेव लंबे समय तक जीवित रहे ।यद्यपि भगत सिंह राजगुरु सुखदेव स्वयं नहीं चाहते थे कि उनको माफी मिले वह फांसी तक जाना ही चाहते थे ।उनके गुरु चंद्रशेखर आजाद भी इस बात से नाराज थे कि वह फांसी चढें। वे चाहते थे कि वे लोग फांसी पर न चढ़े क्योंकि देश के लिए जीने की आवश्यकता अधिक थी आज भी हम सबको वर्तमान परिस्थितियों पर देखते हुए देश के लिए जीने वाले लोगों को अधिक आवश्यकता है ।देश के लिए जीने का मतलब इस देश के संस्कृति ,सभ्यता,  इतिहास ,परंपराओं से अपने आप को जोड़कर उनके किए कार्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है ।आज के कार्यक्रम में सत्यवीर गहली हरियाणा बडेसरा खाप प्रदेश अध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष सावंत सिंह , स्वदेशी जागरण मंच के जिला संयोजक राजेश शास्त्री, सांस्कृतिक अहीरवाल के जिला मीडिया संयोजक शीशपाल यादव ,नारनौल नगर से रतनलाल सैनी पूर्व प्राध्यापक, दिनेश शर्मा हिंदी अध्यापक, कैप्टन ब्रह्मानंद और हीतेंद्र गहली, विकास अग्रवाल उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04: शहीदों को याद करते हुए


नि:शुल्क नेत्र जांच एवं आपरेशन शिविर 25 को
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कनीना की आवाज।
आगामी 25 मार्च को बेवल गांव में नि:शुल्क नेत्र जांच एवं आपरेशन शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर का उद्घाटन प्रमुख समाजसेवी अतरलाल एडवोकेट करेंगे। उक्त जानकारी देते हुए शिविर व्यवस्थापक डा. सोमबीर सिंह व निहाल सिंह ने कहा कि बेवल गांव के रायल पैलेस में गांव के समाजसेवी स्व. उमराव यादव की स्मृति में मिसरी देवी आई अस्पताल नीमराणा के प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. बिरेन्द्र सिंह यादव की टीम के तत्वावधान में शिविर आयोजित किया जा रहा है।





बलिदानियों को किया धनौन्दा में याद
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कनीना की आवाज।
गांव धनौन्दा बलिदान स्मृति समारोह आयोजित कर देश के शहीदों को नमन किया गया। मुख्य अतिथि अतरलाल ने शहीद भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर समारोह का शुभारम्भ किया। अध्यक्षता राजेन्द्र सिंह नम्बरदार ने की।
  अतरलाल ने कहा कि शहीद दिवस मनाने से समाज में नई चेतना जागरूकता तथा देशभक्ति की भावना आती है। उन्होंने शहीद दिवस पर छुट्टी घोषित करने के लिए केंद्र व हरियाणा सरकार का धन्यवाद किया। राजेन्द्र नम्बरदार, सुभाष यादव, ओमप्रकाश व कैलाश सेठ ने शहीद भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव व क्रांतिकारियों की शहादत को नमन करते हुए कहा कि शहीदों की शहादत हमेशा अमर रहेगी। उन्होंने युवाओं से बलिदानियों के जीवन व विचारों से सीख लेने की अपील की। इस अवसर पर किशनपाल, मुकेश, मीर सिंह वैद्य, नवीन जांगड़ा, परमजीत, राकेश यादव ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रजा भलाई संगठन के कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया।
फोटो कैप्शन 01: बलिदानियों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन करते हुए मुख्य अतिथि


कुतरूं प्राचार्य के कारनामों की 17वीं कड़ी पढ़े 24 मार्च को
-कुतरूं की जी हुजूरी न करने वाले शिक्षकों को पढ़ऩे वाले बच्चों एवं बच्चियों से आरोप लगवाकर करता था तंग














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