Tuesday, March 24, 2026



 
 हजारों रुपए बचाने का ठेकेदारों ने ढूंढा नायाब तरीका
- रोड को तोड़कर पत्थर डाल देते हैं, लोग और उनके वाहन उन्हें देते हैं जमा
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कनीना की आवाज।
  धीरे-धीरे जहां विज्ञान नई-नई प्रगति कर रहा है वही सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार भी नई-नई खोज एवं नया-नया तरीका ढूंढ रहे हैं ताकि उनके हजारों रुपए बच जाए। सबसे नायाब तरीका यह है कि किसी भी गांवों और शहरों में घरों के आगे से गुजरने वाली सड़क मार्ग को तोड़ देते हैं या किसी रोड को तोड़ देते हैं और फिर उस पर मिट्टी- रोड़े डाल देते हैं ताकि आवागमन करने वाले वाहन अपने आप उन रोड़ों और रेत मिट्टी को जमा दे। रोड़े एवं रेत आदि डालने के बाद ठेकेदार कई कई दिन सुध नहीं लेते ताकि जब तक की रोड़े एवं मिट्टी आदि अच्छी प्रकार से न जम जाए । बार-बार लोगों के पैरों में चोट आने से घर के मालिक चिंतित हो जाते हैं किंतु ठेकेदारों को कोई चिंता नहीं। चूंकि उनके हजारों रुपए बच रहे हैं। पहले जहां सड़क पर रोड़े आदि डाले जाते थे तो रोलर द्वारा उन्हें ठीक किया जाता था। अब तो ठीक करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हर घर में वाहन हैं, हर घर के मालिक धीरे-धीरे अपने घर के सामने मिट्टी रोड़ों को सही जमा देते ताकि आवागमन सुविधाजनक हो सके। इस प्रकार सड़क के रोड़े एवं मिट्टी जमाने का काम ठेकेदार नहीं खुद लोग करने को मजबूर हो जाते हैं।  लोगों को अपने वाहन आखिरकार इन सड़क मार्गों से ले जाने जरूरी है और जिस सड़क मार्ग पर रोड़े और रेत मिट्टी पड़ी हुई है उससे वाहन निकालते वक्त वो रोड़े एवं मिट्टी जम जाते हैं। कितना सुंदर और बढिय़ा तरीका ठेकेदारों ने ढूंढ लिया है। हजारों रुपए की बचत भी हो जाती है और काम भी साफ सुथरा बन जाता है। इसे कहते हैं आम के आम और गुठली के दाम। लोग ही रोड़े एवं मिट्टी जमा दे और ठेकेदार के पैसे भी बच जाए। अगर ऐसा ही काम ठेकेदार करते हें तो उनके पैसे काट लो फिर देखो, घंटों का काम मिनटों में पूरा हो जाएगा। या फिर ठेकेदार के घर पर रोड़े एवं मिट.टी डाल दो ताकि उसे पैरों में चोंट आए तो वो किसी के कष्ट को समझ सके।



पानी की टंकी से कूदा आइटीआइ का छात्र, संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
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कनीना की आवाज।
  गांव झाड़ली में सोमवार देर रात आइटीआइ छात्र की पानी की टंकी से कूदने के कारण संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही स्वजन मौके पर पहुंचे और उसे उपचार के लिए कनीना के उप नागरिक अस्पताल लेकर गए, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान रविंद्र (19) निवासी गांव झाड़ली के रूप में हुई है। वह आइटीआइ सेहलंग में फिटर ट्रेड का छात्र था और अविवाहित था। बताया जा रहा है कि सोमवार रात वह गांव में बनी पानी की टंकी पर चढ़ गया और वहां से नीचे कूद गया। स्वजनों के अनुसार टंकी से कूदने से पहले रविंदर ने फोन कर घरवालों को बताया था कि वह टंकी पर है और उसे बचा लो। फोन मिलने के बाद स्वजन तुरंत मौके की ओर रवाना हुए, लेकिन तब तक वह नीचे गिर चुका था। स्वजन उसे तुरंत कनीना के उप नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डाक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के पिता राधेश्याम ने बताया कि करीब दो साल पहले उसका किसी के साथ झगड़ा हुआ था, लेकिन फिलहाल परिवार को किसी पर कोई शक नहीं है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल में रखवा दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।




पुलिस ने गांव मुंडिया खेड़ा में चलाया नशा मुक्ति अभियान
-- युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए किया जागरूक
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कनीना की आवाज।
  डोर-टू-डोर नशा मुक्त अभियान के तहत गठित पुलिस की टीम ने गांव मुंडिया खेड़ा का दौरा कर ग्रामीणों को नशे के खिलाफ जागरूक किया। निरीक्षक शारदा और उनकी टीम ने गांव की चौपाल में सभी वर्गों के लोगों के साथ बैठक कर नशे के खिलाफ जागरूक किया और नए आपराधिक कानूनों की जानकारी दी।
इस अवसर पर विशेष रूप से युवाओं को नशे के भयानक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया और उन्हें इस बुरी लत से हमेशा दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस टीम ने बताया कि जो लोग नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं और इसे छोडऩा चाहते हैं, पुलिस उनकी हर संभव मदद करेगी। इसके अलावा, मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 के बारे में भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया।
नशा मुक्ति के इस संदेश के साथ-साथ पुलिस टीम ने ग्रामीणों को नए आपराधिक कानूनों की भी जानकारी दी। लोगों को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में सरल शब्दों में समझाया गया। इस कार्यक्रम में गांव के सरपंच सहित कई गणमान्य व्यक्ति और ग्रामीण उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03 व 04: संबंधित हैं




कुतरूं प्राचार्य के कारनामे -17
-कुतरूं की जी हुजूरी न करने वाले शिक्षकों को पढ़ऩे वाले बच्चों एवं बच्चियों से आरोप लगवाकर करता था तंग
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कनीना की आवाज। 
 कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने बतौर विज्ञान अध्यापक एवं प्राध्यापक 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया है। उन्होंने स्कूल, कालेज, निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि दौरान करीब 35 विभिन्न स्कूल प्राचार्यों के साथ काम किया और उनमें से चंद कुतरूं प्राचार्य निकले। जिनका नाम लेते ही तन मन में दर्द होता है। जिनकी भावना हीन रही है। उनका धरती पर आना ऐसा लगता है कि किसी के काम को रोकने आए हैं। सच का साथ नहीं दिया और उन्होंने सदा ही अच्छे और स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों का विरोध किया। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य के कारनामे सामने आये हैं। आज एक कारनामा यहां उजागर किया जा रहा है।
  कुछ कुतरूं प्राचार्य ऐसे भी हैं जी हुजूरी चाहते हैं। जी हुजूरी न करने वाले शिक्षकों को स्कूल में पढऩे वाले बच्चे बच्चियों से आरोप लगाकर तंग करने का भी सिलसिला जारी रखते हैं। कनीना उप-मंडल के एक गांव में वर्षों पहले एक ऐसा कुतरूं प्राचार्य था जिसकी कई स्कूली शिक्षक धोक लगते थे, उसके लिए कोई छाछ लाकर देता तो  कोई दूध लाता। कोई उनके कपड़ों की तारीफ करता तो कोई उसके कपड़े तक धोता था। कोई उनके परिवार की तारीफ करता और वह फूला नहीं समाता। यहां तक की जो उनका विरोध करता तो उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता और होशियार सिंह ने उनका विरोध किया, परिणाम भुगतना पड़ा, लंबे समय तक संघर्ष जारी रहा अदालत तक भी मामला पहुंचा। स्कूल के कई पुराने रिकार्ड आज भी स्कूल के पास उपलब्ध नहीं है जैसा कि आरटीआई से खुलासा हुआ कि आज भी रिकार्ड उनके पास नहीं हैं। आखिरकार होशियार सिंह ने उसकी शिकायत पर शिकायत की परिणाम उसकी बदली गुरुग्राम में कर दी गई थी।  उसे समय ऐसा लगता था कि शायद अंग्रेजों का शासन फिर से लौट आया है। कभी कभी ऐसा लगता था जैसे दास प्रथा फिर लौट आई है।कुछ शिक्षक तो प्राचार्य के दास ही बन गए थे।इतना घटिया माहौल शायद कभी नहीं देखा, उस कुतरूं के साथ बहुत लंबा संघर्ष किया। यही नहीं वर्तमान में भी एक शिक्षक पर कितने ही स्कूली बच्चों से आरोप लगवाए, अफसोस आज वह शिक्षक इस दुनिया में नहीं है किंतु उस पर इतने आरोप लगवाए की बेचारा अदालतों के चक्कर लगाता रहा।  ऐसे कुतरूं आचार्यों को धरती पर जीने का अधिकारी नहीं होता। उधर अनेकों ऐसे प्राचार्य मिले जिनकी जी हुजूरी करनी पड़ती है। यदि जी हुजूरी न करें तो वो ऐसे देखते हैं जैसे हरिया ढ़ाढ़ी देख रही हो। कोई अधिकारी है या कर्मचारी सब अपना अपना काम करते हैं। नमस्ते करता है तो अच्छा है नहीं करता है तो अपने काम से काम रखना चाहिए लेकिन कुछ भांड और चमचे ऐसे होते हैं जो इन कुतरूं प्राचार्यों को के कान भर देते हैं। ऐसे ही कई कारनामे सामने आये। एक शिक्षक जो स्कूल में जी जान से पढ़ाता था उस पर लड़कियों और लड़कों को भड़काकर कई आरोप लगवा दिये।परिणाम यह निकला कि शिक्षक की रात नींद गायब हो गई। बड़ी मुश्किल से आरोप लगाने वाले बच्चों के अभिभावकों से मिलकर समझाया तब जाकर मामला कहीं शांत हुआ। ऐसा एक बार नहीं कई बार आरोप लगाने का प्रयास किया क्योंकि वह शिक्षक कुतरूं प्राचार्य को भाव नहीं देता था।
 कुतरूं प्राचार्य चाहता है कि उन्हें भाव दिया जाए। एक कुतरूं प्राचार्य ने तो एक शिक्षक को बेवजह डांट मारते हुए कहा कि यू फूल परंतु वह शिक्षक इतना काबिल निकला कि उसने प्रत्युत्तर  में कहा कि यू ब्लडी बास्टर्ड ,यू फूल। फिर तो क्या था कुतरूं प्राचार्य के मानों सारे सींग ही टूट गए और फिर तो दीवारों से सिर टकराने लगा। ऐसा हालत बना कि जब वह शिक्षक सेवानिवृत्त होने लगा तो अपना पूरा अपनी पूरी योजना बनाई। उसका एक चमचा उसके कान भरता था। कुतरूं उस शिक्षक के विरुद्ध खड़ा कर दिया किंतु वह शिक्षक घबराया नहीं, उसने कहा कि अगर कुतरूं प्राचार्य में दम है तो उनके कोई लाभ रोक कर दिखाएं। सेवानिवृत्त होने वाले उस शिक्षक को कुतरूं कुछ बोल नहीं पाया। कभी कभी तो लगता है कि कुछ कुतरूं प्राचार्य ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे अपने घर से दौलत दे रहे हो। वो खुद तो सही काम करते ही नहीं दूसरे को भी नहीं करने देते। ऐसे कुतरूं प्राचार्य की छटनी की जानी चाहिए सरकार को चाहिए कि अनावश्यक तंग करने व शिक्षकों के ेलाभ रोकने वाले कुतरूं प्राचार्य की मेडिकल जांच करवाई जाए कि वह दिमाग से सही है या दिवालिया है। कुछ कुतरूं प्राचार्य रिश्वत भी लेते हैं। नहीं रिश्वत दे तो उनके सारे लाभ कुछ समय के लिए रोक देते हैं। परिणाम शिक्षक परेशान देखे गए। ऐसा कुतरूं प्राचार्य भी देखा जिसे एक बहुत होनहार और पदोन्नति पर आए शिक्षक के विरुद्ध दिन रात छात्राओं को भड़काना शुरू कर दिया। और वह कामयाब भी रहा लेकिन जब अभिभावकों को हकीकत का पता लगा कि कुतरूं प्राचार्य चाल चल रहा है तो उसकी जमकर धुनाई करने की भी योजना बनाई। उस कुटरूं का सौभाग्य रहा जिस दिन क्रोध में आकर अभिभावक स्कूल पहुंचे तो उसे दिन वह अवकाश पर था। अगले दिन जब कुतरूं को पता चला तो फिर से अवकाश ले गया। वरना उसे कुतरूं प्राचार्य को सबक सिखाते। बाद में मामला धीरे-धीरे शांत हो गया। ऐसे कितने ही कारनामे सामने आए हैं जिसमें कुतरूं ग्रामीण कहावत कुतरूं ही बनकर रह गए। बहुत से ऐसे प्राचार्य है जिनका नाम लेकर मन में खुशी होती है। आनंद आता है और वो किसी का काम नहीं रोकते। उनके पास जाते हैं तो वो चाय पानी भी पूछते हैं और अच्छी प्रकार बिठाकर उनके कार्य को तसल्ली से सुनते हैं। जहां तक संभव हो करने का प्रयास करते हैं।





चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन--
 विधि विधान से करें मां कालरात्रि की पूजा-पंडित दिनेश कुमार
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कनीना की आवाज।
  पंडित दिनेश कुमार बताते हैं कि माता दुर्गा के सातवें स्वरूप की पूजा मां कालरात्रि के रूप में की जाती है। सप्तमी की पूजा सुबह अन्य दिनों की तरह ही होती है लेकिन माता कालरात्रि की पूजा में विशेष विधान के साथ पूजा की जाती है जिसके लिए विशेष स्तर की शुद्धता नियम की जरूरत होती है।
माता कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है इनका वर्ण अंधकार की भांति काला और केस भी खरे हैं मां कालरात्रि के तीन नेत्र इस ब्रह्मांड में विशाल वह गोल हैं जिनमें से जिस तरह आकाश में बिजली चमकती है उसी तरह मां की नेत्रों से किरण निकलती है। मां का यह भय उत्पन्न करने वाला स्वरूप केवल पापियों को नाश करने के लिए है। बाकी लोगों के लिए माता कोई नुकसान नहीं पहुंचाती हैं और उनका भला ही करती हैं।
सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करके अपने मन क्रोध पर विजय पा सकते हैं। कालरात्रि साधक को ज्ञान देते हैं कि क्रोध का उपयोग स्वयं की सफलता के लिए कैसे करना है।
देवी का यह रूप ऋद्धि सिद्धि प्रदान करने वाला है। दुर्गा पूजा का सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। सप्तमी पूजा के दिन तंत्र साधना करने वाले साधक मध्य रात्रि में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं। इस दिन मां की आंखें खुलती हैं। दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि का काफी महत्व बताया गया है। इस दिन से भक्त जनों के लिए देवी मां का दरवाजा खुल जाता है और भक्तगण पूजा स्थलों पर देवी के दर्शन हेतु पूजा स्थल पर जुटने लगते हैं। मां कालरात्रि की पूजा करने के लिए श्वेत या लाल वस्त्र धारण करके और ध्यान रहे कि यह विशेष पूजा आपको रात्रि में ही करनी चाहिए मां कालरात्रि के सक्षम दीपक जलाएं और उन्हें गुड़ का भोग लगाएं 108 बार नवार्ण मंत्र पढ़ते जाएं और एक-एक लोंग चढ़ाते जाएं लव का भोग लगाकर अग्नि में छोड़ते जाएं ऐसा करने से आपके घर की बाधाएं दूर होती हैं आपके शत्रु पराजय होते हैं। विजय की प्राप्ति होती हैं।
फोटो कैप्शन: पंडित दिनेश कुमार


 

नवरात्रों में तांता लगता है शिव शक्ति नव मां दुर्गा धाम- मोहनपुर
-कनीना से 6 किमी दूर हैं मां मंदिर
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कनीना की आवाज।
  कनीना से करीब छह किमी दूर नव दुर्गा धाम की स्थापना आठ वर्ष पूर्व हुई है! मंदिर का निर्माण कार्य पंडित ऋषिराज पुजारी की देखरेख में संपन्न हुआ। इस मंदिर में मां के नौ रूपों की मूर्तियां स्थापित है। मंदिर का ऊंचा गुंबद काफी ऊंचा होने की वजह से दूर से ही दिखाई पड़ता है जो श्रद्धालुओं को अपनी और आकर्षित करता है मंदिर में गणेश जी शिव शंकर वह बजरंगबली की भी मूर्तियां स्थापित की गई है। मां की मूर्ति स्थापित किए जाने के चलते यह मंदिर मां मंदिर नाम से जाना जाता है। विशेष प्रकार के ग्रेनाइट पत्थरों से बनाया गया है।
कैसे पहुंचे मंदिर-
मोहनपुर गांव कनीना खंड का एक छोटा गांव है। यह गांव कनीना से 6 किलोमीटर की दूरी पर नारनौल रोड पर स्थित है। मंदिर में जाने के लिए कनीना से बस व जीप द्वारा 15  मिनट में पहुंच सकते हैं। यह स्थान पंडित ऋषिराज की ढ़ाणी नाम से भी जाना जाता है।
मंदिर का इतिहास-
जयपुर के प्रसिद्ध कारीगरों द्वारा मंदिर की भव्य मूर्ति 51 हजार रुपए में तैयार करवा कर विधि विधान से स्थापित की गई थी। प्रत्येक रविवार व शुक्ल पक्ष की अष्टमी नवमी और नवरात्रों के समय मंदिर को सजाया जाता है और बड़ी संख्या में दूर दराज से भक्त आते हैं।मोहनपुर गांव का यह एकमात्र दुर्गा मां मंदिर है । यह मंदिर जिस स्थान पर बना हुआ है वह जमीन एक व्यक्ति विशेष द्वारा दान की गई भूमि है। बताया जाता है कि इस मंदिर में लगे पत्थर भी कटरा (जम्मू)से मंगवाए थे। यहां प्रतिदिन सुबह शाम मां को भोग लगाकर पूजा अर्चना की जाती है!
पंडित ऋषिराज,पुजारी-
यह मां दुर्गा का एक पवित्र मंदिर है यहां सुबह शाम माता रानी का भोग लगाया जाता है और पूजा अर्चना की जाती है जो। माना जाता है कि यहां पर भक्त श्रद्धा पूर्वक कच्चा नारियल माता के चरणों में चढ़ाता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। यहां पर  शुक्ल पक्ष नवमी अष्टमी  व नवरात्रों में काफी संख्या में भक्तों का आना-जाना बना रहता है।
मुंशीराम भक्त-
मैं भी माता रानी के आशीर्वाद से नवरात्रों का व्रत रखता हूं। नवरात्रों के समय मैं भी इस मंदिर में आता हूं। यहां आने से मन बड़ा भक्ति में हो जाता है और शांति मिलती है। यहां बड़ी तादाद में भक्त आते हैं। मन प्रसन्न हो जाता है।
फोटो कैप्शन: मोहनपुर मंदिर, ऋषिराज पुजारी एवं मुंशीराम भक्त



एसडीवमा विद्यालय, ककराला के विद्यार्थी बाक्सिंग में राज्य स्तर पर करेंगे जिला महेन्द्रगढ़ का प्रतिनिधित्व
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कनीना की आवाज।
  एसडीवमा विद्यालय, ककराला के विद्यार्थियों ने बाक्सिंग में जिला स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए अब राज्य स्तर पर अपनी जगह बनाई है। बाक्सिंग फेडरेशन आफ इंडिया जूनियर खेलों के अंतर्गत 22 से 26 मार्च को जिला रोहतक में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में ये खिलाड़ी जिला महेन्द्रगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे।
विद्यालय की प्रधानाचार्या डा. शिप्रा सारस्वत ने जानकारी देते हुए बताया कि 20 मार्च 2026 को महेन्द्रगढ़ में आयोजित प्रतियोगिता में विद्यालय के खिलाडिय़ों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सब-जूनियर वर्ग में 43-46 किलोग्राम भार वर्ग में यश यादव  तथा 45 किलोग्राम भार वर्ग में दिव्या ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं जूनियर वर्ग में 52 किलोग्राम भार वर्ग में मयंक, 54 किलोग्राम भार वर्ग में पियूष तथा 80 किलोग्राम भार वर्ग में तेजल ने भी शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
इस अवसर पर विजेता खिलाडिय़ों को बधाई देते हुए विद्यालय के चेयरमैन जगदेव यादव ने खेलों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेल अत्यंत आवश्यक हैं। विद्यालय की खेल अकादमी एनआईएस प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। खेलों से नेतृत्व क्षमता, अनुशासन एवं साहस जैसे गुणों का विकास होता है, इसलिए विद्यार्थियों को बढ़-चढ़कर इसमें भाग लेना चाहिए। उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाडिय़ों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या डा. शिप्रा सारस्वत, ओमप्रकाश यादव, उप-निदेशक पूर्ण सिंह, सीईओ रामधारी, कोआर्डिनेटर स्नेहलता, खेल प्रमुख सोनू कोच, तेजपाल डीपी, संगीता डीपी, बाक्सिंग कोच विजय, अजीत सिंह सहित समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: बाक्सिंग टीम जो राज्य स्तर पर महेंद्रगढ़ का करेगी प्रतिनिधित्व


किसान सूखा रहे अपनी सरसों की फसल को
-पैदावार लेने की तैयारी
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कनीना की आवाज। 
विगत दिनों हुई वर्षा के कारण कनीना क्षेत्र में गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है वही सरसों की काट कर डाली/लावणी गई फसल भीग गई थी। किसान अब उसे सूखाने के कार्य में लगे हुए।
 किसान अजीत कुमार, सूबे सिंह, योगेश कुमार, कृष्ण कुमार, महिपाल सिंह, सुरेंद्र, राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि वर्षा गत दिनों सरसों की ाटकर डाली गई फसल भीग गई थी। भीगी हुई लावणी की हुई सरसों की फसल को अब सूखाया जा रहा है ताकि इसकी पैदावार आसानी से ली सके। कुछ किसान तो पल्लड़ डालकर उस पर सूखा रहे हैं जबकि कुछ किसान सीधे उसे सूखने में लगे हुए हैं। किसानों का मानना है कि एक-दो रोज में जब यह फसल सूख जाएगी तत्पश्चात इसकी पैदावार ली जाएगी। किसान तेजी से अपनी पैदावार लेने के कार्य में लगे हुए हैं। उधर गेहूं की लावणी भी जल्दी आने वाली है। इसलिए भी किसान दिन रात व्यस्त हैं। किसी प्रकार सरसों की पैदावार घर में डालने पर ही गेहूं की लावणी के कार्य में लगेंगे। किसानों ने बताया कि इस बार मौसम की मार झेलते हुए बड़ी मुश्किल से सरसों और गेहूं की पैदावार ली जा रही है। उधर मार्केट कमेटी चेयरमैन जेपी कोटिया ने बताया कि अभी सरकारी खरीद के उनके पास कोई आदेश नहीं आये हैं। आते ही सूचना दे दी जाएगी।
  क्या कहते डा. अजय यादव एसडीओ कृषि-  एसडीओ कृषि विभाग महेंद्रगढ़ डा.अजय यादव का कहना है कि अभी 27 मार्च तक बूंदाबांदी होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में किसान लावणी का कार्य या थ्रेशिंग का कार्य करते हैं तो मौसम को ध्यान में रखते हुए ही करें क्योंकि लावणी या थ्रेसिंग के समय वर्षा होती है तो परेशानी बढ़ जाएगी।
फोटो कैप्शन 02: गेहूं की फसल को सूखाते हुए किसान


हृदयघात से हो रही मौतों पर चिंता व्यक्त की
-मुफ्त जांच केंद्र बढ़ाए जाए
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कनीना की आवाज।
 बसपा नेता अतरलाल एडवोकेट ने इलाके में हृदयघात से हो रही मौतों पर चिंता प्रकट करते हुए सरकार से इस बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए तत्काल ठोस कार्य निति बनाने की मांग की है।
     अतरलाल ने कहा कि इलाके के लोगों और खासकर युवाओं की हृदयघात और हृदय फेल से हो रही मौतें गंभीर चिंता का विषय है। देखने में आया है कि 50 प्रतिशत मौतें हृदयघात व हृदयफेल से हो रही हैं। यह न केवल एक स्वास्थ्य समस्या है बल्कि भविष्य का उभरता हुआ जन स्वास्थ्य संकट भी है। जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बीमारी के बचाव के लिए सरकार से तुरंत ठोस कार्य योजना बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अचानक से हृदयघात से हुई मौत के कारण परिवार आर्थिक संकट में पड़ जाता है। इसलिए सरकार को कार्यनीति में प्रभावित परिवार के लिए आर्थिक सहायता का भी प्रावधान करना चाहिए। उन्होंने प्रथम चरण में सरकार से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर निशुल्क जांच व इलाज सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की।
 
 
कामनवेल्थ गेम्स 2026 और एशियन गेम्स 2026 किया क्वालीफाई
-छीथरोली की शर्मिला ने जीते 2 गोल्ड मेडल
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव छीथरोली की लड़की शर्मिला ने कामनवेल्थ गेम्स 2026 और एशियन गेम्स 2026 के लिए क्वालीफाई कर लिया है। एक प्रतिभाशाली पैरा एथलीट, ने अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने जनवरी 2026 में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शाटपुट और डिस्कस थ्रो में 2 गोल्ड मेडल जीते। इसके अलावा, उन्होंने फरवरी 2026 में दुबई ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप में शाटपुट में गोल्ड मेडल और डिस्कस थ्रो में ब्रान्ज मेडल हासिल किया। मार्च 2026 में भुवनेश्वर में आयोजित 24वें पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में, उन्होंने शाटपुट में गोल्ड मेडल और डिस्कस थ्रो में ब्रान्ज मेडल जीता। साथ ही नए राष्ट्रीय रिकार्ड भी बनाए। उनकी इस उपलब्धि के साथ, उन्होंने कामनवेल्थ गेम्स 2026 और एशियन गेम्स 2026 के लिए क्वालीफाई कर लिया है। वह पिछले 2 साल से सोनीपत में कोच वीरेंद्र धनखड़ के साथ प्रशिक्षण ले रही हैं।
फोटो कैप्शन: शर्मिला











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