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Wednesday, February 4, 2026
गांव सुंदरह और कोका में नशा मुक्ति व नए आपराधिक कानूनों पर जागरूकता अभियान
-नशे से दूर रहने की ,की अपील
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कनीना की आवाज। डोर टू डोर नशा मुक्त अभियान और नया सवेरा मुहिम के तहत थाना सदर कनीना के अंतर्गत आने वाले गांव सुंदरह और कोका में पुलिस टीम द्वारा विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। गांव सुंदरह की चौपाल और गांव कोका के पंचायत घर में आयोजित इन बैठकों में समाज के सभी वर्गों, विशेषकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया गया और उन्हें इससे दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया। निरीक्षक शारदा और उनकी टीम ने ग्रामीणों को बताया कि जो नशा पीडि़त व्यक्ति नशा छोड़कर मुख्य धारा में लौटना चाहते हैं, पुलिस प्रशासन उनकी हर संभव मदद करेगा। इसके साथ ही, मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान उपस्थित ग्रामीणों को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर गांव सुंदरह और कोका के सरपंच, प्रतिनिधि, ग्राम सचिव और गांव के अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 05 व 06: संबंधित हैं
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यक्तिगत ऋण योजना-
-आवेदन के लिए महिला उद्यमी की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए
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कनीना की आवाज। हरियाणा सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक व सामाजिक स्थिति में सुधार लाने के लिए व्यक्तिगत ऋण योजना चलाई जा रही है।इस योजना के तहत महिलाओं को बैंकों के माध्यम से 1 लाख रुपए तक का ऋण दिलवाने की व्यवस्था की गई है।
यह जानकारी देते हुए डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा यह व्यक्तिगत ऋण योजना हरियाणा महिला विकास निगम के माध्यम से चलाई जा रही है।
इस योजना के तहत जिला महेंद्रगढ़ के लिए 2025-2026 में 74 केसों का लक्ष्य रखा गया है । उन्होंने बताया कि एक लाख 80 हजार रुपए से कम वार्षिक आय वाली व हरियाणा की स्थायी निवासी महिला इस योजना के लिए पात्र होंगी। ऋण के लिए आवेदक के समय महिला उद्यमी की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदक पहले से लिए गए ऋण का डिफाल्टर नहीं होना चाहिए। योजना के तहत सामान्य श्रेणी की महिला को 10 हजार रुपए तथा अनुसूचित श्रेणी की महिला को 25 हजार रुपए अनुदान राशी हरियाणा सरकार द्वारा महिला विकास निगम के माध्यम से दी जाएगी। उन्होंने बताया कि परचून की दुकान, कपड़े की दुकान, सैलून, सिलाई सेंटर, ब्यूटी पार्लर, टेलरिंग, बुटीक, हलवाई की दुकान, फूड स्टॉल, टिफिन सर्विस, मिट्टी के बर्तन आदि बनाने का काम शुरु करने के लिए ऋण ले सकती हैं।
योजना का लाभ लेने के लिए ये दस्तावेज चाहिए-
योजना का लाभ लेने के लिए दस्तावेजों में आवेदक पत्र, परिवार पहचान पत्र, आधार कार्ड व पासपोर्ट आकार फोटो चाहिए। इन सभी दस्तावेजों की दो-दो फोटो कॉपी होनी चाहिए।
इस संबंध में अन्य किसी जानकारी के लिए बस स्टैंड के नजदीक नरूला होटल के पीछे स्थित हरियाणा महिला विकास निगम कार्यालय में आकर तथा कार्यालय के दूरभाष नंबर 01282-250346 पर फोन कर जानकारी ले सकते हैं।
ग्रामीण भत्ता घोषित करने की मांग
-मेडिकल कालेज का किया दौरा
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कनीना की आवाज। बसपा के नेता अतरलाल एडवोकेट ने नारनौल के गांव कोरियावास स्थित महर्षि च्यवन मेडिकल कालेज में कार्यरत डाक्टर्स, फेक्लटी मेम्बर्स और स्पोर्टिंग स्टाफ के लिए ग्रामीण भत्ता (रूरल अलाउंस) घोषित करने की मांग की है।
बसपा नेता अतरलाल ने मेडिकल कालेज का दौरा करने के बाद कहा कि सरकार ने सात सौ करोड़ रुपए की लागत से बहुत शानदार मेडिकल कालेज बनाया है। इसके लिए सरकार का धन्यवाद करते हैं परन्तु मेडिकल कालेज में फेकल्टी, योग्य चिकत्सक, शिक्षण स्टाफ व कर्मचारियों व आधारभूत संरचना की कमी भारी चिंता का विषय है। फेकल्टी के अभाव के कारण छात्रों तथा आमजन को बेहतर व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो रही हैं। यह मेडिकल कॉलेज शहर से दूर पूरी तरह से ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है। फेकल्टी व शिक्षण स्टाफ यहां रूक नहीं रहा है। जिसके कारण छात्रों व आमजन को अच्छी शैक्षणिक व स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके कारण इलाके में भारी रोष है तथा मेडिकल कालेज पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह फरीदाबाद स्थित शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कालेज, नलहड़ तथा भगत फूल सिंह मेडिकल कालेज खानपुर (गोहाना) में कार्यरत फेकल्टी के लिए राज्य सरकार ने ग्रामीण भत्ता घोषित कर रखा है उसी तरह कोरियावास स्थित महर्षि च्यवन मेडिकल कालेज के फेकल्टी मेम्बर्स और डाक्टर्स के लिए भी ग्रामीण भत्ता घोषित किया जाए। महेन्द्रगढ़ जिला पूरा ही ग्रामीण क्षेत्र है और मेडिकल कालेज भी कोरियावास ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है। इसलिए नलहड़ मेडिकल कालेज तथा भगत फूल सिंह मेडिकल कालेज खानपुर (गोहाना) की तरह कोरियावास मेडिकल कॉलेज का भी ग्रामीण भत्ता का हक बनता है। तभी छात्रों को बेहतरीन शैक्षणिक माहौल तथा आमजन को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार व स्वास्थ्य विभाग इस मेडिकल कालेज की अनदेखी कर रह है। जिसका नुकसान इलाके की जनता को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य सरकार ने तत्काल इस और ध्यान देकर मेडिकल कालेज की व्यवस्थाओं व आधारभूत संरचना की कमी को पूरा नहीं किया तो इलाके की जनता आंदोलन करने पर मजबूर होगी।
फोटो कैप्शन 03: मेडिकल कालेज का दौरा व निरीक्षण करते बसपा नेता अतरलाल।
दिव्यांग कर्मचारियों के सेवा विस्तार की मांग -गजट नोटिफिकेशन तत्काल वापस लेने का आग्रह
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कनीना की आवाज। हरियाणा सरकार द्वारा ारी किए गए गजट नोटिफिकेशन, जिसके तहत दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु में परिवर्तन किया गया है, को लेकर हरियाणा प्रगतिशील दिव्यांग शिक्षा अधिकारी संघ ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
संघ के राज्य प्रधान नरेश कौशिक एवं राज्य महासचिव रविंद्र गहलावत ने संयुक्त बयान जारी करते हुए सरकार से मांग की कि इस गजट नोटिफिकेशन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए इसे अविलंब वापस लिया जाए तथा दिव्यांग कर्मचारियों को 58 वर्ष के स्थान पर 60 वर्ष तक सेवा विस्तार प्रदान किया जाए।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि दिव्यांग कर्मचारी पहले से ही शारीरिक एवं सामाजिक चुनौतियों के बीच अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनकी सेवा अवधि घटाने का निर्णय उनके आत्मसम्मान, मनोबल एवं सामाजिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में केंद्र की माननीय श्री नरेंद्र मोदी सरकार तथा राज्य की माननीय नायब सैनी सरकार दिव्यांगजनों के प्रति कृतसंकल्प है और उन्हें समाज के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए पूर्ण रूप से वचनबद्ध है। ऐसे में यह निर्णय सरकार की घोषित दिव्यांग-हितैषी नीतियों और सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत प्रतीत होता है।
संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार दिव्यांग कर्मचारियों के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए इस निर्णय पर शीघ्र पुनर्विचार करेगी।
उन्होंने जानकारी दी कि इस विषय को लेकर शीघ्र ही संघ का एक प्रतिनिधिमंडल माननीय मुख्यमंत्री महोदय से भेंट करेगा और दिव्यांग कर्मचारियों के हित में न्यायोचित एवं सकारात्मक निर्णय की मांग रखेगा।
फोटो कैप्शन: नरेश कौशिक
धुंध का कहर जारी
- बढ़ गई है ठंड
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में धुंध और ठंड दोनों बढ़ गई हैं। जहां लगातार चार दिनों से धुंध बढ़ती ही जा रही है लेकिन धुंध सुबह करीब 7 बजे से पडऩी शुरू होती है और देर दोपहर तक चलती रहती है। तत्पश्चात ठंड चलती है। ठंड भी गत दिनों से बढ़ गई है। वैसे तो माना जाता है कि 14 जनवरी के बाद उत्तरायण शुरू हो जाता है और ठंड कम हो जाती लेकिन ठंड कुछ कम हुई है। इस समय जहां रबी फसल खड़ी है जिसमें सरसों, गेहूं और जो प्रमुख हैं। इन फसलों की ठंड की जरूरत होती है और जितनी ठंड चाहिए वह पर्याप्त मात्रा में मिल रही है।
किसान कृष्ण कुमार, योगेश कुमार, रोहित कुमार आदि ने बताया कि फसलों के लिए ठंड की जरूरत होती है और ठंड नहीं पड़ेगी तो फसल में बढ़ोतरी नहीं हो पाएगी। इस समय सरसों पकान पर पहुंच चुकी है गेहूं और जौ में बालियां आने लग गई है। गेहूं और जो अधिक वृद्धि नहीं कर पाए हैं। होलिका दहन पर्व पर जौ की जरूरत होती है, उस समय तक यह जौ पक जाते हैं। अभी होली पर रुको करीब एक माह बाकी है।
कनीना क्षेत्र में सुबह सवेरे वाहन चालकों को परेशानी होती है क्योंकि धुंध छाई रहती है और धुंध करीब 4-5 घंटे तक चलती है। बाद में मौसम खुल जाता है और धूप निकलती है।
फोटो कैप्शन 04: धुंध का नजारा
संत मोलडऩाथ थे अति प्रकृति प्रेमी
-जोहड़ का करते थे पानी प्रयोग और रहते थे बणी में
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कनीना की आवाज। कनीना के परम संत मोलडऩाथ अति प्रकृति प्रेमी रहे हैं। आज से करीब 80 साल साल पहले संत मोलडऩाथ ने अपना आश्रम प्रकृति की गोद में बनाया था। जिस जगह संत का आश्रम है वहां कनीना की बणी होती थी। वैसे तो कनीना में छह बणियां/जंगल थी उन बणियों में से एक छोटी बनी थी। जिसका आकार कुछ छोटा था इसलिए उसका नाम छोटी बणी रखा था। कनीना का वर्तमान बस स्टैंड नहीं होता था। दूर दराज तक जाल के पेड़ थे। एक जाल के पेड़ जिसे जलौटा कहते थे जिसकी घनी छांव थी, जिसके नीचं उन्होंने अपनी कुटिया बनाई थी। उनकी कुटिया एक जलोटा के नीचे थे जोहड़ के किनारे पर स्थित थी।
यहां उल्लेखनीय कि संत मोलडऩाथ इसी जोहड़ के पानी को प्रयोग करते थे। उसी उसी के पानी से स्नान करते थे। यह पानी वर्षा का इकट्ठा होता था। आस पास के जीव जंतु और जंगल में रहने वाले पशु पक्षी भी इसी जल को पीते थे। ऐसे में संत मोलडऩाथ जोहड़ वर्तमान में मोलडऩाथ तालाब बना हुआ है और पक्का बना हुआ है। यह कभी जोहड़ होता था और इस जोहड़ में साफ पानी भरा रहता था। जो भी कोई भक्त आता वो इसी पानी का प्रयोग करता था। सबसे बड़ी खूबी थी कि संत मोलडऩाथ मोर, चिडिय़ां, गीदड़ आदि को नाम से पुकारते थे। एक बार नाम लेते तो वो चिडिय़ा, पक्षी और पशु दौड़कर आते थे। उनको वे चुग्गा देते थे। वो जीव जंतु अपना चुग्गा लेकर वहीं आसपास विचरते थे। सबसे बड़ी खूबी रही कि वह संत के चारों ओर इधर-उधर ही घूमते रहते थे। संत का इनसे अति लगाव था इसलिए पशु, पक्षी और प्रकृति के अति प्रेमी रहे हैं। वही वो इसजोहड़ के किनारे ही तप करते थे और तप करते हुए जो कुछ मन से बोलते थे वह सिद्ध हो जाता था। वर्तमान में संत मोलडऩाथ जिस जाल के पेड़ के नीचे रहते थे वह भी नहीं बची है और जोहड़ भी वर्तमान में तालाब में बदल दिया है। बाद में यही जोड़ गंदे पानी से लंबे समय तक भरा रहा। फिर नगरपालिका कनीना ने इसे पक्का करवा कर तालाब का रूप दिया। यह तालाब मौलाना नाथ और श्याम दोनों के लिए जल का स्रोत होता है। परंतु इस समय इसका जल पीने योग्य नहीं रहा है। इसे नल से भरा जाता है।
संत भोलानाथ प्रकृति के इसलिए भी प्रेमी थे कि जहां-जहां भी गए उनमें रोड़वाल, मांदी, कांवी भोजावास, ढाणी बाठोठा,नीमराणा, नीमराना तथा मानसरोवर प्रमुख हैं। इन सभी जगह केवल प्रकृति में तप करने के लिए जाते थे। जहां भी तप किया वह स्थल आज भी आबाद हैं। संत मोलड़ जो जन्म से ही साधु के वेश में आए थे और सदा हंसते खेलते रहते थे, सदा खुश रहते थे और जो कुछ मिल गया उसी को खाने के रूप में प्रयोग करते थे। क्यों रखा था मोलड़ नाम -
क्योंकि बचपन से मोलडऩाथ हंसमुख रहे हैं, सदा खुश रहे थे और जहां ठहरने का मनद कर गया वहीं पर रहना शुरू कर देते थे। खेलते कूदते रहते थे। जहां तक की खाने में जो कुछ मिला वह खा लेते थे। आम भाषा में जिसे मोलड़ कहते हैं। इसी कारण से संत मोलडऩाथ बहुत अधिक समय प्रकृति और घुमक्कड़ जिज्ञासु रहे हैं। इसी लिए उनको मोलडऩाथ नाम दिया गया था। तत्पश्चात लोगों ने भी उन्हें मोलडऩाथ कहना शुरू कर दिया और आज तक मोलडऩाथ के परम संतों में मोलडऩाथ का नाम एक है। यूं तो कनीना के चारों दिशाओं में कोई ना कोई संत है किंतु इन सभी में प्रमुख संतों में मोलडऩाथ का नाम पहले लिया जाता है। जहां कभी किसी प्रकार का शुभ कार्य किया जाता है तो मोलडऩाथका नाम लिया जाता है। विवाह शादी हो, कोई दुकान चलानी हो, किसी पशु आदि का दूध चढ़ाना हो या अन्य शुभ कार्यों में मोलडऩाथ को याद किया जाता है। फरवरी माह में जहां जैतपुर धाम, खाटूश्याम के प्रमुख मेले लगते हैं वहां जाने वाले भक्त भी मोलडऩाथ से ही शुरुआत से ही शुरुआत करते हैं। जहां महाशिवरात्रि और शिवरात्रि का मेला आता है इसमें भारी संख्या में कावड़ बाघेश्वर धाम और दूसरे धामों पर अर्पित की जाती है। कनीना और आसपास के लोग मोलडऩाथ आश्रम पर जाकर से ही आकर विश्राम करते रहे हैं। यह सत्य है कि वर्तमान में श्याम मंदिर होने से भक्तों के लिए यहां पड़ाव श्याम मंदिर में लगने लग गया है।
मोलडऩाथ आश्रम की सबसे बड़ी खूबी रही है कि यहां बहुत लंबे समय से भोजन और दूध का सदा प्रबंध रहा है। यदि रात्रि के समय किसी स्थल पर यदि संतों के लिए खाना दाना मिलता है तो वह मोलडऩाथ आश्रम है। कनीना के पूर्व में पार्षद रहे राजेंद्र सिंह ने लंबे समय तक यहां सेवा करते आ रहे हैं। प्रतिदिन शाम को दूध और रोटियां रखते आये हैं ताकि कोई भी संत रात्रि को भूखा न सोये। अगर भूखा आये तो खाना खा सकता है। करीब 50 सालों से वो सेवा करते आ रहे हैं। वर्तमान में जहां रामनिवास महाराज मोलडऩाथ आश्रम में महंत की भूमिका निभा रहे हैं। वही विगत समय में सही करो शांति यहां सैकड़ों संत आए और गए हैं। यह आश्रम दूर दराज तक लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना है। यह एकमात्र धाम है जहां ऊंट और घोडिय़ां की दौड़ लंबे समय से चली आ रही है। बाद में कुछ जगह ऊंट एवं घाोडिय़ों की दौड़ शुरू करवा दी है किंतु कनीना का संत मोलडऩाथ आश्रम एकमात्र ऐसा स्थल है जहां सबसे पहले ऊंट दौड़ और घोडिय़ां की दौड़ शुरू की गई थी। किसी राजा महाराजा के वक्त ये दौड़ चलती थी किंतु मोलडऩाथ आश्रम पर भी ये दौड़ और दंगल होते आ रहे हैं। यह भी सत्य है कि संत मोलडऩाथ ने जिसको कोई वरदान दे दिया वह अभय वरदान बना। कनीना के शहर के जय नारायण यूं तो किसी संत में विश्वास रखते थे तो वह मोलडऩाथ थे। अब तो जयनारायण का भी निधन हो चुका है। जब कोई भक्त मोलडऩाथ के बारे में जयनारायण/जैनिया की दुकान प्रसिद्ध है, से मिलते थे तो बताते थे कि मोलडऩाथ में दो गुण प्रमुख रूप से देखने को मिले हैं। एक ओले भगाने की क्षमता और दूसरी हैजा भगाने की क्षमता। एक बार का वो वर्णन करते थे कि उन्होंने बेर बेचने के लिए बाग ले रखा था। बहुत बेहतरीन बेर लगे हुए थे। जय नारायण ने समझा क्यों न बेर संत को दिए जाएं। एक दिन आकाश में बादल गरजने लगे ऐसा लगा कि ओलावृष्टि होगी। जय नारायण संत के पास पहुंचे बेर उनको देकर कहा कि संत ये बेर खा लो और यह कुछ समय के बचे है। थोड़ी देर बाद में ये खत्म हो जाएंगे। संत ने पूछा ऐसा क्यों? जय नारायण ने बताया कि ये देखिए ओलावृृष्टि होने लगी है और ये ओलावृष्टि सारे बेरों को खत्म कर देगी। संत ने कहा अच्छा ऐसी बात है तो मैं देखता हूं और उन्होंने अपना चोला उठाया और आकाश में घूमाकर कहा-चलो यहां से दूर और जयनारायण डेरीवाले से कहा कि वो देखिये वर्र्तमान में जहां रेवाड़ी की सीमा हैं वहां पहुंचा दिये हैं। जय नारायण ने समझा कि मोलडऩाथ एक संत। ऐसे ही कह दिया होगा। परंतु अगले दिन उन्हें पता लगा कि दूर दराज वर्तमान में जो गांव रेवाड़ी के हैं वहां भारी ओलावृष्टि हुई और कनीना में ओलावृष्टि नहीं हुई। तब से उन्होंने पूजना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि कि संत हमेशा शांत स्वभाव में तल्लीन रहते थे, तप करते थे और उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी कि उनके पास जो भी भक्त आता था उन्हें प्रसाद उनकी पसंद का ही देते थे।
संत आश्रम फोटो साथ है
कनीना के परम संत मोलडऩाथ का मेला 27 फरवरी को
-आयोजित होंगी कुश्ती, कबड्डी, ऊंट और देसी घोडिय़ों की दौड़
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कनीना की आवाज। कनीना के परम संत मोलडऩाथ का मेला 27 फरवरी फागुन शुक्ल एकादशी को आयोजित होगा।
जिसमें कुश्ती, कबड्डी, ऊंटदौड़ एवं देशी घोडिय़ों की दौड़ आयोजित होगी। मोलडऩाथ आश्रम ट्रस्ट प्रधान दिनेश कुमार ने बताया कि 26 फरवरी को रात 8 बजे जागरण होगा। जागरण फुटबाल के खेल के मैदान में आयोजित होगा जिसमें प्रदीप जांडली, आरके लहरी, आंचल पांचाल, अन्नू शर्मा आदि बाबा का गुणगान करेंगे। ऊंट एवं घोडिय़ों की दौड़ 27 फरवरी को प्रात: 8 बजे आएगी तो होगी। ऊंटों की दौड़ में प्रथम 51 51 हजार, दूसरा इनाम 41000 तीसरा 31 हजार, चौथा 21000 तथा पांचवा इनाम 11000 रुपए का होगा। इसी प्रकार देसी घोडिय़ों में प्रथम 51 हजार, दूसरा 41 हजार, तीसरा 31000 ,चौथा 2100 तथा पांचवां 11000 रुपये का होगा। घोडिय़ों की चाल आयोजित होगी जिसमें प्रथम इनाम 21 हजार दूसरा इनाम 15000 रुपए और तीसरा इनाम 7100 रुपए का होगा। सर्कल कबड्डी आयोजित होगी जिसमें प्रथम इनाम 71000 रुपए तो दूसरा इनाम 51 हजार और तृतीय नाम 21000 रुपए का होगा। बेस्ट कैचर को 5100 रुपए और बेस्ट रैडर को भी 5100 रुपए का इनाम दिया जाएगा। 51 रुपए से लेकर 31000 रुपए तक की कुश्तियां आयोजित होगी।
उल्लेखनीय है कि तीन दिनों तक यह मेला आयोजित होता है। जहां प्रथम दिन बाबा का जागरण एवं गुणगान होता है दूसरे दिन मेला एवं दौड़ आयोजित होती हैं और तीसरे और अंतिम दिन आए हुए भक्तजनों को विदा किया जाता है। कनीना का यह सबसे प्रमुख और सबसे प्रसिद्ध मेला है। इस मेल को लेकर हरियाणा ही नहीं नहीं दूसरे प्रदेशों से भी भक्त आते हैं और दौड़ आदि में भाग लेते हैं। कनीना कस्बा का कोई भी व्यक्ति कहीं हो वह इस दिन जरूर आकर शक्कर का प्रसाद चढ़ाता है। संत की अब तक चारकंृतियां, आरतियां, कैलेंडर, बाबा चालीसा आदि प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें तो एक पुस्तक आईएसबीएन तक की भी प्रकाशित हो चुकी है। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने बाबा के प्रचार एवं प्रसार में अहं योगदान दिया है। उधर बाबा का प्राचीन जोहड़ अब जल से भराने की तैयारी की जा रही हैं।
फोटो कैप्शन 01: संत मोलडऩाथ की प्रतिमा कनीना
निजी बसों व परिवहन समिति की बसों में रियायती पास एवं मुफ्त बस पास का है प्रावधान
--आरटीआई से हुआ खुलासा
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कनीना की आवाज। हरियाणा प्रदेश में चलने वाली सहकारी परिवहन समिति एवं निजी बसों में स्टेज कैरिज स्कीम 2016 के तहत विभिन्न मार्गों पर संचालित बसों में मुफ्त यात्रा एवं रियायती यात्र जैसे विद्यार्थियों के बस पास, वरिष्ठ नागरिकों का आधा किराया आदि का प्रावधान है। परिवहन आयुक्त हरियाणा, चंडीगढ़ से मांगी गई सूचना के आधार पर स्पष्ट किया गया है। सूचना मांगी गई थी कि उच्च न्यायालय पंजाब एवं हरियाणा द्वारा रियायती एवं विद्यार्थी बस पास पर स्टे किए जाने के आदेश की प्रति मांगी गई थी जिसमें आयुक्त ने लिखा है कि अभी तक ऐसा कोई स्टे आदेश नहीं दिया है।
उन्होंने जवाब में दिया लिखा है कि मैं न्यायालय द्वारा ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है। ऐसे में छात्रों को मुफ्त बस पास की सुविधा और वरिष्ठ नागरिकों के परिवहन समिति एवं निजी बसों में यथावत लागू है। यही नहीं आईटीआई में एक सूचना मांगी गई कि उच्च न्यायालय पंजाब में हरियाणा के स्टे आदेशों को हरियाणा प्रदेश में लागू किए जाने की प्रति उपलब्ध कराई जाए। आयुक्त ने कहा है कि न्यायालय द्वारा ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है ऐसे में स्पष्ट है कि पंजाब में हरियाणा न्यायालय द्वारा बसों में सहकारी परिवहन समिति और निजी बसों में रियायती यात्रा एवं मुफ्त यात्रा करने पर कोई रोक नहीं लगाई है। ऐसा कोई आदेश परिवहन विभाग के पास नहीं पहुंचा है।
श्रीकृष्ण गौशाला में कई लोगों ने दिया दान
-गौशाला कार्यकारिणी ने
किया उनका अभिनंदन
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कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में धर्मपाल करीरा निवासी ने पशुओं के पानी की खेल बनाने के लिए 21 हजार रुपए का दान दिया और गायों को गुड़ खिलाया। इस मौके पर ग्राम सचिव अंजली कोटिया निवासी ने भी 5100 रुपए देकर एक गाय गोद ली है। श्रीकृष्ण गौशाला पदाधिकारियों ने उन सभी का अभिनंदन किया है।
प्रधान भगत सिंह ने कहा कि गायों की सेवा सर्वश्रेष्ठ सेवा होती हे। हमें दिल खोलकर गायों की सेवा करनी चाहिए। भगत सिंह ने कहा कि गायों की सेवा से सभी पाप मिट जाते हैं और पुण्य का भागी बन जाता है। इंसान को जरूर गायों की सेवा करनी चाहिए ताकि अपने जीवन में नाम कमा सके। उन्होंने कहा गायों की सेवा भगवान श्रीकृष्ण ने की थी इसलिए गोपाल कहलाए। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में गायों के प्रति फिर से वो लगाव उत्पन्न होने लगा है जो वर्षों पहले सिर चढ़कर बोल रहा था। उन्होंने बताया कि कनीना श्रीकृष्ण गौशाला से करीब 500 गाए गोद ली जा चुकी है और भक्तों द्वारा दान दिया गया है। वहीं गौशाला में अमूल चूल परिवर्तन किये जा चुके हैं। आने वाले समय में श्रीकृष्ण गौशाला प्रदेश भर में नंबर वन होगी।
उल्लेखनीय है कि समय समय पर कुछ ऐसे उदार लोग धरा पर आते हैं जो अपनी कर्मठता के चलते लोगों के दिलोदिमाग पर छा जाते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत इस वक्त गौशाला के प्रधान बतौर भगत सिंह ने कार्यभार संभाल रखा है। कहते हैं कि जिसमें कुछ करने की तमन्ना हो वो कुछ नया करके ही दिखाते हैं। भगत सिंह ने गौशाला में आकर अमूल चूल परिवर्तन कर दिखलाये हैं जो अपने आप में भागीरथ से कम नजर नहीं आते हैं। इस समय श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में 2500 गौवंश हैं। जिनके लिए गौशाला में व्यापक प्रबंध किये गये हैं। आज से छह माह पहले जो गौशाला रंग रही थी वो आज उड़ान भरने की कगार पर है। कभी गौशाला में लोग जाते हुए कतराते थे अब पूरे परिवार सहित खुशी खुशी जाकर दानपुण्य कर रहे हैं जिसके पीछे भगत सिंह नामक भागीरथ मिल गया है जो भागीरथी प्रयास कर गौशाला को आधुनिकतम की ओर ले जा रहे हैं।
इस मौके पर प्रधान भगत सिंह, बलवान सिंह आर्य, दिलावर सिंह, मा. भूप सिंह, धर्मपाल करीरा, मा. राम प्रताप आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: गौशाला में दान करने आए हुए
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