कनीना में एसआईआर प्रक्रिया शुरू , घर घर जा रहे हैं बीएलओ
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कनीना की आवाज। हरियाणा सरकार के निर्देशानुसार कनीना में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू हो चुका है। कस्बे में 09 बीएलओ घर घर जाकर पुनरीक्षण कार्य कर रहे है। 15 जून से शुरू हुआ अभियान 14 जुलाई तक जारी रहेगा। बीएलओ राजेश कुमार ने बताया कि कनीना मंडी में उस ने 159 मतदाताओं का पुनर्निरीक्षण हो चुका है। मतदाता भी बढ़ चढ़ कर सहयोग दे रहे है। बीएलओ ने बताया कि कुछ लोग ट्यूबवेलों पर रह रहे हैं तो उनको ढूंढने में परेशानी होती है वहीं किसी से पता करके घर पहुंचते हैं और फिर घर के सदस्यों से बात करने पर ही आगामी कार्रवाई हो पाती है। इस कारण मतदाताओं की सही जानकारी सरकार तक पहुंच जाएगी । और वर्तमान समय में नए पुराने मतदाताओं का आंकलन हो जाएगा। इस अभियान में वालेंटियर की मदद भी ली जा रही है। अभी तक लोगों का उत्तर सही आ रहा है।
फोटो कैप्शन 07: मतदाता सूची का पुनर्निरीक्षण करते बीएलओ
प्राकृतिक खेती अपनाकर कम लागत में बढ़ाएं आय - कृषि विशेषज्ञ
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कनीना की आवाज। कनीना स्थित बाबा बाबा मोलडनाथ मंदिर प्रांगण में मंगलवार को प्राकृतिक खेती एवं उन्नत कृषि तकनीकों पर एक किसान जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि एवं बागवानी विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती, फसल प्रबंधन तथा सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) महेंद्रगढ़ के विशेषज्ञ डा. नरेंद्र ने किसानों को कपास एवं मूंग की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने फसलों की उन्नत किस्मों, रोग प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर प्रकाश डाला। साथ ही धरती माता बचाओ अभियान के तहत प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग का संदेश दिया।
कृषि विभाग के डा. योगेश चंद्र ने किसानों को बाजरे की उन्नत खेती के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि फसल की बुवाई का उपयुक्त समय क्या है तथा बेहतर उत्पादन के लिए खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग किस मात्रा में और कब करना चाहिए। उन्होंने एग्री-स्टैक आईडी के महत्व और इससे मिलने वाले लाभों के बारे में भी किसानों को जागरूक किया। प्राकृतिक खेती विशेषज्ञ डा. मनीष यादव ने किसानों को जीवामृत, घन जीवामृत और अन्य जैविक उत्पादों को तैयार करने एवं उनके प्रयोग की विधि समझाई। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से खेती की लागत कम होती है, भूमि की उर्वरता बढ़ती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। वहीं डॉ. अरविंद यादव ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, जल शक्ति अभियान, फसल अवशेष प्रबंधन (स्टबल बर्निंग रोकथाम) तथा खेत बचाओ अभियान के बारे में जानकारी दी। बागवानी विभाग के डा. सतीश कुमार ने विभाग की विभिन्न अनुदान योजनाओं और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी किसानों को दी। इस अवसर पर प्रधान नरेश कुमार, सूबेदार अजीत सिंह, धर्मपाल, होशियार सिंह, सुमेर सिंह, देवदत्त शर्मा, हरीश कुमार, मनीराम यादव, प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 08:कनीना में आयोजित किसान जागरूकता गोष्ठी
बाबा सुन्दरपुरी की पंच धूनी तपस्या का 35 वां दिन सम्पन्न
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव स्याणा की प्राचीन भूमि पर ऋषि चाउंड मंदिर परिसर में इन दिनों बाबा सुन्दर पुरी महाराज द्वारा पंच धूनी तप जारी है। 13 मई 2026 से तप शुरू किया था जो आगामी 22 जून 2026 तक 41 दिन चलेगा। पंच धूणी की तपस्या सुबह 10 बजकर 15 मिनट से दोपहर बाद 2 बजकर 15 मिनट तक चलती रहती है।
16 जून 2026 तपस्या का 35 वां दिन था। हर रोज की तरह आज भी गांव स्याणा व पास पड़ोस के गांवों की सैकड़ों महिलाओं ने पंच धूणी की परिक्रमा दी और भजन कीर्तन करके धार्मिक आस्था को बढ़ावा दिया। इस पावन अवसर पर सेवा देने वालों में ढाब आश्रम स्थल के महंत श्रद्धानंद महाराज स्याणा, महंत प्रदीप पुरी महाराज, बहु झोलरी जनपद झज्जर, महंत सत्यनारायण पुरी महाराज पोता, मास्टर सीताराम कैमला, ओमप्रकाश पोता, रोहतास शर्मा चांग रोड़ जनपद चरखी दादरी सहित गांव के सैंकड़ों गणमान्य भक्तजनों ने सेवाएं देकर धार्मिक आस्था को बढ़ावा दिया है।
फोटो कैप्शन 6: पंच धूनी तप करते संत
सड़क के बीच में बना है गड्ढा
- लगा रखे पत्थर और झंडा
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कनीना की आवाज। कनीना के मुख्य बस स्टैंड के पास, नगर पालिका चेयरपर्सन के आवास के समक्ष मुख्य मार्ग पर चौड़ा गड्ढा बना हुआ है। वर्षा के समय वर्षा के जल से लबालब भर जाता है। यहां कोई भी बड़ी दुर्घटना होने के आशंका बनी हुई है। वैसे तो लोगों ने पत्थर डालकर झंडा लगा रखा है लेकिन कई बार इस झंडे को बचाने के लिए या तेज गति से आने वाले वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना बन जाती है। इस ओर प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है परिणाम यह है कि पहले भी अनेक दुर्घटनाएं घटी और भविष्य में भी इस प्रकार के सड़क मार्ग से दुर्घटना घटने की संभावना बन गई है।
कनीना क्षेत्र के सुरेश कुमार, रोहित कुमार, दिनेश कुमार, महेश कुमार आदि ने प्रशासन से मांग की है कि गड्ढे की सुध ली जाए ताकि आवागमन सुचारू रूप से हो सके क्योंकि इस वक्त आधा सड़क मार्ग इस गड्ढे ने कवर कर रखा है तो आधे मार्ग से ही वाहनों का आगमन चल रहा है और कोई भी बड़ी दुर्घटना कभी भी घट सकती है।
फोटो कैप्शन 02: वर्षा जल से भरा गड्ढा जहां झंडा गाड़ रखा है
सुन्दरह से महेन्द्रगढ़ तक रोडवेज का जायज किराया निर्धारित किया जाए
-कनीना से शाम को चलाई जाए नई बस
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कनीना की आवाज। बसपा के अतरलाल एडवोकेट ने महाप्रबन्धक रोडवेज नारनौल डिपो को ज्ञापन भेजकर सुन्दरह से महेन्द्रगढ़ तक का रोडवेज बस किराया 20 रुपए वसूलने पर विरोध जताया है। उन्होंने महाप्रबन्धक से जांच करवाकर सुन्दरह से महेन्द्रगढ़ तक का नया जायज किराया निर्धारण करने और कनीना बस अड्डे से सायं 7 बजे वाया नांगल, मोहनपुर, कोका, झिंगावन, सुन्दरह होते हुए नारनौल तक एक नई रोडवेज की बस चलाने की मांग की है।
अतरलाल ने ज्ञापन के बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि उन्हें सुन्दरह, कोका, झिंगावन, बेवल गांवों में जनसंवाद कार्यक्रम में ग्रामीणों से शिकायत मिली है कि सुन्दरह गांव से महेन्द्रगढ़ की दूरी मात्र 10 किलोमीटर है। हरियाणा रोडवेज द्वारा सुन्दरह से महेन्द्रगढ़ तक इस 10 किलोमीटर दूरी का किराया 20 रूपए वसूला जा रहा है जो गलत और खिलाफ कानून है। रोडवेज बसों द्वारा इस गलत किराया वसूली को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि 15 दिन के अंदर जांच करवाकर नया जायज किराया निर्धारित नहीं किया गया तो महाप्रबन्धक रोडवेज नारनौल के कार्यालय के समक्ष धरना दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने दूसरी शिकायत यह की कि कनीना बस अड्डे से सायं 5 बजे के बाद कनीना से वाया नांगल, मोहनपुर, कोका, सुन्दरह, झिंगावन होते हुए नारनौल तक कोई रोडवेज बस संचालित नहीं है। कनीना बस अड्डे से सायं 5 बजे के बाद इस रूट की सवारियों को अपने गांवों में पहुंचने के लिए बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। इसलिए कनीना बस अड्डे से सायं 7 बजे नारनौल के लिए वाया नांगल, मोहनपुर, कोका, सुन्दरह, झिंगावन होकर एक नई रोडवेज बस चलाई जाए।
फोटो कैप्शन 03: लोगों की समस्या जानते अतरलाल
कनीना खास रेलवे स्टेशन पर छाया रहता है अंधेरा
-ट्रेन आने पर दुर्घटना की आशंका
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कनीना की आवाज। कनीना खास रेलवे स्टेशन पर यूं तो ट्रेन न रुकने से कनीनावासी परेशान हैं और उन्हें महेंद्रगढ़ या रेवाड़ी जाकर ट्रेन पकडऩी पड़ रही है। उपमंडल होते हुए भी कनीना की यह दुर्गति बनी हुई है। वहीं रेलवे स्टेशन पर अंधेरा छाए रहने से लोग परेशान है।
जब ट्रेन आती है तब भी कुछ नहीं दिखाई देता जिससे कोई भी दुर्घटना घट सकती है। ट्रेन से सफर करने वाले यथार्थ, रमेश, सुरेश, दिनेश कुमार एवं अमीश कुमार आदि ने बताया कि वो सुबह सवेरे दिल्ली जाने के लिए तैयार थे किंतु पहले तो कनीना की बिजली सप्लाई बंद थी। बिजली सप्लाई होने पर भी रेलवे स्टेशन पर अंधेरा छाया हुआ था। विगत दो माह से यही हालात बनी हुई है।
ट्रेन भी मुश्किल से दिखाई देती है। जब मौसम खराब होता है और अंधेरा छाए रहता है तो ऐसी स्थिति में ट्रेन से सफर करना जोखिम भरा कार्य बन जाता है। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि कम से कम कनीना खास रेलवे स्टेशन की सुध ली जाए। सभी ट्रेनों का ठहराव भी किया जाए, लाइट की उचित व्यवस्था की जाए।
इस संबंध में रेलवे विकास समिति सदस्य योगेश अग्रवाल ने स्टेशन मास्टर से समस्या के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि दूसरा प्लेटफार्म बन रहा है जिसके चलते लाइट काटी हुई है। जब प्लेटफार्म बनकर तैयार हो जाएगा तब लाइट बहाल की जाएगी।
किंतु जब तक कोई हादसा हो जाएगा तो जिम्मेदार कौन होगा। तब तक वैकल्पिक लाइट की व्यवस्था की जा सकती है। एक ओर कनीना खास रेलवे स्टेशन पर फास्ट एवं सुपरफास्ट ट्रेने नहीं रुकती वहीं अब अंधेरे में डूबो रखा है। कनीनावासियों की मांग है कि लाइट व्यवस्था बहाल कर अहीरवाल के गढ़ एवं उपमंडल के रेलवे स्टेशन पर सभी ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित किया जाए।
फोटो कैप्शन 04 व 05: कनीना खास रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन आने पर अंधेरे की स्थिति
कनीना क्षेत्र में हुई 5 एमएम वर्षा
-अभी तक नहीं हो पाई है खेतों में बाजरे की बिजाई
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में सामवार दोपहर के पश्चात धूल भरी आंधी के बाद 2 एमएम वर्षा हुई थी वहीं मंगलवार को दोपहर पूर्व 5 एमएम वर्षा हुई। मौसम तो सुहावना हो गया किंतु खेतों में बाजरे की बिजाई लायक वर्षा नहीं हुई है। अभी किसानों को और इंतजर करना होगा। क्षेत्र में बूंदाबांदी कई बार हो चुकी है किंतु इतनी वर्षा नहीं होती की खरीफ फसलों की बिजाई की जा सके।
क्या कहते हैं किसान-
किसान राजेंद्र सिंह, मनोज कुमार, दिनेश कुमार, सूबे सिंह आदि ने बताया कि जब तक अच्छी वर्षा नहीं होती तब तक बिजाई संभव नहीं है। अभी तक बिजाई न हो पाने से किसान परेशान हैं। यदि बिजाई इस समय हो जाती है तो फसल अच्छी होने के संकेत बन जाते हैं।
क्या कहते हैं एसडीओ कृषि विभाग -
एसडीओ कृषि विभाग डा. अजय यादव से संबंध में बात हुई। उन्होंने कहा कि बाजरे की 20 जून तक बिजाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि सफेद ग्रैब नामक कीड़ा आने की संभावना बढ़ जाती है। यह कीड़ा उस समय अधिक आता है जब 20 जून से पहले बिजाई की गई हो। इस अवधि के बाद कीड़े जीवन चक्र पूरा हो जाता है। और भूमि के ऊपर आकर नष्ट हो जाता है। यह बाजरे की जड़ों में मिलता है। ऐसे में इस पर काबू पानी कठिन होता है। उन्होंने कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह तक भी बिजाई संभव है। बाजरे की बिजाई अलग-अलग क्षेत्र पर निर्भर करती। यदि रेतीला क्षेत्र है तो उसमें बिजाई के बाद वर्षा का कोई नुकसान नहीं होने की संभावना जबकि भूमि कठोर है तो उसमें बिजाई के बाद हुई वर्षा से नुकसान होता है क्योंकि एक मोटी परत बीजों के ऊपर जमा हो जाती है जो बीजों को अंकुरित नहीं होने देती। उन्होंने कहा कि बाजरे की बिछाई 20 जून के बाद ही बेहतर रहती है किंतु निर्भर करता है कि क्षेत्र में कब वर्षा होती है। किसानों की आदत है कि अच्छी वर्षा हो जाने पर तुरंत बाजरे की बिजाई करते है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बाजरा अधिक उगाया जाता है जबकि दूसरी फसले कम उगाई जाती है। जहां रबी के मौसम में सरसों और खरीफ के मौसम में बाजरा आदि को प्राथमिकता के आधार पर उगाने की प्रवृति मिलती है।
फोटो कैप्शन 01: वर्षा का सड़क मार्गों पर भरा जल
साथ में एसडीओ कृषि डा. अजय यादव

















































