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**KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**
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Sunday, March 15, 2026
हिंदू नववर्ष है हमारा असली नववर्ष, 19 मार्च से शुरू -अंग्रेजी नव वर्ष के पीछे नहीं भागेंगे-महेश बोहरा ********************************************* ********************************************** ********************************************* कनीना की आवाज। 19 मार्च से हिंदू नव वर्ष, नव संवत्सर 2083 शुरू हो रहा है। यह वह वर्ष है जो वर्षों से मनाया जाता रहा है। हिंदुओं के लिए यह वर्ष नव वर्ष कहलाता है। चाहे अंग्रेजी वर्ष के पीछे पूरा समाज चल रहा हो किंतु हिंदू नव वर्ष को मनाने की परंपरा अनोखी होती है। हिंदू नव वर्ष मनाने को लेकर के विभिन्न लोगों से चर्चा की गई। ** भारत का असली नव वर्ष, विक्रम संवत 2083 जो 19 मार्च से शुरू हो रहा है। राजा विक्रमादित्य द्वारा इस वर्ष शुरुआत की गई थी जो चंद्रमा गणना के अनुसार शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा 18 मार्च से शुरू होगा। राजा विक्रमादित्य ने ही यह वर्ष शुरू किया था जिसने हिंदू प्रजा की भलाई के लिए उन्होंने अनेक कार्य किए थे। उनके कार्य राम राज्य के समान ही माने जाते हैं। इसे पूरे जोश से मनाया जाना चाहिए। -- महेश बोहरा, हिंदु जागरण हिंदू नव वर्ष के महीनों के नाम भी बहुत से लोग नहीं जानते जबकि इनका ज्ञान होना हम सभी के लिए गर्व की बात है। इन हिंदू महीनों में चैत्र से शुरुआत होती है। बाद में वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्कशीर्ष, पोष माघ और अंतिम महीना फागुन का होता है। ये महीने बहुत से युवा पीढ़ी को ज्ञान नहीं है जबकि इनका ज्ञान होना जरूरी है। अंग्रेजी वर्ष के सभी महीना के नाम लोग आसानी से बता सकते हैं। इनका शिक्षण भी होना चाहिए। -- मनीषा यादव ,कनीना हिंदू नव वर्ष विक्रमादित्य द्वारा चलाया हुआ 19 मार्च से शुरू होगा। उस दिन को नव संवत्सर के रूप में मनाया जाता है। घरों में विभिन्न पकवान बनाकर इस वर्ष की शुरुआत होती है। लंबे समय से लोग घरों में पकवान बनाकर खाते आ रहे हैं। वास्तव में यह राजा विक्रमादित्य को याद करते हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर को तो हम याद रखते हैं किंतु हिंदू नव वर्ष तथा हिंदू कैलेंडर को भूल जाते हैं। यही हमारी भूल है। -- क्रिश यादव राजा विक्रमादित्य ने ही नव वर्ष शुरू किया था क्योंकि उन्होंने हूणों को हराकर टैक्सास नदी में अपने अश्वों को पानी पिलाया था और इसी खुशी में इस वर्ष की शुरुआत की थी। ऐसे में इस वर्ष को धूमधाम से मनाया जाना चाहिए। न केवल पुस्तकों में अपितु घर-घर में इस वर्ष को खुशी से मनाना चाहिए तभी हम हिंदू देश के नागरिक कहलाएंगे। यह वर्ष राजा विक्रमादित्य को समर्पित है। ग्रेगोरियन कैलेंडर और हिंदू कैलेंडर में 57 सालों का अंतर है। जब अंग्रेजी कैलेंडर वर्ष में 57 वर्ष जोड़ दिए जाते हैं तो हिंदू नव वर्ष बनता है अर्थात यह ग्रेगोरियन कैलेंडर से 57 वर्ष पहले शुरू हुआ था। यह आज भी चला आ रहा है। यही हमारा असली वर्ष है। -- जतिन यादव,कनीना फोटो कैप्शन 08:महेश बोहरा, मोनिका यादव, क्रिश यादव, जतिन यादव
दो पाटों के बीच पिसता रहा है कनीना 49 वर्ष पहले समाप्त कर दिया था कनीना विधानसभा क्षेत्र को -बहुत कम लोग जानते हैं कि कनीना निवासी भी होता था मंत्री ********************************************* ********************************************** ********************************************* कनीना की आवाज। जब जब विस चुनाव आते हैं तो कनीना विधानसभा की याद आती है। कनीना विधानसभा से चुना गया प्रत्याशी मंत्री पद तक पहुंचता था और क्षेत्र का विकास करवाता था। कनीना विधानसभा को तोड़े 49 वर्ष बीत गए हैं। कनीना विधानसभा को पेप्सू, पंजाब विधानसभा तथा हरियाणा विधानसभा में अपने प्रतिनिधि भेजने का श्रेय प्राप्त है। 1977 के चुनावों के वक्त कनीना के विधानसभा क्षेत्रों की संख्या बढ़ाकर 90 कर दी गई थी किंतु कनीना विधानसभा को तोड़ दिया गया था। कनीना विधानसभा के गांवों को महेंद्रगढ़ और जाटूसाना में मिला दिया गया था। इसके बाद कनीना को जाटूसान विस के तहत गुजार बसर करना पड़ा और 2009 के चुनावों में कनीना को अटेली विस क्षेत्र में मिला दिया गया। वर्तमान में कनीना अटेली विधानसभा के तहत आता है किंतु कनीना उप मंडल है। कनीना उप मंडल बनाए जाने का श्रेय अनीता यादव पूर्व एमएलए एवं पूर्व सीपीएस को जाता है। उधर अटेली कनीना उपमंडल के तहत आता है। कनीनावासियों ने वर्ष 2006 में विधान सभा पुनर्गठन के समय जमकर आंदोलन किया था यहां तक की अटेली की बजाय लोकसभा की तर्ज पर अटेली-कनीना विधानभा नाम रखने की बात भी कही गई थी। जिस प्रकार लोकसभा का नाम महेंद्रगढ़-भिवानी है। किंतु कनीनावासियों को कोई लाभ नहीं मिला। एक बार फिर से आंदोलन शुरू हो गया है और कनीना विधानसभा बहाली की मांग प्रबल हो गई है।
श्वेता तंवर बनी लेफ्टिनेंट , ग्रामीणों ने किया सम्मानित -खेड़ी तलवाना की है श्वेता ********************************************* ********************************************** ********************************************* कनीना की आवाज। वीरभूमि खेड़ी तलवाना की बेटी श्वेता तंवर का भारतीय सेना में सीधे लेफ्टिनेंट पद पर चयन होने पर पैतृक गांव में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। अतरलाल एडवोकेट के नेतृत्व में आसपास के ग्रामीणों ने श्वेता तंवर को पगड़ी पहनाकर, प्रशस्ति पत्र व अनेक उपहार भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने श्वेता के पिता मनोज तंवर को पगड़ी पहनाकर तथा माता योगिता को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। अतरलाल ने कहा कि श्वेता तंवर ने यह शानदार उपलब्धि हासिल कर पूरे समाज और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने लेफ्टिनेंट बनकर सिद्ध कर दिया है कि मेहनत और लगन से कोई भी कठिन से कठिन मुकाम हासिल किया जा सकता है। श्वेता तंवर ने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता, परिवार, गरुजन, कड़ी मेहनत और जुनून को दिया। इससे पहले उन्होंने बाबा भोलागिरी धाम तथा गांव के धार्मिक मंदिरों में धोक लगाई और शहीद सैनिकों की मूर्तियों पर माल्यापर्ण कर उन्हें नमन किया। गौरतलब है कि श्वेता का परिवार सैनिक परिवार रहा है। उनके परदादा, दादा और पिताजी ने भी सेना और सशस्त्र बलों में उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। चौथी पीढ़ी में श्वेता तंवर ने यह उपलब्धि हासिल कर अपनी पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाया है। इस अवसर पर पंकज सरपंच खेड़ी, रामनिवास बंसल सरपंच तलवाना, कप्तान ओमपाल सिंह, राजेंद्र सिंह नंबरदार, सुबेदार मेजर सुखपाल सिंह, मंजीत सिंह, सुरेश सिंह, रिपुदमन नंबरदार विक्टोरिया क्रास, पंडित विजय कौशिक, शिब्बू जेलदार, हंसराज, सरजीत, रामकुमार हेडमास्टर, कैप्टन सूरज, नरेश सेन, रामपाल सोनी, सुरेंद्र नंबरदार, ठाकुर बलजीत सिंह,सुरेन्द्र सहित सैकड़ों ग्रामीण और मौजीजान उपस्थित थे। फोटो कैप्शन 07: श्वेता तंवर को सम्मानित करते ग्रामीण।
थाना सदर कनीना पुलिस ने कार सवार तस्कर को दबोचा, 17 ग्राम स्मैक बरामद -1350 रुपए की नकदी, एक मोबाइल फोन और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक कार को भी जब्त ********************************************* ********************************************** ********************************************* कनीना की आवाज। पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ के निर्देशानुसार जिला पुलिस द्वारा नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना सदर कनीना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक नशा तस्कर को 17 ग्राम स्मैक (चिट्टा) के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम ने आरोपी के कब्जे से मादक पदार्थ के अलावा 1350 रुपए की नकदी, एक मोबाइल फोन और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक कार को भी जब्त कर लिया है। थाना सदर कनीना की पुलिस टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि नांगल (मोहनपुर) निवासी संदीप मादक पदार्थ बेचने का अवैध धंधा करता है और वह अपनी में मादक पदार्थ लेकर अटेली की तरफ से आ रहा है। इस सूचना को पुख्ता मानकर पुलिस ने एक रेडिंग पार्टी तैयार की, इसके बाद पुलिस टीम ने गांव नांगल की तरफ नाकाबंदी कर चेकिंग शुरू कर दी। कुछ देर बाद संदिग्ध गाड़ी आती दिखाई दी, जिसे पुलिस ने रोकने का इशारा किया। पुलिस को देखकर चालक ने गाड़ी भगाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए थोड़ी दूरी पर ही उसे घेरकर काबू कर लिया। पूछताछ में पकड़े गए व्यक्ति ने अपनी पहचान संदीप निवासी नांगल (मोहनपुर) के रूप में दी। पुलिस द्वारा राजपत्रित अधिकारी को मौके पर बुलाया गया, राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में आरोपी की तलाशी ली गई, तो उसके पास से एक थैली में 17 ग्राम स्मैक बरामद हुई। इसके अलावा आरोपी से 1350 रुपए और एक मोबाइल फोन भी मिला, जिसे पुलिस ने नियमानुसार कब्जे में ले लिया। आरोपी संदीप के खिलाफ थाना सदर कनीना में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपी से गहनता से पूछताछ कर रही है कि वह यह मादक पदार्थ कहां से खरीद कर लाया था, ताकि इसमें शामिल अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा सके।
चर्चित कोटिया स्कूल में भेजें प्रतिनियुक्ति पर दो शिक्षक - ग्रामीणों ने किया था गत दिनों आंदोलन ********************************************* ********************************************** ********************************************* कनीना की आवाज। कनीना उप मंडल के गांव कोटिया स्थित शहीद हनुमान सिंह माध्यमिक विद्यालय कोटिया में जहां स्थायी शिक्षकों के अभाव में मुख्य द्वार पर ग्रामीणों और अभिभावकों ने नारे लगाए और स्थायी शिक्षकों के भेजने की मांग की थी। जिसको लेकर स्कूल चर्चा में आ गया था। वर्तमान कार्यकारी खंड शिक्षा अधिकारी सुनील खुडानिया ने बताया कि सीहोर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल सीहोर दो शिक्षक प्रतिनयुक्ति पर भेज दिए गए हैं जिनमें विक्रम सिंह विज्ञान अध्यापक जो गणित भी पढ़ाएगा तथा मनफूल सिंह संस्कृत अध्यापक जो हिंदी भी पढ़ाएगा भेज दिए गए हैं। अब उन्होंने बताया कि स्थायी शिक्षक तभी आ पाएंगे जब ट्रांसफर ड्राइव चलेगा। बहरहाल काम चलाने के लिए दो शिक्षकों को नियमानुसार प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। अभी तक कोई भी शिक्षक न तो प्रतिनयुक्ति पर भेजा गया था और न ही कोई स्थायी शिक्षक था। अभी तक चपरासी और बाबू ही स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का कार्य कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि कोटिया विद्यालय में करीब 30 बच्चे 6 से 8 और 39 बच्चे एक से पांच में शिक्षा पा रहे हैं। कक्षा एक से 5 के लिए दो शिक्षक है जबकि 6 से 8 के लिए दो शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर भेज दिए गए हैं। अभी तक स्कूल के विद्यार्थी अक्टूबर 2025 से बिना शिक्षकों के पढ़ रहे थे। उन्हें चपरासी और बाबू ही शिक्षण कार्य करवा रहे थे। उधर कोटिया ग्रामीणों एवं एसएमसी सदस्य देशराज से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने मांग की है कि एमआईएस पर केप्ट की गई सभी पोस्ट खोल दी जाए ताकि ट्रांसफर ड्राइव में शिक्षक आ सके। उधर सीहोर स्कूल के प्राचार्य हरिश कुमार प्रधान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके पास 43 बच्चे 6 से आठ तक हैं तथा 3 शिक्षक बचे हैं जो शिक्षण कार्य करवाएंगे। यहांं सामाजिक विज्ञान का पद पहले ही रिक्त है। फोटो कैप्शन 06: कोटिया स्कूल
व्यक्ति गुम, गुमशुदगी का मामला दर्ज ********************************************* ********************************************** ********************************************* कनीना की आवाज। गांव मुंडिया खेड़ा से 56 वर्षीय राजकुमार 13 मार्च से घर से कहीं चला गया। उसका अता पता नहीं चला है। उसके पुत्र सुनील कुमार ने पुलिस में गुमशुदगी का का मामला दर्ज करवाते हुए कहा है कि 13 मार्च 2026 को दिन के 1 बजे उसके पिता घर से बिना बताए कहीं चले गये और उनका मोबाइल अब बंद आ रहा है। हर जगह तलाश की गई,कहीं भी नहीं मिला। कनीना पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया है।
कनीना क्षेत्र में सुबह सवेरे बदला मौसम - बूंदाबांदी हुई, कुछ ओले भी पड़े ********************************************* ********************************************** ********************************************* कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में रविवार को सुबह आकाश में बादल छा गए और बादलों की गडग़ड़ाहट के साथ हल्की वर्षा हुई, कुछ ओले भी गिरे। इससे किसानों की चिंता की रेखाएं बढ़ गई क्योंकि इस समय वर्षा सरसों की फसल के लिए नुकसानदायक साबित होगी। सबसे बड़ा नुकसान सरसों की फसल को हो सकता है। यदि वर्षा होती है तो काट कर डाली गई और पककर तैयार सरसों की फसल को नुकसान होने का अंदेशा बन जाता है। इस समय करीब 20 हजार हेक्टेयर पर सरसों की फसल खड़ी हुई है जिसमें से कुछ की लावणी की जा चुकी है जबकि गेहूं की फसल करीब 9000 हेक्टेयर पर खड़ी हुई है। वर्षा से गेहूं की फसल को लाभ मिल सकता है क्योंकि अभी भी किसान गेहूं की फसल की सिंचाई कर रहे हैं। किसान पल-पल बदलते मौसम पर नजर टिकाये हुए हैं क्योंकि इसी फसल पैदावार से वर्षभर की आय प्राप्त होती है। रबी फसल के दौरान कभी अधिक ठंड कभी पाल, कभी ओलावृष्टि से तो कभी वर्षा से नुकसान झेलना पड़ता है। किसान त्वरित गति से सरसों की लावणी कर रहे और गेहूं की लावणी आने में अभी समय है। फोटो कैप्शन 3: सरसों की फसल में सिंचाई करते किसान
उल्लास की परीक्षा में खंड स्तर पर 34 परीक्षा केंद्रों पर बैठे 403 बुजुर्ग, 441 ने करवाया था रजिस्ट्रेशन -कम से कम हस्ताक्षर करना सीख गए ********************************************* ********************************************** ********************************************* कनीना की आवाज। कनीना खंड के 34 परीक्षा केंद्रों पर उल्लास की परीक्षा संपन्न हुई। 441 बुजुर्गों ने उल्लास के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था जिनमें से 403 बुजुर्ग परीक्षा में बैठे। एक अजब ही नजारा देखने को मिला। 15 वर्ष से 70 वर्ष की आयु के सभी निरक्षरों को पंजीकृत कर उन्हें एक निश्चित अवधि में साक्षर बनाकर उनकी परीक्षा आयोजित करवाई गई है। मिली जानकारी अनुसार अभी तक मार्च 2025, सितंबर 2025, दिसंबर 2025 और अब मार्च 2026 में परीक्षा हो चुकी है। अब इनका रिजल्ट भी आएगा। इस समय में कुछ बुजुर्ग जो इस परीक्षा में बैठ रही थी उनसे चर्चा की गई। क्या कहना है उनका- ***कांता ने बताया कि वैसे तो सामाजिक व्यवहार की सभी बातें जानती है किंतु अपना नाम आदि लिखना नहीं जानती थी। इस परीक्षा से नाम आदि लिखना सीख गई है। 75 वर्ष की आयु में परीक्षा देने पर उन्हें अजीब सा महसूस हुआ है। --75 वर्षीय कांता उधर मधुबाला का कहना है कि और कुछ नहीं तो कहीं अपना नाम लिखकर प्रसन्नता होगी। परिवार के बच्चों ने उन्हें इस उम्र में परीक्षा देने जाते हुए खूब हंसाया परंतु उनकी इच्छा है कि एक बार इस परीक्षा में बैठकर कुछ सीखा जाए। -- मधुबाला 65 वर्ष गांव में कभी से वजन, तोल ने छोटी-छोटी गणना करने का ज्ञान हर निरक्षर को भी होता है किंतु इस परीक्षा में उनके परिवार ने साथ दिया है और शिक्षकों के कारण कम से कम अपने परिवार का नाम लिखना सीख लिया है। -- सौबाई 70 साल विद्या देवी का कहना है कि अच्छा है इस प्रकार की परीक्षा देकर कुछ करना। कुछ बातें पूछी गई उनको हल कर दिया है। भविष्य में छोटी-मोटी बात लिखनी होगी और लिखी जा सकेगी। उन्हें खुशी है कि कम से कम साक्षर बन गई। विद्या देवी 76 साल फोटो कैप्शन: कांता, मधुबाला, सौबाई और विद्या देवी फोटो कैप्शन 04: सीहोर परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देते हुए
गोशाला को भेंट की नई पिकअप -5.11 लाख रुपये भी दिये दान ********************************************* ********************************************** ********************************************* कनीना की आवाज। गोमाता की सेवा को जीवन का उद्देश्य मानने वाले कनीना निवासी समाजसेवी हरीश कनीनवाल ने श्रीकृष्ण गौशाला कनीना को लगभग 7 लाख 65 हजार रुपए मूल्य की नई महिंद्रा पिकअप गाड़ी भेंट की तथा अपने दादा जी स्वर्गीय गुगनराम यादव की पुण्य स्मृति में गौशाला में एक बाड़े के लिए खोर एवं टीन शेड निर्माण हेतु 5 लाख 11 हजार रुपए नकद दान किए। इस अवसर पर हरीश कनीनवाल ने कहा कि समाज की सेवा और गोसेवा के लिए वे सदैव तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में कमाए गए धन का यदि दान न किया जाए तो उस धन का नाश निश्चित है। परमात्मा की कृपा से ही व्यक्ति को दान-धर्म करने का अवसर मिलता है। उन्होंने भविष्य में भी गौशाला को सहयोग देते रहने का आश्वासन दिया। इसी अवसर पर सूबेदार मेजर अर्जुन सिंह ने भी अपने पिता स्व. वीर कुमार, शौर्य चक्र की पुण्य स्मृति में गौशाला में पानी की खेल एवं खोर के निर्माण के लिए 11 हजार रुपए का दान दिया। गोभक्त अधिवक्ता कैलाश गुप्ता ने उनका आभार जताया। इस अवसर पर गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव, सचिव यश कनीनवाल, सह-सचिव रामपाल, बलवान सिंह आर्य, ओमप्रकाश आर्य भडफ़, उपप्रधान दिलावर सिंह, रवींद्र बंसल, मास्टर रामप्रताप, पूर्व पार्षद राजेंद्र, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, होशियार सत्संगी, दुलीचंद, सतबीर गुगनवाला, राजकुमार डीलर, सूबेदार अभय सिंह, युद्धवीर सिंह,
सूबे सिंह, पार्षद नीतीश गुप्ता, पार्षद होशियार सिंह, पार्षद राजकुमार, पार्षद नरेंद्र फौजी, मनीष कुमार, बाबू प्रीतम सिंह, पं. रतन लाल शर्मा, हेडमास्टर बिजेंद्र यादव, हेडमास्टर कृष्ण प्रकाश गुरुजी, पूर्व प्राचार्य अशोक पैकन सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन 01: कनीना गोशाला को नई पिकअप भेंट करते हुए।
कनीना विधानसभा क्षेत्र पुन: बहाली की मांग को लेकर बैठकर आयोजित -26 अप्रैल को क्षेत्र के विभिन्न गांवों के प्रतिनिधि लेंगे भाग ********************************************* ********************************************** ********************************************* कनीना की आवाज। कनीना के परम संत मोलडऩाथ आश्रम पर कनीनिवासियों की एक बैठक कैप्टन भरपूर सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में कनीना के अनेक प्रमुख जनों ने भाग लिया। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई किंतु प्रमुख मुद्दा था कनीना विधानसभा का पुनर्गठन किया जाए। 2006 में जब विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन किया तब भी इस प्रकार की बैठक बुलाई गई थी किंतु परिणाम शून्य निकला। अब 20 साल बाद फिर से कनीना के लोग सक्रिय हो गए हैं और एक बैठक बुलाकर उसमें मुद्दा रखा कि एकजुट होकर कनीना विधानसभा को बहाल करवाने की मांग की जाए। साथ में यह भी मुद्दा रखा गया कि विभिन्न 14 वार्डों में प्रत्येक वार्ड से 11-11 सदस्य चुने जाए जो इसे क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सके। साथ में यह भी निर्णय लिया गया कि अगली महासभा 26 अप्रैल 2026 को बाबा मोलडऩाथ मंदिर परिसर में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में दीपक चौधरी, विनय यादव, राम प्रताप, कमल यादव, हरेंद्र शर्मा, मंगल सिंह, नवीन कनीनवाल, देवेंद्र कुमार, मुकेश नंबरदार, कृष्ण प्रकाश, जय नारायण, सूबे सिंह, सुभाष, विजेंद्र सिंह पूर्व मुख्य अध्यापक, कृष्ण सिंह प्रकाश, राजेंद्र यादव, दमन यादव, कृष्ण सिंह, नरेंद्र सिंह नवीन यादव, लक्ष्मी नारायण, राकेश, दीपक, देवेंद्र सुनील कुमार, संजीव कुमार राजेंद्र सिंह पूर्व पार्ष,द अशोक कुमार आदि भारी संख्या मौजूद रहे। 1977 तक रहा है विधानसभा क्षेत्र- कभी कनीना भी विधानसभा क्षेत्र होता था और कनीना से चुना गया प्रतिनिधि क्षेत्र का विकास करवाता था। वर्ष 1972 के चुनावों के बाद भी कनीना विधानसभा क्षेत्र था। 1977 तक प्रदेश में 81 विधानसभा क्षेत्र आते थे जिनमें कनीना भी एक था। किंतु अब जब प्रदेश में 90 विधानसभा क्षेत्र हैं कनीना को वंचित किया गया है। एक बार फिर से विधानसभा पुनर्गठन की आहट सुनाई पडऩे लगी है। वर्ष 2027 में विस का पुनर्गठन होना है। कनीना को इस बार विधानसभा का फिर से दर्जा मिलने की पूरी आश है। उल्लेखनीय कभी पंजाब सरकार में कनीना से सूबेदार ओंकार सिंह मंत्री हुआ करते थे जिन्होंने कनीना के पशु अस्पताल का निर्माण करवाया था। उस वक्त कनीना के सूबेदार ओंकार सिंह की धाक होती थी। तत्पश्चात 1962 कनीना सुरक्षित विधानसभा से बनवारीलाल जनसंघ से चुनाव लड़े और वे चुने गए। इसके बाद हरियाणा का गठन हुआ और कनीना विधानसभा से वर्ष 1967 में राव दिलीप सिंह, वर्ष 1968 के चुनावों में राव दिलीप सिंह और वर्ष 1972 के चुनावों में फिर से राव दिलीप सिंह चुने गए थे। वर्ष 1977 के चुनावों में कनीना विधानसभा क्षेत्र को तोड़कर जाटूसाना में मिला दिया गया था। इस प्रकार जिला महेंद्रगढ़ एवं सियासत रेवाड़ी जिला के तहत आती थी। वर्ष 1977 से 2008 तक कनीना जाटूसाना विधानसभा के तहत आता रहा किंतु वर्ष 2009 के चुनावों में इसे अटेली विधानसभा के तहत शामिल कर दिया गया और आज तक कनीना को उसका न्याय नहीं मिल पाया। फोटो कैप्शन 02: कनीना में आयोजित महासभा का नजारा
Saturday, March 14, 2026
कुतरूं प्राचार्य के कारनामे- 15 अलग-थलग पड़ गया कुतरूं किंतु स्वभाव नहीं बदला -इसे कहते की रस्सी जल गई परंतु बल नहीं गया ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने बतौर विज्ञान अध्यापक एवं प्राध्यापक 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया है। उन्होंने स्कूल, कालेज निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि दौरान करीब 35 विभिन्न स्कूल प्राचार्यों के साथ काम किया और उनमें से चंद कुतरूं प्राचार्य निकले। जिनका नाम लेते ही तन मन में दर्द होता है। जिनकी भावना हीन रही है। किसी के काम को रोकने आए हैं। सच का साथ नहीं दिया और उन्होंने सदा ही अच्छे और स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों का विरोध किया। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य के कारनामे सामने आये हैं। आज एक कारनामा यहां उजागर किया जा रहा है। शिक्षा विभाग में देखने में आया है कि कुछ-कुतरूं प्राचार्य भर्ती हो गए हैं जिनका शिक्षकों कोई लेना देना या नाता रिश्ता नहीं होता। एक कुतरूं प्राचार्य ने तो सेवानिवृत्त हो रहे शिक्षक को स्कूल कार्यालय से भी पगड़ी नहीं पहने दी, गेट पर ही पगड़ी पहनने की बात कही। स्कूल के अंदर से उसे बाहर ले आया और गेट के बाहर पगड़ी पहनने दी गई। एक कुतरूं प्राचार्य तो शिक्षक के सेवानिवृत्ति के समय छुट्टी लकर भाग गया। ऐसे कुतरूं प्राचार्य को जीने का अधिकार नहीं। क्या वह समाज में मुंह दिखाएंगे। वो भूल गया कि सास भी कभी बहु होती है। ऐसे कुतरूं प्राचार्य भयंकर बीमारियों की चपेट में आकर एक दिन मरेंगे। उनमें कैंसर, मिर्गी, तपेदिक, हृदय घात ऐसे रोग हो जाते हैं। और इनको अपनी माफी मांगने का समय भी नहीं मिलेगा। दुर्भाग्य सुने कि एक कुतरूं प्राचार्य जब आया तो लोगों ने समझा बेहतर होगा और उसकी बहुत सेवा की। कभी कोई गाड़ी में उसे बिठाकर लाता, कभी कोई उसकी सेवा भाव करता, कभी पास बैठकर उससे अच्छी-अच्छी बातें करता किंतु उस कुतरूं ने तो हर किसी शिक्षक में कमियां नजर आई। धीरे-धीरे सभी स्टाफ सदस्य दूर होते चले गए और कुतरूं अकेला अलग-थलग पड़ गया। हालत यह बन गए कुतरूं को अब कोई नहीं चाहता। यह ठीक है सामने से नमस्ते करते लेकिन पीछे से उसकी जमकर बुराई करते। कुतरूं भी हर बात को भांप रहा था किंतु उसकी बुद्धि भगवान ने हर ली परिणाम यह कि किसी को कुछ समझता नहीं। इसलिए कहावत है कि कभी भी रस्सी जल जाती है किंतु परिणाम यह होता है कि उनकी मौत कुत्ते के समान हो जाती है। एक संत की बात है सुन रहा था और वह कह रहा था कि इंसान कई बार इतनी गलतियां कर बैठता है कि जब मरणासन्न होता है तब उसे अपनी गलतियां महसूस होती है। सारे जीवन की गलतियां दृश्य बनकर उसकी आंखों के सामने उभरती है। यह सत्य है कि मरने से पहले स्मृति साफ हो जाती है,मरने से कुछ समय पूर्व वह अवस्था आती है जब अपनी गलतियों को सामने देखता है, जो उसे चिड़ाती हैं लेकिन गलतियों के लिए वह क्षमा नहीं मांग सकता। उसे इतना दर्द होता है कि तुरंत ही मौत के मुंह में चला जाता है। ऐसे में वो गलतियां न करें जिससे जीवन भर पछताना पड़े, मरते समय पछताना पड़े। गलती हो जाए तो अपनी माफी मांग लेने में ही भलाई होती है। जीवन बहुत छोटा है। पाप करके पछताना होता है। मरने के बाद भी बुराई पीछा करती हैं। एक कहानी जो सत्य पर आधारित है जो इस कुतरूं प्राचार्य पर सटीक बैठती है। एक स्कूल में बच्चों के लिए दूध की जरूरत थी। स्कूल के प्राचार्य ने एक दुधिया से कहा कि हमें प्रतिदिन 100 लीटर दूध की जरूरत है। आप प्रदान कर दोगे क्या? दुधिया ने कहा कि कल तक बताता हूं। दुधिया एक अपने परिचित के पास गया और कहा कि मुझे चार बेहतरीन भैंस दिलवा दो ताकि मैं स्कूल में दूध का प्रबंध कर सकूं, बेच सकूं। उसका साथी नकली दूध बनाने में माहिर था। उसने कहा कि तुम्हें दूध की जरूरत है तो भैंसें बांधने की क्या जरूरत है। तुम्हें मैं ऐसा तरीका बताता हूं कि जब चाहे एक सौ लीटर दूध चंद मिनटों में बना लोगे। दुधिया ने कहा- यह तो और भी अच्छी बात है क्योंकि दुधिया भविष्य का अंजाम को नहीं जानता था। फिर क्या था नकली दूध बनाने की विधि दुधिया से बता दी और दुधिया फिर तो दौड़कर स्कूल के प्राचार्य के पास पहुंचा और कहा कि मैं प्रतिदिन 100 लीटर दूध दूंगा। और प्रतिदिन 100 लीटर नकली दूध बना कर देना शुरू कर दिया। परिणाम यह निकला गरीब तबके के बच्चे यह दूध पी पीकर बीमार पडऩे लगे, बददुआएं निकलने लगी, कितनी ही दवाई लेनी पड़ी, औषधीया लेनी पड़ी, कितने ही शिक्षकों को परेशानी झेलनी पड़ी, उनकी सेहत के साथ जमकर खिलवाड़ हुआ। कहते हैं कि भगवान भी हर चीज देखता है। उसके दरबार में देर हो सकती है अंधेर नहीं। बहुत पैसे कमा लिए दुधिया ने, धन दौलत इतनी कमा ली की खूब कार,कोठी खरीद लिये। ऐश आराम करने लगा किंतु बददुआएं पीछा करने लगी। अचानक कैंसर का रोग हो गया। कैंसर होने के बाद धीरे-धीरे बेड पर चला गया। परिवार वाले भी उससे नफरत करने लगे । एक दिन उस दुधिया की स्मृति साफ हुई। उसने अपने बेटे से कहा कि थोड़ा पानी दे दो। उसके बेटे ने उत्तर दिया कि मैं थोड़ा काम में लग रहा हूं, पानी कुछ देर बाद दूंगा। दोबारा उसने पत्नी से पानी मांगा। वह भी कहने लगी मैं पहुंचाती हूं और बार-बार सभी परिवार के सदस्यों से पानी मांगा, समय पर पानी नहीं मिला। तब लड़का पानी लेकर आया फिर क्या था वह दुधिया बेड पर पड़ा हुआ चिल्लाया कि आज इस परिवार के लिए मैंने कितने बुरे काम किये, कितने ही बच्चों को नकली दूध पिलाया, कितने ही लोगों का अहित किया, आज परिणाम मेरे सामने है। मैं कैंसर से धीरे-धीरे मर रहा हूं। जितने पैसे कमाए थे उनसे कहीं अधिक मेरे पर खर्च हो गए और खर्च जाएंगे। मेरे से बहुत बड़ी भूल हो गई कि बच्चों का अहित किया। अब हालात यह है कि उनसे माफी मांगना चाहूं तो कैसे मांगू क्योंकि वो आज यहां नहीं है, न जाने कितने बच्चे कहां चले गए? किन-किन से माफी मांगी जाए, किन शिक्षकों से माफी मांगी जाए और वह बुरी तरह से सड़ता सड़ता एक दिन स्वर्ग सिधार गया किंतु मरने से पहले उसने परिवार को एक ही बात कही कि बुरा करने से अंत बहुत बुरा होता है। परंतु कुछ कुतरूं प्राचार्य इन बातों को नहीं समझते, कितने लोगों का अहित कर रहे हैं और जब उनका अंत होगा बहुत बुरा होगा। तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
हकीकत बचकर रहो बात बात पर घूंसे मारने वालों से ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। यूं तो बातें किसी से करते हैं तो बड़े अदब से करनी चाहिए। सुनने वाले को भी उसकी बातों पर गौर करना चाहिए। जहां बात सुनाने वाला धीरे-धीरे अपनी बातों को समझाएं लेकिन हमारे समाज में अनेक प्रकार के लोग हैं। 100 में से एक दो ऐसे व्यक्ति की भी होते हैं जो बातें बताते बताते घूंसे मारता रहता है। कभी हाथ पकड़ता है कभी-कभी हाथ को हिलाता है, सुनाने वाले को इतना तंग करके रख देता है कि वह ऐसे व्यक्ति से घृणा करने लग जाता है। बात करने वाले और सुनने वाले के बीच दूरी हो। वो सुनने वाले को बाध्य न करें। घूंसे मारते हुए बात करना कोई ढंग नहीं अपितु यह शर्म की बात है। ऐसे लोगों से सावधान रहिए क्योंकि ये घूंसे मार लोग, दिमाग से धीरे-धीरे जीरो होते चले जाते हैं क्योंकि वो ये समझते है कि सामने वाला तेरी बात को नहीं सुन रहा। अगर वह नहीं सुन रहा तो तुम सुनाना क्यों चाहते हो? बड़ा आश्चर्य होता है इस प्रकार के लोग समाज में जी रहे हैं। शनिवार को खुद होशियार सिंह लेखक एक ऐसे व्यक्ति से मिला जो बात बात पर घूंसे मारने लगा। होशियार सिंह पीछे हटता जाता और वो आगे बढ़कर बात समझाने के लिए घूंये मारने का प्रयास करता। ऐसे करते-करते करीब आधे घंटे की बातों में आधा किलोमीटर दूर सड़क पर सरकते चले गए और वह भी घूंसे मारने की कोशिश में रहा। आखिर उससे कहना ही पड़ा कि देख हम कहां खड़े थे और हम कहां आ गए? उन्होंने पूछा कई ऐसा क्यों? होशियार सिंह ने बताया तेरे घूंसों से बचने के लिए तेरी बातें सुनते सुनते पीछे हटता चला गया। देख भाई,तेरे घूंसे खाने के लिए नहीं आए। वह मायूस हो गया और कहने लगा तुम कैसे दोस्त हो? होशियार सिंह ने दूर से हाथ जोड़कर उसे सलाम किया कहा कि कोई बात नहीं भाई तुम्हें अपनी बातें समझानी हो तो आइंदा मेरे पास न आना, आए तो आदतन घूंसे मारने , बार बार हाथ पकड़ कर हिलाने, कभी पीठ, कभी छाती को नू छूना। घूंसे मारने से मैं तुम्हारी बातें अधिक नहीं सुन पाया। आइंदा तुम ध्यान दे ऐसी गलती नहीं करना। बातें सुनाने वाला भी मूसल ही निकाला, जिस पर शायद कोई असर नहीं हुआ और वह चलता बना। ऐसे लोगों से सावधान रहिए?
डाक्टर बनते जा रहे हैं डाकू -इंसान को बचाते कम है धन ऐंठकर परिवार को करते हैं खोखला -जान नहीं बचा पाए तो डाक्टरों को पैसे लेने का नहीं हो हक ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। अब तो बड़े-बड़े अस्पतालों के डाक्टर डाकू बनते जा रहे। निश्चित रूप से डाकू इसलिए कहा जा सकता है कि डाकू जिस प्रकार इंसान को मारकर उससे पैसे छीन ले जाता है वैसे ही अब डाक्टरों का पेशा बनता जा रहा है। अपने पेेशे में कम ध्यान देने लगे हैं और पैसे कमाने में अधिक लगे हुए हैं। गरीब तबके के लोग अगर बड़े अस्पताल में चल जाए तो व्यक्ति की जान बचानी मुश्किल हो जाती है। वही वह गरीब अपने परिवार की सारी प्रापर्टी बेचने को मजबूर हो जाता है क्योंकि भारी भरकम बिल निजी अस्पतालों का होता है। कुछ ऐसे मामले भी अखबारों में आए कि मरे हुए व्यक्ति को कई कई दिनों तक वेंटिलेटर पर आईसीयू में रखते हैं और प्रतिदिन लाखों रुपए के हिसाब से ऐंठ लेते हैं, वसूल लेते हैं। इससे ऐसा लगता है कि अब तो डाक्टर अपने पेशे को भूलकर मरीजों को मारने पर तुले हुए हैं। भारी कमीशन, दवाओं में कमीशन, निश्चित दुकानों से दवा खरीदने को बाध्य करना, न जाने क्या-क्या हथकंडे अपना रहे हैं। कभी डाक्टर को दूसरा भगवान मानते थे किंतु अब धीरे-धीरे डाक्टरों के व्यवहार और कामों से ऐसा लगता है यह डाकू कहलाएंगे। आज भी बहुत से कुछ दरियादिल डाक्टर मिल जाएंगे जो मरीज की दिन रात सेवा करके जान बचा देते हैं लेकिन अधिक डाक्टर ऐसे हो गए जो खून चूसने पर आमादा होते हैं । व्यक्ति भी चला जाता है उसको भी नहीं बचा पाए और धन इतना ऐंठ लेते हैं कि परिवार भी सालों तक नहीं उभर पाता। सरकार को चाहिए, समाज को चाहिए ऐसे डाक्टर जो किसी मरीज को नहीं बचा पाए तो उनसे पैसे लेने का अधिकार भी नहीं दिया जाना चाहिए। एक बार समाज को जागरूक होना पड़ेगा। इस प्रकार के डाकुओं से समाज को बचाना होगा वरना आए दिन मरीजों की जान को खतरा होता चला जाएगा और परिवार का सब कुछ तबाह कर दिया जाता है। सरकार को भी चाहिए ऐसे डाक्टर पर केस चलाएं, ऐसे परिवार से फीस न लेने का कानून बनाना चाहिए जहां जान चली जाती है। जिस परिवार का आदमी भी मर जाता है तो उनसे किसी प्रकार का अस्पताल पैसे न वसूले तब जाकर रामराज का सपना आ सकता है। यही नहीं सरकार को चाहिए सरकारी अस्पताल में वो सुविधाएं जुटाई जाए ताकि अमीर से अमीर भी प्राइवेट अस्पतालों की और न दौड़े तब असली राम राज आ जाएगा। आए दिन रोग बढ़ गये हैं। भविष्य में रोग बढ़ेंगे ऐसे में सरकारी अस्पतालों पर जी जान एक करने की सरकार की जरूरत है।
कनीना से झज्जर बस को मिली हरी झंडी -क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। झज्जर डिपो द्वारा झज्जर से महेन्द्रगढ़ (वाया बहुझोलरी-कनीना) नई बस सेवा शुरू करने पर सभी क्षेत्रवासियों ने प्रशासन का आभार जताया। पिछले काफी दिनों से क्षेत्र वासियों की मांग थी कि कनीना से सीधी झज्जर की बस सुविधा हो । मौजूदा सरकार ने जनता के लिए यह सुविधा भी शनिवार से लागू कर दी। झज्जर डिपो की बस झज्जर से महेंद्रगढ़ तक जाएगी ।जो एक जिला को दूसरे जिला को जोडऩे का कार्य करेगी। यह बस झज्जर से सुबह 9:38 बजे चलकर बहुझोलरी से 11 बजे होते हुए बाहला, बव्वा, कारोली, कारोली मोड़ और कनीना के रास्ते महेन्द्रगढ़ शाम 1:15 बजे पहुंचेगी। वापसी में महेन्द्रगढ़ से शाम 1:41 बजे चलकर कनीना 2:15 बजे होते हुए कारोली मोड़, कारोली, बव्वा, बहुझोलरी के रास्ते झज्जर पहुंचेगी। इस बस सेवा के शुरू होने से क्षेत्र के लोगों, विद्यार्थियों और यात्रियों को बहुत सुविधा होगी। इस महत्वपूर्ण सुविधा के लिए सभी ग्रामवासियंो ने परिवहन मंत्री अनिल विज, कोसली विधायक अनिल यादव,हरियाणा रोडवेज झज्जर डिपो के महाप्रबंधक संजीव तियाल का आभार और धन्यवाद व्यक्त किया। इस मौके पर कनीना बस स्टैंड इंचार्ज निरंजन, पंकज और प्रदीप कुमार मौजूद थे । फोटो कैप्शन 09: झज्जर के लिए बस लगाई
लोक अदालत में 45903 केसों का किया फैसला ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जारी दिशा निर्देशानुसार जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेंद्र सूरा के मार्गदर्शन व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नीलम कुमारी की देखरेख में आज न्यायिक परिसर नारनौल, महेन्द्रगढ़ व कनीना में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया। इस लोक अदालत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मैडम हर्षाली चौधरी एवं मैडम वर्षा जैन, सिविल जज जूनियर डिवीजन मैडम कोपल चौधरी व राकेश कुमार नारनौल में, अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रवीण कुमार कनीना में तथा महेन्द्रगढ़ में सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रदीप कुमार न्यायधीशों की बैचों द्वारा फैसले किए गए। सीजेएम नीलम कुमारी ने बताया कि इस लोक अदालत में वाहन दुर्घटना मुआवजा केस वैवाहिक मामले, वाहन चालान संबंधित मामले, जमीन अधिग्रहण मुआवजा से संबंधित मामले, दीवानी मामले जैसे की किराया बैंक ऋण, बच्चों व पत्नी के लिए भरण-पोषण, बैंक बाउस, साईबर क्राइम व राजीनामा योग्य फौजदारी मामलों को रखा गया। उन्होंने बताया कि इस लोक अदालत में कुल 51820 केस निपटारे के लिए रखे गए जिनमें से 45903 केसों का फैसला किया गया। इस लोक अदालत में 42 मोटर वाहन दुर्घटना केसों का निपटारा किया जिसमें कुल 2 करोड़ 31 लाख 95 हजार रुपए का मुआवजा दिया गया। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नारनौल द्वारा एक हेल्पलाइन नंबर 01282-250322 चलाया हुआ है जिस पर भी आमजन किसी भी प्रकार की कानूनी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 पर भी फोन कर कानूनी सहायता ले सकते हैं। फोटो कैप्शन 10: लोक अदालत में केसों का निपटारा करते न्यायाधीश।
उन्हाणी सर्कल में सर्वोत्तम माता पुरस्कार प्रतियोगिता आयोजित -नांगल गांव की ज्योति देवी रही पहले स्थान पर ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। महिला एवं बाल विकास परियोजना कनीना के तत्वावधान में सर्कल उन्हाणी में सर्कल स्तरीय सर्वोत्तम माता पुरस्कार प्रतियोगिता का आयोजन सर्किल सुपरवाइजर मनीष यादव द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सर्कल के अंतर्गत आने वाले विभिन्न गांवों की माताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें मोहनपुर, नांगल, कोका, इसराना, चेलावास, उन्हाणी, गाहड़ा, रसूलपुर और गुढ़ा सहित अन्य गांवों की महिलाएं शामिल रहीं। कार्यक्रम के दौरान एमपीएचडब्ल्यू संदीप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुढ़ा, एएनएम राजेश देवी तथा कृषि विभाग की अधिकारी मनीषा यादव ने माताओं से उनके तथा उनके बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और टीकाकरण से संबंधित प्रश्न पूछे और उन्हें महत्वपूर्ण जानकारी दी। प्रश्नोत्तरी के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन करते हुए प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान निर्धारित किया गया। सर्कल सुपरवाइजर मनीषा यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और विभिन्न गांवों से आई प्रतियोगी महिलाओं का स्वागत करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस प्रकार की प्रतियोगिता प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाती है। प्रतियोगिता में स्थान प्राप्त करने वाली महिलाओं के खातों में विभाग की ओर से निर्धारित प्रोत्साहन राशि भी स्थानांतरित की जाती है। प्रतियोगिता में नांगल गांव की ज्योति देवी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि उन्हाणी की पूनम द्वितीय स्थान पर रहीं और मोहनपुर की पूजा ने तृतीय स्थान हासिल किया। इस अवसर पर मनीषा यादव ने प्राकृतिक खेती और आर्गेनिक सब्जियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रत्येक आंगनवाड़ी में बाल वाटिका के माध्यम से आर्गेनिक तरीके से सब्जियां उगाने की जानकारी दी जा रही है। साथ ही महिलाओं को अपने घरों में भी प्राकृतिक तरीके से सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि परिवार स्वस्थ रह सके। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ माता ही एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है। कार्यक्रम में सर्कल की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कार्यक्रम के अंत में कन्या भू्रण हत्या व बाल विवाह ना करने की शपथ दिलवाई। फोटो कैप्शन 02: कार्यक्रम में प्रथम स्थान पर आने वाली माता ज्योति को सम्मानित करते हुए।
पुलिस ने पकड़ी 17 ग्राम स्मैक - एक व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर्ज ।************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। पुलिस को सूचना मिली कि नांगल का एक व्यक्ति संदीप मादक पदार्थ बेचने का धंधा करता है। कनीना पुलिस ने रैडिंग पार्टी तैयार की और सुंदरलाल नांगल को गवाह बनाया। पुलिस ने नांगल की तरफ नाकाबंदी की कुछ देर बाद एक गाड़ी अटेली से आती दिखाई दी। पुलिस ने चालक को रुकने का इशारा किया किंतु चालक ने गाड़ी को भगाने का प्रयास किया किंतु थोड़ी दूर जाकर रुक गई। नाम पूछने पर उन्होंने संदीप नांगल बताया। तत्पश्चात पुलिस ने अपना परिचय दिया 50 एमडीपीएस एक्ट का नोटिस दिया गया और बताया कि तुम्हारे पास में स्मैक होने की सूचना मिली है। साथ में डीएसपी नारनौल सुरेश कुमार को राजपत्रित अधिकारी बतौर बुलाया गया जिन्होंने गाड़ी और व्यक्ति की तलाशी ली जिसकी वीडियोग्राफी तैयार की गई। जब संदीप की तलाशी ली गई तो उन्होंने पहनी हुई जींस पेट में पेंट में छोटी थैली मिली। सूंघने पर नशीला पदार्थ स्मैक पाया गया। कंप्यूटर पर वजन किया 17 17 ग्राम पाया गया। पुलिस ने व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया साथ में पुलिस ने संदीप की जेब से 1350 रुपए तथा वीवो का एक मोबाइल भी बरामद किया।
चरित्र और निर्णय तय करते हैं जीवन की दिशा- सीजेआई सूर्य कांत - हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह आयोजित, 50 को मिले पदक व 1462 को मिली डिग्रियां ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के प्रांगण में शनिवार को भव्य 12वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। वहीं पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू व आईआईटी रोपड़ के निदेशक डा. राजीव आहूजा समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। इनके साथ साथ न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ, न्यायमूर्ति एनएस शेखावत, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल चंद्र शेखर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नारनौल नरेंद्र सूरा, उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार व पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ सहित जिला प्रशासन व विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी दीक्षांत समारोह में उपस्थित रहे। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिग्री केवल उस ज्ञान की पुष्टि करती है जो वर्षों की मेहनत से अर्जित किया गया है, लेकिन किसी भी व्यक्ति के जीवन की असली दिशा और दशा उसके चरित्र और निर्णय लेने की क्षमता तय करती है। उन्होंने कहा कि जब औपचारिक शिक्षा का ढांचा व्यक्ति के आसपास नहीं रहता, तब वही चरित्र और विवेक उसके मार्गदर्शक बनते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को अपने ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और सही निर्णय लेने की क्षमता को भी विकसित करना चाहिए। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति के लिए नए अवसरों के द्वार खोलती है। इससे उसकी क्षमताओं का विस्तार होता है, उसकी कमाई की संभावनाएं बढ़ती हैं और जीवन में आगे बढऩे के कई रास्ते उपलब्ध होते हैं। लेकिन इसके साथ ही यह भी समझना जरूरी है कि उच्च शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता का साधन नहीं है, बल्कि इसके साथ समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की इमारतों का निर्माण, प्रयोगशालाओं का संचालन और शिक्षकों का वेतन उन संसाधनों से संभव होता है जो जनता के कर से जुटाए जाते हैं। देश के लाखों ऐसे नागरिक हैं जो स्वयं विश्वविद्यालय तक नहीं पहुंच पाते, लेकिन उनके द्वारा दिए गए कर से ही उच्च शिक्षा की व्यवस्था संचालित होती है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि शिक्षित युवा समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझें और सार्वजनिक संस्थाओं जैसे न्यायपालिका, सिविल सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन को मजबूत बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ। यही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है। न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने हरियाणा के लोकप्रिय खेल कबड्डी का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को जीवन का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कबड्डी में एक रेडर एक ही सांस में विरोधी पाले में प्रवेश करता है और लगातार कबड्डी-कबड्डी का उच्चारण करता रहता है। यह केवल खेल का नियम नहीं, बल्कि अनुशासन और आत्मनियंत्रण का प्रतीक भी है। इसका अर्थ यह है कि व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकता है, लेकिन उसे हमेशा यह समझ बनाए रखनी चाहिए कि उसकी सीमाएं क्या हैं और कब उसे वापस लौटना है। उन्होंने कहा कि महान रेडर वही होते हैं जो बिना अति महत्वाकांक्षा के सही समय पर निर्णय लेते हैं और सुरक्षित लौट आते हैं। वहीं डिफेंडर भी तभी सफल होते हैं जब वे एकजुट होकर टीम के रूप में काम करते हैं। इसी प्रकार जीवन में भी व्यक्ति को बड़े सपने देखने चाहिए, लेकिन साथ ही विनम्रता, अनुशासन और सामूहिकता की भावना को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सफलता के साथ-साथ समाज और संस्थाओं को मजबूत बनाने का संकल्प भी लें, क्योंकि यही किसी भी शिक्षा की वास्तविक कसौटी है। इस अवसर पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रोफेसर राजीव आहूजा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, जिसे विद्यार्थी जीवन भर याद रखते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी हमेशा अपने संस्थान को याद रखें और एक जिम्मेदार पूर्व छात्र (एलुमनाई) के रूप में संस्थान से जुड़े रहें। उन्होंने बताया कि आईआईटी जैसे संस्थानों की सफलता में उनके एलुमनाई का महत्वपूर्ण योगदान होता है। प्रो. आहूजा ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग सही दिशा में करें, शॉर्टकट से बचें और ईमानदारी को हमेशा बनाए रखें। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के जीवन को मेहनत और ईमानदारी का प्रेरक उदाहरण बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी नई तकनीकों को अपनाकर कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार करें और देश के विकास में योगदान दें। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि स्टार्ट-अप शुरू करके रोजगार देने वाले बनना चाहिए। उन्होंने शोध और नवाचार को देश के विकास की कुंजी बताते हुए कहा कि भारत को एक शोध-प्रधान राष्ट्र बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरु-शिष्य परंपरा, माता-पिता और संस्थान के प्रति सम्मान बनाए रखने का आह्वान किया। दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की रिपोर्ट एवं विद्यार्थियों को अपना आशीर्वाद देते हुए कुलपति प्रोफेसर टंकेशवर कुमार ने कहा कि कुलपति ने कहा कि आज हम सभी के लिए यह गौरव की बात है कि देश के करोड़ों युवाओं की प्रेरणा एवं मार्गदर्शक, भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत जी हमारे बीच में हैं वे देश के उस मध्यम वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने कड़े संघर्ष व मेहनत से जीवन में एक बड़ा मुकाम व कीर्तिमान हासिल किया है। वे देश की युवा शक्ति के लिए एक प्रेरणा हैं। कुलपति ने कहा कि 21वीं सदी में हम विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। विकसित देशों की श्रेणी में जाने का रास्ता हमारे महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से होकर ही जाता है। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की और से निरंतर नए प्रयास किए जा रहे हैं। कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय एवं अतंरराष्ट्रीय मंचो पर हमारी रैंकिंग में जबरदस्त सुधार हुआ है। हमें वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में राष्ट्रीय स्तर पर 44 वां स्थान हासिल हुआ है व हरियाणा प्रदेश के विश्वविद्यालयों में हमारी रैंकिंग प्रथम स्थान पर रही है। वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैकिंग में फिजिकल साइंस, लाइफ साइंस व इंजीनियरिंग पाठयक्रम में हमारी रैकिंग अच्छी रही है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों के 3000 से अधिक शोध पत्र स्कोपस एवं वेब ऑफ साइंस डेटा बेस पर प्रकाशित किए हैं व हमारा एच इंडेक्स 82 है। वर्ष 2025 में ही अकेले हमारे शिक्षकों ने 622 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं जो एक रिकार्ड है। विश्वविद्यालय सभी विभागों, पाठयक्रमों व संकायों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में सफल रहा है। वर्तमान में हमारे सभी पाठयक्रम एनईपी आधारित हैं। हमने अपने पाठयक्रमों में अंतरविषयक पाठयक्रमए एसडीजी मेपिंग, वेल्यू एडिड, भारतीय ज्ञान परंपरा, स्किल व वोकेशनल एजुकेशन , मल्टीपल एंट्री एवं एक्जिट की शुरूआत की है। एनईपी के तहत नेशनल क्रेडिट फ्रेमवक मूक कोर्सिज को लाूग किया है। आज हमारे सभी पाठयक्रम वैश्विक मानको के अनुरूप हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप टीचिंग की गुणवता को सुधारने के लिए ही विभिन्न विभागों में प्रोफेसर ऑफ प्रेक्टिस को नियुक्त किया गया है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के 8 संकाय, 35 विभागों में 90 से अधिक पाठयक्रमों में 5000 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हमने विश्वविद्यालय में अगले अकादमिक सत्र से कुछ नए विभाग व पाठयक्रम शुरू करने की योजना बनाई है। मुझे आशा है कि अगले पांच वर्ष में 10 हजार से अधिक विद्यार्थी इस विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे होंगे। उन्होंने से विद्यार्थियों से अपने जीवन में विकसित भारत का संकल्प लेने का आहवान किया। कुलपति ने विद्यार्थियों से आहवान किया कि सभी हर समय कुछ नया सीखते रहें। बदलती दुनिया के साथ हम कदमताल तभी कर पाएंगे जब हमेशा विद्यार्थी बन कर कर लाइफ लांग लर्नर बनें रहेंगे। इस मौके पर मैडल व डिग्री प्राप्त करने वाले सभी छात्र छात्राओं को बधाई दी। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. सुनील कुमार ने सभी का धन्यवाद करते हुए दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए आभार जताया। कार्यक्रम का सफल संचालन विश्वविद्यालय की छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. रेनु यादव व उप छात्र कल्याण अधिष्ठाता डा. नीरज कर्ण सिंह ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के सम कुलपति प्रोफेसर पवन शर्मा, एडीसी तरुण पावरिया सहित सभी डीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष, शिक्षक एवं जिला प्रशासन के सभी अधिकारी मौजूद थे। फोटो कैप्शन 04 से 08: संबंधित हैं
हिंदु नव वर्ष तैयारियां जारी, मनाया जाएगा -19 मार्च से ही हैं नवरात्रि पर्व ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। नवरात्रे एवं हिन्दू नव वर्ष 2083 के प्रारंभ होने जा रहा है। मंदिरों में तैयारियां चल रही हैं। कनीना के महेश कुमार बोहरा, श्याम सुंदर महाशय, देशराज, सुरेंद्र सिंह , मोहन पार्षद आदि ने लोगों से अपील की कि धूमधाम से नव वर्ष मनाए। 19 मार्च को क्षेत्र में नवरात्रों का आगाज हो रहा है। इस मौके पर व्रत रखाने एवं पुराने अन्न को नौ दिनों तक शरीर से समाप्त करके नए अन्न को ग्रहण करने का नियम है। मौसम के बदलाव से नया अन्न तुरंत शरीर में ग्रहण नहीं करना चाहिए। यही कारण है कि इस दिन व्रत किया जाता है। मां दुर्गा के नौ दिनों में नौ रूपों की पूजा की जाती है। राम नवमी के दिन नवरात्रों को समाप्त कर दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि बच्चे-बच्चे की जुबान पर अंग्रेजी वर्ष है किंतु हिंदुओं के सबसे प्राचीन वर्ष का ज्ञान नहीं है। विक्रम संवत या गुड़ी पाड़वा आदि नामों से जाना जाता है। इस दिन घरों में पकवान बनाए जाते हैं और नए वर्ष का आगाज किया जाता है। इसे ग्रामीण क्षेत्रों में सम्मत नाम से जाना जाता है। महाराजा विक्रमादित्य द्वारा चलाया गया विक्रमी संवत आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रासंगिक है। इसी दिन महाराजा विक्रमादित्य ने हूणों पर विजय प्राप्त करके अक्सास नदी में घोड़ों को जल पिलाया था। तभी से आज तक यह पर्व चला आ रहा है। क्या है नव संवत- 19 मार्च को पूरे ही देश में सम्राट विक्रमादित्य द्वारा चलाया हुआ नव संवत्सर का पर्व मनाया जा रहा है। विश्व का सबसे पुराना संवत नव संवत्सर जिसे वर्ष प्रतिपदा, उगादि पर्व तथा गुड़ी पाड़वा नामों से जाना जाता है। माना जाता है है कि ब्रह्मïाजी ने इसी दिन सृष्टिï की रचना की थी जिसके चलते इस दिन दिन बह्मा की भी पूजा की जाती है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा चलाया हुआ नवसंवत्सर 19 मार्च से 2083 शुरू हो रहा है। विक्रमादित्य ने अपने बल पर शकों का नामोनिशान मिटा अश्वों को आक्सस नदी का पानी पिलाया था। अपनी जीत की खुशी में विक्रमी संवत का श्रीगणेश किया था। इसी दिन को हिन्दू अपना नववर्ष मानते हैं। विक्रमादित्य ने अपने पिता गंधर्वसेन की मृत्यु का बदला लिया था। संयोजन महेश बोहरा हिंदु जागरण मंच ने बताया कि नव वर्ष बस स्टैंड पर धूमधाम से मराया जाएगा जिसकी तैयारियां जारी हैं। इस दिन जगह जगह हवन आयोजित होगा वहीं कनीना के संत मोलडऩाथ आश्रम में भी इस दिन हवन होगा। फोटो कैप्शन: महेश बोहरा
कनीनावासी नहीं भूल पाएंगे करतार साहब को - 5 मार्च को हो चुका है देहांत ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। 18 सितंबर 1936 में जन्मे करीब 90 वर्षीय सूबेदार करतार साहब को कनीनावासी नहीं भुला पाएंगे जिनका 5 मार्च 2026 को निधन हो चुका है। उनकी पत्नी कमल यादव 2009 में स्वर्ग सिधार गई थी। अपने समय के नेशनल वालीबाल खिलाड़ी रहे थे। आज तक उनकी खेलों की प्रतिभा को कोई नहीं भुला पा रहा है। उनकी एकमात्र पुत्री मीना यादव स्कूल प्राध्यापिका रह चुकी है। वे कुछ समय से बेड पर ही थे परंतु उनका रोबिला चेहरा आज तक लोगों के जहन में अंकित है। वे अति सामाजिक रहे। वर्षों तक देश सेवा करके सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त होकर कनीना आए थे और कनीना में ही रह रहे थे। फोटो कैप्शन: करतार सिंह साहब
विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस -15 मार्च अपने अधिकारों के प्रति बहुत कम लोग जागरूक है-सुरेश कुमार ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। आज के दिन चाहे विज्ञान ने तरक्की की है किंतु प्रतिदिन इंसान को विभिन्न सामान, खाद्य सामग्री एवं अन्य उपयोगी सामान खरीद कर लाना पड़ता है। परंतु सभी उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है। उन्हें कौन-कौन से अधिकार मिले हैं अगर उनसे पूछा जाए तो वह कुछ भी कहने में असमर्थ है। यहां तक की बाजार से सामान तो खरीद लाते हैं उन्हें कुछ दुकानदार बिल तक नहीं देते, बिल देने में आना कानी करते हैं जिसके चलते वे बिल नहीं ले पाते परिणाम यह निकलता है कि जब उन्हें बिल की आवश्यकता बिल की होती है मारे मारे फिरते हैं। इस संबंध में कुछ उपभोक्ताओं से बात की गई। विशेष कर सुरेश कुमार वरिष्ठ प्राध्यापक से बात की गई जिनके विचार इस प्रकार हैं- *** उपभोक्ता प्रतिदिन का सामान खरीद कर लाने पर भी उन्हें यह मालूम नहीं कि उन्हें कौन-कौन से अधिकार मिले हुए हैं। बाजार से सामान खरीद कर लाते हैं किंतु दुकानदार उन्हें बिल तक नहीं देते, बिल मांगते हैं तो बिल देने में आनाकानी करते हैं यहां तक कि दुकानदार जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावटी चीजों का वितरण, मूल्य से ज्यादा दाम वसूलते हैं। तब भी उपभोक्ता कुछ नहीं कर पाते। उपभोक्ता मन मारकर रह जाते हैं यहां तक कि उन पर कई प्रकार के दाब दिये जाते है। इसके कारण भी अपना मुंह तक भी नहीं खोल पाते। इसके कारण उपभोक्ताओं के साथ अन्याय होता रहता है। उपभोक्ताओं को बिना मानक चीजें बेची जाती है, नापतोल में में गड़बड़ की जाती है। गारंटी की सर्विस देने पर भी उपभोक्ता को कुछ भी प्राप्त नहीं होता। उपभोक्ता बेचारे मायूस बनकर खड़े रहते हैं। उपभोक्ता न्यायालय की स्थापना की गई है किंतु उनको यह नहीं पता होता कि न्यायालय में जाकर भी वे अपने अधिकार मांग सकते हैं। उपभोक्ताओं के साथ जालसाजी की जाती है फिर भी मन मसोसकर कर रहे जाते हैं। ऐसे में उनका जागृत करने का उद्देश्य ही उपभोक्ता जागरूकता दिवस का नियम है। इस संबंध में यदि लोगों को जागरूक किया जाए तो हो सकता है भविष्य में अपनी भूमिका अच्छी प्रकार निभा सकते हैं। महिला भी दैनिक जीवन की कई वस्तुएं खरीदने में पीछे नहीं होती परंतु उनको अपने अधिकारों का कोई ज्ञान नहीं होता वह सामान खरीदने जाती है और भोली भाली महिला विशेष रूप से ठगी का शिकार हो जाती है। आए दिन ठगी होती रहती है किंतु उनका किसी प्रकार का ज्ञान न होना सबसे बड़ी समस्या है। भारत में उपभोक्ताओं के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2020 में बना हुआ है जिसमें अनेकों हित की बातें ग्राहकों के लिए रखी गई है। यदि ग्राहक पूर्ण रूप से जागरूक किया जाए, सरकार उपभोक्ताओं को जागरूक करें तो हो सकता है भविष्य में सुधार की गुंजाइश मिलेगी। फोटो कैप्शन: सुरेश कुमार वरिष्ठ प्राध्यापक
भाजपा नेता रख रहा है लोगों की सेहत का ध्यान, पिला रहा है गन्ने का जूस - रोटी रोजी कमाने में कोई शर्म नहीं -अशोक वर्मा ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। कनीना निवासी अशोक वर्मा जो भाजपा नेता है तथा राव इंद्रजीत सिंह का कट्टर समर्थक तथा उनके पिता रामकुमार वर्मा राव इंद्रजीत सिंह के कट्टर समर्थक रहे हैं, आज अशोक वर्मा अपनी रोटी रोटी चलाने के लिए गन्ने का जूस बेच रहा है। उनसे इस बाबत चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि रोटी रोटी कमाना हर इंसान का फर्ज बनता है। इसमें किसी प्रकार की तौहीन नहीं होती। कमाने के लिए चाहे कोई भी काम मिले, जरूर मेहनत और लगन सीखना चाहिए। उनका कहना है कि वह गन्ने का रस पिलाकर लोगों की सेहत का ध्यान रख रहे हैं तथा बेहतर दर्जे का गन्ने का रस पिलाते हैं। डाक्टर भी कुछ मरीजों को गन्ने का जूस पीने के लिए सलाह देते हैं। इसलिए उनका ध्येय है कि बेहतरीन जूस पिलाकर लोगों की सेहत का ध्यान रखा जाए। उनका कहना है कि अब वो अपने इस कार्य को विस्तार देंगे तथा बड़ी-बड़ी मशीन जूस से संबंधित लाकर अनेक फलों का जूस निकालने का कार्य भी भविष्य में करेंगे। उन्होंने कहा कि जो मेहनत से जी चुराते हैं वो इंसान नहीं होते और जब इंसान होते हैं वो मेहनत करके ही अपनी रोटी रोटी कमाते हैं। अशोक वर्मा के पिता रामकुमार एक वक्त था जब राव इंद्रजीत सिंह का कट्टर समर्थक बना और कनीना के बहुत से लोगों का जमकर विरोध झेलना पड़ा था। उल्लेखनीय है कि अशोक वर्मा ने पहले कबाड़ी का काम भी किया था तथा खूब ख्याति पाई थी। विशेष प्रकार की सूती चद्दर छपाई करके बेचने में भी मशहूर रहे हैं। फोटो कैप्शन 01:अशोक वर्मा गन्ने का जूस पिलाते हुए
फूड सप्लाई इंस्पेक्टर के नेतृत्व में होटलों पर छापेमारी - कमर्शियल सिलिंडर मिले ************************************************ ****************************************** ************************************************ कनीना की आवाज। क्षेत्र में गैस सिलेंडरों के सही उपयोग और वितरण व्यवस्था की जांच के लिए फूड सप्लाई विभाग की टीम ने कनीना में विभिन्न दुकानों, होटलों और अन्य व्यावसायिक संस्थानों पर औचक निरीक्षण किया। यह कार्रवाई फूड सप्लाई इंस्पेक्टर ध्यान सिंह के नेतृत्व में की गई। निरीक्षण के दौरान टीम ने कस्बे के कई होटलों और ढाबों की जांच की। जांच के दौरान सभी होटलों में कमर्शियल गैस सिलेंडर ही उपयोग में पाए गए, जो नियमानुसार सही पाए गए। टीम ने होटल संचालकों को गैस सिलेंडरों के उपयोग से जुड़े नियमों की जानकारी देते हुए भविष्य में भी केवल कमर्शियल सिलेंडर ही प्रयोग करने के निर्देश दिए। फूड सप्लाई इंस्पेक्टर ध्यान सिंह ने बताया कि विभाग का उद्देश्य घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाना है ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा समय-समय पर ऐसे औचक निरीक्षण किए जाते हैं और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा। टीम ने इस दौरान एक गैस एजेंसी पर भी पहुंचकर रिकॉर्ड की जांच की। जांच के दौरान एजेंसी का रिकॉर्ड सही पाया गया और गैस वितरण व्यवस्था संतोषजनक मिली। ध्यान सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह से जारी है और उपभोक्ताओं को गैस की किसी प्रकार की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। इस निरीक्षण टीम में निरीक्षक विनोद कुमार, निरीक्षक रमेश चन्द, निरीक्षक नसीब सिंह तथा उपनिरीक्षक संदीप कुमार भी शामिल रहे, जिन्होंने मिलकर कनीना में विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण किया।
Friday, March 13, 2026
अब नहीं बिकते शहतूत बाजारों में -कभी माली समाज आता था बेचने शहतूत ******************************************* ************************************************ ******************************************* कनीना की आवाज। ग्रामीण क्षेत्रों में पाए जाने वाले शहतूत की आवक कम हो गई है। अति मधुर एवं चंद दिनों के ग्रामीण फल बड़े ही चाव से खाए जाते हैं। शहरी जन बेशक पसंद न करें किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद चाव से खाए जाने वाले शहतूत फल की पैदावार कम हो पाने के कारण आवक घट गई है। एक जमाना था जब इन्हें रेहड़ी एवं ऊंटगाड़ी में डालकर गांवों में बेचा जाता था किंतु अब एक भी व्यक्ति इनको बेचकर रोटी रोजी कमाता नजर नहीं आता है। ये दो प्रकार के होते हैं खट्टे एवं मीठे। ये पौधे छाया भी प्रदान करता है तो फल भी। इस संबंध में किसान राजेंद्र सिंह ने बताया कि मौसम की मार के चलते ये फल या तो झड़ गए हैं या फिर बहुत कम मात्रा में पक पाते हैं जिसके चलते आवक घट गई है। इस संबंध में पूर्व खंड कृषि अधिकारी डा. देवराज का कहना है कि ये फल इस क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में होते हैं किंतु मौसम की मार पडऩे से झड़ जाते हैं। कुछ लोग इसलिए भी नहीं खाते क्योंकि इन पर मक्खी एवं मच्छर बैठे गंदा करते रहते हैं। ये धरती पर गिर जाए तो रेत लग जाता है और धोने पर मधुर स्वाद खत्म हो जाता है। इस संबंध में डा. होशियार सिंह यादव विज्ञान के जानकार का कहना है कि इसमें प्रोटीन, वसा, विटामिन एवं खनिज लवण पाये जाते हैं। शहतूत के रस में एंटीआक्सीडेंट, विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं और इसमें औषधीय गुण भी होते हैं। यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है और रक्तचाप को कम करता है, जिससे रक्त के थक्के बनने और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा, शहतूत के रस का सेवन एनीमिया के लक्षणों को कम करने में भी सहायक होता है। फोटो कैप्शन 10: ग्रामीण क्षेत्रों में चाव से खाया जाने वाला शहतूत फल।
कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-15 पढ़े 15 मार्च को --अलग थलग पड़ा कुतरूं किंतु स्वभाव नहीं बदला, इसे कहते हैं कि रस्सी जल गई परंतु.....
कनीना की आवाज ब्लाग से न उठाये कोई समाचार -वरना कापीराइट के तहत होगा मामला दर्ज -आरएनआई द्वारा है रजिस्टर्ड ******************************************* ************************************************ ******************************************* कनीना की आवाज। कनीना की आवाज नमक ब्लाग आरएनआई द्वारा रजिस्टर्ड समाचार पत्र है। इससे यूं की यूं खबर को उठाकर कुछ लोग अनजाने में ग्रुप में डाल देते हैं जो कापीराइट का उल्लंघन है। कहने को तो अज्ञानता कहेंगे लेकिन कानून के सामने अज्ञानता का कोई बहाना नहीं होता। ऐसे में ऐसी गलती दो-तीन बार कुछ लोग कर चुके हैं जो डा. होशियार सिंह यादव कापीराइट अधिकारी द्वारा देखी जा चुकी हैं। भविष्य में अगर कोई ऐसी गलती करेगा चाहे वह जाने या अनजाने में हुई उसके खिलाफ कापीराइट के तहत मामला दर्ज करवाया जाएगा। इसके लिए ग्रुप एडमिन भी जिम्मेवार होगा। कनीना की आवाज ब्लाग की खबर को कापी करके कहीं प्रयोग न करें, सावधानी बरते अन्यथा अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे। कापीराइट मामले में सजा -अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की कैद और 50,000 रुपए से 2 लाख रुपए तक के जुर्माने तक हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर सजा बढ़ जाती है, और इसमें गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध माना जाता है, जिसमें अवैध सामग्री और उपकरणों को जब्त भी किया जा सकता है। सजा के मुख्य प्रावधान (भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार) धारा 63:पहली बार उल्लंघन करने पर कम से कम 6 महीने की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 लाख रुपएतक का जुर्माना हो सकता है। धारा 63 (दोबारा उल्लंघन): दूसरी बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 साल की कैद और 1 लाख रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 रुपए लाख तक का जुर्माना हो सकता है। धारा 63बी(कंप्यूटर प्रोग्राम का उल्लंघन): कंप्यूटर प्रोग्राम की उल्लंघनकारी प्रति का जानबूझकर उपयोग करने पर कम से कम 7 दिन की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। अन्य दंड:उल्लंघन करने वाली प्रतियां और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए जा सकते हैं, और कापीराइट मालिक सिविल मुकदमे के जरिये मौद्रिक हर्जाना भी मांग सकता है।
साल में दो विज्ञापन भी नहीं देने वाले समाचार न भेजे - अखबार का आदेश है विज्ञापन देने वालों की खबरें लगे अधिक से अधिक ******************************************* ************************************************ ******************************************* कनीना की आवाज। लंबे समय से डा. होशियार सिंह यादव पत्रकारिता में जुटा हुआ है। सुबह से रात 11 जाते हैं तब जाकर पत्रकारिता पूर्ण होती है किंतु न तो समाचार पत्र एक रुपया भी देता और न ही लोग विज्ञापन देते। साल में अनेक समाचार छपने के बाद भी जब विज्ञापन का वक्त आता है तब कोई विज्ञापन नहीं दिया जाता, जिससे अखबार नाराज है और ऐसे पत्रकार जो विज्ञापन नहीं देते उनको हटाने का निर्णय ले लेता है। ऐसे में जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाए वो कृपया मेरे पास/डा. होशियार सिंह यादव के पास समाचार प्रकाशन हेतु न भेजे। इसे कड़ाई से पालन किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई समाचार भेजता है तो स्वयं जिम्मेदार होगा और वे प्रकाशित नहीं होंगे। अपने घर से कंप्यूटर, बिजली, नेट खर्चा, भाग दौड़ करनी पड़ती है वहीं बच्चों से दूर रहना पड़ता है। उस पर भी एक रुपए भी जेब में नहीं आता और खर्चा बढ़ता ही चला जाता है। एक और परिवार वाले नाराज वहीं अखबार वाले नाराज क्योंकि कुछ लोगों की आदत बन गई है कि समाचार के समय तो कहेंगे बड़े-बड़े समाचार छाप दो और विज्ञापन के नाम पर कहेंगे सोचेंगे, देखेंगे या फिर फोन नहीं उठाते, फोन बंद कर लेते हैं। ऐसे में ऐसे व्यक्ति जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाते वो कृपया माफ करें, समाचार भविष्य में न भेजे। केवल वही व्यक्ति भेजें जिन्होंने कुछ विज्ञापन दिया है या मेरी किसी क्षेत्र में मदद की है ताकि उनका खर्चा में स्वयं वहन कर सकूं। सबसे बड़ी बात है कि अखबार के निर्देशानुसार एक विज्ञापन कम से कम 10 हजार का देने वालों के छह माह समाचार प्रकाशित होंगे, दो विज्ञापन देने वालों के पूरे साल समाचार प्रकाशित होंगे। अधिकतम दिन में एक समाचार प्रकाशित करवा सकता है वह भी स्वयं टाइप करके भेजना होगा। यदि साल में 20000 तक का विज्ञापन देता है उनके लिए यह सुविधा एक साल चलती रहेगी। समाचारपत्रों का कहना है कि उन लोगों पर समय बर्बाद ना करें जो विज्ञापन नहीं देते। एक और मजबूरी है दूसरी और विज्ञापन देना जरूरी है। शायद कनीना क्षेत्र के प्रतिदिन 10 बड़े समाचार अकेले मेरे प्रकाशित होते हैं लेकिन इस होली पर महज एक छोटा सा विज्ञापन मिला जिनसे उम्मीद थी वो कल देंगे, फिर देंगे, आगे देंगे करते-करते होली भी टाल दी। अब ऐसा नहीं होगा। केवल क्राइम के समाचार और उन लोगों के समाचार प्रकाशित होंगे जो विज्ञापन देते हैं या ऐसे व्यक्तित्व जो वास्तव में समाज के लिए उदाहरण बने हुए हैं।
भाजपा नेता रख रहा है लोगों की सेहत का ध्यान, पिला रहा है गन्ने का जूस - रोटी रोजी कमाने में कोई शर्म नहीं -अशोक वर्मा ******************************************* ************************************************ ******************************************* कनीना की आवाज। कनीना निवासी अशोक वर्मा जो भाजपा नेता है तथा राव इंद्रजीत सिंह का कट्टर समर्थक तथा उनके पिता रामकुमार वर्मा राव इंद्रजीत सिंह के कट्टर समर्थक रहे हैं, आज अशोक वर्मा अपनी रोटी रोटी चलाने के लिए गन्ने का जूस बेच रहा है। उनसे इस बाबत चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि रोटी रोटी कमाना हर इंसान का फर्ज बनता है। इसमें किसी प्रकार की तौहीन नहीं होती। कमाने के लिए चाहे कोई भी काम मिले, जरूर मेहनत और लगन सीखना चाहिए। उनका कहना है कि वह गन्ने का रस पिलाकर लोगों की सेहत का ध्यान रख रहे हैं तथा बेहतर दर्जे का गन्ने का रस पिलाते हैं। डाक्टर भी कुछ मरीजों को गन्ने का जूस पीने के लिए सलाह देते हैं। इसलिए उनका ध्येय है कि बेहतरीन जूस पिलाकर लोगों की सेहत का ध्यान रखा जाए। उनका कहना है कि अब वो अपने इस कार्य को विस्तार देंगे तथा बड़ी-बड़ी मशीन जूस से संबंधित लाकर अनेक फलों का जूस निकालने का कार्य भी भविष्य में करेंगे। उन्होंने कहा कि जो मेहनत से जी चुराते हैं वो इंसान नहीं होते और जब इंसान होते हैं वो मेहनत करके ही अपनी रोटी रोटी कमाते हैं। अशोक वर्मा के पिता रामकुमार एक वक्त था जब राव इंद्रजीत सिंह का कट्टर समर्थक बना और कनीना के बहुत से लोगों का जमकर विरोध झेलना पड़ा था। उल्लेखनीय है कि अशोक वर्मा ने पहले कबाड़ी का काम भी किया था तथा खूब ख्याति पाई थी। विशेष प्रकार की सूती चद्दर छपाई करके बेचने में भी मशहूर रहे हैं। फोटो कैप्शन 09:अशोक वर्मा गन्ने का जूस पिलाते हुए
अन्तर्राष्ट्रीय गणित दिवस -14 मार्च -पाई दिवस के रूप में भी याद किया जाता है गणित दिवस ******************************************* ************************************************ ******************************************* कनीना की आवाज। भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जन्मदिन को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है। वहीं पाई के महत्व को याद करके अन्तर्राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है। आज के दिन विद्यार्थी गणित से कुछ दूर भागते हैं जबकि भारत के इस गणितज्ञ ने वह खोज की जो आज भी विदेशों तक शोध का आधार बने हुए हैं। इस संबंध में गणित के जानकार राजकुमार राव से बात हुई -- **बेशक वर्तमान पीढ़ी गणित से कुछ दूर भागती हो किंतु गणित बहुत आसान विषय है। गणित को अगर सही ढंग से पढ़ा जाए तो निसंदेह हर विषय की समस्याओं को हल करने की चाबी के रूप में कार्य करेगा। जिस प्रकार रामानुजन ने 32 वर्ष के अल्प जीवन काल में 3900 समीकरण और सर्वसमिकाओं का संकलन किया है, पाई की अनंत श्रेणी शामिल की गई, अनेक सूत्र भी प्रदान किये चुनौती पूर्ण गणित की समस्याओं को हल करने के लिए नए विचार प्रस्तुत कर गणित को आसान से भी आसान विषय सिद्ध करके दिखाया। गणित से डरना बुरी बात है किंतु गणित के साथ खेलने से यह विषय एक सुंदर खेल का माध्यम बन जाता है। गणित से जो डरकर दूर भागता है उतना ही गणित में कमजोर हो जाता है लेकिन जो गणित के गहराई तक जाने का प्रयास करता है वह गणित में पारंगत हासिल कर लेता है और उसकी पहचान प्रतिभावान के रूप में की जाती है। गणित बहुत बड़ा विषय है। गणित की छोटी-छोटी समस्याओं को हल करने में यदि ध्यान दिया जाए तो सही मायने में इंसान का ज्ञान निखर कर सामने आएगा। गणित से दूर भागना योद्धा के समान है जो युद्ध की विभीषिका देखकर डर के मारे भाग रहा हो लेकिन जिस प्रकार एक योद्धा युद्ध में पूरे हौसले के साथ उतरता है तो जीत उसके कदमों को चूमती है। गणित को सरल तरीके एवं छोटी छोटी बातों से बड़ी बातों की ओर ले जाने पर विद्यार्थी आसानी से सीख सकते हैं। गणित में अगर एक बार रुचि जागृत हो जाए तो गणित सबसे सरल विषय बन सकता है। --राजकुमार राव, पूर्व मुख्याध्यापक एवं गणित के जानकार फोटो कैप्शन: राजकुमार राव
खेड़ी में जलभराव और गंदे नालों से ग्रामीण परेशान, निकासी व्यवस्था को लेकर उठे सवाल -नालों में जलभराव से गांव में महामारी फैलने का बना भय -दो दिन पानी में खड़े होकर मांगा था समाधान, अब सरपंच बनने के बाद भी खेड़ी में जलभराव से लोग त्रस्त ******************************************* ************************************************ ******************************************* कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव खेड़ी में जलभराव और नालियों में खड़े गंदे पानी की समस्या एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। गांव की कई गलियों और मुख्य रास्तों पर जमा गंदा पानी ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। नालियों में गंदगी और ठहरे पानी से उठती बदबू और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो गांव में बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान सरपंच पंकज हिंदू ने चुनाव के समय गांव में पानी निकासी की समस्या को प्रमुख मुद्दा बनाकर लोगों से समर्थन मांगा था। उस समय उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर इस समस्या को लेकर जोरदार आवाज उठाई थी। बताया जाता है कि मुख्य रास्ते पर जलभराव की समस्या को लेकर उन्होंने दो दिनों तक पानी में खड़े रहकर सरकार और प्रशासन से समाधान की मांग भी की थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सरपंच बनने के बाद वह गांव में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करवाएंगे और वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा। इसी भरोसे के साथ ग्रामीणों ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना था। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच बनने के बाद भी गांव में पानी निकासी की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। समाजसेवी अधिवक्ता मंदीप सिंह, समाजसेवी तेजपाल रजलीवालद, धर्मपाल दुप्पट, पूर्व सरपंच रामनिवास चौधरी, राजेश, संदीप, दीपक, जोनी, मामन, संजय, दारासिंह और धर्मेंद्र सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव के कई घरों के पास बनी नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं। इनमें पानी जमा रहने से दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की कई गलियों में लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण लोगों को आने-जाने में भी कठिनाई होती है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो गांव में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नालियों की नियमित सफाई करवाई जाए और पानी निकासी के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि गांव के लोगों को इस समस्या से राहत मिल सके। इस मामले में सरपंच पंकज हिंदू से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि गांव में नाले के निर्माण का टेंडर पहले ही जारी किया जा चुका है। केके कंस्ट्रक्शन कंपनी को सड़क चौड़ीकरण और उसके साथ नाले के निर्माण का कार्य दिया गया है। उन्होंने बताया कि पानी निकासी के लिए नालों का निर्माण भी करवाया गया है। सरपंच के अनुसार अब तक चार बार नालों की मरम्मत और कुछ स्थानों पर नया निर्माण भी कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद पानी की निकासी पूरी तरह से नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि संबंधित कंपनी द्वारा सही लेवल नहीं निकालने के कारण कुछ नालियों में पानी जमा हो जाता है। इस समस्या को दूर करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। पाइप डालने का कार्य जारी, जल्द दूर होगी समस्या - पवन कुमार कंपनी का कार्य देख रहे पवन कुमार ने बताया कि नालों से पानी की निकासी को बेहतर बनाने के लिए पाइप डालने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही पाइप लगाने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद गांव में जलभराव और पानी निकासी की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। फोटो कैप्शन 07: गंदे पानी की समस्या दर्शाता हुआ ग्रामीण
प्रदेश स्तरीय युवा महा सम्मेलन में पहुंचने की,की अपील --वेदप्रकाश नंबरदार रामबास पहुंचे कैथल ******************************************* ************************************************ ******************************************* कनीना की आवाज। वेदप्रकाश नंबरदार रामबास कैथल पहुंचे। कैथल में इनेलो पार्टी एससी प्रकोष्ठ की प्रदेश स्तरीय बैठक में उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चौ. रामपाल माजरा को डा. भीमराव अंबेडकर का स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। साथ में एससी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर पहलवान , प्रभारी वेद सिंह मुंडे , महेंद्र कलशन आदि मौजूद रहे। बैठक में 23 मार्च 2026 को नरवाना की नई अनाज मंडी में होने वाले प्रदेश स्तरीय युवा महा सम्मेलन को सफल बनाने के लिए आगामी रणनीति तैयार की। सभी साथियों ने सम्मेलन में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने का भरोसा दिलाया। फोटो कैप्शन 08: वेदप्रकाश नंबरदार रामबास इनेलो पदाधिकारियों को स्मृति चिह्न प्रदान करते हुए
हाई कोर्ट के न्यायाधीश संजय वशिष्ठ पहुंचे कनीना --लायर्स चैंबर्स के लिए जगह चिह्नित करके शिलान्यास किया ******************************************* ************************************************ ******************************************* कनीना की आवाज। कनीना न्यायालय परिसर में उस समय उत्साह और गरिमा का वातावरण देखने को मिला जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट, चंडीगढ़ के न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ कनीना पहुंचे। न्यायमूर्ति के आगमन पर कनीना बार एसोसिएशन के अधिवक्ता साथियों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका भव्य स्वागत एवं सम्मान किया। इस अवसर पर अधिवक्ताओं ने लंबे समय से लंबित अपनी विभिन्न मांगों एवं न्यायिक सुविधाओं से संबंधित समस्याओं को भी माननीय न्यायमूर्ति के समक्ष रखा। इस अवसर पर लायर्स चैंबर्स के लिए जगह चिह्नित करके शिलान्यास किया। न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ ने अधिवक्ताओं की बातों को गंभीरता से सुना तथा समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक आश्वासन दिया। उनके इस सौहार्दपूर्ण व्यवहार से अधिवक्ता साथियों में संतोष और प्रसन्नता का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर उपस्थित अधिवक्ताओं एवं गणमान्य व्यक्तियों ने न्यायमूर्ति का आभार व्यक्त करते हुए उनके न्यायिक मार्गदर्शन की सराहना की। फोटो कैप्शन 04: न्यायाधीश पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय कनीना पहुंचने पर स्वागत करते हुए
कोटिया के स्कूल में स्थायी अध्यापक न होने पर अभिभावकों में रोष -स्कूल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया ******************************************* ************************************************ ******************************************* कनीना की आवाज।राजकीय माध्यमिक विद्यालय कोटिया में अक्टूबर 2025 किसी भी विषय का स्थायी अध्यापक न होने के कारण अभिभावक और ग्रामीणों में भारी रोष है। शुक्रवार को ग्रामीण एवं अभिभावक विद्यालय परिसर पहुंचे और मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन किया। एसएससी सदस्य देशराज यादव ने बताया कि विद्यालय में अक्टूबर 2025 से किसी भी विषय का स्थायी अध्यापक नहीं है। इस कारण बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। इसके लिए कई बार उच्च अधिकारियों को लिखा जा चुका परंतु को स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसलिए सभी अभिभावक एवं ग्रामीणों ने स्कूल द्वार पर धरना व प्रदर्शन किया। यही नहीं अपितु ग्रामीणों ने खंड शिक्षा अधिकारी सुनील खुडानिया व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नारनौल सुनील दत्त यादव से फोन पर बात की तथा विद्यालय की समस्याओं से अवगत करवाया। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने फोन पर बीइओ कनीना आदेश दिया कि सोमवार को दो विषयों के अध्यापक जरूर भेज कर रिपोर्ट करें। इस धरना प्रदर्शन में चंदगीराम, सूबेदार निहाल सिंह, करतार सिंह, नरेश प्रधान एसएमसी, पवन कुमार,पूर्व पंचायत समिति सदस्य, सूरजभान दुलीचंद, रमेश जांगड़ा, देशराज यादव सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक ,सुशीला, राजबाला, भतेरी आदि ग्रामीणों ने इस पर दर्शन में भाग लिया। उल्लेखनीय की दैनिक जागरण में कई बार समाचार को प्रकाशित किया एवं समस्या ओ उजागर किया है किंतु विभाग के कानों पर जू तक नहीं रेंगी है। स्कूल में है कुल 69 विद्यार्थी- कक्षा 6 में 11 कक्षा 7 में 13 और कक्षा 8 में 6 विद्यार्थी हैं और क़ल 6 से 8 तक 30 बच्चे शिक्षा पा रहे है। वहीं पहले से पांचवीं तक 39 विद्यार्थी शिक्षा पा रहे हैं। सबसे बड़ी बात है कि इस विद्यालय में जहां उन्हें पहली से पांचवीं तक कक्षा में दो शिक्षक हैं। एक बीएलओ आदि की ट्रेनिंग पर जाता है और एक से पांच कक्षा तक एक शिक्षक की पढ़ाने को मजबूर हो जाता है। वही 6 से 8 तक चतुर्थश्रेणी कर्मी गणित, बाबू अंग्रेजी, संस्कृत का दूसरे स्कूल से थोड़े समय के लिए भेजा हुआ शिक्षक, वही एसएमसी का सदस्य देशराज भी शिक्षण कर रहा है। मर्ज करने के हुए थे आदेश- 2020 से पहले जब छात्र संख्या घट गई थी तो इस विद्यालय को मर्ज करने की बात सोची थी। तत्पश्चात वर्ष 2022 में ट्रांसफर ड्राइव चला जिसमें केवल मुख्य अध्यापक महिपाल सिंह बाघोत को भेजा। बाकी सभी पद कैप्ट कर दिए गए। परिणाम यह निकला कि अकेला मुख्य अध्यापक की तीन कक्षाओं को पढ़ाता रहा लेकिन अक्टूबर 2025 में वह भी सेवानिवृत्त हो गए। एमआईएस पोर्टल पर कैप्ट रखे पद- मिली जानकारी अनुसार वर्ष 2022 में चले ड्राइव में मुख्य अध्यापक, चपरासी बाबू और पीटीआई के पद खोले गए। बाकी सभी कैप्ट कर दिए गए। मुख्याध्यापक सेवानिवृत्त हो गए। पीटीआई पद पर कोई शिक्षक आया नहीं। महज बाबू एवं चपरासी मजबूरी में कक्षा ले रहे हैं। कई बार प्रकाशित हुआ समाचार- दैनिक अखबारों में प्रमुखता से यह समाचार कई बार प्रकाशित हुआ। बार-बार उच्च अधिकारियों को शिकायत की किंतु परिणाम जिसका दस का तस रहा। फोटो कैप्शन 6: मुख्य द्वार पर अभिभावक एवं ग्रामीण प्रदर्शन करते हुए
गुजरात की गिर नश्ल का युवा नंदी बना श्रीकृष्ण गौशाला का नया सदस्य -गौशाला में किया अभिनंदन ******************************************* ************************************************ ******************************************* कनीना की आवाज। श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में चल रहे नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को गुजरात प्रदेश की प्रसिद्ध गिर नस्ल का एक युवा नंदी गौशाला में शामिल किया गया। कोटिया निवासी सूबेदार संतोष सिंह पुत्र श्योताज सिंह ने यह नंदी गौशाला को भेंट किया। उन्होंने बताया कि कोटिया निवासी सुरेश कुमार यादव, चेयरमैन दी स्कालर गुरुकुल विद्यालय, लगभग दो वर्ष पूर्व गुजरात से गिर नस्ल की एक उच्च गुणवत्ता वाली गाय लेकर आए थे, जो प्रतिदिन करीब 21 किलो दूध देती थी। उसी गाय का यह नंदी अब लगभग ढाई वर्ष का हो चुका है। हिसार पशुपालन विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा इसके निरीक्षण के बाद इसे शुद्ध गिर नस्ल का बताया गया था। गौशाला पहुंचने पर गौभक्तों ने नंदी का फूलमालाओं से स्वागत कर उसे विधिवत नंदी बाड़े में शामिल किया। इस अवसर पर एचडीएफसी बैंक कनीना के प्रबंधक विक्रम दत्त, प्रीतम यादव और कंवर सिंह ने गौशाला को सहयोग स्वरूप 21 हजार रुपए भेंट किए। इस मौके पर गौशाला प्रधान भगत सिंह, सचिव यश कनीनवाल, सह-सचिव रामपाल, उप प्रधान दिलावर सिंह, रवींद्र बंसल, दुलीचंद साहब, दीनदयाल साहब, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, विष्णु जांगड़ा, मदन लाल गेरा, नित्यानंद जांगिड़, दलजीत फौजी, होशियार सत्संगी, राजेंद्र सिंह (पूर्व पार्षद), मास्टर रामप्रताप, राजकुमार डीलर, सतवीर गुगनवाला सहित अनेक गौभक्त उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन 01 व 02: गौशाला में नंदी का स्वागत करते तथा बैक मैनेजर का अभिनंदन करते हुए
जीएम देवदत ने हरी झंडी दिखाकर चित्तौडग़ढ़ के लिए बस को किया कनीना से रवाना
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