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Tuesday, June 2, 2026



 

फर्जी बीमा अधिकारी बन व्यक्ति से ऐंठी मोटी रकम
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कनीना की आवाज।
कनीना में फर्जी बीमा एजेंट बनकर एक व्यक्ति से 10,000 रुपए लेने का मामला सामने आया है। देवेंद्र वासी लिसान ने बताया कि मेरे पास एक ट्रैक्टर है जिसका बीमा करवाने के लिए जो मनोज कुमार वासी मोहनपुर से संपर्क किया तो उसने बताया कि वह बीमा एजेंट है उसने स्वयं की दुकान पूजा फिलिंग स्टेशन कनीना के पास पालिसी जंक्शन के नाम से बताई। पीडि़त ने 09 मई 2019 को मनोज को 10,000 रुपए बीमा के नाम के दिए और रिलायंस इंश्योरेंस का बीमा बता दिया गया। ट्रैक्टर का 28 अगस्त 2019 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया और घायल व्यक्ति ने दावा याचिका दायर की। बीमा अधिकारियों ने उपस्थित होकर बीमा को फर्जी करार दिया। उसके बाद ट्रैक्टर मालिक ने 80,0000 रुपए का भुगतान घायल व्यक्ति धर्मेंद्र बनाम देवेंद्र कालिया को दिया। उसके बाद पीडि़त ने 23 फरवरी 2026 को जिला पुलिस अधीक्षक के समक्ष मामला पेश किया। उसके उपरांत मामला कनीना थाना भेज दिया गया। यहां पर आपसी सहमति के पश्चात मामले को समाप्त करने और भरपाई होने की बात हुई थी लेकिन काफी दिन बीत जाने के बाद भी आज तक कोई सकारात्मक कारवाही ना होने के बाद दोबारा आरोपी के विरुद्ध मामला  दर्ज करने की शिकायत दर्ज की गई है। पीडि़त ने पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। सदर पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।


श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन गोवर्धन पूजा और रासलीला प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव विभोर
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कनीना की आवाज।
गांव बाघोत में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठे दिन कथा पंडाल में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास आचार्य राकेश कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए गोवर्धन पूजा, इंद्र के अभिमान का हरण तथा महारास के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया कथाव्यास ने बताया कि जब ब्रजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की, तो देवराज इंद्र ने क्रोधित होकर मूसलधार वर्षा शुरू कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की। इस प्रसंग से भगवान ने यह संदेश दिया कि अहंकार का अंत निश्चित है तथा सच्चे भक्तों की रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं।कथा में महारास का भावपूर्ण वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि रासलीला आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मानव जीवन को प्रेम, समर्पण और भक्ति का मार्ग दिखाती हैं। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर झूम उठे और पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंच रहे हैं। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर पंडित प्रेमदास की कुटिया बाघोत के श्रद्धालुओं सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 09:गोवर्धन पूजा एवं महारास प्रसंग का वर्णन करते कथा व्यास आचार्य राकेश कृष्ण शास्त्री





श्री सीताराम शिव मंदिर कमेटी ने लगाई मीठे पानी की छबील, राहगीरों की बुझाई प्यास
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कनीना की आवाज।
भीषण गर्मी के बीच राहगीरों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से कनीना सदर थाना के समीप स्थित श्रीसीताराम शिव मंदिर कमेटी द्वारा मीठे पानी की छबील लगाई गई। छबील में बड़ी संख्या में लोगों ने शीतल जल ग्रहण कर गर्मी से राहत महसूस की। मंदिर कमेटी के प्रधान प्रदीप कुमार विशु ने बताया कि समिति द्वारा हर वर्ष गर्मी के मौसम में जनसेवा के तहत मीठे पानी की छबील लगाई जाती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी राहगीरों, वाहन चालकों एवं आमजन के लिए शीतल जल की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में प्यासे लोगों को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना जाता है। उन्होंने बताया कि समिति केवल मानव सेवा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पक्षियों के संरक्षण के लिए भी विशेष प्रयास करती है। गर्मी शुरू होते ही शहर के विभिन्न स्थानों पर पक्षियों के लिए पानी के पात्र रखे जाते हैं, जिनमें प्रतिदिन स्वच्छ एवं ताजा पानी भरा जाता है ताकि पक्षियों को भीषण गर्मी में राहत मिल सके। कार्यक्रम का संयोजन कर रहे जितेंद्र बबलू ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल सेवा का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों में भी प्यासे को पानी पिलाने को श्रेष्ठ सेवा बताया गया है। उन्होंने लोगों से भी गर्मी के मौसम में जरूरतमंदों और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने छबील सेवा में सहयोग करते हुए समाज सेवा का संदेश दिया।
फोटो कैप्शन 10: कनीना में श्री सीताराम शिव मंदिर कमेटी द्वारा लगाई गई मीठे पानी की छबील


विश्व साइकिल दिवस-3 जून
साइकिल चलाने के क्षेत्र में विश्व रिकार्डधारी हैं डा. होशियार सिंह
-प्रतिदिन 20-30 किलोमीटर दूरी करते हैं तय
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कनीना की आवाज।
वैसे तो प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार प्रदूषण रोकने पर बल दे रही है किंतु कनीना निवासी एवं पूर्व विज्ञान अध्यापक डा. होशियार सिंह 41 सालों से लगातार साइकिल चला रहे हैं और स्कूल भी साइकिल से जाते रहे हैं। वे साइकिल से ही दैनिक जीवन के कार्य करते हैं। उनके पास किसी प्रकार की कोई बाइक आदि नहीं है। कहीं भी 10 से 15 किमी दूर किसी कार्य में के लिए जाना हो तो साइकिल ही प्रयोग करते हैं और साइकिल मैन के रूप में एक उदाहरण बन गये हैं। समय-समय पर विभिन्न संस्थाएं उन्हें सबसे लंबे समय तक साइकिल चलाने के कारण सम्मानित करने की बात तो कर रहे हैं किंतु कभी उन्होंने तो सरकार द्वारा और ना ही किसी संस्था द्वारा सम्मानित किया गया है। विश्व रिकार्ड में नाम गत वर्ष जरूर दर्ज करवाया था।
होशियार सिंह कनीना निवासी ने 1985 में साइकिल चलानी शुरू की थी किंतु नियमित रूप से 1987 से साइकिल चला रहे हैं। शिक्षक दौरान कम से कम 25 विभिन्न स्कूलों में उनकी बदली हुई किंतु कभी भी उन्होंने नजदीक स्टेशनों पर वाहन प्रयोग नहीं किया व साइकिल से ही सफर तय करते रहे। चाहे स्कूल जाना हो, चाय सब्जी खरीदनी घरेलू कार्य करना हो सभी कार्य साइकिल से करते हैं। बार-बार लोगों ने बाइक खरीदने की सलाह देते हैं किंतु उनका कहना है कि उनके शरीर का स्वास्थ्य और पैरों की कसरत होने के कारण ही साइकिल चला रहा है।
40 बार कर चुके हैं पैदल यात्रा-
यही नहीं अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अब तक 17 बार पैदल हरिद्वार से कावड़ तथा इतनी ही बार कनीना से खाटू श्याम पदयात्रा पर ध्वज लेकर जा चुके हैं। छह बार कनीना से जैतपुर, एक बार कनीना से नांधा बलवाड़ी, कनीना से माता मंदिर महासर, कनीना से भैरूं का बास पैदल यात्रा की है। एक अगस्त 2026 को हरिद्वार से कांवड़ लाने जाएंगे। जो भी कहीं उन्हें कोई काम हो तो साइकिल ही या पैदल चलना ही उन्हें पसंद है। विज्ञान के शिक्षकों होने के कारण वे प्रदूषण के विषय में जहां स्कूल दौरान विद्यार्थियों को हर समय जानकारी देते रहते हैं वहीं विद्यार्थियों को भी साइकिल पर चलने की सलाह देते थे। यद्यपि कुछ देशों में साइकिल चलाने वालों को सरकार प्रोत्साहित कर रही है किंतु उन्हें साइकिल चलाने के लंबे अरसे के बाद भी किसी प्रकार का कोई प्रोत्साहन तथा प्रशंसा पत्र भी नहीं मिला है जिसके कारण वे मायूस हैं। उन्होंने बताया कि कड़ी सर्दी तथा भीषण गर्मी में भी वे साइकिल चलाते रहे हैं। साइकिल चलाने से जहां उन्हें नींद अच्छी आती है।
43 पुस्तकों की रचना की-
डा. होशियार सिंह लंबे समय से लेखन कार्य से जुड़े होने के कारण अब तक उनकी 43 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है और किसी भी फोटो वगैराह लेने के लिए भी साइकिल पर ही जाते हैं। लोग उन्हें साहित्यकार के नाम से जानते हैं। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो उनकी साइकिल चलाने की अदा को नहीं जानता हो। डा.होशियार सिंह के लंबे समय से साइकिल चलाने के कारण उन्हें सम्मानित करने की मांग सरकार से की है।
क्या कहते हैं होशियार सिंह -
होशियार सिंह पूर्व विज्ञान अध्यापक का कहना है कि साइकिल उनके स्वास्थ्य को ठीक रखने में अहम भूमिका निभाती है। यही कारण है की गर्मी सर्दी में जब भी कहीं जाना हो साइकिल पर ही चलते हैं। उन्हें साइकिल बेहद पसंद है। कभी 500 रुपये में साइकिल खरीदी थी किंतु आज साइकिल कीमत 4500 रुपये से अधिक पहुंच गई है। वे साधारण साइकिल रखते हैं किंतु साइकिल 20 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाकर स्कूल जाते थे। उन्हें चाहे विद्यार्थी शिक्षक तथा कुछ लोग  साइकिल पर देखना पसंद नहीं करते किंतु उनको साइकिल चलाने में जो आनंद आता है उसे वो स्वयं बयां कर रहे हैं।
लेखन के क्षेत्र में हो चुके हैं सम्मानित-
बतौर लेखक हरियाणा साहित्य अकादमी, हरियाणा के राज्यपाल सहित सैकड़ों संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। हजारों की संख्या में लेखन कार्य में उपलब्धियां के प्रशस्ति पत्र मिले हुए हैं। उल्लेखनीय है कि उनकी पत्नी आशा यादव तथा पुत्र अमीश कुमार भी लेखन के क्षेत्र में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा सम्मानित हो चुके हैं और उनकी भी पांच-पांच कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं।
राज्य शिक्षक पुरस्कार से हैं सम्मानित-
डा होशियार सिंह हरियाणा सरकार द्वारा राज्य शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित हैं। राज्यपाल द्वारा उन्हें यह पुरस्कार वर्ष 2022 में मिला था। शिक्षा के क्षेत्र में भी अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं।
पर्यावरण प्रेमी हैं डा.साहब-
डा होशियार सिंह पर्यावरण से अति लगाव रखते हेें। अपने घर एवं पलट पर सैकड़ों पौधे लगा रखे हैं जिनकी प्रतिदिन समय निकाल कर सेवा करते हैं। पर्यावरण मित्र बतौर भी उन्हें सम्मान मिल चुके हैं। उनका कहना है कि समय रहते सभी को साइकिल प्रयोग करनी चाहिए। इससे देश का ईंधन भी बचेगा तथा सेहत भी बनी रहेगी।
 फोटो कैप्शन 01: साइकिल चलाता हुआ पूर्व विज्ञान अध्यापक डा होशियार सिंह।

 

 

 

 

विश्व साइकिल दिवस
  57 वर्षों से सुरेश कुमार लगा रहे हैं पंचर
-1969 में अधिकतम कमा लेते थे 4 रुपये

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कनीना की आवाज।
67 वर्षीय सुरेश कुमार भडफ़ निवासी ने अपनी 10 वर्ष की उम्र में साइकिल पंचर लगाने शुरू किए थे और आज 65 वर्ष की उम्र में भी पंचर लगा रहे हैं। उन्होंने साइकिलों का वह दौर देखा है जब एक साइकिल की कीमत 60 से 100 रुपये की होती थी। उस जमाने में साइकिल का क्रेज होता था। उन्होंने बहादुरगढ़, हरियाणा में अपनी पंचर की छोटे से पंप से दुकान शुरू की थी और आज कनीना में पंचर की दुकान लगाकर अपनी रोटी रोटी कमा रहे हैं।
सुरेश कुमार से संबंध में बात हुई तो उन्होंने बताया कि वह अधिकतम 4 रुपये कमा लेते थे जिसमें से एक रुपये स्टेट बैंक में खाते में जमा कर देते थे और महीने के 30 से 40 रुपये बचाकर शानदार जीवन जी रहे थे। एक दिन इतने पैसों का उसके पिता को पता चला तो उन पैसों से उनके लिए पंखा एवं घरेलू सामान खरीद कर लाये। सुरेश कुमार ने तीन-चार जमात पास की थी किंतु परिवार की आर्थिक हालात अच्छी न होने के कारण इस काम में जुट गए। वो बताते हैं कि एक हवा भरने का पंप खरीदा और काम शुरू कर दिया। 10 पैसे में पंचर लगाया जाता था। लगातार मेहनत करते थे। उस जमाने में इतने साइकिल सवार होते थे कि पंचर लगवाने वाले कतारबद्ध खड़े होते थे। उस वक्त साइकिल में हवा भरने का काम भी पंचर लगाने वाला ही करता था। यही कारण है कि दिन में 40 से 50 तक पंचर लगा पाते थे इसके अतिरिक्त साइकिल ठीक करने का काम भी करते थे जिनका अलग से चार्ज लेते थे। उस जमाने में जो साइकिल होती थी वह स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर मानी जाती थी। इंसान सभी कार्य साइकिल से करता था। मामूली सा खर्चा और सेहत के लिए लाभप्रद होने के कारण गरीब जन भी प्रयोग करते थे। धीरे-धीरे समय बदला और सुरेश कुमार 1994 में कनीना आ पहुंचे और साइकिल के पंचर लगाने का काम शुरू किया। वो बताते हैं कि वर्तमान में साइकिल इतनी कम हो गई है कि अधिकतम 10 पंचर लगा पाते हैं। वर्तमान में छोटे बच्चों की साइकिल का क्रेज बढ़ गया है। धनवान लोग साइकिल कम चलाते हैं, आज के दिन कम से कम 4200 की साइकिल आती है और अधिकतम हीरो की इलेक्ट्रानिक साइकिल 35000 हजार रुपये की आती है।
सुरेश कुमार बताते हैं कि एक इंसान जब अपने काम के प्रति समर्पित होता है तो निश्चित ही सफलता मिलती है। सुरेश कुमार काम के प्रति इतने समर्पित रहे कि आज भी दूर आज तक नाम है। यह ठीक है कि आज के युग में युवा पीढ़ी साइकिलों की तरफ कम मोटरसाइकिल को अधिक पसंद करती है। सड़क पर साइकिल चलाने वाले गरीब माने जाते हैं जबकि गाडिय़ों में चलने वाले लोग अमीर माने जाते हैं। उनका कहना है कि विदेश में इससे उलटा है। अमीर व्यक्ति अपनी सेहत के लिए साइकिल चलाते हैं। वैसे भी सरकार साइकिल चलाने वालों के लिए कोई विशेष प्रोत्साहन नहीं देती। इस बात का गम है। अगर साइकिल के प्रति सरकार विशेष प्रोत्साहन दे तो निसंदेह बहुत से लोग साइकिल चलाना शुरू कर देंगे। यह सत्य है कि शिक्षा विभाग ने छात्राओं के लिए जो दूर से आती है साइकिल मुफ्त देने का प्रावधान कर रखा है परंतु अच्छे दर्जे की साइकिल उन्हें भी नहीं मिल पाती।
साइकिल लगातार प्रयोग करें तो आदमी न तो बूढ़ा होता न ही पैरों की समस्या होगी। उनका कहना है कि आज के दिन हुए 2000 रुपये तक कमा लेते हैं फिर भी उसे जमाने के चार रुपए के मुकाबले कम हैं और वो खुशी नहीं मिल रही है।
कनीना क्षेत्र में अगर साइकिल चलाने वाले देखे जाए तो अधिकतम पांच व्यक्ति 20 सालों से अधिक वर्षों से साइकिल चला रहे हैं। आधुनिक युवा पीढ़ी अगर साइकिल चलाती है तो विशेष प्रकार की साइकिल प्रयोग करती है। साइकिल की कीमत अधिक है। ऐसे में सरकार को साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और कम से कम सप्ताह में एक दिन सभी वाहन चालक घर पर और आसपास साइकिल प्रयोग करें तो ऊर्जा की भी बचत हो सकती है। साइकिल चलाने वालों को समय-समय पर सम्मानित किया जाना चाहिए। वैसे तो साइकिल यूपी में चुनाव चिन्ह भी नेताओं का है किंतु हरियाणा में साइकिल चलाने वाले का क्रेज घटना ही जा रहा है। आने वाले समय में शायद विश्वास नहीं करेंगे कि हजारों की संख्या में लोग साइकिल चलते थे।
 फोटो कैप्शन:  सुरेश कुमार की फोटो साथ में
फोटो कैप्शन 08:  साइकिल के पंचर लगता हुआ सुरेश कुमार



















सड़क दुर्घटना में आमने सामने की टक्कर में युवक की दर्दनाक मौत।
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कनीना की आवाज। कनीना में गाहड़ा-बव्वा रोड पर सोमवार शाम को बुलेट सवार युवक की मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार नीरज वासी बब्बा अपनी मोटर साइकिल पर सवार होकर किसी काम से बाहर जा रहा था। तभी सामने से एक बाइक ने टक्कर मार दी और फरार हो गया । टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार बुरी तरह घायल हो गया। घायल को तुरंत उप नागरिक अस्पताल कनीना लेकर आए। लेकिन डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मंगलवार को मृतक का कनीना में पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला  दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।





संघर्ष, सेवा और मानवता की मिसाल बने पवन राठौड़ मोड़ी
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कनीना की आवाज।
महेंद्रगढ़ जिले के गांव मोड़ी निवासी समाजसेवी पवन कुमार राठौड़ आज सेवा, संघर्ष और मानवता के प्रतीक बन चुके हैं। 2 जनवरी 1985 को जन्मे पवन राठौड़ ने साधारण परिवार में जन्म लेकर कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी पहचान बनाई। सरकारी विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने गुरुग्राम, दिल्ली और एनसीआर में कंप्यूटर, मार्केटिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंस्टालेशन सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 20 वर्षों तक कार्य किया।
समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए उन्होंने आईसीटीएम सोशल फाउंडेशन की स्थापना की। संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण और मानव सेवा के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर शिक्षा, जरूरतमंद बच्चों की सहायता, पौधारोपण और पशु-पक्षी संरक्षण जैसे अनेक जनहितकारी अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
कोरोना महामारी के दौरान पवन राठौड़ और उनकी टीम ने जरूरतमंद परिवारों तक राशन एवं आवश्यक सामग्री पहुंचाकर मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी सेवा भावना के तहत वर्ष 2020 में बेसहारा और असहाय लोगों के लिए आश्रय स्थल की शुरुआत की गई, जो आज शांति कुंज प्रभुजन निवास के रूप में संचालित हो रहा है।
संस्था अब तक 60 से अधिक बेसहारा, मानसिक रूप से अस्वस्थ और लावारिस व्यक्तियों का उपचार करवाकर उन्हें उनके परिवारों से मिलवा चुकी है। इसके अलावा सामाजिक एवं पारिवारिक विवादों के समाधान में भी संस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पवन राठौड़ का मानना है कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है।उनका लक्ष्य भविष्य में आधुनिक अस्पताल, वृद्धाश्रम, महिला आश्रम, अनाथालय, पुनर्वास एवं कौशल विकास केंद्र स्थापित कर जरूरतमंद लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उनकी जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, सेवा भावना और सकारात्मक सोच से समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
फोटो कैप्शन: पवन राठौड़





यूपीईएस देहरादून के छात्र पहुंचे बीएमडी फाउंडेशन कार्यालय  
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कनीना की आवाज।
सामाजिक संस्था बीएमडी फाउंडेशन के कनीना स्थित कार्यालय पर यूनिवर्सिटी आफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) देहरादून के छात्रों सामाजिक समर इंटर्नशिप के लिए आगमन हुआ। संस्थान ने उनकी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूर्ण करवाते हुए इंटर्नशिप के बारे में जानकारी अवगत कराई। चेयरमैन लक्की राव सीगड़ा ने बताया कि  फाउंडेशन का सामाजिक इंटर्नशिप कार्यक्रम न सिर्फ खुद के बारे में ज़्यादा जागरूक बनाएगा, बल्कि उन्हें समाज की भलाई के लिए असरदार काम करने के लिए प्रेरित भी करेगा। उन्होंने कहा कि अच्छी इंटर्नशिप उन जरुरी स्किल्स को डेवलप करने के लिए जरूरी हैं जो आपको क्लासरूम में नहीं मिल सकती। इंटर्नशिप सामाजिक मुद्दों को सुलझाने, बदलाव को बढ़ावा देने और लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने पर भी फोकस करती हैं।
 चेयरमैन लक्की राव सीगड़ा ने बताया कि एनजीओ इंटर्नशिप छात्रों और युवाओं को सामाजिक कार्यों में योगदान देने और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का एक बेहतरीन माध्यम है। यह युवाओं के विचारों को मजबूत करती है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर प्रदान करती है।
गौरतलब हैं कि इस संस्था में विगत वर्ष विभिन्न संस्थाओं के छात्रों एवं युवाओं को सफलतापूर्वक सामाजिक इंटर्नशिप प्रदान कर चुके हैं।
फोटो कैप्शन 07: युवाओं का पंजीकरण करते हुए लक्कीराव




बाबा भैया सेवा दल 10वीं वर्षगांठ पर करेगा होनहार युवाओं एवं सेवानिवृत्त सम्मानित ग्रामवासियों का सम्मान
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कनीना की आवाज।
उपमंडल के ग्राम ककराला की सामाजिक संस्था बाबा भैया सेवा दल अपनी स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आगामी 20 जून 2026 को बाबा भैया लाइब्रेरी परिसर में भव्य समारोह आयोजित करेगा। इस विशेष अवसर पर गाव के होनहार युवाओं तथा विभिन्न सेवा क्षेत्रों से सेवानिवृत्त सम्मानित ग्रामवासियों को सम्मानित किया जाएगा।
पिछले 10 वर्षों से बाबा भैया सेवा दल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता एवं जनसेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। संस्था द्वारा संचालित बाबा भैया लाइब्रेरी क्षेत्र की एक प्रमुख अध्ययन केंद्र बन चुकी है।
संस्था द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2023 से अब तक शिक्षा एवं खेल के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जाएगा। इसमें अनेक परीक्षाएं उत्तीर्ण करने वाले युवा, विभिन्न प्रतियोगिताओं में चयनित प्रतिभागी, जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ी तथा अन्य उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले युवा शामिल किए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त, संस्था द्वारा 19 जून 2016 से अब तक विभिन्न सेवा क्षेत्रों से सेवानिवृत्त हुए ग्रामीणों को भी समारोह में सम्मानित किया जाएगा।  इन दोनों सम्मान समारोहों के लिए संस्था ने आनलाइन नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक व्यक्ति अथवा उनके परिजन गूगल फार्म के माध्यम से नामांकन दर्ज कर सकते हैं। नामांकन की अंतिम तिथि 10 जून 2026 निर्धारित की गई है।
फोटो कैप्शन 04: बाबा भैया सेवा दल के सदस्य ग्रामीणों को जागरूक करते हुए





विवाह की 25वीं वर्षगांठ पर गोशाला को 1 लाख का दिया सहयोग  
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कनीना की आवाज।
श्री कृष्ण गौशाला कनीना में अपनी वैवाहिक जीवन की रजत जयंती (25वीं वर्षगांठ) के शुभ अवसर पर सुरेंद्र कुमार  ने गायों के लिए एक लाख रुपए का सहयोग दिया है।
इस अवसर पर सुरेंद्र कुमार ने गोशाला में सवामणी का आयोजन कर गोवंश की सेवा की। उनके साथ ही उनकी बुआ ने गोमाता के प्रति अपनी अथाह श्रद्धा व्यक्त करते हुए 75 किलोग्राम गेहूं का दान किया। गौवंश को ताजा तरबूज खिलाकर सभी ने गोसेवा का आनंद लिया।
श्री श्याम मंडल ने लगाई सवामणी-
गोसेवक श्री श्याम मंडल कनीना ने भी सवामणी का आयोजन कर गौशाला के लिए 11,000 रुपए का सहयोग दिया।
भगत सिंह प्रधान ने कहा कि जीवन के खुशी के विशेष अवसरों को गौसेवा से जोडऩा समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
इस अवसर पर गौशाला प्रधान भगत सिंह, मेजर दुलीचंद, प्रधान  संदीप राठी, उपसचिव रामपाल, सुरेंद्र कुमार,महेंद्र साहब, सतनारायण गुप्ता, गुड्डू चौधरी, मुकेश बंसल, नवीन सिंगला, कपिल गर्ग, हंसराज गर्ग, पूनम गुप्ता आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 05: गोशाला में एक लाख का दान देते हुए
    06: गोशाला में सवामणी लगाते श्री श्याम सेवक मंडल पदाधिकारी


भारत निर्माण युवा दल ने नशे के खिलाफ छेड़ी जंग
-भडफ़ में सात दिवसीय चरित्र निर्माण शिविर का आगाज
-प्रदेश के कई जिलों के युवा ले रहे भाग
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कनीना की आवाज।
भारत निर्माण युवा दल हरियाणा की ओर से जिला के गांव भडफ़ में चलने वाले सात दिवसीय चरित्र निर्माण एवं प्रशिक्षण शिविर का सोमवार को वैदिक परंपराओं के अनुसार शुभारंभ हुआ। दूसरे दिन मंगलवार का दिन भी बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक उत्थान को समर्पित रहा।
श्रीमदभागवत सेवा आश्रम के स्वामी समर्पणानंद  महाराज के सानिध्य में आयोजित हवन-यज्ञ के साथ शुरू हुए इस शिविर का मुख्य उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का संचार करना है। इस कैंप में प्रदेश के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी, नूंह और झज्जर जिलों से आए युवाओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इस शिविर में वर्तमान में 50 विद्यार्थी, 20 वयस्क सहभागी और 10 प्रबंधन कार्यकर्ता सर्वांगीण विकास के इस कड़े अनुष्ठान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जहां उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक उत्थान पर विशेष बल दिया जा रहा है।
प्रतिदिन सुबह की शुरुआत योग, प्राणायाम और शारीरिक गतिविधियों से हो रही है, जिसके साथ ही युवाओं को आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जा रहे हैं ताकि वे आत्मनिर्भर और साहसी बन सकें।
भारत निर्माण युवा दल के संस्थापक अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह यादव ने इस अवसर पर युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि यदि युवा पीढ़ी को सही दिशा और संस्कार मिल जाएं, तो वे राष्ट्र निर्माण के सबसे बड़े संवाहक बन सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के दुरुपयोग, नशे की बढ़ती लत और सांस्कृतिक मूल्यों से विमुख होने को आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती बताया।
वहीं शिविर के वर्ग प्रमुख भगत सिंह कोठारी ने कहा कि भारत की महान ऋषि परंपरा और महापुरुषों का जीवन ही आज के भटके हुए युवाओं को सही मार्ग दिखा सकता है। इसी सोच के साथ शिविर में पारंपरिक जीवन पद्धति, ऋतु अनुकूल खान-पान और पारिवारिक मूल्यों पर गहन चर्चा की जा रही है।
डिजिटल युग की चुनौतियां और नशा मुक्त भारत का महासंकल्प--
आधुनिकता के इस दौर में यह शिविर केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समसामयिक विषयों को भी बेहद बारीकी से शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि शिविरार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और सोशल मीडिया के सकारात्मक व नकारात्मक पहलुओं से रूबरू कराया जा रहा है, ताकि वे तकनीक का उपयोग रचनात्मक कार्यों और शोध के लिए कर सकें। इसके साथ ही साइबर अपराध, आनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर भी युवाओं को जागरूक किया जा रहा है। बौद्धिक सत्रों के तहत व्याख्यान, समूह चर्चा, प्रश्नोत्तरी और व्यक्तित्व विकास के कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न जिलों से आए युवाओं में आपसी संवाद और सामूहिक नेतृत्व की भावना को सुदृढ़ किया जा रहा है।
शिविर में मौजूद सभी विद्यार्थियों, प्रशिक्षकों और प्रबंधकों ने नशीले पदार्थों, जंक फूड और अन्य हानिकारक वस्तुओं के सेवन से दूर रहने का सामूहिक संकल्प लिया।
फोटो कैप्शन 02:हवन यज्ञ के साथ शिविर का शुभारंभ।
फोटो कैप्शन 01:शिविर में मौजूद युवाओं को संबोधित करते अभिमन्यु राव।


कैमला में भारतीय भाषा समर कैंप आयोजित
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कनीना की आवाज।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में भारतीय भाषा समर कैंप में विभाग के निर्देश अनुसार कार्यशाला का आयोजन मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ की अध्यक्षता में किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए बताया कि भाषायी कौशलों के साथ-साथ भाषा को सीखना, व्यवहार और शिष्टाचार को अपनाना, गांव व शहरी  समुदाय के साथ परस्पर वार्तालाप के तौर-तरीकों  को अपनाना ,दिशाएं और स्थान का जानकारी के साथ -साथ बाजार में वस्तुओं की खरीददारी में व्यवहारिकता और कुशलता का परिचय देना, अन - जान जगह की जानकारी को प्राप्त करना तथा जीवन के प्रत्येक स्तर पर सभी का परिचय  जानना, अभिवादन, शिष्टाचार के बुनियादी तौर -तरीके पर आधारित एक्टिविटी विद्यालय प्रांगण में कराई गई। जिससे विद्यार्थियों को खेल-खेल में नवीनतम ,सृजनात्मक, उपचारात्मक ज्ञान की प्राप्ति के साथ नई आदतों का सृजन और शिष्टाचार की भावना  विकसित होती और आत्मविश्वास के साथ स्वाभिमान की भावना जागृत होती है तथा भय मुक्त शिक्षण एवं पाठ्यक्रम आधारित क्रियाकलापों से विकास होता है।
इस अवसर पर संजीत एबीआरसी क्लस्टर बूचावास  विशेष रूप से उपस्थित हुए और उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में उपयोगी और बहुमूल्य विचारों से अवगत कराया। इस मौके पर सुनील कुमार शास्त्री,वरिष्ठ अध्यापक सुनील कुमार, मनवीर सिंह तंवर विज्ञान अध्यापक,संजीत एबीआरसी ,सुनील कुमार डीटीएच चौकीदार ,सूबे सिंह पार्ट टाइम ,तारामणि देवी, राजकुमार पंच, यशपाल साहब आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: समर कैंप में जानकारी देते हुए मुख्याध्यापक

Monday, June 1, 2026



 



मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में कोताही बर्दाश्त नहीं, घर-घर जाकर करें सत्यापन -एसडीएम
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कनीना की आवाज।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल होना बेहद जरूरी है। निर्वाचन आयोग के इसी उद्देश्य को अमलीजामा पहनाने के लिए कनीना के एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को स्थानीय पंचायत भवन में बीएलओ (बूथ लेवल आफिसर्स) की समीक्षा बैठक ली।
बैठक में एसडीएम ने मतदाता सूची के अपडेशन और पुनरीक्षण कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की और निर्देश दिए कि इस काम में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह ने सभी बीएलओ को निर्देश दिए कि नए मतदाताओं के नाम जोडऩे, मृत व स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम सूची से हटाने और त्रुटियों को ठीक करने का काम पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि यह पूरा कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर संपन्न होना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि बीएलओ केवल कागजी औपचारिकता न निभाएं, बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों में फील्ड में उतरकर घर-घर जाएं। प्रत्येक परिवार का गंभीरता से मतदाता सत्यापन किया जाए ताकि कोई भी योग्य नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
बैठक के दौरान कानूनगो पूनम ने उपस्थित स्टाफ को निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों से अवगत कराया। उन्होंने बीएलओ को निर्देश दिए कि वे अपने रिकॉर्ड को पूरी तरह अपडेट रखें, ताकि स्क्रूटनी के समय किसी भी प्रकार की विसंगति सामने न आए।
बैठक में नए युवाओं को वोटर आईडी कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से बैठक में मतदाता जागरूकता अभियान पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
फोटो कैप्शन 06: कनीना के बीएलओ की बैठक लेते एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह।

प्रवक्ता सचिन शर्मा को मातृशोक
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कनीना की आवाज।
क्षेत्र के शिक्षाविद एवं प्रवक्ता सचिन  शर्मा की पूज्य माता  शकुंतला शर्मा का आकस्मिक निधन हो गया।  परिजनों, रिश्तेदारों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों एवं शुभचिंतकों ने गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
65 वर्षीय शकुंतला शर्मा, सेवानिवृत्त रेलवे गार्ड  सुरेन्द्र शर्मा की धर्मपत्नी थी। वे धार्मिक, सत्संगी एवं सरल स्वभाव की महिला थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन परिवार, समाज और धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित किया। परिवारजनों के अनुसार वे संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों की सजीव पाठशाला थीं, जिन्होंने अपने बच्चों को सदैव नैतिकता, ईमानदारी और मानवता का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी।
अपने पीछे वे भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके ज्येष्ठ पुत्र नवीन शर्मा एवं पुत्रवधू मीनू शर्मा हैं,जबकि कनिष्ठ पुत्र प्रवक्ता सचिन कुमार शर्मा एवं पुत्रवधू प्रवक्ता स्नेहलता शर्मा हैं। वहीं उनकी पुत्री नूतन शर्मा है।परिवार के सभी सदस्यों को उन्होंने प्रेम, अनुशासन और संस्कारों की अमूल्य विरासत प्रदान की। शकुंतला शर्मा के निधन पर डा. नरेंद्र शर्मा,बार एसोसिएशन पूर्व प्रधान एवं पार्षद दीपक चौधरी, बलवान सिंह प्रधान, अनिल गर्ग , संजय भारद्वाज,पूर्व पार्षद मोहन सिंह, मुकेश नंबरदार, प्रधान नीरज यादव, विनोद बंसल सहित क्षेत्र के अनेक शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य व्यक्तियों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जीवन सादगी, सेवा और आध्यात्मिकता का प्रेरणास्रोत था। उन्होंने न केवल अपने परिवार को मजबूत संस्कार दिए, बल्कि समाज में भी सदैव सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा दिया।
फोटो कैप्शन: शकुंतला शर्मा फाइल फोटो



टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत खेड़ा में विशेष स्क्रीनिंग शिविर आयोजित
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कनीना की आवाज।
 राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत रविवार को गांव खेड़ा में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत विशेष स्क्रीनिंग एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों की जांच कर टीबी के प्रति जागरूक किया तथा संभावित मरीजों के नमूने एकत्रित किए।
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अरुण चौधरी एवं बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता ऋषिराज आर्य के नेतृत्व में आयोजित शिविर के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर लोगों को टीबी के लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। शिविर में कुल 90 ग्रामीणों की टीबी संबंधी जांच की गई।
जांच के दौरान खांसी, बुखार, वजन कम होना और कमजोरी जैसे लक्षण पाए जाने पर 11 संभावित मरीजों के बलगम के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। आशा कार्यकर्ता अनीता एवं रामभतेरी ने शिविर के सफल संचालन में सहयोग करते हुए लोगों को जांच के लिए प्रेरित किया। सीएचओ अरुण चौधरी और स्वास्थ्यकर्मी ऋषिराज आर्य ने बताया कि केंद्र सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए प्रत्येक गांव में सक्रिय केस फाइंडिंग अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, शाम के समय बुखार, वजन में लगातार कमी या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवानी चाहिए। उन्होंने बताया कि टीबी का उपचार सरकार द्वारा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी मरीजों को उपचार अवधि के दौरान पोषण के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है।
शिविर के दौरान ग्रामीणों को टीबी से बचाव, पौष्टिक आहार के महत्व तथा सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की भी जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोगों से टीबी के प्रति जागरूक रहने और लक्षण दिखाई देने पर समय पर जांच करवाने की अपील की।
फोटो कैप्शन 04:
खेड़ा गांव में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत आयोजित स्क्रीनिंग शिविर







बाघोत में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कृष्ण जन्मोत्सव की धूम, श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे
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कनीना की आवाज।
उप-मंडल के गांव बाघोत में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथा स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पंडित राकेश कृष्ण शास्त्री  ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतार, बाल लीलाओं और धर्म स्थापना के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे।
कथा व्यास ने कहा कि जब पृथ्वी पर पाप, अत्याचार और अधर्म का बोलबाला बढ़ गया तथा कंस जैसे अत्याचारी शासकों के अत्याचारों से जनता त्रस्त हो गई, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की पुन: स्थापना की। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान ने कारागार में जन्म लेकर यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म को कोई भी शक्ति लंबे समय तक दबा नहीं सकती।
कथा में वासुदेव द्वारा नवजात कृष्ण को यमुना पार कर गोकुल पहुंचाने, पूतना वध, तृणावर्त वध, शकटासुर वध तथा माखन चोरी जैसी बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इन प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मानव जीवन को प्रेम, करुणा, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन कर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए तथा श्रद्धालुओं ने नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से कथा स्थल को गुंजायमान कर दिया। पूरा पंडाल भक्तिरस में सराबोर नजर आया। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाकर समाज में प्रेम, सद्भाव और संस्कारों का संदेश फैलाएं। कथा के अंत में आरती करके श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
फोटो कैप्शन 05: बाघोत में कथा श्रवण करते श्रद्धालु एवं भक्ति में लीन भक्तगण।





वर्षों से ठीक करते आ रहे खराब सीएफएल
- किसी वैज्ञानिक से कम नहीं है विजय वधवा की कार्यकुशलता
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कनीना की आवाज।
 यदि हाथों में कुछ करने का हुनर हो तो दिव्यांगता आड़े नहीं आती है। हिम्मत के पर्याय के रूप में कनीना का विजय वधवा जाना जाता है जो 83 प्रतिशत दिव्यांग है। डाक्टरों ने कहा था कि यह खड़ा भी नहीं हो सकेगा किंतु अपनी रोटी रोजी आज भी कमा रहा है। वो हरियाणा का पहला वैज्ञानिक कबाड़ से जुगाड़ बनाने के नाम से जाने जाते हैं।
कनीना बस स्टैंड के पीछे छोटी सी पुरानी दुकान में बैठकर खराब सीएफएल को ठीक करता है। कनीना में सबसे पहले खराब सीएफएल वो भी 10 रुपये में ठीक करने का अगर श्रेय उनको जाता है। वर्षों पहले इन्होंने अपने यहां सीएफएल ठीक करना शुरू किया और अच्छा नाम कमाया। 2017 में इनको हृदयघात आया और मेडिसिटी गुररुग्राम में भर्ती करवाना पड़ा। कान खराब हो गए, आंखों से दिखाई कम देने लगा और शरीर की एक साइड अधरंग हो गई। वर्तमान में 83 प्रतिशत दिव्यांग हैं परंतु हिम्मत नहीं छोड़ते हैं। उनकी हिम्मत के आगे सभी नतमस्तक होते हैं। प्रतिदिन 30 से 40 सीएफएल वर्तमान में भी ठीक कर लेते हैं जबकि उनके हाथ बड़ी मुश्किल से काम करता है। एक हाथ बिल्कुल काम नहीं करता। पैरों से चला नहीं जाता ,शरीर में कई दिक्कत आती है, चलने के लिए ट्राई साइकिल ले रखी है परंतु उनका एक ही उद्देश्य है कि किसी प्रकार अपनी रोटी रोटी खुद कमाये और दूसरों पर निर्भर न रहे। कहने को तो उनका परिवार है जो अच्छी खासी नौकरियों में है किंतु उन्होंने कभी काम से जी नहीं चुराया। पुरानी सीएफएल लाने वाले लोगों की सीएफएल ठीक करके देता है। यह काम करने को तो अनेकों  लोग कर रहे हैं परंतु जिन परिस्थितियों में विजय वधवा काम कर रहे हैं वो सराहनीय है। उसको देखकर लगता है कि सचमुच वह एक उदाहरण बनकर उभरा है।
विजय वधवा कबाड़ से जुगाड़ करने में भी महारत लिये हुए है। वर्ष 2008 में उन्होंने कबाड़ में पड़ी हुई खराब ट्यूबलाइट को महज अल्प राशि में ठीक करके देने का काम शुरू किया था और आज उन्होंने नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर बहरोड़, कोसली, नारनौल, अटेली, दादरी, सेहलंग एवं कनीना में अपने शिष्य छोड़ दिए हैं जो जन सेवा में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार को आइटीआइ में इस प्रकार का ट्रेड शुरू कर देना चाहिए ताकि वे प्रशिक्षण दे सके। उनका मानना है कि विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों में उनके नि:शुल्क प्रशिक्षण शिविर लगाने की अनुमति दी जाए ताकि वे बेरोजगारों को रोजगार की राह दिखा सके। उनकी तमन्ना है कि हर गांव में कम से कम एक व्यक्ति उनका यह प्रशिक्षण लेकर गांव की खराब लाइटों को ठीक करने लगे तो उनका नाम भी हो और बेरोजगारों को भी रोजगार मिल सके।   विजय वधवा के कानों में सुनने की मशीन, आंखों पर बड़े चश्मे, पास खड़ी ट्राइसाइकिल, बेंत नजर आते हैं किंतु उनके ग्राहक उन तक जरूर आ जाते हैं। धुआं रहित चिमनी वर्षों पहले से बना रहे हैं।
प्रारंभिक जीवन-
विजय वधवा ने मिडिल की परीक्षा गुढा से पास की और कनीना से 9वीं से 11वीं तक की पढ़ाई की। दस जमा दो कालेज से पास करने के बाद 1989 से 1991 तक दिल्ली इंस्टिट्यूट आफ़ मैनेजमेंट एंड सर्विसेज से इलेक्ट्रानिक्स का डिप्लोमा किया। वर्ष 1992 से सीएफएल सुधारने का अपना काम कर रहे हैं। उस जमाना में जब कोई भी सीएफएल को सुधारने वाला नहीं था तब से काम कर रहे हैं। रेडियो, टीवी तथा वीसीआर तकनीक सीखी और काम करने में सफलता हासिल की। लैंडलाइन फोन, कलर टीवी, वीसीआर, सरसों में तेल की मात्रा बताने वाली लैब, वाशिंग मशीन, माइक्रो ओवन की रिपेयरिंग की रिपेयरिंग में दक्षता हासिल की है। वर्तमान में 30 रुपए प्रति लाइट के हिसाब से ठीक करते हैं।
फोटो कैप्शन 03: विजय वधवा दिव्यांग होते हुए भी सीएफएल सुधारने का काम करते हुए।



 एनएसएस स्वयंसेवकों का चौथे दिन उत्कृष्ट प्रदर्शन
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कनीना की आवाज।
डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नारनौल में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) विशेष शिविर के चौथे दिन एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ककराला के स्वयंसेवकों ने विभिन्न सामाजिक जागरूकता गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। शिविर में विद्यार्थियों ने अनुशासन, सेवा भावना एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट परिचय दिया।
विद्यालय की प्राचार्या डा. शिप्रा सारस्वत ने बताया कि शिविर के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित वृक्षारोपण अभियान में स्वयंसेवकों ने पौधारोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया व स्वयंसेवकों ने सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के अंतर्गत आमजन को यातायात नियमों के पालन, हेलमेट एवं सीट बेल्ट के प्रयोग तथा सुरक्षित वाहन संचालन के प्रति जागरूक किया। विद्यार्थियों ने रैली और जनसंपर्क के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम का संदेश दिया।
विद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी देवव्रत यादव एवं धनराज के मार्गदर्शन में स्वयंसेवक शिविर की सभी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभा रहे हैं और समाज सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर रहे हैं।
विद्यालय के चेयरमैन जगदेव ने राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के कार्यों की प्रशंसा की तथा कहा कि भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं के विकास तथा सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि आपके द्वारा किए गए कार्य समाज को एक नई दिशा देने का काम करता है इसलिए आप सभी को अपने आसपास समाज में जागरूकता फैलाने का काम करना चाहिए। जो समाज को और देश को एक नई दिशा देगा।
फोटो कैप्शन 01: स्वयंसेवक पौधारोपण करते हुए


समाज में दान दहेज की प्रथा जारी
-दहेज पर लगनी चाहिए रोक-बजरंग एडवोकेट










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कनीना की आवाज। आज के समाज में जहां लड़कियों की कमी होती जा रही है फिर भी दान दहेज कम नहीं हो रहा है। विवाह शादियों में भारी दान दहेज दिया जाता है जो समाज के लिए कलंक है। ये विचार करीरा निवासी बजरंग एडवोकेट ने मुलाकात में व्यक्त किए।
 इस मौके पर बजरंग एडवोकेट ने कहा कि बहुत से ऐसे पिता होते हैं जो दान दहेज देते देते अपने घर और जमीन नीलाम कर देते हैं। एक लड़की की शादी के लिए इतना दान दहेज देना पड़ता है तो भविष्य कैसा होगा जबकि कहावत है- दुल्हन ही दहेज है और उसके अतिरिक्त दान दहेज लेना और देना समाज के लिए एक बुराई साबित होता है। आज के समय किसी के घर लड़की पैदा हो जाती है तो खुशियां बहुत कम मनाई जाती है जबकि लड़का पैदा होने पर खूब खुशियां मनाई जाती है क्योंकि लड़का होने पर दान दहेज से तो बच जाते हैं। यदि दान दहेज खत्म हो जाए तो समाज में लड़कियों की भी पैदा होने पर लोग बहुत खुश होंगे।
 उन्होंने कहा कि विवाह शादी प्रेम पर आधारित है। दो परिवारों के बीच संबंध को इंगित करता है किंतु जब दान दहेज बीच में आ जाता है तो दो परिवारों के बीच में दरार का काम करता है। इस दान दहेज की प्रथा से अगर बच जाए तो समझो समाज की अधिकांश बुराइयां समाप्त हो जाएंगी। वरना यह तन दहेज न जाने कितनी लड़कियों और कितने माता-पिताओं को लील लेगा। कुछ उदाहरण एक रुपए लेकर शादी करने के सामने आए हैं जो मन में खुशी भर देते हैं। इस मौके पर ओमप्रकाश भट्टी, मनोज कुमार, धर्मपाल एडवोकेट, केके भट्टी, बाल किशन और श्री कृष्ण वैद्य सहित कई जन मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 11:बजरंग एडवोकेट एवं अन्य जानकारी देते हुए

Sunday, May 31, 2026



 


समाज में दान दहेज की प्रथा जारी-बजरंग एडवोकेट
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कनीना की आवाज।
 आज के समाज में जहां लड़कियों की कमी होती जा रही है फिर भी दान दहेज कम नहीं हो रहा है। विवाह शादियों में भारी दान दहेज दिया जाता है जो समाज के लिए कलंक है। ये विचार करीरा निवासी बजरंग एडवोकेट ने रिया और नरेश की शादी दौरान मुलाकात में व्यक्त किए।
 इस मौके पर बजरंग एडवोकेट ने कहा कि बहुत से ऐसे पिता होते हैं जो दान दहेज देते देते अपने घर और जमीन नीलाम कर देते हैं। एक लड़की की शादी के लिए इतना दान दहेज देना पड़ता है तो भविष्य कैसा होगा जबकि कहावत है- दुल्हन ही दहेज है और उसके अतिरिक्त दान दहेज लेना और देना समाज के लिए एक बुराई साबित होता है। आज के समय किसी के घर लड़की पैदा हो जाती है तो खुशियां बहुत कम मनाई जाती है जबकि लड़का पैदा होने पर खूब खुशियां मनाई जाती है क्योंकि लड़का होने पर दान दहेज से तो बच जाते हैं। यदि दान दहेज खत्म हो जाए तो समाज में लड़कियों की भी पैदा होने पर लोग बहुत खुश होंगे।
 उन्होंने कहा कि विवाह शादी प्रेम पर आधारित है। दो परिवारों के बीच संबंध को इंगित करता है किंतु जब दान दहेज बीच में आ जाता है तो दो परिवारों के बीच में दरार का काम करता है। इस दान दहेज की प्रथा से अगर बच जाए तो समझो समाज की अधिकांश बुराइयां समाप्त हो जाएंगी। वरना यह तन दहेज न जाने कितनी लड़कियों और कितने माता-पिताओं को लील लेगा। कुछ उदाहरण एक रुपए लेकर शादी करने के सामने आए हैं जो मन में खुशी भर देते हैं। इस मौके पर ओमप्रकाश भट्टी, मनोज कुमार, धर्मपाल एडवोकेट, केके भट्टी, बाल किशन और श्री कृष्ण वैद्य सहित कई जन मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 11:रिया और नरेश की शादी में दान दहेज की बुराई के बारे में जिक्र करते बजरंग एडवोकेट





व्यापारियों के पुराने टैक्स बकाया से मुक्ति का सुनहरा मौका
-हरियाणा सरकार ने शुरू की एकमुश्त निपटान स्कीम-2026
छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत, एक लाख तक का बकाया अब पूरी तरह माफ
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कनीना की आवाज।
हरियाणा सरकार ने प्रदेश के व्यापारी वर्ग को बड़ी राहत देते हुए एक बार फिर एकमुश्त निपटान स्कीम-2026 का आगाज कर दिया है। यह योजना आगामी 120 दिनों तक रहेगी।
यह जानकारी देते हुए डीईटीसी (सेल टैक्स) प्रियंका यादव ने बताया कि साल 2025 में इस योजना की अपार सफलता और 1.15 लाख से अधिक व्यापारियों द्वारा इसका लाभ उठाए जाने के बाद, सरकार ने इसे दोबारा लागू करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य पुराने टैक्स विवादों को खत्म करना और व्यापारियों को अदालती मुकदमों से मुक्त कर एक स्वच्छ कारोबारी माहौल देना है, ताकि भविष्य में पूरा ध्यान जीएसटी संग्रह पर केंद्रित किया जा सके। यह योजना 1 जून 2026 से प्रभावी हो चुकी है और आगामी 120 दिनों तक यानी 28 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी।
प्रियंका यादव ने स्पष्ट किया कि इस बार सरकार ने छोटे व्यापारियों का विशेष ख्याल रखा है। यदि किसी व्यापारी पर किसी एक वर्ष में 1 लाख रुपये तक का टैक्स बकाया है, तो उसे योजना के लिए आवेदन करने तक की आवश्यकता नहीं है; उनका कर, ब्याज और जुर्माना स्वत: ही माफ मान लिया जाएगा। यह स्कीम कुल सात अलग-अलग कराधान अधिनियमों के तहत पुराने बकायों पर लागू होगी। विशेष रूप से 1973 के पुराने बिक्री कर अधिनियम के मामलों में, जहाँ बकाया बहुत पुराना है, 1 लाख से अधिक की राशि पर 70 प्रतिशत तक की भारी छूट दी जा रही है। इसके अलावा जिन व्यापारियों के मामले सिर्फ इसलिए फंसे हुए थे क्योंकि वे समय पर जरूरी वैधानिक फॉर्म (जैसे फॉर्म सी, एफ या एच) जमा नहीं कर पाए थे, उन्हें भी अब ये फॉर्म जमा कर अपने टैक्स की मांग कम करवाने का मौका दिया गया है, बशर्ते वे फर्जी फर्मों की श्रेणी में न आते हों।
योजना की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने भुगतान की प्रक्रिया को भी बेहद लचीला बनाया है।
उन्होंने बताया कि जो व्यापारी अदालतों में लंबित अपने मुकदमों को वापस लेने को तैयार हैं, वे भी इस राहत का हिस्सा बन सकते हैं। बकाया राशि चुकाने के लिए किस्तों की सुविधा भी दी गई है, जहाँ 5 लाख से अधिक और 25 लाख तक की राशि को दो किस्तों में और 25 लाख से अधिक की राशि को तीन आसान किस्तों में चुकाया जा सकता है। एक बार आवेदन सही पाए जाने और स्वीकार होने के बाद, संबंधित व्यापारी के खिलाफ उस मामले में भविष्य में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक शांति मिल सकेगी।
जानिए कितना मिलेगा लाभ--
इस योजना के तहत हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम 1973 के मामलों में 1 लाख तक 100 प्रतिशत और उससे अधिक पर 70 प्रतिशत टैक्स छूट के साथ पूरा ब्याज व जुर्माना माफ है। अन्य छह अधिनियमों के अंतर्गत भी स्लैब के अनुसार राहत दी गई है, जिसमें 1 लाख तक 100 प्रतिशत, 10 लाख तक 60 प्रतिशत, और 1 करोड़ तक के बकाये पर 50 प्रतिशत टैक्स की छूट शामिल है। जैसे-जैसे बकाया राशि बढ़ती है, छूट का प्रतिशत 30 प्रतिशत तक आता है, लेकिन सभी श्रेणियों में ब्याज और जुर्माने की शत-प्रतिशत माफी व्यापारियों के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरी है।






सफर सृष्टि का लोकार्पण
-मुख्य अतिथि पद्म-भूषण हुकमदेव नारायण यादव थे
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कनीना की आवाज।
धारूहेडा में स्थित जंगल बैबलर ट्यूरिज्म कंपलैक्स में मित्र राधेश्याम गोमला द्वारा रचित सफर सृष्टि काÓ का लोकार्पण हुआ।  पुस्तक लोकार्पण के मुख्य अतिथि पद्म-भूषण हुकमदेव नारायण यादव थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मनोज कुमार यादव (आईएएस) ने की। पुस्तक की समीक्षा प्रकाशक डाक्टर अशोक कुमार मंगलेश, वरिष्ठ साहित्यकार व कोसली कालेज की प्राचार्या डाक्टर लाज कौशल, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र सिंह यादव, एडवोकेट रणजीत सिंह और लोकसभा चैनल के एंकर रामवीर श्रेष्ठ ने की।
वरिष्ठ साहित्यकार मनोज गौतम ने कार्यक्रम का सफल मंच संचालन किया।
टाइगर क्लब नारनौल की ओर से मुख्य अतिथि को गदा भेंट कर सम्मानित किया।
हुकमदेव नारायण यादव ने अपने संबोधन में अनेक उदाहरण देते हुए बताया कि साहित्य का समाज सुधारने और आगे बढ़ाने में विशेष योगदान रहता है। उन्होंने कहा कि लेखक के बाद साहित्य उसे अमर बना देता है।
यादव ने बताया कि सफर सृष्टि का पुस्तक भविष्य में अनेक साहित्यकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगी।
पुस्तक समीक्षकों ने सार स्वरूप बारी बारी कहा कि पुस्तक सफर सृष्टि का एक ऐसी बहुआयामी कृति है, जो विज्ञान, इतिहास, दर्शन, अध्यात्म और मानव सभ्यता के विकास को एक ही वैचारिक धारा में प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। यह पुस्तक केवल घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण नहीं है, बल्कि मानव की सनातन जिज्ञासा—मैं कौन हूँ, कहां से आया हूँ और भविष्य में कहां जा सकता हूं?—का उत्तर खोजने का एक गंभीर साहित्यिक उपक्रम है। लेखक ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर संभावित भविष्य के प्रकाश-मानव तक की यात्रा को रोचक, संवादात्मक और विचारोत्तेजक शैली में प्रस्तुत किया है। यही कारण है कि यह पुस्तक सामान्य ज्ञानग्रंथों से अलग एक विशिष्ट पहचान बनाती है।
पुस्तक का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष इसका विषय-विस्तार है। लेखक ने सिंगुलैरिटी, बिग-बैंग, बिग-बॉउन्स, ग्रह-निर्माण, जैव-विकास, होमो-सेपियन्स, प्राचीन सभ्यताओं, वेदों, संवतों, इतिहास, मानव स्वभाव, आत्मा, चेतना और भविष्य की वैज्ञानिक संभावनाओं जैसे अनेक विषयों को एक ही संरचना में समाहित किया है। इतने व्यापक विषय को एक पुस्तक में समेटना स्वयं में चुनौतीपूर्ण कार्य है। लेखक ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए पाठक के सामने एक ऐसी बौद्धिक यात्रा रखी है, जो उसे समय और ज्ञान के विशाल विस्तार में विचरण कराती है।
इस कृति की सबसे मौलिक उपलब्धि इसकी पाडकास्टीय-चंपू शैली है। लेखक ने आधुनिक पाडकास्ट की संवादात्मक पद्धति को साहित्यिक चंपू परंपरा के साथ जोड़कर एक नवीन शैली का निर्माण किया है। पुस्तक के दो प्रमुख पात्र - बीर श्रेष्ठ और मित्र पुनीतानंद, प्रश्न और उत्तर के माध्यम से विषयों को आगे बढ़ाते हैं। यह शैली पाठक को केवल पढऩे तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे संवाद का सहभागी बना देती है। अनेक स्थानों पर ऐसा अनुभव होता है जैसे पाठक किसी बौद्धिक चर्चा को सुन रहा हो। यह प्रयोग विशेष रूप से आधुनिक युवा पाठकों को आकर्षित करने की क्षमता रखता है।
पुस्तक का प्रथम खंड ब्रह्मांड और जीवन की उत्पत्ति पर केंद्रित है। लेखक ने बिग-बैंग सिद्धांत, सिंगुलैरिटी और ब्रह्मांडीय विकास की वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाने का प्रयास किया है। साथ ही उन्होंने वैदिक साहित्य, विशेषकर ऋग्वेद के नासदीय सूक्त और अन्य वैदिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए यह दिखाने का प्रयास किया है कि सृष्टि के रहस्यों पर चिंतन केवल आधुनिक विज्ञान की देन नहीं है, बल्कि प्राचीन भारतीय मनीषा भी इस विषय पर गंभीर विचार कर चुकी है। लेखक विज्ञान और अध्यात्म को विरोधी नहीं, बल्कि समान प्रश्नों के भिन्न उत्तर खोजने वाली परंपराओं के रूप में देखते हैं। यही दृष्टिकोण पुस्तक को विशिष्ट बनाता है।
दूसरे खंड में मानव सभ्यताओं और सांस्कृतिक विकास की चर्चा है। मेहरगढ़, राखीगढ़ी, धोलावीरा, सिंधु-सारस्वत सभ्यता, सुमेर, मिस्र और अन्य प्राचीन सभ्यताओं का उल्लेख पुस्तक को वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है। लेखक भारतीय सभ्यता की प्राचीनता और महत्ता पर बल देते हैं, परंतु साथ ही विश्व की अन्य सभ्यताओं के योगदान को भी स्वीकार करते हैं। इससे पुस्तक में संतुलन बना रहता है। विभिन्न संवतों, ग्रंथों और ऐतिहासिक घटनाओं का समावेश पाठक को मानव विकास की दीर्घकालिक यात्रा का बोध कराता है।
पुस्तक का तीसरा खंड भविष्य और चेतना से संबंधित है। यहाँ लेखक केवल अतीत का वर्णन नहीं करते, बल्कि मानव के संभावित भविष्य पर भी विचार करते हैं। आत्मा, मस्तिष्क, चेतना, स्वभाव, सामाजिक मर्यादाएँ और वैज्ञानिक संभावनाएँ इस खंड के प्रमुख विषय हैं। प्रकाश-मानव की अवधारणा लेखक की भविष्य-दृष्टि को अभिव्यक्त करती है। यह भाग पाठक को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि मानव विकास अभी पूर्ण नहीं हुआ है और विज्ञान तथा चेतना के नए आयाम भविष्य में मानव जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।
भाषा की दृष्टि से पुस्तक सरल, सहज और प्रभावशाली है। लेखक ने कठिन वैज्ञानिक और दार्शनिक अवधारणाओं को भी सामान्य हिन्दी में प्रस्तुत किया है। बीच-बीच में प्रयुक्त पद्यांश, दोहे और छंद पुस्तक को साहित्यिक गरिमा प्रदान करते हैं। संवादों के बीच काव्यात्मक अभिव्यक्तियाँ पाठक की रुचि बनाए रखती हैं। यह गुण पुस्तक को केवल ज्ञानपरक नहीं, बल्कि साहित्यिक भी बनाता है।
लेखक की अध्ययनशीलता और परिश्रम पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में दिखाई देते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक शोधों, पुरातात्विक खोजों, ऐतिहासिक तथ्यों और प्राचीन ग्रंथों का व्यापक उपयोग किया है। साथ ही वे यह स्वीकार करते हैं कि उनका उद्देश्य अंतिम सत्य की घोषणा करना नहीं, बल्कि उपलब्ध ज्ञान को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करना है। यह विनम्रता पुस्तक की विश्वसनीयता को बढ़ाती है।
हालांकि आलोचनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो पुस्तक की कुछ सीमाएं भी हैं। कई स्थानों पर विज्ञान और अध्यात्म के बीच स्थापित समानताएँ दार्शनिक रूप से आकर्षक अवश्य हैं, किंतु उन्हें वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता। कुछ संवाद अपेक्षाकृत लंबे हैं और विषय-विस्तार के कारण कभी-कभी सूचनाओं की अधिकता भी अनुभव होती है। फिर भी ये सीमाएँ पुस्तक की मूल शक्ति को कम नहीं करतीं। इसके विपरीत, वे इस तथ्य की ओर संकेत करती हैं कि लेखक ने अत्यंत व्यापक विषय को समेटने का साहस किया है।
समग्र रूप से 'सफर सृष्टि का एक महत्त्वपूर्ण, मौलिक और विचारोत्तेजक कृति है। यह पुस्तक पाठक को ब्रह्मांड की विराटता, मानव सभ्यता की जड़ों और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करती है। विज्ञान, इतिहास, दर्शन और अध्यात्म के समन्वय का जो प्रयास इस पुस्तक में दिखाई देता है, वह हिन्दी साहित्य में अपेक्षाकृत दुर्लभ है। ज्ञान और जिज्ञासा की यह यात्रा पाठक को केवल बाहरी संसार से नहीं, बल्कि अपने भीतर के प्रश्नों से भी परिचित कराती है। यही इस कृति की सबसे बड़ी उपलब्धि और स्थायी महत्ता है।
इस अवसर पर एडवोकेट सुदेश यादव, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक डॉक्टर एच डी यादव, पर्यटन विभाग के ए जी एम एच एस यादव, कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉक्टर अजय यादव, सुप्रसिद्ध हास्यकवि हलचल हरियाणवी, सुप्रसिद्ध दोहाकार रघुविंद्र यादव, सिंघानिया विश्वविद्यालय के कैंपस उप कुलपति प्यार सिंह जस्सल, एक सीएसआर कंपनी के हैड दीपक यादव, सिंघानिया विश्वविद्यालय के पूर्व कैंपस उप-कुलपति पवन त्रिपाठी,  एडवोकेट अतरलाल,  प्राचार्य दिनेशकुमार यादव,  प्रोफेसर सविता मंगलेश, आशुकवि दलबीर सिंह फूल, बिजली विभाग के एकाउंट अधिकारी बलबीर सिंह, हरियाणा कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष महावीर पहलवान, साहित्यकार  त्रिलोकचन्द फतेहपुरी, प्राचार्य सूरत सिंह धनोंदा, सामाजिक कार्यकर्ता अजीतवीर यादव, मुख्याध्यापक धर्मेंद्र यादव, वरिष्ठ साहित्यकार सुंदरलाल, लेखक नेमीचंद् शास्त्री, साहित्यकार शुभराम खालेटा, बिजली विभाग के उपमंडल अधिकारी बी डी यादव,दीपक यादव जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी, धर्मबीर बीडीपीओ, दिनेश कुमार समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी, समाजसेवी महावीर यादव,मास्टर रामकिशन यादव,दिल्ली पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर प्रदीप यादव, टाइगर क्लब के संरक्षक राकेश यादव टाइगर, बिट्टू लाम्बा,  वरिष्ठ साहित्यकार श्रीभगवान बव्वा, अजीत सांवरिया, सुनील यादव व सरपंच मिंटू गोमला सहित गणमान्य लोग उपस्थित है।
फोटो कैप्शन 12: संबंधित है

विश्व दूध दिवस
-दूध के बल पर पाई है नीतू गुढ़ा ने राष्ट्र स्तर पर
-दूध न केवल आहार है बल्कि जीवन का आधार है
-नीतू डेरी से प्रतिदिन जाता है 900 लीटर दूध 
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कनीना की आवाज।















 दूध नाम लेते ही सेहत के राज की याद आती है वही नीतू यादव गुढ़ा निवासी को दूध ने मालामाल कर दिया। वो दूध के बल वो दूध के बल पर फर्श से अर्श तक पहुंच गई है। कभी पांच गायों से अपना दूध से संबंधित सफर शुरू किया और आज 100 गाये उनके पास है। जिनसे सर्दियों में 1400 लीटर प्रति दिन तो गर्मियों में 900 लीटर प्रति दिन दूध डेरी तक पहुंच रहा है। उनका दूध पूरे ही राष्ट्र में जाता है। 1995 में गुढ़ा में पवनवीर नामक बेरोजगार व्यक्ति के नीतू यादव की शादी हुई तब तक नीतू ने 10 जमा दो और आईटीआई कटिंग टेलरिंग का कोर्स कर रखा था। गुढ़ा आने के बाद उनके सामने नौकरी की समस्या सामने मुंह बाए खड़ी थी चूंकि उनके पति पवनवीर बेरोजगार थे जो वर्तमान में बाबू पद पर कार्यरत हैं।
 नीतू ने देखा कि उनके जमीन जायदाद तो है किंतु बहुत अधिक चारा बेकार जाता है। तूड़ी, कड़बी, हरा चारा कितना ही बेकार चला जाता था। जिसके चलते उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए पांच गायों से दूध का सफर शुरू किया प्रारंभ में तो दोधिए को ही दूध दिया जाता था और लोकल में ही दूध पहुंच पा रहा था किंतु धीरे-धीरे 2013 तक गायों की संख्या बढ़ा ली और अमूल डेरी को दूध प्रदान करने लगी। धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ती चली गई। वर्तमान में गायों की संख्या एक सौ से अधिक पहुंच गई है। इनमें से दूध देने वाली 45 गाये हैं जो अधिकतम 70 लीटर प्रति दिन दूध देती हैं। घर परिवार के लिए दो भैंस भी पाल रखी हैं। दूध से जो आय हो रही है वह डेढ़ से 2 लाख प्रतिमाह पहुंच रही है। उनको देखकर जयपाल गुढ़ा ने भी एक सौ के करीब गाये पालकर डेरी शुरू कर दी। अनेक लोग हैं जो उनके पदचिह्नों पर चल रहे हैं और कुछ चलने का प्रयास कर रहे हैं।
 दूध के बल पर नीतू ने न केवल अपने स्तर को ऊंचा उठाया अपितु अपनी पुत्री मोनिका को एमबीबीएस करवाया। वर्तमान में वो पीजी की तैयारी कर रही है वही उनका पुत्र कुणाल दस जमा दो मेडिकल में पढ़ाई कर रहा है। वर्तमान में कहीं भी पूछा जाए नीतू डेरी का नाम प्रसिद्ध है। जिले में अमूल का आधार भी नीतू डेरी बनती जा रही है। दूध के बल पर उनका सफर बढ़ता ही जा रहा है। उन्होंने वर्तमान में बड़ी डेरी का निर्माण किया है जिसमें सभी कार्य स्वयं संचालित होंगे अर्थत आटोमेटिक होंगे। उनकी दूध के क्षेत्र में ख्याति के दृष्टिगत 2018 में चैनई  में, 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मान दिया। वही 2022 में भिवानी में उनकी गाय चैंपियन रही। 2022 में भिवानी में मनोहर लाल खट्टर ने उनकी गायों के कारण उन्हें सम्मानित किया। 2022 में  ही लाडवा में भी उन्हें पुरस्कृत किया गया। 2026 में झज्जर में उनका अनेक पुरस्कार मिले। 2026 में ही उनकी गाय पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर रही।
 नीतू का कहना है कि दूध उनके लिए न केवल आहार है बल्कि जीवन का आधार है। जिन्होंने उनकी जिंदगी को संवार दिया है। आज घर की हालत बेहतरीन बन गई है। दूध के कारण ही उनका नाम दूरदराज तक विख्यात है। बुजुर्ग प्राय आशीर्वाद देते आए हैं- दंूधो नहाओ, फूलों फलों अर्थात दूध न केवल पीना अपितु दूध से भी नहाना भी है और आगे उन्नति के शिखर पर चलते जाना है। नीतू गुढ़ा यह कहावत चरितार्थ कर रही है।  
फोटो कैप्शन 9 व 10: नीतू यादव गुढ़ा डेरी संचालिका गायों के साथ


अहीर रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर दौंगड़ा अहीर में 36 बिरादरी की ऐतिहासिक महापंचायत, सर्वसमाज ने भरी हुंकार
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कनीना की आवाज।
अहीर रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर रविवार को ऐतिहासिक गांव दौंगड़ा अहीर स्थित रजवाड़ा फोर्ट में 36 बिरादरी की एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, जयपुर, बहरोड़ तथा आसपास के अनेक क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे समाज की एकजुटता और जागरूकता का परिचय मिला।
महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि अहीर समाज का देश की सेना और राष्ट्र सेवा में गौरवशाली योगदान रहा है। समाज लंबे समय से अहीर रेजिमेंट के गठन की मांग करता आ रहा है। इस मांग को लेकर खेड़की दौला सहित विभिन्न स्थानों पर भूख हड़ताल, धरना-प्रदर्शन और जनजागरण अभियान चलाए गए हैं तथा समाज आज भी पूरी मजबूती के साथ अपने अधिकार की आवाज बुलंद कर रहा है।
महापंचायत में पूर्व सैनिकों और सैन्य अधिकारियों की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम में कैप्टन रतन सिंह, कैप्टन दलीप सिंह जावा, कैप्टन पुंशिका, कैप्टन लालाराम नागतिहाड़ी, सूबेदार मेजर धर्मदेव, आनरेरी कैप्टन हरिओम रेवाड़ी, हवलदार जय किशन तथा सूबेदार सूबे सिंह गुरुग्राम सहित अनेक पूर्व सैनिकों ने भाग लिया और अपने अनुभव साझा करते हुए अहीर रेजिमेंट गठन की मांग का समर्थन किया।
अहीर रेजिमेंट समिति दौंगड़ा अहीर की ओर से प्रधान दलीप सिंह, कैप्टन महादेव सिंह, हेड क्लर्क बनी सिंह, कैप्टन पवन कुमार, सूबेदार सत्यप्रकाश, सूबेदार सतबीर, हवलदार कृष्ण कुमार यादव, सुरेंद्र सिंह, ओमप्रकाश एवं लालचंद साहब सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
महापंचायत में साध्वी पुष्पा आर्या, जलयुद्ध नायक रघु यादव, विजय सोमानी, डॉ. अभयराम, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सत्यवीर झुकिया, अनिल भगड़ाना, मोहित यादव (दिल्ली), दीपिका यादव (रेवाड़ी) तथा इंदु यादव (बधवाना) सहित विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि अहीर समाज ने देश की सुरक्षा और सैन्य परंपरा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए अहीर रेजिमेंट का गठन केवल एक मांग नहीं बल्कि समाज के सम्मान, गौरव और वीर सैनिकों के योगदान को उचित पहचान दिलाने का विषय है।
इस अवसर पर अरुण यादव खेड़की दौला, राजेंद्र कमांडेंट, महेश शर्मा जयपुर, कप्तान शिवराज गिलोथ, ओमप्रकाश राजपूत, राव नरेंद्र यादव गुरुग्राम, एस.एस. यादव पालम विहार, कप्तान देशराज बेरावास, अमित यादव (उपाध्यक्ष एनएसयूआई बहरोड़), विनोद कुमार नांगल चौधरी, दिनेश यादव जयपुर, सूबेदार कृष्ण यादव जावा, कैलाश पालड़ी (पूर्व सरपंच) सहित अनेक सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
महापंचायत में कलवाड़ी, मुंडिया खेड़ा, अटाली, बेवल, भालखी, सिलारपुर, सीहमा, सुंदरह, बवानिया सहित आसपास के अनेक गांवों से आए लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान रजवाड़ा फोर्ट परिसर लोगों से खचाखच भरा रहा और पूरे आयोजन में सामाजिक एकता का माहौल देखने को मिला।
महापंचायत के अंत में सर्वसमाज के लोगों ने एकजुट होकर अहीर रेजिमेंट गठन के समर्थन में जोरदार हुंकार भरी तथा संकल्प लिया कि जब तक अहीर रेजिमेंट का गठन नहीं हो जाता, तब तक यह संघर्ष शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। उपस्थित लोगों ने समाज की एकता, संगठन और अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
फोटो कैप्शन:
दौंगड़ा अहीर स्थित रजवाड़ा फोर्ट में रविवार को अहीर रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर आयोजित 36 बिरादरी की विशाल महापंचायत में बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीण, महिलाएं, पूर्व सैनिक एवं सामाजिक प्रतिनिधि।
फोटो कैप्शन 08: अहीर रेजिमेंट के लिए महापंचायत




आर्य समाज गाहड़ा में मासिक यज्ञ संपन्न, भजनों से गुंजायमान हुआ वेद मंदिर परिसर।
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कनीना की आवाज।
वेद प्रचार मंडल एवं आर्य समाज गाहड़ा के तत्वावधान में रविवार को मासिक यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ किया गया।
     आर्य समाज के प्रधान शिक्षाविद रामेश्वर दयाल शास्त्री  की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।  अपने उद्बोधन में उन्होंने  कहा कि यज्ञ समाज में शांति, शुचिता और आपसी सद्भाव का संदेश देता है।
उन्होंने  शिक्षा और संस्कारों के मेल पर बल देते हुए कहा की वेदों का ज्ञान ही मानव जीवन के कल्याण का सच्चा मार्ग है। नई पीढ़ी को आर्य समाज के सिद्धांतों और वैदिक संस्कृति से जोडऩा आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
   जिसमें पंडिता मनीषा आर्या ने ब्रह्मतत्व निभाया, यजमान के रूप में अनिल आर्य स्वदेशी नवनियुक्त वेद प्रचार मंडल के उप मंत्री व वैदिक पुरोहित पंडित रविन्द्र कुमार आर्य  द्वारा पूर्ण विधि-विधान और वैदिक रीति-नीति से यज्ञ संपन्न कराया गया। वैदिक  मंत्रोच्चारण और पावन आहुतियों से पूरा वातावरण भक्तिमय और सुगंधित हो उठा। श्रद्धा से यज्ञ करके यज्ञ कर्ताओं ने आत्मिक प्रसन्नता व संतुष्टि का अनुभव करते हुए आनंद की अनुभूति की।
         वेद प्रचार मंडल के जिला महेंद्रगढ़ के  प्रधान धर्मवीर सिंह आर्य खातौली के कुशल नेतृत्व में महेंद्रगढ़ की पावन धरा पर वेदवाणी की जो अलख जगाई जा रही है, वह अद्वितीय है। कार्यकारिणी में अनिल आर्य स्वदेसी को घर-घर यज्ञ के प्रचार प्रसार के प्रयासों, निस्वार्थ सेवा भाव, समर्पण हेतु ऋषि दयानंद के सपनों को साकार करने की तड़प को देखते हुए उप मंत्री का दायित्व मिला है। आर्य समाज गाहड़ा द्वारा अगाध श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक पगड़ी व गायत्री पट्टका पहनाकर उनका सम्मान करते हुए स्वयं को गौरवान्वित और कृतज्ञता  का अनुभव किया।
   अनिल आर्य स्वदेशी ने वेद प्रचार की मुहिम को तेज करने की बात कही। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य घर-घर तक वेदों का संदेश पहुंचाना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इस तरह के साप्ताहिक यज्ञों के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों को दूर किया जा सकता है।
 मास्टर जगन्नाथ  ने युवाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा, आर्य समाज सामाजिक सुधार का एक सशक्त मंच है। युवाओं को आगे आकर इस पावन अभियान का हिस्सा बनना चाहिए ताकि एक राष्ट्रभक्त और संस्कारी समाज का निर्माण हो सके। यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात आर्य समाज की बहनों द्वारा अत्यंत मधुर और प्रेरणादायक वैदिक भजनों की प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा परिसर वैदिक लहरों से गुंजायमान हो गया।
फोटो कैप्शन 07: गाहड़ा में यज्ञ करते हुए

राहत:मोहनपुर में लगी मीठे पानी की छबील
-तृप्त हुए राहगीर ठंडा पानी पीकर
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कनीना की आवाज।
गर्मी से राहत देने के लिए मीठे ठंडे पानी की छबील लगाने का सिलसिला जारी है। इन दिनों क्षेत्र में भयंकर गर्मी पड़ रही है। सुबह होते ही जैसे जैसे सूर्य आसमान में चढ़ता है वैसे ही गर्मी भी अपना तेवर दिखाने लगती है। इस समय क्षेत्र का तापमान भी 46 डिग्री पार कर चुका है। इसी बीच मंडी में कनीना-नारनौल सड़क मार्ग पर मोहनपुर गांव के युवाओं ने मीठे पानी की छबील लगाई गई। नारनौल और अटेली की तरफ जाने वाले राहगीरों को मीठा पानी पिला कर पुण्य कमाया। युवाओं ने सुबह 09 बजे से शाम 05 बजे तक राहगीरों को पानी पिलाया। इस मौके पर अमरजीत कोच, मोहित, हितेश रोहिल्ला, मोहित जोशी, निकेतन शर्मा, राहुल शर्मा, वीरेंद्र चौहान समस्त ग्राम वासी मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 06: मीठे पानी की छबील लगाते हुए




विश्व दूध दिवस एक जून
-डेयरी पालन कर गरीब व्यक्ति कमा सकता है रोटी रोजी-डा कांगड़ा
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कनीना की आवाज।
 दूध ऐसा भोजन है जो वर्ष भर तथा जीवन भर प्रयोग किया जाता है। दूध की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व दूध दिवस मनाया जाता है।  विश्व दूध दिवस एफपीओ द्वारा 1 जून 2001 को मनाया गया था और हर वर्ष मनाया जाता है।
 जिला महेंद्रगढ़ में गेाय, भैंस एवं बकरी पाली जाती हैं जिनमें करीब 40 से 50 फीसदी दूध देती है और दूध के जरिए लोगों की आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है। कनीना क्षेत्र में जहां गाय भैंस की डेयरी ओ की संख्या आधा दर्जन है।
 प्रसिद्ध महिला डेरी संचालिका नीतू यादव ने बताया उनके पास 200 गायें हैं प्रतिदिन 1200 लीटर दूध डेरी में जाता है किंतु दूध के भाव कम हैं जिसके पीछे चारा एवं फीड महंगा होना है। चारा 40 रुपये किलो तक पहुंच जाता है या फिर पशुओं का फीड महंगा है। नकली दूध की भरमार है इसलिए दूध महंगा नहीं हो पाता। डेयरी यूनियन ने बार-बार यह बात सरकार समक्ष उठाई है किंतु समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि गरीबों के लिए डेरी पालन बहुत बेहतर धंधा है।
जयपाल गुढ़ा निवासी का कहना है कि गाय पालकर बड़ा आनंद आता है और गायों की संख्या बढ़ाना उनका लक्ष्य है। दूध पर्याप्त मात्रा में देती है जिनसे घर का गुजर बसर ही नहीं बल्कि डेरी के लिए दूध उपलब्ध हो जाता है। जयपाल गुढ़ा डेयरी संचालक के पास गायें हैं तथा सैकड़ों लीटर दूध डेरियों में जा रहा।
क्या कहते हैं डा. पशुपालन विभाग -
 राजकीय पशु चिकित्सालय के डा पवन कांगड़ा वीएस ने बताया एक गाय और भैंस करीब 20 बार ब्याती है परंतु दो तीन बार ब्याने के बाद ही दूध बढ़ता है बाद में दूध घटता चला जाता है। दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जाते हैं। डेरी पालन का धंधा करके गरीब व्यक्ति भी बेहतर आय ले सकता है।
चारे के करने पड़ते हैं भंडार--
दूध के लिए  महेंद्रगढ़ एवं रेवाड़ी जिले पशु पालक खेतों में जाकर देखें तो तूड़ी से भरे हुए कूप तथा कड़वी की छुरियां तथा छव्वा रखते हैं। जिनमें लंबे समय तक पशु चारा खराब नहीं होता। दूध प्राप्त करने के लिए किसान वर्षभर के पशुचारे का प्रबंध इन्हीं विधियों से करते आ रहे हैं।  खरीफ फसल बतौर बाजरा उगाकर कड़बी प्राप्त करते हैं तो रबी फसल बतौर गेहूं और जौ की तूड़ी प्राप्त होती है। दोनों ही सूखे चारे में शामिल किए गए हैं।
गौशालाएं हैं दूध का केंद्र-
अकेले कनीना क्षेत्र में आधा दर्जन गौशालाएं हैं जिनमें कनीना, बुचावास, भोजावास, स्याणा, खरकड़ाबास आदि प्रमुख हैं। गौशालाओं में भी सूखे एवं हरे चारे का प्रबंध किया जाता है और विशेष प्रकार के शेड बनाए जाते हैं जहां वर्षभर का चारा सुरक्षित रखा जाता है। यहां दूध भी उपलब्ध हो पाता है।
 कनीना श्रीकृष्ण गौशाला के प्रधान भगत सिंह ने बताया कि उनके पास करीब 1500 गायों के लिए तूडी के भंडार हैं जहां से 100 मण के करीब तूड़ी प्रतिदिन गायों को परोसी जाती है और 50 गाय दूध दे रही हैं। समय समय पर वे गायों के लिए तूड़ी तथा कड़वी खरीदते हैं ताकि पशुओं का गुजारा चल सके।
किसान कृष्ण सिंह, महेंद्र सिंह, राम अवतार, सूबे सिंह, राजवीर सिंह, महिपाल आदि ने बताया कि वे पशु पालते हैं। पशुओं के लिए चारा खेतों से उपलब्ध हो जाता है। इस प्रकार पशुओं से दूध, घी एवं मक्खन आदि परिवार के लिए उपलब्ध हो जाता है ताकि कहीं से दूध खरीदना न पड़े।
कहावत है हरियाणा पर लागू-
ऐसे में देसां में देस हरियाणा जित दूध दही का खाना वाली कहावत इसी बात से चरितार्थ होती है कि सबसे अधिक दूध,घी एवं दही आदि इस क्षेत्र में पशुओं से प्राप्त होता है जो किसान हैं।  किसानी एवं पशुपालन दोनों का निर्वहण करते हुए एक पंथ दो काज की कहावत चरितार्थ करते हुए जिला महेंद्रगढ़ एवं रेवाड़ी पशुपालक नाम कमा रहे हैं। यहां देसी नस्ल की गाय और मुर्रा नस्ल की भैंस से बहुत प्रसिद्ध है।
प्रसिद्ध है घी एवं दूध-
इन जिलों में पशुओं से विशेषकर देसी नस्ल की गायों एवं भैंसों का दूध, मक्खन, घी, मट्ठा, छाछ आदि दूर दराज से विख्यात है।
फोटो कैप्शन 05: नीतू डेरी पालन करने वाली महिला डेरी समक्ष।
             साथ में डा पवन कांगड़ा