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Friday, February 20, 2026



 



गरीबों के सेब, सेब को भी दे रहे हैं मात
-सर्दी की मार के चलते महंगे हैं बेर
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में भारी मात्रा बेरों की आवक हो रही है। यूं तो ये बेर गरीबों के सेब कहलाते आये हैं क्योंकि ये गरीबों के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाते रहे हैं। जो सेब नहीं खा सकते वे बेर खा सकते हैं। किंतु इस बार सेब सस्ते रहे हैं जबकि बेर महंगे। इस बार बेर के भाव 100 रुपये किलो हैं जबकि सेब 100 रुपये किलो मिल जाते हैं। यही कारण है इस बार गरीबों के सेब गरीबों की पहुंच से दूर हो गए हैं।
 कनीना क्षेत्र में जहां इसराणा ,मोहनपुर, उन्हाणी, कनीना एवं करीरा आदि अनेक स्थानों पर बेरी की खेती की हुई है तथा उससे पैदावार ली जाती है। परंतु इस बार सभी जगह बेर कम बचे हैं क्योंकि सर्दी अधिक पड़ी है। अधिकांश बेर झड़ गए या पक्षियों ने बर्बाद कर दिये हैं जिससे किसान परेशान हैं। आवक कम होने के कारण बेर महंगे हैं।
बेर उगाने वाले महावीर सिंह करीरा, अजीत किसान , रामप्रताप कनीना, अजय मोड़ी गजराज सिंह मोड़ी आदि से बात हुई उन्होंने कहा कि इस बार सर्दी के मौसम के कारण बेर महंगे है क्योंकि सर्दी की मार से अधिकांश बेर झड़ गए हैं जिसके कारण पैदावार में गिरावट आई है।
बेरों के शौकीन लोग बेर जरूर खाते हैं। वैद्य हरिकिशन, डा रविंद्र, वैद्य बालकिशन का कहना है कि बेर दांतो और मसूड़ों की एक्सरसाइज करते हैं। ये विटामिन, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा आदि के बेहतर स्रोत है। यह अच्छी मात्रा में ऊर्जा भी देते हैं और इनका मनपसंद टेस्ट भी होता है। बाजार में इस समय एप्पल बेर आए हुए हैं जिनको ग्रीन एप्पल नाम से जाना जाता है। जो प्राय: कुछ सस्ते होते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी डा प्रेम कुमार बताते हैं कि जिला महेंद्रगढ़ में बेरों की अच्छी पैदावार होती है जिनमें जोधपुरी गोला, ग्रीन एप्पल, कश्मीरी एप्पल, बाल सुंदरी आदि कई किस्में होती हैं जबकि जंगलों में लगने वाले झाड़ी और देसी बर होते हैं। इस सर्दी की मार से बेर कम बचे है और बेर महंगे है।
रोटी रोजी कमाते रेहडी पर बेर बेचने वाले-बेर बेचने वाले रेहडिय़ों पर बेरबेचकर रोटी रोजी कमाते हैं। बेर बेचने वालों भोलू, दिनेश, मनीष आदि ने बताया कि वे बेर बाजार से खरीद कर लाते और महंगे दामों पर मिलते इसलिए महंगे दामों पर ही बेरों को बेच रहे हैं परंतु वे प्रतिदिन अपनी रोटी रोजी रोटी कमा लेते हैं। वे 500 से 600 रुपये प्रतिदिन बेरों से कमा लेते हैं। परंतु जब भी महंगे हो जाते हैं तो उनकी बिक्री भी बढ़ सकती है।
  उधर महाबीर सिंह करीरा का भी यही कहना है कि बेरों को सर्दी लग जाने से पैदावार कम है। फरवरी माह में शिवरात्रि पर भारी मांग रहती है किंतु बाजार में एप्पल बेर तो मिल जाएंगे किंतु बेहतरीन बेर नहीं मिल पाएंगे। अभी देसी बेर पके नहीं हैं जो मार्च माह में पकेंगे जब तक बेरों की मांग कम हो जाएगी।
फोटो कैप्शन 05: बेर

परीक्षा, मेले,डीजे एवं शादियों की है भरमार
-नहीं पढ़ पा रहे हैं विद्यार्थी
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कनीना की आवाज।
  कनीना क्षेत्र में इन दोनों जहां परीक्षा, डीजे, शादी और मेलों की भरमार है। ऐसे में विद्यार्थी सही ढंग से पढ़ नहीं पा रहे हैं। उल्लेखनीय की सीबीएसई की परीक्षाएं शुरू हो चुकी है वहीं हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं 25 फरवरी शुरू होने जा रही हैं।  ऐसे में जहां परीक्षाओं का दौर है, विद्यार्थी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। दिन-रात अपना समय देकर अच्छे अंक पाने के प्रयास कर रहे हैं किंतु मेलों का शोर और डीजे का शोर उनकी पढ़ाई में खलल डाल रहा है। जहां मोलडऩाथ संत का मेला 27 फरवरी को है वही श्याम बाबा के दो मेले जैतपुर और खाटू श्याम में लगेंगे। करीब 10 दिनों तक मेले चलते हैं जिसमें भारी संख्या में भक्तजन पहुंचते हैं। ऐसे में भक्तजनों के लिए जगह-जगह शिविर लगे हुए हैं और वहां पर भी डीजे का प्रबंध किया गया है। डीजे के कारण विद्यार्थी पढ़ नहीं पा रहे हैं। यही नहीं विवाह-शादियों की भी भरमार हैं। फरवरी माह में तो कुछ अधिक शादियां रही हैं और चलती रहेंगी। जिसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई में खलल पड़ रहा है किंतु सबसे अधिक समस्या डीजे दे रहे हैं। बड़ी संख्या में डीजे का शोर गलियों में सुनाई देता है। मैरिज पैलेस के आसपास तो रात को 10 बजे तक डीजे का शोर सुनाई पड़ता है। ऐसे में विद्यार्थी कैसे पढ़े? उनके लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है कि डीजे को बंद करना कठिन है। इसी शोर शराबे के बीच विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई पूर्ण करनी है। साथ में मार्च महीने में तो अनेकों पर्व आ रहे हैं।




तीन दिन ब्लाग रहेगा बंद
-खाटू श्याम पदयात्रा के कारण
-24 फरवरी को अगला ब्लाग आने की संभावना





कैसे करें परीक्षा की बेहतर तैयारी
-परीक्षा का भय सिर पर न पाले-
वीरेंद्र सिंह प्राचार्य               *****************************************
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कनीना की आवाज।
  हरियाणा में सीबीएसई की परीक्षाएं शुरू हो चुकी है तथा हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं 25 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं।  विद्यार्थी जी जान से परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए हैं। अच्छे अंक पाने के लिए शिक्षाविद एवं प्राचार्य बूचावास वीरेंद्र सिंह का कहना है कि सर्वप्रथम किसी भी बच्चे में कोई भी परीक्षा से संबंधित भय नहीं होना चाहिए। प्रत्येक बच्चे को परीक्षा से संबंधित उत्साह और ऊर्जावान होना चाहिए। बच्चों को कक्षा में रुचि पूर्ण पढ़ाई करनी चाहिए।  सिर्फ अपनी मेहनत पर भरोसा करें और तनाव पर काबू रखें शारीरिक रूप से सक्रिय होने से भी चिंता को कम किया जा सकता है। कम समय का उचित उपयोग करें। किसी भी चीज को हल्के में ले ले अपने आप को आराम दें । कभी भी असफलता के बारे में न सोचे। दोस्तों से तैयारी के बारे में नहीं पूछे, व्यायाम करें । जहां आप अध्ययन कर रहे हैं वहां पर एक खुशबूदार अगरबत्ती जला दे ताकि आपका मन स्वस्थ रह सके परीक्षा आते ही रट्टू तोते न बन जाए बल्कि पढ़ाई पर ध्यान दें। बस पढ़ते जाए परीक्षा से पूर्व पुन: रिवीजन करें। पढ़ाई करते वक्त साथ वातावरण होना जरूरी होता है । हमेशा प्रसन्न चित्त रहने से मन स्वस्थ रहेगा जिससे कि पढ़ाई में मन लगेगा। पढ़ाई करते वक्त हो सके तो शवासन कर लेना चाहिए इससे लाभ मिलता है। जो पढ़े उसे थोड़ी देर बाद एक पन्ने पर लिखकर देखे कि जो पढ़ा उसमें से कितना सही है। किसी भी प्रकार से मन में संकोच न लाए नहीं तो असफलता का विचार आएगा। यदि आप में आत्मविश्वास होगा तो आप हर मुसीबतों का सामना डटकर कर सकते हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए उचित शेड्यूल बनाएं। सोने को पर्याप्त समय दें, मानसिक अभ्यास करें, ज्यादा से ज्यादा पानी पिये, दिमाग को आराम करने दें। सकारात्मक सोच बनाए रखें।
फोटो कैप्शन: वीरेंद्र सिंह प्राचार्य






डोर-टू-डोर नशा मुक्त अभियान के तहत कई गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन
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कनीना की आवाज।
  नशामुक्त समाज की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ के कुशल मार्गदर्शन में गठित विशेष टीम द्वारा डोर-टू-डोर नशा मुक्त अभियान के तहत थाना सदर कनीना के अंतर्गत आने वाले विभिन्न गांवों का दौरा किया गया। इस अभियान के तहत पुलिस टीम ने गांव तलवाना, स्याना और नौताना में सघन जनसंपर्क किया और ग्रामीणों को नशे के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया।
अभियान के दौरान निरीक्षक धर्मसिंह और उनकी टीम ने गांव तलवाना के शिव मंदिर, स्याना के बाबा भैया मंदिर और नौताना के सार्वजनिक स्थल पर ग्राम सभाओं का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में युवा वर्ग और सभी आयु वर्ग के ग्रामीणों को नशे के विनाशकारी दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से समझाया गया। टीम ने युवाओं को नशे की लत से दूर रहने के लिए प्रेरित किया और स्पष्ट किया कि जो लोग इस दलदल में फंसे हैं और निकलना चाहते हैं, उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए पुलिस हर संभव सहायता प्रदान करेगी। इसके साथ ही, मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 के बारे में भी जागरूक किया गया।
इस अवसर पर कानूनी जागरूकता का प्रसार करते हुए टीम ने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में जानकारी दी। ग्रामीणों को नई संहिता की धाराओं के बारे में बताया। इन कार्यक्रमों में संबंधित गांवों के सरपंच प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति विशेष रूप से उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04: डोर टू डोर कार्यक्रम करती पुलिस




अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस -21 फरवरी
मातृभाषा ही सदा लगती है मधुर भाषा-नरेश कुमार
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कनीना की आवाज।
  यूं तो हिंदी दिवस मातृभाषा दिवस मनाया जाएगा। हिंदी ही हमारी मातृभाषा है। हिंदी पूरी दुनिया में बोली जाने वाली पांच भाषाओं में से एक है। विश्व भर के करोड़ों लोग आज हिंदी बोलते हैं।
हिंदी भाषा अब विदेशों में भी लोकप्रिय हो रही है। विदेश में रहने वाले लोगों को भी अब हिंदी का महत्व पता लग रहा है।
दैनिक व्यवहार में हिन्दी के उपयोग करने आदि की शिक्षा दी जाती है। क्या कहते हैं शिक्षाविद-

मातृभाषा दिवस पर हिन्दी के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। हिंदी माथे की बिंदी होनी चाहिए। यह मातृभाषा है इसका सम्मान करना चाहिए। हिंदी में काम करने वाले लोगों को सम्मानित करना चाहिए।  हिन्दी भाषा के विकास और विस्तार हेतु हर संभव प्रयास करने चाहिए। मातृभाषा में बात करना सरस एवं आनंद देने वाला होता है।
        --बिजेंद्र सिंह, शिक्षाविद
मातृभाषा हिंदी बोलने वालों की संख्या के अनुसार अंग्रेजी और चीनी भाषा के बाद हिन्दी भाषा पूरे दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी भाषा है। लेकिन उसे अच्छी तरह से समझनेए पढऩे और लिखने वालों में यह संख्या बहुत ही कम है। यह और भी कम होती जा रही। इसके साथ ही हिन्दी भाषा पर अंग्रेजी के शब्दों का भी बहुत अधिक प्रभाव हुआ है और कई शब्द प्रचलन से हट गए और अंग्रेजी के शब्द ने उसकी जगह ले ली है। जिससे भविष्य में भाषा के विलुप्त होने की भी संभावना अधिक बढ़ गयी है। हिंदी के प्रचार एवं प्रसार का प्रयास करना वाहिए।
    ---नरेश कुमार शिक्षाविद
मातृभाषा के रूप में हिन्दी के प्रति अपने कर्तव्य का बोध करवाने के लिए इस दिन को मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है जिससे वे सभी अपने कर्तव्य का पालन कर हिन्दी भाषा को भविष्य में विलुप्त होने से बचा सकें। वर्ष में एक दिन इस बात से लोगों के समक्ष रखना है कि जब तक वे हिन्दी का उपयोग पूर्ण रूप से नहीं करेंगे तब तक हिन्दी भाषा का विकास नहीं हो सकता है। इसे आम बोलचाल की भाषा बनाना चाहिए तथा हर काम हिंदी में करने चाहिए।
-लक्ष्मी देवी, शिक्षाविद
हिंदी भारत की एकता और विविधता का प्रतीक है। यह भाषा देशभक्ति, संस्कृति और समृद्धि का प्रतीक है। हिंदी हमारे संविधान की अधिकारिक भाषा है और हमारी राष्ट्रीय भाषा के रूप में महत्वपूर्ण है। हिंदी दिवस के अवसर पर, हमें अपनी मातृभाषा के प्रति समर्पित रहना चाहिए। हमें इसे सीखनाए उसका सदुपयोग करनाए और उसका संरक्षण करना चाहिए। हमें हिंदी की बढ़ती उपयोगिता को समझना चाहिएए ताकि हम अपने विचारों को सही ढंग से व्यक्त कर सकें।
 -- शिक्षाविद नेमी सिंह
फोटो कैप्शन-नेमी सिंह,लक्ष्मी देवी, नरेश कुमार, बिजेंद्र सिंह
















आधुनिक तकनीक से जुड़ता फैशन- सिलाई प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन मिला नवाचार का संदेश
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कनीना की आवाज। राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हाणी में महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सिलाई मशीन के विभिन्न भागों की जानकारी दी गई तथा उन्हें मशीन चलाने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।
प्रशिक्षिका द्वारा छात्राओं को नाप लेने की सही विधि, कपड़े की कटिंग तथा साधारण सलवार एवं पेटीकोट की सिलाई की प्रारंभिक तकनीकों का विस्तार से अभ्यास करवाया गया। छात्राओं ने पूरी लगन और रुचि के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा अपने कौशल में निखार लाने का प्रयास किया।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ. कविता ने छात्राओं को संबोधित करते हुए विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में फैशन और तकनीक का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक तकनीकों जैसे कंप्यूटराइज्ड सिलाई मशीन, आनलाइन डिजाइनिंग प्लेटफार्म, डिजिटल मार्केटिंग तथा सोशल मीडिया के माध्यम से फैशन को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित किया कि वे पारंपरिक कौशल के साथ-साथ नवीन तकनीकों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनें।
कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डा. विक्रम सिंह ने  कहा कि कौशल आधारित शिक्षा ही आज के समय की आवश्यकता है। ऐसे प्रशिक्षण शिविर छात्राओं को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की भावना भी विकसित करते हैं। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाएं और सीखे गए कौशल को अपने जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाएं।
तीसरे दिन का आयोजन सफल एवं प्रेरणादायक रहा। शिविर आगामी दिनों में भी इसी उत्साह और ऊर्जा के साथ जारी रहेगा।
फोटो कैप्शन 02:फैशन तकनीक की जानकारी देते हुए



53 वर्ष की उम्र में हैं प्राध्यापक जवां
-अखिल भारतीय सिविल सर्विस स्पोर्ट्स मीट में लिया भाग और दिखाया जलवा
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कनीना की आवाज।
  राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्याणा के 53 वर्षीय इतिहास प्रवक्ता सूरत सिंह आज भी जवां हैं। उन्होंने अखिल भारतीय सिविल सर्विस स्पोर्ट्स मीट में भाग लेकर सिद्ध कर दिया कि उम्र कभी अड़चन नहीं बनी है। धनौन्दा  निवासी प्रवक्ता सूरत सिंह ने थ्यागराज स्टेडियम दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय सिविल सर्विस मीट में उन्होंने बाडी बिल्डिंग 50+उम्र में हरियाणा का नेतृत्व किया। उनके इस प्रदर्शन से इलाके में खुशी का माहौल है। उनकी इस उपलब्धि पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सयाणा मैं एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें विद्यालय की प्राचार्य प्रवीण कुमार , एसएमसी प्रधान गजराज सिंह,समस्त अध्यापक साथी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
प्राचार्य ने कहा कि उनके इस जज्बे से उनका चयन नेशनल प्रतियोगिता में हुआ है। इससे आने वाली पीढिय़ों को प्रेरणा मिलेगी। उनके साथ बाघोत गांव के अध्यापक रामचंद्र ने भी 80 किलो भार में हिस्सा लिया। हालांकि वे इस प्रतियोगिता में किसी प्रकार का कोई मैडल नहीं ला पाए। गोल्ड है अगला लक्ष्य-
 सूरत सिंह ने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत सच्ची हो तो उम्र मायने नहीं रखती। अब पूरे क्षेत्र की नजरें अगली प्रतियोगिता पर टिकी है कि अगली बार गोल्ड लेकर आएंगे।
फोटो कैप्शन 01: सूरत सिंह को सम्मानित करता स्कूल स्टाफ





पैक्स एक मुश्त ऋण समाधान योजना करे तत्काल लागू
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कनीना की आवाज।
  बसपा के नेता  अतरलाल एडवोकेट ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से सरकार द्वारा घोषित पैक्स एक मुश्त ऋण समाधान योजना तत्काल लागू करने की मांग की है।
 अतरलाल ने सीहोर, चेलावास, इसराणा, रामबास, भोजावास, बेवल में जनसम्पर्क के दौरान उक्त मांग उठाई। उन्होंने कहा कि गत 10 दिसम्बर 2025 को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सहकारी समितियों से जुड़े किसानों को लंबित ऋणों से मुक्ति दिलाने के लिए एक मुश्त समाधान योजना लागू करने की योजना की थी। इसके द्वारा हरियाणा के 6.81 लाख किसानों व गरीब श्रमिकों को 2266 करोड़ के ब्याज माफी का लाभ दिया जाना था और इसकी अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित की गई थी। परन्तु घोषणा के बाद सरकार इसके कार्यान्वयन के बारे में भूल गई। किसान पैक्स सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। जब किसान व श्रमिक सहकारी समितियों के अधिकारियों से पूछते हैं तो उत्तर मिलता है कि अभी ऊपर से एकमुश्त समाधान योजना का आदेश नहीं मिला है। सरकार द्वारा की जा रही देरी के कारण किसान मानसिक व आर्थिक संकट झेलने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा घोषित योजना का अभी तक किसान व श्रमिकों को लाभ न मिलने से उनमें भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि एक मुश्त समाधान योजना से कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को राहत मिलती और वे नए ऋण लेने में समर्थ होते। अतरलाल ने चेतावनी दी कि सरकार ने 15 दिन के अंदर एक मुश्त समाधान योजना के कार्यान्वयन के आदेश नहीं किए तो बहुजन समाज पार्टी पीडि़त किसानों के साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी। उन्होंने अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 से बढ़ाकर 30 जून 2026 करने की मांग की है। इस अवसर पर कैलाश सेठ, राकेश यादव, शेर सिंह यादव, भाग सिंह चेयरमैन, पदम सिंह, दानसिंह प्रजापत, बीर सिंह, महिपाल आदि पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन: अतरलाल




एक माह पहले प्राचार्य की सूझबूझ से अपने ही साथी प्रवक्ता की बची थी जान
- अब वो पाया कमरे में मृत,पुलिस जांच में जुटी
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कनीना की आवाज।
 जिस शिक्षक की करीब एक माह पहले प्राचार्य की सूझबूझ से जान बच गई थी वो शुक्रवार को कमरे पर पाया गया मृत। हुआ यूं कि शिक्षक स्कूल से अनुपस्थित मिला तो प्राचार्य ने कर्मियों को उनके कमरे पर अनुपस्थिति का कारण जानना चाहा। भेजे कर्मचारियों ने कनीना के लोगों को इकट्ठा कर दरवाजे से झांक कर देखा मिला शैलेश मेहता मृत पाया गया। 29 जनवरी को इसी कमरे पर यह शिक्षक अचेत अवस्था में पाया गया था जिसे  पीजीआई रोहतक भेजा गया था और जान बच गई थी। किंतु इस बार संदिग्ध परिस्थितियों में वह मृत पाया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मृतक के स्वजनों को बुलाया गया है तथा कनीना से मृतक का पोस्टमार्टम करवाया करवा कर उन्हें सौंप दिया गया है।
 मिली जानकारी अनुसार धर्मवीर सिंह प्राचार्य पोता निवासी के साथ आदमपुर मंडी से शैलेश मेहता प्राध्यापक/पीजीटी अंग्रेजी खेड़ी तलवाना में कार्यरत था। करीब 1 साल से कनीना बस स्टैंड पर किराए का मकान में रह रहा था। प्रतिदिन खेड़ी तलवाना स्कूल जाता था। गुरुवार को भी वह स्कूल गया था। जहां स्कूल का समय प्रात: 8:30 बजे का है। जब शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचा तो प्राचार्य ने उनके फोन पर संपर्क किया किंतु फोन नहीं उठाया। तत्पश्चात उन्होंने अपने कर्मियों की सहायता से बार-बार फोन किया किंतु फोन नहीं उठाया तो उन्होंने कर्मियों को भेजा कि पता लगाओ कि शिक्षक स्कूल क्यों नहीं आ रहा है? कनीना के लोगों की सहायता से जब किराए के मकान में जाकर देखा तो शैलेश मेहता मृत पाया गया जिसकी सूचना प्राचार्य को दी गई। स्कूल से आए हुए कर्मचारियों ने पुलिस को सूचित किया और पुलिस मौके पर पहुंची। तत्पश्चात मृतक के स्वजनों को बुलाया गया और 3 स्वजन मौके पर पहुंचे। पुलिस ने हालात से रूबरू करवाते हुए कनीना उपनागरिक अस्पताल उनका मृत शरीर ले जाया गया। जहां उनका पोस्टमार्टम करवा परिजनों को सौंप दिया है। अभी तक हृदय गति रुकना उनकी मौत का कारण माना जा रहा है।
29 जनवरी की घटना-
उल्लेखनीय है कि 29 जनवरी 2026 को शैलेश मेहता जब खेड़ी तलवाना स्कूल नहीं पहुंचा तो प्राचार्य धर्मवीर पोता ने बार-बार फोन किया था। स्कूल का समय 29 जनवरी को प्रात: 9:30 बजे का था। जब कोई सूचना नहीं मिली। तब भी धर्मवीर सिंह पोता निवासी ने अपनी कर्मचारियों को भेजा और घर का दरवाजा लोगों की सहायता से तोड़ कर देखा तो वह अचेत अवस्था में पाया गया था क्योंकि वह अंगीठी जलाकर बंद कमरे में सो गया था और कार्बन मोनोआक्साइड एक जहरीली गैस के कारण अचेत हो गया था। अगर उस समय भी प्राचार्य ने सूझबूझ नहीं दिखाई होती तो उनका बचना कठिन था। तत्पश्चात शैलेश मेहता के परिजनों को सूचित किया था और खेड़ी तलवाड़ा के कर्मियों की सहायता से उन्हें पीजीआई रोहतक भर्ती करवाया गया था। रोहतक तीन दिन भर्ती रहकर ठीक हुआ था। खेड़ी तलवाना प्राचार्य के कारण उनकी तब तो जान बच गई थी किंतु अब महज एक महीने से भी कम समय बाद आज शुक्रवार को संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई है।
 प्राचार्य धर्मवीर सिंह पोता ने बताया कि शैलेश मेहता गुरुवार को भी स्कूल पहुंचा था तब कोई ऐसी बात नहीं थी। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षक आदमपुर मंडी का निवासी है और स्टाफ में बैठता था किंतु कम ही बोलता था। उनसे बार-बार यह कहा जाता था कि आप सभी से घुलमिल कर रहो परंतु वह किसी कारण से कम बोलता था और आज उनकी मौत हो गई है। पूरे स्कूल में शोक की लहर है। करीब 1 साल से शिक्षक कनीना में रह रहा था और खेती तलवाना में कार्यरत था। उसे समय प्राचार्य की सूझबूझ से उनकी जान बच गई थी। इस बार भी फोन न उठाने पर प्राचार्य ने समझा कि कहीं विगत घटना की तरह इस बार भी कोई अप्रिय घटना न घट गई हो, इसलिए कर्मचारियों को तुरंत उसके कमरे पर जाकर सूचना देने की बात कही थी। कर्मचारियों ने कनीनावासियों की सहायता से पता लगाया तो मृत अवस्था में पाया गया।
 फोटो कैप्शन: शैलेश मेहता


Thursday, February 19, 2026



 


जितेंद्र शर्मा की शादी में पहुंचे पूर्व विधायक सीताराम यादव
 
--कई नेता शामिल हुए और दी बधाई     
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कनीना की आवाज।
कनीना निवासी अध्यापक नेता कंवर सेन वशिष्ठ के पौत्र जितेंद्र शर्मा की शादी में अनेक नेता पहुंचे। मिली जानकारी अनुसार पूर्व विधायक सीताराम यादव, भाजपा जिला अध्यक्ष यतेंद्र राव, नेता अतरलाल, विनय एडवोकेट सहित पहुंचे । उन्होंने जितेंद्र शर्मा को बधाई दी। उल्लेखनीय है कि कांवर्सेन वशिष्ठ अध्यापक नेता रहे हैं। लंबे समय तक शिक्षक रहे हैं तथा उनके पौत्र डाक विभाग में अधिकारी हैं। उनका लग्न समारोह बड़े धूमधाम से संपन्न हुआ । अनेक नेताओं ने शिरकत की तथा जितेंद्र शर्मा को बधाई दी। इस मौके पर कनीना और आसपास विभिन्न क्षेत्रों के नेता पूर्व नेता ,समाजसेवी आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 07: संबंधित है






कैसे करे परीक्षा की तैयारी-
परीक्षा के दौरान अनावश्यक तनाव से बचे-निर्मल शास्त्री
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कनीना की आवाज।
अपनी आशाओं को बच्चों में पूरा करने का प्रयास किया जाता है जबकि होना यह चाहिए कि परीक्षा के दौरान बच्चे को किसी प्रकार का अनावश्यक तनाव न मिले। यदि हमें बच्चे का परीक्षा के लिए सहयोग ही करना है  तो उसका पौष्टिक व संतुलित आहार में सहयोग करें उसको बेहतर शैक्षणिक माहौल देने में सहयोग करे। ये विचार शिक्षाविद निर्मल शास्त्री के हैं।
 उन्होंने कहा कि कहीं भी नकारात्मक पहलू नजर आए तो प्यार से बच्चे को समझा कर उसे शिक्षण के लिए प्रेरित करें। अब हमें यह देखना है कि बच्चे ने परीक्षा की तैयारी के लिए जो तरीका अपनाया है वह कितना उचित है ? सबसे पहले तो बच्चा जो विषय पढ़ रहा है उसका संपूर्ण पाठ्यक्रम उसे रुचि लेकर समझना होगा अर्थात हर एक तथ्य को  एक बार पुन: दोहराया जाए और उन खास बातों को नोट किया जाए जो हमारे ध्यान से निकल रही थी ।  
यदि योजनाबद्ध तरीके से तैयारी शुरू से करनी आरंभ कर दी तो अवश्य ही परीक्षा में नंबर बढ़ेंगे । योजनाबद्ध तरीके से समयानुसार रुचि लेकर तैयार किया गया हो तो परीक्षा आपके लिए एक साधारण खेल के समान साबित होगी ।
 संपूर्ण विषय एवं संपूर्ण पाठ्यक्रम थोड़े-थोड़े समय के अंतराल के बाद दोहराना होता है। इस समय हमें अपने स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखना होगा साथ ही हमारा शिक्षण कक्ष शांतिप्रिय होना अति आवश्यक है।
 पूर्ण रूप से आश्वस्त कर लेना चाहिए कि जितना समय परीक्षा में मिलेगा उतने समय में सारे प्रश्न में आसानी से पूरे कर सकता हूं बल्कि अभ्यास के दौरान समय से पूर्व ही पूरा प्रश्न पत्र हल करने का अभ्यास करना चाहिए और संपूर्ण उत्तर भी बिल्कुल सही होने चाहिए।  परीक्षा देते समय उतावलेपनपन में अक्सर उत्तर भूल जाते हैं और उनकी शिकायत होती है कि यह प्रश्न तो मैंने कई बार याद किया था और वह मुझे अच्छी तरह आता था लेकिन परीक्षा देते समय समय अभाव के कारण में उसे नहीं कर पाया। परीक्षा से पूर्व अपने मस्तिष्क को पूर्ण रूप से संतुलित करें। जब मनोदशा पूर्ण रूप से सकारात्मक होगी तो आधी से अधिक मंजिल आप पहले ही पार कर चुके होंगे। मन को शांत और आश्वस्त रखना अति अनिवार्य है।  एक - एक प्रश्न को क्रमश: पढ़ते जाएं और अपने विवेक अनुसार उसका सटीक व सार्थक उत्तर लिखते जाए कई बच्चे ज्यादा लिखने को अच्छा समझते हैं जबकि होना यह चाहिए कि जो पूछा गया है वह सटीक व सार्थक होना चाहिए। तथा प्रश्न पत्र में दिए अंकों के अनुरूप ही हमें उसका उत्तर देना चाहिए । प्रश्न का उत्तर न लिखने की बजाय जितना जानते हैं वह लिखेंगे तो बिल्कुल न लिखने से कहीं ज्यादा बेहतर होगा । अंत में संपूर्ण पेपर का पुन: अवलोकन करें।
फोटो कैप्शन: निर्मल शास्त्री





श्याम भक्तों के लिए लग गये शिविर
-जैतपुर एवं खाटू श्याम के लिए जा रहे हैं भक्त
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कनीना की आवाज।
  खाटूश्याम एवं जैतपुरा धाम के लिए भक्त लगातार रवाना हो रहे हैं। उनके लिए जगह जगह शिविर लगा दिये गये हैं। कनीना में जहां कई जगह शिविर लगे हुए हैं वहीं श्याम मंदिर में भी शिविर लग गया है। सभी शिविरों में हवन हुआ और भक्तों के लिए सेवा प्रबंध शुरू हो गये हैं। हरेक गांव में इस प्रकार के शिविर लगे हुए हैं।
खाटू श्याम धाम तथा हुडिय़ा जैतपुर में 4 मार्च तक भारी भीड़ जुटेगी। दोनों ही स्थल राजस्थान में हैं। श्याम भक्त नवीन सिंगला, सत्यनारायण गुप्ता, गुड्डू चौधरी, पूनम गुप्ता, हंसराज अग्रवाल, महेश गुप्ता, अनिल सिंगला ने बताया कि इस बार हजारों भक्तों के यहां से पहुंचने का अनुमान है।
  यूं तो हर शहर में खाटू श्याम की धूम मची है किंतु गली गली में लगाए गए श्याम भक्तों के लिए सेवा शिविर एवं श्याम भक्तों का आवागमन अब पूरे यौवन की ओर है।
  पंडित संदीप राठी ने बताया कि वे हर वर्ष भक्तों के लिए शिविर लगाते हैं जहां भक्तों के लिए हर प्रकार की खाने पीने, रहने तथा स्नान आदि की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
 श्याम भक्तों की जुबान पर बस श्याम का नाम है।  बूढ़े, युवा एवं बच्चे सभी में श्याम के प्रति गहन आस्था देखने को मिल रही है।  
विभिन्न गांवों में भी श्याम के मंदिर बने हुए हैं जहां सुबह से शाम तक पूजा अर्चना करते हुए भक्त मिलते हैं और यहां तक कि भक्तों के ठहरने का प्रबंध भी अक्सर इन्हीं मंदिरों में किया जा रहा है। भारी जन इन भक्तों की सेवा में जुटे हुए हैं।  
 भक्त केला देवी, शकुंतला, नवीन, नीशू, अनिल, नीरज, किशोरी आदि भक्त खाटे श्याम के लिए रवाना हो रहे हैं और वे 4 दिन में खाटू श्याम धाम पहुंच जाएंगे। उधर भक्तों की सेवा करने वाले  अनूप सिंह, सतपाल, श्योनाथ, ओमप्रकाश, बबलू, हनुमान ने बताया कि वे भक्तों की शिविर में सेवा करके प्रसन्न हो जाते हैं।
फोटो कैप्शन 02: कनीना में लगाए गए श्याम शिविर का नजारा





खाटू श्याम भक्तों के दो दल जाएंगे जैतपुर
-श्याम शिविर संपन्न होने पर जाते हैं जैतपुर
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कनीना की आवाज।
 कनीना के  श्याम मंदिर पर खाटू श्याम भक्तों के लिए 18 फरवरी से मुफ्त शिविर शुरू किया गया है। विस्तृत जानकारी देते हुए श्री श्याम मंदिर कनीना के संदीप राठी ने बताया कि 18 फरवरी से खाटू श्याम भक्तों के लिए शिविर शुरू हो चुका है जो 24 फरवरी तक चलेगा। 24 फरवरी को  हजारों भक्तों का जत्था हुडिय़ा जैतपुर के लिए रवाना होगा। हर वर्ष हुडिय़ा जैतपुर के लिए हजारों भक्त जाते हैं। यही नहीं कनीना मंडी के राधा कृष्ण मंदिर से भी  हजारों भक्तों का जत्था 22 फरवरी के दिन रवाना होगा। खाटू श्याम भक्तों का खाटू  श्यााम मंदिर के लिए पदयात्रा शुरू होने जा रही है। धीरे-धीरे भक्तों की संख्या बढ़ती चली जाएगी क्योंकि हुडिय़ा जैतपुर राजस्थान तथा खाटू श्याम राजस्थान में 18 फरवरी से 4 मार्च तक मेला लगता है और इस मेले में भारी संख्या में भक्त कनीना और आसपास तथा विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचते हैं। महिलाओं की संख्या बहुत अधिक होती है।





ऊंट, घोडिय़ों की दौड़ का मार्ग किया गया साफ
-27 फरवरी का है मेला
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कनीना की आवाज।
बाबा मोलडऩाथ मेले की तैयारी शुरू हो गई हैं। ऊंट एवं घोडिय़ों की दौड़ का रास्ता तैयार करने में कार्यकर्ता जुट गये हैं।
 प्रधान दिनेश यादव ने बताया कि बाबा मोलडऩाथ के मेले में ऊंट एवं घोडिय़ों की दौड़के लिए जो रास्ता तैयार किया जाता है सीहोर-छीथरोली रोड़ पर कच्चा रास्ता है। इस रास्ते को तैयार करने में संजय यादव व उनकी पूरी टीम का विशेष रूप से योगदान रहता है। वे निशुल्क इस रास्ते को तैयार करते हैं। दिन में हजारों रुपए का उनका खर्च आता है लेकिन वो ये सेवा निशुल्क करते हैं और मेले में अपना पूरा सहयोग देते हैं। जिनमें उनके साथ जानी यादव, भूपी ठेकेदार, गजराज सिंह व अन्य कई कार्यकर्ता अपने ट्रैक्टरों से इसमें सेवा देते हैं।
 दिनेश यादव ने जानकारी देते हुए बताया दूर दराज से इस मेले में जो भक्त अपने पशु लेकर पहुंचते हैं उन्हें किसी भी तरह की परेशानी ना हो, उनके लिए दवाई आदि का विशेष प्रबंध किया जाता है, रहने के लिए विशेष स्थान तैयार किए गैंये हैं। सभी कार्यकर्ता उनके भोजन पानी तक की व्यवस्था में लगे रहते हैं। जो भी दूरदराज से लोग आते हैं वो पूरे कनीना की तारीफ करते हुए कहते हैं कि यहां कर उन्हें बहुत ही आनंद आता है। लोगों की सेवाभाव बहुत ही सराहनीय है। उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी इस दौरान नहीं आती। वे खुशी-खुशी आते हैं और खुशी-खुशी अपने पशुओं का प्रदर्शन दिखाकर वापस जाते हैं और फिर अगले साल होने वाले मेले की तैयारी में लग जाते हैं। उन्होंने बताया कि यहां आने वाले हर भक्त के दिल में बाबा मोलडऩाथ के प्रति अपार श्रद्धा है। जो भक्त यहां कर अपनी मन्नत मांगते हैं उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऊंट एवं घोडिय़ों की रेस सुबह 8 बजे 27 फरवरी को शुरू होगी। दौड़ के बाद कुश्ती और कबड्डियों का आयोजन शुरू हो जाएगा, जो फुटबाल ग्राउंड में बस स्टैंड के पीछे होगा।
फोटो कैप्शन 01: ऊंट एवं घोडिय़ों की दौड़ का मार्ग साफ करते हुए



कौशल से सशक्त भविष्य की ओर: छात्राओं ने सीखे आत्मनिर्भरता के नए सूत्र










फैशन एवं स्वरोजगार के अवसरों से परिचित हुआ प्रशिक्षण शिविर का द्वितीय दिवस
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कनीना की आवाज। राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हाणी में महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण शिविर का द्वितीय दिवस उत्साह एवं सक्रिय सहभागिता के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर एवं रोजगारोंमुख बनाना है।
दूसरे दिन शिविर की मुख्य प्रशिक्षिका पवित्रा बाई ने छात्राओं को परिधान निर्माण की उन्नत एवं व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने सटीक माप लेने की विधि, कपड़े की संतुलित कटिंग, आधुनिक डिज़ाइन चयन, विभिन्न प्रकार के गले एवं आस्तीन की शैलियों तथा सिलाई की उत्कृष्ट फिनिशिंग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं ने पूर्ण अनुशासन एवं समर्पण के साथ अभ्यास करते हुए अपने कौशल को और अधिक निखारा।
इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित कुमारी नीतू ने फैशन एवं डिजाइनिंग क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार एवं स्वरोजगार के विविध अवसरों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में फैशन उद्योग युवतियों के लिए आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने बुटीक संचालन, स्वयं का ब्रांड स्थापित करने, सोशल मीडिया एवं आनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से उत्पाद विपणन तथा लघु उद्योग के रूप में व्यवसाय प्रारंभ करने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विभिन्न प्रश्न पूछे और महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डा. विक्रम यादव ने कहा कि कौशल विकास ही सशक्त भविष्य की आधारशिला है। कार्यक्रम की संयोजिका डा. सीमा देवी ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन छात्राओं के व्यक्तित्व विकास एवं आत्मविश्वास को सुदृढ़ करते हैं। सह-संयोजिका डा. सुषमा यादव ने भी कौशल आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
दूसरे दिन का यह आयोजन छात्राओं के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ, जिसने उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढऩे के लिए नई ऊर्जा प्रदान की।
फोटो कैप्शन 3 व 4: आस्तीन बनाने का काम सीखते हुए छात्राएं





Wednesday, February 18, 2026



 




दीमक से परेशान हैं किसान
-लाखों रुपये की क्षति पहुंचाती है दीमक
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कनीना की आवाज।
 दीमक नामक कीट किसानों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। अब किसान के लिए तो दीमक एक आफत बनकर उभर रही है।
  किसानों की फसल, रद्दी पड़ी हो या सूखी लकड़ी, दीवार हो या गिली लकड़ी, पौधे हो या फूलदार शाक हर जगह सफेद एवं पीले रंग का यह कीट अपनी पहुंच बनाकर धीरे-धीरे उन्हें तबाह कर देता है। प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये की क्षति तो अकेला यह दीमक नामक कीट ही पहुंचा रहा है। किसान को जहां फसल बचाने के लिए जीवों एवं नील गायों के साथ संघर्ष करना होता है वहीं इन कीटों को मारने के लिए भरसक प्रयास करने होते है।
  क्या कहते हैं कृषि अधिकारी-
 कनीना के पूर्व खंड कृषि अधिकारी डा देवराज यादव का कहना है कि दीमक अक्सर नमी वाले क्षेत्रों से दूर भागती है और नर्म स्थान एवं सूखे क्षेत्रों में बेहद परेशान करती है। यही कारण है कि जहां अधिक वर्षा होती है या फिर नहरों का पानी उपलब्ध है वहां दीमक नजदीक भी नहीं आती है।  दीमक किसान की रबी एवं खरीफ की फसल में बेहद नुकसान पहुंचाती है। यह जड़ों को काट जाती है और जमीन में छुप जाती है। इसकी सूंघने की क्षमता अत्याधिक होने के कारण दवा को दूर से सूंघकर जमीन में चली जाती है।  दीमक मार्च, जून, सितंबर एवं दिसंबर माह में अधिक निकलती है और उस वक्त खेतों में फसल खड़ी होती है जिसे भारी नुकसान पहुंचाती है। दस फीसदी तक फसल दीमक खराब कर देती है। इनमें दवा निमारीन, फोरेट, क्लोरोपाइरीफास जैसी दवा डाली जाती है तो दीमक उसे दूर से ही सूंघकर भूमि में गहराई पर चली जाती है।
जीव वैज्ञानिक रवींद्र कुमार का कहना है कि दीमक अपने खाने में सेलूलोज पसंद करती है। लकड़ी, पेड़, जड़, तना या किसी कागज को खाने के पीछे सेलूलोज प्राप्त करना है। इनके पेट में कोई भी पदार्थ जाते ही मिट्टी बन जाता है। ये हर इंसान के लिए सिरदर्द बन सकती है।  
फोटो कैप्शन 06: पेड़ पर दीमक का प्रभाव।



परीक्षा की कैसे करें तैयारी---
-परीक्षा से घबराना है अनुचित - मदनमोहन
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कनीना की आवाज।
 एक और जहां 10वीं और 12वीं के परीक्षाएं शुरू हो गई हैं वही विद्यार्थी दिन-रात परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। परीक्षा की तैयारी कैसे करें इस संबंध में विभिन्न शिक्षाविदों से चर्चा की गई।
वरिष्ठ प्राध्यापक मदनमोहन कौशिक का कहना है कि परीक्षा से घबराने की जरूरत नहीं। सामान्य रूप में परीक्षा को ले, कक्षा में अध्यापक के सामने जिस प्रकार से प्रश्न का उत्तर दिया जा रहा है वैसी परीक्षा में हल करें। परीक्षा के समय विद्यार्थी को पूर्ण आत्मविश्वास के साथ तैयारी करनी चाहिए। जिस भी विषय की परीक्षा देनी है उसकी तैयारी के लिए मुख्य बिंदुओं को अलग से नोट बुक में उतारे, अलग से समय देकर दोहराये,ध्यान रहे उन्हें रटे नहीं। शिक्षा की तिथि की पूर्व संध्या को विद्यार्थी अधिक थकान एवं दिमाग पर परीक्षा का भूत सवार न होने दे। पूरी नींद ले, प्रसन्न चित्त होकर परीक्षा की तैयारी के लिए हर विषय के प्रत्येक टापिक का ध्यान लगाकर स्मरण करें तथा पूर्ण आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे।
 सुनील कुमार का कहना है कि बिना दबाव के पढ़ाई की जाती है तो परिणाम बेहतर होते हैं, स्वास्थ्य अच्छा रहता है। छात्र हर दिन को योजना बनाकर पढ़ाई करें जिनकी बेहतर तरीके से दोहराई होती है। थ्योरी के पेपर के लिए लिखकर देखे तो स्मृति टिकाऊ रहती है। परीक्षा के समय सही उत्तर देने में सक्षम बनाता है। गणित, भौतिक शास्त्र एवं रसायन शास्त्र में अभ्यास अधिक से अधिक करें। दिभर में कितना पढ़े यह विद्यार्थियों की अपनी क्षमता के अनुसार तय होता है। 7 घंटे की नींद लेकर एक घंटे व्यायाम या रुचि अनुसार खेल खेलना चाहिए। हर दिन को प्लान करना और उसे पूरा करना पढ़ाई में चार चांद लगा देता है। इन दिनों में अपने को स्वस्थ रखना जरूरी है ताकि समय पर सभी कार्य पूर्ण कर सकें। पढ़ाई को तनावमुक्त का आनंदमय बनाए। हर दिन की योजना बनाये और उसे पूर्ण करें।
फोटो कैप्शन-वरिष्ठ प्राध्यापक मदनमोहन



अपार श्रद्धा के साथ 160 किमी दूर पैदल जा रहे हैं भक्त
--जगह जगह हैं उनके लिए शिविर
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कनीना की आवाज।
 4 मार्च तक खाटू श्याम में लगने वाले फाल्गुन एकादशी के मेले के दृष्टिगत भारी संख्या में भक्तजन रवाना हो रहे हैं। दूर दराज से खाटू की ओर निशान लेकर जाने का सिलसिला चंद दिनों तक जारी जारी रहेगा।
  यूं तो खाटू श्याम मेले के दृष्टिगत ध्वज लेकर पदयात्रा पर एक के बाद एक समूह रवाना होने लगा है तथा उनके लिए जगह जगह शिविर स्थापित किए जा रहे हैं। कनीना से करीब चार दिनों में खाटू धाम पहुंचते हैं। कुछ भक्तों की सेवा करके ही प्रसन्न हो जाते हैं।
  इस संबंध सुशील देवी 52 वर्ष का कहना है कि वे विगत आठ वर्षों से खाटू श्याम जाकर ध्वज अर्पित कर रही है। उनकी कोई मनोकामना नहीं है। अपितु उनके दिल में श्रद्धा एवं भक्ति भरी है जिसके चलते व्यस्त समय में से समय निकालकर खाटू जाती हूं। उन्होंने कहा सफर करीब 250 किमी है किंतु खाटू के प्रति भक्ति के चलते यह दूरी कष्टदायी नहीं लगती है।
--  सुशीला देवी
संगीता 40 वर्षीय का कहना है कि वे विगत आठ वर्षों से खाटू श्याम का भक्त हैं। श्याम को मन में संजोकर लंबी दूरी को पार कर जाते हैं। उनके अनुसार उन्हें थकान तो होती है परंतु रास्ते में लोगों की भक्तों के प्रति भक्ति प्रसन्न रखती है और सफर आसानी से पूरा हो जाता है। कावड़ की अपेक्षा ध्वज में कम नियमों का पालन करना होता है वहीं दूरी भी कम है।
  --संगीता देवी
  सुमन देवी 42 वर्ष का कहना है कि वे 7 वर्षों से खाटू श्याम जा रहे हैं और उन्हें मन को प्रसन्नता एवं भक्ति भाव इसी यात्रा से प्राप्त होता है। जब कभी खाटू मेला पास आता है तो वे मेले में जाने की तैयारी में जुट जाते हैं। पदयात्रा विशेषकर रेलवे ट्रैक के साथ साथ चल पाना थोड़ा कठिन है किंतु मन में भक्तिभाव रखते हुए यह सफर सामान्य महसूस होने लग जाता है। श्याम बाबा के दर्शन करके सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं।
----सुमन देवी
 मुकेश देवी का कहना है कि वे विगत दो वर्षों से श्याम बाबा के यहां जा रही हैं। उनकी सभी इच्छाएं श्याम बाबा के जाने पर खत्म हो जाती हैं। उन्हें खाटू जाना बेहद प्रसन्नतापूर्ण लगता है। उनका कहना है कि अपार भक्तों को मीलों का सफर तय करता देख उनका सफर आसानी से पूर्ण हो जाता है।  
 -- मुकेश देवी
  मैं लगातार 6 वर्षों से ध्वज लेकर 250 किमी दूरी तय करके खाटूश्याम पहुंचती हूं किंतु कोई थकान नहीं होती है अपितु खुशी मिलती है।
       ---सीमा
 मैं विगत 9 वर्षों से झज्जर जिले के नया बास से खाटूश्याम तक पदयात्रा करती हूं। कभी कोई थकान नहीं होती है। मुझे खुशी होती है। शरीर स्वस्थ हो जाता है।
---कृष्णा देवी
मैं भक्तों की सेवा करके खुशी महसूस करता हूं। मुझे कभी कभार ही जैतपुर एवं खाटू श्याम जाने का मौका मिलता है। भक्तों की सेवा में बड़ा आनंद आता है।
फोटो कैप्शन 07: श्याम भक्त खाटू श्यााम जाते हुए






कनीना क्षेत्र में हुई 4 एमएम वर्षा, फसलों के लिए लाभप्रद
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में सुबह से शाम तक बादल छाए रहे तथा हल्की वर्षा  हुई। कनीना क्षेत्र में 4 एमए वर्षा हुई। इस समय क्षेत्र में गेहूं, सरसों एवं जौ आदि की फसलें खड़ी हुई है और फसलों के लिए बहुत बेहतर मानी जा रही है। वर्षा से फसलों को लाभ होगा।
 इस संबंध में किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, अजीत कुमार आदि ने बताया कि उनकी फसलों के लिए इस समय वर्षा की जरूरत थी। वर्षा हो जाने से फसलों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि कुछ दिन से फसलों को पानी की जरूरत थी वह पानी की पूर्ति हो गई है।
 उधर एसडीओ कृषि विभाग महेंद्रगढ़ डा. अजय यादव ने बताया कि वर्षा फसलों के लिए बेहद लाभप्रद साबित होगी। क्योंकि एक और जहां किसान बड़ी फसलों में पानी देने से हिचकिचाते हैं क्योंकि फसल टूटने का अंदेशा होता है वहीं वर्षा से पानी की पूर्ति हो गई है। गेहूं की फसलों में लाभ होगा। मौसम में भी बदलाव होगा जिससे फसलों की वृद्धि होगी। इस समय गर्मी बढ़ गई थी किंतु वर्षा से लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इस समय की वर्षा फसलों के लिए बेहद लाभप्रद है।
 फोटो कैप्शन 5: किसान सरसों की फसल को निहारते हुए
तथा एसडीओ डा. अजय यादव कृषि



दान देने से धन बढ़ता है और पाप कर्म क्षय होते हैं: भगत सिंह
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कनीना की आवाज।
कस्बा कनीना में जीवन में दान-धर्म की परंपरा को निभाते हुए पुण्य कार्यों की एक सराहनीय मिसाल देखने को मिली। सनातन धर्म में स्वर्गवासी आत्मा की शांति एवं पुण्य लाभ हेतु किए जाने वाले दान-पुण्य कार्यों की इसी परंपरा के अंतर्गत कस्बे की प्रसिद्ध कपड़ा व्यापारी फर्म कोका राम हरीश चंद्र के संस्थापक स्वर्गीय कोकाराम गेरा की पुण्यतिथि पर उनके पुत्र सतीश गेरा, पुत्रवधू आशा गेरा सहित समस्त परिवार ने श्री कृष्ण गौशाला कनीना में पहुंचकर गौमाताओं की सेवा की।
इस अवसर पर गेरा परिवार द्वारा गायों को गुड़ व हरा चारा खिलाया गया तथा गौशाला के विकास व संचालन हेतु 11,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
 इसी क्रम में गुरदयाल की पोती अंजली पुत्री प्रेमचंद ने अपनी बेटी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में गौशाला में सेवा करते हुए एक गाय को गोद लेने हेतु 5,100 रुपये का सहयोग प्रदान किया। उनके इस पुनीत कार्य की सभी ने सराहना की।
गौशाला प्रधान भगत सिंह ने सभी दानदाताओं का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सहयोग से गौसेवा एवं सामाजिक सेवा को नई ऊर्जा मिलती है।
इस अवसर पर सचिव यश कनीनवाल, सहसचिव रामपाल, मास्टर रामप्रताप, होशियार सत्संगी, कृष्ण प्रकाश गुरुजी, उपप्रधान दिलावर सिंह, रविन्द्र बंसल, सतबीर गुगनवाला, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, राजेंद्र (पूर्व पार्षद), राज डीलर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: दान देते हुए लोग



कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की ओर: उन्हाणी महाविद्यालय में सात दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम
-राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हाणी में छात्राओं के सशक्तिकरण की पहल
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कनीना की आवाज।
राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हाणी में महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में 18 फरवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक सात दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. विक्रम यादव द्वारा की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य छात्राओं को कौशल आधारित शिक्षा प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाना है।
प्रशिक्षिका श्रीमती पवित्र रानी द्वारा छात्राओं को माप लेने की विधि, कटिंग तकनीक, सिलाई मशीन के सही उपयोग तथा परिधान निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महाविद्यालय की छात्राओं ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा पूर्ण समर्पण और लगन के साथ अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने नई तकनीकों को सीखने में गहरी रुचि दिखाई और प्रत्येक गतिविधि में आत्मविश्वास, अनुशासन एवं रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर प्राचार्य ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि कौशल ही आत्मनिर्भरता की कुंजी है। उन्होंने छात्राओं को पूरे उत्साह एवं समर्पण के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने हुनर को स्वरोजगार में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की संयोजिका डा. सीमा देवी ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्राओं के व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं सह-संयोजिका डॉ. सुषमा यादव ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा वर्तमान समय की आवश्यकता है और इस प्रकार के आयोजन छात्राओं को भविष्य के लिए तैयार करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
फोटो कैप्शन 02: प्रशिक्षण लेते हुए छात्राएं











वार्ड-वार मतदाता सूची का ड्राफ्ट 28 फरवरी को
-नागरिक 7 मार्च तक दर्ज करवा सकेंगे दावे व आपत्तियां
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कनीना की आवाज। राज्य चुनाव आयोग हरियाणा की ओर से नगर पालिका कनीना के उपचुनाव के लिए जारी चुनावी अधिसूचना के अनुपालन में आज एसडीएम कनीना डॉ जितेंद्र सिंह ने बीएलओ तथा संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठक ली।
इस बैठक में एसडीएम ने स्पष्ट किया कि कनीना नगर पालिका क्षेत्र के लिए फोटोयुक्त मतदाता सूची को अपडेट करने का कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुरू कर दिया गया है।
उन्होंने निर्देश दिए कि इस प्रक्रिया के दौरान विधानसभा निर्वाचन नामावली के डेटा का मिलान करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र मतदाता पंजीकरण से वंचित न रहे।
उन्होंने बताया कि वार्ड-वार मतदाता सूची का ड्राफ्ट 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित किया जाएगा। इस सूची पर नागरिक अपने दावे और आपत्तियां 7 मार्च तक दर्ज करवा सकेंगे। उन्होंने अधिकारियों और शिक्षकों को सख्त निर्देश दिए कि वे मृत व्यक्तियों के नाम हटाने और दोहरी प्रविष्टियों को समाप्त करने के लिए भौतिक सत्यापन का कार्य पूरी निष्ठा से करें। मतदाताओं की सुविधा के लिए क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में 'वोटर इंफॉर्मेशन एंड कलेक्शन सेंटर' भी स्थापित किए जा रहे हैं, जहां मुफ्त में फॉर्म उपलब्ध होंगे।
उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 27 मार्च 2026 को किया जाएगा, ताकि आगामी उपचुनाव निष्पक्ष और त्रुटिहीन मतदाता सूची के आधार पर संपन्न हो सकें।
फोटो कैप्शन 01:बीएलओ की बैठक लेते एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह।

Tuesday, February 17, 2026



 



कनीना नगर पालिका के उप चुनाव की होने लगी है चर्चाएं
-वार्ड 14 से होना है उपचुनाव, फोटोयुक्त पहचान पत्रों का रिविजन का कार्य शुरू
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कनीना की आवाज।
नगर पालिका कनीना के यूं तो प्रधान एवं उप प्रधान पहले ही बन चुके हैं। नगर पालिका अपना कार्य विधिवत रूप से कर रही थी कि अचानक वार्ड 14 के पार्षद राजेंद्र लोढ़ा की मौत के बाद एक बार फिर से कनीना के वार्ड 14 की तरफ लोगों की नजरें टिक गई है। यहां निकट भविष्य में उपचुनाव होने वाले हैं क्योंकि वार्ड 14 का पार्षद नगर पालिका प्रधान का ससुर था। एक बबाार फिर से फोटोयुक्त पहचानपत्रों के रिविजन का कार्य 17 फरवरी  से 27 फरवरी तक चलेगा और अंतिम प्रकाशन 27 मार्च 2026 को होगा। इसके बाद ही उप-चुनाव संभव हो पाएंगे। हरियाणा चुनाव आयोग के अनुसार टोहाना, झज्जर,  राजौंद, तरावड़ी,सढौरा और कनीना नगरपालिकाओं आदि का उप चुनाव होना है।  जिनके कारण नगर पालिका में बहुमत बना हुआ था और प्रधान एवं उप प्रधान बने थे। अब लोगों की नजरें वार्ड 14 पर टिक गई है और कई नए और पुराने चुनाव लडऩे वाले इस चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।  वार्ड 14 से पहले चुनाव लड़ चुके ऐसे पूर्व पार्षदों के मैदान में उतरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वार्ड 14 एक नया वार्ड पहली बार चुनाव इस बार के चुनावों में बनाया गया था। बीते चुनावों से पहले कनीना नगर पालिका के 13 वार्ड होते थे। पहली बार चुनाव में वार्ड 14 बनाया गया था  जिसमें अधिकांश लोग रेवाड़ी, गाहड़ा आदि सड़क मार्ग पर बसे हुई वोटर हैं। क्योंकि 6 महीने के अंदर उपचुनाव होने की संभावना है और जल्द ही यह माना जा रहा है चुनाव होंगे। उसके लिए चुनाव लडऩे वालों की तैयारी भी शुरू हो गई है।
  मिली जानकारी अनुसार 9 जनवरी को प्रदेश सरकार ने चुनाव आयोग से कुछ परिषदों के चुनाव एवं उप चुनाव कराने की अनुमति मांगी थी जिस पर चुनाव आयोग ने अनुमति भी दे दी है। अब यह देखना है कि इतना उपचुनाव कब होते हैं और कितने लोग चुनाव मैदान में उतर पाते हैं। कनीना में अभी से इस उप चुनाव के लिए वोट मांगने की कार्रवाई संभावित चुनाव लडऩे वालों ने शुरू कर दी है। इस बार उप चुनावों में जीत के लिए कड़ा संघर्ष करना होगा चूंकि एक अनार सौ बीमार वाली कहावत लागू होगी।
फोटो कैप्शन: नगरपालिका कनीना

    
खाटू श्याम के लिए रवाना होने लगे हैं भक्त
-निशान लेकर जाते हैं खाटूधाम
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कनीना की आवाज।
 4 मार्च के खाटू श्याम में लगने वाले फाल्गुन एकादशी के मेले के दृष्टिगत भारी संख्या में भक्तजन रवाना होने लगेे हैं। दूर दराज से खाटू की ओर निशान लेकर जाने का सिलसिला चंद दिनों तक जारी रहेगा।
  यूं तो खाटू श्याम मेले के दृष्टिगत ध्वज लेकर पदयात्रा पर एक के बाद एक समूह रवाना होने लगा है तथा उनके लिए जगह जगह शिविर स्थापित किए जा रहे हैं। कनीना से करीब चार दिनों में खाटू धाम पहुंचते हैं।
  इस संबंध दिनेश कुमार का कहना है कि वे विगत छह वर्षों से खाटू श्याम जाकर ध्वज अर्पित करते हुए आया है। उनकी कोई मनोकामना नहीं है। अपितु उनके दिल में श्रद्धा एवं भक्ति भरी है जिसके चलते व्यस्त समय में से समय निकालकर खाटू जाता हूं। उन्होंने कहा सफर करीब दो सौ किमी है किंतु खाटू के प्रति भक्ति के चलते यह दूरी कष्टदायी नहीं लगती है।
 राजाराम का कहना है कि वे विगत 15 वर्षों से खाटू श्याम का भक्त हैं। श्याम को मन में संजोकर लंबी दूरी को पार कर जाते हैं। उनके अनुसार उन्हें थकान तो होती है परंतु रास्ते में लोगों की भक्तों के प्रति भक्ति प्रसन्न रखती है और सफर आसानी से पूरा हो जाता है। कांवर की अपेक्षा ध्वज में कम नियमों का पालन करना होता है वहीं दूरी भी कम है।
   धर्मेंद्र भक्त का कहना है कि वे छह वर्षों से खाटू श्याम जा रहे हैं और उन्हें मन को प्रसन्नता एवं भक्ति भाव इसी यात्रा से प्राप्त होता है। जब कभी खाटू मेला पास आता है तो वे मेले में जाने की तैयारी में जुट जाते हैं। पदयात्रा विशेषकर रेलवे ट्रैक के साथ साथ चल पाना थोड़ा कठिन है किंतु मन में भक्तिभाव रखते हुए यह सफर सामान्य महसूस होने लग जाता है। श्याम बाबा के दर्शन करके सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
   महिपाल भक्त का कहना है कि वे विगत दो वर्षों से श्याम बाबा के यहां जा रहे हैं। उनकी सभी इच्छाएं श्याम बाबा के जाने पर खत्म हो जाती हैं। उन्हें खाटू जाना बेहद प्रसन्नतापूर्ण लगता है। उनका कहना है कि अपार भक्तों को मीलों का सफर तय करता देख उनका सफर आसानी से पूर्ण हो जाता है।  
फोटो कैप्शन 06: जैतपुर धाम का नजारा


 राजकीय  वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में कक्षा 12वीं की छात्राओं को भावभीनी विदाई
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कनीना की आवाज।
राजकीय  वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी में आज वरिष्ठ वर्ग की कक्षा 12वीं की छात्राओं के सम्मान में कक्षा 11वीं की छात्राओं द्वारा भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम हर्षोल्लास, भावुक क्षणों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच संपन्न हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कक्षा 12 की छात्राओं को सम्मानित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन मनुष्य के जीवन का सर्वश्रेष्ठ काल होता है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने माता-पिता, विद्यालय, क्षेत्र तथा प्रदेश का नाम रोशन करें। यही उनके लिए सच्चे अर्थों में गुरु दक्षिणा होगी।
कार्यक्रम का संचालन एवं आयोजन 12वीं कक्षा की छात्रा जाह्नवी, पलक, मुस्कान, ऋषिका, गुंजन, भारती, सुप्रिया एवं तनु द्वारा किया गया। छात्राओं ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय में शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच सदैव आत्मीयता व अनुशासन का वातावरण रहा है, जिसने उन्हें जीवन में आगे बढऩे की प्रेरणा दी है। उन्होंने गुरुजनों के सम्मान और मार्गदर्शन को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया।
समारोह के दौरान छात्राओं ने शिक्षकों को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए सामूहिक भोज का भी आयोजन किया गया। विदाई के भावुक क्षणों में छात्राओं ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विद्यालय परिवार ने कक्षा 12 की छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित था।
फोटो कैप्शन 05: विदाई समारोह का नजारा


गौशाला प्रांगण भक्तिभाव से ओतप्रोत, महिला सत्संग मंडलियों ने बांधा भक्ति का समां
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कनीना की आवाज।
अमावस्या के पावन अवसर पर श्रीकृष्ण गौशाला कनीना का प्रांगण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो गया। कस्बे की महिला सत्संग मंडलियों द्वारा आयोजित भजन-कीर्तन कार्यक्रम में वातावरण भक्तिमय बन गया।
इस अवसर पर बाबा मोलडऩाथ महिला सत्संग मंडल एवं ढोकलमल शिव मंदिर की सत्संग मंडलियों ने संयुक्त रूप से भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजन-कीर्तन से पूर्व सभी महिलाओं ने गौवंश को गुड़ व हरा चारा खिलाकर गौसेवा की तथा गौशाला को 5100 रुपये की सहयोग राशि भी भेंट की।
भजनों के उपरांत गौभक्तों द्वारा प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम में मंडली प्रधान सोमती देवी,  कविता, सविता यादव, बनारसी, फूला, गोदावरी, लक्ष्मी, धर्म, बिमला, सुनीता, कांता, सुमन व पूनम ने मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी। उल्लेखनीय है कि विगत माह की अमावस्या पर भी इनके द्वारा सत्संग का आयोजन किया गया था।
इस अवसर पर गौशाला के प्रधान भगत सिंह, सचिव यश, सहसचिव रामपाल, अशोक पैकन, कृष्ण प्रकाश गुरुजी, मास्टर रामप्रताप, ओमप्रकाश आर्य, होशियार सत्संगी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने महिला मंडलियों के इस सेवा व भक्ति भाव की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम के माध्यम से गौसेवा, भक्ति और सामाजिक एकता का सुंदर संदेश दिया गया।
फोटो कैप्शन 03: सत्संग मंडलियां सत्संग करते हुए


खेल नर्सरी योजना के अंतर्गत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में शूटिंग रेंज शाखा हेतु उपकरण उपलब्ध कराए गए
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कनीना की आवाज।
हरियाणा सरकार की खेल नर्सरी योजना 2026-27 के अंतर्गत आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी में शूटिंग रेंज शाखा की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आवश्यक खेल उपकरण विद्यालय को उपलब्ध करवाए गए।
इस पहल का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को आधुनिक सुविधाएँ प्रदान कर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है। सरकार द्वारा केवल ओलंपिक, एशियन व कामनवेल्थ खेलों में शामिल चयनित खेलों के लिए नर्सरी स्थापित की जा रही हैं, जिनमें शूटिंग भी एक प्रमुख खेल है।
विद्यालय परिसर में आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम के दौरान समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। विद्यालय के प्राचार्य  नरेश कुमार कौशिक ने इस अवसर पर कहा कि शूटिंग रेंज शाखा की स्थापना के लिए विद्यालय में एक विशाल बहुउद्देशीय हाल शूटिंग रेंज के लिए उपलब्ध करवाया गया है जिसमें विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने हरियाणा सरकार एवं खेल विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
विद्यालय परिवार ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में कनीना मंडी के खिलाड़ी राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय एवं क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे। इस अवसर पर शूटिंग को राहुल यादव वरिष्ठ अध्यापक, ओमप्रकाश पालीवाल, प्रवीण कुमार, रेखा यादव, सुमन लता, अंजू यादव, अनीता यादव, कल्पना कुमारी, शकुंतला यादव, सरोज, हेमंत कुमार, पन्नालाल सहित समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 04: खेल नर्सरी का सामान उपलब्ध कराते हुए प्राचार्य

परीक्षा की कैसे करें तैयारी---
-परीक्षा से घबराना है अनुचित-सुरेश कुमार
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कनीना की आवाज।
एक और जहां 10वीं और 12वीं के परीक्षा सिर पर है वही विद्यार्थी दिन-रात परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। फरवरी माह में सीबीएसई व हरियाणा बोर्ड की परीक्षाएं होंगी। परीक्षा की तैयारी कैसे करें इस संबंध में शिक्षाविद वरिष्ठ प्राध्यापक सुरेश कुमार का  कहना है कि--
परीक्षा से घबराने की जरूरत नहीं। सामान्य रूप में परीक्षा को ले, कक्षा में अध्यापक के सामने जिस प्रकार से प्रश्न का उत्तर दिया जा रहा है वैसी परीक्षा में हल करें। परीक्षा के समय विद्यार्थी को पूर्ण आत्मविश्वास के साथ तैयारी करनी चाहिए। जिस भी विषय की परीक्षा देनी है उसकी तैयारी के लिए मुख्य बिंदुओं को अलग से नोट बुक में उतारे, अलग से समय देकर दोहराये,ध्यान रहे उन्हें रटे नहीं। शिक्षा की तिथि की पूर्व संध्या को विद्यार्थी अधिक थकान एवं दिमाग पर परीक्षा का भूत सवार न होने दे। पूरी नींद ले, प्रसन्न चित्त होकर परीक्षा की तैयारी के लिए हर विषय के प्रत्येक टापिक का ध्यान लगाकर स्मरण करें तथा पूर्ण आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे। बिना दबाव के पढ़ाई की जाती है तो परिणाम बेहतर होते हैं, स्वास्थ्य अच्छा रहता है। छात्र हर दिन को योजना बनाकर पढ़ाई करें जिनकी बेहतर तरीके से दोहराई होती है। थ्योरी के पेपर के लिए लिखकर देखे तो स्मृति टिकाऊ रहती है। परीक्षा के समय सही उत्तर देने में सक्षम बनाता है। गणित, भौतिक शास्त्र एवं रसायन शास्त्र में अभ्यास अधिक से अधिक करें। दिनभर में कितना पढ़े यह विद्यार्थियों की अपनी क्षमता के अनुसार तय होता है। 7 घंटे की नींद लेकर एक घंटे व्यायाम या रुचि अनुसार खेल खेलना चाहिए। हर दिन को प्लान करना और उसे पूरा करना पढ़ाई में चार चांद लगा देता है। इन दिनों में अपने को स्वस्थ रखना जरूरी है ताकि समय पर सभी कार्य पूर्ण कर सकें। पढ़ाई को तनावमुक्त का आनंदमय बनाए। हर दिन की योजना बनाये और उसे पूर्ण करें। एनसीइआरटी की पुस्तकें ही पढ़े।
फोटो कैप्शन-प्राध्यापक सुरेश कुमार




सर्दी में भी हुआ गर्मी का एहसास
-कुछ दिनों से हो रही तेज धूप, दिन का तापमान बढ़ा
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में जहां दो दिनों से सूर्य तेज धूप के साथ चमक रहा है। सुबह और रात को जहां ठंड होती है वही दिन में गर्मी महसूस हो रही है। चंद दिनों की गर्मी से ऐसा लगता है कि अब सर्दी के दिन बीत गए हैं। तेज धूप के चलते जहां लोग राहत महसूस कर रहे हैं। अभी तक लगातार ठंड, कोहरा, धुंध,वर्षा आदि चल रहे थे किंतु दो दिनों से अचानक सूर्य तेज धूप के साथ चमक रहा है और गर्मी का एहसास हो रहा है।
क्षेत्र में कम से कम तापमान 12 डिग्री तो अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेंटीग्रेड नोट किया गया। आने वाले समय में तापमान और बढऩे की संभावना है। यदि यूं ही तेज धूप खिली तो जल्दी सरसों पक जाएगी और अभी तो बसंत पंचमी भी नहीं आई है। उससे पहले ही फूल कम होने लग जाएंगे। किसानों के चेहरे पर चिंता की रेखा दिखाई देने लगी है किंतु कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी मौसम ठीक चल रहा है चूंकि रात को ठंड पड़ती है तो दिन में जहां धूप खिलता है, इससे फसल को कोई नुकसान अभी तक नहीं होगा।
किसान राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, अजीत कुमार आदि का कहना है कि गर्मी बढऩे से फसलों को नुकसान होगा। सरसों की पैदावार में कमी आ जाएगी। गेहूं की फसल में बढ़ोतरी नहीं होगी। इस समय खेतों में गेहूं एवं सरसों की फसल खड़ी हुई है। कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि फसल को नुकसान होगा।
  उल्लेखनीय है कि इस सर्दी के मौसम में जहां पाला जमने से सरसों में पहले ही नुकसान हो चुका है वहीं अब मौसम बदलने से नुकसान होने का अंदेशा बन गया है।
फोटो केप्शन 02: सरसों फसल




शिवालय का नवीनीकरण करने पर किया सम्मानित
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कनीना की आवाज।









रातांकलां निवासी प्रमुख समाजसेवी एलसी जोशी परिवार ने अपने पूर्वजों के गांव बेवल के धार्मिक स्थल शिवालय  का नवीनीकरण कर समाज सेवा की मिसाल पेश की है। इस नेक कार्य, समाजसेवा और सनातन वैदिक संस्कृति को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय योगदान के लिए गत दिवस बेवल गांव में प्रजा भलाई संगठन के नेता अतरलाल ने एलसी जोशी को पगड़ी पहनाकर तथा प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर एल.सी. जोशी परिवार द्वारा हवन यज्ञ कर नवीनीकरण किए शिवालय में विधि विधान से शिव परिवार की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। जोशी परिवार द्वारा भंडारा आयोजित किया गया। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। अतरलाल ने कहा कि एल.सी.जोशी परिवार ने अपने पूर्वजों द्वारा बेवल गांव में बनाए गए पुराने शिवालय का नवीनीकरण कर समाज तथा अपनी जड़ों से जुडऩे की गौरवशाली मिसाल पेश की है। उनके इस कार्य से समाज के लोगों को अपने धर्म, विरासत, संस्कृति से जुडऩे की प्रेरणा मिलेगी। इस अवसर पर पूर्व सरपंच व विख्यात प्रवचनकर्ता  राजकुमार भारद्वाज ने भी जोशी परिवार की सेवाओं की सराहना करते हुए परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों महिलाओं ने व्रत रख मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।
फोटो कैप्शन 01: एलसी जोशी को सम्मानित करते प्रमुख समाजसेवी अतरलाल।

Monday, February 16, 2026



 



दो बड़े मेलों की हो रही है तैयारियां
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कनीना की आवाज।
अपार भीड़ जुटती है। वही इन मेलों की तैयारियां जोरों पर चल रही है।
27 फरवरी को कनीना का प्रदेश भर में विख्यात संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ का मेला भरने जा रहा है। संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ को बालक नाथ, ओघड़ बाबा नाम से जाना जाता है वही कनीनावासी खेड़ा वाला नाम से भी जानते हैं। कनीना का कुल गुरु बाबा मोलडऩाथ  है। बस स्टैंड के पास भरने वाले मेले की तैयारियां चल रही है। रंग रोगन किया जा रहा है। इस मेले में पूरे ही कस्बा के लोग शक्कर का प्रसाद अर्पित करते हैं ऊंट और घोडिय़ों की दौड़ पूरे प्रदेश में विख्यात है। विक्रमी संवत 2006 में संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ ने सिरसवाला जोहड़ में समाधि लगाई थी और वे स्वस्थ होकर  समाधिस्थ तो गए थे। उनकी याद में हर वर्ष यहां भारी भीड़ जुटती है और मेला लगता है। अब तो कनीना का बाबा मोलडऩाथ आश्रम श्रद्धा एवं भक्ति का आश्रम बन गया है। इसके आसपास कम से कम एक दर्जन अन्य मंदिर स्थापित हो गए हैं जिसके चलते यह दर्शनीय स्थल भी बन गया है। इसी स्थान पर 14 मार्च को शक्कर मेला लगने जा रहा है। कबड्डी तथा ऊंट घोड़ों की दौड़ के अलावा यहां दंगल भी आयोजित होते हैं। यह मेला कनीना के पूर्वजों ने चलाया था जो आज भी चला आ रहा है।
खाटू श्याम मेला-
20 फरवरी से 4 मार्च तक जहां जैतपुर एवं खाटू श्याम (राजस्थान) के विशाल मेला लगने जा रहे हैं जिनको लेकर कनीना ही नहीं अपितु आसपास गांव में शिविर लगाने की तैयारियां चल रही हैं। खाटू श्याम तथा जैतपुर धाम पर भक्त पदयात्रा करते हुए निशान अर्पित करने जाते हैं। दोनों ही स्थानों पर एकादशी एवं द्वादशी के दिन यहां अपार भीड़ जुटती है। जहां खाटू श्याम मेला पूरे ही देशभर में विख्यात है वही जैतपुरा जयपुर स्थित खाटू श्याम मेला भी दूर दराज तक प्रसिद्ध है। कनीना के कई दल इन दोनों ही मेलों में जाकर निशान अर्पित करते हैं। कई वर्षों से निशान अर्पित करने वाले अनिल कुमार का कहना है कि यह दोनों धाम पूरे ही देश नहीं बल्कि विदेशों तक जाने जाते हैं। खाटू श्याम वास्तव में बरबरी का नाम था जो पांडवों में भीम के पौत्र थे। महज तीन बाणों से युद्ध करने के लिए महाभारत युद्ध में पहुंचे थे इसलिए उन्हें तीन बाण धारी तथा नीले घोड़े का सवारी करने वाला नाम से जाना जाता है। कलयुग के श्रीकृष्ण अर्थात श्याम बरबरीक को ही जाना जाता है। धाम पर जहां मेले के लिए विभिन्न गांव से भक्तजन पद यात्रा करने की तैयारियों में जुट गए हैं तथा भक्त रवाना होने लगे हैं।
फोटो कैप्शन 06: खाटूश्याम मुख्य गेट






जिला में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान परीक्षा केंद्रों  
--परीक्षा 17 फरवरी से 12 अप्रैल तक जारी रहेंगी
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कनीना की आवाज।
जिलाधीश कैप्टन मनोज कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जिले में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए निषेधाज्ञा जारी की है।
यह आदेश केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। ये परीक्षा 17 फरवरी से 12 अप्रैल तक जारी रहेंगी।
आदेशों के अनुसार जिले के सभी परीक्षा केंद्रों के 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का हथियार ले जाना पूरी तरह वर्जित है। परीक्षा के दौरान केंद्रों के पास स्थित सभी फोटोकापी की मशीनें और कोचिंग संस्थान बंद रहेंगे।
इसके अलावा बिना वैध पहचान पत्र के किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
यह पाबंदियां पुलिस और सरकारी ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों पर लागू नहीं होंगी। इन आदेशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं को बिना किसी बाधा, फर्जी खबरों या अनुचित साधनों के पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराना है।
 सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलने वालों पर रहेगी कड़ी नजर--
हरियाणा सरकार के निर्देशानुसार जिला प्रशासन महेंद्रगढ़ आगामी 17 फरवरी से शुरू होने वाली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को लेकर पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार की ओर से जारी आदेशों के तहत जिले में निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और नकल रहित परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखना और यातायात का सुगम संचालन प्रशासन की प्राथमिकता रहेगी, जिसके लिए पुलिस अधीक्षक को पर्याप्त पुलिस बल और ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए परीक्षा केंद्रों के 500 मीटर के दायरे में फोटोस्टेट की दुकानों और कोचिंग सेंटरों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही सक्षम अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत आवश्यक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने के लिए भी निर्देशित किया गया है।
छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को परीक्षा के दौरान सुबह 10 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए खुफिया तंत्र और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।
इसके अलावा, जिला शिक्षा अधिकारी को विशेष रूप से सेल्फ सेंटरों की निगरानी करने और परीक्षा केंद्रों की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि छात्र बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी परीक्षाएं दे सकें।





 किसानों की प्रमुख तिलहन फसल बन गई है-सरसों
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कनीना की आवाज।
दक्षिण हरियाणा की सूखी भूमि और जल संसाधनों की कमी के चलते किसानों की अपार मेहनत उनके लिए वरदान बनती जा रही है। सूखे एवं राजस्थान की सीमा से सटे इस रेतीले क्षेत्र में रबी की फसल के रूप में सरसों का नाम उभरकर आ गया है। तिलहन जाति की यह फसल अब किसानों के रोम-रोम में बस गई है। किसान के खाने में भी सरसों का तेल ही होता है वहीं खेतों में भी प्रमुख फसल सरसों बनकर किसानों को खुशहाली की ओर ले जा रही है।
   दक्षिणी हरियाणा में किसानों ने समय-समय पर फसलों में भारी बदलाव किया है। एक वक्त था(करीब 20 वर्ष पहले) जब किसान दलहन जाति की फसल चना उगाने में बहुत उत्साह दिखाता था किंतु अब समय के साथ-साथ चने उगाना ही भूल गया है। उस वक्त रबी की फसल के रूप में चने को इतना महत्व दिया जाता था कि अन्न के रूप में भी चने का उपयोग करता था और चने के चारे को किसान अपने पशुओं के लिए प्रयोग करता था। घरों में विवाह शादी के वक्त भी चना काम में लाया जाता था किंतु अब चने को भूला दिया गया है। आज हालात यह है कि चने की खेती करने वाला किसान भी विवाह शादी के लिए कहीं से खरीदकर चने लाता है। उसके पास चने की खेती नहीं होती है।
  किसान ने धीरे-धीरे चने की खेती का त्याग कर दिया क्योंकि चने की खेती किसान के लिए बेहतर साबित नहीं हो रही थी। उसे तेल आदि को बाजार से खरीदकर लाना पड़ता था। ऐसे में किसान का ध्यान तिलहन जाति की फसल सरसों उगाने की ओर गया और धीरे-धीरे सरसों उगानी शुरू कर दी है। किसान के लिए फिर तो सरसों एक अहं फसल बनकर रह गई। यूं तो किसान ने गेहूं, जौ, ज्वार, मक्का, कपास आदि फसलों पर प्रयोग किया किंतु सभी बेकार साबित हो गई। उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पाई वहीं किसान अपने एवं अपने परिवार का पेट पालने के लिए सरसों की फसल की ओर आकर्षित हुआ जो उसके लिए वरदान साबित हुई।
   किसानों का सरसों की फसल के प्रति इतना गहरा रुझान हुआ कि अब तो सरसों सुख दु:ख का साथी ही बन गई है। किसान सरसों की फसल उगाकर खुशहाल बनता जा रहा है। किसान खरीफ की फसल के रूप में बाजरा एवं ग्वार उगाता है जो पशु चारे के रूप में जाने जाते हैं। रबी फसल के रूप में गेहूं अपने खाने के लिए उगाया जाता है जबकि सरसों न केवल घर में तेल के लिए अपितु खुशहाली लाने के अलावा ईंधन के रूप में भी काम में लाई जा रही है।
 सरसों फसल पर किसान को अधिक ध्यान देने की जरूरत भी नहीं है और पैदावार भी बेहतर देती है। किसान करीब छह माह में सरसों की फसल पैदावार अपने घर में डाल लेता है। किसान सरसों का तेल अपने घर की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रयोग करता है। पहले किसान तेल खरीदकर लाता था और अब वो तेल अपनी फसल पैदावार से ही लेने लग गया है। जब तेल निकलवाता है तो एक ओर जहां तेल मीलों की संख्या में इजाफा हो गया है वहीं तेल किलवाते वक्त पशु चारा भी उपलब्ध हो जाता है। खल नामक यह बेहतर पशु चारा पैदा होता है। किसान को सरसों उगाकर एक लाभ और भी हो गया है कि सरसों की पदाड़ी के बदले खेत की फसल कटाई का काम करवाता है वहीं सरसों के धांसे बेहतर ईंधन का काम करते हैं। किसान अपने खेत के धांसों को काटकर अपने खेत में डाल लेता है और उन्हें वर्ष भर काम में लेता है।
    किसान को अपने खेत में सरसों उगाकर न केवल अपना अपितु अपने परिवार का पालन पोषण करना होता है। किसान के सामने आज के दिन सरसों से बेहतर कोई फसल नहीं है। किसान को सरसों उगाने में लागत भी कम लगानी पड़ती है। यही कारण है कि किसान प्रसन्न है। किसान आज अगर किसी क्षेत्र में होड़ कर रहा है तो अधिक से अधिक सरसों उगाने की कर रहा है। सरसों के भाव भी बेहतर होने के कारण किसान की आर्थिक स्थिति भी मजबूत बनती जा रही है।
   किसान ने जब सरसों उगानी शुरू की तो खेत में सरसों की पदाड़ी को यूं ही बेकार समझकर फेंकना होत था और आज पदाड़ी की इतनी मांग बढ़ गई है कि खेत से सरसों की पैदावार को बाद में उठाता है उससे पहले पदाड़ी को उठाकर घर में डालता है या फिर उसे बेच देता है। किसान के पास ईंट  भट्ठा






संचालक इस पदाड़ी को लेने के लिए आने लगे हैं। अब किसान को सरसों की कटाई, थ्रेसिंग एवं खेत से पैदावार को घर तक डलवाने का खर्चा सरसों के धांसों एवं पदाड़ी से ही प्राप्त होने लगा है। ऐसे में किसान की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा है।
   किसानों द्वारा सरसों उगाने का एक लाभ पशुओं का चारा भी सुलभ होना है। किसान अक्सर पशु पालते हैं जिनके लिए हरे चारे की जरूरत होती है और हरा चारा सरसों के पत्तों से मिल सकता है। किसानों के खेतों में सरसों उगाने से खेत की उर्वरा शक्ति भी बढ़ जाती है। सरसों के पत्ते एवं पौधे की जड़े भूमि के अंदर रहने से खाद की पूर्ति हो जाती है और भावी फसल के लिए लाभ होता है। ग्रामीण परिवेश का किसान ईंधन के लिए परेशान रहता है और उसे सरसों के धांसों से ईंधन प्राप्त हो जाता है। इस प्रकार सरसों एक नहीं अपितु कई लाभ मिल जाते हैं।



प्रदेशभर में विख्यात है बाबा मोलडऩाथ
-डा. होशियार सिंह की प्रकाशित हो चुकी हैं बाबा पर 6 पुस्तकें                         
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कनीना की आवाज।
 संत, तपस्वी, गुणों की खान, चमत्कारी एवं संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ की याद में जिला महेंद्रगढ़ के कनीना कस्बा में प्रत्येक वर्ष फाल्गुन शुक्ल एकादशी को महान धार्मिक मेला भरने जा रहा है। बाबा आश्रम के कारण कनीना एक दर्शनीय स्थल के रूप में उभरता जा रहा है।
    जिला महेंद्रगढ़ एवं रेवाड़ी की सीमा पर बसे करीब 850 वर्ष पुराने कनीना कस्बा को कान्हा की नगरी के रूप में जाना जाता है। इस नगरी के सामान्य बस स्टैंड के पास बाबा मोलडऩाथ आश्रम स्थित है। महान तपस्वी बाबा मोलडऩाथ की याद में बनवाए गए आश्रम पर प्रत्येक वर्ष फाल्गुन शुक्ल एकादशी को उनकी स्मृति में मेला लगता है। इस मेले में प्रदेशभर से श्रद्धालु आते हैं। शक्कर का प्रसाद चढ़ाया जाता है इसलिए यह मेला शक्कर मेला नाम से भी प्रसिद्ध है। इस मेले में आज भी राजा महाराजाओं के समय के मनोरंजन की पुरानी परम्पराएं चली आ रही हैं जिनमें ऊंटों की दौड़, दंगल, कबड्डी, घोडिय़ों की दौड़ प्रसिद्ध हैं। बाबा का मंदिर एवं आश्रम प्रशासन द्वारा लांच किए वेबसाइट पर भी उपलब्ध करवा रखे हैं। होली के पर्व के पास हर वर्ष मेला लगता है। अब तो रोड़वाल राजस्थान में भी मोलडऩाथ मंदिर निर्मित किया है जहां हर वर्षा मेला लगता है।
   बाबा मोलडऩाथ जिन्हें बालकनाथ नाम से भी जाना जाता है अपने बाल रूप में बिरही से यहां आए। यूं तो बाबा मोलडऩाथ कनीना में ही नहीं अपितु मांदी, कांवी भोजावास, रोड़वाल, मानसरोवर, नीमराणा आदि स्थानों पर भी रहे और वहां भी तप किया किंतु उनका प्रमुख स्थल कनीना में ही है। बाबा को देखने वाले कितने ही जन आज भी कनीना व आस पास गांवों में जीवित हैं। बाबा के गुणों एवं चमत्कारों को याद करके अति प्रसन्न हो जाते हैं।
   बाबा ने कनीना में आकर यहां की बणी(जंगल) में स्थित एक जाल को ही अपना तप स्थल बनाया। जब से उन्होंने कनीना में तप करना शुरू किया तभी से किसी प्रकार की कोई आपदा नहीं आई और ओलावृष्टिï एवं हैजे जैसे रोग को तो भगाने की उनमें अपार शक्ति थी। यही कारण हे कि उनके समय तो दूर आज भी जब कभी कनीना में ओलावृष्टिï होती हे तो लोग बाबा का ही नाम लेते हैं और देखते ही देखते ओलावृष्टिï बंद हो जाती है। बाल तपस्वी बाबा रहमदिली संत थे। उनके आश्रम के पास अनेकों जीव जिनमें मोर, गीदड़ और अनेकों प्रकार की चिडिय़ां मिलती थी। बाबा को मिलने वाले खाने में से अधिकांश भाग उन जीवों को दिया जाता था।
  बाबा मोलडऩाथ में जल पर समाधि लेने का अद्भुत गुण भी था। जब कभी उनको जल में तप करना होता तो पास में बाबा के जोहड़ में ही वे बैठ जाते और घंटों तप करते थे। अधिक समय तक जल में तप करने से उन्हें ठंड लग गई और उनका स्वास्थ्य बिगडऩे लगा। विक्रमी संवत 2006 फाल्गुन शुक्ल एकादशी को उन्होंने चोला त्याग दिया। जिस स्थान पर उन्होंने चोला त्यागा उसी स्थान पर बाबा को समाधि दी गई। आज बाबा की समाधि पर कनीना के समाजसेवी भीम सिंह द्वारा निर्मित करवाई हुई उनकी प्रतिमा शोभा बढ़ा रही है और उनके जीवन एवं चरित्र पर कनीना के ही लेखक डा. होशियार सिंह यादव द्वारा चार पुस्तकें प्रकाशित करवाई गई है जिनमें से एक आइएसबीएन नंबर की है वहीं एक कैलेंडर, आरतियां एवं बाबा चालीसा भी प्रकाशित करवाया है। डा. होशियार सिंह के पिता स्व. जयनारायण एवं माता मिश्री देवी भी बाबा के प्रमुख भक्तों में से थे।
   मेले से पूर्व रात्रि को बाबा आश्रम पर शब्द कीर्तन का आगाज होता है। वर्ष 1972 में कनीना के समाजसेवी स्व. डा. मेहरचंद द्वारा बाबा के नाम पर सत्संग मंडली बनाई  जो आज भी बाबा के नाम को चार चांद लगा रही है। सत्संग मंडली में मेहरचंद आजीवन अपना योगदान दे रहे हैं और स्वर्गवासी हो चुके हैं। मेले के प्रमुख दिन सुबह सवेरे से ही बाबा के आश्रम में लोगों और भक्तों का तांता लग जाता है। दूर दराज से लोग शक्कर का प्रसाद लाकर बाबा के धूने व बाबा की समाधि पर चढ़ाते हैं और मन्नतें मांगते हैं। माना जाता हैे की उनकी मन्नतें पूरी होती हैं। बाबा के आश्रम पर सबसे अधिक भीड़ महिलाओं की होती है। प्रसाद के रूप में प्राप्त शक्कर को बोरों में भरकर गायों को खिला दिया जाता है। अपार जनसमूह उमड़ पड़ता है। बाबा आश्रम में शक्कर का प्रसाद उसी वक्त से चढ़ाया जा रहा हे जब से बाबा का मेला भरता आ रहा है।
  उधर बाबा के मेले के दिन ही सुबह सवेरे थाना परिसर के पास भीड़ जुटने लग जाती है। दूसरे राज्यों से आने वाले घोड़ी दौड़ व ऊंट दौड़ के प्रतिभागी अपना जौहर दिखाते हैं और प्रथम तीन स्थान पाने वाले प्रतिभागियों को बड़ा ईनाम भी दिया जाता है। कबड्डी एवं दंगल भी शाम तक चलते हैं। शाम को पुन: बाबा के स्थल पर शब्द कीर्तनों का आगाज होता है। अगली सुबह दूर दराज से आए साधु संतों को आदर सहित विदा किया जाता है। दूर दराज से आने वाले साधु संतों एवं श्रद्धालुओं के ठहरने व भोजन का भी उचित प्रबंध किया जाता है। इस मेले का सबसे बड़ा आकर्षण वैसे तो शक्कर का ही प्रसाद है किंतु शक्कर को बांटने के लिए आने वाले श्रद्धालु बाबा के नाम पर पास से ही मिट्टïी छांटते हैं और जय बाबा की पुकारते हैं।
 बाबा स्थल को चार चांद लगाने के लिए बाबा के स्थल के पास ही अनेकों धार्मिक स्थलों का निर्माण होता जा रहा है। बाबा के आश्रम के पास ही 21 फुट ऊंची शिव प्रतिमा वाला शिवालय स्थित है। इस शिवालय का निर्माण शिवभक्त भरपूर सिंह निर्बाण ने निर्मित करवाया है जो हरिद्वार से 14 कावड़ लाकर शिवालय बाघोत में चढ़ा चुके हैं।  शिवरात्रि के दिन यहां तांता लगता है। शिव मंदिर के पास ही पेयजल टंकी बनी हुई है। पास में सीताराम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। सीताराम मंदिर के पास ही राधाकृष्ण का मंदिर बना हुआ है। बाबा आश्रम के पीछे सती समाधि भी बनी हुई है। पास में पानी से भरा जोहड़ है जहां कभी बाबा जल समाधि लेते थे।  कभी गंदा पानी भरा होता था किंतु विगत वर्षों से इसमें साफ पानी और पक्का तालाब बनाया हुआ है। पास में खाटू श्याम मंदिर भी मन मोह लेता है।
   बाबा आश्रम के नीचे वर्तमान में प्रकटीनाथ का आश्रम बना हुआ है जो बाबा के एक कमरे के निर्माण के वक्त प्रकट हुए थे। एक सुंदर गुफा का भी निर्माण ओमप्रकाश सत्संगी के प्रयासों से करवाया गया। बाबा के पास ही बाबा डूंगरमल की समाधि, खागड़ आश्रम, मंगलदेव की कुटिया, शहीद सुजान सिंह पार्क, बाबा हनुमान की 11 फुट ऊंची प्रतिमा वाला मंदिर, बाबा हनुमान का पुराना मंदिर, बाबा भैया स्थल, शनिदेव मंदिर, मां मंदिर, माता स्थल बने हुए हैं जहां समय-समय पर लोगों का तांता लगा रहता है। बाबा आश्रम के पास ही बस स्टैंड का होना भी अहं भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में बाबा आश्रम का नवीनीकरण किया गया है।


राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी में
-राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के लिए निकली रैली
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कनीना की आवाज।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी में मोटे अनाजों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक प्रभावशाली जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली को विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली कनीना मंडी तथा रेलवे रोड के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी और आमजन को मोटे अनाजों के महत्व का संदेश दिया।
इस अवसर पर ब्लाक टेक्निकल आफिसर डा. मनीषा यादव एवं सहायक तकनीकी मैनेजर अरविंद यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डा. मनीषा यादव ने कहा कि वर्तमान समय में स्वस्थ जीवन के लिए मोटे अनाज अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि अत्यधिक गेहूं एवं चावल के सेवन से शुगर तथा अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, जबकि चना, मक्का, बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और शरीर को आवश्यक ऊर्जा एवं रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों एवं आमजन से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक आहार में मोटे अनाजों को शामिल कर बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाएं।
इस अवसर पर विभाग की ओर से बाजरे एवं मक्का से बने पौष्टिक व्यंजन विद्यार्थियों को वितरित किए गए, जिन्हें बच्चों ने उत्साहपूर्वक ग्रहण किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अध्यापक ओमप्रकाश, नरेन्द्र कुमार, राकेश कुमार, माया देवी सहित 100 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
यह जागरूकता रैली स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ाने एवं संतुलित, पौष्टिक आहार अपनाने के संदेश के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
फोटो कैप्शन 01: जागरूकता रैली निकालते हुए

शतरंज प्रतियोगिता आयोजित की गई

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कनीना की आवाज। लिसान गांव में टाइगर शतरंज क्लब के तत्वावधान में शतरंज प्रतियोगिता आयोजित की गई। मुख्य अतिथि प्रमुख समाजसेवी अतरलाल ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। प्रतियोगिता का शुभारम्भ नगरपालिका कनीना की प्रधान रिम्पी ने किया। प्रतियोगिता में 18 टीमों ने भाग लिया। सीनियर वर्ग में दादरी के हिमांशु विजेता तथा लिसान के शीशराम उपविजेता रहे। जूनियर वर्ग में अर्जुन सैदपुर प्रथम तथा गुडियानी की लक्ष्या कुमारी द्वितीय रही। अतरलाल ने विजेता प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न व नगद इनाम प्रदान किए। प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचने पर मुख्य अतिथि अतरलाल का स्मृति चिह्न प्रदान कर स्वागत किया गया। टाइगर शतरंज क्लब के प्रधान ब्रहमप्रकाश, जयप्रकाश नम्बरदार, धर्मवीर पंच, रमेश शर्मा प्रवक्ता, महिपाल पंच, राजेन्द्र सांखला, सुनिल, कर्मबीर फौजी, विक्रम प्रजापतआदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित करते हुए