155 किलोमीटर रेल लाइन बनेगा चरखी दादरी से अलवर वाया,कनीना एवं नीमराना
-सर्वे का काम पूर्ण-रिपोर्ट
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कनीना की आवाज। बहु-चर्चित चरखी दादरी से कनीना-काठूवास होकर अलवर तक 155 किलोमीटर रेलवे लाइन निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा। मिली जानकारी अनुसार 4000 करोड़ रुपए से यह रेलवे लाइन बनेगी जिससे कई नए स्टेशन बनेंगे।
मिली जानकारी अनुसार चरखी दादरी, कनीना खास और काठूवास प्रमुख जंक्शन होंगे जबकि नीमराना, ततारपुर क्रासिंग स्टेशन होंगे। साथ में रामनगर, मोड़ी, चिडिय़ां, बाघोत, रामबास, गोमला नांगल जमालपुर, मांढण, नयागांव, जाट बहरोड़ रनोत, जिंदोली आदि हाल्ट बनेंगे। अगर जल्द ही रेलवे लाइन पर काम शुरू हो जाएगा तो निश्चित रूप से कनीना एवं काठूवास आदि के लिए बेहतर लाभ होगा। विगत वर्षों भी यह मामला जोर-शोर से उठाया गया था किंतु अधर में लटका हुआ था। अब रेलवे सूत्रों अनुसार यह सर्वे पूर्ण हो चुका है। 155 किलोमीटर लंबे रूट के लिए 15 नये स्टेशन बनेंगे। एमएल एवं एमपी इस संबंध में रेल मंत्री अश्विनी वष्र्णेय से इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।
कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-21 सोमवार को 13 अप्रैल को
-कुतरूं को नमन किया वो दुख पाया, डांट मारकर ही काम करवा पाया
पदाड़ी को बेचा जाता है ईंट भट्ठों को
-3500 रुपए प्रति एकड़ की बिकती है पदाड़ी
-सरसों के धांसे भी बने कीमती
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कनीना की आवाज। एक जमाने में चंद रुपयों में बिकने वाली तूड़ी तथा मुफ्त में मिलने वाली पदाड़ी एवं धांसे अब कीमती बन गए हैं। किसानों के लिए ये अतिरिक्त आय का साधन बन गए हैं। इन्हीं के दम पर हजारों रुपये किसान कमा लेते हैं। अब किसान न तो धांसों को नष्ट करते हैं और न पदाड़ी को बिखेरते हैं। अब तो प्रत्येक गांव में एक या दो लोग इनका स्टाक करके ईंट उद्योगों को पहुंचा रहे हैं जिससे कोयला एवं लकड़ी की मांग घटी है। कुछ लोगों ने गांव गांव में पदाड़ी का स्टाक किया हुआ है जो व्यापार का जरिया बन गया है। पदाड़ी 3500 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से बिक जाती है।
अब दूर दराज से लोग पदाड़ी को अपने गन्ने से गुड़ बनाने या ईंट भट्ठा मालिक इसे ईंट पकाने में काम में लेने लगे हैं। वर्तमान युग में पदाड़ी को भारी दामों पर बेचा जाता हैं। कुछ लोग तो पदाड़ी का धंधा ही करने लग गए हैं। पदाड़ी को भारी मात्रा में इकट्ठा कर लिया जाता है और भ_ा मालिकों को बेचा जाता है। जब जब सरसों की कटाई होती है कुछ लोग सक्रिय हो जाते हैं और बेहतर आय पदाड़ी से कमा लेते हैं।
पदाड़ी की मांग भी दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। किसान धांसों के बदले सरसों की कटाई करवाने के अलावा पदाड़ी को महंगे दामों पर बेचते आ रहे हैं। किसान राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, अजीत कुमार, कृष्ण कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पदाड़ी को उनसे मोल ले जाते हैं और एक जगह स्टाक कर लेते हैं जो ईंट भ_ा उद्योगों को बेच दिया जाता है। इस प्रकार किसान एवं पदाड़ी का व्यापार करने वाले खुश हैं।
किसान गजराज सिंह, योगेश कुमार, महेंद्र, महिपाल आदि ने बताया कि धांसे न केवल ईंधन का विकल्प है अपितु गरीब तबके के लोग जो चूल्हे से खाना बनाते, धांसों को वरदान समझते हैं। धांसों को किसान सरसों कटाई के समय उखाड़ लेते हैं और इक_ा कर वर्षभर प्रयोग करते हैं।
एक वक्त था जब सरसों के धांसों को लोग उखाड़ कर नहीं लाते थे आज उनकी की कीमत बढ़ गई है। किसान फसल कटाई के साथ-साथ जहां धांसों को इकट्ठा करते हैं। इन्हें ईंधन के विकल्प के रूप में प्रयोग करते हैं।
किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, अजीत कुमार, योगेश कुमार आदि ने बताया कि धांसों को काटकर सूखा लिया जाता है और इनको खाना बनाने के लिए प्रयोग में लाते हैं। कुछ किसान पशुओं का आहार पकाने में भी उनका उपयोग करते हैं। धांसों को लोग इकट्ठा करके अपने घर आंगन में कहीं जमा कर लेते हैं और कई महीनों तक विशेषकर ईंधन के विकल्प के रूप में प्रयोग करते हैं। चाहे ये कम ऊष्मा प्रदान करते हो किंतु गरीब तबके के लोगों के लिए धांसे बहुत कीमती माने जाते हैं। किसान इन धांसों को उखाड़ कर अपने लिए प्रयोग करते हैं या आसपास के लोग उन्हें उखाड़ कर ले आते हैं। इस बार तो गैस सिलिंडर की कमी समझते हुए किसान खेतों से धांसे उखाड़कर ला रहे हैं।
फोटो कैप्शन 07: पदाड़ी का किया गया स्टाक
08: खेत से धांसे उखड़ता किसान
580 क्विंटल सरसों की निजी स्तर पर हुई खरीद, रविवार को भी हुई खरीद
- गेहूं की खरीद 6460 क्विंटल हुई
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कनीना की आवाज। कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरसों और गेहूं की खरीद जारी है। जहां सरकारी तौर पर सरसों की कोई खरीद नहीं हो पाई है। मिली जानकारी अनुसार रविवार को 580 क्विंटल निजी स्तर पर सरसों खरीदी गई जिसका भाव 6210 से लेकर 6350 रुपए प्रति क्विंटल तक रहा।
रविवार को 205 जमीदारों की 6460 की क्विंटल गेहूं खरीदी गई। 8000 क्विंटल गेहूं की लिफ्टिंग भी की जा चुकी है। क्योंकि खरीद जोर शोर से जारी है। अब भविष्य में गेहूं की खरीद की आवक और खरीद बढऩे की संभावना है। इस बार पुरानी अनाज मंडी में नहीं खरीदा गया गेहूं।
फोटो कैप्शन 06: कनीना अनाज मंडी में गेहूं की खरीद का नजारा
शोर शराबे के बगैर नहीं रह पाती आधुनिक पीढ़ी
-मोबाइल तो उनके रग रग में बस गया -वीरेंद्र सिंह
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कनीना की आवाज। वैसे तो शोर कम से कम दो दर्जन बीमारियों का घर है किंतु आधुनिक पीढ़ी शोर शराबे में ही जीवन व्यतीत करती है तथा उन्हें शोर पसंद हैं। जब से मोबाइल आए हैं तो कानों में लीड लगाकर संगीत सुनते रहते हैं परंतु या तो शोर शराबा या फिर संगीत उनकी पसंदीदा चीज है। जब किसी बाइक सवार युवा को देखें तो वह अपने साथियों को बुलाने के लिए भी होर्न बजते रहते है। कभी-कभी तो घर के पास होर्न इतना बजाते हैं कि वे बुलाना चाहते हैं किसी को और दो तीन घरों के लोग बाहर निकलकर आ जाते हैं। बाइक पर चलते चलते जोर जोर से होर्न बजाते जाने की आदत बन गई है। एक और डाक्टर और वैज्ञानिक मानते हैं कि शोर प्रदूषण है किंतु आधुनिक पीढ़ी शोर से खुश होती है। उन्हें तो शोर भी संगीत नजर आता है। यहां तक कि कुछ युवा पीढ़ी के जन तो हगते, मूतते, हंसते, रोते या स्नान करते समय भी मोबाइल से कुछ न कुछ संगीत या शोर की चीज सुनते रहते हैं। यही कारण है कि आजकल की पीढ़ी में जहां कान भी कमजोर होते जा रहे हैं वही आंखें भी कमजोर होती जा रही हैं। अब तो बच्चों को खुश करने के लिए भी शोर शराबे किए जाते हैं। या तो टीवी पर या एलसीडी पर या मोबाइल पर उन्हें शोर शराबे के नृत्य आदि दिखाये जाते हैं। विशेष कर छोटे बच्चों के काम तो बहुत ही संवेदनशील होते हैं ऐसे में उन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। शोर के बगैर आधुनिक पीढ़ी जीवित नहीं रह पाती। यूं कहा जाए कि युवा पीढ़ी शोर के सहारे चलती है तो गलत नहीं होगा। यही कारण है कि अधिकांश घटनाएं उस वक्त होती हैं जब युवा शोर में लीन होते हैं। आजकल बुजुर्ग कम रह गए हैं। बुजुर्ग बड़े ही शांतप्रिय जीवन जीना चाहते हैं। आने वाली पीढ़ी बहुत ही शोर शराबे में जीएगी और इससे आगे जो पीढ़ी आएगी उनके बारे में तो महज कल्पना कर सकते हैं।
युवा पीढ़ी तो क्या मोबाइल ने तो हर इंसान की जिंदगी बदलकर रख दी है। मोबाइल को हर इंसान अपने पास रखता है। महिला खाना बनाते समय भी मोबाइल रखती है तो व्यापारियों के लिए तो अहम चीज मोबाइल बन गई है। बूढ़े बड़े भी अब तो मोबाइल से चिपके देखे गए हैं। यह सत्य है कि लोग हगने मूतते वक्त भी मोबाइल प्रयोग करते हैं। चरवाहा भी मोबाइल प्रयोग करता है क्योंकि मोबाइल से लाभ तो अनेक हैं किंतु इसका दुरुपयोग करना घातक साबित होता है। ऐसे में मोबाइल के लाभ के साथ-साथ इसके हानियां अधिक है।मोबाइल अनेक बीमारियों का घर है किंतु अकेलेपन को दूर करने में भी है भूमिका निभाता है। लंबे समय तक शिक्षण कार्य करने वाले वीरेंद्र ढाणा मोबाइल के लाभ व हानियों की चर्चा कर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
फोटो कैप्शन: वीरेंद्र ढाणा
इतिहास कभी नहीं भुला पाएगा 13 अप्रैल का दिन
-जलियांवाला बाग हत्याकांड में मारे गये थे करीब 379 व्यक्ति
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कनीना की आवाज। 13 अप्रैल 1919 पंजाब के जलियावाला बाग हत्याकांड की याद दिलाता है। जब हजारों लोग घायल हो गये थे तथा करीब 379 लोग मौत के मुंह में चले गये थे। निर्दोष लोगों पर जो बैसाखी पर्व की खुशी मनाने के लिए इक_ा हुए थे और उन निहत्थों पर जनरल डायर ने गोलियां बरसाकर जघन्य अपराध किया था। इस संबंध में इतिहासकारों के विचार इस प्रकार हैं-
प्रथम विश्वयुद्ध में अंग्रेजों की मार्मिक अपील पर भारतीयों ने तन मन धन से अंग्रेजों की मदद की और विदेश जाकर शहादत दी। उस वक्त अंग्रेजों ने आश्वासन दिया था की युद्ध के बाद भारत को स्वशासन प्रदान करने की दिशा में प्रयास किया जाएगा लेकिन बदले में रोलेट एक्ट मिला । प्रथम विश्व युद्ध के दुष्प्रभाव एवं सरकार की दमनकारी नीतियों की वजह से भारतीय जनमानस में एक आक्रोश पैदा हो रहा था जिससे भयभीत होकर ब्रिटिश सरकार ने रौलेट एक्ट पास कर दिया। यह एक ऐसा काला कानून था जिसके तहत किसी भी भारतीय को ब्रिटिश सरकार संदेह के आधार पर गिर तार कर सकती थी और वह व्यक्ति अपने बचाव में ना अपील कर सकता था ना दलील कर सकता था ना वकील कर सकता था। तो स्वाभाविक रूप से इस काले कानून के खिलाफ पूरे भारत में तीव्र प्रतिक्रिया हुई और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसके विरोध में 6 अप्रैल 1919 को राष्ट्रीय स्तर की हड़ताल का आह्वान किया। पंजाब क्षेत्र में भी इसी तरह की पूर्ण हड़ताल रही और इस हड़ताल के दौरान ब्रिटिश सरकार ने पंजाब के बड़े नेताओं डा सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू को गिर तार कर लिया जिसके विरोध में अमृतसर के जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 इस्वी को बैसाखी के पर्व के दिन एक सभा बुलाने का निर्णय किया गया। इस दौरान स्वामी श्रद्धानंद के आह्वान पर महात्मा गांधी ने 10 अप्रैल को पंजाब के लोगों से मिलने का कार्यक्रम बनाया लेकिन उनको पलवल रेलवे स्टेशन पर ही रोक लिया गया और गिर तार करके वापस मुंबई भेज दिया। सरकार की इस तरह की दमनकारी नीतियों रौलेट एक्ट के प्रतिरोध और पंजाब के लोकप्रिय नेताओं की रिहाई के लिए 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियावाला बाग में एक सभा बुलाई गई और उस दिन पंजाब का लोकप्रिय त्यौहार वैशाखी भी था इस सभा में लगभग 20 हजार के करीब लोग शामिल हुए जो निहत्थे थे और शांतिपूर्ण तरीके से सभा करके सरकार से मांग कर रहे थे अपने नेताओं की रिहाई की लेकिन इसी दौरान पंजाब के गवर्नर माइकल ओ डायर के आदेश पर सेना अधिकारी जनरल डायर ने निहत्थे जनता के ऊपर बगैर चेतावनी दिए गोलियां चलवाई और यह गोलियों के खत्म होने तक जारी रही।
-- प्रो. कर्मवीर
जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 को हजारों लोगों को माइकल ओ डायर मौत के घाट उतारा गया था। जो बहुत ही निंदनीय कार्य था। इसी दिन जलियांवाला बाग में एक 20 वर्ष का उद्यम सिंह भी पानी पिलाने का कार्य कर रहा था और उसने अपनी आंखों के आगे जब इस नरसंहार को देखा तो उसने शपथ ली संकल्प किया कि मैं इसका बदला लूंगा और वह बदला उसने पूरा किया। 21 साल के बाद 1940 में लंदन में जाकर तत्कालीन पंजाब के गवर्नर माइकल ओ डायर की हत्या करके बदला लिया।। तो इस तरह से जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को एक तरफ जहां आक्रामकता प्रदान की जिससे आगे चलकर क्रांतिकारी आंदोलन चला और भगत सिंह राजगुरु सुखदेव जैसे हजारों नव युवकों ने अपने प्राणों की आहुति देकर आजादी को निकट लाया गया दूसरी तरफ गांधी जी के नेतृत्व में राष्ट्र्रव्यापी आंदोलनों की पृष्ठभूमि तैयार हुई जिसके परिणाम स्वरूप असहयोग आंदोलन और आगे चलकर सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन चले और अंतत भारत को आजादी हासिल हुई।
-प्रो.डा शर्मिला यादव
हर वर्ष 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग में हुए मासूम लोगों के हत्याकांड को याद करने के लिए और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए इस दिन को राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है। बैसाखी के दिन 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में भारी नरसंहार की वजह से भारतीय इतिहास में जलियांवाला बाग एक प्रसिद्ध नाम और जगह बन गया । ब्रिटिश सरकार के बढ़ते अत्याचारों और रोलेट एक्ट नाम के काले कानूनों का विरोध करने के लिए जनता पंजाब के अमृतसर जिले के जलियांवाला बाग में शांति प्रिय रूप से विरोध प्रदर्शन कर रही थी। किंतु ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध किसी भी विरोध को कुचलने के लिए आमादा ब्रिगेडियर जनरल डायर ने मासूम जनता पर सैनिकों को गोलाबारी करने के आदेश दिए जिसके परिणाम स्वरूप हजारों की संख्या में लोग घायल हुए तथा मारे गए ।
- विजयपाल प्राचार्य एवं इतिहासकार
ब्रिटिश सरकार के विरोध में अपनी जान गंवाने वाले इन शहीदों की याद में यहां पर एक स्मारक बनाया गया है जो एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्थान के रूप में प्रख्यात है।
यह दिवस आज भी राष्ट्र को यह याद दिलाता है कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों एवं राष्ट्र प्रेमियों ने इस देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे और हमें इस स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए भरसक प्रयास करने चाहिए।
-नरेश कुमार शिक्षक
फोटो कैप्शन: प्रो डा. शर्मिला, प्रो कर्मवीर तथा नरेश कुमार, प्राचार्य विजयपाल
कनीना मंडी में निश्शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन
-40 मरीजों ने उठाया शिविर का लाभ
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कनीना की आवाज। कनीना मंडी स्थित लाला शिवलाल धर्मशाला में सेवा भारती, कनीना एवं उजाला सिग्नस अस्पताल रेवाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में एक विशाल निश्शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया।
इस स्वास्थ्य शिविर में क्षेत्र के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। शिविर में विशेष रूप से पेट, आंत एवं लीवर रोगों सहित अन्य सामान्य बीमारियों की जांच एवं परामर्श दिया गया। साथ ही ब्लड शुगर सहित अन्य आवश्यक जांचें भी निश्शुल्क की गईं।
विशेषज्ञ डाक्टरों ने मरीजों की जांच कर उन्हें उचित परामर्श एवं उपचार संबंधी जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर आयोजकों ने बताया कि सेवा भारती का निर्माणाधीन चेरिटेबल अस्पताल शीघ्र ही जनता की सेवा के लिए तैयार होने जा रहा है, जहां विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक आमजन के लिए स्थायी रूप से उपलब्ध रहेंगे।
शिविर के सफल आयोजन में कैंप आर्गेनाइजर प्रताप यादव, डा. पीयूष,डीएम गैस्ट्रोलाजी एवं डॉ. हर्ष कुमार,सामान्य रोग विशेषज्ञ का विशेष योगदान रहा। इसके अतिरिक्त कृष्णा यादव, मुस्कान, पवन कुमार, सुरेश शर्मा शाखा अध्यक्ष, संरक्षक शिव कुमार अग्रवाल, योगेश कुमार अग्रवाल(प्रचार प्रमुख तथा शाखा उपाध्यक्ष नवीन कुमार मित्तल ने व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिविर के दौरान लोगों में उत्साह देखने को मिला और स्थानीय नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से कराने की अपेक्षा व्यक्त की। इस मौके पर 40 मरीजों ने जांच करवाई एवं परामर्श लिया।
फोटो कैप्शन 03: स्वास्थ्य जांच करते हुए डाक्टर
एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला में अध्यापक-अभिभावक बैठक का आयोजन
-775 से अधिक अभिभावकों ने लिया भाग
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कनीना की आवाज। एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ककराला में कक्षा नर्सरी से पांचवीं तक के अध्यापक-अभिभावक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में 775 से अधिक अभिभावकों ने भाग लेकर छात्रों के प्रति अपनी जिम्मेदारी एवं अध्यापक-अभिभावक बैठक के महत्व को समझने का परिचय दिया। विद्यालय प्रधानाचार्या शिप्रा सारस्वत ने अपने वार्षिक पाठ्यक्रम के बारे में विस्तृत वर्णन करते हुए बताया कि एसडी विद्यालय खेल एवं गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई करवाता है ताकि बच्चा उसे मनोरंजन के साथ सीखे। सभी अभिभावकों ने अग्रिम सोच का परिचय देते हुए बच्चों के भविष्य के लिए विद्यालय प्रबंधन व सभी संबंधित अध्यापकों के साथ अध्ययन संबंधी समस्याओं के समाधान, शैक्षिक उपलब्धियों के साथ-साथ अन्य गतिविधियों व विषयों पर विमर्श किया। अभिभावकों ने अपने बच्चों की दिनचर्या उनके व्यवहार समय-सारिणी, रुचि आदि से संबंधित पहलुओं से प्रबंधन व संबंधित अध्यापकों से परिचित करवाया और अपने बच्चों की रिपोर्ट लेने में काफी रुचि दिखाई।
विद्यालय सीएओ नरेन्द्र यादव ने अध्यापक-अभिभावक बैठक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बैठक जागरूक अभिभावकों के लिए अध्यापकों से समय-समय पर विचार विमर्श करने व बच्चों के लिए सही मार्ग का चुनाव व सहयोग का आधार है। अध्यापक एवं अभिभावकों का विचार-विमर्श छात्र के जीवन को नई दिशा प्रदान करता है। बच्चे के शैक्षणिक विकास में विद्यालय के साथ-साथ अभिभावक की भी अहम् भूमिका होती है।
इस अवसर पर विद्यालय डिप्टी डायरेक्टर पूर्ण सिंह, कोआर्डिनेटर स्नेहलता, सहित सभी कोआर्डिनेटर्स एवं समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
फोटो कैप्शन 01: एसडी स्कूल में पीटीएम का नजारा
5 महीने में भर गया है कालरवाली जोहड़
-खोदाई के बाद नजर आ रहा है जल ही जल
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कनीना की आवाज। यूं तो कनीना के दो प्रमुख जोहड़ कालरवाली और होलीवाला दोनों की खोदाई करके पानी डालने का कार्य शुरू हो गया है। संपूर्ण कस्बे का गंदा पानी इन दोनों जोहड़ों में आता है। सबसे ज्यादा पानी कालरवाली जोहड़ में तत्पश्चात होलीवाला जोहड़ में आता है। कलरवाली जोहड़ की पांच माह पहले खोदाई की गई थी जो अब लबालब गंदे पानी से भरा हुआ है। वही जोहड़ ने दर्जनों हरे पेड़ों को लील लिया है। वहीं सड़क मार्ग को भारी हानि पहुंचाई है। कई बार इसका गंदा जल घरों में घुस गया और बहुत से लोगों को परेशान किया है। सरकार की ओर से इस जोहड़ की खुदाई करवाई गई, गहरा करवाया गया किंतु 5 महीने में ही यह पूरा भरा खड़ा हुआ है। इस समय इसका पानी निकालकर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।
उधर होलीवाला जोहड़ भी अब भरने लगा है। जल्दी यह जोहड़ भी पूरा भर जाएगा। सैकड़ों वर्षों के बाद इन जोहड़ों की सफाई एवं खोदाई करवाई गई है। आश्चर्य यह है कि उनकी पैमाइश भी ढंग से नहीं करवाई गई और न ही अतिक्रमण हटाया गया। लोगों को आशा थी कि इन जोहड़ों के चारों ओर घूमने की व्यवस्था भी की जाएगी किंतु व्यवस्था तो दूर इन जोहड़ों की खुदाई करके आनन फानन में गंदा जल भरने की कार्रवाई शुरू कर दी।
फोटो कैप्शन 05: कालरवाली जोहड़
3 दिनों से पेयजल व्यवस्था ठप, टैंकरों से भर रहे उपभोक्ता पेयजल
- वाटर सप्लाई की मुख्य मोटर जली, उपभोक्ता परेशान, अतिरिक्त मोटर की हो व्यवस्था
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कनीना की आवाज। कनीना -रेवाड़ी सड़क मार्ग पर स्थित मुख्य जलघर एवं सप्लाई केंद्र पर 40 हार्स पावर की मुख्य मोटर खराब जाने के कारण कनीना कस्बा में पेयजल सप्लाई 3 दिनों से नहीं हो पा रही है जिसके चलते उपभोक्ता परेशान हैं। अब तो टैंकर मंगवाकर उपभोक्ता पेयजल की आपूर्ति कर रहे हैं।
उपभोक्ता सुरेंद्र कुमार, दीना, महेश, राखी, सुनीता आदि ने बताया कि 3 दिनों से पेयजल के लिए उपभोक्ता तरस रहे है और दूर दराज से सिर पर पानी लाकर घरों में आपूर्ति की जा रही हैं। कुछ लोग टैंकर मंगवाकर पेयजल की आपूर्ति कर रहे हैं। उच्चाधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि हर वर्ष यही हालत बनती है परंतु अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते जिसके चलते उपभोक्ता बेहद परेशान है। गर्मी में पेयजल सप्लाई न होने से परेशानी बढ़ जाती है। इस संबंध में एक्सईन प्रदीप कुमार ने शनिवार शाम तक समस्या समाधान की बात कही थी किंतु समस्या आज भी जस की तस है।
उधर पर जल सप्लाई केंद्र से मिली सूचना अनुसार खराब हुई मोटर को शनिवार के दिन निकाल लिया गया था और उसे ठीक करवाने के लिए भेज दिया गया है लेकिन रविवार तक भी ठीक करवाकर समस्या का समाधान नहीं किया गया था।
फोटो कैप्शन 04: टैंकरों से उपभोक्ता जल भरते हुए



















































