कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-18
-कुतरूं को चमचों पर रहा भरोसा, कानों का रहा कच्चा
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कनीना की आवाज। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने बतौर विज्ञान अध्यापक एवं प्राध्यापक 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया है। उन्होंने स्कूल, कालेज, निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि दौरान करीब 35 विभिन्न स्कूल प्राचार्यों के साथ काम किया और उनमें से चंद कुतरूं प्राचार्य निकले। जिनका नाम लेते ही तन मन में दर्द होता है। जिनकी भावना हीन रही है। उनका धरती पर आना ऐसा लगता है कि किसी के काम को रोकने आए हैं। सच का साथ नहीं दिया और उन्होंने सदा ही अच्छे और स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों का विरोध किया। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य के कारनामे सामने आये हैं। आज एक कारनामा यहां उजागर किया जा रहा है।
शास्त्रों में लिखा है जिसकी अपनी बुद्धि काम नहीं करती उसका शास्त्र क्या कर सकता है? कुतरूं जैसी तुच्छ लोग भी अपने आप को किसी मंत्री और प्रधानमंत्री से कम नहीं समझते। बहुत से ऐसे मंत्री होते जो कानों के कच्चे होते हैं और लोगों का उल्टा सीधा काम करते रहते हैं। वो यह नहीं जानते कि लोगों ने उन्हें मंत्री पद तक पहुंचा है परंतु करते हैं उल्टा काम और वो भी किसी के कहने से, कान भरने से, कानों के कच्चे मिलते हैं, अपने चमचों पर ज्यादा विश्वास करते हैं। ऐसा होशियार सिंह ने खुद अपने जीवन में झेला है परंतु क्या करें वक्त की मार सहकर भी जीवित है। कुछ स्कूलों में कुतरूं प्राचार्य मिल जाते हैं और कुछ चमचे भी होते हैं और चमचे उन कुतरूं प्राचार्यों की कमजोरी को भांप कर उनकी चमची मारना शुरू कर देते हैं। अपने काम तो करवा लेते हैं लेकिन दूसरों का भी बिगड़वा देते हैं। एक ऐसे प्राध्यापक भी मिले जो प्राचार्यों की कमजोरी पड़कर उनको धमकाते थे। जिनको किसी प्रकार का कोई ज्ञान नहीं, कभी कक्षा में पढ़ाया नहीं किंतु दूसरों का अहित कैसे करते हैं या दूसरों के कंधे पर बंदूक रखकर कैसे चलाते हैं, इस बात का जरूर ज्ञान रहा है। वे दूसरे का बुरा कुछ करवा देते हैं। एक बार होशियार सिंह की जांच हो रही थी जब उन्होंने पत्रकारिता की अनुमति ले रखी थी। उच्च अधिकारियों से जांच होती -होती कुतरूं प्राचार्य तक आई। कुतरूं प्राचार्य ने अपने चमचा से पूछा। एक चमचे ने उसे बताया कि आप यह जवाब लिखकर भेज दो कि हमें नहीं पता कि होशियार सिंह पत्रकार है या नहीं। आप दैनिक जागरण, दैनिक ट्रिब्यून कार्यालयों से संपर्क कर सकते हैं अर्थात चमचों ने उन अखबारों का नाम लिखवा दिया जिनमें होशियार सिंह काम करता था परंतु अनुमति ले रखी थी। इसलिए चमचे और कुतरूं कुछ नहीं बिगाड़ पाये। कोई भी प्राचार्य है उसे अपने विवेक से काम लेना चाहिए, भगवान ने उन्हें बुद्धि दी है। किसी चमचे पर विश्वास नहीं करना चाहिए जो उनकी खुशामद करते हैं। उनकी बात पर विश्वास न करके केवल अपने विवेक से काम लेना चाहिए। कुतरूं आचार्य कानों के कच्चे होते हैं उन्हें ऐसा नहीं होना चाहिए। हर बात को स्वयं करें, स्वयं समझे तब ही वो कामयाब होते हैं। कुतरूं अपने आप को समझते हैं कि पता नहीं तुम्हारे अंदर क्या पावर है और वह अपनी पावर भी दिखा लेते हैं और किसी का कुछ बिगाड़ भी नहीं सकते। सच्चाई यह है कि बुरे बन जाते हैं। इक्का-दुक्का प्राचार्य को छोड़कर किसी में दम नहीं होता कि किसी का कुछ बिगाड़ सके। हां कुछ कुतरूं ऐसे जरूर है जो कर्मचारी के लाभ रोक लेते हैं, समय पर उनका काम नहीं करते, उनको पीछे-पीछे हंडवाते हैं। वो यह समझते हैं कि तुम्हारे तो लंबी पूंछ लग गई है। वो यह नहीं समझते कि पूछ सदा दुखदाई होती है। न जाने कब पूंछ को पकड़ कर लोग झटका मार दे, पूंछ भी टूट जाए और कुतरूं भी गिरा मिले, मुंह के दांत भी गायब हो जाए। एक जगह चर्चा आती है किकुटरु प्राचार्य ने एक चपरासी की बदली करवाने का प्रयास किया लेकिन चपरासी ने सबक सिखाते हुए कुतरूं प्राचार्य को दूर दराज भिजवा दिया। पता नहीं किस इंसान में क्या गुण पाया जा सकता है। सदा यह नौकरी नहीं रहेगी। कुतरूं प्राचार्य ज्यादा समय नहीं रहते। अअगर 10 साल या 20 साल। क्या वो किसी का बुरा करके और समाज में सम्मान पाएंगे। एक ऐसा निकृष्ट प्राध्यापक भी होशियार सिंह ने देखा है जिसने कभी जीवन में किसी का हित नहीं किया, दूसरे के जरिए अहित करवाता रहा, स्वयं सामने भी नहीं आया। परंतु लोग उसे जानते हैं इसलिए उसे नीचे, मक्कार, कुतरूं का बच्चा कहते हुए नहीं शर्माते। ऐसे में किसी का हित नहीं करने वाले प्राचार्य सदा दुख पाते हैं। कुछ ऐसे प्राचार्य मिले जो दूसरे के हित में लगे रहते थे किसी को कुछ नहीं कहते थे परंतु होशियार सिंह को तो ऐसे कुतरूं प्राचार्य मिले जिन्होंने उनका अहित किया। ऐसे कुछ कुतरूं प्राध्यापक मिले, ऐसे कुछ नीच व्यक्ति मिले जिन्होंने अहित किया। यहां स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि और होशियार सिंह ने बतौर पत्रकारिता किसी का आज तक बुरा नहीं किया। कोई धरती पर यह नहीं कह सकता कि उनसे कोई एक नया पैसा लेकर समाचार लिखा हो। किसी का किया तो हित किया होगा। शायद कनीना और आसपास जितने पत्रकार हैं वो सभी मिलकर उतनी खबर नहीं लिख पाते हैं जितनी होशियार सिंह अकेला लिखता है लेकिन फिर भी लोग उसके दुश्मन है। कहते कि अच्छे के ही दुश्मन होते हैं और बुरे से तो सभी डरते हैं यहां तक कि कहावतें भगवान भी बुरे से डरता है। चाहे कुछ भी हो बुरा करने वाले का अंत बुरा होता है। कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए, कान का कच्चा होकर के कितने कुतरूं प्राचार्य मिले जिनके प्रति होशियार सिंह के दिल में नफरत बची है। होशियार सिंह केवल चाहता है कि भगवान इन कुतरूं प्राचार्यों को वह सजा दे कि खाट में पड़े पड़े लंबे समय तक दुख झेले ताकि उनको पीछे सभी बातें याद आए और कितने अहित किए हैं उसके सारे सामने आए। भगवान से यही प्रार्थना है कि इन कुतरू प्राचार्यों को जल्दी नहीं उठाये इनको ऐसी सजा दे की चारपाई पर ही हगने मूतते रहे, उनके परिवार वाले भगवान से दुआ करें कि इस कुतरूं को उठा ले।
देश के लिए 5 लड़ाई में लडऩे वाले हवलदार राम सिंह नहीं रहे
-कनीना में किया गया अंतिम संस्कार
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कनीना की आवाज। देश के लिए 5 लड़ाई लडऩे वाले एवं करीब 87 वर्षीय कनीना के निवासी राम सिंह हवलदार चल बसे। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं। उनका अंतिम संस्कार कनीना में किया गया। अनेक जन उनके अंतिम संस्कार में पहुंचे।
वे अपने पीछे अपनी पत्नी, दो बेटे, दो पोते, एक पोती, 3 पड़पोती से भरा परिवार छोड़ गये हैं। उन्होंने देश के लिए पांच लड़ाइयां लड़ी थी।
उनका कहना है कि देश की सीमाओं पर जो कुछ छिटपुट की घटनाएं घटती वे देश की सीमाओं पर जाने को तैयार हो जाते थे।
1939 में कनीना में जन्मे हवलदार राम सिंह की मां का नाम डोडी देवी है तथा पिता का नाम मातादीन है। वेे 9 अक्टूबर 1957 में हिसार में देश सेवा के लिए भर्ती हुए। महज चार जमात पास राम सिंह हवलदार 5 जनवरी 1975 को सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें अब तक सेवा के दौरान अनेकों मेडल मिले थे। जिनमें गोवा रक्षा मेडल, नागा हिल्स मेडल, 9 साल की लंबी सेवा का मेडल तथा गोवा मेडल आदि अनेक मेडल मिले थे।
राम सिंह सिपाही पद पर 11 कमाऊ रेजीमेंट में भर्ती हुए थे जिन्होंने 29 अगस्त 1958 से लेकर 11 अप्रैल 1960 तक गोवा युद्ध ,6 दिसंबर 1961 से 21 दिसंबर 1963 तक चीन के विरुद्ध युद्ध, 20 दिसंबर 1964 से 11 सितंबर 1965 तक पाक के विरुद्ध युद्ध, 20 सितंबर 1965 से 27 अप्रैल 1968 तक पाक के विरुद्ध चल रहे युद्ध तथा 27 नंबर 1970 से 20 अगस्त 1973 तक सिक्किम का युद्ध आदि में भाग लिया लेकिन स्वर्ग सिधारने से पहले बताते थे कि 1961 में गोवा में पुर्तगालियों को भगाने के लिए युद्ध किया। चाइना युद्ध में उनका योगदान अहम था। उन्होंने बताया था कि चुसूल मोर्चे पर चार्ली कंपनी के 114 सैनिक मारे गए थे उस समय जब हेडक्वार्टर से उनका संपर्क टूट गया था तो उन्हें तथा उनके साथी 3 सिपाही तथा एक नायक को सूचना लाने को भेजा गया था। चारों गलती से दुश्मनों के बीच में पहुंच गए जिसमें 2 सिपाही तथा नायक भी मारे गए किंतु हवलदार रामसिंह किसी प्रकार दुश्मनों से बच निकले और हेड क्वार्टर को सूचना दी कि किस प्रकार उनकी कंपनी को खत्म कर दिया गया है तथा दुश्मन अभी भी सक्रिय है जिसके चलते गोलाबारी करके दुश्मन को खदेड़ा गया। उस समय की लड़ाई को याद कर रो पड़ते थे । 1965 में राजोरी से आगे महिंद्रा में उन्होंने तैनाती दी और युद्ध के दौरान घायलों को लाने ले जाने की भूमिका निभाई थी।
फोटो कैप्शन: हवलदार राम सिंह
आज भी लोकप्रिय हैं देशी फ्रिज
--कोरोना काल के बाद बढ़ी है कुछ मांग
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कनीना की आवाज। गर्मियां से पेयजल के रूप में काम में लिए जाने वाले मिट्टी के घड़ों की मांग कम है जिसके कारण मिट्टी के घड़े बनाने वाले मायूस हैं। परंतु बुजुर्ग लोग मिट्टी के घड़ों का ही प्रयोग करते हैं। सेहत के लिए उत्तम एवं बेहतर पेयजल हमेशा प्रदान करने वाले गरीबों के फ्रिज अब विवाह शादियों पर अधिक देखने को मिल रहे हें। वैज्ञानिक युग में देसी फ्रिज का स्थान बिजली से चलने वाले फ्रिज ने ले लिया है। आने वाले समय में इनका अस्तित्व ही लुप्त होने की कगार पर पहुंच जाएगा।
पूर्वजों से लेकर आज तक इन घड़ों का जल प्रयोग करते आ रहे हैं। इन घड़ों का जल आज भी बुजुर्ग बड़े चाव से पीते हैं। बेशक बिजली से चलने वाले फ्रिज ने घड़ों का स्थान ले ही लिया है किंतु आज भी कुछ उत्सवों पर इन देसी फ्रिज का वजूद देखने को मिल रहा है।
गरीबों के घड़े अर्थात देसी फ्रिज आज के वैज्ञानिक युग में भी उतने ही लोकप्रिय हैं जितने पहले के जमाने में होते थे। घड़े बनाने वालों की मुसीबतें बढ़ जाने से उनकी रोटी रोजी के लाले मंडराने लगे हैं। अब तो गिने चुने घड़े बनाने वाले लोग ही घड़ों का निर्माण करते हैं वरना उन्हें घड़े खरीदकर लाने पड़ रहे हैं। आने वाले समय में गरीबों के फ्रिज लुप्त प्राय हो जाएंगे। कुम्हार जाति के लोग अपनी रोटी रोजी छिनने से परेशान हैं।
विज्ञान के युग में जहां फ्रिज की भरमार देखने को मिलती है वहीं गरीबों के फ्रिज घड़े आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं जितने पहले होते थे। आज भी भीषण गर्मी में सड़के के किनारे वाटर हट्स देखने को मिलती हैं जहां ठंडा पानी पीने के लिए राहगीर रुकते हैं। इन घड़ों का पानी पीकर वे शकुन महसूस करते हैं। घरों में जहां फ्रिज लग रहे हैं वहीं मटकों को भुलाया नहीं जा रहा है। बुजुर्ग तो आज भी फ्रिज को विभिन्न रोगों का कारण मानते हुए घड़ों के पानी को ही पसंद करते हैं।
एक वक्त था जब घड़े बनाने वालों की संख्या प्रत्येक गांव में काफी होती थी किंतु समय की मार एवं विज्ञान के प्रभाव के चलते उनकी रोटी रोजी पर संकट के बादल मंडराने लगे हें। अब घड़े किसी सड़क के किनारे भी लोगों को बेचते देखा जा सकता है। एक घड़ों का व्यापार करने वाले श्रीराम प्रजापत, शीशराम, राजू एवं मोतीलाल का कहना है कि पहले उनके गांव की मिट्टी बेहतर होती थी किंतु भट्ठा लग जाने से उनको वो मिट्टी नहीं मिलती है और वे मजबूरन कहीं दूसरे स्थानों से बने बनाए घड़े लेकर आते हैं। उन्होंने बताया कि नारनौल के आस पास की मिट्टी आज भी घड़े बनाने के लिए बेहतर है किंतु उस मिट्टी को लाना महंगा पड़ता है। यही कारण है कि बने बनाए घड़ों को बेचकर उनको अल्प धन की बचत होती है जो उनके परिवार का भरण पोषण करने में नाकाफी है।
बेशक घड़ों की कद्र कम हो गई हो किंतु आज भी घड़ों को भुलाया नहीं जा सकता है। लोग दूर दराज से घड़े खरीदकर अपने घरों में ला रहे हें और देसी फ्रिज नाम से प्रसिद्ध इन घड़ों के जल को पीकर अपने को निरोग रहने में कारगर बता रहे है। घड़ा, मटका, मूण, घट, झाल आदि घड़ों के ही रूप हैं जिन्हें ग्रामीण लोग पसंद करते हैं। यदि ईंट भट्टों की इसी प्रकार रफ्तार बढ़ती रही तो आने वाले समय में ये घड़े भी लुप्त हो जाएंगे और घड़े बनाने वाले भी नहीं मिल पाएंगे।
कोरोना काल में फ्रिज का पानी पीने के लिए डाक्टरों ने मलना कर दिया था जिसके बाद से कुछ लोगों का रुझान मिट्टी के घड़ों की ओर बढ़ा है। यह भी सत्य है कि इतिहास अपने आपको दोहराता हे। ऐसे में फिर से इन घड़ों की मांग बढऩे के प्रबल आसार बन रहे हैं।
फोटो कैप्शन 06: देशी फ्रिज का नजारा।
भंडारा 2 अप्रैल को
-एक अप्रैल की रात को होगा जागरण
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कनीना की आवाज। कनीना -महेंद्रगढ़ मुख्य मार्ग पर र्गुढ़ा के पास स्थित हनुमान मंदिर पर 2 अप्रैल को भंडार आयोजित किया जाएगा।
विस्तृत जानकारी देते हुए पं. ओमप्रकाश पुजारी ने बताया कि 1 अप्रैल की रात को जागरण आयोजित होगा वहीं 2 अप्रैल को भंडारा आयोजित होगा जिसमें अतरलाल मुख्य अतिथि होंगे। हर वर्ष यहां भंडारा आयोजित होता है। उन्होंने अधिक से अधिक संख्या में भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने की अपील की।
भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आयोजित की गई प्रश्रोत्तरी
-नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों को किया गया प्रोत्साहित
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कनीना की आवाज। कनीना से दो किमी दूर स्थित पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय भारतीय ज्ञान प्रणाली पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। अव्वल रहे विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। यह प्रतियोगिता श्रीमती सुमन यादव पत्रकार चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित की गई थी।
प्राचार्य जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा बीएम रावत, उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य की उपस्थिति में यह प्रतियोगिता आयोजित करवाई गई जिसमें कक्षा 6 से 8 के सभी विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में अव्वल रहने वाले तीनों कक्षाओं के 15 विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। वहीं भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को भी प्रोत्साहित किया गया।
इस मौके पर समस्त स्टाफ सदस्यों ने सहयोग किया। ट्रस्ट की ओर से योगेश कुमार सचिव तथा नवोदय विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
योगेश कुमार ने बताया कि श्रीमती सुमन यादव चैरिटेबल ट्रस्ट 2011 स्थापित की गई थी जिसका उद्देश्य जनहित कार्य का है। विभिन्न अवसरों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करके ट्रस्ट सेवा प्रदान करती है। इससे पहले भी विभिन्न स्कूलों में कई कार्यक्रम आयोजित करवाए हैं। उन्होंने बताया कि सुमन यादव कनीना की लेखिका और पत्रकार रही है जिनकाछोटी उम्र में ही देहांत हो गया था। उनकी याद में यह ट्रस्ट बनाई हुई है। प्राचार्य तथा प्राचार्य ने ट्रस्ट सदस्यों का आभार जताया।
इस मौके पर प्रधान ट्रस्ट डा. होशियार सिंह यादव ने बताया कि सुमन यादव अलवर की रहने वाली थी तथा कनीना में विवाहिता थी। 21 नवंबर 2000 को उनकी शादी कनीना में हुई थी किंतु 2008 में वह कैंसर से पीडि़त हो गई थी। लगातार उनका इलाज एम्स, महावीर कैंसर अस्पताल, एसएमएस जयपुर, लुधियाना तथा विभिन्न अस्पतालों में चलाया जिसके चलते वह स्वस्थ हो गई थी किंतु दोबारा से कैंसर ने उन्हें जकड़ लिया जिसके चलते 17 नवंबर 2010 को उनका देहांत हो गया था। उनके नाम पर 2011 में ट्रस्ट का निर्माण किया गया। तब से लेकर आज तक ट्रस्ट जनहित कार्य कर रही है। श्रीमती सुमन यादव राष्ट्रीय अखबारों की पत्रकार थी वहीं कई पुस्तकें भी उनकी प्रकाशित हुई। मृदुभाषी सुमन यादव ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी द्वारा आयोजित कहानी में पूरे ही हरियाणा में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। ट्रस्ट जहां उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष पौधारोपण ,खेल प्रतियोगिताएं तथा आंखें डोनेट करने के लिए अभियान चलाती आ रही है और आगे भी इसी प्रकार अभियान चलता रहेगा। विभिन्न स्कूलों में भी खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थी।
फोटो कैप्शन 01 एवं 02: ट्रस्ट की ओर से अव्वल विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते हुए
परमार्थ दिवस के रूप में मनाया पुण्यतिथि को
--पुष्पा देवी की सातवीं पुण्यतिथि पर हवन यज्ञ
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कनीना की आवाज। शिक्षाविद् एवं अनेक शिक्षण संस्थानों की संस्थापक पुष्पा देवी की सातवीं पुण्यतिथि को परमार्थ दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर गांव धनौन्दा स्थित उनके पावन स्मृति धाम परमार्थ स्थल पर विश्व शांति कल्याण एवं पर्यावरण शुद्धि के लिए वैदिक यज्ञ का आयोजन किया गया। स्वर्गीय पुष्पा देवी के अनेक शिष्यों, प्रशंसकों और इलाके के गणमान्य व्यक्तियों ने हवन यज्ञ में आहुति डाली और उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
उपस्थित जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए यज्ञ ब्रह्मा संतलाल दायमा आर्य ने पुष्पा देवी के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुष्पा देवी ने अपने जीवन में हमेशा सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता और सदाचार का पालन किया, जो अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने नारी सशक्तिकरण, सामाजिक भाईचारा, शिक्षा प्रसार तथा सामाजिक धार्मिक कार्यों में बढ़ चढ़कर भाग लिया तथा दान दिया। इससे सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
समाजवादी चिंतक रविन्द्र यादव ने पुष्पा देवी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें महान शिक्षाविद् बताया और कहा कि उनके द्वारा जलाई गई शिक्षा की ज्योति सदैव इलाके का पथ प्रदर्शन करती रहेगी। धनौन्दा के हिन्दी प्रवक्ता आचार्य आशुतोष शास्त्री ने पुष्पा देवी के कार्यों पर प्रकाश डाला और कहा कि पुष्पा देवी विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य धारण करने वाली महान महिला थी। सब को उनसे प्रेरणा लेते हुए कठिन हालातों का भी धैर्य से सामना करना चाहिए। प्रमुख समाजसेवी अतरलाल एडवोकेट ने कहा कि स्वर्गीय पुष्पा देवी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। वह सादा जीवन उच्च विचार को अपने जीवन में अपनाने वाली महान देवी थी। वे सत्य और शील की प्रतिमूर्ति थी। अतरलाल ने उपस्थित सभी जनों से उनके जीवन और आदर्शों पर चलने की अपील की।
वरिष्ठ एलआईसी अधिकारी प्रहलाद सिंह ने पुष्पा देवी को संकल्प शक्ति का प्रतिमान बताते हुए उपस्थित सभी विद्यार्थियों से पुष्पा देवी के व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रेरणा लेने की अपील की। प्रोफेसर नवीन जांगड़ा ने उपस्थित जनसमुदाय से पुष्पा देवी के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी नेताजी अतरलाल, संतलाल आर्य, रविन्द्र यादव, डॉ. सतेन्द्र सिंह, डा. सुभाष यादव, नरेन्द्र कौशिक, मुकेश यादव, प्रवीण शर्मा, नवीन कुमार, आशुतोश शास्त्री, प्रहलाद सिंह, पवन धनखड़, मनजीत गौड, अतरपाल, मुकेश तंवर, सतीश कुमार, परमजीत कौशिक, पूजा, पवित्रा, रेनू यादव सहित सैकड़ों विद्यार्थी, ग्रामीण और गणमान्यजन उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 05:धनौंदा में परमार्थ दिवस मनाजते हुए
सरकारी स्कूलों में नामांकन के लिए चलाया विशेष अभियान
-घर घर जाकर अभिभावकों को किया गया प्रेरित
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कनीना की आवाज। सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए चलाए गए विशेष नामांकन अभियान के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बेवल के अध्यापकों ने घर-घर जाकर अभिभावकों को अपने बच्चों का प्रवेश सरकारी विद्यालय में करवाने के लिए प्रेरित किया। यह कार्यक्रम 23 मार्च से चलाया जा रहा है।
विद्यालय प्राचार्य प्यारेलाल कटारिया के मार्गदर्शन में प्रवक्ता गजराज सिंह, विक्रांत सैन, दीपक शर्मा, नीलम यादव व इंदु बाला की टीम ने बेवल गांव के घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया। प्राध्यापकों की टीम ने अभिभावकों को सरकारी स्कूल में मिलने वाली सुविधाएं निशुल्क पाठ्य पुस्तक, मिड डे मील और छात्रवृत्ति के बारे में जानकारी दी। उनके अलावा विद्यालय में मिलने वाली आधुनिक सुविधाओं जैसे कंप्यूटर लैब, स्मार्ट बोर्ड, बायोलाजी लैब, फिजिक्स लैब, केमिस्ट्री लैब के बारे में बताया व अभिभावकों से अनुरोध किया कि बच्चों को का नामांकन विद्यालय में बढ़ाएं। विद्यालय में आर्ट कामर्स एम साइंस के योग्य अध्यापकों द्वारा बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जाती है।
फोटो कैप्शन 03: नामांकन के लिए बेवल में चलाया गया अभियान



















































