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Thursday, August 27, 2026





 


खंड स्तरीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता में एसडी स्कूल और आरआरसीएम स्कूल का दबदबा
-विभिन्न स्पर्धाओं में शानदार किया प्रदर्शन
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कनीना की आवाज।
खंड स्तरीय अंडर-11 सांस्कृतिक गतिविधि प्रतियोगिता का आयोजन एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ककराला में किया गया। प्रतियोगिता में खंड के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। नोडल अधिकारी मुन्नालाल ने प्रतियोगिता के परिणामों की जानकारी दी।सामूहिक गान के बालिका वर्ग में आईपीएस कनीना ने प्रथम, आरआरसीएम स्कूल कनीना ने द्वितीय तथा बीआर ज्ञानदीप स्कूल सुरजनवास ने तृतीय स्थान हासिल किया। बालक वर्ग में सामूहिक गान में एसडी स्कूल ककराला प्रथम रहा।
फैंसी ड्रेस के बालक वर्ग में आईपीएस कनीना प्रथम, यश आरआरसीएम स्कूल कनीना द्वितीय तथा नैतिक रामचंद्र स्कूल कनीना तृतीय स्थान पर रहे। रागिनी प्रतियोगिता के बालक वर्ग में चिराग एसडी ककराला प्रथम और विनीत बीआर ज्ञानदीप द्वितीय रहे। बालिका वर्ग में प्रियम आरपीएस कनीना प्रथम तथा खुशी आरआरसीएम स्कूल कनीना द्वितीय स्थान पर रही। ग्रुप डांस प्रतियोगिता में एसडी स्कूल ककराला ने प्रथम तथा आईपीएस कनीना ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। सोलो एक्टिंग के बालिका वर्ग में परिधि आरआरसीएम स्कूल कनीना ने प्रथम, विधि आरएचएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल पोता ने द्वितीय तथा यशिका आरपीएस कनीना ने तृतीय स्थान हासिल किया। सोलो एक्टिंग के बालक वर्ग में आदित्य रामचंद्र स्कूल कनीना प्रथम तथा समर आरएसएस कनीना स्कूल द्वितीय रहे। एकल नृत्य के बालक वर्ग में ऋषभ एसडी स्कूल ककराला प्रथम स्थान पर रहे। फैंसी ड्रेस के बालिका वर्ग में वंशिका रामचंद्र स्कूल कनीना प्रथम, तेजस्विनी आईपीएस कनीना द्वितीय तथा जैस्मिन आरआरसीएम स्कूल कनीना तृतीय स्थान पर रही।  प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका दीपक कुमार, चेतन शर्मा, नरेश कुमार, सरजीत सिंह एवं प्रीति सहित अन्य निर्णायकों ने निभाई। आयोजकों ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
फोटो कैप्शन 04: प्रतियोगिता में भाग लेती बच्ची





कैमला में मनाया रक्षा बंधन पर्व
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कनीना की आवाज।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर सभी विद्यार्थियों ने परस्पर मिलकर के राखी प्रतियोगिता का आयोजन गरिमा रानी प्राथमिक अध्यापिका के निर्देशन में किया गया।
  सभी विद्यार्थियों ने स्वेच्छा से  अपनी-अपनी रुचि अनुसार सुंदर, आकर्षक ,भव्य राखी बनाई जो अति सराहनीय थी। प्रतियोगिता दो ग्रुप में की गई प्रथम ग्रुप कक्षा प्रथम से पांचवी तक जिसमें ऋषभ  और वान्य प्रथम ,आध्या व भावना द्वितीय स्थान ,नीतू व दीपांशु आदि संयुक्त रूप से विजेता रहें। दूसरे चरण में कक्षा 6 से 8 तक के सभी विद्यार्थियों की राखी प्रतियोगिता में यशिका व नव्या प्रथम स्थान ,मानवी व निधि द्वितीय और अन्नु व विवेक तृतीय स्थान पर रहें ।सभी विद्यार्थियों ने एक से एक बढ़कर राखी बनाई जो उनकी कलाकृति ,रुचि और एक्टिविटी बेस लर्निंग को  दर्शाती है इससे बच्चों में रचनात्मक विचारों का संचार होता है और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। विद्यालय की ओर से मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह ने सभी विद्यार्थियों को पुरस्कार किया और विद्यार्थियों से अपील की कि हमें प्रत्येक एक्टिविटी में उत्साह के साथ भाग लेना चाहिए जिससे हमें नवीनतम सीखने को मिलता है। इस मौके पर मनवीर सिंह ,  सुनील कुमार डीपीई , देवेंद्र कुमार , राजेश कुमार,भगत सिंह , गरिमा रानी आदि उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 02: रक्षा बंधन पर्व मनाते हुए विद्यार्थी


त्योहार पर आई हुई लड़की लापता,पिता ने लापता होने का केस करवाया दर्ज
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के एक गांव से त्योहार पर आई हुई लड़की कहीं लापता हो गई। शादीशुदा लड़की रक्षाबंधन के पर्व पर आई थी। 26 अगस्त को घर से बिना बताए कहीं चली गई। उसके पिता ने पुलिस में दी शिकायत में कहा है कि उसकी लड़की रक्षा बंधन के त्योहार पर मिलने घर आई थी किंतु बिना बताए कहीं चली गई। कई जगह तलाश की किंतु नहीं मिली। उनके बयान पर लापता होने का केस दर्ज कर लिया है।






नपा के सफाई कर्मियों ने बढ़ाई काम छोड़ हड़ताल 30 अगस्त तक
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कनीना की आवाज। 
नगर पालिका सफाई कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर नगर पालिका सफाई कर्मचारी 22वें दिन भी हड़ताल पर रहे। उन्होंने हड़ताल 30 अगस्त तक बढ़ा दी है। सभी सफाई कर्मचारियों की काम छोड़ हड़ताल जारी रही। कर्मियों का कहना है कि सरकार ने अभी तक उनकी मांगें नहीं मानी हैं जिसके कारण हड़ताल चार दिन और बढ़ा दी गई है।  30 अगस्त तक चलने वाली इस हड़ताल की अध्यक्षता सचिन सुनील कुमार कोषाध्यक्ष करेंगे।
  यूनिट कनीना प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि सभी कर्मी हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, ठेका प्रथा बंद करने, एचकेआरएन खत्म करने, समान काम का समान वेतन लागू करने की प्रमुख हैं। लेकिन सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है।
उनका कहना है कि कर्मचारियों को शहर की सफाई का काम जान हथेली पर रखकर करना पड़ता है।  उनका कहना है कि सरकार के 13 मई को समझौता हुआ था जिस पर सरकार ने कहा था कि हमें 30 जून 2026 तक का समय दिया जाए, आपकी जितनी मांग है सभी पूरी की जाएगी लेकिन सरकार ने अभी तक कोई मांग पूरी नहीं की है।
गंदगी के ढ़ेर-
कनीना में पुरानी अनाज मंडी कनीना , नहर के पास , स्टेशन रोड , राजकीय विद्यालयअंबेडकर चौक, होलीवाला जोहड़ पर गंदगी के ढ़ेर लग गए हैं। कई अन्य स्थानों पर भी गंदगी के ढेर बन गए हैं। लोग बेहद परेशान हैं।
  इस मौके पर अशोक कुमार उप प्रधान, योगेश कुमार, राकेश कुमार, जमादार नवीन कुमार, कर्मवीर, सुभाष, सोनू, शशि बाला, रतनलाल, राजेश, प्रदीप, पवन, संजय व सभी कर्मचारी हड़ताल में उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: सफाई कर्मी कनीना हड़ताल पर



 संस्कृत दिवस 28 अगस्त
 बहुत मधुर और देव भाषा कहलाती है संस्कृत -वीेरेंद्र ढ़ाणा
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कनीना की आवाज।
  संस्कृत भाषा भारत की सबसे प्राचीन भाषा है। इसी से दूसरी भाषाएं भी निकली हैं। सबसे पहले भारत में संस्कृत बोली गई थी इसलिए देव भाषा भी संस्कृति कहलाती है। जहां 22 अनुसूचित भाषाओं में से एक संस्कृत है। उत्तराखंड की यह एक आधिकारिक भाषा है। प्राचीन ग्रंथों की रचना संस्कृत में हुई थी। इसके बहुत से शब्दों के द्वारा अंग्रेजी के शब्द बने हैं। महाभारत काल में वैदिक संस्कृत का प्रयोग होता रहा है। संस्कृत वर्तमान देश की कम बोली जाने वाली भाषा बन गई है लेकिन इस महान भाषा को नकारा नहीं जा सकता। हरियाणा सरकार तो संस्कृत भाषा को पर जोर दे रही है और सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से संस्कृत भाषा ही प्रयोग में लाई जाती है। 31 अगस्त को सावन माह की पूर्णिमा के दिन संस्कृत दिवस मनाया जाता है। 1969 में इसकी शुरुआत हुई थी। संस्कृत दिवस और पूर्णिमा यहां तक की रक्षाबंधन भी इसी दिन पड़ता है। क्या कहते हैं संस्कृत के विद्वान-
 संस्कृत दिवस पूरी दुनिया मनाया जाता है। इसके मनाने का उद्देश्य संस्कृत को अधिक से अधिक बढ़ावा देना है। नई पीढ़ी इस भाषा को जाने। पुराने समय की भाषा बोलने पढऩे में लोगों को शर्म आती है। संस्कृत अति महत्वपूर्ण भाषा देव भाषा नाम से जानी जाती है। संस्कृत भाषा भारतीय संस्कृति के विरासत का प्रतीक है। ऐसी कुंजी जो हमारे प्राचीन ग्रंथों और धार्मिक सांस्कृतिक परंपराओं के के रहस्य को जानने में मदद करती है वह संस्कृत है।
    --- नरेश कुमार
भारत के इतिहास में सबसे अधिक मूल्यवान और शिक्षण सामग्री शास्त्रीय भाषा संस्कृत में लिखे गए हैं। वैदिक संस्कृत के अध्ययन से मानव इतिहास के बारे में जानने में सहायक है। प्राचीन सभ्यता का रोशन करने के लिए भी सक्षम है। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए सबसे अच्छा विकल्प संस्कृत भाषा मानी गई है। इसलिए संस्कृत को अधिक से अधिक प्रयोग में लाना चाहिए और बोलचाल में इसका प्रयोग होना चाहिए।
      --वीरेंद्र शास्त्री ढाणा
कालिदास द्वारा संस्कृत में रची कहानी अभिज्ञान शकुंतला तथा रितु संहार 1783 में विलियम जॉन में ट्रांसलेट किया था। इसके अलावा जयदेव द्वारा रचित गीत गोविंद और मनु के कानून मनु स्मृति को इंग्लिश भाषा में परिवर्तित किया था। चाल्र्स विलकिंस ने श्रीमद् भागवत गीता को अंग्रेजी में रूपांतरित किया गया था। इसी प्रकार मैक्स मूलर ने संस्कृत से जर्मनी भाषा में ट्रांसलेट किया था। इससे सिद्ध होता है कि यह बहुत काम की भाषा है। संस्कृत को नौ ग्रहों का ज्ञान था। संस्कृत आयुर्वेद चिकित्सा का आधार है। संस्कृत एक महान भाषा है जिसको सीखकर इंसान न केवल रोटी रोजी कमा सकता है आपकी तो अर्थात विद्वान बन सकता है। 2014 से हर साल संस्कृत सप्ताह मनाने का भी केंद्रीय विद्यालयों ने घोषणा की थी। पहला संस्कृत विश्वविद्यालय भी वाराणसी में खुली थी तत्पश्चात अनेक संस्कृत विश्वविद्यालय भी खुल चुके हैं जो दर्शाते हैं संस्कृत एक महान भाषा है।
         --- निर्मल शास्त्री, नांगल हरनाथ
संस्कृत की उत्पत्ति 5000 साल पहले हुई थी। संस्कृत दिवस लगातार मनाया जा रहा है। संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत दिवस को मनाया जाता है। संस्कृत कई भाषाओं की जननी है। संस्कृत भाषा के महत्व को समझ कर संस्कृत का उपयोग करना चाहिए। प्राचीन भारत में इसी दिन से ही शिक्षण एवं वेद पाठ शुरू हुआ था। छात्र इस दिन से शास्त्र का अध्ययन करने लगे थे। इसलिए संस्कृत दिवस मनाया जाना उचित है।
-आरडी शास्त्री, गाहड़ा
 फोटो कैप्शन: आरडी शास्त्री, नरेश कुमार, विरेंद्र शास्त्री ढाणा, निर्मल शास्त्री।



सलूणी नाम से जाना जाता है रक्षा बंधन

---रक्षा बंधन पर्व समेटे हुए है इतिहास
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कनीना की आवाज।












 तीज त्योहारों के इस देश में यूं तो समय-समय पर कई पर्व आते हैं और सभी अपनी-अपनी छटा बिखेर कर चले जाते हैं। इन त्योहारों में से एक पर्व रक्षा बंधन का आता है जो भाई बहन के अटूट प्यार की याद दिलाता है। इस त्योहार को ग्रामीण क्षेत्रों में सावनी और सलूणी नाम से जाना जाता है। इस पर्व के पीछे रक्षासूत्र और ब्राह्मïणों की पूजा अर्चना का विधान है। आज के समय में इस त्योहार की प्र्रासंगिकता और भी बढ़ गई है जबकि त्योहार को रक्षा का पर्व कम और भौतिकता के आधार पर अधिक तोला जाने लगा है। कई राज्यों जैसे बिहार, गुजरात और बंगाल में इस त्योहार को अलग रूपों में मनाया जा रहा है। यह पर्व 28 अगस्त को क्षेत्र में मनाया जा रहा है।
       राखी शब्द की उत्पत्ति रक्षासूत्र से हुई है। रक्षासूत्र किसी जमाने में ब्राह्मïण और गुरुजनों द्वारा अपने शिष्यों की कलाई पर बांधा जाता था जिसके बाद माना जाता था कि कोई भी अस्त्र शस्त्र उसे बेंधने में सक्षम नहीं होता था। इसी प्रकार के रक्षासूत्र का हवाला महाबली एवं दानवराज  बलि के हाथों पर उसके गुरु ने द्वारा बांधे जाने का प्रमाण मिलता है। बाद में दुश्मन जनों को भी अगर किसी बहन ने धागा बतौर राखी बांधना तो दूर भेज भी दिया था तो दुश्मन ने भी अपनी बहन समझकर उसके लिए प्राणों की बाजी लगा दी थी। ऐसा ही एक उदाहरण रानी कर्मवती द्वारा अपने दुश्मन हुमायू को राखी भेजे जाने का हवाला मिलता है। यद्यपि हुमायू ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर कर्मवती की रक्षा करने के प्रयास किए किंतु उनके किले के अंदर पहुंचने से पहले ही कर्मवती ने आत्महत्या कर ली थी।
   सलूणी पर्व की उत्पत्ति श्रावणी उपाकर्म से हुई है। उपाकर्म में कोई ब्रह्मïचारी या फिर विद्वान को साफ पानी में इस दिन स्नान करके सूर्य की पूजा अर्चना करके शास्त्रों के अनुसार ही अपने गुरु की मदद से सावनी उपाकर्म करना होता था। उपाकर्म में हवन यज्ञ करके नया यज्ञोपवीत धारण करने का विधान होता था। पुराने समय में माना जाता हे कि वेदों का अध्ययन भी इसी दिन से शुरू किया जाता था। उपाकर्म में गुरु द्वारा रक्षासूत्र बांधे जाने का विधान था। रक्षासूत्र से ही राखी की उत्पत्ति हुई है। बंगाल और बिहार में तो इस गुरु पूर्णिमा के दिन ब्राह्मïणों और गुरुओं की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। गुजरात प्रांत में तो इस दिन गरबा नृत्य आयोजित किया जाता है।
    रक्षा बंधन के पर्व में भाई बहन के अटूट प्रेम का भाव भी भरा हुआ है। चाहे भाई हजार कोस पर बैठा हो फिर भी वह रक्षा बंधन के दिन अपनी बहन के यहां मिलने जरूर जाता है चाहे वह उनके मायके हो या फिर ससुराल। बहन भी भाई का सुबह से ही इंतजार करती है और उसके दर्शन करके ही खाना खाती है। बहन अपने हाथों में एक थाल लेकर उसके आने का इंतजार करती हे जिसमें मिठाई और रक्षासूत्र रखा होता है। ज्योंहि भाई बहन के द्वार पहुंचता है तो सबसे पहले बहन उसका तिलक करके उसके हाथों पर रक्षासूत्र बांध देती है जिसका प्रण भाई ताउम्र निभाता है। यह ठीक है कि आज के दौर में बहन ओर भाई के बीच प्यार घटता जा रहा है और बहन धागा इसलिए बांधती है ताकि उसे कुछ धन मिल सके फिर भी इस त्योहार की अपनी मर्यादाएं हैं। इस दिन जहां घरों में पकवान बनाए जाते हैं वहीं घरों के बाहर रक्षा कवच भी चिपकाए जाते हैं जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में 'सूणÓ नाम से जाना जाता है।  जैन धर्म के अनुयायी और दक्षिण भारत में इस पर्व के मनाने के पीछे पूजा अर्चना एवं गुरु को दान दक्षिणा देने को वरियतता दी जाती है।





नकल फार्म फीस वृद्धि प्रस्ताव के खिलाफ आंदोलन का बजाया दिया बिगुल
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कनीना की आवाज।
  बसपा ने हरियाणा सरकार के नकल फार्म फीस वृद्धि प्रस्ताव के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। नकल फार्म फीस वृद्धि वापिस लेने की मांग को लेकर पार्टी एक सप्ताह के अंदर कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाकर आंदोलन की रूपरेखा बनाएगी।
  बसपा नेता अतरलाल ने उक्त घोषणा गांव भोजावास, गोमली, गोमला में जनसंपर्क के दौरान की। उन्होंने नकल फार्म फीस वृद्धि को जनविरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापिस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार के वृद्धि प्रस्तावों के तहत वर्तमान में नकल फार्म फीस जो एक रुपये है वह सौ रुपये कर दी गई। एक पेज के नकल की फीस जो 6 रुपये है वह 10 रुपये, 2 पेज नकल फीस जो 3 रुपये प्रति पेज है वह 10 रुपये प्रति पेज और 2 पेज से अधिक का शुल्क जो 2 रुपयेप्रति पेज है वह बढ़ाकर 10 रुपये प्रति पेज कर दिया। तत्काल नकल फीस की दर 5000 रुपये प्रति नकल निश्चित की है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित वृद्धि दरें गैर वाजिब, गैर लोकतांत्रिक तथा घोर जन विरोधी हैं। इससे साधारण गरीब वर्ग के हर व्यक्ति, किसान, मजदूर, दुकानदार, महिला, युवा, विद्यार्थी, बेरोजगारों को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ेगी। सभी वर्ग के लोगों को किसी न किसी रूप में अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए नकल फार्म की आवश्यकता पड़ती है। फार्म फीस एक रुपये से सीधे 100 रुपये करने और प्रति पेज 10 रुपये वसूलने से न्याय महंगा हो जाएगा। सरकार के वृद्धि प्रस्तावों को लेकर जनता में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि न्यायहित और जनहित में वृद्धि को तत्काल वापिस नहीं लिया गया तो बसपा जल्दी ही पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाकर आंदोलन की रूपरेखा बनाएगी।
फोटो कैप्शन 01:अतरलाल गांवों में संपर्क करते हुए

Wednesday, August 26, 2026



 




 छितरोली की स्वर्ण पदक विजेता शर्मिला को हरियाणा सरकार से मिला डेढ़ करोड़ रुपए का चेक
-साथ में सरकारी नौकरी का मिला पत्र
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कनीना की आवाज। 
कनीना उप-मंडल के गांव छितरोली निवासी दिव्यांग शर्मिला धनखंड ग्लासगो कोमन वैल्थ गेम्स-2026 की गोल्ड मेडल विजेता को हरियाणा के पंचकूला स्थित मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने डेढ़ करोड़ रुपए का चेक और नौकरी का पत्र प्रदान किया है। कामनवेल्थ गेम्स में विगत दिनों शर्मिला धनखड़ ने खेलों में गोल्ड मेडल जीत कर आई थी तत्पश्चात से उन्हें एक के बाद एक जगह सम्मानित किया जा रहा है।
 इसी कड़ी में हरियाणा सरकार की ओर से उन्हें बुधवार को पंचकूला में डेढ़ करोड़ रुपए का चेक प्रदान किया वहीं उन्हें नौकरी का पत्र भी प्रदान कर दिया गया है। यह नौकरी उननकी योग्यता के अनुसार दी जाएगी। नौकरी के पत्र में खिलाड़ी सेवा नियम 2021 का हवाला देते हुए क/ख/ग श्रेणी की नौकरी उनकी योग्यता के अनुसार देने की बात कही है। इसके लिए जो शर्तें पूरी करती है उसी अनुसार नौकरी  प्रदान कर दी जाएगी। क्षेत्र में खुशी की लहर है विशेषकर एसडीएम स्कूल छितरोली जहां से वह पढ़ी है, में खुशियां मनाई जा रही है।
 अपना असली गुरु मानती है अजमेर सिंह दांगी को -
शर्मिला धनखड़ अपना असली गुरु अजमेर सिंह दांगी को मानती है जिनके स्कूल में वह पढ़ी तथा उन्होंने ही खेलों के लिए बढ़ावा दिया। विगत दिनों जब छितरोली में उनका सम्मान समारोह आयोजित किया गया तो सबसे पहले अपने गुरु के चरणों में बैठकर उन्हें नमन करने पहुंची,तत्पश्चात गुरु माता को नमन करके तब कार्यक्रम स्थल में पहुंची। उनका कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ा मंदिर अजमेर सिंह दांगी और उसकी पत्नी है। उनसे बड़ा अन्य कोई मंदिर नहीं। जिन्होंने उन्हें सही सलाह दी और आज इस मुकाम तक पहुंची।                               कौन बनेगा करोड़पति में जीते 12.50 लाख-
उधर स्वर्ण पदक जीतने के बाद कौन बनेगा करोड़पति की हाट सीट पर भी शर्मिला धनखड़ पहुंची और 12.50 लाख रुपए जीते। 25 लाख के प्रश्न का उत्तर देने में कुछ देरी हो गई और हूटर बज गया जिसके चलते उन्हें 12.50 लाख रुपए जीतकर बाहर आना पड़ा।
 मिले हैं अनेकों आफर-
शर्मिला को इस समय अनेक आफर मिल रहे हैं। एक के बाद एक कितने ही आफर मिलते जा रहे हैं जिनसे शर्मिला संतुष्ट नहीं है। उनकी अब दृष्टि ओलंपिक खेलों और आने वाले खेलों पर टिकी हुई है।
 दो गाडिय़ों की आफर मिली-

विभिन्न कंपनियों ने दो गाडिय़ां देने के लिए भी उन्हें आफर दी है।
 मकान बनाने के लिए सारा खर्चा देगी अंबुजा सीमेंट कंपनी-
 उधर अंबुजा सीमेंट ने शर्मिला को मकान बनाने के लिए सारा खर्चा देगी, चाहे वह कितने भी क्षेत्रफल में अपने लिए मकान बनाना चाहे, उनका कोई खर्चा नहीं लगेगा।
 एम-3-एम  कंपनी देगी जाने आने का खर्चा--

 उधर एम-3-एम कंपनी वर्ष 2028 तक शर्मिला के कहीं भी आने-जाने का सारा खर्च वहन करेगी। वैसे तो 2022 से यह कंपनी उन्हें 35 हजार रुपए प्रतिमाह देती आ रही है। क्योंकि 2028 में ओलंपिक खेल होंगे इसलिए तब तक उनका खर्चा कंपनी वहन करेगी।
 देसी घी का खर्च वहन करेगी गोवर्धन कंपनी-
गोवर्धन कंपनी ने उन्हें ओलंपिक खेल 2028 तक जितना भी देशी घी खाया जाए, सारा खर्चा/देशी घी देगी।
 कल्याण ज्वेलर्स ने दी ज्वेलरी -
उधर कल्याण ज्वेलर्स ने उन्हें पर्याप्त मात्रा में ज्वेलरी दी है जिसकी कोई कीमत नहीं आंकी गई है। इसके बाद अतिरिक्त अनेक और भी आफर उन्हें मिलते ही जा रहे हैं।
 क्या कहना है अजमेर सिंह दांगी का -
अजमेर सिंह दांगी एसडीम स्कूल छितरोली का कहना है कि उन्होंने शर्मिला को सही मार्ग दिखाया किंतु जी तोड़ लगन उनकी अपनी थी जिसके चलते आज वही इस मुकाम पर पहुंची है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि ओलंपिक खेलों 2028 में वो स्वर्ण पदक जीतेगी।
फोटो कैप्शन 6: शर्मिला अपने गुरु और गुरु माता के साथ बचपन में
फोटो कैप्शन 07: डेढ़ करोड़ का चेक देते हैं मुख्यमंत्री
08 :मिला नौकरी का आफर




शिक्षा सुधार के दावों के बीच कनीना खंड में प्रशासनिक संकट
-- 24 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों पर प्राचार्यों की भारी कमी
--कागजों पर सुधार, जमीन पर खाली कुर्सियां—क्या व्यवस्था संभाल पाएगी सरकार?
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कनीना की आवाज।
  एक ओर हरियाणा सरकार और शिक्षा विभाग स्कूलों की व्यवस्था सुधारने, सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लगातार दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। विभाग आए दिन नए आदेश, पोर्टल संबंधी निर्देश और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में व्यस्त दिखाई देता है, लेकिन स्कूलों में नेतृत्वकारी अधिकारियों की भारी कमी शिक्षा व्यवस्था की कमजोर तस्वीर पेश कर रही है।
हाल के दिनों में स्कूलों की सुरक्षा को लेकर भी लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं। स्कूल परिसरों में अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि जब अनेक विद्यालयों में स्थायी प्राचार्य और मुख्याध्यापक तक उपलब्ध नहीं हैं, तो इन आदेशों और व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी आखिर किसके कंधों पर होगी?
वर्तमान में शिक्षा विभाग का बड़ा अमला विभिन्न प्रशासनिक गतिविधियों में व्यस्त है। एसआईआर संबंधी प्रक्रियाएं, जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियां एवं प्रशिक्षण, एमआईएस पोर्टल पर शिक्षकों के अंक और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं लगातार चल रही हैं। इसके अतिरिक्त मॉडल संस्कृति विद्यालयों, पीएम श्री विद्यालयों और सीएम श्री विद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया के लिए हाल ही में मंडल स्तर पर परीक्षाएं भी आयोजित की जा चुकी हैं।
लेकिन इन तमाम गतिविधियों के बीच कनीना खंड के सरकारी विद्यालयों में प्राचार्यों और मुख्याध्यापकों की कमी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
24 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में नेतृत्व का संकट--
खंड कनीना में 24 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं, लेकिन इनमें से अनेक विद्यालयों में प्राचार्य के पद रिक्त बताए जा रहे हैं। कई विद्यालयों में पीजीटी शिक्षकों को कार्यवाहक प्रभारी के रूप में विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
वित्त विभाग एवं सरकार की व्यवस्था के अनुसार विद्यालयों की ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग पावर  को लेकर स्पष्ट प्रशासनिक प्रावधान हैं और सामान्यत: वित्तीय जिम्मेदारी सक्षम अधिकारी के माध्यम से संचालित की जानी चाहिए। ऐसे में कार्यवाहक व्यवस्थाओं और एक अधिकारी पर कई विद्यालयों की जिम्मेदारी का बढ़ता बोझ व्यवस्था की व्यावहारिक चुनौतियों को उजागर करता है।
स्थिति इतनी गंभीर बताई जा रही है कि कुछ प्राचार्यों को दो-दो और तीन-तीन विद्यालयों की अतिरिक्त डीडी पावर तक संभालनी पड़ रही है। ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि एक ही अधिकारी कई विद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कितनी सीमा तक कर सकता है।
31 अगस्त के बाद और बढ़ सकता है संकट--
आगामी 31 अगस्त को एक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं, वहीं खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश यादव भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे खंड की प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पडऩे की संभावना है।
इतना ही नहीं, आगामी दो महीनों में तीन अन्य प्राचार्यों के भी सेवानिवृत्त होने की संभावना बताई जा रही है। यदि रिक्त पदों को समय रहते नहीं भरा गया तो पहले से कमजोर प्रशासनिक ढांचा और अधिक दबाव में आ सकता है।
मौजूदा प्राचार्यों में से ही यदि किसी एक को खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यवाहक प्रभार दिया जाता है, तो पहले से प्राचार्यों की कमी से जूझ रहे विद्यालयों की स्थिति और कमजोर हो सकती है।
खंड में पांच उच्च विद्यालय भी हैं और इनमें एक भी स्थायी मुख्याध्यापक नहीं होने की स्थिति शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
कागजों पर सुधार, जमीन पर रिक्त पद--
शिक्षा विभाग एक ओर शिक्षा सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और बेहतर स्कूल प्रबंधन की बात करता है, लेकिन दूसरी ओर महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों के लंबे समय तक रिक्त रहने से व्यवस्थाएं प्रभावित होना स्वाभाविक है।
विद्यालय में प्राचार्य केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं होता। वह शैक्षणिक नेतृत्व, अनुशासन, वित्तीय प्रबंधन, शिक्षकों के समन्वय, विद्यार्थियों की प्रगति और विद्यालय के समग्र संचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है।
जब एक प्राचार्य को कई विद्यालयों की जिम्मेदारी संभालनी पड़े और अनेक स्कूलों को कार्यवाहक व्यवस्था के सहारे चलाना पड़े, तो इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर पडऩे की आशंका बनी रहती है।
सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदारी किसकी?--
आज आवश्यकता केवल नए आदेश जारी करने, पोर्टल अपडेट कराने और बैठकों के आयोजन की नहीं है। आवश्यकता है कि विद्यालयों में स्थायी नेतृत्व उपलब्ध कराया जाए।
कनीना खंड की स्थिति सरकार और शिक्षा विभाग के सामने बड़ा सवाल खड़ा करती है—
क्या शिक्षा सुधार केवल पोर्टलों, आदेशों और बैठकों तक सीमित रहेगा, या फिर स्कूलों में रिक्त पड़े प्राचार्य, मुख्याध्यापक, मौलिक मुख्याध्यापक और हेड टीचर के पदों को भरकर वास्तविक सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाया जाएगा?
आखिर कब तक कार्यवाहक प्रभार और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के सहारे शिक्षा व्यवस्था चलाई जाएगी?
क्या सरकार उठाएगी ठोस कदम?---
सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल सुधार के दावे करना नहीं, बल्कि उन दावों को धरातल पर उतारना है। शिक्षकों, मुख्याध्यापकों और प्राचार्यों की कमी से जूझ रहे विद्यालयों को यदि समय रहते स्थायी नेतृत्व नहीं मिला, तो शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ता प्रशासनिक बोझ भविष्य में और गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
कागजों पर मजबूत दिखने वाली शिक्षा व्यवस्था की असली परीक्षा स्कूलों के मैदान में होती है। कनीना खंड में रिक्त पदों और अतिरिक्त प्रभारों की यह तस्वीर सरकारी दावों तथा जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावों के बीच सरकार इन खाली कुर्सियों को भरने और चरमराती प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने के लिए कब और क्या ठोस कदम उठाती है।
क्योंकि सवाल केवल अधिकारियों की खाली कुर्सियों का नहीं है—सवाल उन हजारों विद्यार्थियों के भविष्य का है, जिनके लिए हर सरकारी दावा आखिरकार स्कूल की चारदीवारी के भीतर सच साबित होना चाहिए।







किसानों को दी मूंग फसल में होने वाले कीटों के नियंत्रण की जानकारी
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कनीना की आवाज।
  दलहन फसलों में आत्मनिर्भरता योजना के तहत बुधवार को कनीना में एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में डा. मनीष यादव बीटीएम कनीना ने किसानों को रोग कीट नियंत्रण और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की जानकारी दी। साथ में मूंग एवं अरहर की नई किस्मों व फसल में आने वाले विभिन्न रोगों की पहचान और उनकी रोकथाम के उपाय भी बताएं। डा. अरविंद ने विभागीय स्कीमों की जानकारी दी। इसके साथ ही किसानों को खाद वितरण की नई प्रणाली के बारे में भी बताया गया। प्रशिक्षण में करीब 35 किसानों ने भाग लिया।
 फोटो कैप्शन 10: मूंग की फसल के बारे में जानकारी देते कृषि अधिकारी




कनीना में एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह की राजनीतिक दलों के साथ बैठक
-स्वच्छ मतदाता सूची ही मजबूत प्रजातंत्र की नींव- डा. जितेंद्र सिंह
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कनीना की आवाज।
  अटेली विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक पंजीयन अधिकारी एवं एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को उनके कार्यालय में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए-1) की बैठक हुई।
इस मौके पर एसडीएम ने कहा कि एक पारदर्शी और त्रुटिरहित मतदाता सूची ही किसी भी स्वस्थ प्रजातंत्र की सबसे बड़ी मजबूती होती है।
बैठक के दौरान प्रशासन द्वारा भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत तैयार किए गए प्रपत्र संख्या 9, 10, 11, 11ए और 11बी सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा किए गए। इसके साथ ही इन प्रपत्रों पर अब तक की गई प्रशासनिक कार्यवाही तथा 68-अटेली विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत दावे, आपत्तियों व नोटिस चरण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
आम नागरिकों के लिए इस विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के अंतर्गत अपने दावे तथा आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम समय-सीमा 30 अगस्त निर्धारित की गई है। कोई भी पात्र नागरिक जिसका नाम सूची से छूट गया है या जिसमें किसी प्रकार का संशोधन अपेक्षित है, वह 30 अगस्त तक अपने संबंधित बीएलओ या आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना दावा अथवा आपत्ति दर्ज करा सकता है।
एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह ने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने बीएलए के माध्यम से पात्र नागरिकों के नाम जुड़वाने और गलत या स्थानांतरित नामों को हटवाने में प्रशासनिक प्रक्रिया का सहयोग करें।
उन्होंने इस अभियान में लगातार अपनी सहभागिता बनाए रखने का अनुरोध किया।
फोटो कैप्शन 08: एसडीएम कनीना राजनीति दलों से बैठक करते हुए



राजकीय माडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल भोजावास में टीकाकरण शिविर का आयोजन
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कनीना की आवाज।
  राजकीय माडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल, भोजावास में बुधवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों के लिए विशेष टीकाकरण एवं स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में बच्चों को गलघोंटू (डिप्थीरिया), टिटनेस और काली खांसी (कुकुर खांसी) जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए गए।
टीकाकरण के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य की जांच भी की गई, जिसमें बच्चों का वजन और हीमोग्लोबिन की जांच शामिल थी। स्वास्थ्य कर्मी अनिल रसूल ने बताया कि जिन बच्चों में खून की कमी या वजन में कमी पाई गई, उन्हें आयरन की गोलियां व अन्य आवश्यक दवाइयां वितरित की गईं और अभिभावकों को पोषण संबंधी जानकारी दी गई।
फोटो कैप्शन 05: डाक्टरों की टीम बच्चों की जांच करते हुए




 

गायों के लिए लगाई सवामणी
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कनीना की आवाज।
  नरेंद्र कुमार लखेरा वार्ड नंबर 4 कनीना ने अपने पिता स्व. जगमाल सिंह की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रीकृष्ण गोशाला कनीना में सवामणी का आयोजन किया। उन्होंने अपने हाथों से गायों को मीठा खाना खिलाया।
 इस अवसर पर नरेंद्र कुमार की माता चंद्रकला व परिवार के सभी सदस्य गण व गोशाला प्रशासक पूर्व प्रधानाचार्य कृष्ण सिंह, मास्टर रामप्रताप बलवान सिंह, कृष्ण प्रकाश, हिमांशु ,मुनीम सुपरवाइजर, अमीर सिंह, डा.महेश कुमार ठेकेदार ओमप्रकाश एवं समस्त गोशाला परिवार उपस्थित रहा।
फोटो कैप्शन 04: गायों के लिए सवामणी लगाते हुए



खंड स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूर्ण
-एसडी स्कूल में एक दिवसीय कार्यक्रम
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कनीना की आवाज।
  कार्यालय खंड शिक्षा अधिकारी, कनीना द्वारा प्राथमिक स्तर के बच्चों की अंडर-11 की कलात्मक, सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रतिभा को तराशने के उद्देश्य से एक दिवसीय ब्लाक स्तरीय सांस्कृतिक महोत्सव का खाका तैयार किया गया है। 27 अगस्त 2026, बृहस्पतिवार को प्रात: 9 बजे से एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ककराला में आयोजित होने जा रहे इस सांस्कृतिक महाकुंभ में कनीना खंड के सभी राजकीय और निजी विद्यालयों के नन्हे सितारे अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। यह भव्य आयोजन  खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश यादव, नोडल अधिकारी डा. मुन्ना राम प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ककराला ने आयोजन स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
नोडल अधिकारी डा. मुन्ना राम ने बताया कि खंड के राजकीय एवं निजी विद्यालयों के 11 वर्ष तक की आयु के विद्यार्थी विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। प्रतिभागियों के पंजीकरण के लिए विशेष टीम गठित की गई है, जिसमें सन्नी कुमार, सुशील कुमार, मीना, सुमित्रा देवी, संगीता यादव, रिंकू तथा मोनिका को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस सांस्कृतिक महोत्सव में विद्यार्थी सात प्रमुख प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इनमें एकल अभिनय में प्रत्येक स्कूल से एक प्रतिभागी, समूह गायन में 7 से 9 प्रतिभागियों का समूह, चित्रकला एवं रंगोली में 1 से 2 प्रतिभागी, फैंसी ड्रेस में प्रत्येक स्कूल से 1 से 2 प्रतिभागी तथा एकल नृत्य में एक मुख्य नर्तक नर्तकी के साथ 2 सह-गायक भाग ले सकेंगे। समूह नृत्य में 7 से 10 बच्चों की टीम भाग लेगी।
सभी प्रतिभागी कार्यक्रम में स्वयं गाना प्रस्तुत करेंगे तथा रिकार्डेड आडियो/वीडियो या किसी बाहरी यंत्र का प्रयोग मान्य नहीं होगा। प्रतियोगिताओं के विषयों में राष्ट्रीय एकता, पर्यावरण संरक्षण, आतंकवाद, भ्रूण हत्या निवारण तथा नारी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक एवं समसामयिक विषय शामिल रहेंगे।
विभिन्न प्रतियोगिताओं के निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्णय के लिए अनुभवी शिक्षकों का निर्णायक मंडल भी नियुक्त किया गया है। निर्णायक मंडल में सतप्रकाश, सुभल लता, अनीता, चेतन, श्री दीपक शर्मा, सुशीला, प्रीति, मधु, श्री सुरेंद्र, रमेश कुमार, नरेश कुमार, पुखराज, किसमती देवी तथा सरजीत शामिल हैं।
फोटो कैप्शन : जगदेव यादव एसडी स्कूल ककराला



अब आलू की कांट्रैक्ट फार्मिंग से समृद्ध होंगे किसान
-पेप्सिको, बालाजी और हाइफन जैसी दिग्गज कंपनियों ने किसानों से मिलाया हाथ
-आईएचडीसी सुंदरह में किसान उद्योग संवाद आयोजित
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कनीना की आवाज।
 सूखे और कम पानी की चुनौती से जूझने वाले दक्षिण-पश्चिम हरियाणा का मिजाज अब बदलने लगा है। पारंपरिक फसलों से इतर, अब इस अंचल के किसान आलू की व्यावसायिक खेती के जरिए अपनी तकदीर लिखने की तैयारी में हैं। राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की दूरदर्शी सोच और फसल विविधीकरण की पहल को धरातल पर उतारते हुए बागवानी विभाग और अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) ने मिलकर एक बड़ी शुरुआत की है।
सुंदरह (महेंद्रगढ़) स्थित आईएचडीसी में आयोजित एक दिवसीय किसान–उद्योग संवाद कार्यक्रम में इस बदलाव की पहली सीधी झलक देखने को मिली। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद क्षेत्र में आलू की कांट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देना और किसानों को सीधे देश की बड़ी प्रोसेसिंग कंपनियों से जोडऩा था।
इस संवाद में पेप्सिको, बालाजी और हाइफन/मंत्रा जैसी देश की जानी-मानी फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के नुमाइंदों ने सीधा हिस्सा लिया। महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी और रेवाड़ी से पहुंचे लगभग 150 प्रगतिशील किसानों से सीधे रूबरू होते हुए कंपनियों ने कांट्रैक्ट फार्मिंग का मॉडल समझाया।
विशेषज्ञों ने किसानों को आश्वस्त किया कि अगर वे तय गुणवत्ता मानकों का पालन करेंगे, तो कंपनियां उनकी उपज की सीधे खेत से तय दरों पर खरीद करेंगी। इससे न सिर्फ बिचौलियों का खेल खत्म होगा, बल्कि किसानों को मंडी के उतार-चढ़ाव वाले जोखिम से भी राहत मिलेगी। पिछले साल महज 50 एकड़ में किए गए ट्रायल की अपार सफलता के बाद इस साल किसानों में गजब का उत्साह दिखा।
तकनीक और वैज्ञानिक मार्गदर्शन का मिला भरोसा--
कार्यक्रम में विशेषज्ञ डा. सरदार सिंह, डा. अजय और सीआईपी के कंट्री मैनेजर डॉ. नीरज शर्मा ने क्षेत्र में आलू उत्पादन की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम हरियाणा की आबोहवा और मिट्टी आलू की प्रोसेसिंग किस्मों के लिए बहुत मुफीद है।
सीआईपी की वैज्ञानिक टीम (डा. निर्मल और डा. दीपा) तथा कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के डॉ. नरेश यादव, डा. बलबीर सिंह व डॉ. नरेंद्र यादव ने किसानों को आलू की आधुनिक किस्मों, रोग-कीट प्रबंधन और स्वस्थ बीजों के इस्तेमाल की बारीकियां सिखाईं। वहीं जिला उद्यान अधिकारी डा. प्रेम यादव, डा. नेहा यादव और डा. मुकेश ने विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।
आय दोगुनी करने की दिशा में ठोस कदम--
मुख्य अतिथि एवं उपनिदेशक उद्यान डा. मनदीप यादव ने हरियाणा सरकार की किसान-हितैषी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी से लेकर तकनीकी सहायता तक हर मोर्चे पर किसानों के साथ खड़ी है। बागवानी विभाग, सीआईपी, केवीके और निजी उद्योग का यह साझा प्रयास निश्चित रूप से दक्षिण-पश्चिम हरियाणा के किसानों के लिए एक नया सवेरा लेकर आया है। जहां पानी की बचत भी होगी और उपज का दाम भी सही मिलेगा।
फोटो कैप्शन 01:कार्यक्रम में मौजूद किसान।



 कई वर्षों से बंद पड़े डीएवी शिक्षण संस्थान  की भूमि का जनहित में शिक्षा व कौशल विकास के लिए उपयोग करने की मांग
-कनीना के लोगों ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम के माध्यम से सौंपा ज्ञापन,
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कनीना की आवाज।
  कनीना नगर पालिका की करीब 58 एकड़ भूमि पर पूर्व में संचालित डीएवी शिक्षण संस्थान को दोबारा शुरू करने अथवा डीएवी संस्था द्वारा इसे पुन: संचालित नहीं किए जाने की स्थिति में उक्त भूमि का जनहित में शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए उपयोग सुनिश्चित करने की मांग को लेकर कस्बावासियों एवं समाजसेवियों ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन एसडीएम के अधीक्षक अनिल कुमार को सौंपा गया।
 ज्ञापन देने वालों में कस्बावासी एवं समाजसेवी हरेंद्र शर्मा ने बताया कि कनीना में नगर पालिका की करीब 58 एकड़ भूमि पूर्व में शिक्षण संस्थान के संचालन के उद्देश्य से डीएवी संस्था को दी गई थी। इस भूमि पर लंबे समय तक शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होती रहीं और क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षा का लाभ  भी मिला। लेकिन वर्तमान में संस्थान लंबे समय से बंद एवं निष्क्रिय होने के कारण इतनी बड़ी भूमि तथा उससे संबंधित संसाधनों का अपेक्षित शैक्षणिक उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि कनीना एवं आसपास के क्षेत्र के विद्यार्थियों के व्यापक हित को देखते हुए इस मामले में गंभीरता से कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि नगर पालिका के उपलब्ध मूल रिकॉर्ड के आधार पर भूमि की लीज अवधि, शर्तों एवं वर्तमान कानूनी स्थिति की जांच करवाई जाए।
डीएवी संस्था से मांगी जाए स्थिति स्पष्ट करने की जानकारी--
हरेंद्र शर्मा ने मांग रखी कि डीएवी संस्था को लिखित रूप से पत्र भेजकर पूछा जाए कि वह पूर्व संचालित शिक्षण संस्थान को दोबारा शुरू करने के लिए तैयार है या नहीं। यदि संस्था पुन: शिक्षण कार्य शुरू करने को तैयार है तो उससे विस्तृत कार्ययोजना मांगी जाए, जिसमें भवन एवं स्टाफ की व्यवस्था, विद्यार्थियों के प्रवेश तथा संस्थान शुरू करने की प्रस्तावित तिथि सहित अन्य आवश्यक बिंदु शामिल हों।
उन्होंने कहा कि यदि डीएवी संस्था शिक्षण संस्थान संचालित करने में असमर्थ या इच्छुक नहीं है तो नगर पालिका द्वारा लीज पर दी गई भूमि को नियमानुसार वापस लेकर उसका जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
आधुनिक शिक्षा केंद्र विकसित करने की मांग--
ज्ञापन में मांग की गई कि भूमि का उपयोग क्षेत्र के विद्यार्थियों एवं युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किया जाए। यहां वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, आधुनिक एवं डिजिटल लाइब्रेरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अध्ययन केंद्र, कंप्यूटर एवं डिजिटल शिक्षा केंद्र, कौशल विकास एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, खेल एवं शारीरिक प्रशिक्षण सुविधाएं तथा विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाएं विकसित की जा सकती हैं।
हरेंद्र शर्मा ने कहा कि यदि इस भूमि और उपलब्ध संसाधनों का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो कनीना ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बेहतर शैक्षणिक एवं कौशल विकास सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं।
समिति गठित करने की मांग--
ज्ञापन में इस पूरे मामले के अध्ययन एवं समाधान के लिए 5 से 7 सदस्यीय समिति गठित करने की भी मांग की गई है। समिति में नगर पालिका के प्रतिनिधियों के साथ शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ एवं स्थानीय नागरिक प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है, ताकि भूमि एवं संस्थान के भविष्य को लेकर पारदर्शी एवं जनहितकारी निर्णय लिया जा सके। इस मौके पर हरेंद्र शर्मा, पार्षद एडवोकेट दीपक चौधरी,पार्षद योगेश कुमार,पार्षद प्रतिनिधि मनीष कुमार, मुकेश कुमार,संजय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 02: ज्ञापन देते हुए कनीना के लोग




 कनीना के सतीश कुमार को बुरी तरह से काटा बंदरों ने
- अस्पताल भर्ती, छुट्टी
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कनीना की आवाज। 
 कनीना निवासी एवं दुकानदार सतीश कुमार को बंदरों ने बुरी तरह से काट खाया। वह मंगलवार की शाम छत पर किसी काम से गए थे, पीछे बंदरों ने आकर उसके घुटने के नीचे बुरी तरह से काट खाया और खूनमखून कर डाला। जब उसने शोर मचाया तब बंदर भाग खड़े हुए। उन्हेंअस्पताल भर्ती कराया गया जहां एंटी रेबीज के टीके लगाकर उन्हें छुट्टी दे दी गई।
 सतीश कुमार ने बताया कि उसने न तो बंदरों से कोई छेड़ की और न ही उन्होंने बंदरों की ओर देखा। पास में एक नीम के पेड़ पर बंदर बैठे थे, उन्होंने देखा नहीं और जब वे छत पर चढ़े पीछे से आकर बंदरों ने काट खाया। जब शोर मचाया तो वो भाग खड़े हुए। परिजन उसे अस्पताल ले गए जहां उन्हें एंटी रेबीज के टीके देकर छुट्टी दे दी।
 इस प्रकार की घटना एक नहीं आए दिन कनीना में घटित हो रही है। बंदरों को दो बार पड़कर दूर छोड़ा गया हैं किंतु बंदरों की संख्या घटती नहीं। अब तो राक्षसी बंदर भी आ गए हैं जो इंसानों को बिना किसी वजह से ही काटने दौड़ते हैं। जब बंदर दिखाई देते तो अधिकांश लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं। ये बंदर बुरी तरह से पेड़ पौधों को तबाह कर रहे हैं, मल मूत्र त्याग कर घरों का हुलिया ही बिगाड़ रहे हैं। इन पर कोई काबू नहीं है। ऐसे में बंदर एक आफत बनते जा रहे हैं।                         












फोटो कैप्शन 03: सतीश कुमार बंदरों द्वारा काटे गए पैर को दिखाते हुए

Tuesday, August 25, 2026



 


किसानों के लिए आफत है सांप,बिजली के तार और थ्रेसर
-अनेकों हादसे हो जाते साल में
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स्रनीना की आवाज।
 किसान बड़ी मुश्किल से 2 जून की रोटी कमा पाता है। निरंतर खेतों में अपने खेतों की देखभाल करता है, बीज बोता है, फसल सुरक्षा करता है और अनेकों आपदाएं सहन करनी पड़ती है। कभी वर्षा नहीं होती, कभी अधिक वर्षा होती है, कभी ओलावृष्टि हो जाती है तो कभी ठंड के कारण फसल बर्बाद हो जाती है। किसान सब कुछ मायूसी से सहता रहता है किंतु कर भी क्या सकता है? उसके सामने अन्य कोई विकल्प नहीं होता? बिजली आती है तो फव्वारों से सिंचाई कर लेता है किंतु उसके सामने सबसे बड़ी आफत तीन हैं।
 सांप- अकसर गर्मियों के दिनों में जुलाई से सितंबर माह तक जमकर सांप निकलते हैं। यही नहीं गर्मियों की फसल कटाई के समय भी कुछ सांप निकलते हैं। सांपों के कारण अनेक किसानों की साल में मौत हो जाती है। सांप न जाने कब इंसान को काट खाए। जब फव्वारा लाइन बदलते हैं या खेतों में काम करते रात्रि के समय यह सांप उनके लिए आफत बन जाते हैं। कहने को तो सांप किसानों के साथ दोस्त है किंतु ये दुश्मन बन जाते हैं। कितनी ही जान हर वर्ष चली जाती है। किसान कितनी ही सुरक्षा करें फिर भी कुछ सांप फव्वारों में, पाइपों में या घर के आसपास अंधेरे में पैरों से दब जाते और वो काट खाते हैं। किसान का परिवार इतनी जल्दी से सांप कांटे को नहीं समझ पाता और वो अकसर मौत के शिकार हो जाते हैं। किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, अजीत कुमार बताते हैं कि इस वर्ष सांप बहुत अधिक संख्या में निकले। भविष्य में भी सांप फसल कटाई के समय निकलते रहेंगे। सबसे बड़ा किसानो की मौत का कारण सांप होते हैं।
 बिजली के पोल व तारे-
 दूसरी सबसे बड़ी आफत बिजली की तारे हैं। ऐसा शायद ही कोई खेत ना हो जहां से बिजली की तारे न गुजर रही हो। किसानों को रात के समय काम करना होता है और फव्वारा लाइन उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर रखनी होती है। इसी दौरान उनके फव्वारा/एल्युमिनियम के फव्वारा पाइप बिजली के तारों से छू जाते हैं और मौके पर ही मौत हो जाती है। हर वर्ष कितने किसानों की मौत हो जाती है। कितनी भी सावधानी बरतें कभी ना कभी कोई गलती हो ही जाती है। वैसे भी बिजली बोर्ड के कर्मचारी और अधिकारी किसानों की ओर ध्यान नहीं देते हैं। खेतों में तार झुके रहते हैं, बहुत नीचे होते हैं। किसान मजबूर होता है। कुछ कमा पाता है और इन बिजली अधिकारियों को देकर ही कुछ तारों की खींचाई करवा सकता है। सामान्य तौर पर किसान परेशान घूमता रहता है, चक्कर लगाता रहता है। न तो किसानों के बिजली के तार टाइट किए जाते हैं और न अधिकारी उनकी कोई सुनते। परिणाम किसानों की मौत का दूसरा बड़ा कारण बिजली के तार बन जाते हैं।
 थ्रेसर--
 तीसरे नंबर पर किसानों की मौत का कांड थ्रेसर होती है। अक्सर थ्रेसर से जब फसल कटाई की जाती है और अन्न निकाला जाता है, उस समय कोई ना कोई घटना घट ही जाती है। कई किसानों की मौत या हाथ, पैर कट जाते हैं। कुछ पूरे के पूरे थ्रेसर में कट कर खून हो जाता है। कितने ही केस ऐसे सामने आते हैं। हर वर्ष किसानों की मौत का यह कारण बनते हैं। किसान भी मजबूर होता है। फसल निकलना उसकी मजबूरी है और इसी दौरान हादसा हो जाता है।
 यद्यपि सरकार एवं कृषि विभाग इनके लिए कुछ सहायता देता है किंतु सहायता ऊंट के मुंह में जीरे के समान होती है। परिवार का भरण पोषण करने वाला ही जब चला जाता है तो परिवार कैसे आगे बढ़ पाएगा। किसानों की यूं तो अनेक और भी समस्याएं हैं लेकिन मौत के कारण तीन प्रमुख माने गए हैं।







राखियों से सज गए हैं बाजार
- अलग-अलग प्रकार की राखियों की भरमार
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स्रनीना की आवाज। 
28 अगस्त रक्षाबंधन के पर्व के दृष्टिगत बाजार विभिन्न प्रकार की राखियों से सज गए हैं। कई डिजाइन की राखियां बाजार में आई हुई हैं। राखियों को भेजने की परंपरा जारी है। बहने अपने भाइयों के लिए राखियां भेज रही है वहीं पर्व को मनाने के लिए विभिन्न गांव में तैयारियां चल रही हैं। विशेष का दुकानें सज गई हैं। गांव में राखी बेचने के लिए भी लोग आने लगे हैं। सबसे बड़ी विशेषता है कि त्योहार को लेकर के विभिन्न दुकानदार अपनी दुकानों के आगे राखियां रख लेते हैं और जमकर बेचते हैं। इस दिन जहां विगत वर्षों महिलाओं को पूरे हरियाणा की रोड़वेज बसों में मुफ्त यात्रा करने का प्रावधान है वही रक्षाबंधन को लेकर के अच्छा खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
 या तो बहने अपने भाइयों के घर जाती है और राखी बांधकर कर आती है या भाई अपने बहन के घर राखी बंधवाने जाते हैं। यह पर्व सभी पर्वों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है और भाई बहन के प्यार को इंगित करता है। अब तो भारी भरकम राखियों की बचाए हल्की राखियां पसंद की जाति और आधुनिक समय विज्ञान की उन्नति के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की राखियां बाजार में आ गई है। जिनको लेकर के बच्चे, बूढ़े और युवा सभी में उत्साह होता है। म्यूजिकल राखियां भी बाजार में आई हुई है।
एक वक्त था जब डाकघरों के माध्यम से राखियां गंतव्य स्थान तक जाती थी। डाकघर में गर्मी दिनभर लगे रहते थे किंतु अब राखी भेजने का रिवाज कम हो गया है। कोरियर से भी राखियां भेजी जाती हैं। इस संबंध में दुकानदारों का कहना है कि राखियां आनलाइन भेजे जाने के कारण उनकी खरीददारी कम हो रही है। इस संबंध में दुकानदारों एवं पोस्टमैन के विचार निम्र हैं-
एक वक्त था जब 20 दिनों से लेकर एक माह तक केवल राखियों के पैकेट घर घर पहुंचाए जाते थे। ये राखियां तीन दिनों से दस दिनों के बीच गंतव्य स्थान पर पहुंचती थी। पोस्टमैन का काम उन दिनों सबसे अधिक होता था। इसके बाद कुरियर सेवा की ओर रुझान बढ़ा। इसके बाद तो डाकघरों में राखी कम से कम आने लगी। समय बदला और डाकघरों की बजाय लोग राखी न भेजकर रक्षा बंधन पर्व पर या तो भाई बहन के पास या बहन भाई के पास पहुंचती है। इस प्रकार रक्षा पर्व भी हाइटेक हो गया है।
--राजेंद्र सिंह पोस्टमैन
अब तो आनलाइन राखी भेजे जाने एवं गांवों में राखियां बेचने वाले आने लगे हैं जिससे उनका काम कम होता जा रहा है। चाहे कितनी भी बेहतर राखियां दे दे किंतु बेचने वालों की राखियों की मांग अधिक होती है। उनका कारोबार कम होता जा रहा है। अब तो आनलाइन राखियों का जमाना आ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में राखियां अब भी दुकानों से सीधे खरीदकर बांधी जाती हैं किंतु बड़े शहरों में उल्टा राखी आनलाइन खरीदकर आनलाइन ही गंतव्य स्थान पर भेज दी जाती हैं। राखी के प्रति आधुनिक युग में बहन एवं भई एक दूसरे के पास जाने लगे हैं।
---रोहित कुमार दुकानदार
फोटो कैप्शन 02: बाजार में राखियां
वहीं राजेंद्र कुमार, रोहित कुमार की पासपोर्ट फोटो








परमिट टू वर्क के चलते
बाघोत व सिहोर गांवों में रहेगी 26 अगस्त को बिजली चार घंटे रहेगी बंद
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स्रनीना की आवाज।
परमिट टू वर्क के चलते
बाघोत व सिहोर गांवों के 33 केवी फीडरों से 26 अगस्त को बिजली आपूर्ति चार घंटे बंद रहेगी।
डीएचबीवीएन ने सूचित किया जाता है कि रखरखाव के काम के लिए 26 अगस्त को 33 केवी बाघोत और 33 केवी सिहोर लाइन पर परमिट टू वर्क लिया जाएगा। इस काम के चलते 33 केवी सिहोर और 33 केवी बाघोत से निकलने वाले सभी 11 केवी आउटगोइंग फीडर की सप्लाई सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बंद रहेगी।


रक्षाबंधन पर महिलाओं को हरियाणा सरकार की बड़ी सौगात
-रोडवेज बसों में 27 को दोपहर से 28 अगस्त मध्य रात्रि तक मिलेगी मुफ्त यात्रा की सुविधा
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स्रनीना की आवाज।
रक्षाबंधन के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार ने प्रदेश की महिलाओं और बच्चों के लिए मुफ्त बस यात्रा की घोषणा की है। इस फैसले के तहत हरियाणा राज्य परिवहन की साधारण बसों में महिलाओं तथा 15 वर्ष तक के बच्चों को किराए में शत-प्रतिशत छूट दी जाएगी।
नारनौल डिपो के जीएम देवदत्त ने बताया कि विभाग ने त्यौहार के दौरान यात्रियों की संभावित भीड़ को देखते हुए सभी जरूरी प्रबंध पूरे कर लिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुफ्त सफर की सुविधा 27 अगस्त को दोपहर 12 बजे से शुरू होकर 28 अगस्त की मध्यरात्रि तक प्रभावी रहेगी, जिससे बहनें बिना किसी असुविधा के अपने भाइयों के घर पहुंचकर रक्षाबंधन मना सकें।
जीएम देवदत्त ने बताया कि यह छूट केवल हरियाणा राज्य परिवहन की साधारण बसों में ही मान्य होगी। इसके अतिरिक्त, मुफ्त यात्रा का दायरा हरियाणा के एक शहर से दूसरे शहर के अलावा दिल्ली और चंडीगढ़ आने-जाने वाली साधारण बसों पर भी पूरी तरह लागू रहेगा।
उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के दिन यात्रियों की अतिरिक्त संख्या को देखते हुए नारनौल डिपो द्वारा प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त बसों के संचालन की योजना बनाई गई है। डिपो स्तर पर अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मुख्य बस स्टैंडों और रूटों पर सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी यात्री को परेशानी न हो।


जुलाई के बकाया सरसों तेल का 31 अगस्त तक होगा वितरण
-पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर पात्र लाभार्थियों को मिलेगा तेल
-नियमों की अनदेखी पर डिपोधारकों के खिलाफ होगी कार्यवाही: सावित्री बाई
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स्रनीना की आवाज।
जिला में माह जुलाई में सरसों तेल के वितरण के बाद भी सरसों तेल की मात्रा बकाया है। बकाया सरसों तेल का वितरण माह अगस्त के पात्र लाभार्थियों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर 31 अगस्त तक सरसों का तेल वितरित किया जाएगा।
यह जानकारी देते हुए जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक सावित्री बाई ने बताया कि मुख्यालय के
निर्देशसानुसार माह जुलाई के बकाया सरसों तेल का वितरण माह अगस्त के पात्र लाभार्थियों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर 31 अगस्त तक वितरित करने का निर्णय लिया है। कोई भी डिपोधारक किसी भी सूरत में लाभार्थी राशन कार्डधारकों को कम व अधिक मात्रा में आवश्यक वस्तुओं का वितरण नहीं करेगा। यदि कोई डिपोधारक कार्डधारको को सरकारी हिदायतानुसार राशन वितरण नहीं करता है तो उस डिपोधारक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।



 महिला समानता दिवस 26 अगस्त
किसी भी क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों से नहीं है कम-सरिता यादव
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स्रनीना की आवाज।
 महिलाओं कानूनी तौर पर पुरुषों की समान अधिकार मिले हैं लेकिन समाज में उनकी स्थिति समान नहीं है, लोगों के मन में महिलाओं के प्रति दोहरी मानसिकता मिलती है। हरियाणा में भी उनको समानता का अधिकार दिलाने तथा उनकी स्थिति मजबूत करने के लिए 33 फीसदी आरक्षण दिया गया है। किसी समय महिलाओं को देश में मतदान का अधिकार भी नहीं था किंतु 26 अगस्त को 1920 से यह दिवस मनाने की शुरुआत की। विभिन्न देशों में महिलाओं का अधिकार दिलाने के लिए आंदोलन चले। वास्तव में 26 अगस्त 1920 में वोट के अधिकार को लेकर अमेरिका में आंदोलन चला था। इसके बाद यह दिवस मनाया जा रहा है। क्या कहती है क्षेत्र में नाम कमाने वाली महिलाएं एवं सम्मान प्राप्त महिलाएं-
   हालांकि महिला और पुरुषों को बराबर अधिकार दिए गए हैं किंतु समाज में फिर भी उन्हें अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता जो कि समाज की कहीं गलती है। पुरुष से किसी प्रकार महिला कम नहीं है किंतु फिर भी उन्हें अच्छी नजरों से नहीं देखा जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आज के दिन किसी घर में देखा जाए बच्चियों महिलाएं हर प्रकार से पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही है। ऐसे में महिला को पुरुष के बराबर हर प्रकार से यथायोग्य समझना चाहिए। आज तो वक्त ऐसा भी है कि महिलाएं पुरुषों से बहुत आगे निकल चुकी है ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि महिलाएं किसी प्रकार पुरुषों से कम है। समानता का अधिकार हर महिला को मिला हुआ है बशर्ते उसे अपने अंदर झांकना चाहिए। अपनी काबिलियत को ध्यान में रखते हुए आगे बढऩा चाहिए। एक दिन यह समाज भी उसके सामने झुकता नजर आएगा।
              --कमला देवी, कनीना
   आज के परिवेश में नारी किसी भी मायने में पुरुष से कम नहीं है। उसने हर क्षेत्र में पुरुष से बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रशासनिक व राजनीतिक क्षेत्र में अपनी अभूतपूर्व सूझबूझ का परिचय दिया है। जिस क्षेत्र में महिलाओं ने नेतृत्व किया है वहां भ्रष्टाचार के मामले कम से कम हुए हैं। लोगों को अपनी संकीर्ण भावना से ऊपर उठकर पुरुष प्रधानता को तिलांजलि देकर नारी शक्ति की महता पहचान कर उन्हें बराबरी का दर्जा देना होगा, तभी सही मायने में आजादी का अमृत महोत्सव मनाने का सपना साकार होगा।  
--सरिता यादव,कनीना
फोटो कैप्शन:सरिता यादव एवं कमला देवी


बालाजी मंदिर कनीना में संपन्न हुआ हवन
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स्रनीना की आवाज।
 कनीना के 132 केवी पावर हाउस के प्रांगण में स्थित बालाजी मंदिर में हवन आयोजित किया गया। कृष्ण कुमार पंडित द्वारा यह हवन संपन्न कराया गया। यजमान के रूप में हवा सिंह प्रधान अपनी पत्नी सुमन देवी के साथ उपस्थित रहे।
 हवन के बारे में कृष्ण कुमार ने बताया कि हवन से वातावरण शुद्ध होता है। सुख, शांति, शक्ति एवं संपत्ति सब कुछ मिलती है। उन्होंने कहा कि हवन से शालीनता, संयम, सादगी, सफलता, समृद्धि, साधना, संस्कार, यश मिलता है। उन्होंने इस मौके पर सभी के स्वस्थ जीवन की कामना की।
 इस मौके पर रामरतन गोमली, मनोज कुमार, आनंद कुमार, नरेश कुमार, सज्जन सिंह, राकेश तीर्थराज, विक्रम, मोहन कुमार, सोनू, सचिन, पवन, शिशुपाल, सिकंदरा, अमित आदि उपस्थित रहे जिन्होंने संपूर्ण आहुति डाली। प्रसाद भी वितरित किया गया।
 फोटो कैप्शन 01: बालाजी मंदिर कनीना में हवन करते हुए




पुराने ट्रक व बस मालिकों के लिए खुशखबरी
-स्क्रैप कराने और नई गाडिय़ां खरीदने पर सरकार दे रही बंपर सब्सिडी
-परिवर्तन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराकर उठाएं भारी छूट का लाभ

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स्रनीना की आवाज।










हरियाणा सरकार ने पुराने कॉमर्शियल वाहनों यानी ट्रक और बस के मालिकों को बड़ी राहत देने के लिए एक बेहद आकर्षक योजना की शुरुआत की है। अगर आपके पास बीएस-वन, बीएस-टू, बीएस-थ्री या बीएस-फोर मानक का पुराना ट्रक या बस है, तो अब उसे स्क्रैप यानी कबाड़ कराने या बदलने पर सरकार की तरफ से भारी सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
यह जानकारी देते हुए आरटीए मनोज कुमार ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ बनाने की दिशा में सरकार ने परिवर्तन पोर्टल तैयार किया है। इस योजना के तहत पुराना वाहन स्क्रैप कराने पर वाहन मालिकों को सौ प्रतिशत मोटर वाहन कर यानी एमवी टैक्स में छूट दी जा रही है। इसके साथ ही नए वाहन के रजिस्ट्रेशन के समय सौ प्रतिशत पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा।
इतना ही नहीं, नया वाहन खरीदने के लिए लोन लेने पर पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान यानी इंटरेस्ट सब्सिडी का लाभ भी मिलेगा। वाहनों की एक्स-शोरूम कीमत पर आठ प्रतिशत की छूट के साथ-साथ ईंधन वाउचर और प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया गया है। जिला परिवहन अधिकारी-कम-सचिव मनोज कुमार ने नारनौल क्षेत्र के सभी बस एवं ट्रक मालिकों से अपील की है कि वे समय रहते सरकार के आधिकारिक परिवर्तन पोर्टल पर अपने वाहनों का पंजीकरण कराकर इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।


सफाई कर्मियों की जायज मांगे अविलंब मानी जाए
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स्रनीना की आवाज।
बसपा के अतरलाल एडवोकेट ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को ज्ञापन भेजकर स्थानीय नगर निकाय के हड़ताली सफाई कर्मचारी तथा अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की मांगों को तत्काल स्वीकृत कर हड़ताल खत्म करवाने की मांग की है।
  अतरलाल ने बताया कि सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण प्रदेश के कस्बों तथा शहरों में कूड़ा और गंदगी के अंबार लग गए हैं। दुर्गंध फैल रही है और बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने हड़ताली कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि सरकार समय रहते कर्मचारियों से बातचीत कर समाधान निकालती तो प्रदेश के शहरों में गंदगी का यह आलम नहीं होता। उन्होंने कहा कि कर्मचारी 20 दिन से हड़ताल पर हैं लेकिन सरकार इसे हल्के में ले रही है। सरकार की हठधर्मिता के कारण कर्मचारियों के साथ-साथ उनके परिवारजनों और जनता में भी रोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप कर कर्मचारियों की मांगे मानकर शहरों में सफाई व्यवस्था तत्काल बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बसपा हड़ताली कर्मचारियों के साथ खड़ी है। यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया तो कर्मचारी बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।



18 वर्षीय युवती लापता,भाई ने अपनी बहन के लापता होने का करवाया केस दर्ज
- एक व्यक्ति पर शक जताया
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स्रनीना की आवाज।
कनीना उप-मंडल के एक गांव से 18 वर्षीय युवती 24 अगस्त से घर से बिना बताए कहीं चली गइ। परिवार वालों ने काफी तलाश की किंतु कहीं सुराग नहीं मिला। लापता होने वाली युवती के भाई ने पुलिस में मामला दर्ज करवाते हुए कर्ण उर्फ हैप्पी रेवाड़ी जिले के व्यक्ति पर शक जताया है। उन्होंने कहा है कि वह युवती को कहीं ले गया और उसने कहीं छुपा रखा है। कनीना पुलिस ने करण उर्फ हैप्पी के विरुद्ध अभियोग दर्ज कर लिया है।


जांच जारी है।

 

 

 प्रथम पुण्यतिथि पर श्री कृष्ण गौशाला कनीना में सवामणि का आयोजन

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स्रनीना की आवाज।
नरेंद्र कुमार लखेरा पुत्र स्वर्गीय जगमाल सिंह लखेरा वार्ड नंबर 4 कनीना ने अपने पिता स्वर्गीय जगमाल सिंह की प्रथम पुण्यतिथि पर श्री कृष्ण गौशाला कनीना में सवामणि का आयोजन किया इस अवसर पर नरेंद्र कुमार की माता जी श्रीमती चंद्रकला व परिवार के सभी सदस्य गण व गौशाला प्रशासक पूर्व प्रधानाचार्य कृष्ण सिंह मास्टर रामप्रताप जी बलवान सिंह कृष्ण प्रकाश गुरुजी हिमांशु मुनीम सुपरवाइजर अमीर सिंह डॉक्टर महेश कुमार ठेकेदार ओमप्रकाश एवं समस्त गौशाला परिवार उपस्थित रहा।

Monday, August 24, 2026



 


नगरपालिका सफाई कर्मियों ने बढ़ाई दो दिन की और हड़ताल
-26 अगस्त तक चलेगी काम छोड़ हड़ताल
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कनीना की आवाज।
नगर पालिका संघ हरियाणा के आह्वान पर सफाई नगर पालिका कर्मचारी संघ इकाई कनीना ने 19वें दिन काम छोड़ हड़ताल जारी रखी।  हड़ताल के अध्यक्षता कनीना इकाई के प्रधान अनिल कुमार ने की। हड़ताल में सभी कर्मचारी शामिल रहे।
उन्होंने बताया कि सरकार उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रही है जिसके कारण हड़ताल दो दिन और बढ़ा दी गई है। काम छोड़ हड़ताल 26 तक जारी रहेगी।
  उधर कर्मियों की हड़ताल के चलते कनीना कस्बा में गंदगी के ढेर लग गए हैं। लोग परेशान हैं।
फोटो कैप्शन 09: कर्मी हड़ताल पर




वर्षा अभाव में फसल सूखने के कगार पर
-फव्वारों से दे रहे फसल को पानी
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में विगत कई दिनों से वर्षा न होने से बाजरा, कपास एवं मूंग आदि की फसल सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है। मजबूरी में किसान फव्वारों द्वारा सिंचाई कर रहे हैं। सावन माह भी आधा सूखा चला गया। सावन के पहले पखवाड़े में वर्षा हुई थी किंतु दूसरे पखवाड़े में वर्षा का अभाव रहा। दिन में धूप खिलती है और भीषण गर्मी पड़ती है। किसान बेसब्री से वर्षा होने का इंतजार कर रहे हैं।
किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह आदि ने बताया कि डूबते को तिनके का सहारा क्योंकि वर्षा हो नहीं रही ऐसे में जिन किसानों के यहां फव्वारा प्रबंध हैं वो इनसे ही सिंचाई करके खरीफ फसल को बचाने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं।  इस वक्त खेतों में बाजरा, कपास, मूंगफली, अरहर, मूंग, बाजरा, चारा देने वाली फसलें आदि उगा रखी है जिनके लिए यह वर्षा हो जाए तो लाभप्रद साबित होगी।
किसानों का कहना है कि बाजरा फसल न केवल पशुचारा प्रदान करती है अपितु श्रीअन्न भी प्रदान करती है। दोनों की मांग अधिक है और किसानों का सहारा हैं। यदि वर्षा नहीं होगी तो किसान की बेहतर खड़ी फसल ही बर्बाद हो जाएगी।
फोटो कैप्शन 10: बाजरे में फव्वारों से की जा रही सिंचाई




ताश के पत्तों पर रुपये लगाकर जुआ खेल रहे तीन आरोपी काबू, 16,500 रुपए नकद व 52 ताश के पत्ते बरामद
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कनीना की आवाज।
सीआईए महेंद्रगढ़ टीम ने थाना सदर महेंद्रगढ़ क्षेत्र के गांव सिसोठ में कार्रवाई करते हुए ताश के पत्तों पर रुपये लगाकर जुआ खेल रहे तीन व्यक्तियों को मौके से काबू किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 16,500 रुपए की नकदी, 52 प्लास्टिक के ताश के पत्ते एवं एक प्लास्टिक कट्टा बरामद किया है। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी मौके से फरार हो गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री फैजल खान के अनुसार पुलिस टीम गश्त एवं अपराध पड़ताल के दौरान बस अड्डा सिसोठ के पास मौजूद थी। इसी दौरान पुलिस टीम को सूचना प्राप्त हुई कि गांव सिसोठ में कृष्ण की पुरानी खंडहर हवेली में कुछ व्यक्ति रुपये लगाकर ताश पर जुआ खेल रहे हैं। सूचना को विश्वसनीय मानते हुए पुलिस टीम ने रेडिंग पार्टी गठित कर मुखबिर द्वारा बताई गई जगह पर दबिश दी।
पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर हवेली के पास सीढिय़ों की आड़ में छिपकर देखा और सुना कि वहां मौजूद व्यक्ति ताश के पत्तों पर 100, 200, 200 तथा 500 रुपए की चाल लगाकर जुआ खेल रहे थे। इसके बाद पुलिस टीम ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए जुआ खेल रहे व्यक्तियों को काबू करने का प्रयास किया।
पुलिस को देखकर एक व्यक्ति अपने हाथ में लिए हुए ताश के पत्ते फेंककर तथा मौके पर पड़े रुपये लेकर फरार हो गया, जबकि अन्य व्यक्तियों ने अपने हाथों में पकड़े ताश के पत्ते मौके पर पड़े पत्तों में फेंक दिए। पुलिस टीम ने तीन व्यक्तियों को मौके से काबू कर लिया। पूछताछ में आरोपियों की पहचान प्रविण निवासी सिसोठ, कर्मपाल निवासी कुराहवटा तथा अशोक निवासी जाट के रूप में हुई। आरोपियों ने फरार हुए व्यक्ति की पहचान नवीन निवासी भुरजट के रूप में बताई।
मौके की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने प्रविण के कब्जे से 10,000 रुपए कर्मपाल के कब्जे से 3,000 रुपए तथा अशोक के कब्जे से 3,000 की नकदी बरामद की। इसके अतिरिक्त जुए की फड़ से 500 की नकदी तथा 52 प्लास्टिक के ताश के पत्ते बरामद किए गए। इस प्रकार पुलिस ने आरोपियों के कब्जे एवं मौके से कुल 16,500 की नकदी, 52 प्लास्टिक के ताश के पत्ते तथा एक प्लास्टिक कट्टा बरामद किया।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना सदर महेंद्रगढ़ में हरियाणा गैम्बलिंग एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत अभियोग दर्ज कर लिया है। मामले में नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जा रही है तथा फरार आरोपी की तलाश जारी है।
फोटो कैप्शन 05: पकड़े गए आरोपी


जनता की सेवा सर्वोपरि, सभी जनप्रतिनिधि व अधिकारी जनता के सेवक: विपुल गोयल
--नारनौल में जिला लोक संपर्क एवं जन परिवेदना समिति की बैठक में 10 परिवादों की हुई सुनवाई
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कनीना की आवाज।
हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी जनता के सेवक हैं और हम सबका यह निरंतर प्रयास होना चाहिए कि नागरिकों की प्रत्येक समस्या का समाधान एक निश्चित समय सीमा में किया जाए। श्री गोयल सोमवार को स्थानीय राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार में जिला लोक संपर्क एवं जन परिवेदना समिति की मासिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। बैठक में पहले से निर्धारित 10 परिवादों की गहनता से सुनवाई की गई। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ कार्य करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मौके पर उपायुक्त अनुपमा अंजली तथा पुलिस अधीक्षक दीपक ने राजस्व मंत्री का बुके देकर स्वागत किया।
बैठक के दौरान मालड़ा सराय व मालड़ा बास में जलभराव की समस्या पर संज्ञान लेते हुए मंत्री ने सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता को निर्देश दिए कि वे मौके पर जाकर तकनीकी व्यवहार्यता की जांच करें, ताकि संबंधित विभाग इस कार्य को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सके। हुड्डा सेक्टर 1 नारनौल में पार्कों की मरम्मत और बेसहारा पशुओं की रोकथाम के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए गए। कनीना की पीपला वाली बणी में दूषित पानी के संबंध में अधिकारियों ने समिति को अवगत कराया कि गांव में 7 एकड़ क्षेत्र में तालाब का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए टेंडर जारी हो चुके हैं और इससे समस्या का स्थायी समाधान होगा।
डोहर कलां सहित कई गांवों में शेड व बोर्ड निर्माण में अनियमितता के मामले में राजस्व मंत्री ने प्रकरण को जांच के लिए सतर्कता विभाग (विजिलेंस) को भेजने के निर्देश दिए।
बनिहाड़ी गांव के बांध पर युवक की संदिग्ध मौत के मामले में उप पुलिस अधीक्षक भारत भूषण ने बताया कि विसरा डाइटम जांच के लिए न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला मधुबन भेजा गया है, जहां से रिपोर्ट और चिकित्सकों की अंतिम राय प्राप्त होने के बाद नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वहीं नलापुर चौक से छिप्पी जोहड़ तक नाले पर हुए अतिक्रमण की शिकायत पर मंत्री ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर समस्या का पूर्ण समाधान सुनिश्चित कराने के आदेश दिए।
इस मौके पर हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने महाविद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया।
इस बैठक में नारनौल के विधायक ओम प्रकाश यादव, महेंद्रगढ़ के विधायक कंवर सिंह यादव, नांगल चौधरी की विधायक मंजू चौधरी, भाजपा के जिला अध्यक्ष डॉ जितेंद्र राव तथा नगर परिषद चेयरपर्सन कमलेश सैनी के अलावा अन्य गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 05: संबंधित है





वर्षों से ठीक करते आ रहे खराब सीएफएल
- किसी वैज्ञानिक से कम नहीं है विजय वधवा की कार्यकुशलता
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कनीना की आवाज।
 यदि हाथों में कुछ करने का हुनर हो तो दिव्यांगता आड़े नहीं आती है। हिम्मत के पर्याय के रूप में कनीना का विजय वधवा जाना जाता है जो 83 प्रतिशत दिव्यांग है। डाक्टरों ने कहा था कि यह खड़ा भी नहीं हो सकेगा किंतु अपनी रोटी रोजी आज भी कमा रहा है। वो हरियाणा का पहला वैज्ञानिक कबाड़ से जुगाड़ बनाने के नाम से जाने जाते हैं।
10 रुपए तक कर देते हैं सीएफएल ठीक--
कनीना बस स्टैंड के पीछे छोटी सी पुरानी दुकान में बैठकर खराब सीएफएल को ठीक करता है। कनीना में सबसे पहले खराब सीएफएल वो भी 10 रुपये में ठीक करने का अगर श्रेय उनको जाता है। वर्षों पहले इन्होंने अपने यहां सीएफएल ठीक करना शुरू किया और अच्छा नाम कमाया। 2017 में इनको हृदयघात आया और मेडिसिटी गुररुग्राम में भर्ती करवाना पड़ा। कान खराब हो गए, आंखों से दिखाई कम देने लगा और शरीर की एक साइड अधरंग हो गई। वर्तमान में 83 प्रतिशत दिव्यांग हैं परंतु हिम्मत नहीं छोड़ते हैं। उनकी हिम्मत के आगे सभी नतमस्तक होते हैं। प्रतिदिन 30 से 40 सीएफएल वर्तमान में भी ठीक कर लेते हैं जबकि उनके हाथ बड़ी मुश्किल से काम करता है। एक हाथ बिल्कुल काम नहीं करता। पैरों से चला नहीं जाता ,शरीर में कई दिक्कत आती है, चलने के लिए ट्राई साइकिल ले रखी है परंतु उनका एक ही उद्देश्य है कि किसी प्रकार अपनी रोटी रोटी खुद कमाये और दूसरों पर निर्भर न रहे। कहने को तो उनका परिवार है जो अच्छी खासी नौकरियों में है किंतु उन्होंने कभी काम से जी नहीं चुराया। पुरानी सीएफएल लाने वाले लोगों की सीएफएल ठीक करके देता है। यह काम करने को तो अनेकों  लोग कर रहे हैं परंतु जिन परिस्थितियों में विजय वधवा काम कर रहे हैं वो सराहनीय है। उसको देखकर लगता है कि सचमुच वह एक उदाहरण बनकर उभरा है।
कबाड़ से कर देते हैं जुगाड़--
विजय वधवा कबाड़ से जुगाड़ करने में भी महारत लिये हुए है। वर्ष 2008 में उन्होंने कबाड़ में पड़ी हुई खराब ट्यूबलाइट को महज अल्प राशि में ठीक करके देने का काम शुरू किया था और आज उन्होंने नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर बहरोड़, कोसली, नारनौल, अटेली, दादरी, सेहलंग एवं कनीना में अपने शिष्य छोड़ दिए हैं जो जन सेवा में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार को आइटीआइ में इस प्रकार का ट्रेड शुरू कर देना चाहिए ताकि वे प्रशिक्षण दे सके। उनका मानना है कि विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों में उनके नि:शुल्क प्रशिक्षण शिविर लगाने की अनुमति दी जाए ताकि वे बेरोजगारों को रोजगार की राह दिखा सके। उनकी तमन्ना है कि हर गांव में कम से कम एक व्यक्ति उनका यह प्रशिक्षण लेकर गांव की खराब लाइटों को ठीक करने लगे तो उनका नाम भी हो और बेरोजगारों को भी रोजगार मिल सके।   विजय वधवा के कानों में सुनने की मशीन, आंखों पर बड़े चश्मे, पास खड़ी ट्राइसाइकिल, बेंत नजर आते हैं किंतु उनके ग्राहक उन तक जरूर आ जाते हैं। धुआं रहित चिमनी वर्षों पहले से बना रहे हैं।
प्रारंभिक जीवन-
विजय वधवा ने मिडिल की परीक्षा गुढा से पास की और कनीना से 9वीं से 11वीं तक की पढ़ाई की। दस जमा दो कालेज से पास करने के बाद 1989 से 1991 तक दिल्ली इंस्टिट्यूट आफ़ मैनेजमेंट एंड सर्विसेज से इलेक्ट्रानिक्स का डिप्लोमा किया। वर्ष 1992 से सीएफएल सुधारने का अपना काम कर रहे हैं। उस जमाना में जब कोई भी सीएफएल को सुधारने वाला नहीं था तब से काम कर रहे हैं। रेडियो, टीवी तथा वीसीआर तकनीक सीखी और काम करने में सफलता हासिल की। लैंडलाइन फोन, कलर टीवी, वीसीआर, सरसों में तेल की मात्रा बताने वाली लैब, वाशिंग मशीन, माइक्रो ओवन की रिपेयरिंग की रिपेयरिंग में दक्षता हासिल की है। वर्तमान में 30 रुपए प्रति लाइट के हिसाब से ठीक करते हैं।
फोटो कैप्शन 06: विजय वधवा दिव्यांग होते हुए भी सीएफएल सुधारने का काम करते हुए।


बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत जागरूकता शिविर आयोजित
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कनीना की आवाज।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर, सीगड़ा के अंतर्गत आने वाले गांव खेड़ा में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ एवं लिंगानुपात सुधार को लेकर जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर की अध्यक्षता एसएमओ डा. प्रभा यादव ने की।
शिविर के दौरान ग्रामीण महिलाओं को संबोधित करते हुए डा. प्रभा यादव ने कहा कि बेटियां परिवार और समाज की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। बेटियों को जन्म लेने, शिक्षा प्राप्त करने तथा आगे बढऩे के समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देकर ही लिंगानुपात में सुधार किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महिलाओं को कन्या भ्रूण हत्या के दुष्परिणामों, बेटियों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा, समान अधिकार तथा बालिकाओं के सुरक्षित एवं सम्मानजनक भविष्य के संबंध में जागरूक किया।
इस अवसर पर कम्युनिटी हेल्थ अधिकारी अरुण चौधरी ने कहा कि लिंगानुपात में सुधार केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से अपील की कि वे अपने आसपास बेटियों के प्रति भेदभाव की सोच को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं तथा अन्य परिवारों को भी जागरूक करें।
शिविर में स्वास्थ्य कर्मी ऋषिराज एवं हेमलता ने शिविर में महिलाओं के साथ संवाद करते हुए बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं उनके अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। साथ ही समाज में व्याप्त रूढि़वादी सोच को बदलने और बेटियों को समान अवसर देने पर जोर दिया गया।
फोटो कैप्शन 01: बेटी बचाने की शपथ लेते हुए स्वास्थ्यकर्मी एवं अन्य

सावन के अंतिम सोमवार को शिवालयों में लगी भीड़
-बाघोत में लगा मेला

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कनीना की आवाज।
।सावन माह के अंतिम सोमवार को विभिन्न गांवों के शिवालयों में भक्तों की भीड़ लगी रही। सुबह से दोपहर तक भारी संख्या में भक्त पहुंचे।
 प्राचीन शिवालय बाघेश्वर धाम बाघोत में हर सोमवार को यूं तो मेला लगता रहा है किंतु इस बार सावन के अंतिम सोमवार को मेले में बाहरी भीड़ रही। भक्तों को कतारबद्ध रूप से अंदर जाने की अनुमति दी गई जिसके चलते आधे-आधे घंटे में भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित कर पाए।
उल्लेखनीय है कि बाघेश्वर धाम पर जहां 11 अगस्त को शिवरात्रि का मेला/कावड़ मेला भी लगा था।  सावन माह में 4 सोमवार आए, सभी में भारी भीड़ जुटी। भक्त पैदल, वाहनों स एवं पेट के बल शिवालय पहुंच रहे थे। उधर कनीना के 21 फुट ऊंची शिव प्रतिमा वाले शिवालय में सुबह से ही भक्तों की भीड़ रही। विभिन्न गांवों में भी शिवालयों में भीड़ रही। वैसे भी सावन 28 अगस्त को संपन्न हो जाएगा और इसके बाद भाद्रपद का माह शुरू होगा।
 इस बार सावन में कम वर्षा हो पाई। किसान  सावन माह में बेहतर फसल का इंतजार कर रहे थे किंतु सावन माह में प्रथम पखवाड़ा कुछ वर्षा हुई और दूसरे पखवाड़े में कोई वर्षा नहीं हुई। किसान परेशान है।
 फोटो कैप्शन दो: बाघोत में लगा मेला
              03: कनीना शिवालय में शिवलिंग पर जल अर्पित करते हुए


हो रहा है गंदा जल पेयजल सप्लाई
-अल्प मात्रा में ही सप्लाई होने की शिकायत
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कनीना की आवाज।
कनीना में गर्मी के दिनों में जहां नहर पर आधारित गंदा पेयजल सप्लाई घरों में हो रहा है। यही नहीं पेयजल सप्लाई भी थोड़ा हो रहा है। उपभोक्ताओं की शिकायत है कि एक बाल्टी भी पेयजल सप्लाई नहीं हो पा रहा है और वह भी इतना दूषित की पीना तो दूर कपड़े भी नहीं धो सकते।
 उल्लेखनीय की कनीना में तीन प्रकार की पेयजल सप्लाई कार्यरत हैं जिनमें नहर पर आधारित, मुख्य पेयजल सप्लाई तथा ट्यूबवेलों से संचालित पेयजल सप्लाई प्रमुख हैं। नहर पर आधारित पेयजल सप्लाई बड़ी बणी में नजदीक डीएवी अकादमी के पास स्थित है जहां नहर का पानी साफ करके घरों में पेयजल के रूप में पहुंचाया जाता है। विगत करीब 10 दिनों से उपभोक्ताओं की शिकायत मिल रही है कि उन्हें न के बराबर पर जल सप्लाई मिल रहा है और वह भी दूषित जल सप्लाई की रही है।
 उपभोक्ता रमेश कुमार, दिनेश कुमार, भरपूर सिंह, करतार सिंह, महेंद्र सिंह, सुरेंद्र आदि ने बताया कि विगत 10 दिनों से पेयजल सप्लाई न के बराबर हो रही है। उनके यहां नहर पर आधारित पेयजल सप्लाई होती है। उन्होंने बताया कि पेयजल को साफ करने के लिए फिटकरी एवं ब्लीचिंग पाउडर आदि की जरूरत होती है लेकिन फिटकरी आदि होने से पेयजल को साफ नहीं किया जा पा रहा है। जैसा नहर का जल है वैसा ही सप्लाई किया जा रहा है। उपभोक्ताओं ने उच्च अधिकारियों को भी शिकायत की है।
 मिली जानकारी अनुसार पेयजल बहुत कम सप्लाई हो रहा है। कहने को तो 1 घंटा पेयजल सप्लाई होता है किंतु एक बाल्टी भी पानी से नहीं भरी जा सकती। उपभोक्ता में भारी रोष है तथा उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि गर्मी के दिनों में कम से कम पर जलापूर्ति सही ढंग से की जाए।  क्या कहना है कनिष्ठ अभियंता का
इस संबंध में कनिष्ठ अ











भियंता जनस्वास्थ्य विभाग पवन कुमार से बात हुई। उन्होंने बताया कि उन्हें शिकायत मिल चुकी है और वह जहां फिटकरी 25 अगस्त तक उपलब्ध करवा देंगे वहीं कम पेयजल सप्लाई के संबंध में वो 25 अगस्त को स्वयं नहर पर आधारित पेयजल सप्लाई केंद्र पर जाकर पता करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। मोटर कुछ दिनों पहले खराब हो गई थी ठीक करवा दी गई है। नहर का पानी भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। ऐसे में पेयजल सप्लाई न कर पाने के लिए कारणों का पता लगाया जाएगा। मौके पर ही पता लगाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द पेयजल सप्लाई दुरुस्त कर दी जाएगी।
 फोटो कैप्शन 04: सप्लाई गंदा जल