Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Friday, March 13, 2026



 


अब नहीं बिकते शहतूत बाजारों में
-कभी माली समाज आता था बेचने शहतूत
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कनीना की आवाज।
 ग्रामीण क्षेत्रों में पाए जाने वाले शहतूत की आवक कम हो गई है। अति मधुर एवं चंद दिनों के ग्रामीण फल बड़े ही चाव से खाए जाते हैं।
  शहरी जन बेशक पसंद न करें किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद चाव से खाए जाने वाले शहतूत फल की पैदावार कम हो पाने के कारण आवक घट गई है। एक जमाना था जब इन्हें रेहड़ी एवं ऊंटगाड़ी में डालकर गांवों में बेचा जाता था किंतु अब एक भी व्यक्ति इनको बेचकर रोटी रोजी कमाता नजर नहीं आता है। ये दो प्रकार के होते हैं खट्टे एवं मीठे। ये पौधे छाया भी प्रदान करता है तो फल भी।
 इस संबंध में किसान राजेंद्र सिंह ने बताया कि मौसम की मार के चलते ये फल या तो झड़ गए हैं या फिर बहुत कम मात्रा में पक पाते हैं जिसके चलते आवक घट गई है। इस संबंध में पूर्व खंड कृषि अधिकारी डा. देवराज का कहना है कि ये फल इस क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में होते हैं किंतु मौसम की मार पडऩे से झड़ जाते हैं।
 कुछ लोग इसलिए भी नहीं खाते क्योंकि इन पर मक्खी एवं मच्छर बैठे गंदा करते रहते हैं। ये धरती पर गिर जाए तो रेत लग जाता है और धोने पर मधुर स्वाद खत्म हो जाता है।
  इस संबंध में डा. होशियार सिंह यादव विज्ञान के जानकार का कहना है कि इसमें प्रोटीन, वसा, विटामिन एवं खनिज लवण पाये जाते हैं। शहतूत के रस में एंटीआक्सीडेंट, विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं और इसमें औषधीय गुण भी होते हैं। यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है और रक्तचाप को कम करता है, जिससे रक्त के थक्के बनने और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा, शहतूत के रस का सेवन एनीमिया के लक्षणों को कम करने में भी सहायक होता है।
फोटो कैप्शन 10: ग्रामीण क्षेत्रों में चाव से खाया जाने वाला शहतूत फल।



कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-15 पढ़े 15 मार्च को
--अलग थलग पड़ा कुतरूं किंतु स्वभाव नहीं बदला, इसे कहते हैं कि रस्सी जल गई परंतु.....




कनीना की आवाज ब्लाग से न उठाये कोई समाचार
-वरना कापीराइट के तहत होगा मामला दर्ज
-आरएनआई द्वारा है रजिस्टर्ड
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कनीना की आवाज।
 कनीना की आवाज नमक ब्लाग आरएनआई द्वारा  रजिस्टर्ड समाचार पत्र है। इससे यूं की यूं खबर को उठाकर कुछ लोग अनजाने में ग्रुप में डाल देते हैं जो कापीराइट का उल्लंघन है। कहने को तो अज्ञानता कहेंगे लेकिन कानून के सामने अज्ञानता का कोई बहाना नहीं होता। ऐसे में ऐसी गलती दो-तीन बार कुछ लोग कर चुके हैं जो डा. होशियार सिंह यादव कापीराइट अधिकारी द्वारा देखी जा चुकी हैं। भविष्य में अगर कोई ऐसी गलती करेगा चाहे वह जाने या अनजाने में हुई उसके खिलाफ कापीराइट के तहत मामला दर्ज करवाया जाएगा। इसके लिए ग्रुप एडमिन भी जिम्मेवार होगा। कनीना की आवाज ब्लाग की खबर को कापी करके कहीं प्रयोग न करें, सावधानी बरते अन्यथा अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
 कापीराइट मामले में सजा
-अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की कैद और 50,000 रुपए से 2 लाख रुपए तक के जुर्माने तक हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर सजा बढ़ जाती है, और इसमें गैर-जमानती और संज्ञेय  अपराध माना जाता है, जिसमें अवैध सामग्री और उपकरणों को जब्त भी किया जा सकता है।
सजा के मुख्य प्रावधान (भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार)
    धारा 63:पहली बार उल्लंघन करने पर कम से कम 6 महीने की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 लाख रुपएतक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63 (दोबारा उल्लंघन): दूसरी बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 साल की कैद और 1 लाख रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 रुपए लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63बी(कंप्यूटर प्रोग्राम का उल्लंघन): कंप्यूटर प्रोग्राम की उल्लंघनकारी प्रति का जानबूझकर उपयोग करने पर कम से कम 7 दिन की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
    अन्य दंड:उल्लंघन करने वाली प्रतियां और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए जा सकते हैं, और कापीराइट मालिक सिविल मुकदमे के जरिये मौद्रिक हर्जाना भी मांग सकता है।




साल में दो विज्ञापन भी नहीं देने वाले समाचार न भेजे
- अखबार का आदेश है विज्ञापन देने वालों की खबरें लगे अधिक से अधिक
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कनीना की आवाज।
लंबे समय से डा. होशियार सिंह यादव पत्रकारिता में जुटा हुआ है। सुबह से रात 11 जाते हैं तब जाकर पत्रकारिता पूर्ण होती है किंतु न तो समाचार पत्र एक रुपया भी देता और न ही लोग विज्ञापन देते। साल में अनेक समाचार छपने के बाद भी जब विज्ञापन का वक्त आता है तब कोई विज्ञापन नहीं दिया जाता, जिससे अखबार नाराज है और ऐसे पत्रकार जो विज्ञापन नहीं देते उनको हटाने का निर्णय ले लेता है। ऐसे में जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाए वो कृपया मेरे पास/डा. होशियार सिंह यादव के पास समाचार प्रकाशन हेतु न भेजे। इसे कड़ाई से पालन किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई समाचार भेजता है तो स्वयं जिम्मेदार होगा और वे प्रकाशित नहीं होंगे। अपने घर से कंप्यूटर, बिजली, नेट खर्चा, भाग दौड़ करनी पड़ती है वहीं बच्चों से दूर रहना पड़ता है। उस पर भी एक रुपए भी जेब में नहीं आता और खर्चा बढ़ता ही चला जाता है। एक और परिवार वाले नाराज वहीं अखबार वाले नाराज क्योंकि कुछ लोगों की आदत बन गई है कि समाचार के समय तो कहेंगे बड़े-बड़े समाचार छाप दो और विज्ञापन के नाम पर कहेंगे सोचेंगे, देखेंगे या फिर फोन नहीं उठाते, फोन बंद कर लेते हैं।  ऐसे में ऐसे व्यक्ति जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाते वो कृपया माफ करें, समाचार भविष्य में न भेजे। केवल वही व्यक्ति भेजें जिन्होंने कुछ विज्ञापन दिया है या मेरी किसी क्षेत्र में मदद की है ताकि उनका खर्चा में स्वयं वहन कर सकूं। सबसे बड़ी बात है कि अखबार के निर्देशानुसार एक विज्ञापन कम से कम 10 हजार का देने वालों के छह माह समाचार प्रकाशित होंगे, दो विज्ञापन देने वालों के पूरे साल समाचार प्रकाशित होंगे। अधिकतम दिन में एक समाचार प्रकाशित करवा सकता है वह भी स्वयं टाइप करके भेजना होगा। यदि साल में 20000 तक का विज्ञापन देता है उनके लिए यह सुविधा एक साल चलती रहेगी। समाचारपत्रों का कहना है कि उन लोगों पर समय बर्बाद ना करें जो विज्ञापन नहीं देते। एक और मजबूरी है दूसरी और विज्ञापन देना जरूरी है। शायद कनीना क्षेत्र के प्रतिदिन 10 बड़े समाचार अकेले मेरे प्रकाशित होते हैं लेकिन इस होली पर महज एक छोटा सा विज्ञापन मिला जिनसे उम्मीद थी वो कल देंगे, फिर देंगे, आगे देंगे करते-करते होली भी टाल दी। अब ऐसा नहीं होगा। केवल क्राइम के समाचार और उन लोगों के समाचार प्रकाशित होंगे जो विज्ञापन देते हैं या ऐसे व्यक्तित्व जो वास्तव में समाज के लिए  उदाहरण बने हुए हैं।




कांग्रेस का नेता बेच रहा है गन्ने का जूस
- रोटी रोजी कमाने में कोई हर्ज नहीं -अशोक वर्मा
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी अशोक वर्मा जो कांग्रेसी नेता है तथा उनके पिता रामकुमार वर्मा कट्टर कांग्रेसी रहे हैं। आज अशोक वर्मा अपनी रोटी रोटी चलाने के लिए गन्ने का जूस बेच रहा है। उनसे इस बाबत चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि रोटी रोटी कमाना हर इंसान का फर्ज बनता है। इसमें किसी प्रकार की तौहीन नहीं होती। कमाने के लिए चाहे कोई भी काम मिले, जरूर मेहनत और लगन सीखना चाहिए। उनका कहना है कि वह गन्ने का रस पिलाकर लोगों की सेहत का ध्यान रख रहे हैं तथा बेहतर दर्जे का गन्ने का रस पिलाते हैं। डाक्टर भी कुछ मरीजों को गन्ने का जूस पीने के लिए सलाह देते हैं। इसलिए उनका ध्येय है कि बेहतरीन जूस पिलाकर लोगों की सेहत का ध्यान रखा जाए। उनका कहना है कि अब वो अपने इस कार्य को विस्तार देंगे तथा बड़ी-बड़ी मशीन जूस से संबंधित लाकर अनेक फलों का जूस निकालने का कार्य भी भविष्य में करेंगे। उन्होंने कहा कि जो मेहनत से जी चुराते हैं वो इंसान नहीं होते और जब इंसान होते हैं वो मेहनत करके ही अपनी रोटी रोटी कमाते हैं।
  उल्लेखनीय है कि अशोक वर्मा ने पहले कबाड़ी का काम भी किया था तथा खूब ख्याति पाई थी। विशेष प्रकार की सूती चद्दर छपाई करके बेचने में भी मशहूर रहे हैं।
 फोटो कैप्शन 09:अशोक वर्मा गन्ने का जूस पिलाते हुए



अन्तर्राष्ट्रीय गणित दिवस -14 मार्च
-पाई दिवस के रूप में भी याद किया जाता है गणित दिवस
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कनीना की आवाज।
 भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जन्मदिन को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है। वहीं पाई के महत्व को याद करके अन्तर्राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है।  आज के दिन विद्यार्थी गणित से कुछ दूर भागते हैं जबकि भारत के इस गणितज्ञ ने वह खोज की जो आज भी विदेशों तक शोध का आधार बने हुए हैं। इस संबंध में गणित के जानकार राजकुमार राव से बात हुई --
**बेशक वर्तमान पीढ़ी गणित से कुछ दूर भागती हो किंतु गणित बहुत आसान विषय है। गणित को अगर सही ढंग से पढ़ा जाए तो निसंदेह हर विषय की समस्याओं को हल करने की चाबी के रूप में कार्य करेगा। जिस प्रकार रामानुजन ने 32 वर्ष के अल्प जीवन काल में 3900 समीकरण और सर्वसमिकाओं का संकलन किया है, पाई की अनंत श्रेणी शामिल की गई, अनेक सूत्र भी प्रदान किये चुनौती पूर्ण गणित की समस्याओं को हल करने के लिए नए विचार प्रस्तुत कर गणित को आसान से भी आसान विषय सिद्ध करके दिखाया।
गणित से डरना बुरी बात है किंतु गणित के साथ खेलने से यह विषय एक सुंदर खेल का माध्यम बन जाता है। गणित से जो डरकर दूर भागता है उतना ही गणित में कमजोर हो जाता है लेकिन जो गणित के गहराई तक जाने का प्रयास करता है वह गणित में पारंगत हासिल कर लेता है और उसकी पहचान प्रतिभावान के रूप में की जाती है।
गणित बहुत बड़ा विषय है। गणित की छोटी-छोटी समस्याओं को हल करने में यदि ध्यान दिया जाए तो सही मायने में  इंसान का ज्ञान निखर कर सामने आएगा। गणित से दूर भागना योद्धा के समान है जो युद्ध की विभीषिका देखकर डर के मारे भाग रहा हो लेकिन जिस प्रकार एक योद्धा युद्ध में पूरे हौसले के साथ उतरता है तो जीत उसके कदमों को चूमती है। गणित को सरल तरीके एवं छोटी छोटी बातों से बड़ी बातों की ओर ले जाने पर विद्यार्थी आसानी से सीख सकते हैं। गणित में अगर एक बार रुचि जागृत हो जाए तो गणित सबसे सरल विषय बन सकता है।
--राजकुमार राव, पूर्व मुख्याध्यापक एवं गणित के जानकार
फोटो कैप्शन:  राजकुमार राव




खेड़ी में जलभराव और गंदे नालों से ग्रामीण परेशान, निकासी व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
-नालों में जलभराव से गांव में महामारी फैलने का बना भय
-दो दिन पानी में खड़े होकर मांगा था समाधान, अब सरपंच बनने के बाद भी खेड़ी में जलभराव से लोग त्रस्त
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव खेड़ी में जलभराव और नालियों में खड़े गंदे पानी की समस्या एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। गांव की कई गलियों और मुख्य रास्तों पर जमा गंदा पानी ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। नालियों में गंदगी और ठहरे पानी से उठती बदबू और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो गांव में बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान सरपंच पंकज हिंदू ने चुनाव के समय गांव में पानी निकासी की समस्या को प्रमुख मुद्दा बनाकर लोगों से समर्थन मांगा था। उस समय उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर इस समस्या को लेकर जोरदार आवाज उठाई थी। बताया जाता है कि मुख्य रास्ते पर जलभराव की समस्या को लेकर उन्होंने दो दिनों तक पानी में खड़े रहकर सरकार और प्रशासन से समाधान की मांग भी की थी।
ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सरपंच बनने के बाद वह गांव में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करवाएंगे और वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा। इसी भरोसे के साथ ग्रामीणों ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना था। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच बनने के बाद भी गांव में पानी निकासी की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
समाजसेवी अधिवक्ता मंदीप सिंह, समाजसेवी तेजपाल रजलीवालद, धर्मपाल दुप्पट, पूर्व सरपंच रामनिवास चौधरी, राजेश, संदीप, दीपक, जोनी, मामन, संजय, दारासिंह और धर्मेंद्र सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव के कई घरों के पास बनी नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं। इनमें पानी जमा रहने से दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की कई गलियों में लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण लोगों को आने-जाने में भी कठिनाई होती है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो गांव में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नालियों की नियमित सफाई करवाई जाए और पानी निकासी के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि गांव के लोगों को इस समस्या से राहत मिल सके।
इस मामले में सरपंच पंकज हिंदू से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि गांव में नाले के निर्माण का टेंडर पहले ही जारी किया जा चुका है। केके कंस्ट्रक्शन कंपनी को सड़क चौड़ीकरण और उसके साथ नाले के निर्माण का कार्य दिया गया है। उन्होंने बताया कि पानी निकासी के लिए नालों का निर्माण भी करवाया गया है। सरपंच के अनुसार अब तक चार बार नालों की मरम्मत और कुछ स्थानों पर नया निर्माण भी कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद पानी की निकासी पूरी तरह से नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि संबंधित कंपनी द्वारा सही लेवल नहीं निकालने के कारण कुछ नालियों में पानी जमा हो जाता है। इस समस्या को दूर करने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
पाइप डालने का कार्य जारी, जल्द दूर होगी समस्या - पवन कुमार
कंपनी का कार्य देख रहे पवन कुमार ने बताया कि नालों से पानी की निकासी को बेहतर बनाने के लिए पाइप डालने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही पाइप लगाने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद गांव में जलभराव और पानी निकासी की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
फोटो कैप्शन 07: गंदे पानी की समस्या दर्शाता हुआ ग्रामीण


प्रदेश स्तरीय युवा महा सम्मेलन में पहुंचने की,की अपील
--वेदप्रकाश नंबरदार रामबास पहुंचे कैथल
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कनीना की आवाज।
वेदप्रकाश नंबरदार रामबास कैथल पहुंचे। कैथल में इनेलो पार्टी एससी प्रकोष्ठ की प्रदेश स्तरीय बैठक में उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चौ. रामपाल माजरा को डा. भीमराव अंबेडकर का स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। साथ में एससी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर पहलवान , प्रभारी वेद सिंह मुंडे , महेंद्र कलशन  आदि मौजूद रहे। बैठक में 23 मार्च 2026 को नरवाना की नई अनाज मंडी में होने वाले प्रदेश स्तरीय युवा महा सम्मेलन को सफल बनाने के लिए आगामी रणनीति तैयार की। सभी साथियों ने सम्मेलन में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने का भरोसा दिलाया।
फोटो कैप्शन 08: वेदप्रकाश नंबरदार रामबास इनेलो पदाधिकारियों को स्मृति चिह्न प्रदान करते हुए



हाई कोर्ट के न्यायाधीश संजय वशिष्ठ पहुंचे कनीना
--लायर्स चैंबर्स के लिए जगह चिह्नित करके शिलान्यास किया
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कनीना की आवाज।
कनीना न्यायालय परिसर में उस समय उत्साह और गरिमा का वातावरण देखने को मिला जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट, चंडीगढ़ के  न्यायमूर्ति  संजय वशिष्ठ कनीना पहुंचे।
न्यायमूर्ति के आगमन पर कनीना बार एसोसिएशन के अधिवक्ता साथियों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका भव्य स्वागत एवं सम्मान किया। इस अवसर पर अधिवक्ताओं ने लंबे समय से लंबित अपनी विभिन्न मांगों एवं न्यायिक सुविधाओं से संबंधित समस्याओं को भी माननीय न्यायमूर्ति के समक्ष रखा।
इस अवसर पर लायर्स चैंबर्स के लिए जगह चिह्नित करके शिलान्यास किया। न्यायमूर्ति  संजय वशिष्ठ ने अधिवक्ताओं की बातों को गंभीरता से सुना तथा समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक आश्वासन दिया। उनके इस सौहार्दपूर्ण व्यवहार से अधिवक्ता साथियों में संतोष और प्रसन्नता का माहौल देखने को मिला।
इस अवसर पर उपस्थित अधिवक्ताओं एवं गणमान्य व्यक्तियों ने न्यायमूर्ति का आभार व्यक्त करते हुए उनके न्यायिक मार्गदर्शन की सराहना की।
फोटो कैप्शन 04: न्यायाधीश पंजाब  एवं हरियाणा उच्च न्यायालय कनीना पहुंचने पर स्वागत करते हुए


कोटिया के स्कूल में स्थायी अध्यापक न होने पर अभिभावकों में रोष
 -स्कूल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया
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कनीना की आवाज।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कोटिया में अक्टूबर 2025 किसी भी विषय का स्थायी अध्यापक न होने के कारण अभिभावक और ग्रामीणों में भारी रोष है। शुक्रवार को ग्रामीण एवं अभिभावक विद्यालय परिसर पहुंचे और मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन किया।
 एसएससी सदस्य देशराज यादव ने बताया कि विद्यालय में अक्टूबर 2025 से किसी भी विषय का स्थायी अध्यापक नहीं है। इस कारण बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। इसके लिए कई बार उच्च अधिकारियों को लिखा जा चुका परंतु को स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसलिए सभी अभिभावक एवं ग्रामीणों ने स्कूल द्वार पर धरना व प्रदर्शन किया। यही नहीं अपितु ग्रामीणों ने खंड शिक्षा अधिकारी सुनील खुडानिया व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नारनौल सुनील दत्त यादव से फोन पर बात की तथा  विद्यालय की समस्याओं से अवगत करवाया। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने फोन पर बीइओ कनीना आदेश दिया कि सोमवार को दो विषयों के अध्यापक जरूर भेज कर रिपोर्ट करें।
इस धरना प्रदर्शन में चंदगीराम, सूबेदार निहाल सिंह, करतार सिंह, नरेश प्रधान एसएमसी, पवन कुमार,पूर्व पंचायत समिति सदस्य, सूरजभान दुलीचंद, रमेश जांगड़ा, देशराज यादव सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक ,सुशीला, राजबाला, भतेरी आदि   ग्रामीणों ने इस पर दर्शन में भाग लिया।
 उल्लेखनीय की दैनिक जागरण में कई बार समाचार को प्रकाशित किया एवं समस्या ओ उजागर किया है किंतु विभाग के कानों पर जू तक नहीं रेंगी है।
  स्कूल में है कुल 69 विद्यार्थी-
 कक्षा 6 में 11 कक्षा 7 में 13 और कक्षा 8 में 6 विद्यार्थी हैं और क़ल 6 से 8 तक 30 बच्चे शिक्षा पा रहे है। वहीं पहले से पांचवीं तक 39 विद्यार्थी शिक्षा पा रहे हैं। सबसे बड़ी बात है कि इस विद्यालय में जहां उन्हें पहली से पांचवीं तक कक्षा में दो शिक्षक हैं। एक बीएलओ आदि की ट्रेनिंग पर जाता है और एक से पांच कक्षा तक एक शिक्षक की पढ़ाने को मजबूर हो जाता है। वही 6 से 8 तक चतुर्थश्रेणी कर्मी गणित, बाबू अंग्रेजी, संस्कृत का दूसरे स्कूल से थोड़े समय के लिए भेजा हुआ शिक्षक, वही एसएमसी का सदस्य देशराज भी शिक्षण कर रहा है।
 मर्ज करने के हुए थे आदेश-
 2020 से पहले जब छात्र संख्या घट गई थी तो इस विद्यालय को मर्ज करने की बात सोची थी। तत्पश्चात वर्ष 2022 में ट्रांसफर ड्राइव चला जिसमें केवल मुख्य अध्यापक महिपाल सिंह बाघोत को भेजा। बाकी सभी पद कैप्ट कर दिए गए। परिणाम यह निकला कि अकेला मुख्य अध्यापक की तीन कक्षाओं को पढ़ाता रहा लेकिन अक्टूबर 2025 में वह भी सेवानिवृत्त हो गए।
एमआईएस पोर्टल पर कैप्ट रखे पद-
 मिली जानकारी अनुसार वर्ष 2022 में चले ड्राइव में मुख्य अध्यापक, चपरासी बाबू और पीटीआई के पद खोले गए। बाकी सभी कैप्ट कर दिए गए। मुख्याध्यापक सेवानिवृत्त हो गए। पीटीआई पद पर कोई शिक्षक आया नहीं। महज बाबू एवं चपरासी मजबूरी में कक्षा ले रहे हैं।
कई बार प्रकाशित हुआ समाचार-
 दैनिक अखबारों में प्रमुखता से यह समाचार कई बार प्रकाशित हुआ। बार-बार उच्च अधिकारियों को शिकायत की किंतु परिणाम जिसका दस का तस रहा।
 फोटो कैप्शन 6: मुख्य द्वार पर अभिभावक एवं ग्रामीण प्रदर्शन करते हुए




गुजरात की गिर नश्ल का युवा नंदी बना श्रीकृष्ण गौशाला का नया सदस्य
-गौशाला में किया अभिनंदन
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कनीना की आवाज।
श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में चल रहे नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को गुजरात प्रदेश की प्रसिद्ध गिर नस्ल का एक युवा नंदी गौशाला में शामिल किया गया। कोटिया निवासी सूबेदार संतोष सिंह पुत्र श्योताज सिंह ने यह नंदी गौशाला को भेंट किया।
उन्होंने बताया कि कोटिया निवासी सुरेश कुमार यादव, चेयरमैन दी स्कालर गुरुकुल विद्यालय, लगभग दो वर्ष पूर्व गुजरात से गिर नस्ल की एक उच्च गुणवत्ता वाली गाय लेकर आए थे, जो प्रतिदिन करीब 21 किलो दूध देती थी। उसी गाय का यह नंदी अब लगभग ढाई वर्ष का हो चुका है। हिसार पशुपालन विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा इसके निरीक्षण के बाद इसे शुद्ध गिर नस्ल का बताया गया था।
गौशाला पहुंचने पर गौभक्तों ने नंदी का फूलमालाओं से स्वागत कर उसे विधिवत नंदी बाड़े में शामिल किया। इस अवसर पर एचडीएफसी बैंक कनीना के प्रबंधक विक्रम दत्त, प्रीतम यादव और कंवर सिंह ने गौशाला को सहयोग स्वरूप 21 हजार रुपए भेंट किए।
इस मौके पर गौशाला प्रधान भगत सिंह, सचिव यश कनीनवाल, सह-सचिव रामपाल, उप प्रधान दिलावर सिंह, रवींद्र बंसल, दुलीचंद साहब, दीनदयाल साहब, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, विष्णु जांगड़ा, मदन लाल गेरा, नित्यानंद जांगिड़, दलजीत फौजी, होशियार सत्संगी, राजेंद्र सिंह (पूर्व पार्षद), मास्टर रामप्रताप, राजकुमार डीलर, सतवीर गुगनवाला सहित अनेक गौभक्त उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01 व 02: गौशाला में नंदी का स्वागत करते तथा बैक मैनेजर का अभिनंदन करते हुए



जीएम देवदत ने हरी झंडी दिखाकर चित्तौडग़ढ़ के लिए बस को किया कनीना से रवाना













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कनीना की आवाज। लंबे अरसे से लोगों की बेहद दिमाग तथा मंत्री आरती सिंह राव के अनुशंसा पर कनीना बस स्टैंड से चित्तौडग़ढ़ के लिए सीधी बस सेवा शुरू हो गई है। शुक्रवार को सुबह 7 जीएम रोडवेज नारनौल देवदत ने हरी झंडी दिखाकर बस को रवाना किया। यह बस प्रतिदिन सुबह 7 बजे चलेगी जो चित्तौडग़ढ़ 9 बजे के करीब पहुंचेगी तथा अगली सुबह 4:15 बजे बस वापसी कनीना के लिए रवाना होगी जो रात को 10:15 बजे कनीना पहुंचेगी। इस बस के शुरू होने से जल नारनौल जयपुर और चित्तौडग़ढ़ के लिए जाना सरल हो गया है वही चित्तौडग़ढ़ जहां जहां ऐतिहासिक नगरी को देखने तथा सेठ सांवरिया मंदिर को देखने का मौका मिलेगा।
 मिली जानकारी इस बस का एक तरफ का किराया 590 रुपए होगा। वैसे भी चित्तौडग़ढ़ का किला मौर्य वंशी राजा चित्रांगदा मौर्य ने बनवाया था जो पहाड़ी पर स्थित है। यह दुर्ग ऐतिहासिक है। पद्मावती राजा रतन सिंह की रानी के लिए भी यह क्षेत्र जाना जाता है वहीं राणा कुंभा ने  महमूद खिलजी को यहां हराया था। सबसे प्रमुख यहां महाराणा प्रताप के नाम से जाना जाता है जिन्होंने मेवाड़ का युद्ध किया था। कनीना बस स्टैंड से पहली बार कोई लंबी दूरी की बस का सचलन हुआ है। जीएम ने बताया कि कनीना से कभी लबी दूरी की बस चलती थी जिसको ध्यान में रखकर यह बस सेवा शुरू की है। इसी बीच लोगों ने चंड़ीगढ़ के लिए बस सेवा तथा यमुनानगर आदि के लिए भी बस सेवा शुरू करने की मांग की।
अब यह बस सेवा धार्मिक और पर्यटन महत्व रखेगी। इस मौके पर नारनौल डिपो जीएम देवदत्त टीएम जनरेल सिंह, डीआई करतार सिंह, कनीना स्टैंड इंचार्ज निरंजन सिंह, पंकज, प्रदीप कुमार , बस चालकसंदीप, परिचालक महेश कुमार नारनौल डिपो प्रधान अनिल भीलवाड़ा, यार्ड मास्टर श्रीभगवान, प्रीतम बागड़ी, महेश कुमार बोहरा, मुकेश नंबरदार, पार्षद दीपक चौधरी सहित विभिन्न जन मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 03: बस को रवाना करते हुए जीएम



Thursday, March 12, 2026



 


कनीना में रसोई गैस को लेकर उपभोक्ता परेशान , लगा रहे एजेंसी के चक्कर
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस को लेकर उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर लेने के लिए लोगों को एजेंसी के बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि फोन के माध्यम से गैस बुकिंग कराने में भारी दिक्कत आ रही है और बुकिंग नंबर/डीएसी आने में भी तीन चार दिन तक का समय लग रहा है।
गैस एजेंसी संचालक का कहना है कि फिलहाल उनके पास दो-तीन दिन का गैस स्टाक उपलब्ध है लेकिन नियमों के अनुसार केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को सिलेंडर दिया जा रहा है जिनके पास वैध बुकिंग नंबर/डीएसी है। बिना बुकिंग नंबर के किसी को भी गैस सिलेंडर नहीं दिया जा सकता।
उधर प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि गैस की कालाबाजारी जैसी कोई समस्या पैदा न हो। गैस एजेंसी पर पहुंचे उपभोक्ता राजकुमार, अनिल शर्मा, कविता, कुसुम और राजू ने बताया कि बुकिंग प्रक्रिया में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द समाधान करने की मांग की है ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
फोटो कैप्शन 08: कुकिंग गैस सिलिंडर के लिए कर रहे भागदौड़





सरसों के धांसे भी बने कीमती
-कुकिंग सिलिंडर की कमी एवं बढ़ते दामों को लेकरी धांसों का करने लगे स्टाक
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कनीना की आवाज।
एक जमाने में मुफ्त में मिलने वाले धांसे अब कीमती बन गए हैं। किसानों के लिए ये अतिरिक्त आय का साधन बन गए हैं। अब किसान इन धांसों को नष्ट नहीं कर रहा है अपितु कुकिंग गैस सिलिंडर के दाम बढऩे एवं मारामारी को लेकर धांसों का स्टाक करने लग गया है। ताकि आपातकाल के समय काम आए।   हालात ये बन गये हैं कि किसान धांसों के बदले सरसों की कटाई करवाने लगे हैं।  किसान राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, अजीत कुमार, कृष्ण कुमार,गजराज सिंह, योगेश कुमार, महेंद्र, महिपाल आदि ने बताया कि धांसे न केवल ईंधन का विकल्प है अपितु गरीब तबके के लोग जो चूल्हे से खाना बनाते, धांसों को वरदान समझते हैं। धांसों को किसान सरसों कटाई के समय उखाड़ लेते हैं और इकट्ठा कर वर्षभर प्रयोग करते हैं।
 एक वक्त था जब सरसों के धांसों को लोग उखाड़ कर नहीं लाते थे आज उनकी की कीमत बढ़ गई है। किसान फसल कटाई के साथ-साथ जहां धांसों को इकट्ठा करते हैं। इन्हें ईंधन के विकल्प के रूप में प्रयोग करते हैं।
किसानों ने बताया कि धांसों को काटकर सूखा लिया जाता है और इनको खाना बनाने के लिए प्रयोग में लाते हैं। कुछ किसान पशुओं का आहार पकाने में भी उनका उपयोग करते हैं। धांसों को लोग इक_ा करके अपने घर आंगन में कहीं जमा कर लेते हैं और कई महीनों तक विशेषकर ईंधन के विकल्प के रूप में प्रयोग करते हैं। चाहे ये कम ऊष्मा प्रदान करते हो किंतु गरीब तबके के लोगों के लिए धांसे बहुत कीमती माने जाते हैं। किसान इन धांसों को उखाड़ कर अपने लिए प्रयोग करते हैं या आसपास के लोग उन्हें उखाड़ कर ले आते हैं। यही नहीं कपास के वक्त भी कपास के धांसे ईंधन के रूप में काम में लिए जाते हैं। जहां सिलेंडर महंगा होने के कारण धांसों की अच्छी खासी मांग हो रही है। अब तो घरेलू गैस की किल्लत के आसार बनते










जा रहे हैं जिससे धांसे ही काम में लाये जाएंगे। यद्यपि ये प्रदूषण करते हैं किंतु मजबूरी बन गई है कि ईंधन के रूप में प्रयोग करें।
 फोटो कैप्शन 07: खेत से धांसे उखड़ता किसान


दौंगड़ा अहीर में भारतीय किसान संघ की बैठक, सरसों खरीद जल्द शुरू करने की मांग
-एमएसपी से कम दाम पर खरीद का आरोप
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कनीना की आवाज।
सरसों की सरकारी खरीद में हो रही देरी और किसानों को हो रहे आर्थिक नुकसान के मुद्दे को लेकर भारतीय किसान संघ, जिला महेंद्रगढ़ की जिला कार्यकारिणी की आवश्यक बैठक वीरवार को श्री श्याम मंदिर दौंगड़ा अहीर में आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र के अनेक किसान, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे तथा किसानों के हित में प्रशासन को ज्ञापन देने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान राजकुमार यादव ने की। इस दौरान सरसों की सरकारी खरीद शीघ्र शुरू करवाने, किसानों को एमएसपी से कम दाम पर फसल बेचने की मजबूरी, मंडियों में चल रही कच्ची पर्ची प्रणाली तथा बिचौलियों द्वारा की जा रही अवैध खरीद पर रोक लगाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में ग्राम दौंगड़ा अहीर को पुन: सरसों खरीद केंद्र के रूप में संचालित करने तथा खरीद प्रक्रिया को एफपीओ के माध्यम से करवाने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसके बाद भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन जिला राजस्व अधिकारी राकेश कुमार को दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल में जिला प्रधान राजकुमार यादव के साथ मुकेश कुमार बेवल, उपप्रधान पवन कुमार, जगराम यादव, विजेंद्र सिंह सरपंच, हरपाल थानेदार, महेंद्र सिंह सहित अनेक पदाधिकारी और किसान मौजूद रहे।किसान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि शीघ्र सरसों की सरकारी खरीद शुरू नहीं की गई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि मंडियों में व्यापारी एमएसपी से कम भाव पर फसल खरीद रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए। किसानों ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
फोटो कैप्शन 06: सरसों की खरीद को लेकर आयोजित बैठक


भगवद्गीता की शिक्षाओं एवं विज्ञान के सह संबंध पर व्याख्यान आयोजित
-इस्कान की छह सदस्यीय टीम ने किया प्रतिभाग
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कनीना की आवाज।
पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में भगवद्गीता की शिक्षाओं एवं विज्ञान के सह-संबंध पर भारतीय ज्ञान प्रणाली पर व्याख्यान शृंखला का आयोजन कियागया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिकता, अनुशासन तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना था।
पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में भगवद्गीता की शिक्षाओं को विज्ञान के साथ जोड़कर विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु एक विशेष व्याख्यान शृखला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में इस्कान की छह सदस्यीय टीम ने प्रतिभाग किया। टीम में प्रमुख रूप से राघव पंडित दास, संजीव कुमार कुमावत, गणेश शर्मा तथा संदीप शर्मा शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य  बीएम रावत, उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य तथा समस्त स्टाफ सदस्यों द्वारा अतिथि टीम का भव्य स्वागत कर किया गया। मंच संचालन गणित शिक्षक  लोकेश कुमार ने किया।
भारतीय ज्ञान प्रणाली पर विशेष जोर देते हुए इस्कान के वरिष्ठ प्रवक्ता राघव पंडित दास ने विद्यार्थियों को मन नियंत्रण, नैतिक मूल्यों, किशोरावस्था में सख्त अनुशासन, इंद्रियों के समुचित उपयोग तथा आत्म-अनुशासन का मार्ग दिखाया।
राघव पंडित दास ने गीता के श्लोकों का जाप करते हुए विद्यार्थियों को बताया कि मन ही मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र और सबसे बड़ा शत्रु है (गीता6.5)। उन्होंने जोर देकर कहा कि किशोरावस्था में मन के नियंत्रण के बिना न तो पढ़ाई में सफलता मिल सकती है और न ही जीवन में सुख-शांति। उन्होंने गीता के श्लोकों के माध्यम से नैतिक मूल्यों (सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य) को अपनाने, इंद्रियों को संयमित रखने तथा सख्त आत्म-अनुशासन का महत्व समझाया।इस व्याख्यान शृंखला में इस्कान के विद्वानों ने भगवद्गीता के विभिन्न अध्यायों की शिक्षाओं को आधुनिक विज्ञान के सिद्धांतों से जोड़कर प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और गीता के नैतिक मूल्यों, कर्म योग, भक्ति योग तथा ज्ञान योग को विज्ञान की खोजों जैसे क्वांटम फिजिक्स, न्यूरोसाइंस आदि के साथ समझा।
सत्र के दौरान राघव पंडित दास ने विद्यार्थियों के मन में उठे सभी जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने हर सवाल का गीता और विज्ञान दोनों के आधार पर समाधान प्रस्तुत किया, जिससे छात्रों की जिज्ञासा पूरी तरह शांत हुई।
सत्र का समापन अत्यंत उल्लासपूर्ण तरीके से हुआ। श्री राघव पंडित दास ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर  हरे कृष्ण हरे कृष्ण महा- मंत्र का सामूहिक जाप किया। विद्यार्थी, शिक्षक एवं स्टाफ सदस्य सभी झूम उठे।
प्राचार्य बीएम रावत ने कहा कि भगवद्गीता न केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन देती है, बल्कि विज्ञान के साथ इसका सह-संबंध विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करता है।
उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को और ऊंचा उठाते हैं।
सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्टाफ सदस्यों ने इस कार्यक्रम को अत्यंत लाभदायक बताया। कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। कार्यक्रम के अंत में इस्कान की ओर से विद्यालय के सभी विद्यार्थियों एवं स्टाफ को गीता सार की पुस्तक भेंट स्वरूप वितरित की गयी। कार्यक्रम का समन्वयन हिंदी शिक्षिका पूजा सिंह ने किया व विद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान के शिक्षक गोविंद नारायण सेन का विशेष योगदान रहा।
फोटो कैप्शन 03: नवोदय करीरा में गीता सार समझाते हुए राघव पंडित


एचपीवी वैक्सीन लगवाये अधिक से अधिक किशोरी-डा. रेनू
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कनीना की आवाज।
डा. रेणू वर्मा के दिशा निर्देश पर कनीना के उप-नागरिक अस्पताल पर ह्यूमन पपीलेमा वायरस/एचपीवी का वैक्सीन लगाया गया। यह वैक्सीन कैंसर से बचाव हेतु लगाया जाता है।
 विस्तृत जानकारी देते हुए एसएमओ डा. रेनू वर्मा उप-नागरिक अस्पताल ने बताया कि देश में एचपीवी की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा 28 फरवरी 2026 को की थी ताकि किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाए जा सके। जिन किशोरियों ने उम्र 14 वर्ष पूर्ण कर ली है और 15 वर्ष पूरी नहीं की है, उन्हें एचपीवी एक सामान्य संक्रमण बन जाता है जो महिला के  प्रजनन तंत्र को प्रभावित करता है। यही बाद में सर्विक्स कैंसर कैंसर बन जाता है। ऐसे में बचाव के लिए वैक्सीन मुफ्त लगाई जाती है। एचआई शीशराम ने बताया कि एचपीवी भविष्य में सर्विक्स कैंसर होने के खतरे को कम करता है। भारत में सर्विक्स कैंसर आमतौर पर दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है। यह भारत में ही नहीं अपितु 160 देशों में लगाया जा रहा है। टीके के दुष्प्रभाव बहुत कम और हल्के होते हैं। जहां टीका लगाया जाता है उसे जगह दर्द, हल्का बुखार, बदन दर्द हो सकते हैं। ये लक्षण डा. की सलाह से पेरासिटामोल लेने पर ठीक हो जाते हैं। टीकाकरण अभियान 3 माह में पूरा किया जाएगा जिसमें पात्र आयु वर्ग की प्रत्येक किशोरी को एक ही खुराक दी जाएगी। उन्होंने बताया कि टीकाकरण से पहले ओटीपी आधारित सहमति ली जाएगी और अभिभावकों से भी लिखित सहमति भी ली जाएगी। टीकाकरण की जानकारी यू-विन पोर्टल पर दर्ज की जाएगी, टीकाकरण के बाद डिजिटल प्रमाण पत्र भी जारी किया जाएगा जो पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए लिंक से डाउनलोड किया जा सकेगा। यह टीका किशोरियों के लिए मुफ्त होगा। आयोजित टीकाकरण में खंड विस्तारक शिक्षक सतीश कुमार, एलएचवी शारदा,एएनएम कविता व कांता ने भाग लिया तथा कुछ किशोरियों को वैक्सीन लगाई गई। फोटो कैप्शन 04: वैक्सीन लगाने की तैयारी करता स्टाफ






जतिन के 16वें जन्मदिन पर लगाए लगाए गए पौधे
-दो कनाल को पेड़ पौधों से किया जाएगा लैस-महेश
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कनीना की आवाज।
 कनीना के  जतिन बोहरा के 16वें जन्मदिन पर समस्त बोहरा परिवार के सदस्यों ने करीब दो कनाल में पौधारोपण किया। सभी ने शपथ ली कि भविष्य में परिवार के किसी सदस्य का जन्मदिन होगा तब यहां पौधारोपण किया जाएगा।
इस मौके कुलदीप बोहरा ने बताया कि हर इंसान को इस प्रकार का कदम उठाना चाहिए ताकि यह सारी धरती पेड़ पौधों से भर जाए और प्रदूषण का खतरा कम हो जाए। विश्वभर में एक ही सबसे बड़ी समस्या बन रही है जो प्रदूषण की है। इस पर काबू पाने का एकमात्र इलाज है पेड़ पौधे लगाना। कोई जरूरी नहीं है कि फलदार पेड़ पौधे ही लगाए जाए अपितु छायादार पेड़ पौधे भी लगाए जा सकते हैं।
 इस मौके पर जतिन बोहरा के पिता महेश बोहरा ने कहा कि उनकी योजना है कि अधिक से अधिक पेड़ पौधे दो कनाल भूमि पर लगाए जाएंगे ताकि फलों के साथ-साथ छाया और शुद्ध हवा मिल सके। जीवनभर इंसान पैसे कमाता है किंतु प्रकृति की ओर और अपने स्वास्थ्य की ओर बहुत कम ध्यान दे पता है। यदि प्रकृति की ओर ध्यान दिया जाएगा तो स्वास्थ्य अपने आप सुधर जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में यूं ही पेड़ पौधे लगाने के लिए यह जमीन निर्धारित कर दी है और खूब पेड़ पौधे लगाकर इसे हरा भरा बनाया जाएगा ताकि लोग देखने के लिए यहां आए। आने वालों को प्राप्त फलों द्वारा सत्कार किया जाएगा। उन्होंने अपनी आगामी योजना भी बताई। इस मौके पर जहां बड़े-बड़े आम, चीकू, जामुन बेलपत्र आदि के पौधे लगाए गए।
उधर मनोज कुमार रामबास और अजय कुमार इसराना ने बताया कि वे इस कार्यक्रम को पहले ही बढ़ते आ रहे हैं ताकि लोगों का रुझान पेड़ पौधों की ओर जाए। जिससे पेड़ पौधे भी लगे और खाने के लिए फल भी उपलब्ध हो सके। इस मौके पर जहां डा. गजेंद्र सिंह, विजयपाल बोहरा, अनिल कुमार, दीपक कुमार, अश्वनी कुमार, क्रिश बोहरा,चंद्र मोहन बोहरा, आशीष बोहरा, केशव बोहरा ने जतिन बोहरा के जन्मदिन पर उन्हें बधाई दी और पेड़ पौधों लगाने में उनका सहयोग दिया।
फोटो कैप्शन 5: जतिन बोहरा के जन्मदिन पर पौधारोपण करते हुए परिवार के सदस्य


कुकिंग गैस सिलिंडर के लिए मारामारी
-नहीं मिल रहे समय पर सिलिंडर  
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कनीना की आवाज।
 कनीना और आसपास क्षेत्रों में कुकिंग गैस सिलिंडर की मारामारी चलने लगी है। जब से विदेश में युद्ध चल रहे हैं तब से कुकिंग गैस की कमी झलकने लगी है। यहां तक की कामर्शियल सिलिंडर भी नहीं मिल रहे हैं। अगर यही हालत चलते रहे तो भविष्य में होटल, चाय विक्रेता तथा बर्गर एवं रेहडी आदि पर गैस सिलिंडर से काम करने वालों के कार्य ठप हो जाएंगे। यहां तक की घरेलू गैस सिलिंडर के लिए भी जो फोन निर्धारित किया गया है वह नहीं मिल पा रहा है। परिणाम यह है कि घरेलू गैस सिलिंडर भी बुक नहीं हो पा रहे हैं। किसी का कभी कभार बुक हो जाता है। उपभोक्ता बेहद परेशान है और ब्लैक में भी सिलिंडर लेने के लिए लोग तैयार हो रहे हैं परंतु हकीकत यह है कि सिलिंडर मिल नहीं रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या उन लोगों को आएगी जो छोटे-छोटे सिलिंडर भरवा रहे हैं। उनको या तो सिलिंडर  भरकर नहीं दिए जाएंगे या महंगे दामों पर दिये जाएंगे। कुछ समय से यही समस्या चली आ रही है। जहां घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ा दी है वही सिलिंडर भी नहीं मिल रहा है। एक और लोग सिलिंडर  की कीमत घटाने की मांग कर रहे थे वही अब सिलिंडर भी नहीं मिल पा रहे हैं। उपभोक्ता परेशान है और उन्होंने मांग की है कि हो सके तो सिलेंडर उपलब्ध करवाये जाए।





 नीलम देवी ने गौशाला में नए लोडर ट्रैक्टर का किया पूजन
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कनीना की आवाज।
नीलम देवी (लिली) ने आज अपनी गहरी गौभक्ति और सेवा-भावना का एक और सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने नये खरीदे लोडर ट्रैक्टर गौशाला में लाकर भगवान श्रीकृष्ण मंदिर में  विधि-विधान से पूजन किया।  
पूजन के दौरान उन्होंने मंदिर में प्रसाद एवं पुष्प अर्पित किए और गौशाला की सेवा हेतु 5,100 रुपए की भेंट भी दी।  
गौरतलब है कि नीलम देवी की गौसेवा में अटूट आस्था रही है। वर्तमान वर्ष में अब तक उन्होंने गौशाला को लगभग 3 लाख रुपए का उदार सहयोग प्रदान किया है, जिसके लिए गौशाला परिवार उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता है।  
गौशाला कार्यकारिणी ने कहा, नीलम देवी जैसी साधकों की सेवा-भावना ही हमारी प्रेरणा है। उनकी यह भक्ति और सहयोग गौ-संरक्षण के संकल्प को और मजबूत करता है।
इस शुभ अवसर पर गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव, सचिव यश कनीनवाल, सह-सचिव  रामपाल,  बलवान सिंह आर्य, श्री ओमप्रकाश आर्य , उप-प्रधान  दिलावर सिंह,  रामप्रताप, पूर्व पार्षद राजेंद्र, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, होशियार सत्संगी,  दुलीचंद, सतबीर गुगनवाला, युद्धवीर सिंह, सन्नी यादव सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: लोडर की श्रीकृष्ण गौशाला में पूजा करते हुए


सरसों की खरीद हो शुरू
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कनीना की आवाज।
बसपा के नेता अतरलाल एडवोकेट ने राज्य सरकार से सरसों की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि एक सप्ताह के अंदर अनाज मंडियों में सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई तो बसपा कार्यकर्ता मार्केट कमेटियों का घेराव करेंगे। अतरलाल ने कहा कि राज्य सरकार ने आगामी 28 मार्च से सरकारी खरीद शुरू करने की घोषणा की हुई है परन्तु अबकी बार गर्मी पहले शुरू होने के कारण सरसों की फसल 20 दिन पहले पककर तैयार हो गई। किसानों ने सरसों की फसल निकालनी शुरू कर दी है। यदि सरकार ने तत्काल सरकारी खरीद शुरू नहीं की तो किसानों को अपने सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बेचनी पड़ेगी। क्योंकि किसान को इस समय पैसे की ज्यादा जरूरत होती है। इसलिए उन्होंने अपनी फसल कम रेट पर बेचनी पड़ेगी तो उन्हें भारी नुकसान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर सरकारी खरीद देर से शुरू कर रही है। ताकि किसानों की ज्यादातर फसल पहले से ही बिक जाए। उन्होंने राज्य सरकार से अनाज मंडियों में सरकारी खरीद के पुख्ता प्रबन्ध करने की मांग भी की। उन्होंने कनीना, उन्हाणी की अनाज मंडी में एक और टीन शेड बनाने तथा सतनाली और महेन्द्रगढ़ की अनाजमंडियों में टीन शेड बनाने की मांग भी की। इस अवसर पर शेर सिंह यादव भागसिंह तंवर, दानसिंह प्रजापत, राकेश यादव, कैलाश सेठ आदि नेताओं ने विचार व्यक्त किए।


गर्मियों का होता है विशेष खानपान
-सेहत को बरकरार रखने के लिए ग्रामीण लोग है अग्रणी
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कनीना की आवाज।
 सेहत के दृष्टिगत विशेषकर गर्मियों में खानपान का ग्रामीण क्षेत्र के लोग विशेष ध्यान रखते हैं।  ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं कम होती है किंतु सेहत के प्रति उनका रवैया बेहतरीन देखने को मिलता है। गर्मियों के दिनों में जहां ठोस आहार कम काम में लिए लेते हैं वही तरल आहार अधिक से अधिक प्रयोग किया जाता है। गर्मियों के दिनों में रोटी के रूप में मेसी रोटी खाई जाती है। चना,गेहूं या जो आदि की बनी होती है। ऐसी रोटियां  ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी से प्रयोग करते हैं अपितु जब चने की पैदावार अधिक होती थी चने की रोटी खाते थे जो सेहत के लिए बहुत जरूरी है। यहां तक कि बासी मेसी रोटियां भी  राबड़ी के साथ विशेष खाद्य पदार्थ ग्रामीण क्षेत्रों का है।
 राबड़ी जो छाछ, जौ का आटा आदि हांडी में  पकाकर बनाया जाता है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो छाछ में बनाया जाता है तथा छाछ डालकर ही इसे प्याज और बासी रोटी के साथ खाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस मामले में कभी से राबड़ी प्रयोग करते आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी राबड़ी को नहीं भूलते। चाहे वर्तमान पीढ़ी कोल्ड ड्रिंक पीने लग गई और चाय अधिक सेवन करती है किंतु ग्रामीण बुजुर्ग राबड़ी को अहमियत देते हैं। इस वक्त गर्मियों के दिनों में धाणी एवं भुगड़ा नाम से विशेष खाद्य पदार्थ का खाते हैं। ग्रामीण लोग जौ को भुनवाकर धाणी तो चने को भुनवाकर भुगड़ा बनाते हैं जिनको गर्मी के दिनों में बड़े चाव से खाया जाता है। यहां तक कि कुछ लोग जौ की धाणी का सत्तू भी बनाकर पीते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां विशेष रूप से खरबूजा ,खरबूजा,ककड़ी एवं मतीरा आदि खाते हैं। यद्यपि मतीरा दिनों दिन लुप्त होते जा रहे हैं किंतु आज भी बुजुर्ग मतीरे को तरसते हैं। तरबूज से जहां पानी की प्यास बुझाते हैं कोई सेहत के लिए भी लाभप्रद है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र तरबूज पर विशेष ध्यान देते हैं। यहां तक कि आपस में कोई लड़ाई झगड़ा हो जाता है और सुलहनामा बनता है तो तरबूज ही घर लेकर आते  हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में ककड़ी तरबूज और खरबूजा आदि विशेष रूप से चाव से खाए जाते हैं।
ग्रामीण ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का प्याज का विशेष लगाव रहा है। यहां तक कि हर घर में नींबू रखते हैं जिससे शिकंजी पीते हैं तथा प्याज एवं कच्चे आम को भून कर खाते हैं ताकि गर्मी से बचा जा सके। गर्मी के खाद्य पदार्थों के बारे में राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, कृष्ण कुमार, दिनेश कुमार एवं सुनील कुमार आदि बताते हैं की बुजुर्ग पुराने खानपान को आज भी नहीं भूले हैं। सब्जियों के रूप में बुजुर्ग लोग खाटा का साग और कढ़ी के अतिरिक्त रायता बनाकर खाते हैं क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की कमी नहीं होती। यही कारण है दही को रायते में बदल देते हैं और खाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी एक दूसरे के घर से छाछ मुफ्त में उपलब्ध हो जाती है जिसमें काला नमक, भुना हुआ जीरा पुदीना आदि डालकर बड़े चाव से पिया जाता है। जब भी कोई मेहमान आता है तो उसको चाय की बजाए राबड़ी या छाछ का गिलास थमाते हैं जो खाने में बेहतरीन होता है। कसी शहर से आने वाले व्यक्ति भी बड़े चाव से लस्सी को पीते हैं, चाय को दूर भगाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खाने-पीने की आदतें अच्छी है। यहां तक कि मक्खन भी प्रयोग किया जाता है, दूध का भी सेवन किया जाता है किंतु हर घर में प्याज जरूर खरीदी जाती है जिसे वर्ष भर खाते हैं। प्याज का राबड़ी के साथ विशेष संबंध माना गया है। जब कभी धूप लग जाती है तो कच्चे आम को भुनकर ही उसका उपयोग किया जाता है।
गर्मी से बचना जरूरी,खान पान का रखे ध्यान-डा. मोरवाल
डा.जितेंद्र मोरवाल कनीना उप-नागरिक अस्पताल बताते हैं कि गर्मी बढ़ जाने से जहां 10 प्रतिशत तक मरीज बढ़ जाते हैं। जहां लू लगना, उल्टी, बुखार दस्त आदि की शिकायत बढ़ जाती है। धूप से बचना बहुत जरूरी है।
 कैसे बचा जाए तपन से-
डा. जितेंद्र मोरवाल बताते हैं की धूप से बचने का सबसे सरल उपाय है घर में छुपकर बैठे रहे। हवादार कमरे में रहे। यदि बाहर जाना पड़े तो पानी की बोतल साथ लेकर जाए तथा पूरे कपड़े शरीर पर पहने, हाथ पैर सर सभी ढके हुए होने चाहिए। पैरों में चप्पल जूते होने चाहिए ताकि गर्मी और तपन से बचा जा सके। इस दौरान तरल पदार्थ जैसे पानी, जूस, लस्सी ,दूध आदि अधिक प्रयोग करना चाहिए। जंक फूड से इस समय बचना चाहिए, ठोस भोजन कम से कम प्रयोग करना चाहिए। हो सके तो कूलर की हवा में बैठना चाहिए।  जब सुबह और शाम ताप कम हो जाए उस समय यदि कोई जरूरी काम हो तो बाहर निकलना चाहिए उनका कहना है कि गर्मी और नवतपा से धूप, लू लग जाती है, बुखार आ जाता है और इसमें बचाव में ही बचाव है। उन्होंने बताया घर पर ग्लूकोस वगैराह प्रयोग करें तथा साथ में ओआरएस का बनाकर रखे। ओआरएस घोल बनाना बहुत सरल है। नमक चीनी और थोड़ा सा नींबू का रस भी डाले तो बेहतरीन स्वाद का घोल तैयार हो जाता है। पानी अधिक से अधिक प्रयोग करें, शरीर में पानी की कमी ना आने दे।
फोटो कैप्शन : डा. मोरवाल


Wednesday, March 11, 2026



 

कुकिंग गैस सिलिंडर के लिए मारामारी
-नहीं मिल रहे समय पर सिलिंडर  
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कनीना की आवाज।
 कनीना और आसपास क्षेत्रों में कुकिंग गैस सिलिंडर की मारामारी चलने लगी है। जब से विदेश में युद्ध चल रहे हैं तब से कुकिंग गैस की कमी झलकने लगी है। यहां तक की कामर्शियल सिलिंडर भी नहीं मिल रहे हैं। अगर यही हालत चलते रहे तो भविष्य में होटल, चाय विक्रेता तथा बर्गर एवं रेहडी आदि पर गैस सिलिंडर से काम करने वालों के कार्य ठप हो जाएंगे। यहां तक की घरेलू गैस सिलिंडर के लिए भी जो फोन निर्धारित किया गया है वह नहीं मिल पा रहा है। परिणाम यह है कि घरेलू गैस सिलिंडर भी बुक नहीं हो पा रहे हैं। किसी का कभी कभार बुक हो जाता है। उपभोक्ता बेहद परेशान है और ब्लैक में भी सिलिंडर लेने के लिए लोग तैयार हो रहे हैं परंतु हकीकत यह है कि सिलिंडर मिल नहीं रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या उन लोगों को आएगी जो छोटे-छोटे सिलिंडर भरवा रहे हैं। उनको या तो सिलिंडर  भरकर नहीं दिए जाएंगे या महंगे दामों पर दिये जाएंगे। कुछ समय से यही समस्या चली आ रही है। जहां घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ा दी है वही सिलिंडर भी नहीं मिल रहा है। एक और लोग सिलिंडर  की कीमत घटाने की मांग कर रहे थे वही अब सिलिंडर भी नहीं मिल पा रहे हैं। उपभोक्ता परेशान है और उन्होंने मांग की है कि हो सके तो सिलेंडर उपलब्ध करवाये जाए।





वाटर सप्लाई केंद्र के सामने गड्ढे में भरा रहता गंदा पानी
-कुत्ते भी हगते मूतते हैं
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कनीना की आवाज।
 कनीना-रेवाड़ी सड़क मार्ग पर वाटर सप्लाई केंद्र समक्ष कई गड्ढों में वाटर सप्लाई का गंदा पानी भरा रहता है क्योंकि वाटर सप्लाई से पानी को छोडऩे के लिए जिस कुंजी का प्रयोग किया जाता है वह इन्हीं गड्ढे में लगी होती है। कुंजी के रिसाव होने से जल भरा खड़ा रहता है जिसमें गंदगी मिलती रहती है। वही कुत्ते हगते मूतते रहते हैं। परिणाम यह निकलता है कि जब नल सप्लाई बंद हो जाती है तो यही जल वापस कुंजी से होकर जल सप्लाई में प्रवेश कर जाता है। परिणाम गंदा पानी सप्लाई हो रहा है, बार-बार इस समय में शिकायत की जा चुकी है किंतु शिकायत का कोई असर नहीं हो रहा है।
 उपभोक्ता बेहद परेशान है। उपभोक्ता दिनेश कुमार, सुरेश कुमार, महेश कुमार, जितेंद्र आदि ने बताया कि वे इस समस्या के बारे में वाटर सप्लाई विभाग को कई बार जानकारी दे चुके हैं ताकि सुधार किया जा सके किंतु सुधार नहीं किया गया है। जिसके चलते उपभोक्ता गंदा पानी पीने को बाध्य हो रहे हैं। वैसे भी क्षेत्र में वायरस बीमारियां बढ़ रही है। उनमें गंदा पानी भी वायरल बीमारी फैलाने में कारगर साबित होगा।
 फोटो कैप्शन 07: वाटर सप्लाई केंद्र के समक्ष भरा हुआ गंदा जल



घरों के ऊपर से गुजरने वाली बिजली के लाइनें हटाई जाए
--तारों को इंसुलेटिड किया जाए या मोटी केबल लगाई जाए
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में अनेकों घरों एवं दीवारों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजर रही है। बिजली विभाग बेहतरीन फलदार और फूलदार पौधों की कटिंग कर जाता है। पेड़ पौधे लगाने वालों में रोष पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एचटी बिजली की लाइन आबादी से दूर से निकली जाए।
 एक और जहां हरियाणा सरकार ने भी यह बात कही है कि एचटी लाइन आबादी से दूर से निकाली जाए वहीं उच्च न्यायालय का भी यही आदेश है कि बिजली के लाइन घनी आबादी के बीच से न गुजरी जाए। यदि बिजली बोर्ड से संपर्क किया जाता है और बिजली के खंभों को शिफ्ट करवाने की बात कही जाए तो भारी खर्चा मांगा जाता है। खर्चा भी इतना कि आम आदमी उसे वहन नहीं कर पाता। यही कारण है कि बहुत से दीवारों और प्लाट टेढ़े मेढ़े बना दिए गए हैं क्योंकि बिजली विभाग में जिस भी खाली प्लाट में खंभे गाड़े वो अपनी मनमर्जी से गाड़ दिये। अब वे समस्या बनते जा रहे हैं। कनीना-रेवाड़ी मार्ग पर नहर कटान के पास कृष्ण कुमार, भरपूर सिंह, करतार सिंह, विजयपाल, होशियार सिंह आदि के प्लाट में एचटी लाइन गुजर रही है जो एक दीवार पर तीन पोल लगाकर मालिक के प्लाट का नक्षा ही बदल दिया है। इस संबंध में समाधान शिविर में भी यह बात रखी गई है किंतु कोई गौर नहीं किया गया है। पीएम पोर्टल पर शिकायत करने पर अधिकारी झूठी बातों से खानापूर्ति कर देते हैं।
  आश्चर्य तब होता है कि दो लाइन एक साथ गुजारी गई हैं। यदि एक को हटा दिया जाए तो सरकार का माल भी बच जाए और लोगों को राहत भी मिल जाए किंतु विभाग है कि टस से मस तक नहीं होता हे। अब प्रधानमंत्री को इस संबंध में इन अधिकारियों की बार बार शिकायत की जाएगी तथा आंदोलन चलाया जाएगा।
  भरपूर सिंह, कृष्ण कुमार, रोहित कुमार, योगेश कुमार, होशियार सिंह आदि ने बताया कि बिजली विभाग ने हद कर रखी है। प्लाट में ही पोल गाड़ दिये हैं। वो भी एक नहीं तीन-तीन पोल टेढ़ेे मेढ़े गाड़कर बेहद परेशान कर दिया है। डा. होशियार सिंह प्रधान ट्रस्ट ने बताया कि उनका ट्रस्ट कार्यालय इसलिए अधर में अटका पड़ा है कि पोल एवं तार उनके प्लाट से नहीं हटाये जा रहे हैं। चार फुट जमीन के अंदर पोल खड़े हैं।
  बिजली की तारे घरों के ऊपर से गुजर रही है जो बड़े हादसे को न्योता दे रही है। अनेकों दुर्घटनाएं घट चुकी है। परंतु विभाग लाइन व खंभों को शिफ्ट नहीं करता जिसके कारण कोई भी हादसा हो सकता है। ये बिजली के तार कभी भी टूट सकते हैं। एचटी की लाइन भी घरों के ऊपर से गुजर रही हैं या फिर घनी आबादी से भी बिजली की लाइन गुजर रही है। सभी को अविलंब हटा दिया जाए तो बड़ा हादसा होने से टाला जा सकता है। ऐसे कई दुकानदार और घरों के मालिक परेशान है। उनकी परेशानी को दूर करने का एकमात्र इलाज बिजली की लाइनों को शिफ्ट करना है। या फिर खंभे सीधे करने के उपरांत स्टे लगाकर घरों से दूर से लाइन गुजारी जाए।
बिजली की तारे घनी आबादी के पास से गुजरती हैं। घरों में बड़ी ही मेहनत से फलदार और फूलदार पौधे उगाई जाते हैं जो बड़े होते ही तारों के छूने से खतरा बन जाते हैं। एक तरफ बड़ा हादसा होने का खतरा बन जाता है वहीं बिजली विभाग इन पेड़ पौधों को कभी भी काट जाता है जिसके कारण बेहतरीन दर्जे के फलदार और फूलदार पौधे नष्ट हो जाते हैं। कस्बावासियों की मांग है कि बिजली के तारों को घरों के आसपास से हटाया जाए ताकि फलदार और फूलदार पौधे विकसित हो सके।
बिजली के खंभे मनमर्जी से खाली प्लाटों में गाड़ दिए गये जो अब इनको हटाना बहुत महंगा पड़ रहा है। विभाग इनको भारी राशि जमा करके ही शिफ्ट करता है। जिनकी पहुंच उच्च अधिकारियों तक नहीं है वह बेचारे परेशान होकर घरों में बैठ जाते हैं। जहां उच्च न्यायालय और हरियाणा सरकार ने भी बिजली के तारों को दूर शिफ्ट करने की मांग की बात कही है किंतु विभाग अभी तक शिफ्ट नहीं कर रहा है। अविलंब इन तारों को आबादी से दूर किया जाए।
 लोगों ने  मांग की है कि दो एचटी लाइन जो पास पास गुजर रही हैं जिनमें से एक का कोई लाभ नहीं है। यदि इसे हटा दिया जाए तो सरकार के बिजली के तार एवं पोल बच जाएंगे किंतु अधिकारी जानबूझकर उनको नहीं हटा रहे हैं। आबादी से थोड़ा दूर हटाकर उनको इंसुलेटिड किया जाए तो भी राहत मिल सकती है या फिर मोटी केबल लगाई जा सकती है। अब देखना है कि अधिकारी जागते हैं या नहीं। वरना आंदोलन किया जाएगा और प्रधानमंत्री को इन अधिकारियों के बारे में अवगत कराया जाएगा।
 फोटो कैप्शन 08: बिजली के तार घरों के ऊपर से गुजरते हुए या दीवार पर लगाये खंभे

चोर साहब के कारनामे 88
-चोर साहब ही नहीं उसका कुत्ता भी निभाता है दुश्मनी
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कनीना की आवाज
। चोर साहब के कारनामे पहले ही अनेक कडिय़ों में प्रकाशित हो चुके हैं। अब और अनेकों करनामे इकट्ठे कर लिए गए हैं जो भविष्य कडिय़ों के रूप में पढ़ाये जाएंगे लेकिन फिलहाल एक बड़ी अजीब घटना घटी है कि चोर साहब दुश्मनी नहीं निभा रहे अपितु चोर साहब का कुत्ता भी डा. होशियार सिंह से दुश्मनी निभा रहा है। दुश्मनी इस प्रकार की निभा रहा है कि चोर साहब और उसके परिवार ने कुत्ते को ट्रेंड कर रखा है। जब मेरे प्लाट के पास से गुजरते हैं तो उनका कुत्ता भी डा. होशियार सिंह के दरवाजे पर हग मूत जाता है। शायद चोर साहब से दुश्मनी और चोर साहब के कारनामे प्रकाशित करने का परिणाम है कि उसने अपने कुत्ते को ही ट्रेंड कर दिया। बहुत से ऐसे कारनामे सामने आए हैं जो भविष्य में समय रहते जरूर प्रकाशित किए जाएंगे। तब तक पढ़ते रहिए कनीना की आवाज ब्लाग को।




कुतरूं साहब के कारनामे-14
-कुतरूं की आईडी खोलकर तबादलों के आप्शन ही बदल दिए
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कनीना की आवाज।
कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने बतौर विज्ञान अध्यापक एवं प्राध्यापक 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया है। उन्होंने स्कूल, कालेज निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि दौरान करीब 35 विभिन्न स्कूल प्राचार्यों के साथ काम किया और उनमें से चंद कुतरूं प्राचार्य निकले। जिनका नाम लेते ही तन मन में दर्द होता है। जिनकी भावना हीन रही है। किसी के काम को रोकने आए हैं। सच का साथ नहीं दिया और उन्होंने सदा ही अच्छे और स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों का विरोध किया। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य के कारनामे सामने आये हैं। आज एक कारनामा यहां उजागर किया जा रहा है।
  शिक्षा विभाग में एक ऐसा ब्लैकमेलर, निकृष्ट कामचोर, अज्ञानी व्यक्ति भी हुआ है जो प्राचार्य के तलवे चाटता रहता था और प्राचार्य के तलवे चाट चाट कर खुद भी कुतरूं प्राचार्य बन गया। जिस प्रकार प्राचार्य बना वह सब फर्जीवाड़ा है परंतु यहां उसका एक कारनामा नहीं दो कारनामे दिये जा रहे हैं। हर प्राचार्य की स्कूल में आईडी होती है जिसके जरिए किसी भी कर्मचारी के आंकड़े देख सकता है।  हमारे एक साथी होते थे जो प्राध्यापक पद पर कार्यरत थे और आज भी शिक्षा विभाग में कार्यरत है।उन्होंने अपने तबादलों के आप्शन भर दिए और उन्हें खुशी थी कि उनका मनचाहा स्टेशन मिलेगा लेकिन वह नहीं मिला, उनसे सीनियर भी कोई नहीं था। उसने बाद में देखा कि उनके तो आप्शन है किसी ने बदल दिए। ऐसा उस कुतरूं प्राचार्य के उस ब्लैकमेलर साथी ने किया। बेचारा प्राध्यापक रोता रह गया और दूर दराज बदली हो गई। कौन सुनने वाला था। आज तक वो प्राध्यापक उस बात को नहीं भूल पाए हैं। चाहे कितना ही मेहनती इंसान हो लेकिन उस ब्लैकमेलर को नही सुहाता तो उसकी शिकायत करके जरूर तंग करता आया है ताकि ब्लैकमेलिंग कर सके।
 डाक्टर होशियार सिंह के साथ उसने इतना बड़ा कारनामा किया कि एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी लेकिन वो ब्लैकमेलर ननहीं कुतरूं प्राचार्य फंसता? हाोशियार सिंह शिक्षा विभाग में कार्यरत थे और  अपने मनचाहे स्टेशन पर कार्यरत थे। तभी कुतरूं प्राचार्य की आईडी खोलकर शिकायत और समस्या समाधान अपलोड की गई। बाकायदा उस समस्या को अपलोड होने पर रेफरेंस नंबर भी मिलते थे। जब भी कोई कर्मचारी दोबारा शिकायत करता तो उसको वह शिकायत पहले शो होती थी  आपने पहले भी शिकायत की हुई है। एक ऐसा वक्त वक्त आया जब शिक्षा विभाग में उल्टे सीधे तबादले हो गए थे। कर्मियों की मांग पर यह पोर्टल खोला गया था। एक बार डा. होशियार सिंह को सीनियरिटी नंबर नहीं मिले तो उन्होंने पोर्टल पर शिकायत करने की सोची। जब पोर्टल पर शिकायत करनी चाहिए तो उनके पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई कि उनकी तो कोई और भी शिकायत दर्ज है। आश्चर्य के होशियार सिंह के फर्जी साइन करके और एक शिकायत दर्ज करवा दी कि मैं इस विद्यालय में बोर हो चुका हूं। वैसे भी यह मेरे घर के पास का स्टेशन है। मैं यहां इस घर  घर के पास वाले स्टेशन पर नहीं रहना चाहता। मुझे कहीं दूर दराज भेजा जाए। नीचे होशियार सिंह के फर्जी साइन कर दिये।  जब समस्या सामने आई तो बड़ा आश्चर्य हुआ। होशियार सिंह ने कुतरूं प्राचार्य से कहा कि यह किसने शिकायत की है। मैं एफआईआर करवाता हूं। कुतरूं का चेहरा पीला पड़ गया और कहा कि नहीं यह मैंने नहीं की है। उन्होंने सौगंध खाई और बैताया कि प्रिंसिपल की आईडी से यह शिकायत अपलोढ़ की गई है।  कुतरूं प्रिंसिपल की आईडी खोलकर होशियार सिंह के पासवर्ड और आईडी ढूंढ कर शिकायत कर दी। कोई भी कर्मी अपने घर के पास रहने की बजाय दूर दराज क्यों जाना चाहेगा। जब होशियार सिंह को पता चला तो उन्होंने आनन फानन में एक और शिकायत लिखी कि यह शिकायत मैंने नहीं की। यह एप्लीकेशन मेरी नहीं है, मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं, फर्जी हस्ताक्षर करके और यह किसी ने अपलोड की है। तब उनका जवाब आया कि प्राचार्य की आईडी से यह शिकायत की गई है और आपके नाम से गई है। कुतरूं प्राचार्य को मैंने कहा कि इससे बुरी बात क्या हो सकती है, बस वह अवसर था की कुतरूं प्राचार्य के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाई जा सकती थी लेकिन कुतरूं प्राचार्य ने हाथ पैर जोड़कर कहा कि मुझे माफ कर दो। फर्जी शिकायत का उसने साफ नाम बता दिया कि यह ब्लैकमेलर ऐसा कर सकता है। पहले भी ऐसे इसने कई करनामे किए हैं। तब जाकर पता लगा कि दुनिया में कुछ कुतरूं प्राचार्य तो नाम के है। उनको तो शिक्षा विभाग में रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए। जितना जल्दी हो सके उन्हें शिक्षा विभाग से निकाल देना चाहिए, वरना इस समाज के लिए घातक साबित होंगे। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य एक नहीं कई मिल चुके हैं जिनके कारनामे यूं ही आगे प्रकाशित होते रहेंगे।


 विश्व किडनी दिवस -12 मार्च
गुर्दे की देखरेख करना बहुत जरूरी- डा. रितिका
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कनीना की आवाज।
एक इंसान जीवनभर स्वस्थ रहकर स्वर्गलोक गमन करें इसमें बड़ी खुशी होती है परंतु कुछ लोग अपने शरीर की देखरेख नहीं करते जिसके कारण विभिन्न रोगों से पीडि़त हो जाते हैं। कुछ व्यसनों के शिकार होते हैं जिसके कारण उनके विभिन्न अंग खराब हो जाते हैं। विशेषकर गुर्दे जिनमें एक है, जिन्हें किडनी नाम से जाना जाता है और गुर्दे की यदि सही देखरेख न की जाए विशेष कर जब उच्च रक्त बन जाता है, शुगर की बीमारी बढ़ जाती है उसे समय गुर्दे की अनेक समस्याएं बढ जाती है। धीरे-धीरे गुर्दा खराब हो जाता है और इंसान ऐसी स्टेज पर पहुंच जाता है कि केवल उन्हें डायलिसिस से ही कुछ दिनों तक बचाया जा सकता है। बार-बार यह प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। अंतत ऐसे व्यक्ति की मौत हो जाती है ऐसे में विश्व किडनी दिवस का अर्थ लोगों को स्वस्थ किडनी बनाए रखने के लिए जागरूक करना होता है।
 सरकारी अस्पताल में कार्यरत कनीना निवासी डा. रितिका का कहना है कि अद्भुत किडनी के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है। किडनी रोगों में उच्च रक्तचाप होना एक प्रमुख कारण है। यदि किडनी में किस प्रकार की खराबी आ जाती है, इंसान के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन जाती है। डाक्टर का कहना है कि दुनिया भर में 10 में से एक व्यक्ति किडनी की किसी बीमारी से पीडि़त होता है। भारत जैसे देश में भी 10 लाख लोगों मेंकम से कम 1000 लोग कम किडनी से पीडि़त मिलते हैं। किडनी की समस्या का प्रारंभ उपचार है परंतु जब अधिक समय बीत जाता है तो इसका भी कोई इलाज नहीं बचता।
 शरीर में दो किडनी होती है और दोनों किडनी रक्त से हानिकारक पदार्थ विशेषकर मूत्र को अलग करने का कार्य करती है। यदि शरीर में ये किडनी काम छोड़ जाए तो धीरे-धीरे खून में विषैले पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है और ऐसे समय में इंसान का जीना दूभर हो जाता है। स्वस्थ किडनी रखने के लिए इंसान को किडनी के समस्या नजर आए तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
 डा. रितिका के अनुसार स्वस्थ रहने के लिए गतिहीन जीवन शैली से बचे, संतुलित आहार ले, किडनी की जांच करवाएं, रक्तचाप उचित बनाए रखें,कम से कम 2 लीटर पानी पिये, तंबाकू आदि का सेवन नहीं कर,ें कुछ दवाइयां डाक्टर की सलाह के बगैर न ले। गुर्दे यदि स्वस्थ होंगे तो इंसान भी स्वस्थ रहेगा।
फोटो कैप्शन: डाक्टर रितिका


गौशाला में आया नया नंदी, किया अभिनंदन
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कनीना की आवाज।
 कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में एक थारपार नस्ल का नंदी करोली गौशाला से लाया गया। जिसका कनीना गौशाला में अभिनंदन किया गया।
 उधर नीलम देवी अपने नए लोडर का उद्घाटन करने हेतु गौशाला कनीना पहुंची और श्री कृष्णा मंदिर में माथा टेक लोडर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर नीलम देवी ने गौशाला को 5100 रुपए गौशाला को दान दिए।
 इस अवसर पर प्रधान भगत सिंह, बलवान सिंह आर्य, मास्टर रामप्रताप, सचिव यश यादव, सह सचिव रामपाल सिंह, दिलावर सिंह बाबूजी, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, दुलीचंद साहब और होशियार सिंह सत्संगी,उप प्रधान रविंद्र बंसल, ओमप्रकाश ठेकेदार, नितिन, तारावती, युद्धवीर सिंह, सतवीर गुगनवाला, राजेंद्र पार्षद, नीलम देवी आदि उपस्थित रहे।
 फोटो कैप्शन 5:कनीना गौशाला में नंदी का अभिनंदन करते हुए




बव्वा वाली माता की, की गई पूजा तथा बासौड़ा पर्व मनाया गया
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कनीना की आवाज।
 कनीना में सुबह सवेरे से ही बासौड़ा पर्व मनाया गया। विभिन्न स्थानों पर अन्न व पकवान अर्पित किए गए। सोमवार को भी बासौड़ा पर्व मनाया गया था। लगातार 3 तीन सप्ताह तक यह पर्व चलेगा। उधर बव्वावाली माता नाम से सुबह सवेरे महिलाओं ने माता मंदिर जाकर चूरमा का प्रसाद अर्पित किया। बासौड़ा व बव्वावाली माता का पर्व साथ-साथ चलते हैं। इस दिन जहां चूरमा अर्पित किया जाता है वही हर घर में चूरमा खाया जाता है। महिलाओं ने बताया कि रात के समय चूरमा बनाकर रखते हैं  जिसे अगली सुबह सवेरे माता मंदिर में अर्पित किया जाता है और खाया जाता है। पूरा परिवार चूरमा खाता है। यह भी बासौड़ा पर्व का एक पूरक पर्व है। उधर बव्वा में माता का मेला लगा। बाल उतरवाने की रिवाज पूर्ण किया गया। तीन सप्ताह तक यह मेला हर बुधवार को लगेगा।
 फोटो कैप्शन 04: बव्वा वाली माता का प्रसाद अर्पित करने जाते हुए महिलाएं


बेटी के जन्मदिन पर मनोज कुमार रामबास ने किया पौधारोपण, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
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कनीना की आवाज।
  समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से रामबास गांव के निवासी मनोज कुमार रामबास ने अपनी बेटी गुंजन के जन्मदिन के अवसर पर पौधारोपण कर एक सराहनीय पहल की। इस अवसर पर उन्होंने  स्कूल तथा मंदिर परिसर के बहारी मुख्य रस्ते पर सुंदरता के पौधे अशोका के लगाए।
मनोज कुमार रामबास ने बताया कि आज के समय में बढ़ते प्रदूषण और घटते पेड़ों को देखते हुए हर व्यक्ति को अपने जीवन के खास अवसरों पर पौधे लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हर व्यक्ति अपने परिवार के जन्मदिन, वर्षगांठ या अन्य खुशियों के अवसर पर एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे तो पर्यावरण को काफी हद तक सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि गांव में प्रत्येक शुभ अवसर पौधारोपण की मुहिम अपना रखी है , गाव के सामूहिक प्रयास से फलदार पौधों का बाग भी सार्वजनिक जगह पर तैयार हो रहा है
गाव के पशु अस्पताल में फलदार पौधे जन्मदिन व अन्य शुभ अवसर पर ही लगाये गये हैं।
 ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह की पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है और इससे लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है।
ग्रामीणों ने सभी से अपील की कि वे भी अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों पर पौधारोपण करें और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।
फोटो कैप्शन 02:बच्ची के जन्म दिन पर  पौधारोपण करते हुए


अगिहार स्कूल में मनाया गया धूम्रपान निषेध दिवस
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कनीना की आवाज।
लीगल लिटरेसी क्लब अगिहार के तत्वावधान में विद्यालय के प्रांगण में बुधवार को तंबाकू निषेध दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य पूनम यादव ने की विद्यालय के लीगल लिटरेसी क्लब के प्रभारी एवं अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक ने विद्यार्थियों को नशा मुक्ति तथा धूम्रपान से होने वाली हानियों के बारे में  विस्तार से बताया। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने परिवार तथा गांव के अतिरिक्त आसपास के वातावरण को नशा मुक्त बनाएं,आजीवन नशे से दूर रहें तथा एक स्वस्थ दिनचर्या अपना कर एक सुंदर समाज का निर्माण करें।
    इस अवसर पर विद्यालय के प्रवक्ता अजय कुमार बंसल, राजेंद्र कटारिया, कैलाश देवी, पूनम कुमारी, शशि कुमारी, राकेश कुमार,मुख्य शिक्षक रतनलाल व प्रीतम सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: धूम्रपान निषेध की जानकारी देते हुए।




खेड़ी में लड़की का घोड़ी पर निकाला बनवारा
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव खेड़ी तलवाना निवासी श्री सूबे सिंह ने अपनी सुपुत्री मोनिका के विवाह समारोह के दौरान एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल की। उन्होंने सामाजिक परंपरा से अलग हटकर अपनी बेटी मोनिका को घोड़ी पर बनवारा दिलाकर समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया।
आमतौर पर यह रस्म बेटों के साथ जुड़ी मानी जाती है, लेकिन सूबे सिंह के इस कदम ने लड़का-लड़की के बीच भेदभाव खत्म करने और बेटियों को समान अधिकार देने का संदेश दिया है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी सोच समाज में बेटियों के सम्मान और समानता को बढ़ावा देती है।
गांव और आसपास के क्षेत्र में यह पहल चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
 सूबे सिंह ने बताया कि उनकी पुत्री मोनिका एमएससी करने के बाद बीएड कर रही है तथा उनकी शादी फरीदाबाद 12 मार्च को होने जा रही है। उनका शौहर राजस्व विभाग में पटवारी के पद पर कार्यरत है।
फोटो कैप्शन 01: लड़की का बनवारा निकालते हुए











श्री कृष्ण गौशाला कनीना के नंदी बाड़े में एक और नंदी शामिल, नस्ल सुधार कार्यक्रम को मिला बल
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कनीना की आवाज। श्री कृष्ण गौशाला कनीना में गौवंश के संरक्षण और नस्ल सुधार के उद्देश्य से शुरू किया गया कार्यक्रम निरंतर गति पकड़ रहा है। इसी कड़ी में आज गौशाला के नंदी बाड़े में एक स्वस्थ एवं उत्तम नस्ल का युवा थारपारकर नंदी शामिल किया गया। यह नंदी गौशाला कारोली से लाया गया है। इससे पहले भी कारोली गौशाला से एक नंदी लाया जा चुका है जो पूर्णत: स्वस्थ है और गौशाला में अच्छी तरह से अनुकूलित हो चुका है। नए नंदी के गौशाला पहुंचने पर गौभक्तों ने फूलमालाओं से उसका अभिनंदन किया तथा गुड़ और हरा चारा खिलाकर विधिवत उसे नंदी बाड़े में शामिल किया। गौशाला प्रबंधन का मानना है कि इससे गौवंश की उत्तम नस्ल के संवर्धन में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
       इसी दौरान श्रीमती नीलम देवी (लिली) अपने नए लोढऱ ट्रैक्टर को शुभ गौ-आशीर्वाद के लिए गौशाला लेकर पहुंचीं। उन्होंने गौशाला स्थित भगवान श्री कृष्ण मंदिर में पुष्प और प्रसाद अर्पित कर ट्रैक्टर का विधिवत पूजन किया। इस शुभ अवसर पर उन्होंने गौशाला को 5100 रुपये की भेंट भी प्रदान की। नीलम देवी की गौसेवा के प्रति गहरी आस्था है और उनके द्वारा इस वर्ष अब तक लगभग 3 लाख रुपये का सहयोग गौशाला को दिया जा चुका है। गौशाला कार्यकारिणी ने उनके इस निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव, सचिव यश कनीनवाल, सहसचिव रामपाल, बलवान सिंह आर्य, ओमप्रकाश आर्य, उपप्रधान दिलावर सिंह, मास्टर रामप्रताप, राजेंद्र (पूर्व पार्षद), नीलम देवी, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, होशियार सत्संगी, दुलीचंद साहब, हरीश कनीनवाल, सतबीर गुगनवाला, युद्धवीर सिंह, सन्नी यादव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
गौशाला पदाधिकारियों ने कहा कि गौवंश संरक्षण, नस्ल सुधार और गौसेवा के कार्य में समाज के सहयोग से ऐसे प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेंगे।

 

शादी समारोह में डा ओम प्रकाश पूर्व  मंत्री ने की शिरकत                                               ****************************************************
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कनीना की आवाज।
कनीना निवासी दिव्या पुत्री डॉ नरेंद्र  बोहरा की शादी में डॉक्टर ओम प्रकाश पुरव मंत्री ने शिरकत की और वर वधु को आशीर्वाद दिया डॉ ओमप्रकाश यादव का कनीना निवासी सत्यवीर सिंह बोहरा के पुराने साथी रहे हैं इसलिए उनके परिवार में दिव्या की शादी समारोह में पहुंचे इस मौके पर डॉक्टर ओमप्रकाश के अनेक वर्कर शामिल हुए जिन्होंने उनका अभिनंदन किया इस मौके पर डॉक्टर यादव ने कहा कि डॉक्टर नरेंद्र और सत्यवीर सिंह उनके बहुत करीबी रहे हैं किंतु आज वे दोनों स्वर्गवासी है। इस मौके पर मुकेश नंबरदार दीपक चौधरी विनय एडवोकेट कुलदीप बोहरा महेश बोहरा मोहन सिंह पार्षद सवाई सिंह पार्षद राजकुमार पार्षद मनीष पार्षद  अश्विनी  पूर्व प्राध्यापक अशोक ठेकेदार सतीश जांगिड़ सूबे सिंह अजीत कुमार आदि मौजूद रहे।

Tuesday, March 10, 2026



 

खेड़ी में लड़की का घोड़ी पर निकाला बनवारा
---शादी 12 मार्च की
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव खेड़ी तलवाना निवासी श्री सूबे सिंह ने अपनी सुपुत्री मोनिका के विवाह समारोह के दौरान एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल की। उन्होंने सामाजिक परंपरा से अलग हटकर अपनी बेटी मोनिका को घोड़ी पर बनवारा दिलाकर समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया।
आमतौर पर यह रस्म बेटों के साथ जुड़ी मानी जाती है, लेकिन सूबे सिंह के इस कदम ने लड़का-लड़की के बीच भेदभाव खत्म करने और बेटियों को समान अधिकार देने का संदेश दिया है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी सोच समाज में बेटियों के सम्मान और समानता को बढ़ावा देती है।
गांव और आसपास के क्षेत्र में यह पहल चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
 सूबे सिंह ने बताया कि उनकी पुत्री मोनिका एमएससी करने के बाद बीएड कर रही है तथा उनकी शादी फरीदाबाद 12 मार्च को होने जा रही है। उनका शौहर राजस्व विभाग में पटवारी के पद पर कार्यरत है।
फोटो कैप्शन 07= लड़की का बनवारा निकालते हुए





अंतर्राष्ट्रीय विवाद सप्ताह 2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री का किया सम्मान

--रमन प्राचार्य की मुख्यमंत्री ने प्रशंसा की
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कनीना की आवाज।
कबीर भवन चंडीगढ़ में आयोजित भारत अंतर्राष्ट्रीय विवाद सप्ताह 2026 के अवसर पर आयोजित एक संवादात्मक सत्र में मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार नायब सिंह सैनी का रमन शास्त्री प्राचार्य एवं अन्य ने सम्मान किया। यह सत्र 7 मार्च से शुरू हुआ था।
अनुसूचित समाज की समस्याओं के निदान हेतु मुख्यमंत्री ने डिप्टी स्पीकर कृष्ण मिड्ढा, मनोज कुमार प्रोफेसर व रमन शास्त्री प्राचार्य के नेतृत्व में समाज के गणमान्य लोगों की समस्याएं सुनी और उन सभी का का मौके पर ही निदान करवाया।   मुख्यमंत्री व कृष्ण मिड्ढा का मनोज व रमन शास्त्री व समाज के लोगों ने फूलमालाओं  व पगड़ी पहनाकर अभिनन्दन किया। रमन शास्त्री ने सभी का आभार व धन्यवाद किया। मुख्यमंत्री ने रमन शास्त्री एवं अन्य का आभार जताया।
फोटो कैप्शन 06: रमन शास्त्री मुख्यमंत्री का सम्मान करते हुए




नवाचार आधुनिक शिक्षण अधिगम और उपचारात्मक शिक्षा के साथ बच्चों की मानसिक , बौद्धिक विकास में सहायक- वीरेंद्र जांगिड़

---एसएमसी की बैठक संपन्न
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कनीना की आवाज। 
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में  एसएमसी बैठक का आयोजन एसएमसी प्रधान विकासचंद एवं राहुल की संयुक्त अध्यक्षता में किया गया।
इस मौके पर बैठक में पहुंचे अनेक ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने विद्यालय परिसर में  साफ- सफाई, अनुशासन, शैक्षिक व्यवस्था, दोपहर मध्यांतर भोजन व्यवस्था की गुणवत्ता और पौष्टिकता आदि का निरीक्षण किया। विद्यालय प्रबंधन की इस व्यवस्था को देखकर वह उत्साहित नजर आए उन्होंने कहा कि विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था उत्तम और श्रेष्ठ है जिसकी सर्वत्र प्रशंसा होती हैं खण्ड स्तर पर विद्यालय की अपनी पहचान है।
 मौलिक मुख्याध्यापक  वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने सभी के आगंतुकों को विधार्थियों की शैक्षिक प्रगति रिपोर्ट और पाठ्यक्रम आधारित नवीनतम क्रियाकलापों आदि  प्रस्तुत की और बताया कि मुख्यमंत्री सौन्दर्य करण स्कीम के अंतर्गत यह विद्यालय खंड स्तर पर प्रथम रहा है। उन्होंने पाठ्यक्रम आधारित सभी गतिविधियों को विस्तार से बताया और विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए सभी नवीनतम माडल जो नवाचार आधुनिक शिक्षण अधिगम और उपचारात्मक शिक्षा के साथ बच्चों की मानसिक , बौद्धिक विकास में सहायक होते है । उन्होंने उपस्थित सदस्यों से प्रार्थना की कि ग्रामीण ज्यादा से ज्यादा नामांकन आपके गांव के सरकारी विद्यालय में करवाये  विद्यालय में गुणवत्ता पूर्ण और संस्कारवान शिक्षा का केंद्र है  कक्षा 6 से 8 तक के सभी विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जो की अपने आप में एक अनूठी मिसाल है। इसके लिए सभी अध्यापकों का आभार व्यक्त किया और प्रवेश उत्सव का भी निमंत्रण दिया। इस अवसर पर सुनील कुमार, मनवीर सिंह तंवर ,सुनील कुमार, देवेंद्र कुमार, राजेश कुमार ,भगत सिंह, गरिमा रानी ,विकास चंद प्रधान, राहुल प्रधान ,सूबे सिंह पूर्व प्रधान ,सतपाल साहब, राजकुमार पंच,धर्मवीर ठेकेदार सतबीर, तारामणि देवी,पिंकी देवी, बबली देवी, माया देवी, ललिता देवी ,मंजू देवी, धर्मा देवी ,लाली देवी, मोनिका देवी, रूपकला देवी, कौशल्या देवी,बबिता देवी,मुन्नी देवी आदि सम्मानित जन उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 01: एसएमसी बैठक में भाग लेते हुए ग्रामीण।





राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुंदरह में विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन
- नन्हें वैज्ञानिकों ने माडलों के माध्यम से दिखाया अपना हुनर
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कनीना की आवाज।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय  सुंदरह में वार्षिक विज्ञान प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न विषयों पर शानदार वर्किंग माडल प्रस्तुत किए।
छात्रों ने डाई बेस , इलेक्ट्रोस्कोप, प्रकाश संश्लेषण , मैग्नेटिक पेन स्टैंड , टर्मरिक पेपर, गोताखोर , पूर्णांकों का जोड़ एवं घटा , गोनोमीटर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित प्रोजेक्ट्स दिखाए। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में जिज्ञासा पैदा करना और उन्हें सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक रूप में लागू करने के लिए प्रेरित करना था। सर्वश्रेष्ठ माडलों का चयन करने के लिए जूरी द्वारा मूल्यांकन किया गया, जिससे छात्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना देखने को मिली ।
कार्यक्रम के दौरान स्कूल के प्रधानाचार्य  बाबूलाल जी ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करती हैं।
 इस सारे कार्यक्रम को विज्ञान शिक्षिका मंजू यादव ने संचालित किया । इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी महानुभावों ने विज्ञान शिक्षिका की कार्य प्रणाली की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।
फोटो कैप्शन 02: विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए




 कालेज में पढऩे वाली लड़की गुम, गुमशुदगी का मामला दर्ज

--एक व्यक्ति पर उसे छुपाने का मामला दर्ज
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कनीना की आवाज।
 कनीना उप-मंडल के एक गांव से कालेज में पढऩे गई लड़की गुम हो गई। लड़की के पिता ने मामला दर्ज करवाया है।
उन्होंने पुलिस में कहा है कि उसकी लड़की पढऩे के लिए कालेज में गई थी किंतु वापस नहीं आई। आसपास तलाश की गई किंतु कहीं नहीं मिली। उन्होंने राज नामक लड़के पर शक जाहिर किया कि उसने कहीं उसे छुपा रखा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।


निकिता ने पाया विश्वविद्यालय में आठवां स्थान, कालेज में खुशी का माहौल

--उन्हाणी कालेज की है छात्रा
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कनीना की आवाज।
राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हानी की छात्रा निकिता पोता निवासी ने इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर  द्वारा आयोजित बीएससी पांचवें सेमेस्टर की विश्वविद्यालय परीक्षा में आठवां स्थान प्राप्त कर महाविद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डा. विक्रम सिंह ने इस उत्कृष्ट उपलब्धि पर छात्रा व प्राध्यापकों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता उसकी निरंतर मेहनत, अनुशासन एवं समर्पण का परिणाम है। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय का शैक्षणिक माहौल पूरे जिले में अग्रणी  है जिसके परिणामस्वरूप हर वर्ष महाविद्यालय की छात्राएं विश्वविद्यालय की मेरिट सूची में स्थान प्राप्त कर रही हैं। यहां सभी प्राध्यापक लगन और मेहनत से शिक्षण का कार्य कर रहे हैं जिससे इस प्रकार की उपलब्धि महाविद्यालय प्राप्त कर रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यहां की छात्राएं भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर महाविद्यालय एवं अपने परिवार का नाम रोशन करती रहेगी।
फोटो कैप्शन: निकिता


कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-14 कड़ी पढ़े 11 मार्च को
-कुतरू की आईडी खोलकर तबादले के आप्शन ही बदल दिये



कनीना की आवाज ब्लाग से न उठाये कोई समाचार
-वरना कापीराइट के तहत होगा मामला दर्ज
-आरएनआई द्वारा है रजिस्टर्ड
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कनीना की आवाज।
कनीना की आवाज नमक ब्लाग आरएनआई द्वारा  रजिस्टर्ड समाचार पत्र है। इससे यूं की यूं खबर को उठाकर कुछ लोग अनजाने में ग्रुप में डाल देते हैं जो कापीराइट का उल्लंघन है। कहने को तो अज्ञानता कहेंगे लेकिन कानून के सामने अज्ञानता का कोई बहाना नहीं होता। ऐसे में ऐसी गलती दो-तीन बार कुछ लोग कर चुके हैं जो डा. होशियार सिंह यादव कापीराइट अधिकारी द्वारा देखी जा चुकी हैं। भविष्य में अगर कोई ऐसी गलती करेगा चाहे वह जाने या अनजाने में हुई उसके खिलाफ कापीराइट के तहत मामला दर्ज करवाया जाएगा। इसके लिए ग्रुप एडमिन भी जिम्मेवार होगा। कनीना की आवाज ब्लाग की खबर को कापी करके कहीं प्रयोग न करें, सावधानी बरते अन्यथा अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
 कापीराइट मामले में सजा
-अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की कैद और 50,000 रुपए से 2 लाख रुपए तक के जुर्माने तक हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर सजा बढ़ जाती है, और इसमें गैर-जमानती और संज्ञेय  अपराध माना जाता है, जिसमें अवैध सामग्री और उपकरणों को जब्त भी किया जा सकता है।
सजा के मुख्य प्रावधान (भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार)
    धारा 63:पहली बार उल्लंघन करने पर कम से कम 6 महीने की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 लाख रुपएतक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63 (दोबारा उल्लंघन): दूसरी बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 साल की कैद और 1 लाख रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 रुपए लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63बी(कंप्यूटर प्रोग्राम का उल्लंघन): कंप्यूटर प्रोग्राम की उल्लंघनकारी प्रति का जानबूझकर उपयोग करने पर कम से कम 7 दिन की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
    अन्य दंड:उल्लंघन करने वाली प्रतियां और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए जा सकते हैं, और कापीराइट मालिक सिविल मुकदमे के जरिये मौद्रिक हर्जाना भी मांग सकता है।




साल में दो विज्ञापन भी नहीं देने वाले समाचार न भेजे
- अखबार का आदेश है विज्ञापन देने वालों की खबरें लगे अधिक से अधिक
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कनीना की आवाज।
लंबे समय से डा. होशियार सिंह यादव पत्रकारिता में जुटा हुआ है। सुबह से रात 11 जाते हैं तब जाकर पत्रकारिता पूर्ण होती है किंतु न तो समाचार पत्र एक रुपया भी देता और न ही लोग विज्ञापन देते। साल में अनेक समाचार छपने के बाद भी जब विज्ञापन का वक्त आता है तब कोई विज्ञापन नहीं दिया जाता, जिससे अखबार नाराज है और ऐसे पत्रकार जो विज्ञापन नहीं देते उनको हटाने का निर्णय ले लेता है। ऐसे में जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाए वो कृपया मेरे पास/डा. होशियार सिंह यादव के पास समाचार प्रकाशन हेतु न भेजे। इसे कड़ाई से पालन किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई समाचार भेजता है तो स्वयं जिम्मेदार होगा और वे प्रकाशित नहीं होंगे। अपने घर से कंप्यूटर, बिजली, नेट खर्चा, भाग दौड़ करनी पड़ती है वहीं बच्चों से दूर रहना पड़ता है। उस पर भी एक रुपए भी जेब में नहीं आता और खर्चा बढ़ता ही चला जाता है। एक और परिवार वाले नाराज वहीं अखबार वाले नाराज क्योंकि कुछ लोगों की आदत बन गई है कि समाचार के समय तो कहेंगे बड़े-बड़े समाचार छाप दो और विज्ञापन के नाम पर कहेंगे सोचेंगे, देखेंगे या फिर फोन नहीं उठाते, फोन बंद कर लेते हैं।  ऐसे में ऐसे व्यक्ति जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाते वो कृपया माफ करें, समाचार भविष्य में न भेजे। केवल वही व्यक्ति भेजें जिन्होंने कुछ विज्ञापन दिया है या मेरी किसी क्षेत्र में मदद की है ताकि उनका खर्चा में स्वयं वहन कर सकूं। सबसे बड़ी बात है कि अखबार के निर्देशानुसार एक विज्ञापन कम से कम 10 हजार का देने वालों के छह माह समाचार प्रकाशित होंगे, दो विज्ञापन देने वालों के पूरे साल समाचार प्रकाशित होंगे। अधिकतम दिन में एक समाचार प्रकाशित करवा सकता है वह भी स्वयं टाइप करके भेजना होगा। यदि साल में 20000 तक का विज्ञापन देता है उनके लिए यह सुविधा एक साल चलती रहेगी। समाचारपत्रों का कहना है कि उन लोगों पर समय बर्बाद ना करें जो विज्ञापन नहीं देते। एक और मजबूरी है दूसरी और विज्ञापन देना जरूरी है। शायद कनीना क्षेत्र के प्रतिदिन 10 बड़े समाचार अकेले मेरे प्रकाशित होते हैं लेकिन इस होली पर महज एक छोटा सा विज्ञापन मिला जिनसे उम्मीद थी वो कल देंगे, फिर देंगे, आगे देंगे करते-करते होली भी टाल दी। अब ऐसा नहीं होगा। केवल क्राइम के समाचार और उन लोगों के समाचार प्रकाशित होंगे जो विज्ञापन देते हैं या ऐसे व्यक्तित्व जो वास्तव में समाज के लिए  उदाहरण बने हुए हैं।












गर्मी आते ही घड़ों की ओर रुझान बढ़ा
-देशी फ्रिज नाम से जानते हैं लोग
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कनीना की आवाज। यूं तो गर्मी आने पर फ्रिज का लोग जमकर उपयोग करते हैं किंतु बुजुर्ग एवं ग्रामीण लोगों का रुझान आज भी घड़ों की ओर है। यद्यपि घड़े बनाने में घंटों का समय लगता है किंतु इनमें पानी स्वास्थ्य अनुकूल माना जाता है। यही कारण है कि बीमारियों से और फ्रिज से छुटकारा पाने के लिए आज भी लोग घड़ों का पानी प्रयोग करते हैं।
घड़ा बनाने वाले महिपाल सिंह,दिनेश कुमार ने बताया कि आज के दिन कनीना एवं आस पास क्षेत्रों की माटी से घड़े नहीं बनाए जाते बल्कि माटी भी नांगल चौधरी, भिवानी तथा दूर दराज गांवों से खरीदकर लानी पड़ती है जिससे घड़े बनाए जाते और उन्हें सूखाकर, पकाया जाता है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में आवे(घड़े पकाने की भट्ठी) पाई जाती है। घड़े ही नहीं अपितु समय-समय पर दीपक, सुराही, छोटी मटकी तथा अनेक अन्य मिट्टी के उपकरण तैयार किए जाते हैं जिन्हें भ_ी में पकाया जाता है। घड़ों की कीमत दिनों दिन बढ़ती जा रही है। वर्तमान में एक घड़ा 100-125 रुपये का मिलता है। उधर घड़े का पानी पीने वाले राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, कृष्ण कुमार, सत्यराज
आदि ने बताया कि उनके वक्त कभी फ्रीज नहीं होते थे। महज घड़ों का ही पानी ठंडा रहता था जिसे पीकर लंबे समय तक स्वस्थ रहते थे। आज घड़ों की बजाय फ्रीज, कुल्फी, आइसक्रीम आदि पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। कोरोना महामारी के कारण फ्रीज एवं ठंडे खाने पसंद नहीं किये गये किंतु कोरोना समाप्त होने के बाद आज तक देशी फ्रिज की मांग बढ़ी है।
डा. वेद, डा अजीत कुमार आदि ने बताया कि घड़ों का पानी स्वास्थ्य के लिए ज्यादा उचित रहता है। फ्रिज का पानी पीना नुकसानदायक है, ऐसे में उनका कहना है कि घड़ों का पानी ही पीना चाहिए और आने वाले समय में फिर से घड़ों की मांग होगी। वर्तमान में घड़े बनाने वाले त्वरित गति से घड़े बना रहे हैं। घड़ों के अतिरिक्त छोटे-छोटे घड़े, सुराही, मटकी, पौधे उगाने वाले गमले आदि भी बनाए जाते हैं।