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Tuesday, February 17, 2026



 



कनीना नगर पालिका के उप चुनाव की होने लगी है चर्चाएं
-वार्ड 14 से होना है उपचुनाव, फोटोयुक्त पहचान पत्रों का रिविजन का कार्य शुरू
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कनीना की आवाज।
नगर पालिका कनीना के यूं तो प्रधान एवं उप प्रधान पहले ही बन चुके हैं। नगर पालिका अपना कार्य विधिवत रूप से कर रही थी कि अचानक वार्ड 14 के पार्षद राजेंद्र लोढ़ा की मौत के बाद एक बार फिर से कनीना के वार्ड 14 की तरफ लोगों की नजरें टिक गई है। यहां निकट भविष्य में उपचुनाव होने वाले हैं क्योंकि वार्ड 14 का पार्षद नगर पालिका प्रधान का ससुर था। एक बबाार फिर से फोटोयुक्त पहचानपत्रों के रिविजन का कार्य 17 फरवरी  से 27 फरवरी तक चलेगा और अंतिम प्रकाशन 27 मार्च 2026 को होगा। इसके बाद ही उप-चुनाव संभव हो पाएंगे। हरियाणा चुनाव आयोग के अनुसार टोहाना, झज्जर,  राजौंद, तरावड़ी,सढौरा और कनीना नगरपालिकाओं आदि का उप चुनाव होना है।  जिनके कारण नगर पालिका में बहुमत बना हुआ था और प्रधान एवं उप प्रधान बने थे। अब लोगों की नजरें वार्ड 14 पर टिक गई है और कई नए और पुराने चुनाव लडऩे वाले इस चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।  वार्ड 14 से पहले चुनाव लड़ चुके ऐसे पूर्व पार्षदों के मैदान में उतरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वार्ड 14 एक नया वार्ड पहली बार चुनाव इस बार के चुनावों में बनाया गया था। बीते चुनावों से पहले कनीना नगर पालिका के 13 वार्ड होते थे। पहली बार चुनाव में वार्ड 14 बनाया गया था  जिसमें अधिकांश लोग रेवाड़ी, गाहड़ा आदि सड़क मार्ग पर बसे हुई वोटर हैं। क्योंकि 6 महीने के अंदर उपचुनाव होने की संभावना है और जल्द ही यह माना जा रहा है चुनाव होंगे। उसके लिए चुनाव लडऩे वालों की तैयारी भी शुरू हो गई है।
  मिली जानकारी अनुसार 9 जनवरी को प्रदेश सरकार ने चुनाव आयोग से कुछ परिषदों के चुनाव एवं उप चुनाव कराने की अनुमति मांगी थी जिस पर चुनाव आयोग ने अनुमति भी दे दी है। अब यह देखना है कि इतना उपचुनाव कब होते हैं और कितने लोग चुनाव मैदान में उतर पाते हैं। कनीना में अभी से इस उप चुनाव के लिए वोट मांगने की कार्रवाई संभावित चुनाव लडऩे वालों ने शुरू कर दी है। इस बार उप चुनावों में जीत के लिए कड़ा संघर्ष करना होगा चूंकि एक अनार सौ बीमार वाली कहावत लागू होगी।
फोटो कैप्शन: नगरपालिका कनीना

    
खाटू श्याम के लिए रवाना होने लगे हैं भक्त
-निशान लेकर जाते हैं खाटूधाम
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कनीना की आवाज।
 4 मार्च के खाटू श्याम में लगने वाले फाल्गुन एकादशी के मेले के दृष्टिगत भारी संख्या में भक्तजन रवाना होने लगेे हैं। दूर दराज से खाटू की ओर निशान लेकर जाने का सिलसिला चंद दिनों तक जारी रहेगा।
  यूं तो खाटू श्याम मेले के दृष्टिगत ध्वज लेकर पदयात्रा पर एक के बाद एक समूह रवाना होने लगा है तथा उनके लिए जगह जगह शिविर स्थापित किए जा रहे हैं। कनीना से करीब चार दिनों में खाटू धाम पहुंचते हैं।
  इस संबंध दिनेश कुमार का कहना है कि वे विगत छह वर्षों से खाटू श्याम जाकर ध्वज अर्पित करते हुए आया है। उनकी कोई मनोकामना नहीं है। अपितु उनके दिल में श्रद्धा एवं भक्ति भरी है जिसके चलते व्यस्त समय में से समय निकालकर खाटू जाता हूं। उन्होंने कहा सफर करीब दो सौ किमी है किंतु खाटू के प्रति भक्ति के चलते यह दूरी कष्टदायी नहीं लगती है।
 राजाराम का कहना है कि वे विगत 15 वर्षों से खाटू श्याम का भक्त हैं। श्याम को मन में संजोकर लंबी दूरी को पार कर जाते हैं। उनके अनुसार उन्हें थकान तो होती है परंतु रास्ते में लोगों की भक्तों के प्रति भक्ति प्रसन्न रखती है और सफर आसानी से पूरा हो जाता है। कांवर की अपेक्षा ध्वज में कम नियमों का पालन करना होता है वहीं दूरी भी कम है।
   धर्मेंद्र भक्त का कहना है कि वे छह वर्षों से खाटू श्याम जा रहे हैं और उन्हें मन को प्रसन्नता एवं भक्ति भाव इसी यात्रा से प्राप्त होता है। जब कभी खाटू मेला पास आता है तो वे मेले में जाने की तैयारी में जुट जाते हैं। पदयात्रा विशेषकर रेलवे ट्रैक के साथ साथ चल पाना थोड़ा कठिन है किंतु मन में भक्तिभाव रखते हुए यह सफर सामान्य महसूस होने लग जाता है। श्याम बाबा के दर्शन करके सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
   महिपाल भक्त का कहना है कि वे विगत दो वर्षों से श्याम बाबा के यहां जा रहे हैं। उनकी सभी इच्छाएं श्याम बाबा के जाने पर खत्म हो जाती हैं। उन्हें खाटू जाना बेहद प्रसन्नतापूर्ण लगता है। उनका कहना है कि अपार भक्तों को मीलों का सफर तय करता देख उनका सफर आसानी से पूर्ण हो जाता है।  
फोटो कैप्शन 06: जैतपुर धाम का नजारा


 राजकीय  वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में कक्षा 12वीं की छात्राओं को भावभीनी विदाई
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कनीना की आवाज।
राजकीय  वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी में आज वरिष्ठ वर्ग की कक्षा 12वीं की छात्राओं के सम्मान में कक्षा 11वीं की छात्राओं द्वारा भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम हर्षोल्लास, भावुक क्षणों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच संपन्न हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कक्षा 12 की छात्राओं को सम्मानित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन मनुष्य के जीवन का सर्वश्रेष्ठ काल होता है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने माता-पिता, विद्यालय, क्षेत्र तथा प्रदेश का नाम रोशन करें। यही उनके लिए सच्चे अर्थों में गुरु दक्षिणा होगी।
कार्यक्रम का संचालन एवं आयोजन 12वीं कक्षा की छात्रा जाह्नवी, पलक, मुस्कान, ऋषिका, गुंजन, भारती, सुप्रिया एवं तनु द्वारा किया गया। छात्राओं ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय में शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच सदैव आत्मीयता व अनुशासन का वातावरण रहा है, जिसने उन्हें जीवन में आगे बढऩे की प्रेरणा दी है। उन्होंने गुरुजनों के सम्मान और मार्गदर्शन को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया।
समारोह के दौरान छात्राओं ने शिक्षकों को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए सामूहिक भोज का भी आयोजन किया गया। विदाई के भावुक क्षणों में छात्राओं ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विद्यालय परिवार ने कक्षा 12 की छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित था।
फोटो कैप्शन 05: विदाई समारोह का नजारा


गौशाला प्रांगण भक्तिभाव से ओतप्रोत, महिला सत्संग मंडलियों ने बांधा भक्ति का समां
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कनीना की आवाज।
अमावस्या के पावन अवसर पर श्रीकृष्ण गौशाला कनीना का प्रांगण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो गया। कस्बे की महिला सत्संग मंडलियों द्वारा आयोजित भजन-कीर्तन कार्यक्रम में वातावरण भक्तिमय बन गया।
इस अवसर पर बाबा मोलडऩाथ महिला सत्संग मंडल एवं ढोकलमल शिव मंदिर की सत्संग मंडलियों ने संयुक्त रूप से भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजन-कीर्तन से पूर्व सभी महिलाओं ने गौवंश को गुड़ व हरा चारा खिलाकर गौसेवा की तथा गौशाला को 5100 रुपये की सहयोग राशि भी भेंट की।
भजनों के उपरांत गौभक्तों द्वारा प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम में मंडली प्रधान सोमती देवी,  कविता, सविता यादव, बनारसी, फूला, गोदावरी, लक्ष्मी, धर्म, बिमला, सुनीता, कांता, सुमन व पूनम ने मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी। उल्लेखनीय है कि विगत माह की अमावस्या पर भी इनके द्वारा सत्संग का आयोजन किया गया था।
इस अवसर पर गौशाला के प्रधान भगत सिंह, सचिव यश, सहसचिव रामपाल, अशोक पैकन, कृष्ण प्रकाश गुरुजी, मास्टर रामप्रताप, ओमप्रकाश आर्य, होशियार सत्संगी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने महिला मंडलियों के इस सेवा व भक्ति भाव की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम के माध्यम से गौसेवा, भक्ति और सामाजिक एकता का सुंदर संदेश दिया गया।
फोटो कैप्शन 03: सत्संग मंडलियां सत्संग करते हुए


खेल नर्सरी योजना के अंतर्गत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में शूटिंग रेंज शाखा हेतु उपकरण उपलब्ध कराए गए
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कनीना की आवाज।
हरियाणा सरकार की खेल नर्सरी योजना 2026-27 के अंतर्गत आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी में शूटिंग रेंज शाखा की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आवश्यक खेल उपकरण विद्यालय को उपलब्ध करवाए गए।
इस पहल का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को आधुनिक सुविधाएँ प्रदान कर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है। सरकार द्वारा केवल ओलंपिक, एशियन व कामनवेल्थ खेलों में शामिल चयनित खेलों के लिए नर्सरी स्थापित की जा रही हैं, जिनमें शूटिंग भी एक प्रमुख खेल है।
विद्यालय परिसर में आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम के दौरान समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। विद्यालय के प्राचार्य  नरेश कुमार कौशिक ने इस अवसर पर कहा कि शूटिंग रेंज शाखा की स्थापना के लिए विद्यालय में एक विशाल बहुउद्देशीय हाल शूटिंग रेंज के लिए उपलब्ध करवाया गया है जिसमें विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने हरियाणा सरकार एवं खेल विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
विद्यालय परिवार ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में कनीना मंडी के खिलाड़ी राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय एवं क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे। इस अवसर पर शूटिंग को राहुल यादव वरिष्ठ अध्यापक, ओमप्रकाश पालीवाल, प्रवीण कुमार, रेखा यादव, सुमन लता, अंजू यादव, अनीता यादव, कल्पना कुमारी, शकुंतला यादव, सरोज, हेमंत कुमार, पन्नालाल सहित समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 04: खेल नर्सरी का सामान उपलब्ध कराते हुए प्राचार्य

परीक्षा की कैसे करें तैयारी---
-परीक्षा से घबराना है अनुचित-सुरेश कुमार
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कनीना की आवाज।
एक और जहां 10वीं और 12वीं के परीक्षा सिर पर है वही विद्यार्थी दिन-रात परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। फरवरी माह में सीबीएसई व हरियाणा बोर्ड की परीक्षाएं होंगी। परीक्षा की तैयारी कैसे करें इस संबंध में शिक्षाविद वरिष्ठ प्राध्यापक सुरेश कुमार का  कहना है कि--
परीक्षा से घबराने की जरूरत नहीं। सामान्य रूप में परीक्षा को ले, कक्षा में अध्यापक के सामने जिस प्रकार से प्रश्न का उत्तर दिया जा रहा है वैसी परीक्षा में हल करें। परीक्षा के समय विद्यार्थी को पूर्ण आत्मविश्वास के साथ तैयारी करनी चाहिए। जिस भी विषय की परीक्षा देनी है उसकी तैयारी के लिए मुख्य बिंदुओं को अलग से नोट बुक में उतारे, अलग से समय देकर दोहराये,ध्यान रहे उन्हें रटे नहीं। शिक्षा की तिथि की पूर्व संध्या को विद्यार्थी अधिक थकान एवं दिमाग पर परीक्षा का भूत सवार न होने दे। पूरी नींद ले, प्रसन्न चित्त होकर परीक्षा की तैयारी के लिए हर विषय के प्रत्येक टापिक का ध्यान लगाकर स्मरण करें तथा पूर्ण आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे। बिना दबाव के पढ़ाई की जाती है तो परिणाम बेहतर होते हैं, स्वास्थ्य अच्छा रहता है। छात्र हर दिन को योजना बनाकर पढ़ाई करें जिनकी बेहतर तरीके से दोहराई होती है। थ्योरी के पेपर के लिए लिखकर देखे तो स्मृति टिकाऊ रहती है। परीक्षा के समय सही उत्तर देने में सक्षम बनाता है। गणित, भौतिक शास्त्र एवं रसायन शास्त्र में अभ्यास अधिक से अधिक करें। दिनभर में कितना पढ़े यह विद्यार्थियों की अपनी क्षमता के अनुसार तय होता है। 7 घंटे की नींद लेकर एक घंटे व्यायाम या रुचि अनुसार खेल खेलना चाहिए। हर दिन को प्लान करना और उसे पूरा करना पढ़ाई में चार चांद लगा देता है। इन दिनों में अपने को स्वस्थ रखना जरूरी है ताकि समय पर सभी कार्य पूर्ण कर सकें। पढ़ाई को तनावमुक्त का आनंदमय बनाए। हर दिन की योजना बनाये और उसे पूर्ण करें। एनसीइआरटी की पुस्तकें ही पढ़े।
फोटो कैप्शन-प्राध्यापक सुरेश कुमार




सर्दी में भी हुआ गर्मी का एहसास
-कुछ दिनों से हो रही तेज धूप, दिन का तापमान बढ़ा
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में जहां दो दिनों से सूर्य तेज धूप के साथ चमक रहा है। सुबह और रात को जहां ठंड होती है वही दिन में गर्मी महसूस हो रही है। चंद दिनों की गर्मी से ऐसा लगता है कि अब सर्दी के दिन बीत गए हैं। तेज धूप के चलते जहां लोग राहत महसूस कर रहे हैं। अभी तक लगातार ठंड, कोहरा, धुंध,वर्षा आदि चल रहे थे किंतु दो दिनों से अचानक सूर्य तेज धूप के साथ चमक रहा है और गर्मी का एहसास हो रहा है।
क्षेत्र में कम से कम तापमान 12 डिग्री तो अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेंटीग्रेड नोट किया गया। आने वाले समय में तापमान और बढऩे की संभावना है। यदि यूं ही तेज धूप खिली तो जल्दी सरसों पक जाएगी और अभी तो बसंत पंचमी भी नहीं आई है। उससे पहले ही फूल कम होने लग जाएंगे। किसानों के चेहरे पर चिंता की रेखा दिखाई देने लगी है किंतु कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी मौसम ठीक चल रहा है चूंकि रात को ठंड पड़ती है तो दिन में जहां धूप खिलता है, इससे फसल को कोई नुकसान अभी तक नहीं होगा।
किसान राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, अजीत कुमार आदि का कहना है कि गर्मी बढऩे से फसलों को नुकसान होगा। सरसों की पैदावार में कमी आ जाएगी। गेहूं की फसल में बढ़ोतरी नहीं होगी। इस समय खेतों में गेहूं एवं सरसों की फसल खड़ी हुई है। कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि फसल को नुकसान होगा।
  उल्लेखनीय है कि इस सर्दी के मौसम में जहां पाला जमने से सरसों में पहले ही नुकसान हो चुका है वहीं अब मौसम बदलने से नुकसान होने का अंदेशा बन गया है।
फोटो केप्शन 02: सरसों फसल




शिवालय का नवीनीकरण करने पर किया सम्मानित
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कनीना की आवाज।









रातांकलां निवासी प्रमुख समाजसेवी एलसी जोशी परिवार ने अपने पूर्वजों के गांव बेवल के धार्मिक स्थल शिवालय  का नवीनीकरण कर समाज सेवा की मिसाल पेश की है। इस नेक कार्य, समाजसेवा और सनातन वैदिक संस्कृति को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय योगदान के लिए गत दिवस बेवल गांव में प्रजा भलाई संगठन के नेता अतरलाल ने एलसी जोशी को पगड़ी पहनाकर तथा प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर एल.सी. जोशी परिवार द्वारा हवन यज्ञ कर नवीनीकरण किए शिवालय में विधि विधान से शिव परिवार की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। जोशी परिवार द्वारा भंडारा आयोजित किया गया। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। अतरलाल ने कहा कि एल.सी.जोशी परिवार ने अपने पूर्वजों द्वारा बेवल गांव में बनाए गए पुराने शिवालय का नवीनीकरण कर समाज तथा अपनी जड़ों से जुडऩे की गौरवशाली मिसाल पेश की है। उनके इस कार्य से समाज के लोगों को अपने धर्म, विरासत, संस्कृति से जुडऩे की प्रेरणा मिलेगी। इस अवसर पर पूर्व सरपंच व विख्यात प्रवचनकर्ता  राजकुमार भारद्वाज ने भी जोशी परिवार की सेवाओं की सराहना करते हुए परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों महिलाओं ने व्रत रख मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।
फोटो कैप्शन 01: एलसी जोशी को सम्मानित करते प्रमुख समाजसेवी अतरलाल।

Monday, February 16, 2026



 



दो बड़े मेलों की हो रही है तैयारियां
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कनीना की आवाज।
अपार भीड़ जुटती है। वही इन मेलों की तैयारियां जोरों पर चल रही है।
27 फरवरी को कनीना का प्रदेश भर में विख्यात संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ का मेला भरने जा रहा है। संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ को बालक नाथ, ओघड़ बाबा नाम से जाना जाता है वही कनीनावासी खेड़ा वाला नाम से भी जानते हैं। कनीना का कुल गुरु बाबा मोलडऩाथ  है। बस स्टैंड के पास भरने वाले मेले की तैयारियां चल रही है। रंग रोगन किया जा रहा है। इस मेले में पूरे ही कस्बा के लोग शक्कर का प्रसाद अर्पित करते हैं ऊंट और घोडिय़ों की दौड़ पूरे प्रदेश में विख्यात है। विक्रमी संवत 2006 में संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ ने सिरसवाला जोहड़ में समाधि लगाई थी और वे स्वस्थ होकर  समाधिस्थ तो गए थे। उनकी याद में हर वर्ष यहां भारी भीड़ जुटती है और मेला लगता है। अब तो कनीना का बाबा मोलडऩाथ आश्रम श्रद्धा एवं भक्ति का आश्रम बन गया है। इसके आसपास कम से कम एक दर्जन अन्य मंदिर स्थापित हो गए हैं जिसके चलते यह दर्शनीय स्थल भी बन गया है। इसी स्थान पर 14 मार्च को शक्कर मेला लगने जा रहा है। कबड्डी तथा ऊंट घोड़ों की दौड़ के अलावा यहां दंगल भी आयोजित होते हैं। यह मेला कनीना के पूर्वजों ने चलाया था जो आज भी चला आ रहा है।
खाटू श्याम मेला-
20 फरवरी से 4 मार्च तक जहां जैतपुर एवं खाटू श्याम (राजस्थान) के विशाल मेला लगने जा रहे हैं जिनको लेकर कनीना ही नहीं अपितु आसपास गांव में शिविर लगाने की तैयारियां चल रही हैं। खाटू श्याम तथा जैतपुर धाम पर भक्त पदयात्रा करते हुए निशान अर्पित करने जाते हैं। दोनों ही स्थानों पर एकादशी एवं द्वादशी के दिन यहां अपार भीड़ जुटती है। जहां खाटू श्याम मेला पूरे ही देशभर में विख्यात है वही जैतपुरा जयपुर स्थित खाटू श्याम मेला भी दूर दराज तक प्रसिद्ध है। कनीना के कई दल इन दोनों ही मेलों में जाकर निशान अर्पित करते हैं। कई वर्षों से निशान अर्पित करने वाले अनिल कुमार का कहना है कि यह दोनों धाम पूरे ही देश नहीं बल्कि विदेशों तक जाने जाते हैं। खाटू श्याम वास्तव में बरबरी का नाम था जो पांडवों में भीम के पौत्र थे। महज तीन बाणों से युद्ध करने के लिए महाभारत युद्ध में पहुंचे थे इसलिए उन्हें तीन बाण धारी तथा नीले घोड़े का सवारी करने वाला नाम से जाना जाता है। कलयुग के श्रीकृष्ण अर्थात श्याम बरबरीक को ही जाना जाता है। धाम पर जहां मेले के लिए विभिन्न गांव से भक्तजन पद यात्रा करने की तैयारियों में जुट गए हैं तथा भक्त रवाना होने लगे हैं।
फोटो कैप्शन 06: खाटूश्याम मुख्य गेट






जिला में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान परीक्षा केंद्रों  
--परीक्षा 17 फरवरी से 12 अप्रैल तक जारी रहेंगी
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कनीना की आवाज।
जिलाधीश कैप्टन मनोज कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जिले में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए निषेधाज्ञा जारी की है।
यह आदेश केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। ये परीक्षा 17 फरवरी से 12 अप्रैल तक जारी रहेंगी।
आदेशों के अनुसार जिले के सभी परीक्षा केंद्रों के 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का हथियार ले जाना पूरी तरह वर्जित है। परीक्षा के दौरान केंद्रों के पास स्थित सभी फोटोकापी की मशीनें और कोचिंग संस्थान बंद रहेंगे।
इसके अलावा बिना वैध पहचान पत्र के किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
यह पाबंदियां पुलिस और सरकारी ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों पर लागू नहीं होंगी। इन आदेशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं को बिना किसी बाधा, फर्जी खबरों या अनुचित साधनों के पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराना है।
 सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलने वालों पर रहेगी कड़ी नजर--
हरियाणा सरकार के निर्देशानुसार जिला प्रशासन महेंद्रगढ़ आगामी 17 फरवरी से शुरू होने वाली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को लेकर पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार की ओर से जारी आदेशों के तहत जिले में निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और नकल रहित परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखना और यातायात का सुगम संचालन प्रशासन की प्राथमिकता रहेगी, जिसके लिए पुलिस अधीक्षक को पर्याप्त पुलिस बल और ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए परीक्षा केंद्रों के 500 मीटर के दायरे में फोटोस्टेट की दुकानों और कोचिंग सेंटरों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही सक्षम अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत आवश्यक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने के लिए भी निर्देशित किया गया है।
छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को परीक्षा के दौरान सुबह 10 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए खुफिया तंत्र और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।
इसके अलावा, जिला शिक्षा अधिकारी को विशेष रूप से सेल्फ सेंटरों की निगरानी करने और परीक्षा केंद्रों की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि छात्र बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी परीक्षाएं दे सकें।





 किसानों की प्रमुख तिलहन फसल बन गई है-सरसों
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कनीना की आवाज।
दक्षिण हरियाणा की सूखी भूमि और जल संसाधनों की कमी के चलते किसानों की अपार मेहनत उनके लिए वरदान बनती जा रही है। सूखे एवं राजस्थान की सीमा से सटे इस रेतीले क्षेत्र में रबी की फसल के रूप में सरसों का नाम उभरकर आ गया है। तिलहन जाति की यह फसल अब किसानों के रोम-रोम में बस गई है। किसान के खाने में भी सरसों का तेल ही होता है वहीं खेतों में भी प्रमुख फसल सरसों बनकर किसानों को खुशहाली की ओर ले जा रही है।
   दक्षिणी हरियाणा में किसानों ने समय-समय पर फसलों में भारी बदलाव किया है। एक वक्त था(करीब 20 वर्ष पहले) जब किसान दलहन जाति की फसल चना उगाने में बहुत उत्साह दिखाता था किंतु अब समय के साथ-साथ चने उगाना ही भूल गया है। उस वक्त रबी की फसल के रूप में चने को इतना महत्व दिया जाता था कि अन्न के रूप में भी चने का उपयोग करता था और चने के चारे को किसान अपने पशुओं के लिए प्रयोग करता था। घरों में विवाह शादी के वक्त भी चना काम में लाया जाता था किंतु अब चने को भूला दिया गया है। आज हालात यह है कि चने की खेती करने वाला किसान भी विवाह शादी के लिए कहीं से खरीदकर चने लाता है। उसके पास चने की खेती नहीं होती है।
  किसान ने धीरे-धीरे चने की खेती का त्याग कर दिया क्योंकि चने की खेती किसान के लिए बेहतर साबित नहीं हो रही थी। उसे तेल आदि को बाजार से खरीदकर लाना पड़ता था। ऐसे में किसान का ध्यान तिलहन जाति की फसल सरसों उगाने की ओर गया और धीरे-धीरे सरसों उगानी शुरू कर दी है। किसान के लिए फिर तो सरसों एक अहं फसल बनकर रह गई। यूं तो किसान ने गेहूं, जौ, ज्वार, मक्का, कपास आदि फसलों पर प्रयोग किया किंतु सभी बेकार साबित हो गई। उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पाई वहीं किसान अपने एवं अपने परिवार का पेट पालने के लिए सरसों की फसल की ओर आकर्षित हुआ जो उसके लिए वरदान साबित हुई।
   किसानों का सरसों की फसल के प्रति इतना गहरा रुझान हुआ कि अब तो सरसों सुख दु:ख का साथी ही बन गई है। किसान सरसों की फसल उगाकर खुशहाल बनता जा रहा है। किसान खरीफ की फसल के रूप में बाजरा एवं ग्वार उगाता है जो पशु चारे के रूप में जाने जाते हैं। रबी फसल के रूप में गेहूं अपने खाने के लिए उगाया जाता है जबकि सरसों न केवल घर में तेल के लिए अपितु खुशहाली लाने के अलावा ईंधन के रूप में भी काम में लाई जा रही है।
 सरसों फसल पर किसान को अधिक ध्यान देने की जरूरत भी नहीं है और पैदावार भी बेहतर देती है। किसान करीब छह माह में सरसों की फसल पैदावार अपने घर में डाल लेता है। किसान सरसों का तेल अपने घर की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रयोग करता है। पहले किसान तेल खरीदकर लाता था और अब वो तेल अपनी फसल पैदावार से ही लेने लग गया है। जब तेल निकलवाता है तो एक ओर जहां तेल मीलों की संख्या में इजाफा हो गया है वहीं तेल किलवाते वक्त पशु चारा भी उपलब्ध हो जाता है। खल नामक यह बेहतर पशु चारा पैदा होता है। किसान को सरसों उगाकर एक लाभ और भी हो गया है कि सरसों की पदाड़ी के बदले खेत की फसल कटाई का काम करवाता है वहीं सरसों के धांसे बेहतर ईंधन का काम करते हैं। किसान अपने खेत के धांसों को काटकर अपने खेत में डाल लेता है और उन्हें वर्ष भर काम में लेता है।
    किसान को अपने खेत में सरसों उगाकर न केवल अपना अपितु अपने परिवार का पालन पोषण करना होता है। किसान के सामने आज के दिन सरसों से बेहतर कोई फसल नहीं है। किसान को सरसों उगाने में लागत भी कम लगानी पड़ती है। यही कारण है कि किसान प्रसन्न है। किसान आज अगर किसी क्षेत्र में होड़ कर रहा है तो अधिक से अधिक सरसों उगाने की कर रहा है। सरसों के भाव भी बेहतर होने के कारण किसान की आर्थिक स्थिति भी मजबूत बनती जा रही है।
   किसान ने जब सरसों उगानी शुरू की तो खेत में सरसों की पदाड़ी को यूं ही बेकार समझकर फेंकना होत था और आज पदाड़ी की इतनी मांग बढ़ गई है कि खेत से सरसों की पैदावार को बाद में उठाता है उससे पहले पदाड़ी को उठाकर घर में डालता है या फिर उसे बेच देता है। किसान के पास ईंट  भट्ठा






संचालक इस पदाड़ी को लेने के लिए आने लगे हैं। अब किसान को सरसों की कटाई, थ्रेसिंग एवं खेत से पैदावार को घर तक डलवाने का खर्चा सरसों के धांसों एवं पदाड़ी से ही प्राप्त होने लगा है। ऐसे में किसान की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा है।
   किसानों द्वारा सरसों उगाने का एक लाभ पशुओं का चारा भी सुलभ होना है। किसान अक्सर पशु पालते हैं जिनके लिए हरे चारे की जरूरत होती है और हरा चारा सरसों के पत्तों से मिल सकता है। किसानों के खेतों में सरसों उगाने से खेत की उर्वरा शक्ति भी बढ़ जाती है। सरसों के पत्ते एवं पौधे की जड़े भूमि के अंदर रहने से खाद की पूर्ति हो जाती है और भावी फसल के लिए लाभ होता है। ग्रामीण परिवेश का किसान ईंधन के लिए परेशान रहता है और उसे सरसों के धांसों से ईंधन प्राप्त हो जाता है। इस प्रकार सरसों एक नहीं अपितु कई लाभ मिल जाते हैं।



प्रदेशभर में विख्यात है बाबा मोलडऩाथ
-डा. होशियार सिंह की प्रकाशित हो चुकी हैं बाबा पर 6 पुस्तकें                         
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कनीना की आवाज।
 संत, तपस्वी, गुणों की खान, चमत्कारी एवं संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ की याद में जिला महेंद्रगढ़ के कनीना कस्बा में प्रत्येक वर्ष फाल्गुन शुक्ल एकादशी को महान धार्मिक मेला भरने जा रहा है। बाबा आश्रम के कारण कनीना एक दर्शनीय स्थल के रूप में उभरता जा रहा है।
    जिला महेंद्रगढ़ एवं रेवाड़ी की सीमा पर बसे करीब 850 वर्ष पुराने कनीना कस्बा को कान्हा की नगरी के रूप में जाना जाता है। इस नगरी के सामान्य बस स्टैंड के पास बाबा मोलडऩाथ आश्रम स्थित है। महान तपस्वी बाबा मोलडऩाथ की याद में बनवाए गए आश्रम पर प्रत्येक वर्ष फाल्गुन शुक्ल एकादशी को उनकी स्मृति में मेला लगता है। इस मेले में प्रदेशभर से श्रद्धालु आते हैं। शक्कर का प्रसाद चढ़ाया जाता है इसलिए यह मेला शक्कर मेला नाम से भी प्रसिद्ध है। इस मेले में आज भी राजा महाराजाओं के समय के मनोरंजन की पुरानी परम्पराएं चली आ रही हैं जिनमें ऊंटों की दौड़, दंगल, कबड्डी, घोडिय़ों की दौड़ प्रसिद्ध हैं। बाबा का मंदिर एवं आश्रम प्रशासन द्वारा लांच किए वेबसाइट पर भी उपलब्ध करवा रखे हैं। होली के पर्व के पास हर वर्ष मेला लगता है। अब तो रोड़वाल राजस्थान में भी मोलडऩाथ मंदिर निर्मित किया है जहां हर वर्षा मेला लगता है।
   बाबा मोलडऩाथ जिन्हें बालकनाथ नाम से भी जाना जाता है अपने बाल रूप में बिरही से यहां आए। यूं तो बाबा मोलडऩाथ कनीना में ही नहीं अपितु मांदी, कांवी भोजावास, रोड़वाल, मानसरोवर, नीमराणा आदि स्थानों पर भी रहे और वहां भी तप किया किंतु उनका प्रमुख स्थल कनीना में ही है। बाबा को देखने वाले कितने ही जन आज भी कनीना व आस पास गांवों में जीवित हैं। बाबा के गुणों एवं चमत्कारों को याद करके अति प्रसन्न हो जाते हैं।
   बाबा ने कनीना में आकर यहां की बणी(जंगल) में स्थित एक जाल को ही अपना तप स्थल बनाया। जब से उन्होंने कनीना में तप करना शुरू किया तभी से किसी प्रकार की कोई आपदा नहीं आई और ओलावृष्टिï एवं हैजे जैसे रोग को तो भगाने की उनमें अपार शक्ति थी। यही कारण हे कि उनके समय तो दूर आज भी जब कभी कनीना में ओलावृष्टिï होती हे तो लोग बाबा का ही नाम लेते हैं और देखते ही देखते ओलावृष्टिï बंद हो जाती है। बाल तपस्वी बाबा रहमदिली संत थे। उनके आश्रम के पास अनेकों जीव जिनमें मोर, गीदड़ और अनेकों प्रकार की चिडिय़ां मिलती थी। बाबा को मिलने वाले खाने में से अधिकांश भाग उन जीवों को दिया जाता था।
  बाबा मोलडऩाथ में जल पर समाधि लेने का अद्भुत गुण भी था। जब कभी उनको जल में तप करना होता तो पास में बाबा के जोहड़ में ही वे बैठ जाते और घंटों तप करते थे। अधिक समय तक जल में तप करने से उन्हें ठंड लग गई और उनका स्वास्थ्य बिगडऩे लगा। विक्रमी संवत 2006 फाल्गुन शुक्ल एकादशी को उन्होंने चोला त्याग दिया। जिस स्थान पर उन्होंने चोला त्यागा उसी स्थान पर बाबा को समाधि दी गई। आज बाबा की समाधि पर कनीना के समाजसेवी भीम सिंह द्वारा निर्मित करवाई हुई उनकी प्रतिमा शोभा बढ़ा रही है और उनके जीवन एवं चरित्र पर कनीना के ही लेखक डा. होशियार सिंह यादव द्वारा चार पुस्तकें प्रकाशित करवाई गई है जिनमें से एक आइएसबीएन नंबर की है वहीं एक कैलेंडर, आरतियां एवं बाबा चालीसा भी प्रकाशित करवाया है। डा. होशियार सिंह के पिता स्व. जयनारायण एवं माता मिश्री देवी भी बाबा के प्रमुख भक्तों में से थे।
   मेले से पूर्व रात्रि को बाबा आश्रम पर शब्द कीर्तन का आगाज होता है। वर्ष 1972 में कनीना के समाजसेवी स्व. डा. मेहरचंद द्वारा बाबा के नाम पर सत्संग मंडली बनाई  जो आज भी बाबा के नाम को चार चांद लगा रही है। सत्संग मंडली में मेहरचंद आजीवन अपना योगदान दे रहे हैं और स्वर्गवासी हो चुके हैं। मेले के प्रमुख दिन सुबह सवेरे से ही बाबा के आश्रम में लोगों और भक्तों का तांता लग जाता है। दूर दराज से लोग शक्कर का प्रसाद लाकर बाबा के धूने व बाबा की समाधि पर चढ़ाते हैं और मन्नतें मांगते हैं। माना जाता हैे की उनकी मन्नतें पूरी होती हैं। बाबा के आश्रम पर सबसे अधिक भीड़ महिलाओं की होती है। प्रसाद के रूप में प्राप्त शक्कर को बोरों में भरकर गायों को खिला दिया जाता है। अपार जनसमूह उमड़ पड़ता है। बाबा आश्रम में शक्कर का प्रसाद उसी वक्त से चढ़ाया जा रहा हे जब से बाबा का मेला भरता आ रहा है।
  उधर बाबा के मेले के दिन ही सुबह सवेरे थाना परिसर के पास भीड़ जुटने लग जाती है। दूसरे राज्यों से आने वाले घोड़ी दौड़ व ऊंट दौड़ के प्रतिभागी अपना जौहर दिखाते हैं और प्रथम तीन स्थान पाने वाले प्रतिभागियों को बड़ा ईनाम भी दिया जाता है। कबड्डी एवं दंगल भी शाम तक चलते हैं। शाम को पुन: बाबा के स्थल पर शब्द कीर्तनों का आगाज होता है। अगली सुबह दूर दराज से आए साधु संतों को आदर सहित विदा किया जाता है। दूर दराज से आने वाले साधु संतों एवं श्रद्धालुओं के ठहरने व भोजन का भी उचित प्रबंध किया जाता है। इस मेले का सबसे बड़ा आकर्षण वैसे तो शक्कर का ही प्रसाद है किंतु शक्कर को बांटने के लिए आने वाले श्रद्धालु बाबा के नाम पर पास से ही मिट्टïी छांटते हैं और जय बाबा की पुकारते हैं।
 बाबा स्थल को चार चांद लगाने के लिए बाबा के स्थल के पास ही अनेकों धार्मिक स्थलों का निर्माण होता जा रहा है। बाबा के आश्रम के पास ही 21 फुट ऊंची शिव प्रतिमा वाला शिवालय स्थित है। इस शिवालय का निर्माण शिवभक्त भरपूर सिंह निर्बाण ने निर्मित करवाया है जो हरिद्वार से 14 कावड़ लाकर शिवालय बाघोत में चढ़ा चुके हैं।  शिवरात्रि के दिन यहां तांता लगता है। शिव मंदिर के पास ही पेयजल टंकी बनी हुई है। पास में सीताराम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। सीताराम मंदिर के पास ही राधाकृष्ण का मंदिर बना हुआ है। बाबा आश्रम के पीछे सती समाधि भी बनी हुई है। पास में पानी से भरा जोहड़ है जहां कभी बाबा जल समाधि लेते थे।  कभी गंदा पानी भरा होता था किंतु विगत वर्षों से इसमें साफ पानी और पक्का तालाब बनाया हुआ है। पास में खाटू श्याम मंदिर भी मन मोह लेता है।
   बाबा आश्रम के नीचे वर्तमान में प्रकटीनाथ का आश्रम बना हुआ है जो बाबा के एक कमरे के निर्माण के वक्त प्रकट हुए थे। एक सुंदर गुफा का भी निर्माण ओमप्रकाश सत्संगी के प्रयासों से करवाया गया। बाबा के पास ही बाबा डूंगरमल की समाधि, खागड़ आश्रम, मंगलदेव की कुटिया, शहीद सुजान सिंह पार्क, बाबा हनुमान की 11 फुट ऊंची प्रतिमा वाला मंदिर, बाबा हनुमान का पुराना मंदिर, बाबा भैया स्थल, शनिदेव मंदिर, मां मंदिर, माता स्थल बने हुए हैं जहां समय-समय पर लोगों का तांता लगा रहता है। बाबा आश्रम के पास ही बस स्टैंड का होना भी अहं भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में बाबा आश्रम का नवीनीकरण किया गया है।


राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी में
-राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के लिए निकली रैली
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कनीना की आवाज।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी में मोटे अनाजों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक प्रभावशाली जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली को विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली कनीना मंडी तथा रेलवे रोड के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी और आमजन को मोटे अनाजों के महत्व का संदेश दिया।
इस अवसर पर ब्लाक टेक्निकल आफिसर डा. मनीषा यादव एवं सहायक तकनीकी मैनेजर अरविंद यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डा. मनीषा यादव ने कहा कि वर्तमान समय में स्वस्थ जीवन के लिए मोटे अनाज अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि अत्यधिक गेहूं एवं चावल के सेवन से शुगर तथा अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, जबकि चना, मक्का, बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और शरीर को आवश्यक ऊर्जा एवं रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों एवं आमजन से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक आहार में मोटे अनाजों को शामिल कर बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाएं।
इस अवसर पर विभाग की ओर से बाजरे एवं मक्का से बने पौष्टिक व्यंजन विद्यार्थियों को वितरित किए गए, जिन्हें बच्चों ने उत्साहपूर्वक ग्रहण किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अध्यापक ओमप्रकाश, नरेन्द्र कुमार, राकेश कुमार, माया देवी सहित 100 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
यह जागरूकता रैली स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ाने एवं संतुलित, पौष्टिक आहार अपनाने के संदेश के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
फोटो कैप्शन 01: जागरूकता रैली निकालते हुए

शतरंज प्रतियोगिता आयोजित की गई

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कनीना की आवाज। लिसान गांव में टाइगर शतरंज क्लब के तत्वावधान में शतरंज प्रतियोगिता आयोजित की गई। मुख्य अतिथि प्रमुख समाजसेवी अतरलाल ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। प्रतियोगिता का शुभारम्भ नगरपालिका कनीना की प्रधान रिम्पी ने किया। प्रतियोगिता में 18 टीमों ने भाग लिया। सीनियर वर्ग में दादरी के हिमांशु विजेता तथा लिसान के शीशराम उपविजेता रहे। जूनियर वर्ग में अर्जुन सैदपुर प्रथम तथा गुडियानी की लक्ष्या कुमारी द्वितीय रही। अतरलाल ने विजेता प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न व नगद इनाम प्रदान किए। प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचने पर मुख्य अतिथि अतरलाल का स्मृति चिह्न प्रदान कर स्वागत किया गया। टाइगर शतरंज क्लब के प्रधान ब्रहमप्रकाश, जयप्रकाश नम्बरदार, धर्मवीर पंच, रमेश शर्मा प्रवक्ता, महिपाल पंच, राजेन्द्र सांखला, सुनिल, कर्मबीर फौजी, विक्रम प्रजापतआदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित करते हुए


Sunday, February 15, 2026



 



श्रीश्याम जागरण में झूमे श्रद्धालु
-भजनों पर देर रात तक गूंजा रामलीला मैदान
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कनीना की आवाज।
कनीना मंडी स्थित रामलीला मैदान में श्री श्याम मित्र मंडल के तत्वावधान में फाल्गुन महोत्सव के उपलक्ष्य में श्री श्याम बाबा का भव्य जागरण आयोजित किया गया। कार्यक्रम में श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे और भजनों पर झूमकर नाचते नजर आए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी हरीश कनिंवाल ने शिरकत की। इस अवसर पर समाजसेवी सरला गोयल, रामलीला कमेटी के उप प्रधान दिनेश यादव, भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि बलबीर सिंह धनखड़ तथा कनीना नगरपालिका के एमई दिनेश यादव, नपा लिपिक सुरेन्द्र वशिष्ठ ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मंच संचालन प्रवक्ता सचिन शर्मा ने किया, जिन्होंने भजनों और प्रस्तुति के बीच श्रद्धालुओं का भरपूर उत्साहवर्धन किया। मंडल के प्रधान अनिल गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत गुरुग्राम से पहुंचे धु्रव गोयल ने गणेश वंदना से की। इसके बाद गायक अनुज पारिक ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी, जिन पर श्रद्धालु जमकर झूमे। मुख्य कलाकार के रूप में श्रीधाम वृंदावन से पहुंचीं श्याम दीवानी खुशबू राधा ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। उनके भजनों पर विशेष रूप से महिला श्रद्धालुओं ने तालियों की गडग़ड़ाहट से स्वागत किया। लक्की म्यूजिकल ग्रुप ने भी आकर्षक संगीत प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को भव्य बनाया।
प्रवक्ता सचिन शर्मा ने बताया कि श्री श्याम मित्र मंडल द्वारा 11वीं निशान यात्रा का आयोजन 22 फरवरी 2026, रविवार को किया जाएगा। यह यात्रा श्याम मंदिर कनीना से प्रारंभ होकर हुडिया जैतपुर धाम तक निकाली जाएगी। मंडल प्रधान अनिल गर्ग ने बताया कि निशान यात्रा में शामिल होने वाले सभी भक्तों के लिए ध्वज, भोजन तथा आवागमन की संपूर्ण व्यवस्था मंडल की ओर से की जाएगी। उन्होंने क्षेत्र के सभी श्याम प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की।
फोटो कैप्शन 11: उपस्थित जन




7 एवं 8 मार्च को आर्य समाज उत्सव रसूलपुर में
-कई विद्वान पहुंचेंगे
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कनीना की आवाज।
आर्य समाज रसूलपुर का वार्षिक उत्सव 7 एवं 8 मार्च 2026 शनिवार रविवार को होना निश्चित हुआ है यह आर्य समाज रसूलपुर का 36वां वार्षिक उत्सव है। इसमें मनोरंजन आदि व संगीत से केवल रिझाने का उद्देश्य न होकर युवा चरित्र निर्माण राष्ट्रभक्ति व ईश्वर जीव प्रकृति आदि अनेक विषयों पर विद्वानों द्वारा उपदेश किए जाएंगे। इस मौके पर आमंत्रित विद्वान भारत प्रसिद्ध विदुषी संगीता आर्य सहारनपुर उत्तर प्रदेश,अनुज शास्त्री देहरादून उत्तराखंडय नीरज महेंद्रगढ़ ,महाशय विजय पाल जटगांव, बंसी राम कलवाड़ी, सतवीर सिंह एवं स्थानीय भजन मंडली अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। भोजन की व्यवस्था आर्य समाज रसूलपुर की ओर से होगी। आमंत्रित विशेष रूप से कंवर सिंह यादव महेंद्रगढ़ ,डा. यश देव शास्त्री,  भगत सिंह प्रधान एव समाजसेवी कनीना,  जगदेव सिंह अध्यक्ष एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल ककराला आप सभी सादर आमंत्रित हैंं।
फोटो कैप्शन: सतीश आर्य



27 फरवरी को लग रहा है शक्कर मेला
-कनीना का देव है बाबा मोलडऩाथ
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कनीना की आवाज।
27 फरवरी फाल्गुन एकादशी को कनीना के संत मोलडऩाथ मेले के दृष्टिगत तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। सिहोर के कच्चे मार्ग पर ऊंट एवं घुड़दौड़ होगी वहीं स्कूल के मैदान में ईनामी दंगल होगा।
  बस स्टैंड के पास संत मोलडऩाथ आश्रम में संत की प्रतिमा देखने से ही लगती है। यह प्रतिमा कनीना मंडी के निवासी भीम सिंह एवं उनके परिजनों ने फरवरी 2007 में स्थापित करवाई थी। इससे पूर्व तो बाबा की कोई प्रतिमा भी नहीं थी। बाबा के जीवन एवं चमत्कारों पर डा. होशियार सिंह यादव की पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है तथा प्रतिवर्ष बाबा के कलेंडर प्रकाशित किए जाते हैं।  
    बाबा स्थल को चार चांद लगाने के लिए बाबा के स्थल के पास ही अनेकों धार्मिक स्थलों का निर्माण होता जा रहा है। बाबा के आश्रम के पास ही 21 फुट ऊंची शिव प्रतिमा वाला शिवालय है।    
कनीना का बाबा मोलडऩाथ मेले क्षेत्र का बहुत बड़ा मेला है। संत मोलडऩाथ ने कनीना ही नहीं अपितु नारनौल के मांदी, भोजावास, कांवी, बाठोठा, राजस्थान के अलावा कई अन्य स्थानों पर तप किया था और अपने महान चारित्रिक गुणों के कारण सभी जन श्रद्धा एवं भक्ति से उनको याद करते हें। उनकी पुण्यतिथि पर यह विशाल मेला प्रत्येक वर्ष लगता है। शक्कर मेले के रूप में प्रसिद्ध इस मेले में कई वर्षों से बुजुर्गों की दौड़, घुड़दौड़, ऊंट दौड़ एवं दंगल आयोजित किए जाते हैं।
  मोलडऩाथ धाम की सबसे बड़ी विशेषता है कि प्रत्येक घर से लगभग सभी सदस्य इस स्थान पर आकर धोक लगाते हैं। महिला भक्तों की संख्या अधिक होती है। संतों का सम्मान, जागरण एवं भंडारा आयोजित किया जाता है। चाहे कनीना का भक्त किस भी स्थान पर क्यों न हो इस दिन कनीना आकर मन्नत मांगता है। इस मेले में अपार भीड़ जुटती है। इस दिन लगभग समस्त बाजार बंद रहता है। शक्कर का प्रसाद चढ़ाया जाता है। चढ़ावे की शक्कर को प्रसाद के रूप में कई दिनों तक बांटा जाता है। मेला स्थल को दुल्हन की तरह सजाया जाता है जहां आठ मार्च को विशाल मेला लगने जा रहा है। सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जाती है।
कई नामों से जाना जाता है बाबा-
कनीना के महान संत बाबा मोलडऩाथ कई नामों से जाने जाते हैं। उन्हें बालकनाथ, मोलडऩाथ, खेड़ावाला बाबा के नामों से भी जाना जाता है। उन्होंने रोड़वाल, मानसरोवर, मांदी, कांवी भोजावास, ढाणी बाठोठा सहित एक दर्जन गांवों में रहते हुए तप किया था।  बालपन से ब्रह्मचारी एवं तपस्वी थे। बाबा गणेशनाथ उनके गुरू थे। कनीना में विक्रमी संवत 2006 में ब्रह्मलीन हुए थे। कनीना एवं आस पास के लोग जब भी कोई नया काम करते हैं तो बाबा का नाम लेते हैं।
मेले के भी हैं कई नाम-
बाबा मोलडऩाथ मेला बाबा खेड़ावाला मेला तथा शक्कर मेला नामों से जाना जाता है। यहां पर आए शक्कर के प्रसाद को बोरों में भरकर रख दिया जाता है तथा उसे बांटा जाता है या फिर गौशाला में दान कर दिया जाता है। मेले से अगले दिन विशाल भंडारा आयोजित करके साधु संतों को विदा किया जाएगा।
डा. होशियार सिंह का योगदान-
यूं तो बााबा मोलडऩाथ की संपूर्ण जीवनी कनीना के लेखक डा.होशियार सिंह यादव का नाम प्रसिद्ध है वहीं उन्होंने कनीना के भीम सिंह को प्रेरित कर बाबा की प्रतिमा लगवाई। होशियार सिंह ने बाबा मोलडऩाथ पर चार पुस्तकें जिनमें से एक आइएसबीएन नंबर की निकाली वहीं बाबा चालीसा, बाबा कैलेंडर, बाबा करी आरती आदि भी निकाली हैं तथा बाबा के लिए आज भी समर्पित हैं।



 कमल सिंह को दिया मिस्टर एफिशिएंट का अवार्ड
-विश्वविद्यालय के 51 साल पूरे होने पर दिया गया है यह सम्मान
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कनीना की आवाज।
 कमल सिंह सहायक वरिष्ठ सहायक को विश्वविद्यालय के 51 साल पूरे होने पर अपने काम में तीव्रता और दक्षता के चलते मिस्टर एफिशिएंट का अवार्ड दिया गया है। कमल सिंह अपने काम में बेहतरीन और त्वरित गति से काम को पूरा करते हैं। विगत वर्ष विश्वविद्यालय ने स्वर्ण जयंती मनाई थी। इसलिए रोहिलखंड विश्वविद्यालय  के 51 साल पूर्ण होने पर उन्हें यह सम्मान दिया गया है। यह सम्मान उन्हें विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा दिया गया है।
  उल्लेखनीय है कि कमल सिंह लंबे समय से विश्वविद्यालय में वरिष्ठ सहायक हैं। उनका काम सदा बेहतरीन रहा है। इसलिए उन्हें यह सम्मान दिया गया है। उनके सम्मान मिलने पर जहां क्षेत्र के अनेक लोगों ने उन्हें बधाई दी है जिनमें मुन्नीलाल यादव, रीना यादव, सीमा यादव, आशा यादव, डा. होशियार सिंह यादव, पूजा सिंही,शिवा, भूपेंद्र सिंह सहित विभिन्न सैकड़ों लोगों ने उन्हें बधाई दी है।
 फोटो कैप्शन 09: कमल सिंह सम्मान सहित



महाशिवरात्रि की रही धूम
-विभिन्न स्थानों पर लगे भंडारे एवं मेले, शिवालयों में रही भीड़
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कनीना की आवाज।
 कनीना एवं आस पास क्षेत्रों में महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया गया। शिवालयों में दिनभर पूजा अर्चना का सिलसिला चलती रहा। सबसे अधिक भीड़ प्राचीन शिवालय बाघोत स्थित बाघेश्वर धाम पर रही। कई जगह भंडारे आयोजित किए गए।
  महाशिवरात्रि के पर्व पर मंदिरों में भारी भीड़ रही। कनीना के 21 फुट ऊंचे शिव प्रतिमा वाले शिवालय पर दिनभर तांता लगा और भक्तजन गाजर, बेर, फूल एवं फलों से अर्चना करते देखे गए। महिलाओं की संख्या बहुत अधिक थी। उन्होंने आज व्रत किया और शिवलिंग का जलाभिषेक किया। पुराने शिवभक्त भरपूर सिंह, उनकी पत्नी शकुंतला देवी तथा बच्चे सुबह से शिवालय में पूजा अर्चना करते देखे गए।
 उधर विश्व में प्रसिद्ध कनीना से 13 किमी दूर स्थित बाघेश्वर धाम पर अपार जनसमूह उमड़ पड़ा। बाघोत में मेला आयोजित हुआ जिसमें भारी भीड़ जुटी। भक्तों ने स्वयंभू शिवलिंग का अभिषेक किया।
 बाघोत स्थित स्वयंभू शिलिंग के दर्शन हजारों वर्ष पूर्व राजा कल्याण सिंह रैबारी ने यहां स्थित जंगल में सर्वप्रथम किए थे। तत्पश्चात यहां अपार जनसमूह प्रतिवर्ष उमड़ता है। बाघेश्वरी धाम नि:संतानों के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है। राजा दलीप ने यहीं पर तप एवं व्रत करके संतान प्राप्त की थी। यहीं कारण है कि इस मेले में एक प्राचीन पीपल के पेड़ पर अपनी आस्था एवं मन्नत के परिणित संतान प्राप्ति हेतु कच्चा धागा बांधते हैं और जब उनकी मन्नत पूर्ण होती है तो उस कच्चे धागे को अपने कमलों से हटाने का रिवाज चला आ रहा है। कई कारणों एवं आस्थाओं के चलते बाघेश्वर धाम पर अपार भीड़ रहती है। वैसे भी प्रत्येक सोमवार को यहां भक्तों का तांता लगता है। विभिन्न गांवों में शिवालयों में भारी भीड़ रही। सोमवार के दिन भी शिवभोले की पूजा की जाती है तथा व्रत रखा जाता है।
  बाघोत का पुराना नाम हरयेक वन था। यहां पीपलाद ऋषि का आश्रम भी तो यहीं था। उनके कुल में राजा दलीप के कोई संतान नहीं थी। वे दु:खी थे और दुखी मन से अपने कुलगुरु वशिष्ठ के पास गए। उन्होंने अपना पूरा दु:ख का वृतांत मुनिवर को सुनाया। वशिष्ठ ने उन्हें पीपलाद ऋषि के आश्रम में नंदिनी नामक गाय एवं कपिला नाम की बछिया निराहार रहकर चराने का आदेश दे दिया। राजा ने गाय व बछिया को निराहार रहकर चराते वक्त एक दिन भगवान् भोलेनाथ ने बाघ का रूप बनाकर राजा की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। बाघ ने बछिया पर धावा बोल दिया। गाय को बचाने के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने को राजा तैयार हुए। परंतु जब वे ऐसा करने लगे तो  बाघ के स्थान पर शिवभोले खड़े थे। बाघ के कारण ही गांव का नाम बाघोत पड़ा। प्रारंभ में बाघेश्वर शिवालय का निर्माण कणाणा के राजा कल्याण सिंह रैबारी ने करवाया था जिसका समय समय पर उद्धार होता रहा है।
  हरियाणा सरकार की पुस्तकों में भी बाघोत का छोटा उल्लेख है वहीं लेखक डा. एचएस यादव की कृति में संपूर्ण इतिहास दिया गया है।
 विभिन्न गांवों में भंडारा आयोजित किया गया जहां भक्तों की भीड़ रही। लंबी भीड़ जुटी। एक एक घंटे में जलाभिषेक करने के लिए इंतजार करना पड़ता है।
फोटो कैप्शन 5 एवं 7 शिवलिंग पर जल अर्पित करते हुए भक्त
फोटो कैप्शन 8: स्वयंभू शिवलिंग पर जल अर्पित करते हुए संत।





महाशिवरात्रि पर आयोजित हुआ हवन
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कनीना की आवाज।
आर्य समाज मंदिर कनीना में शिवरात्रि के अवसर पर हवन का आयोजन किया गया।  इस अवसर पर गुलशन आर्य यजमान बने। मनफूल आर्य ने बताया कि स्वामी दयानन्द सरस्वती ने आज के दिन ही पवित्र ज्ञान प्राप्त हुआ था। आज के दिन से ही वेद मार्ग पर चले थे। इस अवसर पर आर्य समाज के प्रधान मोहर सिंह आर्य,मनफुल सिंह आर्य,बहन सरला आर्य,प्रेम आर्य,ओम प्रकाश आर्य आदि आर्य गण उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 04: हवन करते हुए




महेंद्रगढ़ कनीना राज्य मार्ग को यथाशीघ्र चार मार्गी करें-राव दान सिंह
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कनीना की आवाज।
प्रदेश सरकार को महेंद्रगढ़ कनीना राज्य मार्ग को यथाशीघ्र चार मार्गी कर आम जन को राहत प्रदान करने का काम वरीयता पर करवाना चाहिए। ये विचार पूर्व संसदीय सचिव एवं महेंद्रगढ़ के पूर्व विधायक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राव दान सिंह ने  कनीना में पत्रकारों के समक्ष व्यक्त किए। वे यह एक विवाह समारोह में शरीक होने पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस वे 152डी से सीधे तौर पर जुडऩे के बाद कनीना महेंद्रगढ़ राज्य मार्ग पर वाहनों का आवागमन अत्यधिक बढ़ गया है-जिससे 152-डी से महेंद्रगढ़ और कनीना दोनों तरफ वाहनों की भीड़ लगी रहती है। आए दिन इस सड़क के दोनों ओर ट्रैफिक जाम के हालात बने रहते हैं। उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार से कनीना महेंद्रगढ़ राज्यमार्ग को फोरलेन में परिवर्तित कर आमजन को जाम लगने से होने वाली परेशानी, जाम लगने से होने वाले प्रदूषण तथा जाम में फंसने वाले वाहन मालिकों की जेब पर पेट्रोल, डीजल व सीएनजी की बढ़ती लागत से भी राहत मिलेगी।
फोटो कैप्शन 06: पत्रकारवार्ता करते राव दान सिंह



करीरा सड़क मार्ग पर अड़चन हुई खत्म जल्द ही शुरू होगा सड़क मार्ग का निर्माण कार्य
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कनीना की आवाज।
कुछ दिनों से करीरा रोड़ पर खड़े पेड़ों के कारण रोड बनाने  में अड़चन आ रही थी वो आज खत्म हो गई। कानूनी रूप से सभी प्रक्रिया पूरी कर पेड़ों को रास्ते से हटा दिया गया और अब जल्दी ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
 करीरा गांव में जाने के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ रहीं थीं वो जल्द ही खत्म हो जाएगी। दीपक चौधरी ने बताया कि रास्ते के निर्माण काफी सालों से अटका हुआ था जिसमें कोर्ट में मामला फाइनल होने के बाद कुछ पेड़ों और अन्य परेशानी आ रहीं थीं जिनके बारे में स्थानीय विधायक आरती सिंह राव से मिलकर  समस्या बताई तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बातचीत की और जल्द ही इस मुद्दे को हल करने के निर्देश दिए और आज पेड़ों की कटाई कर दी गई। मंत्री आरती सिंह राव का आभार जताया है।
फोटो कैप्शन 03:पेड़ों की कटाई करते हुए
 


















हिंदू सम्मेलन को लेकर बैठक आयोजित
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कनीना की आवाज। कनीना मंडल में आगामी हिंदू सम्मेलन 22 फरवरी 2026 होने की तैयारी को लेकर विशेष बैठक नेताजी मेमोरियल क्लब कनीना में संपन्न हुई। शिव कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी गांवों के जन-प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक की शुरुआत करते हुए  प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह ने सभी को संबोधित किया आगामी इस हिंदू सम्मेलन को विराट रूप देने के लिए सभी प्रतिनिधियों से गांवों के सभी धार्मिक संस्थाओं को इसमें शामिल करने के लिए निवेदन किया। सभी जन-प्रतिनिधियों से इसे और अच्छा वह ज्यादा से ज्यादा संख्या वहां पर पहुंचे इसके लिए सभी से सुझाव मांगे। सूबेदार मेजर राजेश आर्य ने विचार रखते हुए बाइक रैली निकली जाए ऐसा सुझाव दिया जो की कनीना मंडी गेट  और मंडल के गांवों से शुरू होकर बाबा बृजेश्वर धाम कोटिया तक निकाली जाए जिसको सभी उपस्थित सदस्यों ने स्वीकार किया। सफलतापूर्वक संचालन के लिए विभिन्न कमेटियों का गठन कर ग्रामीणों को जिम्मेदारियां सौंपी गई जो अपने-अपने गांव में कार्य करेंगे। आयोजन समिति ने सभी जन-प्रतिनिधियों से क्षेत्र वासियों को बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की । इस मौके पर, वीरेंद्र सिंह मंडल अध्यक्ष, नवीन कुमार, धनुष शर्मा, फतेह सिंह, मनिंदर शर्मा, जसवंत सिंह, मोहित कुमार, लीला राम, पोप सिंह, प्रदीप यादव, रामपाल, शेरु, देवदत्त जांगड़ा, राजेंद्र, सतबीर सिंह, काशीराम व संदीप आदि गणमान्य जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: आयोजित बैठक

Saturday, February 14, 2026



 

तीन बेटियों पर किया कुआं पूजन
-मनाई गई खुशियां
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कनीना की आवाज।
कस्बा कनीना में अनोखा और खुशी का अवसर मनाया गया जहां एक परिवार ने तीसरी बेटी कि जन्म पर कुआं पूजन किया। यह आयोजन समाज में बेटियों के महत्व और सम्मान को दर्शाता है ।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य और समाज में उनके योगदान के लिये यह आयोजन किया है । कुआं पूजन कि दौरान परिवार ने दान पुण्य भी किया और समाज कि लोगों को भोजन पर आमंत्रित किया। इस अवसर पर गांव कि लोग और रिश्तेदार मौजूद रहे। जिन्होंने परिवार को बढ़ायी दी और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
फोटो 07: संबंधित है


गाहड़ा क्रिकेट प्रतियोगिता में दूसरे दिन रोमांचक मुकाबले
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कनीना की आवाज।
  उपमंडल के गांव गाहड़ा में चल रही बाबा भैया क्रिकेट प्रतियोगिता के दूसरे दिन खेल प्रेमियों को एक से बढ़कर एक रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। दूसरे दिन कुल 10 टीमों ने भाग लिया और पूरे दिन मैदान पर उत्साह का माहौल बना रहा। खेल कमेटी सदस्य अजय यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि दिन का पहला मैच बचीनी और खैराना के बीच खेला गया। पहले बल्लेबाजी करते हुए खैराना ने 60 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करते हुए बचीनी की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 ओवर में मैच जीत लिया। दूसरा मुकाबला  छीथरोली और बूचावास के बीच हुआ। छीथरोली ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 ओवर में 68 रन बनाए, लेकिन बूचावास की टीम ने सधी हुई बल्लेबाजी करते हुए लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लिया। तीसरे मैच में भडफ़ और नौसवा आमने-सामने रहे। नौसवा ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 ओवर में 80 रन बनाए, परंतु भडफ़ की टीम ने दमदार खेल दिखाते हुए 6 ओवर में लक्ष्य हासिल कर मैच अपने नाम कर लिया।
चौथा मैच धनिया और मोहलड़ा के बीच खेला गया। मोहलड़ा ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 ओवर में 60 रन बनाए। जवाब में धनिया की टीम ने 5.3 ओवर में लक्ष्य हासिल कर जीत दर्ज की। पांचवें मुकाबले में करीरा और गाहड़ा की टीमें भिड़ीं। करीरा ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 ओवर में 77 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करते हुए गाहड़ा की टीम 5 ओवर में 50 रन ही बना सकी, जिससे करीरा ने मैच जीत लिया। इस अवसर पर पारस, हैप्पी शर्मा कनीना, पुष्पेंद्र यादव, अक्षय स्वामी, अजीत, कृष्ण, राहुल, नरेश, रोहित, नवीन, दीपक सहित अनेक खेल प्रेमी उपस्थित रहे और खिलाडिय़ों का उत्साहवर्धन किया।
फोटो कैप्शन 04:खेलते हुए खिलाड़ी।



बचीनी आंगनबाड़ी केंद्र में बाल विवाह रोकने को लेकर जागरूकता बैठक
-महिलाओं ने ली शपथ — बाल विवाह न करेंगे, न होने देंगे
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कनीना की आवाज।
उपमंडल के गांव बचीनी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर मंजू देवी के मार्गदर्शन में जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मिथलेश, सुनीता और माया देवी ने संयुक्त रूप से की। बैठक में उपस्थित आशा वर्कर सुमन देवी एवं पिंकी देवी ने महिलाओं को संबोधित करते हुए बताया कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई ही नहीं, बल्कि कानूनन अपराध भी है। उन्होंने जानकारी दी कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की तथा 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह गैर-कानूनी है और इसके लिए दंड का प्रावधान है। इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मिथलेश ने उपस्थित महिलाओं को बाल विवाह रोकने की शपथ दिलाई।महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे न तो बाल विवाह करेंगी, न उसका समर्थन करेंगी और अपने आसपास कहीं भी बाल विवाह होने की सूचना तुरंत 1098 हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने को देंगी। साथ ही समाज को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए जागरूकता फैलाने का संकल्प भी लिया गया। कार्यक्रम में सुपरवाइजर मंजू देवी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मिथलेश, सुनीता देवी, माया देवी, आशा वर्कर सुमन देवी, पिंकी देवी, हेल्पर भगोती देवी, शकुन्तला सहित अनेक ग्रामीण महिलाएं उपस्थित रहीं।
फोटो कैप्शन 05: शपथ लेते हुए




करीरा रोड पर अड़चन हुई खत्म जल्द ही शुरू होगा रोड़ का निर्माण कार्य
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कनीना की आवाज।
  कुछ दिनों से करीरा रोड़ पर खड़े पेड़ों के कारण रोड बनाने  में अड़चन आ रही थी वो आज खत्म हो गई। कानूनी रूप से सभी प्रक्रिया पूरी कर पेड़ों को रास्ते से हटा दिया गया और अब जल्दी ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
 करीरा गांव में जाने के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ रहीं थीं वो जल्द ही खत्म हो जाएगी। दीपक चौधरी ने बताया कि रास्ते के निर्माण काफी सालों से अटका हुआ था जिसमें कोर्ट में मामला फाइनल होने के बाद कुछ पेड़ों और अन्य परेशानी आ रहीं थीं जिनके बारे में स्थानीय विधायक आरती सिंह राव से मिलकर  समस्या बताई तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बातचीत की और जल्द ही इस मुद्दे को हल करने के निर्देश दिए और आज पेड़ों की कटाई कर दी गई। मंत्री आरती सिंह राव का आभार जताया है।
फोटो कैप्शन 06: संबंधित है




शिव भोले का भंडारा लगाया गया
-भजन सत्संग ने मोहा मन
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कनीना की आवाज।
  वार्ड नंबर 1 कनीना में स्थित शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 11वें विशाल भंडारे एवं भव्य जागरण का आयोजन बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में कस्बे के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और देर रात तक चले जागरण में भगवान भोलेनाथ के भजनों का आनंद लिया।
मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया था। रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों की सजावट से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत शिव भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी कस्बावासियों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति द्वारा व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संभाली गईं और स्वयंसेवकों ने सेवा भाव से सहयोग किया।
महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर आयोजित 11वां भंडारा और जागरण कस्बे में आस्था, एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर उभरा। श्रद्धालुओं ने आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की और भविष्य में भी ऐसे धार्मिक आयोजनों की निरंतरता की कामना की। भंडारे की व्यवस्था में वॉर्ड पार्षद प्रतिनिधि नरेंद्र, धर्मवीर उर्फ बिल्लू, राजेंद्र सिंह, नवीन यदुवंशी, अशोक लाखा, अशोक कुमार, अश्वनी, अजय भोलू, संजय, संदीप, प्रवीण, नितेश, आकाश, रोहित व अन्य गणमान्य सदस्यों एवं कस्बे वासियों का विशेष योगदान रहा।
फोटो कैप्शन 01: भंडारे का प्रसाद चखते भक्त


कनीना में होने वाले हिंदू सम्मेलन की तैयारियां जोरों पर   
-22 फरवरी को होगा कार्यक्रम आयोजित       
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कनीना की आवाज।
  कनीना उपमंडल के गांव गांव कोटिया में 22 फरवरी 2026 को होने वाले कनीना मंडल का हिंदू सम्मेलन सरपंच धर्मवीर यादव की अध्यक्षता में एक मीटिंग का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए जिसकी जिम्मेवारी बाबा बृजेश्वर धाम कोटिया कमेटी ने ली। कार्यक्रम की आगामी रूपरेखा तैयार की गई यह कार्यक्रम बाबा बृजेश्वर धाम कोटिया में सुबह 11:15 पर आयोजन किया जाएगा प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह ने सभी धार्मिक संगठनों को शामिल होने के लिए आग्रह किया जिसमें कनीना मंडल में आने वाले गांव कनीना, कोटिया करीरा,भडफ, गाहडा, उन्हानी चेलावास व सीहोर गांव हिस्सा लेंगे इस मौके पर सूबेदार मेजर राजेश कुमार, संदीप,राधेश्याम शास्त्री, सुरेंद्र मास्टर,वीर सिंह, नरेश प्रधान,फतेह सिंह, सूरजभान बाबूजी, अमरपाल नंबरदार , अशोक, भूपेंद्र, रजत, हरि शर्मा, शेरु तथा गांव के अन्य गण मान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 02: बैठक का नजारा




पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भोजावास में एक दिवसीय एनएसएस कैंप का आयोजन
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कनीना की आवाज।
 पी एम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भोजावास में एक दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर का आयोजन किया गया । इसमें एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी  राजेश बालवान ने विद्यालय के सौंदर्यीकरण एवं रखरखाव हेतु स्वयंसेवकों को जिम्मेदारी दी तथा स्वयंसेवकों ने निर्धारित समय में अपनी जिम्मेदारी को पूरा किया । स्वयंसेवकों ने अपनी कार्यशैली एवं परिश्रम से विद्यालय की छटा को शानदार बना दिया । इस शिविर में विद्यालय के यूथ  इको क्लब प्रभारी  परमानंद ने विद्यार्थियों के साथ छोटे पौधों की कटाई-छँटाई तथा खरपतवार उन्मूलन का कार्य संभाला । गणित शिक्षक  धर्म सिंह  ने साफ-सफाई संबंधी कार्यों की जिम्मेदारी संभाली तथा स्वयंसेवकों के माध्यम से अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन किया । आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्म सिंह गणित शिक्षक ने की तथा मुख्य वक्ता के रूप में दयानंद पीजीटी अंग्रेजी ,राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुन्दरह उपस्थित रहे । उन्होंने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को केवल दिखाने के लिए नहीं अपितु अपने हर किरदार को वास्तविक अर्थों में जीने का आह्वान किया । उन्होंने विद्यार्थियों को आगामी वार्षिक परीक्षाओं में बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ अधिक से अधिक स्वाध्याय करने पर बल दिया तथा अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आह्वान किया । कार्यक्रम अधिकारी राजेश बालवान ने उपस्थित विद्यार्थियों के कल्याण हेतु जीवन उपयोगी गुणों पर प्रकाश डाला तथा उन्हें अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया । उन्होंने हर परिस्थिति में सकारात्मकता एवं संयम अपनाने पर जोर दिया । यूथ इको क्लब प्रभारी परमानंद ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण हेतु अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने व उनका संरक्षण करने का आह्वान किया ।
इस अवसर पर एसएमसी के पूर्व उप-प्रधान  राकेश कुमार व शिवकुमार आदि उपस्थित रहे ।
फोटो कैप्शन 03: एनएसएस शिविर का नजारा








Friday, February 13, 2026



 


दिव्यांग कर्मचारियों की सेवा-आयु बहाली को लेकर विधायक ओम प्रकाश यादव को सौंपा ज्ञापन
-60 साल तक नौकरी पुन: बहाली की मांग
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कनीना की आवाज।
हरियाणा प्रगतिशील दिव्यांग शिक्षा अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश कौशिक  ने आज हरियाणा के पूर्व समाज कल्याण मंत्री एवं नारनौल से विधायक ओम प्रकाश यादव को दिव्यांग कर्मचारियों की सेवा-आयु 60 वर्ष पुन: बहाल करने संबंधी ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन संघ तथा विकलांग संघ उमंग शिक्षा की ओर से प्रस्तुत किया गया।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा दिनांक 03 फरवरी 2026 को जारी गजट अधिसूचना के माध्यम से हरियाणा सिविल सेवा (सामान्य) नियम, 2016 के नियम 143 में संशोधन करते हुए 70 प्रतिशत अथवा उससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारियों को पूर्व में प्रदान की गई 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
संघ की ओर से कहा गया कि पूर्व प्रावधान राज्य की संवेदनशील एवं कल्याणकारी नीति का प्रतीक था। दिव्यांग कर्मचारी शारीरिक एवं सामाजिक चुनौतियों के बावजूद पूर्ण निष्ठा से सेवाएँ प्रदान करते हैं और 60 वर्ष की सेवा-आयु उन्हें आर्थिक स्थिरता एवं सम्मानजनक जीवन-निर्वाह का अवसर देती थी।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि उक्त संशोधन से दिव्यांग कर्मचारियों में मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है। यह निर्णय सामाजिक न्याय की उस भावना के विपरीत है जिसे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 द्वारा संरक्षित किया गया है।
संघ ने विधायक से आग्रह किया कि वे इस विषय में माननीय मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर गजट अधिसूचना 03 फरवरी .2026 को निरस्त कराने तथा दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु पुन: 60 वर्ष निर्धारित कराने हेतु पहल करें। साथ ही दिव्यांग संगठनों के साथ संवाद स्थापित कर संतुलित एवं न्यायोचित निर्णय सुनिश्चित कराने की मांग भी की गई।
विधायक ओम प्रकाश यादव ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विषय पर उचित स्तर पर विचार-विमर्श कराने का आश्वासन दिया।
 हरियाणा प्रदेश दिव्यांग शिक्षा अधिकारी संघ तथा विकलांग संघ उमंग सिरसा शिक्षा की तरफ से दिव्यांगों की सेवानिवृत्ति संबंधित अध्यादेश वापस लेने बारे ज्ञापन नारनौल से विधायक एवं हरियाणा के पूर्व समाज कल्याण मंत्री राव ओम प्रकाश यादव को संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश कुमार कौशिक द्वारा सौंपा गया।
फोटो कैप्शन 07: नरेश कौशिक पूर्व मंत्री को ज्ञापन देते हुए


नवोदय में प्रेरणा उत्सव व फुटबाल फार स्कूल कार्यक्रम आयोजित
--ओमप्रकाश यादव पूर्व मंत्री रहे मुख्य अतिथि
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कनीना की आवाज।
पीएमश्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में प्रेरणा उत्सव व फुटबाल फार स्कूल कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें मुख्य अतिथि नारनौल विधायक एवं पूर्व मंत्री ओमप्रकाश यादव रहे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित प्रेरणा उत्सव जिसके अंतर्गत प्रत्येक जिले के एक छात्र एक छात्रा का चयन किया जाता है। इन विद्यार्थियों को वडनगर, गुजरात में  नई शिक्षा नीति- 2020 पर आधारित एक माडल स्कूल में एक सप्ताह का आवासीय दौरा कराया जाता है ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके और वे प्रेरणा ले सके।
इसी संदर्भ में जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में  जिला स्तरीय प्रेरणा उत्सव का आयोजन किया गया। इस उत्सव में जिले के विभिन्न स्कूलों के 39 छात्र छात्राओं ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में निबंध लेखन,कविता, गीत लेखन, चित्रकला आदि में से एक क्रियात्मक रचना तथा साक्षात्कार के आधार पर अंतिम रूप से एक छात्र तथा एक छात्रा के चयन हेतु प्रक्रिया सम्पन्न की गई।  
दूसरी ओर खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा निर्देशित फुटबाल फार स्कूल का भी विद्यालय में आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत विभिन्न स्कूलों से आए हुए छात्र-छात्राओं को फीफा फुटबाल वितरित किए गए। इस कार्यक्रम में ओमप्रकाश जी यादव विधायक नारनौल विद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे। फुटबाल फार स्कूल कार्यक्रम योगेश शर्मा तथा उषा रानी प्राचार्य बृजमोहन रावत तथा उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य के नेतृत्व में कार्यक्रम संपन्न कराया गया।
  नारनौल से विधायक एवं हरियाणा के पूर्व समाज कल्याण मंत्री ओम प्रकाश यादव ने आज पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय नारनौल में आयोजित प्रेरणा कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को संबोधित किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रेरणा कार्यक्रम की शुरुआत माननीय प्रधानमंत्री की कर्मभूमि वडनगर के पावन स्थल से हुई है और यह पहल आने वाले समय में देशभर के विद्यालयों के लिए प्रेरणापुंज सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को नई दिशा और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करेगा, जिससे वे अपने जीवन में लक्ष्य निर्धारण कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
विधायक ओम प्रकाश यादव ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि जब भी उन्हें विद्यार्थियों के बीच आने और मार्गदर्शन देने का अवसर मिलेगा, वे सदैव हर्षपूर्वक उसे स्वीकार करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य बृजमोहन लाल रावत की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में विद्यालय ने शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है तथा विकास की गति को नई दिशा मिली है।
कार्यक्रम में प्राचार्य रामस्वरूप, प्राचार्य वीरेंद्र सिंह, प्राचार्य नरेश कौशिक सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को प्रेरणादायी बना दिया।
 इस उत्सव के आयोजन को विजय मोहन,  लोकेश कुमार, विक्रम सिंह व अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 06: पूर्व मंत्री संबोधित करते हुए



एसएचओ नरेश कुमार ने स्कूली बच्चों को पढ़ाए सड़क सुरक्षा के पाठ
- यातायात नियमों के पालन की दी महत्वपूर्ण जानकारी
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कनीना की आवाज।
राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में एसएचओ ट्रैफिक निरीक्षक नरेश कुमार ने विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन अमूल्य है और सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है, इसलिए यातायात नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
निरीक्षक नरेश कुमार ने विद्यार्थियों को वाहन चलाते समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कार चलाते समय सीट बेल्ट और दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए। उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि हमेशा अपनी लेन में सुरक्षित दूरी बनाकर चलना चाहिए और लेन बदलते समय या मुड़ते समय इंडिकेटर का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
ड्राइविंग की तकनीकी जानकारी देते हुए एसएचओ ने बताया कि गोल चक्कर, सिग्नल या किसी भी मोड़ पर ओवरटेक करने से बचना चाहिए और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में वाहन की गति हमेशा धीमी रखनी चाहिए। रात्रि के समय ड्राइविंग करते समय हाई बीम और लो बीम का सही इस्तेमाल तथा ओवरटेक करते समय डिपर का प्रयोग करने के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी परिस्थिति में वाहन नहीं चलाना चाहिए। 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद वैध ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के उपरांत ही वाहन का उपयोग करें। अंत में, उन्होंने वाहन को सड़क या मोड़ पर खड़ा न करके हमेशा निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही पार्क करने की अपील की ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
फोटो कैप्शन 04: एसएचओ यातायात नियमों की जानकारी देते हुए



सात दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता का हुआ शुभारंभ
-अतरलाल ने किया शुभारंभ
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गाहड़ा गांव में 7 दिवसीय बाबा भैया क्रिकेट प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य अतिथि बसपा नेता अतरलाल ने रिबन काट कर किया। उन्होंने खेल ग्राउंड में शाट लगाकर खिलाडिय़ों का उत्साहवर्धन भी किया।
 उन्होंने शानदार क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित करने के लिए गांव की खेल कमेटी व ग्रामवासियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि खेल प्रतियोगिताओं से प्रतिभाएं निखरती हैं और सामने आती हैं। प्रतियोगिताओं से खिलाडिय़ों को आगे बढऩे की प्रेरणा मिलती है। उद्घाटन में बाहला और नाहड़ गांव के बीच में खेला गया जिसमें बाहला गांव 5 विकेट से विजयी रही। दूसरा मैच रामबास और बव्वा गांव के बीच में खेला गया जिसमें रामबास की टीम 7 विकेट से जीती।
  कमेटी सदस्य अजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिता में महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी, झज्जर और भिवानी सहित विभिन्न जिलों की कुल 48 टीमें भाग ले रही हैं। प्रतिदिन सुबह 9 बजे से सायं 6 बजे तक मुकाबले खेले जा रहे हैं। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीम को 21 हजार रुपये तथा द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली टीम को 11 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त फाइनल मुकाबले में मैन ऑफ द मैच को 1100 रुपये तथा मैन ऑफ द सीरीज को 2100 रुपये से सम्मानित किया जाएगा। प्रतियोगिता के पहले दिन कई रोमांचक मुकाबले खेले गए। पहले मैच में बहाला ने नाहड़ को हराया। नाहड़ ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 ओवर में 68 रन बनाए, जिसका पीछा करते हुए बहाला ने 6 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। दूसरे मैच में रामबास ने बव्वा को पराजित किया। तीसरे मुकाबले में मालडा ने बहाला को 101 रन का लक्ष्य दिया, जिसके जवाब में बहाला 69 रन ही बना सकी। चौथे मैच में सीहोर ने पाथेड़ा को हराते हुए जीत दर्ज की। इस अवसर पर पारस, हैप्पी शर्मा, पुष्पेंद्र यादव, अक्षय स्वामी, अजीत, कृष्ण, राहुल, नरेश, रोहित, नवीन, दीपक सहित अनेक खेल प्रेमी उपस्थित रहे।
प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचने पर खिलाडिय़ों में मुख्य अतिथि अतरलाल का फूल मालाओं से स्वागत किया। इस अवसर पर खेल कमेटी के सदस्य अजय, हैपी, जितेन्द्र, भुनेश, राजबीर, चिंटा, पारस, सतीश कुमार, नानड़ सिंह, पवन, पुष्पेंदर, लीलू, दीपक, कालिया, टिंकू, अमित, अजय यादव, बलवान आदि खेल समिति के सदस्य तथा खिलाड़ी उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 05: क्रिकेट प्रतियोगिता का शुभारंभ करते हुए अतरलाल


युगदेव का जन्मदिन श्री कृष्ण गौशाला में मनाया गया
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कनीना की आवाज।
श्रीकृष्ण गौशाला कनीना यहां के प्रबंध व्यवस्था,सेवाभाव, अनुशासन और गौमाता के प्रति समर्पण के कारण क्षेत्र में निरंतर ख्याति अर्जित करती जा रही है। यहां प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धा और विश्वास इस बात का प्रमाण है कि गौसेवा समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही है।
इसी क्रम में आज गौशाला प्रांगण में कुमार युगदेव का जन्मदिवस बड़े ही हर्षोल्लास एवं धार्मिक वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर युगदेव के पिता नवीन यदुवंशी अपने समस्त परिवार सहित गौशाला पहुंचे और अपने पुत्र के जन्मदिवस को गौसेवा के माध्यम से मनाकर समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
परिवार द्वारा गौशाला को 5100 रुपए नकद तथा पांच क्विंटल गाजर गायों के लिए भेंट की गई। साथ ही पूरे परिवार ने गायों को गाजर व गुड़ खिलाकर सेवा का पुण्य लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर गौशाला परिसर भक्ति, सेवा और सद्भावना के वातावरण से सराबोर रहा। गौशाला प्रधान भगत सिंह ने कुमार युगदेव के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए पूरे परिवार का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में गौसेवा के प्रति जागरूकता बढ़ती है और युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोडऩे का कार्य होता है।  उल्लेखनीय है कि उन्होंने कुछ दिन पूर्व ही गौशाला को 100 क्विंटल बाजरा भेंट कर गौसेवा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। कार्यक्रम में मैनेजर हंसराज, सूबेदार मेजर लेखराम, नरेंद्र फौजी, बलजीत यादव, गौशाला सचिव यश कनीनवाल, सह सचिव रामपाल, बलवान सिंह आर्य, उपप्रधान  दिलावर सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति की आत्मा है। गौमाता केवल दूध देने का माध्यम नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संतुलन और मानव जीवन के पोषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गौशालाएं न केवल निराश्रित एवं असहाय गौवंश का संरक्षण करती हैं बल्कि समाज में करुणा, सेवा और सहयोग की भावना को भी सशक्त बनाती हैं।
फोटो कैप्शन 01: गौशाला में जन्मदिन मनाते हुए




महाशिवरात्रि पर बाघोत में लगेगा विशाल मेला
-पौराणिक इतिहास समेटे हैं बाघोत
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव बाघोत पर 15 फरवरी को महाशिवरात्रि मेला लगने जा रहा है। वर्ष में दो बार मेला लगता है। सावन त्रयोदशी शिवरात्रि पर कावड़ मेला लगता है। बाघोत जिसे बाघेश्वर धाम नाम से पूरे भारत में जाना जाता है। बाघोत पौराणिक महत्व एवं अपने में इतिहास समेटे हुए है।
 बाघोत का नाम बाघ के आधार पर पड़ा है।
 बाघोत का पुराना नाम हरयेक वन था। यहां पीपलाद ऋषि का आश्रम भी तो यही था। उनके कुल में राजा दलीप के कोई संतान नहीं थी। वे दु:खी थे और दुखी मन से अपने कुलगुरु वशिष्ठ के पास गए। उन्होंने अपना पूरा दु.:ख का वृतांत मुनिवर को सुनाया। वशिष्ठ ने उन्हें पीपलाद ऋषि के आश्रम में नंदिनी नामक गाय एवं कपिला नाम की बछिया निराहार रहकर चराने का आदेश दे दिया। राजा ने गाय व बछिया को निराहार रहकर चराते वक्त एक दिन भगवान् भोलेनाथ ने बाघ का रूप बनाकर राजा की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। बाघ ने बछिया पर धावा बोल दिया। गाय को बचाने के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने को राजा तैयार हुए। परंतु जब वे ऐसा करने लगे तो  बाघ के स्थान पर शिवभोले खड़े थे। बाघ के कारण ही गांव का नाम बाघोत पड़ा। प्रारंभ में बाघेश्वर शिवालय का निर्माण कणाणा के राजा कल्याण सिंह रैबारी ने करवाया था जिसका समय समय पर उद्धार होता रहा है।
   बाघोत स्थित शिवालय उन भक्तों के लिए भी प्रसिद्ध माना जाता है जिनके कोई संतान नहीं होती है। मेले में आकर दंपति अपने हाथों से एक विशाल वटवृक्ष को कच्चा धागा बांधकर सुंदर संतान होने की कामना करता है। जब संतान हो जाती है तो यहां आकर ही धागा खोलता है। यही कारण है कि शिवलिंग के पास ही खड़ा एक वटवृक्ष कच्चे धागों से लदा मिलता है।
हरियाणा सरकार की पुस्तकों में भी बाघोत का छोटा उल्लेख है वहीं लेखक डा. एचएस यादव की कृति में संपूर्ण इतिहास दिया गया है।
बाघोत के शिवालय का शिवलिंग स्वयंभू होने के कारण यहां अपार भीड़ भक्तों की वर्षभर चलती है। छोटा सा गांव है किंतु ठहरने के लिए अनेक धर्मशालाएं हैं। प्राकृतिक शिवलिंग के भक्त दर्शन कर प्रसन्न हो जाते हैं।
स्वयंभू है शिवलिंग.
बाघोत का शिवलिंग स्वयंभू है। यही कारण है कि शिवरात्रि एवं महाशिवरात्रि पर यहां अपार भीड़ जुटती है। हरिद्वार एवं ऋषिकेश से गंगाजल लाकर अर्पित करते हैं।
मांग रहेगी गाजर एवं बेरों की..
 महाशिवरात्रि पर बेर, गाजर एवं फलों की मांग रहती है।  गाजर के अच्छे भाव मिलने की संभावना से  किसानों ने खेतों से गाजर बचा रखी थी और उन्हें बाजार में बेचकर आय माने की संभावना है। उधर  बेहतर बेर की पैदावार लेने वाले बेरों की पैकिंग कर रहे हैं। दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग के पौधों की भी मांग रहती है।
 बाघेश्वर धाम को सजाया गया है। कतारबद्ध भक्तों के खड़े रहने, पेयजल, पुलिस आदि का प्रबंध किया गया है वहीं भंडारे, ठहरने का प्रबंध भी किया गया है।
फोटो कैप्शन 02: बाघोत का शिवालय 03: स्वयंभू शिवलिंग


अग्निपथ योजना के तहत आनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू
-उम्मीदवार 2 अग्निवीर श्रेणी के लिए कर सकते हैं आवेदन
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कनीना की आवाज।
अग्निपथ योजना के तहत आनलाइन आवेदन प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। इच्छुक युवा 1 अप्रैल तक पोर्टल पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
सेना भर्ती कार्यालय चरखी दादरी भर्ती निदेशक ने बताया कि आनलाइन परीक्षा के लिए अभ्यार्थी द्वारा प्रति आवेदन परीक्षा शुल्क 250 रुपए का भुगतान आनलाइन करना होगा। इच्छुक उम्मीद्वार उनकी योग्यता के अनुसार 2 अग्निवीर श्रेणी के लिए आवेदन करने का विकल्प इस वर्ष भी दिया गया है। अग्निवीर श्रेणी में प्राथमिकता का विकल्प है जिसको उम्मीदवार को आवेदन करते समय चुनाव करना है। भर्ती वर्ष 2027 के लिए अग्निवीरो कि भर्ती दो चरणों में की जाएगी। प्रथम चरण में आनलाइन कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) व द्वितीय चरण में भर्ती रैली होगी। भर्ती के लिए इच्छुक उम्मीद्वार को अपना नाम वेबसाइट ज्वाइन इंडियन आर्मी डॉट एनआईसी डाट इन पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि चरखी दादरी, भिवानी, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिला के जिन युवाओ का जन्म 1 जुलाई 2005 से 1 जुलाई 2009 के बीच हुआ है और उन्होंने कक्षा 10वीं या कक्षा 12वीं पास कर ली है और जो उम्मीद्वार कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित हुए हैं और परिणामों की घोषणा की प्रतीक्षा कर रहे हैं वे आवेदन करने के पात्र हैं बशर्ते वे अन्य सभी शर्तों को पूरा करते हो। यह भर्ती अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर क्लर्क, स्टोरकीपर तकनीकी, अग्निवीर तकनीकी, अग्निवीर ट्रेड्समैन 10वीं पास व अग्निवीर ट्रेड्समैन 8वीं पास के पद के लिए है, जिन उम्मीद्वारों ने न्यूनतम शैक्षणिक और आयु सीमा की योग्यता पूरी कर रखी है वे इस योजना के तहत अपने आवेदन आनलाइन कर सकते हैं। आवेदन करते समय सभी उम्मीद्वार अपना निजी मोबाइल नंबर की जानकारी दर्ज करके सबमिट का बटन अवश्य दबाएं। उम्मीद्वार जितनी बार भी अपना आनलाइन फार्म खोले, उसे बंद करने से पहले वे सबमिट बटन को अवश्य दबाएं, आनलाइन आवेदन करने से पहले नोटिफिकेशन को अच्छी तरह से पढ़े और योजना के तहत भर्ती प्रक्रिया को अच्छी तरह से समझ लें।















संत बाबा मोलडऩाथ मेला 27 फरवरी को
-कनीना का प्रमुख पर्व है मोलडऩाथ मेला
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कनीना की आवाज।
 27 फरवरी को कनीना का प्रसिद्ध पर्व संत बाबा मोलडऩाथ मेला लगने जा रहा है जिसमें पूरे प्रदेश से अपार भीड़ जुटती वही दंगल, घोडिय़ों की दौड़, ऊंटों की दौड़ आदि देखने को मिलते हैं। वास्तव में यह पर्व 3 दिन लगातार चलता है। पपहले दिन रात्रि को जागरण तो दूसरे दिन दंगल, घुड़दौड़, ऊंटदौड़ एवं मेला लगता है। तीसरे दिन साधु-संतों एवं आए हुए भक्तों को विदा किया जाता है।
 संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ मेले को शक्कर मेला नाम से भी जाना जाता है। शक्कर को अक्सर चीनी मान लेते हैं लेकिन क्षेत्र के लोग गुड़ जैसे रंग की शक्कर कह जाती है जो यहां प्रसाद के रूप में बांटी जाती है। इसलिए शक्कर मेला कहते हैं। भक्तजन घर से शक्कर का प्रसाद लेकर बाबा को अर्पित करने के लिए पहुंचते हैं। यह परंपरा लंबे अरसे से चली आ रही है। वैसे तो हर मेले में अलग-अलग प्रसाद वितरित करने की परंपरा है किंतु इस मेले में शक्कर का प्रसाद ही अर्पित किया जाता है। शक्कर का प्रसाद क्यों अर्पित किया जाता है इसके बारे में अधिकांश लोगों का कहना है कि पुराने समय में शक्कर प्रमुख रूप से खाई जाती थी इसलिए यह अर्पित की जाने लगी जो आज भी परंपरा के रूप में कायम है।
 बुजुर्ग राजेंद्र सिंह बताते हैं की पुराने समय से ही शक्कर मेला भरता आ रहा है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए शक्कर प्रयोग में लाई जाती रही है। शक्कर आहार में शामिल किया गया था इसलिए शक्कर को ही खाने के लिए तथा अर्पित करने के लिए भी प्रयोग करते आ रहे हैं। इन दिनों दुकानों पर कनीना क्षेत्र में केवल शक्कर ही शक्कर नजर आती है। प्रसाद के रूप में आई शक्कर को इक_ा करके संत शिरोमणि मोलडऩाथ आश्रम में रख दिया जाता है जिसे बाद में प्रयोग किया जाता है या गौशाला को दान दिया जाता हैं
 इस संबंध में कमला देवी का कहना है कि इतनी भारी मात्रा में शक्कर संत शिरोमणि मोलडऩाथ पर चढ़ाई जाती जो पहली बार किसी मेले में देखने को मिलती है। संत आश्रम के आस पास विन्नि धार्मिक स्थानों पर मेले के दिन शक्कर ही चढ़ाई जाती है। पास में करीब एक दर्जन धार्मिक स्थान सभी पर शक्कर नजर आती है क्योंकि शक्कर पुराने समय से लोग सेहत बनाने के लिए काम में लेते आये हैं।
 भगत सिंह का कहना है कि वे तथा उनके पूर्वज भी शक्कर प्रसाद बांटते आये हैं क्योंकि संत मोलडऩाथ के समय शक्कर ही सबसे ज्यादा प्रचलन में थी। इसलिए तो प्रसाद के रूप में वितरित की जाती है।
 भीम सिंह का कहना है कि शक्कर उस जमाने से खाने में प्रयोग की जाती थी। शक्कर संत को भी पसंद थी। शक्कर आज भी प्रचलन में है और शक्कर को घर-घर में बांटा जाता है। मेले की बड़ी विशेषता है कि घर-घर में शक्कर को बांटा जाता है प्रसाद भी शक्कर का दिया जाता है ऐसा लगता है कि पूरा कस्बा ही शक्करमय हो जाता है। इसलिए प्रमुख रूप से शक्कर मेला नाम से जाना जाता है।
फोटो कैप्शन 08: मोलडऩाथ आश्रम का मुख्य द्वार