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Wednesday, August 12, 2026



 


पालिका कर्मियों की हड़ताल जारी
-काम छोड़ हड़ताल पर हैं कर्मी
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कनीना की आवाज।
नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के हवन पर नगर पालिका कर्मचारी संघ इकाई कनीना ने सातवें दिन काम छोड़ हड़ताल कह जिसकी अध्यक्ष अध्यक्षता इकाई प्रधान अनिल कुमार ने की। हड़ताल में सभी कनीना सफाई कर्मचारी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल 15 अगस्त 2026 तक पूरे प्रदेश में रहेगी अगर सरकार ने हमारी मांगे पूरी नहीं की तो यह हड़ताल आगे भी बढ़ जाएगी।
फोटो कैप्शन 07: हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मी



अब 500 रुपए जमा कर सीवर कनेक्षन को करवा सकते हैं वैध
- पानी तथा सीवर दोनों के लिए भी योजना है लागू -पवन कुमार जेई
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कनीना की आवाज।
 अब उन उपभोक्ताओं के लिए विशेष योजना लागू कर दी है जो सीवर एवं जल का अवैध कनेक्शन लिए हुए हैं।
 विस्तृत जानकारी देते हुए कनिष्ठ अभियंता जनस्वास्थ्य विभाग पवन कुमार ने बताया कि सीवर का कनेक्शन वैध करवाने के लिए 500 रुपए देने होंगे। वहीं अगर नकद राशि न देना चाहे नहीं तो उनके बिल में जुड़कर आ जाएंगे। यही नहीं पानी और सीवर दोनों का कनेक्शन वैध करवाना चाहे तो 1550 रुपए ही देने होंगे ।यह योजना 30 नवंबर तक जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि दस्तावेज बतौर आधार कार्ड, एक फोटो, आईडी जमीन की तथा फैमिली आईडी लेकर वैध कनेक्शन पा सकते हैं। सभी जुर्माना माफ कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर सीवर कनेक्शन के लिए 4367 रुपए तथा पानी का कनेक्शन लेने के लिए 2185 रुपए देने होते हैं।





बाजरे की पकी फसल देखकर किसान खुश
-सावन माह में हुई अच्छी वर्षा
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में जहां जुलाई माह में कम वर्षा होने के कारण बहुत से किसान अपने खेतों की बिजाई नहीं कर पाए। जिन्होंने बिजाई कर दी उनकी फसल अब वर्षा के बाद अब बेहतरीन नजर आ रही है। फसल पकान पर चली गई है।
किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, नवीन कुमार, जितेंद्र, अजीत कुमार आदि ने बताया कि समय फसल पकान की ओर चली गई है। बाजरे की फसल जल्दी ही पक जाएगी। इस बार क्षेत्र में बाजरे के अतिरिक्त कपास, मूंगफली, मूंग तथा चारा देने वाली फसलें उगाई गई है। किसानों ने बताया कि इस बार बंपर पैदावार होने की संभावना है। उधर कृषि विशेषज्ञ डा. देवराज यादव ने बताया कि सावन माह में अच्छी वर्षा का होना किसानों के लिए शगुन भरा रहा है। वर्षा के कारण फसलों में आब आ गई है। अब जल्द ही फसल पककर तैयार हो जाएगी। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में फसल कटाई हो जाती है।
फोटो कैप्शन 04: बाजरे की पकान पर गई फसल


अब बम बम की जगह वो मारा वो काटा
-15 अगस्त तक चलेगी पतंगबाजी
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कनीना की आवाज।
अब छतों पर वो मारा वो काटा का शोर सुनाई पडऩे लगा है। भी तक बम बम का शोर सुनाई पड़ रहा था। कनीना क्षेत्र में 15 अगस्त को हरियाली तीज व 14अगस्त को सिंधारा पर्व के दृष्टिगत पतंगों की बहार आ गई है। सुबह से शाम अब वो मारा, वो काटा की आवाज सुनाई पड़ती है।  
युवा वर्ग इस मामले में अधिक सक्रिय है। सर्वाधिक पतंगबाजी हरियाली तीज पर होती है। उधर तीज एवं सिंधारा के दृष्टिगत बाजारों में घेवर की मिठाई की धूम मची हुई है। त्योहार पर घेवर का लेनदेन किया जाता है।
  शहरी क्षेत्र में पतंगबाजी में तेजी आ गई है। बाजारों में दुकानों पर पतंग एवं डोर ही नजर आती है। युवा हो या बच्चा अपनी छतों पर सुबह शाम पतंगबाजी करता है। जिस दिन स्कूलों की छुट्टी होती है उस दिन तो बच्चे अपने घरों की छतों से नीचे ही नहीं आते हैं। एक ओर सिंधारा पर्व पर घेवर की मिठाई का बोलबाला मिलता है वहीं तीज पर्व पर पतंगबाजी का बोलबाला मिलता है। यूं तो इस सावन माह में उत्सवों की बहार है किंतु तीज पर्व का अपना ही महत्व है। सावन में आने वाली हरियाली तीज पर सर्वाधिक पतंगबाजी की जाती है तत्पश्चात पतंगबाजी में कमी आ जाती है।
   सावन माह में इस बार झूले कम ही नजर आते हैं। सावन माह में पुराने समय से झूलों पर झूलने की प्रथा थी किंतु अब वह प्रथा धीमी पड़ गई है। पतंगबाजी में युवा एवं बच्चों की अधिक भागीदारी होती है। एक दुकानदार योगेश कुमार ने बताया कि इस बार पतंगबाजी के लिए युवा वर्ग में इतना उत्साह नहीं है जितना होना चाहिए। कनीना क्षेत्र में बारिश का बोलबाला है। वैसे तो पूरे सावन माह में ही पींग पर झूला जाता है किंतु इस दिन विशेष आकर्षण का केंद्र पींग होती है।
जंगलों में नृत्य करते मोर, वर्षा का शोर तथा पतंग उड़ाने वालों की ध्वनि स्पष्ट सुनाई पड़ती है।  पर्व खुशियां लेकर आता है। वर्षा अच्छी होने पर तो खुशियां और भी बढ़ जाती हैं।
फोटो कैप्शन 05: पतंग की डोर एवं घेवर की




स्कूली बच्चों ने निकाली तिरंगा यात्रा
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कनीना की आवाज।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय झिगावन के बच्चों एवं स्टाफ सदस्यों ने सरपंच ग्राम पंचायत झिगावन एवं ग्रामीणों के साथ  देशभक्ति की भावना जागृत करने तथा अपने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए तिरंगा यात्रा निकाली। तिरंगा यात्रा में हर घर तिरंगा,हर मन तिरंगा नारे लगाए गए।
इस दौरान हरिओम मुख्याध्यापक, पूनम बाई , अनीता यादव, मीना शर्मा, अभिनय खंडवाल,  रामचन्द्र दीवान सरपंच, ग्रामीण तथा स्कूली बच्चों ने भाग लिया। विद्यालय मुखिया ने 15 अगस्त के आयोजन  में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
फोटो कैप्शन 06: तिरंगा यात्रा निकालते हुए बच्चे एवं स्टाफ



एसडी विद्यालय के 251 विद्यार्थी राज्य स्तर पर करेंगे जिले का प्रतिनिधित्व
--खंड शिक्षा अधिकारी कनीना ने किया सम्मानित
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कनीना की आवाज।
एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला के 251 छात्रों का राज्य स्तरीय खेलों के लिए चयन हुआ है।
इस दौरान मुख्य अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश यादव ने राज्य स्तरीय खेलों के लिए चयनित खिलाडिय़ों को बधाई दी और मैडल व प्रमाण पत्र वितरित किये। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद भी जीवन में जरूरी है। जो जीवन में तन और मन को स्वस्थ रखते हैं










। खेल भी जीवन का एक अंग है जो शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास में सहायक होते है। खेलों से जहां स्वास्थ्य ठीक रहता है वही मनुष्य का चारित्रिक व आध्यात्मिक विकास भी होता है।  खेल एक शारीरिक गति विधि है जो तनाव और चिंता को दूर करते है।
इस अवसर पर विजेता खिलाडिय़ों को बधाई देते हुए विद्यालय चेयरमैन जगदेव यादव ने खेलों की महत्ता पर बल देते हुए बताया कि 251 खिलाडिय़ों को गोल्ड मेडल व 262 खिलाडिय़ों सिल्वर मैडल प्राप्त हुए। कुल 513 मैडल प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया। हमारे जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेलों का होना बहुत जरूरी है। खेल हमें स्वस्थ शरीर व तेज दिमाग प्रदान करते है।
इस मौके पर उपनिदेशक पूर्ण सिंह, वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र यादव, सीईओ आर एस यादव, खेल प्रमुख सोनू कोच पाथेड़ा, प्रदीप फुटबाल कोच खेड़ी, विकास कोच खेड़ी, विकास कोच, सास्वत कोच, जिंकल कोच, तेज डीपी, संगीता डीपी आदि सभी स्टाफ उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: खिलाडियों को पुरस्कृत करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी कनीना सुरेश कुमार


विश्व अंगदान दिवस---13 अगस्त
 जब बहन ने दी अपने भाई को किडनी दान जिससे बची जान
-मरकर भी दे गया पांच लोगों को जीवनदान
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कनीना की आवाज।
कभी कभी इंसान अपने जीवन में वो काम कर जाता है जिसे लोग वर्षों तक याद करते हैं। कभी बहन अपने भाई को जिंदगी दे जाती है तो कोई मरकर अमर हो जाता है। जगत में अलौकिक प्रेम भाई बहन के बीच मिलता है। कभी-कभी बहन अपने भाई के लिए अपनी जान को भी कुर्बान करने के लिए तैयार रहती है। ऐसा ही उदाहरण कनीना उपमंडल से 5 किलोमीटर दूर गुढ़ा में देखने को मिला जहां एक बहन ने अपने भाई की रक्षा के लिए किडनी/गुर्दा दान दिया। बात 2008 की जब संतोष यादव का भाई किशन सिंह यादव बैंक में मैनेजर के रूप में बीकानेर में कार्यरत थे। वे अचानक बीमार पड़ गए और और उन्हें अहमदाबाद/गुजरात के अस्पताल में भर्ती करवाया गया। अनेक जांच करने के बाद पता चला कि उनके गुर्दे खराब हो गये हैं जिसे डाक्टरों ने निकाल दिया तथा जिंदगी बचाने के लिए कम से कम एक किडनी की जरूरत थी।  अहमदाबाद गुजरात में अस्पताल में भर्ती करवाया ताकि उन्हें एक गुर्दा दिया जा सके। उस समय विशेष स्थिति बन गई कि उनका गुर्दा कौन दान दे ताकि उनका जीवन बच सके। तभी उनकी बहन संतोष यादव सामने आई और उन्होंने कहा कि वह गुर्दा देंगी। क्योंकि उसके भाई की जिंदगी का सवाल है। संतोष यादव भी गुजरात अहमदाबाद गुजरात में अस्पताल में भर्ती हो गई। कुछ दिनों तक दोनों की जांच हुई। किशन सिंह की जान बचाने के लिए संतोष यादव का एक गुर्दा निकालकर किशन सिंह यादव को प्रत्यारोपित किया गया जिसके कारण उनकी जान बच गई और वह 7 सालों तक जीवित रहे। तत्पश्चात 2015 में उनकी मौत हो गई किंतु संतोष यादव आज भी उस दिन को नहीं भूल पाती है। जब अपने भाई को याद करती है तो आंखों में आंसू आ जाते हैं। उनका कहना है चाहे मेरी जान चली जाती किंतु मेरा भाई बचा रहता।
मिली जानकारी के अनुसार संतोष यादव हांसी के जमावड़ी गांव में विवाहिता है और उनके पति हजारी सिंह आइटीआइ में प्राचार्य हैं तथा वर्तमान में वह गुरुग्राम में रह रही है। किशन सिंह यादव को याद करते हुए उनका छोटा भाई बलवंत सिंह ने बताया कि वह दो बार 1988 तक 2003 में गुढ़ा गांव का सरपंच रह चुके हंै।  उन्होंने अपने भाई किशन सिंह को गुर्दा मिलने पर जीवित देखा बहुत ही आनंद आया कि उसके भाई की जिंदगी बच गई है किंतु वो 7 साल जीवित रहे और अंतत: उनकी मृत्यु हो गई। बलवंत सिंह भी अपनी बहन संतोष यादव तथा उसकी हिम्मत को याद कर प्रसन्न हो जाते हैं तथा गुर्दा दान देने की घटना को याद कर खुश हो जाते हैं किंतु अपने भाई को खोकर उनकी आंखों में भी आंसू आ जाते हैं।
अंगदान देने की एक अनोखी मिसाल की कायम-
कनीना उपमंडल के गांव गुढ़ा निवासी 25 वर्षीय सचिन ने पेश की है। दो वर्ष पहले कांवड़ लाते वक्त अपनी जान देकर 5 लोगों को दे गया जिंदगी। सड़क हादसे में घायल होने के बाद कोमा में गया सचिन नाम का शिवभक्त कांवडिय़ा अपनी सांस थमने से पहले तीन लोगों को नई जिंदगी दे गया। सचिन ने इसके साथ ही अपनी आंखों के जरिये दो लोगों को रोशनी भी दी है। घटना सावन माह के शुरू होने पर 23 जुलाई 2024 की है।
कांवड़ यात्रा के दौरान कहीं से वाहनों में तोडफ़ोड़ की तस्वीरें आईं तो कहीं से मारपीट की। जहां कुछ कांवडिय़ों के डरावने व्यवहार ने लोगों को विचलित कर दिया, वहीं सचिन नाम का शिवभक्त कांवडिय़ा अपनी सांस थमने से पहले 5 लोगों को नई जिंदगी दे गया। सचिन सड़क हादसे में घायल होने के बाद कोमा में चला गया था। 30 जुलाई 2024 को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों ने उसके अंगों को एम्स ऋषिकेश को दान कर दिया था, जिसके बाद अलग-अलग जगहों पर तीन लोगों को उसके अंगों से नई जिंदगी मिली है साथ में दो को आंखें मिल गई। उन्होंने पैंक्रियाज/अग्राश्य, फेफड़े, आंखें, लिवर, गुर्दे दान कर गया जो आज भी इस दुनियां में हैं।
 23 जुलाई को हरियाणा के महेंद्रगढ़ निवासी 25 वर्षीय सचिन रुड़की में सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल हो गया था। उसके कोमा से बाहर आने की उम्मीद नहीं बची तो एम्स के डाक्टरों ने परिजनों से अंगदान की अपील की। परिवार वाले राजी हुए और ब्रेन डेड युवक के अंगदान का फैसला लिया गया। जरूरी प्रक्रिया के बाद सचिन के अंगों से न केवल तीन लोगों को जिंदगी मिली, बल्कि दृष्टि खो चुके दो लोगों के जीवन में सचिन के नेत्रदान से उजियारा कर गया।
एमएस प्रो. संजीव कुमार मित्तल ऋषिकेश ने कहा कि सचिन के अंगदान से दो अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती तीन लोगों को नया जीवन मिला है। इनमें पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती व्यक्ति को किडनी, पेनक्रियाज प्रत्यारोपित किया गया। दूसरी ओर, दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलरी साइंसेज (आईएलबीएस) में भर्ती दो अलग-अलग व्यक्तियों को किडनी एवं लिवर प्रत्यारोपित किए गए।
श्रावण मास में सचिन गुढ़ा,महेंद्रगढ़ से हरिद्वार कांवड़ उठाने निकाला था परंतु कांवड़ नहीं ला सका और पूरे देश में अपना, परिवार, गांव एवं क्षेत्र का नाम रोशन कर गया। उसके पिता सतीश कुमार कनीना में पंक्चर की दुकान चलाते हैं जिसमें वह मदद करता था। परिवार में पिता के अलावा उनकी पत्नी, दो बच्चे और एक छोटा भाई है। एम्स के डाक्टरों ने जब परिवार वालों से अंगदान कराने की अपील की तो सचिन के परिवार वालों ने फरिश्ते की भूमिका निभाई।
सचिन के शरीर के अंगों को तय समय पर दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचाया गया। इसके लिए सड़क मार्ग और हवाई सेवाओं की मदद ली गई। पुलिस की मदद से ऋषिकेश से जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक ग्रीन कारिडोर बनाया गया। पुलिस ने 28 किलोमीटर की दूरी को 35 मिनट की बजाय महज 18 मिनट के रिकार्ड टाइम में पूरा कराया।
 सड़क दुर्घटना में  सचिन के सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें 30 जुलाई 2024 को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। चिकित्सकों की एक टीम ने तत्काल प्रभाव से सचिन के परिवार वालों से संपर्क किया और उन्हें अंगदान के प्रति प्रेरित किया।
 सचिन ने कई लोगों को जीवन दान दिया है। इस मामले में एम्स उन्हें एक मूक नायक के रूप में हमेशा याद रखेगा। यह कार्य बेहद जटिल था लेकिन एम्स के डाक्टरों ने यह कार्य सफल कर दिखाया। सचिन की पत्नी पूजा, उसके दो छोटे बच्चे, सचिन का पिता सतीश कुमार, मां कविता आदि सभी बेरोजगार हैं तथा सचिन का एक छोटा भाई किसी कंपनी में काम करता है। इससे बड़ा अंगदान का और कोई अन्य उदाहरण पूरे देश में नहीं मिलेगा।
उधर गुढ़ा गांव में ही अपने पोते आशीश कुमार को उसकी दादी चमेली देवी ने गुर्दा देकर पोते की जान बचाने का सुंदर उदाहरण भी सामने आया है। ऐसे नायक एवं नायिकाओं को लोग सदा याद करते हैं।  विगत दिनों सचिन की मां एवं पत्नी को उत्तराखंड के राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह ने सम्मानित किया है।
फोटो कैप्शन 02:
 सचिन मृतक, मां कविता देवी तथा पिता सतीश कुमार
   03: राज्यपाल उत्तराखंड सम्मानित करते हुए

Tuesday, August 11, 2026



 





हजारों भक्तों ने मन्नत के लिए बांधा कच्चा धागा
--संतान प्राप्ति की मन्नत के लिए भी जाना जाता है बाघेश्वर धाम   
-कनीना के डा. होशियार सिंह यादव ने इस शिवालय के इतिहास पर शोध भी किया  
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कनीना की आवाज।
 कनीना उपमंडल के बाघोत शिवालय पर प्राचीन पीपल का वृक्ष उन भक्तों के लिए सदा ही प्रसिद्ध रहा है जिनके कोई संतान नहीं है। कावड़ लेकर आने वाले कुछ भक्त भी संतान की इच्छा रखते हैं वे भी इस पीपल के पेड़ के तने या टहनियों पर कच्चा धागा बांधते हैं।
  यूं तो किवदंति के अनुसार राजा दलीप ने ही संतान प्राप्ति के लिए यहां तप किया था और व्रत एवं उपवास के बाद ही संतान प्राप्त हुई थी। तत्पश्चात तो माना जाता है कि उन भक्तों का तांता लगा रहता है जिनके कोई संतान नहीं होती है। पुराने पीपल के पेड़ के तने पर कच्चा धागा बांधकर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी जाती हे। माना जाता है कि उनकी मन्नतें यहां पूर्ण होती है।
  उल्लेखनीय है कि इस पीपल की टहनियों को कच्चा धागा बांधने के लिए एक सीढ़ी की व्यवस्था भी की गई है। भक्तजन इस सीढ़ी के जरिए पेड़ की शाखा पर कच्चे धागे बांधकर भगवान भोलेनाथ को गंगाजल अर्पित करते हैं। जब उनकी यह मन्नत पूर्ण हो जाती है तो वे इस धागे को खेलकर जाते हैं। आज मेले से पूर्व ही तने व टहनियों पर भारी संख्या में धागे बंधे हुए हैं। संतान प्राप्ति की मन्नत मांगने तो दूसरे राज्यों से भी भक्तजन यहां आते हैं। सचमुच अपार श्रद्धा एवं भक्ति की बयार यहां पर बहती है। इस बार तो मेले के दिन सोमवार होना भक्तजन अपने को सौभाग्यशाली मान रहे हैं। इस दिन व्रत करने वाले, शिवभोले की आराधना करने वाले तथा मेले में गंगाजल चढ़ाने वालों की संख्या अधिक होगी वहीं कांवर भी इस दिन अधिक चढ़ेंगी।
 कनीना के डा. होशियार सिंह यादव ने इस शिवालय के इतिहास पर शोध भी किया है तथा आइएसबीएन नंबर की पुस्तक भी प्रकाशित है। लेखक विगत 30 सालों से इस शिवालय पर लेख प्रकाशित करवाते आ रहे हैं।
  फोटो कैप्शन 13:पीपल के पड़ को बांधे गए कच्चे धागों का दृश्य देखे।


नपा कर्मचारियों की हड़ताल जारी
-- कहा जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होंगी तब तक नहीं हटेंगे
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कनीना की आवाज।
कनीना में नगर पालिका कर्मचारियों का धरना प्रदर्शन जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा सरकार शोषण करती आ रही है पहले जब हड़ताल की थी उस समय सरकार ने हमारी सभी मांगे मान ली थी और समझौता करने के लिए  हमें बुलाया था। मौजूदा सरकार ने 30 जून 2026 तक का समय मांगा था लेकिन अब तक कर्मचारियों की कोई मांग नहीं मानी गई है। इसी वजह से दोबारा कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी थी।
कर्मचारी संघ की मांग है कि सभी कर्मचारियों को नियमित किया जाए,कौशल रोजगार को खत्म किया जाए साथ में ठेका प्रथा को बंद किया जाए और पुरानी पेंशन को बहाल किया जाए। इस मौके पर कनीना इकाई प्रधान अनिल कुमार,सचिन, सुनील कुमार, कोष अध्यक्ष अशोक कुमार,उप प्रधान योगेश कुमार इत्यादि मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 04:धरने पर बैठे नपा कर्मी




विभिन्न शिवालयों में मनाया गया शिवरात्रि का पर्व
 - हजारों कावड़ बाघेश्वरी धाम पर अर्पित की गई
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कनीना की आवाज। 
शिवरात्रि का पर्व क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर व्रत रखा गया और गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया गया। देशभर में विख्यात बाघेश्वर धाम पर दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। कावड़ चढ़ाई गई और शिवलिंग का अभिषेक करके मन्नत मांगी गई। इस बार भारी संख्या में कावड़ अर्पित की गई। अन्य वर्षों के मुकाबले अधिक भक्त कांवड़ लेकर आये।
  सुबह से ही चारों ओर बम-बम के जयकारे सुनाई पड़ रहे थे। विभिन्न शिवालयों में सुबह से शाम तक भीड़ रही। कनीना के 21 फुट प्रतिमा वाले शिवालय पर भारी भीड़ रही। धनौंदा के ब्रह्मचारी कृष्णानन्द आश्रम में शिवलिंग का जलाभिषेक किया गया। विभिन्न गांवों में भी जल चढ़ाकर मन्नत मांगने का सिलसिला जारी रहा।
 देशभर में कावड़ के लिए विख्यात बाघेश्वरी धाम पर आज कावड़ चढ़ाने वालों की भीड़ रही वहीं शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए भी मारामारी चली। बाघोत के स्वयंभू शिवलिंग पर हजारों वर्षों से गंगाजल अर्पित करने व कावड़ लकार अर्पित करने का सिलसिला चला आ रहा है। लाखों भक्तों ने शिवालय जाकर शिव भोले को जल अर्पित किया। महिलाओं की संख्या बहुत अधिक रही।
  बाघेश्वरी धाम पर न केवल भक्तों ने कांवड़ अर्पित की अपितु खेलों का आनन्द भी लिया। इस मेले में बड़े-बड़े संत, महात्मा, नेता आदि ने गंगाजल अर्पित किया। यूं तो प्रत्येक सोमवार को यहां पर भारी भीड़ देखने को मिलती है। मेले का आयोजन सात दिनों से चला आ रहा था जो आज संपन्न हो गया है।
ट्रैक्टरों मेें जा रहे थे भक्त-
बाघेश्वरी धाम पर कावड़ अर्पित करने के लिए भक्तजन ट्रैक्टरों, पीकअप आदि में सवार होकर डीजे पर नाचते गाते जाते देखे गए। दिन एवं रात को वाहनों एवं भक्तों का तांता बाघोत की ओर जाते देखा गया। शिवरात्रि के दिन डाक कावड़ की भरमार रही। उनको अलग रास्ते से शिवालय में जाने की व्यवस्था की हुई थी। एक ओर 350 किमी से व्यक्तिगत कावड़ लेकर आने वाले भक्तों को सामान्य लाइन में खड़ा होना पड़ा वहीं डाक कावड़ लाने वालों को विशेष लाइन में दर्शनों का मौका दिया गया।
गीत भजन एवं डांस के साथ कावड़ की गई अर्पित-
शिवरात्रि के दिन बाघेश्वरी धाम पर कावड़ चढ़ाने का सिलसिला अनवरत चलता रहा। इस दौरान कांवर लाने वाले भक्त अपनी कावड़ को विधि विधान से पूजा करवाकर उन्हें बैंड बाजों पर थिरकते हुए शिवालय तक पहुंचे। और तो और महिलाएं भी नृत्य करते हुए आगे बढ़ती देखी गई। जिस प्रकार शादी दौरान नृत्य किया जाता है ठीक उसी प्रकार कावड़ अर्पित करने का सिलसिला देखने को मिला। भारी संख्या में कावड़ अर्पित की गई। कांवड़़ अर्पित करने का सिलसिला विगत सात दिनों से चला आ रहा था। एक अनुमान के अनुसार दस हजार कावड़ अर्पित की गई हैं। विभिन्न गांवों के शिवालयों में भी कावड़ अर्पित की गई।
विभिन्न दलों ने सेवा की-
कावड़ लाकर अर्पित करने वाले तथा शिवालय के दर्शन करने वाले भक्तों की सेवा के लिए विभिन्न दल सेवा कर रहे थे। शिवरात्रि के दिन भारी भीड़ देखने को मिली। तीन-तीन घंटों में नंबर पड़ रहा था। पानी पिलाना तथा मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी सेवादल अहं भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस बल दौरा करते हुए देखे गए।  सबसे अधिक बैकुंठी कावड़ अर्पित की गई वहीं दूसरे नंबर पर डाक कावड़ अर्पित की गई।
क्यों है प्रसिद्ध बाघेश्वर धाम-
वैसे तो बाघोत का धाम हजारों वर्ष पुराना है वहीं जहां राजा दलीप एवं पीपलाद ऋषियों की तपस्थली होने के कारण बाघोत प्रसिद्ध है। जहां राजा दलीप की बाघ के रूप में शिवभोले ने परीक्षा ली थी इसलिए भी बाघेश्वरधाम नाम पड़ा और प्रसिद्ध हो गया। यहां का शिवलिंग भी स्वयंभू होना अपने आप में महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि सरकारी पुस्तकों डा. एचएस यादव की कृतियों में भी इस शिवालय का वर्णन मिलता है।
हर वर्ग ने किया जलाभिषेक-
विभिन्न शिवालयों में शिवरात्रि के दिन विभिन्न वर्ग के लोगों ने मन्नत मांगी और शिवलिंग का जलाभिषेक किया। छोटे बच्चे, युवा एवं महिला पुरुष सभी शिव आराधना करते देखे गए।  कावड़ अर्पित करने का मंगलवार अंतिम दिन रहा। विभिन्न गांवों में कावड़ अर्पित की गई।
  फोटो कैप्शन 05: महिलाएं जल अर्पित करते हुए
     06: छोटी बच्ची जलाभिषेक करते हुए
      07 एवं 11: बाघोत में भक्त जल अर्पित करते हुए
      08: बाघेश्वर धाम के मुख्य द्वार पर जाते भक्त
    09: बाघेश्वर धम पर महिलाएं जल अर्पित करते हुए
    10: बाघेश्वर धाम पर भीड़




अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर, एक डाक कावडि़ए की हुई मौत, केस दर्ज
-11 बार कावड़ ला चुका था दीपक
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कनीना की आवाज।
कनीना उप-मंडल के गांव सेहलंग के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 152-डी पर एक डाक कावडिय़े को अज्ञात वाहन टक्कर मारकर फरार हो गया। जिसमें डाक कावडिय़े  की मौत हो गई। डाक कांवडिय़ा खांदवा ,तहसील बुहाना, राजस्थान का रहने वाला था। उसके पिता विजय सिंह ने कनीना पुलिस में केस दर्ज करवा दिया है। विजय सिंह ने कहा है कि उसका लड़का दीपक हरिद्वार से डाक कावड़ लेकर आ रहा था। सेहलंग के पास 152-डी हाइवे पर मुगलवार सुबह करीब 4 बजे अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी और फरार हो गया। दीपक के मौके पर ही मौत हो गई। शव का पोस्टमार्टम करवा स्वजनों को सौंप दिया गया है। कनीना पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के विरुद्ध मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।



कावडिय़ों के लिए लगाया गया शिविर संपन्न, भंडारा आयोजित
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कनीना की आवाज।
कांवड़ यात्रियों की सेवा के लिए धनौन्दा-झाड़ली सड़क पर धनौन्दा, खरकड़ा बास गांव के हनुमान मंदिर में लगाए गए कावड़ सेवा शिविर का समापन हो गया। बाबा भोले के जयकारों के साथ हवन यज्ञ तथा भंडारा आयोजित कर किया गया।
प्रजा भलाई संगठन के अतरलाल ने समापन समारोह में पहुंचकर कांवड़ सेवा शिविर में उल्लेखनीय सेवा, श्रम, सहयोग तथा योगदान देने के लिए 11 कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने छिथरोली गांव के निवासी दलबीर को हनुमान मंदिर में निशुल्क पीने के पानी का बोर लगाने के लिए हनुमानजी का चित्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने शिविर में सेवा करने वाले सभी कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए बाबा भोले से उनका मनोरथ पूरा करने की कामना की। सम्मानित होने वाले कार्यकर्ता रमेश, सोनू, संतोश कुमार, आनंद, रवि कुमार, नरेन्द्र सिंह, रामफल साहब, जयपाल हलवाई, मंजू, कविता, शारदा ने कहा कि यह उनका कावड़ यात्रियों की सेवा के लिए 13वां सेवा शिविर था। जिसमें सभी स्वयंसेवकों ने बढ़चढ़ कर तन-मन-धन से सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि शिविर में सेवा करके बहुत प्रसन्नता मिलती है। उन्होंने सेवा को परम-धरम बताते हुए सभी ग्रामीण व सहयोगीजनों का धन्यवाद किया।
इस अवसर पर कप्तान ओमपाल सिंह, कैलाश सेठ, संदीप तंवर, छोटेलाल, पवन, कमला, सुमित्रा, राकेश, विक्की आदि जन उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: सेवा करने वाले भक्तों को सम्मानित करते अतरलाल



विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त
आज भी युवा वर्ग हाथी को देखकर होते हैं प्रसन्न  
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कनीना की आवाज।
विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त को मनाया जा रहा है किंतु बच्चे और कुछ युवा हाथी को देखकर आज भी प्रसन्नचित नजर आते हैं। वास्तव में हाथियों की संख्या घटने चले जाना और हरियाणा में आसपास हाथियों का अभ्यारण्य न होने पर युवा और बच्चे हाथी से अधिक परिचित नहीं हैं। हाथी को संस्कृति में कई जगह पवित्र पशु माना गया है। ऐरावत का पुराणों  में भी वर्णन आता है परंतु बच्चे विशेष कर हाथी को  कोई दिखाने के लिए गांव में आता है तो बहुत प्रसन्नचित होते हैं कि लंबे समय तक उसे निहारते रह जाते हैं। वैसे भी विशालकाय प्राणी होने के कारण उसको देखकर बच्चे और युवा वर्ग खुश होते हैं।
 युवा और बच्चों से संबंध में बात की गई युवा हर्ष कुमार ने बताया की हाथी के बारे में यूं तो लंबे समय से परिचित है क्योंकि हाथी बड़ा जानवर है। जहां कनीना में कभी हाथी खान का जिक्र काकाो यहां ठहराव करते थे। अपने के हाथीखाने को कभी देखा नहीं है। उनका कहना है कि पर्यावरण के लिए इन जीवों का होना बहुत जरूरी है। आज भी जंगल में एक बड़ा जानवर हाथी होता है। चिडिय़ाघर में भी उन्होंने हाथी देखा है।
अमीश कुमार बताते हैं कि हाथी के बारे में परिचित तो है परंतु किसी जंगल में जाकर उन्होंने कभी हाथी को नहीं देखा है। पुस्तकों में फिल्मों में तथा चिडिय़ाघर में जरूर हाथी को देखा है। जब वो बचपन की याद ताजा करते हुए  कहते हैं कि जब गांव में हाथी दिखने के लिए लोग आते थे तो हाथी देख कर खुश होते थे।
 हाथी के बारे में जब बच्चों से बात की तो उन्होंने बताया की हाथी देखकर वह खुश हो जाते हैं परंतु हाथी अब देखने को नहीं मिलते क्योंकि हाथियों का शिकार करना, हाथियों को मनोरंजन के लिए पालने पर जहां सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है जिसके चलते अब ग्रामीण क्षेत्रों में हाथी दिखने वाले भी नहीं आते। ऐसे में बहुत से बच्चों ने तो हाथी को प्रत्यक्ष नहीं देखा है अपितु फिल्मों में छोटे बच्चों तितली, जादू, टिन्नी, माही से हाथी की बात करने पर उत्सुक नजर आये। विश्व हाथी दिवस पर ऐसे जीवों को जरूर प्रत्यक्ष देखना चाहते हैं।
फोटो कैप्शन: अमीश एवं हर्ष



अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस- 12 अगस्त
--युवाओं में कुछ कर गुजरने का जोश है
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कनीना की आवाज।
12 अगस्त को अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जा रहा है। देश में अधिक संख्या युवा वर्ग की है और उनकी आवाज को किसी प्रकार दबाया नहीं जा सकता। उनके विचार जरूर सुनने चाहिए। भारत के युवा विवेकानंद को अमोघ जोश के लिए जाना जाता है। उनके द्वारा दिए गए भाषण आज भी युवा वर्ग को प्रेरित करते हैं। स्वामी विवेकानंद का सिर्फ 39 वर्ष का जीवनकाल कई मायनों में आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। स्वामी विवेकानंद कहते थे कि हर युवा राष्ट्र के निर्माण में योगदान दे सकता है। ऐसे में युवाओं को अपने सामथ्र्य का उचित प्रयोग करना चाहिए। ऐसे में युवाओं को आगे बढऩे के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से यह दिन मनाया जाता है
क्या कहना हैं युवा वर्ग का--
युवाओं का जोश अपार होता है। जिस काम को करने की ठान ले। वे हर काम को करने में सक्षम हैं। यह सत्य है कि वह बेरोजगार अधिक है। उन्हें यदि सही मार्गदर्शन दिया जाए तो निश्चित रूप से देश के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं और उनकी भागीदारी को किसी प्रकार भुलाया नहीं जा सकता।
  --कुलदीप बोहरा, समाजसेवी कनीना
 युवा वर्ग एक अलग वर्ग है जिसको पूरे ही विश्व में जाना जाता है। युवा वर्ग की बुद्धि बहुत तेज होती है जो कुछ सोचते हैं उसको कर दिखाने में भी सक्षम होते हैं। राजनीति हो व्यापार हो तथा  किस क्षेत्र में हो उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकते। ऐसे युवाओं को सही दिशा मिलनी चाहिए ताकि देश के विकास में भूमिका निभा सके।
      --रविंद्र कुमार,कनीना
 युवाओं पर भविष्य निर्भर करता है। यदि युवा का भविष्य उज्ज्वल होगा तो देश का विकास होगा और उज्ज्वल भविष्य बनेगा। युवा पीढ़ी की हर विचारधारा को ध्यान में रखकर देश को आगे बढऩा चाहिए। तभी देश का विकास संभव है। युवा क्षेत्र में जागरूक परंतु बेरोजगारी के चलते मायूस हैं। वे अपने धुन के पक्के होते हैं ।यदि उनको सही दिशा मिल जाए तो उन ऊंचाइयों को छुएगा जहां तक आम आदमी तक नहीं पहुंचा जा सकता।
  -   सुरेश कुमार, युवा कनीना
  युवा पीढ़ी एक अलग किस्म की पीढ़ी है। युवा दिल की धड़कन होता है। उनके हर कार्य बहुत सुंदर होते हैं। वे सही दिशा में चलेंगे यदि सही दिशा निर्देश मिलेंगे।  उनका हर कार्य होगा देश के विकास और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करेगा। युवा वर्ग सदा हित की बात सोचता तथा देश के भविष्य की बात को ध्यान में रखता है। उनका हर कदम सही दिशा में पड़े तो भारत फिर से सोने की चिडिय़ा बनेगा।
---दिनेश कुमार समाजसेवी,कनीना
फोटो कैप्शन: दिनेश कुमार, रवि कुमार, सुरेश कुमार, , कुलदीप बोहरा।


बाघोत मेले में स्वास्थ्य विभाग की सराहनीय सेवाएं
-- श्रद्धालुओं ने की सराहना
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कनीना की आवाज।
बाघोत मेले में उमड़ी भारी भीड़ के बीच श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेहलंग की टीम ने एसएमओ डा. प्रभा यादव के मार्गदर्शन में सराहनीय सेवाएं प्रदान कीं।
मेले में किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम पिछले 5 दिनों से शिफ्टों में तैनात है। आज की ड्यूटी पर तैनात टीम में स्वास्थ्यकर्मी धर्मेंद्र यादव, ऋषिराज आर्य, सुधीर कुमार, सीएचओ रवि कुमार के साथ वार्ड अटेंडेंट मनोज सोनी एवं मनोज चौधरी शामिल रहे। टीम द्वारा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य परामर्श एवं आवश्यक चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध कराई गई।
आपातकालीन सेवाओं के लिए सीएचसी सेहलंग की एंबुलेंस भी मेले में तैनात रही। स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और मुस्तैदी के कारण मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
मेले में की गई इस व्यवस्था की श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों ने खुले दिल से सराहना की।
फोटो कैप्शन 01: बाघोत मेले में तैनात स्वास्थ्य विभाग की टीम




महिला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पर छात्राओं को मिला मार्गदर्शन
--कन्हाणी कालेज में चला व्याख्यान
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कनीना की आवाज।
राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हाणी में महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में छात्राओं को महिला स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डा. विक्रम सिंह ने की।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डा. प्रकृति यादव ने छात्राओं को संबोधित करते हुए महिला स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर वैज्ञानिक एवं उपयोगी जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है। स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छ आदतें और समय पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान व्यक्ति को बेहतर एवं स्वस्थ जीवन जीने में मदद करता है।
डा. प्रकृति यादव ने छात्राओं को व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने, संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने, पर्याप्त आराम करने तथा नियमित दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करने तथा आवश्यकता पडऩे पर समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी।
उन्होंने छात्राओं को स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर बिना झिझक अपनी बात रखने और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सही जानकारी के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी अनेक भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है।
व्याख्यान के दौरान छात्राओं ने महिला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। डा. प्रकृति यादव ने छात्राओं की जिज्ञासाओं का सहज, सरल एवं वैज्ञानिक तरीके से समाधान किया। संवादात्मक चर्चा से छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी मिली तथा उनमें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता एवं आत्मविश्वास बढ़ा।
प्राचार्य डा. विक्रम यादव ने डॉ. प्रकृति यादव का धन्यवाद करते हुए कहा कि महिला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं।
फोटो कैप्शन 02: डा. प्रकृति छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधित जानकारी देते हुए























Monday, August 10, 2026



 


*कावड़ पर विशेष पठनीय आलेख--
99 प्रतिशत भक्त नहीं निभा रहे कावड़ के नियम
-अब तो किराए के व्यक्ति भी लाने लगे हैं कावड़
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कनीना की आवाज।
 कनीना के डा. होशियार सिंह यादव पत्रकार एवं लेखक 2010 से लगातार हरिद्वार से पदयात्रा करते हुए बाघेश्वर धाम पर कावड़ अर्पित करते आए हैं। कावड़ के बहुत से नियम होते हैं, हो सकता है कुछ नियम नहीं भी सुने गए हो। बुजुर्गों ने कावड़ के नियम बड़ी सोच समझ के बाद ही बनाए थे। लेकिन जिन नियमों को निर्धारित किया गया उनका पालन अधिकांश भक्त नहीं कर रहे हैं। बड़ा दुख होता है कि या तो कावड़ लानी नहीं चाहिए और अगर लाए तो पूरे लग्न, जोश और नियमों में बंधकर लानी चाहिए।
जहां वर्ष 2026 में कावड़ लाने वालों की संख्या कुछ अधिक देखने को मिली किंतु जिन नियमों का पालन करना चाहिए उनका पालन नहीं करते देखे गए। सबसे बड़ी दुख भरी बात है कि कम से कम 60 प्रतिशत भक्त बीड़ी, सिगरेट, हुक्का ,चिलम आदि प्रयोग करते देखे गए। नशे का प्रयोग करते हुए बस एक ही बात कह रहे हैं कि शिवभोले भी नशा करते थे। बड़ा अफसोस होता है कि त्रिनेत्रधारी ने कभी नशा नहीं करते थे। लेकिन जिस प्रकार के गीत और भजन सुनने को मिले उन में बस एक ही बात अधिकांश सुनने को मिली शिव भोले ने पी ली एक बाल्टी भांग, भांग पिला दे, भांग घोट दे, ठेके पर भांग ला दे। न जाने क्या-क्या उल्टे सीधे गाने बनाए गए हैं जिनसे लगता है कि सच्चे भक्तों की धार्मिक आस्था पर ठेस लगती है। शिव भोले ने जब तप किया कई कई कल्प चला। उन्होंने कभी किसी प्रकार का नशा नहीं किया।  अपने ही देव पर लांछन लगाना बहुत बुरी बात है। कावडिय़े जमकर बीड़ी, सिगरेट पीते देखे गए। बहुत से कावडिय़े तो शराब पीते देखे गए क्योंकि शराब के ठेके पर थोड़ा प्रतिबंध होने से बोतल तक थैले में साथ लेकर गए और होटल में खोलने नजर आए। कावडिय़े तो ऐसा भी काम करते देखे गए कि पुरानी कावड़, अपने तन के कपड़े, गंदगी सब गंगा में बहा रहे थे। वैसे तो गंगा बहुत मालिन होती जा रही है क्योंकि मलमूत्र भी वही त्याग रहे जो गंगाजल में मिल रहा है। बड़ा अफसोस होता है कि जिस गंगा को पवित्र माना जाता है, भागीरथ के प्रयासों से गंगा धरती पर आई आज वह गंगा कितनी दूषित कर दी है। गंदे नाले मिल रहे हैं, लोग न जाने क्या-क्या गंदगी गंगा में डाल रहे हैं। जब कावडिय़े चलते हैं तो रास्ते में एक नया ही नजारा देखने को मिला। जंगली भांग के पौधों से हाथ रगड़कर और उसका मैल उतार कर सिगरेट ,बीड़ी भरकर खूब केस लेते देखे गए। दुख दर्द उन भक्तों को हुआ जो बीड़ी, सिगरेट नहीं पीते। उनका जीना ही हराम हो गया। बारिश का मौसम हो तो सिगरेट की धुआं और इसकी बदबू कोसों दूर तक जाती है। शिविरों में भी जमकर भक्त बीड़ी, सिगरेट पीते देखे गए। जहां बैठना भी कठिन हो जाता है। कैसे-कैसे कावडिय़े देखे गए। कुछ कावडिय़े तो मलमूत्र त्याग कर हाथ भी नहीं धोते, उठाकर कावड़ चल देते हैं। अधिकांश कावड़ तो इधर-उधर गंदगी से छूती देखी गई परंतु भक्त अपनी कावड़ को फिर भी संभाले चले जा रहे थे। बहुत से ऐसे कावड़ यह देखें जो खाना खाने के बाद,सोने के बाद भी बिना स्नान किए कावड़ उठाकर चल रहे थे क्योंकि मौसम ठंडा था, पानी ठंडा था। इसलिए हाथ पैर भी ढंग से नहीं धो रहे थे। जहां शिविरों में इस कदर भीड़ थी कि पैर रखने की भी जगह नहीं मिली। कावड़ को लेकर कुछ भक्त भागते देखे गए। कावड़ कंधे पर किधर घुमानी चाहिए यह भीभक्तों को मालूम नहीं था। कुछ कावडिय़े ऐसे भी नजर आए जो कावड़ सहित  पानी पीते, जूस पीते देखे गए। कुछ भक्तों ने तो मौसमी के जूस में काला नमक मिलाकर जमकर पिया। नियमानुसार सेंधा नमक के अलावा कोई अन्य नमक प्रयोग करता है तो कपड़े धोकर या नए कपड़े नहाकर पहनने चाहिए किंतु कुछ को यही मालूम नहीं है कि काला नमक सेंधा होता है या नहीं। काला नमक लाहौरी नमक कहलाता है जो प्राकृतिक नहीं है। केवल सेंधा नमक जो पहाड़ों के रूप में प्राप्त होता है, को सेंधा नमक कहते हैं जो अक्सर व्रतों में प्रयोग होता है। कावड़ को जिस शुद्धता से लाना चाहिए उनका बहुत कम भक्त ही पालन करते देखे गए। सबसे बड़ी आफत टोकना कावड़ और डाक कावड़ बन गई है। वो तो समझते हैं कि उनके लिए पूरा रास्ता खाली हो, कोई सड़क मार्ग पर न चले। उनके लिए तो प्रधानमंत्री से भी बढ़कर सुरक्षा हो। एक लिटर से 2 लीटर गंगाजल लेकर 50-50 भक्त दौड़ रहे हैं, क्या यह कावड़ का रूप है? कितने ही तेज रफ्तार से बिना साइलैंसर के वाहन चला रहे, शोर मचा रहे थे। डीजे तो ऐसे ऐसे लगे हुए थे जिनकी आवाज से आदमी क्या दीवार भी ढहने के कगार पर पहुंच जाती थी। जो भक्त शांत मन से भोले को याद करना चाहे तो संभव ही नहीं था। न किसी नियम का पालन होता और न प्रशासन के आदेशों का पालन होता। सबसे बड़ी समस्या टोकना कावड़ बन गई। इस बार दनकी संख्या बढ़ गई। जब ये चलते हैं तो दोनों तरफ कोई व्यक्ति नहीं होना चाहिए वरना इनसे चला नहीं जाएगा और सबसे बड़ी बात है कि ये सड़क के बीच में ही कावड़ को रख देते हैं। कोई भी कांवडिय़ा या भक्त इधर-उधर ध्यान हो तो सड़क पर रखी कावड़ से जरूर टकराएगा। बहुत से ऐसे कावडिय़े भी देखे जो कावड़ कंधे पर ले रहे हैं और जमकर गालियां, एक दूसरे को गंदी बातें सुनते और सुनाते नजर आए। कुछ भक्तों ने तो कावड़ के थैले में ही सिगरेट, बीड़ी तथा नशीले पदार्थ रख रखे थे। अफसोस होता है की जिस शिव भोले के प्रति जितनी आस्था होनी चाहिए उसको भक्त खुद ही कम करते जा रहे हैं। सच्चे इंसान तो जब इन घटनाओं को देखते हैं तो उन्हें सचमुच दर्द होता है और वो कहते नजर आए कि इससे बेहतर तो कावड़ नहीं लाई जाए।
कुछ लोगों ने तो नाम कमाने के लिए बिहार एवं यूपी के लोगों को किराए पर ला रखा था जो शिविरों में फलों पर ऐसे धावा बोलते देखे गए जैसे चील एवं गिद्ध हो। कावड़ लाने के पीछे अपने शरीर को कष्ट देना होता है न कि किराए के लोगों को। इसका तो फल भी किराए के कावडिय़ों को मिलेगा।



मंदिर निर्माण में भगत सिंह ने दिए 51 हजार रुपए
-कमेटी ने स्मृति चिह्न से किया सम्मानित
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कनीना की आवाज।
समाजसेवी भगत सिंह पूर्व प्रधान गौशाला कनीना ने बाबा मोलडऩाथ मंदिर निर्माण कार्य में किया। उन्होंने 51 हजार रुपए की राशि मंदिर निर्माण कार्य के लिए दी।
 मंदिर कमेटी प्रधान दिनेश यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि भगत सिंह समाज सेवा में हमेशा तैयार रहते हैं, चाहे वह स्कूल में बोरवेल का काम हो बाबा मोलडऩाथ मंदिर हो। उन्होंने पहले मीठे पानी के एक बोर भी करवाई थी और आज सहयोग राशि देकर सहयोग किया। उसके लिए पूरी कमेटी ने भगत सिंह का स्वागत व सम्मान किया।
 भगत सिंह ने भी कमेटी की तारीफ करते हुए कहा कि मंदिर का कार्य सराहनीय किया जा रहा है। बहुत ही सुंदर और भव्य मंदिर निर्माण कार्य का कमेटी द्वारा किया जा रहा है। इसमें मैं अपना यह छोटा सा योगदान देकर पुण्य का भागीदार बनना चाहता हूं। उन्होंने कमेटी के सभी सदस्यों से विशेष तौर पर आग्रह किया किया बाबा का मंदिर बहुत ही आस्था का केंद्र है।  आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह से परेशानी नहीं होगी क्योंकि मंदिर निर्माण बहुत आधुनिक और हवादार बनाया जा रहा है। इसमें गांव के सभी लोगों ने अपना योगदान दिया है। प्रधान दिनेश कुमार यादव ने पूरे कनीनावासियों का दिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे ही दानदाताओं की बदौलत यह निर्माण कार्य संपूर्ण होगा।
 इस मौके पर उनके साथ गौशाला समिति के पूर्व कार्यकर्ता रामपाल यादव, मास्टर रामप्रताप, होशियार सिंह सत्संगी, बाबी यादव, दीनदयाल साहब, दुलीचंद साहब, दिलावर साहब,महेंद्र साहब आदि का का मंदिर कमेटी में स्वागत किया। जिनमें मंदिर कमेटी प्रधान दिनेश यादव, रमेश, शिवचरण, सुरेंद्र सिंह, संजय यादव, सतबीर यादव मास्टर अनिल यादव, बलवीर साहब, प्रकाश साहब, जानी यादव, हेडमास्टर अश्विनी, महेंद्र यादव, अरविंद यादव, शिवकुमार एवं अनेक गणमान्य लोगों उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 10: भगत सिंह को स्मृति चिह्न भेंट करते हुए




कावड़ लाने वालों के हौसले बुलंद
-आंधी एवं वर्षा में भी नहीं डगमगाए कदम
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कनीना की आवाज।
कंधे पर कावड़ लाने वालों के हौसले बुलंद होने के कारण सड़कों पर दिनरात अब तो बम-बम भोले की गूंज सुनाई पड़ती है और युवा से लेकर वृद्ध तक 350 किमी से भी अधिक दूरी तय करने के बाद भी उसी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं जिस रफ्तार से चलना शुरू करते हैं। दिल में अपार श्रद्धा एवं भक्ति या फिर दिलों में किसी मनोकामना को लेकर सावन माह में शिवभक्त कांवड़ ला रहे हैं। वर्षा एवं आंधी उनके कदमों को नहीं रोक पाई। चाहे छाले पड़ गए किंतु वे आगे बढ़ते जा रहे हैं।
कुछ भक्तजन तो कई-कई वर्षों से ही कावड़ ला रहे हैं और उनके हौसले बुलंद हैं। वे कहते हैं कि जब तक शिवभोले की उन पर कृपा रहेगी वे कांवड़ यूं ही लाते रहेंगे। चंद कावडिय़ों से कांवड़ लाने एवं बाघेश्वर धाम पर चढ़ाने के पीछे वजह के बारे में चर्चा हुई। सभी का लगभग एक ही जवाब था कि वे महज शिवभक्ति के चलते कांवड़ ला रहे हैं।
इस संबंध में 72 वर्षीय प्रसिद्ध शिवभक्त सुमेर सिंह ने बताया कि यह उनकी 45वीं कावड़ है। बचपन से ही शिवभक्त होने के कारण वे कांवड़ लाकर शिवालय पर चढ़ा रहे हैं और जब तक उनके कदमों में दम है तब तक वे कावड़ यूं ही चढ़ाते रहेंगे। वे दिल में किसी प्रकार की शिवभोले से मनोकामना नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि शिव कृपा से उनके कदम अभी तक नहीं रुके हैं। आगे भी कांवड़ लाते रहने का प्रण है।
   भक्त वेद बोस की उम्र 43 वर्ष है और वे 6वीं कांवड़ लेकर आए हैं। उनके मन में शिवभोले के प्रति अपार श्रद्धा है और वे किसी प्रकार की मनोकामना को लेकर कांवड़ नहीं ला रहे हैं। उनका कहना है कि वे लगातार यूं ही कांवड़ लाना चाहते हैं। उनके दिल में जरा भी थकान नजर नहीं आई। वे शिवभोले के पक्के भक्त बताते हैं।  
 वेद प्रकाश की उम्र  51 वर्ष है किंतु वे 26वीं कांवड़ लेकर आए हैं। उनके दिल में भी किसी प्रकार की शिवभोले से प्राप्त करने  की तमन्ना या मनोकामना नहीं है। उनका कहना है कि वे निरंतर कांवड़ लाते रहेंगे और भविष्य में एक रिकार्ड बनाएंगे। उनमें भी किसी प्रकार की थकान या परेशानी नहीं झलकती है। वे कांवड़ लाकर खुश हैं।
दलीप सिंह 20वीं कांवड़ ला रहे हैं संदीप 5वीं कांवड़ ला रहे हैं। सभी के हौसले बुलंद है और सभी भविष्य में भी इसी प्रकार का और लाना चाह रहे हैं । सभी का कहना है कि शिव भोले के नाम लेकर थकान बल में ही मिट जाती है।
भरत सिंह कनीना ने बताया कि वर्षों से कावड़ लाकर बाघेश्वर धाम पर बिना किसी मनोकामना के ला रहे हैं। बस दिल में भक्ति भावना है। देशराज ने बताया कि वे 3 कावड़ ला चुके हैं और आगे भी कावड़ लाते रहेंगे।
 उधर संदीप, योगेश, संजय, अरुण कुमार, संजय भारद्वाज आदि ने बताया कि वे नीलकंठ पर जाकर कावड़ अर्पित करते आए हैं वहीं बाघेश्वर धाम पर भी कावड़ अर्पित करते आए हैं।
  फोटो कैप्शन 09:कावड़ लाने वाले भक्त




बाबा के योगदान पर किया ट्रस्ट ने होशियार सिंह को सम्मानित
-मोलडऩाथ पर लिख चुके कई कृतियां
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने साढ़े 5 दिनों में हरिद्वार से कावड़ लाकर बाघेश्वर धाम पर अर्पित कर दी तथा कनीना पहुंचकर संत मोलडऩाथ आश्रम पर बाबा का आशीर्वाद लिया। उन्होंने अपनी श्रद्धा अनुसार दान पुण्य भी किया।
 इस मौके पर ट्रस्ट के प्रधान दिनेश कुमार यादव ने बताया कि डा. होशियार सिंह यादव वर्ष 2010 से लगातार कावड़ लाकर बाघेश्वर धाम पर अर्पित करते आ रहे हैं। यही नहीं समय-समय पर विभिन्न धार्मिक स्थानों की पदयात्रा करते आ रहे हैं। 2010 से ही खाटू श्याम एवं जैतपुर आदि धामों की निशान पद यात्रा करते आए हैं तथा साइकिल मैन के नाम से प्रसिद्ध हैं। विश्व रिकार्ड धारक होशियार सिंह ने संत मोलडऩाथ पर अनेक कृतियां प्रकाशित की है। उनका योगदान हमेशा याद रहेगा। उन्होंने जहां संत मोलडऩाथ की आरती, मोलडऩाथ की कृति, मोलडऩाथ चालीसा तथा मोलडऩाथ के जीवनवृंत्त एवं उदात गुणों का वर्णन किया है। उनके आलेखों में मोलडऩाथ समाए हुए हैं। उनके सराहनीय योगदान के चलते उन्हें स्मृति चिह्न देकर  ट्रस्ट ने सम्मानित किया।
 इस मौके पर मंदिर कमेटी प्रधान दिनेश यादव, पूर्व प्रवक्ता अश्विनी कुमार, सुरेंद्र सिंह भेलिया, शिवकुमार, लाल सिंह, रमेश कुमार, जानी यादव, मास्टर अनिल कुमार, शिवचरण, अरविंद यादव, नरेश कुमार, सुभाष यादव, सोनू यादव, पवन कुमार, अशोक डीपी, सतवीर यादवआदि उपस्थित रहे।
 फोटो कैप्शन 08: होशियार सिंह को सम्मानित करती ट्रस्ट




स्कूल प्रांगण में त्रिवेणी लगाकर तिरंगा यात्रा का शुभारंभ किया बीइओ कनीना सुरेश कुमार ने
--पेड़ों के गिनाए गए लाभ
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कनीना की आवाज।
राजकीय  माध्यमिक विद्यालय कैमला में खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार यादव ने विद्यालय में त्रिवेणी लगाकर हर घर -घर तिरंगा यात्रा का हरी  झंडी दिखाकर शुभारंभ किया।
विद्यार्थियों को उन्होंने कहा कि तिरंगा हमारे देश की अस्मिता का प्रतीक है। हम सबको तिरंगे का मान, सम्मान के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। यह हमारा राष्ट्रीय प्रतीक है, इसकी सुरक्षा, रक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
 विद्यालय में बरगद ,पीपल, नीम त्रिवेणी लगाकर  एक पेड़ मां के नाम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।  उन्होंने कहा कि हम सबको अपने- अपने घर पर प्रत्येक सुअवसर पर एक पौधा लगाना चाहिए जिससे वातावरण स्वच्छ, हरा- भरा रहेगा और हमें शुद्ध आक्सीजन प्राप्त होगी जो हमें अनेकों रोगों से छुटकारा दिलाने में सहायक होगी।
 कार्यालय अधीक्षक ओम प्रकाश शर्मा ने विद्यार्थियों को शिक्षा ,संस्कार और संस्कृति पर आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि हमें हमेशा अनुशासन में रहकर निरंतर पढ़ाई करनी चाहिए। विद्यालय की ओर से मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने विद्यार्थियों से अपील की की हमें हर पल प्रकृति का संरक्षण, संवर्धन के लिए तैयार रहना चाहिए और उचित सहयोग देना चाहिए। हमें राष्ट्रधर्म को सेवा धर्म मानना चाहिए।
 इस अवसर पर मनवीर सिंह, सुनील कुमार, देवेंद्र यादव ,राजेश कुमार,भगत सिंह, गरीमा रानी,सुनील कुमार डीटीएच चौकीदार, सूबे सिंह पूर्व प्रधान, तारामणि देवी, पिंकी देवी, बबली देवी सतपाल साहब, राजकुमार पंच आदि उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 07: पेड़ लगाकर तिरंगा यात्रा का शुभारंभ करते बीइओ कनीना सुरेश कुमार




आज लगेगा शिवरात्रि पर बाघोत में विशाल मेला
-पौराणिक इतिहास समेटे हैं बाघोत
-सावन के सोमवारों को रहती है भीड़
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कनीना की आवाज।
  कनीना उपमंडल के गांव बाघोत पर 11 अगस्त को शिवरात्रि मेला लगेगा। यहां अपार भीड़ जुटती है तथा हजारों कावड़ अर्पित की जाती हैं। एक सप्ताह से कावड़ अर्पित करने का सिलसिला भी शिवरात्रि को रुक जाएगा। वर्ष में दो बार यहां मेला लगता है। सावन त्रयोदशी शिवरात्रि पर कावड़ मेला लगेगा। महाशिवरात्रि जो सर्दी के दिनों में आती है, कावड़ कम अर्पित होती हें। बाघोत जिसे बाघेश्वर धाम नाम से पूरे भारत में जाना जाता है, का पौराणिक महत्व एवं अपने में इतिहास समेटे हुए है।
हरयेक वन था पुराना नाम--
 बाघोत का नाम बाघ के आधार पर पड़ा है।
 बाघोत का पुराना नाम हरयेक वन था। यहां पीपलाद ऋषि का आश्रम भी तो यही था। उनके कुल में राजा दलीप के कोई संतान नहीं थी। वे दु:खी थे और दुखी मन से अपने कुलगुरु वशिष्ठ के पास गए। उन्होंने अपना पूरा दु:ख का वृतांत मुनिवर को सुनाया। वशिष्ठ ने उन्हें पीपलाद ऋषि के आश्रम में नंदिनी नामक गाय एवं कपिला नाम की बछिया निराहार रहकर चराने का आदेश दे दिया। राजा ने गाय व बछिया को निराहार रहकर चराते वक्त एक दिन भगवान् भोलेनाथ ने बाघ का रूप बनाकर राजा की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। बाघ ने बछिया पर धावा बोल दिया। गाय को बचाने के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने को राजा तैयार हुए। परंतु जब वे ऐसा करने लगे तो  बाघ के स्थान पर शिवभोले खड़े थे। बाघ के कारण ही गांव का नाम बाघोत पड़ा। प्रारंभ में बाघेश्वर शिवालय का निर्माण कणाणा के राजा कल्याण सिंह रैबारी ने करवाया था जिसका समय समय पर उद्धार होता रहा है।
संतान पाने वाले भी आते हैं दूर दराज से-
   बाघोत स्थित शिवालय उन भक्तों के लिए भी प्रसिद्ध माना जाता है जिनके कोई संतान नहीं होती है। मेले में आकर दंपति अपने हाथों से एक विशाल वटवृक्ष को कच्चा धागा बांधकर सुंदर संतान होने की कामना करता है। जब संतान हो जाती है तो यहां आकर ही धागा खोलता है। यही कारण है कि शिवलिंग के पास ही खड़ा एक वटवृक्ष कच्चे धागों से लदा मिलता है।
पुस्तकों में भी वर्णित है इतिहास-
हरियाणा सरकार की पुस्तकों में भी बाघोत का छोटा उल्लेख है वहीं लेखक एचएस यादव की कृति में संपूर्ण इतिहास दिया गया है।
अनेक धर्मशालाएं--
बाघोत के शिवालय का शिवलिंग स्वयंभू होने के कारण यहां अपार भीड़ भक्तों की वर्षभर चलती है। छोटा सा गांव है किंतु ठहरने के लिए अनेक धर्मशालाएं हैं। प्राकृतिक शिवलिंग के भक्त दर्शन कर प्रसन्न हो जाते हैं।
स्वयंभू है शिवलिंग-
बाघोत का शिवलिंग स्वयंभू है। यही कारण है कि शिवरात्रि एवं महाशिवरात्रि पर यहां अपार भीड़ जुटती है। हरिद्वार एवं ऋषिकेश से गंगाजल लाकर अर्पित करते हैं।
 कई जगह लगेंगे मेले-
महाशिवरात्रि पर जहां कनीना एवं बाघोत के अलावा तथा विभिन्न स्थानों पर मेले लगते हैं। विभिन्न गांवों में शिवालय बने हुए हैं जहां महाशिवरात्रि पर मेले लगते हैं। भंडारे भी लगते हैं।
सजाया गया है शिवालय को-
 बाघेश्वर धाम को सजाया गया है। कतारबद्ध भक्तों के खड़े रहने, पेयजल, पुलिस आदि का प्रबंध किया गया है वहीं भंडारे, ठहरने का प्रबंध भी किया गया है।
हरिद्वार से बाघेश्वर धाम तक लगी है भक्तों की कतार-
 देवनगरी हरिद्वार से बाघेश्वर धाम तक शिव भक्तों की लंबी कतार लगी हुई है। एक ओर जहां शिवालयों में कावड़ अर्पित करने का सिलसिला विभिन्न गांवों में एक सप्ताह पूर्व से शुरू हो गया है वहीं प्राचीन शिवालयों पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।  विभिन्न शिवालयों में कावड़ अर्पित की जाती है किंतु किलोई, इंछापुरी, किरमारा, बाघोत आदि स्थानों पर भारी संख्या में कावड़ चढ़ाई जाती है।
 अर्पित कर रहे हैं विभिन्न कावड़-
भक्तजन खड़ी, बैकुंठी, टोकना झूला, थैला तथा डाक कावड़ लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे हैं। जहां उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश में पुलिस का व्यापक प्रबंध है वहीं हरियाणा के विभिन्न शिविरों में भी व्यापक पुलिस प्रबंध किया गया है। जहां भी देखे जयकारे, बम बम की जयघोष सुनाई पड़ रही है। भक्त आगे बढ़ते जा रहे हैं। इस बार जहां भक्तों में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, देश भक्ति कूट-कूट कर भरी देखने को मिली वहीं अपंग व्यक्ति भी कावड़ लाने में पीछे नहीं हट रहे हैं। जहां महिलाएं भी कावड़ लेकर गंतव्य मार्ग की ओर जा रही है वही बच्चे बुड्ढे और जवान भी कांवड़ ला रहे हैं। विभिन्न शिविरों में जहां युवा वर्ग का जोर है वही कावड़ लाने वालों में बुजुर्ग कम तथा अधेड़ आयु के अधिक देखने को मिल रहे हैं।
राजा दलीप की है तप स्थली-
  यूं तो किवदंति के अनुसार राजा दलीप ने ही संतान प्राप्ति के लिए यहां तप किया था और व्रत एवं उपवास के बाद ही संतान प्राप्त हुई थी। तत्पश्चात तो माना जाता है कि उन भक्तों का तांता लगा रहता है जिनके कोई संतान नहीं होती है। पुराने पीपल के पेड़ के तने पर कच्चा धागा बांधकर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी जाती हे। माना जाता है कि उनकी मन्नतें यहां पूर्ण होती है।
रात को जगमगाता है शिवालय-
बाघोत का शिवालय रात को जगमगाता नजर आता है। रेलिंग लगाकर उनमें से भक्तों का गुजारा जाता है। शिवालय के सामने बड़ा जोहड़ है तथा भक्तों को धीरे धीरे आगे बढऩे दिया जाता है। स्वयंभू शिवलिंग पर जल अर्पित करके भक्त अपने को धन्य समझते हैं।
कई बार नवीनीकरण किया गया-
बाघोत शिवालय का कई बार नवीनीकरण हुआ है। प्रारंभ में कणाणा के राजा कल्याण सिंह ने इसे बनवाया था जिस पर ऊंटों के पैरों के निशान छपवाए गए थे किंतु बाद में पुनर्निमाण के समय ऊंटों के पैर नहीं छपवाए गए। राजा कल्याण सिंह के सैनिकों ने ही यह स्वयंभू खोजा था जहां ऊंटों पर लदा हुआ सोना चांदी लूट लिए गए थे किंतु एक दृष्टांत के बाद लुटेरों को पकड़ लिया गया था। खुश होकर राजा कल्याण सिंह ने शिवालय निर्माण कर स्वयं गंगा जल से जलाभिषेक किया था। बाद में झज्जर के नवाब ने शिवनिंग को उखड़वाना चाहा किंतु असफल होने पर उन्होंने भी यहां पूजा शुरू की। और उन्होंने भी स्वयं गंगाजल अर्पित किया।
हजारो वर्ष पुराना शिवलिंग-
यह शिवलिंग हजारों वर्ष पुराना है तथा समय समय पर यहां कावड़ अर्पित की जाती है। सोमवारों को अपार भीड़ जुटती है।
फोटो कैप्शन 02: गंगाजल अर्पित करते भक्त
             03: रात को जगमगाता शिवालय
            04: रेलिंग की व्यवस्था
           05: बाघोत का शिवालय
              06: स्वयंभू शिवलिंग



तीन लोगों पर मारपीट का केस दर्ज
-बाप-बेटे दो दुकानदारों को पीटा गया
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी वार्ड 4 के अशोक कुमार ने थाना कनीना में तीन लोगों के विरुद्ध मारपीट का केस दर्ज करवाया है। उन्होंने पुलिस में दी शिकायत में बताया कि उन्होंने कनीना सदर थाना के पास दो दुकानें कर रखी है जिन पर फल एवं गन्ने के जूस का काम करते हैं। 2 अगस्त को जब वह अपनी दुकान पर था तो शाम को करीब 3 बजे अशोक कुमार का लड़का गौरव अपनी मोटरसाइकिल लेकर दुकान पर आया और चाबी अशोक कुमार को देकर कहने लगा कि अब आप आराम कर लो। दुकानों पर वह काम करेगा। तभी पड़ोसी ममता, उसका लड़का मनीष, एक अन्य लड़का टाइगर डंडे, लोहे की रोड आदि लेकर आए और अशोक कुमार से कहने लगे कि तुमने किराएदार अनीता कोदुकानों के पास स्कूटी क्यों नहीं खड़ी करने दी जिसने मसाज पार्लर की दुकान कर रखी है। इतना कहकर अशोक कुमार एवं गौरव को दुकान से खींचकर मारपीट शुरू कर दी जिसके चलते गौरव और अशोक कुमार घायल हो गए। उन्हें काफी चोटें आई। जब शोर मचाया तो पवन और अतुल नाम के दो व्यक्तियों ने आकर उन्हें छुड़वाया किंतु जाते समय वे जान से मारने की धमकी दे गए। उनकी शिकायत पर तीन लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।


सुनील कुमार एमपीएचडब्












ल्यू ने भेंट किया एक एसी तथा 10 थ्री सीटर चेयर
---16 साल 10 महीने की सेवा करके सेवानिवृत्त
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कनीना की आवाज। कनीना निवासी एवं मिलनसार सुनील कुमार एमपीएचडब्ल्यू 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हो गए लेकिन उन्होंने अब उप नागरिक अस्पताल के एक्सरे रूम में अपने निजी कोष से  एक एसी स्थापित करवाया तथा 10 थ्री सीटर चेयर स्थापित  करवाई हैं जिन पर करीब एक लाख रुपए खर्च आया है।
सुनील कुमार ने बताया कि उन्होंने पहले एएमसी बतौर 16 साल 7 महीना सेवा दी है और अगस्त 2003 में सेवानिवृत्त हुए थे। तत्पश्चात 24 सितंबर 2010 को एमपीएचडब्ल्यू कनीना उप नागरिक अस्पताल में सेवा देने शुरू की और 31 जुलाई 2026 को 16 साल 10 महीने की सेवा करके सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
उनकी सेवानिवृत्ति में डा. रेनू वर्मा एसएमओ समस्त स्टाफ उपस्थित रहा जिन्होंने सुनील कुमार के कार्यों की सराहना की और कहा कि इस प्रकार की सेवा देने वाले सुनील कुमार धन्यवाद के पात्र हैं।
 फोटो कैप्शन 01: स्थापित एक एसी और दस 3 सीटर चेयर कार्यरत हालत में

Sunday, August 9, 2026



 


151 कलशों में गंगाजल से निकाली कलश यात्रा, सैकड़ों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
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कनीना की आवाज।
प्राचीन शिव मंदिर कनीना से   भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कनीना क्षेत्र में पहली बार  कलशों में हरिद्वार से लाया गया गंगाजल भरा गया। कलश यात्रा कस्बे के चारों ओर चक्कर लगाती हुई वापिस शिव मंदिर में खत्म हुई। बाबा मोलडऩाथ आश्रम के पुजारी महंत रामनिवास ने बताया कि मंगलवार को जागरण का आयोजन किया जाएगा और अगले दिन हवन के साथ भंडारा का आयोजन किया जाएगा। जागरण में मुख्य अतिथि के रूप में प्रमुख समाज सेवी ठाकुर अतरलाल और पूर्व पार्षद मनीष यादव आएंगे। वहीं अरविंद बंसल दीप प्रज्वलित करेंगे। महंत ने बताया कि हर वर्ष जागरण और भंडारे का आयोजन श्रावण मास में किया जाता है पहली बार शिव मंदिर पर कलश यात्रा का आयोजन किया गया है। यात्रा में सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने कलश उठाया और नाचते गाते हुए महादेव का गुणगान किया। यात्रा के दौरान जगह जगह पर श्रद्धालुओं ने मीठे पानी की छबील लगा कर पुण्य कमाया। इस मौके पर पूर्व पार्षद मोहन सिंह,राजू योगी, विक्की, नरेश, सुषमा,कविता, गौरव सैन, इत्यादि भक्त मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 10: महिलाएं कलश के साथ नृत्य करते हुए





व्रतों के भरमार, एक के बाद एक तीन व्रत एक साथ
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कनीना की आवाज।
 3 दिनों तक व्रतों की भरमार है। एक और जहां रविवार 9 अगस्त को एकादशी का व्रत महिलाओं ने रखा वहीं 10 अगस्त को सोमवार का व्रत रखेंगे। यही नहीं 11 अगस्त का शिवरात्रि का व्रत रहेगा। ऐसे में एक साथ तीन व्रत चलेंगे। यह एक अनोखा अवसर है जब तीन व्रत लगातार चलेंगे।



चाय छोडऩे का बीता एक वर्ष
-हरिद्वार में कावड़ लाते वक्त छोड़ी थी चाय
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कनीना की आवाज।
 चाय छोडऩे का अपना ही अलग मजा है। डा. होशियार सिंह यादव पत्रकार एवं लेखक ने जहां करीब वर्ष पहले कावड़ लाते वक्त चाय छोडऩे का प्रण लिया था और आज तक चाय नहीं पी। एक वर्ष पूरा हो गया है। दूसरी बार कावड़ लाई जा चुकी है। ऐसा यहां इसलिए बताया जा रहा है कि चाय शरीर के लिए नुकसान करती है। चाय में कैफीन जहर होता है जो शरीर को नुकसान पहुंचता है। वैसे भी चाय छोडऩे पर बड़ा आनंद आता है। चाय वैसे भी अंग्रेजों की देन मानी जाती है परंतु भारत के लोग जमकर चाय पीते हैं, चाहे कोई भी मौसम हो चाय बगैर जीवन नहीं चलता। अगर इंसान चाहे तो कोई भी बुराई जड़ से छोड़ सकता है।
 उल्लेखनीय है कि डा. होशियार सिंह यादव बीड़ी, सिगरेट तथा अन्य किसी प्रकार का नशा कभी जीवन में नहीं किया। होशियार सिंह का कहना है कि कम से कम एक बुराई कावड़ लाते वक्त त्याग देने से उन्हें अनहद खुशी हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि विज्ञान का व्यक्ति कावड़ क्यों ला रहा है? चाहे कुछ भी कहे आस्था तो है, शरीर स्वस्थ रहता है और कावड़ का नाम भी हो जाता है।



लड़की लापता, एक व्यक्ति पर जताया उसे छुपाने का शक
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कनीना की आवाज।
 भिवानी जिले से अपनी रिश्तेदारी में आई हुई एक लड़की 8 अगस्त को गुम हो गई। उसकी मां ने पुलिस में लापता होने का मामला दर्ज करवाया है। उन्होंने कहा है कि उसकी लड़की की उम्र करीब 20 वर्ष है तथा अपने रिश्तेदारी में वह तथा उसकी लड़की आए हुए थे। कमरे में एक साथ सोए थे किंतु 8 अगस्त को देखा कि लड़की लापता मिली। उन्होंने शक जाहिर किया है कि सुरेंद्र सिरसा जिले का रहने वाला उसे कहीं बहला फुसला कर ले गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।




मुफ्त चिकित्सा शिविर का उठाया 30 मरीजों ने लाभ
-हर माह के दूसरे रविवार को लगता है  शिविर
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कनीना की आवाज।
 सेवा भारती कनीना व उजाला सिग्रस अस्पताल रेवाड़ी द्वारा आयोजित निशुल्क चिकित्सा शिविर कनीना मंडी में संपन्न हुआ। यह कैंप 5 मार्च 2017 से लगातार हर महीने के दूसरे रविवार को लगाया जाता है। लाल शिवलाल धर्मशाला कनीना मंडी में लगे शिविर में रेवाड़ी के लिवर स्पेशलिस्ट डाक्टर पीयूष कुमार, डाक्टर सिमरन कौर, डाक्टर जय श्री द्वारा 30 मरीजों के स्वास्थ्य की गहन जांच की। और उन्हें उचित परामर्श दिया। इस अवसर पर बीपी, शुगर ईसीजी की निशुल्क जांच की गई और दवाइयां वितरित की गई। अस्पताल की ओर से प्रताप यादव, डाक्टर, नर्सिंग स्टाफ किरण, वंदना, पवन आदि ने भाग लिया।
 उल्लेखनीय है कि सेवा भारती कनीना 2017 से ही शाम 4 से 6 बजे निशुल्क प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, आर्य समाज मंदिर कनीना में नियमित रूप से चला रहा है। इसमें अब तक एक लाख से अधिक मरीजों ने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया है। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सिलाई प्रशिक्षण भी दिया जाता है। वर्तमान में गोविंदीबाई धर्मशाला कनीना मंडी में शाम को 3 से 5 बजे तक सिलाई प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। इस मौके पर सेवा भारती के अध्यक्ष सुरेश शर्मा, उपाध्यक्ष नवीन मित्तल सचिव श्याम सुंदर, सह सचिव प्रेम सिंगला कोषाध्यक्ष अमित कुमार, डाक्टर वेद प्रकाश शर्मा, रवि दत्त जांगिड़, यादराम यादव, जगदीश आचार्य सहित कई जन उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन 3: मरीजों की डाक्टर जांच करते हुए




बेटी के जन्म पर खुशियां मनाई, मिटाया भेदभाव , ककराला में मनाया गया कुआं पूजन संस्कार
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव ककराला में हिमांशु यादव, मैनेजर और शुभम की पुत्री का नामकरण संस्कार बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। नवजात का नाम दीक्षा रखा गया।
इस अवसर पर दादा सूबेदार मनोज कुमार और दादी सुनीता देवी ने कहा कि हमारे घर में पोती के आगमन को लक्ष्मी का आगमन माना गया है। हम समाज में किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव का कड़ा विरोध करते हैं। इसी सोच के साथ हमने बेटी के जन्म पर भी कुआं पूजन जैसा शुभ संस्कार कराने का फैसला किया, जो परंपरागत रूप से केवल बेटे के जन्म पर किया जाता है।
मिशन महेंद्रगढ़ अपना जल टीम सदस्य राजकुमार  और अनिल रसूलपुरिया ने हरियाली का प्रतीक पौधा भेंट कर दंपति को पुत्री रत्न की बधाई दी और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के संदेश को दोहराया।
ननहाल पक्ष से नाना ओमप्रकाश यादव ने भावुक होते हुए बताया कि हमारे घर में काफी वर्षों बाद बेटी हुई है। पूरा परिवार दीक्षा के स्वागत की तैयारियों में जुटा है।
कार्यक्रम में डाक्टर सुनील ककरालिया, सूबेदार अजय कुमार, सुमन देवी, हर्ष यादव, पूनम देवी, सूबेदार रामप्रसाद सहित गांव के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और परिवार को बधाई दी।
फोटो कैप्शन 05: बच्ची के नरामकरण पर उपहार देते हुए




लेखक डा. होशियार सिंह ने अपनी कावड़ अर्पित की
-साढ़े 5 दिनों में लाए हरिद्वार से बाघोत तक कावड़
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कनीना की आवाज।
वर्ष 2010 से लगातार कांवड़ ला रहे तथा खाटू श्याम पर हर वर्ष 2010 से ध्वज अर्पित करते आ रहे डा. होशियार सिंह यादव लेखक एवं साहित्यकार ने अपनी कांवड़ बाघेश्वर धाम पर अर्पित कर दी है। वे लगातार कांवड़ ला रहे हैं।
 इस वर्ष सुमेर सिंह चेयरमैन, वेद प्रकाश, भरत सिंह, दलीप सिंह एवं देशराज, मिंटू बोस आदि का ग्रुप कांवड़ लेकर पदयात्रा करते हुए बाघेश्वर धाम पहुंचा और वहां पर अपनी अपनी कांवड़ अर्पित कर दी।
 उल्लेखनीय है कि इस बार उन्होंने यात्रा एक अगस्त 2026 को कनीना से रवानगी की। नीलकंठ, मंशा देवी के दर्शन करने के उपरांत 3 अगस्त को कावड़ पदयात्रा हरिद्वार से शाम दो बजे शुरू की गई। संभवत 8 अगस्त को 350 किमी पदयात्रा पूर्ण कर बाघोत अर्पित कर दी गई।
यहां उल्लेखनीय है कि डा. होशियार सिंह यादववर्ष 2010 से लगातार 350 किमी पदयात्रा कर कावड़ अर्पित करता आ रहा है। 2010 से ही हर वर्ष हुडिय़ा, जैतपुर -राजस्थान पर पदयात्रा कर ध्वज अर्पित करता आ रहा है। 2010 से ही हर वर्ष खाटू श्याम पदयात्रा करके निशान अर्पित करता आ रहा है। इसके अतिरिक्त घड़ी महासर, भैरू का बास, बलवाड़ी धार्मिक स्थानों की पदयात्रा भी कर चुके हैं। उनका नाम तीन बार विश्व रिकार्उ बुक में दर्ज हो चुका है।
होशियार सिंह के कांवड़ लाने चले जाने के कारण कनीना की आवाज ब्लाग पर कोई समाचार नहीं डाला जा सका जिसके चलते पाठकों को निराशा हाथ लगी है किंतु श्री सिंह का कहना है कि भगवान भोलेनाथ सभी की मनोकामना पूर्ण करें, चूंकि घर से दूर होने के कारण एवं भगवान भोलनाथ को याद करने में समय बीता जिसके कारण ब्लाग पर समाचार नहीं डाले जा सके हैं किंतु अब विधिवत रूप से समाचार डाले जाते रहेंगे।
 फोटो कैप्शन 07: डा होशियार सिंह कांवड़ लाते हुए।




मेराथन केवल दौड़ नहीं, स्वस्थ जीवन का संकल्प: नायब सिंह सैनी
-नशे को हराने और मुख्यमंत्री के संकल्प को जीताने नारनौल में उमड़ा जनसैलाब
-मुख्यमंत्री ने स्वयं 5 किलोमीटर दौड़ लगाकर युवाओं का किया उत्साहवर्धन
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कनीना की आवाज।
नारनौल के नूनी शेखपूरा मोड़ पर रविवार को तिरंगा हाथों में लिए यूथ मेराथन व तिरंगा यात्रा में शामिल हुए रिकार्ड जन सैलाब को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और नशा मुक्ति का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने स्वयं 5 किलोमीटर दौड़ में शामिल होकर युवाओं का हौसला बढाया। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव, सांसद धर्मबीर सिंह, नारनौल विधायक औमप्रकाश यादव, महेन्द्रगढ विधायक कंवर सिंह यादव, जिला अध्यक्ष यतेन्द्र राव, यूथ मैराथन की ब्रांड ऐंबेस्डर व कामन वैल्थ गोल्ड मेडल विजेता शर्मिला धनखड़, पंकज नैन आईपीएस, उपायुक्त अनुपमा अंजली भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जब किसी प्रदेश के युवा सुबह-सुबह तिरंगा हाथ में लेकर दौडऩे निकल पड़ते हैं, तब समझ लीजिए कि वह प्रदेश केवल विकास की नहीं, बल्कि जागरूकता, राष्ट्रभक्ति और उज्ज्वल भविष्य की दौड़ भी जीतने वाला है। अगर कोई मुझसे पूछे कि विकसित भारत की सबसे सुंदर तस्वीर कैसी होगी... तो मैं कहूँगा-हाथ में तिरंगा, जीवन में खेल और मन में नशा मुक्त भारत का संकल्प। उन्होंने कहा कि यह मेराथन केवल कुछ किलोमीटर की दौड़ नहीं है। यह स्वस्थ जीवन का संकल्प है। यह नशे के अंधकार से उजाले की ओर बढऩे का संकल्प है। आज नारनौल की धरती से यह संदेश पूरे हरियाणा में जाना चाहिए कि नशा जीवन को समाप्त करता है, जबकि खेल जीवन को संवारता है। 26 जुलाई को यमुनानगर से जो जन-जागरण की यह मशाल जली थी, आज नारनौल की धरती पर वह और अधिक प्रज्वलित दिखाई दे रही है। युवाओं का यह उत्साह बताता है कि हरियाणा नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लडऩे के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह आयोजन हर घर तिरंगा अभियान का भी साक्षी है। वर्ष 2022 में आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान शुरू हुआ यह अभियान आज देश का जन आंदोलन बन चुका है। इस वर्ष यह अभियान वंदे मातरम के 150 गौरवशाली वर्षों को समर्पित है। वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की आवाज़ है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की नई चेतना जगाई। आज हमारी जिम्मेदारी है कि हम नई पीढ़ी को उन बलिदानों से परिचित कराएं, जिनकी बदौलत हमें यह आज़ादी मिली है। हमने संकल्प लिया है कि हर घर तिरंगा अभियान को हरियाणा के गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाया जाएगा। सरकारी विभाग, शिक्षण संस्थान, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज मिलकर इसे जनआंदोलन बनाएंगे। तिरंगा यात्राएं, साइकिल यात्राएँ और अन्य कार्यक्रम स्वतंत्रता सेनानियों तथा शहीदों की स्मृति से जुड़े स्थलों पर आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवा केवल तिरंगा हाथ में न लें, बल्कि उसके पीछे के बलिदान को भी समझें। मुझे विश्वास है कि हमारी माताएं-बहनें, स्वयं सहायता समूह, युवा, किसान, खिलाड़ी और विद्यार्थी इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। तिरंगे के प्रति उत्साह के साथ उसकी मर्यादा का पालन करना भी हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। अभियान के बाद तिरंगे को सम्मानपूर्वक उतारकर सुरक्षित रखें। तिरंगे का सम्मान केवल नियमों का पालन नहीं है। यह उन वीर शहीदों के प्रति हमारी श्रद्धांजलि है, जिन्होंने इसकी आन-बान-शान के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। तिरंगा हमें कर्तव्य सिखाता है। खेल हमें अनुशासन सिखाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर के एक करोड़ से अधिक युवाओं को संबोधित करते हुए नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान का शुभारंभ किया है। उन्होंने कहा कि आज का युवा भारत की अमृत पीढ़ी है, जिस पर 2047 तक देश को विकसित बनाने का दायित्व है और इसके लिए नशे से पूर्णत: दूर रहना अनिवार्य है। प्रधानमंत्री जी ने बहुत सही कहा है कि नशा कुछ पल का हाई जरूर देता है, पर पूरे जीवन को लो कर देता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए हमने 'हरियाणा उदय' के माध्यम से नशा मुक्त हरियाणा के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया है। मैराथन, साइक्लोथॉन, राहगीरी और अनेक जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों युवाओं और नागरिकों को इस जनआंदोलन से जोड़ा गया है। अब तक 2,483 कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 17 लाख से अधिक लोगों ने सक्रिय भागीदारी की है। प्रदेश में 160 नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सिविल अस्पतालों में भी उपचार की व्यवस्था की गई है। अब तक 7,523 लोगों की पहचान कर उनका इलाज कराया जा चुका है, ताकि वे सम्मान के साथ सामान्य जीवन में लौट सकें। नशा तस्करों के विरुद्ध विशेष टास्क फोर्स, एंटी नारकोटिक्स सेल और हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के माध्यम से लगातार कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार नहीं जीत सकती। इसमें परिवार, विद्यालय, पंचायत, खेल संस्थाएँ और समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। यदि समय रहते हम किसी भटके हुए युवा का हाथ पकड़ लें, तो हम केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक पूरा परिवार बचा सकते हैं। मैराथन हमें सिखाती है कि लक्ष्य मिलने तक रुकना नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नारनौल की इस धरती से हम पाँच संकल्प लें कि नशे से दूर रहेंगे, दूसरों को भी बचाएंगे, प्रतिदिन खेल या योग करेंगे, तिरंगे की मर्यादा का पालन करेंगे और राष्ट्र निर्माण के हर अभियान में सक्रिय भागीदार बनेंगे।
कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह ने एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने 10 किलोमीटर मैराथन में महिला वर्ग में प्रथम स्थान पर रही भारती को एक लाख, द्वितीय स्थान पर रही सोनिका को 50 हजार व तीसरे स्थान पर रही नीता रानी को 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया। इसी प्रकार 10 किलोमीटर पुरूष वर्ग में प्रथम स्थान पर रहे मोहित, द्वितीय स्थान पर रहे गौरव व तीसरे स्थान पर रहे शुभम को पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने 5 किलोमीटर मैराथन पुरुष वर्ग में प्रथम रहे केशव, द्वितीय रहे अमित व तीसरे स्थान पर रहे साहिल को मोमेंटो देकर सम्मानित किया। इसी प्रकार 5 किलोमीटर मैराथन महिला वर्ग में प्रथम कोमल, द्वितीय आरती व तृतीय स्थान पर रही जागृति को भी मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर पूर्व डिप्टी स्पीकर संतोष यादव, पूर्व विधायक डॉ. अभय सिंह यादव, पूर्व विधायक सीताराम यादव, क्रिकेट खिलाड़ी जोगेन्द्र शर्मा, पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार, पूर्व जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक व अधिकारी उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 08 व 09: मेराथन दौड़ से संबंधित हैं





बीआर स्कूल में दो दिवसीय सीबीएसई प्रशिक्षण का समापन
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कनीना की आवाज।
बी.आर. आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेहलंग में आयोजित दो दिवसीय सीबीएसई आंतरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरे दिन सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराते हुए उनके शिक्षण कौशल को और अधिक प्रभावी बनाना रहा। दूसरे दिन भी सीबीएसई प्रशिक्षक डा. राज सांगवान ने शिक्षकों को विभिन्न गतिविधियों एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
दूसरे दिन के प्रशिक्षण में शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कक्षा में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने, सकारात्मक शिक्षण वातावरण तैयार करने, विद्यार्थियों के व्यवहार को समझने तथा प्रभावी कक्षा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न तकनीकों को सीखा। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण एवं विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
प्राचार्या ज्योति भारद्वाज ने कहा कि प्रशिक्षण के दोनों दिन शिक्षकों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। सीबीएसई प्रशिक्षक डॉ. राज सांगवान द्वारा दी गई जानकारी शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी रही। हमारा प्रयास रहेगा कि प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को कक्षा शिक्षण में प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
इस अवसर पर चेयरमैन हरिश शर्मा ने कहा कि शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक है। इस दो दिवसीय प्रशिक्षण से शिक्षकों को अपने अनुभवों को साझा करने तथा नई शिक्षण तकनीकों को सीखने का अवसर मिला है। इसका लाभ निश्चित रूप से विद्यार्थियों को मिलेगा।
दो दिवसीय प्रशिक्षण के समापन पर विद्यालय प्रबंधन की ओर से सीबीएसई प्रशिक्षक डॉ. राज सांगवान का आभार व्यक्त किया गया। इस प्रशिक्षण के दौरान दोनों विद्यालयों के विभागाध्यक्ष एवं समस्त स्टाफ उपस्थित रहे। सभी शिक्षकों ने प्रशिक्षण की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा प्रशिक्षक द्वारा दी गई जानकारी एवं सुझावों को ध्यानपूर्वक समझा।
फोटो कैप्शन कक्षा प्रबंधन पर प्रशिक्षण देते डॉ. राज सांगवान।
फोटो कैप्शन  प्रशिक्षण गतिविधियों में भाग लेते शिक्षक।




महाराजा दक्ष प्रजापति प्रतिभा सम्मान समारोह 20 सितंबर को दौंगड़ा में होगा
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कनीना की आवाज।
प्रजापति विकास समिति कनीना की आम सभा का आयोजन रविवार को हरि सिंह के कार्यालय, कनीना में समिति के प्रधान बलवान सिंह की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में समाज की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित किए जाने वाले महाराजा दक्ष प्रजापति प्रतिभा सम्मान समारोह के संबंध में विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि महाराजा दक्ष प्रजापति प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन 20 सितंबर 2026 को ग्राम दौंगड़ा में किया जाएगा। समारोह में समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित करने तथा युवाओं को शिक्षा एवं अन्य क्षेत्रों में आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
सभा में समारोह की तैयारियों एवं आयोजन की रूपरेखा को लेकर भी चर्चा की गई तथा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी सदस्यों से सहयोग करने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर पूर्व प्रधान हवा सिंह, खजांची सुबे सिंह, सह सचिव हरि सिंह, निहाल सिंह, रामकुमार,  सुमेर सिंह,आरडी पूर्व प्रधान धनौंदा बाबूलाल, नरेंद्र पाल , कैप्टन बलवंत सिंह, राजेंद्र सिंह सीहोर, शेर सिंह मैकेनिक, जय सिंह, हुकम चंद, नवरत्न प्रजापति, योगेंद्र प्रजापति कनीना सहित समिति के अन्य सदस्य एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: प्रजापति की कनीना में बैठक




एसडी स्कूल में पीटीएम का हुआ आयोजन
-850 अभिभावकों ने लिया भाग
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कनीना की आवाज। एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ककराला में कक्षा नर्सरी से बारहवीं तक के अध्यापक-अभिभावक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में 850 से अधिक अभिभावकों ने भाग लिया।
विद्यालय उपनिदेशक पूरन सिंह ने अपने वार्षिक पाठ्यक्रम के बारे में विस्तृत वर्णन करते हुए बतया कि एसडी विद्यालय खेल एवं गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई करवाता है ताकि बच्चा उसे मनोरंजन के साथ सीखे। सभी अभिभावकों ने अग्रिम सोच का परिचय देते हुए बच्चों के भविष्य के लिए विद्यालय प्रबंधन व सभी संबंधित अध्यापकों के साथ अध्ययन संबंधी समस्याओं के समाधान, शैक्षिक उपलब्धियों के साथ-साथ अन्य गतिविधियों व विषयों पर विमर्श किया। अभिभावकों ने अपने बच्चों की दिनचर्या उनके व्यवहार समय-सारिणी, रुचि आदि से संबंधित पहलुओं से प्रबंधन व संबंधित अध्यापकों से परिचित करवाया और अपने बच्चों की रिपोर्ट लेने में काफी रुचि दिखाई। विद्यालय सी ए ओ नरेन्द्र यादव ने अध्यापक-अभिभावक बैठक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बैठक जागरूक अभिभावकों के लिए अध्यापकों से समय-समय पर विचार विमर्श करने व बच्चों के लिए सही मार्ग का चुनाव व सहयोग का आधार है। जिस प्रकार तीन भुजाएं एक साथ मिलकर त्रिभुज का आकार बनाती है उसी प्रकार अभिभावक के सहयोग से बच्चे बड़े से बड़े लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते है। उन्होंने यह भी बताया कि यह बैठक शैक्षिक जानकारी के साथ-साथ सम्पूर्ण व्यवहार, सामथ्र्यता से संबंधित बातों के आदान-प्रदान के लिए आयोजित की जाती है। अध्यापक एवं अभिभावकों का विचार-विमर्श छात्र के जीवन को नई दिशा प्रदान करता है। बच्चे के शैक्षणिक विकास में विद्यालय के साथ-साथ अभिभावक की भी अहम् भूमिका होती है।
 इस अवसर पर विद्यालय सीईओ आर. एस. यादव, डिप्टी डायरेक्टर पूर्ण सिंह, कोआर्डिनेटर स्नेहलता, सहित सभी कोआर्डिनेटर्स एवं समस्त स्टाफ उपस्थित रहा और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।
फोटो कैप्शन 01: एसडी स्कूल में पीटीएम