नई सिरीज -01
बीते जमाने के कनीना के हीरे, आज भी है और कल भी रहेंगे
-आज के शिक्षा जगत के हीरे हैं रामभगत कनीना
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कनीना की आवाज। बीते जमाने के कुछ ऐसे हीरो कनीना में हुए हैं जो आज भी है और भविष्य में भी रहेंगे। ऐसे ऐसे शिक्षाविद जो अपने समय के बेहतरीन शिक्षक होते थे, ट्यूशन आदि करते थे लेकिन उनका दूर दराज तक नाम था, आज भी वो नाम कमा रहे हैं और भविष्य में भी नाम कमाते रहेंगे। वैसे तो ऐसे हीरों की कमी नहीं हैं परंतु कनीना की आवाज में इस प्रकार के लोगों का साक्षात्कार समय-समय पर प्रकाशित किया जाएगा। ऐसे हीरो से आपको मिलवाया जाएगा। यह कलम निकट भविष्य में शुरू किया जा रहा है। यूं तो कुतरूं प्राचार्य, कुतरूं लोग, चमचे, चमचाराम, चोर साहब, महाचेार साहब, दूसरे की जमीन हड़पने वाले, नकटे एवं कई प्रकार के लोग भी देखे किंतु इनमें कुछ चेहरे अलग थलग नजर आये। चाहे उनकी संख्या नगण्य है किंतु साफ सुथरी छवि के अतिरिक्त जिन्होंने बच्चों की जिंदगी को संवारा है, उनसे रू-ब-रू करवाएंगे।
आज के मशहूर शिक्षा जगत के हीरे रामभगत कनीना से मिलवाते हैं-
कनीना निवासी रामभगत वर्तमान में आकाश पालिटेक्निक कनीना में कार्यरत हैं जो जितने लोकप्रिय बीते समय में रहे हैं उतने ही लोकप्रिय आज हैं और भविष्य में भी इतने लोग प्रिय रहेंगे। इसमें कोई शक नहीं। अपने जमाने के गणित के अच्छे ज्ञाता रहे हैं और कोचिंग देते रहे हैं। दूर दराज तक अपने समय में इनका गणित पढ़ाने में नाम होता था। यही कारण है कि आज के हीरो बतौर उन्हीं से रूबरू करवाया जा रहा है। सौम्य प्रकृति के तथा सदा मेहनत में विश्वास करने वाले रामभगत आज भी अपने साथी और अपने समय के लोगों से ठीक उसी प्रकार मिलते हैं जैसे उसे वक्त मिलते थे। पढ़ाने में विशेषकर गणित पढ़ाने में उनका कोई सानी नहीं है। उसे दौर में जब कोचिंग के लिए बहुत कम शिक्षक मिलते थे विशेष कर 70 के दशक पूरा होते ही बहुत कम लोग मिलते थे और उसे जमाने में जब बेहतरीन गणित पढ़ाते थे तो साफ जाहिर है कि वे प्रमुख हीरो रहे हैं। आज के दिन कितनी ही कोचिंग की दुकान बन गई है, कोचिंग के संस्थान बन गए, कोचिंग देने वाले बन गए लेकिन उस जमाने में कनीना में कोचिंग देने में केवल तीन ही शिक्षक होते थे और उनमें से एक रामभगत होते थे। रामभगत का जीवन बहुत सरल रहा है तथा मेहनत में विश्वास किया है। आज भी उनका यही कहना है कि जो मेहनत करेगा वह सफल होगा। कुछ लोग घर में बैठे हुए और यह कहते हैं हम तो आराम से जीवन जी रहे हैं जबकि रामभगत का कहना है कि जब मेहनत करके जीता है वह आराम की जिंदगी है। कितनी ऊंचे ख्याल है और एक बेहतरीन शिक्षक माने गए हैं। यह सत्य है कि एक जमाना था जब भाई भतीजावाद, रिश्वतखोरी पूरे चरम पर थी। ईमानदारी और बेहतर अंक वाले पीछे रह जाते थे। उदाहरण एक नहीं कनीना के तीन उदाहरण है जिनमें रामभगत भी एक है जो सिफारिश न होने के कारण सरकारी नौकरी नहीं पा सके क्योंकि सरकारी नौकरी के लिए या तो रिश्वत देनी होती थी या किसी की मंत्री संतरियों से पहुंच होना जरूरी था और इन दोनों में ही कनीना के अपने जमाने के तीन हीरो पीछे रह गए। परिणाम आज भी भुगत रहे हैं परंतु किसी प्रकार भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। तीनों का नाम आज भी है। रामभगत जिनमें से एक ऐसी शख्सियत है जिनके जीवन से सबक लेनी चाहिए और इनका उदाहरण देकर अपने बच्चों को मेहनत के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि आने वाले समय में उनके बच्चे कामयाब हो सके।
1982 में दसवीं की परीक्षा राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल कनीना से पास की। परिवार की हालात अधिक अच्छी नहीं थी। यूं कहा जाए कि गरीब हालात में ही जीवन यापन किया तो गलत नहीं होगा। पिता मामनराम तत्कालीन पोस्टमैन थे वहीं मांं शांति देवी गृहणि थी। रामभगत के पिता पोस्टमैन थे जिन्होंने ईमानदारी से जीवन जिया। इसी परिवार में 25 मई 1966 को रामभगत ने जन्म लिया।
उनसे एक बड़ा भाई और परिवार में चार बहने हैं। दसवीं के बाद केएलपी कालेज रेवाड़ी से ग्रेजुएशन किया आरबीएस रेवाड़ी से बीएड करने के बाद नौकरी के लिए प्रयास किया किंतु अधिक प्रयास इसलिए नहीं किए कि भ्रष्टाचार एवं बेईमानी पूरे यौवन पर थी। भाई-भतीजावाद की नौकरी रह गई थी। वरना एक आश्चर्य है कि उस वक्त बीए,बीएड या बीएससी बीएड को नौकरी न मिलना कितनी अचरज की बात है। यहां उल्लेखनीय है कि उस दौर में रमेश कुमार एसएनडी स्कूल संचालक, रामभगत तथा होशियार सिंह तीनों कोचिंग करते थे। तीनों अपने समय के ज्ञानवान शिक्षक रहे हें किंतु रमेश कुमार एवं रामभगत को सरकारी नौकरी नहीं मिली रही होशियार सिंह जो अपने समय के बीएससी, बीएड थे , उन्हें भी रोय पीटकर कच्ची नौकरी उस वक्त मिली जब सैकड़ों साक्षात्कार दिये थे।
रामभगत कोचिंग करते थे और अपने समय के गणित के आस पास क्षेत्रों में नाम था। गणित शिक्षण के लिए रामभगत अपने समय में जाने जाते थे, विज्ञान शिक्षण के लिए होशियार सिंह का नाम था तो कई विषयों के ज्ञाता रमेश कुमार रहे हैं। नौकरी के लिए रामभगत ने प्रयास किया किंतु बेईमानी, रिश्वतखोरी से परेशान हो चले। ऐसे में मजबूरन पेट पालने के लिए कोचिंग चलाते रहे। कोचिंग सही चलने के कारण फिर सरकारी नौकरी का प्रयास कम कर दिया। नौकरी में चयन की व्यवस्था मेरिट बेस पर नहीं होने के कारण भी खिन्न रहे। वर्ष 2003 तक कोचिंग का काम जारी रखा। तत्पश्चात एमडी हाई स्कूल में 10 सालों तक काम करने के बाद आकाश पालिटेक्निक कनीना में 2010 से लगातार शिक्षण का कार्य कर रहे हैं।
रामभगत का बड़ा लउ़का राहुल एमएससी भौतिक शास्त्र, नेट जेआरएफ किए हुए हैं तथा वर्तमान में बिजली विभाग में धनौंदा में कनिष्ठ अभियंता के पद पर कार्यरत है। उनका छोटा लड़का भारत भूषण एमएससी भौतिक शास्त्र से दिल्ली टेक्नोलाजी विश्वविद्यालय से एमएससी की परीक्षा पास करके वर्तमान में दिल्ली टेक्नोलाजी विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। उन्होंने जेम की परीक्षा भी पास की हुई हे। वैसे तो उनका हमीरपुर में एमएससी में एडमिशन हुआ था किंतु वहां नहीं जाकर के नजदीक के डीटीयू दिल्ली में प्रवेश लिया है।
क्या संदेश है रामभगत का-
एक और जहां धन परिवार को पालने में मदद करता है वहीं धन ही परिवार को बर्बाद करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में धन को जोडऩा भी उचित नहीं। अपने बच्चों पर ध्यान देना चाहिए। जिसके बच्चे कामयाब हैं उसका जीवन सफल है।बुआ मनभावती रही है कनीना में प्रसिद्ध
-जोहड़ी की सफाई करने एवं लोगों को जल पिलाने में जीवन जिया-
रामभगत की दादी मनभावती मशहूर महिला रही है। मनभावती कनीना की बुआ के नाम से जानी जाती थी। राजस्व विभाग में मन भावती नाम से आज भी जोहड़ी है जो वर्तमान में अटेली मोड़ से पहले, धनौंदा के लिए जाने वाले नए सड़क मार्ग पर करीब 1 किलोमीटर चलकर आती है। यहां एक बरसात के पानी कोई इकट्ठा करने के लिए मनभावती ने जोहड़ी की जीवनभर सफाई की और लोगों के लिए जन सेवा में जुटी रही। मानका से पानी लाकर आने जाने वालों को पिलाती थी। जब कुएं कोई इक्का दुक्का होते थे उस समय गर्मी, सर्दी या बरसात पानी की व्यवस्था करके प्रतिदिन लोगों को पानी पिलाती थी। घड़ों में भरकर पानी रखती थी ताकि आने जाने वाले लोग ठंडा पेयजल प्रयोग करें। ऐसे समाजसेवी या सेविका अब कम ही मिलते हैं।
फोटो कैप्शन: रामभगत
अब तक 2106 क्विंटल गेहूं की हुई सरकारी खरीद, सरसों के कोई खरीद नहीं
-2985 क्विंटल की रही गेट इंटरी
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कनीना की आवाज। कनीना अनाज मंडी स्थित चेलावास में 6200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से सरसों खरीदने का आदेश है किंतु अभी तक सरकारी तौर पर कोई सरसों नहीं खरीदी गई है। निजी स्तर पर 6210 रुपए से 6500 रुपए के भाव पर किसान अपनी सरसों बेच रहे हैं। इस बार सरकारी खरीद कम बताई जा रही जबकि निजी स्तर पर सरसों की मांग अधिक है और अधिक मूल्य पर खरीददार खरीद रहे हैं। अब तक निजी स्तर पर गुरुवार को 417 क्विंटल सरसों खरीदी गई। अब तक कुल 10893 क्विंटल सरसों खरीदी जा चुकी है वहीं गुरुवार को निजी स्तर पर 19 किसानों से 398 क्विंटल सरसों खरीदी गई। अब तक 417 किसानों से सरसों खरीदी जा चुकी है।
उधर गेहूं की सरकारी खरीद 2585 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से जारी है। अभी तक 10882 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है जबकि गुरुवार को खरीद का कार्य जारी रहा। गुरुवार को 2106 क्विंटल गेहूं खरीदा गया। अब तक कुल 13399 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। अब तक 401 किसानों के गेट पास जारी हो चुके हैं। गेहूं सरकारी तौर पर ही बेचने के लिए किसान अनाज मंडी पहुंच रहे हैं। उठान का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
फोटो कैप्शन 05: कनीना अनाज मंडी में गेहूं की खरीद का नजारा।
प्रीतम का चयन हुआ आफिस सुपरीटेंडेंट(ओएस), इनकम टैक्स विभाग में
- मिल रही है बधाइयां
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कनीना की आवाज। कनीना के वार्ड 13 निवासी प्रीतम कुमार का हाल ही में आफिस सुपरीटेंडेंट, इनकम टैक्स विभाग में चयन हुआ है। उनका यह चयन सीजीएल, एसएससी 2025 के तहत हुआ है। उन्हें बधाइयां मिल रही हैं। मिली जानकारी अनुसार प्रीतम ने दसवीं तथा 12वीं की शिक्षा कनीना से प्राप्त की तथा बीएससी की डिग्री पितामह कान्ह सिंह डिग्री कालेज से प्राप्त की। उन्होंने घर पर ही आनलाइन कोचिंग ली। दूसरे अवसर में उनका चयन हो गया है। उनको बधाई देने वालों में मोहन कुमार पूर्व पार्षद, फायर आफिसर राकेश कुमार कनीना तथा अनेक प्रमुख जन हैं। प्रीतम ने इस उपलब्धि के लिए अपने माता-पिता गुरुजनों और साथियों का आभार जताया है।
फोटो कैप्शन: प्रीतम
31 मई से पहले पानी के बिलों का भुगतान कर लें सरचार्ज माफी का लाभ-उपमंडल अभियंता
-31 मई के बाद बकाया बिलों वाले उपभोक्ता रहें सावधान, कटेगा कनैक्शन
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कनीना की आवाज। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा जिला महेन्द्रगढ़ के शहरी क्षेत्रों नारनौल, नांगल चौधरी, अटेली नांगल, कनीना तथा महेन्द्रगढ़ में पानी एवं सीवर के बकाया बिलों की अदायगी को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को बकाया बिलों पर लगने वाले सरचार्ज में राहत प्रदान की गई है, जिसका लाभ 31 मई 2026 तक लिया जा सकता है।
यह जानकारी देते हुए उपमंडल अभियंता मुकेश कुमार शर्मा ने बताया कि यदि कोई उपभोक्ता 31 दिसंबर 2025 तक के अपने बकाया पानी एवं सीवर बिलों की राशि 31 मई 2026 तक जमा कर देता है, तो उस पर लगाया गया 100 प्रतिशत सरचार्ज माफ कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब उपभोक्ताओं से केवल वर्तमान बकाया राशि पर एक बार 10 प्रतिशत जुर्माना लिया जाएगा, जबकि पहले पूरे बिल पर सरचार्ज लगाया जाता था।
उपमंडल अभियंता मुकेश कुमार शर्मा ने बताया कि आगामी गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ता विशेष सावधानी बरतें। अपने पानी के बिलों की समय पर अदायगी करें। नलों को खुला न छोड़ें, प्रत्येक नल पर टोंटी लगाएं तथा पेयजल से बगीचों आदि की सिंचाई न करें। यदि कोई उपभोक्ता ऐसा करता पाया जाता है, तो उसकी वीडियोग्राफी कर उसका पानी का कनेक्शन काटा जाएगा । आवश्यकता पडऩे पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में प्रत्येक उपभोक्ता को समान मात्रा में पानी उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। वहीं उपभोक्ताओं का भी कर्तव्य है कि वे विभाग के इस अभियान में सहयोग करें और पानी को व्यर्थ न बहाएं।
उन्होंने बताया कि मीटर वाले कनेक्शन धारकों को यह छूट सीधे प्रदान की जाएगी, जबकि जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपने पानी के कनेक्शन पर मीटर नहीं लगवाया है, उन्हें पहले मीटर लगवाना अनिवार्य होगा। बिना मीटर वाले उपभोक्ताओं को इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा।
उपमंडल अभियंता मुकेश कुमार शर्मा ने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे 31 मई 2026 तक अपने सभी बकाया पानी एवं सीवर बिलों की अदायगी अवश्य करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि 31 मई के बाद जिन उपभोक्ताओं के बिल बकाया रहेंगे, उनके पानी एवं सीवर कनेक्शन काट दिए जाएंगे तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी, जिसके लिए संबंधित उपभोक्ता स्वयं जिम्मेदार होंगे।
उन्होंने बताया कि उपभोक्ता अपने बिलों का भुगतान गूगल पे, पेटीएम, भीम यूपीआई, सरल केन्द्र, विभाग की वेबसाइट तथा संबंधित डिवीजन की बिल शाखा में जाकर भी कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त पानी एवं सीवर से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए विभाग के टोल फ्री नंबर 18001805678 का प्रयोग किया जा सकता है।
इस वित्त वर्ष में 100 प्रतिशत रिकवरी का लक्ष्य: जिला सलाहकार--
जिला सलाहकार मंगतुराम सरसवा ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में पानी एवं सीवर कनेक्शनों की लगभग 60 प्रतिशत रिकवरी हुई थी। इस वित्त वर्ष में इसे 100 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए पांचों शहरों में अप्रैल और मई माह के दौरान रिकवरी अभियान को तेज कर दिया गया है। दिसंबर 2025 तक के बकाया बिलों पर सरचार्ज माफी के कारण उपभोक्ताओं को काफी फायदा होगा। जो उपभोक्ता 31 मई तक अपने बिलों का भुगतान कर देंगें, उन्हें यह लाभ मिलेगा तथा वे विभागीय कार्रवाई से भी बच सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इस वित्त वर्ष में नारनौल में 16242 उपभोक्ताओं पर लगभग 116 लाख रुपये बकाया हैं। वहीं नांगल चौधरी शहर में 2065 उपभोक्ताओं पर करीब 15 लाख रुपए,, महेन्द्रगढ़ में 15868 उपभोक्ताओं पर 114 लाख रुपए, अटेली में 2648 उपभोक्ताओं पर 19 लाख रुपए तथा कनीना में 2380 उपभोक्ताओं पर 17 लाख रुपये का एरियर बकाया है।
चौकीदार के रिक्त पदों के लिए आवेदन आमंत्रित
-5 मई तक तहसील कार्यालय में कर सकते हैं आवेदन
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कनीना की आवाज। जिल महेंद्रगढ़ के तीन गांवों के चौकीदारों के रिक्त पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। संबधित गांवों के इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार संबंधित तहसील कार्यालय में चौकीदार के रिक्त पदों पर 5 मई तक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद आने वाले आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।
यह जानकारी देते हुए उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने बताया कि कनीना तहसील के गांव खेड़ी व बाघोत तथा अटेली तहसील के गांव खोड के चौकीदार के रिक्त पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।
गोशाला में अक्षान ने मनाया 10वां जन्मदिन, 5100 रुपए का किया दान
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कनीना की आवाज। श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में आज कोटिया निवासी दी स्कालर गुरुकुल कनीना के चेयरमैन सुरेश कुमार एवं उनकी पत्नी बाला देवी ने अपने पुत्र अक्षान का 10वां जन्मदिन सादगीपूर्ण एवं सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर परिवारजनों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने गोमाता की सेवा कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
जन्मदिन के इस खास मौके पर अक्षान की दादी रामकला, आचार्य रमेश शास्त्री, सोनिया देवी, अंशुल यादव, आराधना तथा नीलम (लिली) भी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर गोशाला में गायों को चारा खिलाया और सेवा कार्य में भाग लिया।
परिवार की ओर से गोशाला को 5100 रुपए की सहयोग राशि भी भेंट की गई। गौशाला प्रधान भगत सिंह ने अक्षान को आशीर्वाद देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और परिवार के इस सेवा भाव की सराहना की।
फोटो कैप्शन 01: गोशाला में जन्म दिन मनाते अक्षान
कृष्णावती नदी में फिर बहेगा पानी
- किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
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कनीना की आवाज। महेंद्रगढ़ क्षेत्र के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रातां से मानपुरा तक बहने वाली कृष्णावती नदी की जल्द ही सफाई करवाई जाएगी, जिससे लंबे समय से रुका हुआ पानी अब आगे तक पहुंच सकेगा।
नहर महकमे के जूनियर इंजीनियर दीपक कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि कृष्णावती नदी की पहले खुदाई तो की गई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से पानी सही तरीके से आगे नहीं जा पाया था। इसी वजह से बीच में ही पानी रुक जाता था और किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था।
अब जैसे ही किसानों की फसल कट चुकी है, विभाग ने निर्णय लिया है कि नदी की पूरी तरह से सफाई की जाएगी और उसके बाद इसमें दोबारा पानी छोड़ा जाएगा। इससे न केवल पानी का प्रवाह सुधरेगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में नहर के पानी का स्तर भी बढ़ेगा और किसानों को नियमित रूप से पानी मिल सकेगा। इसको लेकर प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि कृष्णावती नदी की भूमि पर अभी जुताई-बुवाई न करें, क्योंकि जल्द ही वहां सफाई कार्य शुरू होने वाला है और पानी छोड़ा जाएगा।
वहीं इस पूरे मुद्दे पर सरपंच मिंटू गोमला ने बताया कि यह समस्या उन्होंने पहले ही उठाई थी। उन्होंने कहा कि महकमे ने आश्वासन दिया था कि फसल कटाई के बाद नदी की सफाई करवाई जाएगी और पानी की व्यवस्था को पूरी तरह बहाल किया जाएगा।
किसानों के लिए फायदा होगा और खेतों तक पहुंचेगा नियमित पानी,नहर का जल स्तर बढ़ेगा,सिंचाई की समस्या होगी दूर, आसपास के क्षेत्रों में हरियाली बढ़ेगी।
फोटो कैप्शन 02: कृष्णावती नदी जिसमें अब बहेगा पानी
डा. रामानंद यादव को अरावली पुरस्कार
-कनीना के पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं
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कनीना की आवाज। कनीना के खंड शिक्षा अधिकारी रहे एवं रेवाड़ी से उप-जिला शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त डिगरोता निवासी डा. रामानंद यादव को विवेक बादल बाजपुरी संपादक एवं प्रकाशक द्वारा आमंत्रित रचनाओं में तीन कविताएं सम्मिलित होने पर दो काव्य संग्रह , पर्यावरण प्रेमी सम्मान एवं बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति जिसने चार बार विश्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं ,मेडल देकर सम्मानित किया गया है। बाजपुरी ने राष्ट्रीय स्तर पर अरावली की महता व अरावली के सरंक्षण हेतु समाज में जागरूकता लाने के लिए इन रचनाओं को आमंत्रित किया था , जिसमें सत्रह रचनाकारों की प्रतिभागिता शामिल है; क्योंकि अरावली मात्र पत्थर न होकर भारतीय संस्कृति , भारतीय इतिहास व विशुद्ध पर्यावरण का जीवंत उदाहरण है। आज अंधाधुंध खनन ने इसके अस्तित्व को संकट में डाल दिया है। इन रचनाओं का उद्देश्य समाज को विकास और विनाश के प्रति अवगत कराना है ताकि अरावली का सौंदर्य बना रहे। डा. रामानंद यादव को यह सम्मान मिलने पर सभी ने प्रसन्नता जाहिर की है।
फोटो कैप्शन 04: डा. रामानंद को अवार्ड मिलने पर दिखाते हुए

























































