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Thursday, April 23, 2026



 



सरकारी दर पर 2961 क्विंटल खरीदी सरसों
-गेहूं की कुल खरीद पहुंची 74746 क्विंटल
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कनीना की आवाज।
कनीना में सरकारी दर एवं निजी स्तर पर सरसों की खरीद जारी है। सरकारी तौर पर करीब 2961 क्विंटल सरसों 6200 प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी गई। । अब तक किसान प्राइवेट स्तर पर सरसों बेच रहे हैं। नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में निजी स्तर पर सरसों बेचने वाले भारी संख्या में किसान आ रहे हैं और निजी स्तर पर करीब 23886 क्विंटल सरसों खरीदी जा चुकी है। अब तक 19110 क्विंटल सरसों की लिफ्टिंग की जा चुकी है।
 विस्तृत जानकारी देते हुए जगराम यादव सीनियर मैनेजर हैफेड ने बताया कि अब तक 2961 क्विंटल सरसों सरकारी तौर पर खरीदी गई है। अशोक कुमार डीइओ/डाटा इंट्री आपरेटर ने बताया कि कनीना की अनाज मंडी स्थित चेलावास में अब तक करीब 74746 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। सरकारी तौर पर यह गेहूं खरीदा गया है और अब तक करीब 55500 क्विंटल गेहूं का उठान किया जा चुका है।
फोटो कैप्शन 03: कनीना अनाज मंडी में सरसों की खरीद





धनौंदा में पंच के लिए आया एक नामांकन
-कनीना के पांच गांवों में होंगे पंचों के उप चुनाव
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कनीना की आवाज।
कनीना उप-मंडल के पांच गांवों के पंचों के उप चुनाव होंगे जिनमें नामांकन का काम जारी है। ये पांच गांव हैं भोजावास,कपूरी, स्याणा, धनौंदा और छीथरोली प्रमुख हैं। अभी तक धनौंदा में पंच के लिए एक नामांकन भरा गया है। इस संबंध में एआरओ सोमवीर धनखड़ ने बताया कि एक नामांकन भरा जा चुका है। नामांकन भरने की अंतिम तिथि 25 अप्रैल है।




वार्ड 14 उपचुनाव
- सियासी सरगर्मियां तेज, चुनावी पारा चढ़ा
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कनीना की आवाज।
कनीना कस्बे के वार्ड नंबर 14 में होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। बढ़ती गर्मी के बावजूद उम्मीदवारों की चुनावी दौड़-धूप और जनसंपर्क अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। विभिन्न गुटों और निर्दलीय संभावित प्रत्याशी घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं।
अभी तक एक भी नामांकन नहीं भरा है। नामांकन से पहले वोट मांगने की प्रक्रिया जारी है। अभी तक एक दर्जन के करीब संभावित प्रत्याशी वोट मांग रहे हैं। एक ओर तपती गर्मी उस पर चुनावी सरगर्मी और अब वोट मांगने की गर्मी वार्ड 14 के वोटरों को चैन की सांस नहीं लेने दे रही है।
चुनावी माहौल में इस बार मतदाता भी काफी जागरूक नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि नगरपालिका के प्रधान और उपप्रधान चुनाव के समय जितनी सक्रियता दिखा रहे हैं, यदि वही प्रतिबद्धता पिछले एक वर्ष के कार्यकाल में विकास कार्यों में दिखाई जाती तो आज इस तरह घर-घर जाकर वोट मांगने की जरूरत नहीं पड़ती।
इस उपचुनाव में कुछ दिलचस्प समीकरण भी देखने को मिल रहे हैं। एक निजी स्कूल संचालक द्वारा दो-दो प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारने की चर्चा जोरों पर है, जिस पर मतदाता अपने स्तर पर आकलन कर रहे हैं। जिन्होंने कस्बे के विकास के लिए कोई भी कार्य नहीं किया हो और पहले पार्षद आदि रह चुका हो किंतु अब चुनाव की तैयारी में जुटा हो उसको लेकर भी मतदाताओं के बीच मूल्यांकन का दौर जारी है। कुछ संभावित उम्मीदवारों के सामाजिक और व्यक्तिगत रिकार्ड को लेकर भी मतदाताओं में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह उपचुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बदलाव का संकेत भी दे सकता है। मतदाताओं की बढ़ती जागरूकता और मुद्दों पर केंद्रित चर्चा इस चुनाव को और अधिक रोचक बना रही है।
  स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे इस बार विकास, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। आने वाले दिनों में चुनावी गतिविधियों के और तेज होने की संभावना है, जिससे वार्ड 14 का यह उपचुनाव कस्बे की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।




कनीना में उपचुनाव के मद्देनजर शस्त्र जमा कराने के आदेश
कनीना वार्ड-14 व विभिन्न गांवों में सुरक्षा के मद्देनजर धारा 163 लागू
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कनीना की आवाज।
जिले के विभिन्न गांवों और कनीना नगर पालिका के वार्ड नंबर 14 में आगामी 10 मई को होने वाले उपचुनावों के दौरान शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। जिलाधीश अनुपमा अंजली ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जिला की सीमाओं के भीतर आग्नेयास्त्र और गोला-बारूद ले जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। चुनावी प्रक्रिया संपन्न होने तक प्रभावी रहने वाले इन आदेशों के तहत सभी शस्त्र लाइसेंस धारकों को अपने हथियार संबंधित पुलिस थानों या अधिकृत शस्त्र डीलरों के पास अनिवार्य रूप से जमा कराने होंगे।
यह निर्देश विशेष रूप से फतेहपुर, छिथरोली, स्याना, खुडाना, बुडवाल और कनीना वार्ड-14 सहित उन सभी क्षेत्रों के लिए जारी किए गए हैं जहां मतदान होना है।
प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल ड्यूटी पर तैनात वर्दीधारी पुलिस, सैन्य व अर्धसैनिक बलों के कर्मियों, बैंक सुरक्षा गार्डों और खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले अधिकृत खिलाडिय़ों को ही नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी। अन्य किसी भी स्थिति में हथियार रखने की आवश्यकता होने पर लाइसेंस धारक जिला प्रशासन द्वारा गठित विशेष स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
जिलाधीश ने स्पष्ट किया है कि संबंधित थाना प्रबंधक और शस्त्र डीलर जमा किए गए हथियारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी होंगे। आदेशों की अवहेलना या उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 तथा अन्य सुसंगत कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।



कनीना पुलिस की कामयाबी
 राजस्थान के लूट के मामले में पीओ (कनीना थाने का हिस्ट्रीशीटर) पकड़ा
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कनीना की आवाज।
जिला पुलिस द्वारा अपराधियों और भगोड़ों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत आज थाना शहर कनीना की पुलिस टीम ने सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए राजस्थान के सूरजगढ़ थाने के एक पुराने लूट के मामले में फरार चल रहे उद्घोषित अपराधी (पीओ) और थाना शहर कनीना के हिस्ट्रीशीटर मनजीत निवासी उन्हाणी को काबू कर लिया है।
आरोपी मनजीत थाना शहर कनीना का हिस्ट्रीशीटर है, जिसके खिलाफ अलग-अलग थानों में हत्या, लूट, मारपीट, लडाई–झगड़े, आर्म्स एक्ट के तहत करीब 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं। आरोपी राजस्थान के थाना सूरजगढ़ में वर्ष 2009 में दर्ज लूट और मारपीट के एक मामले में लंबे समय से उद्घोषित अपराधी (पीओ) चल रहा था। पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद आरोपी मनजीत को गहन पूछताछ के लिए थाना शहर कनीना लाया गया। यहां आवश्यक पूछताछ और कार्रवाई पूरी करने के उपरांत, आरोपी को आगामी कानूनी कार्रवाई के लिए थाना सूरजगढ़ (राजस्थान) की पुलिस टीम के हवाले कर दिया गया है।
इस गिरफ्तारी के माध्यम से जिला पुलिस ने यह कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है कि जिले में अपराध और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। जिला पुलिस अपराधियों, भगोड़ों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।
फोटो कैप्शन 02: पकड़ा गया पीओ




कनीना नगरपालिका में तीसरे दिन भी नहीं आया कोई नामांकन
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कनीना की आवाज।
नगरपालिका कनीना के वार्ड संख्या 14 में होने वाले उपचुनाव को लेकर जारी नामांकन प्रक्रिया के तीसरे दिन भी नामांकन केंद्र पर कोई नामांकन पत्र नहीं आया।
चुनाव रिटर्निंग अधिकारी (नगरपालिका कनीना) एवं एसडीएम डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि नामांकन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है, परंतु आज शाम तक किसी भी उम्मीदवार द्वारा पर्चा नहीं भरा गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विस्तृत दैनिक रिपोर्ट जिला उपायुक्त तथा राज्य निर्वाचन आयोग, पंचकूला को प्रेषित कर दी गई है।




पंचायती-राज दिवस-24 अप्रैल
लोकतंत्र की बुनियादी संरचना है पंचायती राज-राधेश्याम
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कनीना की आवाज।
पंचायती-राज दिन भारतीय लोकतंत्र की उस बुनियादी संरचना को समर्पित है, जो गांव-गांव में जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता और विकेंद्रीकरण की भावना को मजबूत करती है। पंचायती-राज केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है, जहां जनता स्वयं अपने विकास का निर्णय लेती है। ये विचार राष्ट्रीय पंचायती राज प्रशिक्षक, विशेषज्ञ राधेश्याम गोमला के हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में पंचायती व्यवस्था का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। वैदिक काल से ही ग्राम सभाओं और स्थानीय निकायों का उल्लेख मिलता है। ऋग्वेद में ग्रामीण व्यवस्था से जुड़े सभा, समिति, विदथ व ग्रामणि शब्दों का कई बार जिक्र आया है।
मौर्यकाल, गुप्तकाल, मुगलकाल और ब्रिटिश काल में शासकों ने इसका क्रियात्मक रूप अपने अनुरूप रखा ।  हालांकि ब्रिटिश काल में लॉर्ड रिपन को इसके सुधार का श्रेय दिया जाता है। यद्यपि भारत की आजादी के बाद कुछ समितियों का गठन कर सुधार के प्रयास हुए। हालांकि सन् 1959 में राजस्थान से इसकी शुरुआत हुई, मगर आधुनिक भारत में इसे संस्थागत रूप देने का महत्वपूर्ण कदम 1992 में उठाया गया, जब 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम पारित किया गया। यह संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ, इसलिए इस दिन को पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस संशोधन ने ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (ब्लॉक स्तर) और जिला परिषद की तीन-स्तरीय प्रणाली वाली पंचायतों को संवैधानिक दर्जा प्रदान कर वर्तमान पंचायती राज व्यवस्था को स्थापित किया। साथ ही, महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान भी किया गया, जिससे लोकतंत्र अधिक समावेशी बन सका।
पंचायती राज प्रणाली का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर शासन को प्रभावी और उत्तरदायी बनाना है। ग्राम सभा इसका सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जहां गाँव के सभी वयस्क नागरिक शामिल होते हैं। ग्राम सभा विकास योजनाओं की स्वीकृति, सामाजिक लेखा-जोखा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का कार्य करती है।
73वें संवैधानिक संशोधन की ग्यारहवीं अनुसूची के अंतर्गत पंचायतों को 29 विषयों पर कार्य करने का अधिकार दिया गया है, जिनमें कृषि, जल प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण सड़कें, आवास और सामाजिक कल्याण शामिल हैं। इससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन संभव होता है।
लोकतंत्र की जड़ों को मजबूती
पंचायती राज प्रणाली लोकतंत्र को केवल संसद और विधानसभाओं तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसे गांव के स्तर तक पहुँचाती है। इससे आम नागरिक को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलता है। यह व्यवस्था न केवल शासन को पारदर्शी बनाती है, बल्कि लोगों में जिम्मेदारी और अधिकारों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती है।
महिलाओं की भागीदारी पंचायती राज की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। आज लाखों महिलाएँ सरपंच और पंचायत सदस्य आदि के रूप में कार्य कर रही हैं, जिससे सामाजिक परिवर्तन की नई दिशा मिल रही है। यह नारी सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है।
हालाँकि पंचायती राज व्यवस्था ने कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं, फिर भी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
कई पंचायतों के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं होते।
प्रशासनिक अधिकारों का पूर्ण हस्तांतरण अभी भी अधूरा है।
कुछ स्थानों पर राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार भी देखने को मिलता है।
डिजिटल साक्षरता और तकनीकी संसाधनों की कमी भी कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
इन समस्याओं के कारण पंचायतों की प्रभावशीलता कई बार सीमित रह जाती है।
आज के समय में डिजिटल तकनीक पंचायती राज को नई दिशा दे रही है। ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी सूचना का प्रवाह तेज हुआ है और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगाने में मदद मिली है।
सरकार द्वारा डिजिटल पंचायत और स्वच्छ ग्राम जैसी पहले इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे पंचायतें अधिक सक्षम और आधुनिक बन रही हैं।
पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए
पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय स्वायत्तता दी जानी चाहिए। प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाए।
पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी साधनों का विस्तार किया जाए।
युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
यदि इन सुधारों को सही ढंग से लागू किया जाए, तो पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण भारत के समग्र विकास का मजबूत आधार बन सकती है।
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का अवसर है। यह हमें याद दिलाता है कि सच्चा लोकतंत्र तभी संभव है, जब सत्ता का विकेंद्रीकरण हो और हर नागरिक को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का अधिकार मिले।
आज आवश्यकता है कि हम पंचायती राज की भावना को समझें और इसे और अधिक सशक्त बनाने के लिए मिलकर प्रयास करें। जब गाव मजबूत होंगे, तभी भारत सशक्त बनेगा, और यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है।
फोटो कैप्शन: राधेश्याम गोमला



मिन्दरजीत यादव की जीत पर नारनौल के वकीलों ने बांटे लड्डू
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कनीना की आवाज।
पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के चुनाव में एडवोकेट मिन्दरजीत यादव को मिली ऐतिहासिक जीत पर नारनौल बार के सदस्यों ने लड्डू बांटकर खुशी मनाई।
इस अवसर पर भेजे सन्देश में मिन्दरजीत यादव ने नारनौल बार एसोसिएशन के सभी अधिवक्ताओं, विशेषरूप से युवा साथियों का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और विश्वास दिलाया कि उनकी सभी लंबित मांगों को जल्दी ही पूरा करवाया जाएगा। अधिवक्ता सजीत यादव ने बताया कि मिन्दरजीत यादव जल्दी ही नारनौल बार का व्यक्तिगत रूप से दौरा करके सहयोग के लिए आभार प्रकट करेंगे और नारनौल बार के साथियों की भलाई के लिए हमेशा समर्पित रहेंगे।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 01: एडवोकेट मिन्दरजीत यादव की जीत पर लड्डू बांटकर खुशी मनाते नारनौल के अधिवक्तागण













कनीना अनाज मंडी में खोली जाए अटल कैंटीन
-मजदूर एवं किसान उठा सके लाभ
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कनीना की आवाज।
बसपा नेता अतरलाल एडवोकेट ने हरियाणा सरकार से कनीना अनाज मंडी में अटल कैंटीन खोलने की मांग की है।
 अतरलाल ने गांव भोजावास, गोमला, गोमली, मोड़ी, सुन्दरह में किसानों की समस्याएं सुनते हुए उक्त मांग उठाई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की अनेक अनाज मंडियों में अटल कैंटीन स्थापित की हुई है। जिसमें किसानों व श्रमिकों को रियायती दर पर भोजन उपलब्ध होता है परन्तु कनीना अनाज मंडी में अटल कैंटीन न होने के कारण यहाँ के किसान तथा श्रमिक इस सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कनीना के साथ भेदभाव कर रही है। बार-बार किसानों तथा श्रमिकों द्वारा मांग किए जाने के बावजूद भी कनीना अनाज मंडी में अटल कैंटीन का स्थापित न किया जाना यह सिद्ध करता है कि राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन को यहां के किसान व श्रमिक वर्ग की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि कनीना अनाज मंडी के अंतर्गत 50 से ज्यादा गांव लगते हैं। इसलिए यहाँ अटल कैंटीन स्थापित किया जाना जरूरी है। अटल कैंटीन स्थापित न होने के कारण किसानों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने कनीना अनाज मंडी में दूसरा टीन शेड स्थापित करने की मांग भी की। इस अवसर पर उनके साथ शेर सिंह यादव, राकेश यादव, भाग सिंह चेयरमैन, कैलाश सेठ, मदन, रणवीर आदि पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

Wednesday, April 22, 2026



 


152 छात्राओं को खिलाई एलबेंडाजोल की गोली
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कनीना की आवाज।
 राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बाछौद में बुधवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा  विद्यालय की 152 छात्राओं को एलबेंडाजोल की गोली खिलाकर कृमि संक्रमण से बचाव के उपाय बताए गए।  
विद्यालय प्राचार्य अनीता यादव ने छात्राओं को स्वच्छता की जीवनशैली बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित पेयजल, व्यक्तिगत स्वच्छता और साफ-सुथरा वातावरण न केवल बीमारियों से बचाता है बल्कि बच्चों के शैक्षिक प्रदर्शन को भी बेहतर बनाता है।  नोडल अधिकारी रजनीश कुमारी ने बताया कि विद्यालय की 152 छात्राओं को एलबेंडाजोल की कृमि नाशक दवा खिलाई गई है  ताकि शरीर रोग मुक्त बन सके और प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो पाए ।  उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं और घर में साफ-सफाई का ध्यान रखें।  
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छात्राओं को दवा लेने का सही तरीका समझाने के साथ ही हाथ धोने की तकनीक का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया।  
विद्यालय स्टाफ के सहयोग से यह अभियान सुचारू रूप से संपन्न हुआ।
फोटो कैप्शन 09: एलबेंडाजोल की गोली खिलाते हुए




हरियाणा एनसीआर दिल्ली में लगातार तापमान में उछाल और गर्मी
-अपने तीखे तेवरों से आगाज किए हुए हैं- डा. चंद्रमोहन
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कनीना की आवाज।
 हरियाणा एनसीआर दिल्ली पर गर्मी अपने तीखे अंदाज से आगाज किए हुए हैं। सम्पूर्ण इलाके में लगातार पारा में उफान देखने को मिल रहा है। मौसम विशेषज्ञ डा. चंद्रमोहन ने बताया कि वर्तमान परिदृश्य में लगातार पश्चिमी शुष्क गर्म हवाओं ने और सूर्य के तल्ख तेवरों से सम्पूर्ण इलाके में तापमान में उछाल जारी है। सम्पूर्ण इलाके में लगातार दिन और रात के तापमान सामान्य से अधिक बने हुए हैं। एक दो स्थानों पर हीट बेब लूं के हालात बने हुए हैं।
मौसम पूर्वानुमान
 आने वाले तीन चार दिनों तक हरियाणा एनसीआर दिल्ली में अधिकतर स्थानों पर दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी जारी रहेगी और कुछ स्थानों पर हीट बेब लूं की स्थिति बनी रहेगी। जिसकी वजह से भारतीय मौसम विभाग ने हरियाणा एनसीआर दिल्ली पर येलो अलर्ट जारी किया हुआ है।  उसके बाद लगातार एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होंगे पहला 25/26 अप्रैल को उसके बाद दुसरा 28 अप्रेल और उसके बाद तीसरा 31 अप्रेल  को होने से हरियाणा एनसीआर दिल्ली में मौसम में बदलाव लगातार बादलों की आवाजाही देखने को मिलेगी और 25 अप्रेल से ही तेज़ गति की हवाओं आंधी अंधड़ और बिखराव वाली हल्की बारिश बूंदाबांदी की गतिविधियों की सम्भावना बन रही है। इन पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से हरियाणा एनसीआर दिल्ली में 25-31 के दौरान बार मौसम में बदलाव और तेज़ गति की हवाओं आंधी अंधड़ और हल्की बारिश बूंदाबांदी की गतिविधियों की सम्भावना बन रही है। आज हरियाणा एनसीआर दिल्ली में सबसे ज्यादा दिन के तापमान नारनौल के क्रमश: 42.5डिग्री सेल्सियस और जबकि सबसे ज्यादा भिवानी के रात के तापमान 27.0  डिग्री सेल्सियस दर्ज हुएं हैं। जबकि हरियाणा एनसीआर दिल्ली में अधिकतर स्थानों पर दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सम्पूर्ण इलाके में दिन और रात के तापमान सामान्य से अधिक बने हुए हैं।
हीट वेव  लूं की स्थिति क्यों बन रही है
मौसम विशेषज्ञ डा. चंद्रमोहन के अनुसार, इस समय थार मरुस्थल की तरफ से पश्चिम दिशा से गर्म व शुष्क हवाएं चल रही हैं।  पश्चिमी हवाओं से धीरे-धीरे वातावरण से नमी कम  होने लगीं है जिसकी वजह से सतही दबाव भी गिर रहा है। इन परिस्थितियों में  सूर्य की चमकदार तेज धूप और गर्म हवाएं मिलकर हीट वेव लूं की परिस्थितियों को बनाती हैं। यही कारण है आने वाले दिनों में दिन के साथ रात में भी गर्मी अपने तीखे तेवरों से आगाज़ करेंगी।
जिला महेंद्रगढ़ और हिसार मौसम के मिजाज -
जिला महेंद्रगढ़ में नारनौल और महेंद्रगढ़ के दिन और रात के तापमान क्रमश: 42.5 ,26.1डिग्री सेल्सियस और 40.3,20.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। जिला महेंद्रगढ़ में दिन और रात के तापमान सामान्य से अधिक बने हुए हैं वहीं हिसार के दिन के तापमान 41.2डिग्री सेल्सियस जबकि रात के तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। जिला महेंद्रगढ़ और हिसार में दिन और रात के तापमान सामान्य से अधिक बने हुए हैं।
आमजन के लिए सावधानी जरूरी-
आमजन को सलाह दी जाती है कि बढ़ती हुई गर्मी और लूं से बचाव हेतु दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, ज्यादा से ज्यादा पानी पीने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने  सिर पर तौलिया छाता का प्रयोग की सलाह दी है।


कापीराइट दिवस-23 अप्रैल
कापीराइट के तहत है सजा का प्रावधान-डा. यादव
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कनीना की आवाज।
 कई बार अनजाने में लोग ऐसी गलती कर बैठते हैं जिसका अंजाम बुरा होता है। विशेष कर लेखन के क्षेत्र में दूसरे के विचारधारा आदि उठकर अपने नाम से प्रकाशित करने का प्रयास करते हैं जिसे कापीराइट का मामला माना जाता है और इसके तहत सजा का प्रावधान है। किसी भी भूलकर भी किसी की कापीराइट की हुई फोटो, विचार, समाचार या अन्य लेखन सामग्री नहीं उठानी चाहिए। अगर उठना भी चाहे तो उसके नीचे जहां से ली गई है उसका संदर्भ जरूर दिया जाना चाहिए अन्यथा गंभीर परिणाम हो सकते। इस बाबत विस्तार से जानकारी देते हुए डा. होशियार सिंह यादव बताते हैं कि कापीराइट एक गंभीर मसला बन रहा है और इसमें बड़ी सजा का प्रावधान है ।
 कापीराइट मामले में सजा
-अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की कैद और 50,000 रुपए से 2 लाख रुपए तक के जुर्माने तक हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर सजा बढ़ जाती है, और इसमें गैर-जमानती और संज्ञेय  अपराध माना जाता है, जिसमें अवैध सामग्री और उपकरणों को जब्त भी किया जा सकता है।
सजा के मुख्य प्रावधान (भारतीय कापीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार)
    धारा 63:पहली बार उल्लंघन करने पर कम से कम 6 महीने की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 लाख रुपएतक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63 (दोबारा उल्लंघन): दूसरी बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 साल की कैद और 1 लाख रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 रुपए लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63बी(कंप्यूटर प्रोग्राम का उल्लंघन): कंप्यूटर प्रोग्राम की उल्लंघनकारी प्रति का जानबूझकर उपयोग करने पर कम से कम 7 दिन की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
अन्य दंड:उल्लंघन करने वाली प्रतियां और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए जा सकते हैं, और कापीराइट मालिक सिविल मुकदमे के जरिये मौद्रिक हर्जाना भी मांग सकता है।
फोटो: डा. होशियार सिंह यादव




सरकारी दर पर 1031 क्विंटल खरीदी सरसों
-गेहूं की कुल खरीद पहुंची 70948 क्विंटल
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कनीना की आवाज।
कनीना में सरकारी दर एवं निजी स्तर पर सरसों की खरीद जारी है। सरकारी तौर पर करीब 1031 क्विंटल सरसों 6200 प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी गई। । अब तक किसान प्राइवेट स्तर पर सरसों बेच रहे हैं। नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में निजी स्तर पर सरसों बेचने वाले भारी संख्या में किसान आ रहे हैं और निजी स्तर पर करीब 21726 क्विंटल सरसों खरीदी जा चुकी है।
 विस्तृत जानकारी देते हुए जगराम यादव सीनियर मैनेजर हैफेड ने बताया कि अब तक 1031 क्विंटल सरसों सरकारी तौर पर खरीदी गई है। कुमार  डीइओ/डाटा इंट्री आपरेटर ने बताया कि कनीना की अनाज मंडी स्थित चेलावास में अब तक करीब 70948 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। सरकारी तौर पर यह गेहूं खरीदा गया है और अब तक करीब 46 हजार क्विंटल गेहूं का उठान किया जा चुका है।
फोटो कैप्शन 08: कनीना अनाज मंडी में अनाज के लगे ढेर




 5 मई को मनाया जाएगा मोप अप डे
-अब तक 28,000 बच्चे और युवाओं को दी जा चुकी है डिवर्मिंग गोलियां
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कनीना की आवाज।
 कनीना उप- नागरिक अस्पताल के डा. विनय शर्मा ने बताया कि एक वर्ष 19 वर्ष तक के बच्चों को और युवाओं को डिवर्मिंग गोलियां दी गई है जिसमें सरकारी स्कूल ,निजी स्कूल, आंगनबाड़ी, कालेज तकनीक स्कूल, सलम एरिया आदि के बच्चे और युवकों को शामिल किया गया है। यह कार्य आशा वर्कर, एएनएम द्वारा पूर्ण किया गया है।
 कनीना उप नागरिक अस्पताल के तहत दोंगड़ा अहीर, मुंडिया खेड़ा और भोजावास पीएचसी आते हैं। इन सभी में मिलकर 31000 बच्चे और युवाओं को यह गोलियां खिलाई जाने का लक्ष्य रखा था लेकिन अब तक 28000 गोलियां खिलाई जा चुकी है।
 5 में को मोप अप डे मनाया जाएगा अर्थात उस दिन बचे हुए बच्चों को गोलियां खिलाई जाएंगी। फोटो कैप्शन 07:यवाओं को गोलियां खिलाते हुए


 
नगरपालिका कनीना उपचुनाव
- दूसरे दिन भी नहीं हुआ कोई नामांकन
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कनीना की आवाज। 
नगरपालिका कनीना के वार्ड संख्या 14 में होने वाले उपचुनाव के तहत नामांकन प्रक्रिया के दूसरे दिन बुधवार को भी कोई उम्मीदवार नामांकन दाखिल करने नहीं पहुंचा।
यह जानकारी देते हुए चुनाव रिटर्निंग अधिकारी (नगरपालिका कनीना) एवं एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग, हरियाणा द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नामांकन प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है, लेकिन दूसरे दिन भी एक भी नामांकन प्राप्त नहीं हुआ है। इस संबंध में दैनिक रिपोर्ट जिला उपायुक्त एवं राज्य निर्वाचन आयोग, पंचकूला को भेज दी गई है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। नामांकन केंद्र पर पर्याप्त स्टाफ और सुरक्षा व्यवस्था तैनात है, ताकि उम्मीदवारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
एसडीएम ने संभावित उम्मीदवारों और क्षेत्र के जागरूक नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने नामांकन पत्र दाखिल करें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि निर्वाचन विभाग पूरी तरह सतर्क है और चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है।
फोटोङ एसडीएम कनीना





राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में मनाया गया  विश्व पृथ्वी दिवस
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कनीना की आवाज।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में लीगल लिटरेसी क्लब के तत्वावधान में विश्व पृथ्वी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य पूनम यादव ने की। उन्होंने विद्यार्थियों को ग्लोबल वार्मिंग से होने वाले खतरों के बारे में अवगत कराया। विद्यालय में लीगल लिटरेसी के प्रभारी तथा अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक ने विद्यार्थियों को बताया कि हमारी पृथ्वी उस बीमार व्यक्ति की तरह से है जिसका स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन खराब हो रहा है, अगर पर्यावरण का संतुलन ऐसे ही बिगड़ता रहा तो इस ग्रह पर हमारा जीवन मुश्किल हो जाएगा।
 उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए, उनकी देखभाल करें, जल संरक्षण अपनाए, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का प्रयोग करें, सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग से बचें तथा सभी तरह की फिजूल खर्ची बंद करें। इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं ने पृथ्वी दिवस पर एक लघु नाटिका प्रस्तुत की विद्यालय किया छात्रों प्रिंस सरला,साइना,ममता कल्पना,नव्या, नरगिस,प्रीति, जानवी,कंचन,शारदा तथा प्रवेश ने अपनी कविताओं के माध्यम  से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर  समस्त स्टाफ और विद्यार्थी उपस्थित रहे
उधर एस.डी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ककराला में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में भाषण प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता, कोलाज मेकिंग, पोस्टर मेकिंग, स्किट (नाटक), लघु नाटिका (प्ले) तथा पृथ्वी दिवस पर प्रोजेक्ट प्रस्तुति जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता एवं अभिव्यक्ति के माध्यम से पृथ्वी बचाओ, जीवन बचाओ का प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत किया।
फोटो कैप्शन 04: एसडी स्कूल में पृथ्वी दिवस मनाते हुए
             06: अगिहार स्कूल में पृथ्वी दिवस मनाते हुए




-मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना-
-पात्र श्रद्धालु अब 30 तक कर सकते हैं सरल हरियाणा पोर्टल पर पंजीकरण
-मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 5 मई को कुरुक्षेत्र से विशेष रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर करेंगे रवाना
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कनीना की आवाज।
हरियाणा सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत बुजुर्ग श्रद्धालुओं को पवित्र तीर्थ स्थल तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब नांदेड़ (महाराष्ट्र) के दर्शन के लिए आवेदन की तिथि बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है, पहले इसकी अंतिम तिथि 15 अप्रैल थी।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी इस ट्रेन को 5 मई को कुरुक्षेत्र से झंडी दिखाकर प्रदेश के विभिन्न जिलों से जाने वाली संगत को रवाना करेंगे। इसके लिए पात्र श्रद्धालु नजदीकी सीएससी सेंटर या अपने स्मार्ट फोन से सरल हरियाणा पोर्टल पर घर बैठे अब 30 अप्रैल तक सरल हरियाणा पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं।
उपायुक्त अनुपमा अंजली ने बताया कि वरिष्ठ नागरिक, जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक है और उनकी पारिवारिक आय एक लाख 80 हजार रुपए से कम है, वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। योजना के तहत यात्रा पूरी तरह नि:शुल्क होगी और पात्र श्रद्धालुओं को रहने व खाने सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। चयन प्रक्रिया "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर होगी, इसलिए पात्र लाभार्थी समय रहते आवेदन करें। इस यात्रा का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं। इसके लिए आवेदक की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। परिवार की वार्षिक आय परिवार पहचान पत्र में 1.80 लाख रुपए से कम होनी चाहिए।
डीसी ने स्पष्ट किया कि पंजीकरण करवाने वाले सभी लाभार्थियों को 1 मई से पहले पुराने लघु सचिवालय में स्थित जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी कार्यालय नारनौल में अपनी सूचना देना अनिवार्य होगी, ताकि यात्रा संबंधी व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित की जा सकें। उन्होंने जिले के पात्र बुजुर्गों से अपील की कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और पवित्र धाम के दर्शन कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें।
योजना का लाभ उठाने के लिए यह होगी पात्रता
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत आवेदन करने के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं, जिनमें वैध फोटो पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य सरकारी आईडी), परिवार पहचान पत्र (पीपीपी), शारीरिक रूप से यात्रा के लिए फिट होने की स्वयं घोषणा तथा पिछले तीन वर्षों में योजना का लाभ न लेने की घोषणा शामिल है। आवेदक का हरियाणा का निवासी होना और परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है।



ग्रीष्म ऋतु के दौरान बागवानी फसलों और सब्जियों को बचाने के लिए किसानों के लिए एडवाइजरी जारी
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कनीना की आवाज।
जिला बागवानी विभाग की ओर से वर्तमान ग्रीष्म मौसम को देखते हुए जिले के किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रेम कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि फसलों को गर्मी के प्रकोप से बचाव के लिए वे अपनी फसलों की निरंतर निगरानी करें।
किसान अपने खेतों का कार्य सुबह के समय ही निपटा लें। बाग और सब्जियों में उचित सिंचाई प्रबंधन करें। नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग का उपयोग अवश्य करें।
फलदार पौधों के लिए प्रबंधन
 जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि नए फलदार पौधों को ढककर 'लू' से बचाएं।
तने के निचले हिस्से पर बोर्डो पेस्ट लगाएं। इसके लिए 2 किलो नीला थोथा, 3 किलो बिना बुझा चूना और 30 लीटर पानी का मिश्रण तैयार करें। बागों में खरपतवार नियंत्रण एवं नमी संरक्षण के लिए मल्चिंग का उपयोग करना चाहिए। बेर के बागों में अप्रैल-मई में छंटाई कर बोर्डो पेस्ट लगाएं। नए बाग लगाने वाले किसान खेत तैयार करके उचित दूरी पर 3 फीट चौड़े व 3 फीट गहरे गड्ढे खोदकर खुला छोड़े उसके बाद गली सड़ी गोबर की खाद व 2 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट को अच्छी तरह से मिलाकर भरें।
सब्जियों के लिए प्रबंधन
सब्जियों की नई पौध को हरे शेडनेट से ढकें।
सब्जियों की तुड़ाई केवल सुबह या शाम के समय ही करें।
बेल वाली सब्जियों में हल्की सिंचाई के माध्यम से उचित नमी बनाए रखें।
फसलों में कीटों और बीमारियों की निरंतर जांच करते रहें। उन्होंने बताया कि किसान अन्य किसी जानकारी के लिए अपने संबंधित ब्लॉक स्तर कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।




एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ककराला में विश्व पृथ्वी दिवस पर विविध कार्यक्रम आयोजित
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कनीना की आवाज।
एस.डी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ककराला में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में भाषण प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता, कोलाज मेकिंग, पोस्टर मेकिंग, स्किट (नाटक), लघु नाटिका (प्ले) तथा पृथ्वी दिवस पर प्रोजेक्ट प्रस्तुति जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता एवं अभिव्यक्ति के माध्यम से पृथ्वी बचाओ, जीवन बचाओ का प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत किया।
विद्यालय के चेयरमैन जगदेव यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में जिस प्रकार प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है, वह वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि बढ़ते प्रदूषण, निरंतर हो रही वनों की कटाई और ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। मानव जीवन की सुरक्षा के लिए पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को पृथ्वी को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या डा. शिप्रा सारस्वत ने अपने संबोधन में बताया कि 22 अप्रैल को विश्व भर में पृथ्वी दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा कि बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में जागरूकता और संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रबंधन समिति के वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र सिंह, ओमप्रकाश यादव, सीईओ आरएस यादव, डिप्टी डायरेक्टर  पूर्ण सिंह, कोआर्डिनेटर स्नेहलता सहित समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04: अव्वल विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते हुए।






विश्व पृथ्वी दिवस पर विद्यालय में किया पौधा रोपण कार्यक्रम
-पेड़ पौधे लगाए गए
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कनीना की आवाज।
सेहलंग स्थित बीआर. आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर पोस्टर मेकिंग, भाषण, नारे लेखन एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों ने पृथ्वी बचाओ-भविष्य बचाओ तथा पेड़ लगाओ-पृथ्वी बचाओ जैसे संदेशों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
चेयरमैन हरिश भारद्वाज, प्राचार्या ज्योति भारद्वाज, समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थियों ने मिलकर विद्यालय परिसर में पौधारोपण किया। साथ ही सभी विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया कि वे अपने जन्मदिन के अवसर पर कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल करें।
विद्यालय की प्राचार्या ने भी विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने और दैनिक जीवन में छोटे-छोटे कदम उठाकर पृथ्वी को बचाने का संदेश दिया।
फोटो कैप्शन 05:  सेहलंग में पौधारोपण करते चेयरमैन, प्राचार्या, स्टाफ एवं छात्र-छात्राएं।



कनीना में जनगणना 2027 प्रशिक्षण का सफल समापन, शिक्षकों को सौंपी गई अहम जिम्मेदारी
कनीना
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कनीना की आवाज।
जनगणना 2027 के अंतर्गत प्रगणकों एवं सुपरवाइजरों के लिए आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। 6 अप्रैल 2027 से विभिन्न चरणों में आयोजित इस प्रशिक्षण में उपमंडल कनीना के लगभग सभी विद्यालयों से प्राथमिक शिक्षक, टीजीटी, मौलिक मुख्य अध्यापक, विद्यालय प्रमुख, प्राचार्य एवं प्राध्यापकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी तथा मॉडल संस्कृति विद्यालय, कनीना में आयोजित किया गया, जहां प्रतिभागियों को जनगणना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उप तहसीलदार एवं उपमंडल चार्ज अधिकारी अर्जुन सिंह ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े जनगणना अभियान में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पूर्ण गोपनीयता, सत्यता एवं सटीकता के साथ किया गया सर्वेक्षण ही प्रदेश एवं देश के विकास की दिशा और दशा तय करेगा।
उन्होंने बताया कि शीघ्र ही ग्राम पंचायतों को जागरूक कर स्व-गणना के लिए प्रेरित किया जाएगा तथा पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। साथ ही विद्यालयों में अध्यापकों एवं विद्यार्थियों को ब्रांड एंबेसडर बनाकर इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
इस अवसर पर जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर डा. हरिओम शर्मा एवं डा. शोएब खान ने प्रशिक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। वहीं, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने कहा कि हाउस लिस्टिंग के 32 बिंदुओं पर गंभीरता से कार्य करने से आगे की प्रक्रिया सरल होगी और प्रथम चरण को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सकेगा।
कार्यक्रम में प्राचार्य वीरेंद्र सिंह, विनोद जांगड़ा, सहायक चार्ज अधिकारी एवं कानूनगो राजेश कुमार, तथा अनूप सिंह (पटवारी) सहित खंड के लगभग 40 शिक्षकों एवं प्राचार्यों ने सहभागिता की।
प्रशिक्षण के दौरान हाउस लिस्टिंग के सभी आयामों पर विशेष बल दिया गया तथा प्रतिभागियों ने व्यवहारिक सर्वेक्षण के माध्यम से अपने कार्य का अभ्यास भी किया, जिससे वे वास्तविक जनगणना कार्य के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
फोटो कैप्शन 01: अर्जुन सिंह शिक्षकों को संबोधित करते हुए















कनीना क्षेत्र में मनाया गया पृथ्वी दिवस
-विभिन्न स्कूलों में आयोजित हुए कार्यक्रम
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कनीना की आवाज।  कनीना एवं आस पास विभिन्न संस्थाओं में पृथ्वी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम आयोजित किए गए।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बेवल में विश्व पृथ्वी दिवस पर लीगल लिटरेसी के सौजन्य से  लीगल लिटरेसी प्रभारी वरिष्ठ प्रवक्ता गजराज सिंह ने विद्यार्थियों को  संबोधित करते हुए कहा कि हमें विश्व पृथ्वी दिवस पर पृथ्वी को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए उन्होंने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पेड़ लगाकर वातावरण को शुद्ध बनाने पर्यावरण प्रदूषण तथा ग्लोबल वार्मिंग जैसे बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन, स्लोगन लेखन आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।आशा यादव प्रवक्ता समाजशास्त्र ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पर्यावरण पर अत्यधिक मात्रा में पीड़कनशियों के प्रयोग पर चिंता जाहिर करते हुए उनके बुरे प्रभाव पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रवक्ता सरोज कुमारी, इंदु बाला ,विक्रांत सैन, दीपक शर्मा, हंसराज, माया बाई,पवन कुमार संस्कृत अध्यापक हवा सिंह, कृष्ण कुमार, लैब सहायक धर्मपाल, प्रमोद कुमार,नवनीत, मुकेश सहित समस्त विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहे।
  उधर बूचावास में पौधारोपण कर पृथ्वी दिवस के मनाने के पीछे कारण बताए गए। इस अवसर पर कार्यवाहक प्राचार्य सूबे सिंह चौहान, डाइट मगढ़ से राकेश यादव , शर्मीला, कृष्ण संजीत आदि उपस्थित रहे।
 बच्चों से स्लोगन, पेंटिंग, आदि प्रतियोगिता करवाई गई। राकेश द्वारा प्रार्थना सभा में बच्चों को विश्व पृथ्वी दिवस पर बहुत ज्यादा पौधे व वातावरण को शुद्ध रखने बारे प्रेरित किया
 फोटो कैप्शन 02: बेवल में विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते हुए
 फोटो कैप्शन 03: बूचावास स्कूल में पृथ्वी दिवस मनाते हुए


Tuesday, April 21, 2026



 




कुतरूं प्राचार्य के कारनामे- 24
शक्की स्वभाव ने गिराई स्टाफ में कद्र
-जैसा किया वैसा फल पाया
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी होशियार सिंह वर्तमान में पत्रकार और लेखन कार्य से जुड़े हुए हैं। इन्होंने 40 सालों तक विभिन्न स्तरों पर शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि में तीन दर्जन से भी अधिक प्राचार्य संपर्क में आए। जिनमें से कुछ एक के गुण देखकर यूं लगाकर निश्चित रूप से बेहद ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ हैं। इनकी संख्या अधिक रही है जबकि कुछ प्राचार्य किसी के काम को करने में आनाकानी करते रहे हैं, अपने साथियों को दर्द देते आए हैं और शिक्षकों का काम रोकने में उन्हें बड़ा आनंद आता है। यही कारण है कि लोग उन्हें कुतरूं नाम से जानते हैं। ऐसे कुछ कुतरूं मिले जिनको देखकर ऐसा लगता है कि कुछ कुछ कुतरूं प्राचार्य शिक्षकों  के काम को अपनी जागीर समझते हुए किसी के काम को करना नहीं चाहते हैं। ऐसे ही कुछ कुतरूं आचार्य सामने आए थे इनमें से एक कुतरूं के शक्की स्वभाव के कारण स्टाफ में कद्र घटी और जैसा किया वैसा फल तो उसे मिलना ही है। चाहे आज वह इस दुनिया में नहीं है या है है।
हुआ यू कि होशियार सिंह स्टाफ में अति विश्वसनीय इंसान रहा है। कभी इधर-उधर की बातें नहीं की। सदा काम की बातें की, सदा दूसरों की भलाई का कार्य किया किंतु उनके विरुद्ध भी अनेक लोग खड़े मिले जिनमें से कुतरूं एक हैं। आज जब उन्हें कुछ लोग मिलते हैं तो वो ऐसे पास से गुजरते हैं जैसे वह उन्हें कभी जानते तक नहीं परंतु बहुत अधिक ऐसे लोग भी मिलते रहे हैं जो सम्मान देने में कसर नहीं छोड़ते। कुतरूं प्राचार्य कुछ ऐसे ही मिले जिन्होंने होशियार सिंह का सम्मान नहीं किया। वैसे तो स्टेट अवार्डी शिक्षक बहुत कम मिलते हैं और उनकी प्रशंसा और उनका नाम कम से कम स्कूल के पटों पर स्वर्ण अक्षरों  में लिखा होना चाहिए ताकि दूसरे शिक्षक एवं विद्यार्थी भी उनसे शिक्षा और प्रेरणा ले सके किंतु कुछ  कुतरूं प्राचार्यों ने तो उनके गुणों की कद्र नहीं की और न ही उन्हें उनका सम्मान दिया। ऐसे संत स्वभाव के होशियार सिंह शिक्षक ने मंच से अकसर बच्चों को प्रेरणा देते रहे हैं। होशियार सिंह ने एक बार मंच से खीर का प्रसंग क्या सुनाया कि कुतरूं प्राचार्य ऐसे उछला जैसे कोई बम गिरने को हो और ऐसे लाल पीला हो गया जैसे किसी ने उसके 5-7 बैंत जड़ दिए हो। वास्तव में ऐसे कुतरूं को देखकर पूरे स्टाफ में चर्चा का विषय बन गया कि आखिर इस शक्की आदमी को क्या हुआ? परिणाम यह निकला उसकी शक्की नजर के कारण सारे स्टाफ में कद्र घट गई। कद्र इसलिए भी घट गई कि किसी शिक्षक का कार्य नहीं करता था। कामों में आनाकानी करना, यहां तक कि उनकी सेवानिवृत्ति पर भी कार्यक्रम में भाग नहीं लेना, इससे लोगों में विश्वास घट गया और यह कहने लग गए की कुतरूं विश्वास के काबिल नहीं है। ऐसे में उसकी कदर घटती चली गई। कदर इंसान की अपने हाथ होती है, वह बना भी सकता है और गिरा भी सकता है, गिराना बहुत आसान है किंतु कद्र को बनाना बहुत कठिन है। जिसने कदर के मूल्य को समझा है वह अपनी इज्जत को बरकरार रखना है। दूसरों की इज्जत और कदर करते हुए इंसान अपना नाम कमा सकता है। उन्हें मालूम है कि इस दुनिया में कोई स्थायी नहीं है। जब स्थायी नहीं है तो घमंड किस बात का? घमंड का परिणाम तो उस समय देखने को मिलता है जब एक मुट्ठी राख उड़ती नजर आती है। क्या यही घमंड का परिणाम है। परंतु इस दुनिया में जैसा इंसान करता है वैसा जरूर फल पता है। जैसा बीज होते हैं वैसी ही  फसल काटता है। जिन गुण एवं संस्कारों से इंसान बना है वैसे ही उसको फल जरूर मिलते हैं। कुतरूं में अवगुण अधिक होने के कारण या तो वह समाज से 90 प्रतिशत गिर चुका है और कुछ बच भी गए तो गिर जाएंगे क्योंकि कई बार इंसान दूसरे का बुरा सोचता है और होता खुद का बुरा है। दूसरे का भला करने वाला सदा भलाई और नाम कमाता है। कुतरूं यह समझ बैठते हैं कि जो उन्होंने कर दिया वह फाइनल है लेकिन वह यह नहीं जानता दुनिया में सबसे बढिय़ा अदालत उस दाता की है जिसके आगे सब कुछ शून्य है। उसका कैमरा और कंप्यूटर सब कुछ रिकार्ड कर रहा है। कुतरूं जैसे लोग जिस दिन प्रभु के पास जाते हैं तो सारे दृश्य सामने आएंगे। उस दाता के समक्ष सब कुछ दिखाया जाएगा और वह अंत होगा कि दुनिया यूं कहेगी कि गंदगी चली गई क्योंकि जिसमें गुण नहीं वह अवगुणी है। ऐसे कुतरूं किसी काम के नहीं वो समाज के लिए और देश के लिए कलंक होते हैं और कुछ-कुछ कुतरूं प्राचार्य तो अपने आप को यह समझते हैं कि उन्होंने बड़ा पद हासिल कर लिया। पर वो भूल गए कि दुनिया में एक प्राचार्य नहीं है कुतरूं प्राचार्य एक हो सकता है लेकिन प्राचार्यों की संख्या अनेक है। इसलिए कभी दूसरे का अहित करते थे वो कुतरूं आज मिट्टी में मिल चुके हैं और जो बच गए वो भी मिट्टी में मिल जाएंगे।
नाम कमाना है तो कर भलाई काम।
मिट्टी में मिल जाएगा,नहीं बचेगा नाम।।



कैमला में यज्ञ व सत्संग आयोजित
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पूर्व सरपंच के कुए पर चला सत्संग
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कनीना की आवाज।
मंगलवार को वीर बजरंगी  बाबा हनुमान के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन स्व. मामराज जांगिड़ पूर्व सरपंच कैमला के यहां नवनिर्मित कुएं पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उनकीं धर्मपत्नी गिंदोडी देवी ने की। कार्यक्रम के संयोजक पंडित सतीश आर्य रसूलपुर  रहे और पंडित कंवर सिंह आर्य  व वेद प्रकाश आर्य ने संयुक्त रूप से पुरोहित का कार्य संपन्न किया। यजमान के रूप में श्रीकांत उनकीं धर्मपत्नी प्रियंका देवी और रविकांत सह धर्मपत्नी रहें। ब्रह्मा की भूमिका के रूप में नंबरदार संतलाल आर्य सह  धर्मपत्नी रहें।
 उपस्थित आर्यजनों और भगत जनों ने  अपनी आहुतियां डालकर सभी के जीवन की मंगल कामना की और श्रद्धापूर्वक बजरंग वीर बजरंगी हनुमान जी की बाल लीलाओं ,भक्ति ज्ञान , सेवा भाव आदि का यशोगान पूरे विधि- विधान और आयुर्वेदिक रीतियों के साथ संपन्न करवाया गया। इस अवसर पर विभिन्न आर्य संगठनों से पधारे प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचारों , कविताई, भजनों और आदर्श वचनों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी जिनमें गजराज आर्य ,वेद प्रकाश आर्य,  पंडित ताराचंद कलवाड़ी,महाशय बंसी राम ,  भरत सिंह दोंगडा, पंडित सतीश  आर्य रसलपुर, कप्तान सुरेंद्र पाल आर्य रसूलपुर, धर्मपाल आर्य मंत्री आर्य समाज रसूलपुर  मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़, थानेदार रघुवीर सिंह आर्य, पंडित इंद्रलाल पाथेडा आदि ने अपने- अपने वैदिक परंपरा, यज्ञ महिमा, उपासना, भक्ति भावनाओं के ओत-प्रोत अपने विचार भजनों कविताओं के माध्यम से रखें जो नए समाज की परिकल्पना,आज के युवाओं में एक नई चेतना और वैचारिक क्रांति की प्राप्ति में सहायक होगी।
जिससे उनके जीवन का भविष्य सुंदर, सुखद आनंदमय के साथ  दिशा और दशा निश्चित रूप से बदल जाएगी। आज का युवा विभिन्न भ्रांतियां से ग्रस्त हैं। इनसे मुक्त होने का मार्ग है वैदिक परंपरा से ही सात्विक सुख की प्राप्ति संभव हो सकती है। हमें दैनिक जीवन की शुरुआत प्रतिदिन यज्ञ के साथ करनी चाहिए, जिससे हमारे बच्चों में शिक्षा, संस्कार और संस्कृति के गुण विकसित हो सकें और जो ऋषि परंपरा की ओर उन्मुख हो सकें। आज भौतिकवादी इस युग में जरूरत है ऐसे अनुष्ठानों की जो समाज को एक नई जागृति प्रदान करें।
उन्होंने सभी मेहमानों का आज के कार्यक्रम में पहुंचने पर यजमान और  गांव की ओर से आभार व्यक्त किया गया ऐसे अनुष्ठान से हमें सादा जीवन और उच्च विचार और संस्कार संस्कार प्रखर होते हैं।
फोटो कैप्शन 08: हवन करते हुए ग्रामीण





कनीना में जनगणना 2027 प्रशिक्षण का दूसरा दिन संपन्न
- हाउस लिस्टिंग के 32 बिंदुओं पर दी विस्तृत जानकारी
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कनीना की आवाज।
जनगणना 2027 के अंतर्गत उपमंडल कनीना में प्रगणकों एवं सुपरवाइजरों के प्रशिक्षण के अंतिम चरण का दूसरा दिन आज राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला स्तरीय ट्रेनर डा. हरिओम भारद्वाज ने प्रतिभागियों को हाउस लिस्टिंग से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
डा. भारद्वाज ने प्रशिक्षण के दौरान हाउस लिस्टिंग के अंतर्गत आने वाले सभी 32 बिंदुओं को सरल एवं स्पष्ट तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि सही और सटीक आंकड़े जुटाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भविष्य की योजनाएं और नीतियां तैयार की जाती हैं।
इस अवसर पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने सभी प्रगणकों और सुपरवाइजरों का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने कार्य को पूरी निष्ठा, सटीकता और समयबद्ध तरीके से पूरा करें। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का एक महत्वपूर्ण दायित्व है, जिसमें हर कर्मचारी की भूमिका अत्यंत अहम है।
उन्होंने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि इस सर्वेक्षण कार्य में लगे कर्मचारियों के तबादले आगामी 31 मार्च 2027 तक नहीं किए जाएंगे तथा सभी को निर्धारित समय अवधि के भीतर ही अपना कार्य पूर्ण करना होगा।
सहायक चार्ज अधिकारी एवं गिरदावर राजेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि सभी प्रगणकों और सुपरवाइजरों को शीघ्र ही उनके कार्यक्षेत्र आवंटित कर दिए जाएंगे, ताकि वे निर्धारित समय के भीतर अपना कार्य प्रारंभ कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान शोएब खान ने भी प्रतिभागियों को निर्देशित करते हुए कहा कि प्रत्येक बिंदु पर गहनता से कार्य करना आवश्यक है और इसके लिए कार्यक्षेत्र की पूरी समझ होना जरूरी है।
इस मौके पर प्राचार्य डा. वीरेंद्र सिंह बुचावास, विनोद जांगड़ा बवानिया, शशि यादव, सुमन जांगड़ा,सुनीता यादव जनगणना विभाग से मनमोहन शेखावत देवेंद्र यादव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 07: जनगणना के लिए शिक्षकों की कनीना स्कूल में ट्रेनिंग




नगरपालिका कनीना उपचुनाव-
-नामांकन के पहले दिन नहीं पहुंचा कोई उम्मीदवार-एसडीएम
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कनीना की आवाज। 
नगरपालिका कनीना के वार्ड संख्या 14 में होने वाले उपचुनाव को लेकर चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नामांकन प्रक्रिया के पहले दिन मंगलवार को किसी भी उम्मीदवार ने अपना पर्चा दाखिल नहीं किया है।
यह जानकारी देते हुए चुनाव रिटर्निंग अधिकारी (नगरपालिका कनीना) एवं एसडीएम डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासन द्वारा निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव संपन्न कराने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग, हरियाणा द्वारा जारी अधिसूचना की अनुपालन में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि महेंद्रगढ़ जिले के तहत आने वाली नगरपालिका कनीना के रिक्त वार्ड के लिए मंगलवार को नामांकन का पहला दिन था। शाम तक कार्यालय में एक भी नामांकन प्राप्त नहीं हुआ, जिसकी अधिकारिक रिपोर्ट जिला उपायुक्त और राज्य निर्वाचन आयोग पंचकुला को भेज दी गई है।
एसडीएम ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ पूरा करने के लिए निर्वाचन विभाग पूरी तरह सतर्क है।
उन्होंने क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और संभावित उम्मीदवारों से अपील की है कि वे चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित समय-सीमा और नियमों का पालन करते हुए अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।





3 को होने वाली नीट परीक्षा को लेकर डीसी अनुपमा अंजली ने ली बैठक
-सुबह 11 बजे से शुरू हो जाएगा उम्मीदवारों का प्रवेश
-परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन मुस्तैद-डीसी
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कनीना की आवाज।
आगामी 3 मई को आयोजित होने वाली नीट (यूजी) परीक्षा को लेकर
उपायुक्त अनुपमा अंजली ने आज लघु सचिवालय में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और नीट परीक्षा के केंद्र अधीक्षकों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने परीक्षा को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए।
बैठक में डीसी ने कहा कि आगामी 3 मई को आयोजित होने वाली नीट (यूजी) परीक्षा को पूरी तरह से नकल मुक्त और पारदर्शी तरीके से संपन्न करवाना सरकार और जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी, जैमर और बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था चाक-चौबंद होनी चाहिए ताकि किसी भी स्तर पर चूक की गुंजाइश न रहे। उपायुक्त ने पुलिस विभाग को सभी केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल और महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में डीसी ने उम्मीदवारों की सुविधा और नियमों के पालन पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों का प्रवेश सुबह 11 बजे से शुरू हो जाएगा और दोपहर 01:30 बजे के बाद किसी भी स्थिति में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि केंद्र के भीतर मोबाइल फोन, घड़ी, वालेट, रुमाल, किसी भी प्रकार के आभूषण या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट नहीं ले जा सकेंगे। परीक्षा के लिए आवश्यक पेन भी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा केंद्र पर ही उपलब्ध कराया जाएगा?। ऐसे में उम्मीदवार बाहर से कोई भी स्टेशनरी न लाएं। उम्मीदवारों को अपने साथ केवल एडमिट कार्ड, पासपोर्ट साइज की दो फोटो और एक वैध मूल पहचान पत्र लाना अनिवार्य है।
बैठक के दौरान नीट कोआर्डिनेटर ओपी यादव ने पीपीटी के जरिए केंद्र अधीक्षकों को प्रशिक्षण दिया।
इस बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त तरुण कुमार पावरिया, नगराधीश डा. मंगल सैन तथा डीएसपी भारत भूषण के अलावा अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 06:  नीट परीक्षा को लेकर अधिकारियों की बैठक लेती डीसी अनुपमा अंजली।


पृथ्वी दिवस-22 अप्रैल
पृथ्वी ग्रह को बचाना होनी चाहिए प्राथमिकता-नरेश कुमार शिक्षक
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कनीना की आवाज।
पूर्व शिक्षक निर्मल कुमार का कहना है कि  22 अप्रैल 1970 से यह दिन हर साल पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता है। पृथ्वी दिवस मनाने के पीछे हमारा उद्देश्य यही है कि हम पृथ्वी को एक बहुत ही सुंदर ग्रह बनाएं इसके लिए आवश्यक है कि हम लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करें तथा इसे बचाने के लिए किया जा रहे, प्रयासों को प्रोत्साहित करें। आज इस घायल ग्रह को जीवित रखने के लिए हम सब का प्रयास जरूरी है ।इसके लिए वनों की अंधाधुंध कटाई को रोके,ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाकर धरती का श्रृंगार करें,प्राकृतिक संसाधनों का कम से कम दोहन करें, जीव जंतुओं व वन्य जीव प्राणियों का संरक्षण करें, कीटनाशकों तथा  उर्वरकों का सीमित मात्रा में प्रयोग करें, डीजल व पेट्रोल की जगह वैकल्पिक ईंधन जैसे सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन का प्रयोग करें। हमारी पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है जिस पर हम सबको मिलकर रहना है, अत: इसके संरक्षण के लिए हम सब का योगदान बहुत जरूरी है, तभी हम आने वाली पीढिय़ों को एक सुंदर और स्वस्थ पर्यावरण दे पाएंगे, वरना वह दिन दूर नहीं जब मनुष्य का अस्तित्व ही इस दुनिया से मिट जाएगा।
    -निर्मल कुमार, पूर्व शिक्षक
जब से होश संभला है तब से पृथ्वी पर हम जीते हैं। हारे इसी पर मलमूत्र चाहते हैं इसी को गंदा करते हैं किंतु यह हमारी पालन करती है। हमें फल, फूल, सब कुछ खाने पीने की वेस्ट प्रदान करती है। जिस प्रकार मां देखरेख करती उसी प्रकार पृथ्वी भी देखरेख करती है। इसलिए पृथ्वी दिवस पर पृथ्वी मां को हम नमन करते हैं। जब सुबह सवेरे उठते ही हम पृथ्वी को नमन करते हैं ताकि हमारा ख्याल रखें। जहां जन्म देने वाली मां को भी नमन किया जाता है जबकि पृथ्वी मां को भी नमन किया जाता है। पृथ्वी इंसान को सदा सहारा देती आई है और देती रहेगी। ऐसे पृथ्वी हमारी सचमुच बड़ी मां है।
--नरेश कुमार हिंदी शिक्षक
फोटो कैप्शन: निर्मल कुमार, नरेश कुमार



 किसान जुटे कृषि कार्यों में
-कपास की ओर रुझान कम
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कनीना की आवाज।
 किसान एक बार फिर से खरीफ फसल की तैयारियों में लग गए हैं। रबी फसल पैदावार लेने के बाद अन्न को बेच रहे हैं वहीं किसान खरीफ विशेषकर कपास की बीजाई की तैयारियों में लगे हैं। खेतों में खाद डालने का काम जारी है।
   वैसे तो किसानों की प्रमुख फसल गेहूं की है। किसान गेहूं को खाने के लिए सबसे अधिक प्रयोग करते हैं वहीं बाजरे की फसल चारे के लिए अधिक उपजाया जाता है और खाने के लिए कम। रबी फसल बेहतर पैदावार नहीं दे पाई। कुछ पैदावार हुई बेचकर घर के कामों के लिए धन प्राप्त किया है। विगत वर्षों से किसान कपास फसल की ओर आकर्षित हुये थे किंतु विगत वर्ष कपास की फसल में रोग आ जाने से किसान नुकसान की ओर चले गये थे। परिणामस्वरूप इस बार किसानों का रुझान कपास की ओर कम है।
 अब किसान खरीफ फसल की तैयारी में लग गया है। खेतों में खाद डालने विशेषकर गोबर का खाद डालकर उसे बिखेरने तथा बारिश होने का इंतजार करेंगे। किसान गर्मियों में अपनी ऊंटगाड़ी, ट्रैक्टर एवं ट्राली से खाद खेतों में डालते हैं।
  कनीना के किसान अजीत सिंह, योगेश कुमार, रोहित कुमार ने बताया कि रबी फसल पैदावार लेने के तुरंत बाद किसान अपनी खरीफ फसल में लग जाता है। इस दौरान बाजरा, ग्वार एवं कपास आदि उगाते हैं। किसानों ने बताया कि खरीफ फसल पूर्णरूप से बारिश पर आश्रित है। वर्षा होने पर बीजाई कर देते हैं।
  किसान पशु पालक होने के कारण पशुओं के गोबर से खाद बनाते हैं या फिर गोबर से कंपोस्ट व केंचुआ खाद बनाकर खेतों में डालने लगे हैं।  किसान मेहनती है और गर्मी में भी खेतों में खाद डाल रहे हैं।
फोटो कैप्शन 05: किसान खेत में खाद डालते हुए।




रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा ने किया धरना प्रदर्शन
-अपनी मांगों को ज्ञापन भी सौंपा
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कनीना की आवाज।
रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा  संबंधित अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन की महेंद्रगढ़ जिला इकाई ने जिला उपायुक्त कार्यालय मिनी सचिवालय पर दस बजे से दोपहर एक बजे तक धरना प्रदर्शन किया। जिसकी रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला प्रधान घनश्याम शर्मा ने की। धरने  प्रदर्शन का मंच संचालन जिला सचिव रोशन लाल निंबल ने किया।  धरना-प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री के नाम मांग पत्र दिया।
 रिटायर्ड कर्मचारियों को संबोधित करते हुए राज्य प्रेस सचिव धर्मपाल शर्मा कहा कि आल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट पेंशनर्स फेडरेशन ने 22- 23 फरवरी 2026 तक सैनी समाज धर्मशाला कुरुक्षेत्र हरियाणा में अपनी दूसरी आल इंडिया कांफ्रेंस खत्म की। इसकी रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा में मेजबानी की। कांफ्रेंस में 312 डेलीगेट शामिल हुए। सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए कामरेड सुरेंद्र चौधरी (बिहार )महासचिव पद के लिए कामरेज वजीर सिंह( हरियाणा) वित सचिव के लिए कामरेड अरुण घोष (पश्चिम बंगाल )समेत कुल 30 सदस्यों का चुनाव हुआ। राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने 12 सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया गया। फाइनेंस बिल वैलिडेशन एक्ट 2025 को रद्द किया जाना चाहिए। नई पेंशन स्कीम को खत्म किया जाना चाहिए और सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन सिस्टम बहाल किया जाना चाहिए।  आठवें सेंट्रल पे कमीशन का फायदा उन सभी को मिलना चाहिए जो 31 दिसंबर 2025 से पहले रिटायर हुए हैं। सभी राज्यों में महंगाई भत्ता बढ़ाकर सेंट्रल गवर्नमेंट पेंशनर्स के बराबर किया जाना चाहिए और करोना काल 2019 के दौरान महंगाई भत्ते का 18 महीने का एरिया ब्याज के साथ दिया जाना चाहिए।
पेंशन कांयूटेशन अमाउंट 11 साल तक काटा जाना चाहिए। कर्मचारियों के फायदे में कोर्ट के फैसलों को जनरलाइजेशन किया जाना चाहिए।  ट्रेन,हवाई यात्रा ,वोल्वो, एसी बसों और निजी कोआपरेटिव बसों के किराए में छूट फिर से शुरू की जानी चाहिए। सभी राज्यों के सभी पेंशनर्स को चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का सरल उपाय अपनाना चाहिए। पब्लिक सेक्टर के संस्थानों के निजीकरण को रोका जाना चाहिए। चार नए खतरनाक लेबर कोड खत्म किए जाने चाहिए ।नई शिक्षा नीति 2020 को रद्द किया जाए और टेट की अनिवार्यता घोष समाप्त किया जाए। पेंशन पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए। किसानों को उनकी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य  दिया जाना चाहिए। रिटायर्ड कर्मचारी संघ कि राज्य महासचिव रतन जिंदल ने कहा पब्लिक सेक्टर और सरकारी संस्थानों जिनमें बिजली, इंश्योरेंस, बैंक और दूसरी सेवाएं शामिल है कि प्राइवेट रिजर्वेशन का कड़ा विरोध करते है और इसे तुरंत रोकने की मांग करते है। सरकार कर्मचारी और पेंशनर्स के अधिकारों की रक्षा करें जिससे जॉब सिक्योरिटी, वेतन , पेंशन और सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट शामिल है। सरकार से लोगों पर केंद्रीय पालिसी अपने की अपील करें। जो कार्पोरेट मुनाफे की बजाय जनता की क्योंकि रक्षा करें। सभी डेमोक्रेसी ट्रेड यूनियन पेंशनों से भी अपील करें। नई पेंशन स्कीम कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम को तुरंत खत्म किया जाए। एनपीएस शुरू होने के बाद या उसके बाद भर्ती हुई सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम बहाल की जाए। पेंशन को एकता है पक्का और महंगाई से बचा हुआ फायदा दिया जाए। नए बने खतरनाक चार मजदूर कोडस को खत्म किया जाए। कीमतों की बढ़ोतरी पर रोक लगाई जाए। किसान नेता मास्टर धर्मेंद्र यादव ने सरकार से किसानों के लिये अनाज मण्डी में जो नये नियम लागू किए है उन्हे,रद्द करने की मांग की है किसान को  सभी  फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की मांग की। सभी नौजवानों का नियमित रोजगार देने की मांग की। आज धरना-प्रदर्शन में कांफ्रेंस होशियार सिंह लाम्बा, गुरूदयाल सिंह नाहर, छोटेलाल खंड शिक्षा अधिकारी,आनंद जोशी,ओमप्रकाश दायमा  नारनौल खण्ड प्रधान, सुवालाल ,अटेली खंड प्रधान बलबीर सिंह यादव,नांगल चोधरी खंड प्रधान छोटेलाल हेडमास्टर, महेन्द्रगङ खंड प्रधान महेंद्र यादव, ताराचंद सैनी ,दुलीचन्द गोठवाल, विजय सिंह यादव, सुरेश कुमार  ,जगबीर सिंह ने भी संबोधित किया।  आज के धरने में रिटायर्ड कर्मचारी संघ के राज्य महासचिव रतन जिंदल,राज्य प्रेस प्रेस सचिव धर्मपाल शर्मा, सर्व कर्मचारी संघ के  पूर्व जिला प्रधान एवं किसान नेता धर्मेंद्र यादव , भारत संसार निगम लिमिटेड यूनियन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कामरेड रमेश कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04: धरना प्रदर्शन करते हुए रिटायर्ड कर्मी


सांस्कृतिक अहीरवाल संस्था के विस्तार से कार्य को गति मिलेगी -सत्यव्रत शास्त्री
-2500 गांवों का  इतिहास लेखन का काम पूरा किया
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कनीना की आवाज।
अहीरवाल क्षेत्र हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली तीन  राज्यों और नौ जिलों में फैला हुआ है । इस क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति ,इतिहास और परंपराओं पर काम करने वाली संस्था है जिसने इस क्षेत्र के  2500 गांवों का  इतिहास लेखन का काम पूरा किया है। यह अपने आप में बड़ा और आने वाली पीढिय़ां के लिए मार्गदर्शन का काम करेगा। सांस्कृतिक अहीरवाल के निदेशक सत्यव्रत शास्त्री ने सांस्कृतिक अहीरवाल की प्राचीन संस्कृति को पुनर्वैभव पर लाने के लिए एक लंबी कार्य योजना का निर्माण किया है। जिसमें लंबे समय काम करके इसकी खोई प्रतिष्ठा को प्राप्त करना है। इस क्षेत्र के पूर्वजों द्वारा स्थापित मान बिंदुओं,  परंपराओं से जिस प्रकार से वर्तमान पीढ़ी अनजान हैं उसको साथ  लेकर उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास करना है । अहीरवाल के इस काम को और अधिक व्यवस्थित रूप से गति देने के लिए समाज के प्रतिष्ठित एवं योग्य व्यक्तियों को नियुक्ति देकर एक कदम और आगे बढ़ाया है आने वाले समय में इस कार्य योजना के अंतर्गत सभी इकाइयों के लिखे गए इतिहास को प्रकाशित कर जन-जन तक पहुंचाना तथा सांस्कृतिक अहीरवाल क्षेत्र के सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन केन्द्रों  को विश्व के मानचित्र पर स्थापित कर लोगों को उसके प्रति आकर्षित करना रहेगा। सांस्कृतिक अहीरवाल के केंद्रीय कार्यालय नारनौल से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नियुक्ति की घोषणा की है जिसमें अहीरवाल के राजस्थान क्षेत्र में डॉक्टर एसपी यादव सीहोर खेतड़ी को राजस्थान क्षेत्र का प्रभारी तथा देशपाल यादव की ईशरोदा  तिजारा को सह प्रभारी का दायित्व सौंपा गया है।  इसी प्रकार जिला झुंझुनूं में कर्णपाल नावता,जिला सीकर में सुंडाराम  एडवोकेट, कोटपूतली बहरोड में डाक्टर रामकुमार यादव ,जिला खैरथल तिजारा में रामसिंह यादव मनेठी  को संयोजक का दायित्व दिया गया है। संगठन द्वारा दी नियुक्ति  पर संगठन के  लोगों ने खुशी जाहिर की है और विश्वास व्यक्त किया है कि संगठन जिस प्रकार से पिछले पांच वर्षों से निरंतर प्रगति की ओर बढ़ रहा है इनकी नियुक्ति से इस काम को और अधिक गति प्राप्त होगी।
फोटो कैप्शन : सत्यव्रत शास्त्री


ककराला की छात्रा तन्वी का भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन के युविका-2026 में चयन
-छात्रा का किया गया सम्मान
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कनीना की आवाज।
एसडी विद्यालय की छात्रा तन्वी का चयन अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित युविका (युवा विज्ञानी कार्यक्रम)-2026 के लिए हुआ है। यह उपलब्धि न केवल छात्रा की मेहनत और लगन का परिणाम है, बल्कि विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन का भी प्रमाण है।
विद्यालय प्रशासन के अनुसार, पिछले लगातार चार वर्षों से विद्यालय के विद्यार्थी इसरो के विभिन्न कार्यक्रमों में चयनित होते आ रहे हैं। विशेष रूप से वर्ष 2024 में विद्यालय के 5 विद्यार्थियों का चयन हुआ था, जिसने संस्था की शैक्षणिक साख को और मजबूत किया।
इनोवेशन इंचार्ज जसबीर जांगिड़ ने बताया कि इस वर्ष तन्वी का चयन रिजनल रिमोट सैनसिंग सेंटर, जोधपुर के लिए हुआ है, जो विद्यालय के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
विद्यालय प्रधानाचार्या डा. शिप्रा सारस्वत ने अपने संबोधन में बताया कि युविका कार्यक्रम के लिए चयन प्रक्रिया अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक होती है, जिसमें विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन, विज्ञान गतिविधियों, ओलंपियाड, खेल तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को विशेष महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि तन्वी की सफलता यह दर्शाती है कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
विद्यालय के चेयरमैन महोदय ने भी इस अवसर पर अपना संदेश देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे विद्यालय एवं क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे भी तन्वी से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करें।
इस अवसर पर विद्यालय में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें तन्वी सहित अन्य विद्यार्थियों को भी उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। सभी चयनित एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए तथा उनके अभिभावकों और ग्राम के गणमान्य व्यक्तियों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित कर उनका सम्मान किया गया।
विद्यालय परिवार ने तन्वी को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही, अन्य विद्यार्थियों को भी इस सफलता से प्रेरणा लेकर उच्च लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की  प्रबंधन समिति के वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र सिंह, ओमप्रकाश यादव, सीईओ आरएस यादव, डिप्टी डायरेक्टर पूर्ण सिंह, कोआर्डिनेटर स्नेहलता सहित समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे और सभी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की।
फोटो कैप्शन 01: तन्वी को पुरस्कृत करते हुए













टीबी का इलाज संभव
-जुकाम, खांसी, बीपी और शुगर की , की गई जांच
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कनीना की आवाज। टीबी एक्टिव केस फाइंडिंग द्वारा गांव ककराला में कैंप लगाया गया। जिसमें एसीफ के अनुसार वहां कैंप में आए हुए ग्रामीणों की जांच की गई। जिसमें जुकाम, खांसी, बीपी और शुगर की जांच की गई।
पवन कुमार सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर ने बताया कि
तपेदिक (टीबी) एक संक्रामक लेकिन पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, यदि समय पर पहचान और सही इलाज हो। आज भी कई लोग जानकारी के अभाव में लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी बढ़ती है और दूसरों तक फैलने का खतरा रहता है। इसके साथ-साथ ककराला के सरकारी स्कूल के अंदर भी बच्चों को टीबी की बीमारी के बारे में जागरूक किया गया। इसके बाद  रैडक्रास सोसाइटी टीबी अभियान के ब्लॉक कोआर्डिनेटर दीपक कुमार ने बच्चों को टीबी मुक्त भारत की शपथ दिलाई तथा सभी से भाइयों-बहनों से अपील है कि यदि किसी को दो हफ्ते से अधिक समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना या रात में पसीना आने जैसी समस्या हो, तो तुरंत जांच करवाएं। सरकार द्वारा टीबी की जांच और इलाज बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध है। टीबी का इलाज बीच में छोडऩा नहीं चाहिए, क्योंकि अधूरा इलाज बीमारी को और खतरनाक बना सकता है। साथ ही, पौष्टिक आहार, साफ-सफाई और नियमित दवाइयों का सेवन बहुत जरूरी है। इस मौके पर एचवी युद्धवीर, एमपीएसडब्ल्यू रविंद्र और आशा वर्कर और एएनएम सभी मौजूद रही।
फोटो कैप्शन 02: ककराला में लगाया गया कैंप


Monday, April 20, 2026




 

कुतरूं के कारनामे-24 पढ़े मंगलवार को
-शकी स्वभाव ने गिराई स्टाफ में कद्र
-जैसा किया वैसा फल पाया


 

तापमान पहुंचा 39 डिग्री, लू का हुआ आभास
--खान पान का रखे ध्यान-डा. मोरवाल
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कनीना की आवाज।
अप्रैल माह में ही तापमान 39 डिग्री पार कर गया है। दिन में घर से बाहर निकलना कठिन हो जाता है। ऐसे में डाक्टरी सलाह जरूरी है। गर्मी से बचने के लिए डाक्टर सलाह दे रहे हैं-
डा.जितेंद्र मोरवाल कनीना उप-नागरिक अस्पताल बताते हैं कि गर्मी बढ़ जाने से जहां 10 प्रतिशत तक मरीज बढ़ जाते हैं। जहां लू लगना, उल्टी, बुखार दस्त आदि की शिकायत बढ़ जाती है। धूप से बचना बहुत जरूरी है।
 कैसे बचा जाए तपन से-
डा. जितेंद्र मोरवाल बताते हैं की धूप से बचने का सबसे सरल उपाय है घर में छुपकर बैठे रहे। हवादार कमरे में रहे। यदि बाहर जाना पड़े तो पानी की बोतल साथ लेकर जाए तथा पूरे कपड़े शरीर पर पहने, हाथ पैर सर सभी ढके हुए होने चाहिए। पैरों में चप्पल जूते होने चाहिए ताकि गर्मी और तपन से बचा जा सके। इस दौरान तरल पदार्थ जैसे पानी, जूस, लस्सी ,दूध आदि अधिक प्रयोग करना चाहिए। जंक फूड से इस समय बचना चाहिए, ठोस भोजन कम से कम प्रयोग करना चाहिए। हो सके तो कूलर की हवा में बैठना चाहिए।  जब सुबह और शाम ताप कम हो जाए उस समय यदि कोई जरूरी काम हो तो बाहर निकलना चाहिए उनका कहना है कि गर्मी और नवतपा से धूप, लू लग जाती है, बुखार आ जाता है और इसमें बचाव में ही बचाव है। उन्होंने बताया घर पर ग्लूकोस वगैराह प्रयोग करें तथा साथ में ओआरएस का बनाकर रखे। ओआरएस घोल बनाना बहुत सरल है। नमक चीनी और थोड़ा सा नींबू का रस भी डाले तो बेहतरीन स्वाद का घोल तैयार हो जाता है। पानी अधिक से अधिक प्रयोग करें, शरीर में पानी की कमी ना आने दे।
 उधर श्रीकिशन वैद्य क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं।  उनका कहना है कि अगर धूप लग जाए, लू लग जाए तो उससे बचने के लिए पुराने समय से बुजुर्ग कच्चे आम को भूनकर उसका रस, नमक ,चीनी आदि मिलाकर पीते आए हैं जो धूप और गर्मी से बचाता है। यह भी ओआरएस की भांति काम करता है।
फोटो कैप्शन: डा. मोरवाल


30.42 लाख रुपए से भरा जाएगा सेहलंग माता खीमज जोहड़
-त्वरित गति से चल रही है कार्रवाई, लोगों में खुशी लहर
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कनीना की आवाज।
 कनीना उपमंडल के गांव सेहलंग में स्थित माता खिमज मंदिर के पास खिमज जोहड़ का नहर के पानी से भरा जाएगा। एक दो रोज में काम पूर्ण हो जाएगा तथा नौतना माइनर से आने वाले पानी से लबालब भर दिया जाएगा। कनीना उपमंडल में एकमात्र पहाड़ी वाला गांव सेहलंग है जिसकी चोटी पर माता खिमज मंदिर स्थित है। यह पहाड़ी अरावली पहाड़ी शृंखला का एक भाग है।
मिली जानकारी अनुसार आरसीसी पाइपलाइन द्वारा 30.42 लाख की लागत से करीब आधा किलोमीटर दूर से गुजर रही नौतना माइनर से जोहड़ को जोडऩे का कार्य त्वरित गति से जारी है। इस आधा किलोमीटर दूरी में भूमिगत पाइप लगा दिए गए हैं और जल्द ही नहर में पानी आने के बाद जोहड़ भर जाएगा ताकि पशु और पक्षियों को गर्मी से राहत मिलेगी।
 उल्लेखनीय के माता खिमज मंदिर सेहलंग का करीब 800 साल से भी पुराना पहाड़ी पर स्थित मंदिर है। 213 सीढिय़ो से चढ़कर इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। यहां पर नाना प्रकार के जगली जीव जंतु पाए जाते और अधिक संख्या में पक्षी मिलते हैं जो इस जोहड़ के पानी का उपयोग कर पाएंगे। अभी तक इसमें गंदा पानी भरा हुआ है और नाममात्र पानी है।
 इस संबंध में विजयपाल सेलंगिया पूर्व प्राध्यापक एवं खजांची, अशोक कुमार प्रधान, नेतराम, डाक्टर सत्य प्रकाश, गोनू उर्फ दीपक आदि ने बताया कि उनके लंबे समय से मांग चली आ रही थी और इस मांग का पूरा कर दिया गया है। इसके बाद अब  खीमज मंदिर वाले जोहड़ को साफ नहरी पानी से भरा जाएगा और पशु ,पक्षी और जंगली जीव जंतु इस पानी से अपनी प्यास बूझा पाएंगे और उन्हें गर्मी से राहत मिलेगी। उन्होंने खुशी जताई की कि सरकार ने उनका यह बेहतरीन कार्य किया है।
 फोटो कैप्शन 5: नौताना नहर से पाइपलाइन बिछाते हुए




पील बनी पुराने जमाने के फल
-  बुजुर्ग पील को याद कर हो जाते हैं खुश, गरीबों के हैं ये अंगूर
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कनीना की आवाज।
कनीना में कभी आधा दर्जन बणिया(जंगल) होती थी। बणी में जाल पेड़ों का साम्राज्य मिलता है, जो हजारों वर्ष पुराने होते हैं। जब गर्मी आती है तब जाल के पेड़ों पर विभिन्न रंगों हरी, सफेद, पीली, लाल, नारंगी तथा विभिन्न रंगों के फलों से लद जाते थे। वास्तव में अंगूर की भांति यह फल होते हैं जिनको आज से 30 साल पहले लोग बड़े चाव से खाते थे। आज बेशक युवा पीढ़ी जंगल में जाने से जंगली जीवों और जानवरों से डरती हो किंतु बुजुर्गों का जीवन जंगलों में बीता था और वहीं जाल के पेड़ों से फल तोड़कर घर पर लाते थे। इन्हें फांका मारकर खाते थे, जिससे एक अलग ही स्वाद आता था। बुजुर्गों के समक्ष जब आज भी चर्चा चलती है तो बस इतना ही कहते हैं कि पील का जमाना लद गया। मौसम परिवर्तन के कारण इन जाल के पेड़ों पर कोई भी फल नहीं लगता। कभी कभार इक्का-दुक्का फल मिल भी जाता है तो उस पर लोगों की नजरें टिक जाती है परंतु एक जमाना था बहुत अधिक मात्रा में फल लगते थे।
 कैसे तोड़ कर लाते थे पील-
 राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, राम सिंह, कृष्ण कुमार आदि बताते हैं जब स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां होती थी तब अपने गले में सिंडोरा(पील इक_ा करने का बर्तन) बांधकर जंगल की ओर चले जाते थे। यह किसी एक घर से नहीं बल्कि लगभग हर घर से पील तोड़कर लाने के लिए चल देते थे। दिनभर आपस में वार्तालाप करते हुए जाल के पेड़ पर चढ़कर पील तोड़ते थे और अपने सिंडोरे में डालते थे। जब सिंडोरा भर जाता था, जाल के पेड़ से नीचे उतरते और घर तक पहुंचते थे। घर के सारे सदस्य बैठकर इन पीलों को फांका मारकर खाते थे। यहां तक कि इन फलों में, बीज वाले अंगूरों की भांति बीज होते थे जिनको खाते समय जीभ से निकाल दिया जाता था।
अंगूर के थे विकल्प -
बुजुर्ग बताते हैं कि अंगूर के विकल्प का विकल्प पील होते थे। अंगूर गरीब आदमियों को नहीं मिल पाते थे अमीरों के लिए अंगूर होते थे और गरीब लोगों के लिए पील खाने को मिलती थी। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में जहां गर्मियों में नीम की निबोरी छोटे आम के रूप में खाई जाती थी जो गरीबों के आम कहलाते हैं जबकि अमीर लोग बड़े-बड़े आम खाते रहे हैं।
क्या क्या कहते हैं पर्यावरणविद-
डा. होशियार सिंह यादव पर्यावरणविद से इस संबंध में चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण पील लगनी बंद हो गई है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार कैर पर टींट एवं पीचू खत्म चुका हो गए हैं उसी प्रकार जाटी पेड़ से सांगर और झींझ लुप्त हो गई है। ठीक उसी प्रकार जाल के पेड़ से पील गायब हो गई हैं। उन्होंने बताया कि इस वक्त मौसम इतना दूषित हो चला है, कि गर्मी अधिक बढ़ गई है जिसके कारण पील पैदा नहीं होती। पील एक निश्चित ताप तक ही पैदा होती है तथा इसके लिए साफ-सुथरी जलवायु की आवश्यकता होती है।








ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मियों का विशेष पेय है राबड़ी
-जौ के आटे व छाछ से बनती है राबड़ी
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कनीना की आवाज।
सेहत के दृष्टिगत विशेषकर गर्मियों में खानपान का ग्रामीण क्षेत्र के लोग विशेष ध्यान रखते हैं।  ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं कम होती है किंतु सेहत के प्रति उनका रवैया बेहतरीन देखने को मिलता है। गर्मियों के दिनों में जहां ठोस आहार कम काम में लिए लेते हैं वही तरल आहार अधिक से अधिक प्रयोग किया जाता है। गर्मियों के दिनों में रोटी के रूप में मेसी रोटी खाई जाती है। चना,गेहूं या जो आदि की बनी होती है। ऐसी रोटियां  ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी से प्रयोग करते हैं अपितु जब चने की पैदावार अधिक होती थी चने की रोटी खाते थे जो सेहत के लिए बहुत जरूरी है। यहां तक कि बासी मेसी रोटियां भी  राबड़ी के साथ विशेष खाद्य पदार्थ ग्रामीण क्षेत्रों का है। क्या कहते हैं जानकार-
** राबड़ी जो छाछ, जौ का आटा आदि हांडी में  पकाकर बनाया जाता है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो छाछ में बनाया जाता है तथा छाछ डालकर ही इसे प्याज और बासी रोटी के साथ खाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस मामले में कभी से राबड़ी प्रयोग करते आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी राबड़ी को नहीं भूलते। चाहे वर्तमान पीढ़ी कोल्ड ड्रिंक पीने लग गई और चाय अधिक सेवन करती है किंतु ग्रामीण बुजुर्ग राबड़ी को अहमियत देते हैं। इस वक्त गर्मियों के दिनों में धाणी एवं भुगड़ा नाम से विशेष खाद्य पदार्थ का खाते हैं।
--सूबे सिंह,कनीना
ग्रामीण लोग जौ को भुनवाकर धाणी तो चने को भुनवाकर भुगड़ा बनाते हैं जिनको गर्मी के दिनों में बड़े चाव से खाया जाता है। यहां तक कि कुछ लोग जौ की धाणी का सत्तू भी बनाकर पीते हैं।
  --भीम सिंह,कनीना मंडी
ग्रामीण ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का प्याज का विशेष लगाव रहा है। यहां तक कि हर घर में नींबू रखते हैं जिससे शिकंजी पीते हैं तथा प्याज के साथ बासी रोटी खाते हैं ताकि गर्मी से बचा जा सके।  बुजुर्ग पुराने खानपान को आज भी नहीं भूले हैं।  
-- --दुलीचंद साहब,कनीना
जब भी कोई मेहमान आता है तो उसको चाय की बजाए राबड़ी या छाछ का गिलास थमाते हैं जो खाने में बेहतरीन होता है। कुछ शहर से आने वाले व्यक्ति भी बड़े चाव से लस्सी को पीते हैं, चाय को दूर भगाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खाने-पीने की आदतें अच्छी है।  घर में प्याज जरूर खरीदी जाती है जिसे वर्ष भर खाते हैं। प्याज का राबड़ी के साथ विशेष संबंध माना गया है।
---सुनील कुमार, समाजसेवी
फोटो कैप्शन: सुनील कुमार, सूबे सिंह, दुलीचंद, भीम सिंह

श्रीकृष्ण गोशाला कनीना में कई लोगों ने दिया दान
-भगत सिंह प्रधान ने जताया आभार
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कनीना की आवाज।
श्रीकृष्ण गोशाला कनीना में गोसेवा के प्रति समर्पण और समाज सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। गोशाला में आए  श्रद्धालुओं ने गौमाता की सेवा हेतु उदारतापूर्वक सहयोग राशि भेंट की तथा सेवा कार्यों में भाग लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रेम कुमार भोजवास के पुत्र निर्मल कुमार और उमेश कुमार द्वारा गोशाला में 51000 रुपए की सहायता राशि भेंट की।
 इसके साथ ही बिजेंद्र सिंह हेडमास्टर ने अपने पिता स्वर्गीय मातादीन की पुण्य स्मृति में 5100 रुपए का योगदान देकर गोसेवा के इस पवित्र कार्य में भागीदारी निभाई। इस अवसर पर उपस्थित गौसेवकों प्रधान भगत सिंह, रामकुमार, सतीश कुमार,  दिलावर सिंह, रामप्रताप, राज सिंह, बलवान आर्य, रविन्द्र बंसल, नीलम देवी लिली, ओमप्रकाश आर्य आदि समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति की पहचान है और इस प्रकार के सहयोग से न केवल गौशालाओं का संचालन सुदृढ़ होता है बल्कि समाज में सेवा और संस्कार की भावना भी विकसित होती है।
गोशाला प्रबंधन ने सभी दानदाताओं एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इसी प्रकार समाज का सहयोग मिलता रहा तो गोमाता की सेवा और बेहतर ढंग से की जा सकेगी। इस मौके पर गायों को गुड़ व चारा खिलाया।
फोटो कैप्शन 02: गायों को गुड़ खिलाकर दान करते हुए।


रेवाड़ी से सतनाली वाया कनीना फोरलेन मार्ग बनाया जाए
-बार-बार मांग उठी किंतु दफन हुई
- वाहनों का दबाव बढ़ा
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कनीना की आवाज।
 कनीना से महेंद्रगढ़ तथा कनीना से रेवाड़ी मार्गों पर जहां वाहनों का दबाव बढ़ रहा है। बाईपास की सख्त जरूरत है वह भी नहीं बन पाया है। यहां तक की चरखी दादरी से अलवर वाया कनीना, काठूवास- नीमराना रेलवे लाइन का भी अभी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में सबसे प्रमुख मार्ग रेवाड़ी से सतनाली का फोर लेन बनाये जाने की है। यह मार्ग रेवाड़ी से शुरू होकर कनीना, महेंद्रगढ़, सतनाली तक जाता है। अगर यह मार्ग फोर लेन का बन जाए तो लोगों को सुविधा मिलेगी वही वाहनों का दबाव घट जाएगा। एक और जहां हिसार तक पहुंचने में करीब 2 घंटे का समय कम लगेगा वहीं लोगों को भारी सुविधा मिलेगी। कई वर्षों से यह मांग बार-बार उठाई जा रही है किंतु मामला अधर में लटका हुआ है। एक बार तो  स्टेट हाईवे 21 नंबर के बोर्ड भी कनीना बस स्टैंड के आसपास गाड़ दिए गए थे। लोगों को खुशी हुई थी कि अब निर्माण कार्य शुरू होगा। राव इंद्रजीत सिंह केंद्रीय मंत्री ने भी यह मांग उठाई थी और आशा की जा रही थी जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा लेकिन आज तक मामला अधर में लटका हुआ है।
  कनीना के आसपास यदि कोई सड़क मार्ग सबसे सघन वाहनों का है तो वह रेवाड़ी से कनीना महेंद्रगढ़ और सतनाली की ओर जाने वाला मार्ग है। इस मार्ग की अभी तक सुध नहीं ली गई है। परिणाम यह है कि जब हिसार जाना होता है तो बड़ी समस्या झेलनी पड़ती है। अगर यह  सड़क मार्ग फोरलेन का बन जाए तो पहुंचना सुविधाजनक हो जाएगा। वैसे तो इसे एक बार पिलानी से मिलने की भी कोशिश की गई थी। लेकिन परिणाम जस का तस है। क्या कहते हैं इस संबंध में लोग-
** यदि रेवाड़ी से सतनाली फोरलेन मार्ग बना दिया जाए तो वाहनों का दबाव घट जाएगा। वाहन आसानी से गुजर सकेंगे और दुर्घटनाओं की आशंका घटेगी, लोगों को सुविधा मिलेगी और हिसार तक कम से कम 2 घंटे का सफर कम हो जाएगा क्योंकि अधिकांश कार्यों के लिए हिसार जाना पड़ता है। यदि यह मार्ग फोर लेन का नहीं बनता तो कई शहर और कस्बों के लोगों को परेशानी यूं ही उठानी पड़ती रहेगी। यदि यह मार्ग फोरलेन का बन जाए और चरखी दादरी से अलवर रेलवे लाइन वाया कनीना निर्माण शुरू हो जाए तो निश्चित रूप से विकास कार्यों की झड़ी लगेगी और लोगों का स्तर ऊंचा उठ जाएगा।
-- भगत सिंह प्रधान एवं समाजसेवी
 रेवाड़ी से कनीना सतनाली तक का यह पुराना मार्ग है। इस मार्ग पर वाहनों की संख्या अन्य मार्गों की अपेक्षा सबसे अधिक है। यूं तो कनीना कस्बा चारों ओर से चरखी दादरी, कोसली, नारनौल, अटेली, महेंद्रगढ़ ,रेवाड़ी आदि से जुड़ा हुआ है लेकिन सबसे व्यस्त मार्ग भी रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ सतनाली तक का है। इस समय इस बार की फोरलेन बनाने की सख्त जरूरत है ताकि आवागमन में सुविधा हो, उद्योग धंधों का विकास हो तथा गंतव्य मार्ग जैसे हिसार तक पहुंचने का समय भी कम लगेगा।
- दिनेश कुमार प्रधान मोलडऩाथ आश्रम
फोटो कैप्शन: दिनेश कुमार और भगत सिंह प्रधान तथा
फोटो कैप्शन 3/4: रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ वाया  कनीना सड़क मार्ग














त्रुटिपूर्ण सड़क को लेकर किया प्रदर्शन
-अध्यक्षता अतरलाल ने की
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कनीना की आवाज। धनौन्दा से मोहनपुर तक बनाई जा रही सड़क पर धनौन्दा पंप हाउस से निकलने वाली तीन नहरों के पुलों पर बनाए जा रहे त्रुटिपूर्ण सड़क निर्माण के खिलाफ ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन कर नारेबाजी की।
 प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए बसपा नेता अतरलाल ने चेतावनी दी कि प्रशासन तथा ठेकेदार ने तीन दिन के अंदर त्रुटियों को दूर कर सड़क निर्माण सही नहीं किया तो ग्रामीण उपमंडल ना. कनीना के कार्यालय पर धरना देंगे। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के कर्मचारियों तथा उपमंडल अधिकारी (ना.) कनीना के संज्ञान में कई बार शिकायत लाने के बावजूद भी सड़क निर्माण सही नहीं किया जा रहा है। बीच सड़क में तीन कीकर तथा खंभा छोड़ दिया गया है। जिससे किसानों के ट्रैक्टर व अन्य वाहनों की आवाजाही में दिक्कत होगी और दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि पुलों के ऊपर से बनाई जा रही सड़क को सही लेवल में बनाने, कीकर व खंभे को हटाने तथा पुलों के ऊपर से गुजर रहे तारों को ऊपर उठा कर सड़क निर्माण करने की मांग की। इस अवसर पर किशनपाल, मीर सिंह वैद्य, वेदपाल दहिया, संजू, प्रताप सिंह, सुबेदार मदन सिंह, ओमपाल सिंह, मनोहर सिंह, आश व ग्रामीण मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 01: सड़क मार्ग को लेकर किया प्रदर्शन