विश्व पोलयों दिवस-24 अक्टूबर
करीब शत प्रतिशत काबू पा लिया है पोलियो पर- डा. मोरवाल
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कनीना की आवाज। दुनिया भर में जिस दर से पोलियों पर काबू पाने के प्रयास किये हैं उससे पोलियो का लगभग खात्मा हो गया है। वर्ष 1980 के बाद शत प्रतिशत के करीब पोलियो पर काबू पा लिया है। पोलियो के केस 1980 से पहले मिल सकते हैं किंतु वर्तमान में बाद 1980 के बाद जिला महेंद्रगढ़ से शायद ही कोई मामला हो। पोलियो टीकाकरण और पोलियो उन्मूलन के लिए जागरूकता बढ़ाई गई है जिसके कारण इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई लड़ी गई और पूर्णतया काबू पा लिया है।
विश्व पोलियो दिवस जोनास साल्क की जयंती के रूप में मनाया जाता है। वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने पोलियो की वैक्सीन विकसित की थी। इस बीमारी के खिलाफ अभियान की शुरुआत रोटरी इंटरनेशनल द्वारा की गई थी जो अंतर्राष्ट्रीय सेवा संगठन ने दुनिया भर में कार्यक्रम चलाए गए। पोलियो की खुराक पिलाई गई जिसके कारण पोलियो पर काबू पा लिया है।
*** पोलियो एक विषाणु जनित रोग है जो एंटरोवायरल से फैलता है। यह विष्णु तांत्रिक संक्रामक बीमारी के रूप में परिभाषित होता है जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को अधिक प्रभावित करता है। जो अपंग बना देता है। यह घातक बीमारी जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है,यह दूषित भोजन और पानी के कारण फैलती है। तत्पश्चात रोगाणु तंत्रिका तंत्र तक चला जाता है। इस बीमारी में कुछ लोगों में बुखार, थकान, मचली, दर्द, नाक बंद होना, गले में खराश, खांसी, गर्दन पीठ में अकडऩ, हाथ पैरों में दर्द, कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। यह रोगाणु मांसपेशियों को पूर्णत नष्ट कर देता है उसके कारण इंसान अपंग बन जाता है। केवल टीकाकरण से इसका इलाज संभव है। पालियो का टीका बच्चों के शरीर में पोलियो वायरस से लडऩे की क्षमता बढ़ाता है। इसकी आईपीवी और ओपीवी दोनों प्रकार की दवाई दी जाती है जो मुख के जरिए पिलाई जाती है। आजकल पोलियो की खुराक को टीकों में ही शामिल कर लिया गया है। डीपीटी का टीका लगाया जाता है जो इस रोग से बचाने में मददगार साबित होता है। मौखिक रूप से दी जाने वाली दवा की खुराक 6 सप्ताह, 10 सप्ताह, 14 सप्ताह और बूस्टर 26, 16 से 24 महीने में दी जाती है।
पोलियो को समाप्त करने के लिए पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम चलाए गए जिनके कारण पोलियो पर काबू पा लिया है। अभी समय-समय पर सख्त उपाय और टीकाकरण की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस रोग से बचने का स्वच्छता एक तरीका है, जितना स्वच्छता पर ध्यान दिया जाए उतना ही रोग कम फैलेगा।
-- डा. जितेंद्र मोरवाल उप-नागरिक अस्पताल कनीना
सरकार बीसीजी, रोटा, आईपीवी आदि की तक लगती है या खुराक पिलाई जाती है। रोटा की 5 बूंद पिलाई जाती है जो टेटनस रोग पर काबू पाती है। वही पीसीबी पांच बीमारियों से बचाने वाला एक टीका है वही आईपीवी जिसे एंटी पोलियो वैक्सीन कहा जाता है। इसी प्रकार सरकार अनेक टीके लगाती है। जब बच्चा 5, 10 और 16 सप्ताह का होता है बीसीजी का टीका, पोलियो की खुराक पिलाई जाती है। डेढ़, ढाई और साढ़े तीन माह बाद बूस्टर डोज दी जाती है। बचपन में ही टीके लगाकर इस रोग पर काबू पाया जा सकता है।
कनीना उप नागरिक अस्पताल में पोलियो का कोई मरीज वर्तमान में नहीं आया है। 30 साल पहले कोई पोलियो का मरीज आता था किंतु आप सरकार ने विभिन्न टीके एवं खुराक पोलियो से बचने की पिलाई जाती हैं।
-- शीशराम हेल्थ इंस्पेक्टर
फोटो कैप्शन: शीशराम एचआई एवं डा. जितेंद्र मोरवाल।
पेयजल संकट को लेकर दिया एसडीएम कनीना को ज्ञापन
---अतरलाल ने की कार्रवाई
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कनीना की आवाज। बृहस्पतिवार से बिजली आपूर्ति ठप्प होने से परेशान लोगों ने उपमंडल अधिकारी (ना.) कनीना तथा उपमंडल अधिकारी (बिजली) कनीना के कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन कर इलाके की बिजली आपूर्ति तत्काल बहाल करने की मांग की है। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रजा भलाई संगठन के अतरलाल और रतन सिंह चेयरमैन ने किया। इसमें इलाके के किसान, मजदूर, दुकानदार, विद्यार्थी, कारोबारी तथा अन्य उपभोक्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। उन्होंने बिजली आपूर्ति बहाल करो, बिजली विभाग होश में आओ, लोगों की परेशानी दूर करो तथा शासन-प्रशासन होश में आओ के जोरदार नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए अतरलाल ने कहा कि गत बृहस्पतिवार से बिजली आपूर्ति बंद होने के कारण इलाके के लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। किसान सरसों तथा गेहूं की बिजाई के लिए जो पलेवा कर रहा था वह बीच में रुक गया है। घरों, दुकानों, स्कूल, कालेजों, निजी दफ्तरों में परेशानी बढऩे लगी है। उपभोक्ताओं को पानी की मोटर चलाने, घरेलु उपकरणों का इस्तेमाल करने और रोजाना की दिनचर्या के कार्यों में परेशानी उठानी पड़ रही है। रतनसिंह चेयरमैन ने कहा कि बिजली आपूर्ति ठप्प होना सरकार की नाकामी है। उन्होंने चेतावनी दी कि 6 घंटे में बिजली आपूर्ति बहाल न की गई तो सड़कों पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन करेंगे और बिजली आपूर्ति बहाल करवाकर रहेंगे। बाद में प्रदर्शनकारियों ने बसपा नेता अतरलाल के नेतृत्व में उपमंडल अधिकारी (ना.) कनीना को ज्ञापन सौंपा। जिसे उन्होंने तत्काल सरकार को भेजकर शीघ्र विद्युत आपूर्ति बहाल करवाने का भरोसा दिया। इस अवसर पर रामकिशन पहलवान, राकेश यादव, रतनसिंह चेयरमैन, पिताम्बर प्रधान, राजबीर, राजेन्द्र सिंह नम्बरदार, हवासिंह, हव. कृष्ण सिंह, कैलाश सेठ, दानसिंह प्रजापत, हरीपाल सिंह, घनश्याम पंच, रामबीर पंच, पवन चौधरी, किशनपाल, डॉ. मुकेश पंच, धीरज, मीर सिंह वैद्य, मुकेश स्वामी, हरीश सिंगर, धर्मबीर, महेन्द्र सिंह, अजय, जग्गी, रोशन आदि छिथरोली, झाड़ली, सिहोर, धनौन्दा, खरकड़ाबास, पाथेड़ा, खेड़ी तलवाना गांवों के सैकड़ों जन उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 09 : ज्ञापन एसडीएम कनीना को सौंपते अतरलाल
बिजली के अभाव में बुजुर्गों ने नई पीढ़ी को पढ़ाया जीवन का पाठ
-दो दिन की बिजली गुल, तो खुल गई पुराने जमाने की यादों की किताब!
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कनीना की आवाज। बिजली विभाग की हड़ताल के चलते पिछले दो दिनों से बिजली और पेयजल की समस्या ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। कहीं पंखे बंद हैं, कहीं मोबाइल की बैटरी जवाब दे रही है तो कहीं पानी के लिए लोग इधर-उधर भटक रहे हैं। लेकिन इसी परेशानी के बीच गांव के बुजुर्गों को नई पीढ़ी को ज्ञान बांटने का सुनहरा अवसर मिल गया।
एक जगह कुछ युवक बिजली को कोस रहे थे। कोई कह रहा था कि बिना पंखे के नींद नहीं आती, तो कोई बोला कि मोबाइल चार्ज नहीं हो रहा, अब समय कैसे कटेगा? तभी एक बुजुर्ग ने मूंछों पर ताव देते हुए कहा, ''बेटा, तुम तो दो दिन में ही ऐसे घबरा गए, जैसे बिजली नहीं, तुम्हारी सांसें बंद हो गई हों!
युवकों ने पूछा, ''दादा जी, आपके जमाने में बिजली नहीं होती थी तो आप लोग कैसे रहते थे?
बुजुर्ग बोले, ''हमारे जमाने में बिजली का नाम तो सुना था, लेकिन घर में दर्शन दुर्लभ थे। गर्मी लगती थी तो हाथ का पंखा चलाते थे। रात को छत पर चारपाई डालकर सोते थे। हवा चलती तो कुदरत का एसी और हवा बंद हो जाती तो हाथ का पंखा ही कूलर बन जाता था।
दूसरे बुजुर्ग ने चुटकी लेते हुए कहा, ''हमारे समय में मोबाइल नहीं था, इसलिए बैटरी खत्म होने का दुख भी नहीं था। रिश्तेदारों से बात करनी होती तो उनके घर चले जाते थे। आज मोबाइल में सौ नंबर हैं, मगर पड़ोसी का हाल पूछने की फुर्सत नहीं!
एक युवक बोला, ''दादा जी, पानी की समस्या तो तब भी होती होगी? बुजुर्ग हंसकर बोले, ''बिल्कुल! तब कुएं से पानी खींचते थे। अब मोटर बंद होते ही लोग ऐसे परेशान हैं, मानो कुएं में पानी नहीं, पूरा गांव ही डूब गया हो!
यह सुनकर वहां ठहाके गूंज उठे। फिर एक बुजुर्ग ने गंभीर होकर कहा, ''बेटा, पुराने समय में सुविधाएं कम थीं, मगर सहनशक्ति ज्यादा थी। आज सुविधाएं बहुत हैं, लेकिन उनके बिना दो दिन बिताना भी मुश्किल लगता है।
हालांकि बुजुर्गों की बातें अपनी जगह हैं, लेकिन बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलना भी जरूरी है। उपभोक्ता नियमित बिल भरते हैं, इसलिए निर्बाध आपूर्ति की जिम्मेदारी से संबंधित विभाग मुंह नहीं मोड़ सकता।
दो दिन की बिजली कटौती ने नई पीढ़ी को पुराने जमाने की याद तो दिला दी। बच्चों ने उस जमाने का दर्शन करना पड़ा जब बुजुर्ग कम संसाधनों में जीवन जीकर गए हैं, बिजली होती नहीं थी और ठीक ऐसे ही अंधेरा होता था जैसा दो दिनों से।
फोटो केप्शन 08:बुजुर्गों के जीने का अंदाजा बताते हुए एक अधेड़
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच योगेश कुमार ने किया पेयजल का प्रबंध
निजी खर्च से अल्टरनेटर मंगवाकर लोगों को करवाया पेयजल सुलभ, क्षेत्रवासियों ने जताया आभार
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कनीना की आवाज। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पिछले दो दिनों से क्षेत्र में बिजली और पेयजल संकट गहराया हुआ है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से अनेक स्थानों पर लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मुश्किल समय में कस्बा कनीना के वार्ड एक निवासी योगेश कुमार पुत्र कृष्ण कुमार दुकानदार ने आगे आकर पेयजल की व्यवस्था करने में सहयोग दिया। उन्होंने अल्टरनेटर मंगवाकर पानी की आपूर्ति का प्रबंध किया, जिससे लोगों को राहत मिली।
जानकारी के अनुसार, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पेयजल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बिजली के अभाव में पेेयजल सप्लाई नहीं हो पा रहा है और लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए पानी जुटाने में परेशानी हो रही है। इस स्थिति को देखते हुए योगेश कुमार ने अपने स्तर पर प्रयास करते हुए अल्टरनेटर मंगवाया और पेयजल उपलब्ध करवाया।
योगेश कुमार के इस कदम से लोगों को राहत मिली। क्षेत्रवासियों ने उनके प्रयास की सराहना करते हुए आभार जताया।
क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि 25 अक्टूबर तक , पेयजल व्यवस्था बहाल हो सकेगी चूंकि 24 अक्टूबर तक बिजली कर्मियों की हड़ताल है। फिलहाल योगेश कुमार द्वारा किया गया प्रयास सराहनीय रहा है।
फोटो कैप्शन 06 व 07: योगेश कुमार एल्टरनेटर से पेयजल उपलब्ध करवाते हुए
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से पैदा हुआ पेयजल संकट, --निजी खर्च पर सरपंच ने मंगवाया अल्टरनेटर
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कनीना की आवाज। बिजली कर्मचारियों की दो दिनों से जारी हड़ताल के चलते जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली और पेयजल संकट गहराता जा रहा है, वहीं गांव झगड़ोली के सरपंच मुकेश कुमार सोनी ने ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए सराहनीय पहल की है। उन्होंने अपने निजी खर्च से अल्टरनेटर मंगवाकर गांव में पेयजल आपूर्ति का प्रबंध किया, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली और लोगों के घरों तक पानी पहुंच सका।
बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण गांव की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। ऐसे में ग्रामीणों के सामने पीने के पानी की समस्या खड़ी हो गई थी। समस्या की गंभीरता को समझते हुए सरपंच मुकेश कुमार सोनी ने स्वयं पहल की और अल्टरनेटर की व्यवस्था करवाई, ताकि गांव की वाटर सप्लाई को चलाया जा सके। उनके इस प्रयास से ग्रामीणों को पानी उपलब्ध हो पाया और लोगों को राहत मिली।
इस कार्य में सरपंच की टीम के अनेक सदस्यों और ग्रामीणों ने भी सहयोग किया। सभी ने मिलकर पेयजल आपूर्ति सुचारु करने के लिए प्रयास किए। सामूहिक सहयोग और आपसी तालमेल से यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ तथा लोगों के घरों तक पानी पहुंचाया गया।
ग्रामीणों ने सरपंच मुकेश कुमार सोनी और उनकी टीम का आभार जताते हुए कहा कि संकट के समय जनप्रतिनिधि का इस प्रकार आगे आना सराहनीय है। उल्लेखनीय है कि बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण प्रदेश के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में झगड़ोली के सरपंच की पहल ने लोगों का मन जीत लिया।
फोटो कैप्शन 05: सरपंच मुकेश सोनी(फोटो में टोपीवाले) अपनी टीम के साथ
भडफ़ गांव में पेयजल और बिजली संकट से परेशान महिलाओं ने लगाया जाम
-दो दिन से जलापूर्ति और बिजली नहीं आने से ग्रामीणों में रोष, पुलिस ने समझाकर खुलवाया जाम
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के भडफ़ गांव में पिछले दो दिनों से पेयजल आपूर्ति और बिजली नहीं आने से परेशान महिलाओं ने सड़क पर जाम लगा दिया। जाम लगने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर कनीना पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझाकर जाम खुलवाया।
जानकारी के अनुसार, गांव में पिछले दो दिनों से बिजली और पेयजल आपूर्ति बाधित होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। घरों में पानी की कमी होने से महिलाओं को दैनिक कार्य निपटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। लगातार बिजली और पानी नहीं मिलने से परेशान महिलाओं ने धैर्य खो दिया और उन्होंने सड़क पर जाम लगा दिया। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
जाम की सूचना मिलने पर कनीना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने महिलाओं से बातचीत की और उन्हें बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारणों की जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि बिजली विभाग के कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के चलते बिजली व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बिजली नहीं आने के कारण पेयजल आपूर्ति भी बाधित हुई है।
पुलिस ने महिलाओं को समझाया कि वे जाम हटाकर अपने घर लौट जाएं। पुलिस के समझाने पर महिलाएं वापस घर चली गईं और सड़क पर यातायात बहाल हो गया। ग्रामीणों के सामने अब पेयजल की समस्या बनी हुई है। बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
नऊोटो कैप्शन 04: भडफ़ गांव में जाम की स्थिति
बिजली विभाग की दूसरे दिन भी हड़ताल जारी, पेयजल संकट से ग्रामीण परेशान
बिजली गुल होने से दुकानदारों की रोजी-रोटी प्रभावित, विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित
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कनीना की आवाज। बिजली विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को भी क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति प्रभावित रही। गुरुवार को कुछ कर्मचारी तैनात थे, लेकिन शुक्रवार को वे भी हड़ताल पर चले गए। इसके चलते बिजली व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
गुरुवार को दोपहर तक विद्युत आपूर्ति चल रही थी, लेकिन इसके बाद बिजली गुल होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के पीछे इन कर्मियों का ही हाथ है। वे फाल्ट डालकर चले गए। दो दिनों से बिजली और पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। पेयजल के लिए लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कई गांवों में लोग दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं। बिजली पर निर्भर दुकानदारों और अन्य छोटे कारोबारियों का कामकाज ठप होने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। वहीं विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
क्षेत्र के कुछ गांवों में पेयजल और बिजली की समस्या से परेशान लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए जाम तक लगाया। दूसरी ओर, जिन लोगों ने अपने घरों में सोलर लाइट और सौर ऊर्जा की व्यवस्था कर रखी है, उन्हें कुछ राहत मिली है।
उपभोक्ताओं में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर नाराजगी लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि वे नियमित रूप से बिजली के बिलों का भुगतान करते हैं, इसके बावजूद उन्हें आवश्यक सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मौजूदा संकट के लिए सरकार से अधिक जिम्मेदारी हड़ताल पर गए कर्मचारियों की है। लोगों ने मांग की है कि बिजली आपूर्ति जल्द बहाल की जाए, ताकि पेयजल संकट दूर हो और आमजन का दैनिक जीवन सामान्य हो सके।
उधर कनीना पावर हाउस पर दिन रात पुलिस एवं कुछ कर्मियों की तैनाती लगाई गई है ताकि किसी प्रकार की तोड़ फोड़ आदि न हो सके या फिर कोई नुकसान सरकारी संपत्ति को न कर सके।
फोटो कैप्शन 03= पावर हाउस कनीना बंद तथा पुलिस तैनात
30 विद्यार्थी खेल महाकुंभ 2026-27 में राज्य स्तर पर करेंगे जिला महेन्द्रगढ़ का प्रतिनिधित्व
--एसडीवमा विद्यालय, ककराला के विद्यार्थी
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कनीना की आवाज। एसडीवमा विद्यालय, ककराला के विद्यार्थियों ने बाक्सिंग, भारोतोलन, हाकी, फुटबाल में जिला स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए अब राज्य स्तर पर अपनी जगह बनाई है। विद्यार्थी खेल महाकुंभ 2026-27 आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में ये खिलाड़ी जिला का प्रतिनिधित्व करेंगे।
विद्यालय के उपनिदेशक पूर्ण सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 30 विद्यार्थी खेल महाकुंभ 2026-27 में ट्रायल के दौरान विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। बाक्सिंग सीनियर लड़कियों से 48 किलो भार वर्ग में साक्षी पुत्री नरेश कुमार, 51 किलो भार वर्ग में हिमांशी पुत्री अशोक यादव, 54 किलो भार वर्ग में दिव्या पुत्री महेश कुमार, 57 किलो भार वर्ग में तनिषा पुत्री सुक्रमपाल, 60 किलो भार वर्ग में कनिष्का पुत्री सतपाल, 65 किलो भार वर्ग में कनिका पुत्री सतेन्द्र सिहँ, 70 किलो भार वर्ग कामना पुत्री मंजीत, 80 किलो भार वर्ग में तन्नु पुत्री देवेन्द्र व 80$ भार वर्ग में साक्षी पुत्री सुरेन्द्र का खेल महाकुंभ के लिए चयन।
बॉक्सिंग सीनियर लड़कों से 50 किलो भार वर्ग में लव पुत्र चन्दन, 80 किलो भार वर्ग में साहिल पुत्र राजेन्द्र, 85 किलो भार वर्ग में हर्ष पुत्र देवेन्द्र, 90 किलो भार वर्ग में भारत पुत्र वेदप्रकाश, 90$ किलो भार वर्ग में विवेक पुत्र नवीन्र का खेल महाकुंभ के लिए चयन।
भारोतोलन सीनियर लड़कियों से 49 किलो भार वर्ग में प्रतिज्ञा पुत्री नरेन्द्र, 57 किलो भार वर्ग में कविता पुत्री प्रदीप, 69 किलो भार वर्ग में दिक्षा पुत्री रमेश कुमार का खेल महाकुंभ के लिए चयन।
भारोतोलन सीनियर लड़कों से 110 किलो भार वर्ग में दिपांशु पुत्र संदीप कुमार का खेल महाकुंभ के लिए चयन।
हाकी सीनियर लड़कियों में मोनिका पुत्री जिनानन्द, मिनाक्षी पुत्री जगमोहन, वर्षा पुत्री संजय, राम भतेरी पुत्री प्रदीप का हाकी टीम में चयन। हाकी सीनियर लड़कों में अनुज पुत्र सुनील कुमार व नितिन पुत्र नवीन कुमार का हॉकी टीम में चयन।
फुटबाल सीनियर लड़कियों में खुशी पुत्री दिनेश कुमार, पायल पुत्री मुलाराम, आंचल पुत्री संदीप कुमार, खुशी पुत्री जितेन्द्र का फुटबाल टीम में चयन।
इस अवसर पर विजेता खिलाडिय़ों को बधाई देते हुए विद्यालय के चेयरमैन जगदेव यादव ने खेलों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेल अत्यंत आवश्यक हैं। विद्यालय की खेल अकादमी एनआईएस प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक ओमप्रकाश, विद्यालय समिति के वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र यादव, सीईओ रामधारी, उपनिदेशक पूरण सिंह एवं प्रधानाचार्य अरविंद कुमार तोमर, कोर्डिनेटर स्नेह यादव, कोआर्डिनेटर प्रियंका यादव, खेल प्रमुख सोनू कोच, सास्वत मिश्रा को, विकास फुटबाल कोच, अमन बास्केट बाल कोच, विकास बालीबाल कोच, जूही प्रमार हाकी कोच, तमन्ना ताईकमाण्डों कोच, तेजपाल डीपी, संगीता डी.पी. सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: खेल महाकुभ के लिए दमखम दिखाते हुए
कैमला में आयोजित की गई बाल रामलीला
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कनीना की आवाज। राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में विभाग के निर्देशानुसार बाल रामलीला का मंचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृष्ण कुमार मुख्य शिक्षक राज्यकीय प्राथमिक पाठशाला बूचावास रहें। सभी विद्यार्थियों ने रामलीला के चित्रों का वर्णन, विस्तारपूर्वक से किया राम की भूमिका में अन्नु ,लक्ष्मण की भूमिका में धु्रव, हनुमान की भूमिका रिषभ,जीया ने संन्यासी , रावण का किरदार वान्या, अंगद का अध्या, दीपांशु और हिमांशु, नकुल वानर सेना का अभिनय निभाया सभी ने पात्रों के माध्यम से संवाद के द्वारा यथार्थ चित्रण प्रस्तुत कर सामाजिक कुरीतियों के प्रति एक नई चेतना, पुराणिक सनातन संस्कृति के महिमा का गुणगान किया भगवान श्री राम की लीलाओं का बखूबी वर्णन किया। सीता की भूमिका प्रीति ने निभाई मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने सभी प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के भौतिकवादी युग में मनुष्य आपा-धापी की दौड़ में लगा हुआ है, जिससे आज हमारे सामाजिक मूल्यों निरंतर गिर रहें है। ऐसे में उसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के चरित्र, आदर्शवादिता और मर्यादा को निभाना अति आवश्यक है जिससे संस्कृति को बचाया जा सकें परिवारों में एकजुटता का संदेश मिल सकें रामायण हमें जीवन, चरित्र ,परंपरा सिद्धांत मर्यादा और परस्पर प्रेम भाव का संदेश देती है। रामायण का प्रत्येक पात्र अपने आप में हमारे जीवन का आदर्श स्वरूप है हमें बखूबी इसका अध्ययन और मनन अपने जीवन में करना चाहिए सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति -पत्र और स्टेशनरी देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मनवीर सिंह विद्यालय अध्यापक, सुनील कुमार शास्त्री ,देवेंद्र यादव ,भगत सिंह, तारामणि देवी ,पिंकी देवी, बबली देवी, सुबे सिंह, पूर्व समिति प्रधान सुनील कुमार डीटीएच चौकीदार और संजीत एबीआरसी आदि उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 01: बाल रामलीला कलाकारों को पुरस्कृत करते हुए








































