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Saturday, October 24, 2026



 






जिला महेंद्रगढ़ में तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए डीओएसएम कमेटी गठित
-- किसानों को मिलेगा लाभ
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कनीना की आवाज।
क्षेत्र में तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने, किसानों की आय में वृद्धि करने और कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नेशनल मिशन आन एडिबल आयल्स,आयल सीड्स  के तहत माननीय अतिरिक्त उपायुक्त महोदय जिला महेंद्रगढ़ की अध्यक्षता में डीओएसएम (डिस्ट्रिक्ट ऑयल सीड मिशन) का गठन किया गया है। इस पहल से क्षेत्र के किसानों को तिलहन उत्पादन बढ़ाने तथा कृषि आधारित गतिविधियों से जुडऩे के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
 अधिकृत अधिकारियों की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चर्चा की गई। बैठक में कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ एसजीएल एग्रोइंडिया प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड करीरा तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मिशन के अंतर्गत किसानों को तिलहन फसलों के उत्पादन, उन्नत कृषि तकनीकों तथा फसल की बेहतर पैदावार के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।
बैठक में कृषि विभाग, उद्यान विभाग, एचएएफईडी, सहकारी बैंक तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठनों  और किसान समूहों को मजबूत करने तथा तिलहन उत्पादन से जुड़े कार्यों को संगठित तरीके से आगे बढ़ाने की योजना पर विचार किया गया।
मिशन के तहत किसानों को बेहतर उत्पादन तकनीक अपनाने, फसल की गुणवत्ता में सुधार करने और उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। तिलहन फसलों के उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलने से किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से कृषि आधारित गतिविधियों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाने और मूल्य संवर्धन की दिशा में काम किया जाए। इसके अंतर्गत तिलहन बीज वितरण, फॉर्मर फील्ड स्कूल का आयोजन, फील्ड डिमॉन्स्ट्रेशन,  खरीद और भंडारण,ऑयल एक्सपेलर मशीन लगाना तथा अन्य जरूरी सुविधाएं स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया, ताकि किसानों को अपनी उपज के प्रसंस्करण और विपणन में सहायता मिल सके।
फोटो कैप्शन 06: संबंधित है



26अक्टूबर को खिलाई जाएगी खीर
शरद पूर्णिमा पर बनाई जाएगी खीर, श्वास रोगियों के लिए रामबाण
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कनीना की आवाज।
 क्षेत्र में शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। इस मौके पर 25 अक्टूबर की रात के समय खीर बनाने तथा प्रसाद के रूप में अगले दिन बांटने की प्रथा चली आ रही है। मंदिरों में खीर बनाकर रात के समय चंद्रमा की किरणें डालकर खिलाने की परंपरा भी अनोखी है। 25 अक्टूबर को खिलाई जाएगी खीर।
    घरों में तो खीर बनती ही है साथ में मंदिरों में भी खीर बनाने की परंपरा है। यह खीर रातभर रखी खुले आकाश के नीचे रखी जाती है तथा चंद्रमा की किरणें डालकर इसे रोग विनाशक बनाकर ही खिलाया जाता है। महंत लालदास का कहना है कि इस रात को चंद्रमा अपने आप में पूर्ण होता है बाकी किसी भी पूर्णिमा को इतना बेदाग नहीं होता है। यही कारण है कि इसकी किरणें डाली जाती है जो मन व मस्तिष्क पर अच्छा प्रभाव डालती हैं।
 उधोदास आश्रम के महंत लालदास ने बताया कि उनके यहां तो जो खीर बनाई जाती है उस मखमल के कपड़े से ढककर रख दिया जाता है ताकि अधिक मात्रा में चंद्रमा की किरणें गिर सके। इन्हीं किरणों के कारण खीर का स्वाद मधुर बन जाता है। तत्पश्चात इस खीरा को रात के बारह बजे बाद ही प्रसाद बतौर खिलाया जाता है। इस खीर का श्वास रोगियों के लिए बेहद लाभ होता है। उन्होंने बताया कि इस खीर में डालने के लिए कई प्रकार की औषधियां व पदार्थ मंगवाएं हैं ताकि खीर के प्रसाद से उनका रोग ठीक हो सके। रातभर भजन कीर्तन करते हुए ठाकुर जी का भोग लगाकर प्रसाद चखते हंै।  
क्या कहते हैं वैद्य-
वैद्य बालकिशन एवं श्रीकिशन का कहना है कि शरद पूर्णिमा का पर्व बहुत अहमियत रखता है। यह पर्व कई रोगों से छुटकारा दिलाने वाला ही नहीं अपितु इंसान में नया संचार जगाने वाला होता है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने भी इस पर्व का विशेष महत्व बताया है तथा इस पर्व से सर्दी का मौसम जुड़ा है। सर्दी प्रारंभ होने से सेहत के लिए लाभकारी होती हैं। उन्होंने कहा कि इस दिन से जल्दी उठकर स्नान ध्यान करने से सभी कष्टï स्वत छूट जाते हैं तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 उन्होंने बताया कि इसी पर्व से जुड़ी है कार्तिक स्नान करने की परंपरा। महिलाएं पूरे एक माह तक चलता रहता है। एक माह बाद इसे संपन्न करती हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह समय अनुकूल माना जाता है।
फोटो कैप्शन: बाबा लालदास महाराज




कनीना अनाज मंडी में बाजरे की खरीद 2 लाख 75 हजार क्विंटल के पार
-10 निजी एजेंसियां कर रही हैं खरीद

-- निलंबित सचिव और मंडी सुपरवाइजर बहाल
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कनीना की आवाज।
 कनीना अनाज मंडी स्थित चेलावास में बाजरे की खरीद 2 लाख 75 हजार क्विंटल के पार पहुंच गई है। किसान तेजी से अपने वाहनों में बाजरा भरकर मंडी में बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। यहां 10 निजी एजेंसियों द्वारा बाजरे की खरीद की जा रही है। दूसरी ओर, सरकारी स्तर पर अभी तक बाजरे की खरीद शुरू नहीं हुई है।
 प्रधान पूर्ण चंद ने बताया कि मंडी में बाजरे की खरीद का कार्य तेजी से चल रहा है। किसान अपनी उपज लेकर लगातार मंडी पहुंच रहे हैं और निजी एजेंसियां बाजरे की खरीद कर रही हैं। एक ओर किसान रबी फसलों की तैयारी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर खरीफ की फसल बाजरे को बेचने के लिए मंडी का रुख कर रहे हैं।
यद्यपि सरकारी खरीद नहीं होने के कारण किसानों को निजी एजेंसियों के माध्यम से ही बाजरा बेचना पड़ रहा है। मंडी में लगातार बढ़ रही आवक के बीच खरीद कार्य सुचारु रूप से जारी है।
सचिव और मंडी सुपरवाइजर बहाल--
कनीना अनाज मंडी के सचिव अजीत सिंह तथा मंडी सुपरवाइजर कुलदीप कुमार को गत दिनों अनियमितताओं के चलते निलंबित किया गया था। अब दोनों अधिकारियों की बहाली हो गई है। सचिव अजीत सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि वे दोनों बहाल हो चुके हैं और अपना कार्यभार संभालकर काम कर रहे हैं।
फोटो कैप्शन 05: कनीना मंडी में बाजरे की खरीद


कनीना के नए बस स्टैंड का निर्माण कार्य शुरू
-छह बूथों वाली दो मंजिला इमारत में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं, 18 माह में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
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कनीना की आवाज।
कनीना बस स्टैंड के नए भवन का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। शनिवार सुबह बस स्टैंड परिसर में नारियल तोड़कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। हरियाणा सरकार की ओर से इस परियोजना के लिए 11 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। छह बूथों वाला यह बस स्टैंड दो मंजिला इमारत के रूप में तैयार किया जाएगा। इसमें यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। निर्माण कार्य को 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ठेकेदार सुनील ने बताया कि नए बस स्टैंड भवन में यात्रियों की सुविधा और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक व्यवस्थाएं की जाएंगी। भवन में वातानुकूलित प्रतीक्षालय, डिजिटल बारकोड सुविधा वाला टिकट काउंटर, जलपान के लिए तीन दुकानें और एटीएम के लिए अलग स्थान निर्धारित किया जाएगा। इसके अलावा महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएंगे। दिव्यांगजनों के लिए अलग शौचालय और रैंप की व्यवस्था भी होगी, ताकि उन्हें आवागमन में परेशानी न हो।
नए बस स्टैंड भवन में छोटे बच्चों को दूध पिलाने के लिए बेबी फीडिंग रूम बनाया जाएगा। यात्रियों के मोबाइल और अन्य उपकरण चार्ज करने के लिए अलग चार्जिंग रूम की व्यवस्था होगी। भवन की ऊपरी मंजिल पर पांच कार्यालय और कर्मचारियों के लिए एक विश्राम कक्ष बनाया जाएगा। यात्रियों को दोनों मंजिलों तक आने-जाने में सुविधा देने के लिए लिफ्ट भी लगाई जाएगी। बस स्टैंड परिसर में वाहनों की पार्किंग के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने की योजना है। इसके साथ ही परिसर की सुंदरता बढ़ाने के लिए हरियाली विकसित की जाएगी। इन सुविधाओं से यात्रियों को बसों का इंतजार करने, टिकट लेने और अन्य जरूरी कार्यों के लिए बेहतर वातावरण मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य मंत्री एवं अटेली की विधायक आरती सिंह राव ने दूरभाष पर जानकारी देते हुए बताया कि कनीना क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बस स्टैंड के नए भवन के निर्माण की मांग और शिकायतें सामने आ रही थीं। यात्रियों की परेशानियों को देखते हुए नए भवन के लिए बजट स्वीकृत करवाया गया है। उन्होंने बताया कि छह बूथों वाला बस स्टैंड दो मंजिला इमारत के रूप में बनाया जाएगा, जिसमें यात्रियों के लिए विभिन्न आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। ठेकेदार सुनील ने बताया कि निर्माण कार्य पूरा होने में करीब 18 महीने लगने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान यात्रियों को बसों का इंतजार करने और वाहनों को खड़ा करने में परेशानी न हो, इसके लिए अस्थायी व्यवस्था की गई है। यात्रियों के बैठने और ठहरने के लिए टीन शेड बनाया गया है। साथ ही पीने के पानी की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने बताया कि बस स्टैंड परिसर में निर्माण से संबंधित सभी कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार करवाए जाएंगे। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कनीना और आसपास के गांवों से आने-जाने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि अगस्त 2026 में बस स्टैंड के  लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। पुराने बस स्टैंड का शिलान्यास 22 दिसंबर 1974 कर्नल महासिंह
ने किया था और उन्हीं ने इसका उद्घाटन भी किया था।
फोटो कैप्शन 04: बस स्टैंड कनीना निर्माण कार्य करते हुए


 एचसीएस बनी शीतल यादव का सम्मान 25 को
--एचसीएस में पाई है 26वीं रैंक
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव कोटिया की शीतल ने पास की एचसीएस की परीक्षा। उन्होंने एचसीएस में 26वां रैंक पाया था।
25 अक्टूबर को कोटिया गांव के सरकारी स्कूल में उनका सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
विस्तृत जानकारी देते हुए देशराज यादव समाजसेवी कोटिया ने बताया कि शीतल ने ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी विद्यालय में प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की उसने हरियाणा सिविल सर्विस में सफलता प्राप्त कर अपने परिवार और गाव व समाज का नाम रौशन किया है ।
शीतल के दादा स्व. दयाराम ने हमेशा बच्चों की शिक्षा पर ही जोर दिया और पोती के लिए भी हमेशा कहते थे की बेटी खूब पढ़ लिख कर बड़ी अफसर बनना। आज दादा के उसी सपने को साकार करते हुए हरियाणा सिविल सर्विस में सफलता हासिल कर अपने माता पिता और गांव व क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है।  शीतल के माता और पिताजी दोनों ही सरकारी शिक्षक है।  शीतल ने प्राथमिक शिक्षा शिक्षा गाहड़ा के सरकारी विद्यालय से पूरी की उच्च शिक्षा पंचकुला व चंडीगढ़ से पूरी की। शीतल शुरू से ही होनहार छात्रा रही है स्नातक शिक्षा में भी उन्होंने विश्वविद्यालय में दूसरा स्थान हासिल किया था। उसके बाद यूपीएससी में भी इंटरव्यू स्तर तक पहुंच गई थी और अब यूपीएससी की एचसीएस की परीक्षा पास करके दादा के सपने को साकार किया है।
फोटो कैप्शन: एचसीएस शीतल






महिला के साथ किया दुष्कर्म, पुत्री के साथ छेड़छाड़
-कमरा किराये पर दिलाने के नाम पर किया दुष्कर्म
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के एक गांव की महिला ने परिचित व्यक्ति पर उसके साथ दुष्कर्म करने और उसकी नाबालिग बेटी के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। महिला की शिकायत पर शहर थाना कनीना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, जान से मारने की धमकी देने और पाक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दी शिकायत में महिला ने बताया कि वह घरेलू काम करती है और उसके तीन बच्चे हैं। उसका पति रेवाड़ी में स्टील बाइंडिंग का काम करता है। महिला के अनुसार, उसके पति की जान-पहचान झाड़ली निवासी एक व्यक्ति से थी, जिसका उनके घर भी आना-जाना था। इसी परिचय के चलते महिला भी आरोपी को जानती थी।
महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे अपनी दुकान पर बर्तन साफ करने का काम दिया था। करीब छह माह पूर्व वह महिला से फोन पर बातचीत करने लगा। आरोपी ने महिला को काम पर आने-जाने में होने वाली देरी का हवाला देकर कनीना में वेद मंदिर के पास किराए पर कमरा दिलाने की बात कही। महिला के अनुसार, आरोपी ने कमरा दिलाया और वहां उसके साथ  दुष्कर्म किया।
महिला की शिकायत के अनुसार, 30 सितंबर 2026 की रात आरोपी मकान पर आया हुआ था। महिला ने आरोप लगाया कि रात करीब 12:30 बजे आरोपी ने उसकी नाबालिग बेटी के साथ गलत व्यवहार किया और उसके कपड़े फाड़ दिए। महिला ने किसी तरह अपनी बेटी को आरोपी से छुड़ाया और उसे घर से जाने के लिए कहा।
वहां से जाते समय आरोपी ने घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। इसके बाद महिला अपनी बेटी और पति के साथ पुलिस थाने पहुंची और शिकायत दी।कनीना पुलिस ने महिला और नाबालिग पीडि़ता के बयान दर्ज किए गए। शुक्रवार को को शहर थाना कनीना में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।





32 वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026-27 में एसडी स्कूल की दो टीमों का राज्य स्तरीय के लिए हुआ चयन
--जगदेव यादव ने दी बधाई
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कनीना की आवाज।
32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026-27 में एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की दो टीमों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है।
विद्यालय उपनिदेशक पूर्ण सिंह ने बताया कि 23 अक्टूबर को नारनौल आयोजित इस प्रतियोगिता में कुल 170 टीमों ने भाग लिया जिनमें से केवल 10 टीमों को राज्य स्तर पर आगे बढऩे का अवसर मिला। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच एसडी विद्यालय की दोनों टीमों ने उपलब्धि हासिल की। प्रतियोगिता का आयोजन दो वर्गों में किया गया। जूनियर वर्ग में समर तथा हार्दिक ने अपने शोध प्रोजेक्ट हाइड्रोकेश के माध्यम से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वहीं सीनियर वर्ग में रितिकतथा यश ने अपने शोध प्रोजेक्ट एसी कंडेनसेट हाइड्रोपोनिक्स के माध्यम से सफलता प्राप्त की। इस परियोजना में एयर कंडीशनर से निकलने वाले संघनित जल का उपयोग हाइड्रोपोनिक विधि से पौधे उगाने में करने की संभावनाओं पर शोध किया गया। यह प्रयास जल के सदुपयोग, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक अभिनव पहल है।
विद्यालय के चेयरमैन जगदेव यादव ने बताया कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता, शोध प्रवृत्ति और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने वाला एक प्रमुख विज्ञान कार्यक्रम है। इसमें विद्यार्थी अपने आसपास की समस्याओं का अध्ययन करते हैं, स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर शोध करते हैं और वैज्ञानिक विधि से संभावित समाधान प्रस्तुत करते हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें खोज, प्रयोग और नवाचार के लिए प्रेरित करना है।
इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक ओमप्रकाश, विद्यालय समिति के वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र यादव, उपनिदेशक पूरण सिंह एवं प्रधानाचार्य अरविंद कुमार तोमर, कोर्डिनेटर स्नेह यादव, प्रियंका यादव सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ  सदस्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: राज्य स्तर के लिए चयनीत स्कूली बच्चे



नशा मुक्त युवा, विकसित भारत विषय पर पड़ोस युवा संसद कार्यक्रम का आयोजन
-माय भारत द्वारा आस पड़ोस युवा संसद का आयोजन
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कनीना की आवाज। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत माय भारत, महेंद्रगढ़ द्वारा युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा नशा मुक्त भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नशा मुक्त युवा, विकसित भारत विषय पर पड़ोस युवा संसद कार्यक्रम का आयोजन बैजनाथ चौधरी राजकीय महिला महाविद्यालय नांगल चौधरी में किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डा. अनीता तंवर, प्राचार्य ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए इस प्रकार की जागरूकता एवं सहभागिता आधारित गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही नशा मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में सार्थक प्रयास किए जा सकते हैं।
प्रो. सुषमा यादव ने नशे के कारणों, दुष्प्रभावों तथा व्यक्ति, परिवार एवं समाज पर पडऩे वाले इसके गंभीर प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने, सकारात्मक सोच अपनाने और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
डॉ. मनोज कुमार ने समूह चर्चा, प्रश्नोत्तरी, उदाहरण आधारित अध्ययन, भूमिका-अभिनय तथा अन्य सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को नशा मुक्ति के प्रति जागरूक किया। उन्होंने युवाओं को अपने परिवार, मित्रों और समाज में नशे के विरुद्ध जागरूकता फैलाने तथा सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया ।
यूथ आइकन हरीश शर्मा ने नशा मुक्ति पर आधारित लघु फिल्मों एवं वृत्तचित्रों का प्रदर्शन किया। इसके माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्परिणामों, नशे से बाहर निकलने के प्रयासों तथा नशा मुक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका के बारे में जागरूक किया गया।
जिला युवा अधिकारी नित्यानंद यादव ने दी माय भारत पोर्टल की जानकारी-
जिला युवा अधिकारी नित्यानंद यादव ने माय भारत पोर्टल पर संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि युवा इस पोर्टल के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेकर अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता को विकसित कर सकते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से विकसित भारत युवा संसद 2026-27 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 18 से 25 वर्ष की आयु के युवा एक राष्ट्र, एक चुनाव विषय पर आयोजित युवा संसद में भाग ले सकते हैं। उन्होंने युवाओं से माय भारत पोर्टल पर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने तथा राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
नशा मुक्ति की शपथ-
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित युवाओं को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक राहुल, अमित एवं बृजेश का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके सहयोग से कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों के संचालन में सहायता मिली।
फोटो कैप्शन 01 व 02:संबंधित है

Friday, October 23, 2026



 


विश्व पोलयों दिवस-24 अक्टूबर
करीब शत प्रतिशत काबू पा लिया है पोलियो पर- डा. मोरवाल
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कनीना की आवाज।
  दुनिया भर में जिस दर से पोलियों पर काबू पाने के प्रयास किये हैं उससे पोलियो का लगभग खात्मा हो गया है। वर्ष 1980 के बाद शत प्रतिशत  के करीब पोलियो पर काबू पा लिया है। पोलियो के केस 1980 से पहले मिल सकते हैं किंतु वर्तमान में बाद 1980  के बाद जिला महेंद्रगढ़ से शायद ही कोई मामला हो। पोलियो टीकाकरण और पोलियो उन्मूलन के लिए जागरूकता बढ़ाई गई है जिसके कारण इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई लड़ी गई और पूर्णतया काबू पा लिया है।
विश्व पोलियो दिवस जोनास साल्क की जयंती के रूप में मनाया जाता है। वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने पोलियो की वैक्सीन विकसित की थी। इस बीमारी के खिलाफ अभियान की शुरुआत रोटरी इंटरनेशनल द्वारा की गई थी जो अंतर्राष्ट्रीय सेवा संगठन ने दुनिया भर में कार्यक्रम चलाए गए। पोलियो की खुराक पिलाई गई जिसके कारण पोलियो पर काबू पा लिया है।
*** पोलियो एक विषाणु जनित रोग है जो एंटरोवायरल से फैलता है। यह विष्णु तांत्रिक संक्रामक बीमारी के रूप में परिभाषित होता है जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को अधिक प्रभावित करता है। जो अपंग बना देता है। यह घातक बीमारी जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है,यह दूषित भोजन और पानी के कारण फैलती है। तत्पश्चात रोगाणु तंत्रिका तंत्र तक चला जाता है। इस बीमारी में कुछ लोगों में बुखार, थकान, मचली, दर्द, नाक बंद होना, गले में खराश, खांसी, गर्दन पीठ में अकडऩ, हाथ पैरों में दर्द, कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। यह रोगाणु मांसपेशियों को पूर्णत नष्ट कर देता है उसके कारण इंसान अपंग बन जाता है। केवल टीकाकरण से इसका इलाज संभव है। पालियो का टीका बच्चों के शरीर में पोलियो वायरस से लडऩे की क्षमता बढ़ाता है। इसकी आईपीवी और ओपीवी दोनों प्रकार की दवाई दी जाती है जो मुख के जरिए पिलाई जाती है। आजकल पोलियो की खुराक को टीकों में ही शामिल कर लिया गया है। डीपीटी का टीका लगाया जाता है जो इस रोग से बचाने में मददगार साबित होता है। मौखिक रूप से दी जाने वाली दवा की खुराक 6 सप्ताह, 10 सप्ताह, 14 सप्ताह और बूस्टर 26, 16 से 24 महीने में दी जाती है।
पोलियो को समाप्त करने के लिए पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम चलाए गए जिनके कारण पोलियो पर काबू पा लिया है। अभी समय-समय पर सख्त उपाय और टीकाकरण की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस रोग से बचने का स्वच्छता एक तरीका है, जितना स्वच्छता पर ध्यान दिया जाए उतना ही रोग कम फैलेगा।
-- डा. जितेंद्र मोरवाल उप-नागरिक अस्पताल कनीना
सरकार बीसीजी, रोटा, आईपीवी आदि की तक लगती है या खुराक पिलाई जाती है। रोटा की 5 बूंद पिलाई जाती है जो टेटनस रोग पर काबू पाती है। वही पीसीबी पांच बीमारियों से बचाने वाला एक टीका है वही आईपीवी जिसे एंटी पोलियो वैक्सीन कहा जाता है। इसी प्रकार सरकार अनेक टीके लगाती है। जब बच्चा 5, 10 और 16 सप्ताह का होता है बीसीजी का टीका, पोलियो की खुराक पिलाई जाती है। डेढ़, ढाई और साढ़े तीन माह बाद बूस्टर डोज दी जाती है। बचपन में ही टीके लगाकर इस रोग पर काबू पाया जा सकता है।
कनीना उप नागरिक अस्पताल में पोलियो का कोई मरीज वर्तमान में नहीं आया है। 30 साल पहले कोई पोलियो का मरीज आता था किंतु आप सरकार ने विभिन्न टीके एवं खुराक पोलियो से बचने की पिलाई जाती हैं।
-- शीशराम हेल्थ इंस्पेक्टर
 फोटो कैप्शन: शीशराम एचआई एवं डा. जितेंद्र मोरवाल।









पेयजल संकट को लेकर दिया एसडीएम कनीना को ज्ञापन

---अतरलाल ने की कार्रवाई
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कनीना की आवाज।
 बृहस्पतिवार से बिजली आपूर्ति ठप्प होने से परेशान लोगों ने उपमंडल अधिकारी (ना.) कनीना तथा उपमंडल अधिकारी (बिजली) कनीना के कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन कर इलाके की बिजली आपूर्ति तत्काल बहाल करने की मांग की है। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रजा भलाई संगठन के अतरलाल और रतन सिंह चेयरमैन ने किया। इसमें इलाके के किसान, मजदूर, दुकानदार, विद्यार्थी, कारोबारी तथा अन्य उपभोक्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। उन्होंने बिजली आपूर्ति बहाल करो, बिजली विभाग होश में आओ, लोगों की परेशानी दूर करो तथा शासन-प्रशासन होश में आओ के जोरदार नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए अतरलाल ने कहा कि गत बृहस्पतिवार से बिजली आपूर्ति बंद होने के कारण इलाके के लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। किसान सरसों तथा गेहूं की बिजाई के लिए जो पलेवा कर रहा था वह बीच में रुक गया है। घरों, दुकानों, स्कूल, कालेजों, निजी दफ्तरों में परेशानी बढऩे लगी है। उपभोक्ताओं को पानी की मोटर चलाने, घरेलु उपकरणों का इस्तेमाल करने और रोजाना की दिनचर्या के कार्यों में परेशानी उठानी पड़ रही है। रतनसिंह चेयरमैन ने कहा कि बिजली आपूर्ति ठप्प होना सरकार की नाकामी है। उन्होंने चेतावनी दी कि 6 घंटे में बिजली आपूर्ति बहाल न की गई तो सड़कों पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन करेंगे और बिजली आपूर्ति बहाल करवाकर रहेंगे। बाद में प्रदर्शनकारियों ने बसपा नेता अतरलाल के नेतृत्व में उपमंडल अधिकारी (ना.) कनीना को ज्ञापन सौंपा। जिसे उन्होंने तत्काल सरकार को भेजकर शीघ्र विद्युत आपूर्ति बहाल करवाने का भरोसा दिया। इस अवसर पर रामकिशन पहलवान, राकेश यादव, रतनसिंह चेयरमैन, पिताम्बर प्रधान, राजबीर, राजेन्द्र सिंह नम्बरदार, हवासिंह, हव. कृष्ण सिंह, कैलाश सेठ, दानसिंह प्रजापत, हरीपाल सिंह, घनश्याम पंच, रामबीर पंच, पवन चौधरी, किशनपाल, डॉ. मुकेश पंच, धीरज, मीर सिंह वैद्य, मुकेश स्वामी, हरीश सिंगर, धर्मबीर, महेन्द्र सिंह, अजय, जग्गी, रोशन आदि छिथरोली, झाड़ली, सिहोर, धनौन्दा, खरकड़ाबास, पाथेड़ा, खेड़ी तलवाना गांवों के सैकड़ों जन उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 09 : ज्ञापन एसडीएम कनीना को सौंपते अतरलाल





बिजली के अभाव में बुजुर्गों ने नई पीढ़ी को पढ़ाया जीवन का पाठ
-दो दिन की बिजली गुल, तो खुल गई पुराने जमाने की यादों की किताब!
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कनीना की आवाज।
बिजली विभाग की हड़ताल के चलते पिछले दो दिनों से बिजली और पेयजल की समस्या ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। कहीं पंखे बंद हैं, कहीं मोबाइल की बैटरी जवाब दे रही है तो कहीं पानी के लिए लोग इधर-उधर भटक रहे हैं। लेकिन इसी परेशानी के बीच गांव के बुजुर्गों को नई पीढ़ी को ज्ञान बांटने का सुनहरा अवसर मिल गया।
एक जगह कुछ युवक बिजली को कोस रहे थे। कोई कह रहा था कि बिना पंखे के नींद नहीं आती, तो कोई बोला कि मोबाइल चार्ज नहीं हो रहा, अब समय कैसे कटेगा? तभी एक बुजुर्ग ने मूंछों पर ताव देते हुए कहा, ''बेटा, तुम तो दो दिन में ही ऐसे घबरा गए, जैसे बिजली नहीं, तुम्हारी सांसें बंद हो गई हों!
युवकों ने पूछा, ''दादा जी, आपके जमाने में बिजली नहीं होती थी तो आप लोग कैसे रहते थे?
बुजुर्ग बोले, ''हमारे जमाने में बिजली का नाम तो सुना था, लेकिन घर में दर्शन दुर्लभ थे। गर्मी लगती थी तो हाथ का पंखा चलाते थे। रात को छत पर चारपाई डालकर सोते थे। हवा चलती तो कुदरत का एसी और हवा बंद हो जाती तो हाथ का पंखा ही कूलर बन जाता था।
दूसरे बुजुर्ग ने चुटकी लेते हुए कहा, ''हमारे समय में मोबाइल नहीं था, इसलिए बैटरी खत्म होने का दुख भी नहीं था। रिश्तेदारों से बात करनी होती तो उनके घर चले जाते थे। आज मोबाइल में सौ नंबर हैं, मगर पड़ोसी का हाल पूछने की फुर्सत नहीं!
एक युवक बोला, ''दादा जी, पानी की समस्या तो तब भी होती होगी? बुजुर्ग हंसकर बोले, ''बिल्कुल! तब कुएं से पानी खींचते थे। अब मोटर बंद होते ही लोग ऐसे परेशान हैं, मानो कुएं में पानी नहीं, पूरा गांव ही डूब गया हो!
यह सुनकर वहां ठहाके गूंज उठे। फिर एक बुजुर्ग ने गंभीर होकर कहा, ''बेटा, पुराने समय में सुविधाएं कम थीं, मगर सहनशक्ति ज्यादा थी। आज सुविधाएं बहुत हैं, लेकिन उनके बिना दो दिन बिताना भी मुश्किल लगता है।
हालांकि बुजुर्गों की बातें अपनी जगह हैं, लेकिन बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलना भी जरूरी है। उपभोक्ता नियमित बिल भरते हैं, इसलिए निर्बाध आपूर्ति की जिम्मेदारी से संबंधित विभाग मुंह नहीं मोड़ सकता।
दो दिन की बिजली कटौती ने नई पीढ़ी को पुराने जमाने की याद तो दिला दी। बच्चों ने उस जमाने का दर्शन करना पड़ा जब बुजुर्ग कम संसाधनों में जीवन जीकर गए हैं, बिजली होती नहीं थी और ठीक ऐसे ही अंधेरा होता था जैसा दो दिनों से।
फोटो केप्शन 08:बुजुर्गों के जीने का अंदाजा बताते हुए एक अधेड़







बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच योगेश कुमार ने किया पेयजल का प्रबंध
निजी खर्च से अल्टरनेटर मंगवाकर लोगों को करवाया पेयजल सुलभ, क्षेत्रवासियों ने जताया आभार
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कनीना की आवाज।
 बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पिछले दो दिनों से क्षेत्र में बिजली और पेयजल संकट गहराया हुआ है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से अनेक स्थानों पर लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मुश्किल समय में कस्बा कनीना के वार्ड एक निवासी योगेश कुमार पुत्र कृष्ण कुमार दुकानदार ने आगे आकर पेयजल की व्यवस्था करने में सहयोग दिया। उन्होंने अल्टरनेटर मंगवाकर पानी की आपूर्ति का प्रबंध किया, जिससे लोगों को राहत मिली।
जानकारी के अनुसार, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पेयजल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बिजली के अभाव में पेेयजल सप्लाई नहीं हो पा रहा है और लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए पानी जुटाने में परेशानी हो रही है। इस स्थिति को देखते हुए योगेश कुमार ने अपने स्तर पर प्रयास करते हुए अल्टरनेटर मंगवाया और पेयजल उपलब्ध करवाया।
योगेश कुमार के इस कदम से लोगों को राहत मिली। क्षेत्रवासियों ने उनके प्रयास की सराहना करते हुए आभार जताया।
क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि 25 अक्टूबर तक ,  पेयजल व्यवस्था बहाल हो सकेगी चूंकि 24 अक्टूबर तक बिजली कर्मियों की हड़ताल है। फिलहाल योगेश कुमार द्वारा किया गया प्रयास सराहनीय रहा है।
फोटो कैप्शन 06 व 07: योगेश कुमार एल्टरनेटर से पेयजल उपलब्ध करवाते हुए






बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से पैदा हुआ  पेयजल संकट,           --निजी खर्च पर सरपंच ने मंगवाया अल्टरनेटर
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कनीना की आवाज।
 बिजली कर्मचारियों की दो दिनों से जारी हड़ताल के चलते जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली और पेयजल संकट गहराता जा रहा है, वहीं गांव झगड़ोली के सरपंच मुकेश कुमार सोनी ने ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए सराहनीय पहल की है। उन्होंने अपने निजी खर्च से अल्टरनेटर मंगवाकर गांव में पेयजल आपूर्ति का प्रबंध किया, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली और लोगों के घरों तक पानी पहुंच सका।
बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण गांव की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। ऐसे में ग्रामीणों के सामने पीने के पानी की समस्या खड़ी हो गई थी। समस्या की गंभीरता को समझते हुए सरपंच मुकेश कुमार सोनी ने स्वयं पहल की और अल्टरनेटर की व्यवस्था करवाई, ताकि गांव की वाटर सप्लाई को चलाया जा सके। उनके इस प्रयास से ग्रामीणों को पानी उपलब्ध हो पाया और लोगों को राहत मिली।
इस कार्य में सरपंच की टीम के अनेक सदस्यों और ग्रामीणों ने भी सहयोग किया। सभी ने मिलकर पेयजल आपूर्ति सुचारु करने के लिए प्रयास किए। सामूहिक सहयोग और आपसी तालमेल से यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ तथा लोगों के घरों तक पानी पहुंचाया गया।
ग्रामीणों ने सरपंच मुकेश कुमार सोनी और उनकी टीम का आभार जताते हुए कहा कि संकट के समय जनप्रतिनिधि का इस प्रकार आगे आना सराहनीय है। उल्लेखनीय है कि बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण प्रदेश के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में झगड़ोली के सरपंच की पहल ने लोगों का मन जीत लिया।
फोटो कैप्शन 05: सरपंच मुकेश सोनी(फोटो में टोपीवाले) अपनी टीम के साथ






भडफ़ गांव में पेयजल और बिजली संकट से परेशान महिलाओं ने लगाया जाम
-दो दिन से जलापूर्ति और बिजली नहीं आने से ग्रामीणों में रोष, पुलिस ने समझाकर खुलवाया जाम
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कनीना की आवाज।
 कनीना उपमंडल के भडफ़ गांव में पिछले दो दिनों से पेयजल आपूर्ति और बिजली नहीं आने से परेशान महिलाओं ने सड़क पर जाम लगा दिया। जाम लगने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर कनीना पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझाकर जाम खुलवाया।
जानकारी के अनुसार, गांव में पिछले दो दिनों से बिजली और पेयजल आपूर्ति बाधित होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। घरों में पानी की कमी होने से महिलाओं को दैनिक कार्य निपटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। लगातार बिजली और पानी नहीं मिलने से परेशान महिलाओं ने धैर्य खो दिया और उन्होंने सड़क पर जाम लगा दिया। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
जाम की सूचना मिलने पर कनीना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने महिलाओं से बातचीत की और उन्हें बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारणों की जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि बिजली विभाग के कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के चलते बिजली व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बिजली नहीं आने के कारण पेयजल आपूर्ति भी बाधित हुई है।
पुलिस ने महिलाओं को समझाया कि वे जाम हटाकर अपने घर लौट जाएं। पुलिस के समझाने पर महिलाएं वापस घर चली गईं और सड़क पर यातायात बहाल हो गया। ग्रामीणों के सामने अब पेयजल की समस्या बनी हुई है। बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
नऊोटो कैप्शन 04: भडफ़ गांव में जाम की स्थिति






बिजली विभाग की दूसरे दिन भी हड़ताल जारी, पेयजल संकट से ग्रामीण परेशान
बिजली गुल होने से दुकानदारों की रोजी-रोटी प्रभावित, विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित
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कनीना की आवाज।
 बिजली विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को भी क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति प्रभावित रही। गुरुवार को कुछ कर्मचारी तैनात थे, लेकिन शुक्रवार को वे भी हड़ताल पर चले गए। इसके चलते बिजली व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
गुरुवार को दोपहर तक विद्युत आपूर्ति चल रही थी, लेकिन इसके बाद बिजली गुल होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के पीछे इन कर्मियों का ही हाथ है। वे फाल्ट डालकर चले गए। दो दिनों से बिजली और पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। पेयजल के लिए लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कई गांवों में लोग दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं। बिजली पर निर्भर दुकानदारों और अन्य छोटे कारोबारियों का कामकाज ठप होने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। वहीं विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
क्षेत्र के कुछ गांवों में पेयजल और बिजली की समस्या से परेशान लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए जाम तक लगाया। दूसरी ओर, जिन लोगों ने अपने घरों में सोलर लाइट और सौर ऊर्जा की व्यवस्था कर रखी है, उन्हें कुछ राहत मिली है।
उपभोक्ताओं में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर नाराजगी लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि वे नियमित रूप से बिजली के बिलों का भुगतान करते हैं, इसके बावजूद उन्हें आवश्यक सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मौजूदा संकट के लिए सरकार से अधिक जिम्मेदारी हड़ताल पर गए कर्मचारियों की है। लोगों ने मांग की है कि बिजली आपूर्ति जल्द बहाल की जाए, ताकि पेयजल संकट दूर हो और आमजन का दैनिक जीवन सामान्य हो सके।
 उधर कनीना पावर हाउस पर दिन रात पुलिस एवं कुछ कर्मियों की तैनाती लगाई गई है ताकि किसी प्रकार की तोड़ फोड़ आदि न हो सके या फिर कोई नुकसान सरकारी संपत्ति को न कर सके।
फोटो कैप्शन 03= पावर हाउस कनीना बंद तथा पुलिस तैनात







30 विद्यार्थी खेल महाकुंभ 2026-27 में राज्य स्तर पर करेंगे जिला महेन्द्रगढ़ का प्रतिनिधित्व

--एसडीवमा विद्यालय, ककराला के विद्यार्थी
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कनीना की आवाज।
एसडीवमा विद्यालय, ककराला के विद्यार्थियों ने बाक्सिंग, भारोतोलन, हाकी, फुटबाल  में जिला स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए अब राज्य स्तर पर अपनी जगह बनाई है। विद्यार्थी खेल महाकुंभ 2026-27 आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में ये खिलाड़ी जिला का प्रतिनिधित्व करेंगे।
विद्यालय के उपनिदेशक पूर्ण सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 30 विद्यार्थी खेल महाकुंभ 2026-27 में ट्रायल के दौरान विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। बाक्सिंग सीनियर लड़कियों से 48 किलो भार वर्ग में साक्षी पुत्री नरेश कुमार, 51 किलो भार वर्ग में हिमांशी पुत्री अशोक यादव, 54 किलो भार वर्ग में दिव्या पुत्री महेश कुमार, 57 किलो भार वर्ग में तनिषा पुत्री सुक्रमपाल, 60 किलो भार वर्ग में कनिष्का पुत्री सतपाल, 65 किलो भार वर्ग में कनिका पुत्री सतेन्द्र सिहँ, 70 किलो भार वर्ग कामना पुत्री मंजीत, 80 किलो भार वर्ग में तन्नु पुत्री देवेन्द्र व 80$ भार वर्ग में साक्षी पुत्री सुरेन्द्र का खेल महाकुंभ के लिए चयन।
बॉक्सिंग सीनियर लड़कों से 50 किलो भार वर्ग में लव पुत्र चन्दन, 80 किलो भार वर्ग में साहिल पुत्र राजेन्द्र, 85 किलो भार वर्ग में हर्ष पुत्र देवेन्द्र, 90 किलो भार वर्ग में भारत पुत्र वेदप्रकाश, 90$ किलो भार वर्ग में विवेक पुत्र नवीन्र का खेल महाकुंभ के लिए चयन।
भारोतोलन सीनियर लड़कियों से 49 किलो भार वर्ग में प्रतिज्ञा पुत्री नरेन्द्र, 57 किलो भार वर्ग में कविता पुत्री प्रदीप, 69 किलो भार वर्ग में दिक्षा पुत्री रमेश कुमार का खेल महाकुंभ के लिए चयन।
भारोतोलन सीनियर लड़कों से 110 किलो भार वर्ग में दिपांशु पुत्र संदीप कुमार का खेल महाकुंभ के लिए चयन।
हाकी सीनियर लड़कियों में मोनिका पुत्री जिनानन्द, मिनाक्षी पुत्री जगमोहन, वर्षा पुत्री संजय, राम भतेरी पुत्री प्रदीप का हाकी टीम में चयन। हाकी सीनियर लड़कों में अनुज पुत्र सुनील कुमार व नितिन पुत्र नवीन कुमार का हॉकी टीम में चयन।
फुटबाल सीनियर लड़कियों में खुशी पुत्री दिनेश कुमार, पायल पुत्री मुलाराम, आंचल पुत्री संदीप कुमार, खुशी पुत्री जितेन्द्र का फुटबाल टीम में चयन।
इस अवसर पर विजेता खिलाडिय़ों को बधाई देते हुए विद्यालय के चेयरमैन जगदेव यादव ने खेलों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेल अत्यंत आवश्यक हैं। विद्यालय की खेल अकादमी एनआईएस प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।  इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक ओमप्रकाश, विद्यालय समिति के वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र यादव, सीईओ रामधारी, उपनिदेशक पूरण सिंह एवं प्रधानाचार्य अरविंद कुमार तोमर, कोर्डिनेटर स्नेह यादव, कोआर्डिनेटर प्रियंका यादव, खेल प्रमुख सोनू कोच, सास्वत मिश्रा को, विकास फुटबाल कोच, अमन बास्केट बाल कोच, विकास बालीबाल कोच, जूही प्रमार हाकी कोच, तमन्ना ताईकमाण्डों कोच, तेजपाल डीपी, संगीता डी.पी. सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: खेल महाकुभ के लिए दमखम दिखाते हुए






कैमला में आयोजित की गई बाल रामलीला
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कनीना की आवाज। राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में विभाग के निर्देशानुसार बाल रामलीला का मंचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृष्ण कुमार मुख्य शिक्षक राज्यकीय प्राथमिक पाठशाला बूचावास रहें। सभी विद्यार्थियों ने रामलीला के चित्रों का वर्णन, विस्तारपूर्वक से किया राम की भूमिका में अन्नु  ,लक्ष्मण की भूमिका में धु्रव, हनुमान की भूमिका रिषभ,जीया ने संन्यासी , रावण का किरदार वान्या, अंगद का अध्या, दीपांशु और हिमांशु, नकुल वानर सेना का अभिनय निभाया सभी  ने पात्रों के माध्यम से संवाद के द्वारा यथार्थ चित्रण प्रस्तुत कर सामाजिक कुरीतियों के प्रति एक नई चेतना, पुराणिक सनातन संस्कृति के महिमा का गुणगान किया भगवान श्री राम की लीलाओं का बखूबी वर्णन किया। सीता की भूमिका प्रीति ने निभाई मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने सभी प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के भौतिकवादी युग में मनुष्य आपा-धापी  की दौड़ में लगा हुआ है, जिससे आज हमारे सामाजिक मूल्यों  निरंतर गिर रहें है। ऐसे में उसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के चरित्र, आदर्शवादिता और मर्यादा को निभाना अति आवश्यक है जिससे संस्कृति को बचाया जा सकें परिवारों में एकजुटता का संदेश मिल सकें रामायण हमें जीवन, चरित्र ,परंपरा सिद्धांत मर्यादा और परस्पर प्रेम भाव का संदेश देती है। रामायण का प्रत्येक पात्र अपने आप में हमारे जीवन का आदर्श स्वरूप है हमें बखूबी इसका अध्ययन और मनन अपने जीवन में करना  चाहिए सभी  प्रतिभागियों को प्रशस्ति -पत्र और स्टेशनरी देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मनवीर सिंह विद्यालय अध्यापक, सुनील कुमार शास्त्री ,देवेंद्र यादव ,भगत सिंह, तारामणि देवी ,पिंकी देवी, बबली देवी, सुबे सिंह, पूर्व समिति प्रधान सुनील कुमार डीटीएच चौकीदार और संजीत एबीआरसी आदि उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 01: बाल रामलीला कलाकारों को पुरस्कृत करते हुए

Thursday, October 22, 2026



 



मरहम वहाँ लगाते हो, जहाँ जख्म नहीं!
-बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से आम जनता परेशान, आखिर नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
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कनीना की आवाज।
 बिजली आज के युग में केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है। घरों से लेकर खेतों तक, विद्यालयों से लेकर अस्पतालों तक और छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े उद्योगों तक, हर जगह बिजली की जरूरत है। ऐसे में यदि लगातार तीन दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति पैदा हो जाए तो आम आदमी का जीवन किस तरह प्रभावित होगा, इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उपभोक्ताओं के सामने जो संकट खड़ा हुआ है, वह केवल बिजली की समस्या नहीं, बल्कि आम नागरिक की परेशानी, उसके अधिकार और व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल है।
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि बिजली बिल समय पर भरने वाले उपभोक्ता आखिर किस अपराध की सजा भुगत रहे हैं? उपभोक्ता हर महीने अपना बिल भरता है। वह बिजली विभाग की सेवाओं के बदले भुगतान करता है। उसे उम्मीद रहती है कि घर में रोशनी होगी, बच्चों की पढ़ाई चलेगी, खेतों में सिंचाई होगी, पीने के पानी की व्यवस्था बनी रहेगी और जरूरत पडऩे पर अस्पतालों में आवश्यक सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। लेकिन जब हड़ताल के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है तो उपभोक्ता की सारी योजनाएं धरी की धरी रह जाती हैं।
ऐसे में मन में एक ही बात आती है—मरहम वहां लगाते हो जहाँ जख्म नहीं! चोट किसी और को लगती है और उसका दर्द किसी तीसरे को सहना पड़ता है। अपनी मांगों को मनवाने के लिए कर्मचारी हड़ताल करते हैं, सरकार और विभाग के सामने अपनी बात रखते हैं, लेकिन सबसे अधिक परेशानी उस आम नागरिक को उठानी पड़ती है जिसका इस विवाद से प्रत्यक्ष रूप से कोई लेना-देना नहीं है।
तीन दिन बिजली के बिना कैसे कटेंगे?
आज के समय में तीन दिन बिजली के बिना गुजारना कोई छोटी बात नहीं है। पहले के समय में लोग लालटेन, दीये और हाथ से चलने वाले पंखों के सहारे जीवन बिताते थे। उस समय न मोबाइल फोन थे, न आधुनिक उपकरणों पर इतनी निर्भरता थी और न ही जीवन की गति इतनी तेज थी। आज परिस्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। घरों में पानी की मोटर से लेकर फ्रिज, पंखे, कूलर, मोबाइल चार्जर और अन्य आवश्यक उपकरण बिजली पर निर्भर हैं।
यदि तीन दिनों तक बिजली आपूर्ति ठप रहती है तो घरों में अंधेरा छा जाएगा। गर्मी और उमस से लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। पीने के पानी की व्यवस्था प्रभावित होगी। मोबाइल फोन बंद होने लगेंगे और लोगों का एक-दूसरे से संपर्क करना कठिन हो सकता है। छोटे दुकानदारों, आटा चक्की संचालकों, वेल्डिंग करने वालों, साइबर कैफे, फोटो स्टूडियो और बिजली से चलने वाले अन्य व्यवसायों का काम रुक सकता है।
सवाल यह है कि इन तीन दिनों में होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या कर्मचारियों की हड़ताल से प्रभावित दुकानदारों को मुआवजा मिलेगा? क्या मजदूरों की छूटी हुई मजदूरी की भरपाई होगी? क्या किसानों को उनकी परेशानी का कोई लाभ मिलेगा? क्या बच्चों की पढ़ाई का नुकसान वापस लौटाया जा सकेगा? इन सवालों का जवाब किसी के पास आसानी से नहीं मिलता।
विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षाओं पर असर
इस समय विद्यार्थियों की पढ़ाई महत्वपूर्ण दौर में है। अनेक विद्यार्थी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। किसी को अगले दिन होने वाली परीक्षा की चिंता है तो कोई प्रतियोगी परीक्षा के लिए अध्ययन कर रहा है। ऐसे में बिजली की आपूर्ति बाधित होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है।
आजकल पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं है। विद्यार्थी मोबाइल फोन, कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से भी अध्ययन करते हैं। ऑनलाइन कक्षाएं, शैक्षणिक वीडियो, डिजिटल नोट्स और परीक्षा संबंधी सामग्री बिजली पर निर्भर हैं। घर में बिजली न होने से मोबाइल की बैटरी खत्म हो सकती है और रात के समय रोशनी की समस्या पैदा हो सकती है।
जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, उनके पास इनवर्टर या जनरेटर जैसी वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं होती। ऐसे परिवारों के बच्चे अंधेरे में पढऩे को मजबूर हो सकते हैं। क्या इन विद्यार्थियों का भविष्य किसी श्रम विवाद से कम महत्वपूर्ण है? कर्मचारियों की मांगें अपनी जगह हो सकती हैं, लेकिन विद्यार्थियों के हितों को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए।
रबी फसल की बिजाई में किसानों की परेशानी-
कनीना और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान इन दिनों रबी फसलों की तैयारी में जुटे हुए हैं। सरसों की बिजाई का काम चल रहा है और गेहूं की बिजाई की तैयारी भी की जा रही है। खेतों में समय पर पानी देना, जमीन तैयार करना और उचित समय पर बीज डालना किसानों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
किसान पहले ही मौसम, बीज, खाद, डीजल और खेती की बढ़ती लागत जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में बिजली आपूर्ति बाधित होने से उसकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। जिन किसानों के खेतों में ट्यूबवेल बिजली से चलते हैं, उन्हें सिंचाई के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है। डीजल से सिंचाई करना महंगा पड़ता है। हर किसान के पास इतना पैसा नहीं होता कि वह लगातार बढ़ते खर्च को सहन कर सके।
खेती में समय का विशेष महत्व है। यदि खेत तैयार होने के बावजूद बिजली न मिले तो किसान की पूरी योजना प्रभावित हो सकती है। फसल की बिजाई में देरी होने पर उत्पादन पर भी असर पडऩे की आशंका रहती है। ऐसे में किसान पूछता है कि जब वह समय पर बिजली बिल भरता है, तब उसे समय पर बिजली क्यों नहीं मिलती?
कर्मचारियों की मांगों पर विचार होना चाहिए, लेकिन किसानों की मजबूरी को भी समझना आवश्यक है। खेतों में खड़ी फसल, बिजाई का समय और सिंचाई की जरूरत किसी हड़ताल की प्रतीक्षा नहीं कर सकते।
पानी के लिए दूर-दराज भटकने को मजबूर महिलाएं---
बिजली आपूर्ति बाधित होने का सबसे सीधा असर पेयजल व्यवस्था पर पड़ सकता है। अनेक गांवों और घरों में पानी की मोटर, बूस्टर तथा अन्य व्यवस्थाएं बिजली पर निर्भर हैं। बिजली नहीं होगी तो पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
ऐसी स्थिति में महिलाओं को पानी के लिए दूर-दराज तक जाना पड़ सकता है। सिर पर घड़ा या हाथ में बाल्टी लेकर पानी लाना उनके लिए कोई नई बात नहीं है, लेकिन आज जब सुविधाओं का विस्तार हो चुका है, तब उन्हें फिर से पुरानी कठिनाइयों का सामना करना पड़े तो यह चिंता का विषय है।
दूर से पानी लाते समय महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को दुर्घटना का खतरा भी रहता है। रास्ते में फिसलने, वाहन की चपेट में आने या थकान के कारण परेशानी हो सकती है। जिन घरों में छोटे बच्चे, बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति हैं, वहां पानी की कमी और गंभीर समस्या बन सकती है।
क्या किसी कर्मचारी या अधिकारी ने सोचा है कि तीन दिन तक पानी की व्यवस्था बाधित होने पर आम परिवार किस तरह गुजारा करेगा? क्या हड़ताल करने वालों के घरों में पानी की जरूरत समाप्त हो जाती है? क्या उनके परिवारों को भोजन बनाने, सफाई करने और पीने के लिए पानी की आवश्यकता नहीं होती? जब हर घर को पानी चाहिए, तब आम जनता को परेशानी में डालकर मांगें मनवाने की रणनीति पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
अस्पतालों और मरीजों की परेशानी सबसे गंभीर---
बिजली आपूर्ति बाधित होने की सबसे गंभीर स्थिति अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं में सामने आ सकती है। अस्पतालों में अनेक उपकरण बिजली पर निर्भर रहते हैं। ऑपरेशन थिएटर, जांच उपकरण, ऑक्सीजन की व्यवस्था, दवाओं के भंडारण और मरीजों की निगरानी में बिजली की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
यह कहना उचित नहीं होगा कि बिजली बंद होने मात्र से हर मरीज का ऑपरेशन रुक जाएगा या किसी की मृत्यु निश्चित हो जाएगी, क्योंकि अस्पतालों में बैकअप और वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी होती हैं। फिर भी, यदि बिजली बाधित होने के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था पर्याप्त न हो या उसमें कोई खराबी आ जाए तो गंभीर मरीजों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे स्वास्थ्य केंद्रों और निजी क्लीनिकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
किसी मरीज का ऑपरेशन टल जाए, जांच में देरी हो या उसे दूसरे अस्पताल तक जाना पड़े तो उसकी परेशानी का अनुमान वही लगा सकता है जिसके घर में कोई बीमार हो। किसी परिवार के लिए एक-एक मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसलिए बिजली कर्मचारियों की हड़ताल हो या कोई अन्य विवाद, अस्पतालों और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था होनी चाहिए। मरीजों की जिंदगी किसी भी श्रम विवाद से बड़ी है। इस मामले में सरकार, विभाग और कर्मचारी—तीनों की जिम्मेदारी बनती है कि आवश्यक सेवाएं बाधित न हों।
बिजली पर निर्भर रोजगार और मजदूरों की रोजी-रोटी
कनीना जैसे कस्बों में अनेक छोटे व्यवसाय बिजली के सहारे चलते हैं। आटा चक्की, वेल्डिंग की दुकान, इलेक्ट्रॉनिक मरम्मत केंद्र, फोटो स्टूडियो, प्रिंटिंग का काम, कंप्यूटर सेंटर और कई अन्य रोजगार सीधे बिजली पर निर्भर हैं। बिजली न होने पर इनका काम रुक सकता है।
दुकानदार की दुकान तो खुली रहती है, लेकिन ग्राहक लौट जाते हैं। मशीनें बंद रहती हैं और आमदनी घट जाती है। दूसरी ओर, दिहाड़ी मजदूर का जीवन तो प्रतिदिन की कमाई पर निर्भर करता है। यदि कारखाना, वर्कशॉप या अन्य कार्यस्थल बंद हो जाए तो उसे मजदूरी नहीं मिलती। उसके सामने परिवार के भोजन, बच्चों की फीस और रोजमर्रा के खर्च का संकट खड़ा हो जाता है।
ऐसे परिवारों के लिए तीन दिन की बेरोजगारी भी भारी पड़ सकती है। वे न तो हड़ताल में शामिल हैं और न ही उनकी किसी मांग से कोई सीधा संबंध है, फिर भी आर्थिक नुकसान उन्हीं को उठाना पड़ता है।
पेट्रोल पंपों पर भी बिजली की उपलब्धता और बैकअप व्यवस्था के अनुसार काम प्रभावित हो सकता है। हालांकि हर पेट्रोल पंप पर बिजली बंद होने से बिक्री पूरी तरह बंद हो जाएगी, ऐसा कहना सही नहीं होगा। लेकिन जहां आवश्यक उपकरणों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, वहां उपभोक्ताओं को परेशानी हो सकती है।
इस तरह एक स्थान पर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे पूरे समाज की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करने लगता है।
हड़ताल के दिनों के वेतन पर भी उठते हैं सवाल
कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर आम जनता के मन में एक और प्रश्न उठता है। यदि कर्मचारी कई दिन काम नहीं करते तो क्या उन्हें उन दिनों का वेतन मिलेगा? इस विषय में वास्तविक स्थिति सेवा नियमों, हड़ताल की वैधता, सरकार के आदेश और संबंधित विभाग के निर्णय पर निर्भर करती है।
यह मान लेना उचित नहीं होगा कि हर कर्मचारी को हड़ताल के दिनों का पूरा वेतन निश्चित रूप से मिल ही जाएगा। सरकार वेतन काटने, अनुशासनात्मक कार्रवाई करने या किसी विशेष परिस्थिति में अलग निर्णय लेने जैसे कदम उठा सकती है। अंतिम स्थिति संबंधित आदेशों से ही स्पष्ट होगी।
फिर भी, यदि हड़ताल के दौरान कर्मचारियों को वेतन देने का निर्णय किया जाता है, तो जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिली, तब उनकी भरपाई कैसे होगी? एक तरफ कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और दूसरी तरफ उपभोक्ता बिल भरने के बावजूद सेवा से वंचित रह जाते हैं। इस असंतुलन पर विचार करना आवश्यक है।
कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन अधिकारों के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। इसी प्रकार सरकार को भी विवाद सुलझाने में देरी नहीं करनी चाहिए। जनता को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसकी जरूरतों और परेशानियों को कोई महत्व नहीं दे रहा।
सरकार से नाराजगी है तो सरकार तक पहुंचाएं आवाज
यदि बिजली कर्मचारियों को सरकार या विभाग से कोई शिकायत है, उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं या उन्हें लगता है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है, तो उन्हें अपनी बात प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचानी चाहिए। ज्ञापन देना, वार्ता करना, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना, जनप्रतिनिधियों से मिलना और कानूनी तरीके अपनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के स्वीकृत रास्ते हैं।
कर्मचारी मंत्रियों और संबंधित अधिकारियों से मिलकर अपनी मांगों को स्पष्ट कर सकते हैं। मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं। यदि वार्ता विफल हो रही है तो नियमानुसार आगे के कदम उठाए जा सकते हैं। शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध का महत्व कम नहीं है।
लेकिन सवाल यह है कि अपनी मांगें मनवाने के लिए आम नागरिक की जिंदगी को कठिन क्यों बनाया जाए? जिस उपभोक्ता ने समय पर बिल भरा है, वह कर्मचारी और सरकार के बीच विवाद का पक्षकार नहीं है। फिर उसे ही सबसे बड़ी कीमत क्यों चुकानी पड़े?
सरकार पर दबाव बनाने के ऐसे तरीके तलाशे जाने चाहिए जिनसे आम जनता को कम से कम नुकसान हो। आवश्यक सेवाओं को बाधित करने के बजाय बातचीत, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से दबाव और नियमों के दायरे में आंदोलन जैसे विकल्पों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी
इस पूरे मामले में केवल कर्मचारियों को दोषी ठहराकर सरकार की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। सरकार और बिजली विभाग का दायित्व है कि वे कर्मचारियों की समस्याओं को सुनें, विवाद को समय रहते सुलझाएं और जनता को बिजली जैसी आवश्यक सेवा उपलब्ध कराएं।
यदि कर्मचारियों की मांगें उचित हैं तो उन पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। यदि मांगों पर सहमति नहीं बन रही तो वार्ता का रास्ता खुला रहना चाहिए। साथ ही, वैकल्पिक कर्मचारियों, आपातकालीन सेवाओं और आवश्यक प्रतिष्ठानों के लिए बिजली आपूर्ति की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।
सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, अस्पतालों, आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं पर हड़ताल का न्यूनतम असर पड़े। उपभोक्ताओं को समय रहते सही जानकारी दी जाए ताकि वे अपनी जरूरतों के अनुसार तैयारी कर सकें।
लोकतांत्रिक सरकार की सफलता केवल निर्णय लेने में नहीं, बल्कि जनता को संकट से बचाने में भी है। इसी तरह किसी कर्मचारी संगठन की सफलता केवल मांगें मनवाने में नहीं, बल्कि समाज का विश्वास बनाए रखने में भी है।
कर्मचारियों को जनता का साथ चाहिए तो जनता का दर्द समझें
कर्मचारी भी इसी समाज का हिस्सा हैं। उनके घरों में भी बच्चे पढ़ते हैं, उनके परिवारों को भी पानी चाहिए, उन्हें भी अस्पतालों की जरूरत पड़ती है और वे भी रोजमर्रा की समस्याओं से गुजरते हैं। ऐसे में उन्हें समझना चाहिए कि बिजली बंद होने से आम जनता पर क्या बीतती है।
यदि कर्मचारियों को जनता का समर्थन चाहिए तो उन्हें जनता के हितों को भी प्राथमिकता देनी होगी। किसी आंदोलन के दौरान आम आदमी को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए प्रयास होने चाहिए। कर्मचारियों को यह विचार करना चाहिए कि जिस उपभोक्ता के बिल से विभाग की व्यवस्था चलती है, उसी को परेशान करके आखिर किस तरह व्यापक जनसमर्थन प्राप्त किया जा सकता है?
दूसरी ओर, उपभोक्ताओं को भी कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने और समझने के लिए तैयार रहना चाहिए। संभव है कि कर्मचारियों की कुछ मांगें जायज हों और उनका समाधान आवश्यक हो। लेकिन मांगें जायज होने का अर्थ यह नहीं कि आम जनता की कठिनाइयों को अनदेखा कर दिया जाए।
जनता को भी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहिए--
यदि उपभोक्ताओं को लगता है कि उनकी समस्याओं की अनदेखी हो रही है, तो वे भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं। वे बिजली विभाग में शिकायत दर्ज करवा सकते हैं, संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन दे सकते हैं और जनप्रतिनिधियों से जवाब मांग सकते हैं।
आगामी चुनावों में भी नागरिक सरकारों के कामकाज का मूल्यांकन कर सकते हैं। किस सरकार ने बिजली व्यवस्था सुधारी, किसने कर्मचारियों की समस्याएं सुलझाईं और किसने उपभोक्ताओं को राहत दी—इन सभी बातों पर विचार करके मतदान करना जनता का अधिकार है।
लेकिन किसी विशेष दल को वोट न देने का निर्णय हर नागरिक का व्यक्तिगत अधिकार है। जनता को भावनाओं में बहने के बजाय तथ्यों, नीतियों और सरकार के समग्र कामकाज के आधार पर अपना निर्णय लेना चाहिए। लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण है और उसका इस्तेमाल सोच-समझकर होना चाहिए।
आखिर कब तक पिसता रहेगा आम आदमी?
कनीना की बिजली समस्या ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किसी भी विवाद में सबसे अधिक नुकसान आम आदमी को ही क्यों उठाना पड़ता है? कर्मचारी अपनी मांगों के लिए संघर्ष करते हैं, सरकार अपने निर्णयों पर अड़ी रहती है और उपभोक्ता दोनों के बीच पिसता रहता है।
किसान को खेत की चिंता है, विद्यार्थी को परीक्षा की, महिला को पानी की, मरीज को इलाज की, दुकानदार को कारोबार की और मजदूर को रोजी-रोटी की। इन सबकी समस्याएं अलग-अलग हैं, लेकिन बिजली बाधित होने पर सभी की परेशानी एक जैसी हो जाती है।
यदि तीन दिन तक बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है तो उसका असर केवल घरों के अंधेरे तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षा, खेती, स्वास्थ्य, व्यापार और सामाजिक जीवन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। इसीलिए इस समस्या का समाधान तत्काल और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
अंत में यही कहना है कि कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए लड़ें, सरकार कर्मचारियों की समस्याएं सुने और उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यक सेवाएं मिलती रहें। किसी की मांग पूरी करने के लिए दूसरे के जीवन को संकट में डालना उचित नहीं है। जिस दिन कर्मचारी जनता की परेशानी को अपनी परेशानी समझेंगे और सरकार जनता की आवाज को गंभीरता से सुनेगी, उसी दिन ऐसे विवादों का बेहतर समाधान निकल सकेगा।
मरेहम वहा लगाते हो जहाँ जख्म नहीं—यह कहावत आज की परिस्थिति पर सटीक बैठती दिखाई देती है। चोट कहीं और लगती है, लेकिन दर्द उस आम आदमी को सहना पड़ता है जो हर महीने बिल भरकर केवल इतनी उम्मीद करता है कि उसके घर में रोशनी रहे, खेतों में पानी पहुंचे, बच्चों की पढ़ाई चलती रहे और जरूरत पडऩे पर मरीज को इलाज मिल सके।
कई अहं प्रश्र--
ये सरकारी कर्मचारी अगर सरकार से कुछ चाहते हैं तो मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों का घेराव करे, उनका बहिष्कार करें, उनको वोट न देने का निर्णय करें किंतु सब बातों के लिए कर्मचारी गला उपभोक्ता का घोट रहे हैं। तीन दिन अगर हड़ताल चली तो उसका वेतन ये कर्मी अंत में ले लेंगे वरना उन्हें वेतन लेने का हक नहीं है। जब लोग बच्चों को पढ़ाने की बात करते हैं तो प्राइवेट स्कूलों में, बसें भी चाहिए तो प्राइवेट, ईलाज चाहिए तो प्राइवेट में इसका मतलब प्राइवेट अध्रिक मेहनत करते हैं। सरकारी को प्राइवेट से अधिक मेहनत करके सिद्ध करना चाहिए कि प्राइवेट जीरों हैं। और सरकार के विरुद्ध न्यायालय की शरण लेनी चाहिए।


महेंद्रगढ़ में वोट बचाओ, देश बचाओ, संविधान बचाओ कार्यक्रम के तहत ब्लाक कांग्रेस का सम्मेलन
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कनीना की आवाज।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार आज जिला कांग्रेस कमेटी, महेंद्रगढ़ के तत्वावधान में वोट बचाओ, देश बचाओ, संविधान बचाओ अभियान के तहत ब्लॉक कांग्रेस, महेंद्रगढ़ का कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम पार्टी हाईकमान के आह्वान पर ब्लॉक स्तर पर आयोजित किया गया
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला कांग्रेस अध्यक्ष  सत्यवीर यादव ,  अरुण राव  एवं किसान कांग्रेस के नेशनल कोऑर्डिनेटर कृष्ण राव विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इसके साथ ही कार्यक्रम में महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष डॉ. राजवती यादव , एससी प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष तोताराम कोहली  एवं पंचायती राज प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र पाराशर जी भी उपस्थित रहे।
जिला अध्यक्ष सत्यवीर यादव ने कहा कि भाजपा सरकार चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोट चोरी का काम कर रही है। आज देश में संविधान और लोकतंत्र दोनों खतरे में हैं। राहुल गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता वोट बचाने और लोकतंत्र बचाने की इस लड़ाई को बूथ स्तर तक ले जाएगा।
युवा नेता अरुण राव ने कहा कि आज का युवा जाग चुका है। वोट चोरी करके बनाई गई यह सरकार ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है। यह लड़ाई देश के भविष्य को बचाने की लड़ाई है।
किसान कांग्रेस के नेशनल कोऑर्डिनेटर कृष्ण राव ने कहा कि केंद्र सरकार ने सभी संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया है। किसान, जवान और आम आदमी सभी परेशान हैं। चुनाव आयोग की मिलीभगत से लोकतंत्र की हत्या की जा रही है, जिसके खिलाफ कांग्रेस सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेगी।
ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप यादव ने कहा कि महेंद्रगढ़ ब्लॉक का एक-एक कार्यकर्ता पार्टी के इस संकल्प के साथ मजबूती से खड़ा है और हम घर-घर जाकर लोगों को वोट चोरी के इस षड्यंत्र के बारे में जागरूक करेंगे।
फोटो कैप्शन 13: संबंधित है



अपनी मांगों के समर्थन में बैठक आयोजित
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कनीना की आवाज।
अभियंता फूल सिंह के साथ मंडल अटेली कार्यालय में ब्रांच 681 कनीना की पदाधिकारी की मीटिंग प्रधान कृष्ण कुमार पुनिया की अध्यक्षता में हुई। इस मीटिंग में कर्मचारियों की लंबी पड़ी मांगों व समस्याओं का मौके पर सुलझाया गया और कार्यकारी अभियंता को आश्वासन दिया कि जो बाकी मांगे रह गए उनको जल्दी से जल्दी निपटारा किया जाएगा। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में  कर्मचारियों की हर 7 तारीख को वेतन दिया जाए, सभी रेगुलर टर्म   फील्ड कर्मचारियों का जूता, डांगरी, रेनकोट दिलाया जाए। सभी फील्ड कर्मचारियों को सेल साबुन सीएफएल दिलाई जाए ,सभी में बूस्टर नहरी योजना पर रेस्ट रिलीवर लगाया जाए। सभी कर्मचारियों का सर्विस बुक चेक करवा कर अधूरी सर्विस को पूरा किया जाए, सभी फील्ड कर्मचारियों का  एचआरएमएस पर अपलोड किया जाए कनीना बूस्टर पर बने क्लियर टांक व कलियर  वैल की रिपेयर करवाई जाए। बूस्टर कनीना पर एक 50 एचपी की मोटर स्पेयर में रखवाई जाए, बूस्टर कनीना में तीन सेट और उसके आगे पार्क बनवाया जाए इत्यादि मांगे कार्यकारी अभियंता के समस्त रखी गई। इस मीटिंग में मौजूद रहे ब्रांच प्रधान महेंद्रगढ़ सुरेंद्र फौजी, कैशियर यशपाल ,ब्रांच प्रधान नारनौल दीपक सैंडल, जसवंत मास्टर, देव प्रकाश,  राजेश मंडोला, संजय गोमल, कुलदीप ,संजय शर्मा, इस मीटिंग में मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 12: संबंधित है


कैमला में आयोजित की गई बाल रामलीला
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कनीना की आवाज।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में विभाग के निर्देशानुसार बाल रामलीला का मंचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृष्ण कुमार मुख्य शिक्षक राज्यकीय प्राथमिक पाठशाला बूचावास रहें। सभी विद्यार्थियों ने रामलीला के चित्रों का वर्णन, विस्तारपूर्वक से किया राम की भूमिका में अन्नु  ,लक्ष्मण की भूमिका में धु्रव, हनुमान की भूमिका रिषभ,जीया ने संन्यासी , रावण का किरदार वान्या, अंगद का अध्या, दीपांशु और हिमांशु, नकुल वानर सेना का अभिनय निभाया सभी  ने पात्रों के माध्यम से संवाद के द्वारा यथार्थ चित्रण प्रस्तुत कर सामाजिक कुरीतियों के प्रति एक नई चेतना, पुराणिक सनातन संस्कृति के महिमा का गुणगान किया भगवान श्री राम की लीलाओं का बखूबी वर्णन किया। सीता की भूमिका प्रीति ने निभाई मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने सभी प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के भौतिकवादी युग में मनुष्य आपा-धापी  की दौड़ में लगा हुआ है, जिससे आज हमारे सामाजिक मूल्यों  निरंतर गिर रहें है। ऐसे में उसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के चरित्र, आदर्शवादिता और मर्यादा को निभाना अति आवश्यक है जिससे संस्कृति को बचाया जा सकें परिवारों में एकजुटता का संदेश मिल सकें रामायण हमें जीवन, चरित्र ,परंपरा सिद्धांत मर्यादा और परस्पर प्रेम भाव का संदेश देती है। रामायण का प्रत्येक पात्र अपने आप में हमारे जीवन का आदर्श स्वरूप है हमें बखूबी इसका अध्ययन और मनन अपने जीवन में करना  चाहिए सभी  प्रतिभागियों को प्रशस्ति -पत्र और स्टेशनरी देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मनवीर सिंह विद्यालय अध्यापक, सुनील कुमार शास्त्री ,देवेंद्र यादव ,भगत सिंह, तारामणि देवी ,पिंकी देवी, बबली देवी, सुबे सिंह, पूर्व समिति प्रधान सुनील कुमार डीटीएच चौकीदार और संजीत एबीआरसी आदि उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 11: संबंधित है






बीआर स्कूल के विद्यार्थियों ने उदयपुर एवं चित्तौडग़ढ़ का किया शैक्षणिक भ्रमण
-शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को मिलती है व्यावहारिक शिक्षा एवं ऐतिहासिक ज्ञान : हरीश भारद्वाज
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कनीना की आवाज।
बी.आर. आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेहलंग द्वारा कक्षा छठी से बारहवीं तक विद्यार्थियों के लिए राजस्थान के उदयपुर, चित्तौडग़ढ़ एवं श्री सांवरिया सेठ मंदिर का शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐतिहासिक धरोहरों, भारतीय संस्कृति, स्थापत्य कला एवं प्राकृतिक सौंदर्य से परिचित करवाना था।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने उदयपुर के प्रसिद्ध सिटी पैलेस, पिछोला झील, सहेलियों की बाड़ी, जगदीश मंदिर एवं फतेहसागर झील का अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने सिटी पैलेस में मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास एवं राजस्थानी स्थापत्य कला के बारे में जानकारी प्राप्त की। वहीं सहेलियों की बाड़ी तथा उदयपुर की खूबसूरत झीलों के भ्रमण ने विद्यार्थियों को प्रकृति एवं पर्यावरण के महत्व से परिचित करवाया।
भ्रमण के दूसरे दिन विद्यार्थियों ने श्री सांवरिया सेठ मंदिर में दर्शन किए तथा ऐतिहासिक चित्तौडग़ढ़ किले का भ्रमण किया। किले में विजय स्तंभ एवं अन्य ऐतिहासिक स्थलों के माध्यम से विद्यार्थियों ने मेवाड़ के शौर्य, वीरता, त्याग एवं बलिदान की गौरवशाली गाथाओं के बारे में जाना।
विद्यालय की प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज ने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का प्रत्यक्ष अवलोकन बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन करता रहेगा।
इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन हरीश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित ज्ञान को वास्तविक जीवन से जोडऩे का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजनों से बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सामूहिक सहयोग एवं सामाजिक व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण गुण विकसित होते हैं।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा शिक्षकों के मार्गदर्शन में विभिन्न ऐतिहासिक एवं दर्शनीय स्थलों के बारे में उपयोगी जानकारी प्राप्त की।
फोटो कैप्शन: उदयपुर एवं चित्तौडग़ढ़ के शैक्षणिक भ्रमण के दौरान ऐतिहासिक स्थलों पर समूह चित्र में बीआर स्कूल, सेहलंग के विद्यार्थी एवं शिक्षक।
फोटो कैप्शन 08 से 10: संबंधित हैं




बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से दर्जनों गांवों में बिजली गुल, पेयजल संकट गहराया
95 प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर रहने से जनजीवन प्रभावित, बिजली पर निर्भर दुकानदार भी परेशान
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कनीना की आवाज।
 बिजली विभाग के कर्मचारियों की 24 अक्टूबर तक प्रस्तावित हड़ताल का असर पहले ही दिन कनीना उपमंडल के दर्जनों गांवों में देखने को मिला। करीब 95 प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर रहे, जबकि पांच प्रतिशत कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात दिखाई दिए। बिजली आपूर्ति बाधित होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा और पशुओं तथा इंसानों के लिए पेयजल संकट उत्पन्न हो गया।
कनीना उपमंडल के गुढ़ा, रसूलपुर, कैमला, चेलावास सहित दर्जनों गांवों में बुधवार रात करीब 9:30 से 10 बजे के बीच बिजली आपूर्ति बंद हो गई थी। इसके बाद गुरुवार को भी आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई। गांवों में बिजली न होने से घरेलू कार्य प्रभावित हुए। हालांकि मौसम में गर्मी नहीं होने के कारण पंखों की जरूरत कम महसूस हुई, लेकिन पेयजल की व्यवस्था और बिजली से चलने वाले अन्य कार्य ठप होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई।   
हड़ताल का सबसे अधिक असर बिजली पर निर्भर दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर पडऩे की आशंका है। बिजली से चलने वाली मशीनों और उपकरणों के सहारे आजीविका चलाने वाले दुकानदार दिनभर खाली बैठे नजर आए। बिजली आपूर्ति बाधित रहने से उनकी रोजमर्रा की कमाई पर भी असर पड़ा।
उधर, किसी अप्रिय घटना से बचाव के लिए पावर हाउसों पर पुलिसकर्मी तैनात रहे। हड़ताल कर रहे बिजली कर्मचारी विभाग के कार्यों का निजीकरण करने और कर्मचारियों को निजी व्यवस्था के तहत काम पर लगाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।
ग्रामीणों और दुकानदारों की निगाहें अब बिजली आपूर्ति बहाल होने पर टिकी हैं। देखना होगा कि विभागीय कर्मचारी कब तक काम पर लौटते हैं और प्रभावित गांवों में बिजली व्यवस्था कब तक सुचारु हो पाती है।
  ग्रामीण महिलाएं पेयजल के लिए दूर दराज बनी पानी की टंकियों का उपयोग करती तथा जहां से पेयजल लाने की व्यवस्था करती नजर आई। महिलाए परेशान वहीं किसान भी परेशान रहे। इस वक्त किसान अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं, उनको बिजली अभाव में कष्ट झेलने पड़े हैं चूंकि सिंचाई के लिए बिजली की आवश्यकता होती है।
फोटो केप्शन 03 व 04= कनीना का 132 केवी उपकेंद्र जहां पुलिस तैनाती एवं चंद कर्मी बैठे नजर आ रहे



किसान क्लब महेंद्रगढ़ ने सौंपा कृषि मंत्री को मांग पत्र
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कनीना की आवाज।
किसान क्लब के जिला प्रधान इसराना के पूर्व सरपंच विजेंद्र सिंह चौहान ने गत दिवस कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा  से  चंडीगढ़ में मुलाकात की तथा मांग की जिन किसानों के फसल पंजीकरण नहीं हो सके उन्हें फिर से मौका दिया जाए तथा जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहे उसके लिए किसानों को जिप्सम पर सब्सिडी प्रदान की जाए ।
इसके साथ उन्होंने हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव से भी मुलाकात की और बिजली आपूर्ति में आए दिन लग रहे कट से निजात दिलाने की मांग की ताकि किसान अपनी सिंचाई समय से कर सके और आपूर्ति समय बढ़ाने की मांग की।
इस अवसर पर उनके साथ धनौंदा से बीर सिंह, पूर्व पार्षद सत्यपाल पाथेड़ा ओम तंवर, नरेश , यदुनंदन पूर्व सरपंच बेवल आदि मौजूद रहे।
फोटा कैप्शन 01: कृषि मंत्री से मुलाकात करते हुए



कनीना में डीएपी खाद आते ही किसानों की लगी भीड़, सरसों की बिजाई जोरों पर
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में रबी फसलों की तैयारी के बीच डीएपी खाद की मांग बढ़ गई है। कनीना के इफको केंद्र तथा हैफेड केंद्रों पर डीएपी खाद पहुंचने के बाद किसानों की भीड़ लग गई। इन दिनों क्षेत्र में सरसों की बिजाई पूरे जोर-शोर से चल रही है, जबकि गेहूं की बिजाई एक नवंबर से शुरू होने की संभावना है।
किसान खेतों में अच्छी पैदावार लेने के लिए बिजाई से पहले डीएपी खाद का प्रयोग करते हैं। ऐसे में खाद की उपलब्धता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है। खाद केंद्रों पर डीएपी पहुंचने की सूचना मिलते ही किसान खाद लेने के लिए पहुंचने लगे।
इफको केंद्र के कार्यालय से जुड़े भरपूर सिंह ने जानकारी दी कि उनके पास डीएपी खाद के 500 बैग आए हैं। प्रत्येक किसान को तीन बैग डीएपी खाद दिए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक किसानों को खाद उपलब्ध हो सके।
किसानों का कहना है कि सरसों की बिजाई के चलते खाद की जरूरत बढ़ गई है। वहीं, गेहूं की बिजाई का समय भी नजदीक आ रहा है। ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि आगामी दिनों में खाद की आपूर्ति सुचारु बनी रहेगी, जिससे उन्हें फसलों की बिजाई में परेशानी का सामना न करना पड़े।
फोटो कैप्शन 02: डीएपी के लिए इफको में भीड़

पोर्टल का लिंक नहीं मिलने से वालंटियर शिक्षकों के आवेदन अटके
-पूर्व सैनिकों और पूर्व शिक्षकों ने सरकार से पोर्टल शीघ्र शुरू करने की मांग की
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कनीना की आवाज।
हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा गत दिनों वालंटियर शिक्षक रखने के लिए पोर्टल खोलने की घोषणा के बावजूद इच्छुक अभ्यर्थियों को आवेदन करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री की ओर से पोर्टल लांच होने की बात कही गई थी, लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि अभी तक उन्हें पोर्टल का लिंक उपलब्ध नहीं हो पाया है। ऐसे में वे आवेदन कहां और कैसे करें, इसे लेकर असमंजस में हैं।
पूर्व सैनिकों रमेश, सुनील और दिनेश तथा पूर्व शिक्षकों हमीर और सुरेंद्र सहित अन्य इच्छुक अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि वालंटियर शिक्षकों के पंजीकरण के लिए पोर्टल का लिंक जल्द सार्वजनिक किया जाए, ताकि वे सरकारी स्कूलों में वालंटियर के रूप में अपनी सेवाएं दे सकें।
उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही इस संबंध में घोषणा कर चुकी है और वालंटियर के रूप में कार्य करने के लिए किसी प्रकार का मानदेय या पारिश्रमिक नहीं दिया जाएगा। इसके बावजूद आवेदन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने से इच्छुक लोग अपनी सेवाएं देने से वंचित रह रहे हैं।
पूर्व सैनिकों और पूर्व शिक्षकों ने शिक्षा विभाग तथा सरकार से मांग की है कि पोर्टल को शीघ्र चालू कर आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और आवश्यक दिशा-निर्देश सार्वजनिक किए जाएं, ताकि स्कूलों में जरूरत के अनुसार वालंटियर शिक्षकों की सेवाएं ली जा सकें।


कई समस्याओं से जूझ रहे हैं कनीना के किसान
-रबी फसल पैदावा
















र लेना तलवार की धार       
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कनीना की आवाज। क्षेत्र के किसान कई समस्याओं से जूझते आ रहे हैं। पैदावार लेने के लिए बिजली, पानी, खाद, गिरते जलस्तर, बीजों की जानकारी अभाव तथा कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में रबी फसल पैदावार लेना तलवार की धार के समान है।
   कनीना क्षेत्र का किसान यूं तो सदा ही मेहनत के बलबूते पर जीवित रहा है। कठिन परिश्रम करके अपनी आजीविका कमा रहा है। उसकी मुख्य फसलें खरीफ एवं रबी की होती है।  खरीफ की फसल वर्षा पर आधारित होती है। पहले ही भू-स्तर गिरता जा रहा है ऊपर से डार्क जोन घोषित होने से नलकूप खोदना आसान नहीं रहा है। वैसे भी नलकूप लगाना लाखों रुपये का खर्चा होता है। यह भी सत्य है कि प्रतिवर्ष उसके बिजली के उपकरण जलने की समस्या रहती है। जैसे तैसे उपकरण ऋण लेकर लगा भी देता है तो पानी की समस्या फिर भी आड़े आ जाती है क्योंकि बिजली कम आती है जिसके चलते पर्याप्त खेतों की सिंचाई नहीं हो पाती है। इस संबंध में कुछ किसानों से चर्चा की गई जिनके विचार निम्र हैं--
 **कनीना क्षेत्र में नहरों की संख्या काफी है किंतु या तो उनमें पानी आता ही नहीं या फिर वह पानी पीने के लिए ही सप्लाई होता है। इस पानी को किसान ले नहीं सकते। खादों की कमी विगत वर्ष से अधिक चल रही है। बीज और दवाइयां भी तो अ'छे नहीं मिलते हैं। मिल भी जाते हैं तो अति महंगे होते हैं। किसान रूढि़वादी होने के कारण भी परेशान हैं क्योंकि वे नए बीजों का उपयोग करने की बजाए पूर्व में उपयोग करते आ रहे बीजों का ही उपयोग करना श्रेष्ठ समझते हैं।
---भरत सिंह किसान
 किसानों के सामने गिरते जलस्तर की समस्या भी तो विकराल बन रही है क्योंकि किसान प्रत्येक वर्ष डीप बोर करवाता है किंतु अगले वर्ष वह जलस्तर भी घट जाता है। ऐसे में दक्षिण हरियाणा का किसान हताश व निराश लगता है। उससे बात करने पर कृषि को घाटे का सौदा बताता है। इन हालातों में उसके लिए फसल पैदावार लेना तलवार की धार पर चलने के समान है।
---रोहित कुमार, किसान
कई कई सालों तक ट्यूबवेल कनेक्षन नहीं मिलता है जिससे कुछ पैदावार लेना चाहे वो नहीं ले पाता है। किसान कुआं खोद ले तो कनेक्षन के लिए मारे मारे फिरते रहो। परेशान होकर बैठ जाता है।
---सूबे सिंह, किसान
आवारा जंतु फसल को तबाह कर जाते हैं। अब तो बंदर, नीलगाय, कुछ सुअर, कुछ अन्य आवारा जंतु भी खड़ी फसल पर धावा बोल देते हैं। किसान मायूस मिलता है। इन पर काबू करना कठिन है।
 --अजीत कुमार, किसान
फोटो कैप्शन: अजीत कुमार, सूबे सिंह, रोहित कुमार, भरत सिंह