एकल पारी में चलाया जाए विद्यालय वरना दिया जाएगा धरना
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कनीना की आवाज। प्रजा भलाई संगठन के सुप्रीमो बसपा नेता अतरलाल ने भोजावास गांव के राजकीय पी.एम. श्री वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को एक पारी (वन-शिफ्ट) में चलाने की मांग की। अतरलाल ने ई-मेल से जिला शिक्षा अधिकारी महेन्द्रगढ़ की मार्फत निदेशक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल शिक्षा विभाग हरियाणा चंडीगढ़ को भेजे ज्ञापन में उक्त मांग उठाई है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि शिक्षा विभाग ने 15 दिन के अंदर विद्यालय में एक पारी शुरू नहीं की तो अभिभावकगण और ग्रामवासी गांव में स्थापित डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा के समक्ष धरना देने पर मजबूर होंगे।
अतरलाल ने उक्त जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें भोजावास गांव के गणमान्यों से शिकायत मिली है कि उनके गांव के विद्यालय में दोहरी पारी के कारण छात्र-छात्राओ को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। दूसरी पारी में छुट्टी देर से होने के कारण दूर-दराज के कुओं तथा ढ़ाणीयों में रहने वाले बच्चों को घर लौटने में दिक्कत होती है। सर्दियों में कोहरा और कमदृश्यता के कारण दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है। इसके अतिरिक्त दोहरी पारी के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए पूरा समय नहीं मिल पाता। उन्हें होमवर्क करने, पाठ्यक्रम पूरा करने और दोहराई करने में परेशानी होती है। अतरलाल ने ज्ञापन में सवाल उठाया कि जब विद्यालय के पास पर्याप्त 29 कमरे, टीन शेड तथा स्थान है और छात्रों की कुल संख्या भी पहले से कम है तो फिर दोहरी पारी क्यों लगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि अभिभावक, ग्रामवासी और स्कूल प्रबंधन कमेटी के सदस्य कई बार जिला शिक्षा अधिकारियों से स्कूल को एक पारी में लगाने की प्रार्थना और आग्रह कर चुके। उसके बावजूद जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन लोगों की जायज मांग की अनदेखी कर रहा है। जिसके कारण ग्रामवासियों तथा आसपास के गांवों के अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि 15 दिन के अंदर विद्यालय में एक पारी शुरू नहीं की गई तो अभिभावक सड़क के साथ डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा के समक्ष धरना देने पर मजबूर होंगे।
क्षेत्र में दिखाई दिया सीजन का पहला कोहरा ,
अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराया ट्रक
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कनीना की आवाज। क्षेत्र में सीजन का पहला कोहरा दिखाई दिया। बीते दो दिन से हो रही हल्की वर्षा के साथ गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी। इसके साथ खेतों में हल्का कोहरा भी दिखाई दिया। कोहरे के कारण महेंद्रगढ़ रोड पर गुढ़ा के पास एक ट्रक अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गया। गनीमत रही कि कोई जान माल की हानि नहीं हुई। सर्दी के रंग दिखाने से किसान खुश हैं क्योंकि उनकी रबी फसल को ठंड की जरूरत होती है।
फोटो कैप्शन 09: ट्रक टकराया पेड़ से
10: क्षेत्र में पड़ता हुआ कोहरा
साहित्य मनीषियों के महाकुंभ में होगा 14 कृतियों का विमोचन
-129 साहित्यकारों और पत्रकारों को किया जाएगा सम्मानित
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कनीना की आवाज। जबलपुर में 31 अक्टूबर को अपराह्न 2 बजे से रात्रि 10 बजे तक साहित्य मनीषियों का महाकुंभ जुटने जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रियाशील कादंबरी संस्था की ओर से 129 साहित्यकारों एवं पत्रकारों को सम्मानित किया जाएगा।
विस्तृत जानकारी देते हुए संस्था के अध्यक्ष आचार्य भगवत दुबे, महासचिव राजेश पाठक 'प्रवीण' तथा यशोवर्धन पाठक कोषाध्यक्ष ने बताया कि इस मौके पर मुख्य अतिथि राकेश सिंह, मंत्री लोक निर्माण विभाग मध्य प्रदेश शासन होंगे वही श्रीमां साध्वी विभानंद गिरि नईदिल्ली मंगल आशीष देंगी। साथ में डा. कैलाश गुप्ता, अशोक मनोध्याय, डा. राजेश धीरावाणी, आचार्य रामनाथ साहू 'ननकी' आदि भी उपस्थित रहेंगे। समारोह में देश के विविध अंचलों के साहित्यकारों द्वारा सृजित 14 कृतियों का विमोचन भी किया जाएगा तथा 129 देश और विदेश से आए हुए साहित्यकारों और पत्रकारों को सम्मानित किया जाएगा। संस्था द्वारा चार लाख 18 हजार 200 रुपये की राशि के 129 स्मृति पुरस्कार दिए जाएंगे जिनमें एक पुरस्कार के 21 हजार रुपये, चार पुरस्कार ग्यारह ग्यारह हजार के, 32 पुरस्कार 5000- 5000 रुपये के तथा 92 पुरस्कार 2100-2100 रुपये के दिए जाएंगे। कादंबरी परिवार विगत कई वर्षों से यह सम्मान समारोह हर वर्ष आयोजित करता आ रहा है।समारोह में कादम्बरी की स्मारिका का भी विमोचन होगा। प्रथम सोपान में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
इन कृतियों का होगा विमोचन-
उन्होंने बताया कि इस मौके पर 14 विभिन्न कृतियों का विमोचन भी होगा जिनमें गोविंद पाल भिलाई की बाघ मामा सियार भांजा, गोविंद पाल की भारतीय ज्ञान परंपरा और विश्व बौद्ध, शंकर भट्टाचार्य दुर्ग की बेजुबान सच, शंकर भट्टाचार्य दुर्ग की ही दूसरी कृति एक मु_ी ईमानदारी, राकेश माहेश्वरी काल्पनिक नरसिंहपुर धूप छांव के संग, डा.अनामिका तिवारी जबलपुर की ऋषि द्वद्व, डा. उमेश चंद्र मिश्रा मैहर प्रतापगढ़ की करवा चौथ, नौमी श्रीवास्तव जबलपुर की जब एक नदी मेरी कहानी में उतरी, हेमंत झा छिंदवाड़ा की आधी हकीकत आधा फसाना, डा. विजय प्रकाश सैनी झांसी की हम इतने झूठे कभी न थे, ज्योति प्यासी अनिका जबलपुर की अंत से अनंत तक, संतोष जाटव जलौनी भिलाई की चिडिय़ा रानी बड़ी सयानी, ज्योति मिश्रा जबलपुर की पारिजात मन, डा. लखविंदर कौर जस्सल जबलपुर की सोच की दिशा प्रमुख हैं।
ये 129 साहित्यकार होंगे सम्मानित- 21 हजार रुपये से सम्मानित- विमल बुंदेला, छतरपपुर, पंडित सुधाकर शर्मा बालाघाट 11 हजार का सम्मान पाने वाले- गिरीमोहन गुरु नर्मदापुरम, डॉ. अर्जुन प्रताप सिंह मिर्जापुर, डॉ. पशुपतिनाथ उपाध्याय अलीगढ़। 5000 रुपये का इनाम पाने वाले साहित्यकार होंगे-भगवत दुबे दीप जबलपुर, डॉ. संध्या जैन श्रुति जबलपुर, डॉ. सुरेंद्र मोहन कौशिक यूएसए, देवेंद्र मिश्रा जबलपुर, डॉ. अद्याप्रसाद सिंह प्रदीप सुल्तानपुर, डॉ. सुधा गुप्ता अमृता, प्रमोद कुमार गोविल जयपुर, कैलाश नाथ बाजपेई, डॉ. अनीता पांडा दिल्ली, मुक्तिनाथ झा सहरसा, बिहार ,नरेंद्र दीपक भोपाल, जगदीश मोहन रावत, सुनील कुमार बाजपेई लखनऊ, वीरेंद्र स्वर्णकार निर्झर बुरहानपुर, मनोरमा श्रीवास्तव भोपाल, वीरेंद्र कुमार चंद्रसखी गाजियाबाद, डॉ. गिरिजा नरवरिया भिंड, डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त हैदराबाद, जय भगवान सैनी हरियाणा, डॉ. कृष्ण जैमिनी गुरुग्राम, इंजीनियर संतोष कुमार मथुरा, डा. विभा प्रकाशन लखनऊ, पुरुषोत्तम श्रीवास्तव पुरु जयपुर, डॉ. ओमप्रकाश कादयान हिसार, गीता कौशिक रत्न यूएसए, हरे राम बाजपेई इंदौर, सुरेंद्र अग्निहोत्री प्रयागराज, सीताराम बघेल मुरैना, डॉ. विजय प्रकाश सैनी विजय झांसी, डॉ.नरेंद्र नाथ लाहा ग्वालियर, डॉ. महेश कुमार मधुकर बरेली, डॉ. रवि बाला महाजन खरगोन। 21 हजार रुपये मिलेगा- भारत सातपुते लाटूर, राकेश सोहम जबलपुर, डा. विवेक सक्सेना नरसिंहपुर, रचना उनियाल बेंगलुरु, डा. रेनू श्रीवास्तव भोपाल, डॉ. चेतन ज्योतिषी ब्योहार मंडला, कर्तव्य उपाध्याय दमोह, भारती जैन दिव्यांशी मुरैना, मनीषा आवले चौगांवकर दिल्ली, मनीष कुमार पाटीदार खरगोन, डॉ. एमएस श्रीवास्तव पृथ्वीपुर, आचार्य डॉ. रामलाल द्विवेदी प्राणेश चित्रकूट, डॉ. श्वेता त्रिपाठी सत्यजीवजा पन्ना, रूप जी रूप घाटोली झालावाड़, हेमराज सिंह हेम बालूपा कोटा, डॉ राहुल राममोहन श्रीवास्तव खेवाली वाराणसी, जगत प्रकाश शर्मा दतिया, गायत्री ठाकुर सक्षम नरसिंहपुर, अनिल कुमार नील प्रतापगढ़, राम लखन शुक्ला प्रयागराज, शंकर भट्टाचार्य दुर्ग, शीशलता शालू भिलाई, संतोष जाटव जालौन भिलाई ,निशा आतुल्य देहरादून, अनूप कुमार त्रिपाठी अनुपम भोपाल, सुधा दुबे भोपाल, आदित्य अभिनव कौशांबी, कन्हैया साहू अमित भाटापारा, डॉ. पूनम आनंद पटना, देवेंद्र कुमार पाठक कटनी, डॉ सुधा पंडा प्रज्ञा रायगढ़ छत्तीसगढ़, पल्लवी दरक न्याति कोटा, आशुतोष तिवारी जबलपुर, अर्चना शर्मा कोटा, डॉ. विवेक वद्र्धन श्रीवास्तव इंदौर, रीता गुप्ता रश्मि कोटा, डॉ. उमेश चंद्र मिश्रा प्रतापगढ़, डॉ. प्रियदर्शनी राज गुजरात, रचना सक्सेना प्रयागराज, शशि रंजन समदर्शी हरिद्वार, सोनू सुरीला बारां राजस्थान, महेश पंचोली कोटा, रामगोपाल निर्मलकर सिवनी, डॉ. साधना शुक्ला भोपाल, शिशिर उपाध्याय इंदौर, विनय कुमार झा, गाजियाबाद, कमल चंद्रा भोपाल, सुनीति बैस ग्वालियर, नरेंद्र निर्मल भरतपुर, पवन शर्मा जुन्नारदेव, राकेश कुमार पलामू, नरेंद्र शुक्ला सुलतानपुर, डॉ. रोशनी किरण अंधेरी मुंबई, महेश चंद्र जोशी खरगोन, अरुण साहू रायगढ़, केशव चंद दुबे भोपाल, नीलम कुमार नील मेरठ, डॉ. नीलिमा मिश्रा नीलम प्रयागराज, डॉ. कामना कौस्तुभ, विनोद मिश्रा सुरमणि दतिया, डॉ. विष्णु शास्त्री सरल चंपावत, डॉ. कनक पाणि नई दिल्ली, डॉ.मनीष गिरी, बीना मंगल कंकरखेड़ा, सुमन लता शर्मा बूंदी, डा. मंजू गोरे जबलपुर, डॉ. शिवराज सिंह शक्तावत कोटा, श्याम चतुर्वेदी विदिशा, महेश मानव बरेला, डॉ. नेहा शर्मा नेह मोहाली पंजाब, प्रीति डिमरी प्रीत देहरादून, रामलाल सराठे रश्मि छिंदवाड़ा, डॉ. सुमन कसाला हरियाणा, कुसुम सिंह अविचल कानपुर, डॉ. वंदना गोपाल शर्मा शैली भाटापारा, राजेंद्र श्रीवास्तव ग्वालियर, पायल शर्मा डूंगरपुर राजस्थान, डॉ. कुकुम गुप्ता भोपाल,बीएल गोहिया, डॉ. प्रतिभा द्विवेदी भोपाल,
सुमनलता शर्मा बूंदी राजस्थान, राकेश मिश्रा मोहम्मदी खीरी, ओम प्रकाश मिश्रा व्यथित रीवा, पुरुषोत्तम पटेल तन्हा जबलपुर, शिवकुमार शर्मा चंदन रामपुर, कामिनी मिश्रा अनिका कानपुर, डॉ. रश्मि मोयदे रागिनी उज्जैन, ललिता यादव बिलासपुर, डेजी रानी मिश्रा बुलंदशहर, डॉ. नीलू शुक्ला समीर भोपाल, डॉ.कविता विकास नोएडा, डॉक्टर बृज लता मिश्र झांसी आदि प्रमुख हैं।
एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ककराला ने कबाड़ से जुगाड़ प्रदर्शनी में हासिल किए पुरस्कार
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कनीना की आवाज। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा, महेंद्रगढ़ में शिक्षा मंत्रालय के व्यावसायिक अध्ययन एवं कौशल विभाग के अंतर्गत औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता ही सेवा एवं एक भारत श्रेष्ठ भारत के
संयुक्त तत्वावधान में कबाड़ से जुगाड़ एवं कबाड़ से कला प्रदर्शनी, अपशिष्ट प्रबंधन कार्यशाला एवं सफाई मित्र सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ककराला ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और अपनी रचनात्मकता, वैज्ञानिक सोच एवं नवाचार का शानदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनी में विद्यालय के विद्यार्थियों ने कबाड़ एवं अनुपयोगी सामग्री का रचनात्मक उपयोग करके उपयोगी माडल, वर्किंग प्रोजेक्ट एवं पोस्टर प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों की इन प्रस्तुतियों ने अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा वेस्ट टू बेस्ट की अवधारणा को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया।
विद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पोस्टर प्रेजेंटेशन में समर पुत्र श्री हनुमान, हार्दिक व चिराग ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। बेस्ट आउट आफ वेस्ट प्रोजेक्ट में यश , चिराग व रितिक ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
बेस्ट आउट आफ वेस्ट में रजत, यश व उमेद ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया तथा कक्षा 11वीं की खुशी, दीक्षा ,जिया , कक्षा नवीं की भूमिका व दिव्या ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
यह उपलब्धि विद्यार्थियों की मेहनत, रचनात्मक प्रतिभा एवं इनोवेशन कार्यप्रभारी जसबीर जांगिड़ व कला और शिल्प प्रभारी शोभा राय के कुशल मार्गदर्शन का परिणाम है। इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक होने, संसाधनों का पुन: उपयोग करने तथा स्वच्छता एवं सतत विकास के महत्व को समझने का अवसर प्रदान किया।
इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक ओमप्रकाश, उप-निदेशक पूरण सिंह एवं प्रधानाचार्य अरविंद कुमार तोमर ने इस शानदार उपलब्धि पर सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों और मार्गदर्शक शिक्षकों को हार्दिक बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
फोटो कैप्शन 08: अव्वल को पुरस्कृत करते हुए
बच्चों के भविष्य की खातिर बेवल गांव में उठी आवाज
-डीएवी संस्थान कनीना को दोबारा खोलने की मांग
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कनीना की आवाज। जिस डीएवी संस्थान में कभी बच्चों के सपनों को उड़ान मिलती थी, आज उसी संस्थान को दोबारा शुरू करवाने की उम्मीद लेकर ग्रामीण एकजुट हो रहे हैं। शनिवार को बेवल गांव की सभा की अध्यक्षता हरेंद्र शर्मा ने की और सरकार से मांग की कि कनीना में वर्षों से बंद पड़े डीएवी अकादमी को पुन: संचालित करवाया जाए।
उन्होंने कहा कि ये सभा बच्चों के भविष्य, क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसरों और बंद पड़े शैक्षणिक संस्थान को फिर से आबाद करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि स्कूल की इमारतें केवल ईंट-पत्थर से नहीं बनतीं, उनमें बच्चों के सपने, माता-पिता की उम्मीदें और समाज का भविष्य बसता है।
ग्रामीणों का मानना है कि डीएवी संस्थान दोबारा शुरू होने से कनीना और आसपास के गांवों के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के अवसर मिल सकते हैं। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए जनसमर्थन जुटाने तथा संबंधित डीएवी प्रबंधन और प्रशासन के समक्ष सामूहिक रूप से मांग रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
यह पहल किसी व्यक्ति या संस्था के विरोध में नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य और क्षेत्र के शैक्षणिक विकास के लिए है। अभियान से जुड़े लोगों ने क्षेत्रवासियों और अभिभावकों से अपील की कि वे इस जनहित के प्रयास में अपना सहयोग दें।
फोटो कैप्शन 06: डीएवी अकादमी कनीना को पुन: शुरू करवाने की मांग को लेकर आयोजित बैठक।
सोने के मृग के मोह में सीता हरण, रामलीला मंचन ने बांधा समां
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कनीना की आवाज। श्रीआदर्श रामलीला कमेटी कनीना के रंगमंच पर भगवान श्रीराम की 13 दिवसीय लीलाओं के नौवें दिन शुक्रवार रात सीता हरण की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने शूर्पणखा प्रसंग से लेकर रावण द्वारा साधु का वेश धारण कर माता सीता का हरण करने तक के दृश्यों को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में हरियाणा प्रदेश वैश्य समाज के प्रदेश महामंत्री एवं समाजसेवी दुर्गादत्त गोयल मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने रामलीला कमेटी को अपने निजी कोष से 31 हजार रुपये भेंट किए। महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर पूजा खींची विशिष्ट अतिथि रहीं। प्रजापति विकास समिति कनीना ब्लाक के प्रधान बलवान सिंह तथा पूनम चंद, ताराचंद एंड संस से कृष्ण भी मौजूद रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंच संचालन मुख्याध्यापक सत्यप्रकाश महरौलिया ने किया।
रामलीला में दिखाया गया कि रावण की बहन शूर्पणखा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को देखकर मोहित हो जाती है और श्रीराम के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है। श्रीराम के प्रस्ताव ठुकराने के बाद वह लक्ष्मण के पास जाती है। इसके बाद लक्ष्मण शूर्पणखा की नाक-कान काट देते हैं। अपमानित शूर्पणखा खर, दूषण और त्रिशिरा के पास पहुंचकर पूरा घटनाक्रम सुनाती है। इसके बाद खर, दूषण और त्रिशिरा राक्षसों की सेना लेकर युद्ध के लिए पहुंचते हैं, जहां भगवान श्रीराम उनका वध कर देते हैं।
इसके बाद शूर्पणखा रावण के पास पहुंचकर अपनी व्यथा सुनाती है। खर-दूषण और त्रिशिरा के मारे जाने से रावण समझ जाता है कि श्रीराम कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि भगवान के अवतार हैं। वह सीता हरण की योजना बनाता है। मारीच सोने का मृग बनकर श्रीराम को दूर ले जाता है और रावण साधु का वेश धारण कर माता सीता का हरण कर लेता है। कलाकारों ने इन दृश्यों का
मुख्य अतिथि दुर्गादत्त गोयल ने कहा कि हनुमान जी ऐसे सच्चे सेवक थे, जिन्होंने अपनी सेवा, समर्पण और भक्ति से देवत्व प्राप्त किया। रामायण में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण सहित कई पात्रों के सामने संकट आए, लेकिन हनुमान जी हर परिस्थिति में संकटमोचन बनकर खड़े रहे। उन्होंने कहा कि जीवन में भी हर व्यक्ति के सामने कठिन परिस्थितियां आती हैं। ऐसे समय में हनुमान जी के साहस, समर्पण और दृढ़ता से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने सभी से भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलते हुए अच्छे संस्कार अपनाने का आह्वान किया।
मंचन में रावण की भूमिका कृष्ण पहलवान चेलावासिया, श्रीराम की शिवकुमार शर्मा, लक्ष्मण की प्रवक्ता सचिन शर्मा तथा माता सीता की भूमिका मुकेश कपूर ने निभाई। सूतीक्षण की भूमिका निर्देशक साहिल शर्मा, अगस्त्य मुनि की नंदलाल शर्मा, खर की पिनाक भारद्वाज तथा दूषण की भूमिका दिनेश यादव ने निभाई। इसके अलावा दिनेश जांगड़ा, संदीप चौधरी, कर्नल चीकारा, नीटू जांगड़ा और नितिन सिंगला टिंकू सहित अन्य कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं से मंचन को प्रभावशाली बनाया।
इस अवसर पर श्री श्याम मित्र मंडल के प्रधान अनिल गर्ग, व्यापार मंडल के पूर्व उपप्रधान रविंद्र बंसल, शिबू पंसारी, विक्की पंसारी, सुभाष मित्तल, सुरेंद्र शर्मा, रामलीला कमेटी के प्रधान मोहित जेलदार, बाबा मोलडऩाथ कमेटी के प्रधान दिनेश यादव, रामकिशन रामा शर्मा, सुरेंद्र मिनिया और पिन्नू मित्तल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04: श्री आदर्श रामलीला के मंच पर सीता हरण की लीला का मंचन करते कलाकार।
01: विभिन्न भूमिकाएं निभाते कलाकार
बूंदाबांदी के बाद तेजी आ गई है बिजाई में
-सरसों बिजाई का कार्य चरम पर
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कनीना की आवाज। कनीना की बावनी नाम से जाने जाने वाली वाली कृषियोग्य भूमि पर गत दिनों हुई बूंदाबांदी के बाद खेत की तैयारी और सरसों बिजाई में तेजी आ गई है। गेहूं अगले माह बोया जाना है किंतु इस वक्त तेजी से किसान खेतों की तैयारी, सिंचाई तथा सरसों की बिजाई कर रहे हैं। कुछ किसानों ने तो अभी तक सरसों के बिजाई भी कर दी गई है। विश्वविद्यालय की गेहूं की किस्में आरएच-1975 और आरएच-725 जो किसान उगाना चाहे तो उसके लिए 20 अक्टूबर तक का समय ही उचित है। उधर 20 अक्टूबर तक ही सरसों के बिजाई की जानी है किंतु तापमान का भी ध्यान रखना है।
क्या कहते हैं एसडीओ कृषि विभाग -
एसडीओ कृषि विभाग डा. अजय यादव से इस संबंध में चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि वैसे तो सरसों बिजाई का समय शुरू हो चुका है किंतु 20 अक्टूबर तक सरसों की बिजाई उत्तम रहती है। उन्होंने कहा कि अभी तक तो तापमान अधिक है इसलिए सरसों बिजाई प्रभावित हो सकती है। ताप का जरूर ध्यान रखें और कम ताप पर ही यरसों उगाए। उन्होंने बताया कि गेहूं की बिजाई अगले माह नवंबर में उचित होती है किंतु जो किसान विश्वविद्यालय की गेहूं की किस्में आरएच-1975 और आरएच-725 जो किसान उगाना चाहे तो 20 अक्टूबर तक जरूर उगा ले वरना बाद में पैदावार पर कुप्रभाव पड़ सकता है।
फोटो कैप्शन 07: बिजाई के कार्य में लगे किसान साथ में एसडीओ कृषि
घड़ी महासर में लगा मेला
- बच्चों के जडूले उतारे गए
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कनीना की आवाज। कनीना -अटेली मार्ग पर घड़ी मास्टर में जहां नवरात्रों में हर वर्ष दो बार मेले लगते हैं। शारदीय नवरात्रों का मेला शनिवार को चला जिसमें लोगों ने दूर दराज से आकर मन्नत मांगी।
राकेश शर्मा पुजारी परिवार ने बताया कि साल में दो बार यह मेला यहां लगता है। हर वर्ष अश्विन तथा चैत्र माह में दो बार यह मेला लगता है और दोनों बार नवरात्रि होते हैं। उन्होंने बताया कि मेले में दूर-दराज से भक्त ध्वज लेकर आए और माता को अर्पित किए वहीं भक्त पेट के बल भी चल कर आए। नवजात जोड़ों की जात लगाई गई। उन्होंने बताया कि माता के इस मंदिर में पूरे साल/365 दिन निशुल्क भंडारा चलता है। विभिन्न भक्त आकर के भंडारा लगाते हैं।
फोटो कैप्शन 02: माता मंदिर पर लगा हुआ मेला।
चेलावास स्थित अनाज मंडी में बाजरे की खरीद जारी
-सरकारी तौर पर नहीं हुई खरीद
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कनीना की आवाज। कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में अब तक डेढ़ लाख क्विंटल से भी अधिक बाजरा प्राइवेट एजेंसियों द्वारा खरीद लिया गया है। सरकारी तौर पर बाजरे का एक दाना भी नहीं खरीदा गया है। सरकारी खरीद एजेंसी हैफेड के मैनेजर जगराम यादव ने बताया कि सरकारी तौर पर बाजरा नहीं खरीदा गया चूंकि वो मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। उधर पूर्णचंद प्रधान ने बताया कि अब तक करीब डेढ़ लाख क्विंटल बाजरे की प्राइवेट एजेंसिज द्वारा खरीद लिया गया है। करीब 10 खरीद एजेंसी बाजरे के खरीद कर रही है और भारी मात्रा में बाजरा आ रहा है। कनीना मंडी में बाजरे के ढेर लग गए हैं। बाजरे की पैकिंग का काम निजी एजेंसी के पास ही है।
फोटो कैप्शन 05: कनीना मंडी में बाजरे का ढेर
सेहलंग गांव के सोमा बाबा उर्फ सोम दत्त का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर
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कनीना की आवाज। खंड कनीना के गांव सहलंग निवासी 85 वर्षीय सोमदत्त शर्मा उर्फ सोम बाबा का आज प्रात: निधन हो गया। उनके निधन से गांव सहित आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। वे अपने पीछे तीन पुत्रों, दो बेटियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके सुपुत्र राधेश्याम, सीताराम और सतपाल तीनों खेतीबाड़ी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
उनके पौत्र देवेंद्र भारद्वाज ने बताया कि सोमदत्त शर्मा अपने सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और जनसेवा की भावना के कारण गांव में विशेष पहचान रखते थे। वे गांव के भविष्यवक्ता के रूप में भी मशहूर थे। ग्रामीणों के बीच उन्हें 'सोम बाबा तथा 'लोहार समाज के जोशी
के नाम से भी जाना जाता था। उनके जीवन से जुड़ी अनेक ऐसी घटनाएं और संस्मरण ग्रामीणों के बीच प्रचलित रहे, जिनमें उनकी कही गई बातें बाद में सही साबित होने की चर्चा होती रही।
उनके अंतिम संस्कार में सेवानिवृत्त जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी सुभाष शर्मा, सेवानिवृत्त खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश यादव, सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक जगदीश प्रसाद, बाबूलाल शर्मा, प्राचार्य नरेश कुमार सहित सैकड़ों ग्रामीणों, गणमान्य व्यक्तियों और परिचितों ने शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्मशान घाट पर उपस्थित ग्रामीणों ने सोमदत्त शर्मा के जीवन से जुड़े अनेक संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि सोम बाबा लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनने वाले, सबके साथ आत्मीयता से मिलने वाले और जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहने वाले व्यक्ति थे। उनकी भविष्यवाणियों से जुड़े अनुभवों की चर्चा भी ग्रामीणों के बीच होती रही।
समाजसेवा और आत्मीय व्यवहार से बनाई पहचान
सोमदत्त शर्मा का जीवन ग्रामीण परिवेश की उन परंपराओं का प्रतीक रहा, जिनमें आपसी भाईचारे, सहयोग, बुजुर्गों के सम्मान और सामाजिक सद्भाव को विशेष महत्व दिया जाता है। वे लोगों के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करते थे और गांव के सामाजिक जीवन में उनकी अपनी विशिष्ट पहचान थी। उनके निधन से गांव ने एक ऐसे बुजुर्ग को खो दिया है, जिनकी स्मृतियां और जीवन से जुड़े प्रसंग लंबे समय तक लोगों के बीच याद किए जाते रहेंगे।
ग्रामीणों ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की।
फोटो कैप्शन: सोम बाबा




























































