खंड स्तरीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता में एसडी स्कूल और आरआरसीएम स्कूल का दबदबा
-विभिन्न स्पर्धाओं में शानदार किया प्रदर्शन
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कनीना की आवाज। खंड स्तरीय अंडर-11 सांस्कृतिक गतिविधि प्रतियोगिता का आयोजन एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ककराला में किया गया। प्रतियोगिता में खंड के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। नोडल अधिकारी मुन्नालाल ने प्रतियोगिता के परिणामों की जानकारी दी।सामूहिक गान के बालिका वर्ग में आईपीएस कनीना ने प्रथम, आरआरसीएम स्कूल कनीना ने द्वितीय तथा बीआर ज्ञानदीप स्कूल सुरजनवास ने तृतीय स्थान हासिल किया। बालक वर्ग में सामूहिक गान में एसडी स्कूल ककराला प्रथम रहा।
फैंसी ड्रेस के बालक वर्ग में आईपीएस कनीना प्रथम, यश आरआरसीएम स्कूल कनीना द्वितीय तथा नैतिक रामचंद्र स्कूल कनीना तृतीय स्थान पर रहे। रागिनी प्रतियोगिता के बालक वर्ग में चिराग एसडी ककराला प्रथम और विनीत बीआर ज्ञानदीप द्वितीय रहे। बालिका वर्ग में प्रियम आरपीएस कनीना प्रथम तथा खुशी आरआरसीएम स्कूल कनीना द्वितीय स्थान पर रही। ग्रुप डांस प्रतियोगिता में एसडी स्कूल ककराला ने प्रथम तथा आईपीएस कनीना ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। सोलो एक्टिंग के बालिका वर्ग में परिधि आरआरसीएम स्कूल कनीना ने प्रथम, विधि आरएचएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल पोता ने द्वितीय तथा यशिका आरपीएस कनीना ने तृतीय स्थान हासिल किया। सोलो एक्टिंग के बालक वर्ग में आदित्य रामचंद्र स्कूल कनीना प्रथम तथा समर आरएसएस कनीना स्कूल द्वितीय रहे। एकल नृत्य के बालक वर्ग में ऋषभ एसडी स्कूल ककराला प्रथम स्थान पर रहे। फैंसी ड्रेस के बालिका वर्ग में वंशिका रामचंद्र स्कूल कनीना प्रथम, तेजस्विनी आईपीएस कनीना द्वितीय तथा जैस्मिन आरआरसीएम स्कूल कनीना तृतीय स्थान पर रही। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका दीपक कुमार, चेतन शर्मा, नरेश कुमार, सरजीत सिंह एवं प्रीति सहित अन्य निर्णायकों ने निभाई। आयोजकों ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
फोटो कैप्शन 04: प्रतियोगिता में भाग लेती बच्ची
कैमला में मनाया रक्षा बंधन पर्व
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कनीना की आवाज। राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर सभी विद्यार्थियों ने परस्पर मिलकर के राखी प्रतियोगिता का आयोजन गरिमा रानी प्राथमिक अध्यापिका के निर्देशन में किया गया।
सभी विद्यार्थियों ने स्वेच्छा से अपनी-अपनी रुचि अनुसार सुंदर, आकर्षक ,भव्य राखी बनाई जो अति सराहनीय थी। प्रतियोगिता दो ग्रुप में की गई प्रथम ग्रुप कक्षा प्रथम से पांचवी तक जिसमें ऋषभ और वान्य प्रथम ,आध्या व भावना द्वितीय स्थान ,नीतू व दीपांशु आदि संयुक्त रूप से विजेता रहें। दूसरे चरण में कक्षा 6 से 8 तक के सभी विद्यार्थियों की राखी प्रतियोगिता में यशिका व नव्या प्रथम स्थान ,मानवी व निधि द्वितीय और अन्नु व विवेक तृतीय स्थान पर रहें ।सभी विद्यार्थियों ने एक से एक बढ़कर राखी बनाई जो उनकी कलाकृति ,रुचि और एक्टिविटी बेस लर्निंग को दर्शाती है इससे बच्चों में रचनात्मक विचारों का संचार होता है और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। विद्यालय की ओर से मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह ने सभी विद्यार्थियों को पुरस्कार किया और विद्यार्थियों से अपील की कि हमें प्रत्येक एक्टिविटी में उत्साह के साथ भाग लेना चाहिए जिससे हमें नवीनतम सीखने को मिलता है। इस मौके पर मनवीर सिंह , सुनील कुमार डीपीई , देवेंद्र कुमार , राजेश कुमार,भगत सिंह , गरिमा रानी आदि उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 02: रक्षा बंधन पर्व मनाते हुए विद्यार्थी
त्योहार पर आई हुई लड़की लापता,पिता ने लापता होने का केस करवाया दर्ज
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के एक गांव से त्योहार पर आई हुई लड़की कहीं लापता हो गई। शादीशुदा लड़की रक्षाबंधन के पर्व पर आई थी। 26 अगस्त को घर से बिना बताए कहीं चली गई। उसके पिता ने पुलिस में दी शिकायत में कहा है कि उसकी लड़की रक्षा बंधन के त्योहार पर मिलने घर आई थी किंतु बिना बताए कहीं चली गई। कई जगह तलाश की किंतु नहीं मिली। उनके बयान पर लापता होने का केस दर्ज कर लिया है।
नपा के सफाई कर्मियों ने बढ़ाई काम छोड़ हड़ताल 30 अगस्त तक
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कनीना की आवाज। नगर पालिका सफाई कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर नगर पालिका सफाई कर्मचारी 22वें दिन भी हड़ताल पर रहे। उन्होंने हड़ताल 30 अगस्त तक बढ़ा दी है। सभी सफाई कर्मचारियों की काम छोड़ हड़ताल जारी रही। कर्मियों का कहना है कि सरकार ने अभी तक उनकी मांगें नहीं मानी हैं जिसके कारण हड़ताल चार दिन और बढ़ा दी गई है। 30 अगस्त तक चलने वाली इस हड़ताल की अध्यक्षता सचिन सुनील कुमार कोषाध्यक्ष करेंगे।
यूनिट कनीना प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि सभी कर्मी हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, ठेका प्रथा बंद करने, एचकेआरएन खत्म करने, समान काम का समान वेतन लागू करने की प्रमुख हैं। लेकिन सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है।
उनका कहना है कि कर्मचारियों को शहर की सफाई का काम जान हथेली पर रखकर करना पड़ता है। उनका कहना है कि सरकार के 13 मई को समझौता हुआ था जिस पर सरकार ने कहा था कि हमें 30 जून 2026 तक का समय दिया जाए, आपकी जितनी मांग है सभी पूरी की जाएगी लेकिन सरकार ने अभी तक कोई मांग पूरी नहीं की है।
गंदगी के ढ़ेर-
कनीना में पुरानी अनाज मंडी कनीना , नहर के पास , स्टेशन रोड , राजकीय विद्यालयअंबेडकर चौक, होलीवाला जोहड़ पर गंदगी के ढ़ेर लग गए हैं। कई अन्य स्थानों पर भी गंदगी के ढेर बन गए हैं। लोग बेहद परेशान हैं।
इस मौके पर अशोक कुमार उप प्रधान, योगेश कुमार, राकेश कुमार, जमादार नवीन कुमार, कर्मवीर, सुभाष, सोनू, शशि बाला, रतनलाल, राजेश, प्रदीप, पवन, संजय व सभी कर्मचारी हड़ताल में उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: सफाई कर्मी कनीना हड़ताल पर
संस्कृत दिवस 28 अगस्त
बहुत मधुर और देव भाषा कहलाती है संस्कृत -वीेरेंद्र ढ़ाणा
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कनीना की आवाज। संस्कृत भाषा भारत की सबसे प्राचीन भाषा है। इसी से दूसरी भाषाएं भी निकली हैं। सबसे पहले भारत में संस्कृत बोली गई थी इसलिए देव भाषा भी संस्कृति कहलाती है। जहां 22 अनुसूचित भाषाओं में से एक संस्कृत है। उत्तराखंड की यह एक आधिकारिक भाषा है। प्राचीन ग्रंथों की रचना संस्कृत में हुई थी। इसके बहुत से शब्दों के द्वारा अंग्रेजी के शब्द बने हैं। महाभारत काल में वैदिक संस्कृत का प्रयोग होता रहा है। संस्कृत वर्तमान देश की कम बोली जाने वाली भाषा बन गई है लेकिन इस महान भाषा को नकारा नहीं जा सकता। हरियाणा सरकार तो संस्कृत भाषा को पर जोर दे रही है और सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से संस्कृत भाषा ही प्रयोग में लाई जाती है। 31 अगस्त को सावन माह की पूर्णिमा के दिन संस्कृत दिवस मनाया जाता है। 1969 में इसकी शुरुआत हुई थी। संस्कृत दिवस और पूर्णिमा यहां तक की रक्षाबंधन भी इसी दिन पड़ता है। क्या कहते हैं संस्कृत के विद्वान-
संस्कृत दिवस पूरी दुनिया मनाया जाता है। इसके मनाने का उद्देश्य संस्कृत को अधिक से अधिक बढ़ावा देना है। नई पीढ़ी इस भाषा को जाने। पुराने समय की भाषा बोलने पढऩे में लोगों को शर्म आती है। संस्कृत अति महत्वपूर्ण भाषा देव भाषा नाम से जानी जाती है। संस्कृत भाषा भारतीय संस्कृति के विरासत का प्रतीक है। ऐसी कुंजी जो हमारे प्राचीन ग्रंथों और धार्मिक सांस्कृतिक परंपराओं के के रहस्य को जानने में मदद करती है वह संस्कृत है।
--- नरेश कुमार
भारत के इतिहास में सबसे अधिक मूल्यवान और शिक्षण सामग्री शास्त्रीय भाषा संस्कृत में लिखे गए हैं। वैदिक संस्कृत के अध्ययन से मानव इतिहास के बारे में जानने में सहायक है। प्राचीन सभ्यता का रोशन करने के लिए भी सक्षम है। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए सबसे अच्छा विकल्प संस्कृत भाषा मानी गई है। इसलिए संस्कृत को अधिक से अधिक प्रयोग में लाना चाहिए और बोलचाल में इसका प्रयोग होना चाहिए।
--वीरेंद्र शास्त्री ढाणा
कालिदास द्वारा संस्कृत में रची कहानी अभिज्ञान शकुंतला तथा रितु संहार 1783 में विलियम जॉन में ट्रांसलेट किया था। इसके अलावा जयदेव द्वारा रचित गीत गोविंद और मनु के कानून मनु स्मृति को इंग्लिश भाषा में परिवर्तित किया था। चाल्र्स विलकिंस ने श्रीमद् भागवत गीता को अंग्रेजी में रूपांतरित किया गया था। इसी प्रकार मैक्स मूलर ने संस्कृत से जर्मनी भाषा में ट्रांसलेट किया था। इससे सिद्ध होता है कि यह बहुत काम की भाषा है। संस्कृत को नौ ग्रहों का ज्ञान था। संस्कृत आयुर्वेद चिकित्सा का आधार है। संस्कृत एक महान भाषा है जिसको सीखकर इंसान न केवल रोटी रोजी कमा सकता है आपकी तो अर्थात विद्वान बन सकता है। 2014 से हर साल संस्कृत सप्ताह मनाने का भी केंद्रीय विद्यालयों ने घोषणा की थी। पहला संस्कृत विश्वविद्यालय भी वाराणसी में खुली थी तत्पश्चात अनेक संस्कृत विश्वविद्यालय भी खुल चुके हैं जो दर्शाते हैं संस्कृत एक महान भाषा है।
--- निर्मल शास्त्री, नांगल हरनाथ
संस्कृत की उत्पत्ति 5000 साल पहले हुई थी। संस्कृत दिवस लगातार मनाया जा रहा है। संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत दिवस को मनाया जाता है। संस्कृत कई भाषाओं की जननी है। संस्कृत भाषा के महत्व को समझ कर संस्कृत का उपयोग करना चाहिए। प्राचीन भारत में इसी दिन से ही शिक्षण एवं वेद पाठ शुरू हुआ था। छात्र इस दिन से शास्त्र का अध्ययन करने लगे थे। इसलिए संस्कृत दिवस मनाया जाना उचित है।
-आरडी शास्त्री, गाहड़ा
फोटो कैप्शन: आरडी शास्त्री, नरेश कुमार, विरेंद्र शास्त्री ढाणा, निर्मल शास्त्री।
सलूणी नाम से जाना जाता है रक्षा बंधन
---रक्षा बंधन पर्व समेटे हुए है इतिहास
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कनीना की आवाज।
तीज त्योहारों के इस देश में यूं तो समय-समय पर कई पर्व आते हैं और सभी अपनी-अपनी छटा बिखेर कर चले जाते हैं। इन त्योहारों में से एक पर्व रक्षा बंधन का आता है जो भाई बहन के अटूट प्यार की याद दिलाता है। इस त्योहार को ग्रामीण क्षेत्रों में सावनी और सलूणी नाम से जाना जाता है। इस पर्व के पीछे रक्षासूत्र और ब्राह्मïणों की पूजा अर्चना का विधान है। आज के समय में इस त्योहार की प्र्रासंगिकता और भी बढ़ गई है जबकि त्योहार को रक्षा का पर्व कम और भौतिकता के आधार पर अधिक तोला जाने लगा है। कई राज्यों जैसे बिहार, गुजरात और बंगाल में इस त्योहार को अलग रूपों में मनाया जा रहा है। यह पर्व 28 अगस्त को क्षेत्र में मनाया जा रहा है।
राखी शब्द की उत्पत्ति रक्षासूत्र से हुई है। रक्षासूत्र किसी जमाने में ब्राह्मïण और गुरुजनों द्वारा अपने शिष्यों की कलाई पर बांधा जाता था जिसके बाद माना जाता था कि कोई भी अस्त्र शस्त्र उसे बेंधने में सक्षम नहीं होता था। इसी प्रकार के रक्षासूत्र का हवाला महाबली एवं दानवराज बलि के हाथों पर उसके गुरु ने द्वारा बांधे जाने का प्रमाण मिलता है। बाद में दुश्मन जनों को भी अगर किसी बहन ने धागा बतौर राखी बांधना तो दूर भेज भी दिया था तो दुश्मन ने भी अपनी बहन समझकर उसके लिए प्राणों की बाजी लगा दी थी। ऐसा ही एक उदाहरण रानी कर्मवती द्वारा अपने दुश्मन हुमायू को राखी भेजे जाने का हवाला मिलता है। यद्यपि हुमायू ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर कर्मवती की रक्षा करने के प्रयास किए किंतु उनके किले के अंदर पहुंचने से पहले ही कर्मवती ने आत्महत्या कर ली थी।
सलूणी पर्व की उत्पत्ति श्रावणी उपाकर्म से हुई है। उपाकर्म में कोई ब्रह्मïचारी या फिर विद्वान को साफ पानी में इस दिन स्नान करके सूर्य की पूजा अर्चना करके शास्त्रों के अनुसार ही अपने गुरु की मदद से सावनी उपाकर्म करना होता था। उपाकर्म में हवन यज्ञ करके नया यज्ञोपवीत धारण करने का विधान होता था। पुराने समय में माना जाता हे कि वेदों का अध्ययन भी इसी दिन से शुरू किया जाता था। उपाकर्म में गुरु द्वारा रक्षासूत्र बांधे जाने का विधान था। रक्षासूत्र से ही राखी की उत्पत्ति हुई है। बंगाल और बिहार में तो इस गुरु पूर्णिमा के दिन ब्राह्मïणों और गुरुओं की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। गुजरात प्रांत में तो इस दिन गरबा नृत्य आयोजित किया जाता है।
रक्षा बंधन के पर्व में भाई बहन के अटूट प्रेम का भाव भी भरा हुआ है। चाहे भाई हजार कोस पर बैठा हो फिर भी वह रक्षा बंधन के दिन अपनी बहन के यहां मिलने जरूर जाता है चाहे वह उनके मायके हो या फिर ससुराल। बहन भी भाई का सुबह से ही इंतजार करती है और उसके दर्शन करके ही खाना खाती है। बहन अपने हाथों में एक थाल लेकर उसके आने का इंतजार करती हे जिसमें मिठाई और रक्षासूत्र रखा होता है। ज्योंहि भाई बहन के द्वार पहुंचता है तो सबसे पहले बहन उसका तिलक करके उसके हाथों पर रक्षासूत्र बांध देती है जिसका प्रण भाई ताउम्र निभाता है। यह ठीक है कि आज के दौर में बहन ओर भाई के बीच प्यार घटता जा रहा है और बहन धागा इसलिए बांधती है ताकि उसे कुछ धन मिल सके फिर भी इस त्योहार की अपनी मर्यादाएं हैं। इस दिन जहां घरों में पकवान बनाए जाते हैं वहीं घरों के बाहर रक्षा कवच भी चिपकाए जाते हैं जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में 'सूणÓ नाम से जाना जाता है। जैन धर्म के अनुयायी और दक्षिण भारत में इस पर्व के मनाने के पीछे पूजा अर्चना एवं गुरु को दान दक्षिणा देने को वरियतता दी जाती है।
नकल फार्म फीस वृद्धि प्रस्ताव के खिलाफ आंदोलन का बजाया दिया बिगुल
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कनीना की आवाज। बसपा ने हरियाणा सरकार के नकल फार्म फीस वृद्धि प्रस्ताव के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। नकल फार्म फीस वृद्धि वापिस लेने की मांग को लेकर पार्टी एक सप्ताह के अंदर कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाकर आंदोलन की रूपरेखा बनाएगी।
बसपा नेता अतरलाल ने उक्त घोषणा गांव भोजावास, गोमली, गोमला में जनसंपर्क के दौरान की। उन्होंने नकल फार्म फीस वृद्धि को जनविरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापिस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार के वृद्धि प्रस्तावों के तहत वर्तमान में नकल फार्म फीस जो एक रुपये है वह सौ रुपये कर दी गई। एक पेज के नकल की फीस जो 6 रुपये है वह 10 रुपये, 2 पेज नकल फीस जो 3 रुपये प्रति पेज है वह 10 रुपये प्रति पेज और 2 पेज से अधिक का शुल्क जो 2 रुपयेप्रति पेज है वह बढ़ाकर 10 रुपये प्रति पेज कर दिया। तत्काल नकल फीस की दर 5000 रुपये प्रति नकल निश्चित की है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित वृद्धि दरें गैर वाजिब, गैर लोकतांत्रिक तथा घोर जन विरोधी हैं। इससे साधारण गरीब वर्ग के हर व्यक्ति, किसान, मजदूर, दुकानदार, महिला, युवा, विद्यार्थी, बेरोजगारों को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ेगी। सभी वर्ग के लोगों को किसी न किसी रूप में अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए नकल फार्म की आवश्यकता पड़ती है। फार्म फीस एक रुपये से सीधे 100 रुपये करने और प्रति पेज 10 रुपये वसूलने से न्याय महंगा हो जाएगा। सरकार के वृद्धि प्रस्तावों को लेकर जनता में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि न्यायहित और जनहित में वृद्धि को तत्काल वापिस नहीं लिया गया तो बसपा जल्दी ही पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाकर आंदोलन की रूपरेखा बनाएगी।
फोटो कैप्शन 01:अतरलाल गांवों में संपर्क करते हुए
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