पूर्व नगर पालिका चेयरमैन सतीश जेलदार के भांजे हरि मोहन बने कर्नाटक के राज्यपाल के ओएसडी
-कनीना क्षेत्र में खुशी की लहर, परिवार और शुभचिंतकों ने दी बधाई
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कनीना की आवाज। कनीना के पूर्व नगर पालिका चेयरमैन सतीश जेलदार के भांजे हरि मोहन की कर्नाटक के राज्यपाल के कार्यालय में ओएसडी (विशेष कार्य अधिकारी) के पद पर नियुक्ति हुई है। इस उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। हरि मोहन की नियुक्ति को कनीना क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
हरि मोहन की इस नियुक्ति से पूर्व नगर पालिका चेयरमैन सतीश जेलदार के परिवार में खुशी और उत्साह का माहौल है। उनकी इस उपलब्धि पर परिचितों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कर्नाटक के राज्यपाल के कार्यालय में ओएसडी के पद पर नियुक्ति महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़ी है। हरि मोहन की इस उपलब्धि से क्षेत्र के लोगों में भी उत्साह है। लोगों को उम्मीद है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करेंगे।
सतीश जेलदार कनीना में पूर्व नगर पालिका चेयरमैन के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। उनके भांजे हरि मोहन की इस नियुक्ति को परिवार के साथ-साथ क्षेत्र के लिए भी सम्मान की बात माना जा रहा है। इस मौके पर उन्हें दमन यादव ,सुखबीर ,राकेश ,सतबीर ,अशोक ,उमेश ,कृष्ण सिंह ,नवीन ,जोगेंद्र, रोहित यादव आदि ने बधाई दी है।
फोटो कैप्शन : हरिमोहन
हनुमान के पराक्रम से गूंजा रामलीला मंच, धू-धू कर जली सोने की लंका
-सुग्रीव-बाली युद्ध और इंद्रजीत के साथ हनुमान के संवादों ने बांधा समां
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कनीना की आवाज। श्रीआदर्श रामलीला कमेटी कनीना के रंगमंच पर शनिवार रात भगवान श्रीराम की 13 दिवसीय लीलाओं के मंचन के दसवें दिन लंका दहन की लीला प्रस्तुत की गई। सुग्रीव-बाली युद्ध, इंद्रजीत द्वारा हनुमान को बंदी बनाना और हनुमान के लंका दहन के दृश्यों ने दर्शकों को भक्ति और रोमांच से भर दिया। हनुमान के पराक्रम और कलाकारों के प्रभावशाली संवादों पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर पालिका कनीना के पूर्व पार्षद मनीष यादव और बाबा मोल्डनाथ मंदिर कमेटी के प्रधान दिनेश यादव सहित अन्य सदस्यों ने शिरकत की। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर मंचन का शुभारंभ किया।
मंचन में भगवान श्रीराम द्वारा सुग्रीव को न्याय दिलाने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। श्रीराम ने सुग्रीव की व्यथा सुनकर उसे न्याय दिलाने का वचन दिया और बाली का वध किया। इसके बाद हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे। उन्होंने माता सीता को भगवान श्रीराम का संदेश और निशानी दी। इसकी जानकारी मिलने पर रावण ने हनुमान को बंदी बनाने का आदेश दिया। इंद्रजीत हनुमान को बंदी बनाकर रावण के दरबार में ले गया। इसके बाद हनुमान ने अपनी पूंछ में आग लगने पर पूरी लंका को आग के हवाले कर दिया। लंका दहन के दृश्य ने दर्शकों में खास उत्साह पैदा किया।
हनुमान की भूमिका निभा रहे मन्नू मित्तल ने अपने दमदार अभिनय और संवाद अदायगी से दर्शकों को प्रभावित किया। मन्नू कनीना रामलीला के 36 वर्ष पहले के प्रसिद्ध कलाकार शिब्बू पंसारी के पौत्र हैं। उनके अभिनय की दर्शकों ने खूब सराहना की। हनुमान और इंद्रजीत के बीच संवाद भी आकर्षण का केंद्र रहे।
रामलीला में रावण की भूमिका कृष्ण पहलवान चेलावास, मेघनाथ की मनोज रोहिल्ला, बाली की मोहित अरोड़ा और सुग्रीव की भूमिका उनके छोटे भाई कपिल अरोड़ा ने निभाई। तारा का किरदार अमित जांगड़ा, भगवान श्रीराम का शिवकुमार शर्मा, लक्ष्मण का प्रवक्ता सचिन शर्मा, माता सीता का मुकेश कपूर और जामवंत का पिनाक भारद्वाज ने निभाया। अक्षय कुमार की भूमिका विकसित रजलीवाल ने निभाई, जबकि अंगद के रूप में कर्नल चिकारा मंच पर उतरे। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों की वाहवाही लूटी।
इस अवसर पर श्री श्याम मित्र मंडल के प्रधान अनिल गर्ग, शिब्बू पंसारी, विक्की पंसारी, सुभाष मित्तल, सुरेंद्र शर्मा, प्रधान मोहित जेलदार, उप प्रधान दिनेश यादव, रामकिशन रामा शर्मा, सुरेंद्र मिनिया, पिन्नू मित्तल और रामा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 06:कनीना में रामलीला मंचन के दौरान लंका दहन की लीला प्रस्तुत करते कलाकार।
05: कलाकार भूमिका अदा करते हुए
दशहरे तक चलेगा सांझी पर्व
-प्रतिदिन बच्चियां गीत गाकर प्रसन्न करती हैं सांझी को
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कनीना की आवाज। दशहरे तक चलने वाला सांझी का पर्व अब समापन की ओर जा रहा है। एकता और भाईचारे का पर्व सांझी भगवान् राम के गुणों को बखान करने वाली रामलीला की भांति मनाया जाता है। गांवों में गोबर तथा सरकंडों से सांझी दिवार पर बनाई जाती है जिसे बच्चियां सिंझा कहती हैं। प्रतिदिन गीत गाकर और भोजन कराकर बच्चियों का समूह अपने घर चला जाता है।
भाद्रपद अमावस्या के दिन गांवों में छोटे-छोटे बच्चे एवं बच्चियां मिलकर गोबर, चूड़ी के टुकड़े, कपड़ों की कतरन व कई साजोसामान से देवी मां की झलक देने वाली सांझी दिवार पर बना देती हैं। तत्पश्चात प्रतिदिन शाम के वक्त पास पड़ोस की बच्चियां इक_ïी होकर सांझी को खाना खिलाती हैं तथा गीत गाती हैं।
सांझी के निर्माण में बच्चियां अपनी बुद्धि व कौशल का परिचय देती हैं। जिस प्रकार सांझी मां के हाथ व पैरों को सजाया और संवारा जाता है। बाल कलाकारों की यह अनोखी कलाकारी मन को मोह लेती है। भोजन कराने की क्रिया अश्विन शुक्ल दशमी अर्थात दशहरे तक चलती है। दशहरे के दिन सांझी को भोजन कराकर एक मटकी में डाला जाता है और मटकी के किनारों पर छेद करके मोमबत्ती जलाकर अंदर रख दी जाती है। छुपते छुपाते किसी जोहड़ में सांझी को बहा दिया जाता है।
एक अनोखी परम्परा के अनुसार सांझी के समक्ष जितने भी बच्चे एवं बच्चियां मिलकर गीत गाते हैं वे प्रतिदिन अपनी बारी के अनुसार गीत समाप्त होने के बाद बाकली या बतासे बांटते हैं। बारी-बारी से प्रत्येक घर का बच्चा यह प्रसाद लाता है और बांटकर खाते हैं। सांझी को जोहड़ में प्रवाहित करने का फैसला भी सामूहिक होता है।
क्यों करते हैं नौ दिन पूजा-
मां जगदंबा के नौ रूप होते हैं। प्रतिदिन बच्चे मां के एक रूप को पूजते हुए उसे खाना खिलाते हैं और बाद में स्वयं खाना खाते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
फोटो कैप्शन 03:दीवार पर बनी हुई सांझी
दुर्गा सप्तमी को कंजकों को कराया गया भोजन, दो दिन चलेगा भोजन कराने का सिलसिला
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कनीना की आवाज। दुर्गा सप्तमी पर कंजकों को भोजन कराया और उन्हें दान पुण्य किया। सोमवार को भी भोजन कराया जाएगा। दोपहर तक कंजकों को भोजन कराने का सिलसिला जारी रहा। यही नहीं अपितु कुत्तों एवं कौवों ने भी जी भर के भोजन किया। हरियाणा सरकार ने सोमवार को कुछ देरी से स्कूल लगाने का आदेश दे रखा है।
दुर्गा सप्तमी से सिलसिला शुरू हुआ है और नवमी सोमवार को भी जारी रहेगा। कुछ लोग मंगलवार को भी कंजकों को खाना खिलाएंगे।
नवरात्रों के सातवें दिन मंदिरों में पूजा अर्चना का जोर रहा वहीं मां की कढ़ाई की गई। विभिन्न मंदिरों में रौनक देखने को मिली। सोमवार को क्षेत्र में नवरात्रे पूर्ण होने जा रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर हवन, कढ़ाई, भजन एवं सत्संग होते रहे।
जहां हलवा पुड़ी एवं शुद्ध देशी घी से बनी वस्तुएं खिलाई गई। उन्हें भेंटस्वरूप फल भी दिए गए। नवरात्रों के दिनों में फल एवं सब्जियां महंगी रही हैं। केले से लेकर सेब तक महंगे हैं। इन चीजों की जरूरत हर घर में रहती है।
फल महंगे-
बाजार में सभी फल एवं सब्जियां करीब दस रुपये महंगी चल रही हैं। रेहडिय़ों पर फल एवं सब्जियां सजी हुई हैं।
51 कन्याओं को कराया भोजन, हवन आयोजित-
संत मालडऩाथ आश्रम में 9 दिनों से चल रही मां दुर्गा के अखंड ज्योति का सोमवार के दिन हवन करके विधि विधान से समापन किया जाएगा। 51 कन्याओं को भोजन करवा कर दान दक्षिणा देकर कन्याओं का पूजन किया जाएगा। मंदिर कमेटी प्रधान दिनेश यादव ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मां दुर्गा का नवरात्रों का समापन पर हवन किया जाएगा वहीं कन्याओं को भोजन करवा कर दान दक्षिणा दी जाएगी।
फोटो कैप्शन 04: कंजकों को भोजन कराते हुए
कनीना में कांग्रेस का रोष मार्च आज, मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंकेंगे कार्यकर्ता
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कनीना की आवाज। हरियाणा कांग्रेस के आह्वान पर 19 अक्टूबर को कनीना में ब्लाक कांग्रेस की ओर से वोट बचाओ, देश बचाओ, संविधान बचाओ कार्यक्रम के तहत रोष मार्च निकाला जाएगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका जाएगा। विस्तृत जानकारी देते हुए पूर्व सीपीएस अनीता यादव ने बताया कि सोमवार सुबह 10 बजे कांग्रेस कार्यकर्ता नेताजी सुभाष पार्क, कनीना में एकत्रित होंगे। इसके बाद वहां से रोष मार्च निकालते हुए अंबेडकर चौक पहुंचेंगे, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर उनका पुतला फूंका जाएगा। उन्होंने जिला और ब्लाक स्तर के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं तथा पार्टी समर्थकों से निर्धारित समय पर पहुंचकर कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में उकलाना के विधायक एवं जिला प्रभारी नरेश कुमार सेलवाल मुख्य रूप से शामिल होंगे। इसके अलावा जिला कांग्रेस अध्यक्ष सतबीर झुकिया सहित अन्य पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ता भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में पार्टी के बैनर तले चल रहे विरोध प्रदर्शनों की कड़ी में कनीना में भी यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसके माध्यम से पार्टी वोट बचाओ, देश बचाओ, संविधान बचाओ का संदेश देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएगी।
नवरात्रों के साथ अब दीपावली की तैयारी
- फूलों की बढ़ी मांग, 150 रुपये किलो तक पहुंचा भाव
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में एक दर्जन गांवों में किसानों ने फूलों की खेती की हुई है। फूलों की मांग बढ़ती जा रही है जो भाव 70 से 80 रुपये प्रति किलो था वह डेढ़ सौ से 160 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है।
राजू कनीना, गजराज मोड़ी, कृष्ण कुमार भडफ़ ने बताया कि उन्होंने फूलों की खेती की है और लंबे समय से फूलों की खेती करते आ रहे हैं। जब-जब त्यौहार पास आते हैं, फूलों की मांग बढ़ जाती और विशेष कर नवरात्रि दीपावली पर फूलों की मांग अधिक होती है। नवरात्रों पर आकर में छोटे फूलों की मांग अधिक होती है और दीपावली पर बड़े आकार के फूलों की मांग अधिक होती है। कृष्ण कुमार ने बताया कि वह दिल्ली फूल बेचने के लिए जाते हैं। वर्तमान में भाव 150 से 160 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है जबकि यही भाव पहले 70 से 80 रुपये प्रति किलो था। गेंदे की खेती कैश क्रॉप में आती है और बेहतर भाव मिलने की संभावना होती है।
किसानों ने बताया कि कभी-कभी भाव इतने कम होते हैं कि किसान मंडियों तक फूल नहीं ले जाते। इस समय दीपावली नजदीक है जिसकी तैयारी में किसान भी अपने खेतों में बेहतर फूलों तैयारी कर रहे हैं। बेहतरीन दर्जे के फूल तैयार कर रहे हैं ताकि वो दीपावली पर बेचे जा सके।
फोटो कैप्शन 02: फूल बेचने जाते हुए किसान
दूर दराज तक विख्यात है भडफ़ का माता मंदिर
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कनीना की आवाज। उप-मंडल कनीना से तीन किलोमीटर दूर रेवाड़ी सड़क मार्ग पर भडफ़ गांव में माता का मंदिर स्थित है।
मंदिर का इतिहास--
भडफ़ गांव के माता मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह गांव के बसासत के समय से चला आ रहा है। पहले इसका नाम नाम बाड़ीवाला आश्रम था जहां संत बिहारी दास, मोहिनीदास, प्रेमानंद आदि संतों ने तप किया और अब उनके स्थान पर प्रेमानंद गिरी महाराज संत तप करते है। यहां पर मकर संक्रांति पर बड़ा मेला लगता है तथा भारी भीड़ जुटती है। 15 साल पहले इस मंदिर की स्थापना की गई थी। जहां पर बाड़ीवाला आश्रम था उसी जगह आज माता का भव्य मंदिर बनाया गया है। दुर्गा के विभिन्न रूपों की मूर्तियों तथा अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां यहां स्थापित की गई है। मूर्तियां राजस्थान से बनवाकर लाई गई थी।
कैसे पहुंचा जाए-
इस मंदिर तक पहुंचाने के लिए कनीना पहुंचना जरूरी है। कनीना से रेवाड़ी मार्ग पर पहला बस स्टाप भडफ़ का आता है। भडफ़ के बस स्टाप से उतरने पर भडफ़ गांव की बणी में पहुंचा जाएगा। बणी के पास ही यह मंदिर स्थापित है। इस गांव के ही नहीं अपितु दूर दराज से भक्त यहां आते हैं। विभिन्न प्रसाद वितरित करते हैं जिनमें बतासे, बूंदी तथा अन्य मीठे का प्रसाद वितरित किया जाता है। यहां मंदिर में दुर्गा, सरस्वती, महाकाली, शेरावाली, पार्वती आदि देवियों की मूर्ति स्थापित है।
क्या कहते हैं पुजारी-
महाराज ब्रह्मगिरी बताते हैं कि यह माता का भव्य मंदिर है। यहां पर दूर दराज तक के भक्त आते हैं और अपनी मन्नत दिल में लाते हैं। यहां पर मांगी गई मन्नत पूर्ण होती है। माता के दरबार में हाजिरी लगाना ही बड़ा होता है। अपने आप को छोटा समझकर मां के दरबार में सभी को आना चाहिए, नतमस्तक होना चाहिए तभी सभी काम सफल होते हैं।
---ब्रह्मगिरी महाराज
क्या कहते हैं भक्त-
नवरात्रों में ही नहीं अकसर यहां पूजा करने आते रहते हैं। अक्सर जाकर धोक लगते हैं और यही मन्नत मांगते हैं की संपूर्ण गांव और सृष्टि खुशहाल रहे। उनका कहना है की माता के दरबार में दिन-रात भारी संख्या में भक्ति पहुंचते हैं क्योंकि इसमें अनेक देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित है इसलिए हर दिन किसी ने किसी देवी देवता के पूजा करने लोग यहां पहुंचते हैं।
--- भक्त महेंद्र सिंह भक्त
फोटो कैप्शन: भडफ़ में माता मंदिर की मूर्तियां, ब्रह्मगिरी तथा महेंद्र सिंह।
नवरात्रि पर लगाए फलदार व धार्मिक महत्व के पौधे
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कनीना की आवाज। नवरात्रि के पावन पर्व पर गांव रामबास के मंदिर परिसर में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर पर्यावरण प्रेमी मनोज कुमार रामबास ने अपने साथियों के साथ मिलकर मंदिर परिसर में बेलपत्र, लेहसुआ, आड़ू और नाशपाती सहित विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए। पौधारोपण के माध्यम से ग्रामीणों को प्रकृति संरक्षण, हरियाली संवर्धन और पौधों की देखभाल के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान मनोज कुमार रामबास ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और पेड़-पौधों का विशेष महत्व है। पेड़-पौधे हमारे जीवन का आधार हैं। वे वातावरण को स्वच्छ बनाने, छाया प्रदान करने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और जीव-जंतुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधारोपण को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये हमें समाज और प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा भी देते हैं। मंदिर परिसर में बेलपत्र का पौधा लगाना धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।
मनोज कुमार रामबास ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल करना, समय पर पानी देना और उन्हें सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। एक पौधा जब वृक्ष बनता है, तभी वह लंबे समय तक प्रकृति और समाज को लाभ पहुंचाता है। इसलिए पौधारोपण के साथ पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी सामूहिक रूप से निभानी चाहिए।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे जन्मदिन, त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और अन्य शुभ अवसरों पर पौधे लगाकर उन्हें यादगार बनाएं। यदि प्रत्येक परिवार कुछ पौधे लगाकर उनकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो गांव में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ आने वाली पीढिय़ों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण दिया जा सकता है।
गांव रामबास में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया यह पौधारोपण कार्यक्रम समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का संदेश देता है। मंदिर परिसर में लगाए गए पौधे धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और पर्यावरण प्रेम के प्रतीक हैं।
कार्यक्रम के अंत में मनोज कुमार रामबास और उनके साथियों ने पौधों की नियमित देखभाल करने तथा गांव को अधिक हरा-भरा, स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया।
फोटो कैप्शन 01:पौधारोपण करते हुए मनोज कुमार एवं उसके साथी
सेहलंग गांव के सोमा बाबा का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर
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कनीना की आवाज। खंड कनीना के गांव सहलंग निवासी 85 वर्षीय सोमदत्त शर्मा उर्फ सोम बाबा का आज प्रात: निधन हो गया। उनके निधन से गांव सहित आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। वे अपने पीछे तीन पुत्रों, दो बेटियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके सुपुत्र राधेश्याम, सीताराम और सतपाल तीनों खेतीबाड़ी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
उनके पौत्र देवेंद्र भारद्वाज ने बताया कि सोमदत्त शर्मा अपने सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और जनसेवा की भावना के कारण गांव में विशेष पहचान रखते थे। वे गांव के भविष्यवक्ता के रूप में भी मशहूर थे। ग्रामीणों के बीच उन्हें सोम बाबा तथा लोहार समाज के जोशी के नाम से भी जाना जाता था। उनके जीवन से जुड़ी अनेक ऐसी घटनाएं और संस्मरण ग्रामीणों के बीच प्रचलित रहे, जिनमें उनकी कही गई बातें बाद में सही साबित होने की चर्चा होती रही।
फोटो कैप्शन: सोम बाबा
एकल पारी में चलाया जाए विद्यालय वरना दिया जाएगा धरना
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कनीना की आवाज। प्रजा भलाई संगठन के सुप्रीमोअतरलाल ने भोजावास गांव के राजकीय पीएमश्री वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को एक पारी (वन-शिफ्ट) में चलाने की मांग की। अतरलाल ने ई-मेल से जिला शिक्षा अधिकारी महेन्द्रगढ़ की मार्फत निदेशक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल शिक्षा विभाग हरियाणा चंडीगढ़ को भेजे ज्ञापन में उक्त मांग उठाई है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि शिक्षा विभाग ने 15 दिन के अंदर विद्यालय में एक पारी शुरू नहीं की तो अभिभावकगण और ग्रामवासी गांव में स्थापित डा. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा के समक्ष धरना देने पर मजबूर होंगे।
बाजरे की सरकारी खरीद का हुआ शेड्यूल जारी
- सुबह 8 बजे से शाम 5 तक चलेगी खरीद
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कनीना की आवाज। कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में किसानों का सरकारी बाजरे खरीद का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। शेड्यूल अनुसार 19 अक्टूबर को मुडिया खेड़ा, नांगल, नौताना एवं पड़तल के किसान अपना बाजरा बेच पाएंगे। वहीं 20 अक्टूबर को पाथेड़ा, पोता, रामबास, रसूलपुरके किसान और 21 अक्टूबर को सेहलंग, सुंदराह, स्याणा,सिहोर के किसान बाजार बेच पाएंगे। वहीं 22 अक्टूबर को तलवाना, उच्चत, उन्हाणी एवं ढाणा के किसान अपनी पैदावार बेच सकेंगे।
विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव एवं कार्यकारी अधिकारी मार्केट कमेटी अजीत सिंह ने बताया कि किसान बिना शेड्यूल के मंडी में ना आए, गेट पास कटवाने के लिए अपने साधन पर नंबर प्लेट लगवाना जरूरी है। वो किसान अनाज मंडी में आए जिन्होंने रजिस्ट्रेशन मेरी फसल मेरा ब्यौरा करवाया हुआ है। अपनी फसल को अच्छी प्रकार सुखाकर वह साफ करके लाए।




























































