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**KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**
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Sunday, May 31, 2026
समाज में दान दहेज की प्रथा जारी-बजरंग एडवोकेट ********************************************** *********************************************** ********************************************** कनीना की आवाज। आज के समाज में जहां लड़कियों की कमी होती जा रही है फिर भी दान दहेज कम नहीं हो रहा है। विवाह शादियों में भारी दान दहेज दिया जाता है जो समाज के लिए कलंक है। ये विचार करीरा निवासी बजरंग एडवोकेट ने रिया और नरेश की शादी दौरान मुलाकात में व्यक्त किए। इस मौके पर बजरंग एडवोकेट ने कहा कि बहुत से ऐसे पिता होते हैं जो दान दहेज देते देते अपने घर और जमीन नीलाम कर देते हैं। एक लड़की की शादी के लिए इतना दान दहेज देना पड़ता है तो भविष्य कैसा होगा जबकि कहावत है- दुल्हन ही दहेज है और उसके अतिरिक्त दान दहेज लेना और देना समाज के लिए एक बुराई साबित होता है। आज के समय किसी के घर लड़की पैदा हो जाती है तो खुशियां बहुत कम मनाई जाती है जबकि लड़का पैदा होने पर खूब खुशियां मनाई जाती है क्योंकि लड़का होने पर दान दहेज से तो बच जाते हैं। यदि दान दहेज खत्म हो जाए तो समाज में लड़कियों की भी पैदा होने पर लोग बहुत खुश होंगे। उन्होंने कहा कि विवाह शादी प्रेम पर आधारित है। दो परिवारों के बीच संबंध को इंगित करता है किंतु जब दान दहेज बीच में आ जाता है तो दो परिवारों के बीच में दरार का काम करता है। इस दान दहेज की प्रथा से अगर बच जाए तो समझो समाज की अधिकांश बुराइयां समाप्त हो जाएंगी। वरना यह तन दहेज न जाने कितनी लड़कियों और कितने माता-पिताओं को लील लेगा। कुछ उदाहरण एक रुपए लेकर शादी करने के सामने आए हैं जो मन में खुशी भर देते हैं। इस मौके पर ओमप्रकाश भट्टी, मनोज कुमार, धर्मपाल एडवोकेट, केके भट्टी, बाल किशन और श्री कृष्ण वैद्य सहित कई जन मौजूद थे। फोटो कैप्शन 11:रिया और नरेश की शादी में दान दहेज की बुराई के बारे में जिक्र करते बजरंग एडवोकेट
व्यापारियों के पुराने टैक्स बकाया से मुक्ति का सुनहरा मौका -हरियाणा सरकार ने शुरू की एकमुश्त निपटान स्कीम-2026 छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत, एक लाख तक का बकाया अब पूरी तरह माफ ********************************************** *********************************************** ********************************************** कनीना की आवाज। हरियाणा सरकार ने प्रदेश के व्यापारी वर्ग को बड़ी राहत देते हुए एक बार फिर एकमुश्त निपटान स्कीम-2026 का आगाज कर दिया है। यह योजना आगामी 120 दिनों तक रहेगी। यह जानकारी देते हुए डीईटीसी (सेल टैक्स) प्रियंका यादव ने बताया कि साल 2025 में इस योजना की अपार सफलता और 1.15 लाख से अधिक व्यापारियों द्वारा इसका लाभ उठाए जाने के बाद, सरकार ने इसे दोबारा लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य पुराने टैक्स विवादों को खत्म करना और व्यापारियों को अदालती मुकदमों से मुक्त कर एक स्वच्छ कारोबारी माहौल देना है, ताकि भविष्य में पूरा ध्यान जीएसटी संग्रह पर केंद्रित किया जा सके। यह योजना 1 जून 2026 से प्रभावी हो चुकी है और आगामी 120 दिनों तक यानी 28 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी। प्रियंका यादव ने स्पष्ट किया कि इस बार सरकार ने छोटे व्यापारियों का विशेष ख्याल रखा है। यदि किसी व्यापारी पर किसी एक वर्ष में 1 लाख रुपये तक का टैक्स बकाया है, तो उसे योजना के लिए आवेदन करने तक की आवश्यकता नहीं है; उनका कर, ब्याज और जुर्माना स्वत: ही माफ मान लिया जाएगा। यह स्कीम कुल सात अलग-अलग कराधान अधिनियमों के तहत पुराने बकायों पर लागू होगी। विशेष रूप से 1973 के पुराने बिक्री कर अधिनियम के मामलों में, जहाँ बकाया बहुत पुराना है, 1 लाख से अधिक की राशि पर 70 प्रतिशत तक की भारी छूट दी जा रही है। इसके अलावा जिन व्यापारियों के मामले सिर्फ इसलिए फंसे हुए थे क्योंकि वे समय पर जरूरी वैधानिक फॉर्म (जैसे फॉर्म सी, एफ या एच) जमा नहीं कर पाए थे, उन्हें भी अब ये फॉर्म जमा कर अपने टैक्स की मांग कम करवाने का मौका दिया गया है, बशर्ते वे फर्जी फर्मों की श्रेणी में न आते हों। योजना की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने भुगतान की प्रक्रिया को भी बेहद लचीला बनाया है। उन्होंने बताया कि जो व्यापारी अदालतों में लंबित अपने मुकदमों को वापस लेने को तैयार हैं, वे भी इस राहत का हिस्सा बन सकते हैं। बकाया राशि चुकाने के लिए किस्तों की सुविधा भी दी गई है, जहाँ 5 लाख से अधिक और 25 लाख तक की राशि को दो किस्तों में और 25 लाख से अधिक की राशि को तीन आसान किस्तों में चुकाया जा सकता है। एक बार आवेदन सही पाए जाने और स्वीकार होने के बाद, संबंधित व्यापारी के खिलाफ उस मामले में भविष्य में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक शांति मिल सकेगी। जानिए कितना मिलेगा लाभ-- इस योजना के तहत हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम 1973 के मामलों में 1 लाख तक 100 प्रतिशत और उससे अधिक पर 70 प्रतिशत टैक्स छूट के साथ पूरा ब्याज व जुर्माना माफ है। अन्य छह अधिनियमों के अंतर्गत भी स्लैब के अनुसार राहत दी गई है, जिसमें 1 लाख तक 100 प्रतिशत, 10 लाख तक 60 प्रतिशत, और 1 करोड़ तक के बकाये पर 50 प्रतिशत टैक्स की छूट शामिल है। जैसे-जैसे बकाया राशि बढ़ती है, छूट का प्रतिशत 30 प्रतिशत तक आता है, लेकिन सभी श्रेणियों में ब्याज और जुर्माने की शत-प्रतिशत माफी व्यापारियों के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरी है।
सफर सृष्टि का लोकार्पण -मुख्य अतिथि पद्म-भूषण हुकमदेव नारायण यादव थे ********************************************** *********************************************** ********************************************** कनीना की आवाज। धारूहेडा में स्थित जंगल बैबलर ट्यूरिज्म कंपलैक्स में मित्र राधेश्याम गोमला द्वारा रचित सफर सृष्टि काÓ का लोकार्पण हुआ। पुस्तक लोकार्पण के मुख्य अतिथि पद्म-भूषण हुकमदेव नारायण यादव थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मनोज कुमार यादव (आईएएस) ने की। पुस्तक की समीक्षा प्रकाशक डाक्टर अशोक कुमार मंगलेश, वरिष्ठ साहित्यकार व कोसली कालेज की प्राचार्या डाक्टर लाज कौशल, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र सिंह यादव, एडवोकेट रणजीत सिंह और लोकसभा चैनल के एंकर रामवीर श्रेष्ठ ने की। वरिष्ठ साहित्यकार मनोज गौतम ने कार्यक्रम का सफल मंच संचालन किया। टाइगर क्लब नारनौल की ओर से मुख्य अतिथि को गदा भेंट कर सम्मानित किया। हुकमदेव नारायण यादव ने अपने संबोधन में अनेक उदाहरण देते हुए बताया कि साहित्य का समाज सुधारने और आगे बढ़ाने में विशेष योगदान रहता है। उन्होंने कहा कि लेखक के बाद साहित्य उसे अमर बना देता है। यादव ने बताया कि सफर सृष्टि का पुस्तक भविष्य में अनेक साहित्यकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगी। पुस्तक समीक्षकों ने सार स्वरूप बारी बारी कहा कि पुस्तक सफर सृष्टि का एक ऐसी बहुआयामी कृति है, जो विज्ञान, इतिहास, दर्शन, अध्यात्म और मानव सभ्यता के विकास को एक ही वैचारिक धारा में प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। यह पुस्तक केवल घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण नहीं है, बल्कि मानव की सनातन जिज्ञासा—मैं कौन हूँ, कहां से आया हूँ और भविष्य में कहां जा सकता हूं?—का उत्तर खोजने का एक गंभीर साहित्यिक उपक्रम है। लेखक ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर संभावित भविष्य के प्रकाश-मानव तक की यात्रा को रोचक, संवादात्मक और विचारोत्तेजक शैली में प्रस्तुत किया है। यही कारण है कि यह पुस्तक सामान्य ज्ञानग्रंथों से अलग एक विशिष्ट पहचान बनाती है। पुस्तक का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष इसका विषय-विस्तार है। लेखक ने सिंगुलैरिटी, बिग-बैंग, बिग-बॉउन्स, ग्रह-निर्माण, जैव-विकास, होमो-सेपियन्स, प्राचीन सभ्यताओं, वेदों, संवतों, इतिहास, मानव स्वभाव, आत्मा, चेतना और भविष्य की वैज्ञानिक संभावनाओं जैसे अनेक विषयों को एक ही संरचना में समाहित किया है। इतने व्यापक विषय को एक पुस्तक में समेटना स्वयं में चुनौतीपूर्ण कार्य है। लेखक ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए पाठक के सामने एक ऐसी बौद्धिक यात्रा रखी है, जो उसे समय और ज्ञान के विशाल विस्तार में विचरण कराती है। इस कृति की सबसे मौलिक उपलब्धि इसकी पाडकास्टीय-चंपू शैली है। लेखक ने आधुनिक पाडकास्ट की संवादात्मक पद्धति को साहित्यिक चंपू परंपरा के साथ जोड़कर एक नवीन शैली का निर्माण किया है। पुस्तक के दो प्रमुख पात्र - बीर श्रेष्ठ और मित्र पुनीतानंद, प्रश्न और उत्तर के माध्यम से विषयों को आगे बढ़ाते हैं। यह शैली पाठक को केवल पढऩे तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे संवाद का सहभागी बना देती है। अनेक स्थानों पर ऐसा अनुभव होता है जैसे पाठक किसी बौद्धिक चर्चा को सुन रहा हो। यह प्रयोग विशेष रूप से आधुनिक युवा पाठकों को आकर्षित करने की क्षमता रखता है। पुस्तक का प्रथम खंड ब्रह्मांड और जीवन की उत्पत्ति पर केंद्रित है। लेखक ने बिग-बैंग सिद्धांत, सिंगुलैरिटी और ब्रह्मांडीय विकास की वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाने का प्रयास किया है। साथ ही उन्होंने वैदिक साहित्य, विशेषकर ऋग्वेद के नासदीय सूक्त और अन्य वैदिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए यह दिखाने का प्रयास किया है कि सृष्टि के रहस्यों पर चिंतन केवल आधुनिक विज्ञान की देन नहीं है, बल्कि प्राचीन भारतीय मनीषा भी इस विषय पर गंभीर विचार कर चुकी है। लेखक विज्ञान और अध्यात्म को विरोधी नहीं, बल्कि समान प्रश्नों के भिन्न उत्तर खोजने वाली परंपराओं के रूप में देखते हैं। यही दृष्टिकोण पुस्तक को विशिष्ट बनाता है। दूसरे खंड में मानव सभ्यताओं और सांस्कृतिक विकास की चर्चा है। मेहरगढ़, राखीगढ़ी, धोलावीरा, सिंधु-सारस्वत सभ्यता, सुमेर, मिस्र और अन्य प्राचीन सभ्यताओं का उल्लेख पुस्तक को वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है। लेखक भारतीय सभ्यता की प्राचीनता और महत्ता पर बल देते हैं, परंतु साथ ही विश्व की अन्य सभ्यताओं के योगदान को भी स्वीकार करते हैं। इससे पुस्तक में संतुलन बना रहता है। विभिन्न संवतों, ग्रंथों और ऐतिहासिक घटनाओं का समावेश पाठक को मानव विकास की दीर्घकालिक यात्रा का बोध कराता है। पुस्तक का तीसरा खंड भविष्य और चेतना से संबंधित है। यहाँ लेखक केवल अतीत का वर्णन नहीं करते, बल्कि मानव के संभावित भविष्य पर भी विचार करते हैं। आत्मा, मस्तिष्क, चेतना, स्वभाव, सामाजिक मर्यादाएँ और वैज्ञानिक संभावनाएँ इस खंड के प्रमुख विषय हैं। प्रकाश-मानव की अवधारणा लेखक की भविष्य-दृष्टि को अभिव्यक्त करती है। यह भाग पाठक को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि मानव विकास अभी पूर्ण नहीं हुआ है और विज्ञान तथा चेतना के नए आयाम भविष्य में मानव जीवन को नई दिशा दे सकते हैं। भाषा की दृष्टि से पुस्तक सरल, सहज और प्रभावशाली है। लेखक ने कठिन वैज्ञानिक और दार्शनिक अवधारणाओं को भी सामान्य हिन्दी में प्रस्तुत किया है। बीच-बीच में प्रयुक्त पद्यांश, दोहे और छंद पुस्तक को साहित्यिक गरिमा प्रदान करते हैं। संवादों के बीच काव्यात्मक अभिव्यक्तियाँ पाठक की रुचि बनाए रखती हैं। यह गुण पुस्तक को केवल ज्ञानपरक नहीं, बल्कि साहित्यिक भी बनाता है। लेखक की अध्ययनशीलता और परिश्रम पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में दिखाई देते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक शोधों, पुरातात्विक खोजों, ऐतिहासिक तथ्यों और प्राचीन ग्रंथों का व्यापक उपयोग किया है। साथ ही वे यह स्वीकार करते हैं कि उनका उद्देश्य अंतिम सत्य की घोषणा करना नहीं, बल्कि उपलब्ध ज्ञान को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करना है। यह विनम्रता पुस्तक की विश्वसनीयता को बढ़ाती है। हालांकि आलोचनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो पुस्तक की कुछ सीमाएं भी हैं। कई स्थानों पर विज्ञान और अध्यात्म के बीच स्थापित समानताएँ दार्शनिक रूप से आकर्षक अवश्य हैं, किंतु उन्हें वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता। कुछ संवाद अपेक्षाकृत लंबे हैं और विषय-विस्तार के कारण कभी-कभी सूचनाओं की अधिकता भी अनुभव होती है। फिर भी ये सीमाएँ पुस्तक की मूल शक्ति को कम नहीं करतीं। इसके विपरीत, वे इस तथ्य की ओर संकेत करती हैं कि लेखक ने अत्यंत व्यापक विषय को समेटने का साहस किया है। समग्र रूप से 'सफर सृष्टि का एक महत्त्वपूर्ण, मौलिक और विचारोत्तेजक कृति है। यह पुस्तक पाठक को ब्रह्मांड की विराटता, मानव सभ्यता की जड़ों और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करती है। विज्ञान, इतिहास, दर्शन और अध्यात्म के समन्वय का जो प्रयास इस पुस्तक में दिखाई देता है, वह हिन्दी साहित्य में अपेक्षाकृत दुर्लभ है। ज्ञान और जिज्ञासा की यह यात्रा पाठक को केवल बाहरी संसार से नहीं, बल्कि अपने भीतर के प्रश्नों से भी परिचित कराती है। यही इस कृति की सबसे बड़ी उपलब्धि और स्थायी महत्ता है। इस अवसर पर एडवोकेट सुदेश यादव, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक डॉक्टर एच डी यादव, पर्यटन विभाग के ए जी एम एच एस यादव, कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉक्टर अजय यादव, सुप्रसिद्ध हास्यकवि हलचल हरियाणवी, सुप्रसिद्ध दोहाकार रघुविंद्र यादव, सिंघानिया विश्वविद्यालय के कैंपस उप कुलपति प्यार सिंह जस्सल, एक सीएसआर कंपनी के हैड दीपक यादव, सिंघानिया विश्वविद्यालय के पूर्व कैंपस उप-कुलपति पवन त्रिपाठी, एडवोकेट अतरलाल, प्राचार्य दिनेशकुमार यादव, प्रोफेसर सविता मंगलेश, आशुकवि दलबीर सिंह फूल, बिजली विभाग के एकाउंट अधिकारी बलबीर सिंह, हरियाणा कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष महावीर पहलवान, साहित्यकार त्रिलोकचन्द फतेहपुरी, प्राचार्य सूरत सिंह धनोंदा, सामाजिक कार्यकर्ता अजीतवीर यादव, मुख्याध्यापक धर्मेंद्र यादव, वरिष्ठ साहित्यकार सुंदरलाल, लेखक नेमीचंद् शास्त्री, साहित्यकार शुभराम खालेटा, बिजली विभाग के उपमंडल अधिकारी बी डी यादव,दीपक यादव जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी, धर्मबीर बीडीपीओ, दिनेश कुमार समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी, समाजसेवी महावीर यादव,मास्टर रामकिशन यादव,दिल्ली पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर प्रदीप यादव, टाइगर क्लब के संरक्षक राकेश यादव टाइगर, बिट्टू लाम्बा, वरिष्ठ साहित्यकार श्रीभगवान बव्वा, अजीत सांवरिया, सुनील यादव व सरपंच मिंटू गोमला सहित गणमान्य लोग उपस्थित है। फोटो कैप्शन 12: संबंधित है
विश्व दूध दिवस -दूध के बल पर पाई है नीतू गुढ़ा ने राष्ट्र स्तर पर -दूध न केवल आहार है बल्कि जीवन का आधार है -नीतू डेरी से प्रतिदिन जाता है 900 लीटर दूध ********************************************** *********************************************** ********************************************** कनीना की आवाज।
दूध नाम लेते ही सेहत के राज की याद आती है वही नीतू यादव गुढ़ा निवासी को दूध ने मालामाल कर दिया। वो दूध के बल वो दूध के बल पर फर्श से अर्श तक पहुंच गई है। कभी पांच गायों से अपना दूध से संबंधित सफर शुरू किया और आज 100 गाये उनके पास है। जिनसे सर्दियों में 1400 लीटर प्रति दिन तो गर्मियों में 900 लीटर प्रति दिन दूध डेरी तक पहुंच रहा है। उनका दूध पूरे ही राष्ट्र में जाता है। 1995 में गुढ़ा में पवनवीर नामक बेरोजगार व्यक्ति के नीतू यादव की शादी हुई तब तक नीतू ने 10 जमा दो और आईटीआई कटिंग टेलरिंग का कोर्स कर रखा था। गुढ़ा आने के बाद उनके सामने नौकरी की समस्या सामने मुंह बाए खड़ी थी चूंकि उनके पति पवनवीर बेरोजगार थे जो वर्तमान में बाबू पद पर कार्यरत हैं। नीतू ने देखा कि उनके जमीन जायदाद तो है किंतु बहुत अधिक चारा बेकार जाता है। तूड़ी, कड़बी, हरा चारा कितना ही बेकार चला जाता था। जिसके चलते उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए पांच गायों से दूध का सफर शुरू किया प्रारंभ में तो दोधिए को ही दूध दिया जाता था और लोकल में ही दूध पहुंच पा रहा था किंतु धीरे-धीरे 2013 तक गायों की संख्या बढ़ा ली और अमूल डेरी को दूध प्रदान करने लगी। धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ती चली गई। वर्तमान में गायों की संख्या एक सौ से अधिक पहुंच गई है। इनमें से दूध देने वाली 45 गाये हैं जो अधिकतम 70 लीटर प्रति दिन दूध देती हैं। घर परिवार के लिए दो भैंस भी पाल रखी हैं। दूध से जो आय हो रही है वह डेढ़ से 2 लाख प्रतिमाह पहुंच रही है। उनको देखकर जयपाल गुढ़ा ने भी एक सौ के करीब गाये पालकर डेरी शुरू कर दी। अनेक लोग हैं जो उनके पदचिह्नों पर चल रहे हैं और कुछ चलने का प्रयास कर रहे हैं। दूध के बल पर नीतू ने न केवल अपने स्तर को ऊंचा उठाया अपितु अपनी पुत्री मोनिका को एमबीबीएस करवाया। वर्तमान में वो पीजी की तैयारी कर रही है वही उनका पुत्र कुणाल दस जमा दो मेडिकल में पढ़ाई कर रहा है। वर्तमान में कहीं भी पूछा जाए नीतू डेरी का नाम प्रसिद्ध है। जिले में अमूल का आधार भी नीतू डेरी बनती जा रही है। दूध के बल पर उनका सफर बढ़ता ही जा रहा है। उन्होंने वर्तमान में बड़ी डेरी का निर्माण किया है जिसमें सभी कार्य स्वयं संचालित होंगे अर्थत आटोमेटिक होंगे। उनकी दूध के क्षेत्र में ख्याति के दृष्टिगत 2018 में चैनई में, 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मान दिया। वही 2022 में भिवानी में उनकी गाय चैंपियन रही। 2022 में भिवानी में मनोहर लाल खट्टर ने उनकी गायों के कारण उन्हें सम्मानित किया। 2022 में ही लाडवा में भी उन्हें पुरस्कृत किया गया। 2026 में झज्जर में उनका अनेक पुरस्कार मिले। 2026 में ही उनकी गाय पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर रही। नीतू का कहना है कि दूध उनके लिए न केवल आहार है बल्कि जीवन का आधार है। जिन्होंने उनकी जिंदगी को संवार दिया है। आज घर की हालत बेहतरीन बन गई है। दूध के कारण ही उनका नाम दूरदराज तक विख्यात है। बुजुर्ग प्राय आशीर्वाद देते आए हैं- दंूधो नहाओ, फूलों फलों अर्थात दूध न केवल पीना अपितु दूध से भी नहाना भी है और आगे उन्नति के शिखर पर चलते जाना है। नीतू गुढ़ा यह कहावत चरितार्थ कर रही है। फोटो कैप्शन 9 व 10: नीतू यादव गुढ़ा डेरी संचालिका गायों के साथ
अहीर रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर दौंगड़ा अहीर में 36 बिरादरी की ऐतिहासिक महापंचायत, सर्वसमाज ने भरी हुंकार ********************************************** *********************************************** ********************************************** कनीना की आवाज। अहीर रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर रविवार को ऐतिहासिक गांव दौंगड़ा अहीर स्थित रजवाड़ा फोर्ट में 36 बिरादरी की एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, जयपुर, बहरोड़ तथा आसपास के अनेक क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे समाज की एकजुटता और जागरूकता का परिचय मिला। महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि अहीर समाज का देश की सेना और राष्ट्र सेवा में गौरवशाली योगदान रहा है। समाज लंबे समय से अहीर रेजिमेंट के गठन की मांग करता आ रहा है। इस मांग को लेकर खेड़की दौला सहित विभिन्न स्थानों पर भूख हड़ताल, धरना-प्रदर्शन और जनजागरण अभियान चलाए गए हैं तथा समाज आज भी पूरी मजबूती के साथ अपने अधिकार की आवाज बुलंद कर रहा है। महापंचायत में पूर्व सैनिकों और सैन्य अधिकारियों की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम में कैप्टन रतन सिंह, कैप्टन दलीप सिंह जावा, कैप्टन पुंशिका, कैप्टन लालाराम नागतिहाड़ी, सूबेदार मेजर धर्मदेव, आनरेरी कैप्टन हरिओम रेवाड़ी, हवलदार जय किशन तथा सूबेदार सूबे सिंह गुरुग्राम सहित अनेक पूर्व सैनिकों ने भाग लिया और अपने अनुभव साझा करते हुए अहीर रेजिमेंट गठन की मांग का समर्थन किया। अहीर रेजिमेंट समिति दौंगड़ा अहीर की ओर से प्रधान दलीप सिंह, कैप्टन महादेव सिंह, हेड क्लर्क बनी सिंह, कैप्टन पवन कुमार, सूबेदार सत्यप्रकाश, सूबेदार सतबीर, हवलदार कृष्ण कुमार यादव, सुरेंद्र सिंह, ओमप्रकाश एवं लालचंद साहब सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। महापंचायत में साध्वी पुष्पा आर्या, जलयुद्ध नायक रघु यादव, विजय सोमानी, डॉ. अभयराम, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सत्यवीर झुकिया, अनिल भगड़ाना, मोहित यादव (दिल्ली), दीपिका यादव (रेवाड़ी) तथा इंदु यादव (बधवाना) सहित विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि अहीर समाज ने देश की सुरक्षा और सैन्य परंपरा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए अहीर रेजिमेंट का गठन केवल एक मांग नहीं बल्कि समाज के सम्मान, गौरव और वीर सैनिकों के योगदान को उचित पहचान दिलाने का विषय है। इस अवसर पर अरुण यादव खेड़की दौला, राजेंद्र कमांडेंट, महेश शर्मा जयपुर, कप्तान शिवराज गिलोथ, ओमप्रकाश राजपूत, राव नरेंद्र यादव गुरुग्राम, एस.एस. यादव पालम विहार, कप्तान देशराज बेरावास, अमित यादव (उपाध्यक्ष एनएसयूआई बहरोड़), विनोद कुमार नांगल चौधरी, दिनेश यादव जयपुर, सूबेदार कृष्ण यादव जावा, कैलाश पालड़ी (पूर्व सरपंच) सहित अनेक सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। महापंचायत में कलवाड़ी, मुंडिया खेड़ा, अटाली, बेवल, भालखी, सिलारपुर, सीहमा, सुंदरह, बवानिया सहित आसपास के अनेक गांवों से आए लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान रजवाड़ा फोर्ट परिसर लोगों से खचाखच भरा रहा और पूरे आयोजन में सामाजिक एकता का माहौल देखने को मिला। महापंचायत के अंत में सर्वसमाज के लोगों ने एकजुट होकर अहीर रेजिमेंट गठन के समर्थन में जोरदार हुंकार भरी तथा संकल्प लिया कि जब तक अहीर रेजिमेंट का गठन नहीं हो जाता, तब तक यह संघर्ष शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। उपस्थित लोगों ने समाज की एकता, संगठन और अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। फोटो कैप्शन: दौंगड़ा अहीर स्थित रजवाड़ा फोर्ट में रविवार को अहीर रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर आयोजित 36 बिरादरी की विशाल महापंचायत में बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीण, महिलाएं, पूर्व सैनिक एवं सामाजिक प्रतिनिधि। फोटो कैप्शन 08: अहीर रेजिमेंट के लिए महापंचायत
आर्य समाज गाहड़ा में मासिक यज्ञ संपन्न, भजनों से गुंजायमान हुआ वेद मंदिर परिसर। ********************************************** *********************************************** ********************************************** कनीना की आवाज। वेद प्रचार मंडल एवं आर्य समाज गाहड़ा के तत्वावधान में रविवार को मासिक यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ किया गया। आर्य समाज के प्रधान शिक्षाविद रामेश्वर दयाल शास्त्री की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि यज्ञ समाज में शांति, शुचिता और आपसी सद्भाव का संदेश देता है। उन्होंने शिक्षा और संस्कारों के मेल पर बल देते हुए कहा की वेदों का ज्ञान ही मानव जीवन के कल्याण का सच्चा मार्ग है। नई पीढ़ी को आर्य समाज के सिद्धांतों और वैदिक संस्कृति से जोडऩा आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जिसमें पंडिता मनीषा आर्या ने ब्रह्मतत्व निभाया, यजमान के रूप में अनिल आर्य स्वदेशी नवनियुक्त वेद प्रचार मंडल के उप मंत्री व वैदिक पुरोहित पंडित रविन्द्र कुमार आर्य द्वारा पूर्ण विधि-विधान और वैदिक रीति-नीति से यज्ञ संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण और पावन आहुतियों से पूरा वातावरण भक्तिमय और सुगंधित हो उठा। श्रद्धा से यज्ञ करके यज्ञ कर्ताओं ने आत्मिक प्रसन्नता व संतुष्टि का अनुभव करते हुए आनंद की अनुभूति की। वेद प्रचार मंडल के जिला महेंद्रगढ़ के प्रधान धर्मवीर सिंह आर्य खातौली के कुशल नेतृत्व में महेंद्रगढ़ की पावन धरा पर वेदवाणी की जो अलख जगाई जा रही है, वह अद्वितीय है। कार्यकारिणी में अनिल आर्य स्वदेसी को घर-घर यज्ञ के प्रचार प्रसार के प्रयासों, निस्वार्थ सेवा भाव, समर्पण हेतु ऋषि दयानंद के सपनों को साकार करने की तड़प को देखते हुए उप मंत्री का दायित्व मिला है। आर्य समाज गाहड़ा द्वारा अगाध श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक पगड़ी व गायत्री पट्टका पहनाकर उनका सम्मान करते हुए स्वयं को गौरवान्वित और कृतज्ञता का अनुभव किया। अनिल आर्य स्वदेशी ने वेद प्रचार की मुहिम को तेज करने की बात कही। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य घर-घर तक वेदों का संदेश पहुंचाना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इस तरह के साप्ताहिक यज्ञों के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों को दूर किया जा सकता है। मास्टर जगन्नाथ ने युवाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा, आर्य समाज सामाजिक सुधार का एक सशक्त मंच है। युवाओं को आगे आकर इस पावन अभियान का हिस्सा बनना चाहिए ताकि एक राष्ट्रभक्त और संस्कारी समाज का निर्माण हो सके। यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात आर्य समाज की बहनों द्वारा अत्यंत मधुर और प्रेरणादायक वैदिक भजनों की प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा परिसर वैदिक लहरों से गुंजायमान हो गया। फोटो कैप्शन 07: गाहड़ा में यज्ञ करते हुए
राहत:मोहनपुर में लगी मीठे पानी की छबील -तृप्त हुए राहगीर ठंडा पानी पीकर ********************************************** *********************************************** ********************************************** कनीना की आवाज।गर्मी से राहत देने के लिए मीठे ठंडे पानी की छबील लगाने का सिलसिला जारी है। इन दिनों क्षेत्र में भयंकर गर्मी पड़ रही है। सुबह होते ही जैसे जैसे सूर्य आसमान में चढ़ता है वैसे ही गर्मी भी अपना तेवर दिखाने लगती है। इस समय क्षेत्र का तापमान भी 46 डिग्री पार कर चुका है। इसी बीच मंडी में कनीना-नारनौल सड़क मार्ग पर मोहनपुर गांव के युवाओं ने मीठे पानी की छबील लगाई गई। नारनौल और अटेली की तरफ जाने वाले राहगीरों को मीठा पानी पिला कर पुण्य कमाया। युवाओं ने सुबह 09 बजे से शाम 05 बजे तक राहगीरों को पानी पिलाया। इस मौके पर अमरजीत कोच, मोहित, हितेश रोहिल्ला, मोहित जोशी, निकेतन शर्मा, राहुल शर्मा, वीरेंद्र चौहान समस्त ग्राम वासी मौजूद रहे। फोटो कैप्शन 06: मीठे पानी की छबील लगाते हुए
विश्व दूध दिवस एक जून -डेयरी पालन कर गरीब व्यक्ति कमा सकता है रोटी रोजी-डा कांगड़ा ********************************************** *********************************************** ********************************************** कनीना की आवाज। दूध ऐसा भोजन है जो वर्ष भर तथा जीवन भर प्रयोग किया जाता है। दूध की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व दूध दिवस मनाया जाता है। विश्व दूध दिवस एफपीओ द्वारा 1 जून 2001 को मनाया गया था और हर वर्ष मनाया जाता है। जिला महेंद्रगढ़ में गेाय, भैंस एवं बकरी पाली जाती हैं जिनमें करीब 40 से 50 फीसदी दूध देती है और दूध के जरिए लोगों की आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है। कनीना क्षेत्र में जहां गाय भैंस की डेयरी ओ की संख्या आधा दर्जन है। प्रसिद्ध महिला डेरी संचालिका नीतू यादव ने बताया उनके पास 200 गायें हैं प्रतिदिन 1200 लीटर दूध डेरी में जाता है किंतु दूध के भाव कम हैं जिसके पीछे चारा एवं फीड महंगा होना है। चारा 40 रुपये किलो तक पहुंच जाता है या फिर पशुओं का फीड महंगा है। नकली दूध की भरमार है इसलिए दूध महंगा नहीं हो पाता। डेयरी यूनियन ने बार-बार यह बात सरकार समक्ष उठाई है किंतु समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि गरीबों के लिए डेरी पालन बहुत बेहतर धंधा है। जयपाल गुढ़ा निवासी का कहना है कि गाय पालकर बड़ा आनंद आता है और गायों की संख्या बढ़ाना उनका लक्ष्य है। दूध पर्याप्त मात्रा में देती है जिनसे घर का गुजर बसर ही नहीं बल्कि डेरी के लिए दूध उपलब्ध हो जाता है। जयपाल गुढ़ा डेयरी संचालक के पास गायें हैं तथा सैकड़ों लीटर दूध डेरियों में जा रहा। क्या कहते हैं डा. पशुपालन विभाग - राजकीय पशु चिकित्सालय के डा पवन कांगड़ा वीएस ने बताया एक गाय और भैंस करीब 20 बार ब्याती है परंतु दो तीन बार ब्याने के बाद ही दूध बढ़ता है बाद में दूध घटता चला जाता है। दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जाते हैं। डेरी पालन का धंधा करके गरीब व्यक्ति भी बेहतर आय ले सकता है। चारे के करने पड़ते हैं भंडार-- दूध के लिए महेंद्रगढ़ एवं रेवाड़ी जिले पशु पालक खेतों में जाकर देखें तो तूड़ी से भरे हुए कूप तथा कड़वी की छुरियां तथा छव्वा रखते हैं। जिनमें लंबे समय तक पशु चारा खराब नहीं होता। दूध प्राप्त करने के लिए किसान वर्षभर के पशुचारे का प्रबंध इन्हीं विधियों से करते आ रहे हैं। खरीफ फसल बतौर बाजरा उगाकर कड़बी प्राप्त करते हैं तो रबी फसल बतौर गेहूं और जौ की तूड़ी प्राप्त होती है। दोनों ही सूखे चारे में शामिल किए गए हैं। गौशालाएं हैं दूध का केंद्र- अकेले कनीना क्षेत्र में आधा दर्जन गौशालाएं हैं जिनमें कनीना, बुचावास, भोजावास, स्याणा, खरकड़ाबास आदि प्रमुख हैं। गौशालाओं में भी सूखे एवं हरे चारे का प्रबंध किया जाता है और विशेष प्रकार के शेड बनाए जाते हैं जहां वर्षभर का चारा सुरक्षित रखा जाता है। यहां दूध भी उपलब्ध हो पाता है। कनीना श्रीकृष्ण गौशाला के प्रधान भगत सिंह ने बताया कि उनके पास करीब 1500 गायों के लिए तूडी के भंडार हैं जहां से 100 मण के करीब तूड़ी प्रतिदिन गायों को परोसी जाती है और 50 गाय दूध दे रही हैं। समय समय पर वे गायों के लिए तूड़ी तथा कड़वी खरीदते हैं ताकि पशुओं का गुजारा चल सके। किसान कृष्ण सिंह, महेंद्र सिंह, राम अवतार, सूबे सिंह, राजवीर सिंह, महिपाल आदि ने बताया कि वे पशु पालते हैं। पशुओं के लिए चारा खेतों से उपलब्ध हो जाता है। इस प्रकार पशुओं से दूध, घी एवं मक्खन आदि परिवार के लिए उपलब्ध हो जाता है ताकि कहीं से दूध खरीदना न पड़े। कहावत है हरियाणा पर लागू- ऐसे में देसां में देस हरियाणा जित दूध दही का खाना वाली कहावत इसी बात से चरितार्थ होती है कि सबसे अधिक दूध,घी एवं दही आदि इस क्षेत्र में पशुओं से प्राप्त होता है जो किसान हैं। किसानी एवं पशुपालन दोनों का निर्वहण करते हुए एक पंथ दो काज की कहावत चरितार्थ करते हुए जिला महेंद्रगढ़ एवं रेवाड़ी पशुपालक नाम कमा रहे हैं। यहां देसी नस्ल की गाय और मुर्रा नस्ल की भैंस से बहुत प्रसिद्ध है। प्रसिद्ध है घी एवं दूध- इन जिलों में पशुओं से विशेषकर देसी नस्ल की गायों एवं भैंसों का दूध, मक्खन, घी, मट्ठा, छाछ आदि दूर दराज से विख्यात है। फोटो कैप्शन 05: नीतू डेरी पालन करने वाली महिला डेरी समक्ष। साथ में डा पवन कांगड़ा
Saturday, May 30, 2026
अगिहार से इतिहास के प्रवक्ता राजेंद्र कटारिया सेवानिवृत्ति ************************************************ ************************************************ ************************************************ कनीना की आवाज। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में इतिहास के प्रवक्ता और ग्राम सिगड़ी हरिजन निवासी राजेंद्र सिंह कटारिया आज अपनी 30 साल और 6 महीने की सेवा पूरी करके सेवानिवृत्त हो गए विद्यालय के प्रांगण में आज उनके सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया गया विदाई समारोह में जिला प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर , तथा स्टेट अवार्ड विजेता दिलबाग सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे ,खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश यादव विशिष्ट अतिथि तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य पूनम यादव ने की,कार्यक्रम का मंच संचालन विद्यालय में अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक ने किया सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रस्तुतीकरण विद्यालय की संस्कृत प्रवक्ता कैलाश देवी ने किया इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्रवक्ता को पगड़ी पहनकर तथा भेंट देकर विद्यालय परिवार, ग्राम वासियों, विभिन्न विद्यालयों से पधारे अध्यापक, प्रवक्ता,प्राचार्य तथा विद्यार्थियों ने सम्मानित किया इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं कोमल, नेहा,नव्या, नरगिस,शारदा कल्पना,पूजा, अर्चना,मुस्कान तथा साक्षी सहित अनेक विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए अपने कार्यकाल में उन्होंने खातीवास,बुचावास ,ऊष्मापुर उन्हाणी,तलवाना बाछोद तथा अगिहार स्कूलों में अपनी सेवाएं दी इस कार्यक्रम में पाथेड़ा के प्राचार्य कृष्ण कुमार,प्रवक्ता सुरेश कुमार, राजेश दहिया, करीरा के प्राचार्य रामस्वरूप, प्रवक्ता फकीरचंद , समाजसेवी एवं रिटायर्ड संस्कृत अध्यापक निर्मल सिंह राजकीय उच्च विद्यालय उन्हाणी के हेड मास्टर शुभकरण यादव, रणधीर सिंह, विद्यालय के प्रवक्ता अजय बंसल निशा जांगड़ा वंदना जांगड़ा धर्मेंद्र डीपी राकेश कुमार शशि कुमारी पूनम कुमारी,मुख्य शिक्षक रतनलाल, राजेंद्र सिंह की धर्मपत्नी सुमन देवी,उनके चाचा ओमप्रकाश कटारिया, भाई दलीप सिंह कटारिया,सुनील कुमार कटारिया सहित उनके परिवार के अनेक सदस्य तथा ग्राम सिगड़ी तथा अगिहार के गणमान्य लोग उपस्थित रहे फोटो कैप्शन 03: संबंधित है
उप स्वास्थ्य केंद्र स्याना में लिंगानुपात जागरूकता बैठक आयोजित -लिंगानुपात सुधार को चुनौती मान स्वास्थ्य कर्मियों ने किया संकल्प, गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीकरण और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर दिया जोर ************************************************ ************************************************ ************************************************ कनीना की आवाज। उप स्वास्थ्य केंद्र सयाना में गुरुवार को लिंगानुपात जागरूकता अभियान के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएचसी सेहलंग की एसएमओ डा. प्रभा यादव ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य समाज में घटते लिंगानुपात के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इसे सामाजिक चुनौती के रूप में स्वीकार करना तथा गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीकरण को सुनिश्चित करना रहा। बैठक में एमपीएचडब्ल्यू भूपेंद्र, एएनएम प्रियंका, ब्लॉक आशा कोऑर्डिनेटर इंद्रजीत, सभी आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा ग्राम सयाना के अनेक गणमान्य ग्रामीण उपस्थित रहे। इनमें राजेंद्र, दिनेश, विनोद, आशा, मुकेश एवं सुनीता प्रमुख रूप से शामिल रहे। इस अवसर पर डा. प्रभा यादव ने आशा कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र की प्रत्येक गर्भवती महिला का गर्भावस्था के 10 सप्ताह के भीतर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें समय पर स्वास्थ्य सेवाओं एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि भ्रूण लिंग जांच एवं कन्या भ्रूण हत्या कानूनन दंडनीय अपराध हैं और समाज को इस कुप्रथा के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। डा. प्रभा यादव ने कहा कि घटता लिंगानुपात केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी गंभीर सामाजिक चुनौती है, जिसे सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संगठनों और आमजन की संयुक्त भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित लोगों से 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का आह्वान किया। बैठक में स्वास्थ्य कर्मियों ने घटते लिंगानुपात को एक गंभीर चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए इसे संतुलित और सम्मानजनक स्थिति में लाने के लिए कमर कसने का संकल्प लिया। सीएचसी सेहलंग की एसएमओ डा. प्रभा यादव के नेतृत्व में आशा एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर जागरूकता फैलाने, गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण करवाने तथा बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का संदेश घर-घर तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई। स्वास्थ्य कर्मियों ने दृढ़ संकल्प व्यक्त किया कि घटते लिंगानुपात को चुनौती मानते हुए वे लिंगानुपात को सम्मानजनक स्थिति में ले जाकर ही दम लेंगे। बैठक के दौरान ग्राम सयाना के बाबू राजेंद्र यादव ने भी ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बेटियों के सम्मान, समान अवसर और लिंगानुपात सुधार के लिए जागरूकता फैलाने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने समाज में लिंग समानता को बढ़ावा देने तथा लिंगानुपात सुधार अभियान को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया। बैठक का वातावरण जागरूकता, सामाजिक जिम्मेदारी और जन सहभागिता की भावना से ओत-प्रोत रहा। फोटो कैप्शन 04: संबंधित है
38 सालों की सेवा पूरी करके ओम प्रकाश करीरा सेवानिवृत्त ************************************************ ************************************************ ************************************************ कनीना की आवाज। हरियाणा ग्रामीण बैंक कनीना से 38 सालों की सेवा करके ओमप्रकाश भाटी करीरा निवासी सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनकी सेवानिवृत्ति में मैनेजर कीर्ति अग्रवाल ने गुलदस्ता भेंटकर स्वागत किया और उनकी विदाई की। उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश भाटी सदा ईमानदारी पर चले हैं और इन्होंने कभी कोई किसी से सदा ही सद्व्यवहारी रहे हैं। इनका कार्य सदा सराहनीय रहा है। इस मौके पर क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश कुमार, अजय करीरा, धर्मवीर ब्लॉक प्रधान, बजरंग एडवोकेट, केक भाटी ठेकेदार, श्रीकिशन बालकिशन वैद्य, सतेंद्र यादव ,आरके यादव पूर्व ब्रांच मैनेजर सहित भारी संख्या में गणमान्य जन उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन 01: ओमप्रकाश भाटी सेवानिवृत्ति पाते हुए
नशा तस्करों पर पुलिस का कड़ा प्रहार: स्मैक व गांजे के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, गाड़ी भी जब्त, 4.44 ग्राम स्मैक और 2 किलो गांजा बरामद। ************************************************ ************************************************ ************************************************ कनीना की आवाज। पुलिस अधीक्षक दीपक के कुशल नेतृत्व और सख्त दिशा-निर्देशों के तहत जिले भर में नशा तस्करों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज से नशे रूपी जहर को खत्म करना और अवैध धंधे में संलिप्त अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजना है। इसी कड़ी में नशा तस्करों पर कड़ा प्रहार करते हुए थाना शहर कनीना की पुलिस टीम को एक शानदार सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दो नशा तस्करों को नशीले पदार्थों (स्मैक और गांजा पत्ती) के साथ गिरफ्तार किया है तथा तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक कार को भी जब्त कर लिया है। मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि दिनांक 30 मई को थाना शहर कनीना की पुलिस टीम गश्त पर थी, तभी उन्हें एक गुप्त सूचना मिली कि विकास निवासी मालड़ा सराय और मनीष निवासी तलवाना अवैध रूप से नशीला पदार्थ बेचने का काम करते हैं। वे दोनों एक गाड़ी में नशीले पदार्थ के साथ रेवाड़ी की तरफ से मालड़ा सराय की ओर जा रहे हैं। इस पुख्ता सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने तुरंत शहर कनीना क्षेत्र में मेन रोड पर नाकाबंदी कर चेकिंग शुरू कर दी। कुछ समय पश्चात बताए गए नंबर की सफेद गाड़ी आती दिखाई दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए गाड़ी को रुकवाया और उसमें सवार दोनों व्यक्तियों को काबू कर लिया। पूछताछ में उन्होंने अपनी पहचान मनीष कुमार (चालक) और विकास के रूप में बताई। पुलिस ने मौके पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट को बुलाया, जिनकी मौजूदगी में दोनों व्यक्तियों और उनकी गाड़ी की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान विकास के पास से 30 पाउच अवैध स्मैक बरामद हुई, जिसका कुल वजन 4.44 ग्राम पाया गया। वहीं, गाड़ी की डिक्की की तलाशी लेने पर एक प्लास्टिक के कट्टे से भारी मात्रा में गांजा पत्ती बरामद हुई, जिसका कुल वजन 2 किलो 60 ग्राम था। पुलिस ने तुरंत प्रभाव से बरामद स्मैक, गांजा पत्ती और तस्करी में प्रयुक्त गाड़ी को कब्जे में लेकर सील कर दिया। इस मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना शहर कनीना में एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस द्वारा आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की गहनता से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे यह नशा कहां से लाते थे और किन-किन लोगों को सप्लाई करते थे। जिला पुलिस का आमजन को यह स्पष्ट संदेश है कि नशे के खिलाफ यह अभियान आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगा और किसी भी नशा तस्कर को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आरोपी मनोज के खिलाफ राजस्थान के थाना चिड़ावा में मुकदमा संख्या सन् 2013 में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में आरोपी काफी समय से पीओ चल रहा था। उसकी इसी फरारी को देखते हुए उस पर 5000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। सीआईए महेंद्रगढ़ की टीम ने अपने सूचना तंत्र को मजबूत करते हुए इस इनामी अपराधी को सफलतापूर्वक काबू कर लिया। आज दिनांक 20 मई को सीआईए महेंद्रगढ़ द्वारा आरोपी को पकडऩे के उपरांत, आगामी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु चिड़ावा (राजस्थान) पुलिस को सौंप दिया गया। फोटो 02: संबंधित है
विश्व धूम्रपान दिवस-31 मई धूम्रपान है मौत की निशानी-डा. जितेंद्र ************************************************ ************************************************ ************************************************ कनीना की आवाज। गुटका, पान, तंबाकू या फिर बीड़ी और सिगरेट इन सभी चीजों का नशा आपको मौत के मुंह में धकेल सकता है। विज्ञापनों और फिर तंबाकू और सिगरेट की डिब्बियों पर दी जाने वाली कितनी ही चेतावनियों बाद भी हजारों-लाखों लोगों की मौत तंबाकू के कारण होती है। भारत सहित दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जहां इस तंबाकू या फिर अफीम जैसे नशे के आदि लोगों की संख्या बढ़ रही है। तंबाकू या सिगरेट की लत शराब की लत से कई गुना हानिकारक और खतरनाक है। पूरी दुनिया में तंबाकू के कारण लगभग हर 6 सेकंड के अंदर एक व्यक्ति की मौत होती है। तंबाकू और धूम्रपान के कारण कई गंभीर बीमारियां जैसे- दिल का दौरा, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, अस्थमा, मुंह और फेफड़ों का कैसर आदि शामिल है। इसलिए बेहतरी इसी में है कि जितना जल्दी हो सके इस बुरी लत को छोड़ दें। इस संबंध में ने इस लत की जानकारी देते हुए कहा डा. जितेंद्र मोरवाल कनीना उप नागरिक अस्पताल बताते हैं कि- तंबाकू का सेवन हृदय को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करता है, हालांकि, पर्याप्त पानी का पीने से न केवल दिल को कई समस्याओं से बचाने में, बल्कि संपूर्ण सेहत को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। पानी की पर्याप्त मात्रा ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने और खून के थक्के बनने के खतरे को कम करती है। खून के थक्के बनना दिल का दौरा पडऩे का सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। डा. ओमप्रकाश योगाचार्य का कहना है कि व्यायाम और योग की मदद से तंबाकू की लत को छोडऩे में मदद मिल सकती है। अक्सर आपने देखा होगा कि आप जब ज्यादा परेशान या तनाव में होते हैं, तो आप ज्यादा सिगरेट या तंबाकू का सेवन करते हैं। लेकिन व्यायाम और योग आपके तनाव को कम करने में मदद करता है और जीवन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। व्यायाम आपकी तंबाकू की लत को छोडने में मदद कर सकता है। तंबाकू या धूम्रपान के नियमित सेवन से शरीर में निकोटीन जैसे विषैले यौगिकों का जमाव होता है। इस व्यसन का त्याग करने से इंसान की जिंदगी बढ़ सकती है वरना अनेक रोगों से पीडि़त हो जाएगा। फोटो कैप्शन: डा. जितेंद्र मोरवाल
31 मई विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष- तंबाकू अनेकों रोगों का कारण, तंबाकू सेवन छोड़कर अब हैं कई जन खुश ************************************************ ************************************************ ************************************************ कनीना की आवाज। तंबाकू एक जानलेवा पदार्थ है जिसे लत डालने वाला पदार्थ कहते हैं। जो एक इसका प्रयोग शुरू कर दे तो लंबे समय तक इंसान उससे छुटकारा नहीं पा सकता। यहां तक कि अनेक बीमारियां शरीर में घर कर जाती है। कैंसर जिनमें से एक हैं। यदि आत्मविश्वास और जिजीविषा हो तो तंबाकू की लत से मुक्ति पाई जा सकती है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर कुछ कनीना क्षेत्र के ऐसे व्यक्तियों से बात हुई जिन्होंने यह बुराई अब छोड़ दी है और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं। बहुत से व्यक्तियों से तंबाकू के विषय में चर्चा की तो उन्होंने तंबाकू को छोडऩेे के लाभ गिनाये। आज वो व्यक्ति दूसरों को शिक्षा दे रहे हैं जो कभी स्वयं बीड़ी सिगरेट पीते थे। सुरेश कुमार कनीना का कहना है कि 25 वर्ष की उम्र तक खूब सिगरेट एवं बीड़ी पीते थे किंतु जब से उन्हें इसके शरीर पर पडऩे वाले घातक प्रभावों की जानकारी मिली तब से उन्होंने पूर्ण रूप से त्याग दिया। उनकी उम्र 49 वर्ष और बीड़ी सिगरेट नहीं पीते बल्कि दूसरे पीने वालों को भी शिक्षा दे रहे हैं। कंवर सैन वशिष्ठ अध्यापक नेता है जो कभी बीड़ी सिगरेट के आदि होते थे। लंबे समय तक इन्होंने बीड़ी सिगरेट की धुआं हवा में उड़ाई। तत्पश्चात उन्होंने इनकी हानियों के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की। उनकी उम्र करीब 70 वर्ष है। वर्ष 2008 से बीड़ी सिगरेट का त्याग किए हुए हैं। सिगरेट की हानियों के विषय में विशेष रूप से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। उन्हें कोई सिगरेट पीने वाला मिलता है तो स्पष्ट कहते हैं कि इसका त्याग ज्यादा बेहतर होगा। दूसरों को बेहतर अच्छे पद चिन्हों पर चलने की प्रेरणा दे रहे हैं और किसी प्रकार की लत से दूर रहने की प्रेरणा दे रहे हैं। मामराज अग्रवाल की उम्र 67 साल है और 10 वर्ष पहले उन्होंने बीड़ी सिगरेट का त्याग कर दिया था। वे परचून की दुकान चलाते हैं किंतु बीड़ी सिगरेट के कट्टर विरोधी हो गए हैं। उनका कहना है कि बीड़ी सिगरेट के कारण उन्हें एक बार सभा में एहसास हुआ जब उन्हें खांसी आ रही थी। सभी लोग उनकी तरफ देख रहे थे। तब से उन्हें महसूस हुआ कि इस बीड़ी सिगरेट के कारण से आज इतना जलील होना पड़ रहा है और उन्हें सदा सदा के लिए बीड़ी सिगरेट का त्याग कर दिया। वे अब दूसरों को शिक्षा दे रहे हैं कि बीड़ी सिगरेट आदि प्रयोग न करे। उधर वेद प्रकाश का कहना है कि बीड़ी सिगरेट आदि लत डालने वाले पदार्थ होते जिनमें निकोटीन जहर पाया जाता है जो हमारे फेफड़ों को बर्बाद कर ही देता हैं वही अनेकों बीमारियां शरीर में घर कर जाती है जिनमें उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, कैंसर आदि प्रमुख है। उन्होंने कहा कि यदि इंसान समय रहते नहीं चेते तो भयंकर परिणाम बीड़ी सिगरेट पीने वालों को वहन करने पड़ते हैं। उन्होंने इस प्रकार के पदार्थों का अविलंब त्याग करने की लोगों से अपील की है ताकि वे सुखी और संपन्न जीवन जी सके। फोटो कैप्शन: डा वेद प्रकाश, कंवर सेन वशिष्ठ, मामराज अग्रवाल, सुरेश कुमार
31 मई विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष- सिगरेट से ज्यादा खतरनाक है हुक्का-डा. यादव ************************************************ ************************************************ ************************************************ कनीना की आवाज। सिगरेट से ज्यादा खतरनाक हुक्का है क्योंकि हुक्का बार में जब कोई हुक्का पीता है तो कम से कम 30 मिनट तक हुक्का पीता है। 30 मिनट तक लगातार कार्बन मोनोआक्साइड शरीर के अन्दर जाता है जो कि सिगरेट से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। हुक्का पीने से हार्ट की ब्लड सेल और वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है। ये विचार डा. होशियार सिंह यादव के हैं। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं का मानना है कि कार्बन मोनोआक्साइड शरीर के लिए जहर जैसा काम करता है। हुक्का पीने वालों में एक्सरसाइज करने की क्षमता लगातार घटती है। हुक्का पीने वालों का फेफड़ा जल्द कमजोर होता है जो कि कार्बन मोनोआक्साइड के साथ अन्य विषैले कणों के कारण होता है। हुक्का में उपयोग किये जाने वाले निकोटीन पदार्थ के साथ वाष्पशील कार्बननिक रसायन, पालीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन, एक्रोलिन, लेड, कैडमियम और आर्सेनिक जैसे हानिकारक रसायन शरीर के अंदर जाते हैं जो हार्ट को बहुत ही बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। उन्होंने एक पत्रिका में प्रकाशित शोध का हवाला देते हुए बताया कि हुक्का पीना सिगरेट से भी ज्यादा खतरनाक होता है। हुक्के में बहुत ज्यादा मात्रा में विषैले पदार्थ लंबे समय तक शरीर में जाते हैं जो हार्ट और फेफड़ों के लिए खतरनाक है। ई-सिगरेट अधिक पीने से बढ़ता है मुंह के कैंसर का खतरा। सिगरेट के तंबाकू से हुक्का का तंबाकू ज्यादा खतरनाक होता है। क्योंकि हुक्का के तंबाकू को बनाने के लिए कई तरह के फ्लेवर और रंग का उपयोग किया जाता है जो कई तरह के कैमिकल को बनाते हैं। फ्लेवर वाले तंबाकू से लेड और खतरनाक विषैले रसायन बनते हैं जो हार्ट के लिए खतरनाक साबित होते हैं। हुक्का पाइप में तम्बाकू सिगरेट से कम जहरीला नहीं होता। हुक्के में पानी धुएं को ठंडा करता है, लेकिन यह धुएं में मौजूद विषाक्त पदार्थों को फिल्टर नहीं करता। हुक्का पीने वाले सिगरेट पीने वालों की तुलना में ज़्यादा तम्बाकू का धुआं सांस के साथ अंदर ले सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक हुक्का पीने का सत्र एक घंटे या उससे ज़्यादा समय तक चल सकता है। हुक्का के धुएँ में हानिकारक रसायनों की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है। इनमें टार, कार्बन मोनोआक्साइड, भारी धातुएँ और कैंसर पैदा करने वाले रसायन शामिल हैं जिन्हें कार्सिनोजेन्स कहा जाता है। दरअसल, हुक्का पीने वाले सिगरेट पीने वालों की तुलना में ज़्यादा कार्बन मोनोआक्साइड और धुएँ के संपर्क में आते हैं। हुक्का पीने से फेफड़े, मूत्राशय, पेट, ग्रासनली और मौखिक कैंसर,दिल की बीमारीएवं अन्य गंभीर स्थितियां, जैसे फेफड़ों के रोग और कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता पैदा होते हैं। हुक्का पीने से निकोटीन की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है, जैसे सिगरेट पीने से होती है। निकोटीन तम्बाकू में मौजूद एक आदत बनाने वाला रसायन है जो व्यक्ति को धूम्रपान करने के लिए मजबूर करता है। हुक्के का धुआं दूसरों के धुएं से जुड़े खतरे पैदा करता है। गर्भवती महिलाओं द्वारा हुक्का पीने से जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं का जन्म होता है। गंदे पाइप का इस्तेमाल करना या दूसरे धूम्रपान करने वालों के साथ पाइप साझा करना जोखिम भरा है। इससे फ़्लू, क्षय रोग, हरपीज, हेपेटाइटिस हो सकते हैं। नए इलेक्ट्रानिक हुक्के, जिन्हें ई-हुक्का कहा जाता है, वेपिंग डिवाइस हैं। वे एक तरल पदार्थ को वाष्प में गर्म करने के लिए बैटरी का उपयोग करते हैं, जिसे उपयोगकर्ता सांस लेते हैं। तरल पदार्थ निकोटीन और स्वाद के साथ या बिना आ सकता है। ई-हुक्का के स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध अभी भी शुरुआती चरण में है। लेकिन ई-हुक्का सहित वेपिंग डिवाइस का उपयोग अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है। और किसी भी रूप में तंबाकू का उपयोग किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं है। फोटो कैप्शन: डाक्टर होशियार सिंह यादव
गाड़ी ने मोटरसाइकिल सवारों को मारी टक्कर, घायल, अस्पताल में एक ने तोड़ा दम - मामला दर्ज ************************************************ ************************************************ ************************************************ कनीना की आवाज। कनीना में करीरा रोड़ के पास एक सड़क हादसे में दो युवक घायल हो गए। अस्पताल में मनीष नामक युवक की मौत हो गई जबकि दूसरे को चोटें आई। गोविंदा कोटिया निवासी ने मामला दर्ज करवाया है। गोविंदा ने पुलिस में बताया कि 28 मई को उनका भतीजा मनीष किसी कार्य से कनीना गया था लेकिन देरी से घर नहीं लौटा तो फोन करके पूछा। मनीष ने बताया कि वह हर्ष कोटिया के साथ किसी काम से कनीना आया हुआ हूं। बाद में करीरा गांव से एक व्यक्ति का फोन आया कि आपका भतीजा मनीष का करीरा- कनीना सड़क मार्ग के पास दुर्घटना हो गई है। उसे सरकारी अस्पताल में उसे पहुंचाया गया है। जब गोविंदा अस्पताल पहुंचा तो डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। गोविंद ने बताया कि मनीष और हर्ष मोटरसाइकिल पर सवार होकर करीरा से कनीना की तरफ आ रहे थे। हर्ष मोटरसाइकिल चला रहा था। तभी करीरा से कनीना की तरफ एक चालक तेज रफ्तार से गाड़ी चलाता आया और उसने मोटरसाइकिल सवारों को टक्कर मार दी, दोनों गिर गए और वो घायल हो गए। मौके पर मौजूद बृजेश करीरा ने पुलिस को सूचित किया। एम्बुलेंस मौके पर आई और दोनों को अस्पताल भर्ती करवाया जहां डाक्टरों ने मनीष को मृत घोषित कर दिया। गोविंदा की शिकायत पर गाड़ी चालक के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है।
ध्यान से होती है सुख व शान्ति की अनुभूति-डा. ओमप्रकाश ************************************************ ************************************************ ************************************************ कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव नांगल मोहनपुर निवासी एवं विदेशों तक योग की शिक्षा देने वाले ओम योग संस्थान के डा. ओमप्रकाश योगिराज ध्यान का अर्थ है मन को किसी एक विचार, वस्तु या लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित करना। यह जागरूकता और मानसिक शांति की एक अवस्था है, जिसमें चित्त वर्तमान में स्थित होता है और विचारों का प्रवाह शांत होने लगता है। इसे गहराई से समझने के लिए मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं। सामान्य अर्थ (एकाग्रता)साधारण शब्दों में ध्यान का मतलब किसी काम या बात पर अपना पूरा मन लगाना या विचार करना है। जबकि भारतीय अध्यात्म और योग में ध्यान केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं है। यह बाहरी दुनिया से हटकर अपने भीतर लौटने की अवस्था है। इसमें व्यक्ति साक्षी भाव से स्वयं के विचारों और श्वास को देखता है, जिससे उसे परम शांति और आनंद की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि ध्यान तनाव हार्मोन को कम करके मानसिक शांति देता है। नियमित अभ्यास से कार्य करने की क्षमता और याददाश्त बढ़ती है। क्रोध और अवसाद से मुक्त होकर सकारात्मक रूप से प्रतिक्रिया करने में मदद करता है। महर्षि पतंजलि के योगसूत्र में ध्यान भी एक सोपान है। चित्त को एकाग्र करके किसी एक वस्तु पर केन्द्रित कर देना ध्यान कहलाता है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि भगवान का ध्यान करते थे। ध्यान की अवस्था में ध्यान करने वाला अपने आसपास के वातावरण को तथा स्वयं को भी भूल जाता है। ध्यान करने से आत्मिक तथा मानसिक शक्तियों का विकास होता है। जिस वस्तु को चित में बांधा जाता है उस में इस प्रकार से लगा दें कि बाह्य प्रभाव होने पर भी वह वहां से अन्यत्र न हट सके, उसे ध्यान कहते है। ध्यान से बहुत से मेडिकल एवं मनोवैज्ञानिक लाभ होते हैं जिनमें बेहतर स्वास्थ्य, शरीर की रोग-प्रतिरोधी शक्ति में वृद्धि, रक्तचाप में कमी,तनाव में कमी,स्मृति-क्षय में कमी, वृद्ध होने की गति में कमी,उत्पादकता में वृद्धि। मन शान्त होने पर उत्पादक शक्ति बढ़ती है, लेखन आदि रचनात्मक कार्यों में यह विशेष रूप से लागू होता है। ध्यान से हमें अपने जीवन का उद्देश्य समझने में सहायता मिलती है। इसी तरह किसी कार्य का उद्देश्य एवं महत्ता का सही ज्ञान हो पाता है।छोटी-छोटी बातें परेशान नहीं करती, मन की यही प्रकृति (आदत) है कि वह छोटी-छोटी अर्थहीन बातों को बड़ा करके गंभीर समस्याओं के रूप में बदल देता है। ध्यान से हम अर्थहीन बातों की समझ बढ़ जाती है; उनकी चिन्ता करना छोड़ देते हैं; सदा बड़ी तस्वीर देखने के अभ्यस्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में ऋषि मुनि और संत लोग ध्यान लगाकर अपने आराध्य देव के दर्शन प्राप्त करते थे और उनसे अपने समस्या का हल भी पुछा करते थे , यह आज के समय में भी संभव है। फोटो कैप्शन: डा. ओमप्रकाश योगीराज
Friday, May 29, 2026
नौतपा में मिली राहत दूसरे दिन भी हुई बूंदाबांदी, गुरुवार को हुई थी 8 एमएम वर्षा -पेड़ों पर आई आब ******************************************** ******************************************** ******************************************** कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में शाम के समय शुक्रवार को तेज हवाएं चलने के बाद वर्षा हुई। गुरुवार की शाम को कनीना क्षेत्र में 8 एमएम वर्षा रिकार्ड की गई। शुक्रवार को समाचार लिखे जाने तक बूंदाबांदी होने का सिलसिला जारी था। आने वाले समय में कुछ और वर्षा होने के आसार बने हुए हैं। जहां नौतपा की गर्मी से जीना मुहाल हो गया था वहां अब हल्की वर्षा से राहत मिली है। पेड़ पौधे सूखने के कगार पर पहुंच गए थे उनको भी अब लाभ मिलेगा। पेड़ों पर अब आब गई है। वर्षा का इंतजार किसान इंतजार रहे थे क्योंकि खेतों में खाद बिखेर दिया है और खरीफ फसल की बिजाई और जुताई के लिए तैयारी चल रही है। वर्षा होने के बाद जुताई में तेजी आ गई आ जाएगी। किसान तेजी से खेतों में हल चलाएंगे तत्पश्चात बीज बोएंगे। इस क्षेत्र में बाजार और ग्वार सबसे अधिक उगाया जाता है। इसके बाद कपास की खेती की जाती है। किसान प्रसन्नचित है और अभी इंतजार करेंगे ताकि वर्षा हो जाए और खेतों की जुताई शुरू हो जाए। जुताई के बाद भी बिजाई से पहले वर्षा का इंतजार करेंगे। कुछ गांवों में ओले भी गिरे हैं। फोटो कैप्शन 06: कनीना क्षेत्र में होती हुई वर्षा
38 साल की सेवा करके हुए सेवानिवृत, कान्हा सिंह धर्मशाला में हुआ भव्य विदाई समारोह ******************************************** ******************************************** ******************************************** कनीना की आवाज। कनीना में जल विभाग के कर्मचारी वेद पाल तंवर शुक्रवार को सेवा निवृत हुए । उन्होंने कुल 38 साल 06 महीने की सेवा विभाग को दी। वे मूल रूप से गांव पाथेड़ा के रहने वाले है । और हरियाणा के विभिन्न स्थानों पर सेवा दी। सबसे पहले कच्चे कर्मचारी के रूप में 1987 में कार्य शुरू किया। 1995 तक होडल रहने के बाद 1996 में कनीना आए।1993 में रेगुलर होने के बाद से कनीना में ही सेवा देने के बाद सेवानिवृत हुए । आल हरियाणा पी डब्लू डी मैकेनिकल 681 ब्रांच कनीना के प्रधान के के पूनिया ने बताया कि वेदपाल अपने कार्य में निरंतर कार्य करने वाले और जुझारू इंसान थे। और कार्य काल में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम किया । इस मौके पर कनिष्क अभियंता पवन , नारनौल ब्रांच प्रधान दीपक सैंडल , कोसली प्रधान हंसराज, महेंद्र गढ़ प्रधान सुरेंद्र फौजी, वेद प्रकाश फिटर,जसवंत मास्टर, सचिन , कुलदीप, देव प्रकाश ,दीपक बडोली,कृष्ण पुनिया,संजय पंडित, कंवर सिंह, प्रधान नरेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन 09:वेदपाल तंवर की सेवानिवृत्ति पर कार्यक्रम आयोजित करते हुए
ध्यान से होती है सुख व शान्ति की अनुभूति-डा. ओमप्रकाश ******************************************** ******************************************** ******************************************** कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव नांगल मोहनपुर निवासी एवं विदेशों तक योग की शिक्षा देने वाले ओम योग संस्थान के डा. ओमप्रकाश योगिराज ध्यान का अर्थ है मन को किसी एक विचार, वस्तु या लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित करना। यह जागरूकता और मानसिक शांति की एक अवस्था है, जिसमें चित्त वर्तमान में स्थित होता है और विचारों का प्रवाह शांत होने लगता है। इसे गहराई से समझने के लिए मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं। सामान्य अर्थ (एकाग्रता)साधारण शब्दों में ध्यान का मतलब किसी काम या बात पर अपना पूरा मन लगाना या विचार करना है। जबकि भारतीय अध्यात्म और योग में ध्यान केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं है। यह बाहरी दुनिया से हटकर अपने भीतर लौटने की अवस्था है। इसमें व्यक्ति साक्षी भाव से स्वयं के विचारों और श्वास को देखता है, जिससे उसे परम शांति और आनंद की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि ध्यान तनाव हार्मोन को कम करके मानसिक शांति देता है। नियमित अभ्यास से कार्य करने की क्षमता और याददाश्त बढ़ती है। क्रोध और अवसाद से मुक्त होकर सकारात्मक रूप से प्रतिक्रिया करने में मदद करता है। महर्षि पतंजलि के योगसूत्र में ध्यान भी एक सोपान है। चित्त को एकाग्र करके किसी एक वस्तु पर केन्द्रित कर देना ध्यान कहलाता है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि भगवान का ध्यान करते थे। ध्यान की अवस्था में ध्यान करने वाला अपने आसपास के वातावरण को तथा स्वयं को भी भूल जाता है। ध्यान करने से आत्मिक तथा मानसिक शक्तियों का विकास होता है। जिस वस्तु को चित में बांधा जाता है उस में इस प्रकार से लगा दें कि बाह्य प्रभाव होने पर भी वह वहां से अन्यत्र न हट सके, उसे ध्यान कहते है। ध्यान से बहुत से मेडिकल एवं मनोवैज्ञानिक लाभ होते हैं जिनमें बेहतर स्वास्थ्य, शरीर की रोग-प्रतिरोधी शक्ति में वृद्धि, रक्तचाप में कमी,तनाव में कमी,स्मृति-क्षय में कमी, वृद्ध होने की गति में कमी,उत्पादकता में वृद्धि। मन शान्त होने पर उत्पादक शक्ति बढ़ती है, लेखन आदि रचनात्मक कार्यों में यह विशेष रूप से लागू होता है। ध्यान से हमें अपने जीवन का उद्देश्य समझने में सहायता मिलती है। इसी तरह किसी कार्य का उद्देश्य एवं महत्ता का सही ज्ञान हो पाता है।छोटी-छोटी बातें परेशान नहीं करती, मन की यही प्रकृति (आदत) है कि वह छोटी-छोटी अर्थहीन बातों को बड़ा करके गंभीर समस्याओं के रूप में बदल देता है। ध्यान से हम अर्थहीन बातों की समझ बढ़ जाती है; उनकी चिन्ता करना छोड़ देते हैं; सदा बड़ी तस्वीर देखने के अभ्यस्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में ऋषि मुनि और संत लोग ध्यान लगाकर अपने आराध्य देव के दर्शन प्राप्त करते थे और उनसे अपने समस्या का हल भी पुछा करते थे , यह आज के समय में भी संभव है। फोटो कैप्शन: डा. ओमप्रकाश योगीराज
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जिला महेंद्रगढ़ सहित प्रदेश को दी 100 करोड़ की स्वास्थ्य सौगातें -स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की मौजूदगी में पंचकूला से 9 बड़ी परियोजनाओं का वर्चुअल शुभारंभ ******************************************** ******************************************** ******************************************** कनीना की आवाज। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को पंचकूला में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम से वर्चुअल माध्यम से जिला महेंद्रगढ़ सहित प्रदेश को 100 करोड़ से अधिक की 9 परियोजनाओं का पंचकूला से वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव भी मौजूद थी। वहीं नारनौल के नागरिक अस्पताल में स्थानीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं नारनौल के विधायक ओम प्रकाश यादव मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे तथा उन्होंने इन परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास किया। इस अवसर पर विधायक ओम प्रकाश यादव ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर कार्यरत है और इन जनकल्याणकारी परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से स्वास्थ्य प्रणाली अत्यधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि इन नई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वस्थ नारी सशक्त परिवार का जो नारा दिया था उसी के अनुरूप प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार निरोगी हरियाणा का सपना साकार करने में लगी है। उन्होंने कहा कि अटेली सीएचसी को वेदांता अस्पताल द्वारा गोद लेने का फैसला सराहनीय है। इस अवसर पर एडीसी तरुण कुमार पावरिया, डीएसपी भारत भूषण, सीएमओ डॉ अशोक कुमार, महर्षि च्यवन राजकीय मेडिकल कॉलेज के निदेशक डा. बृजेंद्र सिंह ढिल्लो, डा. आशा शर्मा, नगर परिषद की चेयरपर्सन कमलेश सैनी तथा पूर्व चेयरमैन जेपी सैनी के अलावा अन्य गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे। सीएम ने महेंद्रगढ़ जिले को दी ये बड़ी सौगातें- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की मौजूदगी में पंचकूला से वर्चुअल माध्यम से जिला महेंद्रगढ़ को कई स्वास्थ्य परियोजनाओं की सौगात दी। सीएम ने जिला नागरिक अस्पताल नारनौल में स्वस्थ नारी, स्वस्थ परिवार क्लिनिक का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और सुलभ बनाने के लिए राज्य स्तरीय टेली-ईसीजी सेवा का भी शुभारंभ किया। ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत स्वास्थ्य ढांचा देने के लिए तिगरा, बिहाली, बजाड़, सिहोर और स्याणा में नवनिर्मित उप स्वास्थ्य केंद्रों का उद्घाटन कर उन्हें जनता को समर्पित किया गया। इसके अलावा आमजन को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला नागरिक अस्पताल नारनौल में अमृत फार्मेसी स्टोर की आधारशिला भी रखी गई। इन सभी नई और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के शुरू होने से महेंद्रगढ़ जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतरीन इलाज मिल सकेगा। अमृत फार्मेसी की स्थापना से मरीजों को बेहद किफायती दरों पर जीवन रक्षक दवाएं मिलेंगी, जिससे गरीब व मध्यम वर्ग के परिवारों का चिकित्सा खर्च कम होगा। कोरियावास मेडिकल कॉलेज में अब मुफ्त डायलिसिस--- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को पंचकूला में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम से वर्चुअल माध्यम से महर्षि च्यवन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं राव तुला राम अस्पताल कोरियावास में नवनिर्मित अत्याधुनिक डायलिसिस यूनिट का विधिवत उद्घाटन कर जनता को समर्पित किया। राज्य स्तर के इस कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव भी पंचकूला में मौजूद थी। मेडिकल कॉलेज में लगाई गई बड़ी एलइडी के जरिए नागरिकों ने इस लाइव कार्यक्रम को देखा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को उसके घर के नजदीक ही विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और यह नई डायलिसिस यूनिट इसी दिशा में एक और मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि महर्षि च्यवन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं राव तुला राम अस्पताल कोरियावास (नारनौल) के द्वितीय तल पर इस आधुनिक डायलिसिस यूनिट की स्थापना से अब जिला महेंद्रगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के किडनी से पीडि़त मरीजों को डायलिसिस के लिए दिल्ली, जयपुर या गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनका कीमती समय व पैसा दोनों बचेगा। संस्थान के निदेशक डा. बृजेंद्र सिंह ढिल्लों ने बताया कि इस डायलिसिस यूनिट में उच्च गुणवत्ता वाली मशीनें और विशेषज्ञ स्टाफ तैनात किए गए हैं ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेज और चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होने से समाज के गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा, जिससे सरकार के स्वस्थ हरियाणा-समृद्ध हरियाणा के संकल्प को नई ताकत मिलेगी। फोटो कैप्शन 07 व 08: स्वास्थ्य परियोजनाओं के वर्चुअल उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का लाइव संबोधन सुनते मुख्य अतिथि विधायक ओम प्रकाश यादव व अन्य।
22वी खाटू श्याम यात्रा पूर्णं - श्री श्याम परिवार दीवाना संकीर्तन मंडल कनीना की ओर से करवाई गई नि:शुल्क यात्रा ******************************************** ******************************************** ******************************************** कनीना की आवाज। कनीना से खाटू श्याम की 22वीं निशुल्क बस यात्रा शाम 5 बजे पूर्ण हो गई। शुक्रवार को सुबह करीब 5 बजे 49 भक्तों को लेकर कनीना के खाटू श्याम मंदिर के समक्ष से बस रवाना हुई थी। जिसमें भक्तों को दो बार नाश्ता, खाना, चाय, पानी आदि निशुल्क दी जाती है। विस्तृत जानकारी देते हुए प्रधान मनोज सिंगला ने बताया कि 22वीं यात्रा सकुशल पूर्ण हो गई है। यात्रा में भक्तों को आना जाना, खाना पीना सब कुछ मुफ्त प्रदान किया जाता है। रितिक, सौरभ गुप्ता, साहिल गोयल, पीयूष, सतपाल आदि सेवादार के बतौर चलते जो पानी, चाय आदि की सुविधा प्रदान करते हैं। जब भक्त वापस कनीना श्याम मंदिर पहुंचने हैं तो उनका एक ड्रा निकाला जाता है जिसमें एक भक्त को बाबा की छवि देकर सम्मानित किया जाता है। फोटो कैप्शन 04: भक्त को बाबा की छायाचित्र भेंट करते हुए
नरेंद्रगिरि कर रहे हैं 84 धूणी तपस्या ******************************************** ******************************************** ******************************************** कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव धनौन्दा में बाबा नरेन्द्रगिरी महाराज द्वारा गत 14 मई से की जा रही 84 धूनी तपस्या आसपास के गांवों के श्रद्धालुओं के लिए धर्म और आस्था का केन्द्र बनी हुई है। भीषण गर्मी, लू और तेज धूप के बावजूद धनौन्दा, खरकड़ा बास, झाड़ली, छिथरोली, खेड़ी तलवाना, सिहोर, नौताना, सेहलंग, उन्हाणी, अगिहार, पाथेड़ा, कैमला आदि आस-पास के गांवों के ग्रामीण नर-नारी व श्रद्धालु भारी संख्या में तपस्या स्थल पर पहुंचकर भजन कीर्तन, शब्द, महिमा गुणगाण और धूणे की परिक्रमा कर रहे हैं। ग्रामीण पिताम्बर प्रधान रविन्द्र, रमेश हलवाई, सुरेन्द्र सिंह, विजय शर्मा, रोशनी, संतोष, कंवर सिंह सोनी ने धूणे की परिक्रमा लगाते हुए कहा कि बाबा नरेन्द्र गिरी महाराज की 84 धूनी तपस्या से पूरे इलाके में धर्म की भावना बढ़ती जा रही है। श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि महाराज की तपस्या को 16 दिन हो गए हैं यह तपस्या 41 दिन चलेगी। नरेन्द्रगिरी महाराज रोजाना प्रात: 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक 84 धूनियों के बीच में बैठकर तपस्या कर रहे हैं। ज्योति, कृश्णा, आशा तथा नेहा ने कहा कि महिलाएं बड़ी संख्या में तपस्या स्थल पर आकर श्रद्धा और विश्वास के साथ 84 धूनीयों की परिक्रमा कर मन्नते मांग रही हैं। जो श्रद्धालु, श्रद्धा, प्रेम व आस्था से आकर मन्नत मांगता है उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है। बाबा नरेन्द्र गिरी ने कहा कि वे समाज में सुख, शांति व स्मृद्धि के लिए यह तपस्या कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने झाड़ली गांव में ठिठुरती सर्दी में 21 दिन की जलधारा तपस्या समाज व राष्ट्र की खुशहाली के लिए की थी। उन्होंने श्रद्धालुओं से तप स्थल पर पधारकर श्रद्धा, भक्ति और प्रेम से सहयोग करने का आह्वान किया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु व भक्तजन मौजूद थे। फोटो कैप्शन 05: बाबा नरेन्द्र गिरी 84 धूनी तपस्या करते हुए।
गांव पाथेड़ा में लिंगानुपात को सुधारने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोगों को किया जागरूक ******************************************** ******************************************** ******************************************** कनीना की आवाज। लिंग अनुपात को सुधारने के उद्देश्य से गांव पाथेड़ा में शक्रवार को जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक पीएचसी धनौंदा के डा. प्रतीक के निर्देशन में आयोजित हुई। बैठक में एएनएम सुमन, अरुण, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर तथा गांव पाटोदा के ग्रामीणों ने भारी संख्या में भाग लिया। इस मौके पर डा. प्रतीक ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को लड़का और लड़की में भेदभाव नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि लड़कियां नहीं होंगी तो संसार का संतुलन कैसे बनेगा। आज के समय में लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और पढ़-लिखकर एक नहीं बल्कि दो परिवारों का भविष्य संवारती हैं। बैठक के दौरान ग्रामीणों को शपथ दिलाई गई कि वे लिंग अनुपात को सुधारने के लिए सामूहिक प्रयास करेंगे तथा किसी भी कीमत पर गांव में कन्या भ्रूण हत्या नहीं होने देंगे। साथ ही लोगों को घटते लिंग अनुपात के दुष्प्रभावों के बारे में भी जागरूक किया गया। फोटो कैप्शन 01: गांव पाथेड़ा में घटते लिंगानुपात को लेकर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी लोगों को जागरूक करते हुए।
जल प्रकृति का अनमोल तत्व है जो जीवन का आधार है-डा. देवेंद्र ******************************************** ******************************************** ******************************************** कनीना की आवाज। जल प्रकृति का अनमोल तत्व है जो जीवन का आधार है। जल के बिना जीवन संभव ही नहीं। इसलिए जलदान करना श्रेष्ठ कर्तव्य है। गांव गोमला स्थित अपना-पार्क में लगाए गए एक वाटर कूलर का उद्घाटन करते हुए कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी डा. अजय यादव ने उपरोक्त बात कही। उन्होंने कहा कि गर्मियों के समय में पहले लोग प्याऊ लगाकर लोगों की प्यास बुझाते थे, उसी तर्ज पर यह वाटरकूलर लगाकर बड़ा ही नेक कार्य किया है। गांव के मध्य में स्थित पार्क में लगे वाटर कूलर से आसपास के घरों व लोगों को शीतल जल प्राप्त होगा। रामचंद्र खाद भंडार की ओर से स्कूल के लिए सीलिंग फैन भी भेंट किया गया। इस अवसर पर मौजूद गांव के सरपंच मिंटू गोमला ने बताया कि रामचंद्र खाद भंडार के द्वारा इस तरह के नेक कार्य से औरों को भी प्रेरणा मिलेगी। इस अवसर पर रामप्रताप, सत्यवीर, वेदप्रकाश, दयानंद-छोटन, धर्मवीर, प्रदीप कुमार, राजेंद्र, मनोज कुमार, अशोक, राकेश, आनंद कुमार, सुरेंद्र, पुष्कर आदि मौजूद थे। फोटो कैप्शन 02: वाटरकूलर का उद्घाटन करते हुए डाक्टर
नवोदय विद्यालय करीरा
के प्रवक्ता की पुस्तक प्रकाशित ******************************************** ******************************************** ******************************************** कनीना की आवाज। पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा के अंग्रेजी विषय के प्रवक्ता सुंदर लाल द्वारा लिखित पुस्तक इकोज आफ नवोदय प्रकाशित हो गई है। यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई प्रेरणादायक एवं मनोरंजक राइम का संग्रह है, जिसमें शिक्षा, सपनों, अनुशासन, संघर्ष और जीवन मूल्यों को सरल एवं आकर्षक शैली में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में सकारात्मक सोच, रचनात्मकता तथा सीखने के प्रति रुचि विकसित करना है। पुस्तक की सरल भाषा, भावनात्मक अभिव्यक्ति और प्रेरणादायक संदेशों से भरपूर हैं, जो पाठकों को विशेष रूप से आकर्षित करेंगी। पुस्तक नवोदय परिवार की भावनाओं, अनुभवों और प्रेरणादायक विचारों की सुंदर अभिव्यक्ति है, जो विद्यार्थियों और पाठकों को नई ऊर्जा एवं प्रेरणा प्रदान करेगी। फोटो कैप्शन 03: प्राध्यापक की प्रकाशित पुस्तक