गरीबों के सेब, सेब को भी दे रहे हैं मात
-सर्दी की मार के चलते महंगे हैं बेर
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में भारी मात्रा बेरों की आवक हो रही है। यूं तो ये बेर गरीबों के सेब कहलाते आये हैं क्योंकि ये गरीबों के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाते रहे हैं। जो सेब नहीं खा सकते वे बेर खा सकते हैं। किंतु इस बार सेब सस्ते रहे हैं जबकि बेर महंगे। इस बार बेर के भाव 100 रुपये किलो हैं जबकि सेब 100 रुपये किलो मिल जाते हैं। यही कारण है इस बार गरीबों के सेब गरीबों की पहुंच से दूर हो गए हैं।
कनीना क्षेत्र में जहां इसराणा ,मोहनपुर, उन्हाणी, कनीना एवं करीरा आदि अनेक स्थानों पर बेरी की खेती की हुई है तथा उससे पैदावार ली जाती है। परंतु इस बार सभी जगह बेर कम बचे हैं क्योंकि सर्दी अधिक पड़ी है। अधिकांश बेर झड़ गए या पक्षियों ने बर्बाद कर दिये हैं जिससे किसान परेशान हैं। आवक कम होने के कारण बेर महंगे हैं।
बेर उगाने वाले महावीर सिंह करीरा, अजीत किसान , रामप्रताप कनीना, अजय मोड़ी गजराज सिंह मोड़ी आदि से बात हुई उन्होंने कहा कि इस बार सर्दी के मौसम के कारण बेर महंगे है क्योंकि सर्दी की मार से अधिकांश बेर झड़ गए हैं जिसके कारण पैदावार में गिरावट आई है।
बेरों के शौकीन लोग बेर जरूर खाते हैं। वैद्य हरिकिशन, डा रविंद्र, वैद्य बालकिशन का कहना है कि बेर दांतो और मसूड़ों की एक्सरसाइज करते हैं। ये विटामिन, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा आदि के बेहतर स्रोत है। यह अच्छी मात्रा में ऊर्जा भी देते हैं और इनका मनपसंद टेस्ट भी होता है। बाजार में इस समय एप्पल बेर आए हुए हैं जिनको ग्रीन एप्पल नाम से जाना जाता है। जो प्राय: कुछ सस्ते होते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी डा प्रेम कुमार बताते हैं कि जिला महेंद्रगढ़ में बेरों की अच्छी पैदावार होती है जिनमें जोधपुरी गोला, ग्रीन एप्पल, कश्मीरी एप्पल, बाल सुंदरी आदि कई किस्में होती हैं जबकि जंगलों में लगने वाले झाड़ी और देसी बर होते हैं। इस सर्दी की मार से बेर कम बचे है और बेर महंगे है।
रोटी रोजी कमाते रेहडी पर बेर बेचने वाले-बेर बेचने वाले रेहडिय़ों पर बेरबेचकर रोटी रोजी कमाते हैं। बेर बेचने वालों भोलू, दिनेश, मनीष आदि ने बताया कि वे बेर बाजार से खरीद कर लाते और महंगे दामों पर मिलते इसलिए महंगे दामों पर ही बेरों को बेच रहे हैं परंतु वे प्रतिदिन अपनी रोटी रोजी रोटी कमा लेते हैं। वे 500 से 600 रुपये प्रतिदिन बेरों से कमा लेते हैं। परंतु जब भी महंगे हो जाते हैं तो उनकी बिक्री भी बढ़ सकती है।
उधर महाबीर सिंह करीरा का भी यही कहना है कि बेरों को सर्दी लग जाने से पैदावार कम है। फरवरी माह में शिवरात्रि पर भारी मांग रहती है किंतु बाजार में एप्पल बेर तो मिल जाएंगे किंतु बेहतरीन बेर नहीं मिल पाएंगे। अभी देसी बेर पके नहीं हैं जो मार्च माह में पकेंगे जब तक बेरों की मांग कम हो जाएगी।
फोटो कैप्शन 05: बेर
परीक्षा, मेले,डीजे एवं शादियों की है भरमार
-नहीं पढ़ पा रहे हैं विद्यार्थी
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में इन दोनों जहां परीक्षा, डीजे, शादी और मेलों की भरमार है। ऐसे में विद्यार्थी सही ढंग से पढ़ नहीं पा रहे हैं। उल्लेखनीय की सीबीएसई की परीक्षाएं शुरू हो चुकी है वहीं हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं 25 फरवरी शुरू होने जा रही हैं। ऐसे में जहां परीक्षाओं का दौर है, विद्यार्थी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। दिन-रात अपना समय देकर अच्छे अंक पाने के प्रयास कर रहे हैं किंतु मेलों का शोर और डीजे का शोर उनकी पढ़ाई में खलल डाल रहा है। जहां मोलडऩाथ संत का मेला 27 फरवरी को है वही श्याम बाबा के दो मेले जैतपुर और खाटू श्याम में लगेंगे। करीब 10 दिनों तक मेले चलते हैं जिसमें भारी संख्या में भक्तजन पहुंचते हैं। ऐसे में भक्तजनों के लिए जगह-जगह शिविर लगे हुए हैं और वहां पर भी डीजे का प्रबंध किया गया है। डीजे के कारण विद्यार्थी पढ़ नहीं पा रहे हैं। यही नहीं विवाह-शादियों की भी भरमार हैं। फरवरी माह में तो कुछ अधिक शादियां रही हैं और चलती रहेंगी। जिसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई में खलल पड़ रहा है किंतु सबसे अधिक समस्या डीजे दे रहे हैं। बड़ी संख्या में डीजे का शोर गलियों में सुनाई देता है। मैरिज पैलेस के आसपास तो रात को 10 बजे तक डीजे का शोर सुनाई पड़ता है। ऐसे में विद्यार्थी कैसे पढ़े? उनके लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है कि डीजे को बंद करना कठिन है। इसी शोर शराबे के बीच विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई पूर्ण करनी है। साथ में मार्च महीने में तो अनेकों पर्व आ रहे हैं।
तीन दिन ब्लाग रहेगा बंद
-खाटू श्याम पदयात्रा के कारण
-24 फरवरी को अगला ब्लाग आने की संभावना
कैसे करें परीक्षा की बेहतर तैयारी
-परीक्षा का भय सिर पर न पाले-वीरेंद्र सिंह प्राचार्य *****************************************
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कनीना की आवाज। हरियाणा में सीबीएसई की परीक्षाएं शुरू हो चुकी है तथा हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं 25 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। विद्यार्थी जी जान से परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए हैं। अच्छे अंक पाने के लिए शिक्षाविद एवं प्राचार्य बूचावास वीरेंद्र सिंह का कहना है कि सर्वप्रथम किसी भी बच्चे में कोई भी परीक्षा से संबंधित भय नहीं होना चाहिए। प्रत्येक बच्चे को परीक्षा से संबंधित उत्साह और ऊर्जावान होना चाहिए। बच्चों को कक्षा में रुचि पूर्ण पढ़ाई करनी चाहिए। सिर्फ अपनी मेहनत पर भरोसा करें और तनाव पर काबू रखें शारीरिक रूप से सक्रिय होने से भी चिंता को कम किया जा सकता है। कम समय का उचित उपयोग करें। किसी भी चीज को हल्के में ले ले अपने आप को आराम दें । कभी भी असफलता के बारे में न सोचे। दोस्तों से तैयारी के बारे में नहीं पूछे, व्यायाम करें । जहां आप अध्ययन कर रहे हैं वहां पर एक खुशबूदार अगरबत्ती जला दे ताकि आपका मन स्वस्थ रह सके परीक्षा आते ही रट्टू तोते न बन जाए बल्कि पढ़ाई पर ध्यान दें। बस पढ़ते जाए परीक्षा से पूर्व पुन: रिवीजन करें। पढ़ाई करते वक्त साथ वातावरण होना जरूरी होता है । हमेशा प्रसन्न चित्त रहने से मन स्वस्थ रहेगा जिससे कि पढ़ाई में मन लगेगा। पढ़ाई करते वक्त हो सके तो शवासन कर लेना चाहिए इससे लाभ मिलता है। जो पढ़े उसे थोड़ी देर बाद एक पन्ने पर लिखकर देखे कि जो पढ़ा उसमें से कितना सही है। किसी भी प्रकार से मन में संकोच न लाए नहीं तो असफलता का विचार आएगा। यदि आप में आत्मविश्वास होगा तो आप हर मुसीबतों का सामना डटकर कर सकते हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए उचित शेड्यूल बनाएं। सोने को पर्याप्त समय दें, मानसिक अभ्यास करें, ज्यादा से ज्यादा पानी पिये, दिमाग को आराम करने दें। सकारात्मक सोच बनाए रखें।
फोटो कैप्शन: वीरेंद्र सिंह प्राचार्य
डोर-टू-डोर नशा मुक्त अभियान के तहत कई गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन
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कनीना की आवाज। नशामुक्त समाज की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ के कुशल मार्गदर्शन में गठित विशेष टीम द्वारा डोर-टू-डोर नशा मुक्त अभियान के तहत थाना सदर कनीना के अंतर्गत आने वाले विभिन्न गांवों का दौरा किया गया। इस अभियान के तहत पुलिस टीम ने गांव तलवाना, स्याना और नौताना में सघन जनसंपर्क किया और ग्रामीणों को नशे के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया।
अभियान के दौरान निरीक्षक धर्मसिंह और उनकी टीम ने गांव तलवाना के शिव मंदिर, स्याना के बाबा भैया मंदिर और नौताना के सार्वजनिक स्थल पर ग्राम सभाओं का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में युवा वर्ग और सभी आयु वर्ग के ग्रामीणों को नशे के विनाशकारी दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से समझाया गया। टीम ने युवाओं को नशे की लत से दूर रहने के लिए प्रेरित किया और स्पष्ट किया कि जो लोग इस दलदल में फंसे हैं और निकलना चाहते हैं, उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए पुलिस हर संभव सहायता प्रदान करेगी। इसके साथ ही, मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 के बारे में भी जागरूक किया गया।
इस अवसर पर कानूनी जागरूकता का प्रसार करते हुए टीम ने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में जानकारी दी। ग्रामीणों को नई संहिता की धाराओं के बारे में बताया। इन कार्यक्रमों में संबंधित गांवों के सरपंच प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति विशेष रूप से उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04: डोर टू डोर कार्यक्रम करती पुलिस
अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस -21 फरवरी
मातृभाषा ही सदा लगती है मधुर भाषा-नरेश कुमार
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कनीना की आवाज। यूं तो हिंदी दिवस मातृभाषा दिवस मनाया जाएगा। हिंदी ही हमारी मातृभाषा है। हिंदी पूरी दुनिया में बोली जाने वाली पांच भाषाओं में से एक है। विश्व भर के करोड़ों लोग आज हिंदी बोलते हैं।
हिंदी भाषा अब विदेशों में भी लोकप्रिय हो रही है। विदेश में रहने वाले लोगों को भी अब हिंदी का महत्व पता लग रहा है।
दैनिक व्यवहार में हिन्दी के उपयोग करने आदि की शिक्षा दी जाती है। क्या कहते हैं शिक्षाविद-
मातृभाषा दिवस पर हिन्दी के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। हिंदी माथे की बिंदी होनी चाहिए। यह मातृभाषा है इसका सम्मान करना चाहिए। हिंदी में काम करने वाले लोगों को सम्मानित करना चाहिए। हिन्दी भाषा के विकास और विस्तार हेतु हर संभव प्रयास करने चाहिए। मातृभाषा में बात करना सरस एवं आनंद देने वाला होता है।
--बिजेंद्र सिंह, शिक्षाविद
मातृभाषा हिंदी बोलने वालों की संख्या के अनुसार अंग्रेजी और चीनी भाषा के बाद हिन्दी भाषा पूरे दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी भाषा है। लेकिन उसे अच्छी तरह से समझनेए पढऩे और लिखने वालों में यह संख्या बहुत ही कम है। यह और भी कम होती जा रही। इसके साथ ही हिन्दी भाषा पर अंग्रेजी के शब्दों का भी बहुत अधिक प्रभाव हुआ है और कई शब्द प्रचलन से हट गए और अंग्रेजी के शब्द ने उसकी जगह ले ली है। जिससे भविष्य में भाषा के विलुप्त होने की भी संभावना अधिक बढ़ गयी है। हिंदी के प्रचार एवं प्रसार का प्रयास करना वाहिए।
---नरेश कुमार शिक्षाविद
मातृभाषा के रूप में हिन्दी के प्रति अपने कर्तव्य का बोध करवाने के लिए इस दिन को मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है जिससे वे सभी अपने कर्तव्य का पालन कर हिन्दी भाषा को भविष्य में विलुप्त होने से बचा सकें। वर्ष में एक दिन इस बात से लोगों के समक्ष रखना है कि जब तक वे हिन्दी का उपयोग पूर्ण रूप से नहीं करेंगे तब तक हिन्दी भाषा का विकास नहीं हो सकता है। इसे आम बोलचाल की भाषा बनाना चाहिए तथा हर काम हिंदी में करने चाहिए।
-लक्ष्मी देवी, शिक्षाविद
हिंदी भारत की एकता और विविधता का प्रतीक है। यह भाषा देशभक्ति, संस्कृति और समृद्धि का प्रतीक है। हिंदी हमारे संविधान की अधिकारिक भाषा है और हमारी राष्ट्रीय भाषा के रूप में महत्वपूर्ण है। हिंदी दिवस के अवसर पर, हमें अपनी मातृभाषा के प्रति समर्पित रहना चाहिए। हमें इसे सीखनाए उसका सदुपयोग करनाए और उसका संरक्षण करना चाहिए। हमें हिंदी की बढ़ती उपयोगिता को समझना चाहिएए ताकि हम अपने विचारों को सही ढंग से व्यक्त कर सकें।
-- शिक्षाविद नेमी सिंह
फोटो कैप्शन-नेमी सिंह,लक्ष्मी देवी, नरेश कुमार, बिजेंद्र सिंह
आधुनिक तकनीक से जुड़ता फैशन- सिलाई प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन मिला नवाचार का संदेश
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कनीना की आवाज। राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हाणी में महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सिलाई मशीन के विभिन्न भागों की जानकारी दी गई तथा उन्हें मशीन चलाने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।
प्रशिक्षिका द्वारा छात्राओं को नाप लेने की सही विधि, कपड़े की कटिंग तथा साधारण सलवार एवं पेटीकोट की सिलाई की प्रारंभिक तकनीकों का विस्तार से अभ्यास करवाया गया। छात्राओं ने पूरी लगन और रुचि के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा अपने कौशल में निखार लाने का प्रयास किया।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ. कविता ने छात्राओं को संबोधित करते हुए विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में फैशन और तकनीक का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक तकनीकों जैसे कंप्यूटराइज्ड सिलाई मशीन, आनलाइन डिजाइनिंग प्लेटफार्म, डिजिटल मार्केटिंग तथा सोशल मीडिया के माध्यम से फैशन को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित किया कि वे पारंपरिक कौशल के साथ-साथ नवीन तकनीकों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनें।
कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डा. विक्रम सिंह ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा ही आज के समय की आवश्यकता है। ऐसे प्रशिक्षण शिविर छात्राओं को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की भावना भी विकसित करते हैं। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाएं और सीखे गए कौशल को अपने जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाएं।
तीसरे दिन का आयोजन सफल एवं प्रेरणादायक रहा। शिविर आगामी दिनों में भी इसी उत्साह और ऊर्जा के साथ जारी रहेगा।
फोटो कैप्शन 02:फैशन तकनीक की जानकारी देते हुए
53 वर्ष की उम्र में हैं प्राध्यापक जवां
-अखिल भारतीय सिविल सर्विस स्पोर्ट्स मीट में लिया भाग और दिखाया जलवा
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कनीना की आवाज। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्याणा के 53 वर्षीय इतिहास प्रवक्ता सूरत सिंह आज भी जवां हैं। उन्होंने अखिल भारतीय सिविल सर्विस स्पोर्ट्स मीट में भाग लेकर सिद्ध कर दिया कि उम्र कभी अड़चन नहीं बनी है। धनौन्दा निवासी प्रवक्ता सूरत सिंह ने थ्यागराज स्टेडियम दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय सिविल सर्विस मीट में उन्होंने बाडी बिल्डिंग 50+उम्र में हरियाणा का नेतृत्व किया। उनके इस प्रदर्शन से इलाके में खुशी का माहौल है। उनकी इस उपलब्धि पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सयाणा मैं एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें विद्यालय की प्राचार्य प्रवीण कुमार , एसएमसी प्रधान गजराज सिंह,समस्त अध्यापक साथी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
प्राचार्य ने कहा कि उनके इस जज्बे से उनका चयन नेशनल प्रतियोगिता में हुआ है। इससे आने वाली पीढिय़ों को प्रेरणा मिलेगी। उनके साथ बाघोत गांव के अध्यापक रामचंद्र ने भी 80 किलो भार में हिस्सा लिया। हालांकि वे इस प्रतियोगिता में किसी प्रकार का कोई मैडल नहीं ला पाए। गोल्ड है अगला लक्ष्य-
सूरत सिंह ने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत सच्ची हो तो उम्र मायने नहीं रखती। अब पूरे क्षेत्र की नजरें अगली प्रतियोगिता पर टिकी है कि अगली बार गोल्ड लेकर आएंगे।
फोटो कैप्शन 01: सूरत सिंह को सम्मानित करता स्कूल स्टाफ
पैक्स एक मुश्त ऋण समाधान योजना करे तत्काल लागू
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कनीना की आवाज। बसपा के नेता अतरलाल एडवोकेट ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से सरकार द्वारा घोषित पैक्स एक मुश्त ऋण समाधान योजना तत्काल लागू करने की मांग की है।
अतरलाल ने सीहोर, चेलावास, इसराणा, रामबास, भोजावास, बेवल में जनसम्पर्क के दौरान उक्त मांग उठाई। उन्होंने कहा कि गत 10 दिसम्बर 2025 को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सहकारी समितियों से जुड़े किसानों को लंबित ऋणों से मुक्ति दिलाने के लिए एक मुश्त समाधान योजना लागू करने की योजना की थी। इसके द्वारा हरियाणा के 6.81 लाख किसानों व गरीब श्रमिकों को 2266 करोड़ के ब्याज माफी का लाभ दिया जाना था और इसकी अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित की गई थी। परन्तु घोषणा के बाद सरकार इसके कार्यान्वयन के बारे में भूल गई। किसान पैक्स सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। जब किसान व श्रमिक सहकारी समितियों के अधिकारियों से पूछते हैं तो उत्तर मिलता है कि अभी ऊपर से एकमुश्त समाधान योजना का आदेश नहीं मिला है। सरकार द्वारा की जा रही देरी के कारण किसान मानसिक व आर्थिक संकट झेलने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा घोषित योजना का अभी तक किसान व श्रमिकों को लाभ न मिलने से उनमें भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि एक मुश्त समाधान योजना से कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को राहत मिलती और वे नए ऋण लेने में समर्थ होते। अतरलाल ने चेतावनी दी कि सरकार ने 15 दिन के अंदर एक मुश्त समाधान योजना के कार्यान्वयन के आदेश नहीं किए तो बहुजन समाज पार्टी पीडि़त किसानों के साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी। उन्होंने अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 से बढ़ाकर 30 जून 2026 करने की मांग की है। इस अवसर पर कैलाश सेठ, राकेश यादव, शेर सिंह यादव, भाग सिंह चेयरमैन, पदम सिंह, दानसिंह प्रजापत, बीर सिंह, महिपाल आदि पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन: अतरलाल
एक माह पहले प्राचार्य की सूझबूझ से अपने ही साथी प्रवक्ता की बची थी जान
- अब वो पाया कमरे में मृत,पुलिस जांच में जुटी
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कनीना की आवाज। जिस शिक्षक की करीब एक माह पहले प्राचार्य की सूझबूझ से जान बच गई थी वो शुक्रवार को कमरे पर पाया गया मृत। हुआ यूं कि शिक्षक स्कूल से अनुपस्थित मिला तो प्राचार्य ने कर्मियों को उनके कमरे पर अनुपस्थिति का कारण जानना चाहा। भेजे कर्मचारियों ने कनीना के लोगों को इकट्ठा कर दरवाजे से झांक कर देखा मिला शैलेश मेहता मृत पाया गया। 29 जनवरी को इसी कमरे पर यह शिक्षक अचेत अवस्था में पाया गया था जिसे पीजीआई रोहतक भेजा गया था और जान बच गई थी। किंतु इस बार संदिग्ध परिस्थितियों में वह मृत पाया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मृतक के स्वजनों को बुलाया गया है तथा कनीना से मृतक का पोस्टमार्टम करवाया करवा कर उन्हें सौंप दिया गया है।
मिली जानकारी अनुसार धर्मवीर सिंह प्राचार्य पोता निवासी के साथ आदमपुर मंडी से शैलेश मेहता प्राध्यापक/पीजीटी अंग्रेजी खेड़ी तलवाना में कार्यरत था। करीब 1 साल से कनीना बस स्टैंड पर किराए का मकान में रह रहा था। प्रतिदिन खेड़ी तलवाना स्कूल जाता था। गुरुवार को भी वह स्कूल गया था। जहां स्कूल का समय प्रात: 8:30 बजे का है। जब शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचा तो प्राचार्य ने उनके फोन पर संपर्क किया किंतु फोन नहीं उठाया। तत्पश्चात उन्होंने अपने कर्मियों की सहायता से बार-बार फोन किया किंतु फोन नहीं उठाया तो उन्होंने कर्मियों को भेजा कि पता लगाओ कि शिक्षक स्कूल क्यों नहीं आ रहा है? कनीना के लोगों की सहायता से जब किराए के मकान में जाकर देखा तो शैलेश मेहता मृत पाया गया जिसकी सूचना प्राचार्य को दी गई। स्कूल से आए हुए कर्मचारियों ने पुलिस को सूचित किया और पुलिस मौके पर पहुंची। तत्पश्चात मृतक के स्वजनों को बुलाया गया और 3 स्वजन मौके पर पहुंचे। पुलिस ने हालात से रूबरू करवाते हुए कनीना उपनागरिक अस्पताल उनका मृत शरीर ले जाया गया। जहां उनका पोस्टमार्टम करवा परिजनों को सौंप दिया है। अभी तक हृदय गति रुकना उनकी मौत का कारण माना जा रहा है।
29 जनवरी की घटना-
उल्लेखनीय है कि 29 जनवरी 2026 को शैलेश मेहता जब खेड़ी तलवाना स्कूल नहीं पहुंचा तो प्राचार्य धर्मवीर पोता ने बार-बार फोन किया था। स्कूल का समय 29 जनवरी को प्रात: 9:30 बजे का था। जब कोई सूचना नहीं मिली। तब भी धर्मवीर सिंह पोता निवासी ने अपनी कर्मचारियों को भेजा और घर का दरवाजा लोगों की सहायता से तोड़ कर देखा तो वह अचेत अवस्था में पाया गया था क्योंकि वह अंगीठी जलाकर बंद कमरे में सो गया था और कार्बन मोनोआक्साइड एक जहरीली गैस के कारण अचेत हो गया था। अगर उस समय भी प्राचार्य ने सूझबूझ नहीं दिखाई होती तो उनका बचना कठिन था। तत्पश्चात शैलेश मेहता के परिजनों को सूचित किया था और खेड़ी तलवाड़ा के कर्मियों की सहायता से उन्हें पीजीआई रोहतक भर्ती करवाया गया था। रोहतक तीन दिन भर्ती रहकर ठीक हुआ था। खेड़ी तलवाना प्राचार्य के कारण उनकी तब तो जान बच गई थी किंतु अब महज एक महीने से भी कम समय बाद आज शुक्रवार को संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई है।
प्राचार्य धर्मवीर सिंह पोता ने बताया कि शैलेश मेहता गुरुवार को भी स्कूल पहुंचा था तब कोई ऐसी बात नहीं थी। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षक आदमपुर मंडी का निवासी है और स्टाफ में बैठता था किंतु कम ही बोलता था। उनसे बार-बार यह कहा जाता था कि आप सभी से घुलमिल कर रहो परंतु वह किसी कारण से कम बोलता था और आज उनकी मौत हो गई है। पूरे स्कूल में शोक की लहर है। करीब 1 साल से शिक्षक कनीना में रह रहा था और खेती तलवाना में कार्यरत था। उसे समय प्राचार्य की सूझबूझ से उनकी जान बच गई थी। इस बार भी फोन न उठाने पर प्राचार्य ने समझा कि कहीं विगत घटना की तरह इस बार भी कोई अप्रिय घटना न घट गई हो, इसलिए कर्मचारियों को तुरंत उसके कमरे पर जाकर सूचना देने की बात कही थी। कर्मचारियों ने कनीनावासियों की सहायता से पता लगाया तो मृत अवस्था में पाया गया।
फोटो कैप्शन: शैलेश मेहता










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