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**KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**
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Tuesday, March 24, 2026
हजारों रुपए बचाने का ठेकेदारों ने ढूंढा नायाब तरीका - रोड को तोड़कर पत्थर डाल देते हैं, लोग और उनके वाहन उन्हें देते हैं जमा **************************************************************** ***************************************************** *************************************************************** कनीना की आवाज। धीरे-धीरे जहां विज्ञान नई-नई प्रगति कर रहा है वही सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार भी नई-नई खोज एवं नया-नया तरीका ढूंढ रहे हैं ताकि उनके हजारों रुपए बच जाए। सबसे नायाब तरीका यह है कि किसी भी गांवों और शहरों में घरों के आगे से गुजरने वाली सड़क मार्ग को तोड़ देते हैं या किसी रोड को तोड़ देते हैं और फिर उस पर मिट्टी- रोड़े डाल देते हैं ताकि आवागमन करने वाले वाहन अपने आप उन रोड़ों और रेत मिट्टी को जमा दे। रोड़े एवं रेत आदि डालने के बाद ठेकेदार कई कई दिन सुध नहीं लेते ताकि जब तक की रोड़े एवं मिट्टी आदि अच्छी प्रकार से न जम जाए । बार-बार लोगों के पैरों में चोट आने से घर के मालिक चिंतित हो जाते हैं किंतु ठेकेदारों को कोई चिंता नहीं। चूंकि उनके हजारों रुपए बच रहे हैं। पहले जहां सड़क पर रोड़े आदि डाले जाते थे तो रोलर द्वारा उन्हें ठीक किया जाता था। अब तो ठीक करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हर घर में वाहन हैं, हर घर के मालिक धीरे-धीरे अपने घर के सामने मिट्टी रोड़ों को सही जमा देते ताकि आवागमन सुविधाजनक हो सके। इस प्रकार सड़क के रोड़े एवं मिट्टी जमाने का काम ठेकेदार नहीं खुद लोग करने को मजबूर हो जाते हैं। लोगों को अपने वाहन आखिरकार इन सड़क मार्गों से ले जाने जरूरी है और जिस सड़क मार्ग पर रोड़े और रेत मिट्टी पड़ी हुई है उससे वाहन निकालते वक्त वो रोड़े एवं मिट्टी जम जाते हैं। कितना सुंदर और बढिय़ा तरीका ठेकेदारों ने ढूंढ लिया है। हजारों रुपए की बचत भी हो जाती है और काम भी साफ सुथरा बन जाता है। इसे कहते हैं आम के आम और गुठली के दाम। लोग ही रोड़े एवं मिट्टी जमा दे और ठेकेदार के पैसे भी बच जाए। अगर ऐसा ही काम ठेकेदार करते हें तो उनके पैसे काट लो फिर देखो, घंटों का काम मिनटों में पूरा हो जाएगा। या फिर ठेकेदार के घर पर रोड़े एवं मिट.टी डाल दो ताकि उसे पैरों में चोंट आए तो वो किसी के कष्ट को समझ सके।
पानी की टंकी से कूदा आइटीआइ का छात्र, संदिग्ध परिस्थितियों में मौत **************************************************************** ***************************************************** *************************************************************** कनीना की आवाज। गांव झाड़ली में सोमवार देर रात आइटीआइ छात्र की पानी की टंकी से कूदने के कारण संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही स्वजन मौके पर पहुंचे और उसे उपचार के लिए कनीना के उप नागरिक अस्पताल लेकर गए, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान रविंद्र (19) निवासी गांव झाड़ली के रूप में हुई है। वह आइटीआइ सेहलंग में फिटर ट्रेड का छात्र था और अविवाहित था। बताया जा रहा है कि सोमवार रात वह गांव में बनी पानी की टंकी पर चढ़ गया और वहां से नीचे कूद गया। स्वजनों के अनुसार टंकी से कूदने से पहले रविंदर ने फोन कर घरवालों को बताया था कि वह टंकी पर है और उसे बचा लो। फोन मिलने के बाद स्वजन तुरंत मौके की ओर रवाना हुए, लेकिन तब तक वह नीचे गिर चुका था। स्वजन उसे तुरंत कनीना के उप नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डाक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के पिता राधेश्याम ने बताया कि करीब दो साल पहले उसका किसी के साथ झगड़ा हुआ था, लेकिन फिलहाल परिवार को किसी पर कोई शक नहीं है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल में रखवा दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने गांव मुंडिया खेड़ा में चलाया नशा मुक्ति अभियान -- युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए किया जागरूक **************************************************************** ***************************************************** *************************************************************** कनीना की आवाज। डोर-टू-डोर नशा मुक्त अभियान के तहत गठित पुलिस की टीम ने गांव मुंडिया खेड़ा का दौरा कर ग्रामीणों को नशे के खिलाफ जागरूक किया। निरीक्षक शारदा और उनकी टीम ने गांव की चौपाल में सभी वर्गों के लोगों के साथ बैठक कर नशे के खिलाफ जागरूक किया और नए आपराधिक कानूनों की जानकारी दी। इस अवसर पर विशेष रूप से युवाओं को नशे के भयानक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया और उन्हें इस बुरी लत से हमेशा दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस टीम ने बताया कि जो लोग नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं और इसे छोडऩा चाहते हैं, पुलिस उनकी हर संभव मदद करेगी। इसके अलावा, मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 के बारे में भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया। नशा मुक्ति के इस संदेश के साथ-साथ पुलिस टीम ने ग्रामीणों को नए आपराधिक कानूनों की भी जानकारी दी। लोगों को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में सरल शब्दों में समझाया गया। इस कार्यक्रम में गांव के सरपंच सहित कई गणमान्य व्यक्ति और ग्रामीण उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन 03 व 04: संबंधित हैं
कुतरूं प्राचार्य के कारनामे -17 -कुतरूं की जी हुजूरी न करने वाले शिक्षकों को पढ़ऩे वाले बच्चों एवं बच्चियों से आरोप लगवाकर करता था तंग **************************************************************** ***************************************************** *************************************************************** कनीना की आवाज। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने बतौर विज्ञान अध्यापक एवं प्राध्यापक 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया है। उन्होंने स्कूल, कालेज, निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि दौरान करीब 35 विभिन्न स्कूल प्राचार्यों के साथ काम किया और उनमें से चंद कुतरूं प्राचार्य निकले। जिनका नाम लेते ही तन मन में दर्द होता है। जिनकी भावना हीन रही है। उनका धरती पर आना ऐसा लगता है कि किसी के काम को रोकने आए हैं। सच का साथ नहीं दिया और उन्होंने सदा ही अच्छे और स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों का विरोध किया। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य के कारनामे सामने आये हैं। आज एक कारनामा यहां उजागर किया जा रहा है। कुछ कुतरूं प्राचार्य ऐसे भी हैं जी हुजूरी चाहते हैं। जी हुजूरी न करने वाले शिक्षकों को स्कूल में पढऩे वाले बच्चे बच्चियों से आरोप लगाकर तंग करने का भी सिलसिला जारी रखते हैं। कनीना उप-मंडल के एक गांव में वर्षों पहले एक ऐसा कुतरूं प्राचार्य था जिसकी कई स्कूली शिक्षक धोक लगते थे, उसके लिए कोई छाछ लाकर देता तो कोई दूध लाता। कोई उनके कपड़ों की तारीफ करता तो कोई उसके कपड़े तक धोता था। कोई उनके परिवार की तारीफ करता और वह फूला नहीं समाता। यहां तक की जो उनका विरोध करता तो उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता और होशियार सिंह ने उनका विरोध किया, परिणाम भुगतना पड़ा, लंबे समय तक संघर्ष जारी रहा अदालत तक भी मामला पहुंचा। स्कूल के कई पुराने रिकार्ड आज भी स्कूल के पास उपलब्ध नहीं है जैसा कि आरटीआई से खुलासा हुआ कि आज भी रिकार्ड उनके पास नहीं हैं। आखिरकार होशियार सिंह ने उसकी शिकायत पर शिकायत की परिणाम उसकी बदली गुरुग्राम में कर दी गई थी। उसे समय ऐसा लगता था कि शायद अंग्रेजों का शासन फिर से लौट आया है। कभी कभी ऐसा लगता था जैसे दास प्रथा फिर लौट आई है।कुछ शिक्षक तो प्राचार्य के दास ही बन गए थे।इतना घटिया माहौल शायद कभी नहीं देखा, उस कुतरूं के साथ बहुत लंबा संघर्ष किया। यही नहीं वर्तमान में भी एक शिक्षक पर कितने ही स्कूली बच्चों से आरोप लगवाए, अफसोस आज वह शिक्षक इस दुनिया में नहीं है किंतु उस पर इतने आरोप लगवाए की बेचारा अदालतों के चक्कर लगाता रहा। ऐसे कुतरूं आचार्यों को धरती पर जीने का अधिकारी नहीं होता। उधर अनेकों ऐसे प्राचार्य मिले जिनकी जी हुजूरी करनी पड़ती है। यदि जी हुजूरी न करें तो वो ऐसे देखते हैं जैसे हरिया ढ़ाढ़ी देख रही हो। कोई अधिकारी है या कर्मचारी सब अपना अपना काम करते हैं। नमस्ते करता है तो अच्छा है नहीं करता है तो अपने काम से काम रखना चाहिए लेकिन कुछ भांड और चमचे ऐसे होते हैं जो इन कुतरूं प्राचार्यों को के कान भर देते हैं। ऐसे ही कई कारनामे सामने आये। एक शिक्षक जो स्कूल में जी जान से पढ़ाता था उस पर लड़कियों और लड़कों को भड़काकर कई आरोप लगवा दिये।परिणाम यह निकला कि शिक्षक की रात नींद गायब हो गई। बड़ी मुश्किल से आरोप लगाने वाले बच्चों के अभिभावकों से मिलकर समझाया तब जाकर मामला कहीं शांत हुआ। ऐसा एक बार नहीं कई बार आरोप लगाने का प्रयास किया क्योंकि वह शिक्षक कुतरूं प्राचार्य को भाव नहीं देता था। कुतरूं प्राचार्य चाहता है कि उन्हें भाव दिया जाए। एक कुतरूं प्राचार्य ने तो एक शिक्षक को बेवजह डांट मारते हुए कहा कि यू फूल परंतु वह शिक्षक इतना काबिल निकला कि उसने प्रत्युत्तर में कहा कि यू ब्लडी बास्टर्ड ,यू फूल। फिर तो क्या था कुतरूं प्राचार्य के मानों सारे सींग ही टूट गए और फिर तो दीवारों से सिर टकराने लगा। ऐसा हालत बना कि जब वह शिक्षक सेवानिवृत्त होने लगा तो अपना पूरा अपनी पूरी योजना बनाई। उसका एक चमचा उसके कान भरता था। कुतरूं उस शिक्षक के विरुद्ध खड़ा कर दिया किंतु वह शिक्षक घबराया नहीं, उसने कहा कि अगर कुतरूं प्राचार्य में दम है तो उनके कोई लाभ रोक कर दिखाएं। सेवानिवृत्त होने वाले उस शिक्षक को कुतरूं कुछ बोल नहीं पाया। कभी कभी तो लगता है कि कुछ कुतरूं प्राचार्य ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे अपने घर से दौलत दे रहे हो। वो खुद तो सही काम करते ही नहीं दूसरे को भी नहीं करने देते। ऐसे कुतरूं प्राचार्य की छटनी की जानी चाहिए सरकार को चाहिए कि अनावश्यक तंग करने व शिक्षकों के ेलाभ रोकने वाले कुतरूं प्राचार्य की मेडिकल जांच करवाई जाए कि वह दिमाग से सही है या दिवालिया है। कुछ कुतरूं प्राचार्य रिश्वत भी लेते हैं। नहीं रिश्वत दे तो उनके सारे लाभ कुछ समय के लिए रोक देते हैं। परिणाम शिक्षक परेशान देखे गए। ऐसा कुतरूं प्राचार्य भी देखा जिसे एक बहुत होनहार और पदोन्नति पर आए शिक्षक के विरुद्ध दिन रात छात्राओं को भड़काना शुरू कर दिया। और वह कामयाब भी रहा लेकिन जब अभिभावकों को हकीकत का पता लगा कि कुतरूं प्राचार्य चाल चल रहा है तो उसकी जमकर धुनाई करने की भी योजना बनाई। उस कुटरूं का सौभाग्य रहा जिस दिन क्रोध में आकर अभिभावक स्कूल पहुंचे तो उसे दिन वह अवकाश पर था। अगले दिन जब कुतरूं को पता चला तो फिर से अवकाश ले गया। वरना उसे कुतरूं प्राचार्य को सबक सिखाते। बाद में मामला धीरे-धीरे शांत हो गया। ऐसे कितने ही कारनामे सामने आए हैं जिसमें कुतरूं ग्रामीण कहावत कुतरूं ही बनकर रह गए। बहुत से ऐसे प्राचार्य है जिनका नाम लेकर मन में खुशी होती है। आनंद आता है और वो किसी का काम नहीं रोकते। उनके पास जाते हैं तो वो चाय पानी भी पूछते हैं और अच्छी प्रकार बिठाकर उनके कार्य को तसल्ली से सुनते हैं। जहां तक संभव हो करने का प्रयास करते हैं।
चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन-- विधि विधान से करें मां कालरात्रि की पूजा-पंडित दिनेश कुमार **************************************************************** ***************************************************** *************************************************************** कनीना की आवाज। पंडित दिनेश कुमार बताते हैं कि माता दुर्गा के सातवें स्वरूप की पूजा मां कालरात्रि के रूप में की जाती है। सप्तमी की पूजा सुबह अन्य दिनों की तरह ही होती है लेकिन माता कालरात्रि की पूजा में विशेष विधान के साथ पूजा की जाती है जिसके लिए विशेष स्तर की शुद्धता नियम की जरूरत होती है। माता कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है इनका वर्ण अंधकार की भांति काला और केस भी खरे हैं मां कालरात्रि के तीन नेत्र इस ब्रह्मांड में विशाल वह गोल हैं जिनमें से जिस तरह आकाश में बिजली चमकती है उसी तरह मां की नेत्रों से किरण निकलती है। मां का यह भय उत्पन्न करने वाला स्वरूप केवल पापियों को नाश करने के लिए है। बाकी लोगों के लिए माता कोई नुकसान नहीं पहुंचाती हैं और उनका भला ही करती हैं। सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करके अपने मन क्रोध पर विजय पा सकते हैं। कालरात्रि साधक को ज्ञान देते हैं कि क्रोध का उपयोग स्वयं की सफलता के लिए कैसे करना है। देवी का यह रूप ऋद्धि सिद्धि प्रदान करने वाला है। दुर्गा पूजा का सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। सप्तमी पूजा के दिन तंत्र साधना करने वाले साधक मध्य रात्रि में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं। इस दिन मां की आंखें खुलती हैं। दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि का काफी महत्व बताया गया है। इस दिन से भक्त जनों के लिए देवी मां का दरवाजा खुल जाता है और भक्तगण पूजा स्थलों पर देवी के दर्शन हेतु पूजा स्थल पर जुटने लगते हैं। मां कालरात्रि की पूजा करने के लिए श्वेत या लाल वस्त्र धारण करके और ध्यान रहे कि यह विशेष पूजा आपको रात्रि में ही करनी चाहिए मां कालरात्रि के सक्षम दीपक जलाएं और उन्हें गुड़ का भोग लगाएं 108 बार नवार्ण मंत्र पढ़ते जाएं और एक-एक लोंग चढ़ाते जाएं लव का भोग लगाकर अग्नि में छोड़ते जाएं ऐसा करने से आपके घर की बाधाएं दूर होती हैं आपके शत्रु पराजय होते हैं। विजय की प्राप्ति होती हैं। फोटो कैप्शन: पंडित दिनेश कुमार
नवरात्रों में तांता लगता है शिव शक्ति नव मां दुर्गा धाम- मोहनपुर -कनीना से 6 किमी दूर हैं मां मंदिर **************************************************************** ***************************************************** *************************************************************** कनीना की आवाज। कनीना से करीब छह किमी दूर नव दुर्गा धाम की स्थापना आठ वर्ष पूर्व हुई है! मंदिर का निर्माण कार्य पंडित ऋषिराज पुजारी की देखरेख में संपन्न हुआ। इस मंदिर में मां के नौ रूपों की मूर्तियां स्थापित है। मंदिर का ऊंचा गुंबद काफी ऊंचा होने की वजह से दूर से ही दिखाई पड़ता है जो श्रद्धालुओं को अपनी और आकर्षित करता है मंदिर में गणेश जी शिव शंकर वह बजरंगबली की भी मूर्तियां स्थापित की गई है। मां की मूर्ति स्थापित किए जाने के चलते यह मंदिर मां मंदिर नाम से जाना जाता है। विशेष प्रकार के ग्रेनाइट पत्थरों से बनाया गया है। कैसे पहुंचे मंदिर- मोहनपुर गांव कनीना खंड का एक छोटा गांव है। यह गांव कनीना से 6 किलोमीटर की दूरी पर नारनौल रोड पर स्थित है। मंदिर में जाने के लिए कनीना से बस व जीप द्वारा 15 मिनट में पहुंच सकते हैं। यह स्थान पंडित ऋषिराज की ढ़ाणी नाम से भी जाना जाता है। मंदिर का इतिहास- जयपुर के प्रसिद्ध कारीगरों द्वारा मंदिर की भव्य मूर्ति 51 हजार रुपए में तैयार करवा कर विधि विधान से स्थापित की गई थी। प्रत्येक रविवार व शुक्ल पक्ष की अष्टमी नवमी और नवरात्रों के समय मंदिर को सजाया जाता है और बड़ी संख्या में दूर दराज से भक्त आते हैं।मोहनपुर गांव का यह एकमात्र दुर्गा मां मंदिर है । यह मंदिर जिस स्थान पर बना हुआ है वह जमीन एक व्यक्ति विशेष द्वारा दान की गई भूमि है। बताया जाता है कि इस मंदिर में लगे पत्थर भी कटरा (जम्मू)से मंगवाए थे। यहां प्रतिदिन सुबह शाम मां को भोग लगाकर पूजा अर्चना की जाती है! पंडित ऋषिराज,पुजारी- यह मां दुर्गा का एक पवित्र मंदिर है यहां सुबह शाम माता रानी का भोग लगाया जाता है और पूजा अर्चना की जाती है जो। माना जाता है कि यहां पर भक्त श्रद्धा पूर्वक कच्चा नारियल माता के चरणों में चढ़ाता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। यहां पर शुक्ल पक्ष नवमी अष्टमी व नवरात्रों में काफी संख्या में भक्तों का आना-जाना बना रहता है। मुंशीराम भक्त- मैं भी माता रानी के आशीर्वाद से नवरात्रों का व्रत रखता हूं। नवरात्रों के समय मैं भी इस मंदिर में आता हूं। यहां आने से मन बड़ा भक्ति में हो जाता है और शांति मिलती है। यहां बड़ी तादाद में भक्त आते हैं। मन प्रसन्न हो जाता है। फोटो कैप्शन: मोहनपुर मंदिर, ऋषिराज पुजारी एवं मुंशीराम भक्त
एसडीवमा विद्यालय, ककराला के विद्यार्थी बाक्सिंग में राज्य स्तर पर करेंगे जिला महेन्द्रगढ़ का प्रतिनिधित्व **************************************************************** ***************************************************** *************************************************************** कनीना की आवाज। एसडीवमा विद्यालय, ककराला के विद्यार्थियों ने बाक्सिंग में जिला स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए अब राज्य स्तर पर अपनी जगह बनाई है। बाक्सिंग फेडरेशन आफ इंडिया जूनियर खेलों के अंतर्गत 22 से 26 मार्च को जिला रोहतक में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में ये खिलाड़ी जिला महेन्द्रगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। विद्यालय की प्रधानाचार्या डा. शिप्रा सारस्वत ने जानकारी देते हुए बताया कि 20 मार्च 2026 को महेन्द्रगढ़ में आयोजित प्रतियोगिता में विद्यालय के खिलाडिय़ों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सब-जूनियर वर्ग में 43-46 किलोग्राम भार वर्ग में यश यादव तथा 45 किलोग्राम भार वर्ग में दिव्या ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं जूनियर वर्ग में 52 किलोग्राम भार वर्ग में मयंक, 54 किलोग्राम भार वर्ग में पियूष तथा 80 किलोग्राम भार वर्ग में तेजल ने भी शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इस अवसर पर विजेता खिलाडिय़ों को बधाई देते हुए विद्यालय के चेयरमैन जगदेव यादव ने खेलों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेल अत्यंत आवश्यक हैं। विद्यालय की खेल अकादमी एनआईएस प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। खेलों से नेतृत्व क्षमता, अनुशासन एवं साहस जैसे गुणों का विकास होता है, इसलिए विद्यार्थियों को बढ़-चढ़कर इसमें भाग लेना चाहिए। उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाडिय़ों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या डा. शिप्रा सारस्वत, ओमप्रकाश यादव, उप-निदेशक पूर्ण सिंह, सीईओ रामधारी, कोआर्डिनेटर स्नेहलता, खेल प्रमुख सोनू कोच, तेजपाल डीपी, संगीता डीपी, बाक्सिंग कोच विजय, अजीत सिंह सहित समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन 01: बाक्सिंग टीम जो राज्य स्तर पर महेंद्रगढ़ का करेगी प्रतिनिधित्व
किसान सूखा रहे अपनी सरसों की फसल को -पैदावार लेने की तैयारी **************************************************************** ***************************************************** *************************************************************** कनीना की आवाज। विगत दिनों हुई वर्षा के कारण कनीना क्षेत्र में गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है वही सरसों की काट कर डाली/लावणी गई फसल भीग गई थी। किसान अब उसे सूखाने के कार्य में लगे हुए। किसान अजीत कुमार, सूबे सिंह, योगेश कुमार, कृष्ण कुमार, महिपाल सिंह, सुरेंद्र, राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि वर्षा गत दिनों सरसों की ाटकर डाली गई फसल भीग गई थी। भीगी हुई लावणी की हुई सरसों की फसल को अब सूखाया जा रहा है ताकि इसकी पैदावार आसानी से ली सके। कुछ किसान तो पल्लड़ डालकर उस पर सूखा रहे हैं जबकि कुछ किसान सीधे उसे सूखने में लगे हुए हैं। किसानों का मानना है कि एक-दो रोज में जब यह फसल सूख जाएगी तत्पश्चात इसकी पैदावार ली जाएगी। किसान तेजी से अपनी पैदावार लेने के कार्य में लगे हुए हैं। उधर गेहूं की लावणी भी जल्दी आने वाली है। इसलिए भी किसान दिन रात व्यस्त हैं। किसी प्रकार सरसों की पैदावार घर में डालने पर ही गेहूं की लावणी के कार्य में लगेंगे। किसानों ने बताया कि इस बार मौसम की मार झेलते हुए बड़ी मुश्किल से सरसों और गेहूं की पैदावार ली जा रही है। उधर मार्केट कमेटी चेयरमैन जेपी कोटिया ने बताया कि अभी सरकारी खरीद के उनके पास कोई आदेश नहीं आये हैं। आते ही सूचना दे दी जाएगी। क्या कहते डा. अजय यादव एसडीओ कृषि- एसडीओ कृषि विभाग महेंद्रगढ़ डा.अजय यादव का कहना है कि अभी 27 मार्च तक बूंदाबांदी होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में किसान लावणी का कार्य या थ्रेशिंग का कार्य करते हैं तो मौसम को ध्यान में रखते हुए ही करें क्योंकि लावणी या थ्रेसिंग के समय वर्षा होती है तो परेशानी बढ़ जाएगी। फोटो कैप्शन 02: गेहूं की फसल को सूखाते हुए किसान
हृदयघात से हो रही मौतों पर चिंता व्यक्त की -मुफ्त जांच केंद्र बढ़ाए जाए **************************************************************** ***************************************************** *************************************************************** कनीना की आवाज। बसपा नेता अतरलाल एडवोकेट ने इलाके में हृदयघात से हो रही मौतों पर चिंता प्रकट करते हुए सरकार से इस बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए तत्काल ठोस कार्य निति बनाने की मांग की है। अतरलाल ने कहा कि इलाके के लोगों और खासकर युवाओं की हृदयघात और हृदय फेल से हो रही मौतें गंभीर चिंता का विषय है। देखने में आया है कि 50 प्रतिशत मौतें हृदयघात व हृदयफेल से हो रही हैं। यह न केवल एक स्वास्थ्य समस्या है बल्कि भविष्य का उभरता हुआ जन स्वास्थ्य संकट भी है। जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बीमारी के बचाव के लिए सरकार से तुरंत ठोस कार्य योजना बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अचानक से हृदयघात से हुई मौत के कारण परिवार आर्थिक संकट में पड़ जाता है। इसलिए सरकार को कार्यनीति में प्रभावित परिवार के लिए आर्थिक सहायता का भी प्रावधान करना चाहिए। उन्होंने प्रथम चरण में सरकार से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर निशुल्क जांच व इलाज सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की।
कामनवेल्थ गेम्स 2026 और एशियन गेम्स 2026 किया क्वालीफाई -छीथरोली की शर्मिला ने जीते 2 गोल्ड मेडल **************************************************************** ***************************************************** *************************************************************** कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव छीथरोली की लड़की शर्मिला ने कामनवेल्थ गेम्स 2026 और एशियन गेम्स 2026 के लिए क्वालीफाई कर लिया है। एक प्रतिभाशाली पैरा एथलीट, ने अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने जनवरी 2026 में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शाटपुट और डिस्कस थ्रो में 2 गोल्ड मेडल जीते। इसके अलावा, उन्होंने फरवरी 2026 में दुबई ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप में शाटपुट में गोल्ड मेडल और डिस्कस थ्रो में ब्रान्ज मेडल हासिल किया। मार्च 2026 में भुवनेश्वर में आयोजित 24वें पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में, उन्होंने शाटपुट में गोल्ड मेडल और डिस्कस थ्रो में ब्रान्ज मेडल जीता। साथ ही नए राष्ट्रीय रिकार्ड भी बनाए। उनकी इस उपलब्धि के साथ, उन्होंने कामनवेल्थ गेम्स 2026 और एशियन गेम्स 2026 के लिए क्वालीफाई कर लिया है। वह पिछले 2 साल से सोनीपत में कोच वीरेंद्र धनखड़ के साथ प्रशिक्षण ले रही हैं। फोटो कैप्शन: शर्मिला
Monday, March 23, 2026
भगत सिंह हैं युवाओं के लिए आदर्श प्रेरणा स्रोत -प्राध्यापक पहुंचा हुसैनी वाला, हुआ भव्य स्वागत ***************************************** *********************************************** ***************************************** कनीना की आवाज। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में अंग्रेजी के प्रवक्ता एवं झगडोली निवासी मदन मोहन कौशिक ने आज राष्ट्रीय बलिदान स्मारक हुसैनी वाला फिरोजपुर भारत-पाकिस्तान बार्डर पर जाकर भारत की आजादी के महानायकों शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये। उन्होंने कहा कि भगत सिंह के आदर्श आज के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे भगत सिंह के जीवन से प्रेरणा ग्रहण करें, उनके बताए हुए मार्ग पर चलें तथा देश के लिए सर्वस्व अर्पण करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने बताया कि भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी सदियों में जन्म लेते हैं जिनकी एक नहीं वरन् तीन-तीन पीढिय़ां आजादी के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल रही। उन्होंने बताया कि 23 मार्च को हुसैनीवाला में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आजादी के इन दीवानों को नमन करने के लिए आते हैं। जगह-जगह लंगर तथा खेलकूद का आयोजन चलता रहता है तथा शाम को बार्डर पर भारतीय सीमा सुरक्षा बल की परेड देखने लायक होती है। इसी दिन फिरोजपुर से हुसैनी वाला के लिए स्पेशल ट्रेन का संचालन किया जाता है। फोटो कैप्शन 05: हुसैनीवाला में प्राध्यापक का अभिन्नंदन करते हुए
अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि दिवस-24 मार्च -कई बार विश्व रिकार्ड बुकों में नाम दर्ज है होशियार सिंह कनीना का ***************************************** *********************************************** ***************************************** कनीना की आवाज। हर साल 24 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन व्यक्तियों के दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और समर्पण का जश्न मनाता है जिन्होंने अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है और अपने संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की है। यह उन लोगों को सम्मानित करने का दिन है, जिन्होंने कला, विज्ञान, खेल, स्वास्थ्य या सामाजिक कार्यों में मेहनत से उपलब्धि हासिल की है। यह लोगों को अपने सपनों को पूरा करने और लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करता है, जिससे समाज और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाया जा सके। यह दिवस सिर्फ सफल लोगों की प्रशंसा नहीं, बल्कि उपलब्धि हासिल करने के लिए आवश्यक मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति का उत्सव है। ऐसी ही शख्सियत कनीना जिला महेंद्रगढ़, हरियाणा के डा. होशियार सिंह यादव हैं। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव पूर्व शिक्षक, साहित्यकार ,लेखक का नाम एक बार कई विश्व रिकार्ड बुक में दर्ज हो हुआ है। 25 जनवरी 2026 को एक साथ दो विश्व रिकार्ड बुकों भारत विश्व रिकार्ड बुक तथा इंफ्लुएंस विश्व रिकार्ड बुक में नाम दर्ज हुआ है। देश की जानी मानी हस्थियों जायेश भ_, मनीषा, अदिल शेख,किशन सहाय आइपीएस ने उन्हें सर्टिफिकेट, गोल्ड मेडल, विश्व रिकार्ड बुक की प्रति, बैज तथा स्मृति चिह्न से जयपुर में नवाजा गया था। जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में उन्हें विभूषित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विदेशों तक विश्व बुक रिकार्ड में नाम दर्ज हो चुका है। इसी कड़ी में इनफ्लुएंस बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज हो चुका है। यह अवार्ड राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर जयपुर में दिया गया। विगत करीब 40 सालों से साइकिल चलाते आ रहे हैं और लगभग हर काम साइकिल पर चलकर करते हैं। वे ताउम्र साइकिल चलाना चाहते हैं। वे प्रतिदिन 50 से 60 किमी तक साइकिल चला लेते हैं। अब तक हजारों की संख्या में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त, डा. होशियार सिंह यादव के 3 शोध प्रकाशित तथा तीन बार राज्यपाल से, राज्य शिक्षक पुरस्कार तथा अनेकों अवार्डोंं से सम्मानित डाक्टर यादव लंबे समय से साइकिल चला रहे हैं। करीब 40 सालों से साइकिल चला रहे और ताउम्र चलने का संकल्प ले रखा है। यही नहीं कावड़ यात्रा, खाटू श्याम पदयात्रा ,जैतपुर पदयात्रा तथा अन्य किसी धाम की यात्रा पर पैदल जाकर नाम कमा चुके हैं। यही कारण है कि उनका नाम एक बार फिर से विश्व रिकार्ड बुक में दर्ज हो चुका है। कई विश्व रिकार्ड धारक हैं- कुर्सी प्रयोग किये बगैर 40 वर्षों तक सदा खड़े रहकर पढ़ाने के कारण डा. होशियार सिंह, कनीना का इंडियन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम पहले ही दर्ज हो चुका था और इंफ्लुअंस बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज हो चुका है। इससे पहले उन्होंने लंदन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज करवाया था। यही नहीं इंटरनेशनल बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड, इलाइट बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड,इंडियन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज हो चुका है वहीं आईकानिक अवार्ड भी मिल चुका है। साथ में ओरिएंट बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज हो चुका है। इसके अलावा चैंपियन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड, भारत विश्व रिकार्ड बुक में भी नाम दर्ज हो चुका है। यही नहीं कई विश्व रिकार्ड बुकों में भी उनका नाम दर्ज हो चुका हैं। फोटो कैप्शन: डा. होशियार सिेंह यादव
अंतर राष्ट्रीय शो में चयन हुआ कारोली गौशाला का सोमनाथ नंदी ---संस्थापक सन्नी शर्मा कारोली सम्मानित ***************************************** *********************************************** ***************************************** कनीना की आवाज। 23 मार्च को बीफा संस्था जो की अपने देसी हरियाणा नस्ल को बचाने के लिए कार्य कर रही है। सेंस्था ने पहले अंतरराष्ट्रीय देशी नस्ल की गायों का हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश, राजस्थान से चुनिंदा श्रेष्ठ नस्ल के गोवंश लिए शो करवाया जिसमें रेवाड़ी के कारोली गांव स्थित भगत सिंह गो चिकित्सालय एवं देसी गो संवर्धन केंद्र के सोमनाथ नदी का चयन हुआ। संस्थापक सन्नी शर्मा कारोली ने बताया कि सोमनाथ नामक नंदी पहले भी अखिल भारतीय स्तर पर आठ बार चैंपियन रह चुका है। गौशाला के डाक्टर रोहित ने बताया हर गोशाला के लिए गो संवर्धन बड़ा जरूरी है। हमारी गौशाला से 23 नंदी अलग-अलग गौशाला एवं पंचायतों में गौ संवर्धन के लिए दे चुके हैं। ये अंतर्राष्ट्रीय मेला बहु अकबरपुर के वेटरनरी कालेज में हुआ जिसमें मुख्य अतिथि गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत ,गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष और भी सम्मानित नेता गणों ने सोमनाथ को सम्मानित किया और बड़ी प्रशंसा की। इस मौके पर सभी ग्रामवासियो में खुशी का माहौल है। इस आयोजन पर ईश्वर पंडित, रामोअवतार, रामनिवास, डा. रोहित, देशराम देशप्रेमी, सचिन, अंशु, रोहित आदि गौ सेवक उपस्थित रहे। गो संवर्धन के लिए नदियों की सेवा गौशाला में बिल्कुल मुफ्त है। फोटो कैप्शन 05: सन्नी शर्मा को सम्मानित करते हुए
विश्व टीबी दिवस- 24 मार्च टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है -नियमित जांच एवं दवा लेने से दूर कर सकते हैं बीमारी को-डा. मोरवाल -24 मार्च को मिलेगा 3 टीबी फ्री गांवों को गोल्ड मेडल ***************************************** *********************************************** ***************************************** कनीना की आवाज। टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। सही समय पर जांच एवं दवा लेने से दूर कर सकते हैं। ट्यूबरकुलोसिस को आम बोलचाल की भाषा में टीबी कहते हैं। यह शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, फेफड़ों में होने वाला टीबी सबसे आम प्रकार का होता है। टीबी एक संचरणीय रोग है जो एक भी खांसी और छींक के द्वारा एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। टीबी का खतरा उन लोगों को सबसे अधिक होता है जो जिन्हें पहले से कोई बड़ी बीमारी जैसे कि एड्स या डायबिटीज आदि होती है। साथ ही, जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है उन्हें भी इस बीमारी का खतरा अधिक होता है। कनीना में टीबी के मरीज- वरष्टि टीबी सुपरवाइजर पवन यादव ने बताया जिला महेंद्रगढ़ में टीबी के चार यूनिट हैं जिनमें कनीना, महेंद्रगढ़ अटेली एवं नारनौल आते हैं। कनीना यूनिट के 85 गांव ाामिल किए गए हैं। कि अकेले कनीना यूनिट में वर्ष 2025 में 356 मरीज थे जिनमें से 271 का सफल ईलाज हो चुका है। शेष का अभी जारी है। कनीना टीबी यूनिट जिसमें धनौंदा, सेहलंग, मालड़ाबास, भोजावास, दौंगड़ा अहीर, मुंडिया खेड़ा एवं कनीना सब यूनिट आते हैं। वर्ष 2026 में अब तक तीन माह में 76 केस टीबी के आ चुके हैं। डाटस टीबी को दूर करने का बेहतर तरीका है। नियमित रूप से दवा लेने से यह रोग दूर हो जाता है। उन्होंने बताया कि अब तक कनीना यूनिट के 30 गांव टीबी फ्री गांव वर्ष 2025 के थे तथा 2026 में 24 गांव टीबी फ्री हैं। भालखी, मानपुरा, कपूरी गांवों में तीन सालों से टीबी का कोई केस नहीं आया इसलिये इनको गोल्ड मेडल 24 मार्च को नारनौल में मिलेगा। वहीं कनीना के दस गांवों को सिल्वर मेडल तथा 11 गांवों को ब्रांज मेडल के तहत आते हैं। उन्होंने बताया कि रेणू वर्मा एसएमओ कनीना के तत्वावधान में सभी गतिविधियां सुचारु रूप से जारी हैं। टीबी के प्रकार - डा. जितेंद्र मोरवाल ने बताया कि टीबी मुख्यता दो प्रकार के होते हैं जिसमें लेटेंट टीबी और सक्रिय टीबी शामिल हैं। टीबी को अन्य दो भागों में बांटा जा सकता है जिसमें पल्मोनरी और एक्स्ट्रा पल्मोनरी नाम दिया गया है। टीबी के कारण टीबी से पीडि़त मरीज जब छींकता, खांसता और थूकता है तो उसके द्वारा छोड़ी गई सांस से वायु में टीबी के बैक्टीरिया फैल जाते हैं। यह बैक्टीरिया कई घंटों तक वायु में जीवित रहते हैं और स्वस्थ व्यक्ति भी आसानी से इसका शिकार बन सकते हैं। जब टीबी का बैक्टीरिया सांस के माध्यम से फेफड़ों तक जाता है तो वह कई गुना बढ़ जाता है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। हालांकि, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इसे बढऩे से रोकती है, लेकिन जैसे-जैसे यह क्षमता कमजोर होती है, टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। टीबी के लक्षण - डा. ने बताया कि टीबी के प्रमुख लक्षणों में तीन सप्ताह से अधिक समय तक खांसी होना, सांस फूलना,सांस लेने में तकलीफ होना, शाम के दौरान बुखार का बढ़ जाना, सीने में तेज दर्द होना, अचानक से वजन का घटना, भूख में कमी आना, बलगम के साथ खून आना,फेफड़ों का संक्रमण होना,लगातार खांसी आना,बुखार आना प्रमुख हैं। इनके लक्षणों के अलावा भी कुछ अन्य लक्षण मिल सकते हें। जिनमें लकवा लगना,पेट में दर्द होना,ग्रंथियों में स्थिर सूजन होना,डायरिया की शिकायत होना,पीठ में अकडऩ होना,प्रभावित हड्डी में दर्द और उसकी कार्यशीलता में कमी आना आदि प्रमुख हैं। टीबी की जांच- उन्होंने बताया कि टीबी की जांच के लिए बलगम जांच, छाती एक्सरे, सीबी नाट, टर्यू नाट प्रमुख हैं। ये जांच महेंद्रगढ़ तथा नारनौल में संभव हैं। फोटो कैप्शन: डा. जितेंद्र मोरवाल एवं पावन यादव टीबी सुपरवाइजर
कनीना क्षेत्र में हुई बूंदाबांदी -किसानों का लावणी का काम प्रभावित ***************************************** *********************************************** ***************************************** कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में सोमवार सुबह बूंदाबांदी हुई जिसके चलते किसानों का लावणी का काम प्रभावित हो गया है। जहां विगत दिनों वर्षा होने के बाद दो दिनों मौसम साफ रहा है। इसके बाद सोमवार को सुबह बूंदाबांदी हुई। बूंदाबांदी करीब आधे घंटे तक धीरे-धीरे चलती रही। जिसके चलते कि सानों की सरसों की लावणी तथा पैदावार लेने का कार्य प्रभावित हो गया है। किसान मुश्किल से अपनी फसल को सुखाकर फिर से लावणी तथा पैदावार लेने के कार्य में लगे थे किंतु वर्षा ने फिर से विघ्र डाल दिया। आए दिन मौसम बदल रहा है जिसके चलते किसानों की चिंता की रेखाएं बढ़ रही है। किसानों कहना है कि किसी प्रकार उनकी फसल पैदावार घर तक पहुंच जाए तत्पश्चात वर्षा होती तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं रहेगी। परंतु घर तक फसल पैदावार पहुंचना एक कठिन कार्य हो गया है। किसान देर सवेर समय निकाल कर अपनी फसल कटाई कर रहे हैं। वैसे भी अब मजदूर मिलना कठिन हो गया है क्योंकि मजदूर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार आदि से आते हैं। इस बार कम मजदूर आने से किसानों के सामने लावणी की समस्या बनी हुई है। समस्या उस समय विकराल बन जाएगी जब गेहूं की लावणी आ जाएगी। करीब एक सप्ताह बाद गेहूं की लावणी आने की संभावना जताई जा रही। इसके बाद मजदूर मिलना बहुत कठिन हो जाएगा। फोटो कैप्शन 03: कनीना क्षेत्र में होती हुई बूंदाबांदी
गायों की सेवा हम सभी का परम धर्म-भगत सिंह ***************************************** *********************************************** ***************************************** कनीना की आवाज। गायों की सेवा हम सभी का परम धर्म बनता है। गायों की सेवा नित्य प्रति करनी चाहिए। ये विचार श्रीकृष्ण गौशाला के प्रधान भगत सिंह ने उस समय व्यक्त किया जब गौशाला में मनोज कुमार तथा उसकी पत्नी शिक्षिका उर्मिला यादव अपना जन्मदिन पूरे परिवार सहित श्री कृष्ण गौशाला में मनाने के लिए पहुंची। उन्होंने गायों को हरा चारा, खल, बिनौला खिलाया तथा 5100 रुपए का दान दिया। भगत सिंह ने उनका अभिनंदन किया और कहा कि गायों की सेवा से पाप दोष सब मिट जाते हैं। हमें वैसे तो हर घर में एक-एक गाय जरूर रखनी चाहिए ताकि दूध और घी जैसा अमृत प्राप्त हो सके। किंतु जो व्यक्ति अपने घरों में गाय नहीं रख सकते उन्हें गौशाला में आकर गायों की सेवा करनी चाहिए। इस मौके पर प्रधान की अतिरिक्त सह-सचिव रामपाल यादव, उप-प्रधान दिलावर सिंह, उप प्रधान रविंद्र बंसल, ओम प्रकाश ठेकेदार भडफ़, मा. राम प्रताप यादव, राज ,सत्यवीर गुगनवाला आदि उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन 02:कनीना श्रीकृष्ण गौशाला में जन्मदिन मनाते हुए
सुखदेव भगत सिंह राजगुरु आज अधिक प्रासंगिक है- सत्यव्रत शास्त्री -शहीदी दिवस पर चर्चा का आयोजन ***************************************** *********************************************** ***************************************** कनीना की आवाज। सांस्कृतिक अहीरवाल के कार्यालय में आज शहीदी दिवस पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य कंवर सिंह यादव ने की। इस अवसर पर परिचर्चा में उपस्थित सभी लोगों ने शहीदों को याद करते हुए भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उन्हें गौरवपूर्ण ढंग से याद किया। सांस्कृतिक अहीरवाल के निदेशक सत्यव्रत शास्त्री ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा आज देश में बलिदान दिवस के उपलक्ष्य में अनेको कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं। लेकिन इन तीनों शहीदों के जीवन चरित्र, उनके किए कार्यों की चर्चा कम है । दुर्भाग्यवश उनके खिलाफ गवाही करने वाले लोगों को न तो चिन्हित किया जाता और नहीं जन सामान्य में उनके जीवन के विषय में जानकारी ही प्रकाशित की जा रही। आज देश भर में एक प्रतिशत लोग भी इन तीनों शहीदों के जीवन को नहीं जानते ।और न बातों को जानते कि इनको फांसी के फंदे पर चढऩे के लिए किन लोगों ने गवाही दी थी और इन भरी जवानी में देश पर बलिदान होने की इच्छा रखने वाले युवकों को अंग्रेजों से फांसी की सजा से छुड़ाने के लिए किन लोगों ने प्रयास किये थे । सजा में कुछ कमी आज भी युवाओं के धधकते हृदय में प्रश्न है कि क्या उनकी फांसी को टालने में कौन सहायक हो सकते थे ।वे कौन लोग थे? जो यह नहीं चाहते थे की भगत सिंह राजगुरु सुखदेव लंबे समय तक जीवित रहे ।यद्यपि भगत सिंह राजगुरु सुखदेव स्वयं नहीं चाहते थे कि उनको माफी मिले वह फांसी तक जाना ही चाहते थे ।उनके गुरु चंद्रशेखर आजाद भी इस बात से नाराज थे कि वह फांसी चढें। वे चाहते थे कि वे लोग फांसी पर न चढ़े क्योंकि देश के लिए जीने की आवश्यकता अधिक थी आज भी हम सबको वर्तमान परिस्थितियों पर देखते हुए देश के लिए जीने वाले लोगों को अधिक आवश्यकता है ।देश के लिए जीने का मतलब इस देश के संस्कृति ,सभ्यता, इतिहास ,परंपराओं से अपने आप को जोड़कर उनके किए कार्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है ।आज के कार्यक्रम में सत्यवीर गहली हरियाणा बडेसरा खाप प्रदेश अध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष सावंत सिंह , स्वदेशी जागरण मंच के जिला संयोजक राजेश शास्त्री, सांस्कृतिक अहीरवाल के जिला मीडिया संयोजक शीशपाल यादव ,नारनौल नगर से रतनलाल सैनी पूर्व प्राध्यापक, दिनेश शर्मा हिंदी अध्यापक, कैप्टन ब्रह्मानंद और हीतेंद्र गहली, विकास अग्रवाल उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन 04: शहीदों को याद करते हुए
नि:शुल्क नेत्र जांच एवं आपरेशन शिविर 25 को ***************************************** *********************************************** ***************************************** कनीना की आवाज। आगामी 25 मार्च को बेवल गांव में नि:शुल्क नेत्र जांच एवं आपरेशन शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर का उद्घाटन प्रमुख समाजसेवी अतरलाल एडवोकेट करेंगे। उक्त जानकारी देते हुए शिविर व्यवस्थापक डा. सोमबीर सिंह व निहाल सिंह ने कहा कि बेवल गांव के रायल पैलेस में गांव के समाजसेवी स्व. उमराव यादव की स्मृति में मिसरी देवी आई अस्पताल नीमराणा के प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. बिरेन्द्र सिंह यादव की टीम के तत्वावधान में शिविर आयोजित किया जा रहा है।
बलिदानियों को किया धनौन्दा में याद ***************************************** *********************************************** ***************************************** कनीना की आवाज। गांव धनौन्दा बलिदान स्मृति समारोह आयोजित कर देश के शहीदों को नमन किया गया। मुख्य अतिथि अतरलाल ने शहीद भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर समारोह का शुभारम्भ किया। अध्यक्षता राजेन्द्र सिंह नम्बरदार ने की। अतरलाल ने कहा कि शहीद दिवस मनाने से समाज में नई चेतना जागरूकता तथा देशभक्ति की भावना आती है। उन्होंने शहीद दिवस पर छुट्टी घोषित करने के लिए केंद्र व हरियाणा सरकार का धन्यवाद किया। राजेन्द्र नम्बरदार, सुभाष यादव, ओमप्रकाश व कैलाश सेठ ने शहीद भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव व क्रांतिकारियों की शहादत को नमन करते हुए कहा कि शहीदों की शहादत हमेशा अमर रहेगी। उन्होंने युवाओं से बलिदानियों के जीवन व विचारों से सीख लेने की अपील की। इस अवसर पर किशनपाल, मुकेश, मीर सिंह वैद्य, नवीन जांगड़ा, परमजीत, राकेश यादव ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रजा भलाई संगठन के कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। फोटो कैप्शन 01: बलिदानियों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन करते हुए मुख्य अतिथि
कुतरूं प्राचार्य के कारनामों की 17वीं कड़ी पढ़े 24 मार्च को -कुतरूं की जी हुजूरी न करने वाले शिक्षकों को पढ़ऩे वाले बच्चों एवं बच्चियों से आरोप लगवाकर करता था तंग
Sunday, March 22, 2026
कुतरूं प्राचार्य के कारनामों की 17वीं कड़ी पढ़े 24 मार्च को -कुतरूं का विरोध करने शिक्षकों को पढऩे वाले बच्चों एवं बच्चियों से आरोप लगवाकर करता था तंग
नहीं फेंकना चाहिए नवरात्रों में उगाए हुए जौ को -ज्वारे रस बनाकर करें प्रयोग ************************************** *********************************************** ************************************** कनीना की आवाज। नवरात्रों पर जहां जौ उगाने की एक प्रथा है। करीब 9 दिनों में ये गेहूं और जौ बड़े हो जाते हैं जिन्हें पानी में बहा दिया जाता है। यद्यपि पानी में बहाने से जहां जल दूषित होता है वहीं अनेक विद्वान मानते हैं कि बहाने नहीं चाहिए। इनका उपयोग करना चाहिए। ये अनेक रोगों में काम आते हैं। इस संबंध में विज्ञान के जानकार डा. होशियार सिंह यादव का कहना है कि ये जौ तथा गेहूं जब आठ दिन बाद काटे जाए तो इनसे ज्वारे रस प्राप्त किया जा सकता है। इसमें क्लोरोफिल आयोडीन, सेलेनियम, आयरन, विटामिन आदि अनेक पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए लाभप्रद है। इसलिए नवरात्रि संपन्न किए जाए इन का ऊपरी भाग काट कर पानी में मिलाकर जरूर व्रत खोलना चाहिए जिससे शरीर लंबे समय तक स्वस्थ रहेगा। उनका कहना है कि जहां करीब 350 के करीब बीमारियां ठीक हो जाती है वही कैंसर में भी लाभप्रद है। दांतों से खून आना, दांतो की समस्या को दूर करने के लिए ज्वारे रस पी लेना चाहिए। फोटो कैप्शन 7: नवरात्रों में उगाया गया जौ जिससे बनता है ज्वारे रस।
स्कंदमाता की पूजा से मिलता है अमिट फल -विधि विधान से करें पूजा-दीपक कौशिक ************************************** *********************************************** ************************************** कनीना की आवाज। नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप की पूजा की जाती है जिसका नाम स्कंदमाता है। कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता का नाम दिया गया है भगवान स्कंद बाल बाल रूप में माता की गोद में विराजमान है। ये विचार दीपक कौशिक ने व्यक्त किये। दीपक कौशिक ने पूजा अर्चना की विधि बताते हुए कहा कि सबसे पहले माता के लिए चौकी पर स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए इसके बाद शुद्धिकरण करने के लिए पंचगव्य तैयार करना चाहिए जिसके लिए हमें गोमूत्र गाय का गोबर, गाय का घी, गाय का दही, गाय का दूध एक पात्र में एकत्रित करके पंचगव्य तैयार करें और जिस स्थान में पूजा कर रहे उस स्थान में भी इसका छिड़काव करें और माता रानी के लिए चौकी के बगल में चांदी या मिट्टी के घड़े में जल भरकर कलश की स्थापना करनी चाहिए। इसके बाद हमें मन में संकल्प लेना चाहिए कि है माता यथाशक्ति यथा भक्ति पूजा कर रहे हैं। जो हमारा सामर्थ है उस हिसाब से हम आपकी सेवा में हाजिर हुए हैं, अपना बालक मानकर हमें क्षमा करें। वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों के द्वारा स्कंदमाता सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें माता का आवाहन करना चाहिए। जिसके लिए हमें आसन, आचमन,स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, बिल पत्र, दूर्वा, सिंदूर, आभूषण, पुष्प हरा पुष्प माता को प्रिय है। हरा पुष्प चढ़ाना चाहिए सुगंधित द्रव्य धूप में फल और माता से क्षमा याचना करनी चाहिए तत्पश्चात वितरण करके पूजा संपन्न करें पंचमी तिथि की अष्टधातु देवी स्कंदमाता हैं जिन व्यक्तियों को संतान का अभाव हो वे माता की पूजन अर्चन तथा मंत्र जाप कर लाभ उठाएं। स्कंदमाता संतान को प्राप्ति देने वाली हैं। निश्चय ही स्कंदमाता की पूजा करने से हमारी मनोरथ सफल होती है। माता को भोग एवं प्रसाद स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद गौ ब्राह्मण को देना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है। हमारे मन को शांति मिलती है और माता रानी अति शीघ्र प्रसन्न होती हैं हमारे जीवन के सभी कष्टों को नाश करती हैं और हमारे परिवार का कल्याण करते हैं इसीलिए हमें स्कंदमाता की मन मानसिक शांत चित्त से स्थिर मन से माता की पूजा करनी चाहिए। फोटो कैप्शन: दीपक कौशिक
श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में आमसभा आयोजित -गोचर भूमि के संरक्षण हेतु प्रस्ताव पारित ************************************** *********************************************** ************************************** कनीना की आवाज। श्रीकृष्ण गौशाला कनीना के प्रांगण में एक महत्वपूर्ण आम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें गौशाला कार्यकारिणी, नगर पालिका अध्यक्ष, सभी पार्षद, कस्बे के समाजसेवी एवं गौभक्त बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता कप्तान सूबे सिंह ने की। गोशाला प्रधान भगत सिंह ने बताया कि वर्ष 2003 में शुरू हुई थी। तभी से इसके साथ लगती नगर पालिका की लगभग 20 एकड़ भूमि का उपयोग गोचर उत्पादन के लिए किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि इस भूमि पर गौशाला द्वारा दो ट्यूबवेल स्थापित किए गए हैं, जिनसे फसल की सिंचाई होती है तथा गायों के लिए हरा चारा उगाया जाता है। इसके अतिरिक्त सांसद कोटे से एक कमरा तथा चारे के भंडारण के लिए एक बड़ा गोदाम भी बनाया गया है। वहीं नगर पालिका द्वारा पूर्व में लगभग 100 फीट लंबा टीन शेड भी निर्मित किया गया था जिनका प्रयोग गौशाला द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने इस भूमि को गौशाला की लाइफ लाइन बताते हुए कहा कि अब तक इस भूमि के उपयोग को लेकर नगर पालिका द्वारा गौशाला के पक्ष में कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है। उन्होंने समस्त कस्बावासियों एवं नगर पालिका अध्यक्ष से आग्रह किया कि इस भूमि के उपयोग हेतु गोशाला के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया जाए। इस पर मुकेश नंबरदार, कुलदीप नंबरदार, दीपचंद यादव, कैलाश गुप्ता एवं राज यादव सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया। सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने बहुमत से प्रस्ताव का समर्थन किया। बैठक के दौरान यह विषय भी सामने आया कि उक्त भूमि में से लगभग 5 एकड़ क्षेत्र उप मंडल प्रशासन द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आवास निर्माण हेतु लिए जाने की प्रक्रिया में है। इस पर नगर पालिका प्रधान रिंपी यादव ने सभा को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनके संज्ञान में इस भूमि के किसी हिस्से के आवंटन का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में मिनी सचिवालय निर्माण के लिए जो भूमि चिह्नित की गई थी, उसी पर विचार चल रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका प्रयास रहेगा कि प्रशासन किसी अन्य स्थान पर आवासीय भवन बनाए तथा गोशाला की 20 एकड़ भूमि में से कोई भी हिस्सा आवंटित नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि इस विषय पर 24 मार्च को नगर पालिका हाउस की बैठक में विस्तृत चर्चा की जाएगी। सभा में गौशाला प्रधान भगत सिंह, दीपक यादव, नितेश गुप्ता, राज यादव, विजय चेयरमैन, सुमेर सिंह चेयरमैन, अशोक ठेकेदार, सवाई सिंह पार्षद, राजेश एडवोकेट सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। फोटो केप्शन 05 व 06: बैठक से संबंधित हैं
बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेहलंग में ग्रेजुएशन डे एवं पुरस्कार वितरण समारोह धूमधाम से सम्पन्न ************************************** *********************************************** ************************************** कनीना की आवाज। बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेहलंग में आज प्री प्राइमरी के विद्यार्थियों के लिए ग्रेजुएशन डे एवं पुरस्कार वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम उत्साह, अनुशासन एवं अभिभावकों की गरिमामयी उपस्थिति के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में चेयरमैन हरिश भारद्वाज, अध्यक्षता वाइस चेयरमैन कृष्ण भारद्वाज द्वारा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज उपस्थित रहीं। नन्हे-मुन्ने विद्यार्थी ग्रेजुएशन ड्रेस (गाउन एवं कैप) में मंच पर आए, जिसने उपस्थित अभिभावकों को भावुक और गर्व से भर दिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों की आत्मविश्वास पूर्ण प्रस्तुति ने विद्यालय की उत्कृष्ट शिक्षा व्यवस्था को प्रदर्शित किया। इसके उपरांत शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अभिभावकों में विशेष उत्साह और प्रसन्नता देखने को मिली। चेयरमैन हरिश भारद्वाज ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव होती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहयोग देने का आह्वान किया तथा कहा कि आज का यह ग्रेजुएशन उनके उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत है। प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज ने अपने संबोधन में बच्चों को निरंतर सीखते रहने और आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया तथा अभिभावकों का धन्यवाद करते हुए विद्यालय द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं संस्कार प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम का समापन पुरस्कार वितरण समारोह एवं उसके पश्चात आयोजित अभिभावक-शिक्षक बैठक के साथ हुआ, जिसमें अभिभावकों ने शिक्षकों से अपने बच्चों की प्रगति पर चर्चा की। फोटो कैप्शन 03: विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरण करते बीआर स्कूल के हरिश भारद्वाज, वाईस चेयरमैन कृष्ण भारद्वाज द्वारा तथा प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज 04: मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते नन्हे विद्यार्थी।
कनीना का मां शेरावाली मंदिर, नवरात्रों में आस्था का केंद्र ************************************** *********************************************** ************************************** कनीना की आवाज। नवरात्रों पर दूर दराज से भक्त आकर विधि विधान से पूजा करके ध्वजा को अर्पित कर देते हैं। करीब 61 फुट ऊंचे इस मंदिर में आकर पूजा अर्चना करते हैं। इस मंदिर की देखरेख का काम भी कनीना के संत शिरोमणि बाबा मोलडऩ़ाथ आश्रम पर रहने वाले संत ही करते हैं। मंदिर का इंतिहास- मंदिर की स्थापना करीब 18 वर्ष पूर्व हुई है। इसका निर्माण कार्य संजीत यादव कनीना के निवासी की देखरेख में संपन्न हुआ है। इस मंदिर के चारों ओर द्वार एवं विशाल सीढिय़ां हैं। दूर से ही आकर्षित करता हुआ माता मंदिर वर्तमान में विख्यात है। संत मोलडऩाथ आश्रम परिसर में ही यह मां का भव्य मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर के पास बाबा को ग्राउंड है जहां संतों को भोजन कराया जाता है। मंदिर की भव्य मूर्ति 51 हजार रुपये में जयपुर के प्रसिद्ध कारीगरों द्वारा निर्मित करवाकर विधि विधान से इस मंदिर में स्थापित करवाई गई थी। प्रत्येक नवरात्रों के समय मां के मंदिर को सजाया जाता है। भारी संख्या में भक्तजन यहां आते हैं। इस मंदिर की भव्यता ही इसका आकर्षण है। सुमन रोहिल्ला ने बताया कि कि वो हर वर्ष मां को नवरात्रों में पोशाक पहनाती हैं। कैसे पहुंचा जाए मंदिर- शहर का यह एकमात्र मां शेरावाली का मंदिर है। इस मंदिर तक पहुंचना आसान है क्योंकि पास में सामान्य बस स्टैंड स्थित है। वर्ष में दो बार आने वाले नवरात्रों पर भीड़ एक मेले का रूप ले लेती है। महेंद्रगढ़ के कनीना कस्बे तक रेल सेवा या बस सेवा से पहुंचा जा सकता है। रेलवे स्टेशन से महज दो किमी बस स्टैंड के पास ही यह भव्य मंदिर दिखाई पड़ता है। रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनौल एवं चरखी दादरी से यहां बसों की सहायता से पहुंचा जा सकता है। क्या कहते हैं भक्त. भक्त दिनेश कुमार का कहना है कि कनीना क्षेत्र में यह विशाल मंदिर है जहां नवरात्रों में सुबह.शाम जोत जलती है और पूजा चलती है। भक्तजन भी यहां आकर जोत जलाते हैं। इस मंदिर में भक्तों का पूरे नवरात्रों में तांता लगा रहता है। दूर दराज से भक्त आते हैं और पूजा करते हैं। क्या कहते हैं पुजारी- पूजारी रामनिवास महंत का कहना है कि वर्ष में दो बार आने वाले इन नवरात्रों में वे मां के मदिर जाते हैं और पूजा अर्चना करके विशेष आनंद मिलता है। मां के नवरात्रों में वे व्रत रखते हैं और मां की पूजा अर्चना करने के लिए प्रसाद, नारियल एवं चुनरी ले जाते हैं। मां के चरणों में जोत जलाते हैं। फोटो कैप्शन-01 मां मंदिर 02 मां की मूर्ति। साथ में दिनेश एवं रामनिवास
विश्व मौसम विज्ञान दिवस -23 मार्च आज के दिन उत्तम उपकरणों के चलते मौसम की भविष्यवाणी होती है सटीक-डा.देवराज ************************************** *********************************************** ************************************** कनीना की आवाज। 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया जाता है। 1950 में विश्व मौसम संगठन के रूप में स्थापित हुआ था तब से लेकर आज तक यह दिवस मनाया जाता रहा है। मौसम विज्ञान दिवस के रूप में मनाए जाने के पीछे मौसम की जानकारी देकर, उसका प्रचार और प्रचार करके देश और दुनिया के लोगों की जान माल की हानि को रोकना होता है। भारत में कलकत्ता मौसम विभाग विज्ञान में जान इलियट को प्रथम महानिदेशक नियुक्त किया गया था। तत्पश्चात पुणे, नई दिल्ली आदि स्थानों पर मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना की गई ।मौसम विज्ञान में वायुमंडल का अध्ययन किया जाता है और मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है। भारत में 6 क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र आते हैं। तत्पश्चात अनेकों मौसम विज्ञान केंद्र ब्लाक जिला और हर प्रांत में स्थापित किए गए हैं। मौसम की जानकारी के लिए विभिन्न आंकड़े इक_े किए जाते हैं उनका अध्ययन किया जाता है जिससे मौसम की भविष्य की जानकारी मिलती है। क्या कहते हैं किसान- मौसम विज्ञान का सबसे अधिक लाभ किसानों को होता है। इसलिए अधिकांश भविष्यवाणी किसने के दृष्टिगत की जाती है। वैसे तो हर व्यक्ति ,हर कर्मचारियों को इसका लाभ होता है किंतु किसान खेतों में अपनी फसल पैदा करते हैं और उनके लिए बहुत जरूरी है। कनीना का किसान का कहना है की मौसम की जानकारी सटीक होने के कारण किसान अपनी फसल पैदा करते हैं, फसल काटते हैं, पानी आदि देते हैं या अन्य कोई भी जानकारी प्राप्त होते ही फसलों को ध्यान में रखते हैं। उनका कहना है की मौसम विज्ञान की जानकारी के चलते उनके जान माल को काफी लाभ होता आ रहा है। पुराने समय में बुजुर्ग मौसम की सही जानकारी न मिलने के कारण अपनी फसल तबाह कर बैठते थे, यहां तक की बारिश आदि की जानकारी का सही अनुमान नहीं लगता था। अब उन बातों का सही अनुमान लगने लग गया है। -- सूबे सिंह प्रगतिशील किसान कनीना इस संबंध में पूर्व कृषि अधिकारी डा. देवराज ने बताया की पुराने समय में अत्यधिक आधुनिकी यंत्र नहीं होते थे जो मौसम की सटीक भविष्यवाणी कर सके। इसलिए लंबे समय के आंकड़े,कई सालों के आंकड़े इकट्ठा करके उनके आधार पर अनुमान लगाया जाता था किंतु आधुनिक उन्नत तकनीक के चलते एक सप्ताह एक या दो दिन आगे का भी सही-सही अनुमान लगाया जा सकता है और सूचना मिलती है जिससे खेती में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। अब तो जिला स्तर नहीं खंड स्तर पर भी मौसम की भविष्यवाणी मिल जाती है। कृषि विश्वविद्यालय हिसार से सटीक जानकारी मिलती है और उसी जानकारी के आधार पर किसान फसल में पानी लगाने, वर्षा या पाल या सूखा आदि से कैसे सुरक्षा करें, का पता लगा सकता है। इस प्रकार की सूचनाओं को क्राप एडवाइजरी नाम से जाना जाता है। न केवल किसान अपितु पशुपालन और आम आदमी को भी इसका लाभ होता है। किसी को अपना कार्यक्रम बना रखा है और यह पता लग जाए की वर्षा होगी तो वह आगे पीछे भी अपने कार्यक्रम को निर्धारित कर सकता है। आजकल एडवांस कृषि यंत्र आने से भविष्यवाणी ज्यादा सही मिल पाती है। कभी-कभार ही कोई भविष्यवाणी गलत हो सकती है। -- डा. देवराज फोटो कैप्शन: डा. देवराज और किसान सूबे सिंह
बाइक से 13वीं शहीद स्मारक की यात्रा 23 को -कर चुके हैं देश के 85 से ज्यादा शहीद स्मारकों की यात्रा ************************************** *********************************************** ************************************** कनीना की आवाज। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में अंग्रेजी के प्रवक्ता एवं ग्राम झगड़ोली निवासी मदन मोहन कौशिक 23 मार्च को प्रात: 5 बजे अपनी 23वीं शहीद स्मारक यात्रा का शुभारंभ करेंगे। यह यात्रा महेंद्रगढ़ के राव तुलाराम चौक से शुरू होकर दोपहर बाद फिरोजपुर में हुसैनीवाला भारत पाक बार्डर पर पहुंचेगी जहां शहीदी दिवस पर आजादी के तीन महान नायकों सहित भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को श्रद्धाजलि अर्पित की जाएगी तथा शाम को भारत पाक बार्डर पर सीमा सुरक्षा बल की परेड का अवलोकन भी किया जाएगा। इससे पहले मदन मोहन कौशिक देश के 85 से ज्यादा शहीद स्मारकों का पूरे देश में भ्रमण कर चुके हैं, तीन बार लेह लद्दाख कारगिल तथा दुनिया के सबसे उंचे दर्रो,खरदूंगला, तंगलागला ,बरालाचला, चांगला व नमिकला सहित देश के 527 जिलों का भ्रमण भी अपनी स्प्लेंडर बाइक से कर चुके हैं। उनकी यह यात्रा पांच राज्यों हरियाणा पंजाब गुजरात राजस्थान व मध्य प्रदेश होकर गुजरेगी जिसमें प्रमुख शहीद स्मारकों, ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के स्थलों का भ्रमण किया जाएगा 3200 किलोमीटर लंबी यह यात्रा राष्ट्रीय शहीद स्मारक हुसैनी वाला, बीकानेर में जूनागढ़ फोर्ट तथा करणी माता मंदिर, जैसलमेर का किला, थार का रेगिस्तान, भारत-पाक सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर, देश के सबसे बड़े जिले कच्छ के नमक के मैदान, गुजरात के पाटन जिले के ऐतिहासिक स्थल रानी की वाव, अहमदाबाद के साबरमती आश्रम,लौह पुरुष सरदार पटेल के पैतृक गांव करमसद खेड़ा,बड़ोदरा के स्टैचू आफ यूनिटी मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भावरा गांव में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद स्मारक, उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर, चित्तौडग़ढ़ के किले, हल्दी घाटी तथा अजमेर स्थित पृथ्वीराज चौहान स्मारक पर भी पहुंचेगी। फोटो कैप्शन 01: मदनमोहन कौशिक बाइक से यात्रा की तैयारी करते हुए
मां मंदिर बसई पहाड़ी पर स्थित है भव्य मंदिर ************************************** *********************************************** ************************************** कनीना की आवाज। बसई गांव की पहाड़ी पर 11 वर्ष पूर्व भव्य मंदिर का निर्माण किया गया था जो आज दूरदराज भक्तों के लिए आस्था श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। प्रतिवर्ष हजारों भक्तों ने आकर मन्नत मांगते हैं। जब जब नवरात्रे आते हैं यहां पर मेले लगते हैं और मेलों में अपार भीड़ जुटती है। ऊंची पहाड़ी पर रमणीक स्थान पर मां का मंदिर है। स्थापना का इतिहास इस मंदिर की स्थापना 11 वर्ष पूर्व माता मंदिर की भोलाराम जोशी, महाबीर जोशी एवं उनके परिजनों ने की करवाई थी। परिवार ने मां चिंतपूर्णी हिमाचल की देवी से प्रेरणा लेकर मंदिर का निर्माण करवाया है। इस मंदिर का निर्माण विशेष प्रकार के पत्थर को काटकर बनवाया गया है। करोड़ों रुपये की लागत से इस मंदिर का निर्माण किया गया है। यही कारण है कि इस मंदिर को देखने के लिए दूरदराज से भक्तजन आते हैं। मंदिर की विशेषता- माता मंदिर में प्रतिदिन भक्तों का ताता लगा रहता है किंतु वर्ष में दो बार नवरात्रों पर जहां भीड़ जुटती है वहीं मेले लगते हैं। भक्त मां दुर्गा का लेकर के तथा विभिन्न प्रकार का प्रसाद विशेष रूप से हलवा, चना, बूंदी आदि लेकर के पहुंचते हैं और माता के चरणों में अर्पित करके मन्नत मांगते हैं। माना जाता है कि उनकी मन्नत पूर्ण होती है। समय समय पर यहां भंडारे एवं हवन आयोजित होते हैं। कैसे पहुंचा जाए मंदिर--- माता मंदिर में पहुंचने के लिए दादरी-महेंद्रगढ़ रोड पर आकोदा उतरकर दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। बसई की पहाड़ी पर मंदिर बना हुआ है जो आकर्षण का केंद्र है। कनीना से 17 किलोमीटर दूर पड़ता है। यहां पहाड़ी की चोटी पर रमणीक स्थान है। वही भव्य मंदिर देखकर सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। भक्तों के ठहरने का विशेष प्रबंध किया गया है। चंद्र प्रकाश बसई भक्त- चंद्र प्रकाश बसई जो फिल्मी हीरों भी हैं, का कहना है कि जब से मंदिर बना है तब से वे इस मंदिर जा रहे हैं। प्रतिदिन माता के चरणों में धोक लगाते और मन्नत मांगते हैं जिसके चलते फिल्म इंडस्ट्री में भी उनका नाम है। माता ने उनकी सभी मन्नत पूर्ण की है। उनका कहना है कि माता आने वाले सभी भक्तों पर दया बरसाती रहती है। गोविंदराम जोशी पुजारी- गोविंदराम जोशी का कहना है कि वे सुबह शाम माता की पूजा करते हैं। सुबह जब भी समय लगता हवन करते हैं तथा मंदिर में ही रहते हैं साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं। यात्रियों के मान सम्मान को देने में कोई कसर नहीं हो छोड़ते। यहां भक्त यहां आकर सारे कष्ट भुला देते हैं। मां के दर्शन कर प्रसन्न हो जाते और मन्नत मांग कर अपने अपने घरों में चले जाते हैं। उनका मानना है कि यहां पर मांगी गई मन्नत पूर्ण होती है। फोटो कैप्शन गोविंदराम जोशी, चंद्र प्रकाश बसई तथा मां मंदिर।
Saturday, March 21, 2026
कनीना में धूम धाम से मनाया गया गणगौर पर्व -शनिवार को किया गया समापन **************************************** ******************************************** *************************************** कनीना की आवाज। कनीना में गणगौर पूजन पर्व बड़ी धूम धाम से मनाया गया। गणगौर की 16 दिन तक पूजा चलती है। इसकी शुरुआत होली के दूसरे दिन हुई थी और समापन चैत शुक्ल पक्ष की तृतीय अर्थात शनिवार को कर दिया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि गणगौर पूजन भगवान शिव और पार्वती के विवाह से संबंधित है। और शिव और पार्वती को साक्षी मान कर पूजन किया जाता है। महिलाएं भगवान शिव और पार्वती के पुतले बनाती है और उनका शृंगार करती है। पुतलों सहित महिलाओं ने कनीना में चारों ओर चक्कर लगवाया तथा नृत्य किया। इस मौके पर शकुंतला शर्मा , सुशीला शर्मा ,स्नेह लता, रेनू शर्मा ,रूपाली, दीप्ति, हेमलता मौजूद थी। क्या कहना है महिलाओं का- गण का अर्थ है शिव तथा गौर का अर्थ है पार्वती। गणगौर का त्यौहार (चैत्र शुक्ल तृतीया) मुख्य रूप से माता पार्वती (गौर) और भगवान शिव (गण) को समर्पित है, जो अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने कठोर तपस्या से शिवजी को प्रसन्न कर पति के रूप में प्राप्त किया था। यह पर्व प्रेम, समर्पण और स्त्री शक्ति का उत्सव है, जिसमें महिलाएं सज-धजकर पूजा करती हैं। गणगौर की पौराणिक कथा- महिलाओं ने बताया कि कथा के अनुसार, माता पार्वती हिमालय की पुत्री थी और उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए बहुत कठिन तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। एक बार शिव-पार्वती और नारद जी पृथ्वी पर भ्रमण कर रहे थे। गरीब स्त्रियों ने उन्हें भक्तिपूर्वक जो कुछ उपलब्ध था, भोग लगाया। माता पार्वती ने प्रसन्न होकर उन पर अपने सुहाग के छींटे डाले, जिससे उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिला। इसके बाद जब धनी स्त्रियों ने कीमती थाल सजाकर पूजा की, तो माता पार्वती ने अपनी उंगली चीरकर उनके ऊपर रक्त छिड़का और कहा कि सच्चा सुहाग समर्पण में है दिखावे में नहीं। एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, एक वृद्धा मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। उसने माली के बगीचे से दूब/घास ली, तो माली ने उसे पकड़ लिया। तब माता पार्वती ने प्रसन्न होकर माली को सोने-चांदी के खजाने से भर दिया। महिलाओं ने बताया कि सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन काला रंग वर्जित माना जाता है और लाल-गुलाबी रंग शुभ माना जाता है। मिट्टी से पार्वती और शिवजी की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा की जाती है। गणगौर का पर्व राजस्थान सहित उत्तर भारत में हर्षोल्लास से मनाया जाता है और यह वसंत ऋतु व अच्छी फसल की कामना का भी प्रतीक माना जाता है। फोटो कैप्शन 07: शिव एवं पार्वती के पुतले सिर पर रखकर गणगौर पूजन करते हुए
कनीना में सुबह सवेरे छाया कोहरा -बढ़ गई है ठंड, फिर से निकाले ऊनी वस्त्र . **************************************** ******************************************** *************************************** कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जहां गत दिनों से मौसम में बदलाव हुआ है, वर्षा हुई है। जिसके बाद मौसम ठंडा हो गया है। तापमान कम से कम 16 डिग्री अधिकतम 27 डिग्री पहुंच गया है। गर्मी में भी सर्दी का एहसास होने लगा है। लोग एक बार फिर से उन्हें कपड़े निकाल कर पहने हुए नजर आए। गर्मी पडऩे से लोगों ने ऊनी कपड़े रख दिए थे किंतु अचानक मौसम बदलने से फिर से निकालने पड़े हैं। उधर इस समय किसान अपनी सरसों की फसल सुखा रहे हैं। जहां तीन दिनों तक वर्षा होने के बाद अब किसान सरसों की फसल को सूखाने में लग गये हैं ताकि पैदावार ली जा सके। तीन दिन बूंदाबांदी के बाद में सूरज तेजी से चमकने लगा। किसान मौसम खुलते अपनी सरसों की फसल सूखने लग गये है और गेहूं फसल में जो नुकसान हुआ इसका जायजा भी ले रहे हैं। फोटो कैप्शन 6: कनीना क्षेत्र में छाया कोहरा
कनीना खास रेलवे स्टेशन पर छाया रहता है अंधेरा -ट्रेन आने पर दुर्घटना की आशंका **************************************** ******************************************** *************************************** कनीना की आवाज। कनीना खास रेलवे स्टेशन पर यूं तो ट्रेन न रुकने से कनीनावासी परेशान हैं और उन्हें महेंद्रगढ़ या रेवाड़ी जाकर ट्रेन पकडऩी पड़ रही है। उपमंडल होते हुए भी कनीना की यह दुर्गति बनी हुई है। वहीं रेलवे स्टेशन पर अंधेरा छाए रहने से लोग परेशान है। जब ट्रेन आती है तब भी कुछ नहीं दिखाई देता जिससे कोई भी दुर्घटना घट सकती है। ट्रेन से सफर करने वाले यथार्थ, रमेश, सुरेश, दिनेश कुमार एवं अमीश कुमार आदि ने बताया कि वो शुक्रवार की सुबह सवेरे दिल्ली जाने के लिए तैयार थे किंतु पहले तो कनीना की बिजली सप्लाई बंद थी। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और वर्षा के कारण कीचड़ में पैर लग रहे थे। तत्पश्चात बिजली सप्लाई होने के बाद भी कनीना खास रेलवे स्टेशन अंधेरे में डूबा रहा। ट्रेन भी मुश्किल से दिखाई दे रही थी। जब मौसम खराब होता है और अंधेरा छाए रहता है तो ऐसी स्थिति में ट्रेन से सफर करना जोखिम भरा कार्य बन जाता है। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि कम से कम कनीना खास रेलवे स्टेशन की शुद्ध ली जाए। सभी ट्रेनों का ठहराव भी किया जाए, लाइट की उचित व्यवस्था की जाए। फोटो कैप्शन 5: कनीना खास रेलवे स्टेशन पर छाया अंधेरा
कुकिंग सिलिंडर जांच के लिए गठित टीम ने की विभिन्न गैस एजेंसियों की जांच --सब कुछ ठीक-ठाक पाया गया **************************************** ******************************************** *************************************** कनीना की आवाज। फूड सप्लाई इंस्पेक्टर ध्यान सिंह नेतृत्व में गठित टीम ने कनीना फूड सप्लाई इंस्पेक्टर के तहत आने वाली 7 विभिन्न गैस एजेंसी की जांच की। जिला उपयुक्त नारनौल के आदेश अनुसार सभी गैस एजेंसियों की जांच करने पर पाया कि सभी जगह बुकिंग सही चल रही है, सप्लाई भी सही चल रही है और किसी से अधिक पैसे भी नहीं लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बड़ा कनीना फूड सप्लाई के तहत भडफ़, कनीना, सेहलंग, बाघोत, पाथेड़ा, भोजावास एवं दौंगड़ा अहीर गैस एजेंसियां आती है। जहां पर गठित टीम ने जाकर हर पहलू को जांचा, सभी ठीक-ठाक पाए गए। फोटो कैप्शन 3: गठित टीम गैस एजेंसी का दौरा करते हुए
विश्व जल दिवस पर ......22 मार्च जल नहीं बचाया तो होगा भविष्य अंधकारमय **************************************** ******************************************** *************************************** कनीना की आवाज।पृथ्वी पर कहने को 71 प्रतिशत भू-भाग पर जल भरा हुआ है किंतु पीने योग्य जल 3 प्रतिशत से भी कम है। यदि जल का इसी प्रकार दोहन होता रहा तो आने वाले समय में जल गंभीर समस्या बन कर उभरेगा जिससे जीना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे मिल वर्षा जल संरक्षण करने, भूमिगत जल को बचाने, रिचार्ज करने आदि की बातें बार-बार उभर कर आ रही। इस संबंध में शिक्षाविद एवं विज्ञान के जानकार डा. होशियार सिंह यादव से बात की गई- उनका कहना है कि जमीन के नीचे 1.6 प्रतिशत पानी और हवा में 0.001 प्रतिशत हवा में वाष्प के रूप में है। दिनोंदिन शुद्ध जल घटता जा रहा है। अगर जल का संरक्षण नहीं किया जाए तो भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्षा के जल को घरों में इकट्ठा करना चाहिए। वर्षा एवं घरेलू जल को भूमिगत भूमि में जाने दिया जाए। वर्षा जल सहेजकर जल से सब्जी और फल बनाने चाहिए। उनका कहना है क्या जल को जीवन का अमृत माना गया है। जल बिना बिना जीना दूभर हो जाएगा। ऐसे में उन्होंने जल को भविष्य के लिए बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल अधिक प्रयोग किया गया तो जल संकट निश्चित है। जल आवश्यकतानुसार प्रयोग करना चाहिए, जल को बहाने से रोकना बहने से रोकना चाहिए। उनका कहना है कि जल है तो कल है। अगर इंसान को मौत से बचना है तो पानी का सोच समझकर प्रयोग किया जाना चाहिए। ऐसे में प्रत्येक जन को प्रतिदिन 2-4 लीटर पानी जरूर बचाना चाहिए। पूरे देश में प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन 2-4 लीटर पानी बचाएगा तो आने वाले समय में पानी की पूर्ति हो सकेगी। वरना आने वाले समय में पेट्रोल पंप की भांति उपलब्ध होगा। डा. यादव का कहना है कि पीने योग्य पानी में से 2.4 प्रतिशत ग्लेशियर और उत्तरी दक्षिणी धु्रव पर जमा हुआ है। केवल 0.6 प्रतिशत पानी झीलों तालाबों में है जिसका उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि एक अनुमान अनुसार धरती पर 32 करोड़ 60 लाख खराब गैलन पानी है। अगर यह पानी इसी रफ्तार से प्रयोग किया जाता रहा तो अधिक दिनों तक नहीं चल पाएगा। ऐसे में उन्होंने कम पानी वाली फसलें उगाने, आवश्यकतानुसार पानी प्रयोग करने पर बल दिया। उनका कहना है कि एक इंसान खाने पीने में नहाने में कपड़े धोने में प्रतिदिन 50 से 60 लीटर पानी प्रयोग कर लेता है। यही हाल चलता रहा तो भविष्य में पीने योग्य शुद्ध जल भी नहीं मिल पाएगा। ऐसे में सभी की छतों से निकलने वाला बारिश का जल तथा घरों से निकलने वाला जल रिचार्ज में मिलाना चाहिए ताकि भूमिगत जल में जाकर यह जल शुद्ध अवस्था में मिल सके। फोटो कैप्शन: होशियार सिंह
पदयात्रियों का दल पहुंचा माता मंदिर घड़ी -5 घंटों में पहुंचा कनीना से महासर **************************************** ******************************************** *************************************** कनीना की आवाज। कनीना से 10 व्यक्तियों के पदयात्रियों का एक दल घड़ी महासर के लिए पदयात्रा पर रवाना हुआ और 5 घंटे में अपना सफर पूरा किया। इन दस व्यक्तियों में ओमप्रकाश बाबूजी, निरंजन, उदय सिंह प्रधान, सतीश कुमार ,शिवचरण, सुरेंद्र सिंह, सतवीर बोहरा, संजीव भारद्वाज, वेदपाल, श्रीकिशन शर्मा एवं डा. होशियार सिंह यादव प्रमुख थे। इनमें से 6 व्यक्ति करीरा से संबंध रखते हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्थानों पर वे पदयात्रा कर रहे हैं। इससे पहले भी बलवाड़ी के लिए पदयात्रा पर गए थे। अब 29 मार्च को भैंरू का बास पदयात्रा पर जाएंगे। महासर पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। डा. होशियार सिंह ने बताया कि वे कई बार कांवड़ हरिद्वार से लाकर बाघेश्वरधाम पर अर्पित कर चुके हैं वहीं खाटू श्याम भी जाते रहे हैं। उधर महासर माता मंदिर के पुजारी राकेश कुमार ने बताया कि माता मंदिर पर 25 मार्च को मेला लगेगा। इस बार पुष्करदत्त पुजारी की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्षभर माता मंदिर में भंडारा लगता है। प्रतिदिन सुबह 9 बजे भोग लगाकर भंडारे का शुभारंभ कर दिया जाता है। यह भंडारा कमेटी द्वारा लगाया जाता है। राकेश कुमार पुजारी ने बताया कि भंडारे में कोई भी वक्ति आकर खाना खा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे संसार में जहां कहीं भी इस क्षेत्र के लोग बसे हैं वो भी इस दिन महासर पहुंचते हैं। अमेरिका, जर्मन, हार्वर्ड आदि अनेक देशों से चलकर भक्त कुलदेवी पर आकर विवाह शादी जोड़े की जात लगाते हैं तथा बाल उतरवाते हैं। उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माता के यहां यहां पर हलवा, पूड़ी, चना का भोग लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि हर शुक्ल पक्ष सप्तमी को यहां हर मां छोटा मेला लगता है लेकिन दो बार वर्ष में नवरात्रों का मुख्य मेला लगता है। उन्होंने बताया इस पंचमी के दिन 23 मार्च को भारी संख्या में भक्तों का एक दल अटेली से चलकर आएगा। पुलिस का पूरा प्रबंध है। फोटो कैप्शन 01: माता मंदिर में पैदल पहुंचे भक्त
डा. भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति की बैठक 22 को **************************************** ******************************************** *************************************** कनीना की आवाज। रविवार 22 मार्च को डा. भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति कनीना की एक बैठक महर्षि वाल्मीकि धर्मशाला कनीना में शाम 4:30 बजे बुलाई गई है। प्रधान कृष्ण कुमार पूनिया ने बताया, इस बैठक में कनीना ब्लाक के सभी सामाजिक बुद्धिजीवी लोग तथा ब्लाक कनीना की सभी समितियां ेके पदाधिकारी इस बैठक में शामिल होंगे। समिति के महासचिव राजेंद्र कपूरी ने बताया कि बैठक में विशेष मुद्दों पर विचार विमर्श किया जाएगा तथा समिति के सदस्यता बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। इसलिए सभी कनीना ब्लाक के क्षेत्रवासियों सभी समितियों के पदाधिकारी व सामाजिक बुद्धिजीवी लोगों से डॉ भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति की तरफ से अपील है कि इस बैठक में ज्यादा से ज्यादा लोग समय पर प