कृत्रिम विधि से पकाए हुये आमों की बहार
-डाक्टरों की राय में नहीं खाने चाहिए ऐसे फल
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कनीना की आवाज। कनीना के विभिन्न गांवों और विभिन्न शहरों में वर्तमान में आम की बिक्री तेजी से चल रही है। ये आम देखने में तो बहुत मधुर और पके हुए लगते हैं लेकिन यदि हकीकत में जाए जाए तो कार्बाइड से पका कर बेचे जा रहे हैं। बाजार में जल्दी आने से इनकी मार्केट बढ़ी हुई है, ये जल्दी खराब हो जाते हैं और स्वास्थ्य पर दूरगामी नुकसान पहुंचाते हैं। इन आमों को डाक्टर खाने से बचने की सलाह देते हैं।
कैल्शियम कार्बाइड से पके हुए आम दिमाग, स्नायुतंत्र एवं फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं और इसी विधि से केला, आम, पपीता, तरबूज आदि को फल पकाए जा रहे हैं ताकि उनकी मांग बढ़ सके। फल खाने से लीवर को नुकसान पहुंचता है वही पोषक तत्व भी कम हो जाते हैं।
बालकिशन और श्रीकिशन वैद्य का कहना है कि कार्बाइड से पके हुए आम लीवर को बेहद नुकसान पहुंचा सकते हैं जिसके परिणाम स्वरूप भविष्य में शारीरिक समस्या उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने इस प्रकार के फलों को खाने से बचने की सलाह दी है। डा वेद प्रकाश कनीना ने बताया कि यह फल लगातार प्रयोग करने से दिमाग की परेशानी बढ़ जाएगी स्नायु तंत्र खराब हो जाएंगे, फेफड़े आदि काम करना बंद कर देंगे। उन्होंने इन फलों से बचने की सलाह दी अपितु जब तक कार्बाइड से पके आम आ रहे हैं तब तक इन फलों को न खाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि यह फल देखने में अच्छे लगेंगे किंतु कृत्रिम विधि से पकाए हुए हैं। ये भविष्य में शरीर को नुकसान पहुंचाएंगे।
पूर्व कृषि वैज्ञानिक डा. देवराज ने बताया कि आम की पैदावार गंगा के तट के साथ-साथ मैदानी इलाकों में ज्यादा होती है। उत्तर प्रदेश, बिहार आदि क्षेत्रों में भारी मात्रा में आम पैदावार होती है जो दिल्ली से विभिन्न राज्यों में पहुंचाए जाते हैं। दिल्ली में इनको पैक किया जाता है। उन्होंने बताया कि आम कतई नहीं खाने चाहिए क्योंकि ये नुकसानदायक होते हैं। उन्होंने पपीता, केला व तरबूज आदि जो कार्बाइड से पकाते हैं। इनसे भी बचने की सलाह दी है।
उल्लेखनीय है कि बाजार में कैल्शियम कार्बाइड से पकाए गए फल जमकर बेचे जा रहे हैं। अनजाने में लोग भी इन्हें बड़े चाव से खा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गलत तरीके से पकाए गए फलों का लगातार सेवन गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। सबसे ज्यादा खतरा आम, पपीता और तरबूज से है।
डाक्टर जितेंद्र मोरवाल का कहना है कि कार्बाइड से पके फलों को खाने से स्वास्थ्य पर दूरगामी दुष्प्रभाव पड़ता है। फलों को समय से पहले पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड नामक रसायन का प्रयोग किया जाता है। ये फल लाभ कम नुकसान अधिक पहुंचाते हैं। इसमें काफी मात्रा में कार्बाइड के अंश रहते हैं, जो लीवर सहित शरीर के अन्य भागों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही फलों से मिलने वाले पोषक तत्वों को कम कर देते हैं।
कार्बाइड से पके फलों से कम मिलता है विटामिन-
कार्बाइड से पके आम में विटामिन की मात्रा कम हो जाती है। कैल्सियम कार्बाइड एक रसायनिक पदार्थ है, जो फलों की नमी पानी से क्रिया करके इथाइल गैस बनाता है। इससे गर्मी उत्पन्न होने से समय से पहले फल पक जाता है। यह गैस फलों के माध्यम से लोगों के शरीर में प्रवेश कर जाती है। इससे कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं।
जहर की श्रेणी में कार्बाइड-
कार्बाइड से पके फलों के सेवन से दुष्प्रभाव तत्काल हो, लेकिन लगातार सेवन करने से पेट में छाले होने के साथ लीवर गुर्दे पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कार्बाइड केमिकल जहर की श्रेणी में आता है इसलिए लोगों को कार्बाइड से पके फलों के सेवन से बचना चाहिए।
कार्बाइड से पकने वाले फलों की जांच कराने के लिए क्षेत्र में लेबोरेट्री नहीं है। कार्बाइड से पकाए गए फल पूरी तरह से नहीं पक पाते हैं। इसकी पहचान गौर करने से हो सकती है। यह फल ऊपर से पके अंदर से कच्चे होते हैं। इनका रंग भी प्राकृतिक रूप से पके फलों की अपेक्षा तेज होता है। फलों को हाथ में लेकर तेज रंगों को देखकर इनकी पहचान की जा सकती है। अगर आम में एलकोहल, कार्बाइड या किसी अन्य तरह की महक आती है ऐसे आम न खरीदें। ये ज्यादा पके और अंदर से खराब हो सकते हैं। अच्छे आम पर सामान्य के अलावा कोई दाग नहीं होते जबकि केमिकल वाले आम का रंग 2-3 दिन के अंदर काला होने लगता है। आम खरीदते समय इन्हें दबाकर देखें। पके आम आसानी से दब जाएंगे.
आम खरीदने से पहले इन्हें चखकर देखें चखने से मीठे और स्वादिष्ट लगें तो ही लें जबकि कार्बाइड से पकाए फल का स्वाद किनारे पर कच्चा और बीच में मीठा होता है। बिना कार्बाइड के पके हुए फल का वेट और कलर एक समान होता है। स्वाद में भी पूरा फल एक समान मीठा होता है. यह लंबे समय तक खराब नहीं होते जबकि कार्बाइड से पकाए फलों का भार समान नहीं होता। बाजार से खरीदे हुए आम पहले साफ पानी से धो लें फिर किसी ठंडी जगह पर एक-दो घंटे रख दें। इसके बाद खाने में इस्तेमाल करें।
फोटो कैप्शन 06: बेचे जा रहे आम
सिगड़ी बनेगी रोल माडल ग्राम पंचायत, मिल सकेगी 24 गुणा 7 पेयजल आपूर्ति - जिला सलाहकार
-वर्तमान स्थिति का किया अवलोकन, डोर टू डोर अभियान 1 मई से शुरू
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कनीना की आवाज। महेंद्रगढ़ जिले की ग्राम पंचायत सिगड़ी को 24 गुणा 7 पेयजल आपूर्ति के लिए रोल माडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस संबंध में जिला सलाहकार मंगतुराम सरसवा ने जानकारी देते हुए बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले से एक-एक ग्राम पंचायत का चयन 24 घंटे पेयजल आपूर्ति के लिए किया जा रहा है, जिसमें महेंद्रगढ़ जिले से सिगड़ी ग्राम पंचायत का चयन किया गया है।
इस कड़ी में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, जल एवं स्वच्छता सहायक संगठन तथा ग्राम जल एवं सीवरेज समिति के सदस्यों के साथ एक बैठक आयोजित की गई। सरपंच पूनम देवी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जिला सलाहकार मंगतुराम सरसवा ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और ग्राम पंचायत को रोल मॉडल बनाने के लिए विस्तृत चर्चा की।
उन्होंने बताया कि 24 गुणा 7 पेयजल आपूर्ति शुरू करने से पहले जमीनी स्थिति का आकलन अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए प्रत्येक घरेलू नल कनेक्शन पर टोंटी और स्टैंड पोस्ट होना जरूरी है। साथ ही योजना की सफलता के लिए सामुदायिक सहभागिता भी महत्वपूर्ण है।
बैठक में ग्राम जल एवं सीवरेज समिति के सदस्यों ने बताया कि गांव दो भागों में विभाजित है, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत घरेलू नल कनेक्शन सही स्थिति में हैं और उनमें टोंटी व स्टैंड पोस्ट लगे हुए हैं, जबकि शेष 40 प्रतिशत कनेक्शनों में सुधार की आवश्यकता है। इसके लिए घर-घर सर्वे कर आवश्यक कार्य किए जाएंगे।
कनिष्ठ अभियंता दीपचंद ने बताया कि ढांचागत सुधार के लिए जल्द ही जलघर का निरीक्षण कर आवश्यक कार्य चिन्हित किए जाएंगे। प्रत्येक घर के नलों पर टोंटी, स्टैंड पोस्ट व उचित कनेक्शन सुनिश्चित किए जाएंगे, ताकि 24 घंटे पानी की आपूर्ति के दौरान जल की बर्बादी न हो। उन्होंने बताया कि सिगड़ी गांव में वर्ष 2017 में निर्मित जलघर लगभग 3 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें लगभग 26 लाख लीटर क्षमता का भूमिगत स्टोरेज टैंक तथा 1 लाख लीटर क्षमता की ओवरहेड टंकी उपलब्ध है। वर्तमान में यह व्यवस्था प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 70 लीटर जल उपलब्ध कराने की क्षमता रखती है।
ग्राम जल एवं सीवरेज समिति की सदस्य पिंकी और सीमा ने इस योजना पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे विशेष रूप से महिलाओं को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि पहले जहां पानी के लिए कुओं पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब हर घर नल से जल उपलब्ध है। अब 24 घंटे आपूर्ति से गांव को नई पहचान मिलेगी।
सरपंच पूनम देवी ने विभागीय अधिकारियों को आश्वस्त किया कि सभी ग्रामीण इस योजना में पूर्ण सहयोग करेंगे। वहीं खंड संसाधन संयोजक मोहित कुमार ने बताया कि 1 मई से गांव में जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा, जिसके तहत ग्रामीणों को योजना एवं जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
इस अवसर पर बीआरसी मोहित कुमार, सरपंच पूनम देवी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पिंकी, सीमा, नलकूप चालक हेमलता, संतोष, यशपाल, संजय कुमार, सुरेंद्र सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
निरंतर व गुणवत्तायुक्त जल आपूर्ति पर रहेगा विशेष ध्यान-अमित जैन
कार्यकारी अभियंता अमित जैन ने बताया कि हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में 24 गुणा 7 पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का कार्य जल जीवन मिशन के माध्यम से किया जा रहा है। इसके तहत पहले प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया और अब दूसरे चरण में निरंतर एवं गुणवत्तायुक्त जल आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सिगड़ी गांव में पाइपलाइन नेटवर्क को मजबूत करने, प्रेशर मैनेजमेंट, जल भंडारण संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण तथा जल गुणवत्ता की नियमित जांच पर कार्य किया जाएगा। साथ ही डिजिटल मानिटरिंग एवं शिकायत निवारण प्रणाली भी लागू की जाएगी, जिससे जल आपूर्ति व्यवस्था पारदर्शी एवं प्रभावी बन सके।
फोटो कैप्शन 04: बैठक के दौरान ग्रामीणों के साथ पेयजल व्यवस्था पर चर्चा करते विभागीय अधिकारी।
फोटो कैप्शन 05:सिगड़ी वाटर वर्क्स परिसर में ग्राम जल एवं सीवरेज समिति एवं विभागीय टीम।
कनीना वार्ड-14 उपचुनाव
प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न मिलते ही आ गई चुनाव प्रचार में तेजी
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कनीना की आवाज। कनीना कस्बे के वार्ड नंबर 14 में होने वाले उपचुनाव ने अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। सभी प्रत्याशियों को उनके चुनाव चिन्ह आवंटित हो चुके हैं और जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे चुनावी तस्वीर भी साफ होतीजाएगी।
इस बार का उप-चुनाव सामान्य नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बदलाव और जनभावनाओं का चुनाव कहा जा रहा है। लंबे समय से कस्बे की राजनीति पर पकड़ बनाए हुए बड़े परिवारों के खिलाफ लोगों में स्पष्ट नाराजगी देखने को मिल रही है। वोटर अब विकास, पारदर्शिता और एकजुटता के मुद्दों पर मतदान करने के मूड में नजर आ रहे हैं।
इसी बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरे कस्बे को चौंका दिया। एक प्रत्याशी द्वारा ऐसे व्यक्ति के प्रभाव में आकर नामांकन दाखिल करना, जिसे कस्बे में विवादित छवि लिए जाना जाता है, लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर इस कदम को भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ माना जा रहा है, जिससे उस प्रत्याशी के प्रति लोगों में असंतोष बढ़ गया है।
कस्बे के लोगों का मानना है कि यह चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का नहीं, बल्कि उन ताकतों को जवाब देने का मौका है जिन्होंने वर्षों से आपसी एकता को कमजोर किया। यही कारण है कि निर्दलीय उम्मीदवारों के प्रति जनता का झुकाव तेजी से बढ़ रहा है, जिन्हें आम जनता की आवाज और असली प्रतिनिधि के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं, इस चुनाव में बाहरी हस्तक्षेप की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं। जिन पर पहले भी चुनावों में मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप लग चुके हैं। हालांकि, इस बार जनता पहले से अधिक सतर्क और जागरूक नजर आ रही है।
कुल मिलाकर वार्ड 14 का यह उपचुनाव अब बड़े राजनीतिक चेहरों और आम जनता के उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कस्बे की जनता किस पर भरोसा जताती है—पुरानी राजनीति पर या नए बदलाव की उम्मीद पर। दस मई को मतदान होगा और 13 मई को नतीजा आएगा।
दोहरी गर्मी-
कनीना का यह चुनाव दोहरी गर्मी पैदा कर रहा है। एक ओर दोपहर को तापमान 42 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है किंतु वोट मांगने वाले घर में छुपने की बजाय वोट मांगते गलियों में नजर आते हैं। इस प्रकार वे गर्मी में गर्मी बढ़ा रहे हैं।
हर हथकंडे को रहे हैं अपना-
चुनाव लडऩे वाले कई हत्थकंडे अपना रहे हैं। एक ओर जहां वोट पाने के लिए वादे कर रहे हैं वहीं उनके रिश्तेदारों से वोट देने की अपील कर रहे हैं। सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं वहीं रात दिन एक किए हुए हैं।
फोटो कैप्शन= नरपालिका कनीना
नगरपालिका कनीना उपचुनाव (वार्ड-14)
-विकास और सुमेर सिंह यादव ने लिया अपना नामांकन पत्र वापिस
-नामांकन वापसी के बाद 6 प्रत्याशी मैदान में
-उम्मीदवारों को किए चुनाव चिन्ह आवंटित
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कनीना की आवाज। नगरपालिका कनीना के वार्ड संख्या 14 में होने वाले उपचुनाव के तहत आज नामांकन पत्र वापसी की प्रक्रिया निर्धारित समयानुसार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इस दौरान विकास और सुमेर सिंह यादव ने अपने नामांकन पत्र वापस ले लिए।
चुनाव रिटर्निंग अधिकारी एवं एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 21 से 25 अप्रैल तक कुल 8 नामांकन पत्र प्राप्त हुए थे, जिनकी 27 अप्रैल को हुई जांच (स्क्रूटनी) में सभी नामांकन वैध पाए गए थे। आज नाम वापसी के बाद अब कुल 6 प्रत्याशी चुनाव मैदान में शेष रह गए हैं।
उन्होंने बताया कि नाम वापसी प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत सभी शेष प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए गए हैं। अब उपचुनाव के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 मई को मतदान कराया जाएगा तथा 13 मई को मतगणना होगी।
प्रशासन द्वारा चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई हैं। मतदाताओं की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम (संपर्क नंबर-01285-294030) सक्रिय है। मतदान केंद्र के रूप में 'पितामह कान्ह सिंह धर्मशाला निर्धारित किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि चुनाव प्रक्रिया सुचारू एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
फोटो कैप्शन 03:चुनाव चिन्ह आवंटित करते चुनाव रिटर्निंग अधिकारी एवं एसडीएम डा. जितेंद्र
कई गांवों में संपर्क करके दस मई का दिया न्यौता
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कनीना की आवाज। 10 मई को भोजावास गांव में मनाई जाने वाली वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती का न्यौता देने के लिए अतरलाल एडवोकेट ने इसराणा, पड़तल, मोड़ी, गोमली, कटकई, मोहनपुर, भडफ़ गांवों का दौरा किया। अतरलाल ने ग्रामीणों से जयंती समारोह में ज्यादा से ज्यादा पहुंचने का आह्वान करते हुए कहा कि संत, महापुरुष, योद्धा, शहीद किसी एक जाति समुदाय के नहीं होते बल्कि सम्पूर्ण देश की आन-बान-शान होते हैं। उनकी स्मृति में आयोजित कार्यक्रमों में सभी को बढ़ चढ़ कर भाग लेना चाहिए। सभी गांवों में ग्रामीणों ने जयंती समारोह में बढ़ चढ़ कर भाग लेने का भरोसा दिया। इस अवसर पर उनके साथ भाग सिंह चेयरमैन, राकेश यादव, दान सिंह प्रजापत, मीर सिंह वैद्य आदि आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 02: ग्रामीणों को न्योता देते अतरलाल एडवोकेट।
स्कूली बच्चों ने किया गोशाला का दौरा
-प्रधान भगत सिंह ने समझाई गोशाला की गतिविधियां
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कनीना की आवाज। आरपीएस स्कूल के तीन बसों में आए बच्चों एवं स्टाफ ने श्रीकृष्ण गोशाला कनीना का भ्रमण किया तथा गोशाला की दैनिक गतिविधियों को समझा। प्रधान भगत सिंह गोशाला की पुरानी एवं वर्तमान गतिविधियों को बखूबी से समझाया।
सेवक ने बच्चों के साथ गायों को गुड़ खिलाया। भगत सिंह ने कहा कि कनीना की गोशाला वर्तमान प्रदेश की अग्रणी गोशालाओं में से एक बन चुकी है। अभी विकास कार्य चल रहे हैं और भविष्य में भारतभर की अग्रणी गोशालाओं में से एक होगी। इस मौके पर स्कूल सीइओ डा. पवित्रा राव, प्राचार्या, स्टाफ राखी सेक्सना, रोजी भारद्वाज,पूजा शर्मा,मनीषा रानी,सुदेश, संगीता यादव,सोनिया,सपना,मोनिका, वैभवी, सुषमा, ज्योति एवं श्रीकृष्ण गौशाला पदाधिकारी मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 01: स्कूली विद्यार्थी गोशाला का दौरा करते हुए
बवाना गांव में पुलिस का डोर टू डोर नशा मुक्त अभियान
- ग्रामीणों को नए आपराधिक कानूनों के प्रति भी किया गया जागरूक।
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कनीना की आवाज। आमजन को नशे के खिलाफ जागरूक करने के लिए पुलिस अधीक्षक दीपक के दिशा-निर्देशों पर डोर टू डोर नशा मुक्त अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में थाना सदर कनीना के गांव बवाना में निरीक्षक शारदा और उनकी टीम द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पुलिस टीम ने गांव के मंदिर में ग्रामीणों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी देकर जागरूक किया। इस दौरान विशेष रूप से युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस उन लोगों को मुख्यधारा में लाने का पूरा प्रयास कर रही है जो नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। जो भी नशा पीडि़त व्यक्ति इस दलदल से बाहर निकलना चाहता है, पुलिस उसकी हर संभव मदद करेगी। इसके साथ ही, ग्रामीणों को मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
नशा मुक्ति के साथ-साथ पुलिस टीम ने ग्रामीणों को नए आपराधिक कानूनों के प्रति भी जागरूक किया। उपस्थित लोगों को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में बताया गया। इस संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने भी पुलिस टीम के साथ अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर गांव के सरपंच प्रतिनिधि भगत सिंह सहित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सभी मौजूद लोगों को भविष्य में कभी नशा न करने की शपथ दिलवाई गई।
सोमवार को अंधड़ ने पहुचाई क्षति
-पेड़ों के फल टूटकर गिरे
--पेड़ भी टूटे














































