Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Tuesday, March 10, 2026



 

खेड़ी में लड़की का घोड़ी पर निकाला बनवारा
---शादी 12 मार्च की
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव खेड़ी तलवाना निवासी श्री सूबे सिंह ने अपनी सुपुत्री मोनिका के विवाह समारोह के दौरान एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल की। उन्होंने सामाजिक परंपरा से अलग हटकर अपनी बेटी मोनिका को घोड़ी पर बनवारा दिलाकर समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया।
आमतौर पर यह रस्म बेटों के साथ जुड़ी मानी जाती है, लेकिन सूबे सिंह के इस कदम ने लड़का-लड़की के बीच भेदभाव खत्म करने और बेटियों को समान अधिकार देने का संदेश दिया है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी सोच समाज में बेटियों के सम्मान और समानता को बढ़ावा देती है।
गांव और आसपास के क्षेत्र में यह पहल चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
 सूबे सिंह ने बताया कि उनकी पुत्री मोनिका एमएससी करने के बाद बीएड कर रही है तथा उनकी शादी फरीदाबाद 12 मार्च को होने जा रही है। उनका शौहर राजस्व विभाग में पटवारी के पद पर कार्यरत है।
फोटो कैप्शन 07= लड़की का बनवारा निकालते हुए





अंतर्राष्ट्रीय विवाद सप्ताह 2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री का किया सम्मान

--रमन प्राचार्य की मुख्यमंत्री ने प्रशंसा की
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कनीना की आवाज।
कबीर भवन चंडीगढ़ में आयोजित भारत अंतर्राष्ट्रीय विवाद सप्ताह 2026 के अवसर पर आयोजित एक संवादात्मक सत्र में मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार नायब सिंह सैनी का रमन शास्त्री प्राचार्य एवं अन्य ने सम्मान किया। यह सत्र 7 मार्च से शुरू हुआ था।
अनुसूचित समाज की समस्याओं के निदान हेतु मुख्यमंत्री ने डिप्टी स्पीकर कृष्ण मिड्ढा, मनोज कुमार प्रोफेसर व रमन शास्त्री प्राचार्य के नेतृत्व में समाज के गणमान्य लोगों की समस्याएं सुनी और उन सभी का का मौके पर ही निदान करवाया।   मुख्यमंत्री व कृष्ण मिड्ढा का मनोज व रमन शास्त्री व समाज के लोगों ने फूलमालाओं  व पगड़ी पहनाकर अभिनन्दन किया। रमन शास्त्री ने सभी का आभार व धन्यवाद किया। मुख्यमंत्री ने रमन शास्त्री एवं अन्य का आभार जताया।
फोटो कैप्शन 06: रमन शास्त्री मुख्यमंत्री का सम्मान करते हुए




नवाचार आधुनिक शिक्षण अधिगम और उपचारात्मक शिक्षा के साथ बच्चों की मानसिक , बौद्धिक विकास में सहायक- वीरेंद्र जांगिड़

---एसएमसी की बैठक संपन्न
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कनीना की आवाज। 
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में  एसएमसी बैठक का आयोजन एसएमसी प्रधान विकासचंद एवं राहुल की संयुक्त अध्यक्षता में किया गया।
इस मौके पर बैठक में पहुंचे अनेक ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने विद्यालय परिसर में  साफ- सफाई, अनुशासन, शैक्षिक व्यवस्था, दोपहर मध्यांतर भोजन व्यवस्था की गुणवत्ता और पौष्टिकता आदि का निरीक्षण किया। विद्यालय प्रबंधन की इस व्यवस्था को देखकर वह उत्साहित नजर आए उन्होंने कहा कि विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था उत्तम और श्रेष्ठ है जिसकी सर्वत्र प्रशंसा होती हैं खण्ड स्तर पर विद्यालय की अपनी पहचान है।
 मौलिक मुख्याध्यापक  वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने सभी के आगंतुकों को विधार्थियों की शैक्षिक प्रगति रिपोर्ट और पाठ्यक्रम आधारित नवीनतम क्रियाकलापों आदि  प्रस्तुत की और बताया कि मुख्यमंत्री सौन्दर्य करण स्कीम के अंतर्गत यह विद्यालय खंड स्तर पर प्रथम रहा है। उन्होंने पाठ्यक्रम आधारित सभी गतिविधियों को विस्तार से बताया और विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए सभी नवीनतम माडल जो नवाचार आधुनिक शिक्षण अधिगम और उपचारात्मक शिक्षा के साथ बच्चों की मानसिक , बौद्धिक विकास में सहायक होते है । उन्होंने उपस्थित सदस्यों से प्रार्थना की कि ग्रामीण ज्यादा से ज्यादा नामांकन आपके गांव के सरकारी विद्यालय में करवाये  विद्यालय में गुणवत्ता पूर्ण और संस्कारवान शिक्षा का केंद्र है  कक्षा 6 से 8 तक के सभी विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जो की अपने आप में एक अनूठी मिसाल है। इसके लिए सभी अध्यापकों का आभार व्यक्त किया और प्रवेश उत्सव का भी निमंत्रण दिया। इस अवसर पर सुनील कुमार, मनवीर सिंह तंवर ,सुनील कुमार, देवेंद्र कुमार, राजेश कुमार ,भगत सिंह, गरिमा रानी ,विकास चंद प्रधान, राहुल प्रधान ,सूबे सिंह पूर्व प्रधान ,सतपाल साहब, राजकुमार पंच,धर्मवीर ठेकेदार सतबीर, तारामणि देवी,पिंकी देवी, बबली देवी, माया देवी, ललिता देवी ,मंजू देवी, धर्मा देवी ,लाली देवी, मोनिका देवी, रूपकला देवी, कौशल्या देवी,बबिता देवी,मुन्नी देवी आदि सम्मानित जन उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 01: एसएमसी बैठक में भाग लेते हुए ग्रामीण।





राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुंदरह में विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन
- नन्हें वैज्ञानिकों ने माडलों के माध्यम से दिखाया अपना हुनर
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कनीना की आवाज।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय  सुंदरह में वार्षिक विज्ञान प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न विषयों पर शानदार वर्किंग माडल प्रस्तुत किए।
छात्रों ने डाई बेस , इलेक्ट्रोस्कोप, प्रकाश संश्लेषण , मैग्नेटिक पेन स्टैंड , टर्मरिक पेपर, गोताखोर , पूर्णांकों का जोड़ एवं घटा , गोनोमीटर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित प्रोजेक्ट्स दिखाए। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में जिज्ञासा पैदा करना और उन्हें सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक रूप में लागू करने के लिए प्रेरित करना था। सर्वश्रेष्ठ माडलों का चयन करने के लिए जूरी द्वारा मूल्यांकन किया गया, जिससे छात्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना देखने को मिली ।
कार्यक्रम के दौरान स्कूल के प्रधानाचार्य  बाबूलाल जी ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करती हैं।
 इस सारे कार्यक्रम को विज्ञान शिक्षिका मंजू यादव ने संचालित किया । इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी महानुभावों ने विज्ञान शिक्षिका की कार्य प्रणाली की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।
फोटो कैप्शन 02: विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए




 कालेज में पढऩे वाली लड़की गुम, गुमशुदगी का मामला दर्ज

--एक व्यक्ति पर उसे छुपाने का मामला दर्ज
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कनीना की आवाज।
 कनीना उप-मंडल के एक गांव से कालेज में पढऩे गई लड़की गुम हो गई। लड़की के पिता ने मामला दर्ज करवाया है।
उन्होंने पुलिस में कहा है कि उसकी लड़की पढऩे के लिए कालेज में गई थी किंतु वापस नहीं आई। आसपास तलाश की गई किंतु कहीं नहीं मिली। उन्होंने राज नामक लड़के पर शक जाहिर किया कि उसने कहीं उसे छुपा रखा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।


निकिता ने पाया विश्वविद्यालय में आठवां स्थान, कालेज में खुशी का माहौल

--उन्हाणी कालेज की है छात्रा
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कनीना की आवाज।
राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हानी की छात्रा निकिता पोता निवासी ने इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर  द्वारा आयोजित बीएससी पांचवें सेमेस्टर की विश्वविद्यालय परीक्षा में आठवां स्थान प्राप्त कर महाविद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डा. विक्रम सिंह ने इस उत्कृष्ट उपलब्धि पर छात्रा व प्राध्यापकों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता उसकी निरंतर मेहनत, अनुशासन एवं समर्पण का परिणाम है। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय का शैक्षणिक माहौल पूरे जिले में अग्रणी  है जिसके परिणामस्वरूप हर वर्ष महाविद्यालय की छात्राएं विश्वविद्यालय की मेरिट सूची में स्थान प्राप्त कर रही हैं। यहां सभी प्राध्यापक लगन और मेहनत से शिक्षण का कार्य कर रहे हैं जिससे इस प्रकार की उपलब्धि महाविद्यालय प्राप्त कर रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यहां की छात्राएं भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर महाविद्यालय एवं अपने परिवार का नाम रोशन करती रहेगी।
फोटो कैप्शन: निकिता


कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-14 कड़ी पढ़े 11 मार्च को
-कुतरू की आईडी खोलकर तबादले के आप्शन ही बदल दिये



कनीना की आवाज ब्लाग से न उठाये कोई समाचार
-वरना कापीराइट के तहत होगा मामला दर्ज
-आरएनआई द्वारा है रजिस्टर्ड
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कनीना की आवाज।
कनीना की आवाज नमक ब्लाग आरएनआई द्वारा  रजिस्टर्ड समाचार पत्र है। इससे यूं की यूं खबर को उठाकर कुछ लोग अनजाने में ग्रुप में डाल देते हैं जो कापीराइट का उल्लंघन है। कहने को तो अज्ञानता कहेंगे लेकिन कानून के सामने अज्ञानता का कोई बहाना नहीं होता। ऐसे में ऐसी गलती दो-तीन बार कुछ लोग कर चुके हैं जो डा. होशियार सिंह यादव कापीराइट अधिकारी द्वारा देखी जा चुकी हैं। भविष्य में अगर कोई ऐसी गलती करेगा चाहे वह जाने या अनजाने में हुई उसके खिलाफ कापीराइट के तहत मामला दर्ज करवाया जाएगा। इसके लिए ग्रुप एडमिन भी जिम्मेवार होगा। कनीना की आवाज ब्लाग की खबर को कापी करके कहीं प्रयोग न करें, सावधानी बरते अन्यथा अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
 कापीराइट मामले में सजा
-अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की कैद और 50,000 रुपए से 2 लाख रुपए तक के जुर्माने तक हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर सजा बढ़ जाती है, और इसमें गैर-जमानती और संज्ञेय  अपराध माना जाता है, जिसमें अवैध सामग्री और उपकरणों को जब्त भी किया जा सकता है।
सजा के मुख्य प्रावधान (भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार)
    धारा 63:पहली बार उल्लंघन करने पर कम से कम 6 महीने की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 लाख रुपएतक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63 (दोबारा उल्लंघन): दूसरी बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 साल की कैद और 1 लाख रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 रुपए लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63बी(कंप्यूटर प्रोग्राम का उल्लंघन): कंप्यूटर प्रोग्राम की उल्लंघनकारी प्रति का जानबूझकर उपयोग करने पर कम से कम 7 दिन की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
    अन्य दंड:उल्लंघन करने वाली प्रतियां और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए जा सकते हैं, और कापीराइट मालिक सिविल मुकदमे के जरिये मौद्रिक हर्जाना भी मांग सकता है।




साल में दो विज्ञापन भी नहीं देने वाले समाचार न भेजे
- अखबार का आदेश है विज्ञापन देने वालों की खबरें लगे अधिक से अधिक
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कनीना की आवाज।
लंबे समय से डा. होशियार सिंह यादव पत्रकारिता में जुटा हुआ है। सुबह से रात 11 जाते हैं तब जाकर पत्रकारिता पूर्ण होती है किंतु न तो समाचार पत्र एक रुपया भी देता और न ही लोग विज्ञापन देते। साल में अनेक समाचार छपने के बाद भी जब विज्ञापन का वक्त आता है तब कोई विज्ञापन नहीं दिया जाता, जिससे अखबार नाराज है और ऐसे पत्रकार जो विज्ञापन नहीं देते उनको हटाने का निर्णय ले लेता है। ऐसे में जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाए वो कृपया मेरे पास/डा. होशियार सिंह यादव के पास समाचार प्रकाशन हेतु न भेजे। इसे कड़ाई से पालन किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई समाचार भेजता है तो स्वयं जिम्मेदार होगा और वे प्रकाशित नहीं होंगे। अपने घर से कंप्यूटर, बिजली, नेट खर्चा, भाग दौड़ करनी पड़ती है वहीं बच्चों से दूर रहना पड़ता है। उस पर भी एक रुपए भी जेब में नहीं आता और खर्चा बढ़ता ही चला जाता है। एक और परिवार वाले नाराज वहीं अखबार वाले नाराज क्योंकि कुछ लोगों की आदत बन गई है कि समाचार के समय तो कहेंगे बड़े-बड़े समाचार छाप दो और विज्ञापन के नाम पर कहेंगे सोचेंगे, देखेंगे या फिर फोन नहीं उठाते, फोन बंद कर लेते हैं।  ऐसे में ऐसे व्यक्ति जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाते वो कृपया माफ करें, समाचार भविष्य में न भेजे। केवल वही व्यक्ति भेजें जिन्होंने कुछ विज्ञापन दिया है या मेरी किसी क्षेत्र में मदद की है ताकि उनका खर्चा में स्वयं वहन कर सकूं। सबसे बड़ी बात है कि अखबार के निर्देशानुसार एक विज्ञापन कम से कम 10 हजार का देने वालों के छह माह समाचार प्रकाशित होंगे, दो विज्ञापन देने वालों के पूरे साल समाचार प्रकाशित होंगे। अधिकतम दिन में एक समाचार प्रकाशित करवा सकता है वह भी स्वयं टाइप करके भेजना होगा। यदि साल में 20000 तक का विज्ञापन देता है उनके लिए यह सुविधा एक साल चलती रहेगी। समाचारपत्रों का कहना है कि उन लोगों पर समय बर्बाद ना करें जो विज्ञापन नहीं देते। एक और मजबूरी है दूसरी और विज्ञापन देना जरूरी है। शायद कनीना क्षेत्र के प्रतिदिन 10 बड़े समाचार अकेले मेरे प्रकाशित होते हैं लेकिन इस होली पर महज एक छोटा सा विज्ञापन मिला जिनसे उम्मीद थी वो कल देंगे, फिर देंगे, आगे देंगे करते-करते होली भी टाल दी। अब ऐसा नहीं होगा। केवल क्राइम के समाचार और उन लोगों के समाचार प्रकाशित होंगे जो विज्ञापन देते हैं या ऐसे व्यक्तित्व जो वास्तव में समाज के लिए  उदाहरण बने हुए हैं।












गर्मी आते ही घड़ों की ओर रुझान बढ़ा
-देशी फ्रिज नाम से जानते हैं लोग
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कनीना की आवाज। यूं तो गर्मी आने पर फ्रिज का लोग जमकर उपयोग करते हैं किंतु बुजुर्ग एवं ग्रामीण लोगों का रुझान आज भी घड़ों की ओर है। यद्यपि घड़े बनाने में घंटों का समय लगता है किंतु इनमें पानी स्वास्थ्य अनुकूल माना जाता है। यही कारण है कि बीमारियों से और फ्रिज से छुटकारा पाने के लिए आज भी लोग घड़ों का पानी प्रयोग करते हैं।
घड़ा बनाने वाले महिपाल सिंह,दिनेश कुमार ने बताया कि आज के दिन कनीना एवं आस पास क्षेत्रों की माटी से घड़े नहीं बनाए जाते बल्कि माटी भी नांगल चौधरी, भिवानी तथा दूर दराज गांवों से खरीदकर लानी पड़ती है जिससे घड़े बनाए जाते और उन्हें सूखाकर, पकाया जाता है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में आवे(घड़े पकाने की भट्ठी) पाई जाती है। घड़े ही नहीं अपितु समय-समय पर दीपक, सुराही, छोटी मटकी तथा अनेक अन्य मिट्टी के उपकरण तैयार किए जाते हैं जिन्हें भ_ी में पकाया जाता है। घड़ों की कीमत दिनों दिन बढ़ती जा रही है। वर्तमान में एक घड़ा 100-125 रुपये का मिलता है। उधर घड़े का पानी पीने वाले राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, कृष्ण कुमार, सत्यराज
आदि ने बताया कि उनके वक्त कभी फ्रीज नहीं होते थे। महज घड़ों का ही पानी ठंडा रहता था जिसे पीकर लंबे समय तक स्वस्थ रहते थे। आज घड़ों की बजाय फ्रीज, कुल्फी, आइसक्रीम आदि पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। कोरोना महामारी के कारण फ्रीज एवं ठंडे खाने पसंद नहीं किये गये किंतु कोरोना समाप्त होने के बाद आज तक देशी फ्रिज की मांग बढ़ी है।
डा. वेद, डा अजीत कुमार आदि ने बताया कि घड़ों का पानी स्वास्थ्य के लिए ज्यादा उचित रहता है। फ्रिज का पानी पीना नुकसानदायक है, ऐसे में उनका कहना है कि घड़ों का पानी ही पीना चाहिए और आने वाले समय में फिर से घड़ों की मांग होगी। वर्तमान में घड़े बनाने वाले त्वरित गति से घड़े बना रहे हैं। घड़ों के अतिरिक्त छोटे-छोटे घड़े, सुराही, मटकी, पौधे उगाने वाले गमले आदि भी बनाए जाते हैं।

Monday, March 9, 2026



 





तापमान पहुंचा 37 डिग्री, गेहूं पकान पर,फसल को नुकसान होने का अंदेशा
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कनीना की आवाज। 
कनीना क्षेत्र में सरसों की लावणी पूरे यौवन पर चल रही है वही तापमान बढ़ता ही जा रहा है। दिन का तापमान 37 डिग्री सेंटीग्रेड पहुंच गया है जिसके चलते गेहूं की पकान पर पहुंची फसल को नुकसान होने का अंदेशा बन गया है। करीब 15 दिन में गेहूं की फसल मिल्क स्टेज से पकान पर पहुंच जाती है। इस अवधि में अगर तापमान 30 डिग्री से अधिक पहुंच जाता है तो पकान प्रक्रिया में व्यवधान आ जाता है और गेहूं का पकान अच्छी प्रकार नहीं हो पाता। गेहूं जल्दी लावणी आ जाता है। गेहूं के दाने भी छोटे रह जाते हैं और पक नहीं पाते।
  किसान चिंतित हैं। किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, अजीत कुमार, कृष्ण कुमार ने बताया कि इस समय गेहूं कच्चे हैं और अभी पके नहीं हैं। ऐसे में ताप बढऩे का कु-प्रभाव पड़ रहा है। उन्हें इस बार अच्छी फसल पैदावार लेने की उम्मीद थी किंतु तापमान बढऩे से उनकी चिंता की रेखाएं बढ़ गई है। अभी गेहूं की बालियां आ चुकी हैं जिनमें गेहूं का दाना मिल्किंग स्टेज पर है जिसे ठंड की जरूरत होती है।
  करीब 20,000 हेक्टेयर पर उगाई गई सरसों की फसल पक चुकी है। कुछ किसान कटाई के काम में लग गये हैं। दिन के समय ताप बढ़ गया है। करीब 9500 हेक्टेयर पर गेहूं की खेती की गई है।
 इस संबंध में पूर्व विषय विशेषज्ञ डा. देवराज से बात की गई। उन्होंने कहा कि जब गेहूं पकान पर पहुंच गया हो और 30 डिग्री से अधिक तापमान हो तो निश्चित रूप से उस समय नुकसान होगा। ऐसे में उन्होंने कहा कि किसानों की गेहूं पैदावार कमजोर रहने, हल्के रहने की संभावना बन जाती है।
 क्या कहते हैं एसडीओ कृषि-
 उधर एसडीओ कृषि डा. अजय यादव से इस संबंध में चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि इस समय सरसों की लावणी चल रही है और तापमान बढऩे का सरसों पर कोई नुकसान नहीं होगा। गेहूं जो पक चुका है उस पर भी कोई नुकसान नहीं होगा। केवल उस गेहूं को नुकसान होगा जो पकान पर पहुंच रहा है, जो मिल्क अवस्था में है, दूधिया अवस्था में होने पर उस गेहूं को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि तापमान 30 डिग्री से अधिक पहुंच जाता है तो ऐसी अवस्था में गेहूं की फसल को नुकसान होने की संभावना बन जाती है। उन्होंने इस स्थिति से लडऩे के लिए किसानों को दो सलाह दी है। उन्होंने कहा कि फव्वारों द्वारा हल्की सिंचाई करें परंतु ध्यान रहे सिंचाई गहरी नहीं  करनी है वरना गेहूं के गिरने की संभावना होती है। यदि तेज हवा चलेगी तो गेहूं गिर जाएगा। ऐसे में गेहूं में हल्की फव्वारों द्वारा सिंचाई करने से लाभ मिलता है। यही नहीं जिन खेतों में गेहूं अभी बहुत कच्चा है उन्हें दो किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट  150 से 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। अगर कच्ची अवस्था में गेहूं है तो एक सप्ताह बाद दूसरी स्प्रे भी करनी चाहिए। अगर गेहूं अधिक कच्चा नहीं है तो एक स्प्रे से ही काम चल जाएगा।
सरसों खरीद की तिथि नहीं आई-
उधर कनीना व्यापार मंडल प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष रविंद्र बंसल ने बताया कि सरकार ने सरसों का समर्थन मूल्य 6250 रुपये वहीं गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल रखा है तथा सरसों की खरीद की कोई अभी तक तिथि नहीं आई है। एक अप्रैल से खरीद होने की संभावना है।
 फोटो कैप्शन 10: किसान गेहूं की फसल को निहारते हुए
और साथ में डा.अजय एसडीओ कृषि


कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-14 कड़ी पढ़े 11 मार्च को
-कुतरू की आईडी खोलकर तबादले के आप्शन ही बदल दिये



कनीना की आवाज ब्लाग से न उठाये कोई समाचार
-वरना कापीराइट के तहत होगा मामला दर्ज
-आरएनआई द्वारा है रजिस्टर्ड
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कनीना की आवाज।
 कनीना की आवाज नमक ब्लाग आरएनआई द्वारा  रजिस्टर्ड समाचार पत्र है। इससे यूं की यूं खबर को उठाकर कुछ लोग अनजाने में ग्रुप में डाल देते हैं जो कापीराइट का उल्लंघन है। कहने को तो अज्ञानता कहेंगे लेकिन कानून के सामने अज्ञानता का कोई बहाना नहीं होता। ऐसे में ऐसी गलती दो-तीन बार कुछ लोग कर चुके हैं जो डा. होशियार सिंह यादव कापीराइट अधिकारी द्वारा देखी जा चुकी हैं। भविष्य में अगर कोई ऐसी गलती करेगा चाहे वह जाने या अनजाने में हुई उसके खिलाफ कापीराइट के तहत मामला दर्ज करवाया जाएगा। इसके लिए ग्रुप एडमिन भी जिम्मेवार होगा। कनीना की आवाज ब्लाग की खबर को कापी करके कहीं प्रयोग न करें, सावधानी बरते अन्यथा अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
 कापीराइट मामले में सजा
-अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की कैद और 50,000 रुपए से 2 लाख रुपए तक के जुर्माने तक हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर सजा बढ़ जाती है, और इसमें गैर-जमानती और संज्ञेय  अपराध माना जाता है, जिसमें अवैध सामग्री और उपकरणों को जब्त भी किया जा सकता है।
सजा के मुख्य प्रावधान (भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार)
    धारा 63:पहली बार उल्लंघन करने पर कम से कम 6 महीने की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 लाख रुपएतक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63 (दोबारा उल्लंघन): दूसरी बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 साल की कैद और 1 लाख रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 रुपए लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63बी(कंप्यूटर प्रोग्राम का उल्लंघन): कंप्यूटर प्रोग्राम की उल्लंघनकारी प्रति का जानबूझकर उपयोग करने पर कम से कम 7 दिन की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
    अन्य दंड:उल्लंघन करने वाली प्रतियां और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए जा सकते हैं, और कापीराइट मालिक सिविल मुकदमे के जरिये मौद्रिक हर्जाना भी मांग सकता है।




साल में दो विज्ञापन भी नहीं देने वाले समाचार न भेजे
- अखबार का आदेश है विज्ञापन देने वालों की खबरें लगे अधिक से अधिक
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कनीना की आवाज।
लंबे समय से डा. होशियार सिंह यादव पत्रकारिता में जुटा हुआ है। सुबह से रात 11 जाते हैं तब जाकर पत्रकारिता पूर्ण होती है किंतु न तो समाचार पत्र एक रुपया भी देता और न ही लोग विज्ञापन देते। साल में अनेक समाचार छपने के बाद भी जब विज्ञापन का वक्त आता है तब कोई विज्ञापन नहीं दिया जाता, जिससे अखबार नाराज है और ऐसे पत्रकार जो विज्ञापन नहीं देते उनको हटाने का निर्णय ले लेता है। ऐसे में जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाए वो कृपया मेरे पास/डा. होशियार सिंह यादव के पास समाचार प्रकाशन हेतु न भेजे। इसे कड़ाई से पालन किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई समाचार भेजता है तो स्वयं जिम्मेदार होगा और वे प्रकाशित नहीं होंगे। अपने घर से कंप्यूटर, बिजली, नेट खर्चा, भाग दौड़ करनी पड़ती है वहीं बच्चों से दूर रहना पड़ता है। उस पर भी एक रुपए भी जेब में नहीं आता और खर्चा बढ़ता ही चला जाता है। एक और परिवार वाले नाराज वहीं अखबार वाले नाराज क्योंकि कुछ लोगों की आदत बन गई है कि समाचार के समय तो कहेंगे बड़े-बड़े समाचार छाप दो और विज्ञापन के नाम पर कहेंगे सोचेंगे, देखेंगे या फिर फोन नहीं उठाते, फोन बंद कर लेते हैं।  ऐसे में ऐसे व्यक्ति जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाते वो कृपया माफ करें, समाचार भविष्य में न भेजे। केवल वही व्यक्ति भेजें जिन्होंने कुछ विज्ञापन दिया है या मेरी किसी क्षेत्र में मदद की है ताकि उनका खर्चा में स्वयं वहन कर सकूं। सबसे बड़ी बात है कि अखबार के निर्देशानुसार एक विज्ञापन कम से कम 10 हजार का देने वालों के छह माह समाचार प्रकाशित होंगे, दो विज्ञापन देने वालों के पूरे साल समाचार प्रकाशित होंगे। अधिकतम दिन में एक समाचार प्रकाशित करवा सकता है वह भी स्वयं टाइप करके भेजना होगा। यदि साल में 20000 तक का विज्ञापन देता है उनके लिए यह सुविधा एक साल चलती रहेगी। समाचारपत्रों का कहना है कि उन लोगों पर समय बर्बाद ना करें जो विज्ञापन नहीं देते। एक और मजबूरी है दूसरी और विज्ञापन देना जरूरी है। शायद कनीना क्षेत्र के प्रतिदिन 10 बड़े समाचार अकेले मेरे प्रकाशित होते हैं लेकिन इस होली पर महज एक छोटा सा विज्ञापन मिला जिनसे उम्मीद थी वो कल देंगे, फिर देंगे, आगे देंगे करते-करते होली भी टाल दी। अब ऐसा नहीं होगा। केवल क्राइम के समाचार और उन लोगों के समाचार प्रकाशित होंगे जो विज्ञापन देते हैं या ऐसे व्यक्तित्व जो वास्तव में समाज के लिए  उदाहरण बने हुए हैं।




राजेंद्र सिंह कपूरी को राज्य वित्त सचिव मनोनीत
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कनीना की आवाज।
हरियाणा पावर कारपोरेशन अनुसूचित जाति जनजाति व पिछड़ा वर्ग कर्मचारी यूनियन का राज्य स्तरीय 36वां चुनाव अधिवेशन डा. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय ऊर्जा पार्क माडल टाउन रेवाड़ी में बड़े ही सौहार्दपूर्ण माहौल में सर्वसम्मति से संपन्न हुआ।  जिसमें प्रदेश के सभी सर्किलों से कर्मचारियों ने हिस्सा लिया जिसमें रमेश तंवर को राज्य प्रधान चुना गया। साथ ही इसी कड़ी में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के उप मंडल कनीना में कार्यरत राजेंद्र सिंह कपूरी को राज्य वित्त सचिव, महेश गोमला को अतिरिक्त महासचिव व संदीप को उप प्रधान चुना गया तथा लखनलाल को  सर्कल सचिव व सुरेंद्र सिंह को सर्किल ऑर्गेनाइज चुना गया। जिसके लिए सभी कर्मचारी साथियों ने निर्वाचन समिति का धन्यवाद किया व उपमंडल कनीना दफ्तर में लड्डू  बाटकर के खुशी जाहिर की। कर्मचारी साथियों को आश्वासन दिया कि उनकी  लम्बित मांगों को समय रहते समय पर पूरा करवाया जाएगा।
फोटो कैप्शन 08: चुनावों में मनोनीत पदाधिकारियों को अभिनंदन करते हुए

क्षमतावर्धन का सर्वे जारी
-कनीना मंडी स्कूल में हुआ सर्वे
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कनीना की आवाज।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद गुरुग्राम के दिशा निर्देश अनुसार तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान महेंद्रगढ़ के प्राचार्य विश्वेश्वर कौशिक के मार्गदर्शन में जिला महेंद्रगढ़ के सभी राजकीय विद्यालयों से वर्ष 2025 -26 में शिक्षकों के क्षमतावर्धन में जो प्रशिक्षण आयोजित किए गए उसे बारे में एक सर्वे आयोजित किया जा रहा है ।
इसी कड़ी में सोमवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान महेंद्रगढ़ से विषय विशेषज्ञ  राजेश गुप्ता उपस्थित रहे। उनके द्वारा बताया गया कि इस सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जो क्षमतावर्धन कार्यक्रम एससीईआरटी के दिशा निर्देश पर आयोजित हुए उनसे विद्यालय के शैक्षिक शैक्षिक वातावरण में कितना बदलाव आया । इसके तहत विद्यालय के मुखिया ,विद्यालय के अध्यापकों तथा छात्र-छात्राओं से संवाद कर प्रशिक्षण की सार्थकता और उसमें सुधार के बारे में विचार विमर्श किया गया। अधिकतर शिक्षकों का मत यही रहा कि प्रशिक्षण से उनके कार्य करने की क्षमता में सुधार हुआ है तथा इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाने चाहिए।
फोटो कैप्शन 07: कनीना मंडी स्कूल में सर्वे करते हुए


सिलिंडर की बढ़ी कीमत ली जाए वापस
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कनीना की आवाज।
बसपा नेता अतरलाल एडवोकेट ने केन्द्र सरकार से घरेलू और कामर्शियल रसोई गैस सिलिंडर की कीमतों में की गई वृद्धि को तत्काल वापिस लेने की मांग की है। उन्होंने सरकार के इस निर्णय के विरोध में आगामी 23 मार्च से गांवों में विरोध सभाएं आयोजित करने की घोषणा की है।
 अतरलाल ने झाड़ली, भडफ़ व गाहड़ा गांव में लोगों से जनसम्पर्क करते हुए कहा कि रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि करने से जनता में भारी रोष व्याप्त है। केन्द्र सरकार का यह निर्णय गरीब विरोधी तथा महिला विरोधी है। सरकार ने एक साल के अंदर दूसरी बार एलपीजी दामों में वृद्धि कर यह साबित कर दिया है कि उसे गरीबों की चिंता नहीं है। रसोई गैस सिलेण्डर की कीमतों में 60 रुपए की वृद्धि से घरों की रसोई पर सीधा असर पड़ा है। जिससे महिलाओं और उपभोक्ताओं की परेशानियां बढ़ गई हैं। पहले से जारी महंगाई की मार से परेशान जनता का इस वृद्धि से जीना अधिक कठिन हो गया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बसपा, सरकार के इस गरीब विरोधी निर्णय के खिलाफ लोगों को लामबंध करेगी। उन्होंने आगामी 23 मार्च से गांवों में विरोध सभाएं आयोजित करने की घोषणा की।



गायों को खिलाया गुड़ और दिया 5100 रुपए का दान
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी देवेंद्र ने अपनी पत्नी आदेश देवी के साथ श्रीकृष्ण गौशाला में पहुंचकर गायों को गुड़ खिलाया और गौवंश के लिए 5100 रुपए का दान दिया। इस मौके पर प्रधान भगत सिंह, सचिव यश यादव, सह सचिव रामपाल यादव, उप प्रधान दिलावर सिंह, रविंद्र बंसल, बलवान सिंह, मास्टर रामप्रताप, सतवीर गुगनवाला, ओमप्रकाश ठेकेदार भडफ़ आदि उपस्थित रहे।
 फोटो कैप्शन 5: गायों को दान देते हुए






पक्षियों के लिए दाना पानी का प्रबंध करना चाहिए-राजेंद्र सिंह
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कनीना की आवाज।
हर इंसान को आगे आना चाहिए और पक्षियों के लिए दाना पानी का प्रबंध करना चाहिए। ये विचार पीपूल फार एनिमल्स के सदस्य एवं समाजसेवी राजेंद्र सिंह ने पक्षियों के लिए जल एवं दाने का प्रबंध करते हुए व्यक्त किए। वे कई वर्षों से गर्मियों के दिनों में इस प्रकार का प्रबंध करते आ रहे हैं।
  श्री सिंह ने कहा कि भीषण गर्मी से बचाने के लिए जीवों की सुरक्षा हम सभी का दायित्व बनता है। जीव अक्सर गर्मी में पानी के बिना प्राण त्याग देते हैं। ऐसे में हम सभी का दायित्व बनता है कि उन निरीह जीवों के लिए खेतों में, घरों में, आस पास जहां भी संभव हो पानी एवं दाना का प्रबंध कर दिया जाए। मार्च माह में ही भीषण गर्मी पडऩे लगी है।
  उल्लेखनीय है कि अभ्यारण्य खोलने के लिए राष्ट्रपति से गुहार कर चुके राजेंद्र सिंह एवं सूबे सिंह अपने परिवार सहित खेतों में ट्यूबवेल पर रहते हैं और वर्षों से जीवों के लिए पानी के घड़े, ठीकरे वृक्षों पर टांग चुके हैं। उनके लिए दिन रात एक करके प्रबंध करते आ रहे हैं वहीं जल एवं अन्न पक्षियों के लिए रखने की प्रेरणा दूसरे लोगों से भी कर रहे हैं।
  खेतों में काम करने वाले सूबे सिंह नामक उनके भाई भी उनकी इस कार्य में मदद करते आ रहे हैं। जीवों का शिकार करने वालों को कभी नहीं बख्शते। उन्हें पुलिस के हवाले कर देते हैं। उन्होंने बताया कि अब सरसों के बाद गेहूं की लावणी होगी फिर तीतर, बटेर का शिकार करने वाले कुछ लोग खेतों में आने लग जाते हैं।
फोटो कैप्शन 02: जीवों के लिए जल का प्रबंध करते राजेंद्र सिंह।


 

गर्मी पडऩे से चलने लगे हैं पंखें
-बढ़ गई है कूलरों की मांग, ठीक करवाने लगे हैं कूलर
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में जहां मार्च माह के दूसरे सप्ताह में ही कम से कम ताप 18 डिग्री तो अधिकतम 37 डिग्री सेंटीग्रेड पहुंच गया है। दिन के समय समय सडै़कों पर कम भीड़ मिलती है। किसान त्वरित गति से सरसों की लावणी में लगे हुए हैं। अगर यूं ही गर्मी बढ़ती रही तो गर्मी जीना मुहाल कर देगी। अप्रैल, मई एवं जून माह में में तो गर्मी और भी बढऩे के आसार हैं। भीषण गर्मी में किसान फसल कटाई में लगे हुए हैं।
  कनीना में भीषण गर्मी पडऩे का असर स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है।  दुकानदार भी गर्मी से राहत पाने के लिए दुकानों में पंखे चलाकर आराम करने लगे हैं।
कूलरों की ओर रुझान--
 गर्मी के चलते कनीना क्षेत्र में कूलरों को ठीक करवाने एवं चालू करने की योजना बनाने लगे हैं। । इसके बाद एसी की ओर बढऩा शुरू कर देंगे। विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी एससी, कूलर एवं पंखे अप्रैल माह में ही प्रयोग किए जा रहे हैं।
 मक्खी एवं मच्छरों की संख्या बढ़ गई है। किसान दिनभर खेतों में काम करके आराम के लिए घर आते हैं तो गर्मी उन्हें सताती है ऐसे में वे पंखेआदि का प्रयोग करते हैं। दुकानदार भीम सिंह ने बताया कि इस बार अभी पुराने कूलर ठीक अधिक कराए जा रहे हैं। पुराने कूलरों को साफ करके जाली आदि बदली जा रही हैं।
फोटो कैप्शन 03:दुकान पर कूलरों की मरम्मत करते कारीगर।


माता मंदिरों में लगे खाने के ढेर
-बासौड़ा पर्व पर चला आ रहा है रिवाज
--बव्वा में माता मेला 10 मार्च को
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कनीना की आवाज।
बासौड़ा पर्व के अवसर पर जहां माता के मंदिरों में विभिन्न प्रकार के पकवानों एवं खानों के ढेर लग गए हैं वहीं चौराहों तथा विभिन्न धार्मिक स्थानों के द्वार पर भी भारी मात्रा में अनाज, पकवान, चावल आदि डाले गए। जीव-जंतु भी दिनभर पकवानों के मजे लेते देखे गए। करीब तीन सप्ताह तक यह पर्व अलग अलग दिन चलता है।
 कनीना का माता स्थल ,संत मोलडऩाथ आश्रम के पास स्थित है। जहां सुबह सोमवार से भारी मात्रा में अनाज चढ़ाया गया। कुछ लोग इस अनाज को इकट्ठा कर पशुओं के चारे के रूप प्रयोग करते देखे। पशुपालक इस अनाज को इकट्ठा करके गाय, भैंस तथा सुअर आदि को खिलाते देखे गये। आगामी 3 सप्ताह तक यहां इसी प्रकार का दृश्य देखने को मिलेगा।
बासी खाने के लिए प्रसिद्ध है बासौड़ा- बासौड़ा  क्षेत्रीय पर्व है तथा लंबे समय से पर्व मनाया जाता रहा है। उन दिनों जब दवा का अधिक ज्ञान नहीं होता था, चेचक रोग बहुत फैलता था। उस जमाने से इस प्रकार का रीति रिवाज बुजुर्गों ने चलाया जिसमें बासी खाना खाया जाता है। बासी खाने से माना जाता है चेचक आदि रोग नहीं होते। यही नहीं पुत्र आदि के स्वस्थ रहने की कामना से भी महिलाएं इस पर्व को मनाती हैं।
कनीना के राजेंद्र सिंह बुजुर्ग बताते हैं कि बासौड़ा पर्व बुजुर्गों के समय से चला आ रहा है। जिन महिलाओं के एक साल के अंतराल में संतान हुई हो वह खाने के रूप में घर घर भेंट देती हैं जिसे कंडवारी नाम से जाना जाता है। माता स्थल पर जहां सीढिय़ों पर भी खाना बिखरा पड़ा है। इस प्रकार के दृश्य को देखकर लगता है कि बासौड़ा के प्रति लोगों का बहुत अधिक रुझान है। सुबह सवेरे उठकर महिलाएं यहां पूजा अर्चना करने आती है और सभी पकवान एवं भोजन या चढ़ाती हैं। तत्पश्चात इसका पूरा परिवार भोग लगाता आया है।  समाजसेवी सुरेंद्र यादव ने बताया कि बव्वा गांव में बुधवार को मेला लगेगा। अक्सर यह पर्व होली के बाद सोमवार एवं बुधवार को मनाया जाता है। यहां भी तीन सप्ताह तक पर्व चलेगा। यहां बाल उतरवाने का पर्व भी चलता है।
 फोटो कैप्शन 01:बव्वा का माता मंदिर
















लावणी के लिए मजदूरों की बढ़ गई है मांग
-सरसों की लावणी रेट बढ़ाये, मारामारी
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में सरसों की फसल कटाई पूरे यौवन पर हैं। किसान अपनी फसल कटाई स्वयं कम करते हैं और मजदूरों से अधिक करवा रहे हैं। दूसरे राज्यों से भारी संख्या में मजदूर आए हुए हैं जो सरसों 3500 रुपये प्रति किला तक तथा गेहूं कम से कम 6000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से फसल कटाई करेेंगे। किसान अपने खेतों में फसल कटाई सरसों निकालना, यहां तक कि आने वाले समय में गेहूं की कटाई और भंडारण भूसे का भंडार आदि सभी कार्य इन मजदूरों से करवाते हैं। आलम यह है कि किसान अपने खेतों में जबसे फसल उगाता है तभी से उसकी रखवाली  का कार्य भी मजदूरों पर छोड़ता रहा है। मजदूर निश्चित राशि में फसलों की देखभाल करते हैं। फसलों की आवारा जंतुओं से देखरेख के लिए अलग से रखवाले भी रखे जाते हैं। ये रखवाले रात को आवारा जंतु जैसे नीलगाय से फसल की सुरक्षा करते हैं। भारी संख्या में मजदूर होली मनाकर यहां पहुंच रहे हैं।
 किसानों ने बताया कि एक जमाना था जब परिवार के सदस्यों की संख्या अधिक होती थी उस समय मजदूरों की जरूरत कम पड़ती थी किंतु अब प्रत्येक घर में सदस्य की संख्या कम होती है। एक और जहां  चल रही हैं विद्यार्थी अपने स्कूल में परीक्षा देने जाते हैं वही किसान अपने खेतों में लावणी का कार्य करते हैं। लेकिन ऐसे बहुत कम किसान है जो अपने खेत की लावणी स्वयं करते हैं। मजदूरों पर ही लावणी का कार्य निर्भर करता है।
 मिली जानकारी अनुसार राजस्थान, बिहार ,उत्तर प्रदेश तथा अन्य राज्य से मजदूरों के ग्रुप आए हुए हैं। ये ग्रुप दस से लेकर के 30 की संख्या में मिलते हैं। एक साथ मिलकर कार्य करते हैं। फसल कटाई का काम जो दिनों में पूरा होना चाहिए कुछ ही घंटों में पूरा कर जाते हैं। यही कारण है किसान मौसम को देखते हुए तथा मौसम बदलाव के चलते हुए इन मजदूरों से कटाई करवाता है। यहां तक सरसों निकालना आदि का कार्य भी मजदूरों से करवा भंडारण तक का कार्य भी मजदूरों से करवाता है। एक और मजदूरों को अपनी रोटी रोजी मिल रही है वही किसान भी इन मजदूरों से काम करवा कर प्रसन्न नजर आ रहे हैं।
फोटो कैप्शन 11: लावणी करता मजदूरों का एक ठोल।

Sunday, March 8, 2026



 


रसुलपुर में दो दिवसीय आर्य समाज वार्षिक उत्सव का हुआ भव्य समापन
--महर्षि की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक -भगत सिंह
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कनीना की आवाज।
उपमंडल के गांव रसुलपुर में आयोजित दो दिवसीय आर्य समाज वार्षिक उत्सव का रविवार को श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक जागरूकता के संदेश के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों, विद्वानों तथा श्रद्धालुओं ने भाग लेकर वैदिक धर्म और समाज सुधार के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर श्रीकृष्ण गौशाला कनीना के   प्रधान भगत भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए समाज में वैदिक संस्कारों और नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उत्सव के दौरान वैदिक यज्ञ, भजन-कीर्तन, प्रवचन तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और समाज में शांति की कामना की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य समाज में सत्य, शिक्षा, समानता और नैतिक मूल्यों का प्रसार करना है।
  मुख्य अतिथि भगत सिंह ने कहा कि  इस मौके पर उन्होंने कहा कि स्वामीजी शिक्षाएं आज भी समाज की बुराइयों पर कुठाराघात करती हैं और समाज की बुराइयों को मिटाने में अहं योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा की आज हम सबको स्वामी दयानंद  के बताए मार्ग पर चलने की जरूरत है वरना हमारा देश संस्कारों में काफी पीछे चला जाएगा। उन्होंने कहा की समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने की सख्त से सख्त जरूरत है जिससे समाज का भला हो पाएगा वरना समाज गर्त में चला जाएगा।
  उन्होंने कहा कि स्वामी जी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा की आज हम सबको स्वामी दयानंद  के बताए मार्ग पर चलने की सख्त जरूरत है वरना हमारा देश संस्कारों में काफी पीछे चला जाएगा। उन्होंने कहा की हमें आर्यव्रत समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने की जरूरत है जिससे हमारा तो भला होगा ही साथ में समाज में फैली बुराइयां भी दूर हो जाएगी और एक स्वच्छ समाज की शुरूआत होगी। इस मौके पर उन्होंने अपने निजी कोष से 11 हजार रुपये का दान दिया।
वक्ताओं ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे नशामुक्ति, शिक्षा के प्रसार और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि जब युवा वर्ग जागरूक होकर समाज सुधार के कार्यों में भागीदारी करेगा, तभी एक सशक्त और संस्कारित समाज का निर्माण संभव हो सकेगा। कार्यक्रम में विद्वान आचार्यों ने वैदिक सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती के विचार आज भी समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक हैं। उन्होंने बताया कि आर्य समाज हमेशा से शिक्षा के प्रसार, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और मानव सेवा के कार्यों में अग्रणी रहा है। समापन अवसर पर आयोजकों ने सभी अतिथियों, समाजसेवियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि भविष्य में भी ऐसे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता, एकता और भाईचारे का संदेश निरंतर फैलाया जाता रहेगा। कार्यक्रम के अंत में शांति पाठ और प्रसाद वितरण के साथ दो दिवसीय आर्य समाज वार्षिक उत्सव का विधिवत समापन किया गया।
फोटो कैप्शन 08: आर्य समाज रस्ूलपुर भजनों से बुराइयों पर प्रहार करते हुए



सोमवार को मनाया जाएगा बासौड़ा पर्व
-तीन सप्ताह तक चलता है यह पर्व
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में सोमवार से बासौड़ा का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। यह पर्व पुराने समय से मनाया जाता आ रहा है। इस पर्व के प्रति लोगों में गहन आस्था है। इसे शीतला अष्टमी का पर्व भी कहते हैं। सोमवार को शीतला मां की पूजा करने के बाद समस्त परिवार बासी भोजन करेगा। करीब आधा दर्जन गांवों में बासौड़ा के छोटे मेले लगते हैं। गांव बव्वा में बुधवार को शीतला माता मेला लगेगा। समाजसेवी सुरेंद्र यादव ने बताया कि सोमवार रात को जागरण आयोजित होगा तथा मंगलवार को माता का भंडारा लगेगा तथा बुधवार को मेला लगेगा। अक्सर यह पर्व होली के बाद सोमवार एवं बुधवार को मनाया जाता है।
  इस पर्व के तहत लोग रात को भोजन बनाकर रख देते हैं और सुबह होने पर माता स्थल पर ले जाकर उसकी पूजा करते हैं और फिर इसे ग्रहण किया जाता है।
इस त्योहार को बासौढ़ा, बासौड़ा, शीतला, पूजन तथा शीतला अष्टमी आदि नामों से जाना जाता है। चैत्र माह के रंगों के त्योहार होली के बाद अकसर सोमवार या बुधवार को भोजन बनाकर रखा जाता है। अगले दिन पूरा परिवार ही बासी भोजन खाता है।
बासौड़ा त्योहार मनाने के पीछे पुत्र कामना तथा शीतला रोगों से बचना माना जाता है। पुराने वक्त में चेचक या शीतला रोग अधिक होता था जिसमें लाखों व्यक्तियों की प्रतिवर्ष मृत्यु हो जाती थी। स्त्रियां शीतला माता की पूजा करके परिवार को रोगों से बचाने की प्रार्थना करती थी। तभी से यह त्योहार चला आ रहा है। त्योहार से एक दिन पूर्व विभिन्न पकवान बनाकर रख दिये जाते हैं। जिसमें चावल प्रमुख होता है। अगली रोज सुबह सवेरे उठ स्नान व शीतला माता की पूजा कर, जीवों को भोजन खिलाकर पूरा परिवार ही बासी भोजन करता है।
पुराने वक्त में बासी भोजन खाने के पीछे एक दंतकथा भी प्रचलित है जिसके अनुसार एक बुढिय़ा गांव से बाहर झोपड़ी में रहती थी। वह बासी भोजन करती थी जो ग्रामवासी देते थे। एक बार भयंकर शीतला रोग फैला। ग्रामीण रोग पीडि़त हो गए परन्तु बुढिय़ा  खुश व रोग रहित थी। ग्रामीणों ने बुढिय़ा से रोग रहित होने का कारण पूछा। बुढिय़ा ने बताया की वह बासी भोजन करती है, तभी से ग्रामीणों ने उनके पदचिह्नों पर चलना शुरू कर दिया। परम्परा वर्तमान में भी चली आ रही है।
बासौढ़ा के दिन चावल पकाकर आपसी आदान प्रदान करने की परम्परा भी चली आ रही है। इस परम्परा को कंडवारी नाम से जाना जाता है। पुत्रवती माता चावल पकाकर घर-घर बंटवाती है। प्रत्येक घर परिवार में यह प्रथा चली आ रही है बासी भोजन के पीछे वैज्ञानिक आधार भी माना जाता है। वर्तमान में भी कई रोगों से बचने के लिए बासी रोटी बताई जाती है। प्रत्येक गांव में माता स्थल बने हुये हैं जहां पूजा होती है।
कनीना में बना है माता शीतला मंदिर-
कनीना में माता शीतला मंदिर बना हुआ है तथा लोग प्रसाद के रूप में माता की मंढी पर भारी मात्रा में चावल एवं अनाज अर्पित कर देते हैं। चावल एवं अन्न के ढेर आगामी तीन सप्ताहों तक दिखाई देंगे।
फोटो कैप्शन 07: कनीना का माता मंदिर जहां बासौड़ा धोक लगाई जाती है




अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 551 महिलाओं का सम्मान
-छितरौली स्थित एसडीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुआ भव्य कार्यक्रम
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कनीना की आवाज।
 उपमंडल के गांव छिथरोली स्थित एसडीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 551 महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर उत्साहपूर्वक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें म्यूजिकल चेयर, दौड़, लेमन-नींबू रेस, मोबाइल के प्रयोग पर वाद-विवाद प्रतियोगिता, निबंध लेखन, भाषण तथा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल रहे। इन कार्यक्रमों में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पूरे उत्साह के साथ आनंद उठाया।
विद्यालय की प्राचार्य रेखा दांगी ने बताया कि विद्यालय परिवार द्वारा हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इस प्रकार के आयोजन किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में आपसी भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि महिला केवल एक नहीं बल्कि दो परिवारों को रोशन करती है, इसलिए समाज में महिलाओं का सम्मान और सशक्तिकरण बेहद आवश्यक है। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने बेटियों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने की शपथ भी ली। प्राचार्य रेखा दांगी ने बताया कि विद्यालय में 50 प्रतिशत से अधिक छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और वे पढ़ाई के साथ-साथ खेल व अन्य गतिविधियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। विद्यालय की बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेल और विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
फोटो कैप्शन 05: महिलाओं को सम्मानित करते हुए






कनीना की आवाज ब्लाग से न उठाये कोई समाचार
-वरना कापीराइट के तहत होगा मामला दर्ज
-आरएनआई द्वारा है रजिस्टर्ड
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कनीना की आवाज।
कनीना की आवाज नमक ब्लाग आरएनआई द्वारा  रजिस्टर्ड समाचार पत्र है। इससे यूं की यूं खबर को उठाकर कुछ लोग अनजाने में ग्रुप में डाल देते हैं जो कापीराइट का उल्लंघन है। कहने को तो अज्ञानता कहेंगे लेकिन कानून के सामने अज्ञानता का कोई बहाना नहीं होता। ऐसे में ऐसी गलती दो-तीन बार कुछ लोग कर चुके हैं जो डा. होशियार सिंह यादव कापीराइट अधिकारी द्वारा देखी जा चुकी हैं। भविष्य में अगर कोई ऐसी गलती करेगा चाहे वह जाने या अनजाने में हुई उसके खिलाफ कापीराइट के तहत मामला दर्ज करवाया जाएगा। इसके लिए ग्रुप एडमिन भी जिम्मेवार होगा। कनीना की आवाज ब्लाग की खबर को कापी करके कहीं प्रयोग न करें, सावधानी बरते अन्यथा अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
 कापीराइट मामले में सजा
-अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की कैद और 50,000 रुपए से 2 लाख रुपए तक के जुर्माने तक हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर सजा बढ़ जाती है, और इसमें गैर-जमानती और संज्ञेय  अपराध माना जाता है, जिसमें अवैध सामग्री और उपकरणों को जब्त भी किया जा सकता है।
सजा के मुख्य प्रावधान (भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार)
    धारा 63:पहली बार उल्लंघन करने पर कम से कम 6 महीने की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 लाख रुपएतक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63 (दोबारा उल्लंघन): दूसरी बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 साल की कैद और 1 लाख रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 रुपए लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63बी(कंप्यूटर प्रोग्राम का उल्लंघन): कंप्यूटर प्रोग्राम की उल्लंघनकारी प्रति का जानबूझकर उपयोग करने पर कम से कम 7 दिन की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
    अन्य दंड:उल्लंघन करने वाली प्रतियां और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए जा सकते हैं, और कापीराइट मालिक सिविल मुकदमे के जरिये मौद्रिक हर्जाना भी मांग सकता है।




साल में दो विज्ञापन भी नहीं देने वाले समाचार न भेजे
- अखबार का आदेश है विज्ञापन देने वालों की खबरें लगे अधिक से अधिक
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कनीना की आवाज।
लंबे समय से डा. होशियार सिंह यादव पत्रकारिता में जुटा हुआ है। सुबह से रात 11 जाते हैं तब जाकर पत्रकारिता पूर्ण होती है किंतु न तो समाचार पत्र एक रुपया भी देता और न ही लोग विज्ञापन देते। साल में अनेक समाचार छपने के बाद भी जब विज्ञापन का वक्त आता है तब कोई विज्ञापन नहीं दिया जाता, जिससे अखबार नाराज है और ऐसे पत्रकार जो विज्ञापन नहीं देते उनको हटाने का निर्णय ले लेता है। ऐसे में जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाए वो कृपया मेरे पास/डा. होशियार सिंह यादव के पास समाचार प्रकाशन हेतु न भेजे। इसे कड़ाई से पालन किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई समाचार भेजता है तो स्वयं जिम्मेदार होगा और वे प्रकाशित नहीं होंगे। अपने घर से कंप्यूटर, बिजली, नेट खर्चा, भाग दौड़ करनी पड़ती है वहीं बच्चों से दूर रहना पड़ता है। उस पर भी एक रुपए भी जेब में नहीं आता और खर्चा बढ़ता ही चला जाता है। एक और परिवार वाले नाराज वहीं अखबार वाले नाराज क्योंकि कुछ लोगों की आदत बन गई है कि समाचार के समय तो कहेंगे बड़े-बड़े समाचार छाप दो और विज्ञापन के नाम पर कहेंगे सोचेंगे, देखेंगे या फिर फोन नहीं उठाते, फोन बंद कर लेते हैं।  ऐसे में ऐसे व्यक्ति जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाते वो कृपया माफ करें, समाचार भविष्य में न भेजे। केवल वही व्यक्ति भेजें जिन्होंने कुछ विज्ञापन दिया है या मेरी किसी क्षेत्र में मदद की है ताकि उनका खर्चा में स्वयं वहन कर सकूं। सबसे बड़ी बात है कि अखबार के निर्देशानुसार एक विज्ञापन कम से कम 10 हजार का देने वालों के छह माह समाचार प्रकाशित होंगे, दो विज्ञापन देने वालों के पूरे साल समाचार प्रकाशित होंगे। अधिकतम दिन में एक समाचार प्रकाशित करवा सकता है वह भी स्वयं टाइप करके भेजना होगा। यदि साल में 20000 तक का विज्ञापन देता है उनके लिए यह सुविधा एक साल चलती रहेगी। समाचारपत्रों का कहना है कि उन लोगों पर समय बर्बाद ना करें जो विज्ञापन नहीं देते। एक और मजबूरी है दूसरी और विज्ञापन देना जरूरी है। शायद कनीना क्षेत्र के प्रतिदिन 10 बड़े समाचार अकेले मेरे प्रकाशित होते हैं लेकिन इस होली पर महज एक छोटा सा विज्ञापन मिला जिनसे उम्मीद थी वो कल देंगे, फिर देंगे, आगे देंगे करते-करते होली भी टाल दी। अब ऐसा नहीं होगा। केवल क्राइम के समाचार और उन लोगों के समाचार प्रकाशित होंगे जो विज्ञापन देते हैं या ऐसे व्यक्तित्व जो वास्तव में समाज के लिए  उदाहरण बने हुए हैं।






भारतीय ज्ञान पद्धति एक समग्र और प्राचीन प्रणाली है-डा. यादव
-प्राचार्य बीएम रावत ने सुनाये प्रेरक प्रसंग
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कनीना की आवाज।
भारतीय ज्ञान पद्धति एक समग्र और प्राचीन प्रणाली है जो वेदों, उपनिषदों और अन्य शास्त्रों पर आधारित है। जिसमें दर्शन, विज्ञान ,गणित, खगोल, आयुर्वेद, रसायन, कला, संस्कृति और आध्यात्मिकता शामिल हैं, जिसका उद्देश्य समग्र मानव कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति है। जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से आधुनिक शिक्षा में एकीकृत किया जा रहा है। यह केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान है जो गुरु-शिष्य परंपरा से पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होता रहा है। ये विचार पूर्व विज्ञान शिक्षक एवं लेखक डा. होशियार सिंह यादव स्टेट अवार्डी शिक्षक ने पीएमश्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में भारतीय ज्ञान पद्धति/इंडियन नालेज सिस्टम पर दो सत्रों में चले  व्याख्यान में व्यक्त किये।
  श्री यादव ने कहा कि इस ज्ञान को समग्र एवं  अनुभव और प्रयोग पर आधारित दो भागों में बांटा गया है। समग्र को भी आध्यात्मिक और लौकिक  दो भागों में बांटकर दोनों के संतुलन पर जोर देता है, जिससे व्यक्ति आत्मिक शांति और भौतिक सुख दोनों प्राप्त कर सके जबकि अनुभव और प्रयोग पर आधारित विज्ञान और जीवन दर्शन की प्रणालियां प्रयोग, अवलोकन और गहन विश्लेषण से विकसित हुई हैं, जैसे योग, ज्योतिष, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान प्रमुख हैं।
    शास्त्रीय आधार पर वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, अर्थशास्त्र, चरक संहिता, सुश्रुत संहिता जैसे ग्रंथ इसके आधार हैं, जो जीवन के हर पहलू का मार्गदर्शन करते हैं। ज्ञान का हस्तांतरण गुरु के माध्यम से होता था, जिससे यह परंपरा जीवित रही।
  उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान पद्धति में
सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा, वेदांत,आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित, खगोल विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान,भारतीय कला, वास्तुकला, साहित्य,राजनीति, समाजशास्त्र आदि शामिल किये गये हैं।
भारतीय ज्ञान पद्धति केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रणाली है जो वर्तमान और भविष्य के लिए प्रासंगिक है, जो मानव जीवन को समग्रता और संतुलन प्रदान करती है। वेदों की संख्या चार है जिनमें ऋग्वेद यह वेदों में सबसे प्राचीन और मंत्रों का संग्रह है,यजुर्वेद में यज्ञ और कर्मकांड से संबंधित नियम हैं। सामवेद में गेय और संगीत से संबंधित मंत्र हैं और अथर्ववेद में जादू-टोने, स्वास्थ्य, और तंत्र-मंत्र जैसी बातें हैं।
श्री यादव ने कहा कि आयुर्वेद, जिसका अर्थ है जीवन का विज्ञान, भारत की एक प्राचीन और समग्र चिकित्सा पद्धति है जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर केंद्रित है, वात, पित्त और कफ नामक तीन दोषों के संतुलन के माध्यम से स्वास्थ्य को बनाए रखती है और रोग को जड़ से खत्म करने के लिए जड़ी-बूटियों, आहार, योग और जीवनशैली का उपयोग करती है। यह केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि दीर्घायु और पूर्ण स्वास्थ्य प्राप्त करने का एक विज्ञान है, जो प्राकृतिक उपचारों पर आधारित है।
     शरीर के तीन मूलभूत ऊर्जाएं (वात,पित,कफ) जो संतुलन में होने पर स्वास्थ्य देती हैं और असंतुलित होने पर रोग का कारण बनती हैं। माना जाता है कि शरीर पांच मूल तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) से बना है।
  उन्होंने बताया कि व्यक्ति के दोष और प्रकृति के अनुसार संतुलित भोजन। करना चाहिए।
स्वस्थ जीवन जीने के लिए दैनिक और मौसमी दिनचर्या का पालन होना चाहिए।
 श्री यादव ने पोलैंड के एक गणितज्ञ, गैलीलियो गैलिली की मेहनत के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कैसे पेंडूलम घड़ी, आवर गिलास आदि खोजी गई।
भारत के वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने क्रेस्कोग्राफ नामक यंत्र से पौधों की वृद्धि और बाहरी उत्तेजनाओंके प्रति उनकी प्रतिक्रियाओं को रिकॉर्ड करके साबित किया कि पौधे सजीव होते हैं, दर्द महसूस करते हैं और उनमें जीवन चक्र होता है। उन्होंने दिखाया कि पौधे भी जंतुओं की तरह विद्युत संकेतों के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हैं। इस मौके पर पत्रकारिता, लेखन के पहुलुओं को भी छुआ और प्राचीन कवियों एवं लेखकों के अलावा नारद मुनि, गुरु शिष्य परंपरा पर प्रकाश डाला।
इस मौके पर प्रश्रोत्तरी प्रतियोगिता के जरिये अव्वल रहे  विद्यार्थियों को श्री यादव ने पुरस्कृत करने की घोषणा भी की। विद्यालय के छठी सातवीं आठवीं के समस्त बच्चे हाजिर रहे। शिक्षिका पूजा सिंह एवं उप प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य ने विशेष भूमिका निभाई। इस मौके पर प्राचार्य बीएम रावत, उप प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य,पूजा सिंह टीजीटी हिंदी, विनोद कुमार टीजीटी विज्ञान, रितिका प्रकाश टीजीटी अंग्रेजी, सुमन पारुथी टीजीटी अंग्रेजी, संगीता मिश्रा संगीत अध्यापिका आदि मौजूद रही।
फोटो कैप्शन 03: भारतीय शिक्षा पद्वति पर व्याख्यान देते डा. होशियार सिंह यादव


40 मरीजों ने उठाया स्वास्थ्य लाभ
-हर माह दूसरे रविवार को लगता है मुफ्त चिकित्सा शिविर
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कनीना की आवाज।
 कनीना मंडी के लाला शिवलाल धर्मशाला में उजाला सिग्रस अस्पताल रेवाड़ी द्वारा सेवा भारती संस्थान कनीना के सौजन्य से निशुल्क चिकित्सा एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया जिसमें डा. आसिफ रहमान गैस्ट्रो, डा. हर्ष सामान्य रोग विशेषज्ञ ने मरीजों के स्वास्थ्य जांच करके दवाइयां वितरित की। कैंप में 40 मरीजों ने स्वास्थ्य लाभ उठाया।
 इस शिविर में प्रताप यादव प्रबंधक उजाला सिग्नस अस्पताल रेवाड़ी, जगदीश आचार्य मंडल प्रमुख, सुरेश शर्मा शाखा प्रमुख, श्याम सुंदर महाशय, दिनेश जांगड़ा, मा. सोमदत्त, डा. वेद शर्मा, शिव कुमार अग्रवाल, योगेश अग्रवाल प्रचार प्रमुख आदि उपस्थित रहे।
उन्होंने बताया कि यह शिविर हर महीने के दूसरे रविवार को आयोजित किया जाता है। सेवा भारती संस्था प्रतिदिन आर्य समाज मंदिर में निशुल्क ओपीडी भी आयोजित करती है। सेवा भारती संस्था का कनीना में  चेरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल का निर्माण कार्य चल रहा है।
 फोटो कैप्शन 04: मरीज चिकित्सा शिविर में स्वास्थ्य लाभ लेते हुए

जनशक्ति विकास संगठन ने  वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन करके, पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
संस,जागरण.कनीना। बाबा राधेदास कनीना और लक्ष्मण गिरी विकलांग गौशाला ( विट्ठलगिरी महाराज आश्रम में जनशक्ति विकास संगठन के सहयोग से खादी नेचुरल और अतुल्य कंपनी के संस्थापक और सीईओ गौरव सिंह के जन्मदिन के अवसर पर द्वारा 40 पौधे लगवाए गए। जिसमें आम ,अमरूद ,शहतूत अशोका, सिल्वरआक, जामुन, बरगद, नीम, पीपल और टैकोमा स्टैंस आदि के पौधे लगाए गए। जनशक्ति विकास संगठन के अध्यक्ष दीपक कुमार वशिष्ठ ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सी ई ओ गौरव सिंह ने वृक्षारोपण कार्यक्रम करवाया।
उन्होंने पौधारोपण किया और पर्यावरण को हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया। दीपक कुमार वशिष्ठ ने कहा कि आज हमारे द्वारा लगाए हुए पौधे भविष्य में  बड़े होकर पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाएंगें। इसी कड़ी में  जनशक्ति का संगठन के सदस्य अमित कुमार ने बताया कि आज के समय में हमें ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करने की जरूरत है। वृक्ष हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है और स्वच्छ पर्यावरण का होना पृथ्वी पर पर्यावरण संतुलन हेतु आवश्यक है। पर्यावरण को बचाने के लिए हर नागरिक को स्वैच्छिक रूप से एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा उसकी रक्षा भी करनी चाहिए। लगाए गए पौधे भावी पीढ़ी के लिए जीवन का आधार बनेंगे तथा उनको स्वच्छ हवा और आक्सीजन देने में सहयोग करेंगे।
इस मौके पर मंहत विष्णु गिरी, जनशक्ति विकास संगठन के सदस्य अमित कुमार, समाजसेवी सुरेश कुमार वशिष्ठ, पूर्वी, महिला बाल विकास से सुपरवाइजर मनीषा यादव, नायक सूबेदार सुनील कुमार, राम सिंह साहब, समाज सेवी गुरुचरण गुप्ता, निर्मला, शर्मिला , नव्या, लक्ष , गौरव चौधरी, कृष्णा, शिवम, चिंटू आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 02: पौधारोपण करते हुए



कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-13
 करना चाहा अहित किंतु हुआ हित
-कहावत है जाको राखे सांइया मार सके न कोय
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने बतौर विज्ञान अध्यापक एवं प्राध्यापक 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया है। उन्होंने स्कूल, कालेज निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि दौरान करीब 35 विभिन्न स्कूल प्राचार्यों के साथ काम किया और उनमें से चंद कुतरूं प्राचार्य निकले। जिनका नाम लेते ही तन मन में दर्द होता है। जिनकी भावना हीन रही है। किसी के काम को रोकने आए हैं। सच का साथ नहीं दिया और उन्होंने सदा ही अच्छे और स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों का विरोध किया। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य के कारनामे सामने आये हैं। आज एक कारनामा यहां उजागर किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग में देखने में आया कि कुछ कुतरूं प्राचार्य वास्तव में ऐसी गंदी हरकतों पर चलते हैं की कल्पना भी कठिन होती है। बात उन दिनों की है जब होशियार सिंह बतौर विज्ञान अध्यापक अपने शिक्षण में तल्लीन रहते थे। परंतु कुतरूं प्राचार्य अपने साथ दो राक्षसी प्रवृति के लोगों को पास बिठाए रखता था। उनका काम ही कान भरना था। आज भी वो दोनों राक्षसी जीव जिंदा हैं। एक दिन राक्षसी प्रवृति के जीवों ने कुतरूं प्राचार्य से कहा कि होशियार सिंह आज के दिन ज्यादा वेतन ले रहा है। इनका इतना वेतन नहीं होना चाहिए। इनकी सर्विस बुक को खंगाला जाए और वो वेतनवृद्धियां काट दी जाएं जो फालतू ले रहा है। इन्होंने पूर्व प्राचार्यों से मिलकर अपना वेतन बढ़वा रखा है। फिर क्या था कुतरूं प्राचार्य ने दो-तीन सर्विस बुक के जानकारों को पास बुलाया और कहा कि इसकी सर्विस बुक की गहनता से जांच की जाए।
फिर क्या था गहन जांच की गई। जांच दौरान होशियार सिंह का एक दोस्त भी बैठा हुआ था। दिन भर माथा पच्ची करते रहे और पाया कि अधिक वेतन नहीं अपितु कम वेतन ले रहा है। इनकी एक वेतनवृद्धि कम लगी हुई है। फिर तो कुतरूं आचार्य और राक्षसी परवर्ती के दो जीवों की मानो जान ही निकल गई क्योंकि वे तो कह रहे थे कि होशियार सिंह अधिक वेतन ले रहा है। उन्होंने अब एक योजना बनाई कि इसे यू ही पड़ा रहने दिया जाए। इसको न बताया जाए कि यह कम वेतन ले रहा है किंतु एक सच्चा इंसान और होशियार सिंह का समर्थक कहने लगा कि अब तो इनको वेतनवृद्धि का लाभ देना होगा नहीं तो मैं होशियार सिंह को सारी बात बताऊंगा। होशियार सिंह के दोस्त ने हंसी आ गई और कहा कि तुमने अच्छा किया। तुम तो किसी का बुरा चाह रहे थे परंतु उस दाता को देखिए उसने भला किया। आखिर इसकी एक वेतनवृद्धि कम लगी हुई थी वह भी लग जाएगी। बाद में होशियार सिंह के दोस्त ने बताया कि ऐसे ऐसे कुतरूं प्राचार्य इस धरती पर हैं और उनके करनामे एक के बाद एक कितने ही सामने आए हैं। आखिर कहते हैं ना जाको राखे साइयां मार सके ना कोय। आखिर वह वेतनवृद्धि रोते हुए कुतरूं प्राचार्य ने लगानी पड़ी और धीरे-धीरे कुतरूं चार्य ने एक दिन कहना ही पड़ा कि हमने आपकी एक वेतनवृद्धि और ढूंढ दी है। तब होशियार सिंह के दोस्त ने कहा -तुमने ढूंढ नहीं दी, तुम तो इनका नुकसान करना चाह रहे थे परंतु हो गया लाभ। कितनी जगह आप लोगों ने इसका नुकसान किया है किंतु तुम बाज नहीं आ रहे। एक दिन खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस प्रकार नुकसान करने से एक दिन तुम नुकसान उठाओगे। किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। ऐसा ही हुआ कि दो राक्षसी जीवों ने आखिर उस कुतरूं प्राचार्य को घेर लिया। उसके विरुद्ध आरटीआई लगाई और बड़ी मुश्किल से जान बचाई। इसलिए कहा है कि दूसरों के लिए गड्ढा न खोदा जाए। अगर दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हो तो एक दिन उसमें खुद भी गिरना पड़ सकता है। याद रहे दूसरे को सम्मान देने से सम्मान मिलता है। ध्यान रहे राक्षसी जीवों ने शायद क्षेत्र में सबसे अधिक ब्लैकमेलिंग की है। एक दो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों से मिलकर कभी किसी के विरुद्ध आरटीआई लगते हैं कभी किसी को ब्लैकमेलिंग करते हैं और उनका उद्देश्य एक ही है कि आईटीआई लगा लगाकर तंग करके ब्लैकमेलिंग करना और फिर पैसे आपस में बांटकर खुश होते हैं। ऐसे राक्षसी जीवों का एक दिन बुरा अंत होना होगा। दुर्भाग्य यह है कि इन राक्षसी जीवों को बहुत से लोग बड़े चाव से पास बैठाते है। यह भी सत्य है कि इन जीवों ने जिस थाली में खाया उसमें छेद नहीं इतना बड़ा छेद कर दिया कि उसे फिर चाहे वेल्डिंग करवाते रहो फिर भी वह थाली जुड़ती नहीं। यह जिस थाली में खाते उसी को तोड़ देते हैं। इनकी नीचता के कारनामे तो बहुत अधिक सामने आए। ऐसे कुतरूं प्राचार्यों से सावधान रहना चाहिए। ऐसे ब्लैकमेलर जो होशियार सिंह के विरोधी, नुकसानकर्ता एवं अहित करने वाले आज कई ऐसी संस्थाओं में बैठे मिलते हैं। वो होशियार सिंह को देखकर समझ जाते हैं।




बीआर स्कूल, सेहलंग में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया
-महिलाएं समाज की सबसे बड़ी शक्ति -हरिश भारद्वाज
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कनीना की आवाज।
बीआर स्कूल, सेहलंग में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विद्यालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण और समाज में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन हरिश भारद्वाज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या ज्योति भारद्वाज ने









की।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्या की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा वंदना से की गई। कार्यक्रम का संचालन दीपा  द्वारा किया गया । कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण विषय पर भाषण, कविता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से महिलाओं के योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यालय की महिला शिक्षिकाओं के उत्कृष्ट कार्य और समर्पण को सराहते हुए उन्हें सम्मानित भी किया गया।
चेयरमैन हरिश भारद्वाज ने कहा कि महिलाएं समाज की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उनके बिना किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित और सशक्त महिला पूरे परिवार और समाज को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वहीं प्राचार्या ज्योति भारद्वाज ने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करना है ताकि वे भविष्य में अपने सपनों को साकार कर सकें और देश का नाम रोशन करें।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया तथा एक-दूसरे को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं।
फोटो कैप्शन 01: चेयरमैन व महिला शिक्षिकाओं को सम्मानित करते हुए


Saturday, March 7, 2026



 


पेयजल के हौद में गिरी तीसरी बार गाय, जेसीबी से निकाली
-गर्मियों में होती है अनेक दुर्घटनाएं
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कनीना की आवाज।
कनीना की बड़ी-बणी स्थित नहर पर आधारित पेयजल योजना के हौद में तीसरी बार एक काले रंग की गाय गिर गई। प्यास बुझाने के लिए गाय अंदर चली गई। आखिरकार जेसीबी बुलाकर गाय को हौद से निकाला गया। पहले भी दो बार नीलगाय इसके अंदर घुस गई,बाद में कड़ी मशक्कत से निकाला गया।
उल्लेखनीय की बड़ी बणी स्थित पानी के हौद में करीब आधा दर्जन लोगों की गिरकर मौत भी हो चुकी है। जिसे समाचारपत्र ने प्रकाशित किया है और बार-बार लोगों की मांग है कि हौद के चारों तरफ ऊंची दीवार बनाई जाए या जालियां लगाई जाए किंतु विभाग अभी तक मौन है। न तो जालियां लगी है और न हीं ऊंची दीवार बनाई गई है। जब-जब गर्मी आई है लोग नहाने के लिए इसमें घुसते हैं और आधा दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। यदि यह सिलसिला नहीं रुका तो भविष्य में इसके परिणाम और भी घातक साबित होंगे। उधर प्यासी गाय इसके अंदर घुस गई फिर निकल नहीं पाई। आखिर कड़ी में मशक्कत के बाद जेसीबी से इसे हौद से निकला गया।
  फोटो कैप्शन 08: पानी के हौद में गिरी गाय




कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-12  पढ़े 8 मार्च को
-करना चाहा था बुरा हो गया भला, जाको राखे सांइया मार सके न कोय




साल में दो विज्ञापन भी नहीं देने वाले समाचार न भेजे
- अखबार का आदेश है विज्ञापन देने वालों की खबरें लगे अधिक से अधिक
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कनीना की आवाज।
लंबे समय से डा. होशियार सिंह यादव पत्रकारिता में जुटा हुआ है। सुबह से रात 11 जाते हैं तब जाकर पत्रकारिता पूर्ण होती है किंतु न तो समाचार पत्र एक रुपया भी देता और न ही लोग विज्ञापन देते। साल में अनेक समाचार छपने के बाद भी जब विज्ञापन का वक्त आता है तब कोई विज्ञापन नहीं दिया जाता, जिससे अखबार नाराज है और ऐसे पत्रकार जो विज्ञापन नहीं देते उनको हटाने का निर्णय ले लेता है। ऐसे में जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाए वो कृपया मेरे पास/डा. होशियार सिंह यादव के पास समाचार प्रकाशन हेतु न भेजे। इसे कड़ाई से पालन किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई समाचार भेजता है तो स्वयं जिम्मेदार होगा और वे प्रकाशित नहीं होंगे। अपने घर से कंप्यूटर, बिजली, नेट खर्चा, भाग दौड़ करनी पड़ती है वहीं बच्चों से दूर रहना पड़ता है। उस पर भी एक रुपए भी जेब में नहीं आता और खर्चा बढ़ता ही चला जाता है। एक और परिवार वाले नाराज वहीं अखबार वाले नाराज क्योंकि कुछ लोगों की आदत बन गई है कि समाचार के समय तो कहेंगे बड़े-बड़े समाचार छाप दो और विज्ञापन के नाम पर कहेंगे सोचेंगे, देखेंगे या फिर फोन नहीं उठाते, फोन बंद कर लेते हैं।  ऐसे में ऐसे व्यक्ति जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाते वो कृपया माफ करें, समाचार भविष्य में न भेजे। केवल वही व्यक्ति भेजें जिन्होंने कुछ विज्ञापन दिया है या मेरी किसी क्षेत्र में मदद की है ताकि उनका खर्चा में स्वयं वहन कर सकूं। सबसे बड़ी बात है कि अखबार के निर्देशानुसार एक विज्ञापन कम से कम 10 हजार का देने वालों के छह माह समाचार प्रकाशित होंगे, दो विज्ञापन देने वालों के पूरे साल समाचार प्रकाशित होंगे। अधिकतम दिन में एक समाचार प्रकाशित करवा सकता है वह भी स्वयं टाइप करके भेजना होगा। यदि साल में 20000 तक का विज्ञापन देता है उनके लिए यह सुविधा एक साल चलती रहेगी। समाचारपत्रों का कहना है कि उन लोगों पर समय बर्बाद ना करें जो विज्ञापन नहीं देते। एक और मजबूरी है दूसरी और विज्ञापन देना जरूरी है। शायद कनीना क्षेत्र के प्रतिदिन 10 बड़े समाचार अकेले मेरे प्रकाशित होते हैं लेकिन इस होली पर महज एक छोटा सा विज्ञापन मिला जिनसे उम्मीद थी वो कल देंगे, फिर देंगे, आगे देंगे करते-करते होली भी टाल दी। अब ऐसा नहीं होगा। केवल क्राइम के समाचार और उन लोगों के समाचार प्रकाशित होंगे जो विज्ञापन देते हैं या ऐसे व्यक्तित्व जो वास्तव में समाज के लिए  उदाहरण बने हुए हैं।



दौंगड़ा अहीर तेजवीर का किया अभिनंदन
पहली बार यूपीएससी में चयन से खुशी की लहर
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कनीना की आवाज।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के घोषित परिणाम में दौंगड़ा अहीर गांव के  तेजवीर ने आल इंडिया 476वीं रैंक प्राप्त कर गांव व क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इसी खुशी में गांव में एक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया।
तेजवीर ने वर्ष 2015 में आईआईंटी मुम्बई से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। वर्तमान में वे गुडग़ांव में नौकरी करते हुए यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। खास बात यह रही कि उनका यह पहला ही मुख्य परीक्षा  और पहला ही इंटरव्यू था, जिसमें उन्होंने यह उल्लेखनीय सफलता हासिल की। तेजवीर ने बताया कि उन्होंने नौकरी के साथ-साथ आनलाइन माध्यम से पढ़ाई की। तैयारी के दौरान उन्होंने यूट्यूब, आनलाइन स्टडी मटेरियल और टेस्ट सीरीज की मदद से नियमित अभ्यास किया और सीमित समय में बेहतर रणनीति बनाकर परीक्षा पास की।उनके पिता  दलीप सिंह सेना से सेवानिवृत्त हवलदार हैं और माता गृहणी हैं। परिवार में दो भाई और एक बहन हैं, जिनमें से एक भाई पटवारी के पद पर कार्यरत हैं।
 प्रोफेसर राजेश बंसल ने बताया कि तेजवीर सिंह पीएमश्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय का वर्ष 2011 में पास आउट विद्यार्थी रहा है। ऐसे में नवोदय में भी खुशी की लहर है। उनकी सफलता पर प्रोफसर राजेश बंसल, संजीव कौशिक, सुनीता सांगवान, अशोक यादव, प्रो. प्रवीन यादव, प्रो. शेखर यादव सहित विभिन्न लोगों ने बधाई दी है।
फोटो कैप्शन 06: तेजवीर सिंह का अभिनंदन करते दौंगड़ा अहीर के ग्रामीण




खेड़ी तलवाना में 9 दिवसीय  वार्षिक उत्सव 25 मार्च से
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव खेड़ी तलवाना के प्राचीन सिद्ध श्रीठाकुरजी महाराज मंदिर प्रांगण में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 9 दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ 25 मार्च से  होगा। इस कार्यक्रम में 8 दिन तक श्रीकृष्ण कथा होगी 1 अप्रैल को भव्य श्याम बाबा का जागरण होगा 2 अप्रैल को भंडारा एवं मेले का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता मोहित दास महाराज कथा का रस बरसाएंगे । इस अवसर पर सरजीत सिंह , विनोद सिंह , धर्मवीर सिंह, कृष्ण सिंह , बिट्टू पुजारी, सतपाल आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 07: खेड़ी में बैठक के बाद जानकारी देते हुए




मोहित ने सीएसआईआर में पाया 105वां रैंक

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कनीना की आवाज।
  व्यक्ति के हौसले बुलंद और मन में दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो व्यक्ति आसमान की ऊंचाइयों को भी छू सकता है। जिला महेंद्रगढ़ के गांव छापड़ा सलीमपुर के बेटे मोहित ने सीएसआईआर-नेट परीक्षा को क्वालीफाई कर इस कथन को सार्थक किया है।
मोहित ने हाल ही में सीएसआईआर-नेट परीक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर 105वीं रैंक हासिल की है। मा. ओमप्रकाश खनगवाल ने बताया कि मोहित बचपन से ही प्रतिभाशाली रहा है और उसने अपनी मेहनत के बल पर यह सफलता हासिल की है। मोहित ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता तथा गुरुजन को दिया है।
मोहित की इस सफलता पर मोहित के पिता रूपचंद, माता मंजू देवी, दादा पूर्व कप्तान मोहन लाल, दादी रामप्यारी ने मोहित के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
फोटो कैप्शन : मोहित




गाहड़ा के अनुज यादव ने यूजीसी नेट व जेआरएफ में पाई 131वीं रैंक
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कनीना की आवाज।
उप मंडल के गांव गाहड़ा के अनुज यादव ने दिसंबर 2025 में आयोजित सीएसआईआर यूजीसी नेट  एवं जेआरएफ परीक्षा में रसायन विज्ञान विषय से 131वीं रैंक प्राप्त कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस सफलता से गांव में खुशी का माहौल है और लोगों ने उन्हें बधाई दी है। अनुज यादव पुत्र जगत सिंह ने एमएससी रसायन विज्ञान की पढ़ाई महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के रसायन शास्त्र विभाग से पूरी की है।
अनुज ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और परिवारजनों को दिया है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि में उनके मार्गदर्शक प्रवीन यादव का विशेष सहयोग और मार्गदर्शन रहा। अनुज यादव का लक्ष्य भविष्य में पीएचडी कर शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देना है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र के युवाओं को भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढऩे की प्रेरणा मिल रही है।
फोटो कैप्शन: अनुज गाहड़ा




कनीना में विशाल भंडारे का आयोजन, ढाई हजार लोगों ने ग्रहण किया प्रसाद
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कनीना की आवाज।
कनीना में गाहड़ा रोड स्थित नीरज इंटरप्राइजेज के सामने भारतीय युवा कांग्रेस के अलका अध्यक्ष नीरज चौधरी की ओर से आमजन की सेवा भाव से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान करीब ढाई हजार लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। नीरज चौधरी ने बताया कि यह भंडारा आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक व सामाजिक आयोजनों से समाज में प्रेम और भाईचारा बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह भंडारा अब हर वर्ष आयोजित किया जाएगा, ताकि दुकानदारों, राहगीरों तथा बाजार में आने वाले ग्राहकों के लिए सेवा की भावना से भोजन की व्यवस्था की जा सके। उन्होंने कहा कि भंडारे हमारी संस्कृति और सामाजिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो लोगों को एक-दूसरे से जोडऩे का काम करते हैं। इस अवसर पर पूर्व बार एसोसिएशन प्रधान पार्षद दीपक चौधरी, दीपचंद यादव, अभय साहब, मास्टर रतनलाल, डॉ. नरेंद्र शर्मा, मास्टर बिजेंद्र, अधिवक्ता हरीश, सिक्कू चौधरी, जीतराम चौधरी, कंवर सिंह बोहरा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: कनीना के भंडारे का नजारा




राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में उल्लास की खंड स्तरीय बैठक आयोजित
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कनीना की आवाज।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में आज उल्लास  कार्यक्रम के तहत खंड स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में खंड के विभिन्न विद्यालयों के संस्था प्रमुखों व अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में नोडल अधिकारी गुलशन कुमार ने आगामी 15 मार्च को आयोजित होने वाली उल्लास परीक्षा के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परीक्षा में पंजीकृत नव साक्षरों का मूल्यांकन किया जाएगा। नव साक्षर अपने क्षेत्र के विद्यालय में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच किसी भी समय आकर परीक्षा दे सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जो नव साक्षर अब तक पंजीकरण या परीक्षा से वंचित रह गए हैं, उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल कर परीक्षा दिलाई जाए।
उन्होंने बताया कि नव साक्षरों की पहचान परिवार पहचान पत्र  के माध्यम से की गई है और उन्हें साक्षर बनाकर जिले को पूर्ण साक्षर बनाने की दिशा में यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने बैठक में उपस्थित सभी आहरण एवं वितरण अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में साक्षरता अभियान की शुरुआत वर्ष 1995 में संपूर्ण साक्षरता अभियान से हुई थी। इसके बाद उत्तर साक्षरता कार्यक्रम तथा सतत शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से इसे आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि समाज में मौजूद निरक्षर लोगों को साक्षर बनाकर उन्हें समाज और राष्ट्र के विकास की मुख्य धारा से जोडऩा हम सभी की जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर प्राचार्य सुनील कुमार ने परीक्षा के दौरान विद्यालय प्रमुखों तथा परीक्षा देने आने वाले नव साक्षरों के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। बैठक में प्राचार्य रामस्वरूप (करीरा), वीरेंद्र सिंह (बूचावास), हेडमास्टर किशन लाल, वीरेंद्र (कैमला), रीता वधवा, मुरारी लाल सेहलग, कैलाश चंद्र बंसल, सत्य प्रकाश महरौलिया, प्रवीण कुमार (स्याणा), पूनम यादव (अगियार), मुन्नाराम (ककराला), महेंद्र सिंह, सतीश कुमार सहित सहित खंड के सभी संस्था मुखिया उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: उल्लास परीक्षा की तैयारी में जुटा विभाग

14 विद्याओं एवं 64 कलाओं से परिपूर्ण है एनईपी-2020
भारतीय ज्ञान प्रणाली पर विशेष व्याख्यान का आयोजन
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कनीना की आवाज।
पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय, करीरा में पीएमश्री योजना के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली  गतिविधि के तहत एक प्रेरणादायी व्याख्यान का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता के रूप में नवोदय विद्यालय करीरा के सेवानिवृत्त एवं स्टेट अवार्डी शिक्षक डा. होशियार सिंह यादव रहे।
विद्यालय पहुंचने पर श्री यादव का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन विद्यालय प्राचार्य ब्रजमोहन रावत , उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य एवं पूजा सिंह टीजीटी हिंदी द्वारा किया गया।कार्यक्रम में कक्षा 6, 7 एवं 8 के समस्त छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
श्री यादव ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली 14 विद्याओं तथा 64 कलाओं से परिपूर्ण है जो नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री द्वारा लागू की गई है। 21वीं सदी की यह पहली एनईपी है। इससे पहले 1968 व 1986 में भी एनईपी लागू की गई थी। ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में छात्रों को प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली एक वैज्ञानिक सोच है।
उन्होंने वेद, उपनिषद, योग शिक्षा तथा भारतीय दर्शन की गहनता, धर्म व संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। 
श्री यादव











जोर देकर कहा कि भारत कभी विश्वगुरु था और गणित, खगोलशास्त्र, चिकित्सा, योग, दर्शन आदि अनेक क्षेत्रों में भारत ने विश्व को अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने बताया की भारतीय ज्ञान प्रणाली का अध्ययन विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में मददगार साबित हो सकता है जैसे वे योग शिक्षक, आयुर्वेद चिकित्सक, वास्तु विशेषज्ञ व मनोवैज्ञानिक आदि क्षेत्रों में अपना सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आज भी इन प्राचीन ज्ञान परंपराओं को पुनर्जन्म देकर हम पुन: विश्वगुरु बन सकते हैं। श्री यादव ने सुभाषचंद्र बोस आर्यभट्ठ, सुश्रुत,चरक, पतंजलि, वहारहमिर का हवाला देते हुए वेदों का सार, उपनिषदों एवं गीता के बारे में भी बताया और गुरु शिष्य परंपरा का समृद्ध इतिहास बताते हुए बुजुर्गों से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित किया ।
कार्यक्रम के अंत में उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य जी ने मुख्य वक्ता डा. यादव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया तथा अपने कीमती समय में उपस्थित होकर विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा का अमूल्य ज्ञान प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। इस मौके पर प्राचार्य बीएम रावत, उप प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य,पूजा सिंह टीजीटी हिंदी, विनोद कुमार टीजीटी विज्ञान, रितिका प्रकाश टीजीटी अंग्रेजी, सुमन पारुथी टीजीटी अंग्रेजी, संगीता मिश्रा संगीत अध्यापिका आदि मौजूद रही।
फोटो कैप्शन 05: डा. यादव भारतीय ज्ञान पद्धति पर व्याख्यान देते हुए




धर्म के होते हैं दस लक्षण-अतरलाल
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कनीना की आवाज।
कनीना के बाबा गोसाई मंदिर सनातन हिन्दू धर्म सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि  अतरलाल एडवोकेट थे। अध्यक्षता रामसिंह साहब ने की। मुख्य अतिथि अतरलाल ने धर्म के 10 लक्षणों का वर्णन करते हुए सनातन हिन्दू धर्म की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि धर्म हमारी रक्षा करता है। हमें अपने कार्य धर्मनिष्ट होकर करने चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था बहुत बड़ी चीज है जो धाव सो पाव। हजारों साल की गुलामी के बाद भी धार्मिक आस्था के कारण भारत की एकता अखंडता, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत मजबूत है। उन्होंने बाबा गौसाई भारती मंदिर के नवीनीकरण के लिए मंदिर कमेटी को 31000 रुपएभेंट किए। रामसिंह साहब ने बाबा गौंसाई भारती मंदिर के नवीनीकरण के लिए लोगों से बढ़-चढ़ कर तन-मन-धन से सहयोग करने का अनुरोध किया। इस अवसर पर बाबा राजेश दास नगरपार्षद, राजकुमार, रामसिंह, हरेन्द्र शर्मा, महेश, मनोज, रगबीर, संतोष, कमला, रामरती, अंगूरी देवी, राजेन्द्र, दानसिंह प्रजापत, रवि कौशिक आदि अनेक श्रद्धालु मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 04: सनातन धर्म सम्मेलन को संबोधित करते अतरलाल एडवोकेट।


बाघोत शराब ठेका डकैती का पर्दाफाश -सेल्समैन को बंधक बनाने वाले 2 आरोपी गिरफ्तार
- एक अन्य वारदात का भी हुआ खुलासा
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कनीना की आवाज। 
कनीना सदर थाना क्षेत्र के बाघोत गांव में एक शराब ठेके पर हुई डकैती की वारदात को सुलझाने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को झज्जर के साल्हावास क्षेत्र से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान सोमबीर निवासी सिवाना, थाना बेरी, जिला झज्जर और अंकित निवासी कुगाई, थाना सदर झज्जर के रूप में हुई है। आरोपियों को आज न्यायालय में पेश किया गया।
 1/2 मार्च की मध्यरात्रि लगभग 1:30 से 2 बजे के बीच, 3-4 अज्ञात बदमाशों ने बाघोत गांव में बहु रोड स्थित शराब के ठेके पर मौजूद सेल्समैन को बंधक बना लिया और ठेकेदार को भविष्य में ठेका न चलाने तथा जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद वे ठेके से अंग्रेजी शराब, बीयर और देसी शराब एक अज्ञात गाड़ी में लादकर ले गए थे। साथ ही, वे गल्ले में रखी नकदी और सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर भी उखाड़ ले गए थे। इस संबंध में सुनील कुमार की शिकायत पर थाना सदर कनीना में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने 12-13 फरवरी को गुढ़ा गांव के ठेके पर हुई इसी तरह की वारदात के आधार पर संदेह भी जताया था।
मामले में पुलिस ने सघन जांच करते हुए 3 मार्च को ही डकैती में लूटी गई शराब की 154 पेटी (अंग्रेजी, देसी व बीयर) बरामद करने में सफलता हासिल कर ली थी। साथ ही वारदात में इस्तेमाल की गई एक पिकअप गाड़ी को भी जब्त कर लिया गया था।
सीआईए महेंद्रगढ़ द्वारा गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से प्रारंभिक पूछताछ में कनीना क्षेत्र में ही एक अन्य शराब ठेके पर डकैती की वारदात का भी पर्दाफाश हुआ है। पुलिस द्वारा आरोपियों से गहनता से पूछताछ की जा रही है ताकि वारदात में शामिल उनके अन्य साथियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके और लूटी गई नकदी व डीवीआर आदि की बरामदगी सुनिश्चित की जा सके।
फोटो कैप्शन 03:पकड़े गये दो आरोपी