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Friday, April 3, 2026



 
गर्मियों का होता है विशेष खानपान
-सेहत को बरकरार रखने के लिए ग्रामीण लोग है अग्रणी
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कनीना की आवाज।
 सेहत के दृष्टिगत विशेषकर गर्मियों में खानपान का ग्रामीण क्षेत्र के लोग विशेष ध्यान रखते हैं।  ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं कम होती है किंतु सेहत के प्रति उनका रवैया बेहतरीन देखने को मिलता है। गर्मियों के दिनों में जहां ठोस आहार कम काम में लिए लेते हैं वही तरल आहार अधिक से अधिक प्रयोग किया जाता है। गर्मियों के दिनों में रोटी के रूप में मेसी रोटी खाई जाती है। चना,गेहूं या जो आदि की बनी होती है। ऐसी रोटियां  ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी से प्रयोग करते हैं अपितु जब चने की पैदावार अधिक होती थी चने की रोटी खाते थे जो सेहत के लिए बहुत जरूरी है। यहां तक कि बासी मेसी रोटियां भी  राबड़ी के साथ विशेष खाद्य पदार्थ ग्रामीण क्षेत्रों का है।
   इस संबंध में विज्ञान के जानकार कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव बताते हें कि राबड़ी जो छाछ, जौ का आटा आदि हांडी में  पकाकर बनाया जाता है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो छाछ में बनाया जाता है तथा छाछ डालकर ही इसे प्याज और बासी रोटी के साथ खाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस मामले में कभी से राबड़ी प्रयोग करते आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी राबड़ी को नहीं भूलते। चाहे वर्तमान पीढ़ी कोल्ड ड्रिंक पीने लग गई और चाय अधिक सेवन करती है किंतु ग्रामीण बुजुर्ग राबड़ी को अहमियत देते हैं। इस वक्त गर्मियों के दिनों में धाणी एवं भुगड़ा नाम से विशेष खाद्य पदार्थ का खाते हैं। ग्रामीण लोग जौ को भुनवाकर धाणी तो चने को भुनवाकर भुगड़ा बनाते हैं जिनको गर्मी के दिनों में बड़े चाव से खाया जाता है। यहां तक कि कुछ लोग जौ की धाणी का सत्तू भी बनाकर पीते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां विशेष रूप से खरबूजा ,खरबूजा,ककड़ी एवं मतीरा आदि खाते हैं। यद्यपि मतीरा दिनों दिन लुप्त होते जा रहे हैं किंतु आज भी बुजुर्ग मतीरे को तरसते हैं। तरबूज से जहां पानी की प्यास बुझाते हैं कोई सेहत के लिए भी लाभप्रद है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र तरबूज पर विशेष ध्यान देते हैं। यहां तक कि आपस में कोई लड़ाई झगड़ा हो जाता है और सुलहनामा बनता है तो तरबूज ही घर लेकर आते  हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में ककड़ी तरबूज और खरबूजा आदि विशेष रूप से चाव से खाए जाते हैं।
ग्रामीण ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का प्याज का विशेष लगाव रहा है। यहां तक कि हर घर में नींबू रखते हैं जिससे शिकंजी पीते हैं तथा प्याज एवं कच्चे आम को भून कर खाते हैं ताकि गर्मी से बचा जा सके। गर्मी के खाद्य पदार्थों के बारे में राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, कृष्ण कुमार, दिनेश कुमार एवं सुनील कुमार आदि बताते हैं की बुजुर्ग पुराने खानपान को आज भी नहीं भूले हैं। सब्जियों के रूप में बुजुर्ग लोग खाटा का साग और कढ़ी के अतिरिक्त रायता बनाकर खाते हैं क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की कमी नहीं होती। यही कारण है दही को रायते में बदल देते हैं और खाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी एक दूसरे के घर से छाछ मुफ्त में उपलब्ध हो जाती है जिसमें काला नमक, भुना हुआ जीरा पुदीना आदि डालकर बड़े चाव से पिया जाता है। जब भी कोई मेहमान आता है तो उसको चाय की बजाए राबड़ी या छाछ का गिलास थमाते हैं जो खाने में बेहतरीन होता है। कसी शहर से आने वाले व्यक्ति भी बड़े चाव से लस्सी को पीते हैं, चाय को दूर भगाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खाने-पीने की आदतें अच्छी है। यहां तक कि मक्खन भी प्रयोग किया जाता है, दूध का भी सेवन किया जाता है किंतु हर घर में प्याज जरूर खरीदी जाती है जिसे वर्ष भर खाते हैं। प्याज का राबड़ी के साथ विशेष संबंध माना गया है। जब कभी धूप लग जाती है तो कच्चे आम को भुनकर ही उसका उपयोग किया जाता है।






शिक्षा के क्षेत्र में लक्ष्य प्राप्ति पर जोर, नामांकन व गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विशेष ध्यान
--उप-जिला शिक्षा अधिकारी दिलबाग सिंह ने दिए निर्देश
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कनीना की आवाज।
शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, विद्यार्थियों के नामांकन में वृद्धि तथा नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।
इस अवसर पर उप-जिला शिक्षा अधिकारी दिलबाग सिंह ने निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों का अधिकतम नामांकन सुनिश्चित किया जाए तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी, रोचक और परिणामोन्मुख बनाया जाए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण कार्य करते हुए विभाग द्वारा निर्धारित नामांकन लक्ष्यों को हर हाल में प्राप्त किया जाना चाहिए।
वहीं खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार यादव ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि निर्धारित शैक्षिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समर्पण, अनुशासन एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से गणितीय दक्षता, भाषा कौशल तथा विद्यार्थियों के मौलिक ज्ञान के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया।
बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि आगामी 6 अप्रैल से जनगणना कार्य हेतु तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसमें विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, जो प्रशिक्षण प्राप्त कर जनगणना कार्य को पूरी जिम्मेदारी के साथ संपन्न करेंगे।
इस दौरान जीएलएन जिला संयोजक विक्रम यादव ने बताया कि लाडो लक्ष्मी योजना के अंतर्गत निपुण हरियाणा के लक्ष्यों को प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की माताओं को लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके लिए सभी शिक्षकों को गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ प्रयास करने होंगे।
खंड संयोजक गुलशन यादव ने उल्लास कार्यक्रम के तहत आयोजित हालिया परीक्षा की विस्तृत जानकारी साझा की तथा एफएलएन  के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक द्वारा किया गया। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी शिक्षकों से सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्राचार्य सुनील खुडानिया, प्राचार्य सत्यपाल गुढ़ा, प्राचार्य रेनू मेहरा भोजावास, प्राचार्य धर्मवीर खेड़ी तलवाना, मुख्याध्यापक सत्य प्रकाश भडफ़, शुभकरण उन्हनी सहित खंड के सभी प्राचार्य, मुख्य अध्यापक एवं मिडिल हेडमास्टर उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04: शिक्षकों की बैठक को संबोधित करते दिलबाग सिंह





दिन भर तेज हवाएं चली, आकाश में बादल छाए, हुई हल्की बूंदाबांदी
-बाद में हुई 6 एमएम वर्षा
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में दिनभर आकाश में काले बादल छाए रहे और तेज हवाएं चली बूंदाबांदी भी हुई। किसान तेजी से अपनी सरसों और गेहूं की लावणी एवं फसल पैदावार लेने में लगे हुए हैं क्योंकि मजदूरों का अभाव होने के कारण हार्वेस्टिंग मशीनों से ही फसल कटाई एवं पैदावार दोनों लेने का कार्य कर रहे हैं।
 उल्लेखनीय है कि मार्च के दूसरे पखवाड़े और अप्रैल में लगातार मौसम बदल रहा है। कई बार बूंदाबांदी और वर्षा हो चुकी है। किसानों की बार-बार लावणी की हुई फसल भीग जाती है जिससे पैदावार की गुणवत्ता पर कु-प्रभाव पडऩे का आसार बना हुआ है। अधिकांश किसानों ने अपनी सरसों की पैदावार त्वरित गति से लेने का कार्य शुरू कर दिया है ताकि पैदावार को घर में सुखाया जा सके। क्योंकि अभी सरसों नमीयुक्त है जिसे सूखने के बाद ही मंडियों तक पहुंचाया जा सकता है।
 किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, मनोज कुमार, कृष्ण कुमार आदि ने बताया कि इस बार रबी फसल के दौरान अनेक समस्याएं किसानों ने झेली हैं। ओलावृष्टि ने भी फसल को नुकसान पहुंचाया है। पैदावार लेने पर ही पता चल पाएगा की मौसम की कितनी मार पड़ी है।
 फोटो कैप्शन 05: आकाश में छाए हुए बादल




 बंदरों की समस्या बोल रही है सिर चढ़कर
--दो बार बंदरों को पकड़कर छोड़ा गया था अन्यत्र
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में बढ़ते बंदरों की संख्या न केवल आम आदमी अपितु दुकानदार, सरकारी कर्मचारी, विभिन्न संस्थाओं के लोग यहां तक की फल और रेहड़ी पर सब्जी विक्रेेता बेहद परेशान है। प्रतिदिन हजारों रुपये का नुकसान बंदर कर देते हैं। एक वक्त था जब बंदरों को खाना खिलाने लोग दूरदराज जाते थे। अब धीरे-धीरे बंदरों के प्रति वह लगाव नहीं रहा है क्योंकि बंदरों से लोग तंग आ चुके हैं। कनीना कस्बे से महज एक बार बंदरों को पकड़कर अन्यत्र छुड़वाया गया था किंतु फिर से इनकी संख्या बढ़ गई है। तत्पश्चात प्रयास किए गए किंतु बंदरों की संख्या बढ़ती ही चली गई। वर्तमान में कनीना ही नहीं अपितु आस पास के गांवों के लोग भी बेहद परेशान हैं। अकेले कनीना में सैकड़ों बंदर दिनरात परेशान कर रहे हैं। एक दर्जन से अधिक लोगों को कनीना क्षेत्र में बंदरों ने काट खाया है। कनीना नगरपालिका ने वर्ष 2013 में 61 तो 2025 में 134 बंदरों को पकड़वाकर अन्यत्र छुड़वाया था किंतु फिर से इनकी संख्या बढ़ गई है। ये बंदर तो डरते नहीं अपितु सीधा हमला बोलते हैं।
 क्या कहते हैं कस्बावासी-
बंदरों ने हर प्रकार से मुसीबत खड़ी कर रखी है। रेहड़ी और फल विक्रेताओं फल उठा कर भाग जाते हैं यहां तक की अंडों की रेहड़ी से अंडे तो विभिन्न जीवों को पकड़ कर ये बंदर खा जाते हैं। वैसे भी लोगों को डरा कर अनेक घटनाएं घटित करवा दी है। इनको पकड़कर दूर दराज छुड़वाना चाहिए।
  -- कनीना के गणेश अग्रवाल
बंदर कनीना में एक समस्या बनकर रह गए हैं। एंटीना हो या कोई ध्वज लगा हो उसे तोड़ कर ही दम लेते हैं। घर में कपड़े सूख रहे हो उनको फाड़ जाते हैं। घर में फल या सब्जी लग रही हो उसे क्षणों में ही बर्बाद कर जाते हैं। बंदरों के कारण कस्बा कनीना में आधा दर्जन घटनाएं भी कर चुकी है। बंदरों से निजात पाने के लिए बार-बार निवेदन कर रहे हैं किंतु समाधान नहीं निकाला गया है।
   ---योगेश अग्रवाल,कनीना मंडी
 लोग कुत्ता, बंदर एवं बिल्ली के काटने के बाद सावधानी नहीं बरती तो जीवन को खतरा हो सकता है। और किसी भी समय यह रोग बढ़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब शहरी तर्ज पर कुत्ते पालने की प्रथम बनी हुई है इसके चलते कुत्ता कभी किसी को काट सकता है और काटने पर तुरंत प्रभाव से टीके लगवाने चाहिए। उन्होंने बताया कि अक्सर कभी कुत्ता काटता है और काटने के बाद यदि कोई खून नहीं निकलता खरोंच आ जाती है तो टीके लगवाने की जरूरत नहीं होती। इसे अच्छी प्रकार साबून,डिटोल एवं तथा अन्य एंटीबायोटिक पदार्थ से धो देना चाहिए परंतु कुत्ते के काटने से कुछ खून निकलता है तो टीके लगवाने जरूरी होते हैं।
  ---डा. पवन कांगड़ा
फोटो कैप्शन: डा. पवन कांगड़ा



कनीना में हुई 6 एमएम वर्षा, किसान परेशान
-गेहूं एवं सरसों पैदावार लेना हुआ दुष्कर

 

उपनिदेशक ने कनीना में एसडीएच का किया दौरा
-उपकरणों की गई जांच
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कनीना की आवाज।
 उपनिदेशक वेक्टर बोर्न डिजिज/वीबीबी डाक्टर रविंद्र अहलावत ने शुक्रवार को कनीना की उप नागरिक अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने विभिन्न प्रयोगशाला के उपकरणों के कैलिबर को जांचा।
मिली जानकारी अनुसार उपनिदेशक ने बीपी मशीन, प्रयोगशाला के विभिन्न मशीनों, एक्सरे, इसीजी, आईएलआर, सेक्षन अपरेट्स, बीपी, शूगर, विभिन्न एनालाइजर आदि की जांच की। पूरे ही प्रदेश के अस्पतालों में इस प्रकार की जांच चल रही है। सभी उपकरण ठीक-ठाक ढंग से कार्य करते पाए गए।
 फोटो कैप्शन 3: उप-निदेशक कनीना एसडीएच का दौरा करते हुए




पानी की टंकियों की होनी चाहिए 3 माह में सफाई
- निर्धारित टंकियों के पास लिखा होना चाहिए सफाई कब की गई
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कनीना की आवाज।
 नेशनल क्वालिटी कंट्रोल के तहत जहां स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न संस्थाओं में आदेश जारी किया हुआ है कि पेयजल टंकियों की नियमित रूप से सफाई की जाए। हो सके तो जब पानी गंदा होता नजर आए तुरंत सफाई करें किंतु 3 महीने में हर हाल में टंकियां की सफाई करना जरूरी होता है।
नियमानुसार बोर्ड पर लिखा भी जाता है कि पानी की टंकी कब साफ की गई थी और अगली सफाई कब की जाएगी। देखने में आता है कि बहुत सी संस्थाओं में पानी की टंकी को लंबे समय तक साफ नहीं किया जाता।
सिविल सर्जन नारनौल में भी आदेश दिया हुआ है की सभी ओवर हेड या भूमिगत जल भंडार,टैंकों की स्थिति जांच की जाए। किसी प्रकार का प्रदूषण रिसाव, संरचनात्मक क्षति न हो, टंकियां की पूर्ण रूप से सफाई की जानी चाहिए। अंदर से कीचड़ हटाना, उचित कीटाणु शोधन प्रयोग करना आदि निर्धारित सुरक्षा स्वच्छता मानकों के अनुरूप ही बताए गए हैं। 3 माह में निश्चित रूप से सफाई की जानी चाहिए। ऐसा पत्र भी हाल ही में सिविल सर्जन ने भी भेजा हुआ है जिसके तहत कुछ कार्यालयों में भी कार्रवाई चल भी रही है लेकिन अभी तक बहुत से कार्यालयों में पानी की टंकी को साफ नहीं किया जा रहा है।
फोटो कैप्शन 02:स्कूल में वर्णित पानी की टंकी की सफाई



16 सालों से अधर में लटके हैं लाइब्रेरी एवं दो कमरे
-अभी भी नहीं हो पाई है लिपाई पुताई , खंडहर बनने की बनी संभावना
-पांच प्राचार्य भी नहीं करवा पाए काम पूरा, बीआरसी भडफ़ जैसा हुआ हाल
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कनीना की आवाज।
 राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना परिसर में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान/आरएममएसए के तहत जहां दो कमरे और एक लाइब्रेरी विगत 16 सालों से पूर्ण होने का इंतजार कर रहे हैं। अभी भी अधर में लटके हैं। न तो फर्श लग पाया है और न ही पुताई हुई है। परिणाम यह है कि अभी से ही भवन खंडहर बनने की कगार पर है। शुरू होने से पहले ही जब खंडहर हो जाएगा तो आखिर सरकार को लाख रुपए का चूना लगेगा। एक और जहां बीआरसी कार्यालय भडफ़ गांव से में बनाया था जो करोड़ों की लागत के बाद भी आज खंडहर बन चुका है और वहां से खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय परिसर में पीछे कमरों में विराजमान है।
 वर्तमान बीइओ कार्यालय के पास ही ये दो कमरे और लाइब्रेरी अधर में लटके हुए हैं  साथ में दो कमरे नगर पालिका द्वारा भी बनाए गए थे वो भी अधूरे पड़े हैं। इस प्रकार चार कमरे एवं एक लाइब्रेरी 16 सालों से अपने निर्माण की दुहाई दे रहे हैं ताकि सरकार के लाखो रुपये मिट्टी में मिलने से बच सके। अगर यह ग्रांट समय पर मिल जाए तो इन कमरों को पूर्ण करके कम से कम खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को ही चलाया जा सकता है या अन्य किसी कार्यों में इस भवन परिसर को दिया जा सकता है।
 अब तक की मिली सूचना अनुसार 2010-11 में एक लाइब्रेरी और दो कमरों का शुभारंभ तत्कालीन प्राचार्य आरपी कौशिक के समय होना था। तत्कालीन प्राचार्य आरपी कौशिक ने प्रयास किया किंतु जिस जगह वो बनाए जाने थे वहां नहीं बन पाए। वर्ष 2012-13 में 2,87,000 रुपए खर्च करके नगर पालिका ने दो कमरे बना दिए जो आज भी अधूरे पड़े हैं। जिनके न तो फर्श लगाया है न लिपाई पुताई की गई है। इसके कारण ये दोनों कमरे भविष्य में खंडहर बन सकते हैं। वर्ष 2014 में तत्कालीन प्राचार्य वेद प्रकाश के समय एक लाइब्रेरी और दो कमरों के लिए प्रथम किस्त प्राप्त हुई जिनका सदुपयोग करते हुए लाइब्रेरी और दो कमरे डीपीसी तक निर्मित कर दिए गए। ये भी नगर पालिका द्वारा बनाए गए कमरों के साथ ही निर्मित हो गए किंतु बार-बार प्रयास करने के बावजूद भी अगली किस्त तुरंत नहीं मिली। परिणाम काम अधूरा रहा। वर्ष 2017 में दूसरी किस्त 4,82,655 रुपए प्राचार्य लाल सिंह के वक्त वक्त आए और छात्र का निर्माण कार्य कर दिया गया। छत तक लगा दी गई। तत्पश्चात फिर से इसकी लिपाई पुताई के लिए तीसरी किस्त आनी बाकी थी जो 5 सालों तक लंबा इंतजार करके वर्ष 2022 में तत्कालीन प्राचार्य सत्यपाल धूपिया के समय 7,66,087 रुपए प्राप्त हुए। जिसमें पांच कमरों की लिपाई पुताई, फर्श आदि किया जाना था। इस समय इसका बजट भी डल गया लेकिन 30 प्रतिशत कैप की वजह से यह राशि निकाल नहीं पाई और फिर से कमरे अधर में लटक गए। वर्ष 2023 में सुनील खुडानिया प्राचार्य ने उपरोक्त राशि प्राप्त करने के लिए फिर से प्रयास किया किंतु उन बातों को 3 साल बीतने को है कि परंतु राशि प्राप्त नहीं हुई है और  निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया है। अभी भीअगर यह राशि प्राप्त नहीं हुई तो करीब 16 साल पहले निर्मित यह भवन फिर से खंडहर बन जाएगा और शुरू होने से पहले ही दम तोड़ देगा। अगर समय पर राशि मिल गई तो इस भवन को बचाया जा सकता है और सरकार की लाखों रुपए की बचत हो सकती है। भवन का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए जैसे कि खंड शिक्षा अधिकारी या माडल स्कूल प्रयोग कर पाएगा वरना यह खंडहर बनकर रह जाएगा बीआरसी की भांति कहीं शराबखोरों की मनपसंद जगह बनकर रह जाएगा। वर्तमान में भी इसके हालत जर्जरनुमा बने हुये है। चारों ओर झाड़ झंखाड़ खड़े हो गए हैं, कोई उखडऩे वाला नहीं। कोई इसकी देखरेख करने वाला नहीं है। सरकार को अविलंब इसकी शेष राशि भेज कर /तीसरी किस्त भेज कर इसको पूर्ण करवाने का प्रयास करना चाहिए।
 उल्लेखनीय है की भवन निर्माण के लिए तीन किस्तों में राशि जारी होती है। पहली किस्त डीपीसी तक ,तत्पश्चात दूसरी किस्त छत तक और तीसरी किस्त फर्श एवं लिपाई पुताई आदि में प्रयोग की जाती है। अब तक दो किस्ते ही 16 साल में आ आई हैं।
क्या कहते हैं प्राचार्य-
 सुनील खुडानिया वर्तमान में राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य सुनील खुडानिया ने बताया कि वर्ष 2023 में उन्होंने 7, 66,087 रुपए की किस्त भेजने की मांग की है ताकि इस भवन को पूरा किया जा सके। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010-11 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था दो कमरे नगर पालिका द्वारा निर्मित किए जाने थे वहीं दो कमरे और एक लाइब्रेरी आरएमएसए से द्वारा निर्मित किए जाने थे किंतु सभी चारों कमरे और लाइब्रेरी अधर में लटके हुए है। यह भवन कमरा खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से महज 50 गज दूरी पर है।
 फोटो कैप्शन 1 से 6: किस्त अभाव में जर्जर हालत में खड़ा भवन




जलघर पोता का एक्शन जन स्वास्थ्य विभाग ने किया दौरा
-जल समस्या का निकाला हल














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कनीना की आवाज। मंत्री आरती राव के आदेश पर एक्षन जन स्वास्थ्य विभाग ने गांव पोता का दौरा किया और पेयजल संबंधित समस्या का हल निकाला।
 मिली जानकारी अनुसार कैबिनेट मंत्री आरती सिंह राव से कनीना उप-मंडल के गांव पोता के ग्रामीणों ने मिलकर गांव में पीने के पानी की समस्या से अवगत करवाया। मंत्री ने ग्रामीणों के सामने जन स्वास्थ्य विभाग के एक्शन प्रदीप यादव को कहा कि आप कल गांव पोता में जाकर ग्रामीणों से मिलकर उनके समस्या का हल करें। शुक्रवार को एक्शन प्रदीप यादव जल घर का निरीक्षण किया व पानी के किल्लत वाले मोहल्ला, ढाणी का दौरा किया। ग्राम वासियों ने तुरंत कार्रवाई करने पर आरती सिंह राव कैबिनेट मंत्री हरियाणा सरकार का आभार जताया।
 जल घर का निरीक्षण दौरान प्रदीप यादव एक्शन, हनुमान सिंह यादव महामंत्री भाजपा मंडल कनीना, रामनिवास यादव, मनोज जांगड़ा, गौतम शर्मा, सतीश यादव, हरकेश यादव व गांव पोता के ग्रामीण उपस्थित रहे।
फोटो केप्शन 01: जलघर पोता का दौरा करते हुए एक्शन एवं अन्य

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