Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Sunday, February 6, 2022

 
जिला में अब कोरोना पॉजिटिव की कुल संख्या 24204
आज 58 मरीज ठीक होने के बाद डिस्चार्ज, 63 नये केस आये
****************************************************************
*********************************************************************
************************************
*****************************
कनीना । सिविल सर्जन डा.अशोक कुमार ने बताया कि जिला में आज 63 नए कोरोना वायरस संक्रमित केस आए हैं। अब जिला में कोरोना पॉजिटिव की कुल संख्या 24204 हो गई है। उन्होंने बताया कि आज 58 कोरोना संक्रमित मरीज को डिस्चार्ज किया गया है। अभी तक जिले में कुल 23748 कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हो चुके हैं। अब तक जिला में 158 कोरोना संक्रमित मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। कोरोना के 298 केस अभी भी एक्टिव हैं। जिले में 6 फरवरी तक 245910 नागरिकों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें से 113400 मरीजों में सामान्य बीमारी पाई गई है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के लिए अब तक जिले से 511005 सैंपल भेजे गए हैं। इनमें से 1102 सैंपल की रिपोर्ट आनी शेष है।
कोरोना संक्रमितों की सूची:
1. मोहल्ला माली टिब्बा नारनौल-1

2. नारनौल-6

3. आकोली-1

4. अटाली-1

5. बाछोद-1

6. बसीरपुर-2

7. भडफ़-4

8. चंदपुरा-1

9. छिलरो-3

10. धानोता- 2

11. दोचाना-1

12. दौंगली-1

13. गहली-2

14. गणियार-1

15.जैलाफ-1

16. झूक-1

17. कालबा-1

18. कनीना-5

19. कपूरी-1

20. खैराना-1

21.खोड़-1

22. कोजिंदा-1

23. कोरियावास-1

24. कोथल खुर्द-1

25. माजरा-1

26. मकसूसपुर-2

27. नानगवास-1

28. नांगतिहाड़ी-1

29. नापला-1

30.नारेड़ी-2

31. निजामपुर-2

32.पड़तल-1

33.पवेरा-2

34.पोता-1

35.रामबास-1

36.सैदपुर-1

37.सिहोर-1

38.थनवास-2

39.तलोट-2

40.उन्हाणी-1





काज पर कैसा नाज
-जीते जी खाना नहीं मरने पर करें काज
************************************************************************
************************************
*********************************
 अक्सर लोग काज पर नाज करते हैं। जीते जी अनेक लोगों को रोटी तक नहीं मिलती, मरने पर उनके निमित्त भोजन कराया जाता है। शास्त्रों में लिखा है कि मरे हुए पर जो भोजन करता है वह पाप का भागीदार होता है, काज में भोजन के रूप में एक ग्रास लेने पर उसका 101 बार जाप करने से भार उतर सकता है। और जो व्यक्ति जमकर भोजन कर ले उनका पाप कैसे उतर पाएगा? कुछ लोग दिन में कई कई घंटे जप करते हैं तो वे काज के भोजन करने के बाद ऋण को उतारने में सक्षम होते हैं।  प्राय ग्रामीण क्षेत्रों में काज की प्रथा सिर चढ़कर बोलती है। बहुत से ऐसे केस देखने को मिले हैं कि जब तक इंसान जीवित होता है उसे या तो अनाथ आश्रम में छोड़ आते हैं या उसको पीटते हैं, उसके लड़के लड़की उसे पीटते देखे गये हैं, बाप को बेटा खूनम खून करता देखा है किंतु जब मर जाता है तो लोगों को खुशी-खुशी भोजन कराया जाता है। यहां तक की जब तक जीवित है और वह कोई पेंशन ले रहा है तो उसकी पेंशन छीन ली जाती है और मरने पर खुशी मनाई जाती है। 2 दिन आंसू बहा कर उसे भुला दिया जाता है। खैर भुला देना तो अच्छी परंपरा है किंतु उमरने वाले के निमित्त किसी संस्थान और अच्छे कार्य में धनराशि खर्च करें तो बहुत लाभ हो किंतु महज जीभ के स्वाद तथा इसलिये भी कुछ लोग भोजन कराते हैं ताकि पता लग जाये की अमुक व्यक्ति की मौत हो चुकी है।
यहां तक कि कुछ केस ऐसे भी देखे गए हैं जिनमें लड़कों की शादी में किसी को झूठ मूठ  बुलाया जाता है, जब दशोटन आदि होते हैं तो मुश्किल से याद किया जाता है परंतु काज का निमंत्रण देकर उसे भोजन कराने तथा पाप चढ़ाने का काम जरूर किया जाता है। काज में खाना खाने के लिए बार बार बुलाया जाता है। यद्यपि समाज कुछ जागरूक हुआ है और काज में कम ही खाना खाने जाते हैं।
आश्चर्यजनक बात तो यह है कि इंसान घर में जब तक रहता है काम आता है, बच्चों को पालता है सारी सुख सुविधा उपलब्ध करवाता है किंतु ज्यों ही मरता है उसे खाट भी नहीं धरती पर पटक दिया जाता है। उसे भूत मानते हैं, जल्दी से जल्दी उसको शमशान घाट ले जाकर जला देते हैं साथ में उसके कपड़े, बर्तन, खाट/चारपाई आदि को भी फेंक दिया जाता है परंतु उसके द्वारा प्रयोग किए गए आभूषण नहीं फेंकते। यदि कान एवं नाक में पहन रखे हैं तो जबरन निकाल लिया जाता है। अगर उसकी जेब में अगर रुपये भरे हो तो तो उनको नहीं बख्शा जाता। शायद उनका मानना है कि धन एवं एवं आभूषण में भूत नहीं छुपता। उस व्यक्ति में जिसने कल तक प्यार दिया ,आज उसको झटपट जलाने के लिए श्मशान घाट ले जाते हैं। यदि काज पर खर्च की गई राशि किसी संस्थान,धर्मशाला या अन्य किसी सार्वजनिक काम में खर्च कर मरने वाले व्यक्ति का नाम लिख दिया जाए तो लंबे समय तक लोग याद करेंगे साथ में जनहित होगा। कुछ लोग तो काज यह सोचकर करते कि लोग क्या कहेंगे? काज क्यों नहीं किया और जबरदस्ती इस परंपरा में धकेल दिया जाता है।
काज करने के स्थान किसी व्यक्ति के नाम पर किसी स्कूल, धर्मशाला या अन्य संस्थान में कोई ऐसा कार्य करवाया जाए जिसे लोग लंबे समय तक याद रखें तो लाभ होगा किंतु काज के नाम पर लाखों रुपए खर्च कर दिए जाते हैं। यहां तक कि जिस इंसान को खाने के लिए दो वक्त की रोटी नहीं मिलती वह भी इसका काज की परंपरा में झुकता देखा गया है। प्राय देखा गया है कि विवाह शादी में खर्चा कम करते हैं और काज में अधिक जैसे ही इंसान की मौत होती है तब से कुछ दिनों तक खूब जमकर चाय पानी लड्डू आदि खिलाए जाते हैं। जब इंसान ने घर में सब कुछ दिया उसे जलाने में देर नहीं की जाती। यही कारण है कि लोग काज करके अपने आपको फूला नहीं समाते।  समाज को बदलना होगा, समाज की इस प्रकार की रूढि़वादी परंपरा से छुटकारा पाना होगा तभी समझो समाज का हित हो सकता है।
                 जीते जी रोटी नहीं, मरने पर हो काज।
                पाप चढ़ा इंसान पर, करते खुद पर नाज।।



 
अहीर रेजिमेंट के मुद्दे को गंभीरता से ले सरकार   - सुनील राव
************************************************************
***********************************************************
************************************
****************************
कनीना। बार एसोसिएशन कनीना के सचिव सुनील राव ने अहीर रेजिमेंट के लिए दिए जा रहे अनिश्चितकालीन धरना स्थल पर जाकर अपना समर्थन दिया और कहा कि अहीर रेजिमेंट का गठन समाज के शहीदों को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि अहीर रेजिमेंट का गठन यादव समाज की बहुत पुरानी और एक जायज मांग है सरकार को इस विषय पर गंभीरता से सोचना चाहिए और जल्द से जल्द जायज मांग को पूरा करना चाहिए। दिल्ली में इस संबंध में एक धरना जारी है।
सुनील राव ने बताया कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि एक सामाजिक मुद्दा है और यादव समाज के साथ-साथ 36 बिरादरी का सहयोग इसके लिए मिल रहा है। अहीरवाल से सबसे अधिक सैनिक देश सेवा में लगे हुए हैं और हर बार जब भी देश को जरूरत हुई है यादव समाज के रणबांकुरे ने अपनी कुर्बानियां दी हैं। सरकार को इस विषय पर जल्द से जल्द सकारात्मक फैसला लेकर अहीर रेजिमेंट का गठन करना चाहिए। जब तक अहीर रेजिमेंट का गठन नहीं हो जाता तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना सभी के सहयोग से जारी रहेगा।
फोटो कैप्शन: सुनील राव।




कनीना में बंदर बने समस्या
-जमकर कर रहे हैं तंग
****************************************************
************************************
****************
कनीना। कस्बा कनीना में इन दिनों बंदरों की करतूतों से लोगों को काफी परेशानियां मिल रही है। वही सर चढ़ कर बोलता बंदरों का आतंक जहां लोगों को गलियों से निकलने नही देता है वहीं बंदरों का आतंक कपड़े तक नही सूखाने देता है वही रात को घरों में सो रहे बच्चों एवं महिलाओं को काट लेने के कारण उनमें खौफ से उनमें भय व्याप्त है। अब तक आधा दर्जन बंदरों द्वारा काटने के मामले अकेले कनीना में घटित हो चुके हैं।
  दर्जन भर लोगों ने बताया कि बंदरों के आतंक के फलस्वरूप लोग घरों से बाहर निकलने से परहेज करने लगें है लेकिन बंदर लोगों के घर जाकर उनके घर में रखे सामान को तोड़ फोड़ करने से भी पीछे नही हट रहे है जिससे लोगों का जीना हराम हो रहा हैं। लोगों ने बताया कि अगर कही से भी मकान का कोई दरवाजा खुला रह जाता है तो बंदर उसमें ऐसे छुप जाते है कि पता भी नही लग पाता लेकिन जब वे आकर मकान को देखते है तो पता चलता है कि घर में रखा कीमती सामान बंदरों द्वारा नष्ट कर दिया गया है। कस्बा वासियों ने बताया कि बंदरों का खौफ लोगों की दिनचर्या को भी बाधित कर रहा है। युवा तो भाग दौड़ बंदरों से अपना पीछा छुटा लेते है लेकिन बुजुर्गों के लिए बंदर अच्छी खासी परेशानी बने हुए है। वही कस्बा वासियों ने प्रशासन से मांगकर बंदरों को पकड़वा कर दूर छुड़वाने की गुहार लगाई है।
  सब्जी एवं फल विक्रेताओं ने बताया कि जब भी उनका ध्यान पलटता है ये बंदर फलों को उठाकर चंपत हो जाते हैं। यही नहीं अपितु किसी भी दुकान में कोई चीज मिल जाती है उसे उठाकर भग जाते हैं। कई बार कीमती वस्तु लेकर छतों पर चढ़ जाते हैं और कई-कई लोग उनको इधर उधर से घेर घोटकर वस्तु को छुड़वाते हैं।
  गृहणियों का कहना है कि जब कभी मौका देखते हैं तो ये बंदर घर में घुसकर फ्रिज से सामान उठाकर खा जाते हैं। जब उनको घर से निकालने का प्रयास किया जाता है तो वे काट खाते हैं। पुलिस अधिकारी की पत्नी से लेकर गरीब जनों को भी काट खाया। गर्मी के दिनों में पानी की टंकी वाले जन अति परेशान हैं। टंकी का ढक्कन हटाकर उसमें दिन भर मजे से नहाते हैं। देख लिए जाए तो भाग खड़े होते हैं।
  टीन शेड हो या एंटेना सभी को हिला-हिलाकर तोड़ डालते हैं। टीन शेड पर छलांग लगाकर नाक में दम कर देते हैं। कस्बावासी ही परेशान नहीं हैं अपितु ग्रामीण भी परेशान हो चले हैं। लोगों ने कनीना से अधिक से अधिक बंदर पकड़वाकर दूर भिजवाने की मांग स्थानीय प्रशासन से की है।
क्या कहते हंै लोग-
कनीना मंडी के शिव कुमार अग्रवाल का कहना है कि वे बार बार आरटीआई से बंदरों के बारे में जानकारी मांग चुके हैं किंतु बंदरों से निजात नहीं दिला पाए हैं। कनीना पालिका का कहना है कि पहले भी कनीना से करीब 50 बंदरों को पकड़वाकर दूर छुड़वाया गया था और एक सौ बंदर पकड़वाने के लिए निविदाएं आमंत्रित की थी जो अब पूरी नहीं हो पाई हैं। पालिका प्रधान सतीश जेलदार का कहना है कि बंदरों को दूर दराज छुड़वाने के लिए कार्रवाई की जा रही है।

 


यूरो स्कूल की परीक्षा में बैठे 530 विद्यार्थी
**************************************************
************************************
************
कनीना। यूरो इंटरनेशल स्कूल कनीना में रविवार 6 फरवरी को कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कालरशिप परीक्षा आयोजित की गई। इस परीक्षा में नौंवी से बारहवीं तक 530 बच्चों ने भाग लिया। विद्यालय के प्राचार्य सुनील यादव ने विभिन्न स्कूलों से आये हुए सभी विद्यार्थियों का स्वागत किया तथा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को दी जाने वाली स्कालरशिप के बारे में बताया।
   इस अवसर पर यूरो ग्रुप के शैक्षणिक निदेशक डॉ. राजेन्द्र यादव ने बच्चों को अपने उज्ज्वल भविष्य के प्रति सजग होने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही स्कूल की उपलब्धियों के बारे में विद्यार्थियों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि एनडीए, आईआईटी, नीट, एनटीएससी, सैनिक व मिलिट्री स्कूल परीक्षा की तैयारी की व्यवस्था हमारे स्कूल के द्वारा प्रदान की जाती है। साथ ही स्कूल प्रबंधन 13 फरवरी 2022, रविवार को कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कालरशिप परीक्षा का आयोजन करने जा रहा है। साथ ही अगर नौंवीं से बारहवीं तक कोई भी छात्र किसी कारणवश  6 फरवरी की परीक्षा से वंचित रह गया हो तो वह विद्यार्थी यह परीक्षा 13 फरवरी रविवार को दे सकता है।
फोटो कैप्शन 01: यूरो स्कूल कैंपस में स्कालरशिप की परीक्षा देने आए विद्यार्थी।





आश्रम में त्रिवेणी और फलदार पौधे लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
**************************************************************
***********************************
***********************
कनीना। कनीना खंड के गांव कपूरी में बाबा गहला आश्रम में बाबा हरिदास के सानिध्य में बीइंग ह्यूमन सेवा मंडल सामाजिक संस्था द्वारा पौधारोपण का कार्य किया गया। आश्रम में बाबा हरिदास ने बताया कि प्रकृति के बिना धरती की सुंदरता नही है जितना हो पेड़ पौधे लगाने चाहिए जिससे कि प्रकृति के प्रकोप से बचा जा सके। इस अवसर पर बीइंग ह्यूमन सेवा मंडल के अध्यक्ष नवीन कौशिक समाजसेवी ने बताया कि संस्था द्वारा जब भी पेड़ पौधे लगाने का उचित समय होता है तभी सामाजिक संस्थानों, मंदिर परिसर या गांव में स्थित पार्कों में पौधा रोपण का कार्य लगातार जारी रहता है। अब मौसम में कुछ बदलाव है जिसमें बहुत से फलों और फूलों के पौधे लगाए जाते हैं। आज इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए कपूरी आश्रम में कटहल, गुड़हल, अमरूद, पिलखन व त्रिवेणी लगाकर फिर से शुरुआत की गई है क्योंकि पर्यावरण संरक्षण बहुत आवश्यक है। इससे छेड़छाड़ करना मानव जाति के लिए घातक सिद्ध हो सकता है इस कार्य में वेदप्रकाश सरपंच कपूरी, पवन, अजय, आलोक, सोनू आदि अनेकों युवा मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 2: कपूरी आश्र













म में पौधे लगाते बीइंग ह्यूमेन सेवा मंडल के पदाधिकारी।

No comments: