सावन माह की शुरूआत 29 जुलाई से,
-कांवड़ लाने वाले हुए सक्रिय
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कनीना की आवाज। इस वर्ष सावन माह 29 जुलाई से शुरू होगा तथा शिवरात्रि 10 अगस्त को मनाई जाएगी। श्रावण मास की शुरुआत 29 जुलाई से हो रही है, जिसकी समाप्ति 28 अगस्त को होगी। इस साल सावन में चार सोमवार होंगे।
इस वर्ष 10 अगस्त 2026 को श्रावण शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। श्रावण मास का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष विधान है।
. इस दौरान सावन सोमवार व्रत का सर्वाधिक महत्व बताया जाता है। दरअसल श्रावण मास भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। इस माह में सोमवार का व्रत और सावन स्नान की परंपरा है।
उन्होंने बताया कि शिव पुराण के अनुसार जो कोई व्यक्ति इस माह में सोमवार का व्रत करता है भगवान शिव उसकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। सावन में श्रद्धालु हरिद्वार, काशी, उज्जैन, नासिक समेत भारत के कई धार्मिक स्थलों पर जाते हैं। कावड़ लेकर आते हैं और गंगाजल पुराने शिवालयों में शिवलिंग पर अर्पित करते हैं।
सावन के महीने का प्रकृति से भी गहरा संबंध है क्योंकि इस माह में वर्षा ऋतु होने से संपूर्ण धरती वर्षा से हरी-भरी हो जाती है। महाराष्ट्र, गोवा एवं गुजरात में श्रावण मास के अंतिम दिन नारियल पूर्णिमा/ओणम तथा उत्तर भारत में रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है।
कांवड़ लाने वालों के लिए विशेष माह-
श्रावण के पावन मास में शिव भक्तों के द्वारा कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस दौरान लाखों शिव भक्त हरिद्वार और गंगोत्री धाम की यात्रा करते हैं। वे इन तीर्थ स्थलों से गंगा जल से भरी कांवड़ को अपने कंधों रखकर पैदल लाते हैं और बाद में वह गंगा जल शिव को चढ़ाया जाता है।
जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हो रहा था तब उस मंथन से 14 रत्न निकले। उन चौदह रत्नों में से एक हलाहल विष भी था, जिससे सृष्टि नष्ट होने का भय था। तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को पी लिया और उसे अपने गले से नीचे नहीं उतरने दिया। विष के प्रभाव से महादेव का कंठ नीला पड़ गया और इसी कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। उनके गले को ठंडक पहुंचाने के उद्देश्य से गंगाजल लाकर उनको अर्पित किया जाता है ताकि कंठ ठंडा रहे।
सावन के इस पवित्र महीने में भक्तों के द्वारा तीन प्रकार के व्रत रखे जाते हैं। सुमेर सिंह चेयरमैन कनीना के सबसे अधिक कांवड़ लाने वाले भक्त हैं। उनका कहना है कि एक अगस्त को कांवड़ लाने के लिए हरिद्वार रवाना होंगे तथा दस अगस्त से पहले शिवधाम बाघोत में अर्पित कर देंगे।
कनीना उपमंडल के गांव बाघोत पर 19 अगस्त को शिवरात्रि मेला लगने जा रहा है। वर्ष में दो बार मेला लगता है। सावन त्रयोदशी शिवरात्रि पर कावड़ मेला लगता है। बाघोत जिसे बाघेश्वर धाम नाम से पूरे भारत में जाना जाता है, का पौराणिक महत्व एवं अपने में इतिहास समेटे हुए है। महाशिवरात्रि पर कांवड़ कम अर्पित की जाती हैं। बाकी शिवरात्रि पर हजारों कांवड़ अर्पित की जाती हैं।
फोटो कैप्शन 02: बाघोत शिवालय
03: स्वयंभू शिवलिंग
केडी सिंह यादव दरोगा की बरसी मनाई
-परिवार एवं नातियों ने किया सामूहिक भोज
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कनीना की आवाज। अपने जमाने के प्रसिद्ध दरोगा रहे तथा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ से विशेष संबंध रखने वाले कपिल देव यादव/केडीसिंह यादव को बिलासपुर में प्रथम बरसी मनाई गई। इस मौके पर परिवार एवं नातियों ने सामूहिक भोज भी आयोजित किया गया।
उनके छोटे पुत्र रमेश कुमार यादव ने कहा इन जैसे महान व्यक्ति वर्षों के बाद पैदा होते हैं। उन्होंने केडी सिंह के जीवन और उनके द्वारा समाज के लिए किए कार्यों पर प्रकाश डाला। उनके परिजनों ने कहा कि उनकी कमी सदा झलकती रहेगी। उनका अचानक जाना सदा खलता रहेगा। उनकी जगह खाली हो गई वह कभी पूरी नहीं हो पाएगी। वो अपनी आवाज के और बोलने की शैली से जाने जाते हैं और जाने जाते रहेंगे। दूर दराज तक उनके चाहने वाले हैं। एक बार उनसे जो कोई मिला वो उन्हें कभी नहीं भूल पाता था।
उल्लेखनीय है कि कपिलदेव सिंह यादव ने करीब 37 सालों तक पुलिस विभाग में सेवा की और दरोगा के रूप में व्याख्यात रहे। दरोगा से उनकी सेवानिवृत्ति के बाद शेष जीवन बिलासपुर में ही यापन किया। वे लोक भलाई एवं जनहितमें सदा लगे रहते थे। उनके महान कार्य को लेकर चर्चाओं का दौर बना रहा। इस मौके पर सैकड़ों लोग उपस्थित हुए जिनमें रामाश्रय, ऋषि यादव एवं रमेश यादव, रीता और गीता, कृष्ण गोपाल, समीर गौरव, सीमा यादव, आद्या, डा. होशियार सिंह यादव,राहुल, राघव, शैली, अदित्या, रामसेवक, रामधीन, रामदास, अश्विनी, यथार्थ, ऋषिका, रिद्धिमा, ऋषित आदित्य सहित अनेक परिवार एवं नाती सहित गणमान्य जन उपस्थित रहे। नातियों ने उनके उदात गुणों की चर्चा की।
केडी सिंह यादव अपने पीछे तीन लड़के रामाश्रय, ऋषि यादव एवं रमेश यादव, दो लड़कियां रीता और गीता सहित भरा परिवार छोड़ गए हैं। उन्होंने 37 सालों तक पुलिस विभाग में सेवा दी। वे 1957 में सेवा में आए थे और 1994 में सेवानिवृत्त हुए हैं। 1994 में सेवानिवृत्ति के बाद बिलासपुर में शेष जीवन यापन किया। हरियाणा से उनका विशेष लगाव रहा है। वे बरेली, हरियाणा में कनीना, उत्तर प्रदेश तथा विभिन्न स्थानों पर अक्सर आते जाते रहे हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कई जगह कई सालों तक सेवा दी है। आज भी उनके प्रशंसक उनको याद कर अश्रु बहाने को मजबूर हैं। 21 जून 2026 उनका निधन हो गया किंतु उनके परिजन उनको कभी नहीं भूल पाएंगे। वे अपने पीछे 10 पोते एवं पोतियां छोड़ गए हैं। यथार्थ और आध्या उन्हें याद कर कहते हैं कि उन जैसा दादा फिर कभी उन्हें नहीं मिलेगा। वे इसे संयोग ही मान रहे हैं कि ऐसे घर में पैदा हुए जहां उनके दादा केडी सिंह यादव से संस्कार मिले। वे उनके पदचिह्नों पर चलने को तैयार हैं। ऋषिका, रिद्धिमा, ऋषित आदित्य आदि उनको याद कर उनकी स्मृतियों में खो जाते हैं।
कृष्ण गोपाल, समीर गौरव उन्हें याद करते हैं और कहते हैं कि ऐसे इंसान सदियों के बाद एक बार पैदा होते हैं जो सदा दूसरों की भलाई में ही जुटे रहते हो। सीमा यादव बिलासपुर का कहना है कि उन्हें ऐसे ससुर मिले जिन्होंने घर में एक बेटी से बढ़कर मान सम्मान दिया। उन्होंने न केवल उन्हें अपितु समाज को वो राह दिखाई जिस पर चलकर इंसान ऊंचाइयों को छू सकता है। उनकी धाकड़ आवाज के वे कायल हैं तथा उनकी वो बोलने की शैली सदा उनके दिलों में सदा अमर रहेगी।
आशा यादव कनीना/महेंद्रगढ हरियाणा उन्हें याद करती है और कहती है कि ऐसे इंसान सदियों के बाद एक बार पैदा होते हैं जो सदा दूसरों की भलाई में ही जुटे रहते हो। सीमा यादव बिलासपुर का कहना है कि उन्हें ऐसे ससुर मिले जो अपनी लड़कियों के बजाय बहुओं पर अधिक विश्वास करते थे। उनके हक के लिए लडऩे के लिए भी सदा तत्पर रहते थे। वे ताउम्र बहुओं को उनका पूरा हक दिलवाने के पक्ष में रहे।
उधर रमेश कुमार यादव बिलासपुर कहते हैं कि उनके पिता उनका एकमात्र बुजुर्ग सहारा थे। यद्यपि उनकी उम्र 93 वर्ष थी किंतु घर में जब होते थे तो ऐसा लगता था कि सब कुछ है। अब जब वो नहीं रहे तो ऐसा लगता है कि सब कुछ ही खत्म हो गया है परंतु उनको वे कभी नहीं भूल पाएंगे।
कनीना, हरियाणा के अजीत कुमार और रवि कुमार कहते हैं कि वो महज दो-तीन बार ही मिले थे किंतु उनके इतने मुरीद हो गए कि आज तक भी नहीं भूल पा रहे हैं। उन्हें विश्वास ही नहीं होता कि अब वे इस दुनिया में नहीं रहे हैं।
विभिन्न लोग उन्हें केडी सिंह यादव के नाम से ही जानते हैं। वे जितने दूसरों की भलाई में विश्वास रखते थे उतने ही खाने पीने के शौकीन और सेहत की ओर ध्यान देते थे। अंतिम सांस तक वे इतने ताकतवर लगते थे कि किसी को विश्वास ही नहीं होता कि वे अचानक उन्हें छोड़ जाएंगे।
उनको उनके तीनों पुत्र याद करते हैं परंतु अंतिम समय में कुछ समय अस्पताल में बीते और बात नहीं कर पाए, इस बात का मलाल है। कनीना से डा. होशियार सिंह यादव उनके बहुत करीब रहे हैं तथा वह आज भी उन्हें याद कर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। ऐसी महान हस्तियां कभी-कभी जीवन में आती है।
फोटो कैप्शन 01: केडी सिंह की बरसी पर उन्हें याद करते हुए
पासपोर्ट केडी सिंह यादव दरोगा
विश्व जूनोसिस दिवस-06 जुलाई
-जीवों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों की याद दिलाता है दिन-होशियार सिंह
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कनीना की आवाज। हर साल 6 जुलाई को विश्व जूनोसिस दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जानवरों से इंसानों में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों के खतरों और उनके बचाव के बारे में लोगों को जागरूक करना है।
वास्तव में 6 जुलाई, 1885 को फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पाश्चर ने इंसानों में जानवरों से फैलने वाली घातक बीमारी, रेबीज का पहला सफल टीका लगाया था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की याद में ही इस दिन को जूनोसिस दिवस के रूप में नामित किया गया।
डा. पवन कांगड़ा बताते हैं कि जूनोसिस वे संक्रामक बीमारियां हैं जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इंसानों में होने वाले सभी ज्ञात संक्रामक रोगों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा जूनोटिक होता है।
उन्होंने बताया कि जानवरों से इंसानों में फैलने वाली प्रमुख बीमारियों में रेबीज जो कुत्ते या बंदर के काटने से,बर्ड फ्लू जो इन्फ्लूएंजा वायरस, इबोला और निपाह वायरस, स्वाइन फ्लू जो सुअर जनित, रेबीज़ एवं कोविड-19,इबोला एवं स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू, साल्मोनेलोसिसआदि प्रमुख हैं।
ये रोग संक्रमित जानवर के लार, खून, यूरिन या मल के सीधे संपर्क में आने, या उनके काटने और खरोंचने से से फैल जाते हैं।
कई बार संक्रमित जानवरों द्वारा दूषित जगहों, सतहों या पानी के संपर्क में आने से, अधपका मांस, कच्चा दूध, या संक्रमित जानवर के मल से दूषित फल-सब्जियों का सेवन करने से,पिस्सू, टिक, या मच्छरों के काटने से, जो जानवरों से इंसानों तक बीमारी पहुंचाते हैं। समय पर इनका इलाज जरूरी है वरना घातक परिणाम निकलेंगे।
फोटो कैप्शन: डा. पवन कांगड़ा
प्लाट में बंधी हुई भैंस हुई चोरी, मामला हुआ दर्ज,
-- सीसीटीवी में दिखे चोर, वाहन में बिठाते हुए
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कनीना की आवाज। उपमंडल के गांव पोता से चोरों द्वारा भैंस चोरी करने का मामला सामने आया हैं। पुलिस को दी शिकायत में लोकेंद्र वासी पोता ने बताया कि उन्होंने अपनी भैंस को प्लाट में बांध रखा था । बीती रात्रि को जब उसके बेटे बुवाई करके घर आए तो देखा कि भैंस प्लाट में थी लेकिन जब सुबह प्लाट में काम करने गए उस समय भैंस नहीं थी। परिवार ने आस पास ढूंढा मगर की सुराग नहीं लगा । फिर पड़ोसी का कैमरा चेक किया तो उसमें कुछ अज्ञात लोग पिक अप गाड़ी में भैंस बैठाते दिखाई दिए । उसके बाद परिवार ने अपने स्तर पर तलाशी की फिर भी कोई सुराग नहीं मिला। अंत में पुलिस थाना कनीना में आकर शिकायत दर्ज करवाई । पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
महिला के घर से चुराए कुंडल, पास के युवक पर जताया शक
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कनीना की आवाज। कस्बे में महिला के घर से गहने चोरी होने का मामला प्रकाश में आया है। प्रवीण वासी कनीना ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह कनीना के सूट बूट हाउस में काम करती है
। जब वो अपना काम खत्म करके घर गई तो देखा कि घर की अलमारी खुली पड़ी थी और उसमें रखे गहने भी गायब थे। घर में कोई नहीं था बच्चे स्कूल गए हुए थे । और पति काम पर गया हुआ था । जब पीडि़ता ने अपने बेटे से पूछा तो उसने बताया कि ताऊ जी का लड़का हितेश और उसका दोस्त यश घर आए थे । पहले हितेश से बात की तो उसने मना कर दिया बाद में उसने कबूल कर लिया कि उसने कानो के कुंडल कनीना में एक ज्वैलरी शाप पर बेच दिए । दुकान मालिक ने बताया कि कुंडल तो बेच दिए है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।









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