मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में कोताही बर्दाश्त नहीं, घर-घर जाकर करें सत्यापन -एसडीएम
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कनीना की आवाज। लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल होना बेहद जरूरी है। निर्वाचन आयोग के इसी उद्देश्य को अमलीजामा पहनाने के लिए कनीना के एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को स्थानीय पंचायत भवन में बीएलओ (बूथ लेवल आफिसर्स) की समीक्षा बैठक ली।
बैठक में एसडीएम ने मतदाता सूची के अपडेशन और पुनरीक्षण कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की और निर्देश दिए कि इस काम में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह ने सभी बीएलओ को निर्देश दिए कि नए मतदाताओं के नाम जोडऩे, मृत व स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम सूची से हटाने और त्रुटियों को ठीक करने का काम पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि यह पूरा कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर संपन्न होना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि बीएलओ केवल कागजी औपचारिकता न निभाएं, बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों में फील्ड में उतरकर घर-घर जाएं। प्रत्येक परिवार का गंभीरता से मतदाता सत्यापन किया जाए ताकि कोई भी योग्य नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
बैठक के दौरान कानूनगो पूनम ने उपस्थित स्टाफ को निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों से अवगत कराया। उन्होंने बीएलओ को निर्देश दिए कि वे अपने रिकॉर्ड को पूरी तरह अपडेट रखें, ताकि स्क्रूटनी के समय किसी भी प्रकार की विसंगति सामने न आए।
बैठक में नए युवाओं को वोटर आईडी कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से बैठक में मतदाता जागरूकता अभियान पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
फोटो कैप्शन 06: कनीना के बीएलओ की बैठक लेते एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह।
प्रवक्ता सचिन शर्मा को मातृशोक
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कनीना की आवाज। क्षेत्र के शिक्षाविद एवं प्रवक्ता सचिन शर्मा की पूज्य माता शकुंतला शर्मा का आकस्मिक निधन हो गया। परिजनों, रिश्तेदारों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों एवं शुभचिंतकों ने गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
65 वर्षीय शकुंतला शर्मा, सेवानिवृत्त रेलवे गार्ड सुरेन्द्र शर्मा की धर्मपत्नी थी। वे धार्मिक, सत्संगी एवं सरल स्वभाव की महिला थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन परिवार, समाज और धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित किया। परिवारजनों के अनुसार वे संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों की सजीव पाठशाला थीं, जिन्होंने अपने बच्चों को सदैव नैतिकता, ईमानदारी और मानवता का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी।
अपने पीछे वे भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके ज्येष्ठ पुत्र नवीन शर्मा एवं पुत्रवधू मीनू शर्मा हैं,जबकि कनिष्ठ पुत्र प्रवक्ता सचिन कुमार शर्मा एवं पुत्रवधू प्रवक्ता स्नेहलता शर्मा हैं। वहीं उनकी पुत्री नूतन शर्मा है।परिवार के सभी सदस्यों को उन्होंने प्रेम, अनुशासन और संस्कारों की अमूल्य विरासत प्रदान की। शकुंतला शर्मा के निधन पर डा. नरेंद्र शर्मा,बार एसोसिएशन पूर्व प्रधान एवं पार्षद दीपक चौधरी, बलवान सिंह प्रधान, अनिल गर्ग , संजय भारद्वाज,पूर्व पार्षद मोहन सिंह, मुकेश नंबरदार, प्रधान नीरज यादव, विनोद बंसल सहित क्षेत्र के अनेक शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य व्यक्तियों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जीवन सादगी, सेवा और आध्यात्मिकता का प्रेरणास्रोत था। उन्होंने न केवल अपने परिवार को मजबूत संस्कार दिए, बल्कि समाज में भी सदैव सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा दिया।
फोटो कैप्शन: शकुंतला शर्मा फाइल फोटो
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत खेड़ा में विशेष स्क्रीनिंग शिविर आयोजित
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कनीना की आवाज। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत रविवार को गांव खेड़ा में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत विशेष स्क्रीनिंग एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों की जांच कर टीबी के प्रति जागरूक किया तथा संभावित मरीजों के नमूने एकत्रित किए।
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अरुण चौधरी एवं बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता ऋषिराज आर्य के नेतृत्व में आयोजित शिविर के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर लोगों को टीबी के लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। शिविर में कुल 90 ग्रामीणों की टीबी संबंधी जांच की गई।
जांच के दौरान खांसी, बुखार, वजन कम होना और कमजोरी जैसे लक्षण पाए जाने पर 11 संभावित मरीजों के बलगम के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। आशा कार्यकर्ता अनीता एवं रामभतेरी ने शिविर के सफल संचालन में सहयोग करते हुए लोगों को जांच के लिए प्रेरित किया। सीएचओ अरुण चौधरी और स्वास्थ्यकर्मी ऋषिराज आर्य ने बताया कि केंद्र सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए प्रत्येक गांव में सक्रिय केस फाइंडिंग अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, शाम के समय बुखार, वजन में लगातार कमी या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवानी चाहिए। उन्होंने बताया कि टीबी का उपचार सरकार द्वारा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी मरीजों को उपचार अवधि के दौरान पोषण के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है।
शिविर के दौरान ग्रामीणों को टीबी से बचाव, पौष्टिक आहार के महत्व तथा सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की भी जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोगों से टीबी के प्रति जागरूक रहने और लक्षण दिखाई देने पर समय पर जांच करवाने की अपील की।
फोटो कैप्शन 04:
खेड़ा गांव में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत आयोजित स्क्रीनिंग शिविर
बाघोत में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कृष्ण जन्मोत्सव की धूम, श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे
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कनीना की आवाज। उप-मंडल के गांव बाघोत में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथा स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पंडित राकेश कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतार, बाल लीलाओं और धर्म स्थापना के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे।
कथा व्यास ने कहा कि जब पृथ्वी पर पाप, अत्याचार और अधर्म का बोलबाला बढ़ गया तथा कंस जैसे अत्याचारी शासकों के अत्याचारों से जनता त्रस्त हो गई, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की पुन: स्थापना की। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान ने कारागार में जन्म लेकर यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म को कोई भी शक्ति लंबे समय तक दबा नहीं सकती।
कथा में वासुदेव द्वारा नवजात कृष्ण को यमुना पार कर गोकुल पहुंचाने, पूतना वध, तृणावर्त वध, शकटासुर वध तथा माखन चोरी जैसी बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इन प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मानव जीवन को प्रेम, करुणा, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन कर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए तथा श्रद्धालुओं ने नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से कथा स्थल को गुंजायमान कर दिया। पूरा पंडाल भक्तिरस में सराबोर नजर आया। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाकर समाज में प्रेम, सद्भाव और संस्कारों का संदेश फैलाएं। कथा के अंत में आरती करके श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
फोटो कैप्शन 05: बाघोत में कथा श्रवण करते श्रद्धालु एवं भक्ति में लीन भक्तगण।
वर्षों से ठीक करते आ रहे खराब सीएफएल
- किसी वैज्ञानिक से कम नहीं है विजय वधवा की कार्यकुशलता
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कनीना की आवाज। यदि हाथों में कुछ करने का हुनर हो तो दिव्यांगता आड़े नहीं आती है। हिम्मत के पर्याय के रूप में कनीना का विजय वधवा जाना जाता है जो 83 प्रतिशत दिव्यांग है। डाक्टरों ने कहा था कि यह खड़ा भी नहीं हो सकेगा किंतु अपनी रोटी रोजी आज भी कमा रहा है। वो हरियाणा का पहला वैज्ञानिक कबाड़ से जुगाड़ बनाने के नाम से जाने जाते हैं।
कनीना बस स्टैंड के पीछे छोटी सी पुरानी दुकान में बैठकर खराब सीएफएल को ठीक करता है। कनीना में सबसे पहले खराब सीएफएल वो भी 10 रुपये में ठीक करने का अगर श्रेय उनको जाता है। वर्षों पहले इन्होंने अपने यहां सीएफएल ठीक करना शुरू किया और अच्छा नाम कमाया। 2017 में इनको हृदयघात आया और मेडिसिटी गुररुग्राम में भर्ती करवाना पड़ा। कान खराब हो गए, आंखों से दिखाई कम देने लगा और शरीर की एक साइड अधरंग हो गई। वर्तमान में 83 प्रतिशत दिव्यांग हैं परंतु हिम्मत नहीं छोड़ते हैं। उनकी हिम्मत के आगे सभी नतमस्तक होते हैं। प्रतिदिन 30 से 40 सीएफएल वर्तमान में भी ठीक कर लेते हैं जबकि उनके हाथ बड़ी मुश्किल से काम करता है। एक हाथ बिल्कुल काम नहीं करता। पैरों से चला नहीं जाता ,शरीर में कई दिक्कत आती है, चलने के लिए ट्राई साइकिल ले रखी है परंतु उनका एक ही उद्देश्य है कि किसी प्रकार अपनी रोटी रोटी खुद कमाये और दूसरों पर निर्भर न रहे। कहने को तो उनका परिवार है जो अच्छी खासी नौकरियों में है किंतु उन्होंने कभी काम से जी नहीं चुराया। पुरानी सीएफएल लाने वाले लोगों की सीएफएल ठीक करके देता है। यह काम करने को तो अनेकों लोग कर रहे हैं परंतु जिन परिस्थितियों में विजय वधवा काम कर रहे हैं वो सराहनीय है। उसको देखकर लगता है कि सचमुच वह एक उदाहरण बनकर उभरा है।
विजय वधवा कबाड़ से जुगाड़ करने में भी महारत लिये हुए है। वर्ष 2008 में उन्होंने कबाड़ में पड़ी हुई खराब ट्यूबलाइट को महज अल्प राशि में ठीक करके देने का काम शुरू किया था और आज उन्होंने नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर बहरोड़, कोसली, नारनौल, अटेली, दादरी, सेहलंग एवं कनीना में अपने शिष्य छोड़ दिए हैं जो जन सेवा में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार को आइटीआइ में इस प्रकार का ट्रेड शुरू कर देना चाहिए ताकि वे प्रशिक्षण दे सके। उनका मानना है कि विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों में उनके नि:शुल्क प्रशिक्षण शिविर लगाने की अनुमति दी जाए ताकि वे बेरोजगारों को रोजगार की राह दिखा सके। उनकी तमन्ना है कि हर गांव में कम से कम एक व्यक्ति उनका यह प्रशिक्षण लेकर गांव की खराब लाइटों को ठीक करने लगे तो उनका नाम भी हो और बेरोजगारों को भी रोजगार मिल सके। विजय वधवा के कानों में सुनने की मशीन, आंखों पर बड़े चश्मे, पास खड़ी ट्राइसाइकिल, बेंत नजर आते हैं किंतु उनके ग्राहक उन तक जरूर आ जाते हैं। धुआं रहित चिमनी वर्षों पहले से बना रहे हैं।
प्रारंभिक जीवन-
विजय वधवा ने मिडिल की परीक्षा गुढा से पास की और कनीना से 9वीं से 11वीं तक की पढ़ाई की। दस जमा दो कालेज से पास करने के बाद 1989 से 1991 तक दिल्ली इंस्टिट्यूट आफ़ मैनेजमेंट एंड सर्विसेज से इलेक्ट्रानिक्स का डिप्लोमा किया। वर्ष 1992 से सीएफएल सुधारने का अपना काम कर रहे हैं। उस जमाना में जब कोई भी सीएफएल को सुधारने वाला नहीं था तब से काम कर रहे हैं। रेडियो, टीवी तथा वीसीआर तकनीक सीखी और काम करने में सफलता हासिल की। लैंडलाइन फोन, कलर टीवी, वीसीआर, सरसों में तेल की मात्रा बताने वाली लैब, वाशिंग मशीन, माइक्रो ओवन की रिपेयरिंग की रिपेयरिंग में दक्षता हासिल की है। वर्तमान में 30 रुपए प्रति लाइट के हिसाब से ठीक करते हैं।
फोटो कैप्शन 03: विजय वधवा दिव्यांग होते हुए भी सीएफएल सुधारने का काम करते हुए।
एनएसएस स्वयंसेवकों का चौथे दिन उत्कृष्ट प्रदर्शन
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कनीना की आवाज। डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नारनौल में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) विशेष शिविर के चौथे दिन एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ककराला के स्वयंसेवकों ने विभिन्न सामाजिक जागरूकता गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। शिविर में विद्यार्थियों ने अनुशासन, सेवा भावना एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट परिचय दिया।
विद्यालय की प्राचार्या डा. शिप्रा सारस्वत ने बताया कि शिविर के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित वृक्षारोपण अभियान में स्वयंसेवकों ने पौधारोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया व स्वयंसेवकों ने सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के अंतर्गत आमजन को यातायात नियमों के पालन, हेलमेट एवं सीट बेल्ट के प्रयोग तथा सुरक्षित वाहन संचालन के प्रति जागरूक किया। विद्यार्थियों ने रैली और जनसंपर्क के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम का संदेश दिया।
विद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी देवव्रत यादव एवं धनराज के मार्गदर्शन में स्वयंसेवक शिविर की सभी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभा रहे हैं और समाज सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर रहे हैं।
विद्यालय के चेयरमैन जगदेव ने राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के कार्यों की प्रशंसा की तथा कहा कि भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं के विकास तथा सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि आपके द्वारा किए गए कार्य समाज को एक नई दिशा देने का काम करता है इसलिए आप सभी को अपने आसपास समाज में जागरूकता फैलाने का काम करना चाहिए। जो समाज को और देश को एक नई दिशा देगा।
फोटो कैप्शन 01: स्वयंसेवक पौधारोपण करते हुए
समाज में दान दहेज की प्रथा जारी
-दहेज पर लगनी चाहिए रोक-बजरंग एडवोकेट
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कनीना की आवाज। आज के समाज में जहां लड़कियों की कमी होती जा रही है फिर भी दान दहेज कम नहीं हो रहा है। विवाह शादियों में भारी दान दहेज दिया जाता है जो समाज के लिए कलंक है। ये विचार करीरा निवासी बजरंग एडवोकेट ने मुलाकात में व्यक्त किए।
इस मौके पर बजरंग एडवोकेट ने कहा कि बहुत से ऐसे पिता होते हैं जो दान दहेज देते देते अपने घर और जमीन नीलाम कर देते हैं। एक लड़की की शादी के लिए इतना दान दहेज देना पड़ता है तो भविष्य कैसा होगा जबकि कहावत है- दुल्हन ही दहेज है और उसके अतिरिक्त दान दहेज लेना और देना समाज के लिए एक बुराई साबित होता है। आज के समय किसी के घर लड़की पैदा हो जाती है तो खुशियां बहुत कम मनाई जाती है जबकि लड़का पैदा होने पर खूब खुशियां मनाई जाती है क्योंकि लड़का होने पर दान दहेज से तो बच जाते हैं। यदि दान दहेज खत्म हो जाए तो समाज में लड़कियों की भी पैदा होने पर लोग बहुत खुश होंगे।
उन्होंने कहा कि विवाह शादी प्रेम पर आधारित है। दो परिवारों के बीच संबंध को इंगित करता है किंतु जब दान दहेज बीच में आ जाता है तो दो परिवारों के बीच में दरार का काम करता है। इस दान दहेज की प्रथा से अगर बच जाए तो समझो समाज की अधिकांश बुराइयां समाप्त हो जाएंगी। वरना यह तन दहेज न जाने कितनी लड़कियों और कितने माता-पिताओं को लील लेगा। कुछ उदाहरण एक रुपए लेकर शादी करने के सामने आए हैं जो मन में खुशी भर देते हैं। इस मौके पर ओमप्रकाश भट्टी, मनोज कुमार, धर्मपाल एडवोकेट, केके भट्टी, बाल किशन और श्री कृष्ण वैद्य सहित कई जन मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 11:बजरंग एडवोकेट एवं अन्य जानकारी देते हुए









