Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**: November 2026

Monday, November 2, 2026






 


जबलपुर में डा. होशियार सिंह को सम्मान लेने जाना था। इसलिए 3 दिन कनीना की आवाज बंद रहा जिसका बड़ा खेद है।



दीपावली पर कबाड़ निकलने से कबाडिय़ों की मौज
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कनीना की आवाज।
दीपावली पर कबाड़ घर से निकालने पर कबाडिय़ों की मौज हो गई है। 8 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी, वही दीपावली को लेकर घरों की साफ-सफाई करने में, मिठाई बनाने वाले मिठाई बनाने में, घरों में रंग पेंट करने वाले लंबे समय से व्यस्त हैं तथा उनके पास किसी के भी पास कोई फुर्सत नहीं है। साल में एक बार यह पर्व आता है जिस पर इन मजदूरों की मांग अधिक होती है। क्षेत्र में जहां रंग पेंट की विशेष मांग है मांग है पुताई करने वाले इस समय फुर्सत में नहीं है।  पेंटर ने बताया सुरेश और मोनू पेंटर ने बताया कि उनके पास इस समय दिवाली तक कोई फुर्सत नहीं है तत्पश्चात ही कुछ वक्त निकल पाएगा। दीपावली एवं पंचायत चुनाव एक साथ आने से भी व्यस्तता बढ़ गई है। वर्षभर कूड़ा कचरा घरों में जमा होता रहता हैं उसे भी वर्ष में एक बार साफ किया जाता है तथा अब कबाड़ी घर घर घूमने लग गए हैं ताकि उन्हें अधिक से अधिक कबाड़ मिल सके। दीपावली के बाद ही विवाह शादियां शुरू होंगी। ऐसे में कुछ लोग जहां विवाह शादियों के दृष्टिगत तो बहुत अधिक लोग दीपावली के दृष्टिगत घरों में पेंटिंग रंग आदि कर रहे हैं। रंग रोगन के चलते आप घर साफ-सुथरे नजर आने लग गए हैं। रवि, दिनेश, सुरेश एवं महेश आदि ने बताया कि रंग पेंट वर्ष में कम से कम एक बार तो जरूर करवा लेना चाहिए ताकि घर लंबे समय तक चल सके।
दीपावली पास आने से कबाड़ी खुश--
दीपावली नजदीक आने से घरों की सफाई करने से कबाड़ी खुश हैं। घरों से भारी मात्रा में कबाड़ का सामान निकाला जा रहा है।
  उल्लेखनीय है कि दीपावली के पर्व पर सफाई करने से प्रत्येक घर से कबाड़ी का सामान निकलता है जिसे कबाड़ के भाव बेच दिया जाता है। कबाड़ी इस सामान को सस्ते में खरीद लेते हैं और दीपावली पर अच्छी दिहाड़ी बना लेते हैं। कबाड़ी दीपावली पर इतना सामान खरीदते हैं जिससे कई माह का गुजारा संभव हो पाता है। एक ओर जहां कबाड़ी सफाई में अहं भूमिका निभा रहे हैं वहीं वे अपने परिवार का पालन पोषण आसानी से करने की क्षमता रखते हैं।






दीयों का स्थान ले लिया मोमबत्तियों ने
-तेल, घी एवं बाती महंगी हुई
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कनीना की आवाज।
दीपावली पर खुशियों को व्यक्त करने के लिए परम्परागत रूप से जलाए जाने वाले दीयों का स्थान मोमबत्तियों ने ले लिया है। एक जाति विशेष कुम्हार जाति, के लोगों द्वारा दीये बनाकर अपनी रोटी रोजी कमाने वालों का तो मानो धंधा ही चौपट हो गया है। सस्ती, सुलभ तथा अविलंब प्रकाशमान होने वाली मोमबत्तियां दीपावली पर भारी संख्या में बिकती हैं।
     दीपावली के आगमन से करीब एक माह पूर्व ही कुम्हार जाति के लोग मिट्टïी लाकर दीपक बनाते हैं तत्पश्चात उन्हें पकाकर घर-घर बेचते हैं। एक जमाना था जब दीपावली के शुभ दिन पर घी के दीये जलाते थे किंतु अब दीयों के प्रति रुझान भी बदल गया है। वैसे तो माना जाता है कि श्रीराम के 14 वर्षों का वनवास पूरा करके, रावण पर विजय पाकर जब सीता सहित राम, लक्ष्मण व हनुमान अयोध्या लौटे थे तो लोगों ने खुशी के मारे घरों में घी के दीये जलाए थे और तत्पश्चात प्रति वर्ष उसी याद को दिल में संजोकर प्रतिवर्ष घी के दीये जलाते आ रहे हैं। समय के साथ-साथ दीये जलाने का रिवाज भी बदल गया है। अब तो लोग तेल के दीये भी नहीं जलाते अपितु मोमबत्ती जलाकर ही खुशी व्यक्त करते हैं। कुम्हार जाति के लोगों ने बताया कि एक वक्त था जब दीपावली के दिन इतने दीये बिकते थे कि उनके परिवार का गुजर बसर आसानी से हो जाता था किंतु अब तो रोटी रोजी के भी लाले पड़ गए हैं।  अब तो दीये बनाकर पकाने का काम भी धीमा पड़ गया है और यहां तक कि कुछ कुम्हारों ने तो अपना यह धंधा ही बदल लिया है या फिर दीये खरीदकर लाते हैं और उन्हें घरों में बेचते हैं। उन्होंने खेद जताया कि अब तो लोग मोमबत्ती से ही गुजारा चला लेते हैं।
   उधर दीपावली से कई दिन पूर्व ही दुकानों पर मोमबत्ती उपलब्ध हो जाती हैं। ये सस्ती भी मिलती हे ऐसे में लोग परम्परागत दीयों को भूला बैठे हैं। गृहणियों ने बताया कि दीयों को देशी घी से जला पाना कठिन हो गया है क्योंकि देशी घी का भाव भी 1400 रुपये से अधिक तक पहुंच गया है वहीं रुई की बाती बनानी पड़ती हैं और दीपकों को पानी में भीगोकर रखना पड़ता है ताकि वे घी कम चूसे। बाद में तेल के दीये जलाने की प्रथा चली क्योंकि तेल का भाव भी 200 रुपये किलो से कम नहीं होता है ऐसे में तेल के दीये जलाना भी आसान काम नहीं है। आदमी के आलसी होने के कारण तथा मेहनत से बचने के लिए मोमबत्ती को ही सुविधाजनक समझ लिया है और दीपावली के दिन मोमबत्तियां ही जलाई जा रही है। उधर मोमबत्ती महज एक रुपये से दस रुपये तक चल रही है। अकेला दीया 5 रुपये का पड़ रहा है।
   वैसे तो भगवान् श्रीराम के अयोध्या लौटने के बाद देशी घी के दीये जलाने का सिलसिला शुरू हुआ था किंतु हालात ये बन गए हैं कि अब मोमबत्ती जलाकर ही काम चलाया जाता है। दीये जाने से स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है जबकि मोमबत्ती जलाने से स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ रही है। वैसे भी मोमबत्तियों को जलाने के धंधे ने कुम्हारों का व्यवसाय छीन लिया है। आगे आने वाले समय में मोमबत्तियों का स्थान कौन लेता है वक्त ही बताएगा।
 समय के साथ-साथ दिवाली मनाने के तौर तरीकों  में भी बदलाव आ रहा है। यह सब विज्ञान का चमत्कार ही कहिए क्योंकि  विज्ञान के कारण ही जहां पटाखे चलाने का रिवाज चला आ रहा है वहीं दीये जलाने के रिवाज में परिवर्तन भी आ गया है। कभी घी के दीये जलाए तांते थे फिर तेल के दीये जलाए गए। अब मोमबत्ती ही जलाकर खुशियां व्यक्त की जाती हैं यहां तक की कुछ लोग तो मोमबत्ती के स्थान पर छोटे-छोटे बल्ब जलाकर ही काम चलाते हैं।
दीपावली के दृष्टिगत बाजार में सजे हैं विभिन्न रूपों और रंगों के दीये --
दीपावली के इस पर्व पर जहां अधिकांश चाइनीज आइटम बाजार से गायब हैं। विगत वर्षों से सरकार भी इस मामले को लेकर प्रयासरत थी जिसके चलते इस सराहनीय कदम बताया जा रहा है, वहीं बाजार में इस बार अलग-अलग डिजाइन के दीयों की बहार आ गई है। विभिन्न रंग और रूप और देखने में मन को मोहने वाले दीये नजर आते हैं।
महेंद्र एवं जितेंद्र नामक व्यक्ति ने बताया कि ये दीये मिट्टी के बने हैं किंतु इनको शंख, गुलाब के फूल में दीये तथा विभिन्न डिजाइन रंगो एवं आकार के दीये बनाए गए हैं। जिनमें विभिन्न रंग लगाकर संजोकर इनको और भी शानदार बनाया गया है जिसके चलते ये मन को मोह लेते हैं। बाजार में इनकी कीमत बड़े दीये एक सौ रुपये तक जबकि छोटे दिए पांच रुपये तक मिल रहे हैं।
फोटो कैप्शन 01: दीयों की दुकानों पर बहार






दीपावली को लेकर बाजारों में रौनक, दुकानों पर सजने लगा त्योहार का सामान
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कनीना की आवाज।
 दीपावली पर्व नजदीक आते ही कनीना के बाजारों में रौनक बढऩे लगी है। दुकानदारों ने त्योहार को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकार की तस्वीरें, दीपावली से संबंधित सजावटी सामान और घरों में उपयोग होने वाली वस्तुएं दुकानों के बाहर सजानी शुरू कर दी हैं। बाजारों में मिट्टी के दीये, रंग-पेंट, रंगोली का सामान, आकर्षक झालरें, लाइटें तथा घरों को सजाने के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुएं खरीददारों को आकर्षित कर रही हैं।
पिछले कुछ दिनों से बाजारों में खरीददारी के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। दुकानों के बाहर सामान सजाने और खरीददारों की भीड़ बढऩे से बाजारों में आवागमन भी प्रभावित होने लगा है। विशेषकर कनीना बस स्टैंड पर सबसे अधिक भीड़ देखने को मिल रही है। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन चालकों, राहगीरों और स्कूली बच्चों का आवागमन होता है। ऐसे में जाम जैसी स्थिति बनने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रत्येक त्योहार पर बाजारों में भीड़ बढ़ती है, लेकिन प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। नई नगर पालिका भी इस समस्या के समाधान को लेकर कोई प्रभावी व्यवस्था करती नजर नहीं आ रही है। लोगों की शिकायतों पर अक्सर यही जवाब मिलता है कि त्योहारों के दौरान भीड़ होना सामान्य बात है।
लोगों का कहना है कि त्योहार खुशियां मनाने का अवसर है, लेकिन अव्यवस्थित यातायात और जाम के कारण खरीददारी करने वालों को परेशानी उठानी पड़ रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कोई कदम उठाता है या लोगों को इसी अव्यवस्था के बीच त्योहार मनाने को मजबूर होना पड़ेगा।
फोटो कैप्शन 02: दीपावली के मद्देनजर कनीना में दुकानों पर सजा सामान और खरीददारी करते ग्राहक।






डा. होशियार सिंह यादव को कादंबरी संस्था ने किया सम्मानित
--लेखन के क्षेत्र में परिवार की विशिष्ट पहचान
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कनीना की आवाज।
 साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय से अपनी लेखनी के माध्यम से विशेष पहचान बनाने वाले कनीना निवासी डॉ. होशियार सिंह यादव को कादंबरी संस्था की ओर से सम्मानित किया गया है। उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्र के साहित्यकारों, पत्रकारों, गणमान्य लोगों और शुभचिंतकों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
डॉ. होशियार सिंह यादव लंबे समय से साहित्य सृजन और पत्रकारिता के कार्य में सक्रिय हैं। अब तक उनकी लगभग 45 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्हें राज्यपाल के हाथों भी तीन बार सम्मानित होने का गौरव प्राप्त है। विभिन्न उपलब्धियों के साथ उनका नाम विश्व रिकॉर्ड से संबंधित पुस्तकों में भी दर्ज हो चुका है। वर्तमान में भी वे निरंतर लेखन कार्य में जुटे हुए हैं।
विशेष बात यह है कि डॉ. यादव का पूरा परिवार साहित्य और लेखन के प्रति समर्पित है। उनके पुत्र अमीश कुमार को हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की ओर से दो बार सम्मानित किया जा चुका है। उनकी पत्नी आशा यादव को भी हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी से श्रेष्ठ कृति पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उनकी पुत्री अमीशा यादव भी लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपनी रचनात्मक प्रतिभा के लिए पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। डॉक्टर होशियार सिंह की अब तक 45 पुस्तके प्रकाशित हो चुकी है।
डॉ. होशियार सिंह यादव ने अपने परिवार के सदस्यों के साहित्यिक योगदान को प्रसन्नता का विषय बताते हुए कहा कि लेखन केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति से जुडऩे का महत्वपूर्ण साधन है। परिवार के सभी सदस्यों का साहित्य के प्रति लगाव उनके लिए प्रेरणादायक है।
डॉ. यादव को मिले इस सम्मान से कनीना और महेंद्रगढ़ क्षेत्र में खुशी का माहौल है। अनेक लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
फोटो संलग्र है




पूर्व मुख्याध्यापक राव भगवान सिंह की तीसरी पुण्यतिथि 4 को
-पूर्व मंत्री राव बंसी सिंह के थे नजदीकी
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कनीना की आवाज।
कनीना उप-मंडल के गांव गुढ़ा निवासी एवं शिक्षा के क्षेत्र में नाम कमाने वाले राव भगवान सिंह का 2023 में निधन हो गया। उनकी दूसरी पुण्यतिथि पर गुढ़ा में जहां हवन एवं प्रसाद वितरण किया जाएगा। उनका निधन करीब 81 वर्ष की उम्र में हुआ था। वे राजकीय विद्यालय ककराला से बतौर मुख्य अध्यापक पद से 2004 में सेवानिवृत्त हुए थे। उनका पैतृक गांव मेघनवास है तथा वे अपने परिवार में छह भाई होते थे। आज के दिन सभी भाइयों की मौत हो चुकी है। जिनमें से दो भाई सेना में, एक गुजरात पुलिस, एक सीआरपी तथा एक जमींदार थे।
1942 के में मेघनवास में जन्मे भगवान सिंह ने हर क्षेत्र में नाम कमाया है। पूर्व मंत्री राव बंशी सिंह के बहुत करीबी रहे। उनका एक पुत्र पवनवीर भडफ़ स्कूल कार्यरत है वहीं दूसरा पुत्र रविंद्र डाक्टर है तथा तीसरा पुत्र जयपाल डेरी के नाम से विख्यात है। उनकी एक पोती एमबीबीएस कर चुकी है तथा एक पुत्रवधू कालेज कनीना में प्रोफेसर है। उनकी एक अन्य पोती शैली है।  उनकी पत्नी संतरा देवी आज भी स्वस्थ है। राव भगवान सिंह संयुक्त पंजाब के समय फुटबाल के अग्रणी खिलाड़ी रहे हैं। कालेज के दौरान भी अन्तर विश्वविद्यालय फुटबाल खेलों में कालेज का प्रतिनिधित्व किया है।
 मेघनावास से संबंध रखने वाले कप्तान महावीर सिंह, डीएसपी जगदीश, बाबूलाल प्रधान  एवं राजकुमार मुख्य अध्यापक ने बताया कि राव भगवान सिंह मेघवनवास गांव के प्रथम शिक्षक लगे थे, तत्पश्चात प्रथम प्रथम ही प्राध्यापक एवं प्रथम मुख्याध्यापक के रूप में जाने जाते हैं।  उनकी एक पुत्रवधू नीतू राष्ट्रपति से सम्मानित है। दूरदराज तक पुत्र जयपाल की डेरी प्रसिद्ध है। अति सौम्य प्रकृति तथा सीधी बात को रखाने वाले राव भगवान सिंह का दूर दराज तक नाम रहा है। कितने ही अध्यापकों को उन्होंने अपनी प्रयास से सेवा में तथा एनसीसी दिलवाने में अहं भूमिका निभाई। वह करीब 30 साल तक शिक्षा विभाग से जुड़े रहे। कनीना में लंबे समय तक प्राध्यापक बतौर रहे हैं। वे गौशाला, गरीब एवं दीन दुखियों के लिए अपनी पेंशन का अधिक भाग दान दे देते थे। परिजन ने बताया कि 4 नवंबर को हवन के अतिरिक्त प्रसाद वितरण किया जाएगा।
 फोटो कैप्शन: राव भगवान सिंह फाइल फोटो


बोलोरो गाड़ी ने मारी टक्कर दो घायल, एक की अस्पताल में मौत,
--दूसरे का हायर सेंटर में उपचार जारी
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कनीना की आवाज।
 कलवाड़ी के पास बोलोरो गाड़ी ने दो जनों को टक्कर मारी जिससे दोनों घायल हो गए। अस्पताल ले जाने पर एक महिला ने दम तोड़ दिया जबकि एक युवक का हायर सेंटर में इलाज चल रहा है। पुलिस में दी गई शिकायत में सतपाल कलवाड़ी ने कहा है कि वह इंडस वैली स्कूल दौंगड़ा अहीर में चपरासी पद पर कार्यरत है। एक नवंबर को रात 8 बजे वह उसकी मां संतोष देवी तथा उसका भतीजा कृष सभी कलवाड़ी गांव के निवासी, खाना खाकर अपने नए मकान से पुराने मकान में सोने के लिए जा रहे थे। संतोष देवी और कृष आगे चल रहे थे तथा सतपाल पीछे चल रहा था। सभी पैदल जा रहे थे। घर से थोड़ा आगे सड़क मार्ग पर चले तो दौंगड़ी अहीर की तरफ से एक सफेद रंग की बोलेरो गाड़ी तेज रफ्तार से आई और आगे चल रहे संतोष देवी और कृष को टक्कर मार दी। दोनों गिर गए और घायल हो गए। गाड़ी चालक गाड़ी रोक कर नीचे आया तो गाड़ी का नंबर नोट कर लिया गया। तत्पश्चात नाम व पता पूछने पर बगैर बताए गाड़ी को तेज रफ्तार से अटेली की तरफ भगा ले गया। सतपाल के जोर-जोर से शोर करने पर लोग इकट्ठे हो गए और स्वजन भी आ गए। एंबुलेंस की सहायता से संतोष व कृष को सरकारी अस्पताल नारनौल लेकर गए जहां डाक्टरों ने संतोष देवी का मृत घोषित कर दिया जबकि कृष को ज्यादा चोट होने के कारण हायर सेंटर रेफर कर दिया। संतोष देवी का पोस्टमार्टम करवा अंतिम संस्कार कलवाड़ी में कर दिया गया है। पुलिस ने गाड़ी चालक के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।