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Sunday, April 5, 2026



 


सीनियर सिटीजन के लिए परेशानी बढ़ी
- हर साल अप्रैल माह में डाकघर में काट लेी जाती हैं टैक्स के नाम पर दस प्रतिशत राशि
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कनीना की आवाज।
 सीनियर सिटीजन डाकघर में सीनियर सिटीजन के तहत जमा राशि से मिलने वाले ब्याज राशि के काटे जाने पर परेशान होने लगे हैं। उन्हें डाकघर उबाऊ होने लगा है क्योंकि हर साल के अप्रैल महीने में उनके खाते से मिलने वाली ब्याज की राशि की 10 प्रतिशत राशि टैक्स के नाम पर काट ली जाती है। यद्यपि इस संबंध में बेचारे 15 जी और 15एच फार्म लगातार भरते आए हैं लेकिन डाकघर के कर्मचारियों की शायद किसी कमी के चलते यह फार्म उनके खाते से नहीं जुड़ते परिणाम उनके खातों से मिलने वाले ब्याज की 10 प्रतिशत राशि टैक्स के नाम पर काट ली जाती है। तत्पश्चात 1 साल तक उन्हें इंतजार करना पड़ता है और जब टैक्स फार्म अप्लाई करते हैं तभी जाकर उनकी वह राशि वापस आती है।
 कनीना उप डाकघर एक मजाक सा बन गया है। खुद कनीना निवासी लेखक और होशियार सिंह ने भी 15 जी और 15एच फार्म सीनियर सिटीजन के लिए जमा करवाए थे किंतु अप्रैल महीने में जहां विगत वर्ष भी 10 प्रतिशत राशि काट ली गई थी और इस पर बार भी अप्रैल 2026 में 10 प्रतिशत राशि ब्याज से काट ली गई है। इस प्रकार कर्मचारियों की या उच्च अधिकारियों की लापरवाही के चलते सीनियर सिटीजन परेशान से हो चले हैं और उन्होंने मन भी बना रखा है कि डाकघर की बजाय यह राशि बैंक में जमा की जाए ताकि कम से कम उनको इस प्रकार की समस्या ने झेलनी न पड़े क्योंकि बैंक कर्मी बार-बार पूछते रहते हैं कि 15जी/15 एच भरा जाए।
 आश्चर्य तब होता है कि जब सीनियर सिटीजन बेचारे 15 जी और 15 एच भरते आ रहे हैं किंतु उनके खाते से ब्याज से 10 प्रतिशत राशि काट ली जाती है। अब तो वर्ष 2026 में 15 जी और 15 एच हटा दिया गया है इसकी जगह 121 नंबर आवेदन टैक्स का भरना पड़ेगा लेकिन यदि कर्मचारियों की मेहरबानी होगी तो ही वे 10 प्रतिशत टैक्स से बच पाएंगे वरना हर बार की तरह उनके खाते से ब्याज की राशि से भी टैक्स कटता रहेगा और वह यूं ही परेशान होते रहेंगे। एक तरफ कहेने को तो सीनियर सिटीजन है किंतु उनके जब खाते से 10 प्रतिशत राशि काट दी जाती है तो वह बेहद परेशान होते हैं। ऐसा एक नहीं दर्जनों सीनियर सिटीजन मिले जिनके खाते से ब्याज की राशि काट ली गई जबकि बार-बार वे निर्धारित फार्म  भरते आए हैं ।
इस संबंध में सीनियर सिटीजन जनों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह बेहद परेशान है क्योंकि डाकघर कनीना में इस प्रकार की समस्या देखने को मिल रही है। कर्मचारी और अधिकारी न तो सीनियर सीनियर सिटीजन की समस्या सुनते हैं और न समाधान करते हैं। इसके चलते इन्होंने मन बना लिया है उच्च अधिकारियों से शिकायत की जाए। आप जब कनीना डाकघर के कर्मचारी और अधिकारी सीनियर सिटीजन की शिकायत नहीं सुनेंगे तो आखिरकार मजबूर उन्होंने उच्च अधिकारियों की शरण लेनी पड़ेगी।







दो संतों की याद दिलाता है शिरीषवाला जोहड़
-लंबे समय से सहेजे हुए है पानी
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कनीना की आवाज।
कनीना का शिरीषवाला जोहड़ दो परम संतों की याद दिलाता है। सैकड़ों सालों से यह जोहड़ सिरसवाला नाम से प्रसिद्ध है। बड़ी बणी नामक स्थान पर स्थित है जो रेलवे स्टेशन के करीब है। यहां वर्तमान में विभिन्न शिक्षण संस्थान भी बने हुए हैं किंतु प्राचीन समय में यहां केवल सिरस का पेड़ होता था जिसके कारण यह जोहड़ सिरस वाला नाम से जाना जाता रहा है।
बड़ी बणी में कनीना नगर पालिका की सबसे अधिक जगह होती थी जहां दूर-दराज तक जाल के पेड़ होते थे। धीरे-धीरे बड़ी बणी का विनाश हो गया किंतु यहां के जोहड़ का बाद में कायाकल्प कर दिया गया। कनीना बसासत के समय का यह जोहड़ चला आ रहा है। कनीन गोत्र के कान्ह   सिंह जब यहां आए थे तभी से यह  जोहड़ स्थित था। कालांतर में इस में बारिश का पानी भरा जाता था और विभिन्न जीव जंतु, जंगली जीव जल पीकर  प्रसन्न हो जाते थे। लंबे समय से यह जोहड़ यही स्थित है कालांतर में यहां रामेश्वर दास नामक संत का आगमन हुआ और उन्होंने तप स्थल यही बनाया। उधर कनीना की छोटी-बणी में संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ जोहड़ पर तप करते थे किंतु एक दूसरे के पास उनका आवागमन होता रहता था। दोनों संत समय समय पर सिरस वाला जोहड़ पर बैठते थे तो कभी रामेश्वर दास भी मोलडऩाथ आश्रम पर जाकर ज्ञान की चर्चा करते थे। सिरस वाला जोहड़ दोनों संतों की याद दिलाता है जहां का भी दोनों संतों ने इसी जोहड़ के पानी में समाधि लगाई थी और होड़ लगी थी। बुुजुर्ग बताते हैं कि रामेश्वर दास जोहड़ से जल्दी बाहर आ गए थे किंतु संत शिरोमणि मोलडऩाथ लंबे समय तक इसी जोहड़ में समाधि लिए बैठे रहे। सर्दी के दिन होने से उनको निमोनिया हो गया था और उन्होंने प्राण त्याग दिये थे।
 लगता है मेला--
सिरसवाला जोहड़ बहुत लंबे समय से जन्माष्टमी के मेले के लिए प्रसिद्ध है। गोगा और जन्माष्टमी पर्व पर जहां जल में जाटी और गोगा नामक पौधे बहाने की परंपरा चली आ रही है। समय बदला इसी जोहड़ पर जहां रामेश्वर दास के शिष्य राधे दास ने भी तप किया और वे भी देवलोक गमन कर गये। इस जोहड़ का लंबा इतिहास चला आ रहा है। जहां समय-समय पर मेलेे भी लगते हैं तथा भंडारे भी चलते हैं। जोहड़ का पानी कभी साफ होता था किंतु बाद में इसे मलिन कर दिया गया। यह कच्चा जोहड़ वर्ष 2018 में पूर्व एसडीएम संदीप सिंह ने पक्का बनवा दिया गया। किंतु नहर इसके पास से गुजरने वाली नहर से जोड़ देने के कारण सदा पानी भरा रहता है ऐसे में यह जोहड़ कनीना के इतिहास की याद दिलाता है वही संतों की रमणीक स्थली की भी याद दिलाता है। यह जोहड़ लंबे समय से पानी को सहेजे हुए हैं। वर्तमान समय में भी वर्षा का जल इसमें एक मोरी से आकर जमा होता रहता है। आज के दिन इस जोहड़ में जीव जंतु कोई लाभ नहीं ले सकते हैं चूंकि चारों ओर से पक्का बना हुआ है। इसमें वर्तमान में नहर का पानी आकर जमा होता है चूंकि एक नहर रामपुरी इसके पास से गुजरती है। यदि इसमें वर्षा जल संचित किया जाए तो अच्छे परिणाम निकलेंगे।
क्या है शिरीष-
 सिरस/शिरीष/सिरसा का बड़ा पेड़ होता है जिसके फूल बहुत कोमल होने से उन्हें सुकुमार कहा जाता है। यह अति औषधीय पौधा होता है। इस जोहड़ के तट पर भी कभी यह पेड़ मिलता था। इसी के कारण जोहड़ का नाम पड़ा है।
फोटो कैप्शन 05: शिरीषवाला जोहड़ का वर्तमान स्वरूप।





कनीना में जनगणना-2027 प्रशिक्षण शिविर कल से, दो-दो जिला स्तरीय प्रशिक्षक देंगे प्रशिक्षण
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कनीना की आवाज।
भारत की आगामी जनगणना 2027 को सफलतापूर्वक संपन्न कराने हेतु कनीना क्षेत्र में प्रगणकों  एवं पर्यवेक्षकों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 06 अप्रैल 2026 से 08 अप्रैल 2026 तक आयोजित होगा।
प्रशिक्षण शिविर का आयोजन राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी तथा मॉडल स्कूल कनीना में किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन चार्ज सेंसस अधिकारी, कनीना के निर्देशन में किया जाएगा।
प्राप्त आधिकारिक उपस्थिति विवरण के अनुसार इस प्रशिक्षण में कुल 38 प्रतिभागियों को नामांकित किया गया है, जो तीन दिनों तक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
इन प्रतिभागियों में विभिन्न विद्यालयों के जेबीटी, पीजीटी, पीआरटी  अध्यापक शामिल हैं, जिन्हें जनगणना कार्य से संबंधित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश, डेटा संकलन प्रक्रिया एवं तकनीकी जानकारी दी जाएगी।
चार्ज अधिकारी, नगर पालिका सचिव कपिल कुमार की ओर से सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय पर प्रशिक्षण में उपस्थित होकर अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करें, जिससे जनगणना कार्य सुचारू एवं सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षकों की भी नियुक्ति की गई है। चार्ज अधिकारी नगर पालिका के सचिव कपिल कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर डॉ. हरिओम भारद्वाज (सहायक प्रोफेसर,  एवं संदीप कुमार (सहायक प्रोफेसर, राजकीय पीकेएसडी महाविद्यालय कनीना) प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। उक्त जानकारी देते हुए खंड शिक्षा अधिकारी  सुरेश यादव ने बताया कि में सभी अध्यापकों को उनकी ड्यूटी से अवगत करवा दिया है तथा उन्हें निर्धारित समय पर अपने प्रशिक्षण स्थल पर पहुंचने के आदेश दे दिए गए हैं तथा विद्यालयों में ड्यूटी पर गए अध्यापकों की कक्षाएं बाधित न हो इसके लिए सभी संस्था मुखियाओ को आदेश दिया गया है कि वह सुचारू कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करें ।
प्रशासन द्वारा प्रशिक्षण शिविर के सफल संचालन हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई हैं तथा कार्यक्रम को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।





सुंदरह स्कूल की छात्रा चंचल ने पास की एनएमएमएस की परीक्षा
-स्कूल परिसर में आयोजित किया सम्मान समारोह
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कनीना की आवाज।
 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुंदरह की छात्रा चंचल ने वर्ष 2025-26 में एनएमएमएस की परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। पूरे विद्यालय में हर्ष और गौरव देखने को मिला।
 विद्यालय प्राचार्य बाबूलाल यादव ने छात्रा की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि चंचल की निरंतर मेहनत, अनुशासन शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने बताया कि विद्यालय सदा ही विद्यार्थियों के लिए बेहतर शिक्षा एवं  उचित मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है ताकि वो भविष्य में इसी प्रकार उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करते रहे। इस शुभ अवसर पर परिसर में एक सम्मान समारोह आयोजन किया गया जिसमें छात्रा चंचल को फूल माला पहनकर पुरस्कृत किया गया। विद्यालय परिवार द्वारा उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं की गई। विद्यालय परिवार ने आशा व्यक्त की कि चंचल की सफलता  विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी और वे भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहेंगे।
 फोटो कैप्शन 04: छात्रा को पुरस्कृत करते प्राचार्य एवं अन्य


फसल पैदावार लेने में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है किसानों को
-बार-बार मौसम की मार झेल रहे हैं किसान
-जैसे तैसे पैदावार लेने की चाहत है किसान को
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में जहां किसानों ने 20,000 हेक्टेयर पर सरसों तो 9000 हेक्टेयर के करीब गेहूं की फसल उगाई थी बाकी पर सब्जी तथा चारे वाली फसलें उगाई थी। इस बार किसान बेहद परेशान है। बार-बार मौसम की मार झेल रहा है। रही सही कसर अब पूरी कर दी जब ओलावृष्टि ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। ओलावृष्टि भी लंबे समय तक चली।
 मिली जानकारी अनुसार इस बार रबी फसल उगाने बाद जहां कभी सर्दी, कभी गर्मी, कभी ठंड, कभी पाला जमा,तो कभी वर्षा, बार-बार वर्षा और बार-बार ओलावृष्टि ने किसानों की कमर ही तोड़कर रख दी है। अब जब किसान सरसों की फसल की लावणी करके पैदावार ले रहे थे और गेहूं की लावणी शुरू कर दी है तब ओलावृष्टि ने तबाही मचा दी है। किसान बेहद परेशान है। बार-बार वर्षा के कारण जब फसल भीग जाती है और ज्योंही उसे सुखाता है तो दोबारा से वर्षा हो जाती है। ऐसे में बहुत से किसानों ने मजबूरी में अपनी फसल पैदावार आनन फानन में ले ली है।
 किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, मनोज कुमार, कृष्ण कुमार, अजीत कुमार आदि ने बताया कि इस बार रबी फसल लेना तलवार की धार के समान रहा है। बार-बार मौसम की मार झेली है। यही नहीं लगता कि सही सलामत रूप से पैदावार घर तक या मंडियों तक पहुंच जाएगी। किसान जितना जल्दी करना चाह रहे हैं उतनी ही देरी हो रही है। जहां सरकार हरियाणा सरकार ने गेहूं और सरसों की खरीद भी शुरू कर दी है लेकिन किसान अभी तक फसल पैदावार नहीं ले पाए हैं क्योंकि मौसम से लगातार जूझ रहे हैं। किसानों ने बताया कि इतनी बुरी हालत पहले कभी नहीं हुई थी। यह भी सत्य है हर वर्ष जब फसल पक जाती है तब ओलावृष्टि आती है और ओलावृष्टि से हर वर्ष फसलों में थोड़ा बहुत नुकसान हो जाता है। एक और जहां फसल उगाई जाती है तभी से ठंड, गर्मी, कभी आवारा जंतुओं से फसल को बचाते बचाते किसान मौसम की मार के आगे जरूर असहाय हो जाता है और इस मार को झेल भी नहीं पाता।
 किसानों ने बताया कि बहुत से ऐसे किसान है जिन्होंने अपनी फसल का बीमा ही नहीं करवाया था। परिणाम यह निकलेगा कि अब सरकार कुछ मुआवजा दे तो उन्हें लाभ होगा वरना उनकी फसल भी बर्बाद हो गई मुआवजा भी मिलने की संभावना कम होती है। गत दिनों ओलावृष्टि से फसलों में नुकसान हुआ। वहीं बार बार वर्षा से लावणी का काम एवं पैदावार लेने का काम अधर में लटक जाता है। कनीना के काम से कम दो दर्जन गांवों में ओलावृष्टि हुई है। गत दिनों ओलावृष्टि भी इतनी तेज हुई है की सरसों की फसल को नुकसान हुआ था। गेहूं की फसल में नुकसान नाम मात्र हो सकता है परंतु गेहूं की लावणी का काम दूभर हो गया है।
 उल्लेखनीय इस क्षेत्र के लोग गेहूं और जो चारे के लिए उगते हैं। तूड़ी प्राप्त होती और तूड़ी में रेत मिल जाएगा क्योंकि लावणी करते समय गेहूं कि जड़ साथ आने की संभावना बन गई है चूंकि जमीन नरम हो गई है। एक और जहां किसान चिंतित यूं भी है समय पर मजदूर नहीं मिले। वैसे भी किसान मजदूर से लावणी करवाता है। परिणाम यह निकला कि इस बार मजदूर नहीं मिले जिसके कारण फसल पैदावार लेने में देरी हो गई है। अब भविष्य पर निर्भर करता है का मौसम खुलता है या नहीं और किसान कैसे अपनी फसल को सुखाकर पैदावार ले पाते हैं। किसानों की सरकार से मांग है कि उन्हें मुआवजा दिया जाए।
मजदूरों की खली कमी-
चूंकि अधिकांश किसान फसल पैदावार लेने की चाहत में हैं और मजदूर कम हैं ऐसे में मजदूर समय पर न मिलने से किसानों की गेहूं की लावणी में भी देरी हो रही है। लावणी करते हैं तो फसल टूटकर खेता में बिखर रही है। मजदूर मुंह मांगा पैसा मांग रहे हैं।
फोटो कैप्शन 03: गेहूं की फसल को सूखाता किसान





कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-20 पढ़े 7 अप्रैल को
-कुतरूं का भी वही हाल हुआ और होगा जो उसने शिक्षकों के साथ किया










एसडी विद्यालय ककराला में हवन के साथ नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ
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कनीना की आवाज। एसडी विद्यालय ककराला में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हवन-पूजन के साथ अत्यंत श्रद्धा एवं उत्साह के साथ की गई। कार्यक्रम का आयोजन प्रधानाचार्या  शिप्रा सारस्वत के नेतृत्व में किया गया, जिसमें पुरोहित द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन अनुष्ठान संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर विद्यालय परिसर भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम के दौरान सरस्वती वंदना, रामायण की चौपाइयों, हनुमान चालीसा, रामचरितमानस एवं राम स्तुति का सामूहिक पाठ किया गया तथा स्वाहा के साथ हवन में आहुति दी गई।
विद्यालय के चेयरमैन जगदेव यादव ने अपने संबोधन में कहा कि हवन अत्यंत पवित्र और फलदायी होता है। उन्होंने बताया कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि इसके वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी हैं, जो वातावरण को शुद्ध एवं सकारात्मक बनाते हैं। उन्होंने सभी को नए सत्र की शुरुआत नई ऊर्जा, नई शक्ति और दृढ़ संकल्प के साथ करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन समिति के वरिष्ठ सदस्य, सीईओ आरएस यादव, डिप्टी डायरेक्टर पूर्ण सिंह, कोआर्डिनेटर स्नेहलता, सहित सभी कोआर्डिनेटर्स एवं समस्त स्टाफ उपस्थित रहा और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।
फोटो कैप्शन 02: हवन करके नये सत्र का शुभारंभ करते हुए

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