पालिका कर्मियों की हड़ताल जारी
-काम छोड़ हड़ताल पर हैं कर्मी
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कनीना की आवाज। नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के हवन पर नगर पालिका कर्मचारी संघ इकाई कनीना ने सातवें दिन काम छोड़ हड़ताल कह जिसकी अध्यक्ष अध्यक्षता इकाई प्रधान अनिल कुमार ने की। हड़ताल में सभी कनीना सफाई कर्मचारी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल 15 अगस्त 2026 तक पूरे प्रदेश में रहेगी अगर सरकार ने हमारी मांगे पूरी नहीं की तो यह हड़ताल आगे भी बढ़ जाएगी।
फोटो कैप्शन 07: हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मी
अब 500 रुपए जमा कर सीवर कनेक्षन को करवा सकते हैं वैध
- पानी तथा सीवर दोनों के लिए भी योजना है लागू -पवन कुमार जेई
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कनीना की आवाज। अब उन उपभोक्ताओं के लिए विशेष योजना लागू कर दी है जो सीवर एवं जल का अवैध कनेक्शन लिए हुए हैं।
विस्तृत जानकारी देते हुए कनिष्ठ अभियंता जनस्वास्थ्य विभाग पवन कुमार ने बताया कि सीवर का कनेक्शन वैध करवाने के लिए 500 रुपए देने होंगे। वहीं अगर नकद राशि न देना चाहे नहीं तो उनके बिल में जुड़कर आ जाएंगे। यही नहीं पानी और सीवर दोनों का कनेक्शन वैध करवाना चाहे तो 1550 रुपए ही देने होंगे ।यह योजना 30 नवंबर तक जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि दस्तावेज बतौर आधार कार्ड, एक फोटो, आईडी जमीन की तथा फैमिली आईडी लेकर वैध कनेक्शन पा सकते हैं। सभी जुर्माना माफ कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर सीवर कनेक्शन के लिए 4367 रुपए तथा पानी का कनेक्शन लेने के लिए 2185 रुपए देने होते हैं।
बाजरे की पकी फसल देखकर किसान खुश
-सावन माह में हुई अच्छी वर्षा
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जहां जुलाई माह में कम वर्षा होने के कारण बहुत से किसान अपने खेतों की बिजाई नहीं कर पाए। जिन्होंने बिजाई कर दी उनकी फसल अब वर्षा के बाद अब बेहतरीन नजर आ रही है। फसल पकान पर चली गई है।
किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, नवीन कुमार, जितेंद्र, अजीत कुमार आदि ने बताया कि समय फसल पकान की ओर चली गई है। बाजरे की फसल जल्दी ही पक जाएगी। इस बार क्षेत्र में बाजरे के अतिरिक्त कपास, मूंगफली, मूंग तथा चारा देने वाली फसलें उगाई गई है। किसानों ने बताया कि इस बार बंपर पैदावार होने की संभावना है। उधर कृषि विशेषज्ञ डा. देवराज यादव ने बताया कि सावन माह में अच्छी वर्षा का होना किसानों के लिए शगुन भरा रहा है। वर्षा के कारण फसलों में आब आ गई है। अब जल्द ही फसल पककर तैयार हो जाएगी। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में फसल कटाई हो जाती है।
फोटो कैप्शन 04: बाजरे की पकान पर गई फसल
अब बम बम की जगह वो मारा वो काटा
-15 अगस्त तक चलेगी पतंगबाजी
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कनीना की आवाज। अब छतों पर वो मारा वो काटा का शोर सुनाई पडऩे लगा है। भी तक बम बम का शोर सुनाई पड़ रहा था। कनीना क्षेत्र में 15 अगस्त को हरियाली तीज व 14अगस्त को सिंधारा पर्व के दृष्टिगत पतंगों की बहार आ गई है। सुबह से शाम अब वो मारा, वो काटा की आवाज सुनाई पड़ती है।
युवा वर्ग इस मामले में अधिक सक्रिय है। सर्वाधिक पतंगबाजी हरियाली तीज पर होती है। उधर तीज एवं सिंधारा के दृष्टिगत बाजारों में घेवर की मिठाई की धूम मची हुई है। त्योहार पर घेवर का लेनदेन किया जाता है।
शहरी क्षेत्र में पतंगबाजी में तेजी आ गई है। बाजारों में दुकानों पर पतंग एवं डोर ही नजर आती है। युवा हो या बच्चा अपनी छतों पर सुबह शाम पतंगबाजी करता है। जिस दिन स्कूलों की छुट्टी होती है उस दिन तो बच्चे अपने घरों की छतों से नीचे ही नहीं आते हैं। एक ओर सिंधारा पर्व पर घेवर की मिठाई का बोलबाला मिलता है वहीं तीज पर्व पर पतंगबाजी का बोलबाला मिलता है। यूं तो इस सावन माह में उत्सवों की बहार है किंतु तीज पर्व का अपना ही महत्व है। सावन में आने वाली हरियाली तीज पर सर्वाधिक पतंगबाजी की जाती है तत्पश्चात पतंगबाजी में कमी आ जाती है।
सावन माह में इस बार झूले कम ही नजर आते हैं। सावन माह में पुराने समय से झूलों पर झूलने की प्रथा थी किंतु अब वह प्रथा धीमी पड़ गई है। पतंगबाजी में युवा एवं बच्चों की अधिक भागीदारी होती है। एक दुकानदार योगेश कुमार ने बताया कि इस बार पतंगबाजी के लिए युवा वर्ग में इतना उत्साह नहीं है जितना होना चाहिए। कनीना क्षेत्र में बारिश का बोलबाला है। वैसे तो पूरे सावन माह में ही पींग पर झूला जाता है किंतु इस दिन विशेष आकर्षण का केंद्र पींग होती है।
जंगलों में नृत्य करते मोर, वर्षा का शोर तथा पतंग उड़ाने वालों की ध्वनि स्पष्ट सुनाई पड़ती है। पर्व खुशियां लेकर आता है। वर्षा अच्छी होने पर तो खुशियां और भी बढ़ जाती हैं।
फोटो कैप्शन 05: पतंग की डोर एवं घेवर की
स्कूली बच्चों ने निकाली तिरंगा यात्रा
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कनीना की आवाज। राजकीय माध्यमिक विद्यालय झिगावन के बच्चों एवं स्टाफ सदस्यों ने सरपंच ग्राम पंचायत झिगावन एवं ग्रामीणों के साथ देशभक्ति की भावना जागृत करने तथा अपने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए तिरंगा यात्रा निकाली। तिरंगा यात्रा में हर घर तिरंगा,हर मन तिरंगा नारे लगाए गए।
इस दौरान हरिओम मुख्याध्यापक, पूनम बाई , अनीता यादव, मीना शर्मा, अभिनय खंडवाल, रामचन्द्र दीवान सरपंच, ग्रामीण तथा स्कूली बच्चों ने भाग लिया। विद्यालय मुखिया ने 15 अगस्त के आयोजन में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
फोटो कैप्शन 06: तिरंगा यात्रा निकालते हुए बच्चे एवं स्टाफ
एसडी विद्यालय के 251 विद्यार्थी राज्य स्तर पर करेंगे जिले का प्रतिनिधित्व
--खंड शिक्षा अधिकारी कनीना ने किया सम्मानित
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कनीना की आवाज। एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला के 251 छात्रों का राज्य स्तरीय खेलों के लिए चयन हुआ है।
इस दौरान मुख्य अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश यादव ने राज्य स्तरीय खेलों के लिए चयनित खिलाडिय़ों को बधाई दी और मैडल व प्रमाण पत्र वितरित किये। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद भी जीवन में जरूरी है। जो जीवन में तन और मन को स्वस्थ रखते हैं
। खेल भी जीवन का एक अंग है जो शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास में सहायक होते है। खेलों से जहां स्वास्थ्य ठीक रहता है वही मनुष्य का चारित्रिक व आध्यात्मिक विकास भी होता है। खेल एक शारीरिक गति विधि है जो तनाव और चिंता को दूर करते है।
इस अवसर पर विजेता खिलाडिय़ों को बधाई देते हुए विद्यालय चेयरमैन जगदेव यादव ने खेलों की महत्ता पर बल देते हुए बताया कि 251 खिलाडिय़ों को गोल्ड मेडल व 262 खिलाडिय़ों सिल्वर मैडल प्राप्त हुए। कुल 513 मैडल प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया। हमारे जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेलों का होना बहुत जरूरी है। खेल हमें स्वस्थ शरीर व तेज दिमाग प्रदान करते है।
इस मौके पर उपनिदेशक पूर्ण सिंह, वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र यादव, सीईओ आर एस यादव, खेल प्रमुख सोनू कोच पाथेड़ा, प्रदीप फुटबाल कोच खेड़ी, विकास कोच खेड़ी, विकास कोच, सास्वत कोच, जिंकल कोच, तेज डीपी, संगीता डीपी आदि सभी स्टाफ उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: खिलाडियों को पुरस्कृत करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी कनीना सुरेश कुमार
विश्व अंगदान दिवस---13 अगस्त
जब बहन ने दी अपने भाई को किडनी दान जिससे बची जान
-मरकर भी दे गया पांच लोगों को जीवनदान
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कनीना की आवाज। कभी कभी इंसान अपने जीवन में वो काम कर जाता है जिसे लोग वर्षों तक याद करते हैं। कभी बहन अपने भाई को जिंदगी दे जाती है तो कोई मरकर अमर हो जाता है। जगत में अलौकिक प्रेम भाई बहन के बीच मिलता है। कभी-कभी बहन अपने भाई के लिए अपनी जान को भी कुर्बान करने के लिए तैयार रहती है। ऐसा ही उदाहरण कनीना उपमंडल से 5 किलोमीटर दूर गुढ़ा में देखने को मिला जहां एक बहन ने अपने भाई की रक्षा के लिए किडनी/गुर्दा दान दिया। बात 2008 की जब संतोष यादव का भाई किशन सिंह यादव बैंक में मैनेजर के रूप में बीकानेर में कार्यरत थे। वे अचानक बीमार पड़ गए और और उन्हें अहमदाबाद/गुजरात के अस्पताल में भर्ती करवाया गया। अनेक जांच करने के बाद पता चला कि उनके गुर्दे खराब हो गये हैं जिसे डाक्टरों ने निकाल दिया तथा जिंदगी बचाने के लिए कम से कम एक किडनी की जरूरत थी। अहमदाबाद गुजरात में अस्पताल में भर्ती करवाया ताकि उन्हें एक गुर्दा दिया जा सके। उस समय विशेष स्थिति बन गई कि उनका गुर्दा कौन दान दे ताकि उनका जीवन बच सके। तभी उनकी बहन संतोष यादव सामने आई और उन्होंने कहा कि वह गुर्दा देंगी। क्योंकि उसके भाई की जिंदगी का सवाल है। संतोष यादव भी गुजरात अहमदाबाद गुजरात में अस्पताल में भर्ती हो गई। कुछ दिनों तक दोनों की जांच हुई। किशन सिंह की जान बचाने के लिए संतोष यादव का एक गुर्दा निकालकर किशन सिंह यादव को प्रत्यारोपित किया गया जिसके कारण उनकी जान बच गई और वह 7 सालों तक जीवित रहे। तत्पश्चात 2015 में उनकी मौत हो गई किंतु संतोष यादव आज भी उस दिन को नहीं भूल पाती है। जब अपने भाई को याद करती है तो आंखों में आंसू आ जाते हैं। उनका कहना है चाहे मेरी जान चली जाती किंतु मेरा भाई बचा रहता।
मिली जानकारी के अनुसार संतोष यादव हांसी के जमावड़ी गांव में विवाहिता है और उनके पति हजारी सिंह आइटीआइ में प्राचार्य हैं तथा वर्तमान में वह गुरुग्राम में रह रही है। किशन सिंह यादव को याद करते हुए उनका छोटा भाई बलवंत सिंह ने बताया कि वह दो बार 1988 तक 2003 में गुढ़ा गांव का सरपंच रह चुके हंै। उन्होंने अपने भाई किशन सिंह को गुर्दा मिलने पर जीवित देखा बहुत ही आनंद आया कि उसके भाई की जिंदगी बच गई है किंतु वो 7 साल जीवित रहे और अंतत: उनकी मृत्यु हो गई। बलवंत सिंह भी अपनी बहन संतोष यादव तथा उसकी हिम्मत को याद कर प्रसन्न हो जाते हैं तथा गुर्दा दान देने की घटना को याद कर खुश हो जाते हैं किंतु अपने भाई को खोकर उनकी आंखों में भी आंसू आ जाते हैं।
अंगदान देने की एक अनोखी मिसाल की कायम-
कनीना उपमंडल के गांव गुढ़ा निवासी 25 वर्षीय सचिन ने पेश की है। दो वर्ष पहले कांवड़ लाते वक्त अपनी जान देकर 5 लोगों को दे गया जिंदगी। सड़क हादसे में घायल होने के बाद कोमा में गया सचिन नाम का शिवभक्त कांवडिय़ा अपनी सांस थमने से पहले तीन लोगों को नई जिंदगी दे गया। सचिन ने इसके साथ ही अपनी आंखों के जरिये दो लोगों को रोशनी भी दी है। घटना सावन माह के शुरू होने पर 23 जुलाई 2024 की है।
कांवड़ यात्रा के दौरान कहीं से वाहनों में तोडफ़ोड़ की तस्वीरें आईं तो कहीं से मारपीट की। जहां कुछ कांवडिय़ों के डरावने व्यवहार ने लोगों को विचलित कर दिया, वहीं सचिन नाम का शिवभक्त कांवडिय़ा अपनी सांस थमने से पहले 5 लोगों को नई जिंदगी दे गया। सचिन सड़क हादसे में घायल होने के बाद कोमा में चला गया था। 30 जुलाई 2024 को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों ने उसके अंगों को एम्स ऋषिकेश को दान कर दिया था, जिसके बाद अलग-अलग जगहों पर तीन लोगों को उसके अंगों से नई जिंदगी मिली है साथ में दो को आंखें मिल गई। उन्होंने पैंक्रियाज/अग्राश्य, फेफड़े, आंखें, लिवर, गुर्दे दान कर गया जो आज भी इस दुनियां में हैं।
23 जुलाई को हरियाणा के महेंद्रगढ़ निवासी 25 वर्षीय सचिन रुड़की में सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल हो गया था। उसके कोमा से बाहर आने की उम्मीद नहीं बची तो एम्स के डाक्टरों ने परिजनों से अंगदान की अपील की। परिवार वाले राजी हुए और ब्रेन डेड युवक के अंगदान का फैसला लिया गया। जरूरी प्रक्रिया के बाद सचिन के अंगों से न केवल तीन लोगों को जिंदगी मिली, बल्कि दृष्टि खो चुके दो लोगों के जीवन में सचिन के नेत्रदान से उजियारा कर गया।
एमएस प्रो. संजीव कुमार मित्तल ऋषिकेश ने कहा कि सचिन के अंगदान से दो अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती तीन लोगों को नया जीवन मिला है। इनमें पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती व्यक्ति को किडनी, पेनक्रियाज प्रत्यारोपित किया गया। दूसरी ओर, दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलरी साइंसेज (आईएलबीएस) में भर्ती दो अलग-अलग व्यक्तियों को किडनी एवं लिवर प्रत्यारोपित किए गए।
श्रावण मास में सचिन गुढ़ा,महेंद्रगढ़ से हरिद्वार कांवड़ उठाने निकाला था परंतु कांवड़ नहीं ला सका और पूरे देश में अपना, परिवार, गांव एवं क्षेत्र का नाम रोशन कर गया। उसके पिता सतीश कुमार कनीना में पंक्चर की दुकान चलाते हैं जिसमें वह मदद करता था। परिवार में पिता के अलावा उनकी पत्नी, दो बच्चे और एक छोटा भाई है। एम्स के डाक्टरों ने जब परिवार वालों से अंगदान कराने की अपील की तो सचिन के परिवार वालों ने फरिश्ते की भूमिका निभाई।
सचिन के शरीर के अंगों को तय समय पर दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचाया गया। इसके लिए सड़क मार्ग और हवाई सेवाओं की मदद ली गई। पुलिस की मदद से ऋषिकेश से जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक ग्रीन कारिडोर बनाया गया। पुलिस ने 28 किलोमीटर की दूरी को 35 मिनट की बजाय महज 18 मिनट के रिकार्ड टाइम में पूरा कराया।
सड़क दुर्घटना में सचिन के सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें 30 जुलाई 2024 को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। चिकित्सकों की एक टीम ने तत्काल प्रभाव से सचिन के परिवार वालों से संपर्क किया और उन्हें अंगदान के प्रति प्रेरित किया।
सचिन ने कई लोगों को जीवन दान दिया है। इस मामले में एम्स उन्हें एक मूक नायक के रूप में हमेशा याद रखेगा। यह कार्य बेहद जटिल था लेकिन एम्स के डाक्टरों ने यह कार्य सफल कर दिखाया। सचिन की पत्नी पूजा, उसके दो छोटे बच्चे, सचिन का पिता सतीश कुमार, मां कविता आदि सभी बेरोजगार हैं तथा सचिन का एक छोटा भाई किसी कंपनी में काम करता है। इससे बड़ा अंगदान का और कोई अन्य उदाहरण पूरे देश में नहीं मिलेगा।
उधर गुढ़ा गांव में ही अपने पोते आशीश कुमार को उसकी दादी चमेली देवी ने गुर्दा देकर पोते की जान बचाने का सुंदर उदाहरण भी सामने आया है। ऐसे नायक एवं नायिकाओं को लोग सदा याद करते हैं। विगत दिनों सचिन की मां एवं पत्नी को उत्तराखंड के राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह ने सम्मानित किया है।
फोटो कैप्शन 02:
सचिन मृतक, मां कविता देवी तथा पिता सतीश कुमार
03: राज्यपाल उत्तराखंड सम्मानित करते हुए












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