हजारों भक्तों ने मन्नत के लिए बांधा कच्चा धागा
--संतान प्राप्ति की मन्नत के लिए भी जाना जाता है बाघेश्वर धाम
-कनीना के डा. होशियार सिंह यादव ने इस शिवालय के इतिहास पर शोध भी किया
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के बाघोत शिवालय पर प्राचीन पीपल का वृक्ष उन भक्तों के लिए सदा ही प्रसिद्ध रहा है जिनके कोई संतान नहीं है। कावड़ लेकर आने वाले कुछ भक्त भी संतान की इच्छा रखते हैं वे भी इस पीपल के पेड़ के तने या टहनियों पर कच्चा धागा बांधते हैं।
यूं तो किवदंति के अनुसार राजा दलीप ने ही संतान प्राप्ति के लिए यहां तप किया था और व्रत एवं उपवास के बाद ही संतान प्राप्त हुई थी। तत्पश्चात तो माना जाता है कि उन भक्तों का तांता लगा रहता है जिनके कोई संतान नहीं होती है। पुराने पीपल के पेड़ के तने पर कच्चा धागा बांधकर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी जाती हे। माना जाता है कि उनकी मन्नतें यहां पूर्ण होती है।
उल्लेखनीय है कि इस पीपल की टहनियों को कच्चा धागा बांधने के लिए एक सीढ़ी की व्यवस्था भी की गई है। भक्तजन इस सीढ़ी के जरिए पेड़ की शाखा पर कच्चे धागे बांधकर भगवान भोलेनाथ को गंगाजल अर्पित करते हैं। जब उनकी यह मन्नत पूर्ण हो जाती है तो वे इस धागे को खेलकर जाते हैं। आज मेले से पूर्व ही तने व टहनियों पर भारी संख्या में धागे बंधे हुए हैं। संतान प्राप्ति की मन्नत मांगने तो दूसरे राज्यों से भी भक्तजन यहां आते हैं। सचमुच अपार श्रद्धा एवं भक्ति की बयार यहां पर बहती है। इस बार तो मेले के दिन सोमवार होना भक्तजन अपने को सौभाग्यशाली मान रहे हैं। इस दिन व्रत करने वाले, शिवभोले की आराधना करने वाले तथा मेले में गंगाजल चढ़ाने वालों की संख्या अधिक होगी वहीं कांवर भी इस दिन अधिक चढ़ेंगी।
कनीना के डा. होशियार सिंह यादव ने इस शिवालय के इतिहास पर शोध भी किया है तथा आइएसबीएन नंबर की पुस्तक भी प्रकाशित है। लेखक विगत 30 सालों से इस शिवालय पर लेख प्रकाशित करवाते आ रहे हैं।
फोटो कैप्शन 13:पीपल के पड़ को बांधे गए कच्चे धागों का दृश्य देखे।
नपा कर्मचारियों की हड़ताल जारी
-- कहा जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होंगी तब तक नहीं हटेंगे
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कनीना की आवाज। कनीना में नगर पालिका कर्मचारियों का धरना प्रदर्शन जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा सरकार शोषण करती आ रही है पहले जब हड़ताल की थी उस समय सरकार ने हमारी सभी मांगे मान ली थी और समझौता करने के लिए हमें बुलाया था। मौजूदा सरकार ने 30 जून 2026 तक का समय मांगा था लेकिन अब तक कर्मचारियों की कोई मांग नहीं मानी गई है। इसी वजह से दोबारा कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी थी।
कर्मचारी संघ की मांग है कि सभी कर्मचारियों को नियमित किया जाए,कौशल रोजगार को खत्म किया जाए साथ में ठेका प्रथा को बंद किया जाए और पुरानी पेंशन को बहाल किया जाए। इस मौके पर कनीना इकाई प्रधान अनिल कुमार,सचिन, सुनील कुमार, कोष अध्यक्ष अशोक कुमार,उप प्रधान योगेश कुमार इत्यादि मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 04:धरने पर बैठे नपा कर्मी
विभिन्न शिवालयों में मनाया गया शिवरात्रि का पर्व
- हजारों कावड़ बाघेश्वरी धाम पर अर्पित की गई
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कनीना की आवाज। शिवरात्रि का पर्व क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर व्रत रखा गया और गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया गया। देशभर में विख्यात बाघेश्वर धाम पर दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। कावड़ चढ़ाई गई और शिवलिंग का अभिषेक करके मन्नत मांगी गई। इस बार भारी संख्या में कावड़ अर्पित की गई। अन्य वर्षों के मुकाबले अधिक भक्त कांवड़ लेकर आये।
सुबह से ही चारों ओर बम-बम के जयकारे सुनाई पड़ रहे थे। विभिन्न शिवालयों में सुबह से शाम तक भीड़ रही। कनीना के 21 फुट प्रतिमा वाले शिवालय पर भारी भीड़ रही। धनौंदा के ब्रह्मचारी कृष्णानन्द आश्रम में शिवलिंग का जलाभिषेक किया गया। विभिन्न गांवों में भी जल चढ़ाकर मन्नत मांगने का सिलसिला जारी रहा।
देशभर में कावड़ के लिए विख्यात बाघेश्वरी धाम पर आज कावड़ चढ़ाने वालों की भीड़ रही वहीं शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए भी मारामारी चली। बाघोत के स्वयंभू शिवलिंग पर हजारों वर्षों से गंगाजल अर्पित करने व कावड़ लकार अर्पित करने का सिलसिला चला आ रहा है। लाखों भक्तों ने शिवालय जाकर शिव भोले को जल अर्पित किया। महिलाओं की संख्या बहुत अधिक रही।
बाघेश्वरी धाम पर न केवल भक्तों ने कांवड़ अर्पित की अपितु खेलों का आनन्द भी लिया। इस मेले में बड़े-बड़े संत, महात्मा, नेता आदि ने गंगाजल अर्पित किया। यूं तो प्रत्येक सोमवार को यहां पर भारी भीड़ देखने को मिलती है। मेले का आयोजन सात दिनों से चला आ रहा था जो आज संपन्न हो गया है।
ट्रैक्टरों मेें जा रहे थे भक्त-
बाघेश्वरी धाम पर कावड़ अर्पित करने के लिए भक्तजन ट्रैक्टरों, पीकअप आदि में सवार होकर डीजे पर नाचते गाते जाते देखे गए। दिन एवं रात को वाहनों एवं भक्तों का तांता बाघोत की ओर जाते देखा गया। शिवरात्रि के दिन डाक कावड़ की भरमार रही। उनको अलग रास्ते से शिवालय में जाने की व्यवस्था की हुई थी। एक ओर 350 किमी से व्यक्तिगत कावड़ लेकर आने वाले भक्तों को सामान्य लाइन में खड़ा होना पड़ा वहीं डाक कावड़ लाने वालों को विशेष लाइन में दर्शनों का मौका दिया गया।
गीत भजन एवं डांस के साथ कावड़ की गई अर्पित-
शिवरात्रि के दिन बाघेश्वरी धाम पर कावड़ चढ़ाने का सिलसिला अनवरत चलता रहा। इस दौरान कांवर लाने वाले भक्त अपनी कावड़ को विधि विधान से पूजा करवाकर उन्हें बैंड बाजों पर थिरकते हुए शिवालय तक पहुंचे। और तो और महिलाएं भी नृत्य करते हुए आगे बढ़ती देखी गई। जिस प्रकार शादी दौरान नृत्य किया जाता है ठीक उसी प्रकार कावड़ अर्पित करने का सिलसिला देखने को मिला। भारी संख्या में कावड़ अर्पित की गई। कांवड़़ अर्पित करने का सिलसिला विगत सात दिनों से चला आ रहा था। एक अनुमान के अनुसार दस हजार कावड़ अर्पित की गई हैं। विभिन्न गांवों के शिवालयों में भी कावड़ अर्पित की गई।
विभिन्न दलों ने सेवा की-
कावड़ लाकर अर्पित करने वाले तथा शिवालय के दर्शन करने वाले भक्तों की सेवा के लिए विभिन्न दल सेवा कर रहे थे। शिवरात्रि के दिन भारी भीड़ देखने को मिली। तीन-तीन घंटों में नंबर पड़ रहा था। पानी पिलाना तथा मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी सेवादल अहं भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस बल दौरा करते हुए देखे गए। सबसे अधिक बैकुंठी कावड़ अर्पित की गई वहीं दूसरे नंबर पर डाक कावड़ अर्पित की गई।
क्यों है प्रसिद्ध बाघेश्वर धाम-
वैसे तो बाघोत का धाम हजारों वर्ष पुराना है वहीं जहां राजा दलीप एवं पीपलाद ऋषियों की तपस्थली होने के कारण बाघोत प्रसिद्ध है। जहां राजा दलीप की बाघ के रूप में शिवभोले ने परीक्षा ली थी इसलिए भी बाघेश्वरधाम नाम पड़ा और प्रसिद्ध हो गया। यहां का शिवलिंग भी स्वयंभू होना अपने आप में महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि सरकारी पुस्तकों डा. एचएस यादव की कृतियों में भी इस शिवालय का वर्णन मिलता है।
हर वर्ग ने किया जलाभिषेक-
विभिन्न शिवालयों में शिवरात्रि के दिन विभिन्न वर्ग के लोगों ने मन्नत मांगी और शिवलिंग का जलाभिषेक किया। छोटे बच्चे, युवा एवं महिला पुरुष सभी शिव आराधना करते देखे गए। कावड़ अर्पित करने का मंगलवार अंतिम दिन रहा। विभिन्न गांवों में कावड़ अर्पित की गई।
फोटो कैप्शन 05: महिलाएं जल अर्पित करते हुए
06: छोटी बच्ची जलाभिषेक करते हुए
07 एवं 11: बाघोत में भक्त जल अर्पित करते हुए
08: बाघेश्वर धाम के मुख्य द्वार पर जाते भक्त
09: बाघेश्वर धम पर महिलाएं जल अर्पित करते हुए
10: बाघेश्वर धाम पर भीड़
अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर, एक डाक कावडि़ए की हुई मौत, केस दर्ज
-11 बार कावड़ ला चुका था दीपक
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कनीना की आवाज। कनीना उप-मंडल के गांव सेहलंग के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 152-डी पर एक डाक कावडिय़े को अज्ञात वाहन टक्कर मारकर फरार हो गया। जिसमें डाक कावडिय़े की मौत हो गई। डाक कांवडिय़ा खांदवा ,तहसील बुहाना, राजस्थान का रहने वाला था। उसके पिता विजय सिंह ने कनीना पुलिस में केस दर्ज करवा दिया है। विजय सिंह ने कहा है कि उसका लड़का दीपक हरिद्वार से डाक कावड़ लेकर आ रहा था। सेहलंग के पास 152-डी हाइवे पर मुगलवार सुबह करीब 4 बजे अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी और फरार हो गया। दीपक के मौके पर ही मौत हो गई। शव का पोस्टमार्टम करवा स्वजनों को सौंप दिया गया है। कनीना पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के विरुद्ध मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कावडिय़ों के लिए लगाया गया शिविर संपन्न, भंडारा आयोजित
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कनीना की आवाज। कांवड़ यात्रियों की सेवा के लिए धनौन्दा-झाड़ली सड़क पर धनौन्दा, खरकड़ा बास गांव के हनुमान मंदिर में लगाए गए कावड़ सेवा शिविर का समापन हो गया। बाबा भोले के जयकारों के साथ हवन यज्ञ तथा भंडारा आयोजित कर किया गया।
प्रजा भलाई संगठन के अतरलाल ने समापन समारोह में पहुंचकर कांवड़ सेवा शिविर में उल्लेखनीय सेवा, श्रम, सहयोग तथा योगदान देने के लिए 11 कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने छिथरोली गांव के निवासी दलबीर को हनुमान मंदिर में निशुल्क पीने के पानी का बोर लगाने के लिए हनुमानजी का चित्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने शिविर में सेवा करने वाले सभी कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए बाबा भोले से उनका मनोरथ पूरा करने की कामना की। सम्मानित होने वाले कार्यकर्ता रमेश, सोनू, संतोश कुमार, आनंद, रवि कुमार, नरेन्द्र सिंह, रामफल साहब, जयपाल हलवाई, मंजू, कविता, शारदा ने कहा कि यह उनका कावड़ यात्रियों की सेवा के लिए 13वां सेवा शिविर था। जिसमें सभी स्वयंसेवकों ने बढ़चढ़ कर तन-मन-धन से सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि शिविर में सेवा करके बहुत प्रसन्नता मिलती है। उन्होंने सेवा को परम-धरम बताते हुए सभी ग्रामीण व सहयोगीजनों का धन्यवाद किया।
इस अवसर पर कप्तान ओमपाल सिंह, कैलाश सेठ, संदीप तंवर, छोटेलाल, पवन, कमला, सुमित्रा, राकेश, विक्की आदि जन उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: सेवा करने वाले भक्तों को सम्मानित करते अतरलाल
विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त
आज भी युवा वर्ग हाथी को देखकर होते हैं प्रसन्न
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कनीना की आवाज। विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त को मनाया जा रहा है किंतु बच्चे और कुछ युवा हाथी को देखकर आज भी प्रसन्नचित नजर आते हैं। वास्तव में हाथियों की संख्या घटने चले जाना और हरियाणा में आसपास हाथियों का अभ्यारण्य न होने पर युवा और बच्चे हाथी से अधिक परिचित नहीं हैं। हाथी को संस्कृति में कई जगह पवित्र पशु माना गया है। ऐरावत का पुराणों में भी वर्णन आता है परंतु बच्चे विशेष कर हाथी को कोई दिखाने के लिए गांव में आता है तो बहुत प्रसन्नचित होते हैं कि लंबे समय तक उसे निहारते रह जाते हैं। वैसे भी विशालकाय प्राणी होने के कारण उसको देखकर बच्चे और युवा वर्ग खुश होते हैं।
युवा और बच्चों से संबंध में बात की गई युवा हर्ष कुमार ने बताया की हाथी के बारे में यूं तो लंबे समय से परिचित है क्योंकि हाथी बड़ा जानवर है। जहां कनीना में कभी हाथी खान का जिक्र काकाो यहां ठहराव करते थे। अपने के हाथीखाने को कभी देखा नहीं है। उनका कहना है कि पर्यावरण के लिए इन जीवों का होना बहुत जरूरी है। आज भी जंगल में एक बड़ा जानवर हाथी होता है। चिडिय़ाघर में भी उन्होंने हाथी देखा है।
अमीश कुमार बताते हैं कि हाथी के बारे में परिचित तो है परंतु किसी जंगल में जाकर उन्होंने कभी हाथी को नहीं देखा है। पुस्तकों में फिल्मों में तथा चिडिय़ाघर में जरूर हाथी को देखा है। जब वो बचपन की याद ताजा करते हुए कहते हैं कि जब गांव में हाथी दिखने के लिए लोग आते थे तो हाथी देख कर खुश होते थे।
हाथी के बारे में जब बच्चों से बात की तो उन्होंने बताया की हाथी देखकर वह खुश हो जाते हैं परंतु हाथी अब देखने को नहीं मिलते क्योंकि हाथियों का शिकार करना, हाथियों को मनोरंजन के लिए पालने पर जहां सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है जिसके चलते अब ग्रामीण क्षेत्रों में हाथी दिखने वाले भी नहीं आते। ऐसे में बहुत से बच्चों ने तो हाथी को प्रत्यक्ष नहीं देखा है अपितु फिल्मों में छोटे बच्चों तितली, जादू, टिन्नी, माही से हाथी की बात करने पर उत्सुक नजर आये। विश्व हाथी दिवस पर ऐसे जीवों को जरूर प्रत्यक्ष देखना चाहते हैं।
फोटो कैप्शन: अमीश एवं हर्ष
अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस- 12 अगस्त
--युवाओं में कुछ कर गुजरने का जोश है
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कनीना की आवाज। 12 अगस्त को अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जा रहा है। देश में अधिक संख्या युवा वर्ग की है और उनकी आवाज को किसी प्रकार दबाया नहीं जा सकता। उनके विचार जरूर सुनने चाहिए। भारत के युवा विवेकानंद को अमोघ जोश के लिए जाना जाता है। उनके द्वारा दिए गए भाषण आज भी युवा वर्ग को प्रेरित करते हैं। स्वामी विवेकानंद का सिर्फ 39 वर्ष का जीवनकाल कई मायनों में आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। स्वामी विवेकानंद कहते थे कि हर युवा राष्ट्र के निर्माण में योगदान दे सकता है। ऐसे में युवाओं को अपने सामथ्र्य का उचित प्रयोग करना चाहिए। ऐसे में युवाओं को आगे बढऩे के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से यह दिन मनाया जाता है
क्या कहना हैं युवा वर्ग का--
युवाओं का जोश अपार होता है। जिस काम को करने की ठान ले। वे हर काम को करने में सक्षम हैं। यह सत्य है कि वह बेरोजगार अधिक है। उन्हें यदि सही मार्गदर्शन दिया जाए तो निश्चित रूप से देश के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं और उनकी भागीदारी को किसी प्रकार भुलाया नहीं जा सकता।
--कुलदीप बोहरा, समाजसेवी कनीना
युवा वर्ग एक अलग वर्ग है जिसको पूरे ही विश्व में जाना जाता है। युवा वर्ग की बुद्धि बहुत तेज होती है जो कुछ सोचते हैं उसको कर दिखाने में भी सक्षम होते हैं। राजनीति हो व्यापार हो तथा किस क्षेत्र में हो उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकते। ऐसे युवाओं को सही दिशा मिलनी चाहिए ताकि देश के विकास में भूमिका निभा सके।
--रविंद्र कुमार,कनीना
युवाओं पर भविष्य निर्भर करता है। यदि युवा का भविष्य उज्ज्वल होगा तो देश का विकास होगा और उज्ज्वल भविष्य बनेगा। युवा पीढ़ी की हर विचारधारा को ध्यान में रखकर देश को आगे बढऩा चाहिए। तभी देश का विकास संभव है। युवा क्षेत्र में जागरूक परंतु बेरोजगारी के चलते मायूस हैं। वे अपने धुन के पक्के होते हैं ।यदि उनको सही दिशा मिल जाए तो उन ऊंचाइयों को छुएगा जहां तक आम आदमी तक नहीं पहुंचा जा सकता।
- सुरेश कुमार, युवा कनीना
युवा पीढ़ी एक अलग किस्म की पीढ़ी है। युवा दिल की धड़कन होता है। उनके हर कार्य बहुत सुंदर होते हैं। वे सही दिशा में चलेंगे यदि सही दिशा निर्देश मिलेंगे। उनका हर कार्य होगा देश के विकास और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करेगा। युवा वर्ग सदा हित की बात सोचता तथा देश के भविष्य की बात को ध्यान में रखता है। उनका हर कदम सही दिशा में पड़े तो भारत फिर से सोने की चिडिय़ा बनेगा।
---दिनेश कुमार समाजसेवी,कनीना
फोटो कैप्शन: दिनेश कुमार, रवि कुमार, सुरेश कुमार, , कुलदीप बोहरा।
बाघोत मेले में स्वास्थ्य विभाग की सराहनीय सेवाएं
-- श्रद्धालुओं ने की सराहना
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कनीना की आवाज। बाघोत मेले में उमड़ी भारी भीड़ के बीच श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेहलंग की टीम ने एसएमओ डा. प्रभा यादव के मार्गदर्शन में सराहनीय सेवाएं प्रदान कीं।
मेले में किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम पिछले 5 दिनों से शिफ्टों में तैनात है। आज की ड्यूटी पर तैनात टीम में स्वास्थ्यकर्मी धर्मेंद्र यादव, ऋषिराज आर्य, सुधीर कुमार, सीएचओ रवि कुमार के साथ वार्ड अटेंडेंट मनोज सोनी एवं मनोज चौधरी शामिल रहे। टीम द्वारा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य परामर्श एवं आवश्यक चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध कराई गई।
आपातकालीन सेवाओं के लिए सीएचसी सेहलंग की एंबुलेंस भी मेले में तैनात रही। स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और मुस्तैदी के कारण मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
मेले में की गई इस व्यवस्था की श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों ने खुले दिल से सराहना की।
फोटो कैप्शन 01: बाघोत मेले में तैनात स्वास्थ्य विभाग की टीम
महिला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पर छात्राओं को मिला मार्गदर्शन
--कन्हाणी कालेज में चला व्याख्यान
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कनीना की आवाज। राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हाणी में महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में छात्राओं को महिला स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डा. विक्रम सिंह ने की।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डा. प्रकृति यादव ने छात्राओं को संबोधित करते हुए महिला स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर वैज्ञानिक एवं उपयोगी जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है। स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छ आदतें और समय पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान व्यक्ति को बेहतर एवं स्वस्थ जीवन जीने में मदद करता है।
डा. प्रकृति यादव ने छात्राओं को व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने, संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने, पर्याप्त आराम करने तथा नियमित दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करने तथा आवश्यकता पडऩे पर समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी।
उन्होंने छात्राओं को स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर बिना झिझक अपनी बात रखने और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सही जानकारी के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी अनेक भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है।
व्याख्यान के दौरान छात्राओं ने महिला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। डा. प्रकृति यादव ने छात्राओं की जिज्ञासाओं का सहज, सरल एवं वैज्ञानिक तरीके से समाधान किया। संवादात्मक चर्चा से छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी मिली तथा उनमें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता एवं आत्मविश्वास बढ़ा।
प्राचार्य डा. विक्रम यादव ने डॉ. प्रकृति यादव का धन्यवाद करते हुए कहा कि महिला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं।
फोटो कैप्शन 02: डा. प्रकृति छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधित जानकारी देते हुए
























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