डीएवी शिक्षण संस्थान के समर्थन में हुई समीक्षा बैठक।
युवाओं ने दिया पुरजोर समर्थन
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कनीना की आवाज। कनीना की डीएवी शिक्षण संस्थान को दोबारा खुलवाने के लिए गेट के पास रविवार को समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया जिसमें कनीना के अलावा आस पास गांव के युवाओं ने अपनी राय दी। समीक्षा बैठक हर रविवार को होती है जिसमें पूरे सप्ताह की नीति बनाई जाती है। इस बार युवाओं में जोश देखने को मिला । वहीं भडफ़ से आए रवि यादव ने संगठन को गांव में पंचायत घर पर दोपहर 12 बजे जन संवाद के लिए आमंत्रित किया है । उन्होंने बताया कि एक समय था जब उनके गांव के युवा डीएवी मैदान में शारीरिक परीक्षण के लिए आते थे। जब शिक्षण संस्थान चला करता था तो उस समय रेवाड़ी रोड पर परिवहन विभाग की तरफ से बस स्टाप भी बनाया गया था। लेकिन अब सब कुछ वीरान पड़ा है। उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि भडफ़ गांव का युवा पीढ़ी ही नहीं बल्कि बुजुर्ग और महिलाएं भी समर्थन में साथ है। हरेंद्र शर्मा ने बताया कि डी ए वी संस्था को दोबारा खुलवाने के लिए जो हस्ताक्षर अभियान शुरू किया था उसकी शुरुआत कनीना के वार्ड नंबर 06 से हो चुकी है जिसमें पूर्व पार्षद पहलाद राय और राज कुमार चौहान ने समर्थन दिया । इसके अलावा वार्ड वासियों ने भी बढ़ चढ़ कर समर्थन दिया। समीक्षा बैठक में समाज सेवी हरेंद्र शर्मा, मोनू यादव, सोनू , दीपांशु, राज कुमार,राज सिंह, हैप्पी, पंकज शर्मा,रिंकू सिंह,इत्यादि क्षेत्र वासी मौजूद थे ।
फोटो कैप्शन 06: संबंधित है
गुरुकुल कनीना में शिक्षक सम्मान समारोह
काश ऐसा सरकारी स्कूलों में भी हो तो बदल जाए तस्वीर!
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कनीना की आवाज। 5 सितंबर रात 9 बजे तक गुरुकुल कनीना में जो कार्यक्रम चला। वह कहने को तो निजी स्कूल था किंतु तंत्र सरकारी देखने को मिला। किसी भी कार्यक्रम में सरकारी स्कूलों में इतना बड़ा तंत्र, इतने अधिक शिक्षक ,इतना बड़ा सम्मान नहीं देखने को मिलता। जिला शिक्षा अधिकारी नारनौल, खेलाधिकारी नारनौल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नारनौल सहित दर्जनों खंड के अधिकारी, सैकड़ों सरकारी स्कूलों के शिक्षक ,निजी स्कूलों के शिक्षक दूर दराज तक सम्मान की सूचक पगड़ी बांधे दिखाई दे रहे थे। इन शिक्षकों का चयन और उन्हें सम्मान के लिए किस आधार पर बुलाया गया यह तो कह पाना कठिन है किंतु ऐसा बड़ा कार्यक्रम शायद ही किसी सरकारी स्कूल में हो पाएगा। एक और जहां 5 सितंबर को जिला के अधिकारियों को चंडीगढ़ में आयोजित राज्य शिक्षक पुरस्कार समारोह में आमंत्रित किया गया था किंतु अधिकांश अधिकारी वहां न जाकर कनीना पहुंचे जो इस गुरुकुल के आकर्षण की ओर इशारा करता है। इन अधिकारियों को बड़ी-बड़ी भगवत गीता आदि दी गई जो उनके घरों में सुरक्षित रख दी जाएगी। शायद ही दो प्रतिशत ऐसे अध्यापक होंगे जो इन गीता का एक चैप्टर भी पढ़ पाएंगे। यदि जिला के शिक्षा अधिकारियों को किसी सरकारी कार्यक्रम में बुलाया जाए तो शायद इतनी संख्या में हाजिर नहीं हो पाएंगे। इससे लगता है की सरकारी स्कूल इसीलिए पीछे बिछड़ते जा रहे हैं। यद्यपि गुरुकुल की अच्छी पहल थी किंतु इसमें जिन शिक्षकों को बुलाया गया जिनको सम्मान दिया गया वह आधार एवं क्राइटेरिया समझ से परे रहा। क्योंकि राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक भी इस क्षेत्र में कम से कम चार है, विश्व रिकार्ड धारक शिक्षक भी है किंतु उनका कोई तवज्जो नहीं दिया गया परंतु निजी संस्थान है वो चाहे वैसा करने का उन्हें पूरा हक है।। सभी को शायद ही बुलाया गया हो। कार्यक्रम सराहनीय रहा किंतु सरकार को भी एक बार सोचना होगा कि इस प्रकार के कार्यक्रम में जब सरकारी अधिकारी और सरकारी शिक्षक आदि पहुंचेंगे तो सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों में क्या संदेश जाएगा। यह सत्य है कि जिस प्रकार कार्यक्रम का गुरुकुल में आयोजन किया गया वह बेहतरीन रहा क्योंकि कुछ पुराने शिक्षकों को कम से कम याद किया गया। चाहे गुरुकुल ने इस बहाने अपना विज्ञापन भी इन शिक्षकों तक पहुंचा दिया, अपना संदेश, अपना ध्येय और अपना उद्देश्य भी शिक्षक को के जरिए पहुंचाया क्योंकि शिक्षक एक ऐसी कड़ी होती है जो एक बार मन में ठान ले कर गुजरते हैं। यदि उन्हें गुरुकुल की पद्धति अच्छी लगेगी तो निसंदेह वो अन्य लोगों को इससे जोडऩे के लिए कहेंगे।
अब सरकार को भी चाहिए इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करें जिसमें पुराने शिक्षक को कम से कम एक बार किसी मंच पर बुलाने का मौका मिले। ऐसा कार्यक्रम 5 सितंबर को एक बार आयोजित करवाया जा सके। इसके लिए सभी अधिकारियों को जरूर उपस्थित रहने का आदेश दिया जाए वरना इस प्रकार गुरुकुल जैसे कार्यक्रम को देखकर एक ही बात पुरानी शिक्षकों में चुभती रहेगी कि काश निजी स्कूलों की तरह सरकारी स्कूल भी आगे बढ़े। वरना इस प्रकार के कार्यक्रमों में सरकारी अधिकारियों को भाग लेने से रोका जाए। वरना सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों एवं अभिभावकों में भेदभाव का रवैया दिल में घर कर जाएगा।
फोटो कैप्शन 07: संबंधित फोटो है
सड़क मार्ग की जर्जर हालत, ठीक करवाने की उठी मांग
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कनीना की आवाज। कनीना-महेंद्रगढ़ मार्ग पर नायरा पेट्रोल समक्ष से गुजरने वाले धनौंदा- चरखी दादरी को जाने वाला मार्ग नायरा पेट्रोल पंप के समक्ष बहुत जर्जर हालत में हो चला है। एक और जहां गंदा नाला भी इधर से गुजरता है वही चौड़े चौड़े गड्ढे बन गए हैं। जब कभी वर्षा होती है तो इनमें पानी खड़ा हो जाता है और निकल पाना कठिन हो जाता है। जब वर्षा का जल भर जाता है तो यह गड्ढे दिखाई नहीं देते जिसमें दोपहिया वाहन चालक गिरकर गंभीर चोटिल हो रहे हैं। वैसे भी उन्हाणी पुल निर्माण के कारण इस मार्ग से होकर महेंद्रगढ़, धानोंदा एवं चरखी दादरी आदि की ओर जाने वाले वाहनों की संख्या बढ़ गई है परंतु प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। चरखी दादरी मार्ग तक इस सड़क की जर्जर हालात बन चुकी है।
राहगीर नरेश कुमार, दिनेश कुमार, सुरेश कुमार, महेश कुमार आदि ने बताया कि लंबे समय से राहगीर परेशान हैं। जब से उन्हाणी पुल का निर्माण जारी है उन्हें इधर से गुजरना होता है। वैसे भी धनौंदा जाने के लिए यह छोटा मार्ग है किंतु यहां के गड्ढे समस्या बनते जा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का निदान किया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।
फोटो कैप्शन 01: नायरा पेट्रोल पंप समक्ष धनौंदा को जाने वाला जर्जर मार्ग
कनीना श्रीकृष्ण गोशाला की कार्यकारिणी के चुनाव 18 सितंबर को
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कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गोशाला की कार्यकारिणी के चुनाव 18 सितंबर को होंगे। विस्तृत जानकारी देते हुए श्रीकृष्ण गोशाला के प्रशासकीय अधिकारी कृष्ण सिंह डागर पूर्व प्राचार्य कनीना ने जानकारी देते हुए बताया कि नामांकन भरने की तिथि 12 सितंबर से 13 सितंबर तक, वही नामांकन फार्म जांच करने की तिथि 14 सितंबर को होगी।
नाम वापस लेने के लिए 15 सितंबर रखा गया है जबकि नाम वापस लेने के बाद सदस्यों की सूची 16 सितंबर को जारी होगी और 17 सितंबर को उनका चुनाव चिन्ह प्रदान कर दिए जाएंगे मतदान 18 को सितंबर को होगा तथा उसी दिन शाम को 3 बजे मतगणना चलेगी। प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि अब तक श्रीकृष्ण गोशाला के 31 सदस्य निर्धारित है जो अपना वोट डालेंगे। उल्लेखनीय के श्रीकृष्ण गोशाला 2003 में स्थापित की गई थी और अभी तक इसकी कार्यकारिणी का चुनाव नहीं हो पाया था। सभी चुनाव सर्वसम्मति से हुए हैं लेकिन इस बार एक व्यक्ति की शिकायत पर यह चुनाव निर्धारित किए गए हैं। गोशाला बहुत ही शानदार तरीके से पूर्व प्रधान भगत सिंह की देखरेख में चल रही थी और गोशाला को चार चांद लगा दिए गए थे। शिकायत के बाद से बहुत से लोगों में रोष पनपा परिणाम यह निकला कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पर्व भी फीका रहा।
फोटो कैप्शन 05: मतदान की घोषणा और सूची चिपकाते हुए कृष्ण सिंह पूर्व प्राचार्य
गुरुकुल में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित, शिक्षा अधिकारियों ने भारतीय शिक्षा पद्धति को बताया गौरवशाली
-देर रात तक चला कार्यक्रम
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कनीना की आवाज। भारतीय संस्कृति की गौरवशाली गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय का संदेश देते हुए कनीना स्थित नवस्थापित गुरुकुल की ओर से शिक्षक दिवस पर भव्य शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षाविदों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षा और ज्ञान की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत भारत के महान शिक्षाविद एवं पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। इसके साथ ही शिक्षक दिवस समारोह का विधिवत शुभारंभ हुआ।
इसके पश्चात स्कूली बच्चों ने मनमोहक अध्यापक वंदना प्रस्तुत कर गुरु-शिष्य परंपरा की महान भारतीय संस्कृति को साकार किया।
समारोह में जिला शिक्षा अधिकारी विश्वेश्वर कौशिक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार शर्मा अति विशिष्ट अतिथि रहे। अतिथियों का संस्था की ओर से पारंपरिक राजस्थानी पगड़ी पहनाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यभार संभाल रहे माडल संस्कृति स्कूल के प्राचार्य सुनील खुडानिया भी कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे।
स्वागत भाषण देते हुए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने शिक्षक दिवस की महत्ता और भारतीय गुरुकुल परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरुकुल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार और चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला रहा है। भारतीय दर्शन पर आधारित गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था के कारण ही भारत को एक समय ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनने का गौरव प्राप्त हुआ था।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को भी विद्यार्थियों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए, ताकि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम न रहकर श्रेष्ठ नागरिक और सशक्त राष्ट्र निर्माण का आधार बने।
मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी विश्वेश्वर कौशिक ने शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरुकुल की स्थापना और शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित करने को अत्यंत सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण जैसे महान व्यक्तित्वों ने भी अपने गुरुओं के सान्निध्य में गुरुकुल परंपरा के माध्यम से शिक्षा और जीवन मूल्यों का ज्ञान प्राप्त किया।
उन्होंने विभिन्न शिक्षण पद्धतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली की मूल शक्ति उसके संस्कार, जीवन मूल्य और गुरु-शिष्य संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाते हुए भारतीय शिक्षा की इन महान परंपराओं को आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
संस्था के प्रबंध निदेशक अंकुर यादव ने नवस्थापित गुरुकुल के उद्देश्य और भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि संस्था का लक्ष्य विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और श्रेष्ठ संस्कारों से जोडऩा है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल के माध्यम से ऐसे प्रतिभाशाली और संस्कारवान विद्यार्थियों को तैयार करने का प्रयास किया जाएगा, जो भविष्य में देश और समाज को नई दिशा दे सकें।
संस्था के निदेशक विजय भुरथला एवं अनीता यादव ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक एवं नृत्य प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार शर्मा, एईओ हंसराज गुर्जर, जीआर इंटरनेशनल स्कूल के अध्यक्ष विजयपाल यादव, बुचावास गौशाला के संरक्षक महंत लक्ष्मण गिरि, आर्य समाज से जुड़े सतीश आर्य, राजेश शासत्री लूखी,गुरुकुल एवं विद्यालय का समस्त स्टाफ, क्षेत्र के शिक्षाविद और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
समारोह के समापन अवसर पर संस्था की ओर से मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों को भारतीय ज्ञान और जीवन दर्शन के महान ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता का विशेष संस्करण सम्मानस्वरूप भेंट किया गया।
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित यह समारोह केवल शिक्षकों के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय गुरुकुल परंपरा की पुनस्र्थापना, संस्कार आधारित शिक्षा और आधुनिक शिक्षण व्यवस्था के बीच एक मजबूत सेतु बनाने का संदेश देकर शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायक पहल बन गया।
फोटो कैप्शन 02: सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हुए बच्चे
03: डीइओ एवं डीइइओ को गीता भेंट करते हुए विजय भुरथला
नपा के सफाई कर्मियों की काम छोड़ हड़ताल 32वें दिन भी जारी
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कनीना की आवाज। नगर पालिका सफाई कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर नगर पालिका सफाई कर्मचारी 32वें दिन भी हड़ताल पर रहे। कर्मियों का कहना है कि सरकार ने अभी तक उनकी मांगें नहीं मानी हैं जिसके कारण हड़ताल जारी है। अगर मांगे नहीं मानी तो आगे भी हड़ताल जारी रहेगी।
यूनिट कनीना प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि सभी कर्मी हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, ठेका प्रथा बंद करने, एचकेआरएन खत्म करने, समान काम का समान वेतन लागू करने की प्रमुख हैं। लेकिन सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है।
उनका कहना है कि सरकार ने अभी तक कोई मांग पूरी नहीं की है। उधर कनीना के विभिन्न स्थानों पर गंदगी के ढ़ेर लग गए हैं। लोग बेहद परेशान हैं। जगह जगह गंदगी के ढेरों में आवारा जंतु मंडराते रहते हैं।
इस मौके पर अशोक कुमार उप प्रधान, योगेश कुमार, राकेश कुमार, जमादार नवीन कुमार, कर्मवीर, सुभाष, सोनू, शशि बाला, रतनलाल, राजेश, प्रदीप, पवन, संजय व अन्य हड़ताल पर रहे।
फोटो कैप्शन 01: सफाई कर्मी कनीना हड़ताल पर रहे
वैश्विक क्षमा दिवस 7 सितंबर
क्षमा करने से शरीर में पैदा होती है सकारात्मक ऊर्जा
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कनीना की आवाज। क्षमा करना इंसान की अंदरूनी आत्मा से उत्पन्न एक विचार है। क्षमा कर देने से इंसान में एक विशेष गुण पैदा जो उसे अधिक सहनशील, उम्र में वृद्धि और सकारात्मक सोच पैदा करता है। क्षमा करने से जहां शरीर में एक सकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है वही क्षमा करना सदियों से चला रहा है। कितने ही उदाहरण मिलते हैं कि ऋषि मुनियों के सामने जब कोई याचक क्षमा मांगता था तो उसे सदा माफ किया जाता था।
क्षमा करने मन की कड़वाहट दूर होती है। 1994 से क्षमा दिवस मनाने की परंपरा चली आ रही है। यह पाया गया है कि जो लोग क्षमा करते हैं वो क्रोध करने वालों की तुलना में अधिक खुश और स्वस्थ रहते हैं। किसी को क्षमा करना कभी-कभी कठिन और चुनौती पूर्ण होता है लेकिन असंभव कुछ नहीं है।क्षमा करने से डिप्रेशन, क्रोध, स्ट्रेस की हर तरह में कमी आती है। क्या कहते हैं डाक्टर --
क्षमा सांस्कृतिक रूप से समाज का हिस्सा है। यह अनेक दान दक्षिणाओं में से एक प्रकार का दान है जिसे हम क्षमादान कहते हैं। क्षमा करने से मन में संतुष्टि और आत्मा को तृप्ति प्रदान होती है। मनोवैज्ञानिक रूप से दोनों पक्षों को ही शांति प्रदान करता है। क्षमा करने पर मस्तिष्क में डोपामाइन नामक हार्मोन निकलता है जो हमें मानसिक रूप से खुशी प्रदान करता है। क्षमा या माफी हर मनुष्य के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रत्येक मनुष्य ने अपने जीवन में अनेक बार किसी को क्षमा किया होगा और किसी ने क्षमा मांगी होगी। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। क्षमा करने से सामाजिक रिश्तों मजबूती आती है और शारीरिक स्वास्थ्य को भी लाभ होता है। मनुष्य को केवल दूसरों को क्षमा करना ही नहीं अपितु स्वयं को भी क्षमा करना भी आना चाहिए। इससे मनुष्य का मानसिक तनाव कम होता है। जिन मनुष्य में क्षमा करने की क्षमता होती है शारीरिक और मानसिक रूप से ज्यादा स्वस्थ रहते हैं।
--डा. जितेंद्र मोरवाल
क्षमा मनुष्यता की पहचान है। क्षमावाणी में दो पहलू हैं। एक तरफ से मांगी गई या की गई क्षमा का भी सम्यक या पूर्ण अस्तित्व नहीं है। कोई क्षमा मांगे और आप उसे क्षमा करें और जब आप क्षमा मांगे तो वह आपको क्षमा करे।
ऐसे समय क्षमा देने वाले का भी दायित्व है कि वह अपने हृदय की विशालता का परिचय दे और क्षमा मांगने वाले के साथ किसी भी तरह का विरोध या बैर मिटाकर मैत्री की स्थापना करे।
अनेक धर्मों के धर्मग्रन्थों में क्षमा के महत्व को दर्शाया भी गया है। शास्त्रों में भी कहा गया है-क्षमा वीरों का आभूषण है।
हमें राग-द्वेष छोड़ सभी जीवों के प्रति पवित्र भाव रखते हुए हित-मित प्रिय वचन बोलना चाहिए और अपने हृदय के साथ वाणी में भी क्षमा लाना चाहिए। क्षमावाणी वर्ष में एक दिन नहीं बल्कि प्रतिदिन व प्रति क्षण होना चाहिए।
--सतीश आर्य समाजसेवी रसूलपुर
फोटो कैप्शन: डा. जितेंद्र मोरवाल तथा सतीश आर्य









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