कनीना में कई विकास कार्यों को मिली मंज़ूरी
बहन आरती राव ने अपने कोष से 25 लाख की दी स्वीकृति : दीपक चौधरी
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कनीना की आवाज। कनीना नगर क्षेत्र में जनसुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विभिन्न वार्डों में कई विकास कार्यों के लिए 25 लाख रुपये की मंज़ूरी दी गई है। इस संबंध में जानकारी देते हुए दीपक चौधरी ने बताया कि आरती राव ने अपने विवेकाधीन कोष से इन कार्यों को करवाने की स्वीकृति प्रदान की है।
दीपक चौधरी के अनुसार कनीना के अलग-अलग वार्डों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए चौपाल निर्माण, पैदल चलने के ट्रैक, पार्कों के नवीनीकरण, पेयजल सुविधा तथा अन्य आवश्यक विकास कार्य शामिल किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि वार्ड नंबर 1 में चौपाल का निर्माण तथा होली वाला जोहड़ के चारों ओर पैदल चलने के लिए ट्रैक बनाया जाएगा। वार्ड नंबर 8 में एससी चौपाल का नवीनीकरण किया जाएगा। वहीं वार्ड नंबर 10 में शहीद अशोक पार्क का नवीनीकरण तथा वार्ड नंबर 4 में चंदा मामा पार्क में ट्यूबवेल का नवीनीकरण किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त वार्ड नंबर 6 में दो वाटर कूलर लगाए जाएंगे, जिससे आम नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिल सके। अनाज मंडी व बस स्टैंड क्षेत्र के पास पैदल चलने के ट्रैक और पार्क विकास का कार्य भी प्रस्तावित है।
दीपक चौधरी ने कहा कि इन विकास कार्यों के पूरा होने से कनीना शहर में बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा और आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। कनीना के विकास में बहन आरती राव के द्वारा दिये गये सहयोग के लिए जिन वार्डो के कार्य होने है उनके पार्षद साथियों ने उनका धन्यावाद किया पार्षद मंजू देवी, योगेश कुमार, राकेश, रेखा देवी,पूजा देवी वार्ड 8,मुकेश नंबरदार, नरेंद्र फौजी, देसराज सभी ने आभार व्यक्त किया
कनीना खास उपमंडल के रेलवे स्टेशन पर फास्ट ट्रेन
--जिले का एकमात्र अभागा रेलवे स्टेशन
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल मुख्यालय का कनीना खास ऐसा अभागा रेलवे स्टेशन होगा जहां केवल पैसेंजर ट्रेन रुकती है। कहने को तो उपमंडल स्तर का रेलवे स्टेशन है किंतु कोई फास्ट और सुपरफास्ट ट्रेन यहां नहीं रुकती है। राजनीति की मार झेलता हुआ यह रेलवे स्टेशन इसका अच्छा उदाहरण है जहां कभी फास्ट ट्रेन रुकती थी उनका भी रुकना बंद हो चला है।
एक वक्त था जब कनीना खास रेलवे लाइन मीटर गेज होती थी यहां पर फास्ट ट्रेन बीकानेर एवं जोधपुर ट्रेने भी रुकती थी किंतु जब से यह लाइन ब्राड गेज में बदली है तब से सभी ट्रेन रुकनी बंद हो गई। एकमात्र पैसेंजर ट्रेन ही यहां रुकती है। ऐसा कोई अधिकारी नहीं है जहां तक कनीना वासियों ने शिकायत नहीं की हो किंतु राजनीति की मार झेलता हुआ आज तक कनीना खास रेलवे स्टेशन नहीं उभर पाया है। कहने को तो भारी संख्या में कनीना में नेता, मंत्री, विधायक हुए हैं और कनीना राजनीति का गढ़ माना जाता है किंतु आज तक रेलवे स्टेशन की सुध नहीं ली है। आश्चर्यजनक तो है कि विगत नवरात्रों तक जहां एक फास्ट ट्रेन का 15 दिनों तक ठहराव होता था वो भी इस बार के नवरात्रों में नहीं रुकी। यहां किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी जा रही है। कनीना खास एकमात्र ऐसा रेलवे स्टेशन है जो रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिलों की सीमा पर स्थित है। एक ओर कनीना के बाद रेवाड़ी जिले का जैनाबाद डहीना रेलवे स्टेशन है वहीं दूसरी ओर महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन है। इस रेलवे स्टेशन ने कितने ही रूप देखे हैं। जहां बीकानेर के महाराज भी यहां आकर रुकते थे और जिनके कारण यहां से ट्रेन का मार्ग निकाला गया था। आज यह रेलवे स्टेशन अपनी बिछुडऩे की दास्तान सुना रहा है। वर्तमान में इस रेलवे स्टेशन विद्युतीकरण भी हो चुका है किंतु अफसोस कनीना को उसका हक नहीं मिला है। अब कनीना पालिका प्रधान के दावेदार इस रेलवे स्टेशन पर सभी ट्रेनों के रुकवाने के लिए प्रयास करने की बात कह रहे हैं वहीं चरखी दादरी से अलवर वायां कनीना रेलवे लाइन बिछाने की कार्रवाई करवाने की बात कह रहे हैं।
सबसे बड़ी विशेषता यह है कि 1935 में स्थापित किए रेलवे स्टेशन कनीना की विशाल अनाज मंडी के चलते स्थापित हुआ था। कनीना की विशाल अनाज मंडी है जिसे दूर दराज तक कनीना मंडी के नाम से ही जाना जाता है परंतु आज तक किसी मंत्री, विधायक, सांसद या अधिकारी की यह नजर नहीं पड़ी है कि कम से कम यहां सभी ट्रेनों का ठहराव कर दिया जाए ताकि यहां के लोग दूर दराज तक जा सके।
अहीरवाल का गढ़ और देश सेवा में इस क्षेत्र के हजारों सैनिक कार्यरत है उनके दृष्टिगत भी यहां कोई ट्रेन का ठहरा नहीं किया जाता। पैसेंजर ट्रेन के कारण ही कनीना का विकास नहीं हो पा रहा है। एक और जहां चरखी दादरी से अलवर वाया कनीना वही कोसली से कनीना रेल मार्ग जोड़े जाने की आस लगाए कनीनावासी बैठे हैं। इनकी सर्वे भी हो चुकी है। विगत समय में यह विषय चर्चा का विषय बना था। यदि ये मार्ग जुड़ जाते हैं तो कनीना जंक्शन बन जाएगा और फिर से यहां ट्रेनों की सुविधा मिलने की उम्मीद बन जाएगी।
कनीना खास रेलवे स्टेशन 1939 में निर्मित किया गया था किंतु यहां फास्ट एवं सुपरफास्ट ट्रेन नहीं रुकती, महज एक फास्ट तथा पैसेंजर ट्रेनों से ही गुजारा करना पड़ता है। कनीना से रेवाड़ी की ओर14 ट्रेन तथा रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ भी 14 ट्रेन चलती हैं जिनमें से कनीना को महज 7 ट्रेन पैसेंजर नसीब होती हैं जबकि कनीना खास रेवाड़ी से 34 किमी तथा महेंद्रगढ़ से 17 किमी दूरी पर स्थित है। अगर कोई चरखी दादरी, रोहतक ,अटेली एवं नारनौल आदि की ओर जाना चाहे तो नहीं जा सकता क्योंकि यह ट्रेन केवल महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी की और देर शाम तक ही चलती हैं। तत्पश्चात सुबह होने का इंतजार करना पड़ता है।
महाभारत का इतिहास समेटे है बाबा खाटू श्याम
-20 फरवरी से लगेगा मेला, किया जाता है निशान अर्पित
-जाएगी कनीना से निशान यात्रा
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कनीना की आवाज। 20 फरवरी से 4 मार्च तक चलने वाले खाटू श्याम मेले के लिए 20 फरवरी से निशान यात्रा शुरू हो जाएगी। कनीना ही नहीं पूरे प्रदेश से हजारों की संख्या में भक्त निशान लेकर जाते हैं। जगह जगह उनके लिए शिविरों का प्रबंध शुरू हो गया है। राजस्थान में रिंगस से करीब 17 किमी दूर खाटूश्याम धाम पौराणिक इतिहास को समेटे हुए है। यूं तो इस धाम पर वर्ष भर भारी भीड़ चलती है किंतु फाल्गुन शुक्ल एकादशी को जो मेला लगता है उसमें अपार जनसैलाब उमड़ता है। यहां कई दिनों पूर्व ही भक्तजन आकर ध्वज चढ़ाने लग जाते हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के अलावा पंजाब के बेशुमार भक्तजन पदयात्रा करके इस धाम पर पहुंचते हैं।
खाटूश्याम की कथा-
श्याम बाबा का नाम बर्बरीक था तथा महाभारत में भीम का पौत्र घाटोत्कच का पुत्र था। जब कौरवों और पांडवों का युद्ध चल रहा था तो बर्बरीक तीन बाण लेकर युद्ध में आया। जब श्रीकृष्ण की नजरें उन पर पड़ी तो उनका परिचय तथा युद्ध में आने का कारण पूछा। बरबरीक ने अपना नाम घटोत्कच पुत्र बबरीक बताया और कहा मैं युद्ध के लिए आया हूं और तीन बाणों से तीन लोकों को बेंध सकता हूं। कृष्ण ने उनकी परीक्षा हेतु सामने खड़े विशाल पीपल के सभी पत्ते एक ही बाण से छेदने के लिए कहा।
बर्बरीक ने एक बाण धनुष पर चढ़ाया और, पीपल के सभी पत्ते छेद डाले। श्रीकृष्ण ने शीश दान में मांगा। बर्बरीक ने हाथ जोड़कर एक विनती की कि उन्हें पूरा युद्ध दिखाया जाये।
शीश को ऊंचे पर्वत पर रख युद्ध का हाल देखने दिया। जब पांडव युद्ध जीत गए तो युद्ध में जीत का कारण श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र तथा द्रोपदी का काल रूप बताया।
बर्बरीक के सच्चे न्याय को सुन श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में श्याम बाबा नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। इसके बाद शीश नदी में बहा दिया जो चलकर खाटू पवित्र धाम में रुका। तभी से खाटू श्याम स्थल पर श्याम मन्दिर बनाकर पूजा आरम्भ की। मन्दिर में रखा शीश स्वयं उत्पन्न हुआ माना जाता है।
रास्ता -
कनीना से सैकड़ों की संख्या में झंडा लेकर श्री खाटू श्याम की ओर रवाना होते हैं। विभिन्न जिलों और राज्यों के भक्तजन निजामपुर सड़क मार्ग को काटने वाले रेलवे ट्रैक के साथ-साथ चलकर जाते हैं रास्ते में अनेक पड़ाव एवं ठहराव होते हैं। रास्ता कनीना-मोहनपुर-सुंदराह-झीगावन-बेवल-अटा ली-सिहमा-खासपुर-नारनौल- निजामपुर-डाबला- जीलो-मावंडा-नीम का थाना-भागेगा-कांवट-कछेरा-श्रीमाधोपुर-रिंगस- खाटूश्याम।
ठहराव-
खाटूश्याम धाम पर मेला अति दर्शनीय है। राजस्थान के भरने वाले प्रसिद्ध मेले के श्रद्धालुओं के लिए गांव-गांव में ठहरने के लिए शिविर लगाये जाते हैं। श्याम बाबा को पहुंचने वाले श्रद्धालुओं व भक्तों को यहां ठहराकर प्रबंधक विभोर हो जाते हैं। वहीं भक्तों की अच्छी सेवा की जाती है। किसी भी भक्त को रास्ते में कोई परेशानी नहीं आती है। वैसे भी भारी संख्या में भक्त विशेषकर महिलाएं अधिक जाती हैं। रास्ते में नहाने, खाने एवं दवाओं को शिविरों में भी बेहतर प्रबंध होता है।
तैयारी-
खाटूश्याम जाने के लिए एक डंडे पर सवा मीटर का कपड़ा जो खाटू ध्वज के नाम से पूजा अर्चना करने के बाद धारण किया जाता है और रास्ते में किसी कपड़े आदि या साफ जगह पर ही रखा जाता है। सुबह सवेरे खाटू की पूजा करके ही ध्वज को लेकर आगे बढ़ते हैं। सफाई के साथ-साथ मन एवं वचन से पूरे रास्ते शुद्धता का ख्याल रखा जाता है। कांवड़ के मुकाबले खाटूश्याम के नियम लचीले होते हैं। साबुन, तेल, ब्रश आदि की जा सकती है। क्योंकि अधिकांश रास्ता ट्रैक के साथ-साथ होकर गुजरता है। ऐसे में भक्तों को ट्रेन का ध्यान रखना जरूरी है।
22 फरवरी को जाएगी कनीना से निशान यात्रा-
निशान यात्रा खाटूधाम एवं जैतपुरा खाटू धाम दो स्थानों पर पहुंचती हैं। जो भक्त करीब 200 किमी दूर राजस्थान में खाटू श्याम धाम पर नहीं जा सकते हैं उनके लिए जैतपुर का धाम विख्यात है। हुडिय़ा-जैतपुर जो कनीना से 22 किमी दूर राजस्थान में स्थित है। प्रति वर्ष यहां पर कई हजार निशान अर्पित किए जाते हैं और खाटू श्याम भक्त पैदल चलकर जाते हैं। कनीना, अटेली, नारनौल तथा महेंद्रगढ़ के अलावा आस पास के भक्त जो एक ही दिन में अपना निशान खाटू को अर्पित करना चाहते हैं और अधिक दूर चलने में असमर्थ हैं उनके लिए यह खाटू श्याम मंदिर जाना जाता है। भक्त अपने घर से खाटू श्याम का निशान लेकर पदयात्रा करता हुआ कनीना से भोजावास तथा राताकलां से जैतपुर पहुंचता है।
कनीना से सैकड़ों भक्तों की निशानयात्रा हर वर्ष की भांति इस वर्ष श्याम मंदिर कनीना से शुरू होगी और उसी दिन जैतपुर धाम पर पहुंचेगी।
फोटो कैप्शन 01: जैतपुरा धाम।
02: खाटूश्याम द्वार
बाबूलाल करीरा अपने व्यवहार सेे कमा रहे हैं नाम
-अपने पैसों से लगते हैं पेड़ पौधे, करते हैं सेवा
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कनीना की आवाज। करीरा निवासी बाबूलाल सुख सहाय जहां शिक्षा विभाग में 25 सालों से सेवा दे रहे हैं वहीं वर्तमान में राजकीय कन्या उच्च विद्यालय कनीना में कार्यरत हैं। आज के दिन चाहे लोग काम से जी चुराते हैं किंतु वह पूरी लगाने से काम करते हैं तथा अपनी पैसों से पेड़ पौधे लगाकर विद्यालय का सौंदर्यीकरण में लगे हुए हैं। जहां उन्होंने अपने पैसों से पेड़ पौधे लगाए हैं वही फव्वारे लगाकर घास का लान तैयार कर रहे हैं। बाबूलाल से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि चाहे इंसान किसी भी पद पर हो किंतु उसे जी जान से मेहनत करनी चाहिए ताकि नाम कमा सके। यह हमारा फर्ज है। सरकार जब हमें वेतन देती है तो हमारा भी फर्ज बनता है कि हम जी जान से काम करें। परिवार की आर्थिक हालात ठीक होने के कारण अवकाश के दिन भी स्कूल में आ जाते हैं और काम में लगे रहते हैं। सौम्य स्वभाव के बाबूलाल जहां प्रांगण को सजाने में लगे हुये है वहीं शीत ऋतु आने पर उनके फूलदार पौधे नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार निज पैसों से पेड़ पौधे लाकर पेड़ लाकर प्रांगण सजाते हैं। अपने घर में उगे हुए फूलदार तथा फलदार पौधे भी लाकर लगाते हैं। जहां किचन गार्डन बनाना हो तो उसमें भी स्वयं अपने हाथों से किचन गार्डन तैयार करते हैं और बीज भी अपने पैसों से लाकर लगाते हैं। सबसे बड़ी बात है कि वर्तमान स्कूल के प्रार्थना सभा स्थल का घास का लान तैयार कर रहे हैं जिसमें उन्होंने खुद अपने पैसों से पाइपलाइन दबाकर उसमें फव्वारा सेट लगाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि बार-बार बंदर फव्वारा सेट को तोड़ जाते हैं इसलिए भूमि के नीचे से पाइप दबाकर छोटे फवारा लगाए हैं। जब भी किसी भी प्रकार का कोई आदेश मिलता है उसे बखूबी से पालन करते हैं कि तथा सद्व्यवहार होने के कारण सभी स्टाफ सदस्य उन्हें चाहते हैं। ऐसे वैसे भी सुखसहाय का वेतन बहुत कम होता है किंतु जो भी मिलता है उसे अपनी खुशनसीबी समझ कर मेहनत में विश्वास करते हैं। उनके लान में सदा हरी औषधि की भरमार है।
फोटो कैप्शन 4: घास का लान तैयार करते बाबूलाल तथा बाबूलाल की पासपोर्ट
विभिन्न मेलों एवं परीक्षाओं की तैयारी शुरू
-कनीना का मोलडऩाथ मेला 27 फरवरी को
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कनीना की आवाज। कनीना एवं आस पास क्षेत्रों में विभिन्न मेले फरवरी एवं मार्च माह में लग रहे हैं वहीं परीक्षाएं भी फरवरी में शुरू हो रही हैं। 22 फरवरी से 4 मार्च तक चलने वाले 12 दिवसीय खाटू श्याम फाल्गुनी मेले की तैयारी शुरू हो गई है। जहां कनीना में श्याम बाबा का मंदिर है वहीं कनीना से लोग राजस्थान के दो स्थानों पर पदयात्रा पर जाते हैं। एक और जहां हुडिय़ा जैतपुर जाते हैं वही खाटू श्याम धाम पर जाते हैं। दोनों ही जगह श्याम मेले लगते हैं। कनीना से करीब 190 किलोमीटर दूर राजस्थान में रिंगस से 17 किलोमीटर दूर खाटू धाम है। जहां सबसे अधिक बड़ा मेला लगता है। इस मेले में सभी गांव से सैकड़ों की संख्या भक्तजन पदयात्रा करते हैं। जगह-जगह उनके लिए जहां ठहरने के प्रबंध किए जाते हैं।
15 फरवरी को महाशिवरात्रि का बाघोत में मेला लगेगा। यह कांवड़ मेला नाम से जाना जाता हे। वर्ष में दो बार लगता है तथा गर्मियों में भारी संख्या में कांवड़ अर्पित की जाती हैं।
उधर को कनीना के संत मोलडऩाथ का मेला लगेगा। इसे शक्कर मेला नाम से जाना जाता हे। मोलडऩाथ मेला 27 फरवरी को संपन्न हो चुका है। कनीना का मोलडऩाथ मेला ऊंट एवं घुड़दौड़ के लिए विख्यात है।
कनीना में बदला मौसम
सुबह से ही निकलती है धूप




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