विश्व स्वास्थ्य दिवस पर स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश
-स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी, संतुलित आहार और संयमित जीवनशैली अपनाएं
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कनीना की आवाज। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने अध्यापकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य ही धन है और मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी उसका स्वास्थ्य होता है। एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते फास्ट फूड और हानिकारक पदार्थों से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि शाकाहारी एवं संतुलित भोजन ही श्रेष्ठ माना गया है, जिसकी भारतीय संस्कृति में विशेष महत्ता बताई गई है।
प्राचार्य ने आगे कहा कि आज के युग में वनस्पति घी, रिफाइंड तेल, अत्यधिक मसालेदार भोजन और अधिक नमक के सेवन से अनेक बीमारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में हमें अपनी खान-पान की आदतों में सुधार लाकर प्राकृतिक और पौष्टिक आहार को अपनाना चाहिए।
इस अवसर पर लीगल सेल के प्रभारी प्रवक्ता पन्नालाल ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या और स्वच्छता बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि हमें विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए, ताकि हम बीमारियों से दूर रहकर एक स्वस्थ जीवन जी सकें।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई और उन्हें दैनिक जीवन में अच्छे स्वास्थ्य संबंधी आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रवक्ता प्रवीण शर्मा, स्नेह लता, सुमन लता, रेखा यादव, अंजू यादव, कुलदीप सिंह, पवन कुमार, हेमंत शर्मा, ओमप्रकाश, ममता शर्मा, अनीता यादव सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
विश्व स्वास्थ्य दिवस के इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ जीवन ही सफलता की कुंजी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सकारात्मक सोच अपनाकर ही एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन संभव है
फोटो कैप्शन 13: संबंधित है
अब तक 5634 क्विंटल गेहूं की हुई सरकारी खरीद, सरसों के कोई खरीद नहीं
-जे- फार्म नहीं हो पा रहे जनरेट, परेशानी
-2518 क्विंटल रही गेट इंटरी मंगलवार को
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कनीना की आवाज। कनीना अनाज मंडी स्थित चेलावास में 6200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से सरसों खरीदने का आदेश है किंतु अभी तक सरकारी तौर पर कोई सरसों नहीं खरीदी गई है। निजी स्तर पर 6200 रुपए से अधिक भाव पर किसान अपनी सरसों बेच रहे हैं। इस बार सरकारी खरीद कम बताई जा रही जबकि निजी स्तर पर सरसों की मांग अधिक है और अधिक मूल्य पर खरीददार खरीद रहे हैं।
उधर गेहूं की सरकारी खरीद 2585 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से जारी है। अभी तक 5634 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है जबकि मंगलवार को खरीद का कार्य जारी रहा। गेहूं सरकारी तौर पर ही बेचने के लिए किसान अनाज मंडी पहुंच रहे हैं। किसानों को सबसे बड़ी समस्या जे-फार्म जनरेट होने की है। जे-फार्म जनरेट नहीं हो रहे हैं।
विस्तृत जानकारी देते हुए मार्केट कमेटी के रविंद्र बंसल ने बताया कि सबसे पहले आढ़ती के पास किसान गेहूं लेकर आता है और आढ़ती उसकी बोली लगाता है। बोली के बाद फूड सप्लाई विभाग गेहूं की खरीद करता है। खरीद करने के बाद मार्केट कमेटी में नीलामी की सूचना दर्ज होती है और उसे वेरीफाई किया जाता है। तत्पश्चात यह रिकार्ड फूड सप्लाई द्वारा वेरीफाई होता है। उसके बाद ही कहीं आढ़ती जाकर जे- फार्म जनरेट कर पता है। किंतु इतने अधिक सौपनों से गुजरने पर समस्या बढ़ रही है। जे- फार्म जनरेट होने में दिक्कत होने से खरीद में विघ्न पड़ रहा है।
नई अनाज मंडी में है सुरक्षा के प्रबंध-
वर्षा एवं आंधी आदि से नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में व्यापक प्रबंध है क्योंकि टीन शेड के नीचे गेहूं तथा सरसों रखी जा रही है इसलिए वर्षा और आंधी का कोई खास प्रभाव खरीद पर नहीं पड़ रहा है। किसान अपनी पैदावार अपने वाहनों में ढक कर अनाज मंडी तक ले जा रहे हैं।
फोटो कैप्शन 11 व 12: कनीना अनाज मंडी में गेहूं की खरीद का नजारा।
नई सिरीज जल्द ही......
बीते जमाने के कनीना के हीरे, आज भी है और कल भी रहेंगे
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कनीना की आवाज। बीते जमाने के कुछ ऐसे हीरो कनीना में हुए हैं जो आज भी है और भविष्य में भी रहेंगे। ऐसे ऐसे शिक्षाविद जो अपने समय के बेहतरीन शिक्षक होते थे, ट्यूशन आदि करते थे लेकिन उनका दूर दराज तक नाम था, आज भी वो नाम कमा रहे हैं और भविष्य में भी नाम कमाते रहेंगे। वैसे तो ऐसे हीरों की कमी नहीं हैं परंतु कनीना की आवाज में इस प्रकार के लोगों का साक्षात्कार समय-समय पर प्रकाशित किया जाएगा। ऐसे हीरो से आपको मिलवाया जाएगा। यह कलम निकट भविष्य में शुरू किया जा रहा है।
कुतरूं प्राचार्य के कारनामे- 20
-कुतरूं का भी वही हाल हुआ और होगा जो उसने शिक्षकों के साथ किया
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कनीना की आवाज। कनीना की आवाज के लेखक होशियार सिंह जो अपने समय के विज्ञान प्राध्यापक एवं अध्यापक रहे हैं। करीब 40 सालों तक निजी स्तर पर, ट्यूशन, निजी स्कूलों में, कालेज, सरकारी स्कूलों में तथा विभिन्न शिक्षण संस्थान में कार्य कर चुके और सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वर्तमान में अपना कनीना की आवाज ब्लाग जोर-शोर से लिख रहे हैं। इन 40 सालों के दौरान होशियार सिंह कनीना की आवाज ब्लाग के लेखक की विभिन्न प्राचार्यों से संपर्क हुआ और इस संपर्क दौरान पाया कि कुछ प्राचार्य कुतरूं कहलाए और कहलाते हैं। यह नाम ग्रामीण लोगों का दिया हुआ है क्योंकि उनके कारनामे इतने घटिया रहे जिसके कारण लोग आज भी उन्हें कुतरूं नाम से पुकारते जबकि कुछ ऐसे प्राचार्य भी रहे जिनका नाम लेने से खुशी महसूस होती है जो दूसरों का हित करने में अग्रणी रहे हैं। यहां तक की उन्होंने अपने स्कूल के शिक्षकों को अपना परिवार का सदस्य समझा और उनके हर सुख दुख में सेवा, मदद की,जो कुछ बन पाया कर पाया लेकिन कुतरूं प्राचार्यों ने अपने तहत आने वाले अधिकांश शिक्षकों को हेय दृष्टि से देखना शुरू कर दिया था। अधिकांश को हेय दृष्टि से देखा,यहां तक कि ऐसे-ऐसे कार्य किये जिनको सुनकर भी दर्द होता है। वोयहां पर वर्णित नहीं किया जा रहे हैं चूंकि ऐसे करनामें प्रकाशित होने पर समाज में एक बुरा संदेश जाएगा। पहले ही शिक्षकों के प्रति समाज सकारात्मक रुख कम रखता है और नकारात्मक रुख अधिक रखता है। अगर ऐसे करनामे प्रकाशित किए गए तो निश्चित रूप से समाज में शिक्षकों के प्रति घृणा बढ़ती चली जाएगी। ऐसे कारनामे करते वक्त ये कुतरूं प्राचार्य दूसरे का अहित करने में कसर नहीं छोड़ते। यही कारण है कि आज भी उनके परिवार खुश नहीं हैं। परिवार में कलह, बीमारी व्याप्त है, खुद भी दुखी है, मानसिक रूप से परेशान है क्योंकि उनके कारनामे आड़े आ रहे हैं। साधु संत मानते हैं कि हम किसी का हित करेंगे, पुण्य के काम करेंगे तो घर परिवार भी सुखी रहेगा। अगर किसी का अहित एवं पाप करेंगे तो निश्चित रूप से परिवार दुखी रहेगा, स्वयं भी दुखी रहना पड़ेगा। वो भूल जाते हैं कि चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात। चार दिनों तक प्राचार्य बने हैं तो शुभ काम करे वरना जाना पड़ेगा शमशानघाट में, राख बनेगी और वो भी एक मु_ी राख बनेगी। जब वे धरती से जाएंगे तो लोग खुश मिलेंगे। उनके बुरे कर्म, कारनामें एवं पाप कर्म कुतरूं प्राचार्य साथ ले जाएगा। जिसके कारण उन्हें आने वाली पीढ़ी कभी माफ नहीं करेगी, गालियां देती रहेगी।
कुतरूं प्राचार्यों के ऐसे करनामे देखें जो वास्तव में सिद्ध करते हैं कि ये कुतरूं किसी को चाहते नहीं, अपने साथ काम करने वाले शिक्षकों को हेय दृष्टि से देखते हैं। बहुत से पढ़ाने वाले शिक्षक तो कुतरूं से अधिक पढ़े लिखे होते है। यह वक्त की बात है कि एक तरफ वो कुतरूं प्राचार्य बन गए और शिक्षक प्रमोशन किसी कारणवश नहीं ले पाए या उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाए, किसी ने उनकी टांग खिंचाई कर दी। एक कुतरूं प्राचार्य की तो बड़ा अजीब देखा। लगातार स्कूल में आता रहा लेकिन एक शिक्षक जो उनकी आंख का कांटा था जो उसको नहीं सुहाता था क्योंकि वह शिक्षक पढ़ाने में मेहनती एवं बेहद ईमानदार और हर कार्य में कुशल होने के कारण कुतरूं के पेट में दर्द होना स्वाभाविक था। परिणाम यह निकला कि जिस दिन वो शिक्षक सेवानिवृत्त होने जा रहा था तरे उस दिन कुतरूं प्राचार्य छुट्टी लेकर भाग गया। अपने चमचों से कह गया कि इसको बिना किसी सम्मान के स्कूल से छुट्टी होने पर निकाल देना। कुतरूं दिन आया ही नहीं ताकि कार्यक्रम ही ना हो। परंतु परिणाम यह निकला की सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक का बेहद सम्मान शिक्षकों द्वारा किया गया और कुतरूं की इतनी थू-थू की गई कि हर शिक्षक एवं गांव के लोगों की जुबान पर बात छलकी कि यह तो सचमुच कुतरूं है।
एक और कारनामें में एक शिक्षक जो उनके तहत सेवानिवृत्त हो रहा था वह भी आंख का कांटा था। अपने काम से कम रखता था। परिणाम यह निकला कि जब वह सेवानिवृत्त हुआ तो उसे स्कूल के अंदर पगड़ी तक नहीं पहनाई गई, उसे गेट के बाहर ही पगड़ी पहनाई और अपने चमचों से मिलकर योजना बनाई जिसका परिणाम चमचे भी भुगतेंगे। परिणाम यह निकला की शिक्षकों की नजर से वह कुतरूं प्राचार्य बन गया। आज भी कुतरूं है। कुछ कुतरूं सेवानिवृत्त हो गए तो कुछ कुतरूं आज भी कार्यरत हैं। एक ऐसा कुतरूं आज भी कार्यरत है जो भविष्य में सेवानिवृत्त होगा क्योंकि सेवानिवृत्त हर कर्मी को होना होता है और जब वह सेवानिवृत्त होगा तो गांव वालों ने पहले ही योजना बना रखी है, शिक्षकों ने भी विशेष योजना बनानी शुरू कर दी है कि जैसा इसने शिक्षकों के साथ बिताया है वैसा ही बुरा हाल इसके साथ किया जाएगा ताकि इसे अपनी गलती का एहसास हो लेकिन गलती एहसास भी हुआ तो देरी से होगा, उसका कोई लाभ नहीं। वैसे तो जैसे को तैसा तो होना ही चाहिए। ऐसे मौके पर एक मेरे निकृष्ट/नीच दोस्त/आज वो दुश्मन है, की याद आती है। वह कहता था कि मैंने कई कुतरूं प्राचार्यों को जूतों की माला पहनाकर सेवानिवृत्त किया है। उसकी बात बड़ी याद आती है। कहते हैं ऐसे कुतरूं प्राचार्य का इलाज भी ऐसा ही कुतरूं कर पाएगा परंतु यह निश्चित है कि यह कुतरूं जिसने शिक्षकों के साथ बुरा व्यवहार किया है वह कुतरूं बनकर ही रहेगा और जीवन भरा दर्द में जीएगा।
नोट::: यह मेरा ब्लाग कापीराइट के तहत आता है। अगर किसी ने कोई भाग चोरी से उठा लिया या कापी कर ली तो उसके विरुद्ध न्यायालय में अभियोग चलेगा जिसका परिणाम वह स्वयं भोगेगा। यहां उल्लेखनीय है कि आने वाली मेरी पुस्तक में इन कुतरूं प्राचार्यों के सभी के नाम वर्णित होंगे। इसलिए थोड़ा इंतजार करें जब तक की यह सीरीज पूर्ण हो जाए, तब तक वह कृति आप लोगों के हाथों में नहीं आएगी तब तक अंदाज लगाते रहो। उस किताब में सभी कुतरूं प्राचार्यों का नाम सहित और दिनांक सहित वर्णन किया जाएगा।
जनगणना प्रशिक्षण का दूसरा दिन
जनगणना प्रशिक्षण शिविर में दी गई जिम्मेदारी व सटीकता पर जोर
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कनीना की आवाज। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में जनगणना कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन अधिकारियों ने प्रगणकों व सुपरवाइजर्स को जनगणना कार्य की बारीकियों से अवगत कराया और इसे पूरी जिम्मेदारी के साथ संपन्न करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए डा. हरिओम भारद्वाज एवं संदीप कुमार ने बताया कि जनगणना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को विस्तारपूर्वक समझाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया है ताकि वे फील्ड में आने वाली परिस्थितियों का सही ढंग से सामना कर सकें।
इस अवसर पर जनगणना चार्ज अधिकारी एवं नगर पालिका सचिव कपिल कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है, जिसे निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने संभावित चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रगणकों को धैर्य, सतर्कता और ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा, ताकि आंकड़ों की सटीकता बनी रहे।
विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि लगन और मेहनत से किया गया कार्य न केवल सही व सटीक जानकारी एकत्र करने में सहायक होता है, बल्कि इससे प्राप्त परिणाम भी विश्वसनीय होते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इस प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाएं और जनगणना कार्य को पूरी निष्ठा के साथ संपन्न करें।
कार्यक्रम के दौरान सुपरवाइजर ममता कुमारी, कुलदीप यादव, सुरेंद्र कुमार सहित सभी अड़तीस प्रतिभागी भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए जनगणना से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं और तकनीकी पहलुओं को समझा।
तीन दिवसीय यह प्रशिक्षण शिविर न केवल प्रगणकों के लिए ज्ञानवर्धक साबित हो रहा है, बल्कि उन्हें जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए तैयार भी कर रहा है।
फोटो कैप्शन 07 व 08: जनगणना के लिए प्रशिक्षण देते हुए कनीना मंडी
बीआर स्कूल सेहलंग में विश्व स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
-डा. शेखर गोयल ने स्वस्थ रहने के दिए टिप्स
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कनीना की आवाज। बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेहलंग में विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्र के चिकित्सक डा. शेखर गोयल उपस्थित रहे, जिन्होंने विद्यार्थियों को स्वस्थ रहने के महत्वपूर्ण टिप्स प्रदान किए।
डा. शेखर गोयल ने कहा कि आज के समय में स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन दोनों ही आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग एवं समय पर सोने-जागने की आदत अपनाने की सलाह दी। साथ ही मोबाइल और जंक फूड से दूरी बनाए रखने पर भी विशेष बल दिया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की ।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न गतिविधियों, जैसे पोस्टर मेकिंग, योग प्रदर्शन एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विद्यालय के चेयरमैन हरिश भारद्वाज ने अपने संबोधन में कहा कि स्वस्थ विद्यार्थी ही एक सफल राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से खेल-कूद एवं योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज ने भी विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का संदेश देते हुए कहा कि विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
फोटो कैप्शन 09 व 10: डा. गोयल बच्चों को चैक करते हुए तथा संबोधित करते हुए
यशदेव आचार्य ने कैमला में संस्कार एवं संस्कृति पर दिया व्याख्यान
-बड़ों का आदर करने की दी सलाह
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कनीना की आवाज। राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में यशदेव आचार्य कुंड आश्रम से विद्यालय में विद्यार्थियों को अनुशासन, मौलिक शिक्षा , संस्कार और संस्कृति के ओत-प्रोत प्रेरित करने के लिए विद्यालय में पहुंचे।
आचार्य ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए बताया कि हमें नियमित रूप से पौष्टिक भोजन, अनुशासन, शिक्षा के महत्व को विद्यार्थी जीवन में समझना चाहिए अपने से बड़ों का सम्मान करना और हमें अपने गुरुजनों के सान्निध्य में रहकर नवीनतम, नूतन तकनीकी आधारित सृजनात्मक ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने वेदांत पर आधारित आध्यात्मिक विचारों से सभी विद्यार्थियों को जागरूक किया और गायत्री मंत्र के महत्व बताया। योगासन से जीवन निरोग और संयमित बनता है इसलिए हमें निरंतर अभ्यास करना चाहिए जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं। तन अच्छा है तो मन स्वच्छ है और विचार भी उज्ज्वल होते हैं। हमें निरंतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को ग्रहण करनी चाहिए।
मौलिक मुख्य अध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने आचार्य के अमूल्य विचारों को जीवन में धारण करने के प्रति आश्वस्त किया और बताया कि हमारे विद्यार्थी निरंतर विचारों का पालन करेंगे और अपने जीवन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे नया सीखने की दिशा में अग्रसर रहेंगे।
इस अवसर पर श्रवण कुमार पूर्व थानेदार ,मनवीर सिंह, सुनील कुमार शास्त्री ,सुनील कुमार, देवेंद्र, भगत सिंह, सूबे पूर्व प्रधान सिंह ,तारामणि देवी, पिंकी देवी आदि उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 04 व 05: आचार्य को स्मृति चिह्न भेंट करते हुए
राजकीय माडल संस्कृति स्कूल में यातायात नियमों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित -एसएचओ ट्रैफिक ने दी छात्रों को जानकारी
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कनीना की आवाज। सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से राजकीय माडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कनीना में विद्यार्थी पुलिस कैडेट के लिए यातायात जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ट्रैफिक एसएचओ, निरीक्षक नरेश कुमार ने बच्चों को यातायात नियमों का पालन करने के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने छात्रों को बताया कि सड़क पर हमारी छोटी सी सावधानी भी हमारी और दूसरों की जान बचा सकती है।
निरीक्षक नरेश कुमार ने छात्रों को सुरक्षित ड्राइविंग के मूल मंत्र देते हुए कहा कि चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट और दोपहिया वाहन पर हेलमेट का प्रयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। हमेशा निर्धारित गति सीमा के भीतर ही वाहन चलाना चाहिए। इसके साथ ही, सुरक्षित तरीके से लेन बदलने, दाएं या बाएं मुड़ते समय इंडिकेटर का सही उपयोग करने और अन्य वाहनों को सावधानीपूर्वक ओवरटेक करने के नियमों के बारे में भी जानकारी देकर जागरूक किया गया।
सुरक्षित ड्राइविंग की बारीकियों को समझाते हुए उन्होंने बताया कि गोल चक्कर, ट्रैफिक सिग्नल और मोड़ पर कभी भी ओवरटेक करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। घनी आबादी वाले क्षेत्रों और बाजारों में हमेशा वाहन की गति धीमी रखनी चाहिए। रात के समय सुरक्षित ड्राइविंग के नियमों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने लो बीम और हाई बीम लाइट के सही इस्तेमाल तथा ओवरटेक करते समय डिपर के उपयोग की अहमियत को भी छात्रों के साथ साझा किया।
सत्र के दौरान निरीक्षक ने नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के खतरों पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी परिस्थिति में वाहन का उपयोग नहीं करना चाहिए। 18 वर्ष की आयु पूरी होने और वैध ड्राइविंग लाइसेंस बनने के बाद ही वाहन चलाना कानूनी और सुरक्षित है। इस जागरूकता अभियान का उद्देश्य बच्चों को एक जिम्मेदार नागरिक बनने और सड़क सुरक्षा के प्रति उनके कर्तव्य का अहसास कराना था।
फोटो कैप्शन 06: निरीक्षक यातायात के नियमों की जानकारी देते हुए
सतनाली स्वास्थ्य केंद्र के अधूरे काम को पूरा करने को 538.12 लाख की राशि स्वीकृत
-स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बनेंगे आवास
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कनीना की आवाज। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महेंद्रगढ़ जिले की सतनाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के शेष निर्माण कार्यों को गति देने के लिए 538.12 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि की स्वीकृति दी है।
यह जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि इस निर्णय से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के आधारभूत ढांचे में सुधार होगा और लंबे समय से रुके हुए विकास कार्यों को गति मिलेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस राशि का उपयोग चिकित्सालय के मुख्य भवन के बचे हुए कार्यों तथा वहां तैनात चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों के लिए आवासीय भवनों का निर्माण भी सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जब स्वास्थ्य कर्मियों के रहने की व्यवस्था परिसर में ही होगी, तो चिकित्सालय में कर्मचारियों की उपस्थिति बेहतर होगी और रोगियों को निरंतर रूप से उपचार मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्र की जनता को उनके निवास के समीप ही श्रेष्ठ चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना है, ताकि उन्हें उपचार के लिए दूर-दराज के बड़े नगरों की ओर न जाना पड़े। इससे स्थानीय निवासियों के समय और धन दोनों की बचत होगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार का संकल्प प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है।
उन्होंने बताया कि सतनाली का यह केंद्र आधुनिक स्वरूप में आने के बाद न केवल सतनाली, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों के लिए एक जीवनरक्षक केंद्र सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि स्वीकृत बजट के साथ निर्माण कार्य को शीघ्र अति शीघ्र पूरा किया जाए ताकि जनसाधारण को इस सुविधा का लाभ तुरंत मिल सके।
9 अप्रैल को राजकीय आईटीआई में लगेगा बड़ा मेला
-यूएनओ मिंडा कंपनी देगी आन-रोल नौकरियां
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कनीना की आवाज। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दिशा निर्देश अनुसार युवाओं को स्वावलंबी बनाने और उन्हें उनके कौशल के अनुरूप रोजगार दिलाने के उद्देश्य से राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नारनौल में आगामी 9 अप्रैल को एक विशाल रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है।
संस्थान के प्रधानाचार्य विनोद खंगवाल ने बताया कि इस मेले में प्रसिद्ध कंपनी यूएनओ मिंडा, मानेसर शिरकत कर रही है। यह कंपनी विभिन्न तकनीकी ट्रेडों के पासआउट युवाओं का चयन कर उन्हें सीधे अपनी कंपनी में नौकरी का अवसर प्रदान करेगी।
प्रधानाचार्य ने बताया कि इस चयन प्रक्रिया में इलेक्ट्रिशियन, फिटर, इलेक्ट्रानिक मैकेनिक, टीपीएस, प्लास्टिक प्रोसेसिंग ऑपरेटर, वायरमैन, वेल्डर और मशिनिस्ट जैसे ट्रेडों में प्रशिक्षित युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह सकल वेतन पर ऑन-रोल जाब दी जाएगी। इसके लिए आयु सीमा 18 से 24 वर्ष तय की गई है। वेतन के अलावा कंपनी द्वारा चयनित युवाओं को कई विशेष लाभ भी दिए जाएंगे, जिनमें एक हजार रुपये का उपस्थिति पुरस्कार, वर्ष में 14 अर्जित अवकाश और 7 आकस्मिक अवकाश शामिल हैं। साथ ही, कर्मियों को वार्षिक बोनस, पीएफ, ईएसआई, चिकित्सा सहायता, वर्दी और कैंटीन जैसी सुविधाएं भी संस्थान के नियमों के अनुसार दी जाएंगी।
प्लेसमेंट अधिकारी सुनील यादव ने इस अवसर का लाभ उठाने के लिए जिले के सभी आईटीआई पासआउट छात्र-छात्राओं को आमंत्रित किया है। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए हैं कि जो भी युवा इस मेले में शामिल होना चाहते हैं वे 9 अप्रैल को संस्थान के परिसर में औपचारिक वेशभूषा (फॉर्मल ड्रेस) में पहुंचें। उम्मीदवार अपने साथ सभी आवश्यक मूल शैक्षणिक दस्तावेज और उनकी छायाप्रतियां अवश्य लाएं ताकि चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। जिले के युवाओं के लिए एक ही स्थान पर प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी पाने का यह एक बेहतरीन मौका है।
फोटो कैप्शन: प्राचार्य विनोद खंगवाल
प्रिया ने पाया खंड कनीना में प्रथम स्थान, रितिका ने दूसरा
-विगत वर्षों से स्कूल का रहा है बेहतर एनएमएमएस परिणाम
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कनीना की आवाज। गत वर्ष 30 नवंबर को राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण एवं परिषद गुरुग्राम द्वारा आयोजित एनएमएमएस परीक्षा के घोषित परिणामों के अनुसार राजकीय माध्यमिक विद्यालय खरकड़ाबास की छात्रा प्रिया ने खंड कनीना में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, वहीं रितिका दूसरे स्थान पर रही है। विद्यालय परिवार की तरफ से दोनों छात्राओं को सम्मानित किया गया।
विद्यालय मुखिया रीता रानी ने बताया कि यह परीक्षा हरियाणा सरकार द्वारा प्रतिवर्ष सरकारी स्कूल में पढऩे वाले मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रदान की जाती है। इसमें सफलता प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को नौवीं से बारहवीं तक प्रति महीना 1000 रुपए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, जो कुल मिलाकर 48000 बनती है। इस परीक्षा में गत पांच वर्षों से विद्यालय का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने वर्तमान में कक्षा आठवीं में पढ़ रहे छात्र- छात्राओं से इस परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए प्रेरित किया एवं इस वर्ष सफलता प्राप्त करने वाली दोनों छात्राओं प्रिया व रितिका को समस्त विद्यालय परिवार की तरफ से बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर राजेंद्र सिंह , एसएमसी प्रधान विक्रम सिंह, कला अध्यापक अजीत सिंह बोहरा, विज्ञान अध्यापक सुभाष चंद, संस्कृत अध्यापक भूपेंद्र सिंह, अनुराधा, अमरनाथ पीटीआई, राजेश माहोर, योगेंद्र शर्मा, कृष्ण कुमार, अमित , राम रतन व अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: अव्वल रही एनएमएमएस छात्राओं को पुरस्कृत करते हुए
दिन भर चलती रही बूंदाबांदी, एक एमएम वर्षा हुई
- किसानों के चेहरों पर दिखी चिंता की रेखा
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कनीना की आवाज। कनीना एवं आस पास आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। रुक रुककर चली बूंदाबांदी में महज एक एमएम वर्षा रिकार्ड की गई।
मौसम के इस बदलाव से किसानों की चिंता बढ़ गई है। दिनभर मौसम आंशिक रूप से बादलों से ढका रहा और हवा सामान्य गति से चलती रही, जिससे वातावरण में नमी बनी रही।
बार बार मौसम के बदलने से किसान बेहद परेशान हैं। किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार, सुनील कुमार आदि ने बताया कि जब भी फसल पैदावार के लिए लावणी की गई फसल को सुखाने का प्रयास करते हैं तो फिर से बूंदाबांदी हो जाती है। त्वरित गति से बहुत से किसानों ने अपनी फसल पैदावार ले ली है। कुड अनाज मंडियों तक पहुंचा रहे हैं। कुछ किसानों ने खेतों में गेहूं निकलवाने के लिए मशीन लगा दी किंतु बूंदाबांदी ने समस्या पैदा कर दी। गेहूं निकलवाने आए किसान रवींद्र ने बताया कि उन्होंने करीब 2 एकड़ में गेहूं उगाए थे। गेहूं निकलवाने के लिए मशीन भी ले आए थे परंतु सुबह से वर्षा के कारण गेहूं पैदावार नहीं ले सके। एक बार फिर से गेहूं एवं सरसों की लावणी की हुई फसल भीग गई है। अब फिर से एक दो दिन इंतजार करना होगा तथा लावणी की गई फसल को सुखाना होगा।
काली पड़ गई है लावणी की फ
सल-
किसानों ने बताया कि बार बार वर्षा के कारण सरसों की लावणी की गई फसल नीचे से काली पड़ गई है जिसमें नुकसान होने लग गया है। फंगस लगनी शुरू हो गई है। हालांकि किसानों ने इस बार गेहूं एवं सरसों की लावणी की गई फसल के नीचे जालीदार पोलीथिन लगा रखी है। विगत वर्षों बिलना जाली वाला पोलीथिन लगा देने से काटकर डाली फसल नीचे से सड़ गई थी। इस बार किसानों ने सावधानी बरती है लेकिन मौसम की मार पीछा नहीं छोड़ रही है।
फिर से भीगी गेहूं एवं सरसों की लावणी-
एक बार फिर से किसानों की गेहूं एवं सरसों की लावणी की गई फसल भीग गई है। किसान अब तो लावणी की गई फसल को भी ढकने का प्रयास करते देखे गये लेकिन आंशिक सफलता मिल पाई है। अब उन्हें इंतजार करना होगा ताकि फसल सूख जाए और पैदावार ली जा सके।
फोटो कैप्शन 02: किसान लावणी की गई फसल को वर्षा से ढकते हुए
03: भीग रही लावणी की गई सरसों


















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