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Sunday, April 25, 2021

 
सोमवार को होगी गेहूं की खरीद
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कनीना। कनीना अनाज मंडी में शनिवार और रविवार को अनाज मंडी में अवकाश रहने पर गेहूं की खरीद नहीं हुई। सोमवार से फिर से गेहूं की खरीद होगी। विस्तृत जानकारी देते हुए हैफेड मैनेजर सतेंद्र यादव ने बताया कि सरसों की आवक नहीं हो रही है, महज गेहूं की आवक जारी है। सोमवार को गेहूं की खरीद सरकारी दर पर होगी।


कोरोना के 32 संक्रमित मिले
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कनीना। कनीना क्षेत्र में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढऩे लगी है। उन्हें घर पर ही आइसोलेट कर दिया है।मिली जानकारी अनुसार कनीना में 10, सुंदरा 3, करीरा-4, रसूलपुर 2, वभडफ़-2, गुढ़ा- 6 ,रामबास एक, ढाणा एक मुंडियाखेड़ा-दो, बेवल में एक कोरोना संक्रमित पाया गया है।


ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना की मार पड़ी है कम
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 कनीना। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में भी कोरोना की मार नाम मात्र है। जहां शहरों में अस्पतालों में भी भागदौड़ मची हुई है, जगह का अभाव है किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत कम कोरोना मरीज मिले हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना कम फैलने के पीछे कई कारण माने जाते हैं जिनमें गांव के लोग इधर उधर कम जाते हैं, वही गाय का दूध तथा लस्सी पीना माना जाता है। विभिन्न ग्रामीण लोगों से बात की गई।
श्रीकिशन शर्मा करीरा ने बताया कि वे गाय का दूध पीते हैं तथा चूल्हे पर खाना बनाते हैं। यदा-कदा गैस सिलेंडर से भी खाना बना लेते हैं लेकिन उनका शुद्ध खाना होता है। इसलिए गांवों में कोरोना कम ही फैला है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र शुद्ध शाक सब्जी भी खाते हैं तथा इधर उधर कम घूमते हैं इसलिए रोग फैलने का खतरा कम है।
 निर्मल कुमार नंगल हरनाथ का कहना है कि वे पहले भी गाय का दूध पीना पसंद करते हैं।लकड़ी जलाकर खाना बनाते हैं, खाने में भी आनंद होता है और रोग भी कम फैलता है। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों में कोरोना की मार अभी भी कम है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग प्रसन्न है तथा अपने घरों में देसी खाना खा रहे हैं।
 सुरेश कुमार पेंटर का कहना है कि वे लंबे समय से गाय पालते आ रहे हैं ।गाय का ही दूध प्रयोग करते हैं तथा बच्चों को भी गाय का दूध पिलाते हैं। उनका कहना है कि वे चूल्हे की रोटी, छाछ, मक्खन, दही आदि जमकर प्रयोग करते हैं इसलिए उनमें कोरोना की मार कम पड़ी है।
 सुनील यादव का कहना है कि वे लंबे समय से गाय पालते हैं। गाय का ही दूध ज्यादा पसंद करते हैं। उनके परिजन भी गाय का दूध प्रयोग करते आ रहे हैं। गाय की लस्सी, दूध, दही ,मक्खन सभी प्रयोग करते हैं। इसलिए उनके गांव में कोरोना की मार कम ही पड़ी है। उनका कहना है कि ग्रामीण इधर उधर भी क जाते हैं जिसे भी कोरोना कम फैलने की संभावना बनी है। उनका मानना है कि देसी फल, सब्जियां, गाय का दूध आदि रोगों से बचाने में मददगार है।
फोटो कैप्शन- सुनील यादव, सुरेश कुमार, निर्मल कुमार, श्रीकिशन शर्मा।





कोरोना से डरना नहीं सावधानी है रखनी- वैद्य
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कनीना। कोरोना महामारी  को लेकर  घबराना नहीं है बल्कि सावधानी बरतनी है। ये विचार वैद्य कर्मवीर सिंह ने गांव धनौंदा स्थित कृष्णानंद आश्रम में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को हराना है उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्मित कोरोना वैक्सीन को लेना चाहिए और सरकार द्वारा बनाई हुई गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि लोंग,काली मिर्च, गिलोय, अदरक ,दालचीनी आदि का काढ़ा बनाकर दिन में तीन बार लेना चाहिए जिससे शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होगी। मास्क का प्रयोग अवश्य ही करना चाहिए। बार बार साबुन से हाथ धोने के अलावा गरम पानी में सेंधा नमक व हल्दी डालकर उसके गरारे करने चाहिए। ठंडी बासी चीजों से बचना चाहिए और अगर घर से बाहर किसी जरूरी काम से जाते हैं तो आकर नीम के गर्म पानी से नहाना चाहिए जिससे हमारी सुरक्षा कवच तैयार हो जाता है। पूजा-पाठ ध्यान स्वाध्याय करते हुए यज्ञ हवन करना चाहिए। कपूर, गूगल की धूनी घर में अवश्य ही लगानी चाहिए ताकि घर में वायरस का खात्मा हो सके और जीवन के लिए शुद्ध हवा मिल सके। उन्होंने कहा कि इस महामारी के काल में  सरकार को प्रशासन का खुलकर सहयोग करना चाहिए।
फोटो कैप्शन 14: काढ़ा पीते हुए लोग।



अपने आस पास पानी खड़ा न होने दे
2019 से कनीना में मलेरिया का कोई केस नहीं  
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कनीना। उप नागरिक अस्पताल कनीना, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भोजावास, प्राथमिक स्वास्थ केंद्र मुंडिया खेड़ा के सभी उप उप स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया दिवस का आयोजन किया गया। कनीना में डा अंकित यादव की अध्यक्षता में यह दिवस मनाया गया। लोगों को मच्छरों से होने वाले विभिन्न रोगों  की जानकारी दी गई।
 कनीना में सलाम एरिया में शीशराम एचआई तथा सुनील कुमार एमपीडब्ल्यू ने लोगों को मलेरिया से जागरूक कराया। उन्होंने बताया कि कहीं पर भी पानी ठहरता हो वहां मिट्टी का तेल डालना चाहिए, सोते समय मच्छरदानी प्रयोग करें, सुबह शाम पूरी बाजू के कपड़े पहने, बुखार हो तो स्वास्थ केंद्र में रक्त पट्टिका बनवाए तथा बुखार के समय एसप्रीन या डिस्प्रिन की गोली न ले, पशु पक्षियों के पानी के बर्तन, एसी ट्रे सप्ताह में एक बार साफ कर सुखायें, पानी को ढक कर रखें ताकि मच्छरों को पनपने से रोका जा सके।
मलेरिया का कोई केस नहीं--
कनीना उप नागरिक अस्पताल में 2019 से अब तक मलेरिया का कोई कस नहीं आया है। वर्ष 2015 से 2018 तक मलेरियां के केस आते रहे हैं। 2019 में कोई केस न आना जागरूकता का परिणाम है।
 मलेरिया इंस्पेक्टर शीशराम ने बताया कि वर्ष 2015 में 6 केस मलेरिया के थे जो 2016 में घटकर तीन रह गए, 2017 में फिर से 2 केस रह गए 2018 में 3 केस मलेरिया के आए। 2019 में कोई मलेरिया का केस नहीं आया जिसके पीछे लोगों की जागरूकता बताई जा रही है।
क्या कहते हैं डा अंकित-
डा अंकित ने बताया कि एमपीएचडब्ल्यू सुनील कुमार गली-गली जाकर के मलेरिया से बचने का प्रचार करते आए हैं जिसके चलते मलेरिया का केस कोई नहीं आया है।  मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से मलेरिया होता है। मलेरिया प्लाजमोडियम परजीवी से फैलता है जिसे मादा एनाफिलीज खून पीते वक्त शरीर में छोड़  जाती है। लाज्मोडियम फेल्सीपैरम और प्लाज्मोडियम वाइवक्स दो परजीवी सबसे अधिक रोग फैलाते हैं। काटने के 10 से 15 दिनों में बार बार बुखार सिरदर्द आदि आता है। यदि जल्द उपचार नहीं किया जाए तो यह बहुत घातक भी साबित बन सकता है।
 मादा एनाफिलीज मच्छर की करीब  400 विभिन्न स्पीशीज पाई जाती है इनमें से 30 प्रमुख हैं। मादा एनाफिलीज मच्छर अपने अंडे पानी पर देती हैं। अंडों को भोजन देने के लिए खून की जरूरत होती है इसलिए मादा एनाफिलीज मच्छर खून पीती है। इस मौके पर चिकनगुनिया तथा डेंगू की जानकारी भी दी गई।




सहायता के लिए गठित की राज्य स्तरीय 20 सदस्यीय समिति
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कनीना। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षा एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री कुमारी शैलजा जी ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर से पीडि़त व प्रभावित लोगों की सहायता करने के लिए एक राज्य स्तरीय 20 सदस्यीय समिति का गठन करके कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इस समिति द्वारा लोगों की आवश्यकतानुसार सहायता प्रदान की जायेगी। इसके साथ-साथ उन्होंने सभी जिलों में भी नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं ताकि राज्य व जिला स्तर पर आपसी तालमेल से जरूरतमंद और गरीब लोगों को त्वरित और उचित सहायता प्रदान की जा सके। महेंद्रगढ़ जिला कोविड हैल्प टीम में सुनीता का नाम भी शामिल करने पर पार्टी हाईकमान कुमारी शैलजा  का आभार जताया है।


पशुचारे की व्यवस्था मेें लगे लोग
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कनीना। इस समय किसान अपनी गेहूं की फसल निकालने के बाद अपने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था में लगे हुए हैं। किसान गेहूं की तूड़ी प्रमुख रूप से काम में लेते हैं जिसे  पशुओं के लिए अपने घर में जमा कर लेते हैं। जो पूरे 12 महीने पशुओं के चारे के काम आती है।
 इस समय  तूडी की ढुलाई जोरों पर है। खेड़ी तलवाना के किसान रोशन सिंह व उनकी पत्नी राधा ने बताया कि तूड़ी को अपने घर में जमा कर लेते हैं जो पूरे साल पशुओं के चारे के काम आती है ।इस समय थोड़ी मेहनत करनी होती है ताकि पशुओं को समय पर चारा उपलब्ध हो सके। खेती के काम करने वाले किसान भोला एवं संजय ने बताया की यह सारा पशुओं के लिए उत्तम होता है तथा पशु जी भर कर इस चारे को खाते हैं। इससे पशुओं का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है।
   उधर कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला के भक्त घरों से चंदा इकट्ठा कर तूड़ी का प्रबंध करने में लगे हुये हैं। कनीना की गौशाला में करीब 1500 गायें हैं।
फोटो कैप्शन 16: तूड़ी का प्रबंध करते किसान।


बाबा कर्ण सिंह की पुण्यतिथि मनाई
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कनीना। कनीना उपमंडल के गांव धनौन्दा में समाज सुधारक बाबा कर्ण सिंह की 26 वीं पुण्यतिथि मनाई गई। ग्रामीणों ने मुख्य अतिथि कैलाश सेठ के साथ बाबा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ठाकुर अतरलाल एडवोकेट ने की। समारोह में कैलाश सेठ ने बाबा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि बाबा महान समाज सुधारक थे। उन्होंने आजीवन समाज में फैल रही कुरीतियों दहेज प्रथा, बाल विवाह, छुआछूत तथा नशा के खिलाफ संघर्ष किया तथा समाज के लोगों को प्रेम, भाईचारा तथा देशभक्ति की भावना से मिलजुल कर समाज को आगे बढ़ाने की सीख दी। समारोह में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर बाबा के जीवन चरित्र पर शोध करने के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय, पाली में सत्यवादी बाबा कर्ण सिंह शोध पीठ स्थापित करने की मांग की गई। इस अवसर पर  संदीप, मदनपाल, राजवीर, पवन, हुकम सिंह, कपिल, अमित, सुनील, अजय, नरेंद्र सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 17: धनौंदा में बाबा कर्ण सिंह की पुण्यतिथि मनाते हुए।




कोरोना को लेकर प्रदेश में स्थिति अभी तक पूरी तरह नियंत्रण में -ओम प्रकाश यादव
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कनीना।प्रदेश में कोरोना को लेकर स्थिति पूरी तरफ से नियंत्रण में है कहीं भी किसी भी अस्पताल में आक्सीजन की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। उपरोक्त बातें प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ओमप्राकश यादव ने शनिवार को कनीना स्थित नवदीप मोटर्स वर्कशाप पर कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए हम सभी का सहयोग भी बहुत अधिक आवश्यक है। सभी लोगों को कोविड-19 की गाइडलाइनों का पालन करते हुए आवश्यकता पडऩे पर ही अपने घरों से बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की सूझबूझ से अभी तक प्रदेश में कोरोना की स्थिति नियंत्रण में है। इस दौरान उन्होंने लोगों की समस्याएं भी सूनी व उपस्थित लोगों को मास्क लगाने व सोशल डिस्टेंस के नियमों का पालन करने के लिए अपील की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए प्रदेश में जहां भी जरूरत होगी वहां पर सरकार अस्पतालों में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था के साथ-साथ आक्सीजन की कोई कमी नहीं रहने देगी। इस अवसर पर कनीना नगरपालिका के पूर्व प्रधान मास्टर दलीप सिंह, मुकेश नंबरदार, सतीश, मनोज कुमार सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 13: नवदीप मोटर्स वर्कशाप पर लोगों की समस्याएं सुनते मंत्री ओम प्रकाश यादव।






शाम छह बजे बाद छा जाता है सन्नाटा, सभी दुकानें हो जाती हैं बंद
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कनीना। कोरोना के दृष्टिगत जहां सरकार ने दुकानें शाम छह बजे बंद करने के आदेश जारी कर रखे जिसके चलते शाम छह बजते ही बस स्टैंड, अनाज मंडी, मुख्य बाजार आदि सब जगह सन्नाटा पसर जाता है। महज आवश्यक सेवाओं की दुकानें, मेडिकल स्टोर आदि की खुले रहते हैं।
नगर पालिका प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि सरकारी आदेश का सख्ती से पालन हो रहा है तथा कनीना में भी सभी दुकानें शाम छह बजे बंद हो जाती है। उल्लेखनीय है कि अभी तक दिनभर दुकानें खुली रहती है। किंतु विगत वर्ष दुकानदारों ने बहुत कष्ट झेले थे।










कोरोना को लेकर काफी बदलाव देखने को मिला
-अब लोग कम भयभीत
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 कनीना। यद्यपि विगत वर्ष कोरोना तथा लाकडाउन चला। इस वर्ष कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। यह लहर विगत वर्ष की तुलना में अधिक घातक बताई जा रही है किंतु लोगों के में कोरोना को लेकर काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। विगत वर्ष जब किसी घर में कोरोना संक्रमित मिलता तो लोग उस परिवार से डर डर कर रहते थे।
 प्रशासन भी अधिक सख्त था किंतु इस वर्ष कोरोना से लोग कम भयभीत हैं। किसी घर में कोरोना मरीज आ जाता है तो लोग अधिक चिंता नहीं कर रहे हैं। विगत वर्ष की तुलना में इस वर्ष कम डर लग रहा है। जहां विगत वर्ष दुकानदार भी नोटों को डरकर हाथ लगा रहे थे किंतु इस बार बेशक कोरोना अधिक घातक है किंतु नोटों को त्वरित गति से छूते हैं। यही नहीं कोरोना को लेकर के दिनचर्या में बदलाव भी आ गया है। जहां
गत वर्ष कोरोना के लेकर लोग अधिक समय घरों में बिताते देखे गए इस वर्ष बहुत कम देखने को मिल रहा है। यह जरूर है कि इस वर्ष कोरोना की वैक्सीन आने से लोगों का रुझान वैक्सीन की ओर देखने को मिला है। जहां विगत वर्ष शादियों का दौर कम था। इस वर्ष अभी शादियों का दौर शुरू हो गया है। जहां कोरोना के लिए अनेक हिदायतें दी गई हैं। विवाह शादी समारोह दिन में चलेंगे तथा 50 व्यक्तियों से अधिक को अनुमति नहीं दी जा रही है। जिसको लेकर के शादी समारोह स्थलों में भीड़भाड़ कम देखने को मिल रही है वहीं कोरोना के लेकर के लोग कुछ सतर्क अधिक हो गये हैं।


Saturday, April 24, 2021

 

कोरोना को लेकर प्रदेश में स्थिति अभी तक पूरी तरह नियंत्रण में -ओम प्रकाश यादव
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कनीना।प्रदेश में कोरोना को लेकर स्थिति पूरी तरफ से नियंत्रण में है कहीं भी किसी भी अस्पताल में आक्सीजन की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। उपरोक्त बातें प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ओमप्राकश यादव ने शनिवार को कनीना स्थित नवदीप मोटर्स वर्कशाप पर कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए हम सभी का सहयोग भी बहुत अधिक आवश्यक है। सभी लोगों को कोविड-19 की गाइडलाइनों का पालन करते हुए आवश्यकता पडऩे पर ही अपने घरों से बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की सूझबूझ से अभी तक प्रदेश में कोरोना की स्थिति नियंत्रण में है। इस दौरान उन्होंने लोगों की समस्याएं भी सूनी व उपस्थित लोगों को मास्क लगाने व सोशल डिस्टेंस के नियमों का पालन करने के लिए अपील की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए प्रदेश में जहां भी जरूरत होगी वहां पर सरकार अस्पतालों में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था के साथ-साथ आक्सीजन की कोई कमी नहीं रहने देगी। इस अवसर पर कनीना नगरपालिका के पूर्व प्रधान मास्टर दलीप सिंह, मुकेश नंबरदार, सतीश, मनोज कुमार सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 13: नवदीप मोटर्स वर्कशाप पर लोगों की समस्याएं सुनते मंत्री ओम प्रकाश यादव।




कनीना की लगाई 360 वैक्सीन
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 कनीना। कनीना क्षेत्र में एक बार फिर से वैक्सीन देने का सिलसिला जोर पकड़ गया है। शनिवार को जहां कनीना, करीरा और गुढ़ा में 360 कोरोना वैक्सीन दी गई।
 विस्तृत जानकारी देते हुए एचआई शीशराम ने बताया कि कनीना में 110, करीरा में 109 तथा गुढ़ा में 141 कोरोना वैक्सीन दी गई लेकिन ये वैक्सीन अभी तक 45 से अधिक उम्र के लोगों को ही दी जा रही हैं। इस मौके पर संदीप, राकेश, संजोग शारदा, पवन, सरिता आदि ने अपनी भूमिका निभाई।


युवा शक्ति संघ के युवा बांट रहे हैं मास्क
-लोगों को कर रहे हैं जागरूक
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कनीना। कोरोना वायरस का संक्रमण दुनिया भर में तेजी से फैल रहा है। पूरी दुनिया में इसे लेकर पैनिक स्थिति देखने को मिल रही है। हर दिन हजारों नए मामले सामने आ रहे हैं। दुनिया भर के कई शहरों और पूरे देश में लाकडाउन जैसी स्थिति देखने को मिल रही है।
कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए कई लोग जागरूकता के लिए भी काम कर रहे हैं। दौंगड़ा अहीर के युवा शक्ति संघ के युवाओं ने बाबा रूपा दास मंदिर से लोगों को मास्क बांटते हुए पूरे गांव में घूम कर लोगों के बीच निशुल्क मास्क का वितरण करते हुए लोगों को कोरोना गाइड लाइन पालन करने की समझाइश दे रहे हैं।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए आदर्श गांव दौंगड़ा अहीर में युवा शक्ति संघ के पूर्व प्रधान राजकुमार यादव द्वारा कोरोना से बचने के उपाय के बारे में बताते हुए कहा कि सभी को सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए,व मास्क लगाए रखना चाहिए क्योंकि इस महामारी से बचने का यही एक उपाय हैं इसको देखते हुए पूरे गांव में गली गली घूमकर मास्क वितरण किये।साथ ही समूह में बैठे ताऊ, बूढ़े, बुजुर्गों,ताश खेलने व हुक्का पीने वालों एवं दुकानदारों को भी इसके बारे में जागरूक किया गया।
इंजीनियर विकास यादव ने बताया कि आज के दिन पूरे देश में हालात बहुत ही खराब है राजधानी दिल्ली के साथ-साथ अब कोरोना हरियाणा में भी पांव पसार लिए हैं प्रतिदिन सम्पूर्ण हरियाणा में लगभग 9000 से भी ज्यादा मरीज आने लगे हैं लेकिन उसके साथ साथ मरीज ठीक होने की दर भी लगभग 85 प्रतिशत के आसपास है।आज के दिन पूरे देश में आक्सीजन की कमी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है तो इन्हीं सब को देखते हुए सभी लोग कोरोना से बचने के नियमों का पालन करते रहे व अपने घरों में सुरक्षित रहे।घर में जो भी वृद्घजन हैं,उनको टीका लगवाएं।
इस मौके पर वेद प्रकाश आर्य,भावी जिला पार्षद राजकुमार यादव, मनोज यादव, इंजीनियर अशोक यादव,विष्णु,सोनू  विकास इंजीनियर एवं कैलाश पालड़ी मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 12: दौंगड़ा में मास्क वितरित करते युवा शक्ति संघ।




शाम छह बजे बाद छा जाता है सन्नाटा, सभी दुकानें हो जाती हैं बंद
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कनीना। कोरोना के दृष्टिगत जहां सरकार ने दुकानें शाम छह बजे बंद करने के आदेश जारी कर रखे जिसके चलते शाम छह बजते ही बस स्टैंड, अनाज मंडी, मुख्य बाजार आदि सब जगह सन्नाटा पसर जाता है। महज आवश्यक सेवाओं की दुकानें, मेडिकल स्टोर आदि की खुले रहते हैं।
नगर पालिका प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि सरकारी आदेश का सख्ती से पालन हो रहा है तथा कनीना में भी सभी दुकानें शाम छह बजे बंद हो जाती है। उल्लेखनीय है कि अभी तक दिनभर दुकानें खुली रहती है। किंतु विगत वर्ष दुकानदारों ने बहुत कष्ट झेले थे।



कोरोना को लेकर काफी बदलाव देखने को मिला
-अब लोग कम भयभीत
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 कनीना। यद्यपि विगत वर्ष कोरोना तथा लाकडाउन चला। इस वर्ष कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। यह लहर विगत वर्ष की तुलना में अधिक घातक बताई जा रही है किंतु लोगों के में कोरोना को लेकर काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। विगत वर्ष जब किसी घर में कोरोना संक्रमित मिलता तो लोग उस परिवार से डर डर कर रहते थे।
 प्रशासन भी अधिक सख्त था किंतु इस वर्ष कोरोना से लोग कम भयभीत हैं। किसी घर में कोरोना मरीज आ जाता है तो लोग अधिक चिंता नहीं कर रहे हैं। विगत वर्ष की तुलना में इस वर्ष कम डर लग रहा है। जहां विगत वर्ष दुकानदार भी नोटों को डरकर हाथ लगा रहे थे किंतु इस बार बेशक कोरोना अधिक घातक है किंतु नोटों को त्वरित गति से छूते हैं। यही नहीं कोरोना को लेकर के दिनचर्या में बदलाव भी आ गया है। जहां
गत वर्ष कोरोना के लेकर लोग अधिक समय घरों में बिताते देखे गए इस वर्ष बहुत कम देखने को मिल रहा है। यह जरूर है कि इस वर्ष कोरोना की वैक्सीन आने से लोगों का रुझान वैक्सीन की ओर देखने को मिला है। जहां विगत वर्ष शादियों का दौर कम था। इस वर्ष अभी शादियों का दौर शुरू हो गया है। जहां कोरोना के लिए अनेक हिदायतें दी गई हैं। विवाह शादी समारोह दिन में चलेंगे तथा 50 व्यक्तियों से अधिक को अनुमति नहीं दी जा रही है। जिसको लेकर के शादी समारोह स्थलों में भीड़भाड़ कम देखने को मिल रही है वहीं कोरोना के लेकर के लोग कुछ सतर्क अधिक हो गये हैं।



ट्रांसफार्मर से रातों रात सामान चोरी
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 कनीना। कनीना उपमंडल के गांव गाहड़ा के 2 किसानों के खेतों में लगे हुए ट्रांसफार्मरों से अज्ञात चोर सामान चोरी कर ले गए। उनकी शिकायत पर कनीना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
 बस्तीराम गाहड़ा निवासी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है कि उनका ट्यूबवेल कोटिया रास्ते पर स्थित है। ट्यूबवेल पर अपना निजी ट्रांसफार्मर लगाया हुआ था। रात को अज्ञात चोर ट्रांसफार्मर  को तोड़कर कीमती सामान चोरी कर ले गए। यही नहीं गाहड़ा गांव के ही किसान धर्मपाल के खेत के ट्यूबवेल पर लगे हुए ट्रांसफार्मर से भी अज्ञात चोर कीमती सामान निकाल ले गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।



बाइक हुई चोरी
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 कनीना। शादी में गये हुये व्यक्ति की मोटरसाइकिल चोरी हो गई। व्यक्ति बेरी का निवासी है। रोहित कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है कि वह बेरी से गुढ़ा गांव में बाइक से शादी समारोह में गया था। जब घर वापस जाने लगा तो उनकी मोटरसाइकिल समारोह के पास से गायब मिली। पूछताछ करने पर नहीं मिली। पुलिस ने अज्ञात चोर के विरुद्ध बाइक चोरी करने का मामला दर्ज कर लिया है।



मार पिटाई का मामला दर्ज
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 कनीना। सेहलंग गांव की कृष्णा देवी ने कनीना पुलिस में 10-12 लोगों के विरुद्ध घर आकर मार पिटाई करने तोडफ़ोड़ करने व जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज करवाया है।
कृष्णा ने कहा है कि वह सेहललंग की स्थाई निवासी है। उनके पास नरेश, पंकज तथा 10-12 अन्य लोग ट्यूबवेल पर आये तथा उनके साथ मार पीटाई की धक्का देकर भविष्य में उनके परिवार को खत्म करने और जान से मार देने की धमकी दी। महिला ने कहा है कि उनके पति खेती बाड़ी का काम करता है और ट्यूबवेल पर ही मकान बनाकर रहते हैं। ये लोग हाथों में लोहे की पाइप, लाठी-डंडे लिए हुए थे। उन्होंने कहा है कि घटना के वक्त एक लेबर महिला उनके साथ थी। उन्होंने शिकायत की है कि उन्होंने सीसीटीवी भी लगवाए उनको भी तोड़ गए, डीवीआर मशीनस सीसीटीवी की फुटेज की रिकार्ड मशीन को भी अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा है कि घटना के समय वह तथा एक लेबर की औरत हाजिर थे। इन लोगों ने गरीब औरत लेबर महिला के साथ छेड़छाड़ की और मोबाइल छीन ले गए। कनीना पुलिस ने विभिन्न लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है तथा जांच शुरू कर दी है।



सूखे में पैदा किए आम
-कई सालों से ले रहे हैं पैदावार
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 कनीना। बेशक जिला महेंद्रगढ़ में पानी की कमी हो और आम पैदा करना महज कल्पना मात्र लगता हो किंतु कनीना मंडी में भीम सिंह ने अपने घर के पास आम के पौधों पर हर वर्ष आम तैयार करते आ रहे हैं।
कनीना के राजेंद्र सिंह ने भी आम पैदा करके नाम कमाया है। दोनों ही किसान आम पैदा करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद यहां पैदा हुए हैं। इस बार अंधड़ ने उनके आम के फल झाड़ दिये हैं।
उधर राजेंद्र सिंह ने बताया कि वे उनके खेत में कई कई साल पुराने आम के एक दर्जन पेड़ हैं जिन पर कभी कम तो कभी अधिक आम लगते हैं।
फोटो कैप्शन 6: आम के पेड़ पर आम लगे दिखाते हुये भीम सिंह कनीना।



पितृ भक्ति की मिसाल
अपने माता-पिता की सेहत के लिए खरीद कर लाए हैं थारपार नस्ल की गाय
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 कनीना। कनीना से 4 किलोमीटर दूर महेंद्रगढ़ रोड पर उन्हाणी के पास जयपाल अपने माता पिता की लंबी उम्र की कामना के लिए थारपार नस्ल की गाय चांदन जिला-जैसलमेर (राजस्थान)से एक लाख रुपये में मंगवाई है।
 जयपाल बीएससी करने के बाद पशुपालन से लगाव हो गया। वे उत्तम नस्ल की गाय तथा भैंस पालते हैं। उनकी मां संतरा देवी गृहणि है जबकि राव भगवान सिंह मुख्याध्यापक पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
जयपाल की मां संतरा देवी शरीर से कमजोर है वहीं उनके पिता राव भगवान सिंह के स्टंट डल चुके हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारियों से तथा वैज्ञानिकों से राय लेकर उन्हें पता चला कि देशी एवं थार पार नस्ल की गायों का दूध विभिन्न रोगों में रामबाण है
वे बताते हैं कि थारपार नस्ल की गाय का दूध अगर 3 महीने तक लगातार सेवन किया जाए तो शुगर, उच्च रक्तचाप, तनाव जैसी बीमारी जड़ से दूर हो जाती है। इसी उद्देश्य को लेकर थार पार नस्ल की गाय राजस्थान से एक लाख रुपये में मंगवाई है। वो अपने माता-पिता को गाय का दूध पिला रहे और उनकी इच्छा है कि उनके माता-पिता लंबे समय तक जीवित रहे ताकि वह उनके दर्शन कर सके।
फोटो कैप्शन 7: थारपार नस्ल की गाय दिखाते हुए जयपाल।


इनके आगे विज्ञान भी फेल
गोबर की बनाती हैं लकड़ी, खाना बनाने में लेती हैं काम
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 कनीना। अगर हाथों में करामात हो तथा बुद्धि बल काम करती हो तो इंसान नया करने में सक्षम हो जाता है। गुढ़ा गांव में दीना और मीना तथा उनके परिवार वाले गोबर की लकड़ी बनाते हैं जो ईंधन का बेहतर विकल्प बन रहा है।
गोबर के उपले जलाने से धुआं अधिक होता है किंतु सरसों के धांसे त्वरित गति से आग पकड़ लेते हैं। ऐसे में कुछ परिजन गोबर से लकड़ी बनाते हैं। धूप में सूखाकर ईंधन की जगह काम में लेते हैं।
उन्होंने दिखाया धांसों पर हल्की गोबर एवं पदाड़ी की परत लपेट दी जाती है। उन्हें सुखाकर ईंधन के रूप में काम में लेते हैं। यह लकड़ी का काम करती है और जलकर बेहतर ऊष्मा प्रदान करती है।
एक ओर जहां किसान इन धांसों को उखाड़ कर फेंक देता है चहीं पशुधन का गोबर भी उपलब्ध हो जाता है। दोनों की सहायता से लोग गोबर को लकड़ी जैसा रूप देते हैं ेिजसे गोबर की लकड़ी कहते हैं। असम राज्य में इस प्रकार की लकड़ी अधिकार काम में लाई जाती है। असम से कुछ लोग मजदूरी करने इधर आए हुए हैं। अपने दैनिक जीवन में गैस सिलेंडर बचाने के लिए र्इंधन का विकल्प तैयार करते हैं। उनको देखकर दूसरे लोग भी अब गोबर पदाड़ी, धांसों आदि की सहायता से गोबर की लकड़ी बनाने लग गए हैं।
 फोटो कैप्शन 8 एवं 9: बनाई हुई गोबर की लकड़ी, धूप में सुखाते हुए तथा गोबर की लकड़ी तैयार करते हुए परिवार।


किसानों के लिए ढैंचा उपलब्ध
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कनीना। कनीना खंड कृषि अधिकारी कार्यालय के तहत किसानों को अब ढैंचा के बीज उपलब्ध हैं। 12 किलों की थैली सब्सिडी सहित 130 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है। किसान आधार कार्ड की कापी लेकर ढैंचा का बीज ले सकता है। हरियाणा बीज निगम कनीना पर ये बीज पर उपलब्ध है।
 खंड कृषि अधिकारी गजानंद शर्मा ने बताया कि ढैंचा का एक बैग 12 किलो का होता है जिसमें की कीमत 120 रुपये सरकार ने रखी है। कोई भी किसान दो बैग ले जा सकता है लेकिन उसके लिए आधार कार्ड की कापी साथ लेकर आना जरूरी है।
  उन्होंने बताया कि यह पौधा हरी खाद के निर्माण के लिए तथा तने के रेशे रस्सियां बनाने के काम आती हैं। राजस्थान में इसे इकड़ नाम से जाना जाता है जो खरीफ की फसल होती है। यह उत्तम हरी खाद के काम आता है।



इंसान की पर्यावर








ण से छेड़छाड़ जीवों के लिए बन रही है मुसीबत
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,कनीना। जंगल से तीतर बटेर, शशक, हरिण लुप्त होने के कगार पर हैं। काला तीतर राज्य पक्षी घोषित है किंतु यह लुप्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं। आने वाले समय में मारिशश देश के डोडो पक्षी की भांति ये पुस्तकों में पढऩे को मिलेंगे।
 जब झोपड़ पट्टी होती थी और चिडिय़ां भारी संख्या में मिलती थी। वन अधिक होने से तीतर, बटेर, हरियल, फाख्ता, टीटीहरी, काला तीतर, हरिण, शशक एवं नाना प्रकार के जंगली जीव मिलते थे। आज उनके दर्शन दुर्लभ हो गए हैं जिनके पीछे इंसान की पर्यावरण से छेड़छाड़ मानी जाती है। पेड़ पौधों की कटाई, अंधाधुंध उर्वरक एवं पीड़कनाशी खेतों में डालना, पक्के मकान बनाए जाना, वनों का विनाश, औधोगिकरण, बढ़ता प्रदूषण, आखेट पर कड़ा प्रतिबंध न लगा पाना, शौकीनी के लिए जीवों को पालना, जीवों को पालतू बनाने की होड़, सांपों को पकड़कर सपेरे की भूमिका निभाना, गर्मी एवं सर्दी से जीवों को बचने के शरणस्थल न होना, खुले कुओं की जगह बोर बनाया जाना, सूखता जल, नदियों एवं नहरों में पानी का अभाव, भोजन न मिल पाना, आहार शृंंखला का छोटा होना एवं जीवों के लिए संरक्षण कानून सख्त न होना आदि प्रमुख कारण है जिनके चलते जीव जंतु दिनोंदिन लुप्त होते जा रहे हैं।
  उधर राजेंद्र सिंह पर्यावरणविद का कहना है कि अभ्यारण्य जैसे स्थल स्थापित किये जाए ताकि जीवों को मरने से बचाया जा सके। उनका कहना है कि जंगली जीवों को बचाने के अब सघन प्रयास करने पड़ेंगे वरना जंगली जीव अब लुप्त हो जाएंगे।  जंगली जीवों को बचाने के लिए पेड़ पौधों को बचाना जरूरी है। पेड़ पौधे अकसर गर्मी में जल की कमी के चलते नष्ट हो जाते हैं वहीं सर्दी में झुलस जाते हैं। किसान अपने खेतों से जाटी पेड़ का विनाश करने पर तुले हुए हैं जिसके चलते तीतर, काला तीतर, फाख्ता आदि विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके हैं।


Friday, April 23, 2021

 
खरीद के 23वें दिन 99 किसानों ने बेचा 3350 क्विंटल गेहूं
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 कनीना। कनीना अनाज मंडी में प्रथम अप्रैल से लगातार गेहूं की खरीद जारी है। अभी तक एक दाना भी सरसों का अनाज मंडी में नहीं आया है क्योंकि खुली मंडियों में सरसों के भाव अधिक हैं।
 विस्तृत जानकारी देते हुए हैं हैफेड मैनेजर सतेंद्र यादव ने बताया कि सरकारी खरीद के 23वें दिन 99 किसानों से 3350 क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। अब तक 23 दिनों में 2721 किसानों से 102170 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। शुक्रवार को 7500 बैग की उठान की गई। अब तक कुल 190000 बैग की उठान कनीना मंडी से की जा चुकी है।
फोटो केप्शन 11: कनीना मंडी में गेहूं खरीदते हैफेड अधिकारी।




किसी भी सरकारी व गैर सरकारी संस्थान द्वारा स्कूली बच्चों को बुलाया गया तो उसको बख्शा नहीं जाएगा -एसडीएम
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कनीना। अगर किसी भी सरकारी व गैर सरकारी संस्थान ने बच्चों को बुलाया तो उसकी खैर नहीं है। ये विचार कनीना के एसडीएम दिनेश कुमार ने विभिन्न स्कूलों में औचक निरीक्षण के उपरांत व्यक्त किए।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना महामारी को लेकर आदेश जारी किया हुआ है कि 31 मई तक प्रदेश के सरकारी व गैर सरकारी सभी स्कूल बंद रहेंगे।  जिसको लेकर कनीना के निकटवर्ती चलने वाले कई स्कूलों का औचक निरीक्षण किया जिसमें सभी स्कूल बंद पाए गए और किसी में भी बच्चे नहीं मिले।
 एसडीम दिनेश कुमार ने बताया कि सूचना मिली थी कि कई स्कूल अभी बच्चों को बुलाकर सरकार के आदेशों का उल्लंघन  कर रहे हैं जिसको लेकर हमने यह कार्रवाई की थी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भी 31 मई से पहले अगर किसी भी प्राइवेट वह सरकारी स्कूल के अलावा आंगनवाड़ी सेंटर आदि में अगर बच्चों को बुलाया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फोटो कैप्शन 10: स्कूल का निरीक्षण करते एसडीएम।



माता-पिता को परेशान करने वालों को नहीं बख्शा जाएगा-दिनेश कुमार
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कनीना। माता पिता को परेशान करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा क्योंकि जिस माता-पिता ने भगवान से लाखों मन्नतें मांग कर जिस संतान को पैदा किया वही संतान आज उनको मारपीट कर घर से निकाल रही है। ये विचार कनीना के एसडीएम दिनेश कुमार ने एक बुजुर्ग द्वारा दी गई शिकायत पर करवाई के उपरांत व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि निकटवर्ती ग्राम बाघोत से एक बुजुर्ग द्वारा दी गई शिकायत में पीडि़त ने बताया कि उसके बेटे मारते पीटते हैं और घर से निकलते हैं, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए एसडीएम ने बुजुर्ग पिता को आश्वासन दिया कि उनको किसी भी तरह से घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि माता-पिता द्वारा बच्चों को सब कुछ दे दिया जाता है लेकिन उसके बाद भी वही माता-पिता एक एक टुकड़े के मोहताज हो जाते हैं इसलिए हमारी सब की ड्यूटी बनती है की ऐसी संतान को अवश्य ही कड़ी सजा दी जानी चाहिए।



जहरीली दवा निगल लेने से व्यक्ति की मौत
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कनीना। उपमंडल के गांव कपूरी में खेती बाड़ी का काम करने वाले किसान की जहरीली दवाई खाने से मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार राजेंद्र 38 वर्ष जोकि खेती का कार्य करता था। उसने एक ट्रैक्टर भी लिया हुआ था उस ट्रैक्टर के माध्यम से कृषि कार्य करता था। राजेंद्र के पड़ोसी धर्मवीर ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार की शाम को ट्रैक्टर से कार्य करने के बाद राजेंद्र घर पर आया। राजेंद्र की दिमाग की हालत ठीक नहीं थी। वह दिमाग का संतुलन बनाए रखने के लिए दवाई लेता था रात के अंधेरे में उसने दिमाग की दवाई की जगह जहरीली दवाई पी ली इसकी वजह से उसकी तबीयत बिगडऩे लगी परिवार के लोगों ने जब उसे देखा तो तुरंत कनीना के एक निजी अस्पताल लेकर गए जहां पर उन्होंने हाई सेंटर रेफर कर दिया। उसके बाद परिजनों उसको रेवाड़ी के राज्य के अस्पताल में ले गए 2 दिन उपचार के बाद शुक्रवार को सुबह राजेंद्र की मौत हो गई। परिजनों के बयान पर पुलिस ने इत्तफाकिया कार्रवाई करके शव परिजनों को सौंप दिया।



दी कनीना प्राथमिक सहकारी समिति के चुने गए प्रधान और उपप्रधान
-जगदीश रामबास को प्रधान तथा बाबूलाल सीहोर को उपप्रधान चुना
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कनीना। शुक्रवार को दी कनीना प्राथमिक सहकारी समिति की एक बैठक शाखा कनीना में आयोजित की गई। इस बैठक में शामिल डायरेक्टरों ने प्रधान और उपप्रधान पद के चुनाव के लिए नाम प्रस्तावित किए। बैठक में पहुंचे सभी डायरेक्टरों ने सर्वसम्मति से  प्रधान और उपप्रधान का चुनाव किया। इस चुनाव में जगदीश रामबास को प्रधान चुना गया। बाबूलाल सीहोर को उपप्रधान चुना गया। कनीना पैक्स के चुनाव अक्टूबर 2020 में हुए थे। लेकिन अभी तक प्रधान और उप प्रधान का चुनाव नहीं हो पाया था। शुक्रवार को चुनाव अधिकारी मेनपाल, बैंक प्रबंधक युद्धवीर की देखरेख में कनीना पैक्स चुनाव संपन्न कराए गए। कनीना पैक्स के लिए हुए चुनाव में 10 डायरेक्टर चुने गए थे। लेकिन चुनाव प्रक्रिया में 6 डायरेक्टरों ने हिस्सा लिया जबकि सातवा वोट बैंक के सरकारी कर्मचारी द्वारा डाला गया। 4 डायरेक्टरों ने चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। चुनाव प्रक्रिया में शामिल हुए 6 डायरेक्टर मुनेश, संतरा देवी ,मंजीता यादव ,सोमबीर ,जगदीश, बाबूलाल शामिल थे। बैंक के सरकारी कर्मचारी के रूप में दी महेंद्रगढ़ कापरेटिव बैंक के विकास अधिकारी बलजीत यादव शामिल हुए और उन्होंने अपना वोट डाला। आपको बता दें कि कनीना पैक्स के प्रधान और उपप्रधान पद के चुनाव के लिए कोरम पूरा करने के लिए 7 वोटों की जरूरत थी। 6 डायरेक्टर और एक सरकारी कर्मचारी के वोट को मिलाकर कोरम पूरा हुआ। चुनाव प्रस्रि5या में शामिल नहीं होने वाले डायरेक्टरों में सविता कनीना ,होशियार सिंह कनीना, राजेंद्र ककराला, काशीराम भडफ़ थे। कनीना पैक्स के डायरेक्टर चुने हुए काफी समय हो गया था लेकिन कई बार मीटिंग होने के बावजूद प्रधान और उपप्रधान पद का चुनाव नहीं हो पाया था। शुक्रवार को भी चुने गए 10 डायरेक्टरों में से 4 डायरेक्टर शामिल नहीं हुए। लेकिन बैंक की नियमावली के अनुसार 7 लोगों द्वारा कोरम पूरा होता है। इस बैठक में 6 डायरेक्टर और एक सरकारी कर्मचारी के वोट को मिलाकर कोरम पूरा हुआ और चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न कराए।
फोटो कैप्शन 11: पैक्स के चुनावों में चुने गये प्रधान एवं उप प्रधान का स्वागत करते हुए।



रक्तदान महादान है युवा इसके महत्व को अवश्य समझे - एसडीएम दिनेश
-40 यूनिट रक्त किया इकट्ठा
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कनीना। सामाजिक संस्था बीएमडी क्लब द्वारा लाइफविवा वैलनेस एवं रेडक्रास सोसाइटी नारनौल के सहयोग से कान्हा जी स्कूल कनीना में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि दिनेश एसडीएम कनीना ने रक्तदान शिविर का उद्धघाटन किया।
शिविर के दौरान सरकार के दिशा निर्देशानुसार कोरोना वायरस के चलते सोशल डिस्टेंसिंग की पालना भी की गई।
मुख्य अतिथि एसडीएम कनीना दिनेश ने बीएमडी क्लब को सफल आयोजन की शुभकामनाएं देते हुए कहा की रक्तदान महादान है। धीरे-धीरे लोग इसका महत्व समझने लगे हैं और रक्तदान के प्रति जागरूकता का माहौल भी देखने को मिल रहा है। फिर भी बहुत सारे लोग है, जिनको अभी भी रक्तदान करने से डर लगता है। तो हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें जागरूक करें। हम लोगों का यह भावना जन-जन तक पहुंचनी चाहिए कि रक्तदान महादान है, इससे लाखों लोगों की जिंदगी बच सकती है।
स्वास्थ्य विभाग से उपस्थित डा. नेहा ने कहा कि हर तीन माह में एक बार रक्तदान करना चाहिए। इससे आपके शरीर में आयरन की मात्रा ठीक बनी रहती है, जिसके कारण दिल संबंधी बीमारियां नहीं होती है। अगर आप रक्त दान करेंगे तो आपके शरीर में खून के नए कण बनेंगे, जिससे आपका स्वास्थ्य सही रहेगा। रक्त दान करने से ब्लड प्रेशर सामान्य और कोलेस्ट्राल का स्तर कम रहता है। नियमित रूप से रक्तदान करने से कैलोरी और वसा जल्दी बर्न होता है, जिससे मोटापा भी नहीं होता।
जिला युवा अधिकारी महेन्द्र कुमार नायक,एडवोकेट रेखा यादव एवं पिंकी यादव एमडी कान्हा जी स्कूल ने भी आये हुए रक्तदाताओं को प्रेरित करते हुए कहा की  रक्तदान ही है, जो न केवल किसी जरूरतमंद का जीवन बचाता है बल्कि जिंदगी बचाकर उस परिवार के जीवन में खुशियों के ढेरों रंग भी भरता है।
क्लब चेयरमैन लक्की सीगड़ा ने सभी आये हुए अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा की इस समय रक्त की कमी को देखते हुए यह शिविर लगाया गया। जिसमें सुबह से ही रक्तदाताओं का आना शुरू हो गया था। भविष्य में भी क्षेत्र के युवा हर समय रक्त दान करने के लिए तैयार रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान सभी रक्तदाताओं को प्रमाण-पत्र भी वितरित किया। इस रक्त दान शिविर में लगभग 40  यूनिट रक्त एकत्रित किया गया।
इस अवसर पर इस कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि जयवीर कुमार एमडी लाइफविवा वैलनेस ,महेन्द्र कुमार नायक जिला युवा अधिकारी एनवाइकेएस,एडवोकेट रेखा यादव एवं  एचआर डिजिटल के एमडी नवीन यादव, घनश्याम एवं कर्मपाल,इंद्रजीत शर्मा,कर्मपाल यादव,नरवीर सिंह,स्वीटी,रोनिका यादव ,मोहित शर्मा,प्रियंका प्रजापति ,दीपिका,निशा ,रेडक्रास से घनश्याम, सिंटू यादव लैब टेक्नीशियन,सुरेंद्र शर्मा ,सुदेश,प्रवीण,पूनम,निशा सहित अन्य युवा साथी एवं रक्तदाता उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 8 व 9: रक्तदान करते हुए तथा उपस्थित एसडीएम दिनेश कुमार।






व्यसनों में संलिप्त होने लगे हैं स्कूल एवं कालेज के विद्यार्थी
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कनीना। कनीना के कालेज एवं स्कूली विद्यार्थी भी विभिन्न नशीले पदार्थों का सेवन करने लगे हैं। अभिभावक, शिक्षक एवं आम जन चिंतित है।
   शहरों के बाद अब गांवों के युवा भी विभिन्न प्रकार के व्यसनों में संलिप्त हो रहे हैं। बीड़ी, सिगरेट, चिलम, हुक्का, शराब, नशीली दवाएं तथा अन्य नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। ये चीजें आसानी से ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपलब्ध हैं। कहने को तो सरकार ने बीड़ी सिगरेट पर प्रतिबंध लगा दिया है किंतु ये नशीले पदार्थ ग्रामीण क्षेत्रों में भी दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। परचून की दुकानों से लेकर अन्य दुकानों पर आसानी से मिल जाते हैं।   
शराब की तस्करी के साथ-साथ ताशबाजी में पूरी तरहा लिप्त होते जा रहे है। आश्चर्य यह है कि शहरों की ताशबाजी की संस्कृति ने अब ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पूरी पैठ बना ली है। बेराजगार युवकों के लिए एक आसरा या समय काटने का सहारा बना सट्टा उनके परिवारों को बर्बादी की कगार पर खड़ा करता जा रहा है।
 युवा वर्ग बीड़ी सिगरेट एवं शराब आदि को सार्वजनिक स्थानों पर भी प्रयोग करते देखे जा सकते हैं। स्कूल हो या कालेज अब तो युवा वर्ग इन व्यसनों की ओर अधिक लिप्त हो रहा है जिसके पीछे मां बाप का नौकरी पर चले जाना और बच्चों पर निगरानी न रखना माना जा रहा है।
   बेरोजगार आर्थिक आय जुटाने के रूप में शराब की तस्करी कर रहे हैं। ताश की आड़ में जुआ तक खेलते हैं। कुछ युवक तो हताश व निरास होकर अपना सब कुछ लुटाकर आत्महत्या करने भी विवश हो चुके है।
  डा अजीत शर्मा एवं वैध बालकिशन इस संबंध में कहते हैं कि बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, चिलम तथा शराब युवा वर्ग दिखाए के लिए शुरू तो कर देता है किंतु इससे पीछा छुड़ाना कठिन हो जाता है। ये नशीली वस्तुएं शरीर, मन एवं धन को बर्बाद कर डालती है। गुर्दे, आंखें, हृदय, पाचन तंत्र, तंत्रिका तंत्र खराब हो जाते हैं और युवा असामयिक वृद्ध हो जाते हैं।
  अभिभावक रमेश, नरेश, कृष्ण एवं योगेश का कहना है कि युवा वर्ग पर निरंतर नजर न डालने से वो कुसंगति में पड़ जाता है और विभिन्न व्यसनों में लिप्त होकर जीवन को बर्बाद कर बैठता है। उनका मानना है कि युवाओं पर नजर रखनी, स्कूल एवं कालेज में शिक्षकों से पूछताछ जरूरी बन गई है।
  शिक्षक राजेश कुमार, सत्येंद्र एवं नरेश ने बताया कि उन्होंने स्कूलों एवं कालेजों में युवा वर्ग को इन व्यसनों में पीडि़त देखा है और पकड़ा भी है किंतु वे सरकार के नियमानुसार दंड नहीं दे सकते हैं जिसके चलते उनके हौसले बुलंद हैं।


पुस्तक दिवस पर विशेष
-पुस्तकों के प्रति रुचि धीरे धीरे घट गई है
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 कनीना। एक जमाना था जब पुस्तकों के प्रति बेहद लगाव होता था। दिन रात चांद के प्रकाश में, चिमनी, लालटेन आदि की सहायता से पुस्तकें पढ़ी जाती थी। पुस्तकों के लिए बेशक धन कम होता था, मोबाइल होते नहीं थे ऐसे में पुस्तक ज्ञान का एकमात्र सहारा होती थी। चाहे किसी भी रूप में पुस्तक पढ़ी जाए, लोग
पुस्तक पढ़ते थे किंतु अब दुर्भाग्य है पुस्तकों से मोह धीरे धीरे भंग हो गया है। पुस्तक पढ़ते नहीं, कापीराइट का ज्ञान नहीं है।
   राधेश्याग गोमला लेखक का का कहना है कि पुस्तकें मानव जीवन के लिए सर्वाधिक उपयोगी मार्गदर्शक साधन हैं। पुस्तकें वो धरोहर हैं जो हमें भूत वर्तमान और कहीं कहीं भविष्य का भी दर्शन कराती हैं। आज जो मानव बेहतर वर्तमान जी रहा है, इसे बेहतर  बनाने में पुस्तकों का सर्वाधिक योगदान रहा है। अगर पुस्तकें नही होती तो मानव विकास की वो बुलन्दियां नही छू पाता जहां आज वह खड़ा है। पुस्तकें ज्ञान तो देती ही हैं, साथ साथ जीने का ढंग सिखाती हैं, मरने की कला सिखाती हैं। और तो और मृत्यु के बाद और अगले जीवन तक की राह सुझाती हैं। वर्तमान की संपत्ति पुस्तकें भविष्य की पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक का काम करती हैं।
 स्याणा से समशेर सिंह कोसलिया का कहना है कि पहले के जमाने की अपेक्षा अब के युग में लोग पुस्तक खरीद कर बहुत ही कम पढ़ते हैं।
पहले के जमाने में लोग पुस्तक को अपना मित्र समझते थे और आज के जमाने में मोबाइल फोन को अपना मित्र समझते हैं। पहले के जमाने में लेखक से भी लोग पुस्तक खरीद कर पढ़ते थे और आज के जमाने में मुफ्त में लेकर पढ़ते हैं और यहां तक की कुछ तो मुफ्त में ली गई पुस्तक को भी नहीं पढ़ते। अब तो लोगों को पुस्तकों से प्यार की बजाय मोबाइल से प्यार हो गया है।
कुछ लोगों को तो पुस्तक के प्रारंभिक पेज को पढ़कर ही शेष पेजों को न पढ़कर फेंक देने की आदत है। कुछ लोगों की सोच यह होती है कि पुस्तक के लेखक को पता नहीं कितनी ही अनाप-शनाप पैसे की कमाई होती है और लेखक को धनवान समझते हैं जबकि लेखक आर्थिक आधार पर गरीब होता है और मन से धनवान है। ऐसे में पुस्तकों के प्रति जन रुझान नहीं है।
 उधर आशा यादव लेखिका का कहना है कि आने वाले समय में पुस्तक की कद्र घट जाएगी और लोग भूलते चले जाएंगे कि पुस्तक के लेखन में कैसे कैसे कष्ट लेखक सहन करते आये हैं।
 समाजसेवी एवं शिक्षक राजेश उन्हाणी का कहना है की पुस्तकों से जिसको प्यार होता है वह जीवन में सफल होता है। किंतु अब पुस्तकों से न ही तो प्यार रहा, न पुस्तकों से लगाव रहा। अब तो महज मोबाइल से ज्यादा प्यार है। यही कारण है पुस्तकें गुम होती रही है। आजकल तो कापीराइट एक्ट का पता अधिकांश लोगों को नहीं है।
तथ्य या रचना हूबहू चोरी कर लेते हैं। ऐसे में कापीराइट का मामला भी बनता है। यही कारण है कि पुस्तकों का जमाना लद गया है।
फोटो कैप्शन: राधेश्याम गोमला, समशेर सिंह कोसलिया, राजेश उन्हाणी। जागरण




आयुर्वेदिक सलाह......................
 नियमित गुनगुना पानी सेवन करे
-भाप को नाकों से खींचे
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कनीना। ग्रामीण आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी बाघोत में आयुष मेडिकल आफिसर डा शशी मोरवाल का कहना है कि कोरोनावायरस के चलते नित्य प्रति गुनगुना पानी पीना चाहिए। जो चाय पीते हैं उन्हें अधिकतम दो कप चाय पीनी चाहिए किंतु चाय या तो नींबू की हो या फिर चाय में तुलसी, लौंग, काली मिर्च, अदरक, अजवायन, अदरक आदि डालकर बनी हो। हो सके भाप को नाकों से खींचे।
 उन्होंने कहा कि रात के वक्त दूध में हल्दी डालकर पीना चाहिए। एक गिलास दूध में चौथाई चम्मच हल्दी डालकर जरूर पीये। उन्होंने कहा कि कोरोना के चलते नियमित सफाई के साथ खाना खाने से पूर्व जरूर हाथों को हैंडवाश से  धोना चाहिए। दिन में तीन चार बार हाथ धोए।
डॉ शशि मोरवाल का कहना है कि ऐतिहात के सभी नियमों का पालन करना चाहिए।  ताजा फल और सब्जियों का ही उपयोग करना चाहिए। फल सब्जियों को अच्छी प्रकार धोकर प्रयोग करें। वहीं उन्होंने कहा कि खट्टे फल जिनमें संतरा,मौसमी आदि का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए ताकि विटामिन-सी की पूर्ति हो सके।
उन्होंने कहा कि बासी खाना नहीं खाना चाहिए। जब घर से बाहर निकले तो नाक में घी या तेल सरसों या नारियल जरूर लगाकर निकले। हल्का खाना तथा गर्म खाना ही खाना चाहिए। सूखे मेवे अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए वहीं अंकुरित अनाज जैसे चना, मूंग, भुना हुआ चना आदि प्रयोग करना चाहिए ताकि कोरोना  से बचा जा सके।
डा शशी मोरवाल, आयुष मेडिकल अधिकारी जीएडी बाघोत(कनीना)



20 डोज कोरोना की दी गई
-500 वैक्सीन आई
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 कनीना। कनीना के उप नागरिक अस्पताल में जहां 20 डोज कोरोना की विभिन्न लोगों को दी गई। जहां अप नागरिक अस्पताल का समय प्रात: 9 से दोपहर 12 बजे का होने के कारण बहुत से लोग कोरोना वैक्सीन लेने से वंचित रह गए। आप भविष्य में भी अस्पताल का यही समय रहेगा। उप नागरिक अस्पताल के एचआई शीशराम ने बताया कि गत दिवस की बची हुई 20 डोज विभिन्न लोगों को दी गई हैं।
500 डोज आई--
शीशराम ने बताया कि जहां कोरोना वैक्सीन समाप्त होते ही 500 और वैक्सीन आ चुकी है जो शनिवार को लगाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि अभी तक 45 वर्ष से 60 वर्ष तक के या इससे अधिक उम्र के लोगों को ये डोज दी जा रही हैं।
भोजावास में नहीं लगी वैक्सीन-
 भोजावास में शुक्रवार को कोई वैक्सीन नहीं लगी। यहां वैक्सीन का अभाव था। एचआई राजकुमार चौहान ने बताया कि अब तक वैक्सीन का अभाव था किंतु शुक्रवार को 300 नई वैक्सीन भोजावास के लिए आ चुकी हैं।
67 सैंपल लिये--
उधर डाक्टर जितेंद्र मोरवाल उप नागरिक अस्पताल कनीना ने बताया कि शुक्रवार को 67 विभिन्न लोगों के कोरोना सैंपल लिए गए हैं। प्रतिदिन कोरोना जांच के लिए यहां सैंपल लिए जा रहे हैं। इनकी रिपोर्ट 2 से 3 दिन के अंदर अंदर आ जाती है तत्पश्चात आगामी कार्रवाई की जाती है।
उधर कनीना में दो दिनों में आए करीब आधा दर्जन कोरोना संक्रमितों को घर पर ही आइसोलेट कर दिया गया है तथा उनके संपर्क में आए लोगों को स्क्रीनिंग कर दिया गया है।




किसान जुटे कृषि कार्यों में
-कपास की ओर रुझान कम
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 कनीना। किसान एक बार फिर से खरीफ फसल की तैयारियों में लग गए हैं। रबी फसल पैदावार लेने के बाद अन्न को बेचकर किसान खरीफ विशेषकर कपास की बीजाई की तैयारियों में लगे हैं। खेतों में खाद डालने का काम जारी है।
   वैसे तो किसानों की प्रमुख फसल गेहूं की है। किसान गेहूं को खाने के लिए सबसे अधिक प्रयोग करते हैं वहीं बाजरे की फसल चारे के लिए अधिक उपजाया जाता है और खाने के लिए कम। रबी फसल बेहतर पैदावार नहीं दे पाई। कुछ पैदावार हुई बेचकर घर के कामों के लिए धन प्राप्त किया है। विगत वर्षों से किसान कपास फसल की ओर आकर्षित हुये थे किंतु विगत वर्ष कपास की फसल में रोग आ जाने से किसान नुकसान की ओर चले गये थे। परिणामस्वरूप इस बार किसानों का रुझान कपास की ओर कम है।
 अब किसान खरीफ फसल की तैयारी में लग गया है। खेतों में खाद डालने विशेषकर गोबर का खाद डालकर उसे बिखेरने तथा बारिश होने का इंतजार करेंगे। किसान गर्मियों में अपनी ऊंटगाड़ी, ट्रैक्टर एवं ट्राली से खाद खेतों में डालते हैं।
  कनीना के किसान अजीत सिंह, योगेश कुमार, रोहित कुमार ने बताया कि रबी फसल पैदावार लेने के तुरंत बाद किसान अपनी खरीफ फसल में लग जाता है। इस दौरान बाजरा, ग्वार एवं कपास आदि उगाते हैं। किसानों ने बताया कि खरीफ फसल पूर्णरूप से बारिश पर आश्रित है। बारिश होने पर बीजाई कर देते हैं।
  किसान पशु पालक होने के कारण पशुओं के गोबर से खाद बनाते हैं या फिर गोबर से कंपोस्ट व केंचुआ खाद बनाकर खेतों में डालने लगे हैं।  किसान मेहनती है और गर्मी में भी खेतों में खाद डाल रहे हैं।
फोटो कैप्शन 2: किसान खेत में खाद डालते हुए।



बुजुर्गों से चर्चा
जीवन में पहली बार देखी है ऐसी महामारी
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 कनीना। कनीना क्षेत्र के बुजुर्गों से कोरोना के बारे में चर्चा की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इस प्रकार की महामारी देखने को मिली, जब लोग घरों में छुपे हुए हैं। यह दूसरा साल चल रहा है और लोग परेशान हो चले हैं। महामारी घटने का नाम ही नहीं ले रही है। विभिन्न बुजुर्गों से इस संबंध में चर्चा की।
वयोवृद्ध हरद्वारी लाल 95 वर्षीय ने बताया कि उनके जीवन में महामारी जरूर आई तथा सुनी थी परंतु इस प्रकार की महामारी पहली बार देख रहे हैं जब घर में छुपकर भी चैन नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा की महामारी अजब है जो जिसका पक्का इलाज भी अभी तक नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि इस महामारी ने तो जग को हिलाकर रख दिया है। वह भी चिंतित है पर महामारी के सामने शून्य हैं। उन्होंने इस महामारी से बचने की अपील की है।
 वयोवृद्ध डा मेहर चंद 84 वर्षीय का कहना है कि वह बहुत लंबे समय से विभिन्न प्रकार के रोग देख चुके हैं किंतु 2020 से जो महामारी चली हुई है कोरोना नामक महामारी नाम दिया है। यह पहली बार देखने को मिली है। इस प्रकार की बीमारी पहले कभी जीवन में नहीं देखी थी। यही कारण है कि इस बीमारी ने तो बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी को परेशान कर दिया है। देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। लोग बेहद परेशान हैं।
उनका कहना है कि इस महामारी से बचने के कदम उठाए जा रहे हैं। फिर भी लोग महामारी से पीडि़त हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि सरकार द्वारा बताई हुई कि हिदायतों का पालन करना चाहिए ताकि इस रोग से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि मास्क एक बहुत आसान तरीका है परंतु इसको नियमित रूप से लोग नहीं पहनते जिसके कारण रोग होने का अंदेशा बना रहता है।
 फोटो कैप्शन 4: डा मेहरचंद और हरद्वारी लाल।












Thursday, April 22, 2021


 

93 किसानों ने बेचा 2400 क्विंटल गेहूं
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 कनीना। कनीना अनाज मंडी में खरीद के 22वें दिन 93 किसानों ने 2400 क्विंटल गेहूं बेचा। विस्तृत जानकारी देते हुए हैफेड मैनेजर सतेंद्र यादव ने बताया कि अब तक 2622 किसानों ने 94820 क्विंटल गेहूं बेचा है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को दो हजार बैग उठान किए गए और कुल उठान 182500 बैग हो चुका है।





नहीं कर रहे हैं नियमों का पालन
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 कनीना। यद्यपि महामारी बढ़ती ही जा रही है किंतु किसी भीड़ वाले स्थान, सभा, विवाह शादी कार्यक्रम आदि में अभी भी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। यहां तक कि बगैर मास्क पहने युवा बाइकों पर घूम रहे हैं, बसों में सफर कर रहे हैं। यहां तक कि कुछ लोग तो सोच भी नहीं रहे हैं कि महामारी भी फैली हुई है। लोग खाली दिमाग इधर-उधर घूमते देखे जा सकते हैं। प्रबुद्ध जनों ने मांग की है कि सख्ती से काम लिया जाए।


हेमसा ने जताया संत के निधन पर शोक
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कनीना। दड़ौली आश्रम के संत शरणानंद के निधन पर हेमसा के जिला अध्यक्ष ने शोक जताया।
हमसा जिला अध्यक्ष बाबूलाल यादव ने बताया कि संत ने आइआइटी रुड़की से बीटेक की परीक्षा उत्तीर्ण की कथा अंग्रेजी विषय के वह बहुत बड़े विद्वान थे। इसके बाद उन्होंने अपना सन्यासी जीवन अपनाया। स्वामी एक महान विद्वान व वेदों के जानकार थे, उन्हें समाज में फैल रहे अंधविश्वास व कुरीतियों को दूर किया तथा जनता को उचित मार्गदर्शन दिया।
   अपना सारा जीवन सामाजिक कार्यों में व्यतीत किया।  स्वामी का जाना समस्त समाज के लिए क्षति है जिसकी क्षतिपूर्ति कभी भी नहीं हो सकती। स्वामी  की आत्मा परमात्मा में विलीन हो गई। स्वामी अपने आप में एक संस्था थे तथा समाज के प्रवर्तक थे ऐसे सिद्ध पुरुष कभी-कभी अवतार लेते हैं। इस मौके पर राजकुमार राव गुढ़ा, प्रदीप यादव, पंकज यादव, प्राचार्य अभय राम यादव, विनय कुमार उपाधीक्षक,  डा कालू करीरा, निहाल पेंटर करीरा, नरेंद्र लिसानिया, मेजर अशोक कुमार, राकेश सरपंच करीरा  विजयपाल प्रवक्ता, विजय सरपंच मघनवास, विजय यादव सुरजनवा गिरधारीलाल करीर, सूबे सिंह प्रवक्ता कपूरी इत्यादि ने शोक संवेदना व्यक्त की।





डॉक्टर की सलाह-----
घर में अधिक समय देकर खुशी खुशी समय बीताए
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 कनीना। कनीना के डाक्टर वेद प्रकाश का कहना है कि कोरोना वायरस पूरे ही जग में समस्या बना हुआ है किंतु अब जल्द ही इसका खात्मा होने जा रहा है। ऐसे में हम सभी का फर्ज बनता है कि इससे रोकथाम के उपाय अपनाए। रोग से बचने का सबसे सरल उपाय है फिजिकल डिस्टेंस बनाए रखें, घरों में रहकर सरकार के आदेश अनुसार आराम करें, बार-बार हाथों को साबुन या डिटोल से धोए,  सैनिटाइज करना हो तो अल्कोहल युक्त सेनिटाइजर से ही सेनिटाइज करें। उनका कहना है कि धातुओं पर लंबे समय तक यह कोरोना जीवित रहते हैं। इसलिए धातु के बर्तनों को छूने के बाद हाथों को जरूर धोए। उन्होंने कहा कि इधर-उधर घूमने से समस्या बनती है जब कोई काम ना हो तो अनावश्यक इधर-उधर न घूमे, रोग के लक्षण अगर किसी में नजर आए तो 1 मीटर की दूरी बनाए। अगर रोग के लक्षण नजर आए तो तुरंत डाक्टर से सलाह करनी चाहिए।
  उन्होंने कहा कि मास्क जरूर पहने। मास्क पहनने से न केवल कोरोनावायरस अपितु उड़ती हुई राख, हवा में उड़ते भी कीट आदि से भी बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि रोगाणु से बचना ही सबसे बेहतरीन तरीका होगा। ऐसे में किसी भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर न जाए, आसपास सभा आदि हो रहा हो तो बहुत सोच समझकर जाना चाहिए। अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर खुशी खुशी दिन बिताना चाहिए। खुशी-खुशी जीवन जिये, शुद्ध सात्विक भोजन खाए, ताजा सब्जी, दाल आदि जरूर प्रयोग करें।  इससे रोग से बचा जा सकता है।
 डॉ वेदप्रकाश कनीना




पृथ्वी दिवस पर ...
पृथ्वी मां है, इसे बचाये-लक्की
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संवाद सहयोगी,कनीना। पृथ्वी हमारी मां है इसे बचाये। ये विचार क्षेत्र के समाजसेवियों के हैं। उन्होंने पृथ्वी दिवस पर पृथ्वी को बचाने की अपील की।
लक्की सिंगड़ा का कहना है कि पृथ्वी के बगैर हमारा जीवन संभव नहीं है जैसे हमें अपने जीवन के लिए पृथ्वी की जरूरत है वैसे ही आज पृथ्वी को भी हमारी जरूरत है। क्योंकि पिछले कुछ दशकों में हमारी पृथ्वी पर प्रदूषण बहुत बढ़ा हैं उससे हमारी पृथ्वी को काफी नुकसान हो रहा है। जीने के लिए रोटी कपड़ा और मकान की जरूरत पड़ती है जो हमें इस पृथ्वी से ही मिलते हैं तो हमारा भी कोई दायित्व बनता हैं कि हम इस पृथ्वी के लिए कुछ करने और अपने आने वाली पीढ़ी की रक्षा करने का भी प्रण ले।  
यदि पृथ्वी पर इसी तरह प्रदूषण होता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा कि हमारी पृथ्वी हमारी जरूरतों के विपरीत काम करने लगेगी। पृथ्वी को बचाने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा पानी बचाने की आवश्यकता हैं। पॉलीथिन के प्रयोग पर बैन करना होगा,पेड़ पौधे लगाने की आवश्यकता है।
मनोज कुमार मेघनवास का कहना है कि किसी भी दिवस का महत्व तभी है जब मानव अपनी जिम्मेदारी समझें अन्यथा यह आम दिनों की तरह सामान्य दिन है। हमारी पृथ्वी का मतलब यह नहीं कि यह सिर्फ मनुष्य के लिए है अपितु यह इस धरा पर रह रहे सभी जीव जगत के लिए है। सभी का इस पर समान अधिकार है। मानव इतना निर्दयी  हो गया है कि वो सभी फैसले जीव जगत की परवाह किए बगैर अपनी सुविधा अनुसार ले रहा है। यह अंतराष्ट्रीय समस्या है। इसके लिए प्रयास भी विश्व स्तर पर करने होंगे। गत वर्ष वैश्विक लाकडाउन में प्रर्यावरण सन्तुलन में जो सुधार हुआ था वो हमारे लिए उदाहरण है। मिलों दूर से हिमालय दिखाई दे ने लगा था। और वायु शुद्धता सूचकांक में सुधार हुआ था। विकसित देशों को यह विचार करना होगा कि वे सभ्यता के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं या विनाश के लिए। हमारी संस्कृति में वृक्ष पूजन के बिना कोई अनुष्ठान संपन्न नहीं होता था। हमें अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पर्यावरण संरक्षण हेतु उपाय करने चाहिए।
फोटो कैप्शन: लक्की सिगड़ा, मनोज मेघनवास।





कनीना में दी गई 194 कोरोना वैक्सीन
- भोजावास में 75 वैक्सीन दी गई
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 कनीना। कनीना क्षेत्र में जहां वैक्सीन की मांग बढ़ गई है। कनीना उप नागरिक अस्पताल में 200 वैक्सीन आई जिनमें से 175 प्रथम डोज गुरुवार को दे दी गई तथा 19  सेकंड डोज दी गई। इस प्रकार कनीना उप नागरिक अस्पताल 194 डोज एक ही दिन में दी गई। एच आई शीशराम ने बताया कि पवन, सुनील, सुनीता एएनएम ने अहं भूमिका निभाई।
उल्लेखनीय है कि एक बार फिर से कोरोना बढऩे के कारण लोगों में जागरूकता आई है। समाजसेवियों ने मांग की है कि अधिक से अधिक वैक्सीन का प्रबंध किया जाए।
कोरोना के मरीज बढ़े





घर से बाहर जाना है तो मास्क का प्रयोग

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कनीना।   कनीना सीएचसी के अधीन आज 14 तथा सेहलंग सीएससी के अधीन 7 कोरोना मरीज आने से क्षेत्र में इन की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिसको लेकर आमजन परेशान है। क्षेत्र के प्रबुद्ध एवं समाजसेवी लोगों ने जिला प्रशासन से मांग कर कोरोना गाइडलाइन का पालन न करने वाले लोगों पर शिकंजा कसने की मांग की है ताकि क्षेत्र में कोरोना महामारी फैलने से रोकी जा सके। वही सेहलग सीएससी प्रभारी डा प्रभा यादव से इस बारे में जानकारी ली तो उनका कहना था कि आए दिन कोरोना मरीज बढऩे से क्षेत्र में बड़ी समस्या बनती जा रही है जिसको लेकर सरकार प्रशासन व आमजन परेशान है। उन्होंने यह भी कहा कि यह महामारी तब तक नहीं रुक सकती जब तक आमजन सजग नहीं होगा क्योंकि इस बीमारी से खुद ही बचाव करना पड़ेगा। जिसको लेकर उन्होंने कहा कि हमें घरों में रहना चाहिए। अगर किसी काम के लिए हमें घर से बाहर जाना है तो मास्क का प्रयोग तथा सोशल डिस्टेस का भी प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा कोरोना वैक्सीन अवश्य ही लेनी चाहिए ताकि हमारे शरीर में रोगरोधक क्षमात बढ़ जाए और रोगों से लडऩे की शक्ति बढ़ जाए ताकि कोरोना जैसी महामारी से बच सकें। उन्होंने बताया कि आज हमने 60 लोगों को कोरोना वैक्सीन दी हैं और यह सिलसिला जोरों पर जारी है। क्षेत्रवासियों ने जिला उपायुक्त व स्थानीय प्रशासन से मांग कर मास्क न लगाने वाले लोगों पर शक्ति की जाए वही धारा 144 का भी खुलकर प्रयोग किया जाए ताकि देश में बढ़ रहे कोरोना महामारी से बचा जा सके।



 स्वामी शरणानंद की कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता -कृष्णानंद
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कनीना। क्षेत्र के परम संत शरणानंद महाराज के निधन पर क्षेत्र के साधु संतों के अलावा समाजसेवी लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है और उन्होंने उक्त संत के चले जाने पर बहुत बड़ी क्षति बताया है।
स्वामी शरणानंद महाराज एक परम संत थे जिन्होंने अपने जीवन में हजारों पुण्य के कार्य किए और  पथभ्रष्ट लोगों को मार्गदर्शन कराया। जिसके कारण उनको करोड़ों लोग याद कर रहे हैं इसी कड़ी में परम संत स्वामी कृष्णानंद महाराज स्वामी ,संजीव कुमार महाराज ने स्वामी शरणानंद जी महाराज के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।  उन्होंने कहा कि शरणानंद के जाने पर कहां कि क्षेत्र से एक बहुत बड़े संत का चला जाना इस क्षेत्र के लिए बड़े दुख की बात है। स्वामी कृष्णानंद  जी ने कहा कि स्वामी शरणानंद जी को वेद शास्त्रों के अलावा सामाजिक ज्ञान का भंडार थे जिन्होंने अपनी मृदु बानी से लाखों लोगों का भला किया और उनको भक्ति मार्ग दिखाया जिसको हम कभी नहीं भुला पाएंगे। शोक व्यक्त करने वालों में महाराज संजीव कुमार, राजकुमार शास्त्री, रमन शास्त्री ओम प्रकाश शास्त्री, बाल किशन एवं श्रीकिशन करीरा, महावीर पहलवान, ठाकुर रतन सिंह, फतेह चंद दायमा, वरुण शास्त्री आदि ने स्वामी जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।


बूंद बूंद है कीमती...
 दो संतों की याद दिलाता है शिरीषवाला जोहड़
-लंबे समय से सहेजे हुए है पानी
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 कनीना। कनीना का शिरीषवाला जोहड़ दो परम संतों की याद दिलाता है। करीब 800 सालों से यह जोहड़ सिरसवाला नाम से प्रसिद्ध है। बड़ी बणी नामक स्थान परस्थित है जो रेलवे स्टेशन के करीब है। यहां वर्तमान में विभिन्न शिक्षण संस्थान भी बने हुए हैं किंतु प्राचीन समय में यहां केवल सिरस का पेड़ होता था जिसके कारण यह जोहड़ सिरस वाला नाम से जाना जाता रहा है।
बड़ी बणी में कनीना नगर पालिका की सबसे अधिक जगह होती थी जहां दूर-दराज तक जाल के पेड़ होते थे। धीरे-धीरे बड़ी बणी का विनाश हो गया किंतु यहां के जोहड़ का बाद में कायाकल्प कर दिया गया। कनीना बसासत के समय का यह जोहड़ चला आ रहा है। कनीन गोत्र के कान्ह   सिंह जब यहां आए थे तभी से यह  जोहड़ स्थित था। कालांतर में इस में बारिश का पानी भरा जाता था और विभिन्न जीव जंतु, जंगली जीव जल पीकर  प्रसन्न हो जाते थे। लंबे समय से यह जोहड़ यही स्थित है कालांतर में यहां रामेश्वर दास नामक संत का आगमन हुआ और उन्होंने तप स्थल यही बनाया। उधर कनीना की छोटी-बणी में संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ जोहड़ पर तप करते थे किंतु एक दूसरे के पास उनका आवागमन होता रहता था। दोनों संत समय समय पर सिरस वाला जोहड़ पर बैठते थे तो कभी रामेश्वर दास भी मोलडऩाथ आश्रम पर जाकर ज्ञान की चर्चा करते थे। सिरस वाला जोहड़ दोनों संतों की याद दिलाता है जहां का भी दोनों संतों ने इसी जोहड़ के पानी में समाधि लगाई थी और होड़ लगी थी। बुुजर्ग बताते हैं कि रामेश्वर दास जोहड़ से जल्दी बाहर आ गए थे किंतु संत शिरोमणि मोलडऩाथ लंबे समय तक इसी जोहड़ में समाधि लिए बैठे रहे। सर्दी के दिन होने से उनको निमोनिया हो गया था और  उन्होंने समाधि ले ली।
सिरसवाला जोहड़ बहुत लंबे समय से जन्माष्टमी के मेले के लिए प्रसिद्ध है। गोगा और जन्माष्टमी पर्व पर जहां जल में जाटी और गोगा नामक पौधे बहाने की परंपरा चली आ रही है। समय बदला इसी जाहड़ पर जहां रामेश्वर दास के शिष्य राधे दास ने भी तप किया और उन्होंने भी समाधि ले ली। इस जोहड़ का लंबा इतिहास चला आ रहा है। जहां समय-समय पर मेलेे भी लगते हैं तथा भंडारे भी चलते हैं। जोहड़ का पानी कभी साफ होता था किंतु बाद में इसे मलिन कर दिया गया। यह कच्चा जोहड़ पूर्व एसडीएम संदीप सिंह ने पक्का बनवा दिया गया। किंतु नहर इसके पास से गुजरने वाली नहर से जोड़ देने के कारण सदा पानी भरा रहता है ऐसे में यह जोहड़ कनीना के इतिहास की याद दिलाता है वही संतों की रमणीक स्थली की भी याद दिलाता है। यह जोड़ लंबे समय से पानी को सहेजे हुए हैं।
क्या है शिरीष-
 सिरस/शिरीष/सिरसा का बड़ा पेड़ होता है जिसके फूल बहुत कोमल होने से उन्हें सुकुमार कहा जाता है। यह अति औषधीय पौधा होता है। इस जोहड़ के तट पर भी कभी यह पेड़ मिलता था। इसी के कारण जोहड़ का नाम पड़ा है।
फोटो कैप्शन 5 व 6: शिरीषवाला जोहड़ का वर्तमान स्वरूप।


मां बहनों की इज्जत ही मां की सच्ची आराधना -कृष्णानंद
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कनीना। संसार की महिलाओं को सम्मान देना ही मां की सच्ची आराधना है।
क्योंकि जब तक हम संसार की मां बहन बेटी को सम्मान नहीं देंगे तब तक हम सुख और शांति को प्राप्त नहीं कर सकते। ये विचार संत शिरोमणि कृष्णानंद महाराज ने कनीना के गांव धनौंदा की बणी में हवन उपरांत व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि शपथ लेनी चाहिए कि जीवन में मां बहन बेटियों की इज्जत करेंगे। किसी युग में मां बहन और बेटियों पर अत्याचार हुआ है तो सभी लोगों को उसका खामियाजा भुगतना पड़ा है।
   उन्होंने कहा कि यज्ञ एक ऐसा साधन है जिससे निकलने वाले धुएं से कीटाणु खत्म होते हैं और जीवाणुओं को बल मिलता है। एसडीएम दिनेश कुमार ने भी यज्ञ पर बोलते हुए कहा कि यज्ञ में मिल जुल कर रहना सीखा जाता है क्योंकि जिस प्रकार यज्ञ में जो सामग्री डाली जाती है वह विभिन्न पदार्थों से मिश्रित होती है जो स्वयं तो जल जाती है पर सुगंध देकर जाती है जिससे मानव को सुखमय जीवन मिलता है।  इस अवसर पर डा फतेह चंद दायमा,अनिल यादव, ज्योति सिंगल, विनय पाल खेड़ी, अतर सिंह, शिव कुमार जांगड़ा, विजय कुमार हलवाई, सुरेंद्र यादव, नरेंद्र लाल पवन प्रजापत के अलावा अन्य लोग उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 1: धनौंदा में हवन करते संत।




मोटरसाइकिल सवार को मारी अज्ञात गाड़ी ने टक्कर, घायल, मामला दर्ज
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 कनीना। कनीना उपमंडल के गांव पड़तल के पास एक तेज रफ्तार की गाड़ी ने मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मारी जिसके चलते मोटरसाइकिल सवार गिर गया, उन्हें
कनीना के उप नागरिक अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी हालत को देखते हायर सेंटर रेफर कर दिय। उनका इलाज रेवाड़ी के निजी अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने अज्ञात चालक के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है।
 मिली जानकारी अनुसार सत्यपाल नांगल मोहनपुर ने मामला दर्ज करवाते हुए कहा है कि वह अपने साले के लड़के को भोजावास डाक्टर को दिखा कर वापस अपने गांव मोहनपुर नांगल आ रहा था। पड़तल के पास पहुंचा तो तेज रफ्तार से पड़ताल की ओर से आ रही गाड़ी ने मेरे आगे चल रहे हैं मोटरसाइकिल सवार को टक्कर जड़ दी। मोटरसाइकिल सवार गिर गया। सत्यपाल ने अपनी मोटरसाइकिल रोक उसे उठाया और उसे पहचाना वह अंकित नाम का युवक उनके गांव का रहने वाला था। उन्होंने निजी साधन उपलब्ध करवाकर अंकित को कनीना अस्पताल पहुंचाया तभी अंकित के परिजन कनीना आ गए। उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। उनका इलाज रेवाड़ी के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांंच शुरू कर दी है।





 विगत वर्ष की तुलना में खरीदा जा चुका है अधिक गेहूं
 -गेहूं की आवक अब हो गई है कम
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 कनीना। कनीना अनाज मंडी में विगत वर्ष की तुलना के इस वर्ष गेहूं की करीब दोगुनी खरीद हो चुकी है जबकि विगत वर्ष सरसों की आवक बहुत अधिक थी। इस बार एक दाना भी सरसों का नहीं खरीदा गया। गेहूं की आवक धीरे-धीरे कम होने लग गई है। किसान कम संख्या में गेहूं लेकर आ रहे हैं।
किसानों की माने तो उनका कहना है कि गेहूं के भाव बढऩे लगे हैं। कोरोना के चलते हर चीज महंगी होने लग गई है जिसके चलते गेहूं के भाव बढऩे लगे हैं। सरसों तो पहले ही महंगे दामों पर बिक रही थी। यही कारण है कि कनीना अनाज मंडी में सरकारी रेट पर सरसों बेचने कोई किसान आज तक नहीं आया है जबकि गेहूं की मांग गांवों में अधिक होने के कारण किसान गेहूं लेकर कम आ रहे आ रहे हैं। प्रतिदिन जहां 200 किसान से अधिक आते थे अब वही 80 किसानों के आसपास पहुंच रहे हैं। यही हालात रही तो आने वाले समय में गेहूं बेचने के लिए कोई किसान नहीं आएगा।
कितनी रही है गेहूं की खरीद-
 विगत वर्ष पूरे खरीद दौरान एक लाख पांच हजार बैग गेहूं के खरीदे गए थे जबकि इस वर्ष अभी तक इस वर्ष 1,84,840 बैग गेहूं के खरीदे जा चुके हैं।
हैफेड मैनेजर सतेंद्र यादव ने बताया कि विगत वर्ष सरसों की खरीद रिकार्ड थी, अब की बार गेहूं की खरीद रिकार्ड पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अभी तक एक दाना भी सरसों नहीं खरीदा है क्योंकि किसान सरसों लेकर नहीं आ रहे हैं।
फोटो कैप्शन 2: कनीना मंडी में गेहूं की खरीद का नजारा।





व्यापार मंडल प्रकोष्ठ के उप प्रधान ने ली वैक्सीन डोज
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कनीना। कनीना अनाज मंडी स्थित व्यापार मंडल प्रकोष्ठ के उप-प्रधान रविंद्र बंसल ने अपनी पत्नी अनीता बंसल के संग कोरोना की प्रथम वैक्सीन ली। उन्होंने वैक्सीन लेने के बाद कहा कि वैक्सीन आत्म सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी बन गई है। जब पूरे ही जग में महामारी फैल रही है ऐसे में अपनी अपनी सुरक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी बनती है। देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी जा रही कोरोना वैक्सीन को जरूर लेना चाहिए। यह सुरक्षित तो है ही साथ में महामारी से भी बचाती है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है इस महामारी को जड़ से उखाडऩा चाहिए। अपने देश में जहां वैक्सीन बनी हुई है, इस वैक्सीन का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए तभी इस महामारी को भगाया जा सकता है।
उमड़ी भीड़-
 कनीना उप नागरिक अस्पताल में जहां 2 दिनों के बाद वैक्सीन आने से भीड़ उमड़ पड़ी। प्रथम तो दूसरी डोज लेने के लिए उप नागरिक अस्पताल में लोग पहुंचे। उल्लेखनीय है कि कनीना उप नागरिक अस्पताल में जहां दोनों ही डोज समाप्त हो गई थी। 2 दिनों के बाद फिर से डोज आई है। यही कारण है कि लोगों में जागरूकता देखने को मिली।
फोटो कैप्शन 3: रविंद्र बंसल डोज लेते हुये।



किसान जुटे कृषि कार्यों में
-कपास की ओर रुझान कम
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 कनीना। किसान एक बार फिर से खरीफ फसल की तैयारियों में लग गए हैं। रबी फसल पैदावार लेने के बाद अन्न को बेचकर किसान खरीफ विशेषकर कपास की बीजाई की तैयारियों में लगे हैं। खेतों में खाद डालने का काम जारी है।
   वैसे तो किसानों की प्रमुख फसल गेहूं की है। किसान गेहूं को खाने के लिए सबसे अधिक प्रयोग करते हैं वहीं बाजरे की फसल चारे के लिए अधिक उपजाया जाता है और खाने के लिए कम। रबी फसल बेहतर पैदावार नहीं दे पाई। कुछ पैदावार हुई बेचकर घर के कामों के लिए धन प्राप्त किया है। विगत वर्षों से किसान कपास फसल की ओर आकर्षित हुये थे किंतु विगत वर्ष कपास की फसल में रोग आ जाने से किसान नुकसान की ओर चले गये थे। परिणामस्वरूप इस बार किसानों का रुझान कपास की ओर कम है।
 अब किसान खरीफ फसल की तैयारी में लग गया है। खेतों में खाद डालने विशेषकर गोबर का खाद डालकर उसे बिखेरने तथा बारिश होने का इंतजार करेंगे। किसान गर्मियों में अपनी ऊंटगाड़ी, ट्रैक्टर एवं ट्राली से खाद खेतों में डालते हैं।
  कनीना के किसान अजीत सिंह, योगेश कुमार, रोहित कुमार ने बताया कि रबी फसल पैदावार लेने के तुरंत बाद किसान अपनी खरीफ फसल में लग जाता है। इस दौरान बाजरा, ग्वार एवं कपास आदि उगाते हैं। किसानों ने बताया कि खरीफ फसल पूर्णरूप से बारिश पर आश्रित है। बारिश होने पर बीजाई कर देते हैं।
  किसान पशु पालक होने के कारण पशुओं के गोबर से खाद बनाते हैं या फिर गोबर से कंपोस्ट व केंचुआ खाद बनाकर खेतों में डालने लगे हैं।  किसान मेहनती है और गर्मी में भी खेतों में खाद डाल रहे हैं।
फोटो कैप्शन 4: किसान खेत में खाद डालते हुए।













Wednesday, April 21, 2021

 
80 किसानों से खरीदा 3400 क्विंटल गेहूं
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 कनीना। कनीना अनाज मंडी में विगत 21 दिनों से गेहूं की खरीद जारी है किंतु सरसों का एक दाना भी नहीं खरीदा गया है। इन 21 दिनों में 2529 किसानों से 92420 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। अकेले बुधवार को 80 किसानों से 3400 क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। खरीद एजेंसी हैफेड के मैनेजर सतेंद्र यादव ने बताया कि बुधवार को 5000 बैग उठाना किए गए जबकि कुल लिफ्टिंग 180500 बैग पहुंच चुकी है।




पृथ्वी को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी -नवीन
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 कनीना। पृथ्वी को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। ये विचार नवीन कुमार सामाजिक संस्था के अध्यक्ष एवं समाजसेवी नवीन कौशिक ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि पृथ्वी को दिन और दिन काटा जा रहा है, पेड़ पौधे से रहित बनाया जा रहा है, जीव जंतु धीरे धीरे कम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे लगातार पृथ्वी को बचाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि वे लगातार पेड़ पौधे लगाकर पृथ्वी को बचा रहे हैं वहीं जीव जंतुओं को बचाने के लिए जगह-जगह सिकोरे रखे रहे हैं। अब छतों पर
भी सिकोरे रखने का अभियान चला दिया है। उनका कहना है कि जब जीव जंतु बचेंगे, पेड़ पौधे अधिक रहेंगे, तभी यह पृथ्वी बचेगी वरना इंसान भी नहीं बचेगा।
उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाया जाता है किंतु पृथ्वी का ख्याल नहीं रख अपना ख्याल अधिक रखते हैं। पृथ्वी पर गंदगी बढ़ाई जाती है, जगह-जगह गड्ढे किए जाते हैं किंतु पृथ्वी की ओर ध्यान नहीं दिया जाता।




52 सैंपल कोरोना टेस्ट के लिए लिए
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 कनीना। उप नागरिक अस्पताल कनीना में 52 सैंपल कोरोना के लिए लिए गए। बुधवार को डॉ जितेंद्र मोरवाल ने ये सैंपल लिए। कनीना और आसपास क्षेत्रों में जहां कोरोना महामारी बढ़ती ही जा रही है जिसको लेकर प्रतिदिन सैंपल लिए जा रहे हैं। वही कोरोना के मरीज भी बढ़ते ही जा रहे हैं।
 वैक्सीन का अभाव-
 जहां कनीना में आए दिन करोना विस्फोट हो रहा है वही 2 दिन से यहां वैक्सीन भी न होने के कारण लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2 दिन से कनीना सीएससी में कोविड-19 की वैक्सीन नहीं होने के कारण लोगों में टीकाकरण नहीं हो रहा है वहीं दूसरी तरफ आए दिन कनीना व उसके आसपास के गांव में क्रोना महामारी ने विकराल रूप धारण किया हुआ है। जिसके चलते शायद ही कनीना का कोई ऐसा गांव बचा होगा जिसमें एक भी केस कोरोना का ना हो। वहीं कोविड-19 की टीम ने बताया कि 2 दिन से वैक्सीन ना होने के कारण लोगों को बिना वैक्सीन के ही वापिस जाना पड़ता है। वही आज भी कनीना वह इसके आस-पास के गांव मैं 9 नए मरीज आने से खलबली मच गई है। क्षेत्र के  लोगों ने प्रशासन से मांग कर कनीना सीएचसी में तुरंत प्रभाव से कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध कराई जाये ताकि आए दिन लोगों को वैक्सीनेशन हो सके वही सेहलग सीएचसी के प्रभारी डा प्रभा यादव ने बताया कि आज हमारे क्षेत्र में कोई नया मरीज नहीं आया जिसको लेकर लोगों ने राहत की सांस ली है वही 128 लोगों को वैक्सीन देकर उनको कोरोना से बचाने का भरसक प्रयास किया गया है।
भोजावास में दी 92 वैक्सीन--
पीएचसी भोजावास में 92 वैक्सीन दी गई। एचआई राजकुमार चौहान ने बताया कि प्रथम डोज 51 तो 41 दूसरी डोज दी गई। मंगलवार को यहां वैक्सीन अभाव रहा।



मां बहनों की इज्जत ही मां की सच्ची आराधना -महाराज
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कनीना। संसार की महिलाओं को सम्मान देना ही मां की सच्ची आराधना है।
क्योंकि जब तक हम संसार की मां बहन बेटी को सम्मान नहीं देंगे तब तक हम सुख और शांति को प्राप्त नहीं कर सकते। ये विचार संत शिरोमणि कृष्णानंद महाराज ने कनीना के गांव धनौंदा की बणी में नवरात्रों की पूर्ण होने पर व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि शपथ लेनी चाहिए कि जीवन में मां बहन बेटियों की इज्जत करेंगे। किसी युग में मां बहन और बेटियों पर अत्याचार हुआ है तो सभी लोगों को उसका खामियाजा भुगतना पड़ा है।
   उन्होंने कहा कि यज्ञ एक ऐसा साधन है जिससे निकलने वाले धुएं से कीटाणु खत्म होते हैं और जीवाणुओं को बल मिलता है। एसडीएम दिनेश कुमार ने भी यज्ञ पर बोलते हुए कहा कि यज्ञ में मिल जुल कर रहना सीखा जाता है क्योंकि जिस प्रकार यज्ञ में जो सामग्री डाली जाती है वह विभिन्न पदार्थों से मिश्रित होती है जो स्वयं तो जल जाती है पर सुगंध देकर जाती है जिससे मानव को सुखमय जीवन मिलता है।  इस अवसर पर डा फतेह चंद दायमा,अनिल यादव, ज्योति सिंगल, विनय पाल खेड़ी, अतर सिंह, शिव कुमार जांगड़ा, विजय कुमार हलवाई, सुरेंद्र यादव, नरेंद्र लाल पवन प्रजापत के अलावा अन्य लोग उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 8: धनौंदा में हवन करते संत।




सभी शुभ कार्य यज्ञ से संपन्न होते हैं-लालदास
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कनीना। सभी शुभ कर्म यज्ञ द्वारा सफल होते है। उक्त विचार उधोदास आश्रम के संत लालदास महाराज ने गौशाला स्थापना की 14वीं वर्षगांठ तथा रामनवमी के उपलक्ष्य पर आयोजित यज्ञ के उपरांत यज्ञ पर आए भक्तगणों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने लोगों को कहा कि इस दुनियां में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले यज्ञ का आयोजन किया जाता है तथा सभी कार्य यज्ञ से सफल होते है। यज्ञ हमें एकत्रित होना सिखाता है और एकता का परिचय देते हुए प्रदूषण नामक राक्षस पर विजय दिलाता है। उन्होंने यज्ञ पर आए पुरुषों को समझाते हुए कहा की सबसे पहले हमें यह देखना चाहिए की हम इस दुनिया में आए क्यों है और यहां आ भी गए तो अब हमें करना क्या है? महाराज कहते हैं कि भगवान् ने हमें मानव शरीर प्रदान करके हम पर बड़ी कृपा की है और साफ शब्दों में कहा है कि हे मानव -आप कर्म करने में स्वतंन्त्र है लेकिन इसका फल भोगने में परतन्त्र है इसलिए आप जैसा कर्म करेंगे वैसा ही आपको उसका फल मिलेगा।
 उन्होंने कहा कि घर में जो खाना तैयार करते हो उस समय पहली रोटी गाय के नाम की निकालनी चाहिए तथा आखिरी रोटी अन्य जीव जंतुओं की निकालनी चाहिए। महाराज कहते है कि इस प्रकार रोजाना करने से समझो की आपने एक प्रकार से एक छोटा यज्ञ आए दिन संपन्न कर लिया है। महाराज ने महिला एवं पुरुषों को गाय की महत्व बताते हुए कहा कि आप गाय की सेवा करोगे तो यह सेवा भगवान् की सीधी और सच्ची सेवा होगी इस लिए सबको अपनी इमानदारी और मेहनत से की गई कमाई का दसवां भाग निकाल कर अवश्य ही गायों की सेवा में लगाना चाहिए। इस मौके परकंवर सिंह, अनिल कुमार, दीपक, रणधीर सिंह, मास्टर नितिन, सूबे सिंह आदि उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 5: हवन करते संत लालदास।



कर्मचारी महासंघ के प्रदेश प्रवक्ता ने लगवाई कोविड वैक्सीन
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कनीना। गांव बाघोत के सीएचसी सेंटर में महावीर पहलवान प्रदेश मुख्य प्रवक्ता हरियाणा कर्मचारी महासंघ ने कोविड-19 की वैक्सीन ली। जिसको रीटा एमपीएच डब्ल्यू(फीमेल)व धर्मेन्द्र एमपीएचडब्ल्यू(मेल) ने वैक्सीन दी।
  इस मौके पर उन्होंने समाज के प्रबुद्ध लोगों से अपील की है कि यह वैक्सीन जरूर लगवाए।  श्री पहलवान ने कहा किकोरोना से बचाव करने के लिए कम से कम 2 गज की दूरी बनाए रखे। यह एक वैश्विक महामारी है इससे बचाव का एक ही उपाय है। जब भी बाहर से घर में जाए अपने हाथ साबुन से धोए, सेनेटाइजर का प्रयोग अवश्य करे, बचाव में ही बचाव है। दो गज की दूरी, जीवन है जरूरी।  बाघोत गांव की सीएचसी पर 80 वैक्सीन दी गई। रीटा ने बताया कि ये वैक्सीन 45 साल से ऊपर के पुरुष व महिलाओं को दी जा रही है जिससे कोरोना से बचाव किया जा सके।  टीम में सोनू शर्मा, लीलावती अशा वर्कर, सीमा, सुनीता, सरिता,सुमन आदि स्टाफ मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 6: महाबीर पहलवान वैक्सीन लेते हुए।



गांवों में नहीं आने दी जाएगी समस्या-एसडीएम
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कनीना। जब तक पंचायती चुनाव नहीं हो जाते हैं तब तक किसी भी गांव में किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी, चाहे उसके लिए प्रशासन को दिन रात क्यों न मेहनत करनी पड़े। ये विचार कनीना के एसडीएम दिनेश कुमार ने कनीना उपमंडल के विभिन्न गांव के दौरे करने के उपरांत व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार पंचायत चुनाव नहीं हो जाते हैं तब तक आमजन को संभालना प्रशासन की जिम्मेवारी बनती है। उन्होंने विभिन्न गांवों में लोगों से बात कर उनका हालचाल जाना। उप मंडल अधिकारी ने बताया कि प्रशासन का फर्ज बनता है कि वह उसके क्षेत्र में आने वाले गांव की सभी समस्याओं को गंभीरता से लें और उनमें जो भी बन सके उनको जल्द से जल्द निपटाने का प्रयास करें।
 गांव धनौंदा का दौरा कर लोगों की समस्याएं जानी। इस अवसर पर एसडीम दिनेश कुमार ने लोगों से अपील की है कि करोना महामाारी के  दौर में हमें सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए अपने घरों में रहना चाहिए और अगर कोई जरूरी काम हो तो उसके लिए मास्क का प्रयोग करना चाहिए वही साथ में 2 गज की दूरी बहुत है जरूरी इस बात को भी ध्यान में रखकर के अपना वह अपने चहेतों का ध्यान करते हुए देश को महामारी से बचाओ अभियान में सहयोग करें।


पुनर्नियुक्ति के आधार पर लगे शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी
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 कनीना। हरियाणा शिक्षा विभाग ने सुगम शिक्षा के अंतर्गत सेवानिवृत्त अध्यापकों/प्राध्यापकों को की सेवाएं तुरंत प्रभाव से स्थगित करने का आदेश दिया है।  निदेशक माध्यमिक शिक्षा विभाग हरियाणा पंचकूला ने आदेश जारी किया है कि कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों के 30 अप्रैल तक अवकाश घोषित कर दिया है। इसलिए विद्यालय में कार्यरत सेवानिवृत्त अध्यापकों/ प्राध्यापकों की सेवाएं तुरंत प्रभाव से आगामी आदेशों तक स्थगित कर दी जाएं और उन्हें अविलंब कार्यभारमुक्3त कर दिया जाए।



कंजकों को करा





या भोजन
-गौशाला में भी खिलाया खाना
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कनीना। कनीना क्षेत्र में नवरात्रों के नौवें दिन कंजकों को भोजन कराया गया और दिनभर लड़कियों को भोजन कराने का सिलसिला जारी रहा। 5-5 घरों में एक-एक लड़की को भोजन करना पड़ा। विगत तीन दिनों से कंजकों को भोजन कराया जा रहा है। राम नवमी का पर्व मनाया वहीं नवरात्र भी संपन्न हो गये हैं।
  कनीना क्षेत्र में दुर्गा सप्तमी से विभिन्न घरों में नवरात्रों की कढ़ाई करने का सिलसिला जारी है किंतु खाना खाने वाले कंजकों की संख्या कम ही रही। सुबह सवेरे से ही विभिन्न घरों से लड़कियों को खाने पर बुलाया गया। यहां तक की बच्चियों को मल मूत्र भी त्यागने के लिए बाद में जाना पड़ा। घरों में एक ही परिवार के कई-कई सदस्यों ने व्रत धारण किया हुआ था।  कुछ जगह तो गरीब तबके के बच्चों को भी आज बेहतर खाना मिला। दिनभर यह कार्यक्रम चलता रहा। आजकल रेडीमेड भोजन एवं आधुनिक फास्ट फूड का भोजन भी खिलाने की परंपरा बढऩे लगी है। फल एवं सब्जियों के दाम खूब बढ़ाए गए। केला 80 रुपये दर्जन तक बेचा गया वहीं सब्जियां भी आम दिनों से पांच से दस रुपये महंगी बेची गई। इस बार स्कूलों में अवकाश होने तथा कोरोना की मार के चलते कतराते हुये बच्चियां खाना खा रही थी।
बच्चियों को घर पर पहुंचाए पैकेट-
राम नवमी पर जहां कन्या पूजन के स्थान पर जिन घरों में कन्याएं हैं उनके यहां खाना पहुंचाने का कार्य दिनभर चलता रहा। कुछ लोग जहां दूसरे प्रदेशों के लोग रहते हैं वहां पर कन्याओं को खाना देते रहे तो कुछ लोगों ने गौशाला में जाकर गायों खाना खिलाया। अब तो हालात यह है कि कोरोना के चलते कुछ लोगों ने घरों में कन्याओं को भी नहीं बुलाया।
फोटो कैप्शन 2: कंजक भोजन करते हुए।