Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Sunday, May 19, 2024


 
कनीना में नेहरू युवा केंद्र के माध्यम से पक्षियों के लिए दाने-पानी की व्यवस्था
---जीवों की सेवा हमारा फर्ज       
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कनीना की आवाज।  रविवार को नेहरू युवा केंद्र के जिला युवा अधिकारी नित्यानंद यादव के नेतृत्व में कनीना के विभिन्न पार्कों में पक्षियों के लिए दाना पानी अभियान चलाया गया। नेहरू युवा केंद्र की ब्लाक वालंटियर रचना शर्मा ने बताया कि जिला युवा अधिकारी नित्यानंद यादव के मार्गदर्शन में पक्षियों के लिए दाना पानी अभियान चलाया गया है, इसके तहत गर्मी के मौसम में जहां पर अधिक पक्षी है वहां पर पक्षियों के लिए दाने व पानी की व्यवस्था करने का कार्य है। कार्यक्रम के तहत जो भी बोले वालंटियर जुड़ रहे हैं। उन्हे सुबह-शाम इन में पानी डालने का कार्य करने के जिम्मेदारी दी गई है। रचना शर्मा ने कहा की पक्षियों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। पक्षियों की संख्या में लगातार कमी हो रही है। ऐसे में उनकी अच्छी तरह से केयर करने और भावी पीढिय़ों तक  बचाए रखने के लिए यह जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति उनके लिए दाना पानी की व्यवस्था करें।  ऐसे ही छोटे छोटे प्रयासों से सभी के सहयोग से परिंदों का संरक्षण हो पाएगा। जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक प्रणाली की पक्षियों को बचाने के लिए बड़ी चुनौती हैं। गर्मी के दौरान पशु-पक्षियो को पानी न मिलने से मौत हो जाती है। बढ़ते तापमान की वजह से पक्षी खुद को असहाय महसूस करते हैं और उड़ान नहीं भर पाते। कई बार तो कमजोर और बीमार होकर नीचे भी गिर पड़ते हैं। प्रकृति को बचाने और पर्यावरण को बनाए रखने के लिए पक्षियों के लिए पानी व दाने की व्यवस्था करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जगह-जगह गांव में यह अभियान चला कर पशुओं को ले जाना पानी की व्यवस्था करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस दौरान  ब्लाक वालंटियर दीपक कुमार, राहुल शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, अनिल, अभिषेक, प्रियंका, पूनम, सुनीता, राजबाला, हिमांशी सहित अन्य मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 04: पक्षियों के लिए स्कोर रखते हुए ब्लाक वालंटियर रचना शर्मा।









नवतपा 25 मई से
अस्पतालों में किये गये विशेष प्रबंध
--भीषण गर्मी से बचे--डा जितेंद्र
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कनीना की आवाज।  25 मई से नवतपा  शुरू हो रहा है जो 2 जुलाई तक चलेगा। यदि उस समय का ताप देखा जाए तो 48 डिग्री तक पहुंच गया है जबकि कम से कम ताप 31 डिग्री रहेगा।
इस वक्त 12 घंटे से अधिक समय सूरज चमक रहा है और तापमान आगे बढ़ाने की संभावना बढ़ रही है। जहां मौसम की जानकारी रखने वाले रविंद्र कुमार बताते हैं कि आगामी समय में इस प्रकार ताप रहने की संभावना है-
दिनांक         कम से कम ताप  अधिकतम ताप
                डिग्री सेंटीग्रेड        डिग्री सेंटीग्रेड
20 मई            30                 45
21 मई            29                 45
22 मई            30                 47
23 मई            30                 46
24 मई            31                 44
25 मई            33                 48
26 मई            32                 48
27 मई            31                 46
28 मई            33                 47
29 मई            32                 47
30 मई            32                 45
31 मई            31                 43
01 जुलाई         31                 43
02 जुलाई         32                 44
नवतपा दौरान सूर्य 13 घंटों से अधिक समय तक चमकता रहेगा।
नवतपा कहे को तो 9 दिन चलेगा कि लगातार 15 दिनों की अवधि में ताप अधिक रहता है। इस दौरान पृथ्वी के पृथ्वी सूर्य के बहुत पास से गुजरती जिसके कारण तापमान बढ़ जाता है। इस दौरान बीमारियां भी बढ़ जाती है। ऐसे में धूप से बचना बहुत जरूरी होता है।
 क्या कहते हैं डाक्टर-
डा.जितेंद्र मोरवाल कनीना उप-नागरिक अस्पताल बताते हैं कि गर्मी बढ़ जाने से जहां 10 प्रतिशत तक मरीज बढ़ गये हैं। जहां लू लगना, उल्टी, बुखार दस्त आदि की शिकायत बढ़ जाती है। धूप से बचना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में सभी दवाओं का प्रबंध नवतपा और हीट वेव को देखते हुए किया गया है। ओआरएस का घोल उपलब्ध कराया गया है ताकि किसी प्रकार की इमरजेंसी से बचा जा सके।
 कैसे बचा जाए तपन से-
डा. जितेंद्र मोरवाल बताते हैं की धूप से बचने का सबसे सरल उपाय है घर में छुपकर बैठे रहे। हवादार कमरे में रहे। यदि बाहर जाना पड़े तो पानी की बोतल साथ लेकर जाए तथा पूरे कपड़े शरीर पर पहने, हाथ पैर सर सभी ढके हुए होने चाहिए। पैरों में चप्पल जूते होने चाहिए ताकि गर्मी और तपन से बचा जा सके। इस दौरान तरल पदार्थ जैसे पानी, जूस, लस्सी ,दूध आदि अधिक प्रयोग करना चाहिए। जंक फूड से इस समय बचना चाहिए, ठोस भोजन कम से कम प्रयोग करना चाहिए। हो सके तो कूलर की हवा में बैठना चाहिए।  जब सुबह और शाम ताप कम हो जाए उस समय यदि कोई जरूरी काम हो तो बाहर निकलना चाहिए उनका कहना है कि गर्मी और नवतपा से धूप, लू लग जाती है, बुखार आ जाता है और इसमें बचाव में ही बचाव है। उन्होंने बताया घर पर ग्लूकोस वगैराह प्रयोग करें तथा साथ में ओआरएस का बनाकर रखे। ओआरएस घोल बनाना बहुत सरल है। नमक चीनी और थोड़ा सा नींबू का रस भी डाले तो बेहतरीन स्वाद का घोल तैयार हो जाता है। पानी अधिक से अधिक प्रयोग करें, शरीर में पानी की कमी ना आने दे।
 उधर बालकिशन और श्रीकिशन वैद्य क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं।  उनका कहना है कि अगर धूप लग जाए, लू लग जाए तो उससे बचने के लिए पुराने समय से बुजुर्ग कच्चे आम को भूनकर उसका रस, नमक ,चीनी आदि मिलाकर पीते आए हैं जो धूप और गर्मी से बचाता है। यह भी ओआरएस की भांति काम करता है। नवतपा से बचाव में ही बचाव है।
फोटो कैप्शन: डा जितेंद्र मोरवाल



गर्मियों में जोहड़ एवं तालाब में नहाने से बचे
--हर वर्ष हो जाती हैं डूबने से कई मौत
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कनीना की आवाज। दिनोंदिन गर्मी बढ़ती जा रही है। विशेषकर गर्मियों में एक जून से 30 जून तक स्कूल बंद रहेंगे और स्कूली बच्चे या तो अपने नाना नानी के यहां या कहीं घूमने के लिए अक्सर जाते रहते हैं। हर वर्ष गर्मियों के दिनों में डूबने से कई बच्चों की मौत हो जाती है क्योंकि वे जोहड़ तालाब आदि में नहाने के लिए उतरते हैं और आजकल जोहड़ तालाबों में गाद भरी होती है जिसके कारण वे गाद में गिर जाते हैं। कई कई बार तो लोग जोर से छलांग लगाकर जोहड़ तालाब में नहाने का प्रयास करते हैं जिसके कारण भी उनकी मौत हो जाती है। कनीना के बड़ी बणी के टैंक में भी कई मौत हो चुकी है जिसके पीछे चाहे कारण कुछ भी हो परंतु माना जाता है नहाने के लिए और पानी पीने के लिए लोग घुसते हैं और डूब जाते हैं। विभिन्न जोहड़ों में डूबने से ऐसी घटनाएं सामने आती है।
 एक वक्त था जब जोहड़ और तालाब में बहुत से लोग नहाते थे, जब पानी साफ भरा होता था। बुजुर्ग आज भी बताते हैं कि उन्हें अच्छी प्रकार तैरना आता है जबकि युवा पीढ़ी और बच्चे तैरना तक नहीं जानते और वे पानी में उतर जाते हैं जिसका परिणाम अच्छा नहीं रहता। बुजुर्ग कृष्ण कुमार, राजेंद्र सिंह, महेश कुमार, दिनेश कुमार दिलीप, मुकेश आदि बताते हैं कि एक वक्त था जब पशुओं को जोहड़ में पानी पिलाने के लिए ले जाया जाता था। साथ-साथ लोग भी उनके पीछे चलते थे। गर्मी के दिनों में नहाना आनंददायक होता था।  लोग भैंस की पूंछ पड़कर पानी में घुस जाते थे और भैंस की पूंछ को नहीं छोड़ते थे जिसके कारण वह पूरे ही जोहड़ व तालाब में स्नान करके आते थे। यहां तक की तैरने का भी अभ्यास करते थे। भैंस के साथ-साथ जोर से बाहर आ जाते थे। वह वक्त अजीब होता था परंतु अब तो पशु कम रखे जाते और उन्हें पशुओं को जोहड़ /तालाब का लोग पानी कम ही ले जाते हैं।  अधिक गर्मी पडऩे से जहां नहाने की इच्छा हो जाती है। अमीर तबके के लोग तो अपने एसी के घरों में घुसे रहते लेकिन गरीब तबके के लोग नहाकर या पंखे के नीचे बैठकर गुजारा करते हैं। अक्सर नहाने के लिए भी गर्मी में पानी की कमी हो जाती जिसके चलते जोहड़ और तालाब में चले जाते हैं। इस संबंध में कुछ पर पुराने तैराकों से बात भी हुई।
***गर्मियों के दिनों में या तो बच्चों को जोड़ तालाब के पास नहीं जाना चाहिए और जाए भी तो अपने परिवार अच्छे तैराक के साथ जाना चाहिए ताकि किसी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। अगर हो सके तो बहुत कम पानी में ही स्नान करना चाहिए, गहरे पानी में किसी भी हाल में नहीं जाना चाहिए। यहां तक की पुराने समय में लोग  वाहनों की ट्यूब में हवा भरकर उसी के सहारे तैरने का अभ्यास करते थे, घड़े को उल्टा पानी में रखकर भी उस पर बैठकर स्नान करते थे, तैरने का अभ्यास करते थे, पजामा में हवा भरकर भी तैरने का अभ्यास करते थे और भैंस आदि की पूंछ पड़कर भी तैरने का अभ्यास करते थे लेकिन इनमें जोखिम भरा कार्य है। किसी अच्छे तैराक की मदद से ही जोहड़ व तालाब में उतरना चाहिए नहीं तो जान को जोखिम में डालना है। अच्छा हो कि घर में ही एक बाल्टी पानी से स्नान कर लेना चाहिए।
--भगत सिंह कनीना निवासी समाजसेवी एवं तैराक
 गर्मियों के दिनों में हो सके तो पानी के पास न जाए। वाटर पार्क आदि बने हुए हैं उसमें जाकर तैरने अभ्यास किया जा सकता है। जिन परिवारों में गरीब हालात है वो अक्सर जोहड़, तालाब, नहर में चले जाते हैं तो ऐसे में किसी बेहतर तैराक की मदद से ही इन स्थानों पर जाना चाहिए वरना उनके पास नहीं जाए ताकि जान को खतरा न हो। उनका कहना है कि लोग तालाब जोहड़ पर चले तो जाते हैं किंतु छलांग लगा, कूद कर स्नान करते हैं। उससे कई बार गाद भरी होती है और गाद में जाकर गिर जाते हैं और व्यक्ति की मौत हो जाती है। ऐसे समय में बगैर तैराक के तैराकी का प्रशिक्षण लिए बगैर जोहड़ के तालाब के पास किसी भी हाल में नहीं पानी के पास नहीं जाना चाहिए। गर्मी की छुट्टियों में हो सके घर के अंदर ही बैठकर थोड़े बहुत पानी से स्नान कर ले और पंखे या कूलर जो भी संभव है उसके पास बैठकर आराम करें तो लाभ मिल सकता है।
--कृष्ण प्रकाश,कनीना, तैराक एवं समाजसेवी
 फोटो कैप्शन: भगत सिंह और कृष्ण प्रकाश साथ में
फोटो कैप्शन दो: कनीना का टैंक जिसमें मौत भी हो चुकी है





 खाटू श्याम में लगाया बड़ा भंडारा
--हजारों भक्तों ने किया जलपान - रविंद्र कुमार
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कनीना की आवाज। कनीना  के करीब सवा सौ विभिन्न श्याम सेवक विभिन्न श्याम सेवकों ने खाटू श्याम राजस्थान में जाकर भंडारा लगाते आ रहे हैं। रविवार को उन्होंने खाटू श्याम में अपना भंडारा लगाया। भंडारा लगाकर हजारों भक्तों को उन्होंने जलपान करवाया। वे सोमवार को वहां से रवाना होंगे।
 इसकी जानकारी देते हुए श्री श्याम सेवा कनीना के भक्त रवि कुमार ने बताया कि पिछले 7 सालों से लगातार भंडारा लगाते आ रहे हैं जिसमें कनीना क्षेत्र के विभिन्न समाजसेवी, श्याम भक्त मंदिर के समक्ष जाकर भंडारा लगते हैं। भंडारे का कार्यक्रम बहुत बेहतरीन चला। रोडवेज की बस से विभिन्न भक्त पहुंचे और सोमवार को विभिन्न भक्ति वापस आएंगे। उन्होंने फोन पर बताया कि खाटू श्याम में बेहतर ढंग से भंडारा लगाया। दूर दराज से आने वाले भक्तों ने भोजन का प्रसाद ग्रहण किया तथा खुशी व्यक्त की।
 इस मौके पर रवि कुमार, पृथ्वी टेलर, नीटू जांगड़ा, मुकुट कुमार, सुरेश मिस्त्री, सत्येंद्र मिस्त्री डाक्टर नरेंद्र, नेमी सिंह आदि ने भक्तों को खाना खिलाया।
 फोटो कैप्शन 03: भंडारा लगाते हुए कंगना के श्याम भक्त।


 जागो मोटर जागो
अपने मत का प्रयोग करना सर्वथा उचित-सुरेंद्र सिंह
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कनीना की आवाज। आजादी के बाद 18 वर्ष की उम्र के लोगों को वोट डालने का अधिकार मिला। जिसके लिए निर्वाचन आयोग द्वारा पहचान पत्र भी समय-समय पर बनाए जाते हैं। जो पहचान पत्र बनवा चुके हैं तथा वोटर लिस्ट में जिनका नाम है वह अपना वोट 25 मई को लोकसभा चुनाव में करेंगे। अक्सर देखने में आता है कि लोग अपने मत का प्रयोग करने में कंजूसी बरतते हैं जबकि उन्हें अधिकार मिला हुआ है तो कंजूसी क्यों? अपने मताधिकार का प्रयोग खुलकर करना चाहिए क्योंकि जो अधिकतर  सरकार ने दिया है, निर्वाचन आयोग से मिला हुआ है तो फिर क्यों नहीं इसका उपयोग किया जाए? क्योंकि मत का प्रयोग करना देशहित राष्ट्र हित विकास कार्य आदि कई मुद्दों से जुड़ा हुआ है।  यदि अपने मत का सदुपयोग करें तो निश्चित रूप से देश का भला होगा, देश का विकास होगा। लोग एक किलोमीटर की दूरी तक जाने से कतराते हैं अक्सर वोट को प्रयोग नहीं करते, वोट खराब चल जाता है परंतु उनकी हिम्मत नहीं होती कि वोट डाले। कई कारणों के चलते हुए वोट नहीं डालते लेकिन अपनी संकीर्ण मानसिकता को विस्तृत करते हुए वोट जरूर डालने जाए। हो सके तो अपने मनपसंद नेता का चुनाव करें ताकि भविष्य में काम आए। यदि वोट नहीं डालेंगे तो देश का विकास का ही मुद्दा धूमिल हो सकता है।
-- सुरेंद्र सिंह कनीना निवासी समाजसेवी



उन्हाणी हादसे को लेकर धनौंदा में हुई महापंचायत
-आरोपित को गिरफ्तार करने का दिया अल्टीमेटम
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कनीना की आवाज। उन्हानी गांव के पास हुए स्कूल बस हादसे में मृतक तथा घायल बच्चों के परिजनों को न्याय देने की मांग को लेकर गांव धनौंदा में न्याय महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत में आसपास के अनेक गांवों के लोगों ने भाग लिया। महापंचायत में चेतावनी दी गई कि 24 घंटे के अंदर आरोपित सुभाष को गिरफ्तार कर शेष मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आगामी 21 मई को उपमंडल अधिकारी नागरिक, कनीना के कार्यालय के समक्ष धरना दिया जाएगा और 23 मई को पाली में पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन दिया जाएगा। न्याय महापंचायत की अध्यक्षता समाजसेवी अतरलाल ने की।
महापंचायत को संबोधित करते हुए ठाकुर रतन सिंह चेयरमैन, राजेंद्र सिंह नंबरदार, जिला पार्षद अजीत सिंह, सरपंच प्रतिनिधि थानेदार बीरसिंह परमार, डा. कंवरपाल, सूबेदार पाल, मदन सिंह, भरत सिंह, दुष्यंत, महेश, रविंद्र व ओम प्रकाश शर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस आरोपित को गिरफ्तार करने में जानबूझकर देरी कर न्याय में बाधक बन रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तथा पुलिस प्रशासन द्वारा पीडि़त परिजनों की मांगों की लगातार की जा रही उपेक्षा के कारण झाड़ली, धनौंदा तथा आसपास के गांवों के लोगों में भारी रोष व्याप्त है। न्याय पंचायत में उपस्थित सभी सदस्यों ने पीडि़त परिजनों की मांगों को जायज मानते हुए सर्वसम्मति से चेतावनी दी कि 24 घंटे के अंदर आरोपित सुभाष को गिरफ्तार कर कार्यवाही नहीं की गई तो 21 मई को उपमंडल अधिकारी नागरिक, कनीना कार्यालय के समक्ष धरना दिया जाएगा और 23 मई को पाली में पहुंचकर प्रधानमंत्री के समक्ष पीडि़त परिवार अपना दुखड़ा सुना कर ज्ञापन देंगे। महापंचायत में रतन सिंह चेयरमैन, सूबेदार प्रताप सिंह, सरपंच प्रतिनिधि बीरसिंह परमार, पृथ्वी सिंह पंच, अजीत सिंह जिला पार्षद, सुनील पंच, पूर्व सरपंच मुकेश, भारत सिंह, राजेंद्र सिंह नंबरदार, ओमप्रकाश शर्मा, अजय पहलवान, डॉ मुकेश, मीर सिंह वैद्य, इंद्रपाल सिंह पंच, विक्रम सिंह पंच, कमल सिंह, मुख्तियार सिंह, श्यामलाल अग्रवाल, रविंद्र सिंह, पूर्व पंच बाली सिंह, सूबेदार छाजू सिंह, यादराम, मदन तंवर, सूबेदार मदन सिंह, अशोक, हनुमान, पवन, महेंद्र सिंह, डॉक्टर कंवरपाल सिंह, सतीश शर्मा, दुष्यंत, गिरधारी, पूर्व बीडीसी सदस्य अशोक तंवर, देवेंद्र फौजी, प्रमोद, भवानी, सुभाष,अमर सिंह शर्मा, महेंद्र सिंह, मानसिंह पंच, कलेक्टर सिंह, विष्णु शर्मा, सतीश जोशी, दर्शन कोच, मुकेश पंच, शिवकुमार स्वामी, डा. बालकिशन, सज्जन सिंह, हनुमान, कृष्ण, परविंद्र प्रजापत, रमेश, पवन व संदीप सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 01: धनौंदा में आयोजित पंचायत का नजारा।




राष्ट्रीय मधुमक्खी दिवस- 20 मई
 आत्मनिर्भर बनाने में मधुमक्खियां का अहम योगदान -देवराज
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कनीना की आवाज। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 20 मई को मधुमक्खी दिवस मनाया जाता है। 2023 से दिवस मनाया जाने लगा है। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन के माध्यम से देश भर में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जाता है। मधुमक्खी पालन का विशेष लाभ होता है।
 विस्तृत जानकारी देते हुए पूर्व कृषि अधिकारी डा. देवराज बताते हैं कि मधुमक्खियां कई प्रकार से पौधे और जंतु ओं के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।  मधुमक्खियां फूलों के परागण में सहायता करती हैं। ये शहद, मोम और मूल्यवान उत्पादों का भी उत्पादन करती है जिनका औषधिये और आर्थिक लाभ भी है। जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी तेजी से सहायता करती है क्योंकि मधुमक्खियां पौधों को तेजी से स्वस्थ और बढ़ाने में मदद करती है। मधुमक्खियां रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की आवश्यकता को भी कम करती है। ये पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य संकेतक भी है। फसल उत्पादन में वृद्धि में सहायता करती है, विशेषकर फल और सब्जियां,दलहन आदि के परागण में इसके उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने में इनका अहम योगदान है। एक अनुमान लगाया जाता है कि मधुमक्खी परागण के कारण फसल पैदावार 20 से 30 प्रतिशत बढ़ता है। मधुमक्खियां रोजगार के साधन भी उपलब्ध करवाती है जैसे मधुमक्खी पालन कर शहद, मोम आदि पदार्थ प्राप्त होते हैं जिनका बाजार में अच्छा भाव मिल जाता है। स्वयं सहायता ग्रुप के सशक्तिकरण करने में इनका अहम योगदान है। हालांकि मधुमक्खी पालन बहुत लाभप्रद किंतु कुछ हानियां भी हो सकती हैं।
भारत में धीरे-धीरे मधुमक्खी पालन व्यवसाय बढ़ रहा है। सर्दियों में जब सरसों पर फूल आते हैं तब हिमाचल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के कुछ लोग मधुमक्खी पालन करने के लिए आते हैं। अब उनकी संख्या बढ़ती जा रही है जिसके कारण क्षेत्र के लोग भी मधुमक्खियां से परिचित हो गए हैं। और उनको पालकर अपनी रोटी रोजी कमा रहे














हैं। ऐसे में मधुमक्खी पालन जैव विविधता में भी सहायक है। मधुमक्खियां पालकर इंसान आत्मनिर्भर हो जाता है।
फोटो कैप्शन: डा. देवराज यादव

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