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Tuesday, November 9, 2021



निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का हुआ आयोजन
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कनीना। कनीना की आरएस वाटिका में एक निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस स्वास्थ्य शिविर का आयोजन दिल्ली की अस्पताल आकाश हेल्थ केयर की तरफ से किया गया। यह शिविर कनीना के कप्तान सूबे सिंह, सूबेदार जयनारायण व सुशील मित्तल का विशेष सहयोग रहा। इस जांच शिविर में एक्स-रे ईसीजी, रेंडम ब्लड सूगर ब्लड शूगर, हड्डी रोग विशेषज्ञ हृदय रोग विशेषज्ञ के द्वारा मरीजों की जांच की गई। इस संबंध में जानकारी देते हुए सूबेदार जयनारायण ने बताया कि इस शिविर में आने वाले मरीजों का एक्स-रे बीपी शुगर चेकअप निशुल्क किया गया। इसके साथ ही जिन मरीजों को घुटनों के जोड़ों में दर्द की शिकायत थी उनकी जांच की गई । कुछ मरीजों को ज्यादा गंभीर समस्या नहीं थी उन्हें दवाइयां लिख कर दी गई । जिन लोगों को घुटनों के जोड़ों में ज्यादा दर्द की शिकायत थी उन्हें ऑपरेशन के लिए परामर्श भी दिया गया। इस जांच शिविर में 100 से भी अधिक लोगों ने निशुल्क जांच सेवा का लाभ उठाया।





खाद न मिलने पर लगाया जाम
-किसानों ने लगाया लगभग 2 घंटे जाम
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कनीना। कनीना में खाद न मिलने से परेशान किसानों ने रेवाड़ी महेंद्रगढ़ सड़क मार्ग पर जाम लगाया।
 जाम की सूचना मिलने पर थाना प्रभारी संतोष कुमार अपने दलबल सहित पहुंचे मौके पर पहुंचे।
थोड़ी देर बाद एसडीओ कृषि विभाग अजय कुमार भी मौके पर पहुंचे।
एसडीएम सुरेंद्र कुमार ने लोगों को दस नवंबर को खाद देने के आश्वासन दिया जिसके बाद किसानों ने जाम खोल दिया। सड़क मार्ग जाम होने से दोनो ओर लंबी लंबी कतारें लग गई।े
 खाद की किल्लत कनीना क्षेत्र में लगातार बनी हुई है। लोगों को खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहा है जिससे उनके खेतों में बिजाई नही हो पा रही है इससे गुस्साए किसानों ने कैंनीना में रेवाड़ी महेंद्रगढ़ सड़क मार्ग पर जाम लगा दिया जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गई किसानों का कहना है कि वह पिछले 5 दिनों से खाद  के लिए चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है जिससे उनके खेतों में बिजाई नहीं हो पा रही है। इससे उन्हें नुकसान हो रहा है। वहीं महिलाओं का कहना है कि वह अपने सभी कामकाज छोड़कर खाद के लिए लाइनों में लगी रहती हैं लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल पा रहा है जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है यही नहीं उनके घरेलू कामकाज भी बाधित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार व प्रशासन से जल्दी खाद उपलब्ध करवाने की मांग की। जाम की सूचना मिलने पर थाना प्रभारी संतोष कुमार कृषि विभाग के एसडीओ अजय कुमार तहसीलदार मैडम मौके पर पहुंचे व किसानों को समझाने का प्रयास किया लेकिन किसान उनकी बात से सहमत नहीं हुए तथा लगातार जाम में नारेबाजी करते रहे। कृषि विभाग के एसडीओ अजय कुमार ने  किसानों को समझाने का काफी प्रयास किया लेकिन किसान नहीं माने। किसानों का कहना है कि वह पिछले कई दिनों से अपने काम धाम को छोड़कर खाद के लिए धक्के खा रहे हैं लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल पा रहा है। विशेष तौर से महिलाओं का कहना है कि वह अपना चूल्हा चौका छोड़कर खाद के लिए लाइनों में लगे हैं लेकिन उन्हें कोरे आश्वासन मिलते हैं बिजाई का समय निकला जा रहा है लेकिन अभी तक गेहूं की बिजाई नहीं हो पाई है जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।
बाद में एसडीएम सुरेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे वह कल खाद देने का लोग किसानों को आश्वासन दिया जिसके बाद किसानों ने जाम खोल दिया।
उनका कहना है कि बाजरा नहीं खरीद रही है और ना ही उसको खाद व बीज दे रही है जिसके कारण मजबूरी बस सड़कों पर आना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया के यह सरकार किसान विरोधी है तथा किसानों को खत्म करने पर तुली हुई है जिसको लेकर आज मजबूरी बस हमें सड़कों पर आना पड़ रहा है। पीडि़त किसानों की अगुवाई कर रहे युवा नेता संजय सिंह सराधना ने बताया कि किसान पिछले 20 दिन से परेशान हैं लेकिन उनको खाद नहीं मिल रहा है आखिर सरकार चाहती क्या है जो किसान को न तो खाद ही दे रही है और ना ही उसकी कहीं कोई मदद कर रही है।  किसान दर-दर की ठोकरें खाने पर विवश हो रहा है।इस जाम को लेकर थाना प्रभारी संतोष कुमार व तहसीलदार अवनीत कौर तथा नायब तहसीलदार सत्यपाल यादव के अलावा अन्य उच्च अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और बड़ी मुश्किल से लोगों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाया।
फोटो कैप्शन 8 व 9: जाम से संबंधित एवं कनीना में मौके पर पुलिस बल।



न्यायिक सेवा दिवस मनाया
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 कनीना। कनीना उपमंडल विधिक सेवा समिति ने न्यायिक सेवा दिवस मनाया। इस मौके पर विधिक सेवा समिति के प्रवक्ता कुलदीप कुमार, ओम प्रकाश रामबास, मीनाक्षी यादव, ममता यादव, मंजीत यादव, नरेश कुमार, विक्रमनाथ आदि अधिवक्तागण मौजूद रहे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सिंह एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन मेनका सिंह ने की।     उन्होंने बताया कि सभी नागरिकों के लिए उचित निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित करने हेतु जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 9 नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिए की गई थी। उसको मनाने का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों के लोगों के लिए निशुल्क और कानूनी सेवाओं की पेशकश करना है। यह कमजोर वर्गों के लोगों को मुफ्त सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना होने के साथ-साथ उन्हें अधिकारों के बारे में जागरूक करने का प्रयास करता है। उन्होंने बताया कि लीगल एड द्वारा लोगों को मुफ्त में कानूनी सहायता दी जाती है और बताया कि सीनियर सिटीजन व सभी महिला, माताओं, बच्चों, विकलांग व्यक्तियों के लिए अनुसूचित जाति जनजाति के अधिकारों की रक्षा के लिए मुफ्त में वकील भी लीगल एड द्वारा दिया जाता है। इस अवसर पर देशबंधु यादव एडवोकेट, संदीप एडवोकेट, सुनील लांबा, सतीश कुमार भाटिया एडवोकेट एडवोकेट, देवेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
 फोटो कैप्शन 7: बैठक में भाग लेती एडिशनल सिविल जज मेनका सिंह।



मंगलवार को भी उत्तर भारत रहा जहरीली गैसों के आगोश में
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कनीना। हरियाणा एनसीआर दिल्ली उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के अधिकतर शहर मंगलवार को भी बुरी तरह से जहरीली व प्रदूषित हवा के आगोश में शामिल है।  केंद्रीय पोलूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार यहां की आबोहवा आमजन के लिए बहुत ही खतरनाक स्तर पर है, इसी वजह से इन शहरों में सांस की बीमारी, आंखों की बीमारी, त्वचा संबंधी  बीमारी पेशेंट (बीमार) ज्यादा बढ़ रहे हैं,और संबंधित अस्पतालों में इन पेशेंट की लंबी कतारें देखने को मिल रही  है। राजकीय महाविद्यालय नारनौल  के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डा चंद्रमोहन ने बताया कि वायु प्रदूषण अनियंत्रित यातायात के साधनों, लंबे लंबे परिवहन के साधनों के जाम , बड़े स्तर पर पराली की जलाई और औद्योगिक कारखानों, खनन कार्य, क्रेशर जोन का होना, त्योहारी सीजन पर आतिशबाजी  द्वारा, और ईट भट्टों द्वारा उत्सर्जित धुएं में उपस्थित राख, गंधक व अन्य हानिकारक रसायन  वायु गुणवत्ता के स्तर को गिरा देती है। दिल्ली एनसीआर में बढ़ते हुए प्रदूषण के स्तर के बढऩे के कारण  हरियाणा और उत्तर प्रदेश  में पराली के जलाने पर और आतिशबाजी करने पर सरकार द्वारा रोक लगाई गई है । परंतु लोगों में जागरूकता की कमी और दीपावली के त्योहार पर प्रदूषण वाले पटाखों की जमकर हुई आतिशबाजी और पराली  जलाने से पूरे हरियाणा, एनसीआर दिल्ली और उत्तर प्रदेश की आबो-हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा अधिक बढ़ गई । भारत देश के इन शहरों के वायु गुणवत्ता सूचकांक  मंगलवार को भी  बहुत खराब श्रेणी में रहे हैं। मंगलवार दोपहर को उत्तर प्रदेश और हरियाणा के शहरों में सबसे ज्यादा हवा में जहरीले पदार्थ पाए गए जिनमें फिरोजाबाद 499, आगरा 482, वृंदावन 466, गाजियाबाद 446, बल्लभगढ़ 443, बागपत 436, फरीदाबाद 435, हापुड  432, नोएडा 425, मेरठ 423,  जींद 402,जबकि दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक  में सोमवार को काफी सुधार हुआ था जो 388 था  परंतु आज फिर वायु गुणवत्ता सूचकांक 402 हो गया।  मंगलवार को अति खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक की सूची में  विश्व में सबसे पहले स्थान पर  फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश रहा है, आज विश्व में सबसे खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक में यूपी और हरियाणा के अधिकतर स्थान रहे हैं । जबकि सामान्य वायु गुणवत्ता सूचकांक 0 से 50 तक रहता है, अगर  एनसीआर दिल्ली  में शामिल शहऱो की बात की जाए तो यहां पहले से  कई कारण है, जिनसे वायु गुणवत्ता में कमी आई रहती है जिनमें पराली की जलाई सबसे प्रथम स्थान पर कारण है , त्योहारों पर आतिशबाजी,अनियंत्रित एवं परिवहन के साधनों की अधिकता जगह-जगह परिवहन के साधनों का जाम लगना, निर्माण कार्यों की अधिकता, सड़कों का निर्माण कार्य का चलना ,इसके साथ साथ क्रेशर जोन का होना, खनन कार्य का होना, बड़ी बड़ी सड़क परियोजनाओं का आना उनके साथ हरे वृक्षों की कटाई का कार्य होना, ईट भट्टा एवं बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों का निर्माण होना। यह सारे कारण इस प्रदूषण के स्तर को और  जहरीले पदार्थों को ज्यादा बढ़ा देते है और वायु की गुणवत्ता को  और कम कर देते है। नोडल अधिकारी ने इस स्थिति से बचने के लिए आमजन के लिए कुछ उपाय बताए हैं  जिनमें बाहर निकलते समय मास्क लगाना चाहिए,घरों की खिड़की और दरवाजे सुबह के समय खोलने चाहिए और पूरे दिन बंद रखने चाहिए, बाहर एक्सरसाइज करने से बचें, बूढ़े व्यक्ति और बीमार व्यक्ति बाहर जाने से बचें,वायु प्रदूषण  से जनित गंभीर बीमारियों जैसे सांस की बीमारियां, त्वचा संबंधी रोग, आंखों के रोग, मानसिक बीमारियों, से बचा जा सकता है।





दो दिवसीय खेलों का हुआ आयोजन
-विभिन्न टीमों ने दिखाया दमखम
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कनीना। एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला में खंड स्तर केदो दिवसीय  खेलों का आयोजन हुआ। जिनमें 23 स्कूलों की टीमों ने भाग लिया। कबड्डी में 17 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों की 12 टीमें, 19 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों की 11 टीमों ने भाग लिया।खो-खो में 10 टीमों की, बालीबाल में 11 टीमों की हैंडबाल की 09, फुटबाल 8 और हाकी की 07 टीमों ने भाग लिया।
17 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों में 1500 मीटर की दौड़ में एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला का छात्र रोहित प्रथम, जीएल पब्लिक स्कूल कनीना के रवि ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। 19 वर्ष तक की आयुवर्ग में लड़कों में 1500 मीटर दौड़ में राजकीय माडल स्कूल के छात्र नितिन प्रथम आरआरसीएम स्कूल के छात्र रोहित ने  द्वितीय स्थान प्राप्त किया। 17 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कियों में 800 मीटर की दौड़ में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला की छात्रा अनिता  प्रथम और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सिहोर की छात्रा तनिशा द्वितीय स्थान पर रही। 19 वर्ष तक आयु वर्ग की लड़कियों में 800 मीटर की दौड़ में आईवीपीएस स्कूल की छात्रा रितु प्रथम स्थान पर और एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला की छात्रा विशाखा द्वितीय स्थान पर रही। 17 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों में 800 मीटर की दौड़ में आरसीएम स्कूल के छात्र हितेश प्रथम व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बाघोत के छात्र सचिन ने द्वितीय स्थान किया। 19 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों में 800 मीटर की दौड़ में आरआरसीएम स्कूल का सोनू प्रथम  और राजकीय उच्च विद्यालय बूचावास के छात्र शक्ति दूसरे स्थान पर रहा।
इसी प्रकार 17 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों में 400 मीटर की दौड़ में जीएलपीएस का छात्र दीपक, आईवीपीएस का छात्र साहिल क्रमश: प्रथम एवं दूसरे स्थान पर रहा। 19 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों में 400 मीटर की दौड़ में आरआरसीएम स्कूल का छात्र निशु प्रथम स्थान पर और आरआरसीएम विद्यालय का छात्र प्रदीन द्वितीय स्थान पर रहा। 17 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कियों में 400 मीटर की दौड़ में आईव पी स्कूल की छात्रा गीतंाशु प्रथम और देवयानी स्कूल की छात्रा कल्पना द्वितीय स्थान पर रही। 19 वर्ष तक आयु वर्ग की लड़कियों में 400 मीटर की दौड़ में जीए पी स्कूल की छात्रा अंजली  प्रथम और एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला की छात्रा संजू द्वितीय स्थान पर रही। 17 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों में 200 मीटर की दौड़ में आर आरसीएम स्कूल का छात्र मनीष प्रथम  व आईवीपीएस का छात्र साहिल द्वितीय स्थान पर रहा। 19 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों में 200 मीटर की दौड़ में आरआरसीएम स्कूल का छात्र निशु प्रथम स्थान पर और आईवीपी स्कूल का छात्र आशीष द्वितीय स्थान पर रहा।
   इसी प्रकार 17 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कियों में 200 मीटर की दौड़ में जीएस एस स्कूल ककराला की छात्रा भारती प्रथम स्थान पर और आईवीपी स्कूल की छात्रा पवीता  द्वितीय स्थान पर रही। 19 वर्ष तक आयु वर्ग की लड़कियों में 200 मीटर की दौड़ में जीएल पी स्कूल की छात्रा अंजली  प्रथम स्थान पर और एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला की छात्रा संजू द्वितीय स्थान पर रही। 17 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों में 100 मीटर की दौड़ में देवयानी स्कूल का छात्र धनराज प्रथम स्थान पर व जीएसएस स्कूल का छात्र सुरेन्द्र  द्वितीय स्थान पर रहा। 19 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों में 100 मीटर की दौड़ में आईवीपी स्कूल का छात्र आशीष पुत्र राजपाल प्रथम स्थान पर और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल भोजावास का छात्र सचिन  द्वितीय स्थान पर रहा।
17 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कियों में 100 मीटर की दौड़ में जीए एस स्कूल ककराला की छात्रा भारती प्रथम स्थान पर और आईवी पी स्कूल की छात्रा गीतांशु द्वितीय स्थान पर रही। 19 वर्ष तक आयु वर्ग की लड़कियों में 100 मीटर की दौड़ में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराल की छात्रा खुशी प्रथम स्थान पर और जीएमएस एसएस विद्यालय की छात्रा मंजू द्वितीय स्थान पर रही।
17 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कों की हॉकी प्रतियोगिता में एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला की टीम विजेता रही और 19 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कों की हाकी प्रतियोगिता में जीएमएसएस स्कूल कनीना की टीम विजेता रही।
17 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कियों की हाकी प्रतियोगिता में आरसीएम स्कूल कनीना की टीम विजेता रही और 19 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कियों की हाकी प्रतियोगिता में आरसीएम स्कूल कनीना की टीम विजेता रही।
17 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कियों की कबड्डी प्रतियोगिता में जीएलपी स्कूल कनीना की टीम विजेता रही और 19 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कियों की हाकी प्रतियोगिता में आरआरसीएम स्कूल कनीना की टीम विजेता रही।
19 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कों की शॉट पुट में आईवीपीएस स्कूल दौंगड़ा का छात्र गौरव प्रथम स्थान पर और एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला का छात्र राहुल  द्वितीय स्थान पर रहा तथा 17 वर्ष तक की आयुवर्ग के लड़कों में शाट पुट में आर आर सी एम स्कूल कनीना का छात्र हरिश प्रथम स्थान पर और आईवीपी स्कूल का छात्र योगेश द्वितीय स्थान पर रहा।
19 वर्ष तक की आयुवर्ग की लड़कियों में शाट पुट में आरआरसी एम स्कूल की छात्र मुस्कान प्रथम स्थान पर और एसडी स्कूल ककराला की छात्रा निशा द्वितीय स्थान पर तथा 17 वर्ष तक की आयु की लड़कियों में शाट पुट में एसडी स्कूल ककराला की छात्रा प्रथम स्थान पर आई वी पी स्कूल की छात्रा प्रिया द्वितीय स्थान पर रही है।
19 वर्ष तक आयुवर्ग के लडकों में लंबी कूद में जीएसएस स्कूल भोजावास का छात्र कोहली प्रथम स्थान पर और आर आरसीएम कनीना का छात्र दिनेश द्वितीय स्थान पर तथा 17 वर्ष तक आयुवर्ग के लड़कों में आरआरसीएम कनीना का छात्र मन्दीप प्रथम स्थान पर और जीएसएस स्कूल रामबास का छात्र गौरव द्वितीय स्थान पर रहा।
19 वर्ष तक आयुवर्ग की लड़कियों में लंबी कूद में एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्रा विशाखा प्रथम स्थान पर और देवयानी स्कूल की छात्रा कल्पना पुत्री ललीत कुमार द्वितीय स्थान पर तथा 17 वर्ष तक आयुवर्ग की लड़कियों में लंबी कूद में आईवीपीएस दौंगड़ा की छात्रा प्रिया और आईवीपीएस स्कूल दौंगड़ा की छात्रा गीतांशु द्वितीय स्थान पर रही।
19 वर्ष तक आयुवर्ग के लडकों में ऊंची कूद में एसडी स्कूल ककराला का छात्र आशीष प्रथम स्थान पर और आरआरसीएम कनीना का छात्र सुदर्शन द्वितीय स्थान पर रहे।
19 वर्ष तक आयुवर्ग के लडकों में जेवलिन थ्रो में जीएसएस स्कूल भोजावास का छात्र अशोक प्रथम स्थान पर और आईवीपीएस दौंगड़ा का छात्र गौरव द्वितीय स्थान पर तथा 17 वर्ष तक आयुवर्ग के लड़कों में आईवीपी एस दौंगड़ा का छात्र हिमांशु  प्रथम स्थान पर और जीएसएस स्कूल रामबास का छात्र नीरज पुत्र धर्मेन्द्र द्वितीय स्थान पर रहा।
19 वर्ष तक आयुवर्ग के लडकों में ट्रिपल जंप में आरआरसीएम का छात्र गगन  प्रथम स्थान पर और आईवीपी एस दौंगड़ा का छात्र कृष्ण  द्वितीय स्थान पर तथा 17 वर्ष तक आयुवर्ग के लड़कों में आई वी पी एस दौंगड़ा का छात्र साहिल  प्रथम स्थान पर और आरआरसीएम स्कूल कनीना का छात्र हरिश द्वितीय स्थान पर रहा।
19 वर्ष तक आयुवर्ग की लड़कियों में ट्रिपल जंप में आईवी पी विद्यालय की छात्रा रविना प्रथम स्थान पर और आरआरसीएम की छात्रा मांशी द्वितीय स्थान पर तथा 17 वर्ष तक आयुवर्ग की लड़कियों में ट्रिपल जंप में आईवीपीएस दौंगड़ा की छात्रा टीना और आईवीपीएस स्कूल दौंगड़ा की छात्रा मुस्कान  द्वितीय स्थान पर रही।
इस अवसर पर बलजीत, राकेश, शर्मिला, सरीता, कुलदीप, कलदीप सिंह, अनिल कुमार, नीरज कुमार, हरिओम आदि उपस्थित थे। 



45500 पशुओं को पैर मुंह खुरी तथा गलघोटू की वैक्सीन देने का लक्ष्य
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 कनीना। कनीना उपमंडल स्तर के पशु अस्पताल कनीना के तहत विभिन्न गांव में 45500 पैर-मुंह खुरी तथा गलघोटू बीमारी की वैक्सीन 30 दिसंबर 2021 तक दिए जाने का लक्ष्य रखा है। अब तक 3201 टीके लगाए जा चुके हैं। यह खुराक केवल गाय और भैंसों को दी जा रही है। जिसमें दोनों रोगों के लिए बचाव के लिए एक ही डोज निर्मित है जो दी जा रही है। कनीना पशु के वरिष्ठ पशु चिकित्सक
डा पवन कांगड़ा ने बताया कि कनीना उपमंडल स्तरीय पशु चिकित्सालय के अलावा कनीना उपमंडल में दौंगड़ा अहीर, मुंडिया खेड़ा बाघोत, धनौंदा, स्याणा तथा खैराना के राजकीय पशु चिकित्सालय आते हैं। सभी में 45500 पशुओं को जिनमें गाय और भैंस शामिल है को एक खुराक दी जाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने हरियाणा को प्राथमिकता के आधार पर की दवाई उपलब्ध करवाई है। उसका पशु पालकों को भारी लाभ होगा। पशुपालक भी त्वरित गति से डोज दिलवा रहे ताकि उनके पशु भयंकर बीमारी से बच सके। डॉक्टर ने बताया कि यह खुराक केवल गाय और भैंस के लिए होती तथा अन्य पशुओं को नहीं लगाई जा सकती।
फोटो कैप्शन 3: पशुओं को पैर मुह खुरी तथा गलघोटू का डोज देने के बाद डाक्टर।


50 फीसदी अनुदान











पर मिल रहा है बरसीम  और जई का बीज
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 कनीना।  कनीना क्षेत्र में 50 फीसदी अनुदान पर जई और बरसीम का बीज किसानों को उपलब्ध हो रहा है। इस योजना के तहत उन्हें 5 किलो जई और 2 किलो बरसीम की के बीज की थैली उपलब्ध करवाई जा रही है। विस्तृत जानकारी देते हुए पशु चिकित्सक डा पवन कांगड़ा ने बताया की ये बीज 50 फीसदी अनुदान में प्राप्त करने के लिए भरा जानो वाला आवेदन पशु चिकित्सालय से प्राप्त किया जा सकता है तथा उन्हाणी के पास हिसार बीज हाउस पर यह बीज सब्सिडी पर परमिट दिखाकर मिल सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों ही चारा देने वाली फसलें पशुओं के लिए लाभप्रद मानी जाती है। ऐसे में सरकार ने 50 फीसदी अनुदान पर देने की का निर्णय लिया है।





नगरपालिका के नये भवन पर साइन बोर्ड लगाने की मांग
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 कनीना। कनीना नगरपालिका का विशाल, सभी सुविधाओं युक्त भवन, एसडीएम कार्यालय समक्ष स्थापित हो चुका है। जिसका उद्घाटन हुए 1 वर्ष बीत चुका है किंतु अभी तक इस पर कोई साइन बोर्ड नहीं लगा है। अधिकांश कार्यों के लिए विशेष कर आधार कार्ड की कमियां दुरुस्त करवाने के लिए, नगर पालिका के कार्यों के लिए विभिन्न गांवों और कस्बों से लोग नगरपालिका कार्यालय आते हैं। अक्सर वे भी पुराने भवन पहुंच जाते हैं जहां पर नगर पालिका कार्यालय का साइन बोर्ड लगा हुआ है किंतु नए कार्यालय का साइन बोर्ड नहीं होना समस्या बना हुआ है। जिसके चलते लोग इधर-उधर दुकानदारों से नगरपालिका कार्यालय का पता पूछते हैं ।यही कारण है कि परेशानी झेलते हुए नगर पालिका कार्यालय तक पहुंच पाते हैं। लोगों की मांग है कि नगरपालिका कार्यालय का साइन बोर्ड जरूर लगवाया जाए तथा नगर पालिका भवन के अंदर भी ऐसा बोर्ड लगवाया जाए।
 इस संबंध में नगर पालिका प्रधान सतीश जेलदार से बात की तो उन्होंने कहा कि नगर पालिका को दर्शाने वाला कोई बोर्ड नहीं लगा हुआ है। 2 से 3 दिनों में नगरपालिका का साइन बोर्ड लगवा दिया जाएगा जिसके बाद लोगों को नगरपालिका तक पहुंचने में किसी प्रकार की कोई शिकायत दिक्कत तो नहीं आएगी। एसडीएम कार्यालय कनीना के सामने जहां एक ओर फाइनेंस का बड़ा साइन बोर्ड लगा है वहीं दूसरी ओर शुद्ध देशी घी का भोजनालय का बोर्ड लगा है। इनके बीच से 50 गज पर भवन दिखाई पड़ता है।
 फोटो कैप्शन 4: नगरपालिका कार्यालय की गली और सामने नगरपालिका कार्यालय।





गायों की पूजा का पर्व है गोपाष्टमी, पर्व 11 नवंबर को
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कनीना। गोपाष्टमी का पर्व गायों की विधि विधान से पूजा का पर्व है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा चलाए गए इस पर्व पर गायों को विभिन्न प्रकार का चारा खिलाया जाता है और सुबह सवेरे से ही पूजा शुरू कर दी जाती है। उनको छापे लगाए जाते हैं तथा रोली एवं मेहन्दी लगाकर पूजा की जाती है। विभिन्न गौशालाओं में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
  कार्तिक शुक्ल अष्टमी यानी 11 नवंबर को यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व पर ही भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम गोबिंद पड़ा था। कनीना के ज्योतिषाचार्य अरविंद जोशी बताते हैं कि गोपाष्टमी पर गायों की विधि विधान से पूजा की जानी चाहिए। घर में अगर गाय न हो तो गौशाला में जाकर भी पूजा की जा सकती है। उनके अनुसार गाय में सभी देवता निवास करते हैं और उनके गोबर में भी लक्ष्मी का निवास पाया जाता है। यही कारण है कि कच्चे घरों को गाय के गोबर से लीप पोतकर साफ सुथरा बनाया जाता है। सुबह से शाम तक उनकी इस दिन पूजा करनी चाहिए। गाय को मां का दर्जा दिया हुआ है। ऐसे में गायों की पूजा करने का विधान भी है।
  गोपाष्टमी का पर्व मनाए जाने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं। बताया जाता है कि इंद्र का गर्व चूर करने के लिए सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाए रखा था जिसके चलते इंद्र का गर्व आठवें दिन चूर चूर हो गया और वे भगवान श्रीकृष्ण की शरण में आ गए थे। तभी से भगवान श्रीकृष्ण का नाम गोविंद पड़ा था। इस दिन भगवान की कामधेनु ने अपनी दुग्ध धारा से नहलाया था और भगवान श्रीकृष्ण ने गायों की सेवा करने का वचन दिया था। तभी से यह पर्व चला आ रहा है।
  एक दूसरी कहानी के अनुसार बलराम एवं श्रीकृष्ण ने गोकुल में गायों की सेवा करने का प्रशिक्षण लिया था और गोपाष्टमी के दिन माता यशोदा एवं नंद बाबा से आज्ञा पाकर गायों को जंगल में चराने का निर्णय लिया था। उस वक्त भगवान श्रीकृष्ण की उम्र महज छह-सात वर्ष थी। उनके द्वारा गाए चराने पर ही उनका नाम गोपालक पड़ा। भगवान श्रीकृष्ण जीवनभर गायों के रक्षक एवं सेवक बने रहे थे। यह भी माना जाता है कि राधा ने इसी दिन से जंगल में गाए चरानी शुरू की थी चूंकि लड़कियों को गाये चराने की अनुमति नहीं थी किंतु उन्होंने पुरुष ग्वाले के वस्त्र धारण किए और भगवान श्रीकृष्ण के साथ वन में गाए चराने निकल पड़ी थी। इस दिन मेहंदी के थापे लगाकर हल्दी एवं रोली से गायों की पूजा करने से सभी विकार पूर्ण हो जाते हैं।





छठ पूजा से कुछ वंचित रहे तो कुछ अपने वतन लौटे
-10 नवंबर को छठ पूजा
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कनीना। क्षेत्र में बिहार एवं उत्तरप्रदेश के भारी संख्या में आए हुए लोग या तो छट पूजा से वंचित रह गए हैं या फिर अपने क्षेत्र में लौट गए हैं।
  कनीना क्षेत्र में दूसरे राज्यों से भारी संख्या में मजदूर एवं मिस्त्री आए हुए हैं जिनके यहां छठ पूजा का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसे में ये लोग या तो छठ पूजा के लिए अपने वतन को लौट गए हैं या फिर जो नहीं जा पाए वो मायूस हैं और छठ पूजा से वंचित रह रहे हैं। कनीना के आस पास रेवाड़ी में छठ पूजा मनाए जाने की प्रथा अधिक है। ऐसे में कुछ लोग तो रेवाड़ी जा रहे हैं।
  कई उत्तरप्रदेश एवं बिहार के लोगों ने बताया कि उनका यह प्रमुख पर्व होता है। इस दिन वे अकसर अपने गांव चले जाते हैं किंतु मजबूरी वश वे जब गांव नहीं जा पाते हैं तो यहीं पर पर्व मना लेते हैं।
सूर्योपासना का पर्व है छठ पूजा -
बिहार और उत्तर प्रदेश में जहां वैदिक आर्य संस्कृति की झलक छठ पूजा पर देखने को मिलती है। सूर्योपासना का यह पर्व माना जाता है। दीपावली के बाद षष्ठी को छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है। यद्यपि छठ पूजा साल में दो बार मनाई जाती चैत्र मास में तथा दूसरी कार्तिक मास में । मां कात्यायनी के नाम से भी जाना जाता है।
 जब पांडव सारा कुछ राज पाट हार गए थे तब श्रीकृष्ण द्वारा द्रौपदी को छठ पूजा का पर्व मनाने की बात कही। तभी से उन्हें सारा राजपाट मिला था। यदि खगोल शास्त्रियों की बात माने तो सूर्य की हानिकारक छठ के समय अधिक मात्रा में धरती पर आती है जिससे रक्षा के लिए यह पर्व मनाया जाता है। जयपाल लगातार तीन दिन चलता रहता है जहां 36 घंटे तक व्रत रखा जाता है और इस दौरान पानी तक नहीं करते। किसी नदी में नहाते हैं प्रसाद वितरित करते हैं। पानी में खड़े होकर ही प्रसाद सूर्य का आराधना की जाती है। विभिन्न पुराणों में भी सूर्य की उपासना की बात कही गई है।

Monday, November 8, 2021

 
 भारत जानो प्रतियोगिता के विजेताओं को किया सम्मानित
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कनीना। भारत विकास परिषद के द्वारा कनीना मंडी की विश्वकर्मा धर्मशाला में  छात्र-अभिनन्दन व गुरु-वन्दन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें भारत को जानों प्रतियोगिता में भाग लेने वाले स्कूलों के छात्रों व अध्यापकों को सम्मानित किया गया।
       कार्यक्रम के मुख्य अतिथि धनसिंह यादव सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक रहे वहीं विशिष्ट अतिथि रामपाल प्राचार्य राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना रहे। मुख्य अतिथि के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया।
   कार्यक्रम मोहन सिंह यादव शाखा अध्यक्ष की अध्यक्षता में तथा कंवर सेन वशिष्ठ संरक्षक व लखन लाल जांगड़ा कैमला शाखा सचिव एवं संयोजक भारत को जानो प्रतियोगिता के संयोजन में सुचारू रूप से चला। कार्यक्रम में कंवर सेन वशिष्ठ संरक्षक ने गुरु वन्दन व छात्र अभिनन्दन के बारे में बहुत ही सारगर्भित बातें बतायी। मुख्य अतिथि धनसिंह यादव ने छात्रों का उत्साह वर्धन करते हुए 8100 रुपये नकद भाविप शाखा कनीना को अपनी तरफ से भेंट किये। सुरेन्द्र सिंह यादव राजकीय कन्या स्कूल कनीना, जयभगवान रिटायर्ड डीएसपी, रामपाल प्राचार्य राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना ने भी अपने विचार व्यक्त किये।  शाखा अध्यक्ष मोहन सिंह यादव ने शिवलाल धर्मशाला के केयरटेकर प्रेम सिंह सिंगला का नि: शुल्क सहयोग करने के लिए धन्यवाद किया। सभी अव्वल रहे विद्यार्थियों को मौके पर ही सम्मानित किया वहीं शिक्षकों का भी वंदन किया गया।
   इस कार्यक्रम में लखनपाल जांगड़ा कैमला,शाखा के सदस्य सूबेदारसुरेन्द्र सिंह, सुरेश शर्मा, शिवकुमार अग्रवाल, धनपत साहब, दलीप सिंह पार्षद, राजेन्द्र सिंह पार्षद, कप्तान सुबे सिंह, शक्ति सिंह पोता, उष्ण जांगड़ा कैमला, सुशीला यादव, प्रेम कुमार सिंगला कोषाध्यक्ष, व देशराज यादव आदि आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 9 व 10: भारत जानो प्रतियोगिता में अव्वल रहे विद्यार्थियों को सम्मानित करते भाविप के पदाधिकारी।




उत्तर भारत जहरीली गैसों के अइागोश में
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कनीना। हरियाणा एनसीआर दिल्ली उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के अधिकतर शहर एक बार फिर बुरी तरह से जहरीली व प्रदूषित हवा के आगोश में है। इसके अलावा  उत्तरी पर्वतीय भागों पर अधिक मात्रा में हिमपात होने की वजह से मैदानी  इलाकों के तापमान में गिरावट आई है। जिससे कोहरे की मात्रा भी बढ़ गई है। आज सोमवार को सबसे कम तापमान पंचकूला का 10 . 4 डिग्री सेल्सियस रहा,  यमुनानगर11.3 डिग्री सेल्सियस रहा ,और महेंद्रगढ़ का 11.4 डिग्री सेल्सियस रहा , और नारनौल का 11.08 डिग्री सेल्सियस रहा, जिसकी वजह से कोहरा की मात्रा भी बढ़ गई, कोहरे और प्रदूषण  के बढऩे से धूम कोहरा  धुआँसा या स्मॉग  की मात्रा बढ़ रही है।  राजकीय महाविद्यालय नारनौल  के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डॉ चंद्रमोहन ने बताया कि धूम कोहरा  वायु प्रदूषण की एक अवस्था है। धूल, धुएँ और कुहासे का यह मिश्रण हिंदी में धुआँसा कहलाता है। गाडिय़ों और औद्योगिक कारखानों द्वारा उत्सर्जित धुएँ में उपस्थित राख, गंधक व अन्य हानिकारक रसायन जब कुहरे के संपर्क में आते हैं तो धुआँसे का निर्माण होता है।  दिल्ली एनसीआर में बढ़ते हुए प्रदूषण के स्तर के कारण।  हरियाणा और उत्तर प्रदेश  में पराली के जलाने पर और आतिशबाजी करने पर रोक लगाई गई है । परंतु लोगों में जागरूकता की कमी और दीपावली के त्योहार पर प्रदूषण वाले पटाखों की जमकर हुई आतिशबाजी और पराली  जलाने से पूरे हरियाणा और उत्तर प्रदेश की आबो-हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा अधिक बढ़ गई इसके साथ साथ तापमान में गिरावट की वजह से कोहरे की मात्रा बढ़ रही है। जिन दोनों के मिलने से धूम कोहरा मे बढ़ोतरी हो रही है । धूंधकोहरा आमजन के लिए और  भी खतरनाक स्थिति पैदा कर देता है।हरियाणा के इन जिलों के वायु गुणवत्ता सूचकांक   सोमवार को भी  बहुत खराब श्रेणी में रहे। आज वायु गुणवत्ता सूचकांक  बहुत खराब श्रेणी में रहा है, जिनमें जींद 412, पानीपत 395, हिसार 381, कुरुक्षेत्र 367, अंबाला 356, रोहतक 350, और नारनौल 345 रहा। सोमवार दोपहर को उत्तर प्रदेश के शहरों में सबसे ज्यादा हवा में जहरीले पदार्थ पाए गए जिनमें वृंदावन 480, आगरा 479, गाजियाबाद 432, कानपुर 424  जबकि दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक  भी  दिल्ली 388 वायु गुणवत्ता सूचकांक काफी सुधार हुआ है । जो जो पिछले दिनों अति खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक की सूची में  विश्व में सबसे पहले स्थान पर रहा है, आज विश्व में सबसे खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक में यूपी के अधिकतर स्थान रहे हैं जिनमें वृंदावन 480 पूरे विश्व में प्रथम स्थान पर रहा है। जबकि सामान्य वायु गुणवत्ता सूचकांक 0 से 50 तक रहता है, अगर  एनसीआर दिल्ली  में शामिल शहऱो की बात की जाए तो यहां पहले से  कई कारण है, जिनसे वायु गुणवत्ता में कमी आई रहती है जिनमें पराली की जलाई सबसे प्रथम स्थान पर कारण है , त्योहारों पर आतिशबाजी,अनियंत्रित एवं परिवहन के साधनों की अधिकता जगह-जगह परिवहन के साधनों का जाम लगना, निर्माण कार्यों की अधिकता, सड़कों का निर्माण कार्य का चलना ,इसके साथ साथ क्रेशर जोन का होना, खनन कार्य का होना, बड़ी बड़ी सड़क परियोजनाओं का आना उनके साथ हरे वृक्षों की कटाई का कार्य होना, ईट भट्टा एवं बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों का निर्माण होना। यह सारे कारण इस प्रदूषण के स्तर को और  जहरीले पदार्थों को ज्यादा बढ़ा देते है और वायु की गुणवत्ता को  और कम कर देते है, आज दोपहर 2:00 बजे नारनौल शहर मे वायु गुणवत्ता सूचकांक पीएम 2.5 की मात्रा 343माइक्रोन, पीएम 10 की मात्रा  222माइक्रोन, एनओ 2 की मात्रा 45 माइक्रोन ,एन एच 3 की मात्रा 11 माइक्रोन,एसओ2 की मात्रा 5 माइक्रोनऔर सीओ की मात्रा 33 माइक्रोन, और ओजोन की मात्रा 3 माइक्रोन पाई गई थी।  इसमें अगर इनमें कोहरा और मिल जाए तो स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। जो वर्तमान में  व्यापक रुप से फैला हुआ है। जो बहुत ही खतरनाक स्थिति में हैं । नोडल अधिकारी ने इस स्थिति से बचने के लिए आमजन के लिए कुछ उपाय बताए हैं  जिनमें बाहर निकलते समय मास्क लगाना चाहिए,घरों की खिड़की और दरवाजे सुबह के समय खोलने चाहिए और पूरे दिन बंद रखने चाहिए, बाहर एक्सरसाइज करने से बचें, बूढ़े व्यक्ति और बीमार व्यक्ति बाहर जाने से बचें,जिससे धुंध कोहरा से जनित गंभीर बीमारियों जैसे सांस की बीमारियां, त्वचा संबंधी रोग, आंखों के रोग, मानसिक बीमारियों, से बचा जा सकता है।
 सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार नारनौल का  वायु गुणवत्ता सूचकांक आज सोमवार को दोपहर 2:00 बजे की स्थिति में  345 हो गया है दीपावली के बाद लगातार बढ़ोतरी और धुंध कोहरा में बढ़ोतरी बेहद खराब स्थिति में है।






नहीं हो रही गांवों में फागिंग
-बढ़ रही है दहशत
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कनीना। कनीना क्षेत्र में डेंगू बुखार का कहर बढ़ता ही जा रहा है। अब तक अलग-अलग गांव से 14 लोग इससे ग्रसित हो चुके हैं। उप नागरिक अस्पताल कनीना के अंतर्गत 37 गांव आते हैं जिन में स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में पानी में लारवा मिलने की वजह से तकरीबन 450 लोगों को नोटिस दे चुकी है। हेल्थ इंस्पेक्टर शीशराम ने जानकारी देते हुए बताया कि उप नागरिक अस्पताल कनीना के अंतर्गत 37 गांव हैं जिसमें स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव गांव घर घर जाकर डेंगू का लारवा जांच कर रही है। जहां जिस गांव में डेंगू का लारवा मिलता है वहां उन लोगों को नोटिस दिया जाता है। अधिकतर लारवा पानी में रुके हुए टैंक, बाहर पड़े हुए बर्तन, टायर, कूलर में मिल रहा है। सबसे पहला डेंगू का मरीज सितंबर के महीने में कोका गांव में मिला था। उसके बाद मरीजों की संख्या बढ़ती गई। अभी तक कनीना में 3, दौंगड़ा अहीर में 2, बेवल में 2, भालखी में 3, झिगावन में 1, कोका में 1, कलवाड़ी में 2  डेंगू से पीडि़त रोगी मिले हैं। इस वक्त अभी 3 डेंगू से पीडि़त एक्टिव हैं। हेल्थ इंस्पेक्टर ने बताया कि नगर पालिका कनीना द्वारा कनीना के तकरीबन सभी वार्डों में फागिंग करवाई जा चुकी है। उप नागरिक अस्पताल के अंतर्गत आने वाले गांवो में फॉगिंग करवाने के लिए उप मंडल अधिकारी नागरिक व बीडीपीओ कार्यालय में पत्र 13 अक्टूबर को दे दिया गया था।
 अभी तक 450 लोगों को दिया जा सके हैं नोटिस-
हेल्थ इंस्पेक्टर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार उप नागरिक अस्पताल कनीना के अंतर्गत आने वाले 37 गांव में गांव-गांव घर-घर जाकर डेंगू के लारवा की जांच कर रही है जिस भी घर में डेंगू का लारवा मिलता है वहां पर उन लोगों को जागरूक किया जाता है। जो लोग ठहरे हुए पानी या जिसमें डेंगू का लारवा मिल रहा है उसको स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने पर उनको नोटिस भी दिया जाता है। अब तक 450 लोगों को नोटिस दीया जा चुका है।
ग्रामीण राकेश, महेश, देवेंद्र, सूरजभान, पंकज, प्रियंका, रोनिका, स्वीटी आदि ने बताया कि अधिकतर गांव में गंदे पानी की नालियां भर  चुकी हैं जिसमें ग्राम सचिवों द्वारा सफाई नहीं करवाई जा रही हैं। जिससे बहुत अधिक मच्छर पनप रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आप डर सता रहा है कहीं यह डेंगू का डंक घर-घर में फैल गया तो बहुत बड़ी परेशानी हो जाएगी। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि उक्त नागरिक अस्पताल कनीना में डेंगू के बचाव के लिए पूर्ण रूप से इलाज उपलब्ध नहीं हैं। प्लेट्स कम होने पर बाहर रेफर कर दिया जाता है। डेंगू के लक्षण मिलने पर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों के निजी अस्पतालों में ले जाना पड़ रहा है।
प्रवर चिकित्सा अधिकारीडॉ धर्मेंद्र यादव का कहना है कि अस्पताल में डेंगू से पीडि़त मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। अधिक प्लेट्स कम होने पर रोगी को रोहतक के लिए रेफर कर दिया जाता है क्योंकि अभी जिले में कहीं भी प्लेट्स की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
एसईपीओ अरविंद यादवने बताया कि
गांव में फागिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। अभी तक गाहड़ा, छितरौली, उन्हानी, चेलावास, पाथेड़ा गांव में करवा दी गई है बाकी बचे हुए गांव में जल्द ही करवा दी जाएगी।




 नवंबर माह में पहली बार हाथ सेकते देखे गये लोग
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 कनीना। दीपावली के बाद तापमान में गिरावट आती जा रही है वहीं सुबह सवेरे ठंड का एहसास हुआ। सोमवार को पहली बार नवंबर के पहले सप्ताह के बाद ही लोग आग के पास बैठे देखे गए। जगह-जगह लोग दुकानों के आसपास हाथ सेकते नजर आए।
वास्तव में ठंड बढऩे लगी है। माना जा रहा है कि दीपावली के कारण प्रदूषण बढऩे के साथ साथ पहाड़ों पर हिमपात होने से ताप गिरा है। एक और जहां तापमान गिरने से किसान खुश है क्योंकि कम ताप से सरसों एवं  गेहूं की फसल को लाभ होगा। किसानों ने बताया कि अभी गेहूं की बिजाई चल रही है जबकि सरसों की बिजाई पूर्ण हो चुकी है। ऐसे में ठंड का मौसम फसलों के लिए लाभप्रद साबित होगा। बहराल क्षेत्र में सर्दी बढऩे लगी है। फोटो कैप्शन 5: आग के पास हाथ सेेकते हुए लोग।




एसडी विद्यालय ककराला में ब्लॉक स्तर के खेलों का हुआ शुभारंभ
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कनीना। एसडी विद्यालय ककराला में 8 नवंबर को ट्रायल खेंलों का एइओ रमेश चन्द्र द्वारा शुभारंभ किया गया। जिसमें फुटबाल,, वालीबाल, एथलेटिक, बाक्सिंग, जूड़ों, कबड्डी, वेट लिफ्टिंग, कुश्ती, खो-खो, बास्केटबाल, साइकलिंग, हैंडबाल, योगा, हाकी आदि खेलों आयोजन किया जा रहा है। उएइओ ने बताया कि आज सभी खिलाडिय़ों के दस्तावेजों की जांच की गई और खेलों का शुभारंभ किया गया। यह प्रतियोगिता 9 नवंबर 2021 तक कराई जानी है। खेल प्रात: 8 बजे से शुरू होंगे। सभी खिलाडिय़ों निर्धारित समय व निर्धारित स्थल  पर पहुंचने की अपील की है।
इस अवसर पर प्राचार्य ओमप्रकाश, वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र यादव, सीईओ आर एस यादव, वरिष्ठ विभाग के मुखिया पूर्ण सिंह, कनिष्ठ विभाग के मुखिया नरेन्द्र यादव, शैक्षणिक विभाग के मुखिया सुनील यादव, सुरेन्द्र कुमार चौहान, संदीप कुमार, प्रवीण बाक्सिंग कोच, विवेक जूडो कोच, सोनपाल कबड्डी कोच, रत्न सिह आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 6:खेलों का शुभारंभ करते एइओ रमेशचंद्र।
           7: खेलों में पहुंचे खिलाडिय़ों का स्वागत करते एइओ एवं अन्य।





भारत जानो प्रतियोगिता में किया बेहतर प्रदर्शन
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कनीना।भारत विकास परिषद् द्वारा जिला स्तरीय  भारत को जानो प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ढ्ढ इस प्रतियोगिता में कनीना शाखा के राजकीय एवं निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। आरआरसी एम पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने इस प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए सर्वाधिक स्थान प्राप्त किए।
प्रतियोगिता के कनिष्ठ वर्ग में कक्षा  8 वीं की छात्रा वंशिका व  प्रतियोगिता के वरिष्ठ वर्ग में कक्षा 10 वीं की छात्रा अंकिता ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि इन दोनों छात्राओं को  राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली भारत को जानो प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता  के लिए चयनित किया गया है। आज भारत विकास परिषद् की कनीना शाखा में आयोजित सम्मान कार्यक्रम में उक्त दोनों छात्राओं को  सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारम्भ छात्रा अंकिता ने दीप प्रज्वलित कर के किया। दोनों छात्राओं को विद्यालय में भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर संस्था के चेयरमैन रोशन लाल यादव ने कहा कि भारत विकास परिषद् द्वारा आयोजित प्रतियोगिता अपने आप में एक विशेष महत्व रखती है। उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति की समझ उसके प्रति रुचि एवं लगाव की भावना का भी विकास करना है। इस अवसर पर संस्था के निदेशक संजय यादव ने बताया कि इस प्रकार की प्रतियोगिताओं से विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि के साथ-साथ उनमें अनेक गुणों का विकास होता है जो एक उत्तम नागरिक के निर्माण के लिए बहुत आवश्यक है।
संस्था के प्राचार्य नरेन्द्र गौतम ने भी प्रतियोगिता में सफल विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभ-कामनाएं प्रदान की तथा उन्हें इस प्रकार की प्रतियोगिताओं में भाग लेने हेतु प्रेरित किया।




 आर्य समाज रसूलपुर का वार्षिक उत्सव 5 फरवरी को
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 कनीना। आर्य समाज रसूलपुर का वार्षिकोत्सव 5 व 6 फरवरी 2022 शनिवार और रविवार को आयोजित होगा। विस्तृत जानकारी देते हुए सतीश आर्य मंडलपति जिला महेंद्रगढ़ ने बताया कि यह 30वां वार्षिक उत्सव होगा। कोरोना काल में दो वार्षिक उत्सव संपन्न नहीं हो पाए। उन्होंने बताया कि इस मौके पर प्रसिद्ध भजन उपदेशिका अंजली आर्य पानीपत तथा संदीप आर्य भजन उपदेशक दिल्ली के अलावा हरियाणा से सतपाल मधुर आदि बुलाए गए हैं। उत्सव को सफल बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है।



मतदाता सूची वर्ष 2022 का पुन: निरीक्षण -
-बूथ स्तर पर बैठेंगे बीएलओ
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 कनीना। अटेली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के तहत आने वाले कनीना के विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची 2022 के विशेष पुन: निरीक्षण के संबंध में बीएलओ बूथ स्तर पर बैठेंगे। विस्तृत जानकारी देते हुए सुनील कुमार बीएलओ ने बताया की सूची के पुन: निरीक्षण के लिए एक नवंबर से कार्य शुरू हो गया है जो 30 नवंबर तक जारी रहेगा किंतु इस अवधि में 13 व 14 नवंबर तत्पश्चात 27 और 28 नवंबर को बूथ स्तर पर बीएलओ बैठेंगे वही 5 जनवरी 2022 को मतदाता सूची को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उन्होंने बताया जिन व्यक्तियों की आयु 1 जनवरी 2022 को 18 वर्ष हो जाएगी अपना मतदाता पहचान पत्र बनवा सकता है 25 वर्ष से अधिक उम्र का व्यक्ति भी अपना पहचान पत्र बनवा सकता है बशर्ते कि उन्हें अब तक नाम न दर्ज कराने का कारण बताना होगा। शुद्धिकरण एवं काटने का कार्य भी चलेगा। मौके पर ही मतदाता सूची का निरीक्षण किया जा सकता है।



ट्रेन चलाये जाने की मांग जोर पकडऩे लगी
-सभी ट्रेनों का हो कनीना खास रेलवे स्टेशन पर ठहराव
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 कनीना। कनीना खास रेलवे स्टेशन से वर्तमान में सभी फास्ट ट्रेन कनीना खास रेलवे स्टेशन पर नहीं रुक रही है जिसके चलते यात्रियों ने रेलवे विभाग से सभी ट्रेन विशेषकर कुछ और पैसेंजर ट्रेन चलार्ये जाने की मांग की है ताकि आवागमन में सुविधा हो सके।
 कोविड के चलते ट्रेनों का किराया बढ़ा दिया गया है जो अभी तक कम नहीं किया गया है। वर्तमान में महेंद्रगढ़ से रेवाड़ी के बीच 11 ट्रेन चल रही हैं किंतु अधिकांश ट्रेन कनीना खास रेलवे स्टेशन पर नहीं रुकती है। क्षेत्र के यात्री रमेश कुमार, दिनेश कुमार, रवि कुमार सुरेश कुमार, महेश कुमार, कुलदीप कुमार, देशराज आदि ने बताया कि सामान लाने ले जाने के लिए आना जाना पड़ता है। बसे समय पर नहीं मिलती तो ट्रेन का साधन सुलभ होता है किंतु ट्रेन 22 मार्च 2020 से लगातार लंबे समय तक बंद रही वहीं अब कुछ चली तो उनका किराया बढ़ा दिया है वहीं उनका आनलाइन सीट का रिजर्वेशन करवाना जरूरी है।  ऐसे में आवागमन में बड़ी दिक्कत हो रही है। उन्होंने विभाग से मांग की है कि सभी ट्रेन चलाई जाए ताकि यात्रियों को आवागमन में सुविधा हो सके। उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रकार की परीक्षाएं भी समय समय पर आयोजित हो रही है जिन्हें जाने के लिए विद्यार्थियों को भारी परेशानी होती है।
नहीं रुकती ट्रेन-
कनीना खास रेलवे स्टेशन 1935 में बना था। उपमंडल स्तर का रेलवे स्टेशन जरूर है किंतु ट्रेनों के मामले में किसी गांव से बदहाल स्थिति में है। विगत 12 वर्षों से लगातार लोगों का संघर्ष चल रहा है कि सभी ट्रेन यहां रोकी जाए। परंतु उपमंडल स्तर के इस कनीना खास रेलवे स्टेशन पर जहां पैसेंजर ट्रेन तथा एक फास्ट ट्रेन रुकती है जबकि कोरोना काल से पहले 18 पैसेंजर और 7 फास्ट ट्रेन चलती थी। जिनमें से कई ट्रेन अभी भी नहीं चल रही हैं। सभी ट्रेन चलाकर कनीना खास रेलवे स्टेशन पर रोके जाने की मांग की है।
बहुत पुराना है रेलवे स्टेशन-
 कनीना खास रेलवे स्टेशन पुराना एवं अंग्रेजी काल का है जब अनाज मंडी और रेलवे स्टेशन लगभग साथ बने थे। वर्तमान में कनीना की नई अनाज मंडी भी खिसक कर चेलावास में बन रही है वहीं रेलवे स्टेशन पर सभी फास्ट एवं सुपरफास्ट ट्रेनों का ठहराव नहीं हो पाया है। कनीना अहीरवाल का गढ़ है यहां तीन मंत्री हुए हैं जिनकी संयुक्त पंजाब में मंत्री रहें सूबेदार ओंकार सिंह तो हरियाणा बनने पर राव दलीप सिंह बाद में केंद्र में मंत्री कर्नल राम सिंह कनीना से संबंध रखते थे। उनका कनीना खास रेलवे स्टेशन से खास लगाव था किंतु यह दुर्भाग्य की तीनों की मौत हो चुकी है। कनीना खास रेलवे स्टेशन जस का तस पड़ा हुआ है।
 फोटो कैप्शन 4: कनीना खास रेलवे स्टेशन।




आगे बढने के लिए इतिहास की जानकारी जरूरी-सत्यव्रत शास्त्री
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कनीना। सांस्कृतिक अहीरवाल के निदेशक सत्यव्रत शास्त्री ने आज महेन्द्रगढ़ मे एक कार्यशाला में लोगों को सम्बोधित करते हुये कहा कि इतिहास वो साधन है जिसके सहारे कोई भी अपनी मंजिल पर आसानी से पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक अहीरवाल का उद्देश्य समस्त अहीरवाल का छुपा ऐतिहासिक  वैभव को खोजकर  वर्तमान पीढ़ी व आने वाली पीढ़ी को अवगत कराया जाये। 1857 के  नसीबपुर युद्ध के बाद अंग्रेजी शासन ने अहीरवाल पर जो अत्याचार किये उससे इस क्षेत्र के रीति रिवाज  रहन सहन परम्पराओं को बड़ी चोट पहुंची। उन्होंने इसके अनेक टुकड़े कर अपने वफादार रियासतों को भेंट कर दिया जिससे अनेक ऐतिहासिक विरासत नष्ट हो गये। इन्हीं लुप्त ऐतिहासिक तथ्यों को उजागर करने लिये सांस्कृतिक अहीरवाल काम कर रहा है। महेन्द्रगढ इकाई के प्रमुख भाई रामसिंह के निवास पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया  जिसमें अमीलाल छाजियावास ,मदनलाल, शेरसिंह दुलोठ अहीर से रामनिवास प्राचार्य जांजडिय़ावास, बलवन्त बोहरा कुरहावटा ,सतपाल और  पूर्व पंचायत सचिव जगत सिंह थे।े






  देव उठावनी एकादशी होने से भी कपड़ों की मांग बढ़ी है
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कनीना। सर्दी दस्तक देने से गर्म कपड़ों की की मांग बढऩे लगी है। आधुनिक दर्जे के गर्म कपड़ों की मांग को देखते हुए दुकानदार भी विभिन्न प्रकार के गर्म कपड़े रखने लग गए हैं और आए दिन फैशन के नाम पर दुकानें खुलने लगी हैं।
  15 नवंबर से देव उठनी एकादशी पर विवाह शादियों का सीजन शुरू हो जाएगा। ऐसे में कपड़ों की विशेषकर आधुनिक कपड़ों की मांग बढऩे लगी है। सिले हुए कपड़ों की दुकान एवं सिलाई करने वाले दर्जियों के पास कपड़े सिलवाने वालों की मांग बढ़ी है वहीं स्कूल एवं कालेजों में जाने वाले विद्यार्थी एवं जवां दिखने की ललक वाले जन फैशन प्वाइंटों पर जाकर आधुनिक दर्जे के फैशनवाले कपड़े खरीदने लगे हैं।
  विगत करीब चार वर्षों में सिले हुए कपड़ों की दुकानों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। वर्तमान में करीब तीन दर्जन नए नए फैशन की दुकानें तथा कई सिले हुए कपड़ों की दुकानें खुल चुकी हैं जहां युवा पीढ़ी कपड़े लेने जरूर जाते हैं।
क्या कहता है दुकानदार-
आधुनिक दर्जे के कपड़े सिलने व आधुनिक दर्जे के फैशन के कपड़े की दुकान करने वाले महेंद्र कुमार का कहना है कि नए डिजाइन एवं आधुनिकता से परिपूर्ण एवं गर्म कपड़ों की बेहद मांग हैं। वे दिल्ली से इस प्रकार के कपड़े लाकर युवाओं के लिए प्रदान कर रहे हैं। युवा एवं अन्य जन बेहद आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में शादियां शुरू होने जा रही हैं जिसके चलते नए डिजाइन के कपड़े सिलवाने वालों का तांता लगने लगा है।





बच्चों को ठंड लगने से बचाए
-गर्म पानी रोज पीये, बुजुर्गों को भी ठंड से बचाए
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कनीना। कनीना क्षेत्र में ठंड बढ़ी है।  ठंड पडऩे से जहां बुजुर्ग तथा छोटे बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। वही पशुपालक भी परेशान होने लगे हैं। एक ओर कोरोना वहीं ठंड एवं शीत लहर ने परेशानी बढ़ा दी है।
 कनीना के  डा वेदप्रकाश  ने बताया कि छोटे बच्चों में ठंड जल्दी लगती है जिनमें निमोनिया तक होने की संभावना जताई है उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को कपड़े पहना कर सुला देने से वे ठंड के शिकार हो रहे हैं क्योंकि वह ऊपरी कपड़े फेंक देते हैं। इसलिए उन्होंने कहा कि अधिक कपड़े पहनाकर बच्चों को रजाई वगैराह नहीं ओढ़ाई जाए वही बच्चे की मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम है। बच्चों को सर्दी से बचाना चाहिए सर्दी लगने पर डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए। बच्चा दो-तीन घंटे में तक दूध नहीं पीता तुरंत डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को उसकी सांस से पता लगाया जा सकता है कि उन्हें कहीं निमोनिया आदि तो नहीं लग गया है यदि सांसों में एक विशेष प्रकार की आवाज आए तो समझों की ठंड लग गई है।
 उधर वैद्य बालकिशन शर्मा एवं हरिकिशन शर्मा ने बताया कि सर्दी से बुजुर्गों को भी बचाना जरूरी है। सर्दी से हृदयघात होने तथा सांस में तकलीफ बढऩे की समस्या पैदा हो जाती है। ऐसे में बुजुर्गों को भी सर्दी से बचाना जरूरी है। उन्हें पीने के लिए गर्म पानी देने तथा बासी भोजन न देने की सलाह दी है। उनका कहना है कि धूप निकलने पर बिस्तर से बाहर जाने देना चाहिए। सर्दी से बचाने से उनके रोगों से भी बचा जा सकता है।
  उधर पशुओं के लिए लंबे समय से औषधियां बनाने के शोध कार्य में लगे हुए विक्की एवं शिब्बू पंसारी का कहना है कि दूध देने वाले पशुओं को भी सर्दी से बचाना चाहिए वरना वे दूध कम देंगे वहीं बीमार हो सकते हैं। उनका कहना है कि पशु भी इंसान की भांति रोगों से पीडि़त हो सकते हैं। उन्हें बचाना जरूरी है। ऐसे में उन्हें गर्म बोरी आदि से ढककर आराम दिलाना जरूरी होता है।
 वैसे भी कोरोना से बचने के लिए बाहर न घूमना चाहिए, गर्म पानी पीना चाहिए, धूप में कुछ समय जरूर बैठना चाहिए। इससे सर्दी एवं कोरोना दोनों से बचा जा सकता है।



कामयाबी चाहिए या संतुष्टि, वक्त की मांग-मनोवैज्ञानिक










सूर्यकांत
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कनीना। उम्मीद काउंसलिंग सेंटर डाइट महेंद्रगढ़ के मनोवैज्ञानिक सूर्यकांत यादव का कहना है कि आज प्रत्येक व्यक्ति सफल होना चाहता है,असफलता किसी को पसंद नहीं है। शायद ही हमने इस ओर ध्यान दिया हो कि सफलता और विफलता घटनाओं को इंगित करती हैं व्यक्ति को नहीं। या तो हम कुछ करते हुए सफल होते हैं,या हम किसी काम में विफल हो जाते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि हम पूरी तरह से सफल हैं या पूरी तरह से विफल हैं। हमारे कुछ पहलू ऐसे हो सकते हैं जिनमें हम पूरी तरह सफल न हों या किसी में पूरी तरह विफल न हों। एक सफल व्यक्ति का बड़ा बैंक बैलेंस हो सकता है,लेकिन वो एक अभिभावक या एक पति या पत्नी के रूप में हो सकता है पूरी तरह नाकाम हो। और वो व्यक्ति किसी व्यवसाय में पूरी तरह नाकाम हो जाए, वो अविश्वसनीय रूप से एक अच्छा अभिभावक हो सकता है।
दरअसल यह हमारा बिलीफ सिस्टम होता है जिसके कारण हम यह मान लेते हैं कि हम सफल हैं और हमारे बच्चों को भी सफल होना चाहिए,या हम ये मान लेते हैं कि हम नाकाम हैं लिहाज़ा ये सुनिश्चित कर लेना चाहते हैं कि हमारे बच्चे नाकाम न हो जाएं। अगर बच्चा परीक्षा में फेल हो जाता है तो हम उसे नाकाम कहते हैं,हम इस तरह से पेश करते हैं जैसे कि वो अपनी बाकी जिंदगी में भी नाकाम ही रहेगा। जबकि हो सकता है कि बच्चा एक परीक्षा में फेल हुआ होगा और उसके जीवन में कई ऐसे पहलू होंगे जिनमें वो सफल रह सकता है। हम ये मानने के लिए तैयार नहीं होते कि बच्चे खेल में अच्छे हो सकते हैं,वे बहुत बड़े कलाकार हो सकते हैं, अच्छे वक्ता या रचनात्मक समस्या को हल करने वाले हो सकते हैं,वे ईमानदार व मददगार हो सकते हैं,उनमें व्यक्ति के रूप में अनोखे गुण हो सकते हैं। हम इन सब चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं और उन पर विफलता का ठप्पा लगा देते हैं सिर्फ इसलिए कि वो एक परीक्षा में फेल हुए हैं।
अपने बच्चों को उनके तमाम सामर्थों और कमजोरियों के साथ,समग्रता में स्वीकार करने के लिए यह समझने की जरूरत है कि सफलता और विफलता,घटनाओं को परिभाषित करने वाली शब्दावलियां हैं, लोगों को नहीं।
उन्होंने कहा कि कुछ विफलताओं का सामना हमें और हमारे बच्चों को निश्चित रूप से करना ही पड़ेगा। एक अभिभावक होने के नाते बच्चों को ऐसे जीवन कौशलों से सुसज्जित करना चाहिए जिनको वे नाकाम होने की स्थिति में इस्तेमाल कर सकें और परिस्थितियों से निपट सकें। हमें बतौर अभिभावक, विपरीत हालात के सामने साहस व समृद्धि के सामने विनम्रता के गुणों को विकसित करना चाहिए। तभी हम अपने बच्चों को उनके जीवन में आने वाली तमाम   चुनौतियों और खुशियों,सफलताओं और विफलताओं का सामना कर पाने लायक बना पाएंगे।
  उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता-असफलता बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। यह मायने नहीं रखता की आप कितनी बार असफल हुए हैं,दुनिया सिर्फ परिणाम देखती है, कोशिश नहीं। कभी-कभी सफलता हमारी नाकामी,गलती व अनचाहे अपराध की भी ढाल बन जाती है। अत: सफल होना व संतुष्ट होना दो भिन्न बातें हैं। यदि हम अपने मन के अनुसार कोई भी कार्य करके खुश हैं,तो वह संतुष्टि है और यदि हम किसी बड़े पद,प्रभाव या प्रतिष्ठा से समाज में रुतबा बनायें हुए हैं,तो यह कामयाबी है। जरूरी नहीं कि कामयाबी से आप संतुष्ट ही हों। जीवन का असली आनन्द सिर्फ इस बात में है कि लोग हमें पैसे,प्रभाव या पद से प्रभावित होकर अग्रिम पंक्ति में स्थान न दें,बल्कि हमारी योग्यता व समाज के प्रति हमारे योगदान के बलबूते पर अग्रिम पंक्ति में स्थान मिले।
फोटो कैप्शन: सूर्यकांत यादव मनोवैज्ञानिक

Sunday, November 7, 2021

  50 यूनिट रक्त किया इकट्ठा
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 कनीना। सर्वोदय संगठन बवानिया तथा हरियाणा रेड क्रास सोसाइटी वालंटरी ब्लड डोनेशन सर्विसेज नारनौल के सामूहिक प्रयास से सर्वोदय लाइब्रेरी बवानिया में ब्लड डोनेशन कैंप लगाया जिसमें 50 यूनिट रक्त इक_ा किया।
 इस मौके पर संस्था के प्रधान प्रदीप कुमार ने कहा कि एक बूंद रक्त किसी की जान को बचा सकती है। दिया गया रक्त तुरंत शरीर में पूरा हो जाता है इसलिए रक्तदान जरूर करना चाहिए ताकि किसी की जान बचाई जा सके। सीमा पर लडऩे वाले वीरों और बहादुरों के लिए भी रक्त की जरूरत होती है। किसी भी समय किसी को रक्त की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए रक्तदान समय समय पर जरूर करना चाहिए। इस अवसर पर प्रदीप कुमार, संजीव कुमार, सुमेर सिंह, सोनू, अजीत,शुक्रमपाल, सुंदर पाल, प्रवीण, सुभाष चंद्र आदि मौजूद थे।
 फोटो कैप्शन 9: ब्लड डोनेशन कैंप बवानिया का नजारा।




त्योहारों की वजह से रुका नहर का भूमिगत कार्य
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 कनीना। कनीना अनाज मंडी से गुजरने वाली नहर को भूमिगत करके इसके ऊपर से बाईपास बनाने की कार्रवाई त्योहारों के चलते रुक गई है। यही नहीं पेड़ों को काटकर पाइप बिछाने की अनुमति भी अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। इसे जल्द ही मिलने के आसार है। कनीना मंडी से गुजरने वाली नहर को भूमिगत करने की गतिविधि लंबे समय से जारी है किंतु नहर के बीच से पाइप दबाने के मुद्दे को लेकर काम रुक गया था। वही कनीना नगर पालिका ने तीन रास्ते पुल बनाकर छोडऩे के के लिए भी एक्षन नहर विभाग को भेजे जाने के चलते कुछ समय के लिए कार्य रुक गया है। तत्पश्चात नहर के बीच से पाइप दबाने की मांग के चलते भी फिर से सर्वे किया गया और अब जगह के बीचो-बीच पाइप दबाने की कार्यवाही चलेगी किंतु इसमें पेड़ पौधे और त्यौहारों ने आंट अड़ा दी थी। त्यौहार बीत गए हैं, वहीं अब पेड़ों के विभाग से अनुमति विभाग से प्राप्त होने के तुरंत बाद ही कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
 इस संबंध में पालिका प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि उन्होंने नहर पर तीन अलग अलग स्थानों पर पुल बनाकर किसानों के लिए रास्ता छोडऩे के लिए एस्टीमेट एक्षन को लिख दिया था जिस पर कार्रवाई होने की उम्मीद है। वहीं इस संबंध में विधायक सीताराम यादव अटेली ने बताया कि पेड़ों की कटाई के लिए विभाग को लिखा जा चुका है, अनुमति प्राप्त होने ही वाली है जिसके तुरंत बाद नहर का भूमिगतिकरण कार्य शुरू हो जाएगा। बहरहाल जल्द ही यह कार्य सिरे चढऩे की उम्मीद है।
 फोटो कैप्शन 10: नहर पर डाले पाइप जिनको भूमि के नीचे से गुजारा जाएगा।



 ऋग्वेद परायण यज्ञ का धनौंदा के वेद मंदिर में हुआ आयोजन
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कनीना। प्रभु का ध्यान ही मानव को शुभ कर्म की ओर अग्रसर करता है क्योंकि प्रभु के ध्यान से ही मन को शांति मिल जाती है। वह समाज को सही दिशा देने का कार्य करता है। ये विचार ऋग्वेद परायण यज्ञकता ब्रह्मचारी संजीव रूप बदायूं वेद पाठी ने यज्ञ के उपरांत व्यक्त किए। इस अवसर पर बोलते हुए ब्रह्मचारी संजीव रूप बदायूं ने यज्ञ पर आए  लोगों को संबोधित करते हुए कहां कि यज्ञ द्वारा सभी मनोरथ संपूर्ण किए जा सकते हैं क्योंकि यज्ञ वह कार्य है जिससे नि:स्वार्थ भाव से सभी को पुण्य मिलता है,जहां यज्ञ किया जाता है। उस गली मोहल्ले में गांव में सुख व शांति का आनंदित होता है। इसलिए ऋग्वेद वेद परायण का शुभारंभ गांव धनौदा के आर्य समाज मंदिर में किया गया।
 वही यज्ञ के मुख्यककर्र्ता वरिष्ठ समाजसेवी कैलाश गोयल ने जानकारी देते हुए बताया यह कि हर वर्ष की भांति गांव धनौंदा में इस प्रकार का यज्ञ हर वर्ष किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया यह  यज्ञ 7 दिन तक चलेगा और उसके बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा जिसमें गांव के ही नहीं आस पड़ोस के गांव के लोग भी आकर आहुति डालेंगे। इस अवसर पर गांव के भारी मात्रा में लोग एकत्रित हुए। इस मौके पर ब्रह्मचारी मनोज आर्य वीर व उनके सहयोगी ब्रह्मचारी आनंद आर्य, विजय आर्य, संतलाल आर्य, सतपाल शर्मा आर्य, ब्रह्मचारी गुरुदत्त आदि मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 8: धनौंदा में यज्ञ करते विशिष्ट जन।




भाविपा की बैठक में लिये गये कई निर्णय
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कनीना। नेताजी मेमोरियल क्लब कनीना में भारत विकास परिषद कनीना की बैठक शाखा अध्यक्ष मोहन सिंह यादव की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कई निर्णय लिये गये।    इस मौके पर लखन लाल जांगड़ा शाखा सचिव एवं भारत को जानों प्रतियोगिता के संचालक ने बताया कि प्रतियोगिता 2021-22 वर्ष में वरिष्ठ वर्ग में हर्षिता कनीना व अंकिता कनीना ने उतीर्ण किया व कनिष्ठ वर्ग में धैर्य व वंशिका ने प्रथम रहे है।
 इस मौके पर कंवरसेन वशिष्ठ शाखा संरक्षक, कृष्ण सिंह यादव सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक शाखा उपाध्यक्ष व धनपत यादव ने इन बच्चों को अपना आशीर्वाद दिया व उम्मीद जाहिर की कि ये बच्चे प्रान्त स्तर पर भी अव्वल आकर कनीना शाखा व अपने स्कूल का नाम रोशन करेंगे। शाखा अध्यक्ष मोहन सिंह यादव ने बताया कि इन सभी बच्चों को आठ नवंबर सोमवार को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागी बच्चों सुबह दस बजे शिवलाल धर्मशाला कनीना मण्डी में मुख्य अतिथि धनसिंह यादव सम्मानित करेंगे। शिक्षकों को भी छात्र अभिनन्दन व गुरु वन्दन कायक्रम में सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर शाखा की कार्यकारिणी के सदस्यों को भी सम्मान समारोह की जिम्मेदारी बांटी गई।  इस बैठक में  मोहन सिंह यादव अध्यक्ष, कंवर सेन वशिष्ठ संरक्षक ,लखन लाल जांगड़ा शाखा सचिव, कृष्ण सिंह यादव उपाध्यक्ष, प्रेम सिंगला कोषाध्यक्ष, संत लाल जांगड़ा, मास्टर दलीप सिंह, शिव कुमार अग्रवाल, धनपत सिंह, सुरेश शर्मा , अरुणा कौशिक व खामोश गुसाईं आदि शामिल रहे।
फोटो कैप्शन 9: भारत विकास परिषद की बैठक का नजारा।



पौधों की छंटाई करने के चलते टाई करने के चलते बिजली रही 6 घंटे बाधित
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 कनीना। कनीना पावर हाउस के कर्मचारियों द्वारा सुबह आठ बजे से दोपहर पश्चात दो बजे तक विद्युत आपूर्ति बंद रखी तथा पेड़ों की कटाई छटाई की गई।
 मिली जानकारी अनुसार लिफ्टर की सहायता से उन पेड़ों की छंटाई की गई जो विद्युत आपूर्ति तारों को बाधक बन रहे थे। इस अवसर पर विजय कुमार जेई, संजय लाइनमैन, राजेश लाइनमैन, सुनील लाइनमैन, जोगेंद्र लाइनमैन और पवन कुमार लाइनमैन, पौधों की हल्की छंगाई की। इस प्रकार 4 घंटे विद्युत आपूर्ति बाधित हुई। तत्पश्चात विद्युत आपूर्ति सुचारू कर दी गई। विजय कुमार जेई ने बताया कि यह पेड़ पौधों की टहनियां अक्सर विद्युत आपूर्ति तारों से छू जाती थी जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो रही थी। अब कटाई छंगाई के बाद विद्युत आपूर्ति सुचारू रूप से चलती रहेगी।
 फोटो कैप्शन दो: पौधों की लिफ्टर की सहायता से छंगाई करते कर्मचारी।





हमें कामयाबी चाहिए या संतुष्टि-मनोवैज्ञानिक सूर्यकांत
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कनीना। उम्मीद काउंसलिंग सेंटर डाइट महेंद्रगढ़ के मनोवैज्ञानिक सूर्यकांत यादव का कहना है कि आज प्रत्येक व्यक्ति सफल होना चाहता है,असफलता किसी को पसंद नहीं है। शायद ही हमने इस ओर ध्यान दिया हो कि सफलता और विफलता घटनाओं को इंगित करती हैं व्यक्ति को नहीं। या तो हम कुछ करते हुए सफल होते हैं,या हम किसी काम में विफल हो जाते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि हम पूरी तरह से सफल हैं या पूरी तरह से विफल हैं। हमारे कुछ पहलू ऐसे हो सकते हैं जिनमें हम पूरी तरह सफल न हों या किसी में पूरी तरह विफल न हों। एक सफल व्यक्ति का बड़ा बैंक बैलेंस हो सकता है,लेकिन वो एक अभिभावक या एक पति या पत्नी के रूप में हो सकता है पूरी तरह नाकाम हो। और वो व्यक्ति किसी व्यवसाय में पूरी तरह नाकाम हो जाए, वो अविश्वसनीय रूप से एक अच्छा अभिभावक हो सकता है।
दरअसल यह हमारा बिलीफ सिस्टम होता है जिसके कारण हम यह मान लेते हैं कि हम सफल हैं और हमारे बच्चों को भी सफल होना चाहिए,या हम ये मान लेते हैं कि हम नाकाम हैं लिहाज़ा ये सुनिश्चित कर लेना चाहते हैं कि हमारे बच्चे नाकाम न हो जाएं। अगर बच्चा परीक्षा में फेल हो जाता है तो हम उसे नाकाम कहते हैं,हम इस तरह से पेश करते हैं जैसे कि वो अपनी बाकी जिंदगी में भी नाकाम ही रहेगा। जबकि हो सकता है कि बच्चा एक परीक्षा में फेल हुआ होगा और उसके जीवन में कई ऐसे पहलू होंगे जिनमें वो सफल रह सकता है। हम ये मानने के लिए तैयार नहीं होते कि बच्चे खेल में अच्छे हो सकते हैं,वे बहुत बड़े कलाकार हो सकते हैं, अच्छे वक्ता या रचनात्मक समस्या को हल करने वाले हो सकते हैं,वे ईमानदार व मददगार हो सकते हैं,उनमें व्यक्ति के रूप में अनोखे गुण हो सकते हैं। हम इन सब चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं और उन पर विफलता का ठप्पा लगा देते हैं सिर्फ इसलिए कि वो एक परीक्षा में फेल हुए हैं।
अपने बच्चों को उनके तमाम सामर्थों और कमजोरियों के साथ,समग्रता में स्वीकार करने के लिए यह समझने की जरूरत है कि सफलता और विफलता,घटनाओं को परिभाषित करने वाली शब्दावलियां हैं, लोगों को नहीं।
उन्होंने कहा कि कुछ विफलताओं का सामना हमें और हमारे बच्चों को निश्चित रूप से करना ही पड़ेगा। एक अभिभावक होने के नाते बच्चों को ऐसे जीवन कौशलों से सुसज्जित करना चाहिए जिनको वे नाकाम होने की स्थिति में इस्तेमाल कर सकें और परिस्थितियों से निपट सकें। हमें बतौर अभिभावक, विपरीत हालात के सामने साहस व समृद्धि के सामने विनम्रता के गुणों को विकसित करना चाहिए। तभी हम अपने बच्चों को उनके जीवन में आने वाली तमाम   चुनौतियों और खुशियों,सफलताओं और विफलताओं का सामना कर पाने लायक बना पाएंगे।
  उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता-असफलता बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। यह मायने नहीं रखता की आप कितनी बार असफल हुए हैं,दुनिया सिर्फ परिणाम देखती है, कोशिश नहीं। कभी-कभी सफलता हमारी नाकामी,गलती व अनचाहे अपराध की भी ढाल बन जाती है। अत: सफल होना व संतुष्ट होना दो भिन्न बातें हैं। यदि हम अपने मन के अनुसार कोई भी कार्य करके खुश हैं,तो वह संतुष्टि है और यदि हम किसी बड़े पद,प्रभाव या प्रतिष्ठा से समाज में रुतबा बनायें हुए हैं,तो यह कामयाबी है। जरूरी नहीं कि कामयाबी से आप संतुष्ट ही हों। जीवन का असली आनन्द सिर्फ इस बात में है कि लोग हमें पैसे,प्रभाव या पद से प्रभावित होकर अग्रिम पंक्ति में स्थान न दें,बल्कि हमारी योग्यता व समाज के प्रति हमारे योगदान के बलबूते पर अग्रिम पंक्ति में स्थान मिले।
फोटो कैप्शन: सूर्यकांत यादव मनोवैज्ञानिक





भडफ़ स्कूल में आयोजित हुई पीटीएम
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कनीना। सरस्वती पब्लिक स्कूल भडफ़ॅ के प्रांगण में  अध्यापक अभिभावक मिलन समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें कक्षा एलकेजी से बारहवीं तक के अभिभावकों ने अपने बच्चों की कक्षा की प्रगति का जायजा लिया और अध्यापकों व विद्यालय के मैनेजमेंट के साथ बच्चों के चहुमुखी विकास के बारे में विस्तार से चर्चा की।
 कोविड-19 के बाद बदलते हुए परिवेश में अध्यापकों ने भी अपनी तरफ से अभिभावकों की हर उम्मीदों पर खरा उतरने का संकल्प लिया वहीं अभिभावकों द्वारा दी गई हर छोटी से छोटी सलाह को बड़ी ही गंभीरता से पालन करने व उसमें सुधार करने का वचन दिया। इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन रमेश कुमार भारद्वाज ने बच्चों को टेलीविजन व मोबाइल फोन से दूरी बनाने के लिए माता पिता को आगाह किया। उन्होंने माता पिता व उनके साथ है आए विद्यार्थियों को इनके दुष्परिणाम के बारे में विस्तार से बताया व माता-पिता से आग्रह किया कि वे बच्चों की हर छोटी व बड़ी सभी गतिविधियों को ध्यान में रखें और उनके बारे में विद्यालय को भी अवगत कराते रहें ताकि बच्चों के कमियों को दूर किया जा सके और उनकी खूबियों को निखारा जा सके। इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन रमेश कुमार भारद्वाज ने सभी अभिभावक बंधुओं को आश्वस्त किया कि समस्त विद्यालय परिवार बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कृत संकल्प है और जितना मुमकिन होगा सार्थक प्रयास जारी रहेगा, बशर्ते की आपका सहयोग पूर्ण रूप से मिलता रहे।  
फोटो कैप्शन एक: सरस्वती स्कूल भडफ़ में आयोजित पीटीएम।




 पूर्व पंच बलवंत सिंह का हुआ निधन
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कनीना। सेना से सेवानिवृत्त हो कर पूर्व पंच करीरा निवासी 88 वर्षीय बलवंत सिंह का निधन हो गया। ठेकेदार नवीन करीरा ने जानकारी देते हुए बताया कि कि उनके दादा बलवंत सिंह सेना में सेवाएं देकर आने के बाद गांव में पंच रहे। गांव में सभी के साथ मिलनसार रहते थे। शाम के समय जब उनसे मिलने के लिए गए तो वह उठे नहीं। बलवंत सिंह अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
फोटो फाइल: फोटो बलवंत सिंह।



घर के आगे खड़ी बाइक चोरी
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कनीना। कनीना थाना के तहत भालखी गांव के ईश्वर सिंह की मोटरसाइकिल उनके घर के सामने से चोरी हो गई। कनीना पुलिस ने उनकी शिकायत पर अज्ञात चोरों के विरुद्ध बाइक चोरी का मामला दर्ज किया है।
 ईश्वर सिंह ने पुलिस में कहा है कि वह भालखी का निवासी है तथा अपने घर के सामने दोपहर पश्चात करीब एक बजे अपनी मोटरसाइकिल खड़ी की और स्कूल में तैनाती पर चला गया। घर वापस आने पर मोटरसाइकिल नहीं मिली, तलाश करने पर भी कोई अता पता नहीं चल पाया। उनकी शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है।



मार पिटाई का मामला दर्ज
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कनीना। कनीना के वार्ड नंबर एक निवासी सुमित कुमार की शिकायत पर 4 लोगों के विरुद्ध मारपीट करने तथा जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया है।
 सुमित कुमार ने बताया कि 23 अक्टूबर को चंद्रभान एवं गजराज ने उसके साथ मारपीट की थी जिसकी शिकायत दी थी किंतु उस पर कार्रवाई नहीं की गई किंतु एक बार फिर चार व्यक्तियों गजराज सिंह, सोनू, धोलिया एवं चंद्रभान ने घर पर आकर मार पिटाई की और चोटिल किया। घायल हालात में कनीना अस्पताल भर्ती करवाया था। सुमित की शिकायत पर चार लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है और कार्रवाई जारी है।


नगरपालिका ने की











प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त
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कनीना। कनीना नगर पालिका के तहत विभिन्न गलियों की प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त है। मकैनिक विद्यानंद ने बताया कि थोड़े समय के लिए कोई प्रकाश व्यवस्था में खराबी आ गई थी उसे पूुन: दुरुस्त कर दिया गया है।। ऐसे में समस्त प्रकाश व्यवस्था जगमग कर रही है। उधर पालिका प्रधान ने बताया कि सभी प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त है। भविष्य में कुछ और प्रकाश व्यवस्था प्रबंध करने पर विचार किया जाएगा, जिन स्थानों पर प्रकाश व्यवस्था की जरूरत है उनको चिन्हित किया जाएगा। बस स्टैंड पर अनाज मंडी किराए पर टावर लाइट में थोड़े समय के लिए खराबी आ गई थी जिसे ठीक कर दी गई है।

Saturday, November 6, 2021

 
सांसद की गाड़ी पर पथराव करने का विरोध जताया
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कनीना। अखिल भारतीय जिला जांगिड़ ब्राह्मण कल्याण सभा की कनीना में विश्वकर्मा धर्मशाला एक विशेष बैठक का आयोजन ओमप्रकाश भडफ़ अध्यक्षता में की गई जिसमें भगवान विश्वकर्मा दिवस के पावन अवसर पर रामचंद्र जी सांसद राज्यसभा को  हिसार जिले के नारनौंद में एक नवनिर्मित धर्मशाला का उद्घाटन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जाना था इसमें शामिल होने के लिए जब वे जा रहे थे तो कुछ असामाजिक एवं शरारती तत्वों के द्वारा उनकी गाड़ी पर पथराव व नारेबाजी, अभद्र व्यवहार किया गया। गाड़ी के शीशे आदि तोड़े गये जो  बड़ा ही निंदनीय कार्य है।
बैठक में इस अभद्रतापूर्ण व्यवहार कड़ी निंदा की। यह केवल व्यक्ति विशेष ही नहीं बल्कि पूरे समाज के धार्मिक देव व आराध्य देव का अपमान ही माना जा रहा है। सरकार से मांग की कि इस प्रकार के असामाजिक तत्वों  के प्रति कठोर से कठोर कार्यवाही अमल में लाए। यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया ताकि इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में न हो पाए और समाज  में अराजकता और अशांति फैलाने वाले तत्वों पर अंकुश लगाया जा सकें।  इस अवसर पर अराजकता और अशांति फैलाने वाले तत्वों पर अंकुश लगाया जा सकें ताकि समाज की छवि और आराध्य देव का निरादर होने से बचा जा सकें और हम सब सुरक्षित जीवन यापन कर सके। इस अवसर पर  राजेंद्र सिंह साहब, कृपाराम पूर्व सरपंच ,धर्मदत्त , ब्रह्मदत्त प्रधान मुकेश नंबरदार ,विजय सिंह अशोक पैकन पूर्व प्राचार्य ,सतबीर सिंह ,धर्मपाल नंबरदार, कैलाश ,सुरेश पेंटर मदन कोटिया, बंशीधर ठेकेदार, मोतीराम थानेदार, सुभाष उपप्रधान,दलीप कुमार ,ओम प्रकाश, मूलचंद, अशोक, पवन कुमार मुकेश कुमार, विरेंद्र सिंह, मुंशीराम ठेकेदार, सुबे सिंह पूर्व सरपंच, रोहतास, छोटेलाल,  वेद प्रकाश रामचंद्र आदि जांगिड़ बंधु जन उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 10: बैठक का नजारा।


निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर 9 को
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 कनीना। 9 नवंबर को आर एस वाटिका में निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया जाएगा। विस्तृत जानकारी देते हुए सूबेदार जयनारायण तथा कप्तान सूबे सिंह ने बताया कि आरएस वाटिका में लगने वाले शिविर में विशेष डॉक्टरों की टीम निशुल्क एक्सरे, ईसीजी, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर आदि की जांच करेगी। वही हड्डी रोग विशेषक और हृदय रोग विशेषज्ञ उपलब्ध रहेंगे। इस शिविर में सभी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगे तथा परामर्श मुफ्त दिया जाएगा।


दीपावली के पटाखों की राशि से खरीदे पौधे और गमले
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 कनीना। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ऋषिराज खेड़ा ने अपने पुत्र सुजल द्वारा दीपावली पर खर्च की जाने वाली करीब 5 हजार रुपये की राशि से न केवल विभिन्न प्रकार के पौधे अपितु गमले खरीदे हैं। ये गमले एवं पौधे घर में सजाये हैं। उन्होंने बताया कि इस बार उनका पुत्र सुजल नहीं चाहता था कि पटाखे चलाए जाए
ऐसे में उनके खाते से 5000 रुपये की राशि जो पटाखों पर खर्च की जानी थी उसे विभिन्न गमले खरीदे हैं। उल्लेखनीय है कि ऋषिराज खेड़ा निवासी का घर गमलों पेड़ पौधों से भरा हुआ है। दूरदराज के लोग उनके घर को देखने के लिए आते हैं। विभिन्न अवसरों पर भी अपने पैसों से विभिन्न गमले एवं पौधे खरीदते हैं और उनसे घर की शोभा बढ़ाते हैं। वर्तमान में उनके घर में फलदार फूलदार करीब 300 पौधों में रखे हुए हैं वही बड़े पौधे भारी संख्या में मौजूद हैं।
फोटो कैप्शन 9: ऋषिराज का घर उसमें रखे हुए गमले।





मेडिकल प्रवेश परीक्षा में यूरो स्कूल के विद्यार्थियों ने पाई सफलता
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कनीना। हाल ही में घोषित मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) में यूरो ग्रुप आफ स्कूल्स के 62 विद्यार्थियों ने सफलता पाई है।
 चेयरमैन सत्यवीर यादव ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की 720 अंकों की इस परीक्षा में छात्र प्रिन्स ने 631, प्रीती ने 611, आयूषी ने 603, प्रियांशी ने 568, तमन्ना ने 523 तथा भारती ने 500 अंक प्राप्त किए। इस सफलता पर यूरो ग्रुप के चेयरमैन सत्यवीर यादव ने विद्यार्थियों, अध्यापकों एवं अभिभावकों को बधाई दी। यूरो गु्रप के शैक्षणिक निदेशक डा राजेन्द्र यादव ने बताया कि कांउसलिंग में सफल विद्यार्थी विभिन्न मेडिकल कालेजों से कोर्स करके चिकित्सा के क्षेत्र में सेवाएं देंगे। यूरो गु्रप के प्रबन्धक  नितिन यादव व प्राचार्य सुनील यादव ने इन सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की एवं उनको निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा दी।


 विधायक सीताराम ने किया जिम का उद्घाटन
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कनीना। अटेली विधायक सीताराम यादव ने बॉडीक्राफ्ट जिम सेहलंग का उद्घाटन किया।
 उन्होंने इस अवसर पर कहा कि रोज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक्सरसाइज बहुत जरूरी हो गई है। ऐसे में जिम लाभदायक है। उन्होंने कहा कि जब तक स्वास्थ्य है तब तक यह संसार है। सेहत खराब होने पर धन और सब कुछ बेकार है। सेहत बनाए रखने के लिए एक्सरसाइज करने पर बल दिया। इस अवसर पर उन्होंने जिम संचालक पंकज एवं राहुल की सराहना की। उन्होंने लोगों से समय निकालकर जिम करने की भी सलाह दी। विधायक ने जिम ट्रेनर पंकज से जिम के तरीकों की जानकारी ली और उपलब्ध उपकरणों का निरीक्षण भी किया। इस मौके पर उनके साथ पूर्व जिला अध्यक्ष सतवीर यादव, हनुमान शर्मा,  शीला शक्ति, नाथन पोता,सज्जन रोहिल्ला, दिनेश,  वेद प्रकाश एडवोकेट बाघोत, अतर सिंह स्याणा, सूबे,  कुलदीप सिंह, विनीत सिंह, रामनिवास आदि मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 8: जिम का उद्घाटन करते सीताराम विधायक।




भूला दिया है मोटे अन्न उपजाना
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कनीना।  तीन दशक पूर्व कनीना क्षेत्र में पैदावार बहुत अधिक होती थी जो अब लगभग समाप्त हो चुकी हैं। किसी एक या दो क्यारी में किसान चना उगाते हैं। अब दाल के भावों में तेजी आने के पीछे भी यही कारण माना जाता है। क्षेत्र में सबसे अधिक चने की खेती होती थी जो विगत 2014 में महज तीस हेक्टेयर में चना उगाया था। वर्ष 2015 में 52 हेक्टेयर पर चने की बीजाई की गई थी। 2015 से 2018 तक भी चने की महज 70 से 80 हेक्टेयर बिजाई की जाती रही है। विगत दो वर्षों से चने की खेती दस हेक्टेयर से कम रह गई है। इस वर्ष चना 6 हेक्टेयर तो जौ 15 हेक्टेयर पर बीजाई होने की संभावना है।
  कनीना की भूमि बावनी नाम से जानी जाती है। 52 हजार हेक्टेयर पर खरीफ एवं रबी की कृषि की जाती है। कनीना क्षेत्र में चने की खेती आज के दिन महज इतनी रह गई है कि कभी कभार बुजुर्गों को चटनी के लिए हरे चने की पत्तियां चाहिए तो किसी किसान के खेत में एक या दो क्यारियां ही मिल सकती हैं। यही कारण है कि बाजार में चने के पौधे भी बिकते देखे जा सकते हैं।
  किसानों का कहना है कि दालों के भावों में निरंतर तेजी के पीछे कारण है कि किसान अपने खेतों में मोटे अन्न जिनमें चना आदि तथा दाल देने वाली फसलें नहीं उगाते हैं। एक वक्त था जब विवाह शादी में अवश्य लड्डू बनाए जाते थे किंतु अब जब किसी के शादी होती है तो लड्डू के लिए चने दूर दराज से लाने पड़ते हैं या फिर खरीदकर लाते हैं।
   किसानों का कहना है कि वे भी किसी वैज्ञानिक से कम नहीं होते हैं और नई नई फसल उगाकर लाभ व हानि का अनुभव करते हैं। अब जब खेतों में कुओं द्वारा सिंचाई की जाती है तो चने के लिए प्रतिकूल है। किसान अजीत सिंह कहते हैं कि पूर्णरूप से वर्षा के जल पर चने की कृषि आधारित है। अब किसान कम खेत में अधिक पैदावार लेने के चक्कर में होते हैं और पुराने अन्न को उगाना भूल गए हैं।
 बुजुर्ग राम सिंह, दुलीचंद, धनपती का कहना है कि कभी इस क्षेत्र में चने की खेती की जाती थी तो चने की सब्जी, चने की रोटी, मेसी रोटी, हरे चने की चटनी, खाटा का साग, कढ़ी, परांठे व कई अन्य सब्जियों में डालकर जायका लिया जाता था। जब तक चना सूख न जाता था तब तक चने को खाते रहते थे किंतु अब दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। कृषि अधिकारी डा देवराज का कहना है कि इस क्षेत्र में चने की कृषि घटती ही जा रही है जिसके पीछे बरानी (असिंचित) क्षेत्र न होना माना जाता है। जहां सिंचाई हो जाती है वहां चना नहीं होता है। अभी भी पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी डा रामानंद यादव चने की खेती कर रहे हैं।



सरसों की अगेती बिजाई करने वाले खुश
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 कनीना। कनीना क्षेत्र में सरसों की अगेती बिजाई करने वाले किसान अब खुश हैं तथा उनके खेतों में खड़ी फसल अच्छी नजर आने लगी है। किसानों ने 11 अक्टूबर को सरसों की बिजाई कर दी थी। कनीना के किसान सुनील कुमार, दिनेश कुमार, महेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने 11 अक्टूबर को सरसों की बिजाई कर दी थी जो अब अच्छी फसल दिखाई देने लग गई है। सरसों खूड़ों से बाहर नजर आ रही है। कृषि विभाग सरसों की बिजाई का समय 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर मानता है परंतु गर्मी अधिक पडऩे के कारण बहुत से किसानों ने जल्दी में बिजाई नहीं की लेकिन कुछ किसानों ने रिस्क लेकर बिजाई की थी जो अब बेहतर नजर आ रही है। वर्तमान में गेहूं की बिजाई जोरों पर चल रही है। सरसों की बिजाई का कार्य पूर्ण हो चुका है।
पूर्व कृषि अधिकारी डॉ देवराज का कहना है कि कनीना क्षेत्र करीब 20 हजार हेक्टेयर पर सरसों की बिजाई तथा 8000 हेक्टेयर के करीब गेहूं की बिजाई की जानी है। अभी तक किसान सरसों की बिजाई पूर्ण कर चुके हैं। क्योंकि खाद की कमी से उनकी बीजाई भी प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि वैसे तो 25 अक्टूबर तक सरसों की बिजाई करना उचित है। इसके बाद तो प्रतिदिन प्रति एकड़ 18 किलो सरसों पैदावार कम होती चली जाती है। ऐसे में देरी से बीजाई करना नुकसानदायक साबित होता है। उन्होंने बताया कि अब किसान गेहूं की बीजाई में लगे हुये हैं जो 25 नवंबर तक जारी रहेगी।
फोटो कैप्शन 8: खेतों में अगैती खड़ी सरसों।




एनएसएस यूनिट के स्वयं सेवकों ने की सफाई
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कनीना। एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला के एनएसएस यूनिट के स्वयं सेवकों ने स्टाफ सदस्यों के साथ विद्यालय में सफाई अभियान चलाया।  
त्योहार के उपलक्ष्य में स्वयं सेवकों ने विद्यालय में साफ  सफाई की और पौधाों को पानी दिया।
एनएसएस प्रभारी संदीप कुमार ने बताया कि सफाई का अपना महत्व है इनसे मिलने वाले सन्देश समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां साफ सफाई होती है वहीं देवता निवास करते हैं। ऐसे में सभी को साफ सफाई पर ध्यान देना चाहिए।
इस मौके पर विद्यालय निदेशक जगदेव यादव ने स्वयं सेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि साफ सफाई से देवता प्रसन्न होते हैं। त्योहारों का सामाजिक व धार्मिक दोनों ही दृष्टि से अत्यधिक महत्व है।
इस अवसर पर प्राचार्य ओमप्रकाश, वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र यादव, सीईओ आरएस यादव, वरिष्ठ विभाग के मुखिया पूर्ण सिंह, कनिष्ठ विभाग के मुखिया नरेन्द्र यादव, शैक्षणिक विभाग के मुखिया सुनील यादव, सुरेन्द्र कुमार चौहान, संदीप कुमार उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: एसडी स्कूल में सफाई करने वाली एनएसएस टीम।




जहरीली गैसें बढ़ी
-दीपावली के बाद स्थिति बिगड़ी
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कनीना। दीपावली और गोवर्धन पूजा  के अगले दिन यानी शनिवार को हरियाणा एनसीआर दिल्ली सहित उत्तर भारत के अधिकतर शहर एक बार फिर बुरी तरह से जहरीली हवाओं की चपेट में हैं. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम शहरों में हवा बेहद जहरीली हो चुकी हैं। इस प्रदूषण की वजह से सूर्य का प्रकाश भी धुंधला दिखाई दे रहा है, शनिवार सुबह में दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) लेवल 410 था जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।दिल्ली आज दुनिया में सबसे प्रदूषित हवा वाला शहर है. यह लेवल बेहद जहरीली हो चुकी हवा का संकेत दे रहा है। दीपावली और गोवर्धन पूजा त्यौहार पर हुई आतिशबाजी की वजह वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी से हरियाणा राज्य की वायु गुणवत्ता सूचकांक में भारी बढ़ोतरी हुई है। राजकीय महाविद्यालय नारनौल के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डा चंद्रमोहन ने बताया की दिल्ली एनसीआर में बढ़ते हुए प्रदूषण के मद्देनजऱ हरियाणा सरकार ने पटाखों की बिक्री को लेकर अहम फैसला लिया था। हरियाणा सरकार ने दिल्ली एनसीआर के अंतर्गत आने वाले हरियाणा के 14 जिलों में  पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी । जिनमें भिवानी, चरखी दादरी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, झज्जर, जींद, करनाल, महेंद्रगढ़, नूंह, पलवल, पानीपत, रेवाड़ी, रोहतक और सोनीपत में सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध रहा।
यह आदेश राज्य के उन सभी शहरों में भी लागू होगा, जहां पिछले साल नवंबर में औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब श्रेणी में रहा था. सरकारी आदेश के मुताबिक, जिन शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक सामान्य श्रेणी में रहा था, वहां केवल ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल को मंजूरी प्रदान की गई है. दीपावली और गुरु नानक जयंती पर रात आठ बजे से 10 बजे के बीच ही पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति होगी. परंतु लोगों में जागरूकता की कमी और दीपावली के मौके पर देर रात तक ग्रीन पटाखों की जगह प्रदूषण वाले पटाखों की जमकर हुई। आतिशबाजी से पूरे हरियाणा का खासकर जिन जिलों में सरकार के आदेश थे कि पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा  इन जिलों में सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही है। हरियाणा के इन जिलों के वायु गुणवत्ता सूचकांक सामान्य श्रेणी में नहीं रहे। जिला महेंद्रगढ़ जिले का आज वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब श्रेणी में रहा है, जिनमें नारनौल का 197 जबकि अटेली का 184 महेंद्रगढ़ का 180 और रेवाड़ी का 224 रहा, रोहतक 378, अंबाला 179, असंध 207, बाहदुरगढ़ 267, उचाना 218, बरवाला 212, बावल 182, भिवानी 232, चरखी दादरी 281, फरीदाबाद 339, गोहाना 308, गुरुग्राम 299,, हिसार 334, झज्जर 326 कलानौर 326, खरखोदा 365, महम 335, रोहतक 378, रहा, दिल्ली 410 जो विश्व में सबसे पहले स्थान पर रहा है, जबकि सामान्य वायु गुणवत्ता सूचकांक 0 से 50 तक रहता है, अगर  एनसीआर दिल्ली में शामिल शहऱो की बात की जाए तो यहां पहले से ही कई कारण है जिनसे वायु गुणवत्ता में कमी आई रहती है जिनमें अनियंत्रित एवं परिवहन के साधनों की अधिकता जगह-जगह परिवहन के साधनों का जाम लगना, निर्माण कार्यों की अधिकता, सड़कों का निर्माण कार्य का चलना ,इसके साथ साथ क्रेशर जोन का होना, खनन कार्य का होना, बड़ी बड़ी सड़क परियोजनाओं का आना उनके साथ हरे वृक्षों की कटाई का कार्य होना, ईट भट्टा एवं बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों का निर्माण होना। यह सारे कारण इस प्रदूषण के स्तर को और ज्यादा बढ़ा देते है और वायु की गुणवत्ता को  और कम कर देते है, इसलिए हम सभी को अधिक से अधिक पेड़ों को लगाना चाहिए, त्योहारों पर आतिशबाजी नहीं करनी चाहिए, जिससे हमें स्वस्थ पर्यावरण और स्वस्थ हवा मिल सके । और प्रदूषण को कम किया जा सके।

 


छठ पूजा का अवकाश घोषित करने की मांग
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कनीना। क्षेत्र में बिहार एवं उत्तरप्रदेश के भारी संख्या में आए हुए लोग या तो छठ पूजा से वंचित रह गए हैं या फिर अपने क्षेत्र में लौट गए हैं।
  कनीना क्षेत्र में करीब दो हजार लोग दूसरे राज्यों से भारी संख्या में मजदूर एवं मिस्त्री आए हुए हैं जिनके यहां छठ पूजा का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसे में ये लोग या तो छठ पूजा के लिए अपने वतन को लौट गए हैं या फिर जो नहीं जा पाए वो मायूस हैं और छठ पूजा से वंचित रह रहे हैं। कनीना के आस पास रेवाड़ी में छठ पूजा मनाए जाने की प्रथा अधिक है। ऐसे में कुछ लोग तो रेवाड़ी जाने की तैयारी में जुटे हुए हैं।
  कई उत्तरप्रदेश एवं बिहार के लोगों ने बताया कि उनका यह प्रमुख पर्व होता है। इस दिन वे अकसर अपने गांव चले जाते हैं किंतु मजबूरी वश वे जब गांव नहीं जा पाते हैं तो यहीं पर पर्व मना लेते हैं। उन्होंने हरियाणा सरकार से मांग की है कि प्रदेश में भी इस दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए ताकि यह पर्व बेहतर ढंग से मनाया जा सके। मजदूरी करने बिहार से आए रमलू, शौनक, दानू तथा उत्तर प्रदेश से आए मुन्नीलाल, धर्मा, खेताराम तथा रेवती ने बताया कि उनके साथी उत्तर प्रदेश तथा बिहार जा चुके हैं। 10 नवंबर को छठ पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। इस पर्व में शामिल होने चले गए हैं किंतु मजदूरी अभी जारी है ऐसे में वे मजदूरी छोड़कर अपने प्रदेश को नहीं जा सके और वे या तो पर्व कनीना में ही मनाएंगे या फिर रेवाड़ी जैसे शहर में जाकर पर्व का मना सकेंगे।





भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है भैया दूज-सुरेंद्र
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कनीना। भाइयों के प्रति बहनों के प्रेम और विश्वास का पर्व भाई दूज कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। भाई दूज के दिन बहने नारियल भाई को देकर टीका करती है, टीका करने के बाद बहने भाई आरती करती करती है, बदले में भाई अपने बहन को गिफ्ट देती है। ये विचार कनीना ज्योतिषाचार्य सुरेंद्र शर्मा ने व्यक्त किये।
  उन्होंने उपस्थित जनसमूह को कहा कि उत्तर भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में कई अनोखी परंपराएं प्रचलित हैं, जिनका निर्वहन करते हुए बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
उन्होंने सुनाई पूरी कहानी-
पंडित प्रदीप शास्त्री ने पूरी कथा सुनाते हुये बताया कि भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया।अयमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया। यमुना ने कहा कि भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करें, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की। इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।
क्षेत्र में शनिवार को भाई बहने के अटूट प्रेम को दर्शाता भैया दूज का पर्व मनाया गया। बहनों ने भाइयों को तिलक किया।
  वर्ष में दो बार भाई बहन के अटूट रिश्ते को दर्शाने वाले पर्व भैया दूज का आगाज होता है।  दीपावली के पर्व के बाद यह पर्व आता है। महिलाएं अपने भाई के आने का बेसब्री से इंतजार किया और व्रत रखकर उनके आने पर खाना खाया।
  इस दिन बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र की कामना के लिए यम से प्रार्थना की। भाई चलकर बहनों से मिलने के लिए गए। कनीना के ज्योतिषाचार्य सुरेंद्र वशिष्ठ का कहना है कि यह पर्व सभी पर्वों में सबसे बड़ा होता है। इस दिन बहना कहीं भी हो उससे मिलने भाई जरूर जाता है और बहने उन्हें तिलक कर अपने हाथों से मीठा भोजन कराकर फिर भोजन ग्रहण करती हैं। इस पर्व पर बहने अपने भाई की लंबी उम्र की कामना के लिए यमराज से प्रार्थना करती हैं।
फोटो कैप्शन 02: बहन भाई को टीका करते हुए।





ऋग्वेद पारा








यण यज्ञ का आयोजन 7 नवंबर से
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कनीना। कनीना उपमंडल के गांव धनौंदा स्थित वेद मंदिर में ऋग्वेद पारायण यज्ञ का आयोजन 7 नवंबर से 13 नवंबर तक चलेगा। विस्तृत जानकारी देते हैं मंदिर के मंत्री-प्रधानाचार्य सूरत सिंह आर्य ने बताया दो पारियों में कार्यक्रम आयोजित होगा जिसमें सुबह नौ से 12 तथा शाम अढ़ाई से 5 बजे तक हवन एवं प्रवचन चलेंगे। इस अवसर पर यज्ञ ब्रह्मचार्य संजीव रूप बदायूं  तथा वेद पाठी ब्रह्मचारी मनोज आर्य वीर तथा ब्रह्मचारी आनंद आर्य होंगे।

Friday, November 5, 2021


ऋग्वेद पारायण यज्ञ का आयोजन 7 नवंबर से
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 कनीना। कनीना उपमंडल के गांव धनौंदा स्थित वेद मंदिर में ऋग्वेद पारायण यज्ञ का आयोजन 7 नवंबर से 13 नवंबर तक चलेगा। विस्तृत जानकारी देते हैं मंदिर के मंत्री-प्रधानाचार्य सूरत सिंह आर्य ने बताया दो पारियों में कार्यक्रम आयोजित होगा जिसमें सुबह नौ से 12 तथा शाम अढ़ाई से 5 बजे तक हवन एवं प्रवचन चलेंगे। इस अवसर पर यज्ञ ब्रह्मचार्य संजीव रूप बदायूं  तथा वेद पाठी ब्रह्मचारी मनोज आर्य वीर तथा ब्रह्मचारी आनंद आर्य होंगे।




क्षेत्र में बदला मौसम, दिनभर सूर्यदेव नहीं दिखाई दिये
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कनीना। कनीना क्षेत्र में मौसम में बदलाव आ गया है। एक बार फिर से बादल आकाश में छाए रहे।
 शुक्रवार को सुबह से सूर्यदेव के दर्शन भी नहीं हुए है जिसको लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि किसानों ने गेहूं की बिजाई की हुई है यदि बारिश होती है तो गेहूं की बीजाई प्रभावित हो सकती है। सरसों बड़ी हो चुकी है।
सरसों की फसल में आब आ गई वहीं दिनभर बादल छाए रहे। किसान कृष्ण कुमार, रवि कुमार, योगेश कुमार, रोहित कुमार, अजीत कुमार, सूबे सिंह आदि ने बताया कि गेहूं एवं सरसों की बीजाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। सरसों की फसल बड़ी हो चुकी है वहीं गेहूं की बीजाई 25 नवंबर तक मानी जाती है।





14 नवंबर देव उठावनी एकादशी होने से खूब बजेंगी शहनाइयां
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कनीना।  14 नवंबर से देव उठनी एकादशी पर विवाह शादियों का सीजन शुरू हो जाने से इस बार कम अवधि में खूब शहनाइयां बजेंगी। ऐसे में नये कपड़ों की विशेषकर आधुनिक कपड़ों की मांग बढऩे लगी है। ऊनी कपड़ों की मांग भी बढ़ी है। कनीना एवं आस पास दो सौ के करीब शादियां हैं। सभी विवाह समारोह स्थल पहले से ही बुक हैं।  
देव उठनी एकादशी 14 नवंबर को-
 देव उठानी एकादशी 14 नवंबर से शुरू हो रही है। इस दिन विवाह शादी शुरू हो जाएंगी तथा विभिन्न विभिन्न स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कनीना के सुरेंद्र वशिष्ठ ने बताया कि अकेले कनीना क्षेत्र में एक  आधा करीब शादियां हो रही है तथा आस पास गांवों को मिलकार करीब 200 शादियां हैं। देव उठनी एकादशी का दिन विवाह शादियों के लिए सबसे शुभ दिन होता है। लंबे समय से विवाह शादी करने वाले इस दिन का इंतजार कर रहे थे। एकादशी पुनीत कार्य पुण्य के बराबर होते हैं। यही कारण है कि इस दिन विवाह शादियां की जाती है।
निर्वाण दिवस-
 उधो आश्रम के बाबा लाल दास ने बताया कि उदास निर्वाण दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन पवित्र ग्रंथ की पूजा अर्चना की जाती है तथा विभिन्न कार्यक्रम उदास आश्रम में आयोजित किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय उठानी एकादशी का दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।





अनाज मंडी तिराहे की टावर लाइट खराब
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 कनीना। कनीना बस स्टैंड से अनाज मंडी जाने वाले तिराहे की टावर लाइट खराब हो जाने से लोग परेशान हैं। दीपावली के दिन भारी भीड़ इधर उधर दौड़ती दिखाई दी किंतु लाइट का अभाव रहा। विभिन्न दुकानदारों ने बताया कि कनीना पालिका द्वारा लगाई हुई लाइट खराब हो गई है जिसके चलते परेशानी उठानी पड़ रही है। विगत वर्षों की लाइट खराब हो गई थी जिसे ठीक करवाया गया था। एक बार फिर से यह खराब हो जाने से लोगों में रोष पनप रहा है। लोगों की मांग है कि टावर लाइट ठीक करवाई जाए। उधर कनीना पालिका प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि इस लाइट को जल्द ही दुरुस्त कर दिया जाएगा। दीपावली पर्व के चलते मैकेनिकल नहीं मिल रहे थे। अब जल्दी उसको ठीक करवाने का प्रस्ताव है।
फोटो कैप्शन 7: टावर लाइट खराब पड़ी टावर लाइट




सरसों की अगेती बिजाई करने वाले खुश
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 कनीना। कनीना क्षेत्र में सरसों की अगेती बिजाई करने वाले किसान अब खुश हैं तथा उनके खेतों में खड़ी फसल अच्छी नजर आने लगी है। किसानों ने 11 अक्टूबर को सरसों की बिजाई कर दी थी। कनीना के किसान सुनील कुमार, दिनेश कुमार, महेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने 11 अक्टूबर को सरसों की बिजाई कर दी थी जो अब अच्छी फसल दिखाई देने लग गई है। सरसों खूड़ों से बाहर नजर आ रही है। कृषि विभाग सरसों की बिजाई का समय 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर मानता है परंतु गर्मी अधिक पडऩे के कारण बहुत से किसानों ने जल्दी में बिजाई नहीं की लेकिन कुछ किसानों ने रिस्क लेकर बिजाई की थी जो अब बेहतर नजर आ रही है। वर्तमान में गेहूं की बिजाई जोरों पर चल रही है। सरसों की बिजाई का कार्य पूर्ण हो चुका है।
पूर्व कृषि अधिकारी डॉ देवराज का कहना है कि कनीना क्षेत्र करीब 20 हजार हेक्टेयर पर सरसों की बिजाई तथा 8000 हेक्टेयर के करीब गेहूं की बिजाई की जानी है। अभी तक किसान सरसों की बिजाई पूर्ण कर चुके हैं। क्योंकि खाद की कमी से उनकी बीजाई भी प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि वैसे तो 25 अक्टूबर तक सरसों की बिजाई करना उचित है। इसके बाद तो प्रतिदिन प्रति एकड़ 18 किलो सरसों पैदावार कम होती चली जाती है। ऐसे में देरी से बीजाई करना नुकसानदायक साबित होता है। उन्होंने बताया कि अब किसान गेहूं की बीजाई में लगे हुये हैं जो 25 नवंबर तक जारी रहेगी।
फोटो कैप्शन 2: खेतों में अगैती खड़ी सरसों।





अन्नकुट वितरित किया
- गोवर्धन पर्व की धूम रही
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कनीना। क्षेत्र में शुक्रवार को गोवर्धन पूजा दिनभर चली। इस अवसर पर हवन, प्रवचन हुए तथा प्रसाद वितरित किया गया।
 क्षेत्र में दीपावली पर्व के अगले दिन शुक्रवार को गोवर्धन पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर गौशालाओं में गायों को भोजन कराया गया वहीं गायों की पूजा की गई। मंदिरों में हवन एवं प्रसाद वितरित किए गए। मंदिरों में प्रसाद वितरित किया गया। विभिन्न गांवों में इस दिन प्रसाद वितरित करने की परंपरा है।
 गोवर्धन पर्व के विषय में जानकारी देते हुए पंडित सुरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि एक बार इंद्र देव भगवान् श्रीकृष्ण से कुपित हो गए और मूसलाधार वर्षा करने लगे। गोकुल में इतनी भारी वर्षा देखकर ग्रामीण भयभीत हो गए और चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई। जीव जल में डूबकर मरने लगे तो ग्रामीण दौड़कर भगवान् श्रीकृष्ण के पास आए। भगवान् श्रीकृष्ण ने उस वक्त गोवर्धन पर्वत ही अपनी अंगुली पर उठा लिया और गोकुलवासियों को उसके नीचे आने का आदेश दिया। इस प्रकार इंद्र का गर्व चूर-चूर हो गया और खुश होकर ग्रामीणों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इसी दिन आजकल गाय आदि की पूजा करने का विधान भी है।
  कनीना मंडी के राधाकृष्ण मंदिर में प्रसाद वितरित किया वहीं कनीना का बड़ा मंदिर, दादा ठाकुर मंदिर में पर्व की धूम रही। दिनभर कढ़ी, खिचड़ी, भाजी एवं खीर वितरित की गई। कनीना के बड़े मंदिर में मदनलाल शर्मा,कंवरसेन वशिष्ठ के अलावा प्रवेश पंडित, सौरभ, नवीन, पवन शर्मा, प्रमोद शर्मा, घन श्याम, रामावतार संदी, कृष्ण, संतोष शर्मा, कमलेश शर्मा सहित कई जनों ने दूर दराज से आए भक्तों की सेवा की और उन्हें प्रसाद वितरित किया। खाटू श्याम मंदिर कनीना में मंदिर कमेटी पदाधिकारियों ने मिलकर अन्नकुट का वितरण किया। दूर दराज से भक्त पहुंचे।
 बड़ा मंदिर कनीना के कंवरसेन वशिष्ठ ने बताया कि इस मंदिर में  करीब 200 वर्षों से अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया जा रहा है।  ठाकुर मंदिर में जहां बीकानेर महाराज आते थे। तब यहां तत्कालीन पुजारी ने उनको विशेष कढ़ी, बाजरा चावल का प्रसाद खिलाया था। वही चर्म रोग से मुक्त हो गए थे। तब से इस मंदिर में आसपास के 52 गांवों के लोग मन्नत मांगने के लिए आते हैं।
 उधर उधोदास आश्रम के संत लालदास महाराज ने बताया कि उनके यहां हर वर्ष अन्नकुट बनाया गया जिसमें दूर दराज से भक्त पहुंचे। भक्तों ने आकर प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने बताया कि यहां देव उठानी एकादशी को भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। कनीना एवं आस पास विभिन्न गांवों में गोवर्धन पर्व की धूम रही तथा प्रसाद वितरित किया।
  उधर खाटू श्याम मंदिर कनीना में प्रसाद वितरण किया गया। यहां दुलीचंद साहब, गुड्डू चौधरी, योगेश कुमार, दुलीचंद, टिंकू, पालाराम, नवीन आदि ने दूर दराज से आये भक्तों को प्रसाद वितरित कर सेवा की। दुलीचंद साहब ने बताया कि यहां विभिन्न कार्यक्रम समय समय पर आयोजित किये जाते हैं।
फोटो कैशन 3 व 4 : खाटू श्याम तथा बड़ा मंदिरों में अन्नकुट वितरित करते हुए।


शहीद स्मारकों पर दीपक जला कर मनाई दिवाली
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कनीना। कनीना खंड के गांव इसराना में स्थित शहीद जोनी स्मारक पर दीपक जलाकर शहीद परिवार के साथ सामाजिक संस्था बीइंग ह्यूमन सेवा मंडल ने सांझा किया। उन्होंने शहीदों के कभी न भूलने वाले बलिदान के महत्व को लोगों के साथ साझा करते हुए युवाओं को उनके सम्मान के लिए प्रेरित किया।
 संस्था अध्यक्ष नवीन कौशिक समाजसेवी ने बताया कि हर दीपावली पर्व पर शहीद स्मारकों पर दीप प्रज्ज्वलित करते हैं। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए इसराना और गांव निमोठ में शहीद कृष्ण कुमार स्मारक पर दीपक जलाकर दिवाली की खुशियां मनाई। इस अवसर पर संस्था की तरफ से दिल्ली पुलिस से रिटायर्ड रोहतास कुमार और सुरेश कुमार ने शहीदों के परिवार को बार बार धन्यवाद दिया जिन्होंने ऐसे सपूतों को जन्मा जिन्होंने देश पर जान न्यौछावर कर दी। इस दौरान टोनी, हनुमान ,गजे सिंह, राहुल यादव, कबूल सिंह, अभिनव, आलोक आदि युवा शामिल रहे।
फोटो कैप्शन 5: शहीदों की चिताओं पर दीप प्रज्लित करते संस्था के सदस्य।





अभिभावकों को समझना होगा बच्चों के मनोविज्ञान को-मनोवैज्ञानिक सूर्यकांत
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कनीना। छात्रों की समुचित शिक्षा में अभिभावकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। क्योंकि बालकों का अधिकांश समय माता-पिता तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ ही गुजरता है। फलत: उनके व्यवहार तथा आचरण का सीधा प्रभाव बालकों के व्यक्तित्व विकास पर पड़ता है। इतना ही नहीं अभिभावकों की धारणा भी अप्रत्यक्ष रूप से बालकों के विकास और विद्यालय शिक्षा को प्रभावित करती है। माता-पिता अपने बच्चे के विकास में अपना कितना समय निवेश करते हैं, इसका सीधा असर बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण पर पड़ता है। यह कहना है उम्मीद काउंसलिंग सेंटर डाइट महेंद्रगढ़ के मनोवैज्ञानिक सूर्यकांत यादव का।
  उन्होंने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में स्थितियां तेजी से बदली हैं। एक विद्यार्थी के जीवन में जहां शिक्षक का अहम योगदान है,वहीं दूसरी तरफ अभिभावकों की भूमिका को भी कम करके नहीं आंका जा सकता। प्रतियोगिता के इस दौर में हर अभिभावक यही चाहता है की उनकी संतान परीक्षा में अच्छे अंक लेकर उत्तीर्ण हो। यूं तो पूरा वर्ष ही अभिभावक अपने बच्चों के लिए चिंतित रहते हैं,मगर ये चिन्ता उस वक्त और अधिक बढ़ जाती है,जब परीक्षाएं सामने हों। अपने बच्चों के लिए अभिभावकों की यह चिंता तो स्वाभाविक है, मगर इस बात का ध्यान रखना भी नितांत आवश्यक है कि अपेक्षाएं इतनी अधिक ना हों की छात्र तनाव व भय के आगोश में समा जाये।
अभिभावकों को अपने बच्चों की तुलना अन्य बच्चों से करने से भी बचना चाहिए क्योंकि प्रत्येक बच्चा विभिन्न गुणों,विवेक शारीरिक क्षमता और स्वभाव के साथ ही पैदा होता है। इसीलिए वे कुशाग्रता, बुद्धि और व्यक्तित्व के मामलों में एक-दूसरे से अलग होते हैं। बच्चों में ऐसे कई जन्मजात गुण होते हैं,जिन पर अभिभावकों के मार्गदर्शन और व्यवहार का असर पड़ता है। अक्सर यह भी देखा गया है कि अभिभावकों का ध्यान बच्चों पर कम और उनके परीक्षा परिणाम की तरफ ज्यादा होता है। समस्या तब और अधिक बढ़ जाती है जब दोनों ही अभिभावक कामकाजी या नौकरी पेशा हों। इससे कहीं ना कहीं एक कम्युनिकेशन गैप पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है।
कई बार अभिभावक अपने बच्चों से अपनी उन अपूर्ण इच्छाओं को पूरा करने की भी आस लगा बैठते हैं,जिन्हें वे कभी अपने विद्यार्थी काल में या अपने जीवन में करने में सफल न हुए हों। यह बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है कि बच्चे की रूचि उन्हीं चीजों में हो,जो उनके लिए अभिभावक सही समझते हों।दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद विषयों का चयन करते समय भी अभिभावकों को अपनी मर्जी बच्चों पर नहीं थोपनी चाहिए बल्कि उन्हें उनकी मर्जी और रुचि के अनुसार ही विषयों का चयन करने देना चाहिए। साथ ही माता-पिता को चाहिए कि वे बाल-मनोविज्ञान को समझते हुए अपने बच्चे की मानसिक योग्यता, अभिरुचि तथा आकांक्षा स्तर के अनुरूप ही व्यवहार करें। बच्चों को अनावश्यक डांटना,फटकारना तथा ग्लानि सूचक शब्द कहना हमेशा हानिप्रद होते हैं, इसलिए अभिभावकों और बच्चों के बीच एक स्वस्थ संवाद का होना जरूरी है ताकि अगर बच्चे किसी परेशानी से जूझ रहे हों तो उसका एक सकारात्मक हल निकाला जा सके। अपने जीवन के प्रेरणादायक प्रसंग और अनुभवों को बच्चों के साथ सांझा करके भी उन्हें तनाव और भयमुक्त किया जा सकता है।
फोटो कैप्शन: सूर्यकांत मनोवैज्ञानिक।





शांतिपूर्वक मनाई गई दीपावली
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कनीना। कनीना एवं आस पास क्षेत्र में दीपावली का पर्व शांतिपूर्वक मनाई गई। इस बार कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। पटाखों पर प्रतिबंध था किंतु चोरी छिपके बहुत पटाखे चलाए गए। वैसे भी लोग कोरोना काल से परेशान थे और खुशी मनाने के लिए यह दिन नजर आया। ऐसे में जमकर पटाखे तोड़े।
  सबसे बड़ा प्रभाव मार्केट में चाइनीज आइटम न खरीदे जाने व न बेचे जाने का देखने को मिला।  वहां भी चाइनीज पटाखे एवं सामान नहीं देखने को मिला। इस बार पटाखे भी कम चले और देर रात तक नहीं चलाए गए।  ग्राहकों को सीधे अपने घर पर बुलाकर पटाखे बेचे गए। युवा वर्ग ने पटाखे खरीदे परंतु महंगे दामों पर। देर शाम तक हल्के पटाखे चलाए गए परंतु चाइनीज आइटम नहीं खरीदे गए।
 सबसे अधिक भीड़ मिठाई की दुकानों पर देखी गई। मिठाई का लेन देन दिनभर चला।दीपावली के दिन जमकर भीड़ विभिन्न सड़क मार्गों पर देखने को मिली वही दुकानदारों ने जमकर महंगे दामों पर वस्तुएं बेची। जहां सेब 150 रुपये किलो वहीं केले 80 रुपये दर्जन बेचे गये। आनानास 125 रुपये प्रति पीस बेचा वहीं विभिन्न स्थानों पर भीड़ देखने को मिली। जहां ग्राहकों को जमकर घटियां वस्तुएं खाने को मिली। टमाटर 90 रुपये किलो वहीं प्याज 70 रुपये किलो के हिसाब से बिकी। विभिन्न सड़क मार्गों पर भारी भीड़ देखने को मिली।
फोटो कैप्शन 01: दीपावली पर फुलझड़ी चलाती बच्ची।



भैया दूज का पर्व 6 नवंबर को
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 कनीना। कनीना क्षेत्र में भाई बहन के अटूट प्यार को निभाने वाला पर्व भैया दूज 6 नवंबर  को मनाया जा रहा है। इस पर्व पर दूरदराज से बहन अपने भाई से मिलने के लिए पहुंचती है या फिर भाई अपनी बहन से मिलने के लिए उन तक पहुंचता है।
यह माना जाता है कि यह पर्व रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने के लिए मनाया जाता है। वर्ष में दो बार यह पर्व आता है। होली के पश्चात तथा दीपावली के पश्चात दोनों ही पर्वों के बाद यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन अवकाश रहेगा। यह पौराणिक कथा यम यमी की याद दिलाता है।
क्या है कहानी
सूर्यदेव की पत्नी छाया की कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ। यमुना अपने भाई यमराज से स्नेहवश निवेदन करती थी कि वे उसके घर आकर भोजन करें। लेकिन यमराज व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात को टाल जाते थे।
कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना अपने द्वार पर अचानक यमराज को खड़ा देखकर हर्ष.विभोर हो गई। प्रसन्नचित्त हो भाई का स्वागत.सत्कार किया तथा भोजन करवाया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वर मांगने को कहा।
तब बहन ने भाई से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आया करेंगे तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाए उसे आपका भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहा और यमपुरी चले गए।
ऐसी मान्यता है कि जो भाई आज के दिन यमुना में स्नान करके पूरी श्रद्धा से बहनों के आतिथ्य को स्वीकार करते हैं उन्हें तथा उनकी बहन को यम का भय नहीं रहता।