कनीना क्षेत्र में मिले आठ संक्रमित
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धनोंदा गांव में एक ही परिवार के पांच लोग मिले संक्रमित
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कनीना। कस्बे में कोरोना का कहर धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है । हालांकि लोग धीरे धीरे कोरोना के प्रति जागरूक हो रहे हैं । धनोंदा गांव में एक ही परिवार के पांच लोग संक्रमित मिले हैं । एसएमओ डॉ धर्मेंद्र यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि रविवार को कस्बे में आठ संक्रमित मिले हैं जिसमें धनोंदा गांव के एक ही परिवार के पांच लोग संक्रमित मिले हैं। रविवार को सबसे पहले करीरा गांव का 38 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित मिला है । दूसरा केस भोजावास गांव का 42 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित मिला है। तीसरा केस कनीना के वार्ड नंबर 7 का रहने वाला 52 वर्षीय संहगमित मिला है । उसके बाद सांय की रिपोर्ट में धनोंदा गांव के एक ही परिवार के पांच लोग संक्रमित मिले हैं। संक्रमितों में अधिकतर को होम आइसोलेट किया गया है । हेल्थ इंस्पेक्टर शीशराम रसूलपुर ने जानकारी देते हुए बताया कि संक्रमितों के आसपास रहने वालों की लिस्ट तैयार की जा रही है। जल्दी ही संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों के सैंपल लिए जाएंगे।
सावधानी बरते--
डा धर्मेंद्र एसएमओ ने कहा कि कोरोना जल्द ही हार जाएगा और हमारी जीत होगी। उन्होंने कहा कि बस थोड़ी सी सावधानी की जरूरत है। अगर सभी अनलाक-4 के नियमों का पालन करेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब कोरोना हार जाएगा। उन्होंने हाथों में ग्लव्ज, मुंह पर मास्क तथा सेनिटाइजर प्रयोग करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सावधानी बरतने से ही इस रोग पर काबू पाया जा सकता है।
फोटो कैप्शन 4: स्क्रीनिंग करते कर्मी।
किसानों के हित में होगा विधेयक-डा देवराज
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कनीना। विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में रखे गए कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 पारित कर दिए गए हैं। इन बिलों को लोकसभा में पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही यह बिल कानून बन जाएंगे।
नए कृषि कानूनों से देश के किसानों के जीवन में कैसे किसानों के लिए, देश की अर्थव्यवस्था के लिए लाभप्रद होंगे। इस संबंध में कृषि विशेषज्ञों से बात की गई।
क्षेत्र के अग्रणी किसान एवं सरकार द्वारा सम्मानित किसान महावीर करीरा से बातचीत की गई। उन्होंने इस विधेयक को किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा बताया। उनका कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की व्यवस्था की जाएगी जिसमें बड़ी-बड़ी कंपनियां बड़े-बड़े फार्मों पर कृषि करेगी। अगर कोई किसान इस प्रकार के फॉर्म के बीच में अपनी स्वयं की खेती कर रहा है तो उसको मजबूरन अपना खेत कंपनियों को देना होगा। वही कंपनियां लंबे समय तक किसानों के पैदावार की राशि समय पर नहीं दे पाती है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी फसल पैदावार को कहीं पर भी बेच पाएगा, बात सही लगती है किंतु किसान बड़ी मुश्किल से अपनी अनाज मंडी तक पहुंच पाता है। ऐसे में किसान के किसी भी क्षेत्र में पहुंचना तो उसके लिए और भी कठिन हो जाएगा। उन्होंने बताया कि लंबे समय से पैदावार खरीदने के लिए कंपनी आती है जो किसानों के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने ऐसे में यह विधेयक किसानों के ज्यादा हितकर नहीं बताया।
उधर कृषि वैज्ञानिक डॉ देवराज यादव ने कहा कि यह विधेयक किसानों के बहुत हितकर होगा। बिना किसी रोक-टोक के किसान कहीं भी अपनी पैदावार बेच पाएगा। बेहतर मुनाफा लेने के लिए किसान कहीं भी जा सकेगा और अच्छा मुनाफा ले पाएगा। वहीं उन्होंने कहा कि कांटेक्ट फार्मिंग किसानों के लिए वरदान साबित होगी। किसान अपनी पैदावार अन्न, फल, सब्जी अनाज इन कंपनियों को देगा और ये कंपनियां उनको उचित लाभ देगी जिससे किसानों की अर्थव्यवस्था सुधर जाएगी।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात होगी कि किसान किसी भी जगह जाकर अपनी पैदावार बेच पाएगा। आढ़तियों और बिचौलियों की भूमिका गौण बन जाएगी और किसान स्वतंत्र होंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विधायक पर आस्ट्रेलिया अमेरिका और विभिन्न देश कार्य कर रहे हैं जहां किसानों की बहुत अच्छी आय हो रही है तथा किसान समृद्ध बने हैं। उन्होंने इस विधेयक की प्रशंसा की और कहा कि किसानों को के हित में विधायक होगा।
फोटो कैप्शन: महावीर सिंह और डॉ देवराज
त्वरित गति से ले रहे हैं पैदावार
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कनीना। क्षेत्र के किसान बदलते मौसम के दृष्टिगत त्वरित गति से पैदावार ले रहे हैं। जहां बाजरे की लावणी का कार्य पूरे वेग से चल रहा है और करीब 1 सप्ताह में पूर्ण होने की पूरी संभावना है।
तत्पश्चात अनाज मंडियों में सरकारी तौर पर बाजरे की खरीद शुरू होने की पूरी संभावना है। 1 अक्टूबर से खरीद कार्य शुरू होगा। सरकारी तौर पर खरीद शुरू होने के अंदेशे से किसान अपनी पैदावार सीधी घरों में डाल रहे हैं। पहली बार देखने को मिला है कि किसान खुली मंडियों में बाजरे को नहीं ले जा रहे हैं। किसान सुखबीर सिंह, अजीत सिंह, राजेंद्र कुमार, महेंद्र सिंह आदि ने बताया कि खुली मंडियों में 1300 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि सरकारी भाव 2150 प्रति क्विंटल है। यही कारण है कि अबकी बार किसान खुली मंडी में बाजरा बेचने के लिए नहीं ले जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि मौसम बदल रहा है। शनिवार की रात को हल्की बूंदाबांदी हुई जिसके चलते किसानों के माथे पर चिंता स्पष्ट नजर आई। दिन में भी बादल नजर आए। यही कारण है कि किसी बारिश आदि की संभावना के दृष्टिगत जल्दी-जल्दी अपनी बाजरे की पूलियां (कड़बी)इक_ी कर रहे और पैदावार को ले रहे हैं। किसानों का कहना है कि बाजरे की कड़वी पूरे साल काम में लाई जाती है। जहां इस बार मजदूर देर में पहुंचे हैं वहीं भारी संख्या में मजदूरों द्वारा कार्य करवाया जा रहा है। कपास ने इस बार किसानों को पहले ही धोखा दे दिया है।
फोटो कैप्शन 1 तथा 2: बाजरे की पूलियां इक_ी करते किसान।
10 हाई मास्क लाइटों से जगमग होगा कनीना कस्बा
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कनीना। कनीना कस्बे में विभिन्न स्थानों पर 10 हाई मास्क लाइट लगाई जा रही है जिनकी लाइट से कनीना कस्बा जगमग होगा।
कनीना कस्बे में अलग-अलग स्थानों पर नगर पालिका की ओर से लाइट लगाने का प्रबंध किया गया है जिससे समुचित प्रकाश व्यवस्था होगी वही किसी चोरी आदि पर भी नजर रखने में सुविधा मिलेगी।
विस्तृत जानकारी देते हैं कनीना पालिका प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि करीब 30 लाख रुपये की लागत से 35 फुट ऊंचाई वाली 10 हाई मास्क लाइट लगाई जा रही है। ये हाई मास्क लाइट गाहड़ा मोड, वार्ड नंबर 5, आर्य समाज मंदिर, नगर पालिका के नए कार्यालय में, संगम कॉलोनी, धोकलमल पार्क, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, अनीता पूर्व सीपीएस मार्ग पर, फुटबॉल के मैदान पर, बस स्टैंड गेट पर लाइट लगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सात मास्क लाइट लगा दी गई है जल्दी 3 हाई मास्क लाइट जल्द ही लगा दी जाएंगी। इस प्रकार कस्बा रात के समय दूर से नजर आएगा और किसी प्रकार की अनहोनी घटना पर भी काबू पाया जा सकेगा।
फोटो कैप्शन 3: हाई मास्क लाइट लगाती नगर पालिका कनीना।
आगे कुआं पीछे खाई
डरे हुये जाएंगे स्कूल
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कनीना। प्रदेश सरकार ने जहां करीब 6 महीने बाद सरकारी एवं निजी स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को स्कूल जाने के लिए कुछ शर्तों के आधार पर छूट दी गई है। जहां सख्त नियम शिक्षकों के लिए रखे गए हैं वहीं विद्यार्थियों के लिए अपने अभिभावकों की अनुमति से स्कूल में जाकर अपने विषय की समस्या हल करवा सकेंगे।
शिक्षक लगातार विद्यालय में जा रहे हैं। गर्मियों में जहां भारी गर्मी सहन की है वही श्रमिक ठहराव के समय भी उन्हें स्कूलों में जाना पड़ा है किंतु विद्यार्थी पहली बार स्कूलों में जाकर अपनी विषय संबंधित जानकारी हासिल करेंगे। लेकिन सरकार के नियमानुसार आपदा प्रबंध कानून 2005 के तहत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के नियमों का पालन न करने पर दंडनीय अपराध होगा। सरकारी तथा निजी स्कूलों में जहां विद्यार्थी जाएंगे वहीं कोविड-19 की त्रासदी के मद्देनजर सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुये सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों के लिए आरोग्य सेतु मोबाइल एप जरूर डालना होगा वही कोविड-19 टेस्ट भी करवाना जरूरी है।
अब इतनी जल्दी शिक्षकों का कोई 19 टेस्ट करवाना जहां कठिन है वही विद्यार्थियों में रोग का भय सता रहा है। ऐसे में आगे कुआं पीछे खाई है। एक ओर भविष्य की चिंता सता रही है वहीं रोग का भय भी सता रहा है।जहां अभिभावक मानते हैं कि रोग तेजी से फैल रहा है, इन हालातों में विद्यार्थियों को स्कूल में अपनी समस्या का निदान करने के लिए जाएंगे तो रोग होने की संभावना अधिक बनती है। साथ में निश्चित संख्या में विद्यार्थी ही स्कूलों में जा सकेंगे
अभिभावक रमेश कुमार, विनोद कुमार, दिनेश कुमार, महेश कुमार, करतार सिंह आदि ने बताया की कोविड-19 के दृष्टिगत जहां स्कूलों में अपनी समस्या का निदान करने के लिए विद्यार्थी स्कूल जा सकेंगे वहीं उन्हें कुछ शंका भी रहेगी कि अचानक इस रोग से कैसे बचा जाए।
क्या करते अभिभावक-
अभिभावक गोगा कहना है कि पिछले 6 महीने से पढ़ाई बाधित हो रही है वहीं यह को रोग का डर लग रहा है और बच्चों को स्कूल में भेजना पड़ रहा है। उनका कहना है कि भविष्य शिक्षा पर निर्भर है। इन हालातों में स्कूल में नहीं भेजे तो उनकी जिंदगी बर्बाद होने के कगार पर होगी। यही कारण है और मजबूरी है कि विद्यार्थियों को स्कूल में अभिभावक भेज रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार और स्कूल पहले उनसे लिखित मांग रही है ताकि किसी प्रकार की समस्या आएगी तो उसके लिए स्कूल और सरकार जिम्मेदार न होंगे।
सबसे बड़ी समस्या एवं जिम्मेदारी शिक्षकों पर आन पड़ी है। शिक्षकों को कोविड- 19 के तहत कोविड टेस्ट करवाना जरूरी होगा और कोई टेस्ट इतने शिक्षकों का करवाना आसान कार्य नहीं है। खंड के कुल 180 स्कूलों के लिए टेस्ट करवाना होगा जिनकी संख्या हजारों में होगी।
इसमें कुछ समय लगेगा परंतु विद्यालयों में जहां सभी विद्यार्थी पढऩे के लिए नहीं आएंगे वहीं शिक्षकों के लिए अब जो विद्यार्थी किसी समस्या को लेकर आएंगे उनके आंकड़े भी प्रतिदिन अपलोड करने होंगे। यहां तक की मुख्याध्यापक स्कूल के प्राचार्य को भी प्रतिदिन रिपोर्ट देनी पड़ेगी।
क्या कहते हैं विद्यार्थी-
विद्यार्थी स्कूल जाने के लिए उत्साहित हैं घर में बैठे-बैठे परेशान हो चुके हैं। विभिन्न विद्यार्थियों से बात की उन्होंने सभी ने एक ही बात कही कि कुछ डर तो लगता है पर मजबूरी है स्कूल में जाकर कुछ समस्याएं हल हो सकेंगे। विद्यार्थी हर्ष कुमार का कहना है कि लंबे समय से भी ऑनलाइन शिक्षण पा रहे हैं किंतु कुछ समस्या सामने आ रही है उनका समाधान करवाने के लिए उन्हें मजबूरी वश स्कूल जाना पड़ेगा। उन्हें कोविड-19 का डर लगता है पर जिंदगी का सवाल है इसलिए उन्हें जाना पड़ेगा। ध्रुव का कहना है कि वह नहीं चाहते हुए भी उनके अभिभावक चाहते हैं कि स्कूल जाए और अपनी समस्या हल करवाएं। वह स्वयं इन समस्याओं को हल करने में अक्षम है, इसलिए मजबूरी है कि नहीं स्कूल जाकर कुछ समस्याएं हल करवानी होगी। सुमित कुमार का भी कहना है कि स्कूल में ही जाकर कुछ प्रश्नों का समाधान हो पाएगा। घर पर हर समस्या का समधान नहीं किया जा सकता है। अमीश कुमार का कहना है कि वे मास्क लगाकर तथा नियमों का पालन करते हुये स्कूल जाएंगे और जो समस्याएं हैं उन्हें नोट कर रखा है उन्हें शिक्षकों से हल करवाएंगे।
शिक्षिका लक्ष्मी देवी का कहना है कि वे विद्यार्थियों की समस्याएं हल करने के लिए तैयार है परंतु अभी उनको कुछ टेस्ट वगैरह से गुजरना होगा तथा सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए ही समस्याओं का समाधान करना है। ऐसे में उनका कहना है कि सरकार का जो आदेश होगा उसका पालन करना ही पड़ेगा। वैसे भी लंबे समय से स्कूल आ रही है।
प्राध्यापक राजेश कुमार का कहना है कि वे पूर्णतया स्कूल में तैयार मिलेंगे और किसी प्रकार की समस्या लेकर विद्यार्थी आएगा उसे हल किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार का जो भी नियम हो रही है तो होंगी उनका भी जरूर पालन करेंगे और विद्यार्थियों को हर हाल में बेहतर शिक्षा देने का प्रयास करेंगे।
पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी अभयराम यादव ने बताया कि कनीना खंड में 74 प्राथमिक स्कूल 22 माध्यमिक स्कूल 5 उच्च विद्यालय तथा 24 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय है। यह तो सरकारी स्कूल है इसके अतिरिक्त वहीं करीब 55 निजी स्कूल खंड में हैं।
वह 21 सितंबर से सभी शिक्षकों का कोविड-19 करवाएंगे लेकिन इसके लिए वे प्रयास करेंगे कि पहले पीजीटी शिक्षकों के टेस्ट हो जाए। तत्पश्चात अन्य शिक्षकों को बारी-बारी से यहां के उप नागरिक अस्पताल में टेस्ट करवाए जाएंगे। उनका कहना है कि सरकार के नियमों का न केवल शिक्षकों को अपितु अधिकारियों को भी पालन करना पड़ेगा।
उधर अब अचानक हजारों शिक्षकों का टेस्ट करवाया जाएगा और रैपिड टेस्ट से ही संभव हो पाएगा।
फोटो कैप्शन: अमीश,धु्रव, हर्ष कुमार, सुमित लक्ष्मी यादव, राजेश कुमार।
बनित यादव का जिला बागवानी अधिकारी के तौर पर चयन
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कनीना। खंड के गांव नांगल हरनाथ के बनित यादव ने हरियाणा बागवानी विभाग मे जिला बागवानी अधिकारी बनकर जिले व गांव का नाम रोशन किया। बनित के दादा अमर सिंह फौज में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हो चुके है, वही इनके पिता सत्यप्रकाश यादव भी फौज से सेवानिवृत्त होकर दिल्ली डीएसएसएसबी में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत है। बनित ने अपनी स्कूली शिक्षा आर्मी स्कूल श्रीगंगानगर से प्राप्त की। 2006 मे इनका दाखिला हरियाणा कृषि विश्वविधालय हिसार मे हुआ। जहां से इन्होंने अपनी बीएससी की डिग्री पूरी की। एमएससी की डिग्री इन्होंने सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ से प्राप्त की। हाल फिलहाल ये खण्ड तकनीकी प्रबन्धक पद पर पिछले 3 साल से कार्यरत थे। अब इनका चयन बागवानी अधिकारी बतौर हुआ है। जिला बागवानी अधिकारी बनने पर पूरे गाँव व क्षेत्र में खुशी का माहौल है ।
फोटो कैप्शन: बनित यादव।
आगे कुआं पीछे खाई
डरे हुये जाएंगे स्कूल
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कनीना। प्रदेश सरकार ने जहां करीब 6 महीने बाद सरकारी एवं निजी स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को स्कूल जाने के लिए कुछ शर्तों के आधार पर छूट दी गई है। जहां सख्त नियम शिक्षकों के लिए रखे गए हैं वहीं विद्यार्थियों के लिए अपने अभिभावकों की अनुमति से स्कूल में जाकर अपने विषय की समस्या हल करवा सकेंगे।
शिक्षक लगातार विद्यालय में जा रहे हैं। गर्मियों में जहां भारी गर्मी सहन की है वही श्रमिक ठहराव के समय भी उन्हें स्कूलों में जाना पड़ा है किंतु विद्यार्थी पहली बार स्कूलों में जाकर अपनी विषय संबंधित जानकारी हासिल करेंगे। लेकिन सरकार के नियमानुसार आपदा प्रबंध कानून 2005 के तहत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के नियमों का पालन न करने पर दंडनीय अपराध होगा। सरकारी तथा निजी स्कूलों में जहां विद्यार्थी जाएंगे वहीं कोविड-19 की त्रासदी के मद्देनजर सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुये सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों के लिए आरोग्य सेतु मोबाइल एप जरूर डालना होगा वही कोविड-19 टेस्ट भी करवाना जरूरी है।
अब इतनी जल्दी शिक्षकों का कोई 19 टेस्ट करवाना जहां कठिन है वही विद्यार्थियों में रोग का भय सता रहा है। ऐसे में आगे कुआं पीछे खाई है। एक ओर भविष्य की चिंता सता रही है वहीं रोग का भय भी सता रहा है।जहां अभिभावक मानते हैं कि रोग तेजी से फैल रहा है, इन हालातों में विद्यार्थियों को स्कूल में अपनी समस्या का निदान करने के लिए जाएंगे तो रोग होने की संभावना अधिक बनती है। साथ में निश्चित संख्या में विद्यार्थी ही स्कूलों में जा सकेंगे
अभिभावक रमेश कुमार, विनोद कुमार, दिनेश कुमार, महेश कुमार, करतार सिंह आदि ने बताया की कोविड-19 के दृष्टिगत जहां स्कूलों में अपनी समस्या का निदान करने के लिए विद्यार्थी स्कूल जा सकेंगे वहीं उन्हें कुछ शंका भी रहेगी कि अचानक इस रोग से कैसे बचा जाए।
क्या करते अभिभावक-
अभिभावक गोगा कहना है कि पिछले 6 महीने से पढ़ाई बाधित हो रही है वहीं यह को रोग का डर लग रहा है और बच्चों को स्कूल में भेजना पड़ रहा है। उनका कहना है कि भविष्य शिक्षा पर निर्भर है। इन हालातों में स्कूल में नहीं भेजे तो उनकी जिंदगी बर्बाद होने के कगार पर होगी। यही कारण है और मजबूरी है कि विद्यार्थियों को स्कूल में अभिभावक भेज रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार और स्कूल पहले उनसे लिखित मांग रही है ताकि किसी प्रकार की समस्या आएगी तो उसके लिए स्कूल और सरकार जिम्मेदार न होंगे।
सबसे बड़ी समस्या एवं जिम्मेदारी शिक्षकों पर आन पड़ी है। शिक्षकों को कोविड- 19 के तहत कोविड टेस्ट करवाना जरूरी होगा और कोई टेस्ट इतने शिक्षकों का करवाना आसान कार्य नहीं है। खंड के कुल 180 स्कूलों के लिए टेस्ट करवाना होगा जिनकी संख्या हजारों में होगी।
इसमें कुछ समय लगेगा परंतु विद्यालयों में जहां सभी विद्यार्थी पढऩे के लिए नहीं आएंगे वहीं शिक्षकों के लिए अब जो विद्यार्थी किसी समस्या को लेकर आएंगे उनके आंकड़े भी प्रतिदिन अपलोड करने होंगे। यहां तक की मुख्याध्यापक स्कूल के प्राचार्य को भी प्रतिदिन रिपोर्ट देनी पड़ेगी।
क्या कहते हैं विद्यार्थी-
विद्यार्थी स्कूल जाने के लिए उत्साहित हैं घर में बैठे-बैठे परेशान हो चुके हैं। विभिन्न विद्यार्थियों से बात की उन्होंने सभी ने एक ही बात कही कि कुछ डर तो लगता है पर मजबूरी है स्कूल में जाकर कुछ समस्याएं हल हो सकेंगे। विद्यार्थी हर्ष कुमार का कहना है कि लंबे समय से भी ऑनलाइन शिक्षण पा रहे हैं किंतु कुछ समस्या सामने आ रही है उनका समाधान करवाने के लिए उन्हें मजबूरी वश स्कूल जाना पड़ेगा। उन्हें कोविड-19 का डर लगता है पर जिंदगी का सवाल है इसलिए उन्हें जाना पड़ेगा। ध्रुव का कहना है कि वह नहीं चाहते हुए भी उनके अभिभावक चाहते हैं कि स्कूल जाए और अपनी समस्या हल करवाएं। वह स्वयं इन समस्याओं को हल करने में अक्षम है, इसलिए मजबूरी है कि नहीं स्कूल जाकर कुछ समस्याएं हल करवानी होगी। सुमित कुमार का भी कहना है कि स्कूल में ही जाकर कुछ प्रश्नों का समाधान हो पाएगा। घर पर हर समस्या का समधान नहीं किया जा सकता है। अमीश कुमार का कहना है कि वे मास्क लगाकर तथा नियमों का पालन करते हुये स्कूल जाएंगे और जो समस्याएं हैं उन्हें नोट कर रखा है उन्हें शिक्षकों से हल करवाएंगे।
शिक्षिका लक्ष्मी देवी का कहना है कि वे विद्यार्थियों की समस्याएं हल करने के लिए तैयार है परंतु अभी उनको कुछ टेस्ट वगैरह से गुजरना होगा तथा सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए ही समस्याओं का समाधान करना है। ऐसे में उनका कहना है कि सरकार का जो आदेश होगा उसका पालन करना ही पड़ेगा। वैसे भी लंबे समय से स्कूल आ रही है।
प्राध्यापक राजेश कुमार का कहना है कि वे पूर्णतया स्कूल में तैयार मिलेंगे और किसी प्रकार की समस्या लेकर विद्यार्थी आएगा उसे हल किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार का जो भी नियम हो रही है तो होंगी उनका भी जरूर पालन करेंगे और विद्यार्थियों को हर हाल में बेहतर शिक्षा देने का प्रयास करेंगे।
पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी अभयराम यादव ने बताया कि कनीना खंड में 74 प्राथमिक स्कूल 22 माध्यमिक स्कूल 5 उच्च विद्यालय तथा 24 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय है। यह तो सरकारी स्कूल है इसके अतिरिक्त वहीं करीब 55 निजी स्कूल खंड में हैं।
वह 21 सितंबर से सभी शिक्षकों का कोविड-19 करवाएंगे लेकिन इसके लिए वे प्रयास करेंगे कि पहले पीजीटी शिक्षकों के टेस्ट हो जाए। तत्पश्चात अन्य शिक्षकों को बारी-बारी से यहां के उप नागरिक अस्पताल में टेस्ट करवाए जाएंगे। उनका कहना है कि सरकार के नियमों का न केवल शिक्षकों को अपितु अधिकारियों को भी पालन करना पड़ेगा।
उधर अब अचानक हजारों शिक्षकों का टेस्ट करवाया जाएगा और रैपिड टेस्ट से ही संभव हो पाएगा।
फोटो कैप्शन: अमीश,धु्रव, हर्ष कुमार, सुमित लक्ष्मी यादव, राजेश कुमार।
परीक्षा शाम को मिला सुबह का पेपर
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कनीना। कनीना खंड के गांव भडफ़ के माधव यादव ने उच्च अधिकारियों को शिकायत कर शाम की परीक्षा में सुबह की पारी का पेपर दिये जाने की जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सुबह का पेपर ने शाम की परीक्षा में दिया गया। बीटेक की प्रवेश के लिए परीक्षा दी थी।
भडफ़ निवासी निवासी माधव यादव ने बताया कि केंद्रीय विश्वविद्यालय में बीटेक की की प्रवेश परीक्षा के लिए उन्होंने आवेदन किया था। परीक्षा कार्ड में एडमिट कार्ड में सायं तीन से पांच बजे का समय दिया था। 18 सितंबर को जो परीक्षा हाल में पहुंचा तो उसे बुकलेट दी गई वह प्रात: दस से बारह बजे के समय की दी गई। उनका कहना है कि पेपर में जहां जीव विज्ञान के प्रश्न भी दिए गए थे वही शाम की परीक्षा में सुबह का पेपर देना अनुचित था। उन्होंने उच्च अधिकारियों को शिकायत कर मामले की जांच की मांग की है।
ताप बढऩे से भावी रबी फसल पर नुकसान होने का अंदेशा
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कनीना। क्षेत्र में सितंबर माह में भी इतनी अधिक गर्मी पड़ रही है कि बगैर कूलर ठहरना भी कठिन हो गया है। इन दिनों तापमान कम होता चला जाना चाहिए किंतु तापमान कम न होने से रबी की फसल को नुकसान होने का अंदेशा है।
उल्लेखनीय है कि 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच सरसों की बिजाई की जाती है। इसके लिए उचित तापमान 28 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड होना चाहिए जबकि गेहूं की पैदावार लेने के लिए 22 डिग्री सेंटीग्रेड ताप होना चाहिए। गेहूं की बीजाई 10 नवंबर से 25 नवंबर के बीच में की जाती है।
कनीना क्षेत्र में गेहूं की पैदावार कम और सरसों की पैदावार अधिक की जाती है यदि ताप यूं ही बढ़ता रहा तो बिजाई पर कुप्रभाव पड़ेगा। सरसों की बिजाई करते ही धोलिया नामक रोग लग जाएगा।
क्या कहते कृषि वैज्ञानिक और कृषि अधिकारी। कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि तापमान अभी तो अधिक है किंतु धीरे-धीरे तापमान घट जाएगा। उनका कहना है कि जब खेतों की सिंचाई होगी और सरसों की को बोया जाएगा उस वक्त तापमान धीरे-धीरे घटता चला जाएगा। वैसे भी तो फव्वारा सेट लगाए जाते हैं जो तापमान को घटा देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि तापमान नहीं घटता है तो कुछ संभावना बनती है की फसल को नुकसान होगा।













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