राजकीय सम्मान के साथ गांव बवानिया में की गई सीआरपीएफ जवान की अंत्येष्टि
-घर पर कुछ समय से चल रहे थे बीमार
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव गांव बवानिया के 52 वर्षीय जवान सत्यपाल का बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। वे अभी सेवा में थे किंतु कुछ समय से बीमार चलने के कारण बवानिया में थे। ग्रुप केंद्र कादरपुर गुरुग्राम सीआरपीएफ अधिकारियों के नेतृत्व में उनको सशस्त्र सलामी दी गई। अंतिम संस्कार में आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग मौजूद थे।
बाबूजी रामकिशन ने बताया कि सत्यपाल 1992 को सीआरपीएफ में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह हवलदार के पद पर कार्यरत थे। उनके छोटा बेटे विनय कुमार व बड़े बेटे बलवान सिंह ने मुख्य अग्नि देखकर अंतिम संस्कार किया। इस मौके पर कर्ण सिंह इंस्पेक्टर, सत्यपाल, धर्मेंद्र हेड कांस्टेबल व अन्य साथ आए सीआरपीएफ के जवान मौजूद रहे।
इस मौके पर कनीना पुलिस पुलिस चौकी से एएसआई प्रीतम सिंह, हेड कांस्टेबल अनिल कुमार, मनोज के अलावा अंतिम संस्कार में प्रतिनिधि सरपंच संजीव कुमार, कृष्ण पंच, बाबूलाल, सोमबीर मंडोला, दिलबाग सिंह व गांव के अन्य लोग मौजूद थे। उन्हें सशस्त्र सलामी एवं पुष्प चक्र अर्पित कर अंतिम विदाई दी।
फोटो कैप्शन 04:राजकीय सम्मान के साथ जवान की अंत्येष्टि करते हुए बवानिया का जवान सत्यपाल सिंह।
चुनावी चटकारे
........ अब तो नमस्ते करना भूल गए, सीधे छूते है पैर
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कनीना की आवाज। कनीना नगरपालिका के चुनावों के दृष्टिगत लोगों की नजरें और अंदाज ही बदला बदला नजर आता है। कुछ लोग तो पहले मिलते थे और सामने से मिलने पर आंखें फेर कर निकल जाते थे। कुछेक बोलते भी थे तो इतनी मधुर स्वर में नहीं बोलते थे। अब तो चुनाव लडऩे वालों के चलने, खाने-पीने,रहन सहन, नमस्ते करने आदि के सभी अंदाज बदल गए हैं। चुनाव लडऩे वाले अब तो हाथ जोड़कर दूर से नमस्ते करते हैं और सीधे ही पैरों को छूते हैं परंतु ये पैर छूने का सिलसिला 2 मार्च तक ही रहेगा, तत्पश्चात पुनर मार्जारो भव अर्थात चल तू फिर से चुहिया बन जा वाली कहावत लागू होगी अर्थात फिर से वो अपना अंदाज बदल लेंगे। यह यहीं पर नहीं बड़े से बड़े नेताओं में भी देखने को मिलता है चाहे एमपी चुनाव हो या एमएलए के चुनाव, यही अंदाज देखा जाता है।
कनीना नगर पालिका चुनाव
-विभिन्न तरीकों से कर रहे हैं चुनाव प्रचार
-अभी तक नहीं हुआ है कोई नामांकन
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कनीना की आवाज। कनीना नगर पालिका के चुनाव 2 मार्च को होंगे। भाजपा की ओर से कोई चुनाव चिन्ह चुनाव लडऩे वालों को नहीं दिया जाएगा। ऐसे में चुनाव लडऩे वाले विभिन्न तरीकों से चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। लंबे समय से बैनर पोस्टर आदि लगाते आ रहे हैं। खंभे, पेड़, दीवार आदि हर जगह पोस्टर ही पोस्टर, बैनर नजर आते हैं। इस स्पर्धा में प्रधान पद के दावेदारों में होड़ लगी हुई है। पार्षद पद के लिए कोई इक्का दुक्का ही पोस्टर लगा नजर आता है। जहां चुनाव प्रचार के लिए किसी कार्यक्रम में जाकर प्रत्याशी अच्छा खासा सम्मान पाते हैं और वोट पकाने से भी नहीं चूक रहे हैं। इसलिए विभिन्न
विभिन्न प्रत्याशी आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में अपना चेहरा दिखाकर वोट पका रहे हैं। वोट पकाने के लिए विभिन्न दल बनया हुआ है जो घर घर जाकर महिला से मिल रहा है और विभिन्न वार्डों में जाकर चुनाव प्रचार कर रहा है। सबसे बड़ी बात है कि हुजूम के साथ लोग वोट मांगने के लिए घर-घर जा रहे हैं। जहां विभिन्न कार्यालय खोले गए हैं, जहां पर भारी संख्या में लोग बैठे दिखाई देते हैं, उनसे भी पता लगता है कौन चुनाव में किस हालत में चल रहा है। अब तो बैनर पोस्टर की भरमार है। भारी संख्या में पोस्ट छपवाए जा रहे हैं और घर-घर जाकर रोजाना एक-एक पोस्टर डालते हैं। कई-कई लोग पोस्टर फेंकने वाले नियुक्त किए हुए हैं और विभिन्न प्रत्याशी सुबह सवेरे एक-एक व्यक्ति को पोस्टर दे देते हैं और ये लोग लगातार पोस्टर घर-घर जाकर फेंक रहे हैं। मोबाइल, व्हाट्सएप तथा फेसबुक आदि के जरिए भी वोट मांगने की अपील की जा रही है। अब तो हालात यह बन गई है कि प्रिंटिंग प्रेस वाले सुबह से शाम और रात को भी काम में लगे रहते हैं और आराम नहीं कर पा रहे हैं। लगातार पोस्टर बैनर छपाई कर रहे हैं। आधा दर्जन से भी अधिक लोग प्रधान पद के दावेदार है। पार्षद पद के दावेदार बहुत कम नजर आ रहे हैं। इस बार प्रधान पद का चुनाव प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। युवा पीढ़ी जमकर प्रचार करते हुए आगे आ रही है। चुनाव लडऩे वाले इस बार पुराने धुरंधर नेता, युवा नेता, युवा दल तथा महिला एवं पुरुष के अलावा पत्रकार, वकील, ठेकेदार कितने ही लोग चुनाव में खड़े हो गए हैं। अब नामांकन प्रक्रिया जारी है। इसलिए अपने-अपने अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर जल्द ही नामांकन कर देने की उम्मीद है।
मेरा शिक्षा का सफर पुस्तक से साभार-103
-कनीना के डाकघर में सबसे पहले खुलवाया था पीपीएफ
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कनीना की आवाज।कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव, विश्व रिकार्ड धारक,शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक सेवा देने के पश्चात 30 अप्रैल 2024 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यद्यपि उनके पास धन दौलत का सदा ही अभाव रहा है। चूंकि सरस्वती और लक्ष्मी का आपस में बैर बताया गया है। जब तक ट्यूशन किया तब तक धन की कोई कमी नहीं रही। वर्ष 1984 से वर्ष 1995 तक धन की कोई कमी नहीं थी, तत्पश्चात सरकारी सेवा में आने के बाद धन की निरंतर कमी होती चली गई जिसके पीछे पत्नी का गंभीर रोग से पीडि़त होना तथा उनकी मौत होना एक कारण रहा है। वही अपने रहने के लिए जमीन जायदाद खरीदनी पड़ी जिसके चलते धन की कमी होती चली गई। अब हालात यह है कि धन की कमी है परंतु खुश हैं। उन्होंने सबसे पहले कनीना डाकघर में लंबे समय तक लिखा प़ी करने के बाद पीपीएफ सेवा शुरू करवाई और सबसे पहले खाता 1001 अपने नाम से खुलवाया था। आइये सुनते हैं उनकी कहानी उनकी ही जुबानी-
मैं 1984 से लगातार ट्यूशन करता रहा, खूब धन जेब में था। एक समय ऐसा भी आ गया कि धन का क्या किया जाए और जितना खर्च होता था खूब किया परंतु आखिर 1995 में सरकारी सेवा में आने के बाद धन की पहले जैसी हालात नहीं रही। किंतु काम कोई भी नहीं रुका। सरकारी सेवा में आने के बाद लगातार कुछ पैसे बचाने की सोचता रहा है क्योंकि 1995 में जब मैं सरकारी सेवा में आया तो नियमित सेवा में होने के कारण सोचा क्यों न पीपीएफ सेवा शुरू करवाई जाए। उस समय कनीना डाकघर में पीपीएफ सेवा नहीं थी। उच्च अधिकारियों से बात करने और लिखा पढ़ी करने के बाद 1999 में कनीना डाकघर में पीपीएफ सेवा आई और 6 मई 1999 को मैंने अपना डाक घर में पीपीएफ खाता खोला और यह पीपीएफ खाता जहां लगातार मेरे लिए लाभप्रद साबित हुआ। शुरुआत में जहां यह खाता 1999 में 500 रुपये से शुरू किया था और लगातार बढ़ता ही चला गया। आखिर यह खाता लगातार चलते रहने के बाद 15 सालों तक चलाया गया चूंकि 15 साल इसे चलाना जरूरी है। हर महीने कुछ ना कुछ पैसे जमा करता रहा और आखिरकार यह खाता 23 मई 2014 तक चला और 15 साल पूरा होने के बाद यह खाता 2014 में बंद करना पड़ा अर्थात उसे समय करीब 3 लाख रुपये जमा हुए, ब्याज सहित प्राप्त हो गए। इस प्रकार कनीना डाकघर में अगर पीपीएफ खाता किसी का सबसे पहले नंबर पर है तो मेरा खाता है। अब 1001 नंबर कहता था बंद हो चुका है। 1999 के बाद सभी बैंकों में धीरे-धीरे खाता खुलवाना पड़ा और सभी खाते धीरे-धीरे बंद होते चले गए। सेंट्रल बैंक, सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक, इलाहाबाद बैंक, पीएनबी बैंक, स्टेट बैंक आफ इंडिया तत्पश्चात एचडीएफसी बैंक आदि में खाते खुलवाए और धीरे-धीरे खाते भी अब लगभग बंद हो चुके हैं। एचडीएफसी बैंक का खाता लंबे समय से चला आया है। जहां श्रीमती सुमन यादव पत्रकार चैरिटेबल ट्रस्ट का खाता पीएनबी में खुलवाया गया जो अभी भी चला आ रहा है परंतु डाकघर में पीपीएफ में सबसे पहले मेरा नाम आता है।
हजारों की संख्या में आये हुये हैं दूसरे राज्यों के राजगीर, मजदूर
-दुगनी दिहाड़ी मिलती है हरियाणा में
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कनीना की आवाज। कनीना ही नहीं समीपी गांवों और शहर विशेषकर महेंद्रगढ़ जिले में हजारों की संख्या में मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश से आए हुए हैं। सबसे अधिक मजदूर और मिस्त्री मध्य प्रदेश से संबंध रखते हैं। यहां अधिक मजदूरी मिलने के कारण इस क्षेत्र में काम करने के लिए आए हुए हैं। यह कनीना और आसपास गांवों के खंडहरनुमा और बिना लाइट, शौचालय आदि के मकानों में अल्प किराए पर रहते हैं। बदहालात में रहकर यह कुछ रोटी रोटी कमाते हैं और कमाई हुई राशि अपने परिजनों को भेज देते हैं। सबसे अधिक मजदूर, मिस्त्री छतरपुर, मध्य प्रदेश से आए हुए हैं तत्पश्चात बिहार, उत्तर प्रदेश और फिर राजस्थान से आए हुए हैं। इन लोगों से चर्चा हुई।
मध्य प्रदेश से आए हुए हुकुमचंद, राजकुमार, राजू मिस्त्री, कन्हैया, परमलाल आदि ने बताया कि वे अपने पेट पालने के लिए जिला महेंद्रगढ़ में विशेष कर आते हैं क्योंकि उनके राज्यों में पारिश्रमिक कम किया जाता है। जहां राजस्थान में मजदूर को 350 से 400 रुपये मिल जाते हैं। मध्य प्रदेश में 300 मिलते हैं, उत्तर प्रदेश में मजदूर को 300 से 350 रुपये के आसपास मिलते हैं वही बिहार में 250 से 300 रुपये ही प्रतिदिन की दिहाड़ी मिलती है। एक वक्त था जब लोकल मजदूर और मिस्त्री बहुत अधिक काम करते थे, आज के दिन उन्होंने लगभग अपना काम छोड़ दिया है और दूसरे राज्यों के मिस्त्री और मजदूर ही भव्य मंजिलें, इमारतें बना रहे हैं। उधर उत्तर प्रदेश के रामलाल, दीनानाथ, रमलू आदि ने बताया कि उनको परिवार का पालन पोषण करना होता है। वहां की अपेक्षा यहां अधिक दिहाड़ी मिलती है। इसलिए वह इस क्षेत्र में काम करते हैं, कभी कभार ही अपने गांव में जाते हैं। मजदूरों ने बताया कि जब रबी फसल, खरीफ फसल की कटाई, फसल निकालने का काम, अनाज मंडी में मजदूरी, कपास चुनने तथा विभिन्न अन्य कार्यों में भी लगे रहते हैं। यहां तक की खुदाई, कुरडी आदि का खाद उठाकर खेतो में डालने का काम करने में राजस्थान के लोग प्रसिद्ध है इसलिए उन्हें राजस्थानी का कर पुकारते हैं। राजस्थान के लोगों से चर्चा हुई तो उन्होंने बताया कि हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में सबसे अधिक पारिश्रमिक दिया जाता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में भी मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन की मिलती है जबकि यहां दुगना पारिश्रमिक मिलता है। यही कारण है कि सभी के मन को महेंद्रगढ़ रेवाड़ी जिले मोह रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जमीन के रेट भी बहुत कम है। छतरपुर से आए हुए मिस्त्री और मजदूरों ने बताया कि वह 8 लाख रुपये एकड़ भाव से जमीन मिल जाती जबकि कनीना और आसपास 60 लाख रुपये तक एकड़ के भाव पहुंच गए हैं। यही कारण है कि क्षेत्र के लोग दूसरे राज्य में जमीन खरीदने में लगे हुए हैं। केवल दिहाड़ी ही नहीं हर चीज यहां पर महंगी मिलती है। यदि कनीना क्षेत्र में सब्जी के भाव देखे तो दिल्ली के भाव भी पीछे छोड़ दिए जाते हैं। अपने पेट पालने और अच्छी दिहाड़ी पाने के लिए ये लोग इस क्षेत्र में आते हैं। अभी तक ये अच्छा धन कमाकर अपने परिवार वालों को भेजते हैं। हुकुमचंद मिस्त्री ने बताया कि वह बहुत कठिन कार्य भी करते हैं जैसे पत्थर उठाकर तीन-तीन मंजिलों पर पहुंचने का कार्य भी मजदूर करते हैं। कई बार उनको चोटिल होना भी पड़ जाता है। जो कार्य इस क्षेत्र के लोग करने से इसके चाहते हैं वे लोग आसानी से कर गुजरते हैं। यही कारण है कि उनकी मांग क्षेत्र में बढ़ रही है। किसान के यहां खेती का काम काम करते और किसान इन लोगों से अधिक खेती करवाते हैं। चाय की दुकान हो या किसी बड़ी दुकान पर देखें मजदूरी करते हुए भी दूसरे राज्यों के लोग देखे जा सकते हैं।
फोटो कैप्शन 02: दूसरे राज्य से आए हुए मजदूर अपनी व्यथा सुनाते हुए जागरण
गये थे समारोह में शामिल होने को लौट कर आए सम्मान पाकर
-गदगद हो गये जसवंत सिंह बबलू एवं सरिता यादव
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कनीना की आवाज। कनीना संत रविदास मंदिर में जहां संत रविदास जयंती समारोह का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में कनीना नगर पालिका से चुनाव लडऩे वाला चर्चित चेहरा सरिता बबलू संग जसवंत सिंह बबलू कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। जहां कार्यक्रम में उनका जमकर सम्मान किया गया। जहां कार्यक्रम को कुछ समय के लिए भुला दिया गया और चुनावी रंग में सभी रंग गए। मौके पर उपस्थित लोगों ने जमकर दोनों की तारीफ की और पूरा सहयोग देने की भी बात कह डाली। ऐसे में दोनों सरिता यादव तथा जसवंत सिंह बबलू दोनों ही गदगद हो गए। उन्होंने संत रविदास जयंती पर प्रसाद ग्रहण किया वहीं फूल मालाओं लाद दिया गया। फूल मालाओं से सम्मान पाकर वे अपने आवास पर पहुंचे। उन्होंने इस संवाददाता को बताया कि उनका समारोह में जमकर स्वागत किया तथा उनके जयकारे भी लगाए गए। उन्होंने बताया कि इतना बड़ा सम्मान उन्होंने आज तक कभी नहीं मिला था, जितना रविदास जयंती समारोह में शामिल होने पर मिला है। दोनों ने ही संत रविदास जयंती पर आयोजकों का आभार जाता है और कहा कि संत रविदास जिस प्रकार सत्य के पथ पर चलते रहे, कभी विचलित नहीं हुये। इसी प्रकार हम भी कभी अपने पथ से विचलित नहीं होंगे सदा ही समाज सेवा विशेष कर कनीना की सेवा में हाजिर रहेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव हर 5 साल बाद आते हैं किंतु भाईचारा अगर एक बार बिगड़ जाए तो दोबारा से वापस नहीं आता। इसलिए भाईचारा कायम करते हुए हम चुनाव लड़ेंगे और वे चुनाव में जीत के प्रति आश्वस्त भी नजर आये। उपस्थित लोगों ने उनके जयकारे लगाये और पूरा सहयोग करने की अपील की।
फोटो कैप्शन 07: फूल मालाओं से लदे जसवंत सिंह बबलू तथा सरिता यादव
कृष्णानंद धाम पर संत शिरोमणि रविदास महाराज का मनाया पर्व
-जगह जगह हुये कार्यक्रम
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कनीना की आवाज। रविदास एक महान संत थे उनके जीवन चरित्र से हमें बहुत ज्ञान मिलता है जिससे हमारा मानव जीवन सफल होता है। ये विचार धनौंदा में शिवानंद महाराज ने रविदास महाराज जयंती पर व्यक्त किये।
संत रविदास महासभा के तत्वावधान में श्रद्धालुओं ने संत रविदास के व्यक्तित्व को दर्शाती मनमोहक झांकियों की शोभायात्रा निकाली गई वहीं कृष्णानंद धाम पर विश्व शांति के लिए महान यज्ञ किया गया। वही यज्ञ के उपरांत भंडारा, सत्संग तथा जागरण आयोजित किया गया। शिवानंद महाराज ने कहां की संत रविदास जैसे महान संतों ने इस दुनिया को ज्ञान की राह दिखाते हुए प्रकाश की राह पर चलना सिखाया है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि भगवान भोग के भूखे हैं, प्रेम के भूखे हैं, अगर उनको आत्मा से निश्चित चल प्रेम किया जाए तो वह दौड़े दौड़े चले आते हैं। जिस प्रकार संत रविदास जी ने मां गंगा को याद किया तो मां गंगा द्वारा बिना देरी किए उनकी कठौती में आना इस बात को साफ दर्शाता है कि भगवान प्रेम के भूखे होते हैं। उन्होंने संत रविदास को भक्तिकाल का महान समतावादी कवि और संत बताते हुए उनकी शिक्षाओं पर चलने की अपील की। उन्होंने समाज में आपसी भाईचारा, प्रेम, सौहार्द, नेकी तथा परिश्रम कर अपनी रोजी रोटी कमाने की सीख दी। उधर कनीना के संत रविदास मंदिर में संत रविदास को याद किया। भंडारा आयोजित हुआ तथा संत को पुष्प अर्पित किये। इस मौके पर कर्नल भूप सिंह, सरिता जसवंत सिंह, मा. सतीश कुमार, रामेश्वर पार्षद, डा. पवन कांगड़ा,कमल पार्षद, बलवान आर्य, संजय कुमार, सचिन शर्मा,नरेंद्र, गोपीचंद सहित कई जन मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 09: धनौंदा में भंडारा आयोजित करते हुए
10: कनीना रविदास मंदिर में संत रविदास को याद करते हुए। फोटो रविदास समिति
रविदास की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक
-मीरा के भी गुरु थे संत रविदास-लालदास
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कनीना की आवाज। कनीना एवं आस पास गांवों में संत रविदास जयंती धूमधाम से मनाई गई। संत शिरोमणि संत रविदास महाराज की जयंती उधोदास आश्रम में मनाई गई। इस कार्यक्रम में लालदास महाराज ने रविदास जी के जीवन पर प्रकाश डाला और लोगों को उनके दिखाए गए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
लालदास महाराज ने कहा कि जब मन साफ होता है तो कोई तीर्थ व्रत करने की भी आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि यह कथन संत शिरोमणि स्वामी रविदास महाराज ने साफ कर दिया था कि मन का साफ होना जरूरी है। चाहे तन साफ हो या ना हो क्योंकि जिनके मन साफ होते हैं उनको कोई तीर्थ स्थल पर जाने की भी जरूरत नहीं है। गंगा स्नान करने की भी आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि जिनके मन साफ होते हैं उनके तो घर में भी गंगा माता स्वयं आ जाती है। इसलिए हमें साफ मन रख कर के अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। मन में मैल नहीं रखना चाहिए। प्रभु तो तन के अंदर बैठा है और वह मन को अच्छे से देख रहा है क्योंकि उसकी दृष्टि में साफ मन वाले लोगों का सदा सदा सम्मान होता है।
उन्होंने कहा कि संत के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संत के जीवन से हमें भाई-चारा कायम रखने की सीख मिलती है। संत जी ने काम को महत्व दिया था और गंगा स्नान बारे उनका कहना था कि मन चंगा तो कठौती में गंगा। इस मौके पर भंडारे का आयोजन भी किया गया।
उधर कनीना उपमंडल के गांव नौताणा में संत शिरोमणि रविदास महाराज का प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया गया। संत रविदास महासभा के तत्वावधान में श्रद्धालुओं ने संत रविदास के व्यक्तित्व को दर्शाती मनमोहक झांकियों की शोभा यात्रा निकाली गई। भंडारा, सत्संग तथा जागरण आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि संत रविदास की शिक्षा तथा विचारधारा आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने समाज में आपसी भाईचारा, प्रेम, सौहार्द, नेकी तथा परिश्रम कर अपनी रोजी रोटी कमाने की सीख दी। संत रविदास समिति के सदस्यों ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर दशरथ प्रधान, उपप्रधान रणवीर, सचिव इंद्रपाल, मामनराम, सतपाल, डा. संजय कुमार, पवन कुमार, ताराचंद नम्बरदार, आदि अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 0 3: संत रविदास को याद करते हुए संत लालदास
खरकड़ाबास स्कूल में एनएमएमएस परीक्षा में 7 का चयन
-जिले के माध्यमिक स्कूलों में
सबसे अधिक चयन खरकड़ाबास से
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कनीना की आवाज। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद गुरुग्राम द्वारा आयोजित नेशनल मींस कम मेरिट स्कालरशिप परीक्षा का परिणाम जारी किया गया है। जिसमें महेंद्रगढ़ जिले से 93 विद्यार्थियों का चयन हुआ है जिनमें से 7 अकेले खरकड़ाबास स्कूल के हैं। यह परीक्षा 17 नवंबर 2024 को जिला स्तर पर आयोजित की गई थी। इस इस स्कालरशिप परीक्षा में चयनित प्रत्येक छात्र को हरियाणा सरकार द्वारा 48000 की राशि कक्षा 9वी से 12वीं तक शिक्षा ग्रहण करने पर दी जाती है। राजकीय माध्यमिक विद्यालय खरकड़ा बास में कार्यरत विज्ञान शिक्षक सुभाष चंद द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उनके विद्यालय से इस बार सात विद्यार्थियों निशा, नेहा, मुस्कान, रितिका, कार्तिक, जसवंत व अनीत का चयन इस स्कालरशिप के लिए हुआ है। यह विद्यालय के लिए बड़े गौरव की बात है। उन्होंने आगे बताया कि हमारे विद्यालय ने जिले के मिडिल स्कूलों में सर्वाधिक चयन के मामले में प्रथम स्थान व सभी विद्यालयों से पूरे जिले में दूसरा स्थान प्राप्त किया है । वहीं विद्यालय की छात्रा निशा ने कनीना खंड में सर्वाधिक अंक प्राप्त करके प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय मुख्य अध्यापिका रीता रानी के कुशल निर्देशन में समस्त विद्यालय परिवार बेहतर कार्य कर रहा है। इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी डा. विश्वेश्वर कौशिक ,खंड संसाधन अधिकारी दिलबाग सिंह , राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पाथेड़ा प्राचार्य कृष्ण कुमार, मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह व किशन लाल,खरकड़ा बास गांव के सरपंच प्रतिनिधि श्री राजेंद्र सिंह,सरपंच मनीषा देवी, समस्त ग्राम पंचायत व ग्रामीणों ने इस स्कालरशिप के लिए चयनित छात्र-छात्राओं व समस्त विद्यालय परिवार को विशेष रूप से बधाई दी है।
फोटो कैप्शन 01: राजकीय माध्यमिक विद्यालय खरकड़ाबास के एनएमएमएस में चयनित विद्यार्थी।
















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