नरेश कौशिक बने प्राचार्य
-एक जुलाई को कनीना मंडी में करेंगे कार्यभार ग्रहण
*************************************************************
**********************************************************************
**************************************************************
कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव खरकड़ाबास निवासी नरेश कौशिक प्राचार्य बन गये हैं। वे एक जुलाई को कनीना मंडी स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करेंगे।
नरेश कौशिक की प्रारंभिक नौकरी की शुरुआत रेवाड़ी में साक्षरता विभाग में जिला परियोजना संयोजक के रूप में हुई। तत्पश्चात 1997 में टीजीटी पद पर नियुक्ति हुई तथा 10 वर्ष पश्चात 2007 में बतौर अंग्रेजी प्रवक्ता पदोन्नति मिली। मुख्याध्यापक के रूप में पदोन्नति 26 अप्रैल 2023 को हुई तथा 26 महीने बाद राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में मुख्याध्यापक के रूप में कार्य करने के बाद पदोन्नति राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में हुई है। क्षेत्र के अनेक लोगों ने उन्हें बधाई दी है।
फोटो कैप्शन: नरेश कौशिक
एक्सप्रेस गाडिय़ों के ठहराव की मांग
-धरना प्रदर्शन एवं रेल रोको आंदोलन 4 को
*************************************************************
**********************************************************************
**************************************************************
कनीना की आवाज। कनीना खास रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस गाडिय़ों का ठहराव न किए जाने से कनीना उपमंडल के लोगों में भारी रोष है। अब आक्रोशित लोगों ने आगामी 4 जुलाई को कनीना स्टेशन पर एक्सप्रेस गाडिय़ों के ठहराव की मांग को लेकर प्रदर्शन धरना व रेल रोको आंदोलन करने की ठानी है।
आंदोलन के नेता अतरलाल का कहना है कि लोग बार-बार ज्ञापन, धरना, प्रदर्शन, महापंचायत करके रेल प्रशासन से कनीना स्टेशन पर एक्सप्रेस गाडिय़ों के ठहराव की मांग कर रहे हैं परन्तु रेल प्रशासन लोगों की मांग की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह कितना दर्दनाक तथा अमानवीय है कि इलाके के लोगों ने इस रूट की रेलवे लाईन बिछाने के लिए अपनी जमीनें दी और उन्हें ही एक्सप्रेस ट्रेने पकडऩे के लिए रेवाड़ी, महेन्द्रगढ़ व लोहारू जाना पड़ता है। आंदोलन के दूसरे नेताओं कर्णसिंह यादव, राजेन्द्र पंच, रघवीर मुकदम, हरीश यादव ने कहा कि जब राजस्थान, बिहार, यूपी में छोटे-छोटे स्टेशनों पर एक्सप्रेस ट्रेन ठहर सकती हैं तो कनीना उपमंडल स्तरीय रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस गाडिय़ों का ठहराव क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने कहा एक्सप्रेस गाडिय़ों का ठहराव होना इलाके के लोगों का हक है इसलिए 4 जुलाई को इलाके के लोग कनीना स्टेशन पर एक्सप्रैस ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन रेल रोको आंदोलन करेंगे और एक्सप्रेस गाडिय़ों का ठहराव मंजूर करवाकर रहेंगे। उन्होंने कहा रेल रोको आंदोलन को लेकर इलाके के लोगों में उत्साह है।
कनिष्क चौहान का अंडर 19 इंडिया क्रिकेट की टीम में चयन होने पर खुशी
*************************************************************
**********************************************************************
**************************************************************
कनीना की आवाज। झज्जर जिला के गांव कुलाना निवासी कनिष्क चौहान सुपुत्र श्री प्रदीप कुमार चौहान का अंडर 19 इंडिया क्रिकेट की टीम में चयन होने पर जिला के धनौन्दा, खेड़ी तलवाना, पाथेड़ा, कैमला, गुढ़ा, रसूलपुर, कोका, भोजावास, मोहलड़ा, राता कलां के लोगों में प्रसन्नता की लहर है। मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन रतन सिंह तंवर, राजेन्द्र सिंह नम्बरदार, किशनपाल सिंह तंवर, मुकेश तंवर, सुनील शर्मा, करतार सिंह, पूर्व सरपंच राजू, संजय शर्मा ने कहा कि इंग्लैंड में चल रही अंडर 19 इंग्लैंड वर्सेज इंडिया पांच मैंचों की एक दिवसीय सीरीज में कनिष्क चौहान का चयन पूरे दक्षिणी हरियाणा के लिए गर्व की बात है। कनिष्क ने अंडर 19 इंडिया क्रिकेट टीम का हिस्सा बनकर न केवल अपने जिला झज्जर का बल्कि पूरे हरियाणा प्रदेश का नाम रोशन किया है। रतन सिंह तंवर ने कहा कि गत 27 जून को इंग्लैंड के होवे कांउटी ग्रांउड पर आयोजित इंग्लैंड वर्सेज इंडिया द्विपक्षीय सीरीज के पहले मैच में खेलते हुए कनिष्क चौहान ने 20 रन देकर 3 विकेट लिए और टीम इंडिया को जिताने में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने कहा कि टीम के वापिस इंडिया आने पर गांव धनौन्दा में कनिष्क चौहान का जोरदार अभिनंदन किया जाएगा।
फोटो कैप्शन : अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी कनिष्क चौहान।
बादलों जमकर बरसों-किसान
चंद बूंदे हर आती है रोजाना
*************************************************************
**********************************************************************
**************************************************************
कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में बादल जमकर नहीं बरस रहे हैं। तीन दिनों से हल्की बूंदाबांदी होकर बादल गुजर जाते हैं। कनीना क्षेत्र में जून के प्रथम सप्ताह में अच्छी वर्षा हुई थी तत्पश्चात से अब तक मानसूनी वर्षा का लगातार इंतजार कर रहे हैं। वर्षा न होने से किसानों की चिंता बढ़ रही है। आए दिन काले-काले बादल छा जाते हैं और बिना बरसे ही गुजर जाते हैं। इस समय खेतों में बाजरे की फसल खड़ी हुई है। यदि वर्षा हो जाए तो बाजरे को बहुत अधिक लाभ होगा। किसानों का कहना है कि बादलों को जमकर बरसाना चाहिए ताकि गर्मी से भी राहत मिलेगी और फसलों को भी लाभ मिलेगा।
चोर साहब के कारनामे-11
दो लोगों ने किया फोन, दौड़ कर गया किंतु चोर साहब उठा ले गया गमला
*************************************************************
**********************************************************************
**************************************************************
कनीना की आवाज। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव विश्व रिकार्डधारक के प्लाट से गमले उठाने का लगातार क्रम जारी रहा। बार-बार बढिय़ा दर्जे के गमले और बेहतरीन पौधे लगाए गए। सभी एक-एक करके उठा ले गया चोर साहब। कितने ही गमले एक के बाद एक उठा ले गया। गमले उठाने वालों का सुराग तो मिल गया था किंतु अपनी आंखों से नहीं देखा था।
जहां पहली बार बहुत बड़ा गमला रखा तत्पश्चात छोटे गमले रखने शुरू किये। सभी एक के बाद एक उठा लिये गये। आखिर का सोचा कि इतने गमले कहां से लाऊं? तो ताजा सीमेंट के कट्टे में पौधे लगाकर रखना शुरू कर दिया। लगातार तीन ऐसे गमले भी उठा लिये गये। चूंकि मैंने गांधी पर पीजी की हुई है और गोल्ड मेडल भी विश्वविद्यालय में प्रथम रहने पर मिला हुआ है। ऐसे में गांधी के पदचिह्नों पर चलता रहा कि आखिरकार एक दिन चोर साहब खुद-ब-खुद मान जाएगा, बाज आएगा। एक रात करीब 9 बजे थे, मैं अपने साथी से बात कर रहा था। दस मिनट तक बात चली। इसी दौरान दो साथियों के फोन आये। जब मेरी बात मेरे साथी से पूरी हुई तब एक नेता एवं साथी का फोन आया कि आपका गमला चोर साहब उठाकर ले जा रहे हैं तुरंत अगर आप आ जाओ तो रंगे हाथों पकड़ सकते हो। इतना सुनकर साइकिल उठाकर मौके पर जाना चाहा तो दूसरे साथी का फोन आ गया कि आपका गमला गया। उन्होंने बताया कि चोर साहब इस वक्त अपने प्लाट के पास नहर पर गमले को रखकर खड़े हुए हैं। मैं तुरंत दौड़कर पहुंचा लेकिन चोर साहब वहां से गायब हो चुके थे। मेरे दोनों साथियों ने बताया गमला तुम्हारे प्लाट के पास रखा था किंतु हम दोनों के आ जाने से चोर साहब दूर खड़ा हो गया था। उन्होंने बताया कि चोर साहब आपके गमले को इधर-उधर फेंक गया होगा। क्योंकि दो लोगों ने उसे चोरी करते देख लिया था इसलिए गमले को उठाकर नहीं ले गया। अपितु उसे फेंक गया। सुबह होने पर नहर पर तलाश की तो नहर पर गमला पड़ा मिला। मैंने अपना गमला फिर से उठाकर रख लिया और दिन के समय काम करते-करते पेड़ की छंगाई करते हुए गहरी धूप के कारण कुल्हाड़ी पास रखकर सो गया। दोपहर पश्चात करीब एक बजा था। तभी गमला उठाने की आवाज सुनाई दी। दौड़ कर देखा तो अपनी आंखों से वह नजारा देखा कि गमला कौन चोर साहब उठा रहा है। बहुत कहा सुनी हुई परंतु सब व्यर्थ गया क्योंकि मेरे पास सीसीटीवी फुटेज नहीं थी। अब उस सीसीटीवी फुटेज का प्रबंध कर लिया गया है। बुजुर्ग बताते हैं कि चोर चोरी से जाये परंतु हेरा फेरी से नहीं जाएर्। एक दिन चोर साहब फिर से चोरी करते हुये पकड़ा जाएगा जिसका विडियो सभी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
चिकित्सक दिवस-1 जुलाई
प्राइवेट अस्पतालों के कारण मरीजों के दिल में डाक्टरों के प्रति आदर भाव घाट
*************************************************************
**********************************************************************
**************************************************************
कनीना की आवाज। एक वक्त था जब डाक्टर को मरीज भगवान समझते थे। कई बार तो उसकी पूजा अर्चना भी करते थे। डाक्टर आने पर यह समझते थे अब मरीज की जान बच जाएगी किंतु दिनों दिन आबादी बढ़ गई, डाक्टरों की संख्या भी बढ़ गई और निजी अस्पताल भी बढ़ गए जिसके कारण मरीज और आम आदमी के दिल में पहले वाला आदरभाव नहीं रहा। इस संबंध में कनीना उप-नागरिक अस्पताल से विभिन्न डाक्टरों से उनके विचार जाने गये। जिनके विचार निम्न हैं-
नैतिक मूल्य गिर रहे हैं वहीं पढ़ाई महंगी हो गई इसलिए डाक्टरों का एक ही उद्देश्य होता है अधिक से अधिक पैसे कमाए जाए। वहीं उपभोक्ता भी जागरूक हो गए हैं। वे सरकारी डाक्टरों को तो अपना नौकर समझते हैं। इस वजह से उनके दिल में आदर भाव घटा है। वही निजी अस्पतालों में अधिक पैसे मिलते हैं इसलिए डाक्टर अधिक पैसे कमाने के चक्कर में निजी अस्पताल में चले जाते हैं और नैतिकता में गिरावट आना स्वाभाविक है। इसलिए आदर भाव कम होता जा रहा है जिसे दूसरा भगवान मानते थे अब ऐसा भाव दिल से घट गया है।
- डा. जितेंद्र मोरवाल चिकित्सक,कनीना
निजीकरण होने के कारण मरीज और आम आदमी के दिल में जो श्रद्धा और भाव डाक्टर के प्रति थे वे घट गए हैं। डाक्टर को व्यवसायी अधिक मानने लगे हैं जिसके कारण भी मरीज के दिल में वो आदर नहीं राहा। परंतु कोविड महामारी के बाद लोगों में डाक्टर के प्रति आदर बढ़ा है। वहीं मरीज जागरूक हो गए हैं उन्हें हर जानकारी विभिन्न प्लेटफार्म से मिल जाती है। इसलिए डाक्टर के प्रति वह आदरभाव कम देखने को मिलता है। -डा. सुंदरलाल उप-नागरिक अस्पताल, कनीना
यह तो अपने-अपने देखने का नजरिया है। जहां पुराने समय में इलाज सस्ता था वहीं मरीज कम थे। 10 से 15 मरीज पूरे गांव में होते थे वहीं मरीजों को अधिक समय दे पाते थे। परंतु अब बीमारी व मरीज बढ़ गए हैं। डाक्टर इतने बढ़े नहीं इसलिए इस समय में जो समय 20 मरीजों को देखने में लगता था अब उसी समय में डेढ़ सौ मरीजों को देखा जाता है। रही इलाज महंगा हो गया, खर्च बढ़ गए हैं। डाक्टर प्राइवेट बनते जा रहे हैं। छोटे-छोटे क्लीनिक में सस्ते में इलाज करते हैं और जब मरीज बड़े अस्पताल में चले जाते हैं तो उनका इलाज बहुत महंगा होता है जिसके कारण डाक्टर को उस भाव से नहीं देख पाते जो पहले था। -डा. विनय कुमार शर्मा उप-नागरिक अस्पताल, कनीना
जहां पहले डा. कम थे अब डाक्टर बढ़ गए हैं और डाक्टर अधिक होने से उनमें कुछ बुरे लोग भी आ गए हैं। जब बुरे लोग आ जाते हैं तो आस्था भी मरीज की घट जाती है। जहां लोगों को तुरंत इलाज चाहिए धैर्य नहीं रहा है इसलिए के डाक्टर को उस भावना से नहीं देखते। जहां निजी अस्पतालों के डाक्टर भारी फीस लेते हैं इसलिए उन्हें भगवान की बजाय लुटेरे समझते हैं। वह आदरभाव उनके दिल में नहीं है।
-- डा. अंकित शर्मा, उप- नागरिक अस्पताल कनीना
फोटो कैप्शन: डा. जितेंद्र मोरवाल, डा. सुंदरलाल, डा. विनय कुमार शर्मा, डा. अंकित शर्मा
बीआर स्कूल में दो दिवसीय सीबीएसई प्रशिक्षण का सफल समापन
शिक्षकों का सतत विकास ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कुंजी - हरीश भारद्वाज
*************************************************************
**********************************************************************
**************************************************************
कनीना की आवाज। बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेहलंग में आयोजित दो दिवसीय सीबीएसई मान्यता प्राप्त आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह प्रशिक्षण अनुभवात्मक अधिगम विषय पर आधारित था, जिसमें विद्यालय के समस्त शिक्षकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का संचालन प्रसिद्ध शिक्षाविद्, शोधकर्ता और सीबीएसई प्रमाणित प्रशिक्षक डा. राज सांगवान द्वारा किया गया।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन डा. सांगवान ने अधिगम पिरामिड, कोल्ब का अनुभव आधारित अधिगम सिद्धांत, प्रभावशाली पाठ योजना का निर्माण, कक्षा-कक्ष में गतिविधियों के माध्यम से प्रभावी शिक्षण और करके सीखने की विधियों पर शिक्षकों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के वास्तविक अनुभव से जुड़ी होनी चाहिए। कक्षा में गतिविधियों और संवाद के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों में रुचि जगा सकते हैं और अधिगम को स्थायी बना सकते हैं।
शिक्षकों ने पूरे प्रशिक्षण सत्र को अत्यंत उपयोगी, उत्साहवर्धक और ज्ञानवर्धक अनुभव बताया। दो दिन के दौरान आयोजित संवादात्मक सत्रों, अभ्यास कार्यों और प्रशिक्षण गतिविधियों ने शिक्षकों में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा कि अब वे अपनी कक्षाओं में अधिक सजीव और नवाचारपूर्ण शिक्षण का प्रयास करेंगे।
विद्यालय के चेयरमैन हरीश भारद्वाज ने इस अवसर पर कहा कि यह प्रशिक्षण शिक्षकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ है। आज के समय में शिक्षकों का सतत विकास ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कुंजी है। उन्होंने डा. राज सांगवान जी तथा सीबीएसई प्रशिक्षण इकाई का आभार प्रकट करते हुए विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण का सकारात्मक प्रभाव विद्यालय की समग्र शिक्षण गुणवत्ता पर अवश्य दिखाई देगा।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और प्रतिभागी शिक्षकों को प्रमाण-पत्र वितरण के साथ किया गया। आयोजन की समस्त व्यवस्था विद्यालय के शिक्षकों एवं समन्वयकों ने कुशलतापूर्वक संपन्न की।
फोटो कैप्शन 01: प्रशिक्षण सत्र के दौरान शिक्षकों के साथ मार्गदर्शन देते हुए डॉ. राज सांगवान।
हंसना,हंसाना एक कला है- अमृत सिंह
विश्व मजाक दिवस -1 जुलाई
*************************************************************
**********************************************************************
**************************************************************
कनीना की आवाज। हंसना और हंसाना दोनों कला हैं। यदि इंसान हंसना जानता है तो समझो उसके सभी रोग दूर हो जाते हैं। सभी अंग प्रफुल्लित हो जाते हैं और हंसाना भी एक कला है। हंसने एवं हंसाने के लिए अनेकों तरीके अपनाए जाते हैं किंतु सबसे आसान तरीका है जोक्स सुनाना। कुछ लोग बातें इस प्रकार से करते हैं कि उनकी हर बात में अंदाज हंसाने वाला होता है।
अक्सर खुशी के अवसर पर विभिन्न प्रकार के चुटकुले जोक्स सुनाएं जाते हैं। जोक्स एक अच्छी दवा है इसलिए आसपास के लोगों के चुटकुले सुनाकर जोर से हंसाना चाहिए। एक चुटकुला प्रतियोगिता भी आयोजित होना चाहिए ताकि हंसते रहे। जितनी देर हंसा जाए उतना ही लाभ होगा। बाबा रामदेव तो हंसने पर जोर देते हैं और कहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा हंसने से लाभ होता है। इसी प्रकार डाक्टर भी मानते हैं की हंसी खुशी से इंसान स्वस्थ रहता है। इस संबंध में कुछ गुदगुदाने वाले और हंसाने वाले लोगों से चर्चा की गई।
**हंसना बड़ी कला है। कई बार इस प्रकार से चुटकुले और जोक्स पेश किए जाते हैं कि अगला व्यक्ति हंसने को मजबूर हो जाता है। चुटकुला प्रतियोगिता भी आयोजित होनी चाहिए ताकि इस बहाने लोग हंस भी सके और अव्वल रहे चुटकुले को पुरस्कृत भी किया जाना चाहिए। चुटकुले वाली किताबें पढ़े और पसंदीदा चुटकुलों को परिवार दोस्तों के साथ साझा करना चाहिए। हंसना बहुत बड़ी कला है।
-- सूबे सिंह शिक्षक एवं जोक्स में माहिर
शिक्षण कार्य और रागिनी के लिए जाने जाने वाले अमृत सिंह का कहना है कि वे दिन रात हंसाने की कला एवं तरीके सोचते रहते हैं कि सि प्रकार दर्शकों को हंसाया जाए। अक्सर रागिनी से पहले उनको हंसाया जाता है ताकि रागिनी पर अच्छी प्रकार ध्यान दें। विद्यार्थियों को भी पढ़ते समय बीच-बीच में हंसाना चाहिए ताकि पढ़ाई की निरसता दूर की जा सके। जोक्स अच्छी कला है और उसे कहने का अंदाज अच्छा हो तो सभी लोग हंसने को मजबूर हो जाते हैं। हंसाने में बहुत सोच विचार कर और अच्छी बातें एवं सामाजिक बातें ही बोलनी चाहिए ताकि माहौल बेहतरीन बन सके। परिवार के लोग भी बैठे होते हैं तथा छोटे-बड़े सभी बैठे होते हैं। इसलिए जोक्स ऐसे हो ताकि हर इंसान को गुदगुदाने के लिए मजबूर कर दे। हंसाना लंबे समय तक अभ्यास करने के बाद कला हासिल हो सकती है। यह कला शुद्ध भारतीय कला है और इससे हर इंसान को हंसाया जा सकता है।
-- अमृत सिंह शिक्षक एवं रागिनी गायक, हंसाने में मशहूर
फोटो कैप्शन: सूबे सिंह, अमृत सिंह
सेहत का राज छुपा है फलो में
अंतरराष्ट्रीय फल दिवस -1 जुलाई
*************************************************************
**********************************************************************
**************************************************************
कनीना की आवाज। फलों का नाम लेते ही खट्टे मीठे अनेक प्रकार के फलों की याद ताजा हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय फल दिवस भी एक जुलाई को मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय फल दिवस फलों के महत्व को दर्शाता है। प्राचीन समय से ही इंसानों का फलों से यह लगाव रहा है इसलिए जहां कहीं मधुर मधुर फिर मिलते हैं इंसान प्रसन्नचित मिलता है। यूं तो हर देश में अपने अलग-अलग प्रकार के फल होते हैं किंतु कुछ ऐसे फल है जो पूरे ही विश्व में पाए जाते हैं। इनमें से कुछ फल निम्र हैं।
जिनमें केला एक फल है। केला हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है इसलिए से पूजा विधान तथा विभिन्न शहरों में वितरित किया जाता है इसमें पोटैशियम अधिक मिलता है जो हृदय को स्वस्थ रखता है। महाराष्ट्र केले के लिए मशहूर है जिसे भारत का केले का शहर नाम से जाना जाता है। अनार एक ऐसा फल है सभी फलों का शाही ताज कहलाता है। अनेक लोकोक्तियां भी इस आधार पर बनाई हुई हैं। प्राचीन समय से लोग भी अनार से परिचित थे। आम फलों का राजा आम पूरे विश्व में पाया जाता है। प्राचीन काल में इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता था। यह देवताओं पर अर्पित किया जाता रहा है। अंगूर एक उर्वरता, प्रचुरता, धन का प्रतीक माना जाता है। अंगूर खाने के लिए सबसे अहम माना जाता है। नारियल एक ऐसा फल है जो सिर्फ श्रीफला नाम से जाना जाता है। भगवान के प्रतीक का फल नारियल है।
क्या कहते हैं लोग फलों के गुणों के बारे में ? क्या कहते हैं वैद्य-
फलों में एंटी वायरल गुण पाया जाता है। विटामिन, खनिज लवण प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसके अतिरिक्त पोटैशियम भी मिलता है । फाइबर और पानी शरीर के लिए सेहतमंद होते हैं। फल शरीर को हर प्रकार से रोगों से बचाते हैं। दिल की बीमारी को केला, संतरा और खरबूजा बहुत लाभप्रद माने जाते हैं। फलों का भोजन में जरूर सेवन करना चाहिए। ऐसे में 1 दिन में कम से कम 2 फल और मौसमी सब्जियां भोजन में शामिल करनी चाहिए। रोजाना फल खाने चाहिए क्योंकि फलों में विटामिन खनिज, फाइबर बहुत अधिक मात्रा में मिलते हैं। फल दिल की बीमारी, कैंसर, मधुमेह आदि बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं।
-वैद्य बालकिशन शर्मा
फोटो कैप्शन: बालकिशन शर्मा वैद्य












No comments:
Post a Comment