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Friday, February 13, 2026



 


दिव्यांग कर्मचारियों की सेवा-आयु बहाली को लेकर विधायक ओम प्रकाश यादव को सौंपा ज्ञापन
-60 साल तक नौकरी पुन: बहाली की मांग
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कनीना की आवाज।
हरियाणा प्रगतिशील दिव्यांग शिक्षा अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश कौशिक  ने आज हरियाणा के पूर्व समाज कल्याण मंत्री एवं नारनौल से विधायक ओम प्रकाश यादव को दिव्यांग कर्मचारियों की सेवा-आयु 60 वर्ष पुन: बहाल करने संबंधी ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन संघ तथा विकलांग संघ उमंग शिक्षा की ओर से प्रस्तुत किया गया।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा दिनांक 03 फरवरी 2026 को जारी गजट अधिसूचना के माध्यम से हरियाणा सिविल सेवा (सामान्य) नियम, 2016 के नियम 143 में संशोधन करते हुए 70 प्रतिशत अथवा उससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारियों को पूर्व में प्रदान की गई 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
संघ की ओर से कहा गया कि पूर्व प्रावधान राज्य की संवेदनशील एवं कल्याणकारी नीति का प्रतीक था। दिव्यांग कर्मचारी शारीरिक एवं सामाजिक चुनौतियों के बावजूद पूर्ण निष्ठा से सेवाएँ प्रदान करते हैं और 60 वर्ष की सेवा-आयु उन्हें आर्थिक स्थिरता एवं सम्मानजनक जीवन-निर्वाह का अवसर देती थी।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि उक्त संशोधन से दिव्यांग कर्मचारियों में मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है। यह निर्णय सामाजिक न्याय की उस भावना के विपरीत है जिसे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 द्वारा संरक्षित किया गया है।
संघ ने विधायक से आग्रह किया कि वे इस विषय में माननीय मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर गजट अधिसूचना 03 फरवरी .2026 को निरस्त कराने तथा दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु पुन: 60 वर्ष निर्धारित कराने हेतु पहल करें। साथ ही दिव्यांग संगठनों के साथ संवाद स्थापित कर संतुलित एवं न्यायोचित निर्णय सुनिश्चित कराने की मांग भी की गई।
विधायक ओम प्रकाश यादव ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विषय पर उचित स्तर पर विचार-विमर्श कराने का आश्वासन दिया।
 हरियाणा प्रदेश दिव्यांग शिक्षा अधिकारी संघ तथा विकलांग संघ उमंग सिरसा शिक्षा की तरफ से दिव्यांगों की सेवानिवृत्ति संबंधित अध्यादेश वापस लेने बारे ज्ञापन नारनौल से विधायक एवं हरियाणा के पूर्व समाज कल्याण मंत्री राव ओम प्रकाश यादव को संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश कुमार कौशिक द्वारा सौंपा गया।
फोटो कैप्शन 07: नरेश कौशिक पूर्व मंत्री को ज्ञापन देते हुए


नवोदय में प्रेरणा उत्सव व फुटबाल फार स्कूल कार्यक्रम आयोजित
--ओमप्रकाश यादव पूर्व मंत्री रहे मुख्य अतिथि
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कनीना की आवाज।
पीएमश्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में प्रेरणा उत्सव व फुटबाल फार स्कूल कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें मुख्य अतिथि नारनौल विधायक एवं पूर्व मंत्री ओमप्रकाश यादव रहे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित प्रेरणा उत्सव जिसके अंतर्गत प्रत्येक जिले के एक छात्र एक छात्रा का चयन किया जाता है। इन विद्यार्थियों को वडनगर, गुजरात में  नई शिक्षा नीति- 2020 पर आधारित एक माडल स्कूल में एक सप्ताह का आवासीय दौरा कराया जाता है ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके और वे प्रेरणा ले सके।
इसी संदर्भ में जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में  जिला स्तरीय प्रेरणा उत्सव का आयोजन किया गया। इस उत्सव में जिले के विभिन्न स्कूलों के 39 छात्र छात्राओं ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में निबंध लेखन,कविता, गीत लेखन, चित्रकला आदि में से एक क्रियात्मक रचना तथा साक्षात्कार के आधार पर अंतिम रूप से एक छात्र तथा एक छात्रा के चयन हेतु प्रक्रिया सम्पन्न की गई।  
दूसरी ओर खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा निर्देशित फुटबाल फार स्कूल का भी विद्यालय में आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत विभिन्न स्कूलों से आए हुए छात्र-छात्राओं को फीफा फुटबाल वितरित किए गए। इस कार्यक्रम में ओमप्रकाश जी यादव विधायक नारनौल विद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे। फुटबाल फार स्कूल कार्यक्रम योगेश शर्मा तथा उषा रानी प्राचार्य बृजमोहन रावत तथा उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य के नेतृत्व में कार्यक्रम संपन्न कराया गया।
  नारनौल से विधायक एवं हरियाणा के पूर्व समाज कल्याण मंत्री ओम प्रकाश यादव ने आज पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय नारनौल में आयोजित प्रेरणा कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को संबोधित किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रेरणा कार्यक्रम की शुरुआत माननीय प्रधानमंत्री की कर्मभूमि वडनगर के पावन स्थल से हुई है और यह पहल आने वाले समय में देशभर के विद्यालयों के लिए प्रेरणापुंज सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को नई दिशा और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करेगा, जिससे वे अपने जीवन में लक्ष्य निर्धारण कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
विधायक ओम प्रकाश यादव ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि जब भी उन्हें विद्यार्थियों के बीच आने और मार्गदर्शन देने का अवसर मिलेगा, वे सदैव हर्षपूर्वक उसे स्वीकार करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य बृजमोहन लाल रावत की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में विद्यालय ने शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है तथा विकास की गति को नई दिशा मिली है।
कार्यक्रम में प्राचार्य रामस्वरूप, प्राचार्य वीरेंद्र सिंह, प्राचार्य नरेश कौशिक सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को प्रेरणादायी बना दिया।
 इस उत्सव के आयोजन को विजय मोहन,  लोकेश कुमार, विक्रम सिंह व अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 06: पूर्व मंत्री संबोधित करते हुए



एसएचओ नरेश कुमार ने स्कूली बच्चों को पढ़ाए सड़क सुरक्षा के पाठ
- यातायात नियमों के पालन की दी महत्वपूर्ण जानकारी
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कनीना की आवाज।
राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में एसएचओ ट्रैफिक निरीक्षक नरेश कुमार ने विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन अमूल्य है और सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है, इसलिए यातायात नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
निरीक्षक नरेश कुमार ने विद्यार्थियों को वाहन चलाते समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कार चलाते समय सीट बेल्ट और दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए। उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि हमेशा अपनी लेन में सुरक्षित दूरी बनाकर चलना चाहिए और लेन बदलते समय या मुड़ते समय इंडिकेटर का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
ड्राइविंग की तकनीकी जानकारी देते हुए एसएचओ ने बताया कि गोल चक्कर, सिग्नल या किसी भी मोड़ पर ओवरटेक करने से बचना चाहिए और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में वाहन की गति हमेशा धीमी रखनी चाहिए। रात्रि के समय ड्राइविंग करते समय हाई बीम और लो बीम का सही इस्तेमाल तथा ओवरटेक करते समय डिपर का प्रयोग करने के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी परिस्थिति में वाहन नहीं चलाना चाहिए। 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद वैध ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के उपरांत ही वाहन का उपयोग करें। अंत में, उन्होंने वाहन को सड़क या मोड़ पर खड़ा न करके हमेशा निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही पार्क करने की अपील की ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
फोटो कैप्शन 04: एसएचओ यातायात नियमों की जानकारी देते हुए



सात दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता का हुआ शुभारंभ
-अतरलाल ने किया शुभारंभ
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गाहड़ा गांव में 7 दिवसीय बाबा भैया क्रिकेट प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य अतिथि बसपा नेता अतरलाल ने रिबन काट कर किया। उन्होंने खेल ग्राउंड में शाट लगाकर खिलाडिय़ों का उत्साहवर्धन भी किया।
 उन्होंने शानदार क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित करने के लिए गांव की खेल कमेटी व ग्रामवासियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि खेल प्रतियोगिताओं से प्रतिभाएं निखरती हैं और सामने आती हैं। प्रतियोगिताओं से खिलाडिय़ों को आगे बढऩे की प्रेरणा मिलती है। उद्घाटन में बाहला और नाहड़ गांव के बीच में खेला गया जिसमें बाहला गांव 5 विकेट से विजयी रही। दूसरा मैच रामबास और बव्वा गांव के बीच में खेला गया जिसमें रामबास की टीम 7 विकेट से जीती।
  कमेटी सदस्य अजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिता में महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी, झज्जर और भिवानी सहित विभिन्न जिलों की कुल 48 टीमें भाग ले रही हैं। प्रतिदिन सुबह 9 बजे से सायं 6 बजे तक मुकाबले खेले जा रहे हैं। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीम को 21 हजार रुपये तथा द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली टीम को 11 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त फाइनल मुकाबले में मैन ऑफ द मैच को 1100 रुपये तथा मैन ऑफ द सीरीज को 2100 रुपये से सम्मानित किया जाएगा। प्रतियोगिता के पहले दिन कई रोमांचक मुकाबले खेले गए। पहले मैच में बहाला ने नाहड़ को हराया। नाहड़ ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 ओवर में 68 रन बनाए, जिसका पीछा करते हुए बहाला ने 6 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। दूसरे मैच में रामबास ने बव्वा को पराजित किया। तीसरे मुकाबले में मालडा ने बहाला को 101 रन का लक्ष्य दिया, जिसके जवाब में बहाला 69 रन ही बना सकी। चौथे मैच में सीहोर ने पाथेड़ा को हराते हुए जीत दर्ज की। इस अवसर पर पारस, हैप्पी शर्मा, पुष्पेंद्र यादव, अक्षय स्वामी, अजीत, कृष्ण, राहुल, नरेश, रोहित, नवीन, दीपक सहित अनेक खेल प्रेमी उपस्थित रहे।
प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचने पर खिलाडिय़ों में मुख्य अतिथि अतरलाल का फूल मालाओं से स्वागत किया। इस अवसर पर खेल कमेटी के सदस्य अजय, हैपी, जितेन्द्र, भुनेश, राजबीर, चिंटा, पारस, सतीश कुमार, नानड़ सिंह, पवन, पुष्पेंदर, लीलू, दीपक, कालिया, टिंकू, अमित, अजय यादव, बलवान आदि खेल समिति के सदस्य तथा खिलाड़ी उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 05: क्रिकेट प्रतियोगिता का शुभारंभ करते हुए अतरलाल


युगदेव का जन्मदिन श्री कृष्ण गौशाला में मनाया गया
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कनीना की आवाज।
श्रीकृष्ण गौशाला कनीना यहां के प्रबंध व्यवस्था,सेवाभाव, अनुशासन और गौमाता के प्रति समर्पण के कारण क्षेत्र में निरंतर ख्याति अर्जित करती जा रही है। यहां प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धा और विश्वास इस बात का प्रमाण है कि गौसेवा समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही है।
इसी क्रम में आज गौशाला प्रांगण में कुमार युगदेव का जन्मदिवस बड़े ही हर्षोल्लास एवं धार्मिक वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर युगदेव के पिता नवीन यदुवंशी अपने समस्त परिवार सहित गौशाला पहुंचे और अपने पुत्र के जन्मदिवस को गौसेवा के माध्यम से मनाकर समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
परिवार द्वारा गौशाला को 5100 रुपए नकद तथा पांच क्विंटल गाजर गायों के लिए भेंट की गई। साथ ही पूरे परिवार ने गायों को गाजर व गुड़ खिलाकर सेवा का पुण्य लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर गौशाला परिसर भक्ति, सेवा और सद्भावना के वातावरण से सराबोर रहा। गौशाला प्रधान भगत सिंह ने कुमार युगदेव के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए पूरे परिवार का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में गौसेवा के प्रति जागरूकता बढ़ती है और युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोडऩे का कार्य होता है।  उल्लेखनीय है कि उन्होंने कुछ दिन पूर्व ही गौशाला को 100 क्विंटल बाजरा भेंट कर गौसेवा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। कार्यक्रम में मैनेजर हंसराज, सूबेदार मेजर लेखराम, नरेंद्र फौजी, बलजीत यादव, गौशाला सचिव यश कनीनवाल, सह सचिव रामपाल, बलवान सिंह आर्य, उपप्रधान  दिलावर सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति की आत्मा है। गौमाता केवल दूध देने का माध्यम नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संतुलन और मानव जीवन के पोषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गौशालाएं न केवल निराश्रित एवं असहाय गौवंश का संरक्षण करती हैं बल्कि समाज में करुणा, सेवा और सहयोग की भावना को भी सशक्त बनाती हैं।
फोटो कैप्शन 01: गौशाला में जन्मदिन मनाते हुए




महाशिवरात्रि पर बाघोत में लगेगा विशाल मेला
-पौराणिक इतिहास समेटे हैं बाघोत
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव बाघोत पर 15 फरवरी को महाशिवरात्रि मेला लगने जा रहा है। वर्ष में दो बार मेला लगता है। सावन त्रयोदशी शिवरात्रि पर कावड़ मेला लगता है। बाघोत जिसे बाघेश्वर धाम नाम से पूरे भारत में जाना जाता है। बाघोत पौराणिक महत्व एवं अपने में इतिहास समेटे हुए है।
 बाघोत का नाम बाघ के आधार पर पड़ा है।
 बाघोत का पुराना नाम हरयेक वन था। यहां पीपलाद ऋषि का आश्रम भी तो यही था। उनके कुल में राजा दलीप के कोई संतान नहीं थी। वे दु:खी थे और दुखी मन से अपने कुलगुरु वशिष्ठ के पास गए। उन्होंने अपना पूरा दु.:ख का वृतांत मुनिवर को सुनाया। वशिष्ठ ने उन्हें पीपलाद ऋषि के आश्रम में नंदिनी नामक गाय एवं कपिला नाम की बछिया निराहार रहकर चराने का आदेश दे दिया। राजा ने गाय व बछिया को निराहार रहकर चराते वक्त एक दिन भगवान् भोलेनाथ ने बाघ का रूप बनाकर राजा की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। बाघ ने बछिया पर धावा बोल दिया। गाय को बचाने के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने को राजा तैयार हुए। परंतु जब वे ऐसा करने लगे तो  बाघ के स्थान पर शिवभोले खड़े थे। बाघ के कारण ही गांव का नाम बाघोत पड़ा। प्रारंभ में बाघेश्वर शिवालय का निर्माण कणाणा के राजा कल्याण सिंह रैबारी ने करवाया था जिसका समय समय पर उद्धार होता रहा है।
   बाघोत स्थित शिवालय उन भक्तों के लिए भी प्रसिद्ध माना जाता है जिनके कोई संतान नहीं होती है। मेले में आकर दंपति अपने हाथों से एक विशाल वटवृक्ष को कच्चा धागा बांधकर सुंदर संतान होने की कामना करता है। जब संतान हो जाती है तो यहां आकर ही धागा खोलता है। यही कारण है कि शिवलिंग के पास ही खड़ा एक वटवृक्ष कच्चे धागों से लदा मिलता है।
हरियाणा सरकार की पुस्तकों में भी बाघोत का छोटा उल्लेख है वहीं लेखक डा. एचएस यादव की कृति में संपूर्ण इतिहास दिया गया है।
बाघोत के शिवालय का शिवलिंग स्वयंभू होने के कारण यहां अपार भीड़ भक्तों की वर्षभर चलती है। छोटा सा गांव है किंतु ठहरने के लिए अनेक धर्मशालाएं हैं। प्राकृतिक शिवलिंग के भक्त दर्शन कर प्रसन्न हो जाते हैं।
स्वयंभू है शिवलिंग.
बाघोत का शिवलिंग स्वयंभू है। यही कारण है कि शिवरात्रि एवं महाशिवरात्रि पर यहां अपार भीड़ जुटती है। हरिद्वार एवं ऋषिकेश से गंगाजल लाकर अर्पित करते हैं।
मांग रहेगी गाजर एवं बेरों की..
 महाशिवरात्रि पर बेर, गाजर एवं फलों की मांग रहती है।  गाजर के अच्छे भाव मिलने की संभावना से  किसानों ने खेतों से गाजर बचा रखी थी और उन्हें बाजार में बेचकर आय माने की संभावना है। उधर  बेहतर बेर की पैदावार लेने वाले बेरों की पैकिंग कर रहे हैं। दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग के पौधों की भी मांग रहती है।
 बाघेश्वर धाम को सजाया गया है। कतारबद्ध भक्तों के खड़े रहने, पेयजल, पुलिस आदि का प्रबंध किया गया है वहीं भंडारे, ठहरने का प्रबंध भी किया गया है।
फोटो कैप्शन 02: बाघोत का शिवालय 03: स्वयंभू शिवलिंग


अग्निपथ योजना के तहत आनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू
-उम्मीदवार 2 अग्निवीर श्रेणी के लिए कर सकते हैं आवेदन
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कनीना की आवाज।
अग्निपथ योजना के तहत आनलाइन आवेदन प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। इच्छुक युवा 1 अप्रैल तक पोर्टल पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
सेना भर्ती कार्यालय चरखी दादरी भर्ती निदेशक ने बताया कि आनलाइन परीक्षा के लिए अभ्यार्थी द्वारा प्रति आवेदन परीक्षा शुल्क 250 रुपए का भुगतान आनलाइन करना होगा। इच्छुक उम्मीद्वार उनकी योग्यता के अनुसार 2 अग्निवीर श्रेणी के लिए आवेदन करने का विकल्प इस वर्ष भी दिया गया है। अग्निवीर श्रेणी में प्राथमिकता का विकल्प है जिसको उम्मीदवार को आवेदन करते समय चुनाव करना है। भर्ती वर्ष 2027 के लिए अग्निवीरो कि भर्ती दो चरणों में की जाएगी। प्रथम चरण में आनलाइन कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) व द्वितीय चरण में भर्ती रैली होगी। भर्ती के लिए इच्छुक उम्मीद्वार को अपना नाम वेबसाइट ज्वाइन इंडियन आर्मी डॉट एनआईसी डाट इन पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि चरखी दादरी, भिवानी, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिला के जिन युवाओ का जन्म 1 जुलाई 2005 से 1 जुलाई 2009 के बीच हुआ है और उन्होंने कक्षा 10वीं या कक्षा 12वीं पास कर ली है और जो उम्मीद्वार कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित हुए हैं और परिणामों की घोषणा की प्रतीक्षा कर रहे हैं वे आवेदन करने के पात्र हैं बशर्ते वे अन्य सभी शर्तों को पूरा करते हो। यह भर्ती अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर क्लर्क, स्टोरकीपर तकनीकी, अग्निवीर तकनीकी, अग्निवीर ट्रेड्समैन 10वीं पास व अग्निवीर ट्रेड्समैन 8वीं पास के पद के लिए है, जिन उम्मीद्वारों ने न्यूनतम शैक्षणिक और आयु सीमा की योग्यता पूरी कर रखी है वे इस योजना के तहत अपने आवेदन आनलाइन कर सकते हैं। आवेदन करते समय सभी उम्मीद्वार अपना निजी मोबाइल नंबर की जानकारी दर्ज करके सबमिट का बटन अवश्य दबाएं। उम्मीद्वार जितनी बार भी अपना आनलाइन फार्म खोले, उसे बंद करने से पहले वे सबमिट बटन को अवश्य दबाएं, आनलाइन आवेदन करने से पहले नोटिफिकेशन को अच्छी तरह से पढ़े और योजना के तहत भर्ती प्रक्रिया को अच्छी तरह से समझ लें।















संत बाबा मोलडऩाथ मेला 27 फरवरी को
-कनीना का प्रमुख पर्व है मोलडऩाथ मेला
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कनीना की आवाज।
 27 फरवरी को कनीना का प्रसिद्ध पर्व संत बाबा मोलडऩाथ मेला लगने जा रहा है जिसमें पूरे प्रदेश से अपार भीड़ जुटती वही दंगल, घोडिय़ों की दौड़, ऊंटों की दौड़ आदि देखने को मिलते हैं। वास्तव में यह पर्व 3 दिन लगातार चलता है। पपहले दिन रात्रि को जागरण तो दूसरे दिन दंगल, घुड़दौड़, ऊंटदौड़ एवं मेला लगता है। तीसरे दिन साधु-संतों एवं आए हुए भक्तों को विदा किया जाता है।
 संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ मेले को शक्कर मेला नाम से भी जाना जाता है। शक्कर को अक्सर चीनी मान लेते हैं लेकिन क्षेत्र के लोग गुड़ जैसे रंग की शक्कर कह जाती है जो यहां प्रसाद के रूप में बांटी जाती है। इसलिए शक्कर मेला कहते हैं। भक्तजन घर से शक्कर का प्रसाद लेकर बाबा को अर्पित करने के लिए पहुंचते हैं। यह परंपरा लंबे अरसे से चली आ रही है। वैसे तो हर मेले में अलग-अलग प्रसाद वितरित करने की परंपरा है किंतु इस मेले में शक्कर का प्रसाद ही अर्पित किया जाता है। शक्कर का प्रसाद क्यों अर्पित किया जाता है इसके बारे में अधिकांश लोगों का कहना है कि पुराने समय में शक्कर प्रमुख रूप से खाई जाती थी इसलिए यह अर्पित की जाने लगी जो आज भी परंपरा के रूप में कायम है।
 बुजुर्ग राजेंद्र सिंह बताते हैं की पुराने समय से ही शक्कर मेला भरता आ रहा है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए शक्कर प्रयोग में लाई जाती रही है। शक्कर आहार में शामिल किया गया था इसलिए शक्कर को ही खाने के लिए तथा अर्पित करने के लिए भी प्रयोग करते आ रहे हैं। इन दिनों दुकानों पर कनीना क्षेत्र में केवल शक्कर ही शक्कर नजर आती है। प्रसाद के रूप में आई शक्कर को इक_ा करके संत शिरोमणि मोलडऩाथ आश्रम में रख दिया जाता है जिसे बाद में प्रयोग किया जाता है या गौशाला को दान दिया जाता हैं
 इस संबंध में कमला देवी का कहना है कि इतनी भारी मात्रा में शक्कर संत शिरोमणि मोलडऩाथ पर चढ़ाई जाती जो पहली बार किसी मेले में देखने को मिलती है। संत आश्रम के आस पास विन्नि धार्मिक स्थानों पर मेले के दिन शक्कर ही चढ़ाई जाती है। पास में करीब एक दर्जन धार्मिक स्थान सभी पर शक्कर नजर आती है क्योंकि शक्कर पुराने समय से लोग सेहत बनाने के लिए काम में लेते आये हैं।
 भगत सिंह का कहना है कि वे तथा उनके पूर्वज भी शक्कर प्रसाद बांटते आये हैं क्योंकि संत मोलडऩाथ के समय शक्कर ही सबसे ज्यादा प्रचलन में थी। इसलिए तो प्रसाद के रूप में वितरित की जाती है।
 भीम सिंह का कहना है कि शक्कर उस जमाने से खाने में प्रयोग की जाती थी। शक्कर संत को भी पसंद थी। शक्कर आज भी प्रचलन में है और शक्कर को घर-घर में बांटा जाता है। मेले की बड़ी विशेषता है कि घर-घर में शक्कर को बांटा जाता है प्रसाद भी शक्कर का दिया जाता है ऐसा लगता है कि पूरा कस्बा ही शक्करमय हो जाता है। इसलिए प्रमुख रूप से शक्कर मेला नाम से जाना जाता है।
फोटो कैप्शन 08: मोलडऩाथ आश्रम का मुख्य द्वार

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