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Saturday, October 25, 2025


 





छठ पूजा की चल रही है तैयारी
-आज नहाए खाय का कार्यक्रम हुआ संपन्न
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कनीना की आवाज।
 कनीना के सिरसवाला जोहड़ पर  28 अक्टूबर तक छठ पूजा का पर्व पूर्वांचल लोगों द्वारा मनाये जाने को लेकर तैयारियां चल रही है। पर्व की शुरुआत हो चुकी है। जहां आज घरों में बैठकर लोगों ने नहाए खाए का कार्यक्रम पूर्ण किया, दीप प्रज्वलित कर पूजा की।
दुलारचंद और पार्वती ने बताया कि वो अपने बच्चों सहित तथा आसपास के सभी लोगों ने मिलकर नहाए और खाय का कार्यक्रम किया है। जो कल से रविवार खरना कार्यक्रम में शामिल होंगे। 27 अक्टूबर को अक्टूबर को जहां भगवान भास्कर को संध्याकालीन अघ्र्य  दिया जाएगा वहीं सुबह अस्ताचलगामी कार्यक्रम चलेगा। 28 अक्टूबर को उदयमान सूर्य को प्रात: कालीन अघ्य दिया जाएगा। इसके लिए सिरसवाला जोहड़ उन्होंने चुन रखा है, जहां पर कार्यक्रम पूर्ण होगा।
   इन लोगों ने बताया कि वे अपने प्रांत नहीं जा सके चूंकि ट्रेनों में सीटों का अभाव है। ऐसे में यहीं पर रहकर पर्व मनाएंगे। यह कठोर व्रत के विधान के तहत उनका पर्व पूर्ण होता है। जल में खडेु़ रहना पड़ता हे। भारी मात्रा में फलों का प्रबंध करना पड़ता है।  विगत वर्षों से कनीना की नहर में, संत मोलडऩाथ आश्रम जोहड़ तथा रामेश्वरदास जोहड़ पर ये लोग धूमधाम से छठ पूजा मनाते आ रहे हैं।
 उन्होंने बताया कि छठ पूजा का पर्व चार दिनों तक चलने वाला  सूर्य उपासना का एक विशेष पर्व है जिसका समापन 28 अक्टूबर को होगा। इस पर्व में कठोर तप, स्नान, उपवास, बगैर पानी पिये लंबे समय तक पानी में खड़े होना और प्रसाद वितरण करके सूर्य को अर्घ देना शामिल है। महाभारत के कर्ण  सूर्य के प्रमुख उपासक हुए हैं। यह दीपावली के 6 दिनों के बाद आने वाला विशाल पर्व है जो विशेषकर उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार में बहुत प्रमुखता से मनाया जाता है। इसे सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है। यह वर्ष में दो बार मनाया जाता है।   स्त्री और पुरुष समान रूप से पर्व मनाते हैं। इस पर्व को अनेक कथाओं से जोड़ा जाता है।
पर्व का संबंध पांडवों के राजपाट से है। जब पांडव अपना राजपाट हार गए तो श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को छठ व्रत करने की बात कही। इस पर्व के करने से मनोकामना पूर्ण हुई और राजपाट वापस मिल गया। वैसे भी सूर्य देव और छठ मैया का संबंध भाई-बहन से जोड़ा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी पर्व को विशेष माना जाता है क्योंकि सूर्य की पराबैंगनी किरणें इस समय अधिक मात्रा में धरती पर आती हैं। इनका कु-प्रभाव सभी जीव जंतुओं पर पड़ता है और इससे बचने के लिए भी सूर्य की पूजा की जाती है। यह पर्व 4 दिनों तक चलता है जहां अंतिम दिन सूर्य की पूजा करके तब व्रत को खोला जाता है। 36 घंटे तक का लंबा व्रत रखा जाता है जिसमें पहले दिन नहाए और खाए चतुर्थी को किया जाता है, वहीं दूसरे दिन पंचमी को पूरे दिन उपवास रखा जाता है, तीसरे दिन छठ का पर्व होता है और पानी में खड़े होकर व्रत किया जाता है, छठ गीत गाए जाते हैं चौथे दिन जहां सूर्योदय होती अर्घ दिया जाता है और व्रत खोला जाता है।
उनका मानना है कि इस पर्व को करने वाली स्त्रिया धन धान्य, पति पुत्र तथा सुख समृद्धि से परिपूर्ण रहती हैं। यह व्रत बड़े नियम तथा निष्ठा से किया जाता है। इसमें तीन दिन के कठोर उपवास का विधान है। इस व्रत को करने वाली स्त्रियों को पंचमी को एक बार नमक रहित भोजन करना पड़ता है। षष्ठी को निर्जल रहकर व्रत करना  पड़ता है। षष्ठी को अस्त होते हुए सूर्य को विधिपूर्वक पूजा करके अर्घ देते हैं। सप्तमी के दिन प्रात:काल नदी या तालाब पर जाकर स्नान करती हैं। सूर्योदय अघ्र्य देती है।
पंडित दिनेश कुमार इस पर्व से जुड़ी एक कहानी बताते हैं। उनके अनुसार प्राचीन काल में बिन्दुसार तीर्थ में एक महीपाल नाम का वणिक रहता था । वह धर्म कर्म तथा देवता विरोधी था। एक बार उसने सूर्य भगवान की प्रतिमा के सामने मल मूत्र का त्याग किया। परिणामस्वरूप उसकी आंखों की ज्योति चली गई। इसके बाद वह अपने जीवन से ऊबकर गंगा जी में डूबकर मर जाने को चल दिया। रास्ते में उसकी भेंट महर्षि नारद से हो गई। नारद ने उससे पूछा- आप,जल्दी जल्दी किधर जा रहे हो महीपाल रोते रोते बोला मेरा जीवन दूभर हो गया है । मैं अपनी जान देने हेतु गंगा में कूदने जा रहा हूं। मुनि बोले मूर्ख प्राणी तेरी यह दशा भगवान सूर्य देव के कारण हुई है इसलिए कार्तिक मास की सूर्य षष्ठी का व्रत रख  तेरे सब कष्ट दूर हो जायेंगे। वणिक ने ऐसा ही किया तथा सुख समृद्धि पूर्ण दिव्य ज्योति प्राप्त कर स्वर्ग का अधिकारी बन गया।
फोटो कैप्शन 08: पूजा अर्चना करते लोग






कई समस्याओं से जूझ रहे हैं कनीना के किसान
-रबी फसल पैदावार लेना तलवार की धार       
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कनीना की आवाज।
क्षेत्र के किसान कई समस्याओं से जूझते आ रहे हैं। पैदावार लेने के लिए बिजली, पानी, खाद, गिरते जलस्तर, बीजों की जानकारी अभाव तथा कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में रबी फसल पैदावार लेना तलवार की धार के समान है।
   कनीना क्षेत्र का किसान यूं तो सदा ही मेहनत के बलबूते पर जीवित रहा है। कठिन परिश्रम करके अपनी आजीविका कमा रहा है। उसकी मुख्य फसलें खरीफ एवं रबी की होती है।  खरीफ की फसल वर्षा पर आधारित होती है। पहले ही भू-स्तर गिरता जा रहा है ऊपर से डार्क जोन घोषित होने से नलकूप खोदना आसान नहीं रहा है। वैसे भी नलकूप लगाना लाखों रुपये का खर्चा होता है। यह भी सत्य है कि प्रतिवर्ष उसके बिजली के उपकरण जलने की समस्या रहती है। जैसे तैसे उपकरण ऋण लेकर लगा भी देता है तो पानी की समस्या फिर भी आड़े आ जाती है क्योंकि बिजली कम आती है जिसके चलते पर्याप्त खेतों की सिंचाई नहीं हो पाती है। इस संबंध में कुछ किसानों से चर्चा की गई जिनके विचार निम्र हैं--
 **कनीना क्षेत्र में नहरों की संख्या काफी है किंतु या तो उनमें पानी आता ही नहीं या फिर वह पानी पीने के लिए ही सप्लाई होता है। इस पानी को किसान ले नहीं सकते। खादों की कमी विगत वर्ष से अधिक चल रही है। बीज और दवाइयां भी तो अच्छे नहीं मिलते हैं। मिल भी जाते हैं तो अति महंगे होते हैं। किसान रूढि़वादी होने के कारण भी परेशान हैं क्योंकि वे नए बीजों का उपयोग करने की बजाए पूर्व में उपयोग करते आ रहे बीजों का ही उपयोग करना श्रेष्ठ समझते हैं।
---भरत सिंह किसान
 किसानों के सामने गिरते जलस्तर की समस्या भी तो विकराल बन रही है क्योंकि किसान प्रत्येक वर्ष डीप बोर करवाता है किंतु अगले वर्ष वह जलस्तर भी घट जाता है। ऐसे में दक्षिण हरियाणा का किसान हताश व निराश लगता है। उससे बात करने पर कृषि को घाटे का सौदा बताता है। इन हालातों में उसके लिए फसल पैदावार लेना तलवार की धार पर चलने के समान है।
---रोहित कुमार, किसान
कई कई सालों तक ट्यूबवेल कनेक्षन नहीं मिलता है जिससे कुछ पैदावार लेना चाहे वो नहीं ले पाता है। किसान कुआं खोद ले तो कनेक्षन के लिए मारे मारे फिरते रहो। परेशान होकर बैठ जाता है।
---सूबे सिंह, किसान
आवारा जंतु फसल को तबाह कर जाते हैं। अब तो बंदर, नीलगाय, कुछ सुअर, कुछ अन्य आवारा जंतु भी खड़ी फसल पर धावा बोल देते हैं। किसान मायूस मिलता है। इन पर काबू करना कठिन है।
 --अजीत कुमार, किसान
फोटो कैप्शन: अजीत कुमार, सूबे सिंह, रोहित कुमार, भरत सिंह



326 किसान मंडी में लेकर आये 9413 क्विंटल बाजरा
--खरीद पहुंची 204896 क्विंटल ,सरकारी तौर पर नहीं हो पाई खरीद
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कनीना की आवाज।
 कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक एक दाना भी बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 204896 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा कम से कम 1900 रुपये और अधिकतम 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। शनिवार को 326 किसान 9413 क्विंटल बाजरा लेकर आये।
 मिली जानकारी अनुसार अब तक 6635 टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
फोटो कैप्शन 06: कनीना की नई अनाज मंडी में बाजरे की आवक।




 बाबा उधोदास का महापरिनिर्वाण दिवस 2 नवंबर को
-महान संत है लालदास महाराज
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कनीना की आवाज।
 संत शिरोमणि बाबा उधोदास महापरिनिर्वाण दिवस 2नवंबर देव उठानी एकादशी को मनाया जाएगा। रात्रि को जागरण होगा तथा द्वादशी 3 नवंबर को भंडारा आयोजित होगा। विस्तृत जानकारी देते हुए संत शिरोमणि लाल दास महाराज ने बताया कि वर्षों से यह परंपरा इसी प्रकार चली आ रही है। बाबा उधोदास का महापरिनिर्वाण दिवस देव उठानी एकादशी को मनाया जाता है।
लालदास महाराज--
कनीना-रेवाड़ी मार्ग पर मात्र नौ किमी दूर ग्र्राम जैनाबाद में स्थित बाबा उधोदास मंदिर अपार श्रद्धा एवं भक्ति का केंद्र बन गया है जिसके पीछे यहां के संत लालदास एवं उनके द्वारा स्थापित गौशाला है। स्वयं दिनभर गायों की सेवा करते हैं और अपने भक्तों को भी सेवा भाव में लगाए रखते हैं। दो योजनाएं गांव के सरपंच बनने के कारण गांव की काया ही पलट कर रख दी है। होली के दिन बाबा  बाबा लालदास स्वयं होली खेलते हैं। हजारों गाएं बिना किसी सरकारी सहायता के बाबा लालदास स्वयं गौशाला में पाल रहे हैं।
    रेवाड़ी जिला के  जैनाबाद स्थित बाबा उधोदास का भव्य मंदिर है। इसी मंदिर के सामने बाबा की समाधि तथा बाबा के बाद में आए उनके शिष्यों की समाधियों वाला मंदिर है। भजन-कीर्तन तथा उत्सव इसी भव्य मंदिर में होते हैं जहां समाधियों के अलावा पेयजल का प्रबंध, घास के मैदान तथा वृक्षों से आच्छादित क्षेत्र है। इन समाधियों में सबसे पहले बाबा उधोदास की समाधि है। इस समाधि के ऊपर की ओर झांक कर देखे तो सैकड़ों वर्ष पुरानी पेंट व ब्रुश से की हुई कलाकारी दिखाई पड़ती है जो आज भी अपनी आब नहीं खो पाई है। यह वही स्थान है जहां अनवरत पूजा अर्चना का सिलसिला चलता रहता है तथा दीप जलते रहते हैं।
  होली के पर्व पर महंत लालदास के साथ होली खेलते भक्तों को देखा जा सकता है। यहां पर हरियाणा ही नहीं अपितु दूसरे राज्यों के भक्तजन भी आते हैं। जब देव उठनी एकादशी आती है तो बाबा का निर्वाण दिवस श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन रात्रि के समय जहां जागरण चलता रहता है  
 संत लालदास महाराज ने यूं तो दो योजनाएं गांव के सरपंच रहकर गांव का नाम चमका दिया वहीं जैनाबाद में संत शिरोमणि बाबा उधोदास नामक गौशाला खोलकर एक बेहतर काम किया है। बाबा सेवादास 22 जून 1978 को ब्रह्मïलीन हुए थे जिसके बाद 27 फरवरी 1979 को बाबा लालदास जी ने पदार्पण किया जो आज भी मंदिर के कायाकल्प व बाबा उधोदास के नाम को चार चांद लगा रहे हैं।
       बाबा लालदास जीव जंतुओं और मानव जाति के कल्याण में रत रहते हैं। गायों के प्रति गहन लगाव रखने के कारण अपाहिज गायों की सेवा के उद्देश्य से गौशाला की स्थापना की। महज चार वर्षों में इस गौशाला में गायों की संख्या बढ़कर हजारों हो गई है। किसी प्रकार की सरकारी सहायता के बगैर ही गौशाला को चलाया जा रहा है। बाबा की अपार मेहनत के चलते बाबा आश्रम की भांति गौशाला का नाम उच्च श्रेणी में गिना जाने लगा है।
 बाबा लालदास कहते हैं कि संसार में तीन ही माताएं मानी जाती हैं जिनमें जननी, धरती और गौमाता आती हैं। यूं तो तीनों ही माताओं की आज के दिन दुर्दशा हो चली है किंतु गौमाता की तो कुछ अधिक ही दुर्दशा हो गई है। जिस गाय को कभी घरों में पालना शुभ माना जाता था और उनके दूध एवं दही को खाकर जवान बनते थे जिनकी प्रखर बुद्धि होती थी आज उन गायों को कोई पूछने वाला नहीं है। या तो उन्हें गली-मौहल्ले में घूमते देखा जा सकता है।
 'गो सेवा से बेहतर कोई सेवा नहीं है। गायों की सेवा ही इंसान के सभी पूर्व पापों से मुक्ति दिलाती हैÓ। ये विचार  बाबा लालदास के हैं। उनका कहना है  कि जो व्यक्ति नित्य गायों की सेवा करता है उसे पुण्य प्राप्त होता है। गायों को घर में रखने से घर के संताप मिट जाते हैं और गाय का दूध व घी प्रयोग करने से सभी रोग समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने गायों की सेवा करने व उनका घी व दूध प्रयोग करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण भी गायों की सेवा करने के कारण गोपाल कहलाए थे।
  फोटो कैप्शन: संत लालदास महाराज



सेवानिवृत्त कर्मियों की बैठक एक नवंबर को कुरुक्षेत्र में
--कई मुद्दों पर होगी चर्चा
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कनीना की आवाज।
रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा संबंधित अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश सचिव धर्मपाल शर्मा ने बताया कि रिटायर्ड कर्मचारी संघ की बैठक 01 नवंबर को प्रात: 11.00 बजे सैनी समाज धर्मशाला, कुरुक्षेत्र में आयोजित की जाएगी। जिसमें सभी जिलों के प्रधान, सचिव , वित्त सचिव व राज्य के पदाधिकारी व कुरुक्षेत्र के ब्लाक से लेकर जिला के सभी पदाधिकारी व सक्रिय साथी भी शामिल होंगे। बैठक में  17 सितंबर के दिल्ली जंतर मंतर पर धरने की समीक्षा की जायेगी। दिनांक 17 दिसंबर को गवर्नर के माध्यम से प्रधानमंत्री को राज्य स्तरीय ज्ञापन की तैयारी पर विचार विमर्श होगा।
 कुरुक्षेत्र में दिनांक 22-23 फरवरी 2026 को अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर फेडरेशन का दूसरा राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रबंध के लिए तैनातियां लगाई जायेंगी। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा का सिरसा में तृतीय वार्षिक सम्मेलन में सहयोग करने बारे विचार विमर्श किया जायेगा। रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा का राज्य प्रतिनिधिमंडल 08 अक्टूबर को चण्डीगढ़ में अधिकारियों से मीटिंग की रिपोर्ट रखी जायेगी। सभी जिलों के प्रधान ,सचिव अपने अपने जिलंो की सदस्यता , संघर्ष फंड , बाढ़ सहायता फंड ,जिला में बैंक खाता खोला जाना आदि की रिपोर्ट रखेंगे। अन्य विशेष विचार-विमर्श अध्यक्ष की अनुमति से होगा।




बलिदानी सूबेदार रामस्वरूप सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा
-विक्टोरिया क्रास विजेता है बलिदानी
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कनीना की आवाज।
विश्व के सबसे बड़े सैनिक सम्मान विक्टोरिया क्रास से सम्मानित बलिदानी  सूबेदार रामस्वरूप सिंह की पुण्यतिथि पर उनके पैतृक गांव खेड़ी तलवाना में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। अतरलाल एडवोकेट ने इलाके के गणमान्य के साथ बलिदानी की मूर्ति पर माल्यापर्ण कर नमन किया। बलिदानी के सम्मान में सभी ने खड़े होकर एक मिनट का मौन धारण कर भावभीनी श्रद्धांजलि भेंट की।
 मुख्य अतिथि ने कहा कि शहीद सूबेदार रामस्वरूप सिंह ने 1944 द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी सैनिकों को परास्त कर विग हिल चौकी पर कब्जा कर बेजोड़ शहादत का कारनामा कर विक्टोरिया क्रास जीतकर संयुक्त पंजाब व देश का नाम रोशन किया। उन्होंने कहा शहीद देश के गौरव होते हैं। शहीदों का सम्मान राष्ट्र धर्म है। उन्होंने केन्द्र व हरियाणा सरकार से महेन्द्रगढ़ जिला के सभी बलिदानियों के स्मारकों के रख रखाव के लिए बलिदानी परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये ग्रांट देने की मांग की। कप्तान मामराज साहब तथा कप्तान ओमपाल साहब ने बलिदानी सूबेदार रामस्वरूप सिंह के दृढ़ संकल्प तथा युद्ध में किए गए बेजोड़ कार्यों का वर्णन कर सभी के रोंगटे खड़े कर दिए। इस अवसर पर सरपंच पंकज, बलिदानी के पौत्र रिपूदमन व शिवकुमार, पूर्व सरपंच सुरेन्द्र सिंह, पूर्व सरपंच रिसाल पहलवान, सुरेन्द्र सिंह मुनीम, चेयरमैन धूम सिंह, ठाकुर बलजीत सिंह, शिब्बू जेलदार, कैप्टन मामराज, कैप्टन ओमपाल सिंह, कैप्टन रमेश सिंह, सुरेश साहब, सूबेदार मोतीलाल शर्मा, प्रकाश चैहान, नरेश सैन, पूर्व सरपंच रामनिवास, कैलाश सेठ, राजेन्द्र सिंह नम्बरदार, रणबीर नम्बरदार, राकेश यादव, ओमल तंवर, करतार तंवर, मास्टर रणवीर, कैप्टन रामावतार, कैप्टन चिमन सिंह, महेन्द्र जांगड़ा, मोहित, डा. सौरव, सक्षम, अंसज सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे। बलिदानीके पौत्र रिपुदमन नम्बरदार ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद किया।
फोटो कैप्शन 04: गणमान्य जनों के साथ बलिदानी रामस्वरूप सिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण करते अतरलाल।


त्रिवार्षिक चुनाव के लिए कर्मचारी रवाना हुए बहादुरगढ़
-हरियाणा राज्य बिजली बोर्ड वर्कर्स यूनियन के है चुनाव
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कनीना की आवाज।
 हरियाणा राज्य बिजली बोर्ड एचएसईबी वर्कर्स यूनियन के त्रि- वार्षिक चुनाव 25-26 अक्टूबर तक बहादुरगढ़ में होंगे। सभी यूनिट कनीना से बहादुरगढ़ में चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए सभी यूनियन पदाधिकारी एवं कर्मचारी कनीना से रवाना हुये। बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना राम रतन शर्मा तदर्थ कमिटी मेंबर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
सब यूनिट प्रधान हवा सिंह एवं सचिव चुन्नीलाल ने भी जोर-जोर से नारों के साथ बस को रवाना किया। इस मौके पर सर्कल सचिव सत्यवान यादव, यूनिट प्रधान नवीन कुमार, सचिव अनिल कुमार एवं समस्त यूनिट पदाधिकारी, सब यूनिट यूनिट प्रधान सब -अर्बन शेर सिंह ,दीपक कुमार, प्रवीण कुमार, नवीन लखेरा, सतनाली सब यूनिट प्रधान, सचिव एवं समस्त कर्मचारी हाजिर रहे।
फोटो कैप्शन 5: बहादुरगढ़ के लिए यूनिट पदाधिकारी को रवाना करते हुए रामरतन गोमली





मिनी-स्टार्टअप:नन्हे उद्यमियों की अद्भुत पहल
- शिक्षा के साथ सृजन और आत्मनिर्भरता की सीख
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कनीना की आवाज।
बीआर आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेहलंग में इस बार शिक्षा को व्यावहारिक अनुभवों से जोडऩे की पहल की- जिसका नाम रखा गया, मिनी-स्टार्टअप । इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को न केवल उद्यमिता की मूल बातें सिखाना था, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देना भी था।
विद्यालय की प्रधानाचार्या ज्योति शर्मा ने बताया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम बनाना चाहिए। इसी सोच के तहत विद्यार्थियों को अवसर दिया गया कि वे अपने द्वारा बनाए गए उत्पादों को दीपावली मेले में प्रदर्शित और विक्रय करें। यह एक ऐसा प्रयोग था जिसमें विद्यार्थियों ने रचनात्मकता, मेहनत और टीमवर्क के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को वास्तविक अनुभव में बदला।
बेस्ट आउट आफ वेस्ट थीम पर आधारित इस परियोजना में बच्चों ने अनेक आकर्षक उत्पाद तैयार किए- जैसे पेंट किए हुए दीये, जूट और वेस्ट मटेरियल से बने होम डेकोर आइटम, सजावटी फ्रेम, हैंडमेड पेंटिंग्स, बुकमार्क्स और रचनात्मक तोरण।
विद्यालय में कई दिनों तक इसकी तैयारी चली। विद्यार्थियों ने टीमें बनाई। किसी ने निर्माण और डिजाइन की जिम्मेदारी ली, तो किसी ने पैकिंग, प्राइस टैगिंग और प्रचार की। शिक्षकों ने उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता, मूल्य निर्धारण और प्रस्तुति का महत्व सिखाया। इस पूरे प्रयास में बच्चों ने वित्तीय साक्षरता, संचार कौशल और टीमवर्क जैसे जीवन कौशल विकसित किए।
















 हर स्टाल पर बच्चों की मेहनत और कल्पनाशक्ति झलक रही थी। कुछ ही घंटों में बेस्ट आउट आफ़ वेस्ट के अंतर्गत बने कई उत्पाद सोल्ड आउट हो गए। मेले में लगे फेस्टिव क्विज कार्नर ने भी सबका ध्यान आकर्षित किया। यहाँ पर विजेताओं को बच्चों द्वारा बनाए गए पेंटेड दीये पुरस्कार स्वरूप दिए गए। ताकि उनके परिश्रम और कला का सम्मान भी हो सके।
कक्षा 10 की भू-भारती ने शिक्षकों के मार्गदर्शन में पेंटिंग्स बनाई और उसने लगभग 1000 रुपये की कमाई की। उसकी इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार और अभिभावक गर्व से भर उठे।
कक्षा 7 की मुस्कान की कहानी इस प्रोजेक्ट की प्रेरणा बन गई।
शिक्षकों ने बच्चों को यह समझाया कि रचनात्मकता तभी सार्थक होती है जब उसमें सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी जुड़ी हो। विद्यालय के हर शिक्षक ने सुनिश्चित किया कि प्रत्येक विद्यार्थी किसी न किसी रूप में इस परियोजना का हिस्सा बने। अभिभावकों ने इस पहल की भरपूर सराहना की और कहा कि इसने बच्चों में आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और सृजनशीलता का अद्भुत संगम पैदा किया है।
प्रधानाचार्या ज्योति शर्मा ने कहा — मिनी-स्टार्टअप केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक विचार है- सीखो, बनाओ और आगे बढ़ो। हमारे विद्यार्थी न केवल अच्छे छात्र हैं, बल्कि भविष्य के सच्चे उद्यमी भी हैं। रचनात्मकता तब अर्थ पाती है जब वह आत्मनिर्भरता में बदल जाए।
विद्यालय अब इस पहल को स्थायी रूप देने जा रहा है। जल्द ही यहां यंग एंटरप्रेन्योर्स क्लब की स्थापना की जाएगी, जहां विद्यार्थी नए विचारों पर कार्य करेंगे, स्थानीय बाजार से जुड़ेंगे और अपने उत्पादों को और अधिक रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत करना सीखेंगे।
फोटो कैप्शन 01: विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए उपयोगी और आकर्षक माडल।

Friday, October 24, 2025


 




डीएवी अकादमी को पुन: शुरू करवाने संबंधित दिया जिला उपायुक्त को ज्ञापन
--कई सालों से बंद पड़ी है अकादमी
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कनीना की आवाज।
हरेंद्र शर्मा समाजसेवी एवं कुछ अन्य लोगों ने नारनौल जिला उपायुक्त को ज्ञापन देकर कनीना की डीएवी अकादमी को पुन: शुरू करवाने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि डीएवी अकादमी कनीना कई वर्षों से बंद पड़ी है। इसका भवन खंडहर बनने जा रहा है। भवनों में जंगली जानवरों ने शरण ले ली है। यह संस्थान विश्व स्तरीय शिक्षा संस्थान है। इसके आने से कनीना में खुशियां छा गई थी जिसको क्षेत्र को बहुत गर्व हुआ था लेकिन बाद में बंद कर दिया गया है। इस अकादमी के कारण कनीना क्षेत्र की 50 एकड़ कीमती जमीन बेकार हो गई है। यहां विभिन्न कार्यालय स्थापित किये जा सकते हैं। इसको जल्द से जल्द पुन: खुलवाने का कष्ट करें।
फोटो कैप्शन 07: कनीना की बंद पड़ी डीएवी अकादमी





360 किसान मंडी में लेकर आये 23022 क्विंटल बाजरा
--खरीद पहुंची 195483 क्विंटल ,सरकारी तौर पर नहीं हो पाई खरीद
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कनीना की आवाज।
 कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक एक दाना भी बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 195483 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा कम से कम 1900 रुपये और अधिकतम 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। शुक्रवार को 360 किसान 23022 क्विंटल बाजरा लेकर आये।
 विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 6309 टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
फोटो कैप्शन 08: कनीना की नई अनाज मंडी में बाजरे की आवक।






कूड़ा बीनने वाले बिखेर देते कूड़े को
-नगरपालिका नहीं उठाती समय पर
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कनीना की आवाज।
 कनीना के विभिन्न वार्डों में जहां समय पर नगरपालिका कूड़ा नहीं उठा पाती जिसका लाभ कुड़ा बीनने वाले उठा रहे हैं। वे कूड़े से विभिन्न उपयोगी तथा कबाड़ में बेचे जाने वाले पदार्थों को इकट्ठा कर लेते हैं जिसके कारण कूड़े को दूर तक बिखेर देते हैं।
 कूड़ा बीनने वाले आए दिन सुबह सवेरे कूड़े के ढेरों बिखेरकर उनमें उपयोगी एवं कबाड़ में बेचे जाने वस्तु को उठा लेते हैं। उन पर आवारा जंतु भी मंडराते रहते हैं। कनीना के कई स्थानों पर कूड़ादान नहीं रखे गए हैं, परिणाम कूड़ा दूर दराज तक फैल जाता है और बदबू देता है।
   बार-बार प्रशासन से लोग गुहार लगते हैं कि समय पर कूड़ा उठाया जाए किंतु नगर पालिका अधिकारी एवं कर्मचारी कूड़ा उठाने वाले कर्मियों की कमी बता देते हैं। और मानते हैं कि सभी वार्डों में प्रतिदिन कूड़ा नहीं उठाया जा सकता। एक और जहां कूड़े के ढ़ेर लग जाते हैं वहीं कुत्ते उन पर मल मूत्र त्याग जाते हैं जिसके कारण गंदगी और भी बढ़ जाती है। कनीना में कुत्तों की संख्या भी बढ़ती जा रही है परिणाम यह निकलता है की गंदगी को और गंदा करने में ये आवारा जंतु मदद कर रहे हैं।
 फोटो कैप्शन 6: गंदगी के लगे हुए ढेर और पास बैठा कूड़ा बीनने वाला






खेड़ी में कलश यात्रा के बाद राम कथा की शुरू
--अतरलाल पहुंचे मुख्य अतिथि बतौर
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कनीना की आवाज।
खेड़ी (तलवाना) गांव के राम मन्दिर में आठ दिवसीय संगीतमय रामकथा विधि विधान से शुरू हुई। सुबह कलश यात्रा निकाली गई। जिसका शुभारम्भ प्रमुख समाजसेवी अतरलाल एडवोकेट तथा कथावाचक आचार्य दास मोहित ने भगवा झंडा दिखाकर किया। अतरलाल ने कहा कि राम विश्व के आराध्य देव हैं। उनकी कथा से समाज में प्रेम, करूणा, सद्भावना, त्याग, तपस्या, परोपकार व भाईचारा की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कथा आयोजन के लिए ग्रामवासियों का धन्यवाद किया। आचार्य दास मोहित ने बालकांड की कथा सुनाते हुए राम की बाल लीलाओं का संगीतमय बखान कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। इस दौरान बाल लीलाओं की शानदार झांकियां प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर रोतान सिंह, सरपंच पकंज, धूम सिंह चेयरमैन, सुखपाल सिंह, औमप्रकाश, रामबीर सिंह, रामनिवास, पवन कुमार, चमनलाल, विजय सिंह, राजेश देवी, निन्दू, गीता, राजेश, पूनम, सोनू, विजय सिंह, धर्मपाल, अजय सिंह, योगराज सिंह आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 05:कलश यात्रा का शुभारम्भ करते समाजसेवी अतरलाल





संत रामेश्वर दास जोहड़ पर छठ पूजा की तैयारी
-विगत वर्ष सैकड़ों लोगों ने मनाई थी यहां छठ पूजा
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कनीना की आवाज।
 कनीना के की बड़ी बणी स्थित संत रामेश्वर दास पर विगत वर्ष सैकड़ों महिला और पुरुषों ने छठ पूजा का पर्व मनाया था। इस जोहड़ को सिरसवाला जोहड़ नाम से जाना जाता है। क्योंकि यह जोहड़ प्राचीन जोहड़ है तथा सदा नहर के पानी से लबालब भरा रहता है। पास में जहां खड़े होने, ठहरने, कपड़े बदलने आदि का भी प्रबंध है। इसलिए विगत वर्ष जहां सैकड़ो महिला और पुरुष इस जोहड़ पर छठ पूजा मनाते देखे गये। जहां इससे पहले इस जोहड़ के पास से गुजरने वाली नहर में छठ पूजा का पर्व मनाया गया था।
 यद्यपि प्रशासन के पास कोई सूचना न होने से न कोई प्रबंध किया है और न ही इन लोगों ने अपनी ओर से कोई प्रबंध किया है। बिहार और यूपी से आए लोग शेर सिंह, देशपाल, सुंदर सिंह आदि ने बताया कि वे अपने प्रांतों में छठ पूजा के पर्व पर नहीं जा सके क्योंकि ट्रेनों में कोई जगह नहीं है, जिसके चलते अब उन्होंने निर्णय लिया है कि अब कनीना में ही पर्व मनाएंगे या फिर मिलकर रेवाड़ी जाएंगे।
 उन्होंने यह भी बताएं कि विगत वर्ष रामेश्वर दास जोहड़ पर उन्होंने छठ पूजा का पर्व पूर्ण किया था। इस वर्ष भी यहीं पर छठ पूजा का पर्व मनाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि कनीना में हजारों की संख्या में बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि से लोग आए हुए हैं। जिनमें बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग यह पर्व मानते ह। महिलाएं सज धज कर इस जोहड़ में ही पर्व की गतिविधियां पूर्ण करती हैं। ये वे लोग होते हैं जो किसी कारण से अपने प्रांत में नहीं जा सके। ये अधिकांश वे लोग है जो आसपास क्षेत्र में रोटी रोजी के लिए आते हैं और इनको जब पर्व मानना होता है तो वापस अपने प्रांत जाते हैं। परंतु इस बार ट्रेनों में सीटों का प्रबंध न होने से ये मायूस है और बहुत से लोग यहीं पर छठ पूजा का पर्व मनाएंगे। छठ पूजा का पर्व 27 अक्टूबर और 28 अक्टूबर को देखने लायक होगा क्योंकि 28 अक्टूबर को यह पर संपन्न किया जाएगा।
 फोटो कैप्शन: दो और तीन: वह जोहड़ जहां छठ पूजा का पर्व पूर्वांचल के लोग मानते हैं






देसी गायों में मिलता है मालिक से आत्मिक लगाव
-खूंटा बदलने से चारा देती हैं छोड़, रखे ध्यान-डा. कांगड़ा
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कनीना की आवाज।
 कनीना के पशु चिकित्सक डा. पवन कांगड़ा ने श्रीकृष्ण गौशाला में गायों और उन्नत नस्ल के बैलों का निरीक्षण करने के पश्चात बताया कि देसी नस्ल की गायों का मालिक से आत्मिक लगाव अधिक होता है। जिस घर और जिस खूंटे से ये बंधी होती हैं उसे छोडऩा नहीं चाहती। यदि किसी कारणवश गौशाला में भेज दिया जाता है या खूंटा बदल दिया जाता है तो अक्सर वह खाना तक छोड़ देती है। ऐसे उन्होंने उदाहरण भी बताये। जिसमें पशु ने चलना फिरना भी छोड़ दिया। यदि उस समय ध्यान नहीं दिया जाए तो उनकी मौत तक हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में देसी गायों का खूंटा नहीं बदलना चाहिए या किसी गौशाला में नहीं छोडऩा चाहिए। गौशाला में अगर छोड़ जाता है तो उन पर नजर रखने की जरूरत है, यदि वह चारा नहीं चरती तो उन्हें पुराने स्थल पर ही भेजने से वो ठीक हो सकती है। उउन्होंने गौशाला के प्रधान भगत सिंह से कहा कि जो गायों को बाहर से लोग छोड़कर जाते हैं उन पर जरूर नजर रखे। यदि वह खाना एवं चलना फिरना छोड़ देती है तो किसी वह किसी भी प्रकार की बीमारी से पीडि़त नहीं होती अपितु आत्मिक लगाव रखती है।
पांच गाये ली गोद और दिया दान-
 कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में 5 विभिन्न गायों को गोद लिया और दान दक्षिणा दी। दिन में दो गाये विमला देवी वार्ड नंबर एक निवासी ने गोद लेकर लेकर 10200 रुपये दान दिया। वही एक गाय अमित कुमार ने गोद ली। इस मौके पर उनके साथ भगत सिंह प्रधान के अलावा नवीन यदुवंशी, नवीन पार्षद, रामप्रताप मास्टर, दिलावर सिंह, डा. किरण चौधरी, डा. महेश यादव, हरेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।  उधर एक गाय डा. अजय सिंगला ने तथा एक गाय बजरंगलाल कनीना ने गोद ली। गौशाला प्रधान भगत सिंह ने उनका अभिनंनदन किया।
फोटो कैप्शन 04: डा. पवन कांगड़ा गायों का निरीक्षण कर हिदायत देते हुए।





अगिहार स्कूल में संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया गया
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कनीना की आवाज।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्या पूनम यादव ने की।
 विद्यालय में अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक ने विद्यार्थियों को संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्य तथा अंगों के बारे में विस्तार से बताया तथा आधुनिक विश्व के परिप्रेक्ष्य में संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता पर चर्चा की। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न अंगों व कार्यों को अपने अभिनय के द्वारा प्रस्तुत किया  जिसमें मानवी,नव्या,नरगिस, कल्पना, कंचन, शशि, यश्विनी,साक्षी,मीनाक्षी तथा रीतिका आदि ने भाग लिया।
 इस अवसर पर विद्यालय में गणित के प्रवक्ता अजय बंसल राजेंद्र कटारिया निशा जांगड़ा, कैलाश देवी, धर्मेंद्र डीपीई, वंदना जांगिड़, शशि कुमारी पूनम कुमारी,सुरेंद्र सिंह,प्रमोद कुमार राकेश कुमार,चंद्रशेखर सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहा।
फोटो कैप्शन 01: अगिहार में संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाते हुए।






छठ पूजा का









सार्वजनिक अवकाश की मांग
-हजारों लोग बिहार एवं यूपी के आते हैं कनीना क्षेत्र में
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कनीना की आवाज।
 क्षेत्र में बिहार एवं उत्तरप्रदेश के भारी संख्या में आए हुए लोग या तो छठ पूजा से वंचित रह गए हैं या फिर अपने क्षेत्र में लौट गए हैं। इस वर्ष छठ पूजा 27 अक्टूबर को मनाई जा रही है।
  कनीना क्षेत्र में करीब दो हजार लोग दूसरे राज्यों से भारी संख्या में मजदूर एवं मिस्त्री आए हुए हैं जिनके यहां छठ पूजा का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसे में ये लोग या तो छठ पूजा के लिए अपने वतन को लौट गए हैं या फिर जो नहीं जा पाए वो मायूस हैं और छठ पूजा से वंचित रह रहे हैं। कनीना के आस पास रेवाड़ी में छठ पूजा मनाए जाने की प्रथा अधिक है। ऐसे में कुछ लोग तो रेवाड़ी जाने की तैयारी में जुटे हुए हैं। कनीना में भी ये लोग छठ पूजा मनाते हैं।
  कई उत्तरप्रदेश एवं बिहार के लोगों ने बताया कि उनका यह प्रमुख पर्व होता है। इस दिन वे अकसर अपने गांव चले जाते हैं किंतु मजबूरी वश वे जब गांव नहीं जा पाते हैं तो यहीं पर पर्व मना लेते हैं। उन्होंने हरियाणा सरकार से मांग की है कि प्रदेश में भी इस दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए ताकि यह पर्व बेहतर ढंग से मनाया जा सके। मजदूरी करने बिहार से आए रमलू, शौनक, दानू तथा उत्तर प्रदेश से आए मुन्नीलाल, धर्मा, खेताराम तथा रेवती ने बताया कि उनके साथी उत्तर प्रदेश तथा बिहार जा चुके हैं। 27 अक्टूबर को छठ पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। इस पर्व में शामिल होने चले गए हैं किंतु मजदूरी अभी जारी है ऐसे में वे मजदूरी छोड़कर अपने प्रदेश को नहीं जा सके और वे या तो पर्व कनीना में ही मनाएंगे या फिर रेवाड़ी जैसे शहर में जाकर पर्व का मना सकेंगे।


Thursday, October 23, 2025


 




344 किसान लेकर आये 11224 क्विंटल बाजरा
--खरीद पहुंची 183685 क्विंटल ,सरकारीतौर पर खरीद शून्य
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कनीना की आवाज।
 कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 183685 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा कम से कम 1900 रुपये और अधिकतम 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। गुरुवार को 344 किसान 11224 क्विंटल बाजरा लेकर आये।
 विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 5949 टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
फोटो कैप्शन 02: कनीना की नई अनाज मंडी में बाजरे की आवक।







भैया दूज का पर्व मनाया, बहनों ने किया भाइयों को तिलक
-दिनभर चलता रहा कार्यक्रम
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कनीना की आवाज।
क्षेत्र में गुरुवार को भाई बहन के अटूट प्रेम को दर्शाता भैया दूज का पर्व मनाया गया। बहनों ने भाइयों को तिलक किया। दूर दराज से बहने अपने भाइयों तक पहुंची।
  भाई बहन के अटूट रिश्ते को दर्शाने वाले पर्व भैया दूज का आगाज होता है। दीपावली के पर्व के बाद यह पर्व आता है। बहनों ने भाई के आने का बेसब्री से इंतजार किया और व्रत रखकर उनके आने पर खाना खाया।
  इस दिन बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र की कामना के लिए यम से प्रार्थना की। भाई चलकर बहनों से मिलने के लिए गए। कनीना के आचार्य दीपक कौशिक का कहना है कि यह पर्व सभी पर्वों में सबसे बड़ा होता है। इस दिन बहना कहीं भी हो उससे मिलने भाई जरूर जाता है और बहने उन्हें तिलक कर अपने हाथों से मीठा भोजन कराकर फिर भोजन ग्रहण करती हैं। इस पर्व पर बहने अपने भाई की लंबी उम्र की कामना के लिए यमराज से प्रार्थना की।
उन्होंने बताया कि भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया। यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता है। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया। यमुना े ने उत्तर दिया- आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करें, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह ली। इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।
फोटो कैप्शन 01: भाई की लंबी उम्र की कामना करती बहन।



चार महीनों से मिड डे मील की राशि न  आने से बढ़ी परेशानी
- शिक्षक अपनी जेब से लगा रहे हैं पैसे
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कनीना की आवाज।
 कनीना खंड के विभिन्न स्कूलों से करीब चार माह से 4 माह से मिड डे मील पकाने की कोई राशि नहीं डाली जा रही है। जिसके चलते लाखों रुपये मिड डे मील इंचार्ज अपनी जेब से खर्च कर चुके हैं। बार-बार सरकार से मांग करने के बाद भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
   एक और अगर एक दिन के लिए भी खाना नहीं बनाया जाए तो आफत बन सकती है। और लोग विभिन्न अधिकारियों उएवं च्च अधिकारियों को शिकायत करते हैं किंतु कम से कम 4 महीने से मिड डे मील की राशि न आने से शिक्षक बेहद परेशान हैं। इस ओर न तो अधिकारी और न स्कूल मुखिया ध्यान दे रहे हैं। हर स्कूल में एक शिक्षक को यह जिम्मेदारी दी गई है जो मिड डे मील की देखरेख करता है।उनकी जेब में इतने पैसे नहीं होते जिसके चलते दुकानदार भी उन्हें झूठा समझने लग गए हैं। दुकानदार तो दबी जुबान से कहते सुने जा सकते हैं कि शिक्षक अपनी जेब में पैसे डाल जाते हैं। ऐसे में शिक्षक परेशान है। वैसे तो विभिन्न स्कूलों में कई फंड होते हैं और अधिकारियों के माने तो उनका कहना है कि फंड से पैसे निकाल कर खर्च किए जा सकते हैं और जब मिड डे मील की राशि आए तो वह पैसे जमा किए जा सकते हैं। इस बाबत ऐसा संभव है या नहीं यह तो मिड डे मिल इंचार्ज ही जाने परंतु विभिन्न स्कूलों में चार-पांच महीनों की मिड डे मील की राशि नहीं आई है। अप्रैल माह से राशि नहीं आई है लेकिन बीच में एक महीना अवकाश रहता है। उधर कुक का काम करने वाले कुछ महिलाओं के पैसे भी रुके हुए हैं।  शिक्षक दबी जुबान से कह तो रहे हैं कि वे परेशान है किंतु प्राचार्य से कोई मदद नहीं ले रहे हैं। यदि इस प्राचार्य मदद नहीं करते हैं तो उन्हें उच्च अधिकारियों के संज्ञान में बात लानी चाहिए।
क्या कहते हैं खंड शिक्षा अधिकारी -
खंड शिक्षा अधिकारी कनीना दिलबाग सिंह से बात हु।ई उन्होंने बताया की कूकों का अब तक का संपूर्ण पारिश्रमिक डाला हुआ है लेकिन मिड डे मिल मनाने की राशि का बजट तो आया हुआ है लेकिन फाइल अप्रूवल के लिए चंडीगढ़ गई हुई है। चंडीगढ़ से आते ही एक दो दिनों यह राशि भी डाल दी जाएगी। साथ में उन्होंने बताया की स्कूलों में और भी फंड होते हैं जिनसे राशि उधार लेकर खर्च की जा सकती है और जब मिड डे मील की राशि आए तो वह जमा की जा सकती है। उनका मानना है कि शिक्षकों को सूझबूझ से काम लेना चाहिए


 
करीब शत प्रतिशत काबू पा लिया है पोलियो पर- डा. अंकित
-पोलियों का लगभग हो चुका खात्मा
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कनीना की आवाज।
दुनिया भर में जिस दर से पोलियों पर काबू पाने के प्रयास किये हैं उससे पोलियो का लगभग खात्मा हो गया है। वर्ष 1980 के बाद शत प्रतिशत  के करीब पोलियो पर काबू पा लिया है। पोलियो के केस 1980 से पहले मिल सकते हैं किंतु वर्तमान में बाद 1980  के बाद जिला महेंद्रगढ़ से शायद ही कोई मामला हो। पोलियो टीकाकरण और पोलियो उन्मूलन के लिए जागरूकता बढ़ाई गई है जिसके कारण इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई लड़ी गई और पूर्णतया काबू पा लिया है।
विश्व पोलियो दिवस जोनास साल्क की जयंती के रूप में मनाया जाता है। वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने पोलियो की वैक्सीन विकसित की थी। इस बीमारी के खिलाफ अभियान की शुरुआत रोटरी इंटरनेशनल द्वारा की गई थी जो अंतर्राष्ट्रीय सेवा संगठन ने दुनिया भर में कार्यक्रम चलाए गए। पोलियो की खुराक पिलाई गई जिसके कारण पोलियो पर काबू पा लिया है।
*** पोलियो एक विषाणु जनित रोग है जो एंटरोवायरल से फैलता है। यह विष्णु तांत्रिक संक्रामक बीमारी के रूप में परिभाषित होता है जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को अधिक प्रभावित करता है। जो अपंग बना देता है। यह घातक बीमारी जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है,यह दूषित भोजन और पानी के कारण फैलती है। तत्पश्चात रोगाणु तंत्रिका तंत्र तक चला जाता है। इस बीमारी में कुछ लोगों में बुखार, थकान, मचली, दर्द, नाक बंद होना, गले में खराश, खांसी, गर्दन पीठ में अकडऩ, हाथ पैरों में दर्द, कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। यह रोगाणु मांसपेशियों को पूर्णत नष्ट कर देता है उसके कारण इंसान अपंग बन जाता है। केवल टीकाकरण से इसका इलाज संभव है। पालियो का टीका बच्चों के शरीर में पोलियो वायरस से लडऩे की क्षमता बढ़ाता है। इसकी आईपीवी और ओपीवी दोनों प्रकार की दवाई दी जाती है जो मुख के जरिए पिलाई जाती है। आजकल पोलियो की खुराक को टीकों में ही शामिल कर लिया गया है। डीपीटी का टीका लगाया जाता है जो इस रोग से बचाने में मददगार साबित होता है। मौखिक रूप से दी जाने वाली दवा की खुराक 6 सप्ताह, 10 सप्ताह, 14 सप्ताह और बूस्टर 26, 16 से 24 महीने में दी जाती है।
पोलियो को समाप्त करने के लिए पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम चलाए गए जिनके कारण पोलियो पर काबू पा लिया है। अभी समय-समय पर सख्त उपाय और टीकाकरण की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस रोग से बचने का स्वच्छता एक तरीका है, जितना स्वच्छता पर ध्यान दिया जाए उतना ही रोग कम फैलेगा।
-- डा. अंकित उप-नागरिक अस्पताल कनीना
सरकार बीसीजी, रोटा, आईपीवी आदि की तक लगती है या खुराक पिलाई जाती है। रोटा की 5 बूंद पिलाई जाती है जो टेटनस रोग पर काबू पाती है। वही पीसीबी पांच बीमारियों से बचाने वाला एक टीका है वही आईपीवी जिसे एंटी पोलियो वैक्सीन कहा जाता है। इसी प्रकार सरकार अनेक टीके लगाती है। जब बच्चा 5, 10 और 16 सप्ताह का होता है बीसीजी का टीका, पोलियो की खुराक पिलाई जाती है। डेढ़, ढाई और साढ़े तीन माह बाद बूस्टर डोज दी जाती है। बचपन में ही टीके लगाकर इस रोग पर काबू पाया जा सकता है।
कनीना उप नागरिक अस्पताल में पोलियो का कोई मरीज वर्तमान में नहीं आया है। 30 सालों से अधिक पहले कोई पोलियो का मरीज आते थे किंतु आप सरकार ने विभिन्न टीके एवं खुराक पोलियो से बचने की पिलाई जाती हैं।
-- शीशराम हेल्थ इंस्पेक्टर
 फोटो कैप्शन: शीशराम एचआई एवं डाक्टर अंकित।


मधुमक्खी पालकों के हित में सरकार का बड़ा फैसला, शहद अब भावांतर भरपाई योजना में शामिल
-मधुमक्खी पालकों को 120 रुपए प्रति किलो का भाव सुनिश्चित
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कनीना की आवाज।
 हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में चल रही सरकार ने मधुमक्खी पालकों को शहद का उचित भाव न मिलने से होने वाले नुकसान से बचाने और होने वाले घाटे की संभावनाओं का जोखिम खत्म करने के लिए शहद को भावांतर भरपाई योजना में शामिल कर दिया गया है।
भावांतार भरपाई योजना में कच्चे शहद का 120 रुपए प्रति किलो का भाव रखा है। इससे किसानों को पूरा भाव मिलेगा और उनकी आय बढ़ेगी।मधुमक्खी पालकों को बागवानी विभाग के मधु क्रांति पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रेम यादव ने बताया कि जिला में किसानों द्वारा पारंपरिक खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन का कार्य भी किया जा रहा है, परन्तु मार्केट में कई बार शहद के रेट कम मिलने से मधुमक्खी पालकों का रूझान कम हो रहा था। महेन्द्रगढ़ सहित प्रदेशभर के मधुमक्खी पालक शहद को भी बागवानी विभाग की भावांतर भरपाई योजना में शामिल करने की मांग कर रहे थे। मधुमक्खी पालक अब हनी ट्रेड सेंटर, आईबीडीसी, रामनगर जिला कुरूक्षेत्र में अपना शहद बेच सकेंगे।
उन्होंने बताया कि जिला महेन्द्रगढ के मधुमक्खी पालक दूसरे प्रदेशों जैसे राजस्थान, हिमाचल, यूपी व जम्मू एंड कश्मीर में अपने मधुमक्खियों के बक्सों को लेकर जाते हैं और जाहां पर फसलों व पेड़-पौधों पर फूल लगे होते हैं बक्सों को वहां पर रखा जाता है। राजस्थान में बाजरा, सरसों व जांडी के फूलों से, हिमाचल में सेब व कश्मीर में अकेषिया पेड़ के फूलों से मधुमक्खियां शहद बनाती है। इन बक्सों को सिर्फ रात को ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर जाया जाता है। मधुक्खियां दिन में तो बॉक्स से बाहर आती-जाती रहती है और रात को बॉक्स में ही रहती है।
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि शहद को भावांतर भरपाई योजना में शामिल करने से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा मिलेगा। बागवानी विभाग द्वारा मधुमक्खी पालन वाले बक्सों पर 85 प्रतिशत व अन्य यंत्रो पर 75 प्रतिशत अनुदान देने का प्रावधान है।
भावांतर भरपाई योजना के लिए पात्रता-
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि केवल मधुक्रांति पोर्टल पर पंजीकृत मधुमक्खी पालक व बागवानी अधिकारी द्वारा सत्यापित। परिवार पहचान पत्र। जो मधुमक्खी पालक अपना शहद हनी ट्रेड सेन्टर पलेटर्फोम के माध्यम से निर्धारित अवधि में बिक्री करेगा। बिक्री मुल्य व मात्रा ट्रेड सेन्टर के माध्यम से बिक्री बिल/लेन-देन प्रमाण के आधार पर प्रोत्साहन की प्रक्रिया की जाएगी। कम से कम 500 किलो शहद फूड ग्रेड बाल्टी में ही बिक्री के लिए हनी ट्रेड सेन्टर द्वारा लिया जाएगा।
जो मधुमक्खी पालक पहले से ही मधुक्रांती पोर्टल पर पंजीकृत है वो अपना आवेदन सत्यापन 15 नवम्बर 2025 तक कर सकते हैं, इसके उपरान्त सत्यापन अवधि 31 दिसम्बर 2025 तक रहेगी।
जो मधुमक्खी पालक मधुक्रांती पोर्टल पर पंजीकृत नहीं है वह अपना पंजिकरण 30 अक्टूबर 2025 तक करवाना सुनिश्चित करें व अपना आवेदन सत्यापन 15 नवम्बर 2025 तक कर सकते हैं, इसके उपरान्त सत्यापन अवधि 31 दिसम्बर 2025 तक रहेगी।
अगली वर्षों के लिए 1 दिसम्बर से लेकर 31 मई तक एचटीसी पोर्टल पर पंजीकरण करवाएं व जनवरी से जून तक सत्यापन की अवधि रहेगी व मधुमक्खी पालक अपने परिवार पहचान पत्र के अंतिम चार अक्षर सिरियल नम्बर के साथ मधुमक्खी के बक्से पर अपने खर्चे पर उत्कीर्ण करवाना सुनिश्चित करें ताकि सत्यापन के दौरान हर बक्से की पहचान की जा सके।



पुलिस ने बलिदानी सूबे सिंह







की परिवार से शिष्टाचार मुलाकात की
-पुलिस मना रही है बलिदान दिवस और झंडा दिवस
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कनीना की आवाज।
हरियाणा पुलिस द्वारा 21 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक पुलिस बलिदान दिवस और झंडा दिवस मनाया जा रहा है। थाना सदर कनीना के गांव सुंदरह में पुलिस स्मृति दिवस और झंडा दिवस पर कनीना पुलिस ने बलिदानी सूबे सिंह की परिवार से शिष्टाचार मुलाकात की और बलिदानी सूबे सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए।
इस दौरान शहीद सूबे सिंह के बलिदान और पुलिस विभाग में उनके द्वारा दिए गए योगदान के बारे में भी विस्तार से बताया गया, ताकि युवा पीढ़ी उनकी शिक्षाओं को ग्रहण कर अच्छे रास्तों पर चलकर अपना मुकाम हासिल कर सके। उन्होंने युवाओं को संबोधित कर जागरूक करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा करते हुए बलिदान होना बहुत गर्व की बात है। उन्होंने लोगों को बताया कि चीन से हुए युद्ध में सीआरपीएफ जवानों ने चीनी सेना के आक्रमण को विफल कर दिया था। इसमें सीआरपीएफ के 10 जवानों ने बलिदान दिया था। उनके बलिदान को पूरे देश में पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
फोटो कैप्शन 09: बलिदानी सूबे सिंह के परिवार से पुलिस मिलते हुए।





Wednesday, October 22, 2025


 



पुलिस ने बलिदानी सूबे सिंह की परिवार से शिष्टाचार मुलाकात की
-पुलिस मना रही है बलिदान दिवस और झंडा दिवस
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कनीना की आवाज।
हरियाणा पुलिस द्वारा 21 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक पुलिस बलिदान दिवस और झंडा दिवस मनाया जा रहा है। थाना सदर कनीना के गांव सुंदरह में पुलिस स्मृति दिवस और झंडा दिवस पर कनीना पुलिस ने बलिदानी सूबे सिंह की परिवार से शिष्टाचार मुलाकात की और बलिदानी सूबे सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए।
इस दौरान शहीद सूबे सिंह के बलिदान और पुलिस विभाग में उनके द्वारा दिए गए योगदान के बारे में भी विस्तार से बताया गया, ताकि युवा पीढ़ी उनकी शिक्षाओं को ग्रहण कर अच्छे रास्तों पर चलकर अपना मुकाम हासिल कर सके। उन्होंने युवाओं को संबोधित कर जागरूक करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा करते हुए बलिदान होना बहुत गर्व की बात है। उन्होंने लोगों को बताया कि चीन से हुए युद्ध में सीआरपीएफ जवानों ने चीनी सेना के आक्रमण को विफल कर दिया था। इसमें सीआरपीएफ के 10 जवानों ने बलिदान दिया था। उनके बलिदान को पूरे देश में पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
फोटो कैप्शन 09: बलिदानी सूबे सिंह के परिवार से पुलिस मिलते हुए।




खरीद पहुंची 172461 क्विंटल ,सरकारीतौर पर खरीद शून्य
-अब तक 5605 गेट पास काटे गये
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कनीना की आवाज।
 कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 172461 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा कम से कम 1900 रुपये और अधिकतम 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। कुल आवक 172461 क्विंटल हो चुकी है। किसान बाजरे की पैदावार लेकर अनाज मंडी पहुंचे।
 विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 5605 टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।



भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है भैया दूज
-23 अक्टूबर को मनाया जाएगा
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कनीना की आवाज।
भाइयों के प्रति बहनों के प्रेम और विश्वास का पर्व भाई दूज कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। भाई दूज के दिन बहने भाई को नारियल देकर टीका करती है, टीका करने के बाद बहने भाई आरती करती करती है, बदले में भाई अपने बहन को गिफ्ट देती है। ये विचार कनीना पंडित दिनेश कुमार ने व्यक्त किये।
 वर्ष में दो बार भाई बहन के अटूट रिश्ते को दर्शाने वाले पर्व भैया दूज का आगाज होता है। होली एवं दीपावली के पर्व के बाद यह पर्व आता है। महिलाएं अपने भाई के आने का बेसब्री से इंतजार करती हैं और व्रत रखकर उनके आने पर खाना खाती है।
उन्होंने सुनाई पूरी कहानी-
पंडित ने पूरी कथा सुनाते हुये बताया कि भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया।अयमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया। यमुना ने कहा कि भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करें, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की। इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।
  महिलाएं अपने भाई के आने का बेसब्री से इंतजार करती हैं और व्रत रखकर उनके आने पर खाना खाती हैं।




बाबा भैया सेवा दल, ककराला
द्वारा मनाया गया सम्मान समारोह
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव ककराला की समाजसेवी संस्था बाबा भैया सेवा दल द्वारा सेवानिवृत्त सम्मान समारोह का आयोजन सामाजिक एकता के साथ बाबा भैया लाइब्रेरी में आयोजित किया गया। इस अवसर पर गांव के सेवानिवृत्त ग्रामीणों को सम्मानित किया गया।
भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस से सेवानिवृत्त पवन कुमार को और वायुसेना हवलदार रैंक से सेवानिवृत्त अभिमन्यु शर्मा को स्मृति चिह्न भेंट करके सम्मानित किया गया।
साथ ही संस्था से जुड़े लाइब्रेरी के विशेष सहयोगियों को भी सम्मानित किया गया, जिनमें आरएस यादव, डाक्टर रमेश एडवोकेट को सम्मानित किया गया।
अध्यक्ष रामनिवास मास्टर ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान संस्था में हाल ही में जुड़े नए सदस्यों का स्वागत एवं परिचय भी कराया गया। संस्था पदाधिकारियों ने उन्हें संस्था की गतिविधियों और उद्देश्यों से अवगत कराते हुए समाजसेवा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
बैठक में गांव के शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और युवाओं की सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई। सभी सदस्यों ने एकमत से निर्णय लिया कि आने वाले महीनों में संस्था इन क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाएगी, ताकि गांव में शिक्षा का स्तर और हरियाली दोनों में निरंतर वृद्धि हो।
सभी उपस्थित ग्रामीणों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे अपने गांव को अधिक शिक्षित, स्वच्छ और हराभरा बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएँगे। इस मौके पर वीपी राजपाल सिंह यादव, कार्यालय प्रबंधक दिनेश सोनी, पर्यावरण र्कार्डिनेटर ओमप्रकाश, महेश कुमार, मास्टर मदन पाल, मास्टर गुलशन, बाबी, रामकिशन, जगत सिंह, संदीप पंच, रामचंद्र यादव, गौरव शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 03: सम्मान समारोह में सम्मानित करते हुए सेवा दल पदाधिकारी।




विभिन्न मंदिरों में मनाया गोवर्धन पर्व
-बांटा अन्नकुट
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में शनिवार को अन्नकुट का पर्व मनाया गया। इसे गोवर्धन नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मंदिरों में खिचड़ी व कढ़ी बांटी गई जिसे लोगों ने चाव से खाई। कनीना क्षेत्र में दीपावली के एक दिन बाद गोवर्धन पर्व मनाया गया वरना अक्सर दीपावली से अगले दिन यह पर्व मनाया जाता है।
 कनीना ही नहीं अपितु समीपी गांवों में भी यह पर्व मनाया गया। कनीना के बड़ा मंदिर में दिनभर अन्नकूट बांटा गया वहीं खाटू श्याम मंदिर, लेखराम बाग कनीना, कनीना मंडी के विश्वकर्मा मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर में अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया गया। गोवर्धन पर्व से जुड़ी है श्रीकृष्ण और इन्द्र देव के बीच का प्रसंग।
लालदास महाराज ने अपने भक्तों को जानकारी देते हुए बताया कि एक बार इंद्र देव भगवान् श्रीकृष्ण से कुपित हो गए और मूसलाधार वर्षा करने लगे। गोकुल में इतनी भारी वर्षा देखकर ग्रामीण भयभीत हो गए और चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई। जीव जल में डूबकर मरने लगे तो ग्रामीण दौड़कर भगवान् श्रीकृष्ण के पास आए। भगवान् श्रीकृष्ण ने उस वक्त गोवर्धन पर्वत ही अपनी अंगुली पर उठा लिया और गोकुलवासियों को उसके नीचे आने का आदेश दिया। इस प्रकार इंद्र का गर्व चूर-चूर हो गया और खुश होकर ग्रामीणों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इसी दिन आजकल गाय आदि की पूजा करने का विधान भी है। विश्वकर्मा जयंती भी मनाई जा रही है। इस दिन विभिन्न मंदिरों में अन्नकूट बनाकर वितरित किया गया। गौशालाओं में गायों को खिलाया मीठा भोजन।
उधर कनीना ठाकुर जी के मंदिर में अन्नकूट का ठाकुर का भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया गया। इलाके में पैदा होने वाले बच्चों के मां सहित अनेक महिलाओं ने ठाकुर के मंदिर में आकर प्रसाद ग्रहण करती है और ठाकुर  से अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए प्रार्थना करती हैं ।  कनीना में सबसे पहला ग्राम देवता ठाकुर ही है जिनके पुजारी को स्वामी कहा जाता है मंदिर में स्त्री पुरुष ने लाइन में लगकर प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर कंवर सेन वशिष्ठ, मदन लाल शर्मा, नवीन शर्मा, प्रवेश शर्मा, पूरन शर्मा,सुनील शर्मा, मनीष शर्मा, जितेंद्र शर्मा, केशव शर्मा, हर्षित शर्मा,रतन शर्मा, सुरेश शर्मा,नवीन शर्मा, राहुल शर्मा, योगेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।
  कनीना के खाटूश्याम मंदिर में अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया। महेंद्र सिंह, दुलीचंद साहब ने बताया कि वर्षों से यहां अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया जाता है। मंदिर कमेटी के सभी सदस्य सेवा करते हैं।
  कनीना के लेखराम बाग में अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया। मनोज गुप्ता ने बताया कि विगत आठ वर्षों से यहां यह परंपरा चली आ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी गोवर्धन पर्व मनाया गया।
विश्वकर्मा जयंती व गोवर्धन पूजा के उपलक्ष में  कनीना मंडी स्थित विश्वकर्मा मंदिर में यज्ञ का आयोजन कर अन्नकुट का प्रसाद बना वितरण किया गया। इस माौके पर मुकेश नंबरदार कनीना मोहर सिंह आर्य प्रधान आर्य समाज कनीना,  ओमप्रकाश आर्य, मनफूल सिंह आर्य  व सरला आर्य राजेंद्र प्रसाद आर्य, दीपक चौधरी पार्षद, योगेश पार्षद, देशराज राजेश देवी पार्षद, अंजू देवी सतीश जांगिड़, मदनलाल प्रधान, शांतिलाल नंबरदार, महेंद्र जांगड़ा, रवि दत्त, सचिन, आशीष गोयल, भागीरथ, वेद प्रकाश, हलवाई शैलेश ,महेश, सोमदत, चेतन कमल आदि उपस्थित रहे।
  उधर राधा कृष्ण मंदिर अनाज मंडी कनीना में अन्नकुट का पर्व धूम धाम मनाया गया। श्री श्याम मित्र मंडल के प्रधान अनिल गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया कि हर वर्ष राधा कृष्ण मंदिर अनाज मंडी में यह पर्व आयोजित किया गया।  । इस अवसर पर व्यापार मंडल के प्रधान निरंजन मित्तल, , दादा ठाकुर मंदिर कमेटी के प्रधान विनोद मित्तल, ,व्यापार मण्डल के उपप्रधान रवींद्र बंसल, महेंद्र मित्तल , प्रवीण मित्तल , मुकेश कपूर , नरेश बत्रा , मोहित जेलदार , अमित छोटू व गणमान्यजन उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04: कनीना मंडी राधाकृष्ण मंदिर में प्रसाद वितरण
फोटो कैप्शन 05: विश्वकर्मा मंदिर में हवन करते हुए।
              06:लेखराम बाग कनीना में प्रसाद वितरण
             07:खाटू श्याम मंदिर में प्रसाद वितरण
              08:ठाकुर मंदिर कनीना में प्रसाद वितरण करते हुए।








जनस्वास्थ्य की लापरवाही
-सीवर जल लीक होकर सड़क मार्ग को पहुंचा रहा है क्षति
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कनीना की आवाज।
जहां नगर पालिका कनीना ने करोड़ों रुपये खर्च कर रेवाड़ी रोड से नहर के साथ लगते हुए अटेली रोड तक सड़क बनाने का कार्य पूर्ण किया था जिसको लगभग 6 महीने भी पूरे नहीं हुए हैं लेकिन सड़क पर जगह जगह गंदा पानी रुकता है। लोगों का कहना है सड़क तो बनी लेकिन उसके नीचे से जा रही सीवर  लाइन तथा वाटर सप्लाई की लाइन लीक होने के कारण इतना पानी निकलता है  मानो बाढ़ आ गई हो। जिसके कारण सड़क टूट कर बिखर गई है लेकिन इस समस्या की तरफ न तो नगर पालिका ही ध्यान दे रही है और ना ही जन स्वास्थ्य विभाग।
  लोगों का कहना है अगर जन स्वास्थ्य विभाग अपने कार्य को समय पर निपटा दें तो आज करोड़ों रुपये से बनी इस सड़क का सत्यानाश नहीं होता लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हंै।  लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से तथा जिला उपायुक्त नारनौल से मांग की है कि जन स्वास्थ्य विभाग से सड़क में लीक हो रही वाटर सप्लाई लाइन तथा सीवर लाइन को तुरंत ठीक कराया जाए। इस संबंध में जेई जनस्वास्थ्य विभाग तेजबहादुर से से बात करनी चाही किंतु उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
फोटो कैप्शन 02: सड़क पर लीक हुए वाटर सप्लाई का पानी


गौशाला के उद्धारक के रू













प में उभर रहे हैं भगत सिंह प्रधान
--गाय गोद लेने की परिपाटी के सूत्रपात हैं
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कनीना की आवाज।
पैैसे कमाने वाले तो बहुत हैं और कितने ही लोग ऐसे हैं जिनके पास अनाप शनाप पैसे हैं किंतु गायों के लिए सेवा करने वाले कम हैं। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में भगत सिंह एक देवरूप में नर आने लगे हैं। उनकी चलाई हुई गौशाला की परिपाटी गाये गोद लेने की सिर चढ़कर बोल रही है। तीन माह में 20 लाख रुपये की आय करवाना अपने आप में रिकार्ड है। गौशाला के मूल चूल परिवर्तन में वो दिनरात लगे हुए हैं। उनसे बात हुई तो उनका कहना था कि पैसे तो पूरी उम्र कमाते हैं किंतु गायों की सेवा करने का मौका कम मिलता है। यही कारण है कि अपना काम धाम छोड़कर गायों की सेवा में लीन हैं।
वहीं कस्बे कनीना में चल रही गौशाला में गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव व उनकी टीम तथा क्षेत्र वासियों की कड़ी मेहनत के कारण श्रीकृष्ण गौशाला कनीना दिन दुगनी रात चौगुनी उन्नति कर रही है। जिसके कारण गौशाला में हजारों गायों की सेवा उनके द्वारा की जा रही है। इसी कड़ी में गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव अपने सारे   निजी कार्य को छोड़कर गौ सेवा में लगे हुए हैं तथा क्षेत्र के लोगों वह गौशाला में आने वाले को भक्तों को गांव की महिमा के बारे में बताते हैं और उनको गौ सेवा करने की प्रेरणा भी देते हैं। जिसके कारण
सैकड़ों गाये गोद लेने के लिए लोग घरों से चलकर आये हैं। न केवल कनीना अपितु आस पास के गांवों के लोग भी गौशाला में आकर गायों को गोद ले रहे हैं और दान दे रहे हैं।
इस अवसर पर गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव का कहना है अपने लिए तो पशु और पक्षी भी जिंदा रहता है। लेकिन हमें भगवान ने यह मानव का शरीर दिया है इसे हम सदुपयोग कर गौ सेवा करे तो सभी पाप दोष दूर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कस्बावासियों के साथ-साथ क्षेत्र के सभी लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है जिसके कारण गौशाला जल्द ही क्षेत्र की नंबर वन गौशाला होगी।
फोटो कैप्शन 01: श्रीकृष्ण गौशाला में सेवा में तल्लीन भगत सिंह प्रधान

Tuesday, October 21, 2025


 


 नगर पालिका द्वारा बनाई गई सड़क पर भरा है पानी
-बने हुए छह माह ही बीते हैं, हो चली है जर्जर
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कनीना की आवाज।
जहां नगर पालिका कनीना ने करोड़ों रुपये खर्च कर रेवाड़ी रोड से नहर के साथ लगते हुए अटेली रोड तक सड़क बनाने का कार्य पूर्ण किया था जिसको लगभग 6 महीने भी पूरे नहीं हुए हैं लेकिन सड़क पर जगह जगह गंदा पानी रुकता है। लोगों का कहना है सड़क तो बनी लेकिन उसके नीचे से जा रही सीवर  लाइन तथा वाटर सप्लाई की लाइन लीक होने के कारण इतना पानी निकलता है  मानो बाढ़ आ गई हो। जिसके कारण सड़क टूट कर बिखर गई है लेकिन इस समस्या की तरफ न तो नगर पालिका ही ध्यान दे रही है और ना ही जन स्वास्थ्य विभाग।
  लोगों का कहना है अगर जन स्वास्थ्य विभाग अपने कार्य को समय पर निपटा दें तो आज करोड़ों रुपये से बनी इस सड़क का सत्यानाश नहीं होता लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हंै।  लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से तथा जिला उपायुक्त नारनौल से मांग की है कि जन स्वास्थ्य विभाग से सड़क में लीक हो रही वाटर सप्लाई लाइन तथा सीवर लाइन को तुरंत ठीक कराया जाए।
फोटो कैप्शन 05: सड़क पर लीक हुए वाटर सप्लाई का पानी


गौ-सेवा ही गोविंद सेवा है-भगत सिंह
-कनीना गौशाला में भगत सिंह दिखाई पड़ रहे हैं एक देव रूप में
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कनीना की आवाज।
पैैसे कमाने वाले तो बहुत हैं और कितने ही लोग ऐसे हैं जिनके पास अनाप शनाप पैसे हैं किंतु गायों के लिए सेवा करने वाले कम हैं। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में भगत सिंह एक देवरूप में नर आने लगे हैं। उनकी चलाई हुई गौशाला की परिपाटी गाये गोद लेने की सिर चढ़कर बोल रही है। तीन माह में 20 लाख रुपये की आय करवाना अपने आप में रिकार्ड है। गौशाला के मूल चूल परिवर्तन में वो दिनरात लगे हुए हैं। उनसे बात हुई तो उनका कहना था कि पैसे तो पूरी उम्र कमाते हैं किंतु गायों की सेवा करने का मौका कम मिलता है। यही कारण है कि अपना काम धाम छोड़कर गायों की सेवा में लीन हैं।
वहीं कस्बे कनीना में चल रही गौशाला में गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव व उनकी टीम तथा क्षेत्र वासियों की कड़ी मेहनत के कारण श्रीकृष्ण गौशाला कनीना दिन दुगनी रात चौगुनी उन्नति कर रही है। जिसके कारण गौशाला में हजारों गायों की सेवा उनके द्वारा की जा रही है। इसी कड़ी में गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव अपने सारे   निजी कार्य को छोड़कर गौ सेवा में लगे हुए हैं तथा क्षेत्र के लोगों वह गौशाला में आने वाले को भक्तों को गांव की महिमा के बारे में बताते हैं और उनको गौ सेवा करने की प्रेरणा भी देते हैं। जिसके कारण
सैकड़ों गाये गोद लेने के लिए लोग घरों से चलकर आये हैं। न केवल कनीना अपितु आस पास के गांवों के लोग भी गौशाला में आकर गायों को गोद ले रहे हैं और दान दे रहे हैं।
इस अवसर पर गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव का कहना है अपने लिए तो पशु और पक्षी भी जिंदा रहता है। लेकिन हमें भगवान ने यह मानव का शरीर दिया है इसे हम सदुपयोग कर गौ सेवा करे तो सभी पाप दोष दूर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कस्बावासियों के साथ-साथ क्षेत्र के सभी लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है जिसके कारण गौशाला जल्द ही क्षेत्र की नंबर वन गौशाला होगी।
फोटो कैप्शन 06: श्रीकृष्ण गौशाला में सेवा में तल्लीन भगत सिंह प्रधान




प्रदूषण बढ़ा, बादल छाने जैसा आभास
-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये-डाक्टर
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में हर वर्ष दीपावली के बाद प्रदूषण इतना बढ़ जाता है की सांस लेना भी दूभर हो जाता है। यहां तक की सूरज के दर्शन भी नहीं हो पाते। मंगलवार को कनीना एवं आस पास दिन भर कभी बादल छाने जैसा आभास होता रहा लेकिन यह धूल और प्रदूषण का प्रभाव है। दीपावली के दिन काफी पटाखे चलाए गए। यद्यपि पटाखे बेचने पर प्रतिबंध था परंतु चोरी चुपके पटाखे चलाने का सिलसिला जारी रहा,परिणाम यह निकला कि अब सांस लेना भी कठिन हो गया है।
कनीना क्षेत्र में सुबह अधिक प्रदूषण था जो धीरे-धीरे कम होता चला गया। सूरज के सुबह से दर्शन नहीं हुए, धुंधला प्रकाश जरूर नजर आया। प्रदूषण के बारे में डा.जितेंद्र मोरवाल से चर्चा की गई उन्होंने बताया कि प्रदूषण से
श्वसन संबंधी बीमारियां जैसे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस, हृदय संबंधी समस्याएं जैसे हार्ट अटैक और स्ट्रोक, आंखों में जलन और लंबे समय में फेफड़ों के कैंसर का खतरा शामिल है। पटाखों से निकलने वाले महीन कण और जहरीली गैसें जैसे सल्फर डाइआक्साइड और कार्बन मोनोआक्साइड फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर नुकसान पहुंचाती हैं।
डाक्टर ने बताया कि पटाखों के धुएं से फेफड़ों में जलन, सूजन और आक्सीजऩ का आदान-प्रदान कम हो जाता है। यह अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य पुरानी श्वसन संबंधी बीमारियों को बढ़ा सकता है। वायु प्रदूषण से धमनियां कड़ी हो सकती हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। हवा में मौजूद जहरीले कण आंखों में जलन और अन्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। प्रदूषित हवा में मौजूद कार्सिनोजेनिक तत्व फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।
बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे वे बीमारियों से जल्दी घिर जाते हैं।
डा. मोरवाल ने प्रदूषण से निजात पाने के लिए बताया कि बाहर निकलते समय उच्च गुणवत्ता वाले मास्क पहनें,घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें,पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर और पौष्टिक आहार लेकर शरीर को हाइड्रेटेड रखें। अनुलोम-विलोम जैसे श्वास व्यायाम करें। बच्चों और बुजुर्गों की डाइट में विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां शामिल करें।
    वायु गुणवत्ता सूचकांक पर नजर रखें और जब प्रदूषण अधिक हो तो बाहर की गतिविधियां सीमित करें। नाक और गले में जमने वाले पदार्थ की सफाई करते रहे।
फोटो कैप्शन 04: प्रदूषण भरा वातावरण
         साथ में डा. जितेंद्र मोरवाल



स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की पहल पर नागरिक अस्पताल नारनौल को मिली अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन
--हजारों लोगों को होगा लाभ
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कनीना की आवाज।
 हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में महेंद्रगढ़ जिले के निवासियों को इस दिवाली पर स्वास्थ्य का एक बेहतरीन तोहफा मिला है।
राज्य की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के प्रयासों से नागरिक अस्पताल, नारनौल को लगभग एक करोड़ रुपए की अत्याधुनिक कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराई गई है।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि इस आधुनिक मशीन के नारनौल नागरिक अस्पताल में स्थापित होने से जिले के लोगों को अब बेहतर और सटीक डायग्नोस्टिक सुविधाएं मिलेंगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी के मार्गदर्शन में हम हर जिले और हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह मशीन गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों और अन्य गंभीर बीमारियों के निदान में गेम चेंजर साबित होगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के नागरिकों को इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर रुख न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि सिविल अस्पतालों में आधुनिक उपकरण और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हों।
यह मशीन शीघ्र ही नागरिक अस्पताल नारनौल में कार्य करना शुरू कर देगी जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों को तत्काल लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि आगामी समय में भी प्रदेश के अस्पतालों को आधुनिक उपकरणों और संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि हर नागरिक को सही, सुरक्षित और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उनके निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर ही उपलब्ध हो सकें।


14 गाये ली गोद और दिया दान
--लोगों का रुझान श्रीकृष्ण गौशाला की ओर
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कनीना की आवाज।
 कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में रविवार दीपावली के दिन चार गाये गोद ली और दान दक्षिणा दी।
 भगत सिंह गौशाला प्रधान ने बताया कि बसंत लाल शर्मा चांगरोड वाले ने एक गाय गोद ली और 5600 रुपये की राशि दान दी। जबकि धोकलमल पार्क सत्संग मंडल की सोमवती देवी, राजेश देवी, सुमन, कमलेश, सविता देवी आदि ने दो गाये गोद ली और 11000 रुपये दान दिया। उधर एडवोकेट देवेंद्र ने अपनी पुत्री के जन्मदिन पर एक गाय गोद ली और 5100 रुपये दान दिया। इस समय बच्ची की दादी सविता देवी भी मौजूद रही।
 गौशाला के प्रधान भगत सिंह ने कहा कि गायों को गोद लेना एक शुभ कार्य है। हो सके उतना गायों को गोद लेना चाहिए ताकि गायों की कदर बढ़े।
  उधर कृष्ण गौशाला कनीना में सतीश कुमार कोकाराम व आशा रानी कनीना मंडी ने अपने पौत्र मेघांश कुमार के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 11000 रुपये नगद दान देकर दो गायें गोद ली।   इस मौके पर अशोक ठेकेदार, दिलावर सिंह, पूर्व शिक्षक राम प्रताप, कृष्ण गुरु जी, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, सूबेदार दुलीचंद ,सूबेदार अभय सिंह, मास्टर रतन सिंह, मास्टर विजेंद्र सिंह यादव, मदन लाल गेरा, तोताराम ठेकेदार, नित्यानंद शर्मा, नरेंद्र ठेकेदार, राजेश वर्मा, नवीन यादव, एडवोकेट दीपक प्रधान, नरेंद्र पार्षद, मनीष पार्षद, योगेश पार्षद, अतर सिंह थानेदार, रामपाल यादव व मानसिंह पूर्व पार्षद आदि मौजूद रहे।
  उधर दलीप सिंह कनीना ने एक, जितेंद्र कनीना एक, सुदेश कनीना एक,कविंद्र सिंह कनीना एक, आशा कोटिया ने एक, दलीप पुत्र सिंहराम गुढ़ा ने एक,श्रीभगवान कनीना ने एक, प्रवीण भडफ़ ने एक गाय गोद ली है।
  फोटो कैप्शन 02: गायों को गोद लेते हुए


गोवर्धन पूजा 22 को-ऋषिराज
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कनीना की आवाज।
ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषिराज शिति कंठा का कहना है कि,
गोवर्धन पूजा  कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को होती है। इस साल  प्रतिपदा
तिथि 22 अक्टूबर को है। यह रात्रि 8:15 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
 सूर्योदय समय प्रतिपदा तिथि 22 अक्टूबर को पड़ रही है। उदय तिथि के अनुसार गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को  है।
उन्होंने बताया कि गोवर्धन पूजा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के घंमड को चूर-चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली में उठा लिया था। इसलिए आज भी लोग कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर इस घटना के उपलक्ष्य में गोवर्धन पूजा की जाती है।
गोवर्धन पूजा के लिए घर के मुख्य द्वार पर या आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत और ग्वाल-बालों की आकृति बनाएं। पर्वत के बीच में भगवान कृष्ण की मूर्ति स्थापित करें।
एक थाली में रोली, अक्षत, बताशे, खीर, दूध, जल, फूल, फल, मिठाई और पान रखें। दीपक जलाएं और पूजा सामग्री अपने पास रखें।  गोवर्धन पर्वत की नाभि में एक छोटा दीपक रखें और उसमें दूध, दही, शहद, शक्कर और गंगाजल मिलाकर पंचामृत तैयार करें। इस पंचामृत से गोवर्धन और कृष्ण की पूजा करें। इसके बाद, फल और मिठाई का भोग लगाएं। गोवर्धन पर्वत की 7 बार परिक्रमा करें, परिक्रमा के दौरान लोटे से गंगाजल और जौ के बीज गिराते हुए चलें। पूजा के बाद, नाभि वाले दीपक का प्रसाद और अन्नकूट सभी में बांटें।
फोटो कैप्शन: ऋषिराज


मोहर सिंह आर्य का पौत्र सचिन आर्य बना सब इंस्पेक्टर
-उनको मिली है यह तीसरी नौकरी
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कनीना की आवाज।
आर्य समाज कनीना के प्रधान मोहर सिंह आर्य के पौत्र सचिन आर्य का दिल्ली पुलिस मे सब इंस्पेक्टर के पद पर चयन हुआ है। सचिन को बहुत बहुत बधाइयां मिल रही हैं।
  सचिन का जन्म 25 नवंबर 2001 में जन्में सचिन आर्य को यह तीसरी नौकरी मिली है। पहले डी-ग्रुप में 9 माह सेवा दी फिर पुलिस में हैड कांस्टेबल की नौकरी 9 माह की और अब उनका चयन दिल्ली में एसआई पर हो गया है। उसने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता पिता एवं दादा के अतिरिक्त गुरुजनों को दिया है। वे 12वीं तक कनीना में पढ़े हैं फिर कालेज महेंद्रगढ़ गये थे।
  सचिन कि पिता प्रमोद लोढ़ा कनीना नपा में ट्रैक्टर चालक हैं वहीं मां रिंकी कनीना मंडी के स्कूल में कंप्यूटर शिक्षक है। उनके दादा राव मोहर सिंह आर्य समाज कनीना के प्रधान हैं।
फोटो कैप्शन : सचिन आर्य


गो संवर्धन हेतु लाए गए उन्नत नस्ल के दो सांड
-खूब किया गया पूजन
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कनीना की आवाज।
कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में गायों की उन्नत नस्लें तैयार करने के लिए और गो संवर्धन हेतु थारपर नस्ल का एक सांड तथा हरियाणा नस्ल का एक सांड लाये गये और उनका विधि विधान से पूजन कर गौशाला में छोड़ा। उनके नाम राम एवं श्याम रखे गये हैं।
विस्तृत जानकारी देते हुए श्रीकृष्ण गौशाला कनीना के प्रधान भगत सिंह ने बताया कि 25 सालों से गो संवर्धन पर काम कर रही संस्था तथा पूरे भारत में उन्नत नस्ल की गायें एवं सांड प्रदान करने वाली संस्था खांडवा से ये सांड लाये गये हैं। संचालक कृष्णस्वरूप महाराज से संपर्क कर सांड की मांग की तो उन्होंने सहर्ष देने का निर्णय किया। दोनों ही सांडों का विधि विधान से पूजन किया गया। ये नस्ले 18 से 22 लीटर तक दूध देती हैं।  
  भगत सिंह प्रधान ने बताया कि उनकी हार्दिक इच्छा है कि कनीना श्रीकृष्ण गौशाला ऊंचाइयों को छुए तथा उन्नत नस्ल की गायें तैयार हो ताकि लोग गौशाला से उन्नत नस्ल की गायों को अपने घर में रखने के लिए बाध्य हो जाए। उन्होंने कहा कि यह दिन अब दूर नहीं है और जल्द ही उनकी यह तमन्ना पूरी हो जाएगी। इस मौके पर अशोक ठेकेदार, दिलावर सिंह, पूर्व शिक्षक राम प्रताप, कृष्ण गुरु जी, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, सूबेदार दुलीचंद ,सूबेदार अभय सिंह, मास्टर रतन सिंह, मास्टर विजेंद्र सिंह यादव, मदन लाल गेरा, तोताराम ठेकेदार, नित्यानंद शर्मा, नरेंद्र ठेकेदार, राजेश वर्मा, नवीन यादव, एडवोकेट दीपक प्रधान, नरेंद्र पार्षद, मनीष पार्षद, योगेश पार्षद, अतर सिंह थानेदार, रामपाल यादव व मानसिंह पूर्व पार्षद आदि मौजूद रहे।
 फोटो कैप्शन 1: उन्नत नस्ल सांडों का पूजन करते हुए



अन्नकुट का पर्व 22 अक्टूबर को
--दीवाली के एक दिन बाद मनेगा पर्व
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में 22 अक्टूबर को अन्नकुट का पर्व मनाया जाएगा। इसे गोवर्धन नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मंदिरों में खिचड़ी व कढ़ी बांटी जाती हैं जिसे प्रत्येक जन चाव से खाता है। अक्सर यह पर्व दीपावली के दूसरे दिन आता है किंतु विगत वर्ष की भांति दीपावली के अगले दिन अमावस्या मनाई जा रही है और अन्नकुट 22 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
गोवर्धन पर्व से जुड़ी है श्रीकृष्ण और इन्द्र देव के बीच का प्रसंग। इस संबंध में लालदास महाराज ने बताया कि -
एक बार इंद्र देव भगवान् श्रीकृष्ण से कुपित हो गए और मूसलाधार वर्षा करने लगे। गोकुल में इतनी भारी वर्षा देखकर ग्रामीण भयभीत हो गए और चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई। जीव जल में डूबकर मरने लगे तो ग्रामीण दौड़कर भगवान् श्रीकृष्ण के पास आए। भगवान् श्रीकृष्ण ने उस वक्त गोवर्धन पर्वत ही अपनी अंगुली पर उठा लिया और गोकुलवासियों को उसके नीचे आने का आदेश दिया। इस प्रकार इंद्र का गर्व चूर-चूर हो गया और खुश होकर ग्रामीणों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इसी दिन आजकल गाय आदि की पूजा करने का विधान भी है। विश्वकर्मा जयंती भी मनाई जा रही है। इस दिन विभिन्न मंदिरों में अन्नकूट बनाकर वितरित किया जाएगा।
  अन्नकुट का पर्व मनाया जाता है। इसे गोवर्धन नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मंदिरों में खिचड़ी व कढ़ी बांटी जाती हैं जिसे प्रत्येक जन चाव से खाता है। गोवर्धन पर्व से जुड़ी है श्रीकृष्ण और इन्द्र देव के बीच का प्रसंग। एक बार इंद्र देव भगवान् श्रीकृष्ण से कुपित हो गए और मूसलाधार वर्षा करने लगे। गोकुल में इतनी भारी वर्षा देखकर ग्रामीण भयभीत हो गए और चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई। जीव जल में डूबकर मरने लगे तो ग्रामीण दौड़कर भगवान् श्रीकृष्ण के पास आए। भगवान् श्रीकृष्ण ने उस वक्त गोवर्धन पर्वत ही अपनी अंगुली पर उठा लिया और गोकुलवासियों को उसके नीचे आने का आदेश दिया। इस प्रकार इंद्र का गर्व चूर-चूर हो गया और खुश होकर ग्रामीणों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इसी दिन आजकल गायों की पूजा करने का विधान भी है। विश्वकर्मा जयंती भी मनाई जा रही है।
कनीना और आस पास गांवों में गोवर्धन पूजा का पर्व 22 अक्टूबर को मनाया जाएगा। कनीना में आाधा दर्जन विभिन्न स्थानों पर अन्नकुट का पर्व मनेगा। यह लंबे समय के बाद दूसरी बार देखने को मिला है  कि दीपावली के बाद अमावस्या और अब दीवाली के एक दिन बाद गोवर्धन पूजा होगी। कनीना के संदीप राठी ने बताया कि  खाटू श्याम मंदिर, बड़ा मंदिर, कनीना मंडी के विश्वकर्मा मंदिर एवं कई अन्य स्थानों पर पर्व मनाया जाएगा।





कनीना क्षेत्र में मनाई दीपावली
 पटाखे कम चले, प्रदूषण के दृष्टिगत जागरूक हुए लोग
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में तीन दिनों से लगातार दीपावली की धूम मची हुई थी और दीपावली दीयों की दीपावली धूमधाम से मनाई गई, पटाखे चलाए गए किंतु बहुत कम संख्या में। सरकार द्वारा बार-बार पटाखों पर प्रतिबंध लगाने लोगों की जागरूकता के चलते पटाखे बिक्री नहीं हो पाए। इसलिए पटाखे नहीं चल पाए और पटाखों के न चलने से प्रदूषण इस बार क्षेत्र में कम हो पाया है। विभिन्न जगह फुलझडिय़ां, छोटे पटाखे बच्चे चलते देखे गए और चेहरे पर खुशियां देखने को मिली। नए-नए कपड़ों में बच्चे, बूढ़े, पूजा अर्चना करते देखे गए। पूजा अर्चना के बाद प्रसाद वितरित किया गया तथा दीपों की कतार दूर तक दीवारों पर दिखाई दे रही थी। लंबे समय से दीपावली का इंतजार कर रहे थे आखिरकार वह दिन भी आ ही पहुंचा और दीपावली हंसी खुशी से मनाई गई।
  महंगी रही दीपावली--
दीपावली के दिन जमकर भीड़ विभिन्न सड़क मार्गों पर देखने को मिली वही दुकानदारों ने जमकर महंगे दामों पर वस्तुएं बेची जहां सेब 100 रुपये किलो वहीं केले 100 रुपये दर्जन बेचे गये। आनानास 100 रुपये प्रति पीस बेचा वहीं विभिन्न स्थानों पर भीड़ देखने को मिली। जहां ग्राहकों को जमकर घटियां वस्तुएं खाने को मिली। लौकी 40 रुपये किलो वहीं गोभी 80 रुपये किलो के हिसाब से बिकी। विभिन्न सड़क मार्गों पर भारी भीड़ देखने को मिला। घिसा पिटा माल बेचा गया वहीं पनीर भी 400 रुपये किलो तक बेचा गया। मिठाइयों की दुकानों पर भारी भीड़ देखने को मिली।
60 रुपये का मिला एक गन्ना-
कनीना बस स्टैंड पर दीपावली के दिन जमकर गन्ने बेचे गए। यद्यपि गन्ने कनीना क्षेत्र और आसपास नहीं उगाये जाते, अधिकांश गन्ने उत्तर प्रदेश में उगाए जाते हैं किंतु यहां के लोग उत्तर प्रदेश के लोगों के पदचिह्नों पर चलने लग गये हैं।  यहां अधिक संख्या में उत्तर प्रदेश के लोग किराये पर रहने के कारण गन्ने की खरीददारी करते हैं। उनको गन्ना खरीदता देख अब कितने ही घरों में गन्ने लेने शुरू कर दिये हैं। करीब 5 साल पहले दीपावली के दिन कोई गन्ना नहीं खरीदता था किंतु जब से ये उत्तर प्रदेश के लोग आए हैं और गन्ना खरीदते देखा है तब से यहां के लोग भी गन्ना खरीदने लग गये हैं। कई क्विंटल गन्ना एक ही दिन में बेच दिया गया और अच्छे दामों पर बेचा गया। एक-एक गाना 50-50 रुपये तक बेचा गया।

फोटो कैप्शन 03: छोटी बच्ची दीपावली पर फुलझड़ी चलाते हुए।


रामरतन गोमली को बनाया समिति प्रदेश संयोजक
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कनीना की आवाज।
 सनातन धर्म उत्थान समिति के प्रदेश संयोजक हरियाणा बतौर राम रतन गोमली जेई को बनाया गया है। समिति ने कहा है कि सनातन धर्म उत्थान समिति द्वारा समाज में शांति और लोगों के कल्याण के लिए, समाज में धार्मिक मूल्यों को अंकित करने और समाज को नई दिशा दिखाने के रामरतन गोमली का अहम योगदान है। ऐसे में प्रदेश संयोजक नियुक्त किया जाता है। उनके नियुक्ति पर विभिन्न लोगों ने खूब बधाई दी है।
 फोटो कैप्शन: राम रतन गोमली











दीपावली मनी शांतिपूर्वक
-कोई अप्रिय घटना नहीं
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में इस बार शांतिपूर्वक एवं फीकी दीपावली मनाई गई। किसी प्रकार की अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं है। फायर ब्रिगेड की ओर से मिली सूचना अनुसार भी कहीं कोई आगजनी की घटना नहीं घटी।  अधिकांश दुकानदारों का कहना है कि इस बार की दीवाली फीकी रही है। केवल मिठाई की बिक्री सबसे अधिक रही। बहुत सी ऐसी मिठाइयां थी जो दीवाली के एक दिन बाद ही सडऩे लग गई हैं।