Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Thursday, October 23, 2025


 




344 किसान लेकर आये 11224 क्विंटल बाजरा
--खरीद पहुंची 183685 क्विंटल ,सरकारीतौर पर खरीद शून्य
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कनीना की आवाज।
 कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 183685 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा कम से कम 1900 रुपये और अधिकतम 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। गुरुवार को 344 किसान 11224 क्विंटल बाजरा लेकर आये।
 विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 5949 टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
फोटो कैप्शन 02: कनीना की नई अनाज मंडी में बाजरे की आवक।







भैया दूज का पर्व मनाया, बहनों ने किया भाइयों को तिलक
-दिनभर चलता रहा कार्यक्रम
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कनीना की आवाज।
क्षेत्र में गुरुवार को भाई बहन के अटूट प्रेम को दर्शाता भैया दूज का पर्व मनाया गया। बहनों ने भाइयों को तिलक किया। दूर दराज से बहने अपने भाइयों तक पहुंची।
  भाई बहन के अटूट रिश्ते को दर्शाने वाले पर्व भैया दूज का आगाज होता है। दीपावली के पर्व के बाद यह पर्व आता है। बहनों ने भाई के आने का बेसब्री से इंतजार किया और व्रत रखकर उनके आने पर खाना खाया।
  इस दिन बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र की कामना के लिए यम से प्रार्थना की। भाई चलकर बहनों से मिलने के लिए गए। कनीना के आचार्य दीपक कौशिक का कहना है कि यह पर्व सभी पर्वों में सबसे बड़ा होता है। इस दिन बहना कहीं भी हो उससे मिलने भाई जरूर जाता है और बहने उन्हें तिलक कर अपने हाथों से मीठा भोजन कराकर फिर भोजन ग्रहण करती हैं। इस पर्व पर बहने अपने भाई की लंबी उम्र की कामना के लिए यमराज से प्रार्थना की।
उन्होंने बताया कि भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया। यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता है। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया। यमुना े ने उत्तर दिया- आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करें, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह ली। इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।
फोटो कैप्शन 01: भाई की लंबी उम्र की कामना करती बहन।



चार महीनों से मिड डे मील की राशि न  आने से बढ़ी परेशानी
- शिक्षक अपनी जेब से लगा रहे हैं पैसे
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कनीना की आवाज।
 कनीना खंड के विभिन्न स्कूलों से करीब चार माह से 4 माह से मिड डे मील पकाने की कोई राशि नहीं डाली जा रही है। जिसके चलते लाखों रुपये मिड डे मील इंचार्ज अपनी जेब से खर्च कर चुके हैं। बार-बार सरकार से मांग करने के बाद भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
   एक और अगर एक दिन के लिए भी खाना नहीं बनाया जाए तो आफत बन सकती है। और लोग विभिन्न अधिकारियों उएवं च्च अधिकारियों को शिकायत करते हैं किंतु कम से कम 4 महीने से मिड डे मील की राशि न आने से शिक्षक बेहद परेशान हैं। इस ओर न तो अधिकारी और न स्कूल मुखिया ध्यान दे रहे हैं। हर स्कूल में एक शिक्षक को यह जिम्मेदारी दी गई है जो मिड डे मील की देखरेख करता है।उनकी जेब में इतने पैसे नहीं होते जिसके चलते दुकानदार भी उन्हें झूठा समझने लग गए हैं। दुकानदार तो दबी जुबान से कहते सुने जा सकते हैं कि शिक्षक अपनी जेब में पैसे डाल जाते हैं। ऐसे में शिक्षक परेशान है। वैसे तो विभिन्न स्कूलों में कई फंड होते हैं और अधिकारियों के माने तो उनका कहना है कि फंड से पैसे निकाल कर खर्च किए जा सकते हैं और जब मिड डे मील की राशि आए तो वह पैसे जमा किए जा सकते हैं। इस बाबत ऐसा संभव है या नहीं यह तो मिड डे मिल इंचार्ज ही जाने परंतु विभिन्न स्कूलों में चार-पांच महीनों की मिड डे मील की राशि नहीं आई है। अप्रैल माह से राशि नहीं आई है लेकिन बीच में एक महीना अवकाश रहता है। उधर कुक का काम करने वाले कुछ महिलाओं के पैसे भी रुके हुए हैं।  शिक्षक दबी जुबान से कह तो रहे हैं कि वे परेशान है किंतु प्राचार्य से कोई मदद नहीं ले रहे हैं। यदि इस प्राचार्य मदद नहीं करते हैं तो उन्हें उच्च अधिकारियों के संज्ञान में बात लानी चाहिए।
क्या कहते हैं खंड शिक्षा अधिकारी -
खंड शिक्षा अधिकारी कनीना दिलबाग सिंह से बात हु।ई उन्होंने बताया की कूकों का अब तक का संपूर्ण पारिश्रमिक डाला हुआ है लेकिन मिड डे मिल मनाने की राशि का बजट तो आया हुआ है लेकिन फाइल अप्रूवल के लिए चंडीगढ़ गई हुई है। चंडीगढ़ से आते ही एक दो दिनों यह राशि भी डाल दी जाएगी। साथ में उन्होंने बताया की स्कूलों में और भी फंड होते हैं जिनसे राशि उधार लेकर खर्च की जा सकती है और जब मिड डे मील की राशि आए तो वह जमा की जा सकती है। उनका मानना है कि शिक्षकों को सूझबूझ से काम लेना चाहिए


 
करीब शत प्रतिशत काबू पा लिया है पोलियो पर- डा. अंकित
-पोलियों का लगभग हो चुका खात्मा
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कनीना की आवाज।
दुनिया भर में जिस दर से पोलियों पर काबू पाने के प्रयास किये हैं उससे पोलियो का लगभग खात्मा हो गया है। वर्ष 1980 के बाद शत प्रतिशत  के करीब पोलियो पर काबू पा लिया है। पोलियो के केस 1980 से पहले मिल सकते हैं किंतु वर्तमान में बाद 1980  के बाद जिला महेंद्रगढ़ से शायद ही कोई मामला हो। पोलियो टीकाकरण और पोलियो उन्मूलन के लिए जागरूकता बढ़ाई गई है जिसके कारण इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई लड़ी गई और पूर्णतया काबू पा लिया है।
विश्व पोलियो दिवस जोनास साल्क की जयंती के रूप में मनाया जाता है। वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने पोलियो की वैक्सीन विकसित की थी। इस बीमारी के खिलाफ अभियान की शुरुआत रोटरी इंटरनेशनल द्वारा की गई थी जो अंतर्राष्ट्रीय सेवा संगठन ने दुनिया भर में कार्यक्रम चलाए गए। पोलियो की खुराक पिलाई गई जिसके कारण पोलियो पर काबू पा लिया है।
*** पोलियो एक विषाणु जनित रोग है जो एंटरोवायरल से फैलता है। यह विष्णु तांत्रिक संक्रामक बीमारी के रूप में परिभाषित होता है जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को अधिक प्रभावित करता है। जो अपंग बना देता है। यह घातक बीमारी जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है,यह दूषित भोजन और पानी के कारण फैलती है। तत्पश्चात रोगाणु तंत्रिका तंत्र तक चला जाता है। इस बीमारी में कुछ लोगों में बुखार, थकान, मचली, दर्द, नाक बंद होना, गले में खराश, खांसी, गर्दन पीठ में अकडऩ, हाथ पैरों में दर्द, कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। यह रोगाणु मांसपेशियों को पूर्णत नष्ट कर देता है उसके कारण इंसान अपंग बन जाता है। केवल टीकाकरण से इसका इलाज संभव है। पालियो का टीका बच्चों के शरीर में पोलियो वायरस से लडऩे की क्षमता बढ़ाता है। इसकी आईपीवी और ओपीवी दोनों प्रकार की दवाई दी जाती है जो मुख के जरिए पिलाई जाती है। आजकल पोलियो की खुराक को टीकों में ही शामिल कर लिया गया है। डीपीटी का टीका लगाया जाता है जो इस रोग से बचाने में मददगार साबित होता है। मौखिक रूप से दी जाने वाली दवा की खुराक 6 सप्ताह, 10 सप्ताह, 14 सप्ताह और बूस्टर 26, 16 से 24 महीने में दी जाती है।
पोलियो को समाप्त करने के लिए पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम चलाए गए जिनके कारण पोलियो पर काबू पा लिया है। अभी समय-समय पर सख्त उपाय और टीकाकरण की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस रोग से बचने का स्वच्छता एक तरीका है, जितना स्वच्छता पर ध्यान दिया जाए उतना ही रोग कम फैलेगा।
-- डा. अंकित उप-नागरिक अस्पताल कनीना
सरकार बीसीजी, रोटा, आईपीवी आदि की तक लगती है या खुराक पिलाई जाती है। रोटा की 5 बूंद पिलाई जाती है जो टेटनस रोग पर काबू पाती है। वही पीसीबी पांच बीमारियों से बचाने वाला एक टीका है वही आईपीवी जिसे एंटी पोलियो वैक्सीन कहा जाता है। इसी प्रकार सरकार अनेक टीके लगाती है। जब बच्चा 5, 10 और 16 सप्ताह का होता है बीसीजी का टीका, पोलियो की खुराक पिलाई जाती है। डेढ़, ढाई और साढ़े तीन माह बाद बूस्टर डोज दी जाती है। बचपन में ही टीके लगाकर इस रोग पर काबू पाया जा सकता है।
कनीना उप नागरिक अस्पताल में पोलियो का कोई मरीज वर्तमान में नहीं आया है। 30 सालों से अधिक पहले कोई पोलियो का मरीज आते थे किंतु आप सरकार ने विभिन्न टीके एवं खुराक पोलियो से बचने की पिलाई जाती हैं।
-- शीशराम हेल्थ इंस्पेक्टर
 फोटो कैप्शन: शीशराम एचआई एवं डाक्टर अंकित।


मधुमक्खी पालकों के हित में सरकार का बड़ा फैसला, शहद अब भावांतर भरपाई योजना में शामिल
-मधुमक्खी पालकों को 120 रुपए प्रति किलो का भाव सुनिश्चित
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कनीना की आवाज।
 हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में चल रही सरकार ने मधुमक्खी पालकों को शहद का उचित भाव न मिलने से होने वाले नुकसान से बचाने और होने वाले घाटे की संभावनाओं का जोखिम खत्म करने के लिए शहद को भावांतर भरपाई योजना में शामिल कर दिया गया है।
भावांतार भरपाई योजना में कच्चे शहद का 120 रुपए प्रति किलो का भाव रखा है। इससे किसानों को पूरा भाव मिलेगा और उनकी आय बढ़ेगी।मधुमक्खी पालकों को बागवानी विभाग के मधु क्रांति पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रेम यादव ने बताया कि जिला में किसानों द्वारा पारंपरिक खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन का कार्य भी किया जा रहा है, परन्तु मार्केट में कई बार शहद के रेट कम मिलने से मधुमक्खी पालकों का रूझान कम हो रहा था। महेन्द्रगढ़ सहित प्रदेशभर के मधुमक्खी पालक शहद को भी बागवानी विभाग की भावांतर भरपाई योजना में शामिल करने की मांग कर रहे थे। मधुमक्खी पालक अब हनी ट्रेड सेंटर, आईबीडीसी, रामनगर जिला कुरूक्षेत्र में अपना शहद बेच सकेंगे।
उन्होंने बताया कि जिला महेन्द्रगढ के मधुमक्खी पालक दूसरे प्रदेशों जैसे राजस्थान, हिमाचल, यूपी व जम्मू एंड कश्मीर में अपने मधुमक्खियों के बक्सों को लेकर जाते हैं और जाहां पर फसलों व पेड़-पौधों पर फूल लगे होते हैं बक्सों को वहां पर रखा जाता है। राजस्थान में बाजरा, सरसों व जांडी के फूलों से, हिमाचल में सेब व कश्मीर में अकेषिया पेड़ के फूलों से मधुमक्खियां शहद बनाती है। इन बक्सों को सिर्फ रात को ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर जाया जाता है। मधुक्खियां दिन में तो बॉक्स से बाहर आती-जाती रहती है और रात को बॉक्स में ही रहती है।
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि शहद को भावांतर भरपाई योजना में शामिल करने से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा मिलेगा। बागवानी विभाग द्वारा मधुमक्खी पालन वाले बक्सों पर 85 प्रतिशत व अन्य यंत्रो पर 75 प्रतिशत अनुदान देने का प्रावधान है।
भावांतर भरपाई योजना के लिए पात्रता-
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि केवल मधुक्रांति पोर्टल पर पंजीकृत मधुमक्खी पालक व बागवानी अधिकारी द्वारा सत्यापित। परिवार पहचान पत्र। जो मधुमक्खी पालक अपना शहद हनी ट्रेड सेन्टर पलेटर्फोम के माध्यम से निर्धारित अवधि में बिक्री करेगा। बिक्री मुल्य व मात्रा ट्रेड सेन्टर के माध्यम से बिक्री बिल/लेन-देन प्रमाण के आधार पर प्रोत्साहन की प्रक्रिया की जाएगी। कम से कम 500 किलो शहद फूड ग्रेड बाल्टी में ही बिक्री के लिए हनी ट्रेड सेन्टर द्वारा लिया जाएगा।
जो मधुमक्खी पालक पहले से ही मधुक्रांती पोर्टल पर पंजीकृत है वो अपना आवेदन सत्यापन 15 नवम्बर 2025 तक कर सकते हैं, इसके उपरान्त सत्यापन अवधि 31 दिसम्बर 2025 तक रहेगी।
जो मधुमक्खी पालक मधुक्रांती पोर्टल पर पंजीकृत नहीं है वह अपना पंजिकरण 30 अक्टूबर 2025 तक करवाना सुनिश्चित करें व अपना आवेदन सत्यापन 15 नवम्बर 2025 तक कर सकते हैं, इसके उपरान्त सत्यापन अवधि 31 दिसम्बर 2025 तक रहेगी।
अगली वर्षों के लिए 1 दिसम्बर से लेकर 31 मई तक एचटीसी पोर्टल पर पंजीकरण करवाएं व जनवरी से जून तक सत्यापन की अवधि रहेगी व मधुमक्खी पालक अपने परिवार पहचान पत्र के अंतिम चार अक्षर सिरियल नम्बर के साथ मधुमक्खी के बक्से पर अपने खर्चे पर उत्कीर्ण करवाना सुनिश्चित करें ताकि सत्यापन के दौरान हर बक्से की पहचान की जा सके।



पुलिस ने बलिदानी सूबे सिंह







की परिवार से शिष्टाचार मुलाकात की
-पुलिस मना रही है बलिदान दिवस और झंडा दिवस
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कनीना की आवाज।
हरियाणा पुलिस द्वारा 21 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक पुलिस बलिदान दिवस और झंडा दिवस मनाया जा रहा है। थाना सदर कनीना के गांव सुंदरह में पुलिस स्मृति दिवस और झंडा दिवस पर कनीना पुलिस ने बलिदानी सूबे सिंह की परिवार से शिष्टाचार मुलाकात की और बलिदानी सूबे सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए।
इस दौरान शहीद सूबे सिंह के बलिदान और पुलिस विभाग में उनके द्वारा दिए गए योगदान के बारे में भी विस्तार से बताया गया, ताकि युवा पीढ़ी उनकी शिक्षाओं को ग्रहण कर अच्छे रास्तों पर चलकर अपना मुकाम हासिल कर सके। उन्होंने युवाओं को संबोधित कर जागरूक करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा करते हुए बलिदान होना बहुत गर्व की बात है। उन्होंने लोगों को बताया कि चीन से हुए युद्ध में सीआरपीएफ जवानों ने चीनी सेना के आक्रमण को विफल कर दिया था। इसमें सीआरपीएफ के 10 जवानों ने बलिदान दिया था। उनके बलिदान को पूरे देश में पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
फोटो कैप्शन 09: बलिदानी सूबे सिंह के परिवार से पुलिस मिलते हुए।





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