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Monday, April 13, 2026
कुतरूं प्राचार्य के करनामे- 21
-कुतरूं को नमन किया और दुख पाया, डांट मारकर ही काम करवाया
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कनीना की आवाज। कनीना निवासी लेखक, पत्रकार एवं पूर्व शिक्षक रहे होशियार सिंह ने बतौर शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को पढऩे में 40 सालों की सेवा दी। इस दौरान करीब 30 प्राचार्य/मुखियाओं से सामना करना पड़ा जिनमें से कुछेक कुतरूं शिक्षकों के प्रति बुरा व्यवहार करने वाले, काम रोकने वाले, परेशान करने वाले नजर आए। जिनको लोग कुतरूं नाम से जानते हैं जबकि बहुत से ऐसे प्राचार्य और मुखिया मिले जो शिक्षकों के हर सुख दुख में आगे मिले, उन्हें यदि एक रोटी की जरूरत हो तो दो देने के लिए तैयार मिलते थे। कुछ कुतरूं प्राचार्य ऐसे मिले जिनके कारण शिक्षा विभाग वास्तव में गर्त की ओर जाता है जबकि बहुत से प्राचार्यों ने शिक्षा विभाग को चार चांद लगाए हैं, मान सम्मान शिक्षकों का बढ़ाया है। परंतु इस अवधि दौरान होशियार सिंह ने पाया की कुतरूं प्राचार्य के सामने जो नमन करता मिला, उनके हर सुख दुख में आगे खड़ा होने का प्रयास किया, उनकी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। कुतरूं ने ऐसे शिक्षकों का शोषण ही किया। न तो उनका काम समय पर किया और न उनके कामों में सहायता की अपितु उनको दुख दर्द देने में कसर नहीं छोड़ी। कहावत है जो दूसरे के लिए गड्ढा खोदते हैं वो एक दिन उसी में गिरते हैं। कई कुतरुओं ने दूसरों के लिए गड्ढे खोदे हैं परिणाम अब वो खुद भी गड्ढे में गिर चुके हैं या गिर रहे हैं या आगे भी गिर जाएंगे। यह भी सत्य हैं कि लोहे को लोहा काटता है। एक कुतरूं प्राचार्य से एक कुतरूं शिक्षक ने कहा कि या तो मेरा काम कर दो वरना जूतों की माला पहनाई जाएगी। वह कुतरूं शिक्षक जमकर गालियां देता था, मजाल उस प्राचार्य की कि उस कुतरूं शिक्षक को एक शब्द बोल दिखाए। उल्टा कुतरूं प्राचार्य उससे डरता था, उसके पास कमरे में बैठा रहता था। उसके हर काम को पूरा करने में कसर नहीं छोड़ता था। अफसोस जो कुतरूं को गाली दे उसके ही काम प्रमुखता से पूर्ण होते थे।
इससे बहुत दर्द भी हुआ कि जो कक्षा में पढऩा तो दूर बच्चों से नफरत करते थे वो कुतरूं शिक्षक कुतरूं प्राचार्य से भी नफरत करता था और उसके किसी काम को कभी नहीं रोका। जिससे साफ जाहिर है की कुतरूं प्राचार्य के साथ तो कुतरूं बनकर ही रहे तो कामयाब होंगे। कुतरूं को आंखें दिखाने पर ही काम आसानी से होगा। एक नहीं ऐसे कई उदाहरण सामने आए जब कुतरूं शिक्षक कुतरूं प्राचार्य का सामना करते थे उनका कभी काम नहीं रोका गया और जो दिन रात कक्षा में मेहनत करते थे, दिन-रात पढ़ाई करवाने में लीन रहते थे, बच्चों का हित करते थे उनके सभी कार्य समय-समय पर रोक गए, ऐसे कुतरूं प्राचार्य देखने में आए। एक और उदाहरण सामने आया था की डांट करने वाले ही सफल हुए। एक कुतरूं प्राचार्य ने तो शिक्षक से किसी मुद्दे को लेकर कहा कि यूं सेटअप। बस उस शिक्षक ने तो झड़ी लगा दी और कहा -यू ब्लडी बस्टर्ड यू सेटअप और यहां तक की कहा कि तुम जैसे तो मैंने कितने ही कुतरूं प्राचार्य देखें हैं। बस फिर क्या था कुतरूं प्राचार्य ने उसके सभी काम पूर्ण किए। ऐसा लगा कि वास्तव में कुटरू प्राचार्यों के सामने तो पढ़ाने वाले नहीं सीधे बोलने वाले, विरोध करने वाले शिक्षक ही होने चाहिए। एक शिक्षक दिन रात पढ़ाता ,कितनी ही बार नाम कमाया, हर जगह उसने पढऩे में नाम कमाया किंतु जब सेवानिवृत्त हुआ तो कुतरूं प्राचार्य छुप गया, स्कूल में नहीं आया। बड़ा अफसोस हुआ ऐसे कुतरूं प्राचार्य जब सेवानिवृत्त होते हैं तो उनका भी वही हाल होता है और जो कुछ रह गए उनका वही हाल होगा जो उन्होंने दूसरे के साथ बीताए। मां नामक चलचित्र में बताया गया है कि एक हथिनी के बच्चे को हथनी से अलग करने के लिए हथिनी के पैरों को पकडऩे वाले यंत्र लगाए गए। हथिनी फंस गई और उसके बच्चे को पकड़ लिया गया। एक दिन एक उस हाथी पकडऩे वाले व्यक्ति की मां का पीछा हथिनी करने लगी। जब हाथी पकडऩे वाले ने देखा कि उसकी मां का पीछा हथिनी कर रही है तो दौडऩा शुरू किया और उसका पैर भी इस यंत्र ने पकड़ लिया जिसमें इस आदमी ने कभी हथिनी को पकड़ा था। परिणाम यह निकला कि हाथी को पकडऩे वाले की मां को हथिनी ने मार डाला। तब उसे एहसास हुआ कि जो दूसरे के साथ बिताता है उसके साथ भी वही दुर्गति एक ना एक दिन होती है, चाहे कोई खुश हो ले कि वह आज कुतरूं प्राचार्य है परंतु कितने दिन का, आखिर आना इसी गली में है, उन्हीं लोगों के बीच में है और उसी बांसों से बनी अर्थी पर जाना है। उन्हें भी आखिर उसी मुर्दाघाट में जाकर एक मु_ी राख बनेगी और वह भी उड़ती फिरेगी। लोग पीछे से गालियां देंगे कि कुतरूं चला गया। इसलिए कुतरूं न बनकर इंसानियत निभानी चाहिए।
होनहार परी को किया पुरस्कृत
-किसमें कितना है दम में दिखाया था परी ने दम
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कनीना की आवाज। अनुसूचित जाति /जनजाति और पिछड़ा वर्ग कर्मचारी यूनियन ने गांव गोमला में महेश कुमार फोरमैन, राज्य अतिरिक्त महासचिव की होनहार परी को स्मृति चिह्न भेंट किया। और संगठन कि तरफ से 1100 रुपए देकर पुरस्कृत किया गया।
टीवी धारावाहिक चैनल रियलिटी शो के डायरेक्टर केडी बंसल के द्वारा किसमें कितना है दम वाले टीवी शो में अपना लोहा मनवाने वाली परी अंडर-15 के 5 लाख विद्यार्थियों में से 5 राउंड को पार करते हुए नाम रोशन किया। इस अवसर पर एससी/एसटी और बीसी कर्मचारी यूनियन के राज्य वित्त सचिव राजेंद्र सिंह कपूरी , सर्कल सचिव लखन लाल गोकुल चन्द जेई ,राजेश कुमार जी जेई, राकेश कुमार फोरमैन, सत्यवान कुमार फोरमैन, बाबू लाल एएलएम,सतीश कुमार एसए आदि कर्मचारी मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 08: परी को स्मृति चिह्न भेंट करते हुए
खुशियों से भरा पर्व है बैसाखी-यादव
-पंजाब का प्रमुख पर्व है बैसाखी
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कनीना की आवाज। बैसाखी का त्योहार आमतौर पर हर साल 14 अप्रैल को मनाया जाता है। पूरे भारत में मनाया जाने वाला बैसाखी 2026 पूरे भारत में, विशेष रूप से पंजाब के सिख गुरुद्वारों और खेतों में कई धूमधाम से मनाया जाएगा। हरियाणा के कुछ जिलों में भी पर्व मनाया जाता हे। बैसाखी के दिन सिख गुरु गोविंद सिंह द्वारा 1699 में स्थापित खालसा पंथ की स्थापना का जश्न मनाते हैं। यह रबी फसल की कटाई की खुशी में मनाया जाने वाला पर्व है और सिख धर्म में खालसा पंथ की स्थापना के कारण इसका विशेष धार्मिक महत्व है। 1699 में, गुरु गोविंद सिंह ने खालसा की स्थापना के लिए इस पर्व को चुना था। खालसा सिखों का सामूहिक नाम है जिन्होंने बपतिस्मा लिया है। यह जानकारी डा. होशियार सिंह यादव ने देते हुए बताया कि-
कथा के अनुसार, पर्व के दौरान वे एक तंबू से तलवार लेकर निकले और कहा कि जो भी सिख अपने धर्म के लिए प्राणों की आहुति देने को तैयार हो, वह तंबू में आ जाए। इस त्योहार से जुड़ा एक और रोचक तथ्य यह है कि बैसाखी उन तीन प्रमुख त्योहारों में से एक थी जिन्हें तीसरे सिख गुरु, गुरु अमर दास ने मनाने का निर्णय लिया था। 1699 में बैसाखी के दिन, दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। बैसाखी, जिसे वैशाखी भी कहा जाता है, सिखों का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जिसे बड़े उत्साह और सम्मान के साथ मनाया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना और फसल के मौसम के आगमन का प्रतीक है। बैसाखी सिख संस्कृति और आध्यात्मिकता में एक विशेष स्थान रखती है, जो एकता, समानता और नवजीवन का प्रतीक है। बैसाखी का अर्थ है फसल कटाई के समय मनाया जाने वाला एक त्योहार, जो पंजाब में नए साल की शुरुआत का प्रतीक है। बैसाखी रबी की फसल के पकने और कटाई की खुशी में मनाई जाती है। इस दिन खेतों में मेहनत करने वाले किसान अपनी मेहनत का फल मिलने पर जश्न मनाते हैं। ढोल-नगाड़ों, भांगड़ा-गिद्धा और पारंपरिक पकवानों के साथ यह त्योहार पूरे जोश के साथ मनाया जाता है।
फोटो कैप्शन: डा. होशियार सिंह यादव
155 किलोमीटर रेल लाइन बनेगा चरखी दादरी से अलवर वाया,कनीना एवं नीमराना,क्षेत्र में खुशी की लहर
-सर्वे का काम पूर्ण, रेल मंत्री का जताया आभार
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कनीना की आवाज। बहु-चर्चित चरखी दादरी से कनीना-काठूवास होकर अलवर तक 155 किलोमीटर रेलवे लाइन निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा। मिली जानकारी अनुसार 4000 करोड़ रुपए से यह रेलवे लाइन बनेगी जिससे कई नए स्टेशन बनेंगे।
मिली जानकारी अनुसार चरखी दादरी, कनीना खास और काठूवास प्रमुख जंक्शन होंगे जबकि नीमराना, ततारपुर क्रासिंग स्टेशन होंगे। साथ में रामनगर, मोड़ी, चिडिय़ां, बाघोत, रामबास, गोमला नांगल जमालपुर, मांढण, नयागांव, जाट बहरोड़ रनोत, जिंदोली आदि हाल्ट बनेंगे। अगर जल्द ही रेलवे लाइन पर काम शुरू हो जाएगा तो निश्चित रूप से कनीना एवं काठूवास आदि के लिए बेहतर लाभ होगा। विगत वर्षों भी यह मामला जोर-शोर से उठाया गया था किंतु अधर में लटका हुआ था। अब रेलवे सूत्रों अनुसार यह सर्वे पूर्ण हो चुका है। 155 किलोमीटर लंबे रूट के लिए 15 नये स्टेशन बनेंगे। एमएल एवं एमपी इस संबंध में रेल मंत्री अश्विनी वष्र्णेय से इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।
रेल मंत्री का जताया आभार-
कनीना क्षेत्र के पूर्ण सिंह प्रधान मंडी, रविंद्र बंसल ,ब्रह्म दत्त जांगड़ा, सुरेंद्र कुमार, अनिल प्रधान, ओमप्रकाश लिसानिया, योगेश अग्रवाल, शिवकुमार अग्रवाल, लाजपत प्रधान, गणेश अग्रवाल, निरंजन लाल प्रधान आदि ने रेल मंत्री अश्विनी वाष्र्णय का आभार जताया कि उन्होंने कनीना क्षेत्र से यह रेलवे लाइन निर्माण का निर्णय लिया है। इससे कनीना का खोया हुआ सम्मान वापस बहाल होगा तथा कनीनावासियों के लिए जीवन मरण का प्रश्न बना हुआ है।
होगा कनीना का विकास-
यह रेलवे लाइन कनीना होकर गुजरने पर कनीना क्षेत्र का विकास संभव हो पाएगा तथा औद्योगिक क्षेत्र बन जाएगा। विशेष कर बाघोत जो देश में बाघेश्वर धाम के लिए जाना जाता है, वह भी रेलवे लाइन से जुड़ जाएगा। इसलिए बाघोत में खुशी का माहौल है। वैसे भी अलवर अहीरवाल का गढ़ है। इसलिए इससे जुडऩे का सौभाग्य मिलेगा। कनीना और आसपास के बहुत अधिक संख्या में लोग अलवर जान जाते रहते हैं। उनका सुविधा मिलेगी। ऐसे गांव जिन में अभी तक रेलवे हाल्ट भी नहीं है उन्हें भी यह रेल की सुविधा मिलेगी। इसलिए सभी में खुशी की लहर है और उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्दी इस रेलवे लाइन पर काम शुरू किया जाए।
जल्द ही आयोजित होगी बैठक-
कनीना और आसपास विभिन्न गांवों में जल्द ही बैठक आयोजित और होगी जिसमें रेल मंत्री का आभार जताया जाएगा और उन तक ज्ञापन भेज कर अविलंब इस रेलवे लाइन को पूरा करने की मांग की जाएगी।
फोटो कैप्शन 5: कनीना खास रेलवे स्टेशन
आंबेडकर जयंती मंगलवार को मनेगी कनीना में
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कनीना की आवाज। भारत रत्न डा. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती समारोह अंबेडकर चौक कनीना में प्रात. 10 बजे डा. भीमराव अंबेडकर जनजागरण समिति के तत्वावधान में मनाई जाएगी।
इस जयंती समारोह के मुख्य अतिथि नपा कनीना रहेगी जिसकी अध्यक्षता समाजसेवी शेर सिंह फौजी करेंगे। इसी समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी ठाकुर अतरलाल व डा. प्रवीण कुमार यादव प्राचार्य कन्या महाविद्यालय अटेली व बीडीसी मेंबर प्रतिनिधि,पवन एडवोकेट रहेंगे।
समिति के प्रधान कृष्ण कुमार पूनिया ने बताया कि भारतीय संविधान के जनक डा. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू छावनी में हुआ था। वो अपने माता-पिता की चौधवी और अंतिम संतान थे। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा सतारा महाराष्ट्र से और माध्यमिक शिक्षा मुंबई के एलीफस्टन हाई स्कूल से प्राप्त की थी वह एक प्रख्यात अर्थशास्त्री कानून विद और समाज सुधारक बने जिन्होंने भारतीय संविधान का निर्माण किया।
पावर वेट लिफ्टिंग में नंदिनी ने पाया प्रथम स्थान
-राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में लेगी भाग
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कनीना की आवाज। पावर वेट लिफ्टिंग में नंदिनी पुत्री देवेंद्र यादव, वार्ड पांच, कनीना निवासी ने बहादुरगढ़ में आयोजित हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सब जूनियर कैटेगरी में प्रथम स्थान पाया है। वे राष्ट्रीय स्तर के लिए होने वाली प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई हो चुकी है।
विस्तृत जानकारी देते हुए पूर्व शिक्षक राम प्रताप यादव ने बताया कि 15 मई को आंध्र प्रदेश में आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में वे भाग लेंगी। कनीना और आसपास क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर है। उन्होंने नंदिनी को बधाई दी है।
फोटो कैप्शन 02: नंदिनी वेट लिफ्टिंग में करतब दिखाते हुए
जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईन ने किया जलघर बाघोत का निरीक्षण
-जल समस्या का समाधान करने का दिया आदेश
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कनीना की आवाज। बाघोत में पब्लिक हेल्थ के एक्सईन प्रदीप यादव ने आरती सिंह राव स्वास्थ्य मंत्री हरियाणा सरकार के निर्देश पर जल घर का निरीक्षण किया। बाघोत गांव में नहर से आने वाले नाले जो नहर से जल घर तक बना हुआ है उसमें रुकावट बनी हुई है। उसके समाधान के लिए पूरी गहनता से जांच की। उन्होंने कहा कि जल्द नई पाइप लाइन बिछवाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। जब तक पाइप लाइन का काम नही होता तब तक अस्थाई नाला जो जोहड़ भरने के लिए बना हुआ है उससे जल घर का तालाब भरवाने का काम किया जाएगा और उस कच्चे नाले की सफाई करके नहर आने से पहले साफ किया जाएगा।
गांव में पीने के पानी की कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी। उनके साथ विभाग के जेई पवन कुमार को आदेश दिया कि इस जोहड़ वाले नाले को कल से सफाई करवा कर नहर आने पर जल घर के तालाब को भरवाया जाए। गांव के सरपंच राजेन्द्र पहलवान व महावीर पहलवान ने एक्सईन प्रदीप यादव को कहा कि गांव में पीने का पानी की समस्या बनी हुई है। इस पर अधिकारी ने पूरा आश्वासन दिया। उनके साथ जेई पवन कुमार को तुरंत आदेश दिया कल से काम करके पानी के तालाब को भरवाने का काम करें।
फोटो कैप्शन 04: बाघोत में एक्सईन जल समस्या का निरीक्षण करते हुए
क्रीड़ा भारती, हरियाणा प्रांत की दो दिवसीय वार्षिक नियोजन बैठक संपन्न
- नई जिम्मेदारियां, खेल एवं संस्कार आधारित गतिविधियों को मिलेगा नया विस्तार
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कनीना की आवाज। क्रीड़ाभारती, हरियाणा प्रांत की बहुप्रतीक्षित दो दिवसीय वार्षिक नियोजन बैठक एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ककराला संपन्न हुई। इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं खेल प्रेमियों ने भाग लिया।
बैठक के विभिन्न सत्रों में विस्तार से चर्चा करते हुए वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक कैलेंडर तैयार किया गया। इसमें यह निर्णय लिया गया कि हनुमान जयंती, जो क्रीड़ा भारती का स्थापना दिवस है, उसे पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाएगा। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को बड़े स्तर पर मनाने, विद्यालयों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में खेल पखवाड़ा आयोजित करने, विद्यार्थियों में खेल एवं सामान्य ज्ञान के विकास हेतु क्रीड़ा ज्ञान परीक्षा आयोजित करने तथा खिलाडिय़ों की माताओं को सम्मानित करने के लिए जीजाबाई सम्मान समारोह प्रत्येक जिले में आयोजित किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त सूर्य नमस्कार कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर चलाने, अधिक से अधिक युवाओं को जोडऩे तथा खेलों के माध्यम से स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में कार्य करने पर विशेष जोर दिया गया।
इस मौके पर रामदीप पंचकुला को सह जिला मंत्री,राजेश कैथल जिला मंत्री,सुरेंद्र प्रांत युवा प्रमुख,सुनील सह प्रांत योग प्रमुख,सुनिल गुरुग्राम,सह विभाग प्रमुख,सौरभ अंबाला, विभाग संयोजक,कुसुम मलिक नूंह जिला अध्यक्ष,आमिर नूंह जिला मंत्री मनोनीत किया गया।
इस मौके पर दीपक वत्स , डा. उमेश प्रताप , अजमेर सिंह एवं राकेश खोला,
सतीश कुमार, सुरेंद्र मलिक, डा. नरेश कुमार, हंसराज चौधरी, डा. सुशील त्यागी, राजेश कुमार, बबली देवी, जितेंद्र सिंह, जगदेव, किरण नांदल, जसवीर सिंह, डा. उदयवीर पाल, जयसिंह, रमेश, वेदपाल, नितिन भारद्वाज, सुनील भारद्वाज, डा. अनीता सिंह, मुकेश, अमित कुमार, सविता पटेल, जुगल किशोर, राजेश कुमार सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: ककराला में बैठक का नजारा।
डा. भीमराव आंबेकर को किया याद
-कैमला स्कूल में मनाई गई जयंती
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कनीना की आवाज। राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में को भारतीय संविधान के जनक डा. भीमराव आंबेडकर की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के मौलिक मुख्य अध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने की उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे दलितों के मसीहा डा. भीमराव अंबेडकर के जीवन से प्रेरणा ग्रहण करें तथा उनके आत्मनिर्भरता,आत्म सम्मान तथा सामाजिक समानता के मार्ग पर चलते हुए संगठित होकर संघर्ष करने जैसी शिक्षाओं पर अमल करे। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक ने विद्यार्थियों को भारत रत्न डा. भीमराव अंबेडकर के जीवन तथा उनकी शिक्षाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि सामाजिक उत्थान के अनेक कार्य जैसे छुआछूत के विरुद्ध संघर्ष, महिलाओं तथा वंचित वर्ग की शिक्षा व उनके उत्थान के लिए कार्य, संविधान व कानून में विश्वास तथा न्याय के लिए संघर्ष जैसी उनकी शिक्षाओं ने लाखों लोगों का जीवन बदल दिया। इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों निधि,पुनीत, जयंत,समर, यश, विवेक,कार्तिक, अनु तथा जीया ने डा. भीमराव अंबेडकर के जीवन पर आधारित अनेकों विचार व्यक्त किए इस अवसर पर एक पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया जिसमें निधि ने प्रथम, विवेक ने द्वितीय तथा लीना ने तृतीय स्थान प्राप्त किया तथा वान्या और अंकित को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया इस अवसर पर विद्यालय के स्टाफ सदस्य मनवीर सिंह तंवर ,देवेंद्र कुमार,सुनील कुमार शास्त्री,सुनील कुमार डीपीई, राजेश कुमार, भगत सिंह, गरिमा रानी,सुबे सिंह पूर्व प्रधान, तारामणि देवी, पिंकी देवी सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थी गण उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 03: आंबेडकर जयंती मनाते हुए कैमला
धनौंदा के अभिनेता को किया याद
-स्व. सतीश कौशिक की जयंती मनाई
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कनीना की आवाज। मशहूर अभिनेता, फिल्म निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक स्व. सतीश कौशिक की जयंती पर उनके पैतृक गांव धनौन्दा में स्मृति समारोह आयोजित कर उन्हें याद किया गया। अभिनेता सतीश कौशिक चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित समारोह में आसपास के ग्रामीणों तथा उनके प्रशंसकों ने उन्हें याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता उनके बचपन के सहपाठी राजेन्द्र सिंह नम्बरदार ने की।
अतरलाल एडवोकेट ने सतीश कौशिक के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उपस्थित स्व. सतीश कौशिक के अनेक प्रशंसकों और ग्रामीणों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए नेताजी अतरलाल ने कहा कि सतीश कौशिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एक ऐसे हरफनमौला कलाकार थे जिन्होंने अभिनय, पटकथा लेखन, निर्देशन तथा सिनेमा के हर क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्हें एक साथ कई भूमिकाएं निभाने की महारत हासिल थी। राजेन्द्र सिंह नंबरदार ने उनके बचपन के किस्से सुनाते हुए कहा कि वे अपने गांव, अपने साथियों तथा गांव की परंपराओं से प्यार करते थे। वे अंतिम समय तक अपने गांव से जुड़े रहे। उन्होंने हरियाणा सरकार से कहकर गांव में बड़ा खेल स्टेडियम बनवाया तथा गांव के पुराने ठाकुर जी मंदिर के जीर्णोद्धार में सहयोग दिया। कैलाश सेठ ने सतीश कौशिक को याद करते हुए कहा कि वे ऊंचाइयों पर पहुंचकर भी जमीन से जुड़े हुए इंसान थे। विभिन्न मंचों पर गर्व से खुद को महेंद्रगढ़ जिला के कनीना उपमंडल के धनौन्दा गांव का मूल निवासी बताते थे। इस अवसर पर ग्रामीणों ने उनके नाम पर अभिनेता सतीश कौशिक लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड और अभिनेता सतीश कौशिक एक्स्ट्राआर्डिनरी अवार्ड स्थापित तथा शुरू करने का निर्णय लिया। जो अगले साल से शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, कला तथा सिनेमा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाएगा। इस दौरान देवेन्द्र नंबरदार अगिहार, भूपेन्द्र सिंह, डा. मुकेश, औमप्रकाश यादव, राकेश यादव, कैलाश सेठ, कृष्ण सिंह फोरमैन, धीरज, जसमेर, मीर सिंह वैद्य, पवन प्रजापत, प्रोफेसर नवीन जांगड़ा, परमजीत कौशिक, सुभाषचंद यादव सहित अनेक ग्रामीण और प्रशंसक उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 06: अभिनेता सतीश कौशिक को याद करते हुए
मंगलवार को कनीना में होगी जल की आपूर्ति
-खराब हुई मोटर को लगाया गया, आंशिक रूप से की गई जल सप्लाई बहाल
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कनीना की आवाज। कनीना-रेवाड़ी मुख्य मार्ग पर स्थित जलघर केंद्र की मुख्य मोटर जल जाने के बाद चार दिनों से पेयजल का संकट छाया हुआ है। लोग इधर-उधर से उपभोक्ता इधर-उधर से पानी का प्रबंध करते देखे गए, वहीं टैंकरों से जल की आपूर्ति की गई। टैंकर चालकों ने भी कुछ लाभ कमाया वहीं उपभोक्ताओं ने सिर पर पानी ढो-ढोकर घर तक पहुंचाया।
उपभोक्ताओं की मांग है कि गर्मी की हालत को देखते हुए एक अतिरिक्त मोटर का प्रबंध किया जाए ताकि आपातकाल के समय उसे प्रयोग में लाया जा सके। उल्लेखनीय की दैनिक जागरण पेयजल संकट पर लगातार समाचार प्रकाशित किया, उच्च अधिकारियों से इस संबंध में बात हुई। अधिकारी एक दिन में ही सप्लाई बहाल करने की बात कह रहे थे किंतु पूरे चार दिनों तक कोई पेयजल सप्लाई आपूर्ति नहीं हो पाई। मंगलवार को संभावना है कि पेयजल की आपूर्ति हो पाए क्योंकि 40 हार्स पावर की मोटर जो जल गई थी उसे फिर से स्थापित करवा दिया गया। दैनिक जागरण के प्रभाव के चलते ऐसा संभव हो पाया है। वैसे तो कस्बा कनीना के उपभोक्ता गर्मियों में दो बार पेय जल सप्लाई की मांग कर रहे हैं किंतु दो बार सप्लाई नहीं हो पाए तो प्रत्येक वार्ड में एक-एक घंटा पर जलापूर्ति जरूर सप्लाई होनी चाहिए ताकि गर्मी से राहत मिल सकेगी।
फोटो कैप्शन 07: पेयजल की मोटर स्थापित करते हुए
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