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Sunday, March 8, 2026



 


रसुलपुर में दो दिवसीय आर्य समाज वार्षिक उत्सव का हुआ भव्य समापन
--महर्षि की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक -भगत सिंह
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कनीना की आवाज।
उपमंडल के गांव रसुलपुर में आयोजित दो दिवसीय आर्य समाज वार्षिक उत्सव का रविवार को श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक जागरूकता के संदेश के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों, विद्वानों तथा श्रद्धालुओं ने भाग लेकर वैदिक धर्म और समाज सुधार के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर श्रीकृष्ण गौशाला कनीना के   प्रधान भगत भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए समाज में वैदिक संस्कारों और नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उत्सव के दौरान वैदिक यज्ञ, भजन-कीर्तन, प्रवचन तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और समाज में शांति की कामना की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य समाज में सत्य, शिक्षा, समानता और नैतिक मूल्यों का प्रसार करना है।
  मुख्य अतिथि भगत सिंह ने कहा कि  इस मौके पर उन्होंने कहा कि स्वामीजी शिक्षाएं आज भी समाज की बुराइयों पर कुठाराघात करती हैं और समाज की बुराइयों को मिटाने में अहं योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा की आज हम सबको स्वामी दयानंद  के बताए मार्ग पर चलने की जरूरत है वरना हमारा देश संस्कारों में काफी पीछे चला जाएगा। उन्होंने कहा की समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने की सख्त से सख्त जरूरत है जिससे समाज का भला हो पाएगा वरना समाज गर्त में चला जाएगा।
  उन्होंने कहा कि स्वामी जी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा की आज हम सबको स्वामी दयानंद  के बताए मार्ग पर चलने की सख्त जरूरत है वरना हमारा देश संस्कारों में काफी पीछे चला जाएगा। उन्होंने कहा की हमें आर्यव्रत समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने की जरूरत है जिससे हमारा तो भला होगा ही साथ में समाज में फैली बुराइयां भी दूर हो जाएगी और एक स्वच्छ समाज की शुरूआत होगी। इस मौके पर उन्होंने अपने निजी कोष से 11 हजार रुपये का दान दिया।
वक्ताओं ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे नशामुक्ति, शिक्षा के प्रसार और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि जब युवा वर्ग जागरूक होकर समाज सुधार के कार्यों में भागीदारी करेगा, तभी एक सशक्त और संस्कारित समाज का निर्माण संभव हो सकेगा। कार्यक्रम में विद्वान आचार्यों ने वैदिक सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती के विचार आज भी समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक हैं। उन्होंने बताया कि आर्य समाज हमेशा से शिक्षा के प्रसार, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और मानव सेवा के कार्यों में अग्रणी रहा है। समापन अवसर पर आयोजकों ने सभी अतिथियों, समाजसेवियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि भविष्य में भी ऐसे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता, एकता और भाईचारे का संदेश निरंतर फैलाया जाता रहेगा। कार्यक्रम के अंत में शांति पाठ और प्रसाद वितरण के साथ दो दिवसीय आर्य समाज वार्षिक उत्सव का विधिवत समापन किया गया।
फोटो कैप्शन 08: आर्य समाज रस्ूलपुर भजनों से बुराइयों पर प्रहार करते हुए



सोमवार को मनाया जाएगा बासौड़ा पर्व
-तीन सप्ताह तक चलता है यह पर्व
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में सोमवार से बासौड़ा का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। यह पर्व पुराने समय से मनाया जाता आ रहा है। इस पर्व के प्रति लोगों में गहन आस्था है। इसे शीतला अष्टमी का पर्व भी कहते हैं। सोमवार को शीतला मां की पूजा करने के बाद समस्त परिवार बासी भोजन करेगा। करीब आधा दर्जन गांवों में बासौड़ा के छोटे मेले लगते हैं। गांव बव्वा में बुधवार को शीतला माता मेला लगेगा। समाजसेवी सुरेंद्र यादव ने बताया कि सोमवार रात को जागरण आयोजित होगा तथा मंगलवार को माता का भंडारा लगेगा तथा बुधवार को मेला लगेगा। अक्सर यह पर्व होली के बाद सोमवार एवं बुधवार को मनाया जाता है।
  इस पर्व के तहत लोग रात को भोजन बनाकर रख देते हैं और सुबह होने पर माता स्थल पर ले जाकर उसकी पूजा करते हैं और फिर इसे ग्रहण किया जाता है।
इस त्योहार को बासौढ़ा, बासौड़ा, शीतला, पूजन तथा शीतला अष्टमी आदि नामों से जाना जाता है। चैत्र माह के रंगों के त्योहार होली के बाद अकसर सोमवार या बुधवार को भोजन बनाकर रखा जाता है। अगले दिन पूरा परिवार ही बासी भोजन खाता है।
बासौड़ा त्योहार मनाने के पीछे पुत्र कामना तथा शीतला रोगों से बचना माना जाता है। पुराने वक्त में चेचक या शीतला रोग अधिक होता था जिसमें लाखों व्यक्तियों की प्रतिवर्ष मृत्यु हो जाती थी। स्त्रियां शीतला माता की पूजा करके परिवार को रोगों से बचाने की प्रार्थना करती थी। तभी से यह त्योहार चला आ रहा है। त्योहार से एक दिन पूर्व विभिन्न पकवान बनाकर रख दिये जाते हैं। जिसमें चावल प्रमुख होता है। अगली रोज सुबह सवेरे उठ स्नान व शीतला माता की पूजा कर, जीवों को भोजन खिलाकर पूरा परिवार ही बासी भोजन करता है।
पुराने वक्त में बासी भोजन खाने के पीछे एक दंतकथा भी प्रचलित है जिसके अनुसार एक बुढिय़ा गांव से बाहर झोपड़ी में रहती थी। वह बासी भोजन करती थी जो ग्रामवासी देते थे। एक बार भयंकर शीतला रोग फैला। ग्रामीण रोग पीडि़त हो गए परन्तु बुढिय़ा  खुश व रोग रहित थी। ग्रामीणों ने बुढिय़ा से रोग रहित होने का कारण पूछा। बुढिय़ा ने बताया की वह बासी भोजन करती है, तभी से ग्रामीणों ने उनके पदचिह्नों पर चलना शुरू कर दिया। परम्परा वर्तमान में भी चली आ रही है।
बासौढ़ा के दिन चावल पकाकर आपसी आदान प्रदान करने की परम्परा भी चली आ रही है। इस परम्परा को कंडवारी नाम से जाना जाता है। पुत्रवती माता चावल पकाकर घर-घर बंटवाती है। प्रत्येक घर परिवार में यह प्रथा चली आ रही है बासी भोजन के पीछे वैज्ञानिक आधार भी माना जाता है। वर्तमान में भी कई रोगों से बचने के लिए बासी रोटी बताई जाती है। प्रत्येक गांव में माता स्थल बने हुये हैं जहां पूजा होती है।
कनीना में बना है माता शीतला मंदिर-
कनीना में माता शीतला मंदिर बना हुआ है तथा लोग प्रसाद के रूप में माता की मंढी पर भारी मात्रा में चावल एवं अनाज अर्पित कर देते हैं। चावल एवं अन्न के ढेर आगामी तीन सप्ताहों तक दिखाई देंगे।
फोटो कैप्शन 07: कनीना का माता मंदिर जहां बासौड़ा धोक लगाई जाती है




अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 551 महिलाओं का सम्मान
-छितरौली स्थित एसडीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुआ भव्य कार्यक्रम
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कनीना की आवाज।
 उपमंडल के गांव छिथरोली स्थित एसडीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 551 महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर उत्साहपूर्वक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें म्यूजिकल चेयर, दौड़, लेमन-नींबू रेस, मोबाइल के प्रयोग पर वाद-विवाद प्रतियोगिता, निबंध लेखन, भाषण तथा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल रहे। इन कार्यक्रमों में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पूरे उत्साह के साथ आनंद उठाया।
विद्यालय की प्राचार्य रेखा दांगी ने बताया कि विद्यालय परिवार द्वारा हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इस प्रकार के आयोजन किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में आपसी भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि महिला केवल एक नहीं बल्कि दो परिवारों को रोशन करती है, इसलिए समाज में महिलाओं का सम्मान और सशक्तिकरण बेहद आवश्यक है। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने बेटियों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने की शपथ भी ली। प्राचार्य रेखा दांगी ने बताया कि विद्यालय में 50 प्रतिशत से अधिक छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और वे पढ़ाई के साथ-साथ खेल व अन्य गतिविधियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। विद्यालय की बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेल और विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
फोटो कैप्शन 05: महिलाओं को सम्मानित करते हुए






कनीना की आवाज ब्लाग से न उठाये कोई समाचार
-वरना कापीराइट के तहत होगा मामला दर्ज
-आरएनआई द्वारा है रजिस्टर्ड
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कनीना की आवाज।
कनीना की आवाज नमक ब्लाग आरएनआई द्वारा  रजिस्टर्ड समाचार पत्र है। इससे यूं की यूं खबर को उठाकर कुछ लोग अनजाने में ग्रुप में डाल देते हैं जो कापीराइट का उल्लंघन है। कहने को तो अज्ञानता कहेंगे लेकिन कानून के सामने अज्ञानता का कोई बहाना नहीं होता। ऐसे में ऐसी गलती दो-तीन बार कुछ लोग कर चुके हैं जो डा. होशियार सिंह यादव कापीराइट अधिकारी द्वारा देखी जा चुकी हैं। भविष्य में अगर कोई ऐसी गलती करेगा चाहे वह जाने या अनजाने में हुई उसके खिलाफ कापीराइट के तहत मामला दर्ज करवाया जाएगा। इसके लिए ग्रुप एडमिन भी जिम्मेवार होगा। कनीना की आवाज ब्लाग की खबर को कापी करके कहीं प्रयोग न करें, सावधानी बरते अन्यथा अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
 कापीराइट मामले में सजा
-अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की कैद और 50,000 रुपए से 2 लाख रुपए तक के जुर्माने तक हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर सजा बढ़ जाती है, और इसमें गैर-जमानती और संज्ञेय  अपराध माना जाता है, जिसमें अवैध सामग्री और उपकरणों को जब्त भी किया जा सकता है।
सजा के मुख्य प्रावधान (भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार)
    धारा 63:पहली बार उल्लंघन करने पर कम से कम 6 महीने की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 लाख रुपएतक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63 (दोबारा उल्लंघन): दूसरी बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 साल की कैद और 1 लाख रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 रुपए लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
    धारा 63बी(कंप्यूटर प्रोग्राम का उल्लंघन): कंप्यूटर प्रोग्राम की उल्लंघनकारी प्रति का जानबूझकर उपयोग करने पर कम से कम 7 दिन की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
    अन्य दंड:उल्लंघन करने वाली प्रतियां और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए जा सकते हैं, और कापीराइट मालिक सिविल मुकदमे के जरिये मौद्रिक हर्जाना भी मांग सकता है।




साल में दो विज्ञापन भी नहीं देने वाले समाचार न भेजे
- अखबार का आदेश है विज्ञापन देने वालों की खबरें लगे अधिक से अधिक
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कनीना की आवाज।
लंबे समय से डा. होशियार सिंह यादव पत्रकारिता में जुटा हुआ है। सुबह से रात 11 जाते हैं तब जाकर पत्रकारिता पूर्ण होती है किंतु न तो समाचार पत्र एक रुपया भी देता और न ही लोग विज्ञापन देते। साल में अनेक समाचार छपने के बाद भी जब विज्ञापन का वक्त आता है तब कोई विज्ञापन नहीं दिया जाता, जिससे अखबार नाराज है और ऐसे पत्रकार जो विज्ञापन नहीं देते उनको हटाने का निर्णय ले लेता है। ऐसे में जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाए वो कृपया मेरे पास/डा. होशियार सिंह यादव के पास समाचार प्रकाशन हेतु न भेजे। इसे कड़ाई से पालन किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई समाचार भेजता है तो स्वयं जिम्मेदार होगा और वे प्रकाशित नहीं होंगे। अपने घर से कंप्यूटर, बिजली, नेट खर्चा, भाग दौड़ करनी पड़ती है वहीं बच्चों से दूर रहना पड़ता है। उस पर भी एक रुपए भी जेब में नहीं आता और खर्चा बढ़ता ही चला जाता है। एक और परिवार वाले नाराज वहीं अखबार वाले नाराज क्योंकि कुछ लोगों की आदत बन गई है कि समाचार के समय तो कहेंगे बड़े-बड़े समाचार छाप दो और विज्ञापन के नाम पर कहेंगे सोचेंगे, देखेंगे या फिर फोन नहीं उठाते, फोन बंद कर लेते हैं।  ऐसे में ऐसे व्यक्ति जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाते वो कृपया माफ करें, समाचार भविष्य में न भेजे। केवल वही व्यक्ति भेजें जिन्होंने कुछ विज्ञापन दिया है या मेरी किसी क्षेत्र में मदद की है ताकि उनका खर्चा में स्वयं वहन कर सकूं। सबसे बड़ी बात है कि अखबार के निर्देशानुसार एक विज्ञापन कम से कम 10 हजार का देने वालों के छह माह समाचार प्रकाशित होंगे, दो विज्ञापन देने वालों के पूरे साल समाचार प्रकाशित होंगे। अधिकतम दिन में एक समाचार प्रकाशित करवा सकता है वह भी स्वयं टाइप करके भेजना होगा। यदि साल में 20000 तक का विज्ञापन देता है उनके लिए यह सुविधा एक साल चलती रहेगी। समाचारपत्रों का कहना है कि उन लोगों पर समय बर्बाद ना करें जो विज्ञापन नहीं देते। एक और मजबूरी है दूसरी और विज्ञापन देना जरूरी है। शायद कनीना क्षेत्र के प्रतिदिन 10 बड़े समाचार अकेले मेरे प्रकाशित होते हैं लेकिन इस होली पर महज एक छोटा सा विज्ञापन मिला जिनसे उम्मीद थी वो कल देंगे, फिर देंगे, आगे देंगे करते-करते होली भी टाल दी। अब ऐसा नहीं होगा। केवल क्राइम के समाचार और उन लोगों के समाचार प्रकाशित होंगे जो विज्ञापन देते हैं या ऐसे व्यक्तित्व जो वास्तव में समाज के लिए  उदाहरण बने हुए हैं।






भारतीय ज्ञान पद्धति एक समग्र और प्राचीन प्रणाली है-डा. यादव
-प्राचार्य बीएम रावत ने सुनाये प्रेरक प्रसंग
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कनीना की आवाज।
भारतीय ज्ञान पद्धति एक समग्र और प्राचीन प्रणाली है जो वेदों, उपनिषदों और अन्य शास्त्रों पर आधारित है। जिसमें दर्शन, विज्ञान ,गणित, खगोल, आयुर्वेद, रसायन, कला, संस्कृति और आध्यात्मिकता शामिल हैं, जिसका उद्देश्य समग्र मानव कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति है। जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से आधुनिक शिक्षा में एकीकृत किया जा रहा है। यह केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान है जो गुरु-शिष्य परंपरा से पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होता रहा है। ये विचार पूर्व विज्ञान शिक्षक एवं लेखक डा. होशियार सिंह यादव स्टेट अवार्डी शिक्षक ने पीएमश्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में भारतीय ज्ञान पद्धति/इंडियन नालेज सिस्टम पर दो सत्रों में चले  व्याख्यान में व्यक्त किये।
  श्री यादव ने कहा कि इस ज्ञान को समग्र एवं  अनुभव और प्रयोग पर आधारित दो भागों में बांटा गया है। समग्र को भी आध्यात्मिक और लौकिक  दो भागों में बांटकर दोनों के संतुलन पर जोर देता है, जिससे व्यक्ति आत्मिक शांति और भौतिक सुख दोनों प्राप्त कर सके जबकि अनुभव और प्रयोग पर आधारित विज्ञान और जीवन दर्शन की प्रणालियां प्रयोग, अवलोकन और गहन विश्लेषण से विकसित हुई हैं, जैसे योग, ज्योतिष, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान प्रमुख हैं।
    शास्त्रीय आधार पर वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, अर्थशास्त्र, चरक संहिता, सुश्रुत संहिता जैसे ग्रंथ इसके आधार हैं, जो जीवन के हर पहलू का मार्गदर्शन करते हैं। ज्ञान का हस्तांतरण गुरु के माध्यम से होता था, जिससे यह परंपरा जीवित रही।
  उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान पद्धति में
सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा, वेदांत,आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित, खगोल विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान,भारतीय कला, वास्तुकला, साहित्य,राजनीति, समाजशास्त्र आदि शामिल किये गये हैं।
भारतीय ज्ञान पद्धति केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रणाली है जो वर्तमान और भविष्य के लिए प्रासंगिक है, जो मानव जीवन को समग्रता और संतुलन प्रदान करती है। वेदों की संख्या चार है जिनमें ऋग्वेद यह वेदों में सबसे प्राचीन और मंत्रों का संग्रह है,यजुर्वेद में यज्ञ और कर्मकांड से संबंधित नियम हैं। सामवेद में गेय और संगीत से संबंधित मंत्र हैं और अथर्ववेद में जादू-टोने, स्वास्थ्य, और तंत्र-मंत्र जैसी बातें हैं।
श्री यादव ने कहा कि आयुर्वेद, जिसका अर्थ है जीवन का विज्ञान, भारत की एक प्राचीन और समग्र चिकित्सा पद्धति है जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर केंद्रित है, वात, पित्त और कफ नामक तीन दोषों के संतुलन के माध्यम से स्वास्थ्य को बनाए रखती है और रोग को जड़ से खत्म करने के लिए जड़ी-बूटियों, आहार, योग और जीवनशैली का उपयोग करती है। यह केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि दीर्घायु और पूर्ण स्वास्थ्य प्राप्त करने का एक विज्ञान है, जो प्राकृतिक उपचारों पर आधारित है।
     शरीर के तीन मूलभूत ऊर्जाएं (वात,पित,कफ) जो संतुलन में होने पर स्वास्थ्य देती हैं और असंतुलित होने पर रोग का कारण बनती हैं। माना जाता है कि शरीर पांच मूल तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) से बना है।
  उन्होंने बताया कि व्यक्ति के दोष और प्रकृति के अनुसार संतुलित भोजन। करना चाहिए।
स्वस्थ जीवन जीने के लिए दैनिक और मौसमी दिनचर्या का पालन होना चाहिए।
 श्री यादव ने पोलैंड के एक गणितज्ञ, गैलीलियो गैलिली की मेहनत के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कैसे पेंडूलम घड़ी, आवर गिलास आदि खोजी गई।
भारत के वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने क्रेस्कोग्राफ नामक यंत्र से पौधों की वृद्धि और बाहरी उत्तेजनाओंके प्रति उनकी प्रतिक्रियाओं को रिकॉर्ड करके साबित किया कि पौधे सजीव होते हैं, दर्द महसूस करते हैं और उनमें जीवन चक्र होता है। उन्होंने दिखाया कि पौधे भी जंतुओं की तरह विद्युत संकेतों के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हैं। इस मौके पर पत्रकारिता, लेखन के पहुलुओं को भी छुआ और प्राचीन कवियों एवं लेखकों के अलावा नारद मुनि, गुरु शिष्य परंपरा पर प्रकाश डाला।
इस मौके पर प्रश्रोत्तरी प्रतियोगिता के जरिये अव्वल रहे  विद्यार्थियों को श्री यादव ने पुरस्कृत करने की घोषणा भी की। विद्यालय के छठी सातवीं आठवीं के समस्त बच्चे हाजिर रहे। शिक्षिका पूजा सिंह एवं उप प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य ने विशेष भूमिका निभाई। इस मौके पर प्राचार्य बीएम रावत, उप प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य,पूजा सिंह टीजीटी हिंदी, विनोद कुमार टीजीटी विज्ञान, रितिका प्रकाश टीजीटी अंग्रेजी, सुमन पारुथी टीजीटी अंग्रेजी, संगीता मिश्रा संगीत अध्यापिका आदि मौजूद रही।
फोटो कैप्शन 03: भारतीय शिक्षा पद्वति पर व्याख्यान देते डा. होशियार सिंह यादव


40 मरीजों ने उठाया स्वास्थ्य लाभ
-हर माह दूसरे रविवार को लगता है मुफ्त चिकित्सा शिविर
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कनीना की आवाज।
 कनीना मंडी के लाला शिवलाल धर्मशाला में उजाला सिग्रस अस्पताल रेवाड़ी द्वारा सेवा भारती संस्थान कनीना के सौजन्य से निशुल्क चिकित्सा एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया जिसमें डा. आसिफ रहमान गैस्ट्रो, डा. हर्ष सामान्य रोग विशेषज्ञ ने मरीजों के स्वास्थ्य जांच करके दवाइयां वितरित की। कैंप में 40 मरीजों ने स्वास्थ्य लाभ उठाया।
 इस शिविर में प्रताप यादव प्रबंधक उजाला सिग्नस अस्पताल रेवाड़ी, जगदीश आचार्य मंडल प्रमुख, सुरेश शर्मा शाखा प्रमुख, श्याम सुंदर महाशय, दिनेश जांगड़ा, मा. सोमदत्त, डा. वेद शर्मा, शिव कुमार अग्रवाल, योगेश अग्रवाल प्रचार प्रमुख आदि उपस्थित रहे।
उन्होंने बताया कि यह शिविर हर महीने के दूसरे रविवार को आयोजित किया जाता है। सेवा भारती संस्था प्रतिदिन आर्य समाज मंदिर में निशुल्क ओपीडी भी आयोजित करती है। सेवा भारती संस्था का कनीना में  चेरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल का निर्माण कार्य चल रहा है।
 फोटो कैप्शन 04: मरीज चिकित्सा शिविर में स्वास्थ्य लाभ लेते हुए

जनशक्ति विकास संगठन ने  वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन करके, पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
संस,जागरण.कनीना। बाबा राधेदास कनीना और लक्ष्मण गिरी विकलांग गौशाला ( विट्ठलगिरी महाराज आश्रम में जनशक्ति विकास संगठन के सहयोग से खादी नेचुरल और अतुल्य कंपनी के संस्थापक और सीईओ गौरव सिंह के जन्मदिन के अवसर पर द्वारा 40 पौधे लगवाए गए। जिसमें आम ,अमरूद ,शहतूत अशोका, सिल्वरआक, जामुन, बरगद, नीम, पीपल और टैकोमा स्टैंस आदि के पौधे लगाए गए। जनशक्ति विकास संगठन के अध्यक्ष दीपक कुमार वशिष्ठ ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सी ई ओ गौरव सिंह ने वृक्षारोपण कार्यक्रम करवाया।
उन्होंने पौधारोपण किया और पर्यावरण को हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया। दीपक कुमार वशिष्ठ ने कहा कि आज हमारे द्वारा लगाए हुए पौधे भविष्य में  बड़े होकर पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाएंगें। इसी कड़ी में  जनशक्ति का संगठन के सदस्य अमित कुमार ने बताया कि आज के समय में हमें ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करने की जरूरत है। वृक्ष हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है और स्वच्छ पर्यावरण का होना पृथ्वी पर पर्यावरण संतुलन हेतु आवश्यक है। पर्यावरण को बचाने के लिए हर नागरिक को स्वैच्छिक रूप से एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा उसकी रक्षा भी करनी चाहिए। लगाए गए पौधे भावी पीढ़ी के लिए जीवन का आधार बनेंगे तथा उनको स्वच्छ हवा और आक्सीजन देने में सहयोग करेंगे।
इस मौके पर मंहत विष्णु गिरी, जनशक्ति विकास संगठन के सदस्य अमित कुमार, समाजसेवी सुरेश कुमार वशिष्ठ, पूर्वी, महिला बाल विकास से सुपरवाइजर मनीषा यादव, नायक सूबेदार सुनील कुमार, राम सिंह साहब, समाज सेवी गुरुचरण गुप्ता, निर्मला, शर्मिला , नव्या, लक्ष , गौरव चौधरी, कृष्णा, शिवम, चिंटू आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 02: पौधारोपण करते हुए



कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-13
 करना चाहा अहित किंतु हुआ हित
-कहावत है जाको राखे सांइया मार सके न कोय
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने बतौर विज्ञान अध्यापक एवं प्राध्यापक 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया है। उन्होंने स्कूल, कालेज निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि दौरान करीब 35 विभिन्न स्कूल प्राचार्यों के साथ काम किया और उनमें से चंद कुतरूं प्राचार्य निकले। जिनका नाम लेते ही तन मन में दर्द होता है। जिनकी भावना हीन रही है। किसी के काम को रोकने आए हैं। सच का साथ नहीं दिया और उन्होंने सदा ही अच्छे और स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों का विरोध किया। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य के कारनामे सामने आये हैं। आज एक कारनामा यहां उजागर किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग में देखने में आया कि कुछ कुतरूं प्राचार्य वास्तव में ऐसी गंदी हरकतों पर चलते हैं की कल्पना भी कठिन होती है। बात उन दिनों की है जब होशियार सिंह बतौर विज्ञान अध्यापक अपने शिक्षण में तल्लीन रहते थे। परंतु कुतरूं प्राचार्य अपने साथ दो राक्षसी प्रवृति के लोगों को पास बिठाए रखता था। उनका काम ही कान भरना था। आज भी वो दोनों राक्षसी जीव जिंदा हैं। एक दिन राक्षसी प्रवृति के जीवों ने कुतरूं प्राचार्य से कहा कि होशियार सिंह आज के दिन ज्यादा वेतन ले रहा है। इनका इतना वेतन नहीं होना चाहिए। इनकी सर्विस बुक को खंगाला जाए और वो वेतनवृद्धियां काट दी जाएं जो फालतू ले रहा है। इन्होंने पूर्व प्राचार्यों से मिलकर अपना वेतन बढ़वा रखा है। फिर क्या था कुतरूं प्राचार्य ने दो-तीन सर्विस बुक के जानकारों को पास बुलाया और कहा कि इसकी सर्विस बुक की गहनता से जांच की जाए।
फिर क्या था गहन जांच की गई। जांच दौरान होशियार सिंह का एक दोस्त भी बैठा हुआ था। दिन भर माथा पच्ची करते रहे और पाया कि अधिक वेतन नहीं अपितु कम वेतन ले रहा है। इनकी एक वेतनवृद्धि कम लगी हुई है। फिर तो कुतरूं आचार्य और राक्षसी परवर्ती के दो जीवों की मानो जान ही निकल गई क्योंकि वे तो कह रहे थे कि होशियार सिंह अधिक वेतन ले रहा है। उन्होंने अब एक योजना बनाई कि इसे यू ही पड़ा रहने दिया जाए। इसको न बताया जाए कि यह कम वेतन ले रहा है किंतु एक सच्चा इंसान और होशियार सिंह का समर्थक कहने लगा कि अब तो इनको वेतनवृद्धि का लाभ देना होगा नहीं तो मैं होशियार सिंह को सारी बात बताऊंगा। होशियार सिंह के दोस्त ने हंसी आ गई और कहा कि तुमने अच्छा किया। तुम तो किसी का बुरा चाह रहे थे परंतु उस दाता को देखिए उसने भला किया। आखिर इसकी एक वेतनवृद्धि कम लगी हुई थी वह भी लग जाएगी। बाद में होशियार सिंह के दोस्त ने बताया कि ऐसे ऐसे कुतरूं प्राचार्य इस धरती पर हैं और उनके करनामे एक के बाद एक कितने ही सामने आए हैं। आखिर कहते हैं ना जाको राखे साइयां मार सके ना कोय। आखिर वह वेतनवृद्धि रोते हुए कुतरूं प्राचार्य ने लगानी पड़ी और धीरे-धीरे कुतरूं चार्य ने एक दिन कहना ही पड़ा कि हमने आपकी एक वेतनवृद्धि और ढूंढ दी है। तब होशियार सिंह के दोस्त ने कहा -तुमने ढूंढ नहीं दी, तुम तो इनका नुकसान करना चाह रहे थे परंतु हो गया लाभ। कितनी जगह आप लोगों ने इसका नुकसान किया है किंतु तुम बाज नहीं आ रहे। एक दिन खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस प्रकार नुकसान करने से एक दिन तुम नुकसान उठाओगे। किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। ऐसा ही हुआ कि दो राक्षसी जीवों ने आखिर उस कुतरूं प्राचार्य को घेर लिया। उसके विरुद्ध आरटीआई लगाई और बड़ी मुश्किल से जान बचाई। इसलिए कहा है कि दूसरों के लिए गड्ढा न खोदा जाए। अगर दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हो तो एक दिन उसमें खुद भी गिरना पड़ सकता है। याद रहे दूसरे को सम्मान देने से सम्मान मिलता है। ध्यान रहे राक्षसी जीवों ने शायद क्षेत्र में सबसे अधिक ब्लैकमेलिंग की है। एक दो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों से मिलकर कभी किसी के विरुद्ध आरटीआई लगते हैं कभी किसी को ब्लैकमेलिंग करते हैं और उनका उद्देश्य एक ही है कि आईटीआई लगा लगाकर तंग करके ब्लैकमेलिंग करना और फिर पैसे आपस में बांटकर खुश होते हैं। ऐसे राक्षसी जीवों का एक दिन बुरा अंत होना होगा। दुर्भाग्य यह है कि इन राक्षसी जीवों को बहुत से लोग बड़े चाव से पास बैठाते है। यह भी सत्य है कि इन जीवों ने जिस थाली में खाया उसमें छेद नहीं इतना बड़ा छेद कर दिया कि उसे फिर चाहे वेल्डिंग करवाते रहो फिर भी वह थाली जुड़ती नहीं। यह जिस थाली में खाते उसी को तोड़ देते हैं। इनकी नीचता के कारनामे तो बहुत अधिक सामने आए। ऐसे कुतरूं प्राचार्यों से सावधान रहना चाहिए। ऐसे ब्लैकमेलर जो होशियार सिंह के विरोधी, नुकसानकर्ता एवं अहित करने वाले आज कई ऐसी संस्थाओं में बैठे मिलते हैं। वो होशियार सिंह को देखकर समझ जाते हैं।




बीआर स्कूल, सेहलंग में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया
-महिलाएं समाज की सबसे बड़ी शक्ति -हरिश भारद्वाज
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कनीना की आवाज।
बीआर स्कूल, सेहलंग में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विद्यालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण और समाज में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन हरिश भारद्वाज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या ज्योति भारद्वाज ने









की।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्या की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा वंदना से की गई। कार्यक्रम का संचालन दीपा  द्वारा किया गया । कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण विषय पर भाषण, कविता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से महिलाओं के योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यालय की महिला शिक्षिकाओं के उत्कृष्ट कार्य और समर्पण को सराहते हुए उन्हें सम्मानित भी किया गया।
चेयरमैन हरिश भारद्वाज ने कहा कि महिलाएं समाज की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उनके बिना किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित और सशक्त महिला पूरे परिवार और समाज को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वहीं प्राचार्या ज्योति भारद्वाज ने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करना है ताकि वे भविष्य में अपने सपनों को साकार कर सकें और देश का नाम रोशन करें।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया तथा एक-दूसरे को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं।
फोटो कैप्शन 01: चेयरमैन व महिला शिक्षिकाओं को सम्मानित करते हुए


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