कुकिंग गैस सिलिंडर के लिए मारामारी
-नहीं मिल रहे समय पर सिलिंडर
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कनीना की आवाज। कनीना और आसपास क्षेत्रों में कुकिंग गैस सिलिंडर की मारामारी चलने लगी है। जब से विदेश में युद्ध चल रहे हैं तब से कुकिंग गैस की कमी झलकने लगी है। यहां तक की कामर्शियल सिलिंडर भी नहीं मिल रहे हैं। अगर यही हालत चलते रहे तो भविष्य में होटल, चाय विक्रेता तथा बर्गर एवं रेहडी आदि पर गैस सिलिंडर से काम करने वालों के कार्य ठप हो जाएंगे। यहां तक की घरेलू गैस सिलिंडर के लिए भी जो फोन निर्धारित किया गया है वह नहीं मिल पा रहा है। परिणाम यह है कि घरेलू गैस सिलिंडर भी बुक नहीं हो पा रहे हैं। किसी का कभी कभार बुक हो जाता है। उपभोक्ता बेहद परेशान है और ब्लैक में भी सिलिंडर लेने के लिए लोग तैयार हो रहे हैं परंतु हकीकत यह है कि सिलिंडर मिल नहीं रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या उन लोगों को आएगी जो छोटे-छोटे सिलिंडर भरवा रहे हैं। उनको या तो सिलिंडर भरकर नहीं दिए जाएंगे या महंगे दामों पर दिये जाएंगे। कुछ समय से यही समस्या चली आ रही है। जहां घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ा दी है वही सिलिंडर भी नहीं मिल रहा है। एक और लोग सिलिंडर की कीमत घटाने की मांग कर रहे थे वही अब सिलिंडर भी नहीं मिल पा रहे हैं। उपभोक्ता परेशान है और उन्होंने मांग की है कि हो सके तो सिलेंडर उपलब्ध करवाये जाए।
वाटर सप्लाई केंद्र के सामने गड्ढे में भरा रहता गंदा पानी
-कुत्ते भी हगते मूतते हैं
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कनीना की आवाज। कनीना-रेवाड़ी सड़क मार्ग पर वाटर सप्लाई केंद्र समक्ष कई गड्ढों में वाटर सप्लाई का गंदा पानी भरा रहता है क्योंकि वाटर सप्लाई से पानी को छोडऩे के लिए जिस कुंजी का प्रयोग किया जाता है वह इन्हीं गड्ढे में लगी होती है। कुंजी के रिसाव होने से जल भरा खड़ा रहता है जिसमें गंदगी मिलती रहती है। वही कुत्ते हगते मूतते रहते हैं। परिणाम यह निकलता है कि जब नल सप्लाई बंद हो जाती है तो यही जल वापस कुंजी से होकर जल सप्लाई में प्रवेश कर जाता है। परिणाम गंदा पानी सप्लाई हो रहा है, बार-बार इस समय में शिकायत की जा चुकी है किंतु शिकायत का कोई असर नहीं हो रहा है।
उपभोक्ता बेहद परेशान है। उपभोक्ता दिनेश कुमार, सुरेश कुमार, महेश कुमार, जितेंद्र आदि ने बताया कि वे इस समस्या के बारे में वाटर सप्लाई विभाग को कई बार जानकारी दे चुके हैं ताकि सुधार किया जा सके किंतु सुधार नहीं किया गया है। जिसके चलते उपभोक्ता गंदा पानी पीने को बाध्य हो रहे हैं। वैसे भी क्षेत्र में वायरस बीमारियां बढ़ रही है। उनमें गंदा पानी भी वायरल बीमारी फैलाने में कारगर साबित होगा।
फोटो कैप्शन 07: वाटर सप्लाई केंद्र के समक्ष भरा हुआ गंदा जल
घरों के ऊपर से गुजरने वाली बिजली के लाइनें हटाई जाए
--तारों को इंसुलेटिड किया जाए या मोटी केबल लगाई जाए
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कनीना की आवाज।कनीना क्षेत्र में अनेकों घरों एवं दीवारों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजर रही है। बिजली विभाग बेहतरीन फलदार और फूलदार पौधों की कटिंग कर जाता है। पेड़ पौधे लगाने वालों में रोष पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एचटी बिजली की लाइन आबादी से दूर से निकली जाए।
एक और जहां हरियाणा सरकार ने भी यह बात कही है कि एचटी लाइन आबादी से दूर से निकाली जाए वहीं उच्च न्यायालय का भी यही आदेश है कि बिजली के लाइन घनी आबादी के बीच से न गुजरी जाए। यदि बिजली बोर्ड से संपर्क किया जाता है और बिजली के खंभों को शिफ्ट करवाने की बात कही जाए तो भारी खर्चा मांगा जाता है। खर्चा भी इतना कि आम आदमी उसे वहन नहीं कर पाता। यही कारण है कि बहुत से दीवारों और प्लाट टेढ़े मेढ़े बना दिए गए हैं क्योंकि बिजली विभाग में जिस भी खाली प्लाट में खंभे गाड़े वो अपनी मनमर्जी से गाड़ दिये। अब वे समस्या बनते जा रहे हैं। कनीना-रेवाड़ी मार्ग पर नहर कटान के पास कृष्ण कुमार, भरपूर सिंह, करतार सिंह, विजयपाल, होशियार सिंह आदि के प्लाट में एचटी लाइन गुजर रही है जो एक दीवार पर तीन पोल लगाकर मालिक के प्लाट का नक्षा ही बदल दिया है। इस संबंध में समाधान शिविर में भी यह बात रखी गई है किंतु कोई गौर नहीं किया गया है। पीएम पोर्टल पर शिकायत करने पर अधिकारी झूठी बातों से खानापूर्ति कर देते हैं।
आश्चर्य तब होता है कि दो लाइन एक साथ गुजारी गई हैं। यदि एक को हटा दिया जाए तो सरकार का माल भी बच जाए और लोगों को राहत भी मिल जाए किंतु विभाग है कि टस से मस तक नहीं होता हे। अब प्रधानमंत्री को इस संबंध में इन अधिकारियों की बार बार शिकायत की जाएगी तथा आंदोलन चलाया जाएगा।
भरपूर सिंह, कृष्ण कुमार, रोहित कुमार, योगेश कुमार, होशियार सिंह आदि ने बताया कि बिजली विभाग ने हद कर रखी है। प्लाट में ही पोल गाड़ दिये हैं। वो भी एक नहीं तीन-तीन पोल टेढ़ेे मेढ़े गाड़कर बेहद परेशान कर दिया है। डा. होशियार सिंह प्रधान ट्रस्ट ने बताया कि उनका ट्रस्ट कार्यालय इसलिए अधर में अटका पड़ा है कि पोल एवं तार उनके प्लाट से नहीं हटाये जा रहे हैं। चार फुट जमीन के अंदर पोल खड़े हैं।
बिजली की तारे घरों के ऊपर से गुजर रही है जो बड़े हादसे को न्योता दे रही है। अनेकों दुर्घटनाएं घट चुकी है। परंतु विभाग लाइन व खंभों को शिफ्ट नहीं करता जिसके कारण कोई भी हादसा हो सकता है। ये बिजली के तार कभी भी टूट सकते हैं। एचटी की लाइन भी घरों के ऊपर से गुजर रही हैं या फिर घनी आबादी से भी बिजली की लाइन गुजर रही है। सभी को अविलंब हटा दिया जाए तो बड़ा हादसा होने से टाला जा सकता है। ऐसे कई दुकानदार और घरों के मालिक परेशान है। उनकी परेशानी को दूर करने का एकमात्र इलाज बिजली की लाइनों को शिफ्ट करना है। या फिर खंभे सीधे करने के उपरांत स्टे लगाकर घरों से दूर से लाइन गुजारी जाए।
बिजली की तारे घनी आबादी के पास से गुजरती हैं। घरों में बड़ी ही मेहनत से फलदार और फूलदार पौधे उगाई जाते हैं जो बड़े होते ही तारों के छूने से खतरा बन जाते हैं। एक तरफ बड़ा हादसा होने का खतरा बन जाता है वहीं बिजली विभाग इन पेड़ पौधों को कभी भी काट जाता है जिसके कारण बेहतरीन दर्जे के फलदार और फूलदार पौधे नष्ट हो जाते हैं। कस्बावासियों की मांग है कि बिजली के तारों को घरों के आसपास से हटाया जाए ताकि फलदार और फूलदार पौधे विकसित हो सके।
बिजली के खंभे मनमर्जी से खाली प्लाटों में गाड़ दिए गये जो अब इनको हटाना बहुत महंगा पड़ रहा है। विभाग इनको भारी राशि जमा करके ही शिफ्ट करता है। जिनकी पहुंच उच्च अधिकारियों तक नहीं है वह बेचारे परेशान होकर घरों में बैठ जाते हैं। जहां उच्च न्यायालय और हरियाणा सरकार ने भी बिजली के तारों को दूर शिफ्ट करने की मांग की बात कही है किंतु विभाग अभी तक शिफ्ट नहीं कर रहा है। अविलंब इन तारों को आबादी से दूर किया जाए।
लोगों ने मांग की है कि दो एचटी लाइन जो पास पास गुजर रही हैं जिनमें से एक का कोई लाभ नहीं है। यदि इसे हटा दिया जाए तो सरकार के बिजली के तार एवं पोल बच जाएंगे किंतु अधिकारी जानबूझकर उनको नहीं हटा रहे हैं। आबादी से थोड़ा दूर हटाकर उनको इंसुलेटिड किया जाए तो भी राहत मिल सकती है या फिर मोटी केबल लगाई जा सकती है। अब देखना है कि अधिकारी जागते हैं या नहीं। वरना आंदोलन किया जाएगा और प्रधानमंत्री को इन अधिकारियों के बारे में अवगत कराया जाएगा।
फोटो कैप्शन 08: बिजली के तार घरों के ऊपर से गुजरते हुए या दीवार पर लगाये खंभे
चोर साहब के कारनामे 88
-चोर साहब ही नहीं उसका कुत्ता भी निभाता है दुश्मनी
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कनीना की आवाज। चोर साहब के कारनामे पहले ही अनेक कडिय़ों में प्रकाशित हो चुके हैं। अब और अनेकों करनामे इकट्ठे कर लिए गए हैं जो भविष्य कडिय़ों के रूप में पढ़ाये जाएंगे लेकिन फिलहाल एक बड़ी अजीब घटना घटी है कि चोर साहब दुश्मनी नहीं निभा रहे अपितु चोर साहब का कुत्ता भी डा. होशियार सिंह से दुश्मनी निभा रहा है। दुश्मनी इस प्रकार की निभा रहा है कि चोर साहब और उसके परिवार ने कुत्ते को ट्रेंड कर रखा है। जब मेरे प्लाट के पास से गुजरते हैं तो उनका कुत्ता भी डा. होशियार सिंह के दरवाजे पर हग मूत जाता है। शायद चोर साहब से दुश्मनी और चोर साहब के कारनामे प्रकाशित करने का परिणाम है कि उसने अपने कुत्ते को ही ट्रेंड कर दिया। बहुत से ऐसे कारनामे सामने आए हैं जो भविष्य में समय रहते जरूर प्रकाशित किए जाएंगे। तब तक पढ़ते रहिए कनीना की आवाज ब्लाग को।
कुतरूं साहब के कारनामे-14
-कुतरूं की आईडी खोलकर तबादलों के आप्शन ही बदल दिए
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कनीना की आवाज। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने बतौर विज्ञान अध्यापक एवं प्राध्यापक 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया है। उन्होंने स्कूल, कालेज निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि दौरान करीब 35 विभिन्न स्कूल प्राचार्यों के साथ काम किया और उनमें से चंद कुतरूं प्राचार्य निकले। जिनका नाम लेते ही तन मन में दर्द होता है। जिनकी भावना हीन रही है। किसी के काम को रोकने आए हैं। सच का साथ नहीं दिया और उन्होंने सदा ही अच्छे और स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों का विरोध किया। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य के कारनामे सामने आये हैं। आज एक कारनामा यहां उजागर किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग में एक ऐसा ब्लैकमेलर, निकृष्ट कामचोर, अज्ञानी व्यक्ति भी हुआ है जो प्राचार्य के तलवे चाटता रहता था और प्राचार्य के तलवे चाट चाट कर खुद भी कुतरूं प्राचार्य बन गया। जिस प्रकार प्राचार्य बना वह सब फर्जीवाड़ा है परंतु यहां उसका एक कारनामा नहीं दो कारनामे दिये जा रहे हैं। हर प्राचार्य की स्कूल में आईडी होती है जिसके जरिए किसी भी कर्मचारी के आंकड़े देख सकता है। हमारे एक साथी होते थे जो प्राध्यापक पद पर कार्यरत थे और आज भी शिक्षा विभाग में कार्यरत है।उन्होंने अपने तबादलों के आप्शन भर दिए और उन्हें खुशी थी कि उनका मनचाहा स्टेशन मिलेगा लेकिन वह नहीं मिला, उनसे सीनियर भी कोई नहीं था। उसने बाद में देखा कि उनके तो आप्शन है किसी ने बदल दिए। ऐसा उस कुतरूं प्राचार्य के उस ब्लैकमेलर साथी ने किया। बेचारा प्राध्यापक रोता रह गया और दूर दराज बदली हो गई। कौन सुनने वाला था। आज तक वो प्राध्यापक उस बात को नहीं भूल पाए हैं। चाहे कितना ही मेहनती इंसान हो लेकिन उस ब्लैकमेलर को नही सुहाता तो उसकी शिकायत करके जरूर तंग करता आया है ताकि ब्लैकमेलिंग कर सके।
डाक्टर होशियार सिंह के साथ उसने इतना बड़ा कारनामा किया कि एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी लेकिन वो ब्लैकमेलर ननहीं कुतरूं प्राचार्य फंसता? हाोशियार सिंह शिक्षा विभाग में कार्यरत थे और अपने मनचाहे स्टेशन पर कार्यरत थे। तभी कुतरूं प्राचार्य की आईडी खोलकर शिकायत और समस्या समाधान अपलोड की गई। बाकायदा उस समस्या को अपलोड होने पर रेफरेंस नंबर भी मिलते थे। जब भी कोई कर्मचारी दोबारा शिकायत करता तो उसको वह शिकायत पहले शो होती थी आपने पहले भी शिकायत की हुई है। एक ऐसा वक्त वक्त आया जब शिक्षा विभाग में उल्टे सीधे तबादले हो गए थे। कर्मियों की मांग पर यह पोर्टल खोला गया था। एक बार डा. होशियार सिंह को सीनियरिटी नंबर नहीं मिले तो उन्होंने पोर्टल पर शिकायत करने की सोची। जब पोर्टल पर शिकायत करनी चाहिए तो उनके पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई कि उनकी तो कोई और भी शिकायत दर्ज है। आश्चर्य के होशियार सिंह के फर्जी साइन करके और एक शिकायत दर्ज करवा दी कि मैं इस विद्यालय में बोर हो चुका हूं। वैसे भी यह मेरे घर के पास का स्टेशन है। मैं यहां इस घर घर के पास वाले स्टेशन पर नहीं रहना चाहता। मुझे कहीं दूर दराज भेजा जाए। नीचे होशियार सिंह के फर्जी साइन कर दिये। जब समस्या सामने आई तो बड़ा आश्चर्य हुआ। होशियार सिंह ने कुतरूं प्राचार्य से कहा कि यह किसने शिकायत की है। मैं एफआईआर करवाता हूं। कुतरूं का चेहरा पीला पड़ गया और कहा कि नहीं यह मैंने नहीं की है। उन्होंने सौगंध खाई और बैताया कि प्रिंसिपल की आईडी से यह शिकायत अपलोढ़ की गई है। कुतरूं प्रिंसिपल की आईडी खोलकर होशियार सिंह के पासवर्ड और आईडी ढूंढ कर शिकायत कर दी। कोई भी कर्मी अपने घर के पास रहने की बजाय दूर दराज क्यों जाना चाहेगा। जब होशियार सिंह को पता चला तो उन्होंने आनन फानन में एक और शिकायत लिखी कि यह शिकायत मैंने नहीं की। यह एप्लीकेशन मेरी नहीं है, मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं, फर्जी हस्ताक्षर करके और यह किसी ने अपलोड की है। तब उनका जवाब आया कि प्राचार्य की आईडी से यह शिकायत की गई है और आपके नाम से गई है। कुतरूं प्राचार्य को मैंने कहा कि इससे बुरी बात क्या हो सकती है, बस वह अवसर था की कुतरूं प्राचार्य के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाई जा सकती थी लेकिन कुतरूं प्राचार्य ने हाथ पैर जोड़कर कहा कि मुझे माफ कर दो। फर्जी शिकायत का उसने साफ नाम बता दिया कि यह ब्लैकमेलर ऐसा कर सकता है। पहले भी ऐसे इसने कई करनामे किए हैं। तब जाकर पता लगा कि दुनिया में कुछ कुतरूं प्राचार्य तो नाम के है। उनको तो शिक्षा विभाग में रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए। जितना जल्दी हो सके उन्हें शिक्षा विभाग से निकाल देना चाहिए, वरना इस समाज के लिए घातक साबित होंगे। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य एक नहीं कई मिल चुके हैं जिनके कारनामे यूं ही आगे प्रकाशित होते रहेंगे।
विश्व किडनी दिवस -12 मार्च
गुर्दे की देखरेख करना बहुत जरूरी- डा. रितिका
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कनीना की आवाज। एक इंसान जीवनभर स्वस्थ रहकर स्वर्गलोक गमन करें इसमें बड़ी खुशी होती है परंतु कुछ लोग अपने शरीर की देखरेख नहीं करते जिसके कारण विभिन्न रोगों से पीडि़त हो जाते हैं। कुछ व्यसनों के शिकार होते हैं जिसके कारण उनके विभिन्न अंग खराब हो जाते हैं। विशेषकर गुर्दे जिनमें एक है, जिन्हें किडनी नाम से जाना जाता है और गुर्दे की यदि सही देखरेख न की जाए विशेष कर जब उच्च रक्त बन जाता है, शुगर की बीमारी बढ़ जाती है उसे समय गुर्दे की अनेक समस्याएं बढ जाती है। धीरे-धीरे गुर्दा खराब हो जाता है और इंसान ऐसी स्टेज पर पहुंच जाता है कि केवल उन्हें डायलिसिस से ही कुछ दिनों तक बचाया जा सकता है। बार-बार यह प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। अंतत ऐसे व्यक्ति की मौत हो जाती है ऐसे में विश्व किडनी दिवस का अर्थ लोगों को स्वस्थ किडनी बनाए रखने के लिए जागरूक करना होता है।
सरकारी अस्पताल में कार्यरत कनीना निवासी डा. रितिका का कहना है कि अद्भुत किडनी के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है। किडनी रोगों में उच्च रक्तचाप होना एक प्रमुख कारण है। यदि किडनी में किस प्रकार की खराबी आ जाती है, इंसान के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन जाती है। डाक्टर का कहना है कि दुनिया भर में 10 में से एक व्यक्ति किडनी की किसी बीमारी से पीडि़त होता है। भारत जैसे देश में भी 10 लाख लोगों मेंकम से कम 1000 लोग कम किडनी से पीडि़त मिलते हैं। किडनी की समस्या का प्रारंभ उपचार है परंतु जब अधिक समय बीत जाता है तो इसका भी कोई इलाज नहीं बचता।
शरीर में दो किडनी होती है और दोनों किडनी रक्त से हानिकारक पदार्थ विशेषकर मूत्र को अलग करने का कार्य करती है। यदि शरीर में ये किडनी काम छोड़ जाए तो धीरे-धीरे खून में विषैले पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है और ऐसे समय में इंसान का जीना दूभर हो जाता है। स्वस्थ किडनी रखने के लिए इंसान को किडनी के समस्या नजर आए तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
डा. रितिका के अनुसार स्वस्थ रहने के लिए गतिहीन जीवन शैली से बचे, संतुलित आहार ले, किडनी की जांच करवाएं, रक्तचाप उचित बनाए रखें,कम से कम 2 लीटर पानी पिये, तंबाकू आदि का सेवन नहीं कर,ें कुछ दवाइयां डाक्टर की सलाह के बगैर न ले। गुर्दे यदि स्वस्थ होंगे तो इंसान भी स्वस्थ रहेगा।
फोटो कैप्शन: डाक्टर रितिका
गौशाला में आया नया नंदी, किया अभिनंदन
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कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में एक थारपार नस्ल का नंदी करोली गौशाला से लाया गया। जिसका कनीना गौशाला में अभिनंदन किया गया।
उधर नीलम देवी अपने नए लोडर का उद्घाटन करने हेतु गौशाला कनीना पहुंची और श्री कृष्णा मंदिर में माथा टेक लोडर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर नीलम देवी ने गौशाला को 5100 रुपए गौशाला को दान दिए।
इस अवसर पर प्रधान भगत सिंह, बलवान सिंह आर्य, मास्टर रामप्रताप, सचिव यश यादव, सह सचिव रामपाल सिंह, दिलावर सिंह बाबूजी, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, दुलीचंद साहब और होशियार सिंह सत्संगी,उप प्रधान रविंद्र बंसल, ओमप्रकाश ठेकेदार, नितिन, तारावती, युद्धवीर सिंह, सतवीर गुगनवाला, राजेंद्र पार्षद, नीलम देवी आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 5:कनीना गौशाला में नंदी का अभिनंदन करते हुए
बव्वा वाली माता की, की गई पूजा तथा बासौड़ा पर्व मनाया गया
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कनीना की आवाज। कनीना में सुबह सवेरे से ही बासौड़ा पर्व मनाया गया। विभिन्न स्थानों पर अन्न व पकवान अर्पित किए गए। सोमवार को भी बासौड़ा पर्व मनाया गया था। लगातार 3 तीन सप्ताह तक यह पर्व चलेगा। उधर बव्वावाली माता नाम से सुबह सवेरे महिलाओं ने माता मंदिर जाकर चूरमा का प्रसाद अर्पित किया। बासौड़ा व बव्वावाली माता का पर्व साथ-साथ चलते हैं। इस दिन जहां चूरमा अर्पित किया जाता है वही हर घर में चूरमा खाया जाता है। महिलाओं ने बताया कि रात के समय चूरमा बनाकर रखते हैं जिसे अगली सुबह सवेरे माता मंदिर में अर्पित किया जाता है और खाया जाता है। पूरा परिवार चूरमा खाता है। यह भी बासौड़ा पर्व का एक पूरक पर्व है। उधर बव्वा में माता का मेला लगा। बाल उतरवाने की रिवाज पूर्ण किया गया। तीन सप्ताह तक यह मेला हर बुधवार को लगेगा।
फोटो कैप्शन 04: बव्वा वाली माता का प्रसाद अर्पित करने जाते हुए महिलाएं
बेटी के जन्मदिन पर मनोज कुमार रामबास ने किया पौधारोपण, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
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कनीना की आवाज। समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से रामबास गांव के निवासी मनोज कुमार रामबास ने अपनी बेटी गुंजन के जन्मदिन के अवसर पर पौधारोपण कर एक सराहनीय पहल की। इस अवसर पर उन्होंने स्कूल तथा मंदिर परिसर के बहारी मुख्य रस्ते पर सुंदरता के पौधे अशोका के लगाए।
मनोज कुमार रामबास ने बताया कि आज के समय में बढ़ते प्रदूषण और घटते पेड़ों को देखते हुए हर व्यक्ति को अपने जीवन के खास अवसरों पर पौधे लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हर व्यक्ति अपने परिवार के जन्मदिन, वर्षगांठ या अन्य खुशियों के अवसर पर एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे तो पर्यावरण को काफी हद तक सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि गांव में प्रत्येक शुभ अवसर पौधारोपण की मुहिम अपना रखी है , गाव के सामूहिक प्रयास से फलदार पौधों का बाग भी सार्वजनिक जगह पर तैयार हो रहा है
गाव के पशु अस्पताल में फलदार पौधे जन्मदिन व अन्य शुभ अवसर पर ही लगाये गये हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह की पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है और इससे लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है।
ग्रामीणों ने सभी से अपील की कि वे भी अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों पर पौधारोपण करें और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।
फोटो कैप्शन 02:बच्ची के जन्म दिन पर पौधारोपण करते हुए
अगिहार स्कूल में मनाया गया धूम्रपान निषेध दिवस
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कनीना की आवाज। लीगल लिटरेसी क्लब अगिहार के तत्वावधान में विद्यालय के प्रांगण में बुधवार को तंबाकू निषेध दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य पूनम यादव ने की विद्यालय के लीगल लिटरेसी क्लब के प्रभारी एवं अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक ने विद्यार्थियों को नशा मुक्ति तथा धूम्रपान से होने वाली हानियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने परिवार तथा गांव के अतिरिक्त आसपास के वातावरण को नशा मुक्त बनाएं,आजीवन नशे से दूर रहें तथा एक स्वस्थ दिनचर्या अपना कर एक सुंदर समाज का निर्माण करें।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रवक्ता अजय कुमार बंसल, राजेंद्र कटारिया, कैलाश देवी, पूनम कुमारी, शशि कुमारी, राकेश कुमार,मुख्य शिक्षक रतनलाल व प्रीतम सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: धूम्रपान निषेध की जानकारी देते हुए।
खेड़ी में लड़की का घोड़ी पर निकाला बनवारा
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव खेड़ी तलवाना निवासी श्री सूबे सिंह ने अपनी सुपुत्री मोनिका के विवाह समारोह के दौरान एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल की। उन्होंने सामाजिक परंपरा से अलग हटकर अपनी बेटी मोनिका को घोड़ी पर बनवारा दिलाकर समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया।
आमतौर पर यह रस्म बेटों के साथ जुड़ी मानी जाती है, लेकिन सूबे सिंह के इस कदम ने लड़का-लड़की के बीच भेदभाव खत्म करने और बेटियों को समान अधिकार देने का संदेश दिया है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी सोच समाज में बेटियों के सम्मान और समानता को बढ़ावा देती है।
गांव और आसपास के क्षेत्र में यह पहल चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
सूबे सिंह ने बताया कि उनकी पुत्री मोनिका एमएससी करने के बाद बीएड कर रही है तथा उनकी शादी फरीदाबाद 12 मार्च को होने जा रही है। उनका शौहर राजस्व विभाग में पटवारी के पद पर कार्यरत है।
फोटो कैप्शन 01: लड़की का बनवारा निकालते हुए
श्री कृष्ण गौशाला कनीना के नंदी बाड़े में एक और नंदी शामिल, नस्ल सुधार कार्यक्रम को मिला बल
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कनीना की आवाज। श्री कृष्ण गौशाला कनीना में गौवंश के संरक्षण और नस्ल सुधार के उद्देश्य से शुरू किया गया कार्यक्रम निरंतर गति पकड़ रहा है। इसी कड़ी में आज गौशाला के नंदी बाड़े में एक स्वस्थ एवं उत्तम नस्ल का युवा थारपारकर नंदी शामिल किया गया। यह नंदी गौशाला कारोली से लाया गया है। इससे पहले भी कारोली गौशाला से एक नंदी लाया जा चुका है जो पूर्णत: स्वस्थ है और गौशाला में अच्छी तरह से अनुकूलित हो चुका है। नए नंदी के गौशाला पहुंचने पर गौभक्तों ने फूलमालाओं से उसका अभिनंदन किया तथा गुड़ और हरा चारा खिलाकर विधिवत उसे नंदी बाड़े में शामिल किया। गौशाला प्रबंधन का मानना है कि इससे गौवंश की उत्तम नस्ल के संवर्धन में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
इसी दौरान श्रीमती नीलम देवी (लिली) अपने नए लोढऱ ट्रैक्टर को शुभ गौ-आशीर्वाद के लिए गौशाला लेकर पहुंचीं। उन्होंने गौशाला स्थित भगवान श्री कृष्ण मंदिर में पुष्प और प्रसाद अर्पित कर ट्रैक्टर का विधिवत पूजन किया। इस शुभ अवसर पर उन्होंने गौशाला को 5100 रुपये की भेंट भी प्रदान की। नीलम देवी की गौसेवा के प्रति गहरी आस्था है और उनके द्वारा इस वर्ष अब तक लगभग 3 लाख रुपये का सहयोग गौशाला को दिया जा चुका है। गौशाला कार्यकारिणी ने उनके इस निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव, सचिव यश कनीनवाल, सहसचिव रामपाल, बलवान सिंह आर्य, ओमप्रकाश आर्य, उपप्रधान दिलावर सिंह, मास्टर रामप्रताप, राजेंद्र (पूर्व पार्षद), नीलम देवी, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, होशियार सत्संगी, दुलीचंद साहब, हरीश कनीनवाल, सतबीर गुगनवाला, युद्धवीर सिंह, सन्नी यादव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
गौशाला पदाधिकारियों ने कहा कि गौवंश संरक्षण, नस्ल सुधार और गौसेवा के कार्य में समाज के सहयोग से ऐसे प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेंगे।
शादी समारोह में डा ओम प्रकाश पूर्व मंत्री ने की शिरकत ****************************************************
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कनीना की आवाज।कनीना निवासी दिव्या पुत्री डॉ नरेंद्र बोहरा की शादी में डॉक्टर ओम प्रकाश पुरव मंत्री ने शिरकत की और वर वधु को आशीर्वाद दिया डॉ ओमप्रकाश यादव का कनीना निवासी सत्यवीर सिंह बोहरा के पुराने साथी रहे हैं इसलिए उनके परिवार में दिव्या की शादी समारोह में पहुंचे इस मौके पर डॉक्टर ओमप्रकाश के अनेक वर्कर शामिल हुए जिन्होंने उनका अभिनंदन किया इस मौके पर डॉक्टर यादव ने कहा कि डॉक्टर नरेंद्र और सत्यवीर सिंह उनके बहुत करीबी रहे हैं किंतु आज वे दोनों स्वर्गवासी है। इस मौके पर मुकेश नंबरदार दीपक चौधरी विनय एडवोकेट कुलदीप बोहरा महेश बोहरा मोहन सिंह पार्षद सवाई सिंह पार्षद राजकुमार पार्षद मनीष पार्षद अश्विनी पूर्व प्राध्यापक अशोक ठेकेदार सतीश जांगिड़ सूबे सिंह अजीत कुमार आदि मौजूद रहे।











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