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Sunday, March 15, 2026



 



हिंदू नववर्ष है हमारा असली नववर्ष, 19 मार्च से शुरू
-अंग्रेजी नव वर्ष के पीछे नहीं भागेंगे-महेश बोहरा
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कनीना की आवाज।
 19 मार्च से हिंदू नव वर्ष, नव संवत्सर 2083 शुरू हो रहा है। यह वह वर्ष है जो वर्षों से मनाया जाता रहा है। हिंदुओं के लिए यह वर्ष नव वर्ष कहलाता है। चाहे अंग्रेजी वर्ष के पीछे पूरा समाज चल रहा हो किंतु हिंदू नव वर्ष को मनाने की परंपरा अनोखी होती है। हिंदू नव वर्ष मनाने को लेकर के विभिन्न लोगों से चर्चा की गई।
** भारत का असली नव वर्ष, विक्रम संवत 2083 जो 19 मार्च से शुरू हो रहा है। राजा विक्रमादित्य द्वारा इस वर्ष शुरुआत की गई थी जो चंद्रमा गणना के अनुसार शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा 18 मार्च से शुरू होगा। राजा विक्रमादित्य ने ही यह वर्ष शुरू किया था जिसने हिंदू प्रजा की भलाई के लिए उन्होंने अनेक कार्य किए थे। उनके कार्य राम राज्य के समान ही माने जाते हैं। इसे पूरे जोश से मनाया जाना चाहिए।
-- महेश बोहरा, हिंदु जागरण
हिंदू नव वर्ष के महीनों के नाम भी बहुत से लोग नहीं जानते जबकि इनका ज्ञान होना हम सभी के लिए गर्व की बात है। इन हिंदू महीनों में चैत्र से शुरुआत होती है। बाद में वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्कशीर्ष, पोष माघ और अंतिम महीना फागुन का होता है। ये महीने बहुत से युवा पीढ़ी को ज्ञान नहीं है जबकि इनका ज्ञान होना जरूरी है। अंग्रेजी वर्ष के सभी महीना के नाम लोग आसानी से बता सकते हैं। इनका शिक्षण भी होना चाहिए।
-- मनीषा यादव ,कनीना
हिंदू नव वर्ष विक्रमादित्य द्वारा चलाया हुआ 19 मार्च से शुरू होगा। उस दिन को नव संवत्सर के रूप में मनाया जाता है। घरों में विभिन्न पकवान बनाकर इस वर्ष की शुरुआत होती है। लंबे समय से लोग घरों में पकवान बनाकर खाते आ रहे हैं। वास्तव में यह राजा विक्रमादित्य को याद करते हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर को तो हम याद रखते हैं किंतु हिंदू नव वर्ष तथा हिंदू कैलेंडर को भूल जाते हैं। यही हमारी भूल है।
-- क्रिश यादव
राजा विक्रमादित्य ने ही नव वर्ष शुरू किया था क्योंकि उन्होंने हूणों को हराकर टैक्सास नदी में अपने अश्वों को पानी पिलाया था और इसी खुशी में इस वर्ष की शुरुआत की थी। ऐसे में इस वर्ष को धूमधाम से मनाया जाना चाहिए। न केवल पुस्तकों में अपितु घर-घर में इस वर्ष को खुशी से मनाना चाहिए तभी हम हिंदू देश के नागरिक कहलाएंगे। यह वर्ष राजा विक्रमादित्य को समर्पित है। ग्रेगोरियन कैलेंडर और हिंदू कैलेंडर में 57 सालों का अंतर है। जब अंग्रेजी कैलेंडर वर्ष में 57 वर्ष जोड़ दिए जाते हैं तो हिंदू नव वर्ष बनता है अर्थात यह ग्रेगोरियन कैलेंडर से 57 वर्ष पहले शुरू हुआ था। यह आज भी चला आ रहा है। यही हमारा असली वर्ष है।
-- जतिन यादव,कनीना
 फोटो कैप्शन 08:महेश बोहरा, मोनिका यादव, क्रिश यादव, जतिन यादव



दो पाटों के बीच पिसता रहा है कनीना
49 वर्ष पहले समाप्त कर दिया था कनीना विधानसभा क्षेत्र को
-बहुत कम लोग जानते हैं कि कनीना निवासी भी होता था मंत्री
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कनीना की आवाज।
 जब जब विस चुनाव आते हैं तो कनीना विधानसभा की याद आती है। कनीना विधानसभा से चुना गया प्रत्याशी मंत्री पद तक पहुंचता था और क्षेत्र का विकास करवाता था। कनीना विधानसभा को तोड़े 49 वर्ष बीत गए हैं। कनीना विधानसभा को पेप्सू, पंजाब विधानसभा तथा हरियाणा विधानसभा में अपने प्रतिनिधि भेजने का श्रेय प्राप्त है।
   1977 के चुनावों के वक्त कनीना के विधानसभा क्षेत्रों की संख्या बढ़ाकर 90 कर दी गई थी किंतु कनीना विधानसभा को तोड़ दिया गया था। कनीना विधानसभा के गांवों को महेंद्रगढ़ और जाटूसाना में मिला दिया गया था। इसके बाद कनीना को जाटूसान विस के तहत गुजार बसर करना पड़ा और 2009 के चुनावों में कनीना को अटेली विस क्षेत्र में मिला दिया गया। वर्तमान में कनीना अटेली विधानसभा के तहत आता है किंतु कनीना उप मंडल है। कनीना उप मंडल बनाए जाने का श्रेय अनीता यादव पूर्व एमएलए एवं पूर्व सीपीएस को जाता है। उधर अटेली कनीना उपमंडल के तहत आता है। कनीनावासियों ने वर्ष 2006 में विधान सभा पुनर्गठन के समय जमकर आंदोलन किया था यहां तक की अटेली की बजाय लोकसभा की तर्ज पर अटेली-कनीना विधानभा नाम रखने की बात भी कही गई थी। जिस प्रकार लोकसभा का नाम महेंद्रगढ़-भिवानी है। किंतु कनीनावासियों को कोई लाभ नहीं मिला। एक बार फिर से आंदोलन शुरू हो गया है और कनीना विधानसभा बहाली की मांग प्रबल हो गई है।


श्वेता तंवर बनी लेफ्टिनेंट , ग्रामीणों ने किया सम्मानित
-खेड़ी तलवाना की है श्वेता
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कनीना की आवाज।
वीरभूमि खेड़ी तलवाना की बेटी श्वेता तंवर का भारतीय सेना में सीधे लेफ्टिनेंट पद पर चयन होने पर पैतृक गांव में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। अतरलाल एडवोकेट के नेतृत्व में आसपास के ग्रामीणों ने श्वेता तंवर को पगड़ी पहनाकर, प्रशस्ति पत्र व अनेक उपहार भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने श्वेता के पिता मनोज तंवर को पगड़ी पहनाकर तथा माता योगिता को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
 अतरलाल ने कहा कि श्वेता तंवर ने यह शानदार उपलब्धि हासिल कर पूरे समाज और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने लेफ्टिनेंट बनकर सिद्ध कर दिया है कि मेहनत और लगन से कोई भी कठिन से कठिन मुकाम हासिल किया जा सकता है। श्वेता तंवर ने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता, परिवार, गरुजन, कड़ी मेहनत और जुनून को दिया। इससे पहले उन्होंने बाबा भोलागिरी धाम तथा गांव के धार्मिक मंदिरों में धोक लगाई और शहीद सैनिकों की मूर्तियों पर माल्यापर्ण कर उन्हें नमन किया। गौरतलब है कि श्वेता का परिवार सैनिक परिवार रहा है। उनके परदादा, दादा और पिताजी ने भी सेना और सशस्त्र बलों में उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। चौथी पीढ़ी में श्वेता तंवर ने यह उपलब्धि हासिल कर अपनी पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाया है। इस अवसर पर पंकज सरपंच खेड़ी, रामनिवास बंसल सरपंच तलवाना, कप्तान ओमपाल सिंह, राजेंद्र सिंह नंबरदार, सुबेदार मेजर सुखपाल सिंह, मंजीत सिंह, सुरेश सिंह, रिपुदमन नंबरदार विक्टोरिया क्रास, पंडित विजय कौशिक, शिब्बू जेलदार, हंसराज, सरजीत, रामकुमार हेडमास्टर, कैप्टन सूरज, नरेश सेन, रामपाल सोनी, सुरेंद्र नंबरदार, ठाकुर बलजीत सिंह,सुरेन्द्र सहित सैकड़ों ग्रामीण और मौजीजान उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 07: श्वेता तंवर को सम्मानित करते ग्रामीण।



थाना सदर कनीना पुलिस ने कार सवार तस्कर को दबोचा, 17 ग्राम स्मैक बरामद
-1350 रुपए की नकदी, एक मोबाइल फोन और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक कार को भी जब्त
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कनीना की आवाज।
पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ के निर्देशानुसार जिला पुलिस द्वारा नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना सदर कनीना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक नशा तस्कर को 17 ग्राम स्मैक (चिट्टा) के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम ने आरोपी के कब्जे से मादक पदार्थ के अलावा 1350 रुपए की नकदी, एक मोबाइल फोन और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक कार को भी जब्त कर लिया है।
थाना सदर कनीना की पुलिस टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि नांगल (मोहनपुर) निवासी संदीप मादक पदार्थ बेचने का अवैध धंधा करता है और वह अपनी में मादक पदार्थ लेकर अटेली की तरफ से आ रहा है। इस सूचना को पुख्ता मानकर पुलिस ने एक रेडिंग पार्टी तैयार की, इसके बाद पुलिस टीम ने गांव नांगल की तरफ नाकाबंदी कर चेकिंग शुरू कर दी। कुछ देर बाद संदिग्ध गाड़ी आती दिखाई दी, जिसे पुलिस ने रोकने का इशारा किया। पुलिस को देखकर चालक ने गाड़ी भगाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए थोड़ी दूरी पर ही उसे घेरकर काबू कर लिया।
पूछताछ में पकड़े गए व्यक्ति ने अपनी पहचान संदीप निवासी नांगल (मोहनपुर) के रूप में दी। पुलिस द्वारा राजपत्रित अधिकारी को मौके पर बुलाया गया, राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में आरोपी की तलाशी ली गई, तो उसके पास से एक थैली में 17 ग्राम स्मैक बरामद हुई। इसके अलावा आरोपी से 1350 रुपए और एक मोबाइल फोन भी मिला, जिसे पुलिस ने नियमानुसार कब्जे में ले लिया। आरोपी संदीप के खिलाफ थाना सदर कनीना में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपी से गहनता से पूछताछ कर रही है कि वह यह मादक पदार्थ कहां से खरीद कर लाया था, ताकि इसमें शामिल अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा सके।




चर्चित कोटिया स्कूल में भेजें प्रतिनियुक्ति पर दो शिक्षक
- ग्रामीणों ने किया था गत दिनों आंदोलन
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कनीना की आवाज।
 कनीना उप मंडल के गांव कोटिया स्थित शहीद हनुमान सिंह माध्यमिक विद्यालय कोटिया में जहां स्थायी शिक्षकों के अभाव में मुख्य द्वार पर ग्रामीणों और अभिभावकों ने नारे लगाए और स्थायी शिक्षकों के भेजने की मांग की थी। जिसको लेकर स्कूल चर्चा में आ गया था। वर्तमान कार्यकारी खंड शिक्षा अधिकारी सुनील खुडानिया ने बताया कि सीहोर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल सीहोर दो शिक्षक प्रतिनयुक्ति पर भेज दिए गए हैं जिनमें विक्रम सिंह विज्ञान अध्यापक जो गणित भी पढ़ाएगा तथा मनफूल सिंह संस्कृत अध्यापक जो हिंदी भी पढ़ाएगा भेज दिए गए हैं। अब उन्होंने बताया कि स्थायी शिक्षक तभी आ पाएंगे जब ट्रांसफर ड्राइव चलेगा। बहरहाल काम चलाने के लिए दो शिक्षकों को नियमानुसार प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। अभी तक कोई भी शिक्षक न तो प्रतिनयुक्ति पर भेजा गया था और न ही कोई स्थायी शिक्षक था। अभी तक चपरासी और बाबू ही स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का कार्य कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि कोटिया विद्यालय में करीब 30 बच्चे 6 से 8 और 39 बच्चे एक से पांच में शिक्षा पा रहे हैं। कक्षा एक से 5 के लिए दो शिक्षक है जबकि 6 से 8 के लिए दो शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर भेज दिए गए हैं। अभी तक स्कूल के विद्यार्थी अक्टूबर 2025 से बिना शिक्षकों के पढ़ रहे थे। उन्हें चपरासी और बाबू ही शिक्षण कार्य करवा रहे थे। उधर कोटिया ग्रामीणों एवं एसएमसी सदस्य देशराज से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने मांग की है कि एमआईएस पर केप्ट की गई सभी पोस्ट खोल दी जाए ताकि ट्रांसफर ड्राइव में शिक्षक आ सके।
  उधर सीहोर स्कूल के प्राचार्य हरिश कुमार प्रधान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके पास 43 बच्चे 6 से आठ तक हैं तथा 3 शिक्षक बचे हैं जो शिक्षण कार्य करवाएंगे। यहांं सामाजिक विज्ञान का पद पहले ही रिक्त है।
फोटो कैप्शन 06: कोटिया स्कूल




व्यक्ति गुम, गुमशुदगी का मामला दर्ज
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कनीना की आवाज।
 गांव मुंडिया खेड़ा से 56 वर्षीय राजकुमार 13 मार्च से घर से कहीं चला गया। उसका अता पता नहीं चला है। उसके पुत्र सुनील कुमार ने पुलिस में गुमशुदगी का का मामला दर्ज करवाते हुए कहा है कि 13 मार्च 2026 को दिन के 1 बजे उसके पिता घर से बिना बताए कहीं चले गये और उनका मोबाइल अब बंद आ रहा है। हर जगह तलाश की गई,कहीं भी नहीं मिला। कनीना पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया है।



कनीना क्षेत्र में सुबह सवेरे बदला मौसम
- बूंदाबांदी हुई, कुछ ओले भी पड़े
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में रविवार को सुबह आकाश में बादल छा गए और बादलों की गडग़ड़ाहट के साथ हल्की वर्षा हुई, कुछ ओले भी गिरे। इससे किसानों की चिंता की रेखाएं बढ़ गई क्योंकि इस समय वर्षा सरसों की फसल के लिए नुकसानदायक साबित होगी। सबसे बड़ा नुकसान सरसों की फसल को हो सकता है। यदि वर्षा होती है तो काट कर डाली गई और पककर तैयार सरसों की फसल को नुकसान होने का अंदेशा बन जाता है। इस समय करीब 20 हजार हेक्टेयर पर सरसों की फसल खड़ी हुई है जिसमें से कुछ की लावणी की जा चुकी है जबकि गेहूं की फसल करीब 9000 हेक्टेयर पर खड़ी हुई है। वर्षा से गेहूं की फसल को लाभ मिल सकता है क्योंकि अभी भी किसान गेहूं की फसल की सिंचाई कर रहे हैं। किसान पल-पल बदलते मौसम पर नजर टिकाये हुए हैं क्योंकि इसी फसल पैदावार से वर्षभर की आय प्राप्त होती है।
 रबी फसल के दौरान कभी अधिक ठंड कभी पाल, कभी ओलावृष्टि से तो कभी वर्षा से नुकसान झेलना पड़ता है। किसान त्वरित गति से सरसों की लावणी कर रहे और गेहूं की लावणी आने में अभी समय है।
 फोटो कैप्शन 3: सरसों की फसल में सिंचाई करते किसान



उल्लास की परीक्षा में खंड स्तर पर 34 परीक्षा केंद्रों पर बैठे 403 बुजुर्ग, 441 ने करवाया था रजिस्ट्रेशन
-कम से कम हस्ताक्षर करना सीख गए
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कनीना की आवाज।
 कनीना खंड के 34 परीक्षा केंद्रों पर उल्लास की परीक्षा संपन्न हुई। 441 बुजुर्गों ने उल्लास के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था जिनमें से 403 बुजुर्ग परीक्षा में बैठे। एक अजब ही नजारा देखने को मिला। 15 वर्ष से 70 वर्ष की आयु के सभी निरक्षरों को पंजीकृत कर उन्हें एक निश्चित अवधि में साक्षर बनाकर उनकी परीक्षा आयोजित करवाई गई है।
मिली जानकारी अनुसार अभी तक मार्च 2025, सितंबर 2025, दिसंबर 2025 और अब मार्च 2026 में परीक्षा हो चुकी है। अब इनका रिजल्ट भी आएगा।
इस समय में कुछ बुजुर्ग जो इस परीक्षा में बैठ रही थी उनसे चर्चा की गई। क्या कहना है उनका-  
***कांता ने बताया कि वैसे तो सामाजिक व्यवहार की सभी बातें जानती है किंतु अपना नाम आदि लिखना नहीं जानती थी। इस परीक्षा से नाम आदि लिखना सीख गई है। 75 वर्ष की आयु में परीक्षा देने पर उन्हें अजीब सा महसूस हुआ है।
--75 वर्षीय कांता
उधर मधुबाला का कहना है कि और कुछ नहीं तो कहीं अपना नाम लिखकर प्रसन्नता होगी। परिवार के बच्चों ने उन्हें इस उम्र में परीक्षा देने जाते हुए खूब हंसाया परंतु उनकी इच्छा है कि एक बार इस परीक्षा में बैठकर कुछ सीखा जाए।
-- मधुबाला 65 वर्ष
 गांव में कभी से वजन, तोल ने छोटी-छोटी गणना करने का ज्ञान हर निरक्षर को भी होता है किंतु इस परीक्षा में उनके परिवार ने साथ दिया है और शिक्षकों के कारण कम से कम अपने परिवार का नाम लिखना सीख लिया है।
-- सौबाई 70 साल
 विद्या देवी का कहना है कि अच्छा है इस प्रकार की परीक्षा देकर कुछ करना।  कुछ बातें पूछी गई उनको हल कर दिया है। भविष्य में छोटी-मोटी बात लिखनी होगी और लिखी जा सकेगी। उन्हें खुशी है कि कम से कम साक्षर बन गई।
 विद्या देवी 76 साल
 फोटो कैप्शन: कांता, मधुबाला, सौबाई और विद्या देवी
फोटो कैप्शन 04: सीहोर परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देते हुए





गोशाला को भेंट की नई पिकअप
-5.11 लाख रुपये भी दिये दान
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कनीना की आवाज।
गोमाता की सेवा को जीवन का उद्देश्य मानने वाले कनीना निवासी समाजसेवी हरीश कनीनवाल ने श्रीकृष्ण गौशाला कनीना को लगभग 7 लाख 65 हजार रुपए मूल्य की नई महिंद्रा पिकअप गाड़ी भेंट की तथा अपने दादा जी स्वर्गीय गुगनराम यादव की पुण्य स्मृति में गौशाला में एक बाड़े के लिए खोर एवं टीन शेड निर्माण हेतु 5 लाख 11 हजार रुपए नकद दान किए।
इस अवसर पर हरीश कनीनवाल ने कहा कि समाज की सेवा और गोसेवा के लिए वे सदैव तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में कमाए गए धन का यदि दान न किया जाए तो उस धन का नाश निश्चित है। परमात्मा की कृपा से ही व्यक्ति को दान-धर्म करने का अवसर मिलता है। उन्होंने भविष्य में भी गौशाला को सहयोग देते रहने का आश्वासन दिया।
इसी अवसर पर सूबेदार मेजर अर्जुन सिंह ने भी अपने पिता स्व. वीर कुमार, शौर्य चक्र की पुण्य स्मृति में गौशाला में पानी की खेल एवं खोर के निर्माण के लिए 11 हजार रुपए का दान दिया।
गोभक्त अधिवक्ता कैलाश गुप्ता ने उनका आभार जताया।
इस अवसर पर गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव, सचिव  यश कनीनवाल, सह-सचिव रामपाल, बलवान सिंह आर्य, ओमप्रकाश आर्य भडफ़, उपप्रधान दिलावर सिंह, रवींद्र बंसल, मास्टर रामप्रताप, पूर्व पार्षद राजेंद्र, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, होशियार सत्संगी, दुलीचंद, सतबीर गुगनवाला, राजकुमार डीलर, सूबेदार अभय सिंह, युद्धवीर सिंह,



















सूबे सिंह, पार्षद नीतीश गुप्ता, पार्षद होशियार सिंह, पार्षद राजकुमार, पार्षद नरेंद्र फौजी, मनीष कुमार, बाबू प्रीतम सिंह, पं. रतन लाल शर्मा, हेडमास्टर बिजेंद्र यादव, हेडमास्टर कृष्ण प्रकाश गुरुजी,  पूर्व प्राचार्य अशोक पैकन सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: कनीना गोशाला को नई पिकअप भेंट करते हुए।


कनीना विधानसभा क्षेत्र पुन: बहाली की मांग को लेकर बैठकर आयोजित
-26 अप्रैल को क्षेत्र के विभिन्न गांवों के प्रतिनिधि लेंगे भाग
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कनीना की आवाज। 
कनीना के परम संत मोलडऩाथ आश्रम पर कनीनिवासियों की एक बैठक कैप्टन भरपूर सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में कनीना के अनेक प्रमुख जनों ने भाग लिया। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई किंतु प्रमुख मुद्दा था कनीना विधानसभा का पुनर्गठन किया जाए। 2006 में जब विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन किया तब भी इस प्रकार की बैठक बुलाई गई थी किंतु परिणाम शून्य निकला। अब 20 साल बाद फिर से कनीना के लोग सक्रिय हो गए हैं और एक बैठक बुलाकर उसमें मुद्दा रखा कि एकजुट होकर कनीना विधानसभा को बहाल करवाने की मांग की जाए। साथ में यह भी मुद्दा रखा गया कि विभिन्न 14 वार्डों में प्रत्येक वार्ड से 11-11 सदस्य चुने जाए जो इसे क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सके। साथ में यह भी निर्णय लिया गया कि अगली महासभा 26 अप्रैल 2026 को बाबा मोलडऩाथ मंदिर परिसर में आयोजित की जाएगी।
इस बैठक में दीपक चौधरी, विनय यादव, राम प्रताप, कमल यादव, हरेंद्र शर्मा, मंगल सिंह, नवीन कनीनवाल, देवेंद्र कुमार, मुकेश नंबरदार, कृष्ण प्रकाश, जय नारायण, सूबे सिंह, सुभाष, विजेंद्र सिंह पूर्व मुख्य अध्यापक, कृष्ण सिंह प्रकाश,  राजेंद्र यादव, दमन यादव, कृष्ण सिंह, नरेंद्र सिंह नवीन यादव, लक्ष्मी नारायण, राकेश, दीपक, देवेंद्र सुनील कुमार, संजीव कुमार राजेंद्र सिंह पूर्व पार्ष,द अशोक कुमार आदि भारी संख्या मौजूद रहे।
1977 तक रहा है विधानसभा क्षेत्र-
  कभी कनीना भी विधानसभा क्षेत्र होता था और कनीना से चुना गया प्रतिनिधि क्षेत्र का विकास करवाता था। वर्ष 1972 के चुनावों के बाद भी कनीना विधानसभा क्षेत्र था। 1977 तक प्रदेश में 81 विधानसभा क्षेत्र आते थे जिनमें कनीना भी एक था। किंतु अब जब प्रदेश में 90 विधानसभा क्षेत्र हैं कनीना को वंचित किया गया है। एक बार फिर से विधानसभा पुनर्गठन की आहट सुनाई पडऩे लगी है। वर्ष 2027 में विस का पुनर्गठन होना है। कनीना को इस बार विधानसभा का फिर से दर्जा मिलने की पूरी आश है।
उल्लेखनीय  कभी पंजाब सरकार में कनीना से सूबेदार ओंकार सिंह मंत्री हुआ करते थे जिन्होंने कनीना के पशु अस्पताल का निर्माण करवाया था। उस वक्त कनीना के सूबेदार ओंकार सिंह की धाक होती थी। तत्पश्चात 1962 कनीना सुरक्षित विधानसभा से बनवारीलाल जनसंघ से चुनाव लड़े और वे चुने गए। इसके बाद हरियाणा का गठन हुआ और कनीना विधानसभा से वर्ष 1967 में राव दिलीप सिंह, वर्ष 1968 के चुनावों में राव दिलीप सिंह और वर्ष 1972 के चुनावों में फिर से राव दिलीप सिंह चुने गए थे।
 वर्ष 1977 के चुनावों में कनीना विधानसभा क्षेत्र को तोड़कर जाटूसाना में मिला दिया गया था। इस प्रकार जिला महेंद्रगढ़ एवं सियासत रेवाड़ी जिला के तहत आती थी। वर्ष 1977 से 2008 तक कनीना जाटूसाना विधानसभा के तहत आता रहा किंतु वर्ष 2009 के चुनावों में इसे अटेली विधानसभा के तहत शामिल कर दिया गया और आज तक कनीना को उसका न्याय नहीं मिल पाया।
फोटो कैप्शन 02: कनीना में आयोजित महासभा का नजारा

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