ताजा समाचार/विडियो/लेख का बेहतर ब्लाग Best Blog for News/Video & Lekh
Monday, March 16, 2026
9 दिन चलने वाले नवरात्रों के पीछे छुपा है वैज्ञानिक तथ्य-डा होशियार सिंह
-एलर्जी से बचने के लिए किया जाता है व्रत
**************************************************
********************************************************
***************************************************
कनीना की आवाज। चैत्र नवरात्रे 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं तथा लगातार 9 दिन माता के नौ रूपों की पूजा का विधान है। इस बार नवरात्रे रामनवमी 27 मार्च को संपन्न हो जाएंगे। वास्तव में नवरात्रों के पीछे भी वैज्ञानिक तथ्य छुपा हुआ है। विज्ञान के जानकार डा. होशियार सिंह यादव कनीना का कहना है कि नवरात्रे वर्ष में दो बार आते हैं जिसमें सर्दी से गर्मी में या गर्मी से सर्दी में प्रवेश किया जाता है जिन्हें शारदीय नवरात्रे तथा चैत्र नवरात्र नाम से जाना जाता है। 19 मार्च से शुरू हो रहे नवरात्रों को चैत्र नवरात्रे नाम से जाना जाता है। इनके पीछे भी विज्ञान का गहरा राज छिपा हुआ है। वास्तव में जब मौसम बदलता है उस वक्त नया अनाज आ जाता है और नया अनाज सीधे ग्रहण करने से शरीर में कुछ उल्टे प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में शरीर से पुराने अन्न को पूर्णतया समाप्त करके ही नया अन्न धारण करना चाहिए। 9 दिनों के व्रत के पीछे यही कारण है कि शरीर से पुराना अनाज समाप्त किया जाता है। नौ दिनों में पुराना अनाज शरीर से रस एवं खून में बदल जाता। तत्पश्चात ही नया अन्य धारण किया जाता है जो शरीर में किसी प्रकार का नुकसान नहीं करके स्फूर्ति का संचार करता है। वास्तव में मौसम बदलता है बदले मौसम के अनुरूप ही नया अन्न ग्रहण करना चाहिए। यद्यपि नवरात्रों में जौ उगाये जाते हैं जो 9 दिनों तक बड़ा हो जाता है तथा इस हालात में चले जाते हैं कि उनको व्रत के अंतिम दिन ऊपर से काटकर जवारे रस बनाकर पीना चाहिए और व्रत खोलना चाहिए। उनमें कैंसर तक लडऩे की क्षमता होती है। अक्सर लोग इन 9 दिनों तक उगाए गए जौ को किसी नदी, नाले आदि में बहा कर इतिश्री समझ लेते हैं। और तभी से कहावत चली है गंगा में जौ उगाना। वास्तव में इन उगाये हुये जौ से दोनों लाभ उठाये जा सकते हैं। ऊपर से एक से 2 इंच काटकर रस बनाकर पीना चाहिए और मां के नवरात्र संपन्न करने चाहिए जो शरीर में ऊर्जा स्फूर्ति ,प्रतिरोधकता पैदा करते हैं।
डा यादव बताते हैं कि सबसे बड़ा तथ्य नवरात्रों के पीछे छुपा है कि 9 दिन व्रत करने से शरीर बिल्कुल शुद्ध किया जाता है। अनाज पूणरूप समाप्त हो जाता है और फिर नए मौसम के अनुसार अनाज को ग्रहण करते हैं तो बेहद स्फूर्ति देता है। अफसर इन 9 दिनों में माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है पुराने वक्त से चली आ रही है।
उनका कहना है कि पुराने वक्त से इसी दिन से नए वर्ष की शुरुआत होती है। 19 मार्च को 2083 नव वर्ष शुरू होगा जो राजा विक्रमादित्य द्वारा चलाया हुआ है जिन्होंने हूणों पर विजय पाकर यह नव वर्ष शुरू किया था। ग्रामीण क्षेत्रों में से सम्मत संवत,नव वर्ष आदि नामों से जाना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में जहां गुड़ी पाड़वा, विक्रमी संवत आदि नामों से जानते हैं वहीं से नव संवत्सर नाम से भी जानते हैं। विभिन्न पकवान बनाकर इस नए वर्ष का स्वागत किया जाता है जो पूर्वजों से चला आ रहा है।
देखने में आता है की बच्चे नवरात्रि में मां के नौ रूपों तक का ध्यान नहीं रखते। बहुत से व्रत धारण करने वाले भी मां के नौ रूपों का ध्यान नहीं दे पाते वास्तव में नौ रूप शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री नाम से जाने जाते हैं वही
हर बच्चे बच्चे की जुबान पर जनवरी से दिसंबर तक महीनों के नाम हिंदी व अंग्रेजी में याद है किंतु हिंदू कैलेंडर जो अकसर मार्च-अप्रैल में शुरू होता है के बारे में तथा महीनों के नाम नहीं जानते। ये नाम चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भाद्रपद आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष ,पौष, माघ और फागुन हैं। 9 दिनों तक अन्न न ग्रहण करके अधिक से अधिक जल धारण करें तो विज्ञान का तथ्य कहता है कि शरीर पूर्णता शुद्ध हो जाएगा साथ में अन्न की बजाय फल आदि का प्रयोग करें ताकि शरीर में शुद्धता आये। अचानक नया अन्न प्रयोग करने से एलर्जी आदि की संभावना बढ़ जाती है, उससे बचने का सबसे सरल उपाय है माता के नौ रूपों की का व्रत धारण करना चाहिए।
फोटो-डा. होशियार सिंह यादव
30 साल पहले होती थी जौ की बेहतर खेती
-जौ शून्य हेक्टेयर पर पहुंचा, व्रतों में याद आते हें जौ
**************************************************
********************************************************
***************************************************
कनीना की आवाज। किसान जौ एवं चने की खेती करना भूलते जा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जौ की रोटी, राबड़ी तथा धानी आदि बनाकर प्राकृतिक ठंडक प्राप्त करते हैं। अब न तो जौ की खेती होती और न राबड़ी एवं धानी।
1986-87 तक कनीना क्षेत्र की करीब 33 हजार हेक्टेयर भूमि हजारों एकड़ में जौ की खेती की जाती थी। वैसे तो जौ न केवल पूजा आदि बल्कि हवन आदि में भी काम आता है। जब नवरात्रे चलते हैं तो जौ की विशेष मांग होती है। गेहूं-चना एवं जौ -चने की मिश्रित खेती की जाती थी। 1982 में स्ंिप्रकलर फव्वारा आया जिसके चलते चने की खेती घटती जा रही है और वर्तमान में तो चना अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
जौ को गंगा में डालने, पूजा अर्चना,हवन आदि में काम आता है वहीं पैदावार 40 मण प्रति हेक्टेयर तथा भाव 2200 रुपये क्विंटल तक होता है। होली के पर्व पर जहां जौ को भूनकर पूरा परिवार चखता है और तत्पश्चात ही लावणी की शुरुआत होती आ रही है। एक जमाना था जब हर घर में जौ की खेती की जाती थी जिसे पूरी गर्मी आनंद से रोटी एवं अन्य रूपों में प्रयोग किया जाता था। जौ की रोटी खाने के लिए या फिर धानी बनवाने के लिए दूसरे क्षेत्रों से जौ खरीदकर लाते हैं।
जौ की रोटी प्रचलन था जो सेहत के लिए अति लाभकारी मानी जाती थी। राबड़ी चाव से खाते हैं वहीं जौ का प्रयोग बीयर आदि बनाने में लेते हैं। शरीर में ठंडक के लिए राबड़ी को गर्मियों में खाते हैं किंतु अब राबड़ी की बजाय चाय पर आ पहुंचा है।
कनिष्क चौहान को किया जाए सम्मानित
--धनौंदा में बैठक में लिया यह फैसला
**************************************************
********************************************************
***************************************************
कनीना की आवाज। बसपा के महेन्द्रगढ़ जिला खेल प्रकोष्ठ ने हरियाणा सरकार से अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप 2026 की विजेता भारतीय टीम के हरियाणा निवासी आलराउंडर खिलाड़ी कनिष्क चौहान को सम्मानित करने की मांग की है। उक्त मांग धनौन्दा में आयोजित खेल प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं की बैठक में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पास कर उठाई गई। अतरलाल ने मुख्य अतिथि के तौर पर बैठक में भाग लिया तथा अध्यक्षता खेल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डा. मुकेश तंवर ने की।
बैठक में मुख्य अतिथि अतरलाल ने कहा कि अंडर-19 विश्व कप 2026 की विजेता भारतीय टीम में हरियाणा के इकलौते खिलाडी कुलाना गांव निवासी कनिष्क चौहान ने विश्व कप 2026 की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर हरियाणा का नाम रोशन किया है। उन्हें अनेक स्थानों पर ग्रामीणों द्वारा सम्मानित किया जा रहा है परन्तु हरियाणा सरकार की तरफ से अभी तक उनको सम्मानित न किए जाने और न ही उनके लिए कोई नगद ईनाम की घोषणा किए जाने से प्रदेश के खिलाडिय़ों तथा जनता में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा क्रिकेट वर्ल्डकप अथवा प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता जीतने वाले खिलाडिय़ों को 1.5 करोड़ से 6 करोड़ रुपए का नगद ईनाम देने की नीति बनाई हुई है। 2025 में एक विश्वकप जीत के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री ने हरियाणा की एक महिला क्रिकेटर को 1.5 करोड़ रुपए का नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। अभी हाल में बिहार सरकार ने भी अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप 2026 की विजेता भारतीय टीम के बिहार निवासी खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी को 50 लाख रुपए का नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया है। इसलिए हरियाणा सरकार को भी हरियाणा के क्रिकेट खिलाड़ी कनिष्क चौहान को 6 करोड़ रुपए नगद ईनाम व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कनिष्क चौहान ने जि़म्बाब्वे में खेले गए अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ शानदार पारी खेलते हुए 20 गेंदों में 37 रन बनाकर भारतीय टीम का स्कोर 411 तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद गेंदबाजी में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए दो विकेट हासिल किये तथा इंग्लैंड की तरफ से शतक बनाने वाले फाल्कनर जैसे जमे हुए बल्लेबाज को आउट कर टीम इंडिया की जीत को सुनिश्चित कर दिया। वे आगामी आईपीएल में रायल चैलेंजर्स बैंगलुरु टीम का हिस्सा होंगे।
फोटो कैप्शन 06: खेल प्रकोष्ठ की बैठक में प्रस्ताव पास करते सदस्य।
बीइओ ने विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर दिया जोर
-कार्यभार ग्रहण करते ही पहुंचे मंडी स्कूल में
**************************************************
********************************************************
***************************************************
कनीना की आवाज। राजकीय माडल संस्कृति स्कूल, चरखी दादरी के प्राचार्य रहे सुरेश यादव ने आज खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के बाद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी का दौरा किया। विद्यालय पहुंचने पर उनका स्वागत प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक, सीहोर स्कूल के प्राचार्य हरीश यादव, विजय पाल महक तथा वरिष्ठ प्रवक्ता रवि कुमार यादव ने किया।
इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश यादव ने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र से विद्यालयों में नामांकन बढ़ाना तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा लागू की जा रही नवाचार आधारित शिक्षा पद्धति को विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा तथा नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
दौरे के दौरान उन्होंने विद्यालय में संचालित शूटिंग रेंज का निरीक्षण किया और खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी खेल एवं अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहयोग करेंगे।
इसके अतिरिक्त उन्होंने विद्यालय की विभिन्न प्रयोगशालाओं, लैंग्वेज लैब, खेल मैदान तथा हाल ही में कन्या विद्यालय से सह-शिक्षा संस्थान में परिवर्तित हुए विद्यालय की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया।
खंड शिक्षा अधिकारी ने इस दौरान हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की चल रही दसवीं कक्षा की परीक्षा के परीक्षा केंद्र का भी निरीक्षण किया और परीक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
फोटो कैप्शन 05: कनीना मंडी स्कूल में बीइओ का स्वागत
सेवानिवृत्ति की खुशी में दिए 11-11 हजार रुपए गौशालाओं को दान
-वीरेंद्र शास्त्री हैं ढाणा के निवासी
**************************************************
********************************************************
***************************************************
कनीना की आवाज। वीरेंद्र शास्त्री ढ़ाणा निवासी जो 28 फरवरी 2026 को पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भोजावास से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने इसी खुशी में विभिन्न गौशालाओं में 11-11 हजार रुपए का दान दिया। वीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि हेमादास गौशाला भोजावास में 11000 रुपए का दान दिया है तत्पश्चात 11000 रुपए का ही दान श्रीकृष्ण गौशाला कनीना को दिया है।
कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में उनका सम्मान किया गया। उन्होंने श्रीकृष्ण गौशाला में चारे आदि के लिए 11 हजार रुपए दान दिए। इस मौके पर प्रधान भगत सिंह के मार्गदर्शन में पूर्व शिक्षक राम प्रताप,सह सचिव रामपाल, दीनदयाल तथा कनीना श्रीकृष्ण गौशाला के पदाधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। इस मौके पर पूर्व शिक्षक रामप्रताप ने कहा कि गायों के लिए जो दान देता है वह सच्चा दान होता है। दान देने से सभी पाप दूर हो जाते हैं। हमें प्रतिदिन कुछ न कुछ गायों के लिए जरूर दान देना चाहिए।
फोटो कैप्शन 02: वीरेंद्र शास्त्री गायों के लिए दान देते हुए
सुरेश कुमार सेहलंग निवासी ने बतौर खंड शिक्षा अधिकारी कनीना कार्यभार किया ग्रहण
- पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी राज सिंह भी रहे उपस्थित
**************************************************
********************************************************
***************************************************
कनीना की आवाज। चरखी दादरी से तबादला होकर कनीना में सेहलंग निवासी सुरेश यादव ने बतौर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इस मौके पर अनेक अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
मिली जानकारी अनुसार सुरेश कुमार ने 24 नवंबर 1995 में बवाना में बतौर जेबीटी शिक्षक शुरुआत की थी। तत्पश्चात लावन में सीआरसी बने। धनौदा में विज्ञान अध्यापक रहे। तत्पश्चात रेवाड़ी के लखी गांव में मुख्य अध्यापक बने। बालरोड में भी मुख्याध्यापक रहे। स्याणा में प्रिंसिपल बतौर कार्य किया। तत्पश्चात 4 जनवरी 2016 को चरखी दादरी में बतौर प्राचार्य कार्यभार ग्रहण किया था। अब सोमवार को उन्होंने कनीना के खंड शिक्षा अधिकारी बतौर कार्यभार ग्रहण कर लिया है। वे 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। इस मौके पर जहां पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी कनीना राज सिंह, प्राचार्य एवं कार्यकारी खंड शिक्षा अधिकारी सुनील खुडानिया, प्राचार्य करीरा रामस्वरूप, प्राचार्य रामपाल, पूर्व मुख्याध्यापक राजकुमार, मुख्य अध्यापक वीरेंद्र जांगिड़, ओम प्रकाश असिस्टेंट, राजेंद्र सिंह स्याणा, ओमप्रकाश पंकज कुमार, वरिष्ठ प्राध्यापक रवि कुमार, सुनील प्रधान, कविता एवं रोशनी आदि उपस्थित रहे। उनका फूलमालाओं से स्वागत किया। इस मौके पर सुरेश कुमार ने कहा कि उनकी इच्छा है कि सभी को साथ लेकर चला जाए और सभी कार्य समय पर पूर्ण किया जाए। कोई कर्मचारी उनके कार्यालय से निराश होकर न लौट।े सभी के कार्य समय पर पूर्ण किया जाए। इस मौके पर उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी के स्टाफ से भी मुलाकात कर उन्हें आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
फोटो कैप्शन 01: सुरेश कुमार कार्यभार ग्रहण करते हुए साथ में पासपोर्ट सुरेश कुमार खंड शिक्षा अधिकारी
रसूलपुर और उच्चत में चला डोर टू डोर नशा मुक्त अभियान
-नए कानूनों के प्रति किया जागरूक
**************************************************
********************************************************
***************************************************
कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र के गांव रसूलपुर और उच्चत में चला डोर टू डोर नशा मुक्त अभियान, पुलिस ने ग्रामीणों को नशा मुक्ति और नए कानूनों के प्रति किया जागरूक।
कनीना। युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने और आमजन को कानूनी रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से डोर टू डोर नशा मुक्त अभियान के तहत गठित पुलिस टीम द्वारा थाना सदर कनीना के अंतर्गत आने वाले गांव रसूलपुर और उच्चत का भ्रमण किया गया। इस अभियान के दौरान पुलिस टीम ने ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया। गांव रसूलपुर की आंगनबाड़ी और गांव उच्चत की महिला चौपाल में आयोजित इन बैठकों में पुलिस ने विशेष रूप से युवा वर्ग को नशे के घातक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से समझाया और उन्हें इस सामाजिक बुराई से दूर रहकर एक स्वस्थ जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान निरीक्षक शारदा और पुलिस टीम ने बताया कि जो भी नशा पीडि़त व्यक्ति स्वेच्छा से इस दलदल से बाहर आना चाहता है, पुलिस उसकी हर संभव मदद करेगी। इसके साथ ही मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 के बारे में भी ग्रामीणों को विस्तृत जानकारी दी गई।
नशा मुक्ति के प्रयासों के साथ-साथ इन बैठकों में कानूनी जागरूकता पर भी विशेष बल दिया गया। पुलिस टीम ने उपस्थित ग्रामीणों को नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम—के बारे में सरल भाषा में विस्तार से समझाया। इस महत्वपूर्ण जन-संवाद कार्यक्रम में गांव रसूलपुर से सरपंच प्रतिनिधि सतबीर सिंह, पंच ईश्वर सिंह तथा गांव उच्चत से सरपंच कुलदीप सहित दोनों गांवों के कई गणमान्य व्यक्ति और ग्रामीण उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04:रसूलपुर गांव में नशे के नुकसान की जानकारी देते हुए पुलिस
19 मार्च से शुरू होगा हिंदु नव वर्ष 2083
-कम लोगों को है हिंदु नव वर्ष की जानकारी
**************************************************
********************************************************
***************************************************
कनीना की आवाज। 19 मार्च से हिंदू नव वर्ष, नव संवत्सर 2083 शुरू हो रहा है। यह वह वर्ष है जो वर्षों से मनाया जाता रहा है। हिंदुओं के लिए यह वर्ष नव वर्ष कहलाता है। चाहे अंग्रेजी वर्ष के पीछे पूरा समाज चल रहा हो किंतु हिंदू नव वर्ष को मनाने की परंपरा अनोखी होती है। हिंदू नव वर्ष मनाने को लेकर के विभिन्न लोगों से चर्चा की गई।
** भारत का असली नव वर्ष, विक्रम संवत 2083 जो 19 मार्च से शुरू हो रहा है। राजा विक्रमादित्य द्वारा इस वर्ष शुरुआत की गई थी जो चंद्रमा गणना के अनुसार शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा 18 मार्च से शुरू होगा। राजा विक्रमादित्य ने ही यह वर्ष शुरू किया था जिसने हिंदू प्रजा की भलाई के लिए उन्होंने अनेक कार्य किए थे। उनके कार्य राम राज्य के समान ही माने जाते हैं। इसे पूरे जोश से मनाया जाना चाहिए।
-- महेश बोहरा, हिंदु जागरण
हिंदू नव वर्ष के महीनों के नाम भी बहुत से लोग नहीं जानते जबकि इनका ज्ञान होना हम सभी के लिए गर्व की बात है। इन हिंदू महीनों में चैत्र से शुरुआत होती है। बाद में वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्कशीर्ष, पोष माघ और अंतिम महीना फागुन का होता है। ये महीने बहुत से युवा पीढ़ी को ज्ञान नहीं है जबकि इनका ज्ञान होना जरूरी है। अंग्रेजी वर्ष के सभी महीना के नाम लोग आसानी से बता सकते हैं। इनका शिक्षण भी होना चाहिए।
-- मोनिका यादव ,कनीना
हिंदू नव वर्ष विक्रमादित्य द्वारा चलाया हुआ 19 मार्च से शुरू होगा। उस दिन को नव संवत्सर के रूप में मनाया जाता है। घरों में विभिन्न पकवान बनाकर इस वर्ष की शुरुआत होती है। लंबे समय से लोग घरों में पकवान बनाकर खाते आ रहे हैं। वास्तव में यह राजा विक्रमादित्य को याद करते हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर को तो हम याद रखते हैं किंतु हिंदू नव वर्ष तथा हिंदू कैलेंडर को भूल जाते हैं। यही हमारी भूल है।
-- क्रिश यादव
राजा विक्रमादित्य ने ही नव वर्ष शुरू किया था क्योंकि उन्होंने हूणों को हराकर टैक्सास नदी में अपने अश्वों को पानी पिलाया था और इसी खुशी में इस वर्ष की शुरुआत की थी। ऐसे में इस वर्ष को धूमधाम से मनाया जाना चाहिए। न केवल पुस्तकों में अपितु घर-घर में इस वर्ष को खुशी से मनाना चाहिए तभी हम हिंदू देश के नागरिक कहलाएंगे। यह वर्ष राजा विक्रमादित्य को समर्पित है। ग्रेगोरियन कैलेंडर और हिंदू कैलेंडर में 57 सालों का अंतर है। जब अंग्रेजी कैलेंडर वर्ष में 57 वर्ष जोड़ दिए जाते हैं तो हिंदू नव वर्ष बनता है अर्थात यह ग्रेगोरियन कैलेंडर से 57 वर्ष पहले शुरू हुआ था। यह आज भी चला आ रहा है। यही हमारा असली वर्ष है।
-- जतिन यादव,कनीना
फोटो कैप्शन 01:महेश बोहरा, मोनिका यादव, क्रिश यादव, जतिन यादव
Subscribe to:
Post Comments (Atom)














No comments:
Post a Comment