शराब के ठेके पर लूटपाट कर, जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज
-भारी मात्रा में शराब लूट ले गये
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कनीना की आवाज। सुनील कुमार बधवाना निवासी ने ठेके पर लूटपाट करने और जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज करवाया है। उन्होंने पुलिस में बताया कि गणपति वाइंस नाम से बाघोत में बहु रोड पर शराब का ठेका चला रहे हैं जिसका वह लाइसेंसी वेंडर है। एक मार्च को लगभग 6:30 शाम को सुनील कुमार अपने सेल्समैन से हिसाब किताब करने नकदी लेकर आया था और कुछ नगदी लगभग 5500 गले में छोड़कर गया था। शराब ठेके पर सेल्समैन सुधीर कुमार गांव हवेलियां, मैनपुरी उत्तरप्रदेश को छोड़कर गया था। दो मार्च की सुबह करीब 1:30 बजे से 2 बजे के बीच कुछ अज्ञात लुटेरों ने सेल्समैन को बंधक बनाकर ठेके से शराब की पेटियां किसी अज्ञात गाड़ी में डालकर ले गए। सेल्समैन को कह गए कि ठेकेदार को बोल देना ठेका नहीं चलने देंगे। आगे से ठेका लिया तो जान से मार देंगे। सुबह जब सुनील कुमार ठेके पर पहुंचा तो सीसीटीवी कैमरा, डीवीआर गायब मिला जो अज्ञात लुटेरे उखाड़ ले गए। पर्चे से मिलान किया तब अंग्रेजी शराब की 35 पेटी, बियर की 25 पेटी, देशी शराब की 97 पेटी व गल्ले से 12500 रुपये गायब मिले। जो अज्ञात चोर चोरी कर ले गये। उन्होंने बताया कि 12 और 13 फरवरी 2026 को गुढ़ा गांव के ठेके पर भी इस प्रकार की वारदात हुई थी। उन्हीं लोगों पर उन्हें शक जताया है। सेल्समैन ने बताया कि 3- चार व्यक्तियों की आवाज आ रही थी जो गाड़ी लेकर आए थे। कनीना पुलिस ने अज्ञात लुटेरों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है।
करीरा के भक्तों का जत्था पहुंचा बलवाड़ी
-वर्षों से पदयात्रा पर जाता है यह जत्था
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कनीना की आवाज। विगत कई वर्षों से करीरा के भक्त बलवाड़ी धाम पर जाते रहे हैं। रंगों के त्योहार होली पर सुबह सवेरे भक्तों का एक जत्था बलवाड़ी पहुंचा। इनमें बजरंग एडवोकेट, एडवोकेट धर्मपाल, श्रीकिशन वैद्य, ओमप्रकाश बाबूजी, शिवचरण कनीना, सतीश कुमार कनीना, वीरेंद्र सिंह राजेश देवी, बिरमा देवी, भीम सिंह शकुंतला, भावना शर्मा आदि बलवाड़ी धाम पहुंचे और वापस दोपहर घर आए। यह जत्था कई वर्षों से पदयात्रा पर जाता रहा है।
फोटो कैप्शन 01: बलवाड़ी धाम पर जाता हुआ जत्था
शिक्षा विभाग में चौथी पीढ़ी में फिर बने सहायक प्रोफेसर
-डा. राहुल शर्मा कनीना के हैं निवासी
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कनीना की आवाज। कनीना निवासी पूर्व मुख्य अध्यापक रतनलाल शर्मा के पुत्र डा. राहुल शर्मा का सहायक प्रोफेसर भूगोल में चयन हुआ है। हाल ही में एचपीएससी द्वारा घोषित परिणाम में उनका चयन हुआ है। राहुल शर्मा अपने परिवार में चौथी पीढ़ी में आते हैं जो शिक्षा विभाग में नौकरी करेंगे। पहले भी तीन पीढिय़ा शिक्षा विभाग में इस परिवार में शिक्षक रहे हैं।
फोटो कैप्शन: राहुल शर्मा
बाबा मोलडऩाथ क्लब की ओर मनाया होली मिलन समारोह
--ट्राफी पर किया कब्जा
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कनीना की आवाज। बाबा मोलडऩाथ क्लब की तरफ से होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया जिसमें फुटबाल खेल के मैदान में फुटबाल खेलों का आयोजन किया गया। रंगों के साथ-साथ खेलों का भी आयोजन त्यौहार की रौनक बढ़ा गया।
मंदिर कमेटी प्रधान दिनेश यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि खेलों का नवीन कुमार द्वारा आयोजन किया गया जिसमें चार टीमों ने भाग लिया। होली वाला क्लब, बाबा लालगिरी क्लब नेताजी सुभाष क्लब और बाबा मोलडऩाथ क्लब प्रमुख रहे। चारों ही टीमों ने बहुत ही बेहतरीन खेलों का प्रदर्शन किया। इन खेलों में जहां भाईचारे की एकता देखने को मिली तो दूसरी तरफ बाप- बेटा, चाचा-भतीजा और सगे-भाई इन खेलों में एक ही टीम में खेलते नजर आए। खेलों का आयोजन बहुत ही सुंदर और सराहनीय रहा। सैकड़ों लोगों ने खेलों का आनंद उठाया और लोगों ने इन खेलों की दिल से तारीफ की और कहा कि यह प्रेम और भाईचारे का त्यौहार है। फाइनल मुकाबला बाबा मोलडऩाथ क्लब व नेताजी सुभाष क्लब के बीच खेला गया जिसमें पहले नेताजी सुभाष क्लब ने एक गोल किया उसके बाद बाबा मोलडऩाथ क्लब की ओर से लगातार दो गोल करके मैच जीत लिया। इसमें शानदार भूमिका निभाई देवेंद्र छोटू ने निभाई और दोनों ही गोल देवेंद्र छोटू ने बहुत ही शानदार तरीके से किये। इस प्रकार ट्राफी पर कब्जा किया। एडवोकेट विनय यादव ने 1100 रुपये में प्रथम रही टीम को देकर सम्मानित किया। देवेंद्र छोटू के साथ इस कार्य में उनकी पूरी टीम ने सहयोग किया जिसमें अशोक डीपी नीतू नंबरदार मास्टर सतीश, प्रकाश साहब, अभय सिंह, मास्टर अनिल कुमार, मोहर सिंह साहब, वीना एडवोकेट, नवीन कुमार, सूबे सिंह आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 02: बाबा मोलडऩाथ क्लब जीत पर खुशी जताते हुए
श्री कृष्ण गौशाला, कनीना में हरियाली एवं गौपोषण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की
--केरल से मंगवाए 10 हजार सहजन बीजों का गोचर भूमि में बीजारोपण
- संपूर्णा बहुवर्षीय चारे के 200 पौधे भी रोपे गए
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कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में पर्यावरण संरक्षण, हरियाली वृद्धि तथा गौवंश के पोषण स्तर को और बेहतर बनाने की दिशा में एक सराहनीय एवं अनुकरणीय पहल की गई है। गौशाला के सक्रिय सदस्य देवेंद्र द्वारा गौशाला के समग्र विकास एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने केरल से सहजन (मोरिंगा) के लगभग 10 हजार बीज मंगवाए, जिनका गौभक्तों एवं समर्थकों के सहयोग से गौशाला की गोचर भूमि में बीजारोपण किया गया।
इसके अतिरिक्त, बुलंदशहर के कृषक एवं राष्ट्रपति अवार्ड प्राप्त पद्मश्री भारत भूषण त्यागी से प्राप्त संपूर्णा बहुवर्षीय चारे के 200 पौधे भी गौशाला परिसर में सफलतापूर्वक रोपे गए। संपूर्णा चारा एक बहुवर्षीय प्रजाति है, जो लगभग पूरे वर्ष हरा चारा उपलब्ध कराती है। इससे गौवंश को भरपूर पोषण मिलेगा तथा गौशाला की चारा व्यवस्था में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान होगा।
सहजन के बीजों का उचित उपचार कर उन्हें एक-एक फीट की दूरी पर लगाया गया है। ये बीज 5 से 7 दिनों में अंकुरित हो जाएंगे। पौधों की ऊंचाई लगभग 5 फीट होने पर इन्हें ऊपर से काटकर गायों को चारे के रूप में खिलाया जाएगा, जो अत्यंत पौष्टिक एवं औषधीय गुणों से युक्त होता है।
इस अवसर पर मोलडऩाथ सत्संग मंडल, कनीना द्वारा गौशाला के लिए 11,000 रुपए का आर्थिक सहयोग दिया गया। साथ ही, मुकेश नंबरदार ने अपने पुत्र के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में गौशाला को 2,100 रुपए का सहयोग देकर गौसेवा की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में गौशाला के प्रधान भगत सिंह यादव, सचिव यश कनीनवाल, सह-सचिव रामपाल, उप प्रधान रवींद्र बंसल, उप प्रधान बाबू दिलावर सिंह, होशियार सिंह सत्संगी, बलवान सिंह आर्य, मुकेश नंबरदार, राजेंद्र (पूर्व पार्षद), कृष्ण प्रकाश गुरुजी, मनोज कुमार, अशोक कुमार सेठ, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, कैप्टन दीनदयाल, मास्टर रामप्रताप, शुभम, गुरुचरण गुप्ता (पूर्व पार्षद), रोहित सेठ, नवीन यदुवंशी, नरेंद्र फौजी, रमेश सत्संगी, नरेश सत्संगी, सूबेदार देशराज, एडवोकेट योगेश, संदीप महेश्वरी, तुलसी राम सोनी, नरेंद्र ठेकेदार, आडिटर लक्ष्मीनारायण, सुरेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों एवं गौभक्तों ने देवेंद्र एवं उनके सहयोगियों के इन प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की तथा इसे पर्यावरण संरक्षण, गौसेवा एवं आत्मनिर्भर गौशाला की दिशा में एक ठोस एवं प्रेरणादायक कदम बताया।
फोटो कैप्शन 03: गौशाला में उपस्थित लोग।
कनीना मनाई गई दुलेंडी
-2 दिन चला दुलेंडी का पर्व
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कनीना की आवाज। कनीना एवं आस पास गांवों में जमकर होली खेली गई। जमकर गुलाल से खुशी मनाई, काले पीले और विभिन्न रंगों से रंगे नृत्य करते हुए तथा विभिन्न धार्मिक स्थानों विशेष कर विशेषकर मोलड़ नाथ आश्रम पर धोक लगाते देखे गए। दिन भर माइकों की गूंज सुनाई दी। लोग खुशियों में डूबे मिले, जहां हार वाले गम में डूबे मिले तो जीत वाले खुशियों में डूबे नजर आए। ज
निमोठ बाबा बिशनदास के रही भीड़
--बाल उतरवाने की प्रथा की पूर्ण
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कनीना की आवाज। कनीना के समीपी गांव निमोठ में मेला लगा तथा बच्चों के बाल उतरवाये गये। बिशनदास मंदिर निमोठ, जैनाबाद का उधोदास आश्रम तथा सीहा आदि स्थानों पर बाल उतरवाए गये तथा मेले लगे। परंतु बव्वा की माता पर बासौड़ा को ही बाल उतरवाएं जाते हैं।
कनीना बिशनदास मंदिर गये अमीश कुमार, रोहित कुमार, कृष्ण कुमार, टिंकू आदि ने बताया कि कनीना से भारी संख्या में भक्त दुलेंडी को पहुंचे तथा बच्चों के बाल उतरवाये। बाबा की धाक लगाई तथा दिनभर मेला लगा।
फोटो कैप्शन 07: बिशनदास निमोठ में बाल उतरवाते भक्त
शांति से मनाया प्रेम एवं भाईचारे का पर्व धुलेंडी
--दिनभर चला दुलेंडी का पर्व
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कनीना की आवाज। कनीना में धुलेंडी का पर्व होली धूमधाम से संपन्न हुआ। होली के पर्व पर किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं मिला है। दिन भर लोग रंग गुलाल से होली खेलते नजर आए।
उल्लेखनीय है कि युवा वर्ग में पहली बार देखने को मिला कि पानी की बचत कर रहे थे तथा प्राकृतिक रंग एवं गुलाल आदि से होली खेल रहे थे। कृष्ण कुमार, सुरेंद्र कुमार, सुनील कुमार ने बताया कि उन्होंने पहली बार हल्दी, टेसू के फूल, चुकंदर का रस, पत्तों के रस एवं मेहंदी आदि से होली खेली और पानी को बचत की पहली बार क्षेत्र में सूखी होली खेलने को मिली। वहीं यदाकदा कुछ लोग पानी बिखेरते भी नजर आए। वहीं दुुलेंडी के दिन तो दिन भर सड़कों, गलियों में होली खेलते लोग नजर आए। क्षेत्र में भडफ़ एवं जैनाबाद,सीहा, निमोठ, बवानिया आदि गांवों में मेले लगे वहीं जैनाबाद आश्रम में लाल दास महाराज ने होली खेली और भक्तों पर रंग डाला। भक्तों ने भी महाराज पर रंग डाला। होली का पर्व धूमधाम से विभिन्न संस्थाओं में भी मनाया गया। होली खेलते महिलाएं, पुरुष एवं बच्चे देखे गए।
कनीना के सामान्य बस स्टैंड पर तथा अनाज मंडी में सभी दुकानें बंद रही और वे होली खेलते देखे गए। विभिन्न संस्थानों एवं समाजसेवियों के अनुरोध पर इस बार कम पानी का प्रयोग हुआ। बच्चे एवं युवा ही अधिक संख्या में होली खेलते मिले।
दुलेंडी पर अकसर लड़ाई झगड़ा होता रहा है किंतु इस बार शांतिपूर्वक पर्व संपन्न हो गया। पत्रकार, समाजसेवी, नेता एवं सामान्य जन बढ़ चढ़कर गुलाल लगा रहे थे। कनीना में धुलेंडी का पर्व होली का पर्व धूमधाम से संपन्न हुआ। होली के पर्व पर किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं मिला है। दिन भर लोग रंग गुलाल से होली खेलते नजर आए।
उल्लेखनीय है कि युवा वर्ग में पहली बार देखने को मिला कि पानी की बचत कर रहे थे तथा प्राकृतिक रंग एवं गुलाल आदि से होली खेल रहे थे। अजीत कुमार, सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि उन्होंने पहली बार हल्दी, टेसू के फूल, चुकंदर का रस, पत्तों के रस एवं मेहंदी आदि से होली खेली और पानी को बचत किया पहली बार क्षेत्र में सूखी होली खेलने को मिली। वहीं यदाकदा कुछ लोग पानी बिखेरते भी नजर आए। विगत वर्षों से कनीना क्षेत्र में गंदे पानी डालने कीचड़ में डालने आदि की घटनाएं घटती रहती थी किंतु इस बार होली पर ऐसी कोई घटना नहीं देखने को मिली। सरकारी स्कूलों में होलिका दहन के दिन अवकाश न होने के कारण शिक्षण संस्थाओं में रंगों की होली खेलते नजर आए। वहीं दुुलेंडी के दिन तो दिन भर सड़कों, गलियों में होली खेलते लोग नजर आए। क्षेत्र में भडफ़ एवं जैनाबाद,सीहा, निमोठ, बवानिया आदि गांवों में मेले लगे वहीं जैनाबाद आश्रम में लाल दास महाराज ने होली खेली और भक्तों पर रंग डाला। भक्तों ने भी महाराज पर रंग डाला। होली का पर्व धूमधाम से विभिन्न संस्थाओं में भी मनाया गया। होली खेलते महिलाएं, पुरुष एवं बच्चे देखे गए।
फोटो कैप्शन 04: होली खेलते युवा
दुलेंडी पर लगा मेला, महाराज ने स्वयं खेली होली
-दूर दराज से भक्त पहुंचे, बाल भी उतरवाये गये
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कनीना की आवाज। बाबा उधोदास मंदिर पर होली मेला लगा। बाबा उधोदास की याद में वर्षों से विशाल मेला लगता आ रहा है। भक्तों की भीड़ यहां जमा होती है वहीं संत लालदास स्वयं भक्तों के संग होली खेलते हैं।
रणधीर सिंह भक्त ने बताया कि कनीना से नौ किमी दूर बाबा उधोदास का भव्य मंदिर स्थित है। इसी मंदिर के सामने बाबा की समाधि तथा बाबा के बाद में आए उनके शिष्यों की समाधियों वाला मंदिर है। इन समाधियों में सबसे पहले बाबा उधोदास की समाधि है। इस समाधि के ऊपर की ओर झांक कर देखे तो सैकड़ों वर्ष पुरानी पेंट व ब्रुश से की हुई कलाकारी दिखाई पड़ती है जो आज भी अपनी आब नहीं खो पाई है। यह वही स्थान है जहां अनवरत पूजा अर्चना का सिलसिला चलता रहता है तथा दीप जलते रहते हैं।
होली के दिन भजन-कीर्तन के समय यहां भारी भीड़ जुटती है। प्रत्येक पूर्णिमा के दिन यहां का नजारा देखने लायक होता है जब प्रवचन, भजन एवं कीर्तन का आगाज किया जाता है किंतु रंगों के त्योहार होली की रात को यहां विशेष जागरण चलता है तथा दिन के समय ढोल एवं नगाड़ों के बीच होली जमकर खेली जाती है। महंत लालदास के साथ होली खेलते भक्तों को देखा गया। यहां पर हरियाणा ही नहीं अपितु दूसरे राज्यों के भक्तजन भी आकर मन्नतें मांगते हैं। माना जाता है कि उनकी मन्नत पूर्ण हो जाती है जिसके चलते वे दंपति यहां गठ जोड़े की जात देने आते हैं। गांव जैनाबाद के पास से कंशावती नदी बहती थी। इसी नदी के किनारे पर उधोदास का जन्म हुआ। उधोदास धुन के पक्के और मन के सच्चे थे। उनके गुरू का नाम दाताराम था। उधोदास ने कंशावती नदी के किनारे एक वृक्ष के नीचे तप और ध्यान लगाते हुए दु:खियों के दर्द को मिटाया।
बाबा उधोदास की समाधि बनी हुई है जहां अनवरत दीपक जलता रहता है। ढफ और नगाड़ों के बीच हर्षोल्लास के साथ महंत लालदास जी धुलेंडी खेली। बाबा लालदास ने गायों के लिए बाबा के नाम पर एक गौशाला बनवाई हुई है। संत लालदास की देखरेख में गांव ही नहीं अपितु मंदिर को चार चांद लग चुके हैं।
इसी आश्रम में जहां 03 मार्च की रात को भजन कीर्तन चले वहीं भंडारा भी लगा। रात्रि के समय भक्तिसागर ग्रंथ की पूजा भी की गई तथा विधि विधान ग्रंथ को वापस स्थापित किया गया। दिनभर भंडारा चलता रहा।
फोटो कैप्शन 05: संबंधित है
साल में दो विज्ञापन भी नहीं देने वाले समाचार न भेजे
- अखबार का आदेश है विज्ञापन देने वालों की खबरें लगे अधिक से अधिक
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कनीना की आवाज। लंबे समय से डा. होशियार सिंह यादव पत्रकारिता में जुटा हुआ है। सुबह से रात 11 जाते हैं तब जाकर पत्रकारिता पूर्ण होती है किंतु न तो समाचार पत्र एक रुपया भी देता और न ही लोग विज्ञापन देते। साल में अनेक समाचार छपने के बाद भी जब विज्ञापन का वक्त आता है तब कोई विज्ञापन नहीं दिया जाता, जिससे अखबार नाराज है और ऐसे पत्रकार जो विज्ञापन नहीं देते उनको हटाने का निर्णय ले लेता है। ऐसे में जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाए वो कृपया मेरे पास/डा. होशियार सिंह यादव के पास समाचार प्रकाशन हेतु न भेजे। इसे कड़ाई से पालन किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई समाचार भेजता है तो स्वयं जिम्मेदार होगा और वे प्रकाशित नहीं होंगे। अपने घर से कंप्यूटर, बिजली, नेट खर्चा, भाग दौड़ करनी पड़ती है वहीं बच्चों से दूर रहना पड़ता है। उस पर भी एक रुपए भी जेब में नहीं आता और खर्चा बढ़ता ही चला जाता है। एक और परिवार वाले नाराज वहीं अखबार वाले नाराज क्योंकि कुछ लोगों की आदत बन गई है कि समाचार के समय तो कहेंगे बड़े-बड़े समाचार छाप दो और विज्ञापन के नाम पर कहेंगे सोचेंगे, देखेंगे या फिर फोन नहीं उठाते, फोन बंद कर लेते हैं। ऐसे में ऐसे व्यक्ति जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाते वो कृपया माफ करें, समाचार भविष्य में न भेजे। केवल वही व्यक्ति भेजें जिन्होंने कुछ विज्ञापन दिया है या मेरी किसी क्षेत्र में मदद की है ताकि उनका खर्चा में स्वयं वहन कर सकूं। सबसे बड़ी बात है कि अखबार के निर्देशानुसार एक विज्ञापन कम से कम 10 हजार का देने वालों के छह माह समाचार प्रकाशित होंगे, दो विज्ञापन देने वालों के पूरे साल समाचार प्रकाशित होंगे। अधिकतम दिन में एक समाचार प्रकाशित करवा सकता है वह भी स्वयं टाइप करके भेजना होगा। यदि साल में 20000 तक का विज्ञापन देता है उनके लिए यह सुविधा एक साल चलती रहेगी। समाचारपत्रों का कहना है कि उन लोगों पर समय बर्बाद ना करें जो विज्ञापन नहीं देते। एक और मजबूरी है दूसरी और विज्ञापन देना जरूरी है। शायद कनीना क्षेत्र के प्रतिदिन 10 बड़े समाचार अकेले मेरे प्रकाशित होते हैं लेकिन इस होली पर महज एक छोटा सा विज्ञापन मिला जिनसे उम्मीद थी वो कल देंगे, फिर देंगे, आगे देंगे करते-करते होली भी टाल दी। अब ऐसा नहीं होगा। केवल क्राइम के समाचार और उन लोगों के समाचार प्रकाशित होंगे जो विज्ञापन देते हैं या ऐसे व्यक्तित्व जो वास्तव में समाज के लिए उदाहरण बने हुए हैं।
कुतरूं प्राचार्य के कारनामे -5 मार्च से
-घर से बाहर होने के कारण नहीं भेज पाया अगली कडिय़ां
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कनीना की आवाज। कुतरूं प्राचार्य के कारनामों पर चल रही कडिय़ों में को बीच में इसलिए विराम दिया गया क्योंकि मुझे लखनऊ, बरेली, प्रयागराज और कई स्थानों पर मजबूरी में जाना पड़ गया फिर 15 दिनों के बाद लौटने पर खाटू धाम पदयात्रा पर चला गया। फिर जैतपुर धाम पर चला गया। इस प्रकार समय नहीं मिल पाया और कुतरूं प्राचार्य की जो कडिय़ां प्रस्तुत की जा रही थी वां आगे नहीं बढ़ पाई। अब फिर से 5 मार्च से कुतरूं प्राचार्य के कारनामों की कडिय़ां जारी रहेगी। आशा एवं विश्वास है कि आपका सहयोग सदा बना रहेगा।








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