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Saturday, March 14, 2026



 




कुतरूं  प्राचार्य के कारनामे- 15
अलग-थलग पड़ गया कुतरूं किंतु स्वभाव नहीं बदला
-इसे कहते की रस्सी जल गई परंतु बल नहीं गया
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने बतौर विज्ञान अध्यापक एवं प्राध्यापक 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया है। उन्होंने स्कूल, कालेज निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि दौरान करीब 35 विभिन्न स्कूल प्राचार्यों के साथ काम किया और उनमें से चंद कुतरूं प्राचार्य निकले। जिनका नाम लेते ही तन मन में दर्द होता है। जिनकी भावना हीन रही है। किसी के काम को रोकने आए हैं। सच का साथ नहीं दिया और उन्होंने सदा ही अच्छे और स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों का विरोध किया। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य के कारनामे सामने आये हैं। आज एक कारनामा यहां उजागर किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग में देखने में आया है कि कुछ-कुतरूं प्राचार्य भर्ती हो गए हैं जिनका शिक्षकों  कोई लेना देना या नाता रिश्ता नहीं होता। एक कुतरूं प्राचार्य ने तो सेवानिवृत्त हो रहे शिक्षक को स्कूल कार्यालय से भी पगड़ी नहीं पहने दी, गेट पर ही पगड़ी पहनने की बात कही। स्कूल के अंदर से उसे बाहर ले आया और गेट के बाहर पगड़ी पहनने दी गई। एक कुतरूं प्राचार्य तो शिक्षक के सेवानिवृत्ति के समय छुट्टी लकर भाग गया। ऐसे कुतरूं प्राचार्य को जीने का अधिकार नहीं। क्या वह समाज में मुंह दिखाएंगे। वो भूल गया कि सास भी कभी बहु होती है। ऐसे कुतरूं प्राचार्य भयंकर बीमारियों की चपेट में आकर एक दिन मरेंगे। उनमें कैंसर, मिर्गी, तपेदिक, हृदय घात ऐसे रोग हो जाते हैं। और इनको अपनी माफी मांगने का समय भी नहीं मिलेगा। दुर्भाग्य सुने कि  एक कुतरूं प्राचार्य जब आया तो लोगों ने समझा बेहतर होगा और उसकी बहुत सेवा की। कभी कोई गाड़ी में उसे बिठाकर लाता, कभी कोई उसकी सेवा भाव करता, कभी पास बैठकर उससे अच्छी-अच्छी बातें करता किंतु उस कुतरूं ने तो हर किसी शिक्षक में कमियां नजर आई। धीरे-धीरे सभी स्टाफ सदस्य दूर होते चले गए और कुतरूं अकेला अलग-थलग पड़ गया।
   हालत यह बन गए कुतरूं को अब कोई नहीं चाहता। यह ठीक है सामने से नमस्ते करते लेकिन पीछे से उसकी जमकर बुराई करते। कुतरूं भी हर बात को भांप रहा था किंतु उसकी बुद्धि भगवान ने हर ली परिणाम यह कि किसी को कुछ समझता नहीं। इसलिए कहावत है कि कभी भी रस्सी जल जाती है किंतु परिणाम यह होता है कि उनकी मौत कुत्ते के समान हो जाती है। एक संत की बात है सुन रहा था और वह कह रहा था कि इंसान कई बार इतनी गलतियां कर बैठता है कि जब मरणासन्न होता है तब उसे अपनी गलतियां महसूस होती है। सारे जीवन की गलतियां दृश्य बनकर उसकी आंखों के सामने उभरती है। यह सत्य है कि मरने से पहले स्मृति साफ हो जाती है,मरने से कुछ समय पूर्व वह अवस्था आती है जब अपनी गलतियों को सामने देखता है, जो उसे चिड़ाती हैं लेकिन गलतियों के लिए वह क्षमा नहीं मांग सकता। उसे इतना दर्द होता है कि तुरंत ही मौत के मुंह में चला जाता है। ऐसे में वो गलतियां न करें जिससे जीवन भर पछताना पड़े, मरते समय पछताना पड़े। गलती हो जाए तो अपनी माफी मांग लेने में ही भलाई होती है। जीवन बहुत छोटा है। पाप करके पछताना होता है। मरने के बाद भी बुराई पीछा करती हैं। एक कहानी जो सत्य पर आधारित है जो इस कुतरूं प्राचार्य पर सटीक बैठती है।
   एक स्कूल में बच्चों के लिए दूध की जरूरत थी। स्कूल के प्राचार्य ने एक दुधिया से कहा कि हमें प्रतिदिन 100 लीटर दूध की जरूरत है। आप प्रदान कर दोगे क्या? दुधिया ने कहा कि कल तक बताता हूं। दुधिया एक अपने परिचित के पास गया और कहा कि मुझे चार बेहतरीन भैंस दिलवा दो ताकि मैं स्कूल में दूध का प्रबंध कर सकूं, बेच सकूं। उसका साथी नकली दूध बनाने में माहिर था। उसने कहा कि तुम्हें दूध की जरूरत है तो भैंसें बांधने की क्या जरूरत है। तुम्हें मैं ऐसा तरीका बताता हूं कि जब चाहे एक सौ लीटर दूध चंद मिनटों में बना लोगे। दुधिया ने कहा- यह तो और भी अच्छी बात है क्योंकि दुधिया भविष्य का अंजाम को नहीं जानता था। फिर क्या था नकली दूध बनाने की विधि दुधिया से बता दी और दुधिया फिर तो दौड़कर स्कूल के प्राचार्य के पास पहुंचा और कहा कि मैं प्रतिदिन 100 लीटर दूध दूंगा। और प्रतिदिन 100 लीटर नकली दूध बना कर देना शुरू कर दिया। परिणाम यह निकला गरीब तबके के बच्चे यह दूध पी पीकर बीमार पडऩे लगे, बददुआएं निकलने लगी, कितनी ही दवाई लेनी पड़ी, औषधीया लेनी पड़ी, कितने ही शिक्षकों को परेशानी झेलनी पड़ी, उनकी सेहत के साथ जमकर खिलवाड़ हुआ। कहते हैं कि भगवान भी हर चीज देखता है। उसके दरबार में देर हो सकती है अंधेर नहीं। बहुत पैसे कमा लिए दुधिया ने, धन दौलत इतनी कमा ली की खूब कार,कोठी खरीद लिये।  ऐश आराम करने लगा किंतु बददुआएं पीछा करने लगी। अचानक कैंसर का रोग हो गया। कैंसर होने के बाद धीरे-धीरे बेड पर चला गया। परिवार वाले भी उससे नफरत करने लगे । एक दिन उस दुधिया की स्मृति साफ हुई। उसने अपने बेटे से कहा कि थोड़ा पानी दे दो। उसके बेटे ने उत्तर दिया कि मैं थोड़ा काम में लग रहा हूं, पानी कुछ देर बाद दूंगा। दोबारा उसने पत्नी से पानी मांगा।  वह भी कहने लगी मैं पहुंचाती हूं और बार-बार सभी परिवार के सदस्यों से पानी मांगा, समय पर पानी नहीं मिला। तब लड़का पानी लेकर आया फिर क्या था वह दुधिया बेड पर पड़ा हुआ चिल्लाया कि आज इस परिवार के लिए मैंने कितने बुरे काम किये, कितने ही बच्चों को नकली दूध पिलाया, कितने ही लोगों का अहित किया, आज परिणाम मेरे सामने है। मैं कैंसर से धीरे-धीरे मर रहा हूं। जितने पैसे कमाए थे उनसे कहीं अधिक मेरे पर खर्च हो गए और खर्च जाएंगे। मेरे से बहुत बड़ी भूल हो गई कि बच्चों का अहित किया।
  अब हालात यह है कि उनसे माफी मांगना चाहूं तो कैसे मांगू क्योंकि वो आज यहां नहीं है, न जाने कितने बच्चे कहां चले गए? किन-किन से माफी मांगी जाए, किन शिक्षकों से माफी मांगी जाए और वह बुरी तरह से सड़ता सड़ता एक दिन स्वर्ग सिधार गया किंतु मरने से पहले उसने परिवार को एक ही बात कही कि बुरा करने से अंत बहुत बुरा होता है। परंतु कुछ कुतरूं प्राचार्य इन बातों को नहीं समझते, कितने लोगों का अहित कर रहे हैं और जब उनका अंत होगा बहुत बुरा होगा। तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।





हकीकत
बचकर रहो बात बात पर घूंसे मारने वालों से  
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कनीना की आवाज। 
यूं तो बातें किसी से करते हैं तो बड़े अदब से करनी चाहिए। सुनने वाले को भी उसकी बातों पर गौर करना चाहिए। जहां बात सुनाने वाला धीरे-धीरे अपनी बातों को समझाएं लेकिन हमारे समाज में अनेक प्रकार के लोग हैं। 100 में से एक दो ऐसे व्यक्ति की भी होते हैं जो बातें बताते बताते घूंसे मारता रहता है। कभी हाथ पकड़ता है कभी-कभी हाथ को हिलाता है, सुनाने वाले को इतना तंग करके रख देता है कि वह ऐसे व्यक्ति से घृणा करने लग जाता है। बात करने वाले और सुनने वाले के बीच दूरी हो। वो सुनने वाले को बाध्य न करें। घूंसे मारते हुए बात करना कोई ढंग नहीं अपितु यह शर्म की बात है। ऐसे लोगों से सावधान रहिए क्योंकि ये घूंसे मार लोग, दिमाग से धीरे-धीरे जीरो होते चले जाते हैं क्योंकि वो ये समझते है कि सामने वाला तेरी बात को नहीं सुन रहा। अगर वह नहीं सुन रहा तो तुम सुनाना क्यों चाहते हो? बड़ा आश्चर्य होता है इस प्रकार के लोग समाज में जी रहे हैं।
शनिवार को खुद होशियार सिंह लेखक एक ऐसे व्यक्ति से मिला जो बात बात पर घूंसे मारने लगा। होशियार सिंह पीछे हटता जाता और वो आगे बढ़कर बात समझाने के लिए घूंये मारने का प्रयास करता। ऐसे करते-करते करीब आधे घंटे की बातों में आधा किलोमीटर दूर सड़क पर सरकते चले गए और वह भी घूंसे मारने की कोशिश में रहा। आखिर उससे कहना ही पड़ा कि देख हम कहां खड़े थे और हम कहां आ गए? उन्होंने पूछा कई ऐसा क्यों? होशियार सिंह ने बताया तेरे घूंसों से बचने के लिए तेरी बातें सुनते सुनते पीछे हटता चला गया। देख भाई,तेरे घूंसे खाने के लिए नहीं आए। वह मायूस हो गया और कहने लगा तुम कैसे दोस्त हो? होशियार सिंह ने दूर से हाथ जोड़कर उसे सलाम किया कहा कि कोई बात नहीं भाई तुम्हें अपनी बातें समझानी हो तो आइंदा मेरे पास न आना, आए तो आदतन घूंसे मारने , बार बार हाथ  पकड़ कर हिलाने, कभी पीठ, कभी छाती को नू छूना। घूंसे मारने से मैं तुम्हारी बातें अधिक नहीं सुन पाया। आइंदा तुम ध्यान दे ऐसी गलती नहीं करना।  बातें सुनाने वाला भी मूसल ही निकाला, जिस पर शायद कोई असर नहीं हुआ और वह चलता बना। ऐसे लोगों से सावधान रहिए?



डाक्टर बनते जा रहे हैं डाकू
-इंसान को बचाते कम है धन ऐंठकर परिवार को करते हैं खोखला
-जान नहीं बचा पाए तो डाक्टरों को पैसे लेने का नहीं हो हक
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कनीना की आवाज।
 अब तो बड़े-बड़े अस्पतालों के डाक्टर डाकू बनते जा रहे। निश्चित रूप से डाकू इसलिए कहा जा सकता है कि डाकू जिस प्रकार इंसान को मारकर उससे पैसे छीन ले जाता है वैसे ही अब डाक्टरों का पेशा बनता जा रहा है। अपने पेेशे में कम ध्यान देने लगे हैं और पैसे कमाने में अधिक लगे हुए हैं। गरीब तबके के लोग अगर बड़े अस्पताल में चल जाए तो व्यक्ति की जान बचानी मुश्किल हो जाती है। वही वह गरीब अपने परिवार की सारी प्रापर्टी बेचने को मजबूर हो जाता है क्योंकि भारी भरकम बिल निजी अस्पतालों का होता है। कुछ ऐसे मामले भी अखबारों में आए कि मरे हुए व्यक्ति को कई कई दिनों तक वेंटिलेटर पर आईसीयू में रखते हैं और प्रतिदिन लाखों रुपए के हिसाब से ऐंठ लेते हैं, वसूल लेते हैं। इससे ऐसा लगता है कि अब तो डाक्टर अपने पेशे को भूलकर मरीजों को मारने पर तुले हुए हैं। भारी कमीशन, दवाओं में कमीशन, निश्चित दुकानों से दवा खरीदने को बाध्य करना, न जाने क्या-क्या हथकंडे अपना रहे हैं। कभी डाक्टर को दूसरा भगवान मानते थे किंतु अब धीरे-धीरे डाक्टरों के व्यवहार और कामों से ऐसा लगता है यह डाकू कहलाएंगे। आज भी बहुत से कुछ दरियादिल डाक्टर मिल जाएंगे जो मरीज की दिन रात सेवा करके जान बचा देते हैं लेकिन अधिक डाक्टर ऐसे हो गए जो खून चूसने पर आमादा होते हैं । व्यक्ति भी चला जाता है उसको भी नहीं बचा पाए और धन इतना ऐंठ लेते हैं कि परिवार भी सालों तक नहीं उभर पाता। सरकार को चाहिए, समाज को चाहिए ऐसे डाक्टर जो किसी मरीज को नहीं बचा पाए तो उनसे पैसे लेने का अधिकार भी नहीं दिया जाना चाहिए। एक बार समाज को जागरूक होना पड़ेगा। इस प्रकार के डाकुओं से समाज को बचाना होगा वरना आए दिन मरीजों की जान को खतरा होता चला जाएगा और परिवार का सब कुछ तबाह कर दिया जाता है। सरकार को भी चाहिए ऐसे डाक्टर पर केस चलाएं, ऐसे परिवार से फीस न लेने का कानून बनाना चाहिए जहां जान चली जाती है। जिस  परिवार का आदमी भी मर जाता है तो उनसे किसी प्रकार का अस्पताल पैसे न वसूले तब जाकर रामराज का सपना आ सकता है। यही नहीं सरकार को चाहिए सरकारी अस्पताल में वो सुविधाएं जुटाई जाए ताकि अमीर से अमीर भी प्राइवेट अस्पतालों की और न दौड़े तब असली राम राज आ जाएगा। आए दिन रोग बढ़ गये हैं। भविष्य में रोग बढ़ेंगे ऐसे में सरकारी अस्पतालों पर जी जान एक करने की सरकार की जरूरत है।







 कनीना से झज्जर बस को मिली हरी झंडी
-क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर
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कनीना की आवाज।
झज्जर डिपो द्वारा झज्जर से महेन्द्रगढ़ (वाया बहुझोलरी-कनीना) नई बस सेवा शुरू करने पर सभी क्षेत्रवासियों ने प्रशासन का आभार जताया। पिछले काफी दिनों से क्षेत्र वासियों की मांग थी कि कनीना से सीधी झज्जर की बस सुविधा हो । मौजूदा सरकार ने जनता के लिए यह सुविधा भी शनिवार से लागू कर दी। झज्जर डिपो की बस झज्जर से महेंद्रगढ़ तक जाएगी ।जो एक जिला को दूसरे जिला को जोडऩे का कार्य करेगी। यह बस झज्जर से सुबह 9:38 बजे चलकर बहुझोलरी से 11 बजे होते हुए बाहला, बव्वा, कारोली, कारोली मोड़ और कनीना के रास्ते महेन्द्रगढ़ शाम 1:15 बजे पहुंचेगी। वापसी में महेन्द्रगढ़ से शाम 1:41 बजे चलकर कनीना 2:15 बजे होते हुए कारोली मोड़, कारोली, बव्वा, बहुझोलरी के रास्ते झज्जर पहुंचेगी।
इस बस सेवा के शुरू होने से क्षेत्र के लोगों, विद्यार्थियों और यात्रियों को बहुत सुविधा होगी।
इस महत्वपूर्ण सुविधा के लिए सभी ग्रामवासियंो ने परिवहन मंत्री  अनिल विज, कोसली विधायक  अनिल यादव,हरियाणा रोडवेज झज्जर डिपो के महाप्रबंधक संजीव तियाल का आभार और धन्यवाद व्यक्त किया। इस मौके पर कनीना बस स्टैंड इंचार्ज निरंजन, पंकज  और प्रदीप कुमार मौजूद थे ।
फोटो कैप्शन 09: झज्जर के लिए बस लगाई






लोक अदालत में 45903 केसों का किया फैसला
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कनीना की आवाज।
हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जारी दिशा निर्देशानुसार जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेंद्र सूरा के मार्गदर्शन व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नीलम कुमारी की देखरेख में आज न्यायिक परिसर नारनौल, महेन्द्रगढ़ व कनीना में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया।
इस लोक अदालत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मैडम हर्षाली चौधरी एवं मैडम वर्षा जैन, सिविल जज जूनियर डिवीजन मैडम कोपल चौधरी व राकेश कुमार नारनौल में, अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रवीण कुमार कनीना में तथा महेन्द्रगढ़ में सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रदीप कुमार न्यायधीशों की बैचों द्वारा फैसले किए गए।
सीजेएम नीलम कुमारी ने बताया कि इस लोक अदालत में वाहन दुर्घटना मुआवजा केस वैवाहिक मामले, वाहन चालान संबंधित मामले, जमीन अधिग्रहण मुआवजा से संबंधित मामले, दीवानी मामले जैसे की किराया बैंक ऋण, बच्चों व पत्नी के लिए भरण-पोषण, बैंक बाउस, साईबर क्राइम व राजीनामा योग्य फौजदारी मामलों को रखा गया। उन्होंने बताया कि इस लोक अदालत में कुल 51820 केस निपटारे के लिए रखे गए जिनमें से 45903 केसों का फैसला किया गया। इस लोक अदालत में 42 मोटर वाहन दुर्घटना केसों का निपटारा किया जिसमें कुल 2 करोड़ 31 लाख 95 हजार रुपए का मुआवजा दिया गया।
उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नारनौल द्वारा एक हेल्पलाइन नंबर 01282-250322 चलाया हुआ है जिस पर भी आमजन किसी भी प्रकार की कानूनी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 पर भी फोन कर कानूनी सहायता ले सकते हैं।
फोटो कैप्शन 10: लोक अदालत में केसों का निपटारा करते न्यायाधीश।


उन्हाणी सर्कल में सर्वोत्तम माता पुरस्कार प्रतियोगिता आयोजित
-नांगल गांव की ज्योति देवी रही पहले स्थान पर
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कनीना की आवाज।
 महिला एवं बाल विकास परियोजना कनीना के तत्वावधान में सर्कल उन्हाणी में सर्कल स्तरीय सर्वोत्तम माता पुरस्कार प्रतियोगिता का आयोजन सर्किल सुपरवाइजर मनीष यादव द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सर्कल के अंतर्गत आने वाले विभिन्न गांवों की माताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें मोहनपुर, नांगल, कोका, इसराना, चेलावास, उन्हाणी, गाहड़ा, रसूलपुर और गुढ़ा सहित अन्य गांवों की महिलाएं शामिल रहीं।
कार्यक्रम के दौरान एमपीएचडब्ल्यू संदीप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुढ़ा, एएनएम राजेश देवी तथा कृषि विभाग की अधिकारी मनीषा यादव ने माताओं से उनके तथा उनके बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और टीकाकरण से संबंधित प्रश्न पूछे और उन्हें महत्वपूर्ण जानकारी दी। प्रश्नोत्तरी के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन करते हुए प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान निर्धारित किया गया। सर्कल सुपरवाइजर मनीषा यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और विभिन्न गांवों से आई प्रतियोगी महिलाओं का स्वागत करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस प्रकार की प्रतियोगिता प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाती है। प्रतियोगिता में स्थान प्राप्त करने वाली महिलाओं के खातों में विभाग की ओर से निर्धारित प्रोत्साहन राशि भी स्थानांतरित की जाती है। प्रतियोगिता में नांगल गांव की ज्योति देवी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि उन्हाणी की पूनम द्वितीय स्थान पर रहीं और मोहनपुर की पूजा ने तृतीय स्थान हासिल किया। इस अवसर पर मनीषा यादव ने प्राकृतिक खेती और आर्गेनिक सब्जियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रत्येक आंगनवाड़ी में बाल वाटिका के माध्यम से आर्गेनिक तरीके से सब्जियां उगाने की जानकारी दी जा रही है। साथ ही महिलाओं को अपने घरों में भी प्राकृतिक तरीके से सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि परिवार स्वस्थ रह सके। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ माता ही एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है। कार्यक्रम में सर्कल की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कार्यक्रम के अंत में कन्या भू्रण हत्या व बाल विवाह ना करने की शपथ दिलवाई।
फोटो कैप्शन 02: कार्यक्रम में प्रथम स्थान पर आने वाली माता ज्योति को सम्मानित करते हुए।



पुलिस ने पकड़ी 17 ग्राम स्मैक
- एक व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर्ज
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कनीना की आवाज।
पुलिस को सूचना मिली कि नांगल का एक व्यक्ति संदीप मादक पदार्थ बेचने का धंधा करता है।  कनीना पुलिस ने रैडिंग पार्टी तैयार की और सुंदरलाल नांगल को गवाह बनाया। पुलिस ने नांगल की तरफ नाकाबंदी की कुछ देर बाद एक गाड़ी अटेली से आती दिखाई दी। पुलिस ने चालक को रुकने का इशारा किया किंतु चालक ने गाड़ी को भगाने का प्रयास किया किंतु थोड़ी दूर जाकर रुक गई। नाम पूछने पर उन्होंने संदीप नांगल बताया। तत्पश्चात पुलिस ने अपना परिचय दिया 50 एमडीपीएस एक्ट का नोटिस दिया गया और बताया कि तुम्हारे पास में स्मैक होने की सूचना मिली है। साथ में डीएसपी नारनौल सुरेश कुमार को राजपत्रित अधिकारी बतौर बुलाया गया जिन्होंने गाड़ी और व्यक्ति की तलाशी ली जिसकी वीडियोग्राफी तैयार की गई। जब संदीप की तलाशी ली गई तो उन्होंने पहनी हुई जींस पेट में पेंट  में छोटी थैली मिली। सूंघने पर नशीला पदार्थ स्मैक पाया गया। कंप्यूटर पर वजन किया 17 17 ग्राम पाया गया। पुलिस ने व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया साथ में पुलिस ने संदीप की जेब से 1350 रुपए तथा वीवो का एक मोबाइल भी बरामद किया।



चरित्र और निर्णय तय करते हैं जीवन की दिशा- सीजेआई सूर्य कांत
- हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह आयोजित, 50 को मिले पदक व 1462 को मिली डिग्रियां
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कनीना की आवाज।
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के प्रांगण में शनिवार को भव्य 12वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। वहीं पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू व आईआईटी रोपड़ के निदेशक डा. राजीव आहूजा समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए।
इनके साथ साथ न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ, न्यायमूर्ति एनएस शेखावत, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल चंद्र शेखर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नारनौल नरेंद्र सूरा, उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार व पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ सहित जिला प्रशासन व विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी दीक्षांत समारोह में उपस्थित रहे।  
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिग्री केवल उस ज्ञान की पुष्टि करती है जो वर्षों की मेहनत से अर्जित किया गया है, लेकिन किसी भी व्यक्ति के जीवन की असली दिशा और दशा उसके चरित्र और निर्णय लेने की क्षमता तय करती है। उन्होंने कहा कि जब औपचारिक शिक्षा का ढांचा व्यक्ति के आसपास नहीं रहता, तब वही चरित्र और विवेक उसके मार्गदर्शक बनते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को अपने ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और सही निर्णय लेने की क्षमता को भी विकसित करना चाहिए।
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति के लिए नए अवसरों के द्वार खोलती है। इससे उसकी क्षमताओं का विस्तार होता है, उसकी कमाई की संभावनाएं बढ़ती हैं और जीवन में आगे बढऩे के कई रास्ते उपलब्ध होते हैं। लेकिन इसके साथ ही यह भी समझना जरूरी है कि उच्च शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता का साधन नहीं है, बल्कि इसके साथ समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की इमारतों का निर्माण, प्रयोगशालाओं का संचालन और शिक्षकों का वेतन उन संसाधनों से संभव होता है जो जनता के कर से जुटाए जाते हैं। देश के लाखों ऐसे नागरिक हैं जो स्वयं विश्वविद्यालय तक नहीं पहुंच पाते, लेकिन उनके द्वारा दिए गए कर से ही उच्च शिक्षा की व्यवस्था संचालित होती है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि शिक्षित युवा समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझें और सार्वजनिक संस्थाओं जैसे न्यायपालिका, सिविल सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन को मजबूत बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ। यही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने हरियाणा के लोकप्रिय खेल कबड्डी का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को जीवन का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कबड्डी में एक रेडर एक ही सांस में विरोधी पाले में प्रवेश करता है और लगातार कबड्डी-कबड्डी का उच्चारण करता रहता है। यह केवल खेल का नियम नहीं, बल्कि अनुशासन और आत्मनियंत्रण का प्रतीक भी है। इसका अर्थ यह है कि व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकता है, लेकिन उसे हमेशा यह समझ बनाए रखनी चाहिए कि उसकी सीमाएं क्या हैं और कब उसे वापस लौटना है। उन्होंने कहा कि महान रेडर वही होते हैं जो बिना अति महत्वाकांक्षा के सही समय पर निर्णय लेते हैं और सुरक्षित लौट आते हैं। वहीं डिफेंडर भी तभी सफल होते हैं जब वे एकजुट होकर टीम के रूप में काम करते हैं। इसी प्रकार जीवन में भी व्यक्ति को बड़े सपने देखने चाहिए, लेकिन साथ ही विनम्रता, अनुशासन और सामूहिकता की भावना को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सफलता के साथ-साथ समाज और संस्थाओं को मजबूत बनाने का संकल्प भी लें, क्योंकि यही किसी भी शिक्षा की वास्तविक कसौटी है।
इस अवसर पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रोफेसर राजीव आहूजा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, जिसे विद्यार्थी जीवन भर याद रखते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी हमेशा अपने संस्थान को याद रखें और एक जिम्मेदार पूर्व छात्र (एलुमनाई) के रूप में संस्थान से जुड़े रहें। उन्होंने बताया कि आईआईटी जैसे संस्थानों की सफलता में उनके एलुमनाई का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
प्रो. आहूजा ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग सही दिशा में करें, शॉर्टकट से बचें और ईमानदारी को हमेशा बनाए रखें। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के जीवन को मेहनत और ईमानदारी का प्रेरक उदाहरण बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी नई तकनीकों को अपनाकर कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार करें और देश के विकास में योगदान दें।
उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि स्टार्ट-अप शुरू करके रोजगार देने वाले बनना चाहिए। उन्होंने शोध और नवाचार को देश के विकास की कुंजी बताते हुए कहा कि भारत को एक शोध-प्रधान राष्ट्र बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरु-शिष्य परंपरा, माता-पिता और संस्थान के प्रति सम्मान बनाए रखने का आह्वान किया।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की रिपोर्ट एवं विद्यार्थियों को अपना आशीर्वाद देते हुए कुलपति प्रोफेसर टंकेशवर कुमार ने कहा कि कुलपति ने कहा कि आज हम सभी के लिए यह गौरव की बात है कि देश के करोड़ों युवाओं की प्रेरणा एवं मार्गदर्शक, भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत जी हमारे बीच में हैं वे देश के उस मध्यम वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने कड़े संघर्ष व मेहनत से जीवन में एक बड़ा मुकाम व कीर्तिमान हासिल किया है। वे  देश की युवा शक्ति के लिए एक प्रेरणा हैं।
कुलपति ने कहा कि 21वीं सदी में हम विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। विकसित देशों की श्रेणी में जाने का रास्ता हमारे महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से होकर ही जाता है। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की और से निरंतर नए प्रयास किए जा रहे हैं। कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय एवं अतंरराष्ट्रीय मंचो पर हमारी रैंकिंग में जबरदस्त सुधार हुआ है। हमें वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में राष्ट्रीय स्तर पर 44 वां स्थान हासिल हुआ है व हरियाणा प्रदेश के विश्वविद्यालयों में हमारी रैंकिंग प्रथम स्थान पर रही है। वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैकिंग में  फिजिकल साइंस, लाइफ साइंस व इंजीनियरिंग पाठयक्रम में हमारी रैकिंग अच्छी रही है।
विश्वविद्यालय के शिक्षकों के 3000 से अधिक शोध पत्र  स्कोपस एवं वेब ऑफ साइंस डेटा बेस पर प्रकाशित किए हैं व हमारा एच इंडेक्स 82 है। वर्ष 2025 में ही अकेले हमारे शिक्षकों ने 622 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं जो एक रिकार्ड है।
विश्वविद्यालय सभी विभागों, पाठयक्रमों व संकायों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में सफल रहा है। वर्तमान में हमारे सभी पाठयक्रम एनईपी आधारित हैं। हमने अपने पाठयक्रमों में अंतरविषयक पाठयक्रमए एसडीजी मेपिंग, वेल्यू एडिड, भारतीय ज्ञान परंपरा, स्किल व वोकेशनल एजुकेशन , मल्टीपल एंट्री एवं एक्जिट  की शुरूआत की है। एनईपी के तहत नेशनल क्रेडिट फ्रेमवक  मूक कोर्सिज को लाूग किया है। आज हमारे सभी पाठयक्रम वैश्विक मानको के अनुरूप हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप टीचिंग की गुणवता को सुधारने के लिए ही विभिन्न विभागों में प्रोफेसर ऑफ प्रेक्टिस को नियुक्त किया गया है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के 8 संकाय, 35 विभागों में 90 से अधिक पाठयक्रमों में 5000 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हमने विश्वविद्यालय में अगले अकादमिक सत्र से कुछ नए विभाग व पाठयक्रम शुरू करने की योजना बनाई है। मुझे आशा है कि अगले पांच वर्ष में 10 हजार से अधिक विद्यार्थी इस विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे होंगे।
उन्होंने से विद्यार्थियों से अपने जीवन में विकसित भारत का संकल्प लेने का आहवान किया।  कुलपति ने विद्यार्थियों से आहवान किया कि  सभी हर समय कुछ नया सीखते रहें। बदलती दुनिया के साथ हम कदमताल तभी कर पाएंगे जब हमेशा विद्यार्थी बन कर कर लाइफ लांग लर्नर बनें रहेंगे। इस मौके पर मैडल व डिग्री प्राप्त करने वाले सभी छात्र छात्राओं को बधाई दी।
इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. सुनील कुमार ने सभी का धन्यवाद करते हुए दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए आभार जताया। कार्यक्रम का सफल संचालन विश्वविद्यालय की छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. रेनु यादव व उप छात्र कल्याण अधिष्ठाता डा. नीरज कर्ण सिंह ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के सम कुलपति प्रोफेसर पवन शर्मा, एडीसी तरुण पावरिया सहित सभी डीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष, शिक्षक एवं जिला प्रशासन के सभी अधिकारी मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 04 से 08: संबंधित हैं


हिंदु नव वर्ष  तैयारियां जारी, मनाया जाएगा
-19 मार्च से ही हैं नवरात्रि पर्व

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कनीना की आवाज।
नवरात्रे एवं हिन्दू नव वर्ष 2083 के प्रारंभ होने जा रहा है। मंदिरों में तैयारियां चल रही हैं। कनीना के महेश कुमार बोहरा, श्याम सुंदर महाशय, देशराज, सुरेंद्र सिंह , मोहन पार्षद आदि ने लोगों से अपील की कि धूमधाम से नव वर्ष मनाए।
19 मार्च को क्षेत्र में नवरात्रों का आगाज हो रहा है। इस मौके पर व्रत रखाने एवं पुराने अन्न को नौ दिनों तक शरीर से समाप्त करके नए अन्न को ग्रहण करने का नियम है। मौसम के बदलाव से नया अन्न तुरंत शरीर में ग्रहण नहीं करना चाहिए। यही कारण है कि इस दिन व्रत किया जाता है। मां दुर्गा के नौ दिनों में नौ रूपों की पूजा की जाती है। राम नवमी के दिन नवरात्रों को समाप्त कर दिया जाता है।
  उल्लेखनीय है कि बच्चे-बच्चे की जुबान पर अंग्रेजी वर्ष है किंतु हिंदुओं के सबसे प्राचीन वर्ष का ज्ञान नहीं है। विक्रम संवत या गुड़ी पाड़वा आदि नामों से जाना जाता है। इस दिन घरों में पकवान बनाए जाते हैं और नए वर्ष का आगाज किया जाता है। इसे ग्रामीण क्षेत्रों में सम्मत नाम से जाना जाता है।
  महाराजा विक्रमादित्य द्वारा चलाया गया विक्रमी संवत आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रासंगिक है। इसी दिन महाराजा विक्रमादित्य ने हूणों पर विजय प्राप्त करके अक्सास नदी में घोड़ों को जल पिलाया था। तभी से आज तक यह पर्व चला आ रहा है।
क्या है नव संवत-
19 मार्च को पूरे ही देश में सम्राट विक्रमादित्य द्वारा चलाया हुआ नव संवत्सर का पर्व मनाया जा रहा है। विश्व का सबसे पुराना संवत नव संवत्सर जिसे वर्ष प्रतिपदा, उगादि पर्व तथा गुड़ी पाड़वा नामों से जाना जाता है। माना जाता है है कि ब्रह्मïाजी ने इसी दिन सृष्टिï की रचना की थी जिसके चलते इस दिन दिन बह्मा की भी पूजा की जाती है।  
    उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा चलाया हुआ नवसंवत्सर 19 मार्च से 2083 शुरू हो रहा है।
 विक्रमादित्य ने अपने बल पर शकों का नामोनिशान मिटा अश्वों को आक्सस नदी का पानी पिलाया था। अपनी जीत की खुशी में विक्रमी संवत का श्रीगणेश किया था। इसी दिन को हिन्दू अपना नववर्ष मानते हैं। विक्रमादित्य ने अपने पिता गंधर्वसेन की मृत्यु का बदला लिया था। संयोजन महेश बोहरा हिंदु जागरण मंच ने बताया कि नव वर्ष बस स्टैंड पर धूमधाम से मराया जाएगा जिसकी तैयारियां जारी हैं। इस दिन जगह जगह हवन आयोजित होगा वहीं कनीना के संत मोलडऩाथ आश्रम में भी इस दिन हवन होगा।
फोटो कैप्शन: महेश बोहरा


 कनीनावासी नहीं भूल पाएंगे करतार साहब को
- 5 मार्च को हो चुका है देहांत
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कनीना की आवाज।
 18 सितंबर 1936 में जन्मे करीब 90 वर्षीय सूबेदार करतार साहब को कनीनावासी नहीं भुला पाएंगे जिनका 5 मार्च 2026 को निधन हो चुका है। उनकी पत्नी कमल यादव 2009 में स्वर्ग सिधार गई थी। अपने समय के नेशनल वालीबाल खिलाड़ी रहे थे। आज तक उनकी खेलों की प्रतिभा को कोई नहीं भुला पा रहा है। उनकी एकमात्र पुत्री मीना यादव स्कूल प्राध्यापिका रह चुकी है।
वे कुछ समय से बेड पर ही थे परंतु उनका रोबिला चेहरा आज तक लोगों के जहन में अंकित है। वे अति सामाजिक रहे। वर्षों तक देश सेवा करके सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त होकर कनीना आए थे और कनीना में ही रह रहे थे।
 फोटो कैप्शन: करतार सिंह साहब




विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस -15 मार्च
अपने अधिकारों के प्रति बहुत कम लोग जागरूक है-सुरेश कुमार
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कनीना की आवाज।
 आज के दिन चाहे विज्ञान ने तरक्की की है किंतु प्रतिदिन इंसान को विभिन्न सामान, खाद्य सामग्री एवं अन्य उपयोगी सामान खरीद कर लाना पड़ता है। परंतु सभी उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है। उन्हें कौन-कौन से अधिकार मिले हैं अगर उनसे पूछा जाए तो वह कुछ भी कहने में असमर्थ है। यहां तक की बाजार से सामान तो खरीद लाते हैं उन्हें कुछ दुकानदार बिल तक नहीं देते, बिल देने में आना कानी करते हैं जिसके चलते वे बिल नहीं ले पाते परिणाम यह निकलता है कि जब उन्हें बिल की आवश्यकता बिल की होती है मारे मारे फिरते हैं। इस संबंध में कुछ उपभोक्ताओं से बात की गई। विशेष कर सुरेश कुमार वरिष्ठ प्राध्यापक से बात की गई जिनके विचार इस प्रकार हैं-
*** उपभोक्ता प्रतिदिन का सामान खरीद कर लाने पर भी उन्हें यह मालूम नहीं कि उन्हें कौन-कौन से अधिकार मिले हुए हैं। बाजार से सामान खरीद कर लाते हैं किंतु दुकानदार उन्हें बिल तक नहीं देते, बिल मांगते हैं तो बिल देने में आनाकानी करते हैं यहां तक कि दुकानदार जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावटी चीजों का वितरण, मूल्य से ज्यादा दाम वसूलते हैं। तब भी उपभोक्ता कुछ नहीं कर पाते। उपभोक्ता मन मारकर रह जाते हैं यहां तक कि उन पर कई प्रकार के दाब दिये जाते है। इसके कारण भी अपना मुंह तक भी नहीं खोल पाते। इसके कारण उपभोक्ताओं के साथ अन्याय होता रहता है। उपभोक्ताओं को बिना मानक चीजें बेची जाती है, नापतोल में में गड़बड़ की जाती है। गारंटी की सर्विस देने पर भी उपभोक्ता को कुछ भी प्राप्त नहीं होता। उपभोक्ता बेचारे मायूस बनकर खड़े रहते हैं। उपभोक्ता न्यायालय की स्थापना की गई है किंतु उनको यह नहीं पता होता कि न्यायालय में जाकर भी वे अपने अधिकार मांग सकते हैं। उपभोक्ताओं के साथ जालसाजी की जाती है फिर भी मन मसोसकर कर रहे जाते हैं। ऐसे में उनका जागृत करने का उद्देश्य ही उपभोक्ता जागरूकता दिवस का नियम है। इस संबंध में यदि लोगों को जागरूक किया जाए तो हो सकता है भविष्य में अपनी भूमिका अच्छी प्रकार निभा सकते हैं।
 महिला भी दैनिक जीवन की कई वस्तुएं खरीदने में पीछे नहीं होती परंतु उनको अपने अधिकारों का कोई ज्ञान नहीं होता वह सामान खरीदने जाती है और भोली भाली महिला विशेष रूप से ठगी का शिकार हो जाती है। आए दिन ठगी होती रहती है किंतु उनका किसी प्रकार का ज्ञान न होना सबसे बड़ी समस्या है। भारत में उपभोक्ताओं के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2020 में बना हुआ है जिसमें अनेकों हित की बातें ग्राहकों के लिए रखी गई है। यदि ग्राहक पूर्ण रूप से जागरूक किया जाए, सरकार उपभोक्ताओं को जागरूक करें तो हो सकता है भविष्य में सुधार की गुंजाइश मिलेगी।
 फोटो कैप्शन: सुरेश कुमार वरिष्ठ प्राध्यापक


भाजपा नेता रख रहा है लोगों की सेहत का ध्यान, पिला रहा है गन्ने का जूस
- रोटी रोजी कमाने में कोई शर्म नहीं -अशोक वर्मा
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कनीना की आवाज।
कनीना निवासी अशोक वर्मा जो भाजपा नेता है तथा राव इंद्रजीत सिंह का कट्टर समर्थक तथा उनके पिता रामकुमार वर्मा राव इंद्रजीत सिंह के कट्टर समर्थक रहे हैं, आज अशोक वर्मा अपनी रोटी रोटी चलाने के लिए गन्ने का जूस बेच रहा है। उनसे इस बाबत चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि रोटी रोटी कमाना हर इंसान का फर्ज बनता है। इसमें किसी प्रकार की तौहीन नहीं होती। कमाने के लिए चाहे कोई भी काम मिले, जरूर मेहनत और लगन सीखना चाहिए। उनका कहना है कि वह गन्ने का रस पिलाकर लोगों की सेहत का ध्यान रख रहे हैं तथा बेहतर दर्जे का गन्ने का रस पिलाते हैं। डाक्टर भी कुछ मरीजों को गन्ने का जूस पीने के लिए सलाह देते हैं। इसलिए उनका ध्येय है कि बेहतरीन जूस पिलाकर लोगों की सेहत का ध्यान रखा जाए। उनका कहना है कि अब वो अपने इस कार्य को विस्तार देंगे तथा बड़ी-बड़ी मशीन जूस से संबंधित लाकर अनेक फलों का जूस निकालने का कार्य भी भविष्य में करेंगे। उन्होंने कहा कि जो मेहनत से जी चुराते हैं वो इंसान नहीं होते और जब इंसान होते हैं वो मेहनत करके ही अपनी रोटी रोटी कमाते हैं। अशोक वर्मा के पिता रामकुमार एक वक्त था जब राव इंद्रजीत सिंह का कट्टर समर्थक बना और कनीना के बहुत से लोगों का जमकर विरोध झेलना पड़ा था।
  उल्लेखनीय है कि अशोक वर्मा ने पहले कबाड़ी का काम भी किया था तथा खूब ख्याति पाई थी। विशेष प्रकार की सूती चद्दर छपाई करके बेचने में भी मशहूर रहे हैं।
 फोटो कैप्शन 01:अशोक वर्मा गन्ने का जूस पिलाते हुए














फूड सप्लाई इंस्पेक्टर के नेतृत्व में होटलों पर छापेमारी
- कमर्शियल सिलिंडर मिले

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कनीना की आवाज।

क्षेत्र में गैस सिलेंडरों के सही उपयोग और वितरण व्यवस्था की जांच के लिए फूड सप्लाई विभाग की टीम ने कनीना में विभिन्न दुकानों, होटलों और अन्य व्यावसायिक संस्थानों पर औचक निरीक्षण किया। यह कार्रवाई फूड सप्लाई इंस्पेक्टर ध्यान सिंह के नेतृत्व में की गई।
निरीक्षण के दौरान टीम ने कस्बे के कई होटलों और ढाबों की जांच की। जांच के दौरान सभी होटलों में कमर्शियल गैस सिलेंडर ही उपयोग में पाए गए, जो नियमानुसार सही पाए गए। टीम ने होटल संचालकों को गैस सिलेंडरों के उपयोग से जुड़े नियमों की जानकारी देते हुए भविष्य में भी केवल कमर्शियल सिलेंडर ही प्रयोग करने के निर्देश दिए। फूड सप्लाई इंस्पेक्टर ध्यान सिंह ने बताया कि विभाग का उद्देश्य घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाना है ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा समय-समय पर ऐसे औचक निरीक्षण किए जाते हैं और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।
टीम ने इस दौरान एक गैस एजेंसी पर भी पहुंचकर रिकॉर्ड की जांच की। जांच के दौरान एजेंसी का रिकॉर्ड सही पाया गया और गैस वितरण व्यवस्था संतोषजनक मिली। ध्यान सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह से जारी है और उपभोक्ताओं को गैस की किसी प्रकार की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। इस निरीक्षण टीम में निरीक्षक विनोद कुमार, निरीक्षक रमेश चन्द, निरीक्षक नसीब सिंह तथा उपनिरीक्षक संदीप कुमार भी शामिल रहे, जिन्होंने मिलकर कनीना में विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण किया।

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