तापमान पहुंचा 37 डिग्री, गेहूं पकान पर,फसल को नुकसान होने का अंदेशा
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में सरसों की लावणी पूरे यौवन पर चल रही है वही तापमान बढ़ता ही जा रहा है। दिन का तापमान 37 डिग्री सेंटीग्रेड पहुंच गया है जिसके चलते गेहूं की पकान पर पहुंची फसल को नुकसान होने का अंदेशा बन गया है। करीब 15 दिन में गेहूं की फसल मिल्क स्टेज से पकान पर पहुंच जाती है। इस अवधि में अगर तापमान 30 डिग्री से अधिक पहुंच जाता है तो पकान प्रक्रिया में व्यवधान आ जाता है और गेहूं का पकान अच्छी प्रकार नहीं हो पाता। गेहूं जल्दी लावणी आ जाता है। गेहूं के दाने भी छोटे रह जाते हैं और पक नहीं पाते।
किसान चिंतित हैं। किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, अजीत कुमार, कृष्ण कुमार ने बताया कि इस समय गेहूं कच्चे हैं और अभी पके नहीं हैं। ऐसे में ताप बढऩे का कु-प्रभाव पड़ रहा है। उन्हें इस बार अच्छी फसल पैदावार लेने की उम्मीद थी किंतु तापमान बढऩे से उनकी चिंता की रेखाएं बढ़ गई है। अभी गेहूं की बालियां आ चुकी हैं जिनमें गेहूं का दाना मिल्किंग स्टेज पर है जिसे ठंड की जरूरत होती है।
करीब 20,000 हेक्टेयर पर उगाई गई सरसों की फसल पक चुकी है। कुछ किसान कटाई के काम में लग गये हैं। दिन के समय ताप बढ़ गया है। करीब 9500 हेक्टेयर पर गेहूं की खेती की गई है।
इस संबंध में पूर्व विषय विशेषज्ञ डा. देवराज से बात की गई। उन्होंने कहा कि जब गेहूं पकान पर पहुंच गया हो और 30 डिग्री से अधिक तापमान हो तो निश्चित रूप से उस समय नुकसान होगा। ऐसे में उन्होंने कहा कि किसानों की गेहूं पैदावार कमजोर रहने, हल्के रहने की संभावना बन जाती है।
क्या कहते हैं एसडीओ कृषि-
उधर एसडीओ कृषि डा. अजय यादव से इस संबंध में चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि इस समय सरसों की लावणी चल रही है और तापमान बढऩे का सरसों पर कोई नुकसान नहीं होगा। गेहूं जो पक चुका है उस पर भी कोई नुकसान नहीं होगा। केवल उस गेहूं को नुकसान होगा जो पकान पर पहुंच रहा है, जो मिल्क अवस्था में है, दूधिया अवस्था में होने पर उस गेहूं को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि तापमान 30 डिग्री से अधिक पहुंच जाता है तो ऐसी अवस्था में गेहूं की फसल को नुकसान होने की संभावना बन जाती है। उन्होंने इस स्थिति से लडऩे के लिए किसानों को दो सलाह दी है। उन्होंने कहा कि फव्वारों द्वारा हल्की सिंचाई करें परंतु ध्यान रहे सिंचाई गहरी नहीं करनी है वरना गेहूं के गिरने की संभावना होती है। यदि तेज हवा चलेगी तो गेहूं गिर जाएगा। ऐसे में गेहूं में हल्की फव्वारों द्वारा सिंचाई करने से लाभ मिलता है। यही नहीं जिन खेतों में गेहूं अभी बहुत कच्चा है उन्हें दो किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। अगर कच्ची अवस्था में गेहूं है तो एक सप्ताह बाद दूसरी स्प्रे भी करनी चाहिए। अगर गेहूं अधिक कच्चा नहीं है तो एक स्प्रे से ही काम चल जाएगा।
सरसों खरीद की तिथि नहीं आई-
उधर कनीना व्यापार मंडल प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष रविंद्र बंसल ने बताया कि सरकार ने सरसों का समर्थन मूल्य 6250 रुपये वहीं गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल रखा है तथा सरसों की खरीद की कोई अभी तक तिथि नहीं आई है। एक अप्रैल से खरीद होने की संभावना है।
फोटो कैप्शन 10: किसान गेहूं की फसल को निहारते हुए
और साथ में डा.अजय एसडीओ कृषि
कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-14 कड़ी पढ़े 11 मार्च को
-कुतरू की आईडी खोलकर तबादले के आप्शन ही बदल दिये
कनीना की आवाज ब्लाग से न उठाये कोई समाचार
-वरना कापीराइट के तहत होगा मामला दर्ज
-आरएनआई द्वारा है रजिस्टर्ड
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कनीना की आवाज। कनीना की आवाज नमक ब्लाग आरएनआई द्वारा रजिस्टर्ड समाचार पत्र है। इससे यूं की यूं खबर को उठाकर कुछ लोग अनजाने में ग्रुप में डाल देते हैं जो कापीराइट का उल्लंघन है। कहने को तो अज्ञानता कहेंगे लेकिन कानून के सामने अज्ञानता का कोई बहाना नहीं होता। ऐसे में ऐसी गलती दो-तीन बार कुछ लोग कर चुके हैं जो डा. होशियार सिंह यादव कापीराइट अधिकारी द्वारा देखी जा चुकी हैं। भविष्य में अगर कोई ऐसी गलती करेगा चाहे वह जाने या अनजाने में हुई उसके खिलाफ कापीराइट के तहत मामला दर्ज करवाया जाएगा। इसके लिए ग्रुप एडमिन भी जिम्मेवार होगा। कनीना की आवाज ब्लाग की खबर को कापी करके कहीं प्रयोग न करें, सावधानी बरते अन्यथा अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
कापीराइट मामले में सजा
-अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की कैद और 50,000 रुपए से 2 लाख रुपए तक के जुर्माने तक हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर सजा बढ़ जाती है, और इसमें गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध माना जाता है, जिसमें अवैध सामग्री और उपकरणों को जब्त भी किया जा सकता है।
सजा के मुख्य प्रावधान (भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अनुसार)
धारा 63:पहली बार उल्लंघन करने पर कम से कम 6 महीने की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 लाख रुपएतक का जुर्माना हो सकता है।
धारा 63 (दोबारा उल्लंघन): दूसरी बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 साल की कैद और 1 लाख रुपए के जुर्माने से लेकर अधिकतम 3 साल तक की कैद और 2 रुपए लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
धारा 63बी(कंप्यूटर प्रोग्राम का उल्लंघन): कंप्यूटर प्रोग्राम की उल्लंघनकारी प्रति का जानबूझकर उपयोग करने पर कम से कम 7 दिन की कैद और 50,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
अन्य दंड:उल्लंघन करने वाली प्रतियां और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए जा सकते हैं, और कापीराइट मालिक सिविल मुकदमे के जरिये मौद्रिक हर्जाना भी मांग सकता है।
साल में दो विज्ञापन भी नहीं देने वाले समाचार न भेजे
- अखबार का आदेश है विज्ञापन देने वालों की खबरें लगे अधिक से अधिक
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कनीना की आवाज। लंबे समय से डा. होशियार सिंह यादव पत्रकारिता में जुटा हुआ है। सुबह से रात 11 जाते हैं तब जाकर पत्रकारिता पूर्ण होती है किंतु न तो समाचार पत्र एक रुपया भी देता और न ही लोग विज्ञापन देते। साल में अनेक समाचार छपने के बाद भी जब विज्ञापन का वक्त आता है तब कोई विज्ञापन नहीं दिया जाता, जिससे अखबार नाराज है और ऐसे पत्रकार जो विज्ञापन नहीं देते उनको हटाने का निर्णय ले लेता है। ऐसे में जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाए वो कृपया मेरे पास/डा. होशियार सिंह यादव के पास समाचार प्रकाशन हेतु न भेजे। इसे कड़ाई से पालन किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई समाचार भेजता है तो स्वयं जिम्मेदार होगा और वे प्रकाशित नहीं होंगे। अपने घर से कंप्यूटर, बिजली, नेट खर्चा, भाग दौड़ करनी पड़ती है वहीं बच्चों से दूर रहना पड़ता है। उस पर भी एक रुपए भी जेब में नहीं आता और खर्चा बढ़ता ही चला जाता है। एक और परिवार वाले नाराज वहीं अखबार वाले नाराज क्योंकि कुछ लोगों की आदत बन गई है कि समाचार के समय तो कहेंगे बड़े-बड़े समाचार छाप दो और विज्ञापन के नाम पर कहेंगे सोचेंगे, देखेंगे या फिर फोन नहीं उठाते, फोन बंद कर लेते हैं। ऐसे में ऐसे व्यक्ति जो साल में दो विज्ञापन नहीं दे पाते वो कृपया माफ करें, समाचार भविष्य में न भेजे। केवल वही व्यक्ति भेजें जिन्होंने कुछ विज्ञापन दिया है या मेरी किसी क्षेत्र में मदद की है ताकि उनका खर्चा में स्वयं वहन कर सकूं। सबसे बड़ी बात है कि अखबार के निर्देशानुसार एक विज्ञापन कम से कम 10 हजार का देने वालों के छह माह समाचार प्रकाशित होंगे, दो विज्ञापन देने वालों के पूरे साल समाचार प्रकाशित होंगे। अधिकतम दिन में एक समाचार प्रकाशित करवा सकता है वह भी स्वयं टाइप करके भेजना होगा। यदि साल में 20000 तक का विज्ञापन देता है उनके लिए यह सुविधा एक साल चलती रहेगी। समाचारपत्रों का कहना है कि उन लोगों पर समय बर्बाद ना करें जो विज्ञापन नहीं देते। एक और मजबूरी है दूसरी और विज्ञापन देना जरूरी है। शायद कनीना क्षेत्र के प्रतिदिन 10 बड़े समाचार अकेले मेरे प्रकाशित होते हैं लेकिन इस होली पर महज एक छोटा सा विज्ञापन मिला जिनसे उम्मीद थी वो कल देंगे, फिर देंगे, आगे देंगे करते-करते होली भी टाल दी। अब ऐसा नहीं होगा। केवल क्राइम के समाचार और उन लोगों के समाचार प्रकाशित होंगे जो विज्ञापन देते हैं या ऐसे व्यक्तित्व जो वास्तव में समाज के लिए उदाहरण बने हुए हैं।
राजेंद्र सिंह कपूरी को राज्य वित्त सचिव मनोनीत
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कनीना की आवाज। हरियाणा पावर कारपोरेशन अनुसूचित जाति जनजाति व पिछड़ा वर्ग कर्मचारी यूनियन का राज्य स्तरीय 36वां चुनाव अधिवेशन डा. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय ऊर्जा पार्क माडल टाउन रेवाड़ी में बड़े ही सौहार्दपूर्ण माहौल में सर्वसम्मति से संपन्न हुआ। जिसमें प्रदेश के सभी सर्किलों से कर्मचारियों ने हिस्सा लिया जिसमें रमेश तंवर को राज्य प्रधान चुना गया। साथ ही इसी कड़ी में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के उप मंडल कनीना में कार्यरत राजेंद्र सिंह कपूरी को राज्य वित्त सचिव, महेश गोमला को अतिरिक्त महासचिव व संदीप को उप प्रधान चुना गया तथा लखनलाल को सर्कल सचिव व सुरेंद्र सिंह को सर्किल ऑर्गेनाइज चुना गया। जिसके लिए सभी कर्मचारी साथियों ने निर्वाचन समिति का धन्यवाद किया व उपमंडल कनीना दफ्तर में लड्डू बाटकर के खुशी जाहिर की। कर्मचारी साथियों को आश्वासन दिया कि उनकी लम्बित मांगों को समय रहते समय पर पूरा करवाया जाएगा।
फोटो कैप्शन 08: चुनावों में मनोनीत पदाधिकारियों को अभिनंदन करते हुए
क्षमतावर्धन का सर्वे जारी
-कनीना मंडी स्कूल में हुआ सर्वे
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कनीना की आवाज। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद गुरुग्राम के दिशा निर्देश अनुसार तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान महेंद्रगढ़ के प्राचार्य विश्वेश्वर कौशिक के मार्गदर्शन में जिला महेंद्रगढ़ के सभी राजकीय विद्यालयों से वर्ष 2025 -26 में शिक्षकों के क्षमतावर्धन में जो प्रशिक्षण आयोजित किए गए उसे बारे में एक सर्वे आयोजित किया जा रहा है ।
इसी कड़ी में सोमवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान महेंद्रगढ़ से विषय विशेषज्ञ राजेश गुप्ता उपस्थित रहे। उनके द्वारा बताया गया कि इस सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जो क्षमतावर्धन कार्यक्रम एससीईआरटी के दिशा निर्देश पर आयोजित हुए उनसे विद्यालय के शैक्षिक शैक्षिक वातावरण में कितना बदलाव आया । इसके तहत विद्यालय के मुखिया ,विद्यालय के अध्यापकों तथा छात्र-छात्राओं से संवाद कर प्रशिक्षण की सार्थकता और उसमें सुधार के बारे में विचार विमर्श किया गया। अधिकतर शिक्षकों का मत यही रहा कि प्रशिक्षण से उनके कार्य करने की क्षमता में सुधार हुआ है तथा इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाने चाहिए।
फोटो कैप्शन 07: कनीना मंडी स्कूल में सर्वे करते हुए
सिलिंडर की बढ़ी कीमत ली जाए वापस
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कनीना की आवाज। बसपा नेता अतरलाल एडवोकेट ने केन्द्र सरकार से घरेलू और कामर्शियल रसोई गैस सिलिंडर की कीमतों में की गई वृद्धि को तत्काल वापिस लेने की मांग की है। उन्होंने सरकार के इस निर्णय के विरोध में आगामी 23 मार्च से गांवों में विरोध सभाएं आयोजित करने की घोषणा की है।
अतरलाल ने झाड़ली, भडफ़ व गाहड़ा गांव में लोगों से जनसम्पर्क करते हुए कहा कि रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि करने से जनता में भारी रोष व्याप्त है। केन्द्र सरकार का यह निर्णय गरीब विरोधी तथा महिला विरोधी है। सरकार ने एक साल के अंदर दूसरी बार एलपीजी दामों में वृद्धि कर यह साबित कर दिया है कि उसे गरीबों की चिंता नहीं है। रसोई गैस सिलेण्डर की कीमतों में 60 रुपए की वृद्धि से घरों की रसोई पर सीधा असर पड़ा है। जिससे महिलाओं और उपभोक्ताओं की परेशानियां बढ़ गई हैं। पहले से जारी महंगाई की मार से परेशान जनता का इस वृद्धि से जीना अधिक कठिन हो गया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बसपा, सरकार के इस गरीब विरोधी निर्णय के खिलाफ लोगों को लामबंध करेगी। उन्होंने आगामी 23 मार्च से गांवों में विरोध सभाएं आयोजित करने की घोषणा की।
गायों को खिलाया गुड़ और दिया 5100 रुपए का दान
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कनीना की आवाज। कनीना निवासी देवेंद्र ने अपनी पत्नी आदेश देवी के साथ श्रीकृष्ण गौशाला में पहुंचकर गायों को गुड़ खिलाया और गौवंश के लिए 5100 रुपए का दान दिया। इस मौके पर प्रधान भगत सिंह, सचिव यश यादव, सह सचिव रामपाल यादव, उप प्रधान दिलावर सिंह, रविंद्र बंसल, बलवान सिंह, मास्टर रामप्रताप, सतवीर गुगनवाला, ओमप्रकाश ठेकेदार भडफ़ आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 5: गायों को दान देते हुए
पक्षियों के लिए दाना पानी का प्रबंध करना चाहिए-राजेंद्र सिंह
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कनीना की आवाज। हर इंसान को आगे आना चाहिए और पक्षियों के लिए दाना पानी का प्रबंध करना चाहिए। ये विचार पीपूल फार एनिमल्स के सदस्य एवं समाजसेवी राजेंद्र सिंह ने पक्षियों के लिए जल एवं दाने का प्रबंध करते हुए व्यक्त किए। वे कई वर्षों से गर्मियों के दिनों में इस प्रकार का प्रबंध करते आ रहे हैं।
श्री सिंह ने कहा कि भीषण गर्मी से बचाने के लिए जीवों की सुरक्षा हम सभी का दायित्व बनता है। जीव अक्सर गर्मी में पानी के बिना प्राण त्याग देते हैं। ऐसे में हम सभी का दायित्व बनता है कि उन निरीह जीवों के लिए खेतों में, घरों में, आस पास जहां भी संभव हो पानी एवं दाना का प्रबंध कर दिया जाए। मार्च माह में ही भीषण गर्मी पडऩे लगी है।
उल्लेखनीय है कि अभ्यारण्य खोलने के लिए राष्ट्रपति से गुहार कर चुके राजेंद्र सिंह एवं सूबे सिंह अपने परिवार सहित खेतों में ट्यूबवेल पर रहते हैं और वर्षों से जीवों के लिए पानी के घड़े, ठीकरे वृक्षों पर टांग चुके हैं। उनके लिए दिन रात एक करके प्रबंध करते आ रहे हैं वहीं जल एवं अन्न पक्षियों के लिए रखने की प्रेरणा दूसरे लोगों से भी कर रहे हैं।
खेतों में काम करने वाले सूबे सिंह नामक उनके भाई भी उनकी इस कार्य में मदद करते आ रहे हैं। जीवों का शिकार करने वालों को कभी नहीं बख्शते। उन्हें पुलिस के हवाले कर देते हैं। उन्होंने बताया कि अब सरसों के बाद गेहूं की लावणी होगी फिर तीतर, बटेर का शिकार करने वाले कुछ लोग खेतों में आने लग जाते हैं।
फोटो कैप्शन 02: जीवों के लिए जल का प्रबंध करते राजेंद्र सिंह।
गर्मी पडऩे से चलने लगे हैं पंखें
-बढ़ गई है कूलरों की मांग, ठीक करवाने लगे हैं कूलर
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जहां मार्च माह के दूसरे सप्ताह में ही कम से कम ताप 18 डिग्री तो अधिकतम 37 डिग्री सेंटीग्रेड पहुंच गया है। दिन के समय समय सडै़कों पर कम भीड़ मिलती है। किसान त्वरित गति से सरसों की लावणी में लगे हुए हैं। अगर यूं ही गर्मी बढ़ती रही तो गर्मी जीना मुहाल कर देगी। अप्रैल, मई एवं जून माह में में तो गर्मी और भी बढऩे के आसार हैं। भीषण गर्मी में किसान फसल कटाई में लगे हुए हैं।
कनीना में भीषण गर्मी पडऩे का असर स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है। दुकानदार भी गर्मी से राहत पाने के लिए दुकानों में पंखे चलाकर आराम करने लगे हैं।
कूलरों की ओर रुझान--
गर्मी के चलते कनीना क्षेत्र में कूलरों को ठीक करवाने एवं चालू करने की योजना बनाने लगे हैं। । इसके बाद एसी की ओर बढऩा शुरू कर देंगे। विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी एससी, कूलर एवं पंखे अप्रैल माह में ही प्रयोग किए जा रहे हैं।
मक्खी एवं मच्छरों की संख्या बढ़ गई है। किसान दिनभर खेतों में काम करके आराम के लिए घर आते हैं तो गर्मी उन्हें सताती है ऐसे में वे पंखेआदि का प्रयोग करते हैं। दुकानदार भीम सिंह ने बताया कि इस बार अभी पुराने कूलर ठीक अधिक कराए जा रहे हैं। पुराने कूलरों को साफ करके जाली आदि बदली जा रही हैं।
फोटो कैप्शन 03:दुकान पर कूलरों की मरम्मत करते कारीगर।
माता मंदिरों में लगे खाने के ढेर
-बासौड़ा पर्व पर चला आ रहा है रिवाज
--बव्वा में माता मेला 10 मार्च को
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कनीना की आवाज। बासौड़ा पर्व के अवसर पर जहां माता के मंदिरों में विभिन्न प्रकार के पकवानों एवं खानों के ढेर लग गए हैं वहीं चौराहों तथा विभिन्न धार्मिक स्थानों के द्वार पर भी भारी मात्रा में अनाज, पकवान, चावल आदि डाले गए। जीव-जंतु भी दिनभर पकवानों के मजे लेते देखे गए। करीब तीन सप्ताह तक यह पर्व अलग अलग दिन चलता है।
कनीना का माता स्थल ,संत मोलडऩाथ आश्रम के पास स्थित है। जहां सुबह सोमवार से भारी मात्रा में अनाज चढ़ाया गया। कुछ लोग इस अनाज को इकट्ठा कर पशुओं के चारे के रूप प्रयोग करते देखे। पशुपालक इस अनाज को इकट्ठा करके गाय, भैंस तथा सुअर आदि को खिलाते देखे गये। आगामी 3 सप्ताह तक यहां इसी प्रकार का दृश्य देखने को मिलेगा।
बासी खाने के लिए प्रसिद्ध है बासौड़ा- बासौड़ा क्षेत्रीय पर्व है तथा लंबे समय से पर्व मनाया जाता रहा है। उन दिनों जब दवा का अधिक ज्ञान नहीं होता था, चेचक रोग बहुत फैलता था। उस जमाने से इस प्रकार का रीति रिवाज बुजुर्गों ने चलाया जिसमें बासी खाना खाया जाता है। बासी खाने से माना जाता है चेचक आदि रोग नहीं होते। यही नहीं पुत्र आदि के स्वस्थ रहने की कामना से भी महिलाएं इस पर्व को मनाती हैं।
कनीना के राजेंद्र सिंह बुजुर्ग बताते हैं कि बासौड़ा पर्व बुजुर्गों के समय से चला आ रहा है। जिन महिलाओं के एक साल के अंतराल में संतान हुई हो वह खाने के रूप में घर घर भेंट देती हैं जिसे कंडवारी नाम से जाना जाता है। माता स्थल पर जहां सीढिय़ों पर भी खाना बिखरा पड़ा है। इस प्रकार के दृश्य को देखकर लगता है कि बासौड़ा के प्रति लोगों का बहुत अधिक रुझान है। सुबह सवेरे उठकर महिलाएं यहां पूजा अर्चना करने आती है और सभी पकवान एवं भोजन या चढ़ाती हैं। तत्पश्चात इसका पूरा परिवार भोग लगाता आया है। समाजसेवी सुरेंद्र यादव ने बताया कि बव्वा गांव में बुधवार को मेला लगेगा। अक्सर यह पर्व होली के बाद सोमवार एवं बुधवार को मनाया जाता है। यहां भी तीन सप्ताह तक पर्व चलेगा। यहां बाल उतरवाने का पर्व भी चलता है।
फोटो कैप्शन 01:बव्वा का माता मंदिर
लावणी के लिए मजदूरों की बढ़ गई है मांग
-सरसों की लावणी रेट बढ़ाये, मारामारी
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में सरसों की फसल कटाई पूरे यौवन पर हैं। किसान अपनी फसल कटाई स्वयं कम करते हैं और मजदूरों से अधिक करवा रहे हैं। दूसरे राज्यों से भारी संख्या में मजदूर आए हुए हैं जो सरसों 3500 रुपये प्रति किला तक तथा गेहूं कम से कम 6000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से फसल कटाई करेेंगे। किसान अपने खेतों में फसल कटाई सरसों निकालना, यहां तक कि आने वाले समय में गेहूं की कटाई और भंडारण भूसे का भंडार आदि सभी कार्य इन मजदूरों से करवाते हैं। आलम यह है कि किसान अपने खेतों में जबसे फसल उगाता है तभी से उसकी रखवाली का कार्य भी मजदूरों पर छोड़ता रहा है। मजदूर निश्चित राशि में फसलों की देखभाल करते हैं। फसलों की आवारा जंतुओं से देखरेख के लिए अलग से रखवाले भी रखे जाते हैं। ये रखवाले रात को आवारा जंतु जैसे नीलगाय से फसल की सुरक्षा करते हैं। भारी संख्या में मजदूर होली मनाकर यहां पहुंच रहे हैं।
किसानों ने बताया कि एक जमाना था जब परिवार के सदस्यों की संख्या अधिक होती थी उस समय मजदूरों की जरूरत कम पड़ती थी किंतु अब प्रत्येक घर में सदस्य की संख्या कम होती है। एक और जहां चल रही हैं विद्यार्थी अपने स्कूल में परीक्षा देने जाते हैं वही किसान अपने खेतों में लावणी का कार्य करते हैं। लेकिन ऐसे बहुत कम किसान है जो अपने खेत की लावणी स्वयं करते हैं। मजदूरों पर ही लावणी का कार्य निर्भर करता है।
मिली जानकारी अनुसार राजस्थान, बिहार ,उत्तर प्रदेश तथा अन्य राज्य से मजदूरों के ग्रुप आए हुए हैं। ये ग्रुप दस से लेकर के 30 की संख्या में मिलते हैं। एक साथ मिलकर कार्य करते हैं। फसल कटाई का काम जो दिनों में पूरा होना चाहिए कुछ ही घंटों में पूरा कर जाते हैं। यही कारण है किसान मौसम को देखते हुए तथा मौसम बदलाव के चलते हुए इन मजदूरों से कटाई करवाता है। यहां तक सरसों निकालना आदि का कार्य भी मजदूरों से करवा भंडारण तक का कार्य भी मजदूरों से करवाता है। एक और मजदूरों को अपनी रोटी रोजी मिल रही है वही किसान भी इन मजदूरों से काम करवा कर प्रसन्न नजर आ रहे हैं।
फोटो कैप्शन 11: लावणी करता मजदूरों का एक ठोल।














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