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Thursday, March 12, 2026
कनीना में रसोई गैस को लेकर उपभोक्ता परेशान , लगा रहे एजेंसी के चक्कर
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस को लेकर उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर लेने के लिए लोगों को एजेंसी के बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि फोन के माध्यम से गैस बुकिंग कराने में भारी दिक्कत आ रही है और बुकिंग नंबर/डीएसी आने में भी तीन चार दिन तक का समय लग रहा है।
गैस एजेंसी संचालक का कहना है कि फिलहाल उनके पास दो-तीन दिन का गैस स्टाक उपलब्ध है लेकिन नियमों के अनुसार केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को सिलेंडर दिया जा रहा है जिनके पास वैध बुकिंग नंबर/डीएसी है। बिना बुकिंग नंबर के किसी को भी गैस सिलेंडर नहीं दिया जा सकता।
उधर प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि गैस की कालाबाजारी जैसी कोई समस्या पैदा न हो। गैस एजेंसी पर पहुंचे उपभोक्ता राजकुमार, अनिल शर्मा, कविता, कुसुम और राजू ने बताया कि बुकिंग प्रक्रिया में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द समाधान करने की मांग की है ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
फोटो कैप्शन 08: कुकिंग गैस सिलिंडर के लिए कर रहे भागदौड़
सरसों के धांसे भी बने कीमती
-कुकिंग सिलिंडर की कमी एवं बढ़ते दामों को लेकरी धांसों का करने लगे स्टाक
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कनीना की आवाज। एक जमाने में मुफ्त में मिलने वाले धांसे अब कीमती बन गए हैं। किसानों के लिए ये अतिरिक्त आय का साधन बन गए हैं। अब किसान इन धांसों को नष्ट नहीं कर रहा है अपितु कुकिंग गैस सिलिंडर के दाम बढऩे एवं मारामारी को लेकर धांसों का स्टाक करने लग गया है। ताकि आपातकाल के समय काम आए। हालात ये बन गये हैं कि किसान धांसों के बदले सरसों की कटाई करवाने लगे हैं। किसान राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, अजीत कुमार, कृष्ण कुमार,गजराज सिंह, योगेश कुमार, महेंद्र, महिपाल आदि ने बताया कि धांसे न केवल ईंधन का विकल्प है अपितु गरीब तबके के लोग जो चूल्हे से खाना बनाते, धांसों को वरदान समझते हैं। धांसों को किसान सरसों कटाई के समय उखाड़ लेते हैं और इकट्ठा कर वर्षभर प्रयोग करते हैं।
एक वक्त था जब सरसों के धांसों को लोग उखाड़ कर नहीं लाते थे आज उनकी की कीमत बढ़ गई है। किसान फसल कटाई के साथ-साथ जहां धांसों को इकट्ठा करते हैं। इन्हें ईंधन के विकल्प के रूप में प्रयोग करते हैं।
किसानों ने बताया कि धांसों को काटकर सूखा लिया जाता है और इनको खाना बनाने के लिए प्रयोग में लाते हैं। कुछ किसान पशुओं का आहार पकाने में भी उनका उपयोग करते हैं। धांसों को लोग इक_ा करके अपने घर आंगन में कहीं जमा कर लेते हैं और कई महीनों तक विशेषकर ईंधन के विकल्प के रूप में प्रयोग करते हैं। चाहे ये कम ऊष्मा प्रदान करते हो किंतु गरीब तबके के लोगों के लिए धांसे बहुत कीमती माने जाते हैं। किसान इन धांसों को उखाड़ कर अपने लिए प्रयोग करते हैं या आसपास के लोग उन्हें उखाड़ कर ले आते हैं। यही नहीं कपास के वक्त भी कपास के धांसे ईंधन के रूप में काम में लिए जाते हैं। जहां सिलेंडर महंगा होने के कारण धांसों की अच्छी खासी मांग हो रही है। अब तो घरेलू गैस की किल्लत के आसार बनते
जा रहे हैं जिससे धांसे ही काम में लाये जाएंगे। यद्यपि ये प्रदूषण करते हैं किंतु मजबूरी बन गई है कि ईंधन के रूप में प्रयोग करें।
फोटो कैप्शन 07: खेत से धांसे उखड़ता किसान
दौंगड़ा अहीर में भारतीय किसान संघ की बैठक, सरसों खरीद जल्द शुरू करने की मांग
-एमएसपी से कम दाम पर खरीद का आरोप
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कनीना की आवाज। सरसों की सरकारी खरीद में हो रही देरी और किसानों को हो रहे आर्थिक नुकसान के मुद्दे को लेकर भारतीय किसान संघ, जिला महेंद्रगढ़ की जिला कार्यकारिणी की आवश्यक बैठक वीरवार को श्री श्याम मंदिर दौंगड़ा अहीर में आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र के अनेक किसान, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे तथा किसानों के हित में प्रशासन को ज्ञापन देने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान राजकुमार यादव ने की। इस दौरान सरसों की सरकारी खरीद शीघ्र शुरू करवाने, किसानों को एमएसपी से कम दाम पर फसल बेचने की मजबूरी, मंडियों में चल रही कच्ची पर्ची प्रणाली तथा बिचौलियों द्वारा की जा रही अवैध खरीद पर रोक लगाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में ग्राम दौंगड़ा अहीर को पुन: सरसों खरीद केंद्र के रूप में संचालित करने तथा खरीद प्रक्रिया को एफपीओ के माध्यम से करवाने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसके बाद भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन जिला राजस्व अधिकारी राकेश कुमार को दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल में जिला प्रधान राजकुमार यादव के साथ मुकेश कुमार बेवल, उपप्रधान पवन कुमार, जगराम यादव, विजेंद्र सिंह सरपंच, हरपाल थानेदार, महेंद्र सिंह सहित अनेक पदाधिकारी और किसान मौजूद रहे।किसान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि शीघ्र सरसों की सरकारी खरीद शुरू नहीं की गई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि मंडियों में व्यापारी एमएसपी से कम भाव पर फसल खरीद रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए। किसानों ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
फोटो कैप्शन 06: सरसों की खरीद को लेकर आयोजित बैठक
भगवद्गीता की शिक्षाओं एवं विज्ञान के सह संबंध पर व्याख्यान आयोजित
-इस्कान की छह सदस्यीय टीम ने किया प्रतिभाग
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कनीना की आवाज। पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में भगवद्गीता की शिक्षाओं एवं विज्ञान के सह-संबंध पर भारतीय ज्ञान प्रणाली पर व्याख्यान शृंखला का आयोजन कियागया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिकता, अनुशासन तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना था।
पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में भगवद्गीता की शिक्षाओं को विज्ञान के साथ जोड़कर विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु एक विशेष व्याख्यान शृखला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में इस्कान की छह सदस्यीय टीम ने प्रतिभाग किया। टीम में प्रमुख रूप से राघव पंडित दास, संजीव कुमार कुमावत, गणेश शर्मा तथा संदीप शर्मा शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य बीएम रावत, उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य तथा समस्त स्टाफ सदस्यों द्वारा अतिथि टीम का भव्य स्वागत कर किया गया। मंच संचालन गणित शिक्षक लोकेश कुमार ने किया।
भारतीय ज्ञान प्रणाली पर विशेष जोर देते हुए इस्कान के वरिष्ठ प्रवक्ता राघव पंडित दास ने विद्यार्थियों को मन नियंत्रण, नैतिक मूल्यों, किशोरावस्था में सख्त अनुशासन, इंद्रियों के समुचित उपयोग तथा आत्म-अनुशासन का मार्ग दिखाया।
राघव पंडित दास ने गीता के श्लोकों का जाप करते हुए विद्यार्थियों को बताया कि मन ही मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र और सबसे बड़ा शत्रु है (गीता6.5)। उन्होंने जोर देकर कहा कि किशोरावस्था में मन के नियंत्रण के बिना न तो पढ़ाई में सफलता मिल सकती है और न ही जीवन में सुख-शांति। उन्होंने गीता के श्लोकों के माध्यम से नैतिक मूल्यों (सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य) को अपनाने, इंद्रियों को संयमित रखने तथा सख्त आत्म-अनुशासन का महत्व समझाया।इस व्याख्यान शृंखला में इस्कान के विद्वानों ने भगवद्गीता के विभिन्न अध्यायों की शिक्षाओं को आधुनिक विज्ञान के सिद्धांतों से जोड़कर प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और गीता के नैतिक मूल्यों, कर्म योग, भक्ति योग तथा ज्ञान योग को विज्ञान की खोजों जैसे क्वांटम फिजिक्स, न्यूरोसाइंस आदि के साथ समझा।
सत्र के दौरान राघव पंडित दास ने विद्यार्थियों के मन में उठे सभी जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने हर सवाल का गीता और विज्ञान दोनों के आधार पर समाधान प्रस्तुत किया, जिससे छात्रों की जिज्ञासा पूरी तरह शांत हुई।
सत्र का समापन अत्यंत उल्लासपूर्ण तरीके से हुआ। श्री राघव पंडित दास ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर हरे कृष्ण हरे कृष्ण महा- मंत्र का सामूहिक जाप किया। विद्यार्थी, शिक्षक एवं स्टाफ सदस्य सभी झूम उठे।
प्राचार्य बीएम रावत ने कहा कि भगवद्गीता न केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन देती है, बल्कि विज्ञान के साथ इसका सह-संबंध विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करता है।
उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को और ऊंचा उठाते हैं।
सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्टाफ सदस्यों ने इस कार्यक्रम को अत्यंत लाभदायक बताया। कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। कार्यक्रम के अंत में इस्कान की ओर से विद्यालय के सभी विद्यार्थियों एवं स्टाफ को गीता सार की पुस्तक भेंट स्वरूप वितरित की गयी। कार्यक्रम का समन्वयन हिंदी शिक्षिका पूजा सिंह ने किया व विद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान के शिक्षक गोविंद नारायण सेन का विशेष योगदान रहा।
फोटो कैप्शन 03: नवोदय करीरा में गीता सार समझाते हुए राघव पंडित
एचपीवी वैक्सीन लगवाये अधिक से अधिक किशोरी-डा. रेनू
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कनीना की आवाज। डा. रेणू वर्मा के दिशा निर्देश पर कनीना के उप-नागरिक अस्पताल पर ह्यूमन पपीलेमा वायरस/एचपीवी का वैक्सीन लगाया गया। यह वैक्सीन कैंसर से बचाव हेतु लगाया जाता है।
विस्तृत जानकारी देते हुए एसएमओ डा. रेनू वर्मा उप-नागरिक अस्पताल ने बताया कि देश में एचपीवी की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा 28 फरवरी 2026 को की थी ताकि किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाए जा सके। जिन किशोरियों ने उम्र 14 वर्ष पूर्ण कर ली है और 15 वर्ष पूरी नहीं की है, उन्हें एचपीवी एक सामान्य संक्रमण बन जाता है जो महिला के प्रजनन तंत्र को प्रभावित करता है। यही बाद में सर्विक्स कैंसर कैंसर बन जाता है। ऐसे में बचाव के लिए वैक्सीन मुफ्त लगाई जाती है। एचआई शीशराम ने बताया कि एचपीवी भविष्य में सर्विक्स कैंसर होने के खतरे को कम करता है। भारत में सर्विक्स कैंसर आमतौर पर दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है। यह भारत में ही नहीं अपितु 160 देशों में लगाया जा रहा है। टीके के दुष्प्रभाव बहुत कम और हल्के होते हैं। जहां टीका लगाया जाता है उसे जगह दर्द, हल्का बुखार, बदन दर्द हो सकते हैं। ये लक्षण डा. की सलाह से पेरासिटामोल लेने पर ठीक हो जाते हैं। टीकाकरण अभियान 3 माह में पूरा किया जाएगा जिसमें पात्र आयु वर्ग की प्रत्येक किशोरी को एक ही खुराक दी जाएगी। उन्होंने बताया कि टीकाकरण से पहले ओटीपी आधारित सहमति ली जाएगी और अभिभावकों से भी लिखित सहमति भी ली जाएगी। टीकाकरण की जानकारी यू-विन पोर्टल पर दर्ज की जाएगी, टीकाकरण के बाद डिजिटल प्रमाण पत्र भी जारी किया जाएगा जो पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए लिंक से डाउनलोड किया जा सकेगा। यह टीका किशोरियों के लिए मुफ्त होगा। आयोजित टीकाकरण में खंड विस्तारक शिक्षक सतीश कुमार, एलएचवी शारदा,एएनएम कविता व कांता ने भाग लिया तथा कुछ किशोरियों को वैक्सीन लगाई गई। फोटो कैप्शन 04: वैक्सीन लगाने की तैयारी करता स्टाफ
जतिन के 16वें जन्मदिन पर लगाए लगाए गए पौधे
-दो कनाल को पेड़ पौधों से किया जाएगा लैस-महेश
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कनीना की आवाज। कनीना के जतिन बोहरा के 16वें जन्मदिन पर समस्त बोहरा परिवार के सदस्यों ने करीब दो कनाल में पौधारोपण किया। सभी ने शपथ ली कि भविष्य में परिवार के किसी सदस्य का जन्मदिन होगा तब यहां पौधारोपण किया जाएगा।
इस मौके कुलदीप बोहरा ने बताया कि हर इंसान को इस प्रकार का कदम उठाना चाहिए ताकि यह सारी धरती पेड़ पौधों से भर जाए और प्रदूषण का खतरा कम हो जाए। विश्वभर में एक ही सबसे बड़ी समस्या बन रही है जो प्रदूषण की है। इस पर काबू पाने का एकमात्र इलाज है पेड़ पौधे लगाना। कोई जरूरी नहीं है कि फलदार पेड़ पौधे ही लगाए जाए अपितु छायादार पेड़ पौधे भी लगाए जा सकते हैं।
इस मौके पर जतिन बोहरा के पिता महेश बोहरा ने कहा कि उनकी योजना है कि अधिक से अधिक पेड़ पौधे दो कनाल भूमि पर लगाए जाएंगे ताकि फलों के साथ-साथ छाया और शुद्ध हवा मिल सके। जीवनभर इंसान पैसे कमाता है किंतु प्रकृति की ओर और अपने स्वास्थ्य की ओर बहुत कम ध्यान दे पता है। यदि प्रकृति की ओर ध्यान दिया जाएगा तो स्वास्थ्य अपने आप सुधर जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में यूं ही पेड़ पौधे लगाने के लिए यह जमीन निर्धारित कर दी है और खूब पेड़ पौधे लगाकर इसे हरा भरा बनाया जाएगा ताकि लोग देखने के लिए यहां आए। आने वालों को प्राप्त फलों द्वारा सत्कार किया जाएगा। उन्होंने अपनी आगामी योजना भी बताई। इस मौके पर जहां बड़े-बड़े आम, चीकू, जामुन बेलपत्र आदि के पौधे लगाए गए।
उधर मनोज कुमार रामबास और अजय कुमार इसराना ने बताया कि वे इस कार्यक्रम को पहले ही बढ़ते आ रहे हैं ताकि लोगों का रुझान पेड़ पौधों की ओर जाए। जिससे पेड़ पौधे भी लगे और खाने के लिए फल भी उपलब्ध हो सके। इस मौके पर जहां डा. गजेंद्र सिंह, विजयपाल बोहरा, अनिल कुमार, दीपक कुमार, अश्वनी कुमार, क्रिश बोहरा,चंद्र मोहन बोहरा, आशीष बोहरा, केशव बोहरा ने जतिन बोहरा के जन्मदिन पर उन्हें बधाई दी और पेड़ पौधों लगाने में उनका सहयोग दिया।
फोटो कैप्शन 5: जतिन बोहरा के जन्मदिन पर पौधारोपण करते हुए परिवार के सदस्य
कुकिंग गैस सिलिंडर के लिए मारामारी
-नहीं मिल रहे समय पर सिलिंडर
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कनीना की आवाज। कनीना और आसपास क्षेत्रों में कुकिंग गैस सिलिंडर की मारामारी चलने लगी है। जब से विदेश में युद्ध चल रहे हैं तब से कुकिंग गैस की कमी झलकने लगी है। यहां तक की कामर्शियल सिलिंडर भी नहीं मिल रहे हैं। अगर यही हालत चलते रहे तो भविष्य में होटल, चाय विक्रेता तथा बर्गर एवं रेहडी आदि पर गैस सिलिंडर से काम करने वालों के कार्य ठप हो जाएंगे। यहां तक की घरेलू गैस सिलिंडर के लिए भी जो फोन निर्धारित किया गया है वह नहीं मिल पा रहा है। परिणाम यह है कि घरेलू गैस सिलिंडर भी बुक नहीं हो पा रहे हैं। किसी का कभी कभार बुक हो जाता है। उपभोक्ता बेहद परेशान है और ब्लैक में भी सिलिंडर लेने के लिए लोग तैयार हो रहे हैं परंतु हकीकत यह है कि सिलिंडर मिल नहीं रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या उन लोगों को आएगी जो छोटे-छोटे सिलिंडर भरवा रहे हैं। उनको या तो सिलिंडर भरकर नहीं दिए जाएंगे या महंगे दामों पर दिये जाएंगे। कुछ समय से यही समस्या चली आ रही है। जहां घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ा दी है वही सिलिंडर भी नहीं मिल रहा है। एक और लोग सिलिंडर की कीमत घटाने की मांग कर रहे थे वही अब सिलिंडर भी नहीं मिल पा रहे हैं। उपभोक्ता परेशान है और उन्होंने मांग की है कि हो सके तो सिलेंडर उपलब्ध करवाये जाए।
नीलम देवी ने गौशाला में नए लोडर ट्रैक्टर का किया पूजन
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कनीना की आवाज। नीलम देवी (लिली) ने आज अपनी गहरी गौभक्ति और सेवा-भावना का एक और सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने नये खरीदे लोडर ट्रैक्टर गौशाला में लाकर भगवान श्रीकृष्ण मंदिर में विधि-विधान से पूजन किया।
पूजन के दौरान उन्होंने मंदिर में प्रसाद एवं पुष्प अर्पित किए और गौशाला की सेवा हेतु 5,100 रुपए की भेंट भी दी।
गौरतलब है कि नीलम देवी की गौसेवा में अटूट आस्था रही है। वर्तमान वर्ष में अब तक उन्होंने गौशाला को लगभग 3 लाख रुपए का उदार सहयोग प्रदान किया है, जिसके लिए गौशाला परिवार उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता है।
गौशाला कार्यकारिणी ने कहा, नीलम देवी जैसी साधकों की सेवा-भावना ही हमारी प्रेरणा है। उनकी यह भक्ति और सहयोग गौ-संरक्षण के संकल्प को और मजबूत करता है।
इस शुभ अवसर पर गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव, सचिव यश कनीनवाल, सह-सचिव रामपाल, बलवान सिंह आर्य, श्री ओमप्रकाश आर्य , उप-प्रधान दिलावर सिंह, रामप्रताप, पूर्व पार्षद राजेंद्र, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, होशियार सत्संगी, दुलीचंद, सतबीर गुगनवाला, युद्धवीर सिंह, सन्नी यादव सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: लोडर की श्रीकृष्ण गौशाला में पूजा करते हुए
सरसों की खरीद हो शुरू
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कनीना की आवाज। बसपा के नेता अतरलाल एडवोकेट ने राज्य सरकार से सरसों की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि एक सप्ताह के अंदर अनाज मंडियों में सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई तो बसपा कार्यकर्ता मार्केट कमेटियों का घेराव करेंगे। अतरलाल ने कहा कि राज्य सरकार ने आगामी 28 मार्च से सरकारी खरीद शुरू करने की घोषणा की हुई है परन्तु अबकी बार गर्मी पहले शुरू होने के कारण सरसों की फसल 20 दिन पहले पककर तैयार हो गई। किसानों ने सरसों की फसल निकालनी शुरू कर दी है। यदि सरकार ने तत्काल सरकारी खरीद शुरू नहीं की तो किसानों को अपने सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बेचनी पड़ेगी। क्योंकि किसान को इस समय पैसे की ज्यादा जरूरत होती है। इसलिए उन्होंने अपनी फसल कम रेट पर बेचनी पड़ेगी तो उन्हें भारी नुकसान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर सरकारी खरीद देर से शुरू कर रही है। ताकि किसानों की ज्यादातर फसल पहले से ही बिक जाए। उन्होंने राज्य सरकार से अनाज मंडियों में सरकारी खरीद के पुख्ता प्रबन्ध करने की मांग भी की। उन्होंने कनीना, उन्हाणी की अनाज मंडी में एक और टीन शेड बनाने तथा सतनाली और महेन्द्रगढ़ की अनाजमंडियों में टीन शेड बनाने की मांग भी की। इस अवसर पर शेर सिंह यादव भागसिंह तंवर, दानसिंह प्रजापत, राकेश यादव, कैलाश सेठ आदि नेताओं ने विचार व्यक्त किए।
गर्मियों का होता है विशेष खानपान
-सेहत को बरकरार रखने के लिए ग्रामीण लोग है अग्रणी
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कनीना की आवाज। सेहत के दृष्टिगत विशेषकर गर्मियों में खानपान का ग्रामीण क्षेत्र के लोग विशेष ध्यान रखते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं कम होती है किंतु सेहत के प्रति उनका रवैया बेहतरीन देखने को मिलता है। गर्मियों के दिनों में जहां ठोस आहार कम काम में लिए लेते हैं वही तरल आहार अधिक से अधिक प्रयोग किया जाता है। गर्मियों के दिनों में रोटी के रूप में मेसी रोटी खाई जाती है। चना,गेहूं या जो आदि की बनी होती है। ऐसी रोटियां ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी से प्रयोग करते हैं अपितु जब चने की पैदावार अधिक होती थी चने की रोटी खाते थे जो सेहत के लिए बहुत जरूरी है। यहां तक कि बासी मेसी रोटियां भी राबड़ी के साथ विशेष खाद्य पदार्थ ग्रामीण क्षेत्रों का है।
राबड़ी जो छाछ, जौ का आटा आदि हांडी में पकाकर बनाया जाता है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो छाछ में बनाया जाता है तथा छाछ डालकर ही इसे प्याज और बासी रोटी के साथ खाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस मामले में कभी से राबड़ी प्रयोग करते आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी राबड़ी को नहीं भूलते। चाहे वर्तमान पीढ़ी कोल्ड ड्रिंक पीने लग गई और चाय अधिक सेवन करती है किंतु ग्रामीण बुजुर्ग राबड़ी को अहमियत देते हैं। इस वक्त गर्मियों के दिनों में धाणी एवं भुगड़ा नाम से विशेष खाद्य पदार्थ का खाते हैं। ग्रामीण लोग जौ को भुनवाकर धाणी तो चने को भुनवाकर भुगड़ा बनाते हैं जिनको गर्मी के दिनों में बड़े चाव से खाया जाता है। यहां तक कि कुछ लोग जौ की धाणी का सत्तू भी बनाकर पीते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां विशेष रूप से खरबूजा ,खरबूजा,ककड़ी एवं मतीरा आदि खाते हैं। यद्यपि मतीरा दिनों दिन लुप्त होते जा रहे हैं किंतु आज भी बुजुर्ग मतीरे को तरसते हैं। तरबूज से जहां पानी की प्यास बुझाते हैं कोई सेहत के लिए भी लाभप्रद है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र तरबूज पर विशेष ध्यान देते हैं। यहां तक कि आपस में कोई लड़ाई झगड़ा हो जाता है और सुलहनामा बनता है तो तरबूज ही घर लेकर आते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में ककड़ी तरबूज और खरबूजा आदि विशेष रूप से चाव से खाए जाते हैं।
ग्रामीण ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का प्याज का विशेष लगाव रहा है। यहां तक कि हर घर में नींबू रखते हैं जिससे शिकंजी पीते हैं तथा प्याज एवं कच्चे आम को भून कर खाते हैं ताकि गर्मी से बचा जा सके। गर्मी के खाद्य पदार्थों के बारे में राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, कृष्ण कुमार, दिनेश कुमार एवं सुनील कुमार आदि बताते हैं की बुजुर्ग पुराने खानपान को आज भी नहीं भूले हैं। सब्जियों के रूप में बुजुर्ग लोग खाटा का साग और कढ़ी के अतिरिक्त रायता बनाकर खाते हैं क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की कमी नहीं होती। यही कारण है दही को रायते में बदल देते हैं और खाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी एक दूसरे के घर से छाछ मुफ्त में उपलब्ध हो जाती है जिसमें काला नमक, भुना हुआ जीरा पुदीना आदि डालकर बड़े चाव से पिया जाता है। जब भी कोई मेहमान आता है तो उसको चाय की बजाए राबड़ी या छाछ का गिलास थमाते हैं जो खाने में बेहतरीन होता है। कसी शहर से आने वाले व्यक्ति भी बड़े चाव से लस्सी को पीते हैं, चाय को दूर भगाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खाने-पीने की आदतें अच्छी है। यहां तक कि मक्खन भी प्रयोग किया जाता है, दूध का भी सेवन किया जाता है किंतु हर घर में प्याज जरूर खरीदी जाती है जिसे वर्ष भर खाते हैं। प्याज का राबड़ी के साथ विशेष संबंध माना गया है। जब कभी धूप लग जाती है तो कच्चे आम को भुनकर ही उसका उपयोग किया जाता है।
गर्मी से बचना जरूरी,खान पान का रखे ध्यान-डा. मोरवाल
डा.जितेंद्र मोरवाल कनीना उप-नागरिक अस्पताल बताते हैं कि गर्मी बढ़ जाने से जहां 10 प्रतिशत तक मरीज बढ़ जाते हैं। जहां लू लगना, उल्टी, बुखार दस्त आदि की शिकायत बढ़ जाती है। धूप से बचना बहुत जरूरी है।
कैसे बचा जाए तपन से-
डा. जितेंद्र मोरवाल बताते हैं की धूप से बचने का सबसे सरल उपाय है घर में छुपकर बैठे रहे। हवादार कमरे में रहे। यदि बाहर जाना पड़े तो पानी की बोतल साथ लेकर जाए तथा पूरे कपड़े शरीर पर पहने, हाथ पैर सर सभी ढके हुए होने चाहिए। पैरों में चप्पल जूते होने चाहिए ताकि गर्मी और तपन से बचा जा सके। इस दौरान तरल पदार्थ जैसे पानी, जूस, लस्सी ,दूध आदि अधिक प्रयोग करना चाहिए। जंक फूड से इस समय बचना चाहिए, ठोस भोजन कम से कम प्रयोग करना चाहिए। हो सके तो कूलर की हवा में बैठना चाहिए। जब सुबह और शाम ताप कम हो जाए उस समय यदि कोई जरूरी काम हो तो बाहर निकलना चाहिए उनका कहना है कि गर्मी और नवतपा से धूप, लू लग जाती है, बुखार आ जाता है और इसमें बचाव में ही बचाव है। उन्होंने बताया घर पर ग्लूकोस वगैराह प्रयोग करें तथा साथ में ओआरएस का बनाकर रखे। ओआरएस घोल बनाना बहुत सरल है। नमक चीनी और थोड़ा सा नींबू का रस भी डाले तो बेहतरीन स्वाद का घोल तैयार हो जाता है। पानी अधिक से अधिक प्रयोग करें, शरीर में पानी की कमी ना आने दे।
फोटो कैप्शन : डा. मोरवाल
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