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Saturday, May 2, 2020


जुआ खेलते सात गिरफ्तार, विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज 
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 कनीना। कनीना पुलिस ने मुखबिरी के आधार पर ककराला रोड पर स्थित एक कुएं से 7 व्यक्तियों को जुआ खेलते हुए गिरफ्तार किया और उनसे एक लाख से भी अधिक राशि बरामद की है।
मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को मुखबिरी के आधार पर ककराला रोड़ स्थित साधुराम के कुएं पर छापा मारा जिसमें सात व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। उनसे करीब एक लाख 9 हजार 970 रुपये भी मिले हैं। साधु राम ने अपने कुएं पर जगह दी थी इसलिए साधुराम, कृष्ण कुमार,संदीप, चिमन, अजय सभी कनीना निवासी सतपाल ककराला निवासी तथा सुखबीर चेलावास निवासी मौके पर जुआ खेलते पकड़े। सभी को गिरफ्तार कर लिया है उनके विरुद्ध गैंबलिंग एक्ट का मामला दर्ज किया है वहीं उन्होंने सरकार के आदेशों की अवहेलना की इसलिए धारा 188/269 और 270 भी लगाई गई है। कनीना के एसआई गोविंद राम सहित पुलिस कर्मियों ने छापा मारकर यह कार्रवाई की है। सातों व्यक्ति गिरफ्तार कर लिए गए हैं।

 


253 किसानों से 6990 क्विंटल सरसों खरीदी
 -गेहूं महज 44 किसानों ने 1900 क्विंटल बेचा 

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 कनीना। कनीना अनाज मंडी तथा इसके तहत तीन खरीद केंद्रों पर शनिवार को भी सरसों एवं गेहूं की खरीद जारी रही। जहां गेहूं की आवक कम है इसलिए 44 किसानों से उन्नीस सौ क्विंटल ही गेहूं खरीदा गया वहीं सरसों की त्वरित आवक जारी है। 253 किसानों ने 6990 क्विंटल सरसों हैफेड द्वारा खरीदी गई। बारदाने का कोई अभाव नहीं है वही मजदूर त्वरित गति से पैकिंग का कार्य कर रहे हैं। उठान भी तेजी से चल रहा है। कनीना हैफेड मैनेजर सत्येंद्र यादव ने बताया कि कनीना के 110 किसानों ने 2800 क्विंटल तो दौंगड़ा में 51 किसानों ने 1423 क्विंटल सरसों बेची। सेहलंग में 32 किसानों ने 767 और करीरा में 60 किसानों ने दो हजार क्विंटल सरसों बेची है।
फोटो कैप्शन 5: सरसों की खरीद करते हैफेड अधिकारी।

 हास्य दिवस पर विशेष...
हंसने से होते हैं रोग दूर

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 कनीना। यूं तो दिन भर इंसान भागदौड़ की जिंदगी जीता है परंतु चेहरे पर मुस्कान तक नजर नहीं आती। यूं लगता है कि दिन भर वह परेशानियों से जूझ रहा है किंतु जब वह जोर से ठहाका लगाकर हंसता है तो दिन भर की परेशानियां दूर हो जाती है।
अब तो वैज्ञानिक और डॉक्टर भी मानने लग गए हैं कि हंसने से शरीर के तार तार खुल जाते हैं और रोग दूर हो जाते हैं । ऐसे में हंसना बहुत जरूरी हो गया है। जहां बाबा रामदेव ने भी हंसने की एक आदत डालने का प्रयास किया था जो इंगित करता है कि सभी रोगों से बच सकते हैं। हंसना भी एक कला है। कई बार इंसान हंसते हुए रोते नजर आता है तो कई बार रोता हुआ इंसान भी हंसता है।
 हंसी वह है जो दूसरे जन को देखकर भी हंसने लग जाए। अब तो हंसने के लिए भी विभिन्न संस्थान खुलने में देर नहीं है क्योंकि हंसना बहुत कठिन हो गया है, रोना बहुत सरल है। दिन भर काम के बोझ तले इंसान दबा नजर आता है। यदा-कदा किसी मौके पर ही इंसान हंसता फूलता फल फूल की तरह मुस्कुराते नजर आता है। इसलिए पर तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग हंसने के लिए ठहाका लगाते हैं।
 एक समय था जो बुजुर्ग सारे परिवार को इक_ा करके हंसाते थे और अब वह समय दूर होता जा रहा है। लोग हंसने की कला को भूल गए हैं। मारपीट, झगड़ा, दंगा, फसाद आदि में लीन होते हैं और हंसना गवारा नहीं समझते। यही कारण है कि दिनोंदिन हृदयघात जैसी बीमारियां पनपती जा रही है और लोग असामयिक मौत के शिकार होते जा रहे हैं।



 5910 प्रवासी अपने प्रदेशों में जाने को तैयार 

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4 मई से भेजे जाने का होगा सिलसिला शुरू 

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 कनीना। कनीना उप-नागरिक अस्पताल के 37 गांवो तथा सेहलंग सातुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के गांवों के तहत करीब 5910 प्रवासियों का मेडिकल हो चुका है। अब इनको 4 मई से इनके प्रदेशों में भेजने की तैयारी हो रही है।
 कनीना के एसएमओ डॉ धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि विभिन्न गांवों के सरपंचों के बुलावे पर उन्हें सभी गांव में जाकर के ठहरे हुए प्रवासियों का मेडिकल किया है। उन्होंने बताया कि कनीना उप नागरिक अस्पताल के तहत 37 गांव आते हैं जबकि सेहलंग अस्पताल के तहत भी कुछ गांव आते हैं। रिकॉर्ड अनुसार इन श्रमिकों की संख्या 5910 है किंतु आंकड़े 6000 को पार कर गए हैं। उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर सरपंचों ने बताए कम लेकिन हकीकत में ज्यादा लोग मिले हैं। ऐसे में सभी की मेडिकल हो चुका है। यह विभिन्न राज्यों बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि के रहने वाले हैं।
 उल्लेखनीय है कि कनीना और आसपास क्षेत्र में फसल कटाई शुरू होती है तब भारी संख्या में लोग आते हैं। ये लोग आ गए तत्पश्चात लाकडाउन के चलते वापस नहीं जा पाए। अब इनको घर की याद सताने लगी है। आखिरकार सरकार ने निर्णय लेते हुए उन्हें उनके राज्यों में भेजने का कदम उठाया है।  4 मई से इनको विभिन्न राज्यों में भेजा जाएगा। 

8600 रुपए कोरोना राहत कोष में भेजे 

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कनीना। कनीना मंडी के लोगों ने 8600  रुपये प्रधानमंत्री को रोना केयर फंड में भेजे हैं। विस्तृत जानकारी देते हुए कनीना मंडी के ओमप्रकाश लिसानिया ने बताया कि सुरेंद्र कुमार ओम प्रकाश, ओमप्रकाश लिसानिया, हरिराम मित्तल, बजरंगलाल, रोहताश कुमार, जीवाराम, प्रेम कुमार सिंगला, विक्टर प्रसाद शर्मा और प्रेम कुमार ने अलग अलग राशि मिलकर इक_ी की है। इससे पहले भी कनीना मंडी के लोगों ने 64100 रुपये भेजे थे।



विश्व हिंदु परिषद ने बांटे न्यूट्रीशन पैकेट 

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 कनीना।  विश्व हिंदू परिषद द्वारा कनीना एवं कनीना खंड के विभिन्न गांवों में न्यूट्रीशन के पैकेट बांटे। महेश बोहरा प्रखंड अध्यक्ष वही अपने हाथों से ये पैकेट वितरित किए।
 कनीना खंड के गांव रामबास, धनौंदा, बाघोत, ककराला, मोहनपुर, सुंदराह, बेवल एवं गाहड़ा आदि गांव में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं के मार्फत यह पैकेट बटवाए गए हैं वहीं कनीना के वार्ड 8, 9, 12 और 13 में महेश बोहरा ने स्वयं घरों में जाकर ये पैकेट वितरित किए है।
महेश बोहरा ने कहा कि ये न्यूट्रिशन के पैकेट है जो विशेषकर बच्चों एवं बूढ़ों के लिए बहुत कारगर हैं। छह माह से बड़े बच्चों के लिए यह बेहद कारगर है जो काजू, चीनी, सोया, दूध एवं खनिज लवण आदि से तैयार किए गए हैं। इनमें विटामिन एवं एंटीऑक्सीडेंट के साथ अमल पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोरोना वायरस फैल रहा है, बच्चों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्य पदार्थ उपलब्ध नहीं हो पाते या फिर खाद्य पदार्थ पर विश्वास नहीं किया जाता है। ऐसे में इस प्रकार के पैकेट उनके लिए विशेष कारगर साबित होंगे। उन्होंने बताया कि वैसे तो खाने के लिए पर्याप्त खाद्य पदार्थ होते हैं किंतु यदि खाने के साथ साथ इनका उउपयोग किया जाए तो लाभ अधिक होगा।
ये न्यूट्रीशन पैकेट बच्चे और बुड्ढों में जहां रोग रोधक क्षमता को बढ़ाते हैं वहीं उनमें ताकत का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा विश्व हिंदू परिषद द्वारा यह पैकेट विभिन्न क्षेत्रों में बटवाए जा रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद ने पहले भी सराहनीय कार्य करते हुए जहां मास्क बाटे थे, वर्तमान में भी मास्क बटवा रही है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी नियमित रूप से बंदरों के लिए खाना खिलाने जाते है तथा लोगों में अब ये पैकेट बांटने के लिए जा रहे हैं।
 फोटो कैप्शन 1: लोगों को न्यूट्रीशन पैकेट बांटते हुए महेश बोहरा


कारोनासे बचाव के तरीकें बताए*****************************

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कनीना। कोरोना भगाओ-देश बचाओ राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत रेडक्रास समिति नारनौल की ओर से ग्रामीण क्षेत्र में मास्क इत्यादि वितरित कर लोगों में कोरोना के प्रति जागरूकता पैदा करने का कार्य किया गया।
रेडक्रास समिति के आजीवन सदस्य एवं एम्बुलेंस ब्रिगेड ऑफिसर डॉ छतर सिंह वर्मा ने गाँव कलवाड़ी, सिलारपुर तथा कटकई में गांव-चौपालों व सार्वजनिक स्थानों पर ग्रामीणों को कोरोना के प्रति सचेत किया तथा बगैर मास्क वाले लोगों को मास्क वितरित किए। कोरोना वायरस के  फैलाव को रोकने के उपायों पर चर्चा करते हुए डॉ वर्मा ने कहा कि कोरोना से बचने के लिए वर्तमान हालात में हमें अपनी जीवन-शैली में बदलाव लाना होगा । अनाव्यशक रूप से घर से बाहर न निकलने, किसी अन्य व्यक्ति से बातें करते समय मुंह पर मास्क लगाने तथा सोशल डिस्टेंस बनाए रखने को अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा तभी हम कोरोना की शृंखला को तोड़ पाएंगे । गांव कलवाड़ी में सरपंच कर्ण सिंह व बाबू रतिपाल शर्मा, सिलारपुर में सरपंच संजय कुमार व प्रवक्ता देवेंद्र यादव तथा कटकई में सरपंच विजय सिंह व अजीत चौहान इत्यादि गणमान्य जनों ने भी कोरोना से बचाव के प्रति ग्रामीणों को सचेत किया।
फोटो कैप्शन डा सीएस वर्मा

जम कर दे रहे दान

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कनीना। कनीना की नगरपालिका में बाहर से आए हुए लोगों के लिए खाने का प्रबंध किया गया है जहां लोग जमकर दान दे रहे हैं। विस्तृृत जानकारी देते हुए पालिकाके प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि मुकेश पुत्र मुसद्दी वार्ड 9 ने केे यहां विगत दिनों शादी रचाई हुई थी जिन्होंने मेल यहीं पर की और पूरे पंडाल में लोगों को भोजन कराया वही बुधराम 5100 रुपये डॉ बीएल यादव ने 5000 रुपये, सोनू गुर्जर 1100 रुपये, एडवोकेट विजय 1100 रुपए, टैक्सी स्टैंड कनीना ने 11000 रुपये,नरेश बचीनीवाला ने 11 हजार रुपये किशोरीलाल-महेंद्र कुमार ने 7000 रुपए तथा डा रमेश मित्तल ने 3100 रुपये दान दिए हैं।




 

पक्षियों के लिए दाना पानी का प्रबंध करे

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कनीना। गर्मी पूरे यौवन पर है और इस गर्मी में पक्षियों को बचाने के लिए शिकोरे रखे जा रहे हें वहीं उनके लिए छतों पर दाना पानी रखने का अभियान चला हुआ है। दैनिक जागरण की इस पहल को संज्ञान में लेते हुए पावर हाउस के अधिकारियों ने भी पावर हाउस परिसर में परिंडे रखकर उन्हें जल से भरा।
 कनीना पावर हाउस में रामरत्न जेई गोमली ने पावर हाउस परिसर में जीवों के लिए शिकोरे रखे हैं। सेवाराम सहित विभिन्न जन उपस्थित थे। जेई का कहना है कि गर्मी में जीवों के लिए पानी की समस्या होती है। ऐसे में उनके लिए पानी का प्रबंध करना हम सभी का दायित्व बनता है। उन्होंने अन्य लोगों को भी इस प्रकार पक्षियों की सेवा करने पर बल दिया।





 कोरोना योद्धा......
 हर प्रकार से सेवा कर रहे हैं चंद्रकांत

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कनीना।  कनीना के चंद्रकांत एक ऐसी शख्सियत है जो लॉकडाउन से पहले भी जन सेवा करते आ रहे हैं और लॉकडाउन के पश्चात तेजी से जन सेवा में जुटे हुए हैं। उन्होंने हर प्रकार से लोगों की सेवा की है। मास्क बांटना, चाय पिलाना, जलेबी, समोसे आदि का प्रबंध करना गरीबों को खाना खिलाना यहां तक कि बंदरों के लिए भी खाने का प्रबंध करना ये सभी कार्य चंद्रकांत बखूबी निभा रहे हैं।
 चंद्रकांत जहां खाटूश्याम जाने वाले पदयात्रियों के लिए शिविर लगाते आए हैं और 15 अगस्त एवं 26 जनवरी के राष्ट्रीय पर्वों पर जल पिलाकर सेवा करते आए हैं। पानी की बोतल उनको मंच पर उपलब्ध कराते आए हैं ताकि कार्यक्रम की रोचकता में कोई विघ्न न पड़े।
 जब से कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ा है तबसे मास्क बांटने शुरू किया और अब तक 1500 मास्क सरकारी तथा गैर सरकारी स्थानों पर वांट चुके हैं। यही नहीं 2000 सेट दस्ताने बांटे हैं वहीं 50 सैनिटाइजर की भी लोगों को बांटे हैं।
जनसेवा की है उन्होंने 14 अप्रैल तक एक विशेष अभियान चलाया जिसमें सुबह और शाम मजदूरों और बाहर से आए हुए लोगों को चाय पिलाई। चंद्रकांत बताते हैं कि तीन सौ चाय प्रतिदिन सुबह-शाम न केवल शेल्टर होम में अपितु शेल्टर होम,अस्पताल, पुलिस स्टेशन आदि पर जाकर भी चाय पिलाने का कार्य किया हैं।
 उन्होंने समोसे और जलेबी बांटने का कार्य किया वही अभी भी जनसेवा में जुटे हुए है। वर्तमान में जहां शेल्टर होम खाली हो गए हैं बंदरों के लिए खाना डालकर आ रहे हैं। प्रतिदिन नहाड़ और नया गांव में जाकर भुने हुए चने और केले आदि डालकर बंदरों की सेवा कर रहे हैं।
 उन्होंने बताया कि इंसान तो अपने भोजन का प्रबंध कर सकता है लेकिन ये बंदर नहीं। ऐसे में उन्हें खाना खिला रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरे जोश से जनसेवा अभियान में जुटे हुए हैं और भविष्य में बेहतर कार्य करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि उनके पास चंदामामा पार्क है जिसमें कई दिनों तक सफाई अभियान चलाया और इसको साफ सुथरा करके बच्चों के लिए खेलने कूदने लायक बनाया। चंद्रकांत जनसेवा में कभी पीछे नहीं हटते हैं इसलिए चंद्रकांत का नाम दूरदराज तक प्रसिद्ध है।
फोटो कैप्शन: चंद्रकांत।

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