बीएससी फाइनल के परीक्षा परिणाम में सावित्री देवी कालेज की 25 छात्राओं ने मेरिट सूची में दर्ज करवाया अपना नाम
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कनीना। इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी मीरपुर द्वारा घोषित बीएससी फाइनल के परिणाम में कनीना कस्बे में स्थित सावित्री देवी महिला महाविद्यालय की 25 छात्राओं ने मेरिट सूची में अपना नाम दर्ज करवाकर महाविद्यालय व क्षेत्र का नाम रोशन किया है। कालेज प्राचार्य प्रवीण यादव ने बताया कि इस वर्ष कालेज से बीएससी फाईनल में 42 छात्राओं के द्वारा परीक्षा दी गई थी। जिसमें से 25 छात्राओं ने मेरिट सूची में अपना नाम दर्ज करवाया है। उन्होंने बताया कि कालेज से छात्रा मेघा शर्मा 86.22 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम, जयश्री 85.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर द्वितीय व पूजा यादव 84.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान पर रही। कॉलेज निदेशक एडवोकेट विनय ने कहा कि कठिन परिश्रम जीवन में हमेशा उन्नति की तरफ ले जाता है। इस दौरान उन्होंने सभी छात्राओं व कालेज स्टाफ को इस उपलब्धि पर बधाई दी।
गंदगी का साम्राज्य हटाने की उठी मांग
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कनीना। कनीना के सामान्य बस स्टैंड के पूर्व दिशा में जहां संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ आश्रम तक जगह गंदगी, कूड़े कचरे और अकेसिया निलाटिका (विलायती कीकर) से आच्छादित है। यहां आवारा जंतुओं, मल मूत्र त्यागने वाले लोगों और चोरों की चरण शरण स्थली बन गई है।
बहुत सी दुकानें बस स्टैंड की दीवार के साथ लगी हुई है। चोर इन घनी झाडिय़ों में छुपकर किसी भी चोरी या अन्य घटना को अंजाम दे सकता है। यही नहीं इस गंदगी के कारण बस स्टैंड के अंदर झांकना भी कठिन हो गया है। यदि सामान्य बस स्टैंड के अंदर से देखा जाए तो न तो मलमूत्र त्यागने के लिए यहां अच्छा शौचालय हैं और हैं वे पुराने शौचालय बंद या खराब पड़े हैं। जिसके चलते लोग खुले में मल मूत्र त्यागने को मजबूर है वहीं यह आवारा जंतुओं की शरण स्थली भी बन गया है।
अगर बस स्टैंड से बाबा मोलडऩाथ तक इस जगह को साफ सुथरा बनवाया जाए तो बस स्टैंड से उतरकर यात्री सीधे संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ आश्रम के दर्शन कर सकते हैं। उनके बीच की दूरी महज 500 मीटर के करीब है।
पूर्व एसडीएम ने किया था प्रयास -
पूर्व एसडीएम संदीप सिंह ने इस गंदगी को हटाने तथा कीकर को हटाने के प्रयास भी किए थे किंतु उनकी बदली होने के बाद काम अधर में लटक गया था। यदि गंदगी समाप्त कर दी जाए
विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन आसानी से हो सकेंगे। संत शिरोमणि बाबा मोलउऩाथ आश्रम के साथ-साथ शिवालय, खाटू श्याम मंदिर, खागड़ आश्रम, माता मंदिर, पुराना हनुमान मंदिर तथा अन्य दर्शनीय स्थल भी यहीं पर बने हुये है। इन दर्शनीय स्थलों तक पहुंचने के लिए बस स्टैंड से उतर कर वाया रोड़ होकर पहुंचा जा सकता है। अगर यह बीच की दूरी सही कर दी जाए तो महज 500 मीटर दूरी हैं।
क्या कहते हैं बस स्टैंड इनचार्ज-
बस स्टैंड इंचार्ज सुधीर कुमार का कहना है कि यह इस गंदगी एवं कीकर को जेसीबी से हटाने के लिए जनरल मैनेजर नारनौल भी पत्र लिखा जा चुका है। आदेश प्राप्त होगा तुरंत इन को साफ करवा दिया जाएगा।
क्या कहते हैं लोग-
कनीना के मोहन कुमार, सुमेर सिंह चेयरमैन, महेश कुमार, दिनेश कुमार आदि ने बताया कि यह गंदगी बस स्टैंड ही नहीं अपितु दर्शनीय स्थल की शोभा घटा रही है। इसे अविलंब साफ करवाकर भरत करवाया जाए।
फोटासे कैप्शन 3 व 4: बस स्टेंड कनीना के अंदर गंदगी तथा सामने बाबा मोलडऩाथ आश्रम
कनीना मंडी में चला लिफ्टिंग का काम
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कनीना। कनीना अनाज मंडी में शनिवार को बाजरे कोई खरीद नहीं की गई महज लिफ्टिंग का काम किया गया। रविवार को भी खरीद का कार्य बंद रहेगा। हैफेड मैनेजर सत्येंद्र यादव ने बताया कि अब तक कनीना अनाज मंडी में 14449 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। शनिवार को कोई खरीद नहीं की गई वर्तमान में अनाज मंडी में केवल 385 बैग बाजरे के पड़े हुए। अब तक 28513 बैग उठाए जा चुके शनिवार को भी लिफ्टिंग की गई और 3920 बैग शनिवार को उठाए गए।
कभी मोबाइल स्कूलों में रखना बुरा था आज मोबाइल जरूरी है
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कनीना। एक वक्त था जब शिक्षा विभाग में अध्यापकों को कक्षा में मोबाइल प्रयोग करने की अनुमति नहीं थी। बहुत से मुख्याध्यापक के प्राचार्य ने आदेश जारी कर रखा था कि कोई भी अध्यापक मोबाइल प्रयोग करता पाया तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। यहां तक कि कुछ मुखियों ने तो आदेश जारी किया था कि स्कूल में प्रवेश करते हैं मोबाइल काउंटर पर जमा करवा दें और स्कूल से छुट्टी होने के बाद मोबाइल वापस लेकर जाए। विद्यार्थियों को तो मोबाइल रखना और भी दूर की बात थी किंतु वक्त के अनुसार अब मोबाइल बहुत जरूरी चीज बना दी है। सरकार ने सभी शिक्षकों को स्मार्ट फोन रखने का आदेश दे रखा है। स्मार्टफोन के जरिए विभिन्न प्रकार की ट्रेनिंग पूरी की जा रही है।
कोरोना काल में जहां विद्यार्थियों को फोन चलाना और रखना सिखा दिया वहीं शिक्षकों के लिए भी जरूरी ट्रेनिंग इन पर पूरी करने का आदेश दिया है जो बड़े एवं सेवानिवृत्ति के पास शिक्षक थे वे स्मार्ट मोबाइल रखने के शौकीन नहीं थे। आज उन्हें मजबूरन मोबाइल रखने पड़ रहे हैं। चाहे पहली कक्षा का विद्यार्थी है उन्हें भी मोबाइल पर आपने उत्तर देने पड़ रहे हैं। कोरोना ने यह प्रभाव छोड़ा है।
कौन-कौन से जरूरी हैं एप-
मोबाइल रख कर शिक्षकों की एप पर ही विभिन्न प्रकार की ट्रेनिंग जारी है। जहां प्रारंभ चाकलेट नामक एप आया। इस पर कई ट्रेनिंग शिक्षकों ने पूरी की। यहां तक कि ट्रेनिंग पूरी करने पर ही उन्हें सर्टिफिकेट दी गई। इस एप की सफलता के पश्चात शिक्षकों को समीक्षा एप, दीक्षा एप और अवसर नामक एप रखने का अवसर दिया गया है। अभी निष्ठा नामक ट्रेनिंग चलेगी यदि ट्रेनिंग पूरा नहीं करेंगे तो शिक्षकों की तनख्वाह भी रोकी जा सकती है, वेतन वृद्धि भी बंद की जा सकती है। 16 अक्टूबर से ट्रेनिंग का कार्यक्रम शुरू होगा।
कौन करेंगे ट्रेनिंग-
वरिष्ठ प्राचार्य अभयराम यादव ने बताया कि कक्षा 1 से 8 तक के सभी शिक्षकों के लिए अब इन्हीं एप पर ट्रेनिंग पूरी करनी होगी, चाहे वह किसी भी वर्ग का शिक्षक है एवं किसी भी प्रकार का शिक्षक है। पहले निष्ठा की ट्रेनिंग पूरी हुई थी जिसमें कला एवं शारीरिक शिक्षक आदि को ट्रेनिंग पूरी करने का आदेश नहीं था किंतु इस बार उनको भी यह ट्रेनिंग पूरी करनी ही पड़ेगी, नहीं तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई होगी।
विद्यार्थी हुए एक्सपर्ट-
अब तो छोटे छोटे विद्यार्थी भी मोबाइल के एक्सपर्ट बन गए हैं। जब से कोरोना काल चला है तब से मोबाइल पर ही शिक्षण कार्य चल रहा है और शिक्षण कार्य पूरा करने के लिए चाहे छोटा बच्चा है या युवक है उन्हें मोबाइल से शिक्षा पूरी की है। कक्षा 1 से 12 तक के सभी विद्यार्थी मोबाइल के जरिए शिक्षा पूरी कर रहे हैं, अभी भी शिक्षण कार्य मोबाइल के जरिए जारी है। जहां शिक्षा शिक्षण के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं वही एसएमएस. के जरिए भी शिक्षण कार्य चल रहा है। जिन अभिभावकों और विद्यार्थियों के पास स्मार्टफोन नहीं है वे भी एसएमएस के जरिये शिक्षण पूरा कर रहे हैं।
क्या कहते हैं अभिभावक -
अभिभावकों का कहना है कि मजबूरन में अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए कोरोना काल में नए फोन खरीदने पड़े। दिनेश कुमार, महेश कुमार गुल्लू राम आदि ने बताया कि वे गरीब व्यक्ति है जिनके पास बेहतर दर्जे का मोबाइल न होने से शिक्षण कार्य प्रभावित हुआ जिसके चलते उन्होंने अच्छे दर्जे के मोबाइल खरीदने को मजबूर कर दिया। यद्यपि सरकार ने ये मोबाइल खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया किंतु मजबूरी वश उन्होंने ये मोबाइल खरीदने पड़े।
सभी ट्रेनिंग और हर प्रकार की गतिविधियां होगी एप पर- अब तो वक्त आ गया है कि सभी प्रकार की ट्रेनिंग कार्य तथा यहां तक की हाजिरी लगाने का काम भी एप के जरिए होगा। वरिष्ठ प्राचार्य अभयराम यादव ने बताया कि कनीना खंड में 74 प्राथमिक स्कूल 22 माध्यमिक स्कूल 5 उच्च विद्यालय तथा 24 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय है। इसके अतिरिक्त वहीं करीब 55 निजी स्कूल खंड में हैं।
क्या कहते हैं शिक्षक-शिक्षिका लक्ष्मी देवी, शिक्षक महिपाल सिंह, शिक्षक राजबीर सिंह ने बताया कि वे जी जान से आनलाइन शिक्षण करवा रहे हैं। विद्यार्थियों का ग्रुप बनाया हुआ है जहां वे प्रतिदिन शिक्षण सामग्री भेजते हैं।
फोटो कैप्शन: लक्ष्मी देवी, महिपाल सिंह, राजवीर सिंह।
कनीना क्षेत्र में मिले तीन संक्रमित
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कनीना। कनीना क्षेत्र में कोरोना संक्रमितों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती हुई जा रही है । हालांकि कनीना शहर के दुकानदार सभी प्रकार की हिदायतें बरत रहे हैं जिसमें सैनिटाइज का प्रयोग मास्क व सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखा जा रहा है। नागरिक अस्पताल कनीना के सुनील ने जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार को कनीना के वार्ड नंबर सात अनाज मंडी में एक व्यक्ति संक्रमित मिला है। दूसरा बवानिया गांव में एक संक्रमित मिला है । तीसरा भोजावास संक्रमित मिला है। एसएमओ डॉ धर्मेंद्र यादव ने बताया कि आमजन से अपील है कि मास्क का प्रयोग करें। भीड़ भाड़ वाली जगह जाने से बचें। सतर्क वह करके ही हम अपने आप को बचा सकते हैं। हेल्थ इंस्पेक्टर शीशराम रसूलपुर ने जानकारी देते हुए बताया कि सं्रमितों के संपर्क में आए लोगों की लिस्ट तैयार की जा रही है। जल्दी ही इन लोगों के सैंपल लिए जाएंगे।
2 दिनों में कनीना मंडी में कोई खरीद नहीं
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कनीना। कनीना अनाज मंडी में वैसे ही बाजरे की खरीद धीमी गति से चल रही है उस पर शनिवार और रविवार को कोई खरीद नहीं होगी। अगली खरीद सोमवार को होने की संभावना है।
खरीद एजेंसी हैफेड के चेयरमैन सतेंद्र यादव ने बताया कि शनिवार का कोई शेड्यूल नहीं आने से बाजरे कोई खरीद नहीं की गई। रविवार को भी उन्होंने बताया कोई खरीद की संभावना नहीं है, ऐसे में सोमवार को खरीद की फिर से संभावना है अर्थात 12 अक्टूबर को ही अब खरीद होगी। खरीद का कार्य धीमी गति से चल रहा है।
कनीना की दुकानें रहेंगी बंद
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कनीना। कनीना क्षेत्र की सभी दुकानें प्रतिष्ठान रविवार को बंद रहेंगे। केवल आपातकालीन सेवा ही काम करेंगी।
विस्तृत जानकारी देते हुए पालिका प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि इस संबंध में पहले ही सूचना जारी कर दी गई है। रविवार को किसी प्रकार की कोई दुकान नहीं खुलेगी। यद्यपि अनलाक शुरू हो गया है किंतु दुकान खोलने का कोई अभी तक आदेश प्रशासन ने नहीं दिया है जिसके चलते रविवार को सभी दुकानें बंद रहेंगी। उधर उन लोगों का अमित कुमार, जितेंद्र कुमार, धर्म वीर, कृष्ण कुमार आदि ने बताया कि रविवार को ही उनके पास खरीद के लिए समय बचता है बाकी समय या तो अपने दफ्तर जाना पड़ता है किसी काम पर जाना पड़ता है। रविवार को पूर्ण रूप से खरीददारी के लिए तैयार रहते हैं किंतु रविवार को प्रशासन द्वारा दुकानें बंद करवा दी जाती है। इसके चलते उन्हें खरीददारी भी करने से वंचित रहना पड़ता है।
मजदूरी छोड़ कर वापस जाने की नौबत आ गई है मजदूरों के सामने
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कनीना। कनीना अनाज मंडी में आए हुए करीब 400 मजदूरों में से बहुत से अब काम छोड़ कर वापस अपने राज्य में जाने की पूरी संभावना बन गई है। अनाज मंडियों में मजदूरी उनके लिये घाटे का सौदा बन गई हैं।
बिहार एवं राजस्थान से आने वाले मजदूर सोच कर आए थे कि उन्हें रोटी रोजी मिलेगी और परिवार का पालन पोषण करने के लिए कुछ कमाकर ले जाएंगे लेकिन प्रतिदिन 50 से 60 रुपये दिनभर में कमा रहे हैं। अब खररीद 12 अक्टूबर को होगी जबकि 11 दिनों में करीब 14 हजार क्विंटल बाजरा खरीदा है जिसमें तीन दिन बाजरा नहीं खरीदा तथा दो बार सरवर खराब रहा है।
कारण-
अनाज मंडी में प्रतिदिन 70 से 100 किसानों से बाजरे की खरीद की जा रही है जो अलग-अलग मात्रा में बाजरा लेकर आते है। अधिकतम 40 क्विंटल बाजरा एक किसान बेच सकता है। इस प्रकार प्रतिदिन अधिकतम 4000 क्विंटल बाजरा कनीना में खरीदा जाता है जबकि एक बैग 50 किलो का भरने में मजदूरों को 10 मिनट लगते हैं और उन्हें नौ रुपये प्रति बैग तुलाई व भराई के मिलते हैं। इस प्रकार करीब 48 आढ़तियों के पास 4000 क्विंटल बाजरा बट जाता है और इस प्रकार 80 क्विंटल तक बाजरा प्रति आढ़ती आता है। यहां तक कि कुछ आढ़तियों के पास तो एक दाना भी नहीं आता। जिसके चलते उनके मजदूर उन्हें छोड़कर जा रहे हैं। प्रतिदिन एक आरती के पास 10 से 15 मजदूर काम करते हैं और इस प्रकार को मुश्किल से 50 रुपये कमा पाते हैं।
क्या कहते हैं मजदूर--
बिहार से आए हुए श्रवण, अनिल, वैजनाथ, रामरतन, संतोष, सोनू, रामदरश, राम नारायण पासवान, सोना प्रसाद, मनोज ठाकुर, साहेब सिंह, अमरीश राय आदि ने बताया कि वे बिहार के समस्तीपुर जिले से आए हैं परंतु उनकी रोटी रोजी नहीं मिल पा रही है।
क्या है समाधान -
जब तक प्रतिदिन 300 से 400 किसान अनाज मंडी में नहीं आएंगे तब तक न तो आढ़तियों का काम चल पाएगा और नहीं मजदूर यहां रुक पाएंगे अपितु किसान भी अपना बाजरा तभी बेच पाएंगे जब आवक बढ़ेगी। यह भविष्य में संभावना नजर आ रही है लेकिन अब तक 10 दिन खरीद हो चुकी हैं और करीब 14 हजार क्विंटल बाजरा खरीदा गया है।
क्या कहते आढ़ती-
कनीना मंडी स्थित आढ़ती एवं कनीना मार्केट मार्केट कमेटी के उपप्रधान ओमप्रकाश लिसानिया ने बताया कि अब तक उनके पास महज 10 दिन में 50 क्विंटल बाजरा आया है जिससे मजदूरों की रोटी रोजी तो दूर अपनी रोटी रोजी कमाना कठिन हो गया है। यही कारण है कि उनके पास राजस्थान के 5 मजदूर कार्यरत थे वे छोड़ कर जा चुके हैं जबकि उन्होंने अपनी जेब से उन्हें रोटी खिलानी पड़ी है।
व्यापार मंडल के उप प्रधान रविंद्र बंसल का कहना है कि जब तक आवक नहीं बढ़ेगी मजदूर भी नहीं रुकेंगे और उनकी रोटी रोटी भी खत्म हो जाएगी। ऐसे में उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रतिदिन 300 से 400 किसानों को बाजरा बेचने के लिए बुलाया जाए ताकि एक बार सभी किसानों को मौका मिल सके।
संभावना-
किसानों की संख्या बढऩे की निकट भविष्य में उम्मीद है। हैफेड मैनेजर सतेंद्र सिंह ने बताया कि निकट भविष्य में प्रतिदिन किसानों की संख्या बढऩे की संभावना है। उच्चाधिकारियों तक यह संदेश जा चुका है और वे किसानों की संख्या बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
फोटो कैप्शन 1:बिहार से आये मजदूर अपना दुखड़ा सुनाते हुए




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