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Tuesday, April 21, 2026



 




कुतरूं प्राचार्य के कारनामे- 24
शक्की स्वभाव ने गिराई स्टाफ में कद्र
-जैसा किया वैसा फल पाया
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी होशियार सिंह वर्तमान में पत्रकार और लेखन कार्य से जुड़े हुए हैं। इन्होंने 40 सालों तक विभिन्न स्तरों पर शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि में तीन दर्जन से भी अधिक प्राचार्य संपर्क में आए। जिनमें से कुछ एक के गुण देखकर यूं लगाकर निश्चित रूप से बेहद ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ हैं। इनकी संख्या अधिक रही है जबकि कुछ प्राचार्य किसी के काम को करने में आनाकानी करते रहे हैं, अपने साथियों को दर्द देते आए हैं और शिक्षकों का काम रोकने में उन्हें बड़ा आनंद आता है। यही कारण है कि लोग उन्हें कुतरूं नाम से जानते हैं। ऐसे कुछ कुतरूं मिले जिनको देखकर ऐसा लगता है कि कुछ कुछ कुतरूं प्राचार्य शिक्षकों  के काम को अपनी जागीर समझते हुए किसी के काम को करना नहीं चाहते हैं। ऐसे ही कुछ कुतरूं आचार्य सामने आए थे इनमें से एक कुतरूं के शक्की स्वभाव के कारण स्टाफ में कद्र घटी और जैसा किया वैसा फल तो उसे मिलना ही है। चाहे आज वह इस दुनिया में नहीं है या है है।
हुआ यू कि होशियार सिंह स्टाफ में अति विश्वसनीय इंसान रहा है। कभी इधर-उधर की बातें नहीं की। सदा काम की बातें की, सदा दूसरों की भलाई का कार्य किया किंतु उनके विरुद्ध भी अनेक लोग खड़े मिले जिनमें से कुतरूं एक हैं। आज जब उन्हें कुछ लोग मिलते हैं तो वो ऐसे पास से गुजरते हैं जैसे वह उन्हें कभी जानते तक नहीं परंतु बहुत अधिक ऐसे लोग भी मिलते रहे हैं जो सम्मान देने में कसर नहीं छोड़ते। कुतरूं प्राचार्य कुछ ऐसे ही मिले जिन्होंने होशियार सिंह का सम्मान नहीं किया। वैसे तो स्टेट अवार्डी शिक्षक बहुत कम मिलते हैं और उनकी प्रशंसा और उनका नाम कम से कम स्कूल के पटों पर स्वर्ण अक्षरों  में लिखा होना चाहिए ताकि दूसरे शिक्षक एवं विद्यार्थी भी उनसे शिक्षा और प्रेरणा ले सके किंतु कुछ  कुतरूं प्राचार्यों ने तो उनके गुणों की कद्र नहीं की और न ही उन्हें उनका सम्मान दिया। ऐसे संत स्वभाव के होशियार सिंह शिक्षक ने मंच से अकसर बच्चों को प्रेरणा देते रहे हैं। होशियार सिंह ने एक बार मंच से खीर का प्रसंग क्या सुनाया कि कुतरूं प्राचार्य ऐसे उछला जैसे कोई बम गिरने को हो और ऐसे लाल पीला हो गया जैसे किसी ने उसके 5-7 बैंत जड़ दिए हो। वास्तव में ऐसे कुतरूं को देखकर पूरे स्टाफ में चर्चा का विषय बन गया कि आखिर इस शक्की आदमी को क्या हुआ? परिणाम यह निकला उसकी शक्की नजर के कारण सारे स्टाफ में कद्र घट गई। कद्र इसलिए भी घट गई कि किसी शिक्षक का कार्य नहीं करता था। कामों में आनाकानी करना, यहां तक कि उनकी सेवानिवृत्ति पर भी कार्यक्रम में भाग नहीं लेना, इससे लोगों में विश्वास घट गया और यह कहने लग गए की कुतरूं विश्वास के काबिल नहीं है। ऐसे में उसकी कदर घटती चली गई। कदर इंसान की अपने हाथ होती है, वह बना भी सकता है और गिरा भी सकता है, गिराना बहुत आसान है किंतु कद्र को बनाना बहुत कठिन है। जिसने कदर के मूल्य को समझा है वह अपनी इज्जत को बरकरार रखना है। दूसरों की इज्जत और कदर करते हुए इंसान अपना नाम कमा सकता है। उन्हें मालूम है कि इस दुनिया में कोई स्थायी नहीं है। जब स्थायी नहीं है तो घमंड किस बात का? घमंड का परिणाम तो उस समय देखने को मिलता है जब एक मुट्ठी राख उड़ती नजर आती है। क्या यही घमंड का परिणाम है। परंतु इस दुनिया में जैसा इंसान करता है वैसा जरूर फल पता है। जैसा बीज होते हैं वैसी ही  फसल काटता है। जिन गुण एवं संस्कारों से इंसान बना है वैसे ही उसको फल जरूर मिलते हैं। कुतरूं में अवगुण अधिक होने के कारण या तो वह समाज से 90 प्रतिशत गिर चुका है और कुछ बच भी गए तो गिर जाएंगे क्योंकि कई बार इंसान दूसरे का बुरा सोचता है और होता खुद का बुरा है। दूसरे का भला करने वाला सदा भलाई और नाम कमाता है। कुतरूं यह समझ बैठते हैं कि जो उन्होंने कर दिया वह फाइनल है लेकिन वह यह नहीं जानता दुनिया में सबसे बढिय़ा अदालत उस दाता की है जिसके आगे सब कुछ शून्य है। उसका कैमरा और कंप्यूटर सब कुछ रिकार्ड कर रहा है। कुतरूं जैसे लोग जिस दिन प्रभु के पास जाते हैं तो सारे दृश्य सामने आएंगे। उस दाता के समक्ष सब कुछ दिखाया जाएगा और वह अंत होगा कि दुनिया यूं कहेगी कि गंदगी चली गई क्योंकि जिसमें गुण नहीं वह अवगुणी है। ऐसे कुतरूं किसी काम के नहीं वो समाज के लिए और देश के लिए कलंक होते हैं और कुछ-कुछ कुतरूं प्राचार्य तो अपने आप को यह समझते हैं कि उन्होंने बड़ा पद हासिल कर लिया। पर वो भूल गए कि दुनिया में एक प्राचार्य नहीं है कुतरूं प्राचार्य एक हो सकता है लेकिन प्राचार्यों की संख्या अनेक है। इसलिए कभी दूसरे का अहित करते थे वो कुतरूं आज मिट्टी में मिल चुके हैं और जो बच गए वो भी मिट्टी में मिल जाएंगे।
नाम कमाना है तो कर भलाई काम।
मिट्टी में मिल जाएगा,नहीं बचेगा नाम।।



कैमला में यज्ञ व सत्संग आयोजित
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पूर्व सरपंच के कुए पर चला सत्संग
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कनीना की आवाज।
मंगलवार को वीर बजरंगी  बाबा हनुमान के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन स्व. मामराज जांगिड़ पूर्व सरपंच कैमला के यहां नवनिर्मित कुएं पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उनकीं धर्मपत्नी गिंदोडी देवी ने की। कार्यक्रम के संयोजक पंडित सतीश आर्य रसूलपुर  रहे और पंडित कंवर सिंह आर्य  व वेद प्रकाश आर्य ने संयुक्त रूप से पुरोहित का कार्य संपन्न किया। यजमान के रूप में श्रीकांत उनकीं धर्मपत्नी प्रियंका देवी और रविकांत सह धर्मपत्नी रहें। ब्रह्मा की भूमिका के रूप में नंबरदार संतलाल आर्य सह  धर्मपत्नी रहें।
 उपस्थित आर्यजनों और भगत जनों ने  अपनी आहुतियां डालकर सभी के जीवन की मंगल कामना की और श्रद्धापूर्वक बजरंग वीर बजरंगी हनुमान जी की बाल लीलाओं ,भक्ति ज्ञान , सेवा भाव आदि का यशोगान पूरे विधि- विधान और आयुर्वेदिक रीतियों के साथ संपन्न करवाया गया। इस अवसर पर विभिन्न आर्य संगठनों से पधारे प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचारों , कविताई, भजनों और आदर्श वचनों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी जिनमें गजराज आर्य ,वेद प्रकाश आर्य,  पंडित ताराचंद कलवाड़ी,महाशय बंसी राम ,  भरत सिंह दोंगडा, पंडित सतीश  आर्य रसलपुर, कप्तान सुरेंद्र पाल आर्य रसूलपुर, धर्मपाल आर्य मंत्री आर्य समाज रसूलपुर  मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़, थानेदार रघुवीर सिंह आर्य, पंडित इंद्रलाल पाथेडा आदि ने अपने- अपने वैदिक परंपरा, यज्ञ महिमा, उपासना, भक्ति भावनाओं के ओत-प्रोत अपने विचार भजनों कविताओं के माध्यम से रखें जो नए समाज की परिकल्पना,आज के युवाओं में एक नई चेतना और वैचारिक क्रांति की प्राप्ति में सहायक होगी।
जिससे उनके जीवन का भविष्य सुंदर, सुखद आनंदमय के साथ  दिशा और दशा निश्चित रूप से बदल जाएगी। आज का युवा विभिन्न भ्रांतियां से ग्रस्त हैं। इनसे मुक्त होने का मार्ग है वैदिक परंपरा से ही सात्विक सुख की प्राप्ति संभव हो सकती है। हमें दैनिक जीवन की शुरुआत प्रतिदिन यज्ञ के साथ करनी चाहिए, जिससे हमारे बच्चों में शिक्षा, संस्कार और संस्कृति के गुण विकसित हो सकें और जो ऋषि परंपरा की ओर उन्मुख हो सकें। आज भौतिकवादी इस युग में जरूरत है ऐसे अनुष्ठानों की जो समाज को एक नई जागृति प्रदान करें।
उन्होंने सभी मेहमानों का आज के कार्यक्रम में पहुंचने पर यजमान और  गांव की ओर से आभार व्यक्त किया गया ऐसे अनुष्ठान से हमें सादा जीवन और उच्च विचार और संस्कार संस्कार प्रखर होते हैं।
फोटो कैप्शन 08: हवन करते हुए ग्रामीण





कनीना में जनगणना 2027 प्रशिक्षण का दूसरा दिन संपन्न
- हाउस लिस्टिंग के 32 बिंदुओं पर दी विस्तृत जानकारी
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कनीना की आवाज।
जनगणना 2027 के अंतर्गत उपमंडल कनीना में प्रगणकों एवं सुपरवाइजरों के प्रशिक्षण के अंतिम चरण का दूसरा दिन आज राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला स्तरीय ट्रेनर डा. हरिओम भारद्वाज ने प्रतिभागियों को हाउस लिस्टिंग से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
डा. भारद्वाज ने प्रशिक्षण के दौरान हाउस लिस्टिंग के अंतर्गत आने वाले सभी 32 बिंदुओं को सरल एवं स्पष्ट तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि सही और सटीक आंकड़े जुटाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भविष्य की योजनाएं और नीतियां तैयार की जाती हैं।
इस अवसर पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने सभी प्रगणकों और सुपरवाइजरों का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने कार्य को पूरी निष्ठा, सटीकता और समयबद्ध तरीके से पूरा करें। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का एक महत्वपूर्ण दायित्व है, जिसमें हर कर्मचारी की भूमिका अत्यंत अहम है।
उन्होंने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि इस सर्वेक्षण कार्य में लगे कर्मचारियों के तबादले आगामी 31 मार्च 2027 तक नहीं किए जाएंगे तथा सभी को निर्धारित समय अवधि के भीतर ही अपना कार्य पूर्ण करना होगा।
सहायक चार्ज अधिकारी एवं गिरदावर राजेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि सभी प्रगणकों और सुपरवाइजरों को शीघ्र ही उनके कार्यक्षेत्र आवंटित कर दिए जाएंगे, ताकि वे निर्धारित समय के भीतर अपना कार्य प्रारंभ कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान शोएब खान ने भी प्रतिभागियों को निर्देशित करते हुए कहा कि प्रत्येक बिंदु पर गहनता से कार्य करना आवश्यक है और इसके लिए कार्यक्षेत्र की पूरी समझ होना जरूरी है।
इस मौके पर प्राचार्य डा. वीरेंद्र सिंह बुचावास, विनोद जांगड़ा बवानिया, शशि यादव, सुमन जांगड़ा,सुनीता यादव जनगणना विभाग से मनमोहन शेखावत देवेंद्र यादव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 07: जनगणना के लिए शिक्षकों की कनीना स्कूल में ट्रेनिंग




नगरपालिका कनीना उपचुनाव-
-नामांकन के पहले दिन नहीं पहुंचा कोई उम्मीदवार-एसडीएम
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कनीना की आवाज। 
नगरपालिका कनीना के वार्ड संख्या 14 में होने वाले उपचुनाव को लेकर चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नामांकन प्रक्रिया के पहले दिन मंगलवार को किसी भी उम्मीदवार ने अपना पर्चा दाखिल नहीं किया है।
यह जानकारी देते हुए चुनाव रिटर्निंग अधिकारी (नगरपालिका कनीना) एवं एसडीएम डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासन द्वारा निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव संपन्न कराने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग, हरियाणा द्वारा जारी अधिसूचना की अनुपालन में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि महेंद्रगढ़ जिले के तहत आने वाली नगरपालिका कनीना के रिक्त वार्ड के लिए मंगलवार को नामांकन का पहला दिन था। शाम तक कार्यालय में एक भी नामांकन प्राप्त नहीं हुआ, जिसकी अधिकारिक रिपोर्ट जिला उपायुक्त और राज्य निर्वाचन आयोग पंचकुला को भेज दी गई है।
एसडीएम ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ पूरा करने के लिए निर्वाचन विभाग पूरी तरह सतर्क है।
उन्होंने क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और संभावित उम्मीदवारों से अपील की है कि वे चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित समय-सीमा और नियमों का पालन करते हुए अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।





3 को होने वाली नीट परीक्षा को लेकर डीसी अनुपमा अंजली ने ली बैठक
-सुबह 11 बजे से शुरू हो जाएगा उम्मीदवारों का प्रवेश
-परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन मुस्तैद-डीसी
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कनीना की आवाज।
आगामी 3 मई को आयोजित होने वाली नीट (यूजी) परीक्षा को लेकर
उपायुक्त अनुपमा अंजली ने आज लघु सचिवालय में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और नीट परीक्षा के केंद्र अधीक्षकों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने परीक्षा को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए।
बैठक में डीसी ने कहा कि आगामी 3 मई को आयोजित होने वाली नीट (यूजी) परीक्षा को पूरी तरह से नकल मुक्त और पारदर्शी तरीके से संपन्न करवाना सरकार और जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी, जैमर और बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था चाक-चौबंद होनी चाहिए ताकि किसी भी स्तर पर चूक की गुंजाइश न रहे। उपायुक्त ने पुलिस विभाग को सभी केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल और महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में डीसी ने उम्मीदवारों की सुविधा और नियमों के पालन पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों का प्रवेश सुबह 11 बजे से शुरू हो जाएगा और दोपहर 01:30 बजे के बाद किसी भी स्थिति में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि केंद्र के भीतर मोबाइल फोन, घड़ी, वालेट, रुमाल, किसी भी प्रकार के आभूषण या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट नहीं ले जा सकेंगे। परीक्षा के लिए आवश्यक पेन भी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा केंद्र पर ही उपलब्ध कराया जाएगा?। ऐसे में उम्मीदवार बाहर से कोई भी स्टेशनरी न लाएं। उम्मीदवारों को अपने साथ केवल एडमिट कार्ड, पासपोर्ट साइज की दो फोटो और एक वैध मूल पहचान पत्र लाना अनिवार्य है।
बैठक के दौरान नीट कोआर्डिनेटर ओपी यादव ने पीपीटी के जरिए केंद्र अधीक्षकों को प्रशिक्षण दिया।
इस बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त तरुण कुमार पावरिया, नगराधीश डा. मंगल सैन तथा डीएसपी भारत भूषण के अलावा अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 06:  नीट परीक्षा को लेकर अधिकारियों की बैठक लेती डीसी अनुपमा अंजली।


पृथ्वी दिवस-22 अप्रैल
पृथ्वी ग्रह को बचाना होनी चाहिए प्राथमिकता-नरेश कुमार शिक्षक
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कनीना की आवाज।
पूर्व शिक्षक निर्मल कुमार का कहना है कि  22 अप्रैल 1970 से यह दिन हर साल पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता है। पृथ्वी दिवस मनाने के पीछे हमारा उद्देश्य यही है कि हम पृथ्वी को एक बहुत ही सुंदर ग्रह बनाएं इसके लिए आवश्यक है कि हम लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करें तथा इसे बचाने के लिए किया जा रहे, प्रयासों को प्रोत्साहित करें। आज इस घायल ग्रह को जीवित रखने के लिए हम सब का प्रयास जरूरी है ।इसके लिए वनों की अंधाधुंध कटाई को रोके,ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाकर धरती का श्रृंगार करें,प्राकृतिक संसाधनों का कम से कम दोहन करें, जीव जंतुओं व वन्य जीव प्राणियों का संरक्षण करें, कीटनाशकों तथा  उर्वरकों का सीमित मात्रा में प्रयोग करें, डीजल व पेट्रोल की जगह वैकल्पिक ईंधन जैसे सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन का प्रयोग करें। हमारी पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है जिस पर हम सबको मिलकर रहना है, अत: इसके संरक्षण के लिए हम सब का योगदान बहुत जरूरी है, तभी हम आने वाली पीढिय़ों को एक सुंदर और स्वस्थ पर्यावरण दे पाएंगे, वरना वह दिन दूर नहीं जब मनुष्य का अस्तित्व ही इस दुनिया से मिट जाएगा।
    -निर्मल कुमार, पूर्व शिक्षक
जब से होश संभला है तब से पृथ्वी पर हम जीते हैं। हारे इसी पर मलमूत्र चाहते हैं इसी को गंदा करते हैं किंतु यह हमारी पालन करती है। हमें फल, फूल, सब कुछ खाने पीने की वेस्ट प्रदान करती है। जिस प्रकार मां देखरेख करती उसी प्रकार पृथ्वी भी देखरेख करती है। इसलिए पृथ्वी दिवस पर पृथ्वी मां को हम नमन करते हैं। जब सुबह सवेरे उठते ही हम पृथ्वी को नमन करते हैं ताकि हमारा ख्याल रखें। जहां जन्म देने वाली मां को भी नमन किया जाता है जबकि पृथ्वी मां को भी नमन किया जाता है। पृथ्वी इंसान को सदा सहारा देती आई है और देती रहेगी। ऐसे पृथ्वी हमारी सचमुच बड़ी मां है।
--नरेश कुमार हिंदी शिक्षक
फोटो कैप्शन: निर्मल कुमार, नरेश कुमार



 किसान जुटे कृषि कार्यों में
-कपास की ओर रुझान कम
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कनीना की आवाज।
 किसान एक बार फिर से खरीफ फसल की तैयारियों में लग गए हैं। रबी फसल पैदावार लेने के बाद अन्न को बेच रहे हैं वहीं किसान खरीफ विशेषकर कपास की बीजाई की तैयारियों में लगे हैं। खेतों में खाद डालने का काम जारी है।
   वैसे तो किसानों की प्रमुख फसल गेहूं की है। किसान गेहूं को खाने के लिए सबसे अधिक प्रयोग करते हैं वहीं बाजरे की फसल चारे के लिए अधिक उपजाया जाता है और खाने के लिए कम। रबी फसल बेहतर पैदावार नहीं दे पाई। कुछ पैदावार हुई बेचकर घर के कामों के लिए धन प्राप्त किया है। विगत वर्षों से किसान कपास फसल की ओर आकर्षित हुये थे किंतु विगत वर्ष कपास की फसल में रोग आ जाने से किसान नुकसान की ओर चले गये थे। परिणामस्वरूप इस बार किसानों का रुझान कपास की ओर कम है।
 अब किसान खरीफ फसल की तैयारी में लग गया है। खेतों में खाद डालने विशेषकर गोबर का खाद डालकर उसे बिखेरने तथा बारिश होने का इंतजार करेंगे। किसान गर्मियों में अपनी ऊंटगाड़ी, ट्रैक्टर एवं ट्राली से खाद खेतों में डालते हैं।
  कनीना के किसान अजीत सिंह, योगेश कुमार, रोहित कुमार ने बताया कि रबी फसल पैदावार लेने के तुरंत बाद किसान अपनी खरीफ फसल में लग जाता है। इस दौरान बाजरा, ग्वार एवं कपास आदि उगाते हैं। किसानों ने बताया कि खरीफ फसल पूर्णरूप से बारिश पर आश्रित है। वर्षा होने पर बीजाई कर देते हैं।
  किसान पशु पालक होने के कारण पशुओं के गोबर से खाद बनाते हैं या फिर गोबर से कंपोस्ट व केंचुआ खाद बनाकर खेतों में डालने लगे हैं।  किसान मेहनती है और गर्मी में भी खेतों में खाद डाल रहे हैं।
फोटो कैप्शन 05: किसान खेत में खाद डालते हुए।




रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा ने किया धरना प्रदर्शन
-अपनी मांगों को ज्ञापन भी सौंपा
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कनीना की आवाज।
रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा  संबंधित अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन की महेंद्रगढ़ जिला इकाई ने जिला उपायुक्त कार्यालय मिनी सचिवालय पर दस बजे से दोपहर एक बजे तक धरना प्रदर्शन किया। जिसकी रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला प्रधान घनश्याम शर्मा ने की। धरने  प्रदर्शन का मंच संचालन जिला सचिव रोशन लाल निंबल ने किया।  धरना-प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री के नाम मांग पत्र दिया।
 रिटायर्ड कर्मचारियों को संबोधित करते हुए राज्य प्रेस सचिव धर्मपाल शर्मा कहा कि आल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट पेंशनर्स फेडरेशन ने 22- 23 फरवरी 2026 तक सैनी समाज धर्मशाला कुरुक्षेत्र हरियाणा में अपनी दूसरी आल इंडिया कांफ्रेंस खत्म की। इसकी रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा में मेजबानी की। कांफ्रेंस में 312 डेलीगेट शामिल हुए। सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए कामरेड सुरेंद्र चौधरी (बिहार )महासचिव पद के लिए कामरेज वजीर सिंह( हरियाणा) वित सचिव के लिए कामरेड अरुण घोष (पश्चिम बंगाल )समेत कुल 30 सदस्यों का चुनाव हुआ। राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने 12 सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया गया। फाइनेंस बिल वैलिडेशन एक्ट 2025 को रद्द किया जाना चाहिए। नई पेंशन स्कीम को खत्म किया जाना चाहिए और सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन सिस्टम बहाल किया जाना चाहिए।  आठवें सेंट्रल पे कमीशन का फायदा उन सभी को मिलना चाहिए जो 31 दिसंबर 2025 से पहले रिटायर हुए हैं। सभी राज्यों में महंगाई भत्ता बढ़ाकर सेंट्रल गवर्नमेंट पेंशनर्स के बराबर किया जाना चाहिए और करोना काल 2019 के दौरान महंगाई भत्ते का 18 महीने का एरिया ब्याज के साथ दिया जाना चाहिए।
पेंशन कांयूटेशन अमाउंट 11 साल तक काटा जाना चाहिए। कर्मचारियों के फायदे में कोर्ट के फैसलों को जनरलाइजेशन किया जाना चाहिए।  ट्रेन,हवाई यात्रा ,वोल्वो, एसी बसों और निजी कोआपरेटिव बसों के किराए में छूट फिर से शुरू की जानी चाहिए। सभी राज्यों के सभी पेंशनर्स को चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का सरल उपाय अपनाना चाहिए। पब्लिक सेक्टर के संस्थानों के निजीकरण को रोका जाना चाहिए। चार नए खतरनाक लेबर कोड खत्म किए जाने चाहिए ।नई शिक्षा नीति 2020 को रद्द किया जाए और टेट की अनिवार्यता घोष समाप्त किया जाए। पेंशन पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए। किसानों को उनकी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य  दिया जाना चाहिए। रिटायर्ड कर्मचारी संघ कि राज्य महासचिव रतन जिंदल ने कहा पब्लिक सेक्टर और सरकारी संस्थानों जिनमें बिजली, इंश्योरेंस, बैंक और दूसरी सेवाएं शामिल है कि प्राइवेट रिजर्वेशन का कड़ा विरोध करते है और इसे तुरंत रोकने की मांग करते है। सरकार कर्मचारी और पेंशनर्स के अधिकारों की रक्षा करें जिससे जॉब सिक्योरिटी, वेतन , पेंशन और सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट शामिल है। सरकार से लोगों पर केंद्रीय पालिसी अपने की अपील करें। जो कार्पोरेट मुनाफे की बजाय जनता की क्योंकि रक्षा करें। सभी डेमोक्रेसी ट्रेड यूनियन पेंशनों से भी अपील करें। नई पेंशन स्कीम कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम को तुरंत खत्म किया जाए। एनपीएस शुरू होने के बाद या उसके बाद भर्ती हुई सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम बहाल की जाए। पेंशन को एकता है पक्का और महंगाई से बचा हुआ फायदा दिया जाए। नए बने खतरनाक चार मजदूर कोडस को खत्म किया जाए। कीमतों की बढ़ोतरी पर रोक लगाई जाए। किसान नेता मास्टर धर्मेंद्र यादव ने सरकार से किसानों के लिये अनाज मण्डी में जो नये नियम लागू किए है उन्हे,रद्द करने की मांग की है किसान को  सभी  फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की मांग की। सभी नौजवानों का नियमित रोजगार देने की मांग की। आज धरना-प्रदर्शन में कांफ्रेंस होशियार सिंह लाम्बा, गुरूदयाल सिंह नाहर, छोटेलाल खंड शिक्षा अधिकारी,आनंद जोशी,ओमप्रकाश दायमा  नारनौल खण्ड प्रधान, सुवालाल ,अटेली खंड प्रधान बलबीर सिंह यादव,नांगल चोधरी खंड प्रधान छोटेलाल हेडमास्टर, महेन्द्रगङ खंड प्रधान महेंद्र यादव, ताराचंद सैनी ,दुलीचन्द गोठवाल, विजय सिंह यादव, सुरेश कुमार  ,जगबीर सिंह ने भी संबोधित किया।  आज के धरने में रिटायर्ड कर्मचारी संघ के राज्य महासचिव रतन जिंदल,राज्य प्रेस प्रेस सचिव धर्मपाल शर्मा, सर्व कर्मचारी संघ के  पूर्व जिला प्रधान एवं किसान नेता धर्मेंद्र यादव , भारत संसार निगम लिमिटेड यूनियन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कामरेड रमेश कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04: धरना प्रदर्शन करते हुए रिटायर्ड कर्मी


सांस्कृतिक अहीरवाल संस्था के विस्तार से कार्य को गति मिलेगी -सत्यव्रत शास्त्री
-2500 गांवों का  इतिहास लेखन का काम पूरा किया
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कनीना की आवाज।
अहीरवाल क्षेत्र हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली तीन  राज्यों और नौ जिलों में फैला हुआ है । इस क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति ,इतिहास और परंपराओं पर काम करने वाली संस्था है जिसने इस क्षेत्र के  2500 गांवों का  इतिहास लेखन का काम पूरा किया है। यह अपने आप में बड़ा और आने वाली पीढिय़ां के लिए मार्गदर्शन का काम करेगा। सांस्कृतिक अहीरवाल के निदेशक सत्यव्रत शास्त्री ने सांस्कृतिक अहीरवाल की प्राचीन संस्कृति को पुनर्वैभव पर लाने के लिए एक लंबी कार्य योजना का निर्माण किया है। जिसमें लंबे समय काम करके इसकी खोई प्रतिष्ठा को प्राप्त करना है। इस क्षेत्र के पूर्वजों द्वारा स्थापित मान बिंदुओं,  परंपराओं से जिस प्रकार से वर्तमान पीढ़ी अनजान हैं उसको साथ  लेकर उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास करना है । अहीरवाल के इस काम को और अधिक व्यवस्थित रूप से गति देने के लिए समाज के प्रतिष्ठित एवं योग्य व्यक्तियों को नियुक्ति देकर एक कदम और आगे बढ़ाया है आने वाले समय में इस कार्य योजना के अंतर्गत सभी इकाइयों के लिखे गए इतिहास को प्रकाशित कर जन-जन तक पहुंचाना तथा सांस्कृतिक अहीरवाल क्षेत्र के सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन केन्द्रों  को विश्व के मानचित्र पर स्थापित कर लोगों को उसके प्रति आकर्षित करना रहेगा। सांस्कृतिक अहीरवाल के केंद्रीय कार्यालय नारनौल से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नियुक्ति की घोषणा की है जिसमें अहीरवाल के राजस्थान क्षेत्र में डॉक्टर एसपी यादव सीहोर खेतड़ी को राजस्थान क्षेत्र का प्रभारी तथा देशपाल यादव की ईशरोदा  तिजारा को सह प्रभारी का दायित्व सौंपा गया है।  इसी प्रकार जिला झुंझुनूं में कर्णपाल नावता,जिला सीकर में सुंडाराम  एडवोकेट, कोटपूतली बहरोड में डाक्टर रामकुमार यादव ,जिला खैरथल तिजारा में रामसिंह यादव मनेठी  को संयोजक का दायित्व दिया गया है। संगठन द्वारा दी नियुक्ति  पर संगठन के  लोगों ने खुशी जाहिर की है और विश्वास व्यक्त किया है कि संगठन जिस प्रकार से पिछले पांच वर्षों से निरंतर प्रगति की ओर बढ़ रहा है इनकी नियुक्ति से इस काम को और अधिक गति प्राप्त होगी।
फोटो कैप्शन : सत्यव्रत शास्त्री


ककराला की छात्रा तन्वी का भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन के युविका-2026 में चयन
-छात्रा का किया गया सम्मान
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कनीना की आवाज।
एसडी विद्यालय की छात्रा तन्वी का चयन अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित युविका (युवा विज्ञानी कार्यक्रम)-2026 के लिए हुआ है। यह उपलब्धि न केवल छात्रा की मेहनत और लगन का परिणाम है, बल्कि विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन का भी प्रमाण है।
विद्यालय प्रशासन के अनुसार, पिछले लगातार चार वर्षों से विद्यालय के विद्यार्थी इसरो के विभिन्न कार्यक्रमों में चयनित होते आ रहे हैं। विशेष रूप से वर्ष 2024 में विद्यालय के 5 विद्यार्थियों का चयन हुआ था, जिसने संस्था की शैक्षणिक साख को और मजबूत किया।
इनोवेशन इंचार्ज जसबीर जांगिड़ ने बताया कि इस वर्ष तन्वी का चयन रिजनल रिमोट सैनसिंग सेंटर, जोधपुर के लिए हुआ है, जो विद्यालय के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
विद्यालय प्रधानाचार्या डा. शिप्रा सारस्वत ने अपने संबोधन में बताया कि युविका कार्यक्रम के लिए चयन प्रक्रिया अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक होती है, जिसमें विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन, विज्ञान गतिविधियों, ओलंपियाड, खेल तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को विशेष महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि तन्वी की सफलता यह दर्शाती है कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
विद्यालय के चेयरमैन महोदय ने भी इस अवसर पर अपना संदेश देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे विद्यालय एवं क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे भी तन्वी से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करें।
इस अवसर पर विद्यालय में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें तन्वी सहित अन्य विद्यार्थियों को भी उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। सभी चयनित एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए तथा उनके अभिभावकों और ग्राम के गणमान्य व्यक्तियों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित कर उनका सम्मान किया गया।
विद्यालय परिवार ने तन्वी को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही, अन्य विद्यार्थियों को भी इस सफलता से प्रेरणा लेकर उच्च लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की  प्रबंधन समिति के वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र सिंह, ओमप्रकाश यादव, सीईओ आरएस यादव, डिप्टी डायरेक्टर पूर्ण सिंह, कोआर्डिनेटर स्नेहलता सहित समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे और सभी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की।
फोटो कैप्शन 01: तन्वी को पुरस्कृत करते हुए













टीबी का इलाज संभव
-जुकाम, खांसी, बीपी और शुगर की , की गई जांच
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कनीना की आवाज। टीबी एक्टिव केस फाइंडिंग द्वारा गांव ककराला में कैंप लगाया गया। जिसमें एसीफ के अनुसार वहां कैंप में आए हुए ग्रामीणों की जांच की गई। जिसमें जुकाम, खांसी, बीपी और शुगर की जांच की गई।
पवन कुमार सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर ने बताया कि
तपेदिक (टीबी) एक संक्रामक लेकिन पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, यदि समय पर पहचान और सही इलाज हो। आज भी कई लोग जानकारी के अभाव में लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी बढ़ती है और दूसरों तक फैलने का खतरा रहता है। इसके साथ-साथ ककराला के सरकारी स्कूल के अंदर भी बच्चों को टीबी की बीमारी के बारे में जागरूक किया गया। इसके बाद  रैडक्रास सोसाइटी टीबी अभियान के ब्लॉक कोआर्डिनेटर दीपक कुमार ने बच्चों को टीबी मुक्त भारत की शपथ दिलाई तथा सभी से भाइयों-बहनों से अपील है कि यदि किसी को दो हफ्ते से अधिक समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना या रात में पसीना आने जैसी समस्या हो, तो तुरंत जांच करवाएं। सरकार द्वारा टीबी की जांच और इलाज बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध है। टीबी का इलाज बीच में छोडऩा नहीं चाहिए, क्योंकि अधूरा इलाज बीमारी को और खतरनाक बना सकता है। साथ ही, पौष्टिक आहार, साफ-सफाई और नियमित दवाइयों का सेवन बहुत जरूरी है। इस मौके पर एचवी युद्धवीर, एमपीएसडब्ल्यू रविंद्र और आशा वर्कर और एएनएम सभी मौजूद रही।
फोटो कैप्शन 02: ककराला में लगाया गया कैंप


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