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Friday, May 22, 2026





आईपीएस बनने पर भडफ़ में खुशी की लहर
-मिठाई बांटी
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कनीना की आवाज।
हिसार जिले के गांव मुकलाना के विजय सिंह जाखड़ आईपीएस अधिकारी बन गए हैं। उन्होंने अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उनकी पदोन्नति पर गांव भडफ़ में खुशी की लहर है। गांव में मिठाई बांटकर खुशी जताई है।
खुशी जताने वालों में रामबिलास शर्मा, महिपाल गोस्वामी, सुनील शर्मा, नरेश सोनी, महेंद्र शर्मा आदि प्रमुख हैं।
फोटो कैप्शन 07: पदोन्नति पाकर अधिकारी बने विजय सिंह

पील बनी पुराने जमाने के फल
-  बुजुर्ग पील को याद कर हो जाते हैं खुश, गरीबों के हैं ये अंगूर
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कनीना की आवाज।
 कनीना में कभी आधा दर्जन बणिया(जंगल) होती थी। बणी में जाल पेड़ों का साम्राज्य मिलता है, जो हजारों वर्ष पुराने होते हैं। जब गर्मी आती है तब जाल के पेड़ों पर विभिन्न रंगों हरी, सफेद, पीली, लाल, नारंगी तथा विभिन्न रंगों के फलों से लद जाते थे। वास्तव में अंगूर की भांति यह फल होते हैं जिनको आज से 30 साल पहले लोग बड़े चाव से खाते थे। आज बेशक युवा पीढ़ी जंगल में जाने से जंगली जीवों और जानवरों से डरती हो किंतु बुजुर्गों का जीवन जंगलों में बीता था और वहीं जाल के पेड़ों से फल तोड़कर घर पर लाते थे। इन्हें फांका मारकर खाते थे, जिससे एक अलग ही स्वाद आता था। बुजुर्गों के समक्ष जब आज भी चर्चा चलती है तो बस इतना ही कहते हैं कि पील का जमाना लद गया। मौसम परिवर्तन के कारण इन जाल के पेड़ों पर कोई भी फल नहीं लगता। कभी कभार इक्का-दुक्का फल मिल भी जाता है तो उस पर लोगों की नजरें टिक जाती है परंतु एक जमाना था बहुत अधिक मात्रा में फल लगते थे।
 कैसे तोड़ कर लाते थे पील-
 राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, राम सिंह, कृष्ण कुमार आदि बताते हैं जब स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां होती थी तब अपने गले में सिंडोरा(पील इक_ा करने का बर्तन) बांधकर जंगल की ओर चले जाते थे। यह किसी एक घर से नहीं बल्कि लगभग हर घर से पील तोड़कर लाने के लिए चल देते थे। दिनभर आपस में वार्तालाप करते हुए जाल के पेड़ पर चढ़कर पील तोड़ते थे और अपने सिंडोरे में डालते थे। जब सिंडोरा भर जाता था, जाल के पेड़ से नीचे उतरते और घर तक पहुंचते थे। घर के सारे सदस्य बैठकर इन पीलों को फांका मारकर खाते थे। यहां तक कि इन फलों में, बीज वाले अंगूरों की भांति बीज होते थे जिनको खाते समय जीभ से निकाल दिया जाता था।
अंगूर के थे विकल्प -
बुजुर्ग बताते हैं कि अंगूर के विकल्प का विकल्प पील होते थे। अंगूर गरीब आदमियों को नहीं मिल पाते थे अमीरों के लिए अंगूर होते थे और गरीब लोगों के लिए पील खाने को मिलती थी। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में जहां गर्मियों में नीम की निबोरी छोटे आम के रूप में खाई जाती थी जो गरीबों के आम कहलाते हैं जबकि अमीर लोग बड़े-बड़े आम खाते रहे हैं।
क्या क्या कहते हैं पर्यावरणविद-
 रविंद्र कुमार पर्यावरणविद से इस संबंध में चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण पील लगनी बंद हो गई है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार कैर पर टींट एवं पीचू खत्म चुका हो गए हैं उसी प्रकार जाटी पेड़ से सांगर और झींझ लुप्त हो गई है। ठीक उसी प्रकार जाल के पेड़ से पील गायब हो गई हैं। उन्होंने बताया कि इस वक्त मौसम इतना दूषित हो चला है, कि गर्मी अधिक बढ़ गई है जिसके कारण पील पैदा नहीं होती। पील एक निश्चित ताप तक ही पैदा होती है तथा इसके लिए साफ-सुथरी जलवायु की आवश्यकता होती है।
राजस्थान से मंगवा रहे हैं पील-
बुजुर्ग खाने के लिए गर्मियों में राजस्थान  क्षेत्रों से पील मंगवा रहे हें। राजस्थान क्षेत्रों में आज भी जाल के पेड़ों पर पील पाई जाती है। यही कारण है कि उनसे पील मंगवा कर बड़े चाव से खाते हैं।
नष्ट कर कर दी है जाल और बणिया-
 कनीना में आधा दर्जन बणी होती थी जिनको लगभग साफ कर दिया गया है। जहां पीपल वाली बणी बहुत कम बची है, अतिक्रमण का शिकार हो गई है वहीं रणास और मानका वाली बनी खत्म कर दी गई है। छोटी बणी बस स्टैंड सीमा में चली गई है वहीं बड़ीबणी अभी थोड़ी बहुत बची है जो अतिक्रमण के चलते निकट भविष्य में समाप्त हो जाएगी और हजारों वर्ष पुराने पेड़ पौधे जाल भी समाप्त हो जाएंगे। आवश्यकता है पेड़ों की देखरेख की। बार-बार मांग उठ रही है कि बणियों में जाल के पेड़ों की सुरक्षा की जाए ताकि भविष्य में इन पर फल भी लग सकते हैं। अगर पेड़ उखाड़ दिए गए तो भविष्य में पुस्तकों में जाल व पील पढऩे को मिलेगी।
अनभिज्ञ हैं छोटे बच्चे-
 यहां तक कि बहुत से युवा पील से अपरिचित है क्योंकि उन्होंने कभी पील का नाम सुना ही नहीं। वैसे तो आजकल मोबाइल का जमाना होने के कारण युवा पीढ़ी एवं बच्चे मोबाइल पर पील जरूर देख सकते हैं किंतु हकीकत में पील खाकर नहीं देखी है। जब उनको पील और सांगर दिखाया जाता है तो चकित होकर इनका नाम पूछते हैं।
 फोटो कैप्शन 8: पील का फल


विद्यार्थियों को करवाया उत्कटासन का अभ्यास
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कनीना की आवाज।
योगीराज डा. ओ3मप्रकाश महाराज ने ओ3म शिक्षा संस्कार सीनियर सैकेण्डरी स्कूल पाली के छात्र, छात्राओं को उत्कटासन का अभ्यास करवाया।
योगीराज ने बताया कि अपने बिछौने पर सावधान की स्थिति में खड़े हो जाए । पैरों में एक फुट का फासला रखें। अपने दोनों हाथों को सामने कन्धों के बराबर लाएं, हथेलियां जमीन की ओर रहेंगी । गर्दन और कमर को सीधा रखने का प्रयास करें। धीरे-धीरे घुटने मोड़ते हुए नीचे की ओर बैठें। एडियां ऊपर की ओर उठी हुई रहेंगी, जिससे की सारे शरीर का संतुलन बना रहे। कुछ समय इसी स्थिति में रुकने के बाद धीरे-धीरे पंजों के ऊपर भार डालते हुए, शरीर को ऊपर की तरफ उठाएं, घुटनों को सीधा करते हुए, कमर और गर्दन को भी सीधा रखते हुए खड़े हो जाएं। हाथों को सामने से पाश्र्व भाग में लाएं। दोनों पैरों को मिलाते हुए पुन: सावधान की स्थिति में आ जाएँ। यह एक आवृति पूरी हुई । कुछ समय पश्चात् दूसरी व तीसरी आवृत्ति करें । तीसरी आवृत्ति के पश्चात श्वासन में विश्राम करें।
उन्होंने बताया कि इस आसन के करने से पिण्डली की मांसपेशियों को सुदृढ़ बनाता है। मुख्यत: इसका उपयोग पैरों की स्नायु दुर्बलता को दूर करने में है। जिन लोगों को मांसपेशियों में ऐंठन की शिकायत हो तथा जिनको चक्कर आते हों वे इस आसन को न करें।
प्रारम्भ में 15 सेकेंड से शुरू करके तीन मिनट तक समय बढ़ा सकते हैं। इसी प्रकार प्रारम्भ में एक आवृत्ति से शुरू करके धीरे-धीरे तीन आवृत्ति तक अभ्यास करें ।
फोटो कैप्शन 07= योगीराज आसन करवाते हुए




पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, पारदी गैंग के 7 सदस्य हथियारों सहित दबोचे, इनामी आरोपी भी शामिल
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कनीना की आवाज।
पुलिस अधीक्षक दीपक के कुशल मार्गदर्शन में सीआईए नारनौल, सीआईए महेंद्रगढ़ और थाना शहर महेंद्रगढ़ की संयुक्त टीमों ने मुठभेड़ के बाद अंतर्राज्यीय पारदी गुलेल गैंग के सात बदमाशों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है।
यह वारदात आज दिनांक 22 मई को अल सुबह थाना शहर महेंद्रगढ़ के अंतर्गत पडऩे वाले हुड्डा सेक्टर (नजदीक कोर्ट महेंद्रगढ़) क्षेत्र में हुई है। इस गिरोह के सदस्य पिछले काफी समय से विभिन्न क्षेत्रों में लूटपाट, डकैती और चोरी की वारदातों को अंजाम देकर कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए थे।
घटना के संबंध में विस्तृत विवरण देते हुए पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि सीआईए नारनौल की पुलिस टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि महेंद्रगढ़ शहर में कुछ संदिग्ध व्यक्ति किसी संगीन अपराध को अंजाम देने की नियत से घूम रहे हैं। ये बदमाश पिछले दिनों कई जिलों में सक्रिय रहे पारदी गिरोह से ताल्लुक रखते हैं, जो लूट व डकैती के साथ-साथ हत्या जैसे जघन्य कृत्यों के लिए जाने जाते हैं।
इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सीआईए नारनौल, सीआईए महेंद्रगढ़ और थाना शहर महेंद्रगढ़ की विशेष टीमों का गठन किया गया, जब पुलिस टीमें महेंद्रगढ़ कॉलेज के पास पहुंचीं, तो दोबारा सूचना मिली कि संदिग्ध आरोपी सतनाली मोड़ से होते हुए हुड्डा सेक्टर की तरफ भाग रहे हैं। पुलिस टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए रणनीतिक रूप से नाकाबंदी कर आरोपियों को रोकने का प्रयास किया। पुलिस को सामने देखकर बदमाशों ने खुद को घिरा पाकर आत्मसमर्पण करने के बजाय अलग-अलग दिशाओं में भागना शुरू कर दिया।
पुलिस टीम द्वारा पीछा किए जाने और रुकने की सख्त चेतावनी देने पर बदमाशों ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नियत से फायरिंग कर दी। इस पर पुलिस बल ने पहले आत्मरक्षार्थ हवाई फायर किए, लेकिन जब बदमाशों की तरफ से फायरिंग नहीं रुकी तो पुलिस ने उन्हें काबू करने और आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की। इस गोलीबारी में दो बदमाश घायल हो गए, जिन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए सरकारी अस्पताल महेंद्रगढ़ भिजवाया गया। जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हायर सेंटर ले जाया गया।
घेराबंदी कर दबोचे गए सभी सात आरोपी मध्य प्रदेश के मूल निवासी हैं। पकड़े गए आरोपियों की पहचान मनीराम निवासी बिलाखेड़ी गुना, अभय निवासी कनेरा गुना), अर्जुन निवासी कनेरा गुना, विरेन्द्र निवासी बिलाखेड़ी गुना, सुनील निवासी माधौगढ़ अशोकनगर), चांद निवासी पटेल नगर गुना) और विजय निवासी कनेरा गुना) के रूप में हुई है।
आपराधिक रिकॉर्ड के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से विजय पर 15,000 रुपऐ और चांद पर 5,000 रुपए का नकद इनाम एमपी पुलिस की तरफ से घोषित था, जो लंबे समय से कई संगीन वारदातों में वांछित चल रहे थे। घायल बदमाशों के अलावा बाकि 5 आरोपियों को पुलिस टीम द्वारा मौके पर ही डिटेन कर लिया गया। पुलिस द्वारा सभी आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी चेक किया जा रहा है।
मुठभेड़ स्थल और आरोपियों की सघन तलाशी के दौरान पुलिस ने अवैध हथियार और उपकरण बरामद किए हैं। बरामदगी में एक आधुनिक स्वचालित पिस्तौल मैगजीन व 3 जिंदा कारतूस तथा एक देसी कट्टा व 1 खाली कारतूस का खोखा बरामद हुआ है। इसके अलावा, घटना स्थल से बदमाशों द्वारा चलाए गए कारतूसों के खाली खोखे भी साक्ष्य के रूप में बरामद किए गए। आरोपियों के पास से मिले एक पि_ू बैग की तलाशी लेने पर लोहे का नुकीला सरिया, रेती, प्लास, वायर कटर, पेचकस, एक मोबाइल फोन और एक घड़ी सहित चोरी व सेंधमारी में इस्तेमाल होने वाली गुलेल और अन्य सामग्री बरामद हुई है।
इस वारदात के संदर्भ में थाना शहर महेंद्रगढ़ में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस द्वारा मामले में आगामी कार्रवाई की जा रही है।
फोटो कैप्शन 06: पकड़े गये अपराधी


शहीदों के सम्मान में नसीबपुर में बनेगा भव्य स्मारक : आरती सिंह राव
-सीएम के साथ शहीद स्मारक की ड्राफ्टिंग और डिजाइन के विस्तार पर हुई चर्चा
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कनीना की आवाज।
हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि शहीदों और वीर बलिदानियों की स्मृति में नारनौल के नसीबपुर में बनने वाला भव्य शहीद स्मारक आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा स्मारक निर्माण को लेकर दिए गए दिशा-निर्देशों का स्वागत करते हुए कहा कि यह परियोजना अहीरवाल के गौरवशाली इतिहास को नई पहचान देगी।
आरती सिंह राव ने कहा कि अहीरवाल की धरती वीरता, राष्ट्रभक्ति और बलिदान के लिए पूरे देश में जानी जाती है। यहां के वीर जवानों ने देश की आजादी और सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए हैं। प्रदेश सरकार उनके सम्मान और इतिहास को सहेजने का कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ हुई बैठक में नसीबपुर में बनने वाले शहीद स्मारक की ड्राफ्टिंग और डिजाइन का विस्तार से अवलोकन किया गया।
बैठक में स्मारक निर्माण कार्य को जल्द शुरू करने को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने स्मारक को आधुनिक और भव्य स्वरूप देने पर जोर दिया।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि करीब 42 कनाल 10 मरला भूमि में बनने वाले इस स्मारक में आधुनिक सुविधाओं के साथ इतिहास और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। परिसर में 500 से 600 लोगों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर, अत्याधुनिक लाइट एंड साउंड शो, छह भव्य गैलरी, ऑडिटोरियम, एडमिन ब्लॉक और विशाल तिरंगा स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्मारक परिसर में ग्रीनरी, स्वच्छता, पार्किंग और तालाब के जीर्णोद्धार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। तालाब के पानी की स्वच्छता बनाए रखने के लिए अलग से एसटीपी की व्यवस्था की जाएगी, जिससे यह स्थल आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।
आरती सिंह राव ने कहा कि नसीबपुर का यह शहीद स्मारक केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि अहीरवाल की आन-बान-शान और देशभक्ति का जीवंत प्रतीक होगा। यह स्मारक युवाओं में राष्ट्रसेवा और देशभक्ति की भावना को मजबूत करेगा तथा पूरे देश के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।
फोटो कैप्शन 05:सीएम के साथ शहीद स्मारक की ड्राफ्टिंग और डिजाइन के विस्तार पर चर्चा करती स्वास्थ्य






विश्व कछुआ दिवस-23 मई
लुप्त होने के कगार पर पहुंच गया है कछुआ
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कनीना की आवाज। दुनिया में जहां 300 प्रजातियां कछुए की पाई जाती है उनमें से 190 लुप्त प्राय है। एक वक्त था जब कछुए को देखकर बच्चे उसका पीछा करते थे, जो लोगों को देखकर अपनी गर्दन को और पैरों का अंदर सिकोड़ लेता था परंतु जब कोई नजर नहीं आता तो चलना शुरू कर देता था।
 कछुए के बारे में विस्तार से राजेंद्र सिंह समाजसेवी एवं जंगली प्राणी विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह बताते हैं कि कछुओं की प्रजातियां दिनों दिन लुप्त पड़ा हो रही हैं। क्योंकि कछुए को कुछ लोगों ने पकड़कर खा लिया वही पानी की कमी होने के कारण कछुए दुर्लभ प्राणी बनते चले गए। यहां तक कि वर्तमान पीढ़ी कछुआ नाम सुनकर चकित हो जाती है।
उन्होंने बताया कि 1990 में अमेरिका के पति-पत्नी टेललेम एवं थामसन कछुआ दिवस की स्थापना की जो कछुए को नष्ट होने से बचाने के प्रयास रहा है। उन्होंने बताया कि ये अजीब प्राणी विशेषकर पानी में मिलते थे परंतु छोटे-छोटे जीवो को खाकर अपना पेट भरते थे। विभिन्न प्रकार की आवाज भी निकालते थे। आगामी कुछ वर्षों में कछुए की अनेक प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच जाएंगी। ये पानी में जीवों का नियंत्रण करते हैं ,अंडे देने वाले प्राणी सागर और बड़े तालाब तक ही सिमट कर रह गए हैं।
राजेंद्र सिंह बताते हैं कि कुछ लोग इनके अंडों को पानी के तट को खोदकर निकाल लेेते हैं वही बड़े-बड़े क्षेत्रों में इनकी तस्करी की जाती है। उनके आवास धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं इसलिए यह जीव खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। यदि समय रहते कछुओं की सुरक्षा नहीं की गई तो आने वाले समय में कछुओं को पुस्तकों में पढऩा पड़ेगा।
रविंद्र कुमार बताते हैं कि कछुए को टेस्टूडाइन वैज्ञानिक नाम से जाना जाता है। उन्होंने बताया कि आज के दिन बच्चे को कछुआ दिखाई दे जाए तो दांतो तले उंगली दबा लेगा। कछुए की चाल पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है। ऐसे में ऐसे जीवों को लुप्त होने से बचाने के प्रयास करने चाहिए, इनके आवास प्रदान करने चाहिए, इनके शिकार पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
फोटो कैप्शन: राजेंद्र सिंह


भेजावास में अव्वल रहे विद्यार्थियों को किया पुरस्कृत
-बीइओ रहे मुख्य अतिथि
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कनीना की आवाज।
पीएमश्री विद्यालय भोजावास में प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को नगद पुरस्कार एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सुरेश यादव, खंड शिक्षा अधिकारी मुख्य अतिथि के रूप में अपस्थित रहे। साथ में नरेश कौशिक, प्राचार्य राजकीय वरिष्ठ मध्यमिक विद्यालय कनीना, बाबूलाल प्राचार्य राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुंदरह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अध्यक्षता प्राचार्य रेनू मेहरा  ने की। इस अवसर पर  खंड में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली 10वीं कक्षा की छात्रा दीया को 11000 नगद पुरस्कृत व स्मृति चिन्ह देखकर सम्मानित किया गया। दीया ने 500 में से 482 अंक लेकर खंड कनीना में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
 कार्यक्रम में 10वीं कक्षा में मेरिट प्राप्त करने वाले 21 विद्यार्थियों तथा 12वीं कक्षा में मेरिट प्राप्त करने वाले 27 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त 10वीं कक्षा में विभिन्न विषयों में 90 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 35 विद्यार्थियों को तथा 12वीं कक्षा के 17 विद्यार्थियों को भी स्मृति चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों ने विद्यार्थियों को बढ़ाई देते हुए उनका उत्साहवर्धन किया । इस अवसर पर डा. विक्रम सिंह व डा. पूखराज ने भी बच्चों को संबोधित किया। प्राचार्य रेणु मेहरा ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर विद्यालय स्टाफ को स्मृति चिन्ह देखकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में पूर्व सरपंच पवन कुमार , एसएमसी सदस्य, चेयरमैन भाग सिंह ,पंचायत सदस्य, अभिभावक गण पीएचसी भोजावास स्टाफ सदस्य व समस्त विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा।
फोटो कैप्शन 01 व 02: अव्वल रहे विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते हुए






माडल संस्कृति स्कूल कनीना में समाजसेवियों के सम्मान में भव्य सम्मान समारोह आयोजित
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कनीना की आवाज।
राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना में विद्यालय परिवार की ओर से उन समाजसेवियों एवं दानदाताओं के सम्मान में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिन्होंने विद्यालय एवं विद्यार्थियों के हित में उल्लेखनीय योगदान देकर शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय प्राचार्य सुनील खुडानिया के मार्गदर्शन में किया गया।
समारोह में सर्वप्रथम विद्यालय के मुख्य द्वार का निर्माण करवाने वाले समाजसेवी  कैलाश चंद का विशेष सम्मान किया गया। उनके द्वारा विद्यालय को भेंट किए गए मुख्य द्वार की अनुमानित लागत लगभग एक लाख है। उनके इस योगदान से विद्यालय की सुंदरता, सुरक्षा एवं गरिमा में अत्यधिक वृद्धि हुई है।
विद्यालय में विद्यार्थियों की सुविधा हेतु वाटर कूलर दान करने वाले खुशपाल जांगड़ा निवासी गागड़वास का भी समारोह में विशेष सम्मान किया गया। उनके द्वारा प्रदान किए गए वाटर कूलर की अनुमानित लागत लगभग 40,000 रुपए है। इसके साथ ही खुशपाल जांगड़ा द्वारा विद्यालय के सभी विद्यार्थियों को प्रसाद भी वितरित किया गया, जिससे पूरे विद्यालय परिसर में हर्ष एवं उत्साह का वातावरण बना रहा।
इसके अतिरिक्त समाजसेवी नवीन यादव द्वारा जनवरी माह में विद्यालय के जरूरतमंद विद्यार्थियों को ब्लेजर वितरित किए गए, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 51,000 रुपए है। विद्यार्थियों ने इस सहयोग के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त किया। यह सहयोग विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद शिक्षा प्राप्त करने हेतु निरंतर प्रयासरत हैं।
कार्यक्रम में अंकुर कनीनवाल द्वारा 11वीं एवं 12वीं विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिए एनडीए तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की महत्वपूर्ण पुस्तकें भेंट की गईं। इन पुस्तकों की अनुमानित लागत लगभग 25,000 रुपए है। उनके इस योगदान से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी तथा उनमें उच्च लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा जागृत होगी।
 प्राचार्य सुनील खुडानिया ने सभी दानदाताओं एवं अतिथियों का विद्यालय परिवार की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के प्रबुद्ध एवं सहयोगी व्यक्तियों के ऐसे प्रेरणादायक कार्य विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक वातावरण तैयार करते हैं।
फोटो कैप्शन 03: समाजसेवियों को पुरस्कृत करते हुए प्राचार्य














राहत: कनीना मंडी में लगी सीजन की पहली मीठे पानी की छबील
-तृप्त हुए राहगीर ठंडा पानी पीकर
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कनीना की आवाज। गर्मी से राहत देने के लिए मीठे ठंडे पानी की छबील लगने लगी हैं। इन दिनों क्षेत्र में भयंकर गर्मी पड़ रही है। सुबह होते ही जैसे जैसे सूर्य आसमान में चढ़ता है वैसे ही गर्मी भी अपना तेवर दिखाने लगती है। इस समय क्षेत्र का तापमान भी 46 डिग्री पार कर चुका है। इसी बीच मंडी में ककराला रोड़ पर इस सीजन की पहली मीठे पानी की छबील लगाई गई। आस पास के दुकानदारों और मंडी वासियों ने मिलकर नारनौल और अटेली की तरफ जाने वाले राहगीरों को मीठा पानी पिला कर पुण्य कमाया। मंडी वासियों ने सुबह 09 बजे से शाम 05 बजे तक राहगीरों को पानी पिलाया। इसी के साथ पशु पक्षियों के लिए भी सकोरे रखे। दुकानदार काबुल सिंह, राजू  और डा. सुरेश कुमार ने बताया कि मानव का सबसे बड़ा पुण्य प्यासे को पानी और भूखे को भोजन देना होता है। यही सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है। इस मौके पर जितेंद्र सचिव, काबुल सिंह ,राजू, कुलदीप, डा. सुरेश , सूबे सिंह इत्यादि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 04: मीठे पानी की छबील लगाते हुए





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