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Monday, November 2, 2020

 दोनों खरीद केंद्रों पर भी करीब 15000 क्विंटल बाजरे की हुई खरीद 

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कनीना। कनीना में दो खरीद केंद्रों पर बाजरे की खरीद जारी है।  सोमवार को जहां गौशाला गौशाला रोड पर डेढ़ सौ किसानों का 4500 क्विंटल बाजरा खरीदा गया। गौशाला रोड पर इस प्रकार 21150 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। इसकी जानकारी देते हुए हैं सतेंद्र यादव ने बताया कि अब तक तीन हजार बैग की लिफ्टिंग ेकी जा चुकी हैं। गौशाला रोड पर कुल लिफ्टिंग 33190 बैग की हो चुकी है वहीं 9110 बैग फड़ों पर पड़े हैं।
उधर कनीना मंडी में 340 किसानों का  10000 क्विंटल बाजरा खरीदा गया। यहां अब तक 5314 किसानों ने 156841 क्विंटल बाजरा बेचा है। सोमवार को 24432 बैग बाजरे  की लिफ्टिंग की गई और कुल 2176481 बैग की लिफ्टिंग की जा चुकी है। अभी भी फड़ों पर 37201 बैग फड़ों पर पड़े हुये हैं। एक ढऱी को मानदंड पूरा न करने पर रिजेक्ट कर दिया गया है। गौशाला रोड पर 14 गांवों के किसान बाजरा बेच रहे हैं। 15 नवंबर तक बाजरा खरीदा जाना है। कनीना में 12700 से अधिक किसानों ने बाजरा बेचना है।

कनीना क्षेत्र में मिले 9 संक्रमित
दादी पोती भी मिले संक्रमित

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कनीना। कनीना क्षेत्र में सोमवार को 9 संक्रमित मिले हैं। स्वास्थ्य कर्मी सुनील ने जानकारी देते हुए बताया कि
ढाणा गांव का 31 वर्षीय एक व्यक्ति संक्रमित मिला है। इस व्यक्ति ने शनिवार को अपना सैंपल जमा करवाया था। जिसकी रिपोर्ट सोमवार को पाजिटिव आ गई। सीहोर गांव की 35 वर्षीय महिला, 7 वर्षीय बच्चा, 60 वर्षीय महिला, 18 वर्षीय लड़की, 17 वर्षीय युवक संक्रमित मिले हैं । इन्होंने गांव में गई मोबाइल टीम को शनिवार को अपना सैंपल दिया था। जिसकी रिपोर्ट सोमवार को पॉजिटिव आ गई। सीहोर गांव में ही 73 वर्षीय महिला, 35 वर्षीय महिला, 21 वर्षीय लड़की संक्रमित मिली हैं। इन सभी ने शुक्रवार को मोबाइल टीम को अपना सैंपल जमा करवाया था। जिसकी रिपोर्ट सोमवार को पॉजिटिव आ गई। एसएमओ डॉक्टर धर्मेंद्र यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि त्योहारों के सीजन में बाहर की मिठाई खाने की बजाय अपने घर में निर्मित मिठाईयां बना कर खाएं। भीड़भाड़ वाले इलाके में ना जाएं। मास्क का प्रयोग करें। शारीरिक दूरी का ध्यान रखें।


सपनों का संसार...........
टिकी है दीयों पर आशा

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कनीना। कनीना कोरोना काल से उभर कर अब कुम्हार समुदाय के लोग दीपावली की आस लगाए बैठे हैं। मोमबत्ती ने दीयों का स्थान क्या लिया इनकी रोटी रोजी खेलती नजर आ रही है। कभी दीयों की मांग अधिक होती थी अब मोमबत्ती की मांग अधिक है। दीया बनाने में जहां एक दिया बनाने में 5 दिन तक लग जाते हैं और भारी मेहनत की जाती है। जिस पर इन लोगों का व्यवसाय टिका हुआ है। यद्यपि यह व्यवसाय मौसमी हो गया है। इस व्यवसाय पर रोटी रोजी कमाना कठिन हो गया है।
दीयो के लिए मिट्टी भी दूर से लानी पड़ती है वह भी खरीदकर लानी पड़ती है। धनौंदा के सतबीर सिंह, लक्ष्मी, पूजा, देवेंद्र आदि ने बताया कि यह कार्य पुरखों से करते आ रहे हैं। विगत दीपावली पर नहीं तो न तो अधिक घड़े और न दीये बिके थे।  उधर कनीना के कुंदन लाल, मनोहरलाल कुंदन सिंह, जगदीश कुमार, अशोक कुमार, हरि सिंह आदि ने बताया बड़ी मेहनत करके दीये बनाते हैं लेकिन मांग नहीं है। माटी दड़ौली तथा नांगल मूंदी आदि से लाते हैं फिर भी मेहनत का परिणाम नहीं आता। करवा चौथ तथादीपावली पर छोटे घड़ी बिकते हैं वही दिए बिकते हैं परंतु लोगों का रुझान घटता ही जा रहा है। उधर
दीये बेचने वाले राजेश कुमार ने बताया कि छोटा एक रुपए प्रति दीया बेचते हैं तथा बड़ा दीपक पांच रुपये का है। इस प्रकार अपनी रोटी रोजी दीये से कमाते हैं। यद्यपि मांग घटने से इनका व्यवसाय घटता जा रहा है। इस समुदाय के लोगों ने बताया कि अब तो दीये पर आश्रित उनकी रोटी रोजी छीनती जा रही है फिर भी इस बार उनका संसार इसी पर टिका है। उन्होंने मांग की है कि कम से कम दीये जरूर प्रयोग करें ताकि उनकी मेहनत का रंग बेहतर आ सके।
फोटो कैप्शन 11: दीये बेचता हुआ राजेश कुमार
12: दीये बनाता हुआ एक जाति विशेष का लोग।

 कालेज खुलेंगे 16 नवंबर से 

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कनीना। वैसे तो कहने में अटपटा लगता है कि कालेज 16 नवंबर से खुलेंगे जबकि स्कूल 2 नवंबर से खुल चुके हैं। अभी तक कालेज में नये विद्यार्थियों के लिए फीस भी भरी  जा रही है और नए स्तर का भी प्रारंभ होने में अभी समय है।
 विस्तृत जानकारी देते हुए विक्रम सिंह प्राचार्य राजकीय महिला कालेज ने बताया कि पहले 2 नवंबर से कालेज खुलने थे किंतु स्थगित कर 16 नवंबर कर दिया गया है। नये आवेदन के लिए 28 अक्टूबर से पहले पोर्टल खुला था, उन्हें फीस भरने का मौका दिया जा रहा है। यदि कहीं सीट खाली है तो आन द स्पॉट एडमिशन मेरिट बनाकर में एडमिशन दिया जा सकता है उधर विद्यालयों में जहां नौवीं से बारहवीं कक्षा शुरू हो गई है। अब अगला 6 से 8 कक्षाएं भविष्य में शुरू की जाएंगी।


फिर लौटने लगा है साइकिलों का जमाना
-प्रदूषण से बचने का बेहतर विकल्प

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कनीना। एक और जहां दीपावली, होली जैसे पर्वों पर प्रदूषण बढ़ता ही चला जाता है जिससे प्रदूषण की समस्या बनती है। विभिन्न प्रकार की आपदाएं आ रही है। उसी स्थिति में यदि साइकिल का प्रचलन फिर से शुरू हो जाए होता है तो न केवल सेहत के लिए अपितु पर्यावरण के लिए बहुत लाभप्रद साबित होगा।  सरकार बार-बार साइकिल चलाने की बात कर रही है वही कनीना क्षेत्र में ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने साइकिल पर अपनी जीवन गुजार दिया है। साइकिल द्वारा  सामान जैसे कुकिंग सिलेंडर ढोने,  थोड़ी दूरी तय करने में, स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए साइकिल बहुत लाभप्रद साबित हो सकती है।
जहां 2 किलोमीटर दूर से आने वाली लड़कियों के लिए भी सरकार की साइकिल प्रदान करती है। साइकिल पर हरिद्वार से 350 किलोमीटर तक लोग कावड़ लेकर आते हैं। साइकिल यात्रा ,साइकिल रेस आदि प्रसिद्ध हैं। कनीना क्षेत्र के राव सतबीर सिंह बोहरा जो साइकिल चलाने में माहिर थे। उनकी शादी में साइकिल मिली थी। लंबी उम्र तक जीवन यापन कर के स्वर्ग सिधार गए हैं लेकिन उन्होंने चुनाव लड़े उस समय उनका चुनाव चिन्ह साइकिल था। कनीना के श्यामलाल पंडित अभी जीवित है तथा बहुत लंबे समय तक साइकिल चलाई है। करीब 40 वर्षों से उन्होंने साइकिल पर अपनी जिंदगी बिताई है। यहां तक कि विभिन्न कार्य भी साइकिल पर ही करते देखे गए। बुजुर्ग होने के कारण साइकिल चलाना छोड़ दिया है।  
सुमेर सिंह 60 साल के है किंतु उन्होंने 1990 में साइकिल चलानी शुरू की थी और आज तक भी साइकिल चला रहे हैं। उनका कहना कि उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है और नहीं लगता कि अभी भी बूढ़े होंगे। वे बहुत खुश हैं। राव मोहर सिंह जो देश सेवा कर के सेवानिवृत्त हो गए हैं। विगत 23 वर्षों से लगातार साइकिल चला रहे हैं। मोहर सिंह ने बताया कि आज भी बिल्कुल स्वास्थ्य और सेना में भी समय मिलने पर साइकिल चलाते थे। आज भी साइकिल चला रहे हैं। ऐसे व्यक्तियों को सरकार द्वारा सम्मानित करने की मांग उठ रही है ताकि साइकिल चलाने का क्रेज बढ़े।
क्या कहते हैं साइकिल विक्रेता-
कनीना में सुरेश कुमार भडफ़ निवासी वर्ष 1969 से साइकिल स्टोर चला रहे हैं। उनका कहना है कि प्रतिदिन औसत पांच साइकिल बिक जाती है। इसका मतलब है कि एक बार फिर से साइकिल की ओर रुझान बढ़ा है। उन्होंने बताया कि 1969 में 60 रुपये से लेकर 120 रुपये तक की साइकिल मिलती थी। बेहतरीन कंपनी की साइकिल 120 रुपये तक की थी।
वर्तमान में एक बार फिर से साइकिल की ओर रुझान दिख रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सात गेयर की साइकिल उपलब्ध है जिसमें तीन आगे तथा सात गेयर पीछे हैं और यह साइकिल 21 स्पीड वाली नाम से जानी जाती है। उन्होंने बताया कि साइकिल 27 हजार रुपये तक की साइकिल उपलब्ध है। भविष्य में मांग बढऩे की उम्मीद है।
फोटो केप्शन 9 व 10: आधुनिक दर्जे की साइकिल दिखाते मिस्त्री सुरेश कुमार साथ में सुमेर सिंह चेयरमैन

राज्य बाल कल्याण परिषद की ओर से आनलाइन माध्यम से करवाई जा रही प्रतियोगिता में
-भाग लेने का किया आह्वान

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कनीना। एसडीम रणबीर सिंह ने जिले के समस्त बच्चों से अपील की है कि हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बच्चों के अंदर छुपी प्रतिभा एवं कला का प्रदर्शन दिखाने के लिए बच्चों का अपना ब्लॉक बस्टर इवेंट बाल महोत्सव करवा रही है। कोविड-19 महामारी के चलते यह इवेंट 10 अक्टूबर से इस वर्ष आनलाइन माध्यम से करवाए जा रहे हैं जो कि 10 नवंबर तक जारी रहेंगे। इसमें बच्चों के लिए 23 प्रकार की विभिन्न प्रतियोगिताएं अलग-अलग ग्रुपों में रखी गई है।
एसडीम रणबीर सिंह ने बच्चों से अपील की है कि वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में चाइल्ड वेलफेयर हरियाणा डाट काम ऑब्लिक बाल महोत्सव पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर अपनी प्रतिभा व कला के माध्यम से अपने सपनों को साकार करें। उन्होंने कहा कि बाल कल्याण परिषद गरीब से गरीब व ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को ऑनलाइन प्रतियोगिता का बड़ा मंच प्रदान किया है इसके माध्यम से बच्चे अपनी कला व प्रतिभा का प्रदर्शन करके अपने सपनों को साकार रूप प्रदान कर सकते हैं तथा अपने अंदर छुपी हुई किसी भी प्रकार की क्षमता को अलग-अलग प्रतियोगिताओं के माध्यम से लोगों तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद का कोविड-19 के कठिन दौर में आनलाइन प्रतियोगिता करवाने व जिला बाल कल्याण परिषद की टीम की भी उनके द्वारा प्रतियोगिताओं की सफलता के लिए की जा रही मेहनत की प्रशंसा की।
फोटो-एसडीम रणबीर सिंह।



करवा चौथ पर्व पर आई खांडसारी के करवों की बहार

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कनीना। बुधवार 4 नवंबर को कनीना क्षेत्र में करवा चौथ का पर्व मनाया जा रहा है। बाजार में खांडसारी के करवों की बहार आ गई है वहीं कपड़ों की दुकानों तथा ब्यूटी पार्लरों पर भीड़ लगने लगी है। इस दिन महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं एवं साज शृंगार करती हैं।
कार्तिक माह की कृष्ण चतुर्थी को सौभाग्यवती महिलाओं का पर्व करवा चौथ मनाया जा रहा है जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में गटक चौथ आदि नामों से जाना जाता है। सर्दी के प्रारंभ में आने वाले इस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत पति, पुत्र की मंगलकामना, धन एवं धान्य के लिए  किया जाता है जिसका समापन चन्द्रदेव को अघ्र्य देकर पूर्ण किया जाता है। दान पुण्य करने की भी परम्परा चली आ रही है।
    यह व्रत विवाहित एवं अविवाहित दोनों के लिए ही फलदायक माना जाता है। अविवाहित महिलाएं अपने सुपति की कामना से तो विवाहित महिलाएं अपने पुत्र, भाई  एवं पति की मंगलकामना के लिए व्रत करती हैं। चांद को देखकर तथा उसे अघ्र्य देकर ही इस व्रत का समापन किया जाता है जिसके पीछे माना जाता है कि महिलाएं चांद जैसी शीतलता एवं चमक अपने इष्टïदेव में देखना चाहती हैं। इस दिन श्रीगणेश की पूजा करने का विशेष विधान है।
क्या खाया जाता है-
 करवा चौथ के दिन खांडसारी के बनाए हुए करवे खाए जाते हैं। इस दिन पूजा के लिए भी करवा खरीदे जाते हैं। करवा नामक औरत की कथा भी सुनी एवं सुनाई जाती है। खांडसारी के बने हुए करवे बाजार में कई दिन पूर्व ही उपलब्ध हो जाते हैं जिन्हें खरीदकर महिलाएं लाती हैं। ये खांडसारी के करवे ही लेने देन में काम आते हैं। महिलाएं अपने से बड़ी महिलाओं को करवे दिए जाते हैं।
क्या कहानी सुनाई जाती है
इस दिन करवा नामक औरत की कहानी सुनाई जाती है जिसमें उस औरत के भाई अपनी बहन की भूख की व्याकुलता देखकर परेशान हो जाते हैं। वे उसे आग जलाकर छलनी में से नकली चंद्रमा का आभास कराते हैं और करवा खाना खाने के लिए तैयार होती है तो अपशकुन होते हैं किंतु दु:ख उस वक्त होता है जब करवा को सके पति की मृत्यु का समाचार मिलता है। आखिरकार वह अपने पति को जीवित करने के लिए घोर तप करती है और पुन: इस व्रत के आने का इंतजार करती है। आखिरकार करवा अपने पति को जीवित कराने में सफल हो जाती है। उसी दिन से करवा खाने और करवा चौथ का पर्व चला आ रहा है।
कब तक चलेगा यह व्रत
कनीना के ज्योतिषाचार्य सुरेंद्र वशिष्ठ का कहना है कि यह व्रत दिनभर चलेगा किंतु शाम करीब 8:23 बजे पर चंद्रमा दिखाई देने लग जाएगा। महिलाएं इसी चंद्रमा को अघ्र्य देकर अपना व्रत पूर्ण कर सकती हैं। दिनभर कहानी सुनने, दान पुण्य करने तथा बड़े बूढ़ों से आशीर्वाद पाने की परंपरा चली आ रही है। खांडसारी के करवे ही दान दिए जाते हैं।  
कौन करता है करवा चौथ व्रत -
एक वक्त था जब केवल महिलाएं ही करवा चौथ का व्रत करती थी। अब तो इसमें पुरुष भी भागीदार बन गए हैं। महिलाएं जहां अपने पति के लिए तो पति अपने पत्नी के लिए लंबी उम्र की कामना करते हैं। अविवाहित लड़कियां भी इस व्रत को करने लगी हैं। पले केवल विवाहित महिलाएं ही व्रत करती थी। कनीना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पूर्व में कार्यरत मुकेश कुमार हमेशा हर वर्ष अपनी पत्नी के लिए बात करता है। धीरे धीरे ऐसे में बदलाव आ गया है और पुरुष की भागीदारी बढ़ती जा रही है
कुछ महिलाएं तो लंबे समय से करवा चौथ करती आ रही है। कोरोना ने सब कुछ बदल कर रख दिया जिसके बाद फिर से उम्मीद जगी है बाजार सजने लगे हैं और खासकर करवा चौथ पर बाजारों में बिक्री की ज्यादा उम्मीद है। कोरोना अनलॉक के चलते जो महिला इक_े होकर कहानी सुनती थी वे अब कहानियां भी दूर दूर रहकर सुनेंगी।
फोटो कैप्शन 8: खांडसारी के करवे बेचता दुकानदार।


पशु प्रदर्शनी में 3 पशुओं को ले गए ,तीनों प्रथम स्थान पर रहे, चैंपियन का खिताब मिला 

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कनीना। कनीना खंड के गांव गुढ़ा निवासी नीतू यादव ने एक बार सिद्ध कर दिया कि उनके पशु किसी भी प्रकार से किसी क्षेत्र में कम नहीं है। ताजपुर- अटेली में लगी भारतीय पशु प्रदर्शनी में उनके तीन पशु पहुंचे और तीनों ही प्रथम स्थान हासिल करने के पश्चात चैंपियनशिप का खिताब जीत कर आए हैं।
 नीतू यादव गुढ़ा निवासी ने बताया कि दो दिवसीय पशु प्रदर्शनी ताजपुर में चली थी। वे तीन पशुओं को लेकर मेले में पहुंची,प्रदर्शनी भाग लिया। उन्होंने बताया कि एचएफ(होलस्टीन फ्रेजियन) श्रेणी की दुधारू गायों में उनकी गाय ने प्रथम स्थान प्राप्त किया वहीं एचएफ श्रेणी में शुष्क गायों की श्रेणी में भी उनकी गाय प्रथम स्थान पर री। वहींं दो दांत की बछड़ी ने भी प्रथम स्थान प्राप्त किया और 5100 रुपये का नकद पुरस्कार जीता है। सीताराम यादव अटेली विधायक ने नीतू यादव को खिताब से सम्मनित किया। इस मौके पर नगर पालिका कनीना के प्रधान सतीश जेलदार भी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि नीतू यादव ने अब तक दर्जनों पुरस्कार पशु क्षेत्र में प्राप्त किए हैं, न केवल अधिक दूध उत्पादन में इनका नाम है, अपितु गोबर पर आधारित कंपोस्ट खाद में भी इनका नाम है। राष्ट्रपति से लेकर के विधायक तक इन्हें सम्मानित किया जा चुका है। इनकी डेयरी गुढा गांव के पास स्थित है जिसमें प्रतिदिन हजारों लीटर दूध डेरियों तक जाता है, पूरा ही परिवार, इस कार्य में अहम भूमिका निभा रहा है।
  इस पशु प्रदर्शनी में चैंपियनशिप का खिताब मिलने पर नीतू यादव के ससुर एवं पूर्व मुख्य अध्यापक राव भगवान सिंह ने खुशी जताई, यद्यपि इनाम की राशि कम थी लेकिन नाम दूर-दूर तक हुआ है। उल्लेखनीय है कि गांव गुढ़ा निवासी नीतू यादव(38)पत्नी पवनवीर ने अपनी मेहनत के मुकाम पर डेयरी के क्षेत्र में  राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविद से एक लाख रुपये का पुरस्कार मिल चुका है अपितु आधा दर्जन अन्य पुरस्कार पाकर सिद्ध कर दिया है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। अगस्त 2019 में भी उनके पशुओं ने विभिन्न स्थान हासिल किए और उन्हें सम्मानित किया गया।
कनीना खंड के गांव गुढ़ा निवासी नीतू सिंह यादव को गन्नौर (सोनीपत) में फरवरी-2019 में एग्री लीडरशिप सम्मिट में किसान रतन पुरस्कार से राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविद ने डेयरी एवं जैविक खाद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए एक लाख रुपये का पुरस्कार मिला था। इससे पहले भी उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
गांव गुढ़ा की नीतू यादव व उनका परिवार न केवल गायों की सेवा करके अपना एवं गायों का भरण पोषण तो कर ही रहा है साथ में एक दर्जन व्यक्तियों को रोजगार भी दिया है। अपना रोजगार छह गायों से शुरू किया किंतु आज 300 गाएं हैं। वे दूसरों के लिए उदाहरण बन गई हैं और बहुत से जन उनके पदचिह्नों पर चल रहे हैं। उन्हें 2018 का सर्वश्रेष्ठ महिला डेयरी पुरस्कार मिला था। उन्हें यह पुरस्कार इंडियन डेयरी एसोसिएशन(उत्तरी क्षेत्र) द्वारा उन्हें श्रेष्ठ डेयरी महिला बतौर कोच्चि में दिया था।  
 मेघनवास जिला महेंद्रगढ़ से निकास तथा गुढ़ा गांव में रह रही नीतू यादव एवं उनके परिवार जिसमें राव भगवान सिंह, संतरा देवी,जयपाल एवं बबली बीते 2008 में छह गायों से गुढ़ा में डेयरी का काम शुरू किया। उस वक्त पंजाब से एक गाय भी मंगवाई गई थी। आज उनके पास 300 गाएं हैं तथा अन्य पशु शामिल हैं। जिनका दूध दोहने के लिए कुछ अत्याधुनिक मशीन भी मंगवा रखी हैं। करीब दो घंटों में सभी गायों का दूध दोह लेते हैं। प्रतिदिन कई डेयरियों में 2600 लीटर प्रतिदिन दूध भेज रहे हैं। वर्तमान में ड्राई डे चलने से दूध कम है वरना 5000 लीटर तक दूध मिलता है।
फोटो कैप्शन 7: सीताराम विधायक, नीतू यादव को खिताब देते हुए
फोटो कैप्शन 8: गाय को चैंपियनशिप की उपाधि गाय को देते हुए सरपंच शमशेर सिंह नीतू यादव।




स्कूल खुले, चेहरे खिले

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कनीना। सरकार के आदेश अनुसार कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल 2 नवंबर सोमवार से खुल गये हैं। यद्यपि विद्यार्थियों की संख्या सामान्य रही किंतु विद्यार्थियों ने स्कूल में शकुन महसूस किया  वहीं शिक्षकों ने भी पहली बार शकुन का आभास हुआ। लंबे समय से कोरोना काल तत्पश्चात अनलोक के पश्चात स्कूल बंद रहने के बाद स्कूल खोलने का यह निर्णय सरकार ने लिया है। इसके चलते सभी स्कूलों में जहां शारीरिक दूरी बनाते हुए, थर्मल स्कैनिंग करने के पश्चात तथा मुंह पर मास्क लगाने के बाद कक्षाओं में बैठने की अनुमति दी गई। स्कूलों में विद्यार्थियों को करीब 3 घंटे ही चलाया  गया जिसका उन्होंने पालन किया।
शिक्षिका लक्ष्मी यादव, पीटीआई संजय कुमार, महिपाल सिंह आदि ने बताया कि स्कूलों में विद्यार्थियों के आने पर सभी नियमों का पालन करने के बाद ही विद्यालय में प्रवेश कराया गया। अध्यापकों ने खुशी जताई कि सरकार ने जो फैसला लिया है वह बेहतर है ताकि बेटी की पढ़ाई प्रभावित न हो। उधर प्राचार्य कृष्ण कुमार ने बताया कि सरकारी आदेशों का दृढ़ता से पालन किया जा रहा है। जब तक नियमों का पालन नहीं करेंगे विद्यार्थियों को स्कूल में अंदर नहीं घुसने दिया जाता है। शिक्षक पढ़ाकर प्रसन्नचित नजर आए।
शिक्षकों का कहना था कि लंबे समय से इंतजार कर रहे थे कि विद्यार्थी उनके पास पढऩे के लिए आए। आनलाइन पढ़ते-पढ़ते पढ़ाते कुछ परेशानी की नजर आने परेशानी महसूस करने लग गए थे। विद्यार्थी भी घर बैठे बैठे थक गए थे, आखिरकार सरकार ने उनको स्कूल में आने का आदेश देकर सराहनीय कदम उठाया है। विद्यार्थी भी अपनी कक्षा में जाकर प्रसन्नचित नजर आए।
 फोटो कैप्शन 9: विद्यार्थियों का थर्मल स्कैनिंग करते शिक्षक।




































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