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Saturday, January 2, 2021

 

 सुसज्जित लैब हो ग्रामीण क्षेत्रों में
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कनीना। ग्रामीण क्षेत्रों में मिडिल एवं उच्च विद्यालयों को सुसज्जित लैबयुक्त करने की मांग बढ़ रही है। विज्ञान के युग में विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान की प्रयोगशालाओं पर बल देना जरूरी बताया जा रहा है। अभी तक मिडिल स्कूलों में विज्ञान लैब पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
  हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेश सचिव धर्मपाल शर्मा ने बताया कि सरकार विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा दे रही है किंतु कई राजकीय वरिष्ठ, राजकीय उच्च एवं माध्यमिक स्कूलों में विज्ञान तक के पद समाप्त कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कनीना के सिहोर, भडफ़, कोटिया, कनीना मंडी आदि दर्जनों स्कूलों से विज्ञान का पद भी स्वीकृत नहीं है जिसके चलते विज्ञान शिक्षण बेहतर ढंग से नहीं चल पा रहा है। यही नहीं अपितु ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान की प्रयोगशाला का अभाव होने से भी परेशानी बढ़ रही है। बेरोजगार विज्ञान शिक्षकों की कोई कमी नहीं है।
  उधर विज्ञान शिक्षण को प्रयोगशाला के माध्यम से पढ़ाने की जरूरत होती है किंतु अधिकांश राजकीय माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशाला तक नहीं है। महज विज्ञान किट से काम चलाया जाता है। ऐसे में विद्यार्थी बगैर विज्ञान के उपकरणों से विज्ञान को बेहतर ढंग से नहीं सीख पा सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाएं जरूर स्थापित की जाए ताकि विज्ञान शिक्षण में रुचि बढ़ सके।
  उन्होंने कहा कि विज्ञान शिक्षकों के पद को तकनीकी पद घोषित किया जाए। अभी तक विज्ञान की पुस्तक का नाम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी रख दिया है किंतु विज्ञान शिक्षकों के पद को तकनीकी घोषित करने की मांग को दफन किया जा रहा है। उन्हें प्रायोगिक भत्ता भी दिया जाए।

 पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा
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कनीना। जिला के सैनिक बाहुल्य गांव  पाथेड़ा में सहित रविपाल सिंह की 16वीं पुण्यतिथि प्रजा भलाई संगठन सुप्रीमो समाजसेवी ठाकुर अतरलाल के मुख्य अतिथित्व में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। अध्यक्षता प्रमुख शिक्षाविद प्रोफेसर डा. प्रवीण यादव ने की।
 श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में ग्रामवासियों तथा आसपास के गांवों के मौजीजान ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प चक्र तथा माल्यापर्ण कर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य अतिथि अतरलाल ने शहीद की विरांगना कुमकुम, माता ओमवती तथा गांव के पूर्व सैनिकों को शॉल ओढ़ा कर तथा अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने जाबांज शहीद रविपाल की शहादत को याद करते हुए कहा की 2005-2006 में उनकी 26 राजपूत पलाटून ने मणिपुर में आतंकवादियों के सफाए के लिए आपरेशन हिफाजत चलाया हुआ था। जिसमें आतंकवादियों से लोहा लेते हुए जांबाज वीर सैनिक रविपाल सिंह 2 जनवरी 2006 को शहीद हो गए। उन्होंने कहा कि शहीदों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कत्र्तव्य है। प्रोफेसर डा. प्रवीण कुमार यादव ने शहीदों की कुर्बानी से सबक लेकर देश की एकता व अखंडता के लिए काम करने की अपील की है। जिला पार्षद सतपाल सिंह, जिला वेद प्रचार मंडल के प्रधान इंद्रपाल शर्मा, कप्तान हरद्वारीलाल सिंह व पवन तंवर ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर पूर्व सैनिक संगठन के सदस्य कप्तान हरद्वारी लाल, सुखदेव सिंह, रामबीर सिंह, रामसिंह, औमप्रकाश सिंह, प्रताप सिंह, मलखान सिंह, मामन सिंह, करतार, प्रेम सिंह, इन्द्र सिंह पूर्ण सिंह, गनीराम, कृश्णपाल, वेदव्यास, इन्द्रजीत, रामौतार सिंह, बलबीर सिंह, बहादुर सिंह, संजय सिंह, बाबूलाल, सुरेन्द्र सिंह, पूर्व सरपंच दलीप सिंह, जिला करणी सेना के प्रधान जर्मन सिंह, देवेन्द्र सिंह आदि मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 8: श्रद्धांजलि सभा में बोलते हुये डा प्रवीण यादव।

 किसान जय सिंहपुर खेड़ा रवाना हुए
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कनीना। अनिल यादव नेता के नेतृत्व में किसान शुक्रवार की रात ट्रैक्टर ट्रालियों में बैठा कर जयसिंहपुर खेड़ा रवाना होने हुये। उन्होंने सरकार से कृषि के लिए बनाए तीनों काले कानूनों को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि  किसान परेशान है। उन्होंने खाने पीने का प्रबंध करके रवानगी ली।


प्याज गिरी औंधे मुंह, 30 रुपये किलो पहुंची
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 कनीना। क्षेत्र में जो प्याज 90 रुपये किलो तक बिक रही थी वह औंधे मुंह गिर गई है। अब 30 रुपये किलो के भाव पर पहुंच गई है। गांवों में भी प्याज ठेलियों पर बेची जा रही हैं।
लंबे समय से प्याज और टमाटर में होड़ चली आ रही है। कभी टमाटर सस्ता तो प्याज महंगी हुई। अब टमाटर और प्याज बराबर भाव पर चल रहे हैं।
 अचानक प्याज के भाव कम होने के पीछे प्याज उगाने वाले गए, महाबीर करीरा, गजराज मोड़ी, सब्जी विक्रेता सुरेश कुमार एवं योगेश कुमार ने बताया कि प्याज के भाव बढऩे से खरीददार कम हो गए थे किंतु नासिक एवं सीकर में प्याज को जल्दी उखाड़ दिया और प्याज आयात होने से प्याज के भाव अचानक गिर गए।
यहां तक कि हरी प्याज भी सूखी प्याज के रास्ते पर चली और वह भी 80 रुपये किलो तक बिकी। किंतु अब टमाटर महंगा हो गया है। माना जा रहा है आने वाले समय में प्याज और भी सस्ती होगी।
प्याज सस्ती होने से जहां गली-गली में आप लोग प्याज बेचते नजर आ रहे किंतु खरीददार नहीं मिल रहे वही दुकानदार भी अधिक प्याज नहीं रख रहे हैं क्योंकि प्याज दिनोंदिन सस्ती हो रही है।  उपभोक्ता भी मान रहे हैं कि प्याज और सस्ती होगी वही दुकानदार योगेश, दिनेश, धर्मेंद्र आदि ने बताया कि प्याज के भाव लगातार घट बढ़ रहे हैं।
 ग्राहक भी अब बहुत कम प्याज खरीद रहे हैं उनका भी कहना है कि प्याज के भाव और घटेंगे। गृहणि सुनीता, शकुंतला, मनीता आदि ने बताया कि प्याज महंगे दामों पर पहुंच गई थी किंतु अब सस्ती हो रही है। आने वाले समय में और भी सस्ती होने की संभावना है। अभी तक दाल एवं सब्जी का तड़का लगाते समय प्याज गायब हो गई थी। अब फिर से प्याज के लौट आने से तड़के में प्याज दिखाई देगी।
 फोटो कैप्शन 9: प्याज की फोटो।

ग्रामीण क्षेत्रों से लुप्त हो रही है भेली
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 कनीना। एक जमाने में विवाह शादी विभिन्न उत्सव और विशेषकर नए वर्ष पर गुड़ की भेली देने का रिवाज था किंतु अब दुकानों से भेलियां गायब है। वैसे तो बुजुर्ग कहते हैं गुड़ की भेली और गांव की अभेली दोनों ही ग्रामीण क्षेत्रों से गायब होती जा रही हैं।
 वास्तव में से गुड़ से बना हुआ चक्का भेली कहलाता था और यह सेर में मापी जाती थी। आजकल जहां तोल के लिए किलोग्राम प्रयोग किया जाता है किसी जमाने में सेर और छटांक प्रयोग करते थे। 16 छटांक का एक सेर बनता था और एक सेर में करीब 900 ग्राम वजन होता था। आज भी पुराने घरों में सेर का बट्टा देखने को मिल सकता है। से का स्थान किलोग्राम ने ले लिया किंतु अढ़ाई सेर या पांच सेर की गुड़ की भेली दुकानों पर मिलती थी। जहां विवाह शादियों में लड़का आदि होने पर गुड़ की भेली दी जाती थी वहीं 1 जनवरी से 14 जनवरी तक तो गुड़ की भेलियों की इस कदर मांग होती थी की दुकानों पर गुड़ ही गुड़ नजर आता था।
बुजुर्ग राजेंद्र सिंह, संतरा, विमला, कमला का कहना है कि जहां प्रसाद के रूप में शक्कर तत्पश्चात बताशे उसके बाद बूंदी प्रयोग में लाई जाती हैं इसी प्रकार पुराने वक्त में गुड़ ही सबसे बड़ी मिठाई होती थी। खुशी के अवसर पर गुड़ का लेनदेन होता था और गुड़ की 2.5 या 5 किलो खुशी खुशी में दिया जाता था जो धीरे धीरे बंद हो गई।
और अब तो गुड़ की भेली दिखाई नहीं पड़ती। बुजुर्ग बताते हैं कि पहले किसी भी उत्सव पर चूरमा, खीर, दाल आदि बनाई जाती थी और वहीं परंपरा आज भी चली आ रही है। 14 जनवरी मकर सक्रांति के दिन जा दाल व चूरमा आज भी चाव से खाया जाता है।
नए साल पर प्रथम जनवरी से कभी गुड लेकर के माता-पिता अपनी विवाहित पुूत्री के ससुराल  या भाई अपनी विवाहित बहन के लिए गुड़ की भेली देकर आता था और साथ में घी भी देकर आता था ताकि मकर सक्रांति पर चूरमा और दाल बनाई जा सके। इसे त्योहारी नाम से जाना जाता था। अब ना तो त्योहारी बची है और ना गुड़ की भेली का लेनदेन होता है।
आज गुड़ की भेली गायब हैं। दुकानदार कृष्ण कुमार, रोहित कुमार, योगेश कुमार आदि ने बताया कभी मकर संक्रांति पर गुड़ की भेली की मांग होती थी लेकिन अब गुड़ की भेली के खरीददार नहीं रहे। इसलिए प्रचलन घट गया है। कनीना की 20 हजार आबादी की करीब 800 दुकानों पर भटका जाए तो महज एक या दो दुकानों पर भेली मिल सकती हैं।
फोटो कैप्शन 01: गुड़ की भेली। दैनिक जागरण


बार रूम के आस-पास पड़ी गंदगी को सफाई करवाने के लिए एसडीएम से मिले अधिवक्ता
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कनीना। कनीना बार एसोसिएशन के प्रधान कुलदीप रामबास के नेतृत्व में कुछ अधिवक्ता शुक्रवार को एसडीएम विश्राम कुमार मीणा से मिले। बार प्रधान कुलदीप रामबास ने जानकारी देते हुए बताया कि बार रूम के आसपास बहुत अधिक मात्रा में गंदगी हो रखी है। वहीं बार रूम के पीछे की तरफ टायलेट बने हुए हैं।  जिनमें बहुत अधिक मात्रा में गंदगी फैली हुई है। वहीं बार रूम के पास जमीन पर एक बिजली का ट्रांसफार्मर रखा हुआ है। जिसे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इन सभी समस्याओं को लेकर शुक्रवार को एसडीएम विश्राम कुमार मीणा से अधिवक्ताओं ने मुलाकात की। एसडीएम ने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि जल्दी ही इन सभी समस्याओं पर संज्ञान लेते हुए समाधान किया जाएगा।
वही बार प्रधान कुलदीप रामबास ने बताया कि 4 जनवरी को जब कोर्ट ओपन होगा तो बार एसोसिएशन के पास एक यज्ञ के साथ नए साल की शुरुआत की जाएगी ।
फोटो कैप्शन 02: एसडीएम विश्राम कुमार मीणा से समस्याओं के बारे में जानकारी देते हुए अधिवक्ता गण

बाघोत में 3 जनवरी को होगी कुश्ती प्रतियोगिता
कनीना। बाघोत में 3 जनवरी को सिनीपट कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसमें लड़के-लड़कियों के वर्ग में पहलवान भाग लेंगे। कोच जय भगवान ने जानकारी देते हुए बताया कि 3 जनवरी को सुबह 8 बजे पहलवानों का वजन किया जाएगा। सभी पहलवानों को दो पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र एवं मेडिकल सर्टिफिकेट लेकर और कुश्ती की किट में आना अनिवार्य है। लड़कों के वर्ग में 57, 61, 65, 70, 74, 79, 86, 92, 97, 155 किलो भारवर्ग में पहलवान भाग लेंगे। वहीं लड़कियों के वर्ग में 50, 53, 55, 59, 62, 65, 68, 72 व 76 किलो भारवर्ग में पहलवान भाग लेंगी।


नव वर्ष पर भंडारा लगाकर 500 लोगों को खिलाया खाना
-मोलडऩाथ आश्रम पर हुआ हवन
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कनीना। नये वर्ष 2021 के आगमन पर जगह जगह विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये। भोजन खिलाया, हवन आयोजित किये तथा गले मिलते नये साल की मुबारकवाद देते देखे गये।
कनीना के कुछ युवाओं ने कनीना महेंद्रगढ़ मेन रोड पर नए वर्ष के उपलक्ष्य में राहगीरों के लिए भंडारा लगाकर 500 लोगों को खाना खिलाया गया। भंडारे में विशेष रूप से झुग्गी झोपडिय़ों में रहने वाले लोगों के साथ राहगीर शामिल हुए। जितेंद्र यादव ने राहगीरों को भंडारे का प्रसाद वितरित करते कहा कि मानवता की नए वर्ष का शुभारंभ अच्छे दिन और लोगों की सेवा करने के साथ-साथ किया गया है। यह भंडारा सेवा को समर्पित हैं। प्रेम स्वामी सीहोर ने कहा कि  बुजुर्गों के जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है और जीवन में धर्म के रास्ते पर चलकर दूसरों की सेवा करनी चाहिए। इस अवसर पर सुभाष, सौरभ जांगड़ा, जितेंद्र कुमार, विनोद कुमार, बलजीत, सतपाल, प्रेम, विकास, कादर, विक्रम, कर्ण सिंह, ढोलिया सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
 वहीं दूसरी तरफ नए वर्ष के शुभारंभ बाबा मोलडऩ नाथ आश्रम में हवन यज्ञ करके किया गया। यह हवन साईं मंदिर पुजारी प्रवेश पंडित
ने पूर्ण करवाया। इस मौके पर विभिन्न उपस्थित लोगों ने पूर्ण आहुति में भाग लिया।
इस अवसर पर रमेश दादा, शनि मंदिर पुजारी रामकिशन,दिनेश कुमार, सुरेश गोयल, दीपक नितेश आदि मौजूद थे। इस मौके पर हेमंत मित्तल यजमान बने थे। प्रवेश पंडित ने हवन की महिमा बताई।
फोटो कैप्शन 03: बाबा मोलडऩाथ आश्रम पर हवन कराते प्रवेश पंडित।
      04: महेंद्रगढ़ रोड़ कनीना में लोगों को नव वर्ष पर खाना खिलाते युवा।

रुकमणी देवी स्मृति में आयोजित हुआ भंडारा
-यदुवंशी शिक्षा निकेतन के चेयरमैन एवं पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह थे मुख्य अतिथि

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कनीना। कनीना उपमंडल के गांव करीरा में शुक्रवार सती माता रुकमणी देवी की स्मृति में भंडारे का आयोजन किया गया। लगभग 300 साल पहले रुकमणी देवी  अपने पति के साथ चिता में सती हो गई थी। विगत छह वर्षों से ग्राम करीरा में नियमित रूप से भंडारे का आयोजन किया जा रहा है।
 आयोजित भंडारे में मुख्य अतिथि के बतौर पर  नांगल चौधरी के पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने शिरकत की। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने नव वर्ष की बधाई दी। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने इस मौके पर अटेली विधानसभा क्षेत्र से अगला चुनाव लडऩे का ऐलान करते हुए आमजन से अपना पूर्ण सहयोग देने की अपील भी की। राव बहादुर सिंह ने कहा कि यदि अटेली क्षेत्र की जनता ने उनका साथ दिया तो वह समूचे अटेली क्षेत्र में विकास की बयार ला देंगे। उन्होंने कहा की भाजपा सरकार चाहे वह देश की हो या प्रदेश की नकारा है किसान विरोधी है। उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता कड़कड़ाती ठंड में सड़कों पर है और सरकार के वजीर अपने ऐसी महलों में आराम फरमा रहे हैं। जिला परिषद के पूर्व  पार्षद विक्रम यादव  ने भी  ग्रामीणों से  राव बहादुर सिंह का  तन मन धन से साथ देने की अपील की । वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने सती माता मंदिर प्रबंधन समिति को अपने निजी कोष से 51,000 की राशि भेंट  की। पूर्व विधायक के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका फूल मालाओं से स्वागत किया। इस अवसर पर पंडित केदारनाथ, जगराम शर्मा, अशोक शर्मा, कैलाश शर्मा, बलवंत सिंह, राजेश सरपंच, शिवलाल, उदमी राम, मातादीन यादव आदि सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 05 व 06: पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह भंडारे में करीरा में भाग लेते हुए।




 क्षेत्र में हुई 2 एमएम बूंदाबांदी
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 कनीना। कनीना क्षेत्र में 2 दिनों से लगातार पाला पडऩे के बाद शुक्रवार की रात से रुक-रुक कर बूंदाबांदी हो रही है। दिनभर आकाश में बादल छाए रहे जिसके चलते शनिवार को पाला नहीं जमा लेकिन मौसम फसल अनुकूल हो गया है। किसानों के माथे की चिंता अब गायब हो गई है, फसल पर आ गई है। दूर-दराज तक पीली पीली सरसों नजर आ रही है।
कनीना क्षेत्र में जहां करीब 31,000 हेक्टेयर पर विभिन्न फसलें उगाई गई है। किसान बारिश का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। मौसम विभाग आगामी दिनों में बूंदाबांदी की संभावना जता रहे हैं। उधर किसान बूंदाबांदी से प्रसन्न है क्योंकि लगातार खेतों में पानी देकर पैदावार बढ़ाने का प्रयास में बूंदाबांदी सहायक होगी और खेतों में पानी नहीं देना पड़ेगा।
 किसान दिनेश कुमार, राजेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह देशराज, महेश कुमार आदि ने बताया कि रबी की फसल के लिए बारिश यदा-कदा ही होती है। अक्सर नलकूपों से रबी पैदावार ली जाती है। एक बार बूंदाबांदी पहले भी हुई थी और दूसरी बार यह बूंदाबांदी हुई है जिससे फसलों पर आब आ गई है। अब तक पाला पडऩे से फसलों को नुकसान होने का जो अंदेशा बना हुआ था अब समाप्त हो गया है। शनिवार को शाम तक मौसम नहीं खुला था, सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। किसानों का कहना है कि इस प्रकार का मौसम रहे तो आगामी तो पैदावार बढ़ जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों के किसान दिनेश कुमार, सूरत सिंह, महेश कुमार आदि ने बताया कि गांव में बिजली आपूर्ति कम होने से फसल में पानी देने की जरूरत समझी जा रही थी जो बूंदाबांदी ने पूरी कर दी है। एक और जहां कनीना खंड के
दर्जनों किसानों ने सब्जी और फल के पौधे उगा रखे हैं जिनके लिए पाला नुकसान पहुंचा रहा था। अब उस पाले से नुकसान होने की संभावना क्षीण हो गई है। कृषि विभाग अधिकारी डा देवराज ने बताया कि यह बूंदाबांदी नहीं बल्कि चांदी बरस रही है। यह फसल के लिए बहुत उत्तम होती है। अब तक जो संभावना पाले से नुकसान की जताई जा रही थी वह समाप्त हो गई है। किसानों को अच्छी पैदावार मिलने की उम्मीद है।
 फोटो कैप्शन 10: बारिश के बाद दूर-दराज तक नजर आती पीली सरसों फसल।











स्कूलों में छापामारी
-छोटे विद्यार्थियों को स्कूल बुलाना गलत
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 कनीना। कड़ाके की ठंड व शीतलहर में शिक्षक और विद्यार्थी जहां स्कूलों में जा रहे हैं किंतु कुछ स्कूलों में छोटी कक्षाओं विशेषर एक से आठ को बुलाने की सूचना मिलने पर पूरा प्रशासन सख्ती से पेश आ रहा है। निजी स्कूलों पर छापे मारे जा रहे हैं तथा कार्रवाई के अंदेशा बना हुआ है। ऐसे में निजी स्कूल अपने स्कूलों में छोटे बच्चों की कक्षाएं नहीं लगा रहे हैं।      उल्लेखनीय है कि सरकारी स्कूलों में लगातार शिक्षक स्कूलों में जा रहे हैं। कोरोना काल में भी शिक्षकों को स्कूल में जाना पड़ा है। कड़ाके की ठंड में भी नौवीं से बारहवीं तक कक्षा के विद्यार्थी कम संख्या में स्कूल पहुंच रहे हैं किंतु शिक्षकों का पहुंचना बहुत जरूरी है। इस बार शीतकालीन अवकाश होने से शिक्षकों को पूरी ठंड , बारिश पाला आदि कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है।
अभिभावक कमल, दिनेश, महेश, सुरेश आदि ने बताया कि कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी स्कूलों में जा रहे हैं तो छोटी कक्षाएं भी बुला ली जाए तो शिक्षक बोर नहीं होंगे।  उधर शिक्षक भी दबी जुबान से कह रहे हैं कि जब कक्षा 1 से 8 तक की कक्षाएं नहीं बुलाई जा रही तो शिक्षकों को भी न बुलाया जाए।
 दूसरी और मिली जानकारी अनुसार विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या आधी से भी कम आ रही है जिसके चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई खराब हो रही है वहीं छोटे विद्यार्थी आनलाइन शिक्षा पा रहे हैं। आश्चर्य है कि बड़े विद्यार्थी तो आनलाइन शिक्षा पाने में सक्षम है किंतु उन्हें तो स्कूलों में बुलाया जा रहा है किंतु छोटे बच्चे जो मोबाइल से दूर रखे जाने चाहिए उनको अब मोबाइल पकडऩा पड़ रहा है। इससे विद्यार्थियों की आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है पर मजबूरी वश अभिभावक भी उन्हें मोबाइल दे रहे हैं। अभिभावक मोहन, देवेंद्र, सुरेंद्र आदि ने बताया कि उनकी मजबूरी है कि वे अपने बच्चों को मोबाइल दे रहे हैं वरना मोबाइल से बच्चों के शरीर पर घातक प्रभाव पड़ रहा है।

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