विश्व कछुआ दिवस-23 मई
लुप्त होने के कगार पर पहुंच गया है कछुआ
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कनीना की आवाज। कभी जोहड़ ,तालाब तथा पानी के स्रोतों से कछुआ आसानी से दिखाई देता था किंतु अब लुप्तप्राय है। दुनिया में जहां 300 प्रजातियां कछुए की पाई जाती है उनमें से 190 लुप्त प्राय है। एक वक्त था जब कछुए को देखकर बच्चे उसका पीछा करते थे, जो लोगों को देखकर अपनी गर्दन को और पैरों का अंदर सिकोड़ लेता था परंतु जब कोई नजर नहीं आता तो चलना शुरू कर देता था।
कछुए के बारे में विस्तार से प्राणी विशेषज्ञ रविंद्र कुमार बताते हैं कि कछुओं की प्रजातियां दिनों दिन लुप्त पड़ा हो रही हैं। क्योंकि कछुए को कुछ लोगों ने पकड़कर खा लिया वही पानी की कमी होने के कारण कछुए दुर्लभ प्राणी बनते चले गए। यहां तक कि वर्तमान पीढ़ी कछुआ नाम सुनकर चकित हो जाती है। 1990 में अमेरिका के पति-पत्नी टेललेम एवं थामसन कछुआ दिवस की स्थापना की जो कछुए को नष्ट होने से बचाने के प्रयास रहा है। उन्होंने बताया कि ये अजीब प्राणी विशेषकर पानी में मिलते थे परंतु छोटे-छोटे जीवो को खाकर अपना पेट भरते थे। विभिन्न प्रकार की आवाज भी निकालते थे। आगामी कुछ वर्षों में कछुए की अनेक प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच जाएंगी। ये पानी में जीवों का नियंत्रण करते हैं ,अंडे देने वाले प्राणी सागर और बड़े तालाब तक ही सिमट कर रह गए हैं।
रविंद्र कुमार बताते हैं कि कुछ लोग इनके अंडों को पानी के तट को खोदकर निकाल लेेते हैं वही बड़े-बड़े क्षेत्रों में इनकी तस्करी की जाती है। उनके आवास धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं इसलिए यह जीव खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। यदि समय रहते कछुओं की सुरक्षा नहीं की गई तो आने वाले समय में कछुओं को पुस्तकों में पढऩा पड़ेगा।
रविंद्र कुमार बताते हैं कि कछुए को टेस्टूडाइन वैज्ञानिक नाम से जाना जाता है। उन्होंने बताया कि आज के दिन बच्चे को कछुआ दिखाई दे जाए तो दांतो तले उंगली दबा लेगा। कछुए की चाल पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है। ऐसे में ऐसे जीवों को लुप्त होने से बचाने के प्रयास करने चाहिए, इनके आवास प्रदान करने चाहिए, इनके शिकार पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
गर्मियों का होता है विशेष खानपान
-सेहत को बरकरार रखने के लिए ग्रामीण लोग है अग्रणी
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कनीना की आवाज। सेहत के दृष्टिगत विशेषकर गर्मियों में खानपान का ग्रामीण क्षेत्र के लोग विशेष ध्यान रखते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं कम होती है किंतु सेहत के प्रति उनका रवैया बेहतरीन देखने को मिलता है। गर्मियों के दिनों में जहां ठोस आहार कम काम में लिए लेते हैं वही तरल आहार अधिक से अधिक प्रयोग किया जाता है। गर्मियों के दिनों में रोटी के रूप में मेसी रोटी खाई जाती है। चना,गेहूं या जो आदि की बनी होती है। ऐसी रोटियां ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी से प्रयोग करते हैं अपितु जब चने की पैदावार अधिक होती थी चने की रोटी खाते थे जो सेहत के लिए बहुत जरूरी है। यहां तक कि बासी मेसी रोटियां भी राबड़ी के साथ विशेष खाद्य पदार्थ ग्रामीण क्षेत्रों का है।
राबड़ी जो छाछ, जौ का आटा आदि हांडी में पकाकर बनाया जाता है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो छाछ में बनाया जाता है तथा छाछ डालकर ही इसे प्याज और बासी रोटी के साथ खाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस मामले में कभी से राबड़ी प्रयोग करते आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी राबड़ी को नहीं भूलते। चाहे वर्तमान पीढ़ी कोल्ड ड्रिंक पीने लग गई और चाय अधिक सेवन करती है किंतु ग्रामीण बुजुर्ग राबड़ी को अहमियत देते हैं। इस वक्त गर्मियों के दिनों में धाणी एवं भुगड़ा नाम से विशेष खाद्य पदार्थ का खाते हैं। ग्रामीण लोग जौ को भुनवाकर धाणी तो चने को भुनवाकर भुगड़ा बनाते हैं जिनको गर्मी के दिनों में बड़े चाव से खाया जाता है। यहां तक कि कुछ लोग जौ की धाणी का सत्तू भी बनाकर पीते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां विशेष रूप से खरबूजा ,खरबूजा,ककड़ी एवं मतीरा आदि खाते हैं। यद्यपि मतीरा दिनों दिन लुप्त होते जा रहे हैं किंतु आज भी बुजुर्ग मतीरे को तरसते हैं। तरबूज से जहां पानी की प्यास बुझाते हैं कोई सेहत के लिए भी लाभप्रद है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र तरबूज पर विशेष ध्यान देते हैं। यहां तक कि आपस में कोई लड़ाई झगड़ा हो जाता है और सुलहनामा बनता है तो तरबूज ही घर लेकर आते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में ककड़ी तरबूज और खरबूजा आदि विशेष रूप से चाव से खाए जाते हैं।
ग्रामीण ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का प्याज का विशेष लगाव रहा है। यहां तक कि हर घर में नींबू रखते हैं जिससे शिकंजी पीते हैं तथा प्याज एवं कच्चे आम को भून कर खाते हैं ताकि गर्मी से बचा जा सके। गर्मी के खाद्य पदार्थों के बारे में राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, कृष्ण कुमार, दिनेश कुमार एवं सुनील कुमार आदि बताते हैं की बुजुर्ग पुराने खानपान को आज भी नहीं भूले हैं। सब्जियों के रूप में बुजुर्ग लोग खाटा का साग और कढ़ी के अतिरिक्त रायता बनाकर खाते हैं क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की कमी नहीं होती। यही कारण है दही को रायते में बदल देते हैं और खाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी एक दूसरे के घर से छाछ मुफ्त में उपलब्ध हो जाती है जिसमें काला नमक, भुना हुआ जीरा पुदीना आदि डालकर बड़े चाव से पिया जाता है। जब भी कोई मेहमान आता है तो उसको चाय की बजाए राबड़ी या छाछ का गिलास थमाते हैं जो खाने में बेहतरीन होता है। कसी शहर से आने वाले व्यक्ति भी बड़े चाव से लस्सी को पीते हैं, चाय को दूर भगाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खाने-पीने की आदतें अच्छी है। यहां तक कि मक्खन भी प्रयोग किया जाता है, दूध का भी सेवन किया जाता है किंतु हर घर में प्याज जरूर खरीदी जाती है जिसे वर्ष भर खाते हैं। प्याज का राबड़ी के साथ विशेष संबंध माना गया है। जब कभी धूप लग जाती है तो कच्चे आम को भुनकर ही उसका उपयोग किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग मनोज कुमार, सुरेश कुमार, रविंद्र कुमार आदि बताते हैं कि ग्रामीण खानपान सबसे बेहतरीन खानपान है। शहरों का खानपान बहुत बेहतर नहीं होता ऐसे में शहरी लोग गांव में आकर कुछ समय बिताना चाहते हैं ताकि खानपान में सुधार करके अपनी सेहत बना सके।
फोटो कैप्शन 9: ग्रामीण क्षेत्रों में तरबूज की आई बहार।
9 दिनों तक पड़ेगी गर्मी, नौतपा दौरान लू चलेंगी
-अधिक से अधिक पानी एवं सिट्रस फलों का करें प्रयोग
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कनीना की आवाज। आगामी 25 मई से 2 जून तक पूरे 9 दिन जमकर गर्मी पड़ेगी। ऐसे में ऐतिहात बरतनी जरूरी है। इस दौरान सूर्य की किरणें सीधी ही धरती पर पड़ती है जिससे धरा का ताप बढ़ता है वही लू चलती है। यह 9 दिनों की अवधि बहुत कष्टदायक साबित होती है। ऐसे में इस दौरान गर्मी से बचना बहुत जरूरी है, वरना लू लगने और हैजा होने की समस्याएं पनप जाती है। गर्मी से बचने के लिए डाक्टरों और वैध से चर्चा की गई जिनका अलग-अलग विचार है।
मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे डा. अजीत कुमार का कहना है कि इस अवधि में अनावश्यक घर से बाहर न निकले यदि बहुत जरूरी हो तो घर से बाहर निकले लेकिन नंगे पैर और नंगे सिर कभी न घूमे। जब भी बाहर जाए तो साथ में पानी की बोतल जरूर रखें ताकि पानी को पी कर प्यास बुझा सके। इस दौरान लू पड़ती है इसलिए पूरे शरीर को अच्छी प्रकार ढक लेना चाहिए। घर में भी बैठे तो कूलर एवं पंखे की हवा में जरूर बैठे ताकि गर्मी न लगे।
वैद्य बालकिशन शर्मा बताते हैं कि नौतपा दौरान प्याज का अधिक से अधिक सेवन करें। प्याज लू एवं हैजा लगने से बचाती है, वही शरीर में खनिज एवं विटामिन प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि प्याज के अतिरिक्त जिन फलों और सब्जियों में ज्यादा पानी हो तो जरूर प्रयोग करें। जैसे इस दौरान विभिन्न प्रकार के जूस पीने चाहिए। गन्ना मौसमी, संतरा आदि के जूस उपलब्ध होते हैं वही इस दौरान तरबूज जैसे फल को भी खाया जा सकता है जो पानी की भी पूर्ति करता है। इस अवधि में हो सके तो आराम करें ।
उधर मेडिकल प्रैक्टिशनर डा वेद बताते हैं कि नौतपा बहुत कष्ट दाई होती है। इस दौरान लू लगने से बचने के लिए सिट्रस जाति के फल अधिक से अधिक प्रयोग करें । नींबू संतरा मौसमी आदि सिट्रस जाति में आते हैं। इनमें विटामिन भी मिलती है शरीर में पानी की पूर्ति भी होती है। उन्होंने बताया कि लू लगने पर घरेलू उपचार कच्चे आमी को भनकर उस का रस निकालकर उसमें थोड़ा सा चुटकी भर नमक मिलाकर पिया जाता है जो गर्मी से राहत देता है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में बहार न जाये।
वैद्य श्रीकिसान बताते हैं कि नौतपा सबसे कठिन साबित होता है। घर से बाहर नहीं जाना चाहिए। इस अवधि में अगर हो सके तो घर पर ही रहे। अधिक से अधिक हरी पत्तेदार एवं वाली सब्जियां खाए। प्याज का अधिक उपयोग करें। इस अवधि में पानी का अधिक से अधिक सेवन करें। गर्मी से बचने के लिए हो सके तो किसी कूलर ,पंखे एवं एसी आदि के हवा में बैठना चाहिए क्योंकि नौतपा दौरान बहुत अधिक पौधों और सब्जियों को नुकसान होता है। ऐसे में इंसान पर भी भारी प्रभाव सूर्य की किरणें करती है। इनसे बचना जरूरी है। फोटो कैप्शन: मेडिकल प्रैक्टिशनर डॉ अजीत, डा वेद, वैद्य बालकिशन एवं वैद्य श्रीकिसान
अटेली विधानसभा क्षेत्र का आर्थिक विकास न होने के कारण आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री को सौंपेंगे ज्ञापन
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कनीना की आवाज। जिला महेंद्रगढ़ में जनसंवाद कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री के आगमन पर आम आदमी पार्टी कनीना कार्यालय में आप पदाधिकारियों की एक मीटिंग का आयोजन हुआ जिसमें आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
इस अवसर पर बोलते हुए एडवोकेट सत्यनारायण ने कहा कि अटेली हलका आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है तथा एनसीआर से बाहर हो गया है। इसलिए अटेली विधानसभा क्षेत्र को विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाए। जिसमें मुख्य मांग अटेली को उपमंडल का दर्जा जो की अटेली क्षेत्र वासियों कि उपमंडल बनाने की काफी पुरानी मांग है तथा विधायक सीताराम यादव ने भी इस बारे में लोगों को कई बार आश्वासन दे चुके हैं और कहा था कि फरवरी 2023 तक अटेली को मंडल बनाने की घोषणा कर दी जाएगी परंतु सरकार ने अब तक कोई ध्यान नहीं दिया है। इसके अलावा अटेली विधानसभा क्षेत्र में ना ही कोई मेडिकल कालेज न कोई आईआईटी संस्था तथा न आईटीआई कालेज है
इसलिए सरकार को आइआइटी इस क्षेत्र में बनाने की घोषणा करनी चाहिए अटेली हलका औद्योगिक तौर पर काफी पिछड़ा हुआ है। जहां पर सरकारी व गैर सरकारी उद्योग नहीं लगे हुए हैं यहां पर बड़ा औद्योगिक नगर बसाया जा सकता है कनीना जो कि एक ऐतिहासिक कस्बा है फिर भी उसका विधानसभा क्षेत्र खत्म करके जाटूसना में मिला दिया और अब अटेली से जोड़ दिया गया है। अब 2026 में नया परिसीमन होना है और जहां हरियाणा में 90 सीटें हैं उनको बढ़ाकर 120 के करीब विधानसभा सीट करनी चाहिए ताकि कनीना को विधान सभा का दर्जा बहाल हो सके जो कनीना सहित आसपास के गांव व ग्रामीणों की पुरानी मांग है। इसके अलावा कनीना में बाइपास सड़क बनाई जाए तथा सभी सड़कों की मरम्मत भी तुरंत प्रभाव से करवाई जाये और कनीना के सभी लिंक रोड महेंद्रगढ़ से रेवाड़ी, कनीना से कोसली, कनीना से दादरी, कनीना से अटेली, कनीना से नारनौल को फोर लाइन बनाया जाए। इसके अलावा 152 डी राष्ट्रीय राजमार्ग नारनौल- चंडीगढ़ से लोगों की मांग को देखते हुए यहां पर बाघोत-सेहलग के पास कट मंजूर कर इस पर तुरंत प्रभाव से काम शुरू किया जाए और इस रोड को झज्जर से केएमपी में मिलाया जाए। वह 152डी बाघोत रोड पर जो 40 गांव के लोग धरने पर बैठे हैं उनकी मांग जायज है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी उनकी इस मांग को मान चुके हैं इसलिए इस मांग पर तुरंत काम शुरू किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर आम आदमी पार्टी सतनारायण एडवोकेट, पूर्व प्रवक्ता महेंद्र सिंह राता ,आम आदमी पार्टी पूर्व इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह, मदन सिंह, कैप्टन विनोद भंवर सिंह, हरेंद्र शर्मा ,नवदीप एडवोकेट, नरेंद्र यादव, मुकेश यादव, महेंद्र सिंह, सुनील राव, ओमप्रकाश नीरज, राव राजपाल सिंह, सुरेंद्र यादव एवं प्रवीण कुमार आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 8: आम आदमी पार्टी के नेता बैठक करने के बाद।
भारत विकास परिषद ने धरने पर बैठे कि लोगों को दिया समर्थन
- भेंट की 1100 रुपये की राशि
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कनीना की आवाज। भारत विकास परिषद शाखा कनीना की कार्यकारिणी की एक आवश्यक बैठक नेताजी मेमोरियल क्लब कनीना प्रांगण में संपन्न हुई जिसकी अध्यक्षता लखन लाल जांगड़ा कैमला ने की।
शाखा के सदस्यों को केंद्रीय नेतृत्व द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों से अवगत करवाया और कुछ नए दायित्व के बारे में विचार विमर्श किया गया। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि भारत विकास परिषद कनीना, सेहलंग एवं बाघोत गांवों के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 152-डी पर बैठे धरने के लोगों को समर्थन दिया जाए। ऐसे में सभी पदाधिकारी समर्थन देने बाघोत-संहलंग के बीच धरना स्थल पहुंचे और अपनी ओर से 1100 रुपये की राशि भी भेंट की। धरना दे रहे लोगों ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर लखनलाल जांगड़ा ने समर्थन देते हुए कहा कि भविष्य में भी समर्थन देते रहेंगे। इस अवसर पर संरक्षक कंवरसेन वशिष्ठ, मोहन सिंह यादव पूर्व शाखा अध्यक्ष, प्रेम कुमार सिंगला उपाध्यक्ष, कृष्ण सिंह यादव सचिव, सूबेदार मेजर राकेश कुमार यादव शाखा कोषाध्यक्ष, डा. नरेंद्र कुमार यादव, शक्ति सिंह पोता, महेश बोहरा, डालचंद जांगड़ा के समर्थन में सर्व समिति से आदि उपस्थित रहे।
महारणा प्रताप को धरना स्थल पर किया याद-
उधर राष्ट्रीय राजमार्ग 152 डी पर सेहलंग, बाघोत के समीप कट की मांग को लेकर धरना 71वें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती हर्षोल्लास से मनाई गई। अध्यक्षता बाबूलाल सेहलंग ने की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता नरेन्द्र शास्त्री ने कहा जिस तरह महाराणा प्रताप ने स्वाधीनता के लिए अंतिम दम तक संघर्ष किया। इसी तरह अपनी मांग को लेकर हमारा धरना भी जब तक जारी रहेगा जब तक कट का काम शुरू न हो जाए। उन्होंने महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके आपसी सद्भाव और समरसता के सिद्धांत पर चलने की अपील की। इस अवसर पर केक काटकर महाराणा प्रताप जन्मोत्सव की बधाई दी।
फोटो कैप्शन 05: धरना स्थल पर महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण कर जयंती मनाते हुए मौजीजान।
फोटो कैप्शन 04: धरने को समर्थन देने पहुंचे भारत विकास परिषद के पदाधिकारी।
जल संरक्षण के लिए युवा पीढ़ी को आना होगा आगे- लक्कीराव सीगड़ा
-जल है तो कल जीवन संभव
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कनीना की आवाज। बीएमडी फाउंडेशन द्वारा कनीना स्थित कार्यालय में जल संरक्षण विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता लक्कीराव सीगड़ा ने विचार गोष्ठी में जल संरक्षण पर विचार रखते हुए कहा की जल से ही कल है। जल को संरक्षित करने के लिए प्रत्येक नागरिक को संकल्प लेना होगा। लगातार जल का दोहन धरा की उर्वरा शक्ति को कम कर रहा है। कम वर्षा से भूजल घट रहा है। प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण करके ही पानी की कमी को दूर किया जा सकता है। पानी की अधिक बर्बादी कपड़े धोने में होती है। इसके लिए कारगर उपाय भी करने होंगे। जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी की अति आवश्यकता है। हमें एक साथ मिलकर जल संरक्षण और पौधारोपण को लेकर जागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझकर इस मुहिम में सहयोग कर सके। जल की लगातार हो रही बर्बादी के लिए हम खुद जिम्मेदार है। क्योंकि आवश्यकता से अधिक पानी का दोहन कर रहे है। गांवों में पानी संरक्षण को बने तालाब,पोखर एवं नहरें सूख चुकी है। जिनके पानी का उपयोग खेत की सिंचाई,जानवरों को नहाने और पीने में किया जाता रहा है। अब संयमित होकर जल को बचाने की जरूरत है क्योंकि जल है तो कल है।
सीगड़ा ने जल को संरक्षित करने के तरीकों पर महत्व डालते हुए यह भी कहा ज्यादा पानी न बहाएं बाजार, रास्ते में चलते नल को देखते ही बंद कर दें। बरसात के पानी को संरक्षित करने की चिंता करें । घर में कपड़ा, बर्तन धोने से निकले पानी को पौधों में डालकर उपयोग में लाएं। इस्तेमाल किये हुए पानी का फिर से शौचालयों अथवा बगीचों में फिर से इस्तेमाल और रिसाइकिलिंग करके जल का सदुपयोग करना चाहिए। इस दिशा में जन-जागरूकता बढ़ाई जाए,वर्षा-जल का संग्रहण करके हम पानी को बचा सकते हैं। विभिन्न जलाशयों का निर्माण करके उनमें जल संग्रह करना जल संसाधन का सबसे पुराना उपाय है। हमें दैनिक जीवन जैसे नहाने ,ब्रश करने जैसे विभिन्न कार्यों में भी कम से कम पानी प्रयोग करना चाहिए जब जरूरत न हो तो नल को बंद भी करना चाहिए।
इस विचार गोष्ठी में रचना शर्मा, भारती सैनी, हैप्पी, टीना, मंजू यादव , प्रियंका प्रजापति एवं नवीन कुमार आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 6: जल संरक्षण पर बोलते हुए लक्कीराव सिंड़ा
7: जल संरक्षण पर बैठक लेते हुए।
पासपोर्ट लक्की सिंगड़ा
खेड़ी एसडी स्कूल में आयोजित हुई पीटीएम
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कनीना की आवाज। एसडी स्कूल खेड़ी तलवाना में रविवार को 21 मई 2023 को अभिभावकों के साथ छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा करने के लिए एक अभिभावक - शिक्षक बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन माननीय निदेशक जगदेव यादव के दिशा-निर्देशों और अध्यक्षता में किया गया था।अभिभावक-शिक्षक बैठक किसी भी स्कूल की महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक है यह शिक्षक और माता-पिता दोनों के लिए बच्चे की बेहतरी के लिए काम करने का एक शानदार अवसर है। पीटीएम छात्र के शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए आयोजित किया जाता है। यह हमें बच्चे के बेहतर प्रदर्शन को जानने और काम करने में मदद करता है। माता-पिता शिक्षक बैठक बच्चे के प्रदर्शन की बेहतरी के लिए एक दूसरे के साथ बातचीत करने का एक प्रभावी और उपयोगी तरीका है। यहां पीटीएम में शिक्षक और माता-पिता दोनों ने बातचीत की और अपनी समस्याओं और मुद्दों पर चर्चा की जो वे छात्र के लिए महसूस करते हैं। माता-पिता और शिक्षकों के बीच आमने-सामने संचार उनके बच्चे की सीखने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्राचार्य सतपाल शर्मा ने बताया कि अपने बच्चों के विकास के लिए शिक्षकों और अभिभावकों के बीच यह बहुत अच्छी बातचीत थी जहाँ उन्होंने ताकत और सुधार के क्षेत्र दोनों पर चर्चा की। एस डी स्कूल सभी अभिभावकों की उपस्थिति और प्रगतिशील सुझावों के लिए बहुत आभारी है।
फोटो कैप्शन 03: पीटीएम खेड़ी का नजारा।
25 मई से दो जून तक का समय कहलाता है नौतपा
-जमकर पड़ती है गर्मी, बरते ऐतिहात
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कनीना की आवाज। इस समय सूर्य पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी पर हैं । सूर्य पृथ्वी से 15 करोड़ 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर हैं तब आग उगल रहा है जबकि 22 दिसंबर से 04 जनवरी तक सूर्य हमारे सबसे निकट होता है । पृथ्वी कीं सूर्य से दूरी 14 करोड़ 73 लाख किलोमीटर की दूरी पर था तब हम ठंड से ठिठुर रहे थे।
25 मई से 02 जून तक का समय नौतपा का समय है। नौतपा में सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधी गिरकर कम स्थान पर फैल रही है। अब सूर्य की किरणें पृथ्वी पर 89.2 डिग्री के आसपास पहुंच रही है। इसलिये गर्मी तेजी से पड़ रही है। इस समय तापमान अधिक होने का मुख्य कारण सूर्य की किरणों का पृथ्वी के इस भाग पर सीधा गिरना है। वर्तमान समय में एक वर्ग किलोमीटर की किरणें एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर पङ़ती है जिससे हमें पूरी गर्मी लगती हैं। 15 जून को पृथ्वी पर सूर्य की किरणें 90 डिग्री पर पहुंचेगी। इसलिये इस समय गर्मी के यहीं हालात बने रहेंगे। 22 दिसम्बर से 04 जनवरी तक सूर्य हमारे सबसे निकट होता है फिर भी कड़ाके की ठंड पङ़ती है। उस वक्त सूर्य की किरणें पृथ्वी पर 45 डिग्री का कोण पर पृथ्वी पर पहुंचती हैं। सूर्य की एक वर्ग किलोमीटर की किरणें 1.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पङ़ती है जिससे गर्मी का अहसास कम होता है। यह वही बात है जैसे चाय कप में रखने पर गर्म रहतीं हैं प्लेट मे डाल दे तो कम गर्म महसूस होती है। किसी भू भाग पर गर्मी सूर्य की किरणों के अलावा हवा की दिशा, पहाड़ी क्षेत्र, भूमि का ढाल, मिट्टी के प्रकार, पौधों की स्थिति, प्रदूषण पर निर्भर करती है।
पहाड़ की 165 मीटर की ऊंचाई पर जाने पर 1 डिग्री तापमान कम हो जाता है। अगर गर्म प्रदेश से हवा आ रहीं हैं तो तापमान और बढ़ेगा। कारखानों, वाहनों के अधिक होने वाले क्षेत्र में गर्मी ज्यादा होगी। समुद्र के आसपास वाले क्षेत्र में तापमान अधिक नहीं होता है क्योंकि पानी देर से गर्म होता है देर से ठंडा होता है। इसलिये समुद्र के आस-पास के क्षेत्र में न अधिक गर्मी पङ़ती है न अधिक ठंड पङती है। सूर्य की परिक्रमा करती पृथ्वी से देखने पर सूर्य के पीछे रोहिणी नक्षत्र आ जाता है। 365 दिन में पृथ्वी की परिक्रमा अवधि के कारण सूर्य के पीछे रोहिणी नक्षत्र आना एक खगोलीय घटना है। लगभग इन दिनों हर साल गर्मी पडऩे की घटना होती है। अत: नौतपा ग्रीष्मकाल का कैलेंडर है।
सावधानियां-
आजकल लू का प्रकोप भी हो सकता है। आप सभी से सुझाव है कि आप खाली पेट घर से बाहर न निकले। सिर को कपड़े से ढक कर बाहर जाये। भोजन में प्याज का सेवन करे। दिन में अधिक पानी का सेवन करे। नींबू का सेवन भी अधिक से अधिक करे।
एनएच-152 डी पर सेहलंग-बाघोत कट के लिए धरना 71वें दिन जारी
महिलाओं ने भी लिया धरने में भाग
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कनीना की आवाज। राष्ट्रीय राजमाग 152 -डी पर सेहलंग-बाघोत गांवों के बीच कट के लिए 71वें दिन भी जारी रहा। गर्मी एवं तपन में महिलाओं की संख्या अधिक रही। धरने की अध्यक्षता बाबूलाल सेहलंग ने की।
71वें दिन सहलंग-बाघोत कट के लिए महिलाओं ने भी अपना समर्थन दिया। महिला
ज्योति ने बताया कि अब महिलाओं ने भी मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने कहा कि जब तक कट नहीं बनेगा तब तक महिलाएं भी अपना समर्थन देती रहेगी।
धरना कमेटी के संयोजक सरपंच बलवान सिंह छितरोली एवं सतपाल सिंह चेयरमैन पोता ने बताया कि पिछले 71 दिनों से लोग गर्मी में तप रहे है। किंतु सरकार अभी तक कोई उचित कार्यवाही नही कर पाई है। इसको लेकर लोगों में भारी आक्रोश है।
कट बनाने की घोषणा मार्च 2022 पंचगाव रैली में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने खुद की थी। सरकार से व नितिन गडकरी से आग्रह है कि लोगों की मांग पर ध्यान रखते हुए जल्द से जल्द इस कट का धरातल पर काम शुरू करवाए। तमाम संसद , विधायकों के आश्वासन के बाद भी धरातल पर कोई उचित कार्यवाही नही हुई है।
इस मौके पर बिमला, सुरेश देवी, पूनम, सुमित्रा, कमला, कृष्णा,सुमन, रामकुमार, सतबीर,धर्मपाल, भोले साहब, मास्टर विजयपाल, नरेंद्र शास्त्री वविभिन्न गांवों के पूर्व,वर्तमान सरपंच, बीडीसी सदस्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 2: कट के लिए धरने पर बैठी महिलाएं एवं पुरुष।
मंदिर में चोरी करने के मामले में एक ज्ञात और 35 से 40 अज्ञात के विरूद्ध मामला दर्ज
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कनीना की आवाज। शनि देव मंदिर भोजावास के पुजारी गोकलचंद केबयान पर मंदिर में तोडफ़ोड़ करने, सामान चोरी कर ले जाने के मामले में देशराज एवं 35 से 40 अज्ञात व्यक्तियों के व्यक्तियों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। शनि देव मंदिर के पुजारी ने मामला दर्ज करवाते हुए कहा कि 20 मई की रात को देशराज एवं 35 से 40 अज्ञात व्यक्ति कैंपर गाड़ी, इंडो फार्म ट्रैक्टर,स्कार्पियो गाड़ी,
स्विफ्ट गाड़ी सहित आए, भंडारे में तोडफ़ोड़ कर गए। ग्रामीणों को पता चला तो भाग खड़े हुए लेकिन कुछ समय बाद दोबारा आए और मंदिर से गल्ला वह सामान चोरी कर ले गए। 20 मई को मंदिर में भंडारा था जिसमें धनराशि, बर्तन ,कपड़े सारा सामान देशराज और उनके साथी लेकर फरार हो गए। कनीना पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 295/427/379/34 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।
महाराणा प्रताप जयंती मनाई गई
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कनीना की आवाज। धनौन्दा स्थित स्कूल में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर अतरलाल एडवोकेट मुख्य अतिथि थे। उन्होंने महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्प अर्पित करके कार्यक्रम की शुरुआत की।
अतरलाल ने बच्चों को महाराणा प्रताप के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति एकाग्रता और स्वाभिमान सर्वोपरि के मूल मंत्र बताते हुए उन्हें कड़ी मेहनत करने का संकल्प दिलाया। विद्यार्थियों ने भी महाराणा प्रताप के जीवन और चरित्र से संबंधित गीत, कविता, रागिनी इत्यादि सुना कर कार्यक्रम को चार चांद लगा दिए।
इस अवसर पर कक्षा प्रथम से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए चित्रकला एवं रंग भरो प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें नन्हे-मुन्ने बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया तथा विभिन्न मुद्राओं में महाराणा प्रताप के चित्र बनाकर रंगों का जादू दिखाया। इस मौके पर भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए अतरलाल एवं अन्य।
कनीना नगर पालिका
चुनावों में अब फिर आई नरमी
-उछल कूद करने वाले सोशल मीडिया के पत्र ने किये फेल
-आरक्षण संबंधित पत्र आने का इंतजार
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कनीना की आवाज। कनीना नगर पालिका में सतीश जेलदार ने 13 मई 2018 को प्रधान पद की शपथ ली थी। उनका कार्यकाल 24 जून 2023 तक का निर्धारित कर दिया गया है। नगरपालिका के लिए जहां प्रधान पद के लिए आरक्षण भी घोषित हो चुका है। अब कनीना नगर पालिका का प्रधान पद महिला के लिए आरक्षित होगा, ऐसे संकेत मिल चुके हैं
उल्लेखनीय है कि कनीना कस्बे में जहां पहले भी दो योजनाओं में दो महिलाएं प्रधान रह चुकी है, एक बार फिर से महिला को यह कमान संभाली जाएगी। कुछ भी हो महिला या पुरुष सभी चुनावों के लिए तैयार हैं। अधिकारिक पत्र आना अभी बाकी है।
इससे पहले भी शारदा और संतोष देवी पालिका प्रधान दो अलग-अलग योजनाओं में रह चुकी है। अब एक बार फिर से महिला को कमान दी जाएगी। सबसे बड़ी विडंबना है कि पूर्व प्रधान और वर्तमान प्रधान भी इस चुनाव प्रक्रिया में प्रधान पद के चुनाव से बाहर हो गए हैं, बेशक वे चाहे तो पार्षद के चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन प्रधान पद के चुनाव डायरेक्ट होने के चलते प्रधान नहीं बन पाएंगे। नए सिरे से चुनावी जोड़ दौड़ में लग गए हैं। चूंकि महिला को ही चुनाव लड़वाना पड़ेगा। क्या कहते हैं पालिका के वर्तमान और पूर्व प्रधान----
पालिका के वर्तमान प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि उनकी पुत्रवधू अनुराधा पढ़ी लिखी है जो यह चुनाव लड़ेगी तथा वो स्वयं तो पहले से ही चुनाव न लडऩे की बात कह चुके हैं। उनका पुत्र चुनाव लडऩे का इच्छुक है किंतु पालिका प्रधान आरक्षित होने के कारण अब वो भी चुनाव से बाहर हो गए हैं। हर प्रकार से चुनाव लडऩे के लिए महिला एवं पुरुष तैयार हैं। महिला के लिए प्रधान पद आरक्षित हो जाएगा तो पार्षद के चुनाव लडऩा और भी कठिन हो जाएगा क्योंकि प्रधान पद से वंचित रहे लोग पार्षद के लिए हाथ पैर मारेंगे।
उधर पालिका के पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह लोढ़ा ने बताया वो स्वयं चुनाव न लड़ पाए किंतु उनके परिवार के सदस्य चुनाव जरूर लड़ेंगे। उन्होंने बताया कि पुत्रवधू दीप्ती राव उनके परिवार से चुनाव लड़ सकती है।
वहीं पूर्व पालिका प्रधान मास्टर दिलीप सिंह की पुत्रवधू सुमन चौधरी चुनाव लड़ सकती है। एडवोकेट दीपक ने बताया कि वह चुनाव लडऩे के लिए तैयार था किंतु महिला के लिए प्रधान पद आरक्षित होने के कारण वे अपनी पत्नी सुमन चौधरी को चुनाव लड़वाएंगे। एकदम चुनाव लडऩे वालों के लिए आरक्षण ने समस्या पैदा कर दी है। जो पुरुष चुनाव लडऩा चाहते थे वह अब प्रधान पद से पीछे हट गए हैं। कनीना पालिका जहां चुनाव लडऩे वाले नए-नए चेहरे उभर सकते हैं। अशोक वर्मा वार्ड चार के घर से महिला चुनाव लडऩे के लिए तत्पर है।
कमल पूर्व पार्षद ने बताया कि उनके परिवार से भी एक महिला अवश्य चुनाव लड़ेगी किंतु उन्होंने नाम उजागर नहीं किया। उधर एडवोकेट पंकज यादव की मां संतोष देवी यह चुनाव लड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले वो स्वयं चुनाव लडऩे का इच्छुक था किंतु आरक्षण के बाद उनकी मां चुनाव लड़ेगी जो वर्तमान में पार्षद है। ऐसे में अब कनीना में महिलाओं के लिए फिर से चुनाव लडऩे की प्रक्रिया शुरू हो गई है।


















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