प्रत्येक घंटे के बाद विद्यार्थियों को पीने के लिए पानी उपलब्ध करवाया जाए -शिक्षा विभाग
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कनीना की आवाज। हाल ही में शिक्षा विभाग हरियाणा ने सभी स्कूलों में पत्र जारी करते हुए ग्रीष्म ऋतु में विद्यार्थियों को लू एवं गर्मी की विभीषिका से बचाने हेतु कदम उठाने का निर्देश दिये हैं। यद्यपि स्कूलों का समय नहीं बदला गया है और न हीं ग्रीष्मावकाश का कोई खुलासा किया है।
किंतु गर्मी से बचने के लिए शिक्षा विभाग ने आदेश दिया कि विद्यार्थियों को खुली धूप में नहीं बैठाया जाए,खुली धूप में कोई कार्यक्रम न करें,, विद्यार्थियों को साफ पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और प्रत्येक घंटे के बाद पानी पीने के लिए घंटी बजाई जाए ताकि विद्यार्थी समय पर पानी पी सके। विद्यालयों में उपलब्ध रेड क्रास फंड से लू से बचाव के लिए ओआरएस पैकेट की व्यवस्था करने का भी आदेश दिया है। वहीं गर्मी से बचने के उपायों पर चर्चा की जाए तथा व्यापक जानकारी उपलब्ध करवाई जाए। परामर्श हेतु आयुष विभाग से संपर्क किया जाए। उन्होंने कहा किसी भी आपात स्थिति के संदर्भ में स्थानीय अस्पताल में संपर्क की व्यवस्था की जाए तथा आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण ले, खिड़कियों को रिफ्लेक्टर जैसे एलुमिनियम की पन्नी से ढक कर रखें ताकि बाहर की हवा अंदर न आ सके। दरवाजों पर पर्दे लगाकर रखा जाए। शिक्षा विभाग ने स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान को सुनने का भी आदेश दिया है ताकि तापमान में होने वाले परिवर्तनों के प्रति सचेत रहा जाए। बच्चे और पालतू जानवरों को कभी भी बंद वाहन में अकेला न छोड़े, जहां तक संभव हो घर में ही रहे तक सूर्य के संपर्क से बचे। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घरों में निचली मंजिल में रहे, संतुलित हल्का नियमित भोजन करें। घर से बाहर जाते समय अपने शरीर को पूरे कपड़ों से ढके तथा सिर पर टोपी पहने।
गर्मी से बचने के लिए डाक्टर की सलाह-
पुदीना और कच्चे आम की चटनी खाए
-प्याज अधिक प्रयोग करें -डा.शशि मोरवाल
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कनीना की आवाज। दिनों दिन गर्मी बढ़ रही है और गर्मी में खानपान उचित रखने के लिए आयुर्वेदिक मेडिकल अधिकारी, ग्रामीण आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी बाघोत डा. शशि मोरवाल बताती है कि गर्मी के दौरान अधिक से अधिक पानी और लस्सी पिये, गरिष्ठ भोजन कभी प्रयोग ना करें, सलाद अधिक से अधिक प्रयोग करें।
उन्होंने बताया कि पूरे कपड़े पहन कर रखे तथा बाहर जाना हो तो पूरी बाजू के कपड़े पहनकर ही बाहर निकले, सिर को नंगा न रखें । उन्होंने बताया कि पुदीने और कच्चे आम की चटनी बहुत लाभप्रद होती है। ठंडाई के लिए राबड़ी प्रयोग की जाये, फ्रिज का पानी नहीं पीना चाहिए,घड़े का पानी ही प्रयोग करें।
डॉ शशि बोरवाल बताती है कि प्याज टमाटर जैसी सलाद सेहत के लिए अच्छी है वहीं गर्मी से बचाती है जिनमें पानी भी अधिक होता है। उन्होंने बताया कि हल्का भोजन, हल्की सब्जी लेनी चाहिए जिनमें घिया, तोरई, दाल मूंग प्रयोग करें, दलिया अधिक प्रयोग करें। तीनों वक्त भोजन ले लेकिन भोजन समय पर ही प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि गर्मी से बचने के लिए हो सके तो घर में ही रहे यदि बाहर जाना हो तो शरीर को पूरा ढककर निकले।
फोटो कैप्शन: डा शशि मोरवाल
एनसीसी कैडेट्स की भर्ती प्रक्रिया सम्पन्न हुई
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कनीना की आवाज। एसडी विद्यालय ककराला में एनसीसी कैडेट्स की नई भर्ती 16-हरियाणा एनसीसी बटालियन के द्वारा मंगलवार को सम्पन्न की गई। 16-हरियाणा एनसीसी बटालियन की टीम कर्नल केजे सिंह, कर्नल हरप्रीत सिंह, सूबेदार मेजर जगमाल सिंह, सूबेदार मनोहर सिंह, हवलदार ओमप्रकाश एवं शिव कुमार द्वारा सर्वप्रथम प्रतिभागियों के दस्तावेजों की जांच की गई जिसमें आठवीं और नौवीं कक्षा में पढऩे वाले प्रतिभागी जिनका जन्म 30 अपै्रल 2004 से 31 मई 2010 के बीच रहा हो तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज पूरे थे, वे इसके पात्र रहे। दस्तावेजों की जांच के बाद 138 प्रतिभागियों की शारीरिक दक्षता कि जांच हुई जिसमें दौड़, लम्बी कूद आदि का आंकलन किया गया। पात्र प्रतिभागियों की सामान्य मेडिकल जांच भी की गई, इसके बाद लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया। लिखित परीक्षा में मेरिट के आधार पर कैडेट्स का चयन किया जाएगा।
एसडी विद्यालय में एनसीसी की यूनिट पिछले सत्र में प्रारम्भ की गई थी जिसमें केवल 22 लड़कों की भागीदारी थी। इस सत्र में एनसीसी कैडेट्स के रूप में कुल सीटों में 33 प्रतिशत लड़कियां एवं 67 प्रतिशत लड़के चुने जायेंगे। इस अवसर पर एनसीसी सीटीओ राहुल उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 5 एनसीसी के लिए लिखित परीक्षा लेते अधिकारी।
स्याणा गांव की बेटी अभिरुचि ने पास की आईएएस परीक्षा
- ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं -सतवीर डागर
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कनीना की आवाज। कनीना उप-मंडल के गांव स्याणा की अभिरुचि पुत्री डा. जयपाल का आईएएस में चयन हो गया है।
डा. जयपाल की पुत्री अभिरुचि के आईएएस बनने पर क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने बधाई दी है। विस्तृत जानकारी देते हुए अभिरुचि के परिवार से पूर्व प्राचार्य सतवीर डागर ने बताया अभिरुचि बचपन से ही आईएएस बनना चाहती थी। एक ही सपना था कि पढ़ाई बाद वो आईएएस बने। पढ़ाई में हर समय अच्छा नाम कमाने के बाद अब लेकर अपने अंतिम लक्ष्य को पाने में सफल रही है। जीएल पब्लिक स्कूल कनीना से दसवीं और बारहवीं की परीक्षा पास की। उन्होंने बताया कि 10वीं कक्षा में वर्ष 2011-12 में सीबीएसई दिल्ली जोन में प्रथम स्थान हासिल किया था जिसके चलते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें अपने हाथों सम्मानित किया था। हाल ही में घोषित आईएएस की परीक्षा में 317 नंबर पर सूची में उनका नाम अंकित है। दसवीं और बारहवीं कक्षा के बाद उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र साइंस एंड टेक्नोलॉजी नई दिल्ली से बीटेक किया। आगे कोई पढ़ाई नहीं की, केवल एक ही लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ती रही। उनका लक्ष्य आईएएस बनने का था जिसमें वह सफल हो गई है। इसे सिद्ध हो गया ग्रामीण परिवेश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती है।
उनके पिता डॉ जयपाल सिंह एसडीओ पशुपालन विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जबकि मां डा सुविरा यादव वर्तमान में राजकरीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मदनपुर आकेड़ जिला रेवाड़ी में प्राचार्य रूप में कार्यरत है।
अभिरुचि ने दूसरा बार आईएएस पास किया है। पहली बार में ही उन्होंने आईएएस क्वालीफाई कर लिया था परंतु किन्हीं कारणों से चयन नहीं हो पाया। दूसरे अवसर में सफल हो चुकी हैं। अभिरुचि इस सफलता का श्रेय समस्त डागर परिवार को देते हुए अपना प्रेरणास्रोत मानती है। उनकी सफलता पर गणमान्य लोगों ने बधाई दी है जिनमें राजेंद्र सिंह लोढ़ा, मास्टर दलीप सिंह पूर्व प्रधान, पूर्व सरपंच सुमेर सिंह, श्रद्धानंद महाराज ढाब आश्रम स्याणा, राजकुमार मुख्याध्यापक ,ईश्वर सिंह प्रवक्ता, वासुदेव साहब, विजय सिंह नौताना, हिम्मत सिंह प्रवक्ता, डा. शशि, डा. मेजर नरेश, डा. तथागत, अस्मिता इंजीनियर , संजय इंजीनियर आदि प्रमुख हैं।
पूर्व प्राचार्य सतवीर सिंह डागर बताते हैं कि अभिरुचि अपने लक्ष्य को लेकर दिन रात मेहनत करती थी जो भी पुस्तक मिल जाए उसको पूरा ध्यान से पढ़ कर ही दम लेती थी। यही कारण है कि आज वह इस मुकाम पर पहुंच गई है। उनका सपना पूरा हो गया है।
फोटो कैप्शन: अभिरुचि तथा परीक्षा परिणाम की पीडीएफ क्रम संख्या 317 अभिरुचि
जल संरक्षण बहुत जरूरी है-डा मुंशीराम
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कनीना की आवाज। जल संरक्षण विषय को लेकर डा मुंशीराम लगातार लोगों से संपर्क कर रहे हें और आने वाले मानसून में जल संरक्षण की जानकारी दे रहे हैं। उनका कहना है कि जल संरक्षण से ही भविष्य संभव है वरना जीवन का अंत हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वे चाहते हैं कि सभी घरों में नलों को टोंटी लगे, सभी घरों में पक्का गड्ढा बनाकर वर्षा जल को संरक्षित किया जाए। वे इसे एक अभियान के रूप में चलाएंगे।
इस संबंध में कुछ लोगों से जल संरक्षण पर बात हुई जिनका कहना है-
जल एक बूंद भी अमूल्य और अमृत समान होती है। इसको बचाने के हर संभव प्रयास करने चाहिए। हम सभी की प्राथमिकता जल बचत की होनी चाहिए नहीं तो जीवन का अंत होगा।
घरों में गड्ढा बनाकर वर्षा जल की बचत करें। जल को कम से कम प्रयोग करना चाहिए। जितनी आवश्यकता हो उतना प्रयोग करें। नालियों में साफ जल को नहीं बहाना चाहिए। पीने के पानी को से पशु न नहलाए। यही से जल की बचत होगी। --टीना
जहां तक हो सके बारिश के समय जल को पक्के गड्ढों में इक_ा कर लेना चाहिए और उसे फसलों सब्जियों के उगाने में काम में लेना चाहिए। यही संदेश समाज को प्रेषित कर अधिक से अधिक वर्षा जल को संरक्षित करें। यही संदेश हम सभी का होना चाहिए वरना जीवन निश्चित रूप से अंत हो जाएगा।
-- रचना शर्मा
सरकार द्वारा भी जल संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। उन सभी तरीकों को अपनाना चाहिए जिससे जल को बचाया जा सके। भविष्य के लिए जल अमृत और बहुमूल्य चीज है।
-- मंजू यादव
अभी हमें ऐसी फसलें उगानी चाहिए जिनमें पानी कम चाहिए, अधिक पानी वाली फसलें नहीं उगानी चाहिए, वरना धरती से पानी लुप्त हो जाएगा और पाताल में चला जाएगा। जिससे जीवन दूभर हो जाएगा। प्रत्येक घर में निकलने वाले जल को गहरे गड्ढों में डाल देना चाहिए और गड्ढों का अच्छी प्रकार बाहर से ढक देना चाहिए ताकि यह चल भूमिगत जल को बढ़ा सके और जल को भविष्य के लिए बचाया जा सके।
--हैप्पी
जल बचाने वाले सभी तरीकों का उपयोग हर इंसान को करना चाहिए। जो जल को ज्यादा बचाएगा वह एक दिन नाम कमाएगा। जल को व्यर्थ बहाना बहुत ही बुरी बात होती है। जल को बचाने के लिए जोहड़ों को संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है और पुराने समय में भी जोहड़ होते थे। इन जोहड़ों को आज भी संरक्षित किया जा रहा है। सरकार भी बढ़ावा दे रही है। इस उद्देश्य को आगे बढ़ाना हम सभी का हम कर्तव्य होना चाहिए जिससे जल की बचत हो सके
--भारती
सरकार विभिन्न जोहड़ों को पक्का करके उसमें वर्षा पानी को जमा कर रही है। इसी दिशा में कनीना मोलडऩाथ जोहड़ भी पक्का करवा दिया गया है। निकट भविष्य में अन्य जोहड़ों को भी पक्का करने की सरकार की योजना है और इन जोहड़ों को संरक्षित करने के लिए हम सभी को कटिबद्ध रहना चाहिए ताकि जितना हो सके जल को बचाया जा सके। भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जल का संरक्षण जरूरी है।
-- सतीश जेलदार पालिका प्रधान
फोटो कैप्शन: डा मुंशीराम, सतीश जेलदार,भारती, रचना शर्मा,हैप्पी, मंजू यादव,टीना
जल को बचाना हम सभी का कर्तव्य-भगत सिंह
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कनीना की आवाज। जल को बचाना हम सभी का कर्तव्य है तथा जो जल संरक्षण नहीं करता वो पाप का भागीदार होता है। ये विचार कनीना के समाजसेवी भगत सिंह ने जल संरक्षण के बारे में लोगों को जागरूक करते हुए व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि हर इंसान को स्वच्छ पेयजल की जरूरत है किंतु जल संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। अगर जल संरक्षित नहीं कर पाएंगे तो भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने वर्षा जल संग्रहण, हर नल पर टोंटी लगाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि संसार में आने वाले समय में सबसे बड़ी त्रासदी होगी तो वह जल संकट होगा यदि हमें अपना भविष्य सुरक्षित रखना है तो पानी की एक-एक बूंद को बचाना होगा। तभी हम आने वाली पीढ़ी को धरोहर के रूप में अच्छा भविष्य दे पाएंगे।
हमारे जीवन में जल का अति महत्वपूर्ण स्थान है तथा जल है तो कल है। भविष्य की सभी आवश्यकताएं तभी पूरी होगी जब हमें पीने के लिए स्वच्छ जल मिलेगा। आज संसार में 80 प्रतिशत लोगों को स्वच्छ जल के लिए मारामारी करनी पड़ती है तथा उन्हें स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं हो पाता। जल के संरक्षण और भूमि पर लगातार जमीनी जल की उपलब्धता के विषय में बताया। उन्होंने कहा कि 55-60 लीटर जल प्रति व्यक्ति मुख्य रूप से पानी प्रयोग करता है और 120 प्रति लीटर जल एक जानवर प्रतिदिन प्रयोग करता है भगत सिंह ने कहा कि अपने खेतों में उस प्रकार की फसलों का प्रयोग करना चाहिए जो कम से कम जल को ग्रहण करती हो। सरकार भी इसके लिए उपयुक्त रूप पर समय-समय पर योजनाएं चलाती रहती है हमें उनका लाभ उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कहा कि जल है तो कल है तथा जल के बिना यह पृथ्वी निष्फल है। उन्होंने घर घर जाकर जल संरक्षण अभियान चलाने तथा हर घर में नल के टोंटरी लगाने के लिए एक अभियान चलाने की बात कही और कहा कि वो स्वयं भी दइस काम में अहं भूमिका निभाएंगे। उन्होंने लोगों जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार बच्चे से बूढ़े तक जल संरक्षण में भूमिका निभा सकते है। भगत सिंह ने बच्चों को जल संरक्षण के लिए भी संदेश देते हुए कहा कि बच्चे भविष्य की नींव है पानी की हर बूंद का सम्मान करना बहुत जरूरी है तभी पानी को बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पानी पीने का अगर अच्छा ना हो तो पेट संबंधी 70 प्रतिशत बीमारियों का कारण बनता है इसलिए हर नल पर टोंटी का होना आवश्यक है।
फोटो कैप्शन 3: जल संरक्षण पर बोलते हुए भगत सिंह समाजसेवी तथा पासपोर्ट भगत सिंह।
जेठ मास की तपती लू व गर्मी में धरना 72वें दिन रहा जारी
-मांग पूरी न किये जाने से लोगों में भारी रोष
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कनीना की आवाज। जेठ माह की तपती दुपहरी की लू एवं गर्मी को सहने करते हुए सेहलंग-बाघोत गांवों के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर कट की मांग को लेकर ग्रामीणों का धरना 72वें दिन भी जारी रहा। धरने की अध्यक्षता मास्टर विजयपाल सिंह सेहलंग ने की।
धरने के अध्यक्ष विजय सिंह चेयरमैन नौताना ने बताया कि सरकार झूठे आश्वासन तो दे रही है पर धरातल पर काम कुछ नही हो रहा है। उन्होंने बताया कि यह धरना जब तक जारी रहेगा तब तक काम शुरू नही हो जाता है।
उन्होंने कहा कि जो भी नेता एवं मंत्री धरना स्थल पर आया है बस उसने कट जल्द से जल्द बनवाने की बात कही है किंतु आश्वासन कोरे आश्वासन रहे हैं। उन्होंने कहा कि धरने पर बैठे लोग आश्वासन नहीं काम चाहते हैं जिसकी लंबे समय से मांग चली आ रही है। उन्होंने अविलंब कट शुरू करने की मांग की है।
इस मौके पर संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय सिंह चेयरमैन नौताना,मेनपाल सिंह ,सत्यवीर सिंह पूर्व सरपंच नौसवा,जयसिंह ,प्यारे लाल,नरेंद्र शास्त्री,हेमराज साहब,पहलवान धर्मपाल,डॉक्टर लक्ष्मण सिंह,ठेकेदार शेर सिंह, सत्य नारायण,वेद,सरपंच वीरपाल स्याना, भरत सिंह, एडवोकेट पीके यादव, कृष्ण,जयसिंह पंच व विभिन्न गांवों के वर्तमान पूर्व सरपंच, बीडीसी सदस्य आदि गणमान्य लोग मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 04: धरने पर बैठे लोग।
ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मियों का होता है विशेष खानपान
-सेहत को बरकरार रखने के लिए ग्रामीण लोग है अग्रणी
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कनीना की आवाज। सेहत के दृष्टिगत विशेषकर गर्मियों में खानपान का ग्रामीण क्षेत्र के लोग विशेष ध्यान रखते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं कम होती है किंतु सेहत के प्रति उनका रवैया बेहतरीन देखने को मिलता है। गर्मियों के दिनों में जहां ठोस आहार कम काम में लिए लेते हैं वही तरल आहार अधिक से अधिक प्रयोग किया जाता है। गर्मियों के दिनों में रोटी के रूप में मेसी रोटी खाई जाती है। चना,गेहूं या जो आदि की बनी होती है। ऐसी रोटियां ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी से प्रयोग करते हैं अपितु जब चने की पैदावार अधिक होती थी चने की रोटी खाते थे जो सेहत के लिए बहुत जरूरी है। यहां तक कि बासी मेसी रोटियां भी राबड़ी के साथ विशेष खाद्य पदार्थ ग्रामीण क्षेत्रों का है।
राबड़ी जो छाछ, जौ का आटा आदि हांडी में पकाकर बनाया जाता है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो छाछ में बनाया जाता है तथा छाछ डालकर ही इसे प्याज और बासी रोटी के साथ खाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस मामले में कभी से राबड़ी प्रयोग करते आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोग कभी राबड़ी को नहीं भूलते। चाहे वर्तमान पीढ़ी कोल्ड ड्रिंक पीने लग गई और चाय अधिक सेवन करती है किंतु ग्रामीण बुजुर्ग राबड़ी को अहमियत देते हैं। इस वक्त गर्मियों के दिनों में धाणी एवं भुगड़ा नाम से विशेष खाद्य पदार्थ का खाते हैं। ग्रामीण लोग जौ को भुनवाकर धाणी तो चने को भुनवाकर भुगड़ा बनाते हैं जिनको गर्मी के दिनों में बड़े चाव से खाया जाता है। यहां तक कि कुछ लोग जौ की धाणी का सत्तू भी बनाकर पीते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां विशेष रूप से खरबूजा ,खरबूजा,ककड़ी एवं मतीरा आदि खाते हैं। यद्यपि मतीरा दिनों दिन लुप्त होते जा रहे हैं किंतु आज भी बुजुर्ग मतीरे को तरसते हैं। तरबूज से जहां पानी की प्यास बुझाते हैं कोई सेहत के लिए भी लाभप्रद है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र तरबूज पर विशेष ध्यान देते हैं। यहां तक कि आपस में कोई लड़ाई झगड़ा हो जाता है और सुलहनामा बनता है तो तरबूज ही घर लेकर आते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में ककड़ी तरबूज और खरबूजा आदि विशेष रूप से चाव से खाए जाते हैं।
ग्रामीण ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का प्याज का विशेष लगाव रहा है। यहां तक कि हर घर में नींबू रखते हैं जिससे शिकंजी पीते हैं तथा प्याज एवं कच्चे आम को भून कर खाते हैं ताकि गर्मी से बचा जा सके। गर्मी के खाद्य पदार्थों के बारे में राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, कृष्ण कुमार, दिनेश कुमार एवं सुनील कुमार आदि बताते हैं की बुजुर्ग पुराने खानपान को आज भी नहीं भूले हैं। सब्जियों के रूप में बुजुर्ग लोग खाटा का साग और कढ़ी के अतिरिक्त रायता बनाकर खाते हैं क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की कमी नहीं होती। यही कारण है दही को रायते में बदल देते हैं और खाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी एक दूसरे के घर से छाछ मुफ्त में उपलब्ध हो जाती है जिसमें काला नमक, भुना हुआ जीरा पुदीना आदि डालकर बड़े चाव से पिया जाता है। जब भी कोई मेहमान आता है तो उसको चाय की बजाए राबड़ी या छाछ का गिलास थमाते हैं जो खाने में बेहतरीन होता है। कसी शहर से आने वाले व्यक्ति भी बड़े चाव से लस्सी को पीते हैं, चाय को दूर भगाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खाने-पीने की आदतें अच्छी है। यहां तक कि मक्खन भी प्रयोग किया जाता है, दूध का भी सेवन किया जाता है किंतु हर घर में प्याज जरूर खरीदी जाती है जिसे वर्ष भर खाते हैं। प्याज का राबड़ी के साथ विशेष संबंध माना गया है। जब कभी धूप लग जाती है तो कच्चे आम को भुनकर ही उसका उपयोग किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग मनोज कुमार, सुरेश कुमार, रविंद्र कुमार आदि बताते हैं कि ग्रामीण खानपान सबसे बेहतरीन खानपान है। शहरों का खानपान बहुत बेहतर नहीं होता ऐसे में शहरी लोग गांव में आकर कुछ समय बिताना चाहते हैं ताकि खानपान में सुधार करके अपनी सेहत बना सके।
फोटो कैप्शन 01: ग्रामीण क्षेत्रों में तरबूज की आई बहार।
9 दिनों तक पड़ेगी गर्मी, नौतपा दौरान लू चलेंगी
-अधिक से अधिक पानी एवं सिट्रस फलों का करें प्रयोग
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कनीना की आवाज। आगामी 25 मई से 2 जून तक पूरे 9 दिन जमकर गर्मी पड़ेगी। ऐसे में ऐतिहात बरतनी जरूरी है। इस दौरान सूर्य की किरणें सीधी ही धरती पर पड़ती है जिससे धरा का ताप बढ़ता है वही लू चलती है। यह 9 दिनों की अवधि बहुत कष्टदायक साबित होती है। ऐसे में इस दौरान गर्मी से बचना बहुत जरूरी है, वरना लू लगने और हैजा होने की समस्याएं पनप जाती है। गर्मी से बचने के लिए डाक्टरों और वैध से चर्चा की गई जिनका अलग-अलग विचार है।
मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे डा. अजीत कुमार का कहना है कि इस अवधि में अनावश्यक घर से बाहर न निकले यदि बहुत जरूरी हो तो घर से बाहर निकले लेकिन नंगे पैर और नंगे सिर कभी न घूमे। जब भी बाहर जाए तो साथ में पानी की बोतल जरूर रखें ताकि पानी को पी कर प्यास बुझा सके। इस दौरान लू पड़ती है इसलिए पूरे शरीर को अच्छी प्रकार ढक लेना चाहिए। घर में भी बैठे तो कूलर एवं पंखे की हवा में जरूर बैठे ताकि गर्मी न लगे।
वैद्य बालकिशन शर्मा बताते हैं कि नौतपा दौरान प्याज का अधिक से अधिक सेवन करें। प्याज लू एवं हैजा लगने से बचाती है, वही शरीर में खनिज एवं विटामिन प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि प्याज के अतिरिक्त जिन फलों और सब्जियों में ज्यादा पानी हो तो जरूर प्रयोग करें। जैसे इस दौरान विभिन्न प्रकार के जूस पीने चाहिए। गन्ना मौसमी, संतरा आदि के जूस उपलब्ध होते हैं वही इस दौरान तरबूज जैसे फल को भी खाया जा सकता है जो पानी की भी पूर्ति करता है। इस अवधि में हो सके तो आराम करें ।
उधर मेडिकल प्रैक्टिशनर डा वेद बताते हैं कि नौतपा बहुत कष्ट दाई होती है। इस दौरान लू लगने से बचने के लिए सिट्रस जाति के फल अधिक से अधिक प्रयोग करें । नींबू संतरा मौसमी आदि सिट्रस जाति में आते हैं। इनमें विटामिन भी मिलती है शरीर में पानी की पूर्ति भी होती है। उन्होंने बताया कि लू लगने पर घरेलू उपचार कच्चे आमी को भनकर उस का रस निकालकर उसमें थोड़ा सा चुटकी भर नमक मिलाकर पिया जाता है जो गर्मी से राहत देता है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में बहार न जाये।
वैद्य श्रीकिसान बताते हैं कि नौतपा सबसे कठिन साबित होता है। घर से बाहर नहीं जाना चाहिए। इस अवधि में अगर हो सके तो घर पर ही रहे। अधिक से अधिक हरी पत्तेदार एवं वाली सब्जियां खाए। प्याज का अधिक उपयोग करें। इस अवधि में पानी का अधिक से अधिक सेवन करें। गर्मी से बचने के लिए हो सके तो किसी कूलर ,पंखे एवं एसी आदि के हवा में बैठना चाहिए क्योंकि नौतपा दौरान बहुत अधिक पौधों और सब्जियों को नुकसान होता है। ऐसे में इंसान पर भी भारी प्रभाव सूर्य की किरणें करती है। इनसे बचना जरूरी है।
फोटो कैप्शन: मेडिकल प्रैक्टिशनर डॉ अजीत, डा वेद, वैद्य बालकिशन एवं वैद्य श्रीकिसान
अटेली विधानसभा क्षेत्र का आर्थिक विकास न होने के कारण आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री को सौंपेंगे ज्ञापन
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कनीना की आवाज। जिला महेंद्रगढ़ में जनसंवाद कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री के आगमन पर आम आदमी पार्टी कनीना कार्यालय में आप पदाधिकारियों की एक मीटिंग का आयोजन हुआ जिसमें आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
इस अवसर पर बोलते हुए एडवोकेट सत्यनारायण ने कहा कि अटेली हलका आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है तथा एनसीआर से बाहर हो गया है। इसलिए अटेली विधानसभा क्षेत्र को विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाए। जिसमें मुख्य मांग अटेली को उपमंडल का दर्जा जो की अटेली क्षेत्र वासियों कि उपमंडल बनाने की काफी पुरानी मांग है तथा विधायक सीताराम यादव ने भी इस बारे में लोगों को कई बार आश्वासन दे चुके हैं और कहा था कि फरवरी 2023 तक अटेली को मंडल बनाने की घोषणा कर दी जाएगी परंतु सरकार ने अब तक कोई ध्यान नहीं दिया है। इसके अलावा अटेली विधानसभा क्षेत्र में ना ही कोई मेडिकल कालेज न कोई आईआईटी संस्था तथा न आईटीआई कालेज है
इसलिए सरकार को आइआइटी इस क्षेत्र में बनाने की घोषणा करनी चाहिए अटेली हलका औद्योगिक तौर पर काफी पिछड़ा हुआ है। जहां पर सरकारी व गैर सरकारी उद्योग नहीं लगे हुए हैं यहां पर बड़ा औद्योगिक नगर बसाया जा सकता है कनीना जो कि एक ऐतिहासिक कस्बा है फिर भी उसका विधानसभा क्षेत्र खत्म करके जाटूसना में मिला दिया और अब अटेली से जोड़ दिया गया है। अब 2026 में नया परिसीमन होना है और जहां हरियाणा में 90 सीटें हैं उनको बढ़ाकर 120 के करीब विधानसभा सीट करनी चाहिए ताकि कनीना को विधान सभा का दर्जा बहाल हो सके जो कनीना सहित आसपास के गांव व ग्रामीणों की पुरानी मांग है। इसके अलावा कनीना में बाइपास सड़क बनाई जाए तथा सभी सड़कों की मरम्मत भी तुरंत प्रभाव से करवाई जाये और कनीना के सभी लिंक रोड महेंद्रगढ़ से रेवाड़ी, कनीना से कोसली, कनीना से दादरी, कनीना से अटेली, कनीना से नारनौल को फोर लाइन बनाया जाए। इसके अलावा 152 डी राष्ट्रीय राजमार्ग नारनौल- चंडीगढ़ से लोगों की मांग को देखते हुए यहां पर बाघोत-सेहलग के पास कट मंजूर कर इस पर तुरंत प्रभाव से काम शुरू किया जाए और इस रोड को झज्जर से केएमपी में मिलाया जाए। वह 152डी बाघोत रोड पर जो 40 गांव के लोग धरने पर बैठे हैं उनकी मांग जायज है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी उनकी इस मांग को मान चुके हैं इसलिए इस मांग पर तुरंत काम शुरू किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर आम आदमी पार्टी सतनारायण एडवोकेट, पूर्व प्रवक्ता महेंद्र सिंह राता ,आम आदमी पार्टी पूर्व इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह, मदन सिंह, कैप्टन विनोद भंवर सिंह, हरेंद्र शर्मा ,नवदीप एडवोकेट, नरेंद्र यादव, मुकेश यादव, महेंद्र सिंह, सुनील राव, ओमप्रकाश नीरज, राव राजपाल सिंह, सुरेंद्र यादव एवं प्रवीण कुमार आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 02: आम आदमी पार्टी के नेता बैठक करने के बाद।
हर प्रकार से चुनाव के लिए तैयार है कनीनावासी
-आरक्षण संबंधी सोशल मीडिया के पत्र ने निकाल दी कइयों की हवा
-चुनाव अभी होते नहीं आ रहे नजर
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कनीना की आवाज। नगरपालिका के प्रधान सतीश जेलदार ने 22 मई 2018 को शपथ ली थी तथा चुनाव 13 मई 2018 को हुये थे किंतु पत्र अनुसार उनका कार्यकाल 24 जून 2023 तक का निर्धारित कर दिया गया है।
पालिका प्रधान सतीश जेलदार ने 22 मई 2018 को शपथ ली थी परंतु सोशल मीडिया के एक पत्र ने में स्पष्ट कर दिया है कि उनका कार्यकाल 24 जून 2023 तक रहेगा। इस संबंध में पालिका प्रधान सतीश जेलदार से भी बात हुई है किंतु अभी तक उनके पास उनके कार्यकाल समापन के विषय में कोई पत्र नहीं मिला है। स्पष्ट है कि उनका कार्यकाल भी अब 24 जून 2023 तक की रखा गया है। उधर पत्र अनुसार कनीना नगर पालिका की प्रधान पद के लिए आरक्षण हो चुका है परंतु आज आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। यह पद महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इस पत्र की सूचना को लेकर के अनेक प्रकार की भ्रांतियां क्षेत्र में फैली हुई है, कुछ लोग इसे फर्जी करार देते हैं परंतु इसमें प्रदेश की 22 पालिकाओं का वर्णन है फर्जी नहीं हो सकता है? सभी 22 पालिकाओं का सही सही आंकड़ा लिखा हुआ है। यह सत्य है कि इस पर किसी प्रकार का कोई एंडोर्समेंट नहीं है जिसको लेकर के इसे फर्जी माना जा रहा है परंतु जो कुछ हो, कनीनावासी हर प्रकार से चुनाव लडऩे के लिए तैयार है। अगर प्रधान पद महिला के लिए आरक्षित हो जाता है तो बहुत से धुरंधरों के लिए केवल पार्षद का चुनाव लडऩा मजबूरी बन जाती है जिसके चलते पार्षद पद का चुनाव कांटे की टक्कर तलवार की धार के समान होगा क्योंकि चुनाव लडऩा चाहने वाले लोग किसी प्रकार पीछे हटने वाले नहीं। यदि प्रधान पद के लिए उनके परिवार से कोई महिला तैयार नहीं होती है तो वे पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं। वैसे भी पार्षद पद के लिए चुनाव लडऩे वाले अभी तक बहुत कम लोग आगे आ रहे हैं क्योंकि प्रधान की शक्ति इस बार अधिक हो गई है, उसका चुनाव सीधा होने की वजह से उसे पार्षदों का काम कम हो गया है भविष्य में प्रधान बनने के बाद किसी प्रस्ताव को पारित करते समय इन पार्षदों की जरूरत हो सकती है। ऐसे में बड़ा और सशक्त पद प्रधान का बना दिया गया है जिसको लेकर के दर्जनों लोग तैयार थे किंतु जब से पत्र की सूचना सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई है तब से लोग शांत बैठ गए हैं। उनका अब विचार और मंथन हो रहा है कि किस को मैदान में खड़ा किया जाए। यह सत्य है कि चुनाव लडऩे वाले अब अपनी मां, बहन, बेटी या पत्नी को चुनाव लड़ा सकते हैं, स्वयं भी पार्षद पद के लिए चुनाव लडऩे के लिए तैयार हो रहे हैं। कनीना के पार्षद पद के लिए चुनाव लडऩे वाले महेश बोहरा एक है। उनके पिता राव सत्यवीर बोहरा भी पार्षद रह चुके हैं। अपने पिता के पद चिन्हों पर चलते हुए पार्षद पद के चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं क्योंकि उन्होंने तो कभी से ही पार्षद पद के की घोषणा की है और पालिका प्रधान बनने की इच्छा नहीं रही की? विजय चेयरमैन भी पार्षद पद के चुनावों के लिए तैयार हैं। अब भविष्य में जब कोई आधिकारिक पत्र आएगा तब की कोई आगे की कार्रवाई चल पाएगी। बहरहाल अभी चुनाव होते नजर नहीं आ रहे हैं क्योंकि जून महीना बाकी है। यदि चुनाव जून में होते है तो अभी तक कोई कार्रवाई हो चुकी होती। एक और जहां प्रधान का कार्यकाल भी 24 जून तक का किया हुआ है वहीं मतदाता सूचि का अंतिम प्रकाशन भी अभी तक नहीं हुआ है। ऐसे में नहीं लगता कि जून माह में कोई चुनाव हो सकेंगे। ऐसे में जून तक चुनाव नहीं होते तो पत्र में कहे अनुसार 31 दिसंबर 2023 से पहले पहले ही चुनाव करवाए जाएंगे। अब सभी की नजरें इन चुनावों पर टिकी हुई हैं।
आजादी के 76 साल बाद भी नहीं हट पाया महिलाओं का घूंघट
-महिला आरक्षित पदों का हो रहा है दुरुपयोग
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कनीना की आवाज। चाहे हरियाणा सरकार ने भरसक प्रयास किया है और महिलाओं को आगे लाने के बहुत सार्थक प्रयास भी हुए हैं, उन्हें 33 प्रतिशत आरक्षण भी दिया गया है परंतु आजादी के 76 साल बीत गए हैं अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं घूंघट से बाहर नहीं आ पाई हैं। यही कारण है की पंच, सरपंच, पार्षद एवं प्रधान आदि पदों पर आसीन महिला खुद तो काम नहीं करती बल्कि उनके भाई, पति, ससुर, देवर या अन्य कोई उनकी जगह काम करता है। अब तो आलम यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं कई कई पंच एवं सरपंच बन गए हैं। अगर किसी के घर में महिला सरपंच है वह कहीं नजर नहीं आती उसकी जगह उसका पति भाई, देवर, ससुर एवं अन्य कोई उस पद का दुरुपयोग करता हुआ देखा जा सकता है। यही हालात अन्य पदों की है। सवाल उठता है कि जब महिलाएं आगे नहीं आना चाहती तो ऐसे आरक्षण का क्या फायदा? अभी भी समाचार पत्रों में घूंघट वाली फोटो छपती हैं। एक और अखबार समाचार पत्रों का कहना है कि घूंघट वाली फोटो नहीं छपनी चाहिए यह कुरीति का बढ़ावा देना है वहीं बहुत से फोटो समाचार पत्रों में घूंघट के छपते देखे गये हैं। जब तक महिलाएं घर से बाहर नहीं आएंगी तब तक देश का विकास संभव नहीं है।
यदि पद किसी के पास है और उसका दुरुपयोग कोई अन्य कर रहा है तो यह शर्त सभी विभागों में क्यों नहीं लागू कर दी जाए ताकि जहां कहीं भी महिला कार्यरत है उसकी जगह उसका पति, भाई या देवरा नौकरी कर लेगा? यह प्रश्न ग्रामीण क्षेत्रों में आम उठने लगा है। अब तो लोग जागरूक हो गए हैं, उनका कहना है कि जब तक महिला आगे नहीं आना चाहती तो ऐसी महिलाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
एक कार्यक्रम में अधिकारी ने बरबस पूछ लिया कि यहां की सरपंच कौन है तो पता लगा महिला सरपंच है और उसकी जगह उसके परिवार वाला बन ठन कर अधिकारी के पास बैठा था अधिकारी ने उसे अच्छी डांट पिलाई और कहा कि जो सरपंच है उसे हाजिर करें। आखिरकार अपना सा मुंह लेकर वह व्यक्ति उठकर चला गया और उसकी जगह असली सरपंच आकर बैठी। अधिकारी ने उसको भी खरा खरा कहा सुनाया। ऐसी कार्रवाई हर अधिकारी को करनी चाहिए ताकि महिलाएं आगे आ सके। इस प्रकार के पदों का दुरुपयोग करने वाले लोगों के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए। महिलाओं को जो पद मिला हुआ है उस पर पर बिठाया जाना चाहिए, घूंघट/पर्दा प्रथा का अंत होना चाहिए। वरना देश का भविष्य क्या होगा? घूंघट/पर्दा प्रथा पुरानी हो चुकी है परंतु अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में घूंघट नहीं हट पा रहा है जिसका परिणाम अच्छा नहीं हो रहा है। एक बार सभी लोगों को जागरूक होकर आगे आना चाहिए और महिलाओं को घूंघट से बाहर निकाल कर उनके पदों पर उन्हें बैठाया जाना चाहिए वरना उन्हें अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए। जो घूंघट से बाहर आकर खुद का काम स्वयं कर सके उन्हें आगे लाना चाहिए।
कनीना नगर पालिका चुनावों में अब फिर आई नरमी
-उछल कूद करने वाले सोशल मीडिया के पत्र ने किये फेल
-आरक्षण संबंधित पत्र आने का इंतजार
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कनीना। कनीना नगर पालिका में सतीश जेलदार ने 22 मई 2018 को प्रधान पद की शपथ ली थी। उनका कार्यकाल 24 जून 2023 तक का निर्धारित कर दिया गया है। नगरपालिका के लिए जहां प्रधान पद के लिए आरक्षण भी घोषित हो चुका है। अब कनीना नगर पालिका का प्रधान पद महिला के लिए आरक्षित होगा, ऐसे संकेत मिल चुके हैं
उल्लेखनीय है कि कनीना कस्बे में जहां पहले भी दो योजनाओं में दो महिलाएं प्रधान रह चुकी है, एक बार फिर से महिला को यह कमान संभाली जाएगी। कुछ भी हो महिला या पुरुष सभी चुनावों के लिए तैयार हैं। अधिकारिक पत्र आना अभी बाकी है।
इससे पहले भी शारदा और संतोष देवी पालिका प्रधान दो अलग-अलग योजनाओं में रह चुकी है। अब एक बार फिर से महिला को कमान दी जाएगी। सबसे बड़ी विडंबना है कि पूर्व प्रधान और वर्तमान प्रधान भी इस चुनाव प्रक्रिया में प्रधान पद के चुनाव से बाहर हो गए हैं, बेशक वे चाहे तो पार्षद के चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन प्रधान पद के चुनाव डायरेक्ट होने के चलते प्रधान नहीं बन पाएंगे। नए सिरे से चुनावी जोड़ दौड़ में लग गए हैं। चूंकि महिला को ही चुनाव लड़वाना पड़ेगा। क्या कहते हैं पालिका के वर्तमान और पूर्व प्रधान----
पालिका के वर्तमान प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि उनकी पुत्रवधू अनुराधा पढ़ी लिखी है जो यह चुनाव लड़ेगी तथा वो स्वयं तो पहले से ही चुनाव न लडऩे की बात कह चुके हैं। उनका पुत्र चुनाव लडऩे का इच्छुक है किंतु पालिका प्रधान आरक्षित होने के कारण अब वो भी चुनाव से बाहर हो गए हैं। हर प्रकार से चुनाव लडऩे के लिए महिला एवं पुरुष तैयार हैं। महिला के लिए प्रधान पद आरक्षित हो जाएगा तो पार्षद के चुनाव लडऩा और भी कठिन हो जाएगा क्योंकि प्रधान पद से वंचित रहे लोग पार्षद के लिए हाथ पैर मारेंगे।
उधर पालिका के पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह लोढ़ा ने बताया वो स्वयं चुनाव न लड़ पाए किंतु उनके परिवार के सदस्य चुनाव जरूर लड़ेंगे। उन्होंने बताया कि पुत्रवधू दीप्ती राव उनके परिवार से चुनाव लड़ सकती है।
वहीं पूर्व पालिका प्रधान मास्टर दिलीप सिंह की पुत्रवधू सुमन चौधरी चुनाव लड़ सकती है। एडवोकेट दीपक ने बताया कि वह चुनाव लडऩे के लिए तैयार था किंतु महिला के लिए प्रधान पद आरक्षित होने के कारण वे अपनी पत्नी सुमन चौधरी को चुनाव लड़वाएंगे। एकदम चुनाव लडऩे वालों के लिए आरक्षण ने समस्या पैदा कर दी है। जो पुरुष चुनाव लडऩा चाहते थे वह अब प्रधान पद से पीछे हट गए हैं। कनीना पालिका जहां चुनाव लडऩे वाले नए-नए चेहरे उभर सकते हैं। अशोक वर्मा वार्ड चार के घर से महिला चुनाव लडऩे के लिए तत्पर है।
कमल पूर्व पार्षद ने बताया कि उनके परिवार से भी एक महिला अवश्य चुनाव लड़ेगी किंतु उन्होंने नाम उजागर नहीं किया। उधर एडवोकेट पंकज यादव की मां संतोष देवी यह चुनाव लड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले वो स्वयं चुनाव लडऩे का इच्छुक था किंतु आरक्षण के बाद उनकी मां चुनाव लड़ेगी जो वर्तमान में पार्षद है। ऐसे में अब कनीना में महिलाओं के लिए फिर से चुनाव लडऩे की प्रक्रिया शुरू हो गई है।





























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