Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Friday, September 20, 2024


 
आवागमन में बाधा डालने पर ट्रैक्टर ट्राली चालक के विरुद्ध मामला दर्ज
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कनीना की आवाज।
 कनीना बस स्टैंड के पास एक ट्रैक्टर ट्राली चालक सड़क के बीच में अपने ट्रैक्टर को बंद करके आराम से बैठा हुआ था, जिससे आवागमन में दिक्कत आ रही थी। कनीना पुलिस मौके पर पहुंची और उसके विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है। नाम पूछे जाने पर उसने संदीप गोलाहेडा, मुंडावर, जिला अलवर बताया।




पत्रकारिता एक बढ़ता हुआ जोखिम
-परिवार को भूखा रखने का एक बेहतर जरिया है पत्रकारिता
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कनीना की आवाज।
यूं तो हर इंसान में पत्रकार का गुण होता है और पत्रकारिता करने का एक शौक और जुनून भी होता है। पत्रकारिता में यूं तो दो प्रकार के पत्रकार होते हैं एक तो वह जो कम से कम हिंदी से स्नातकोत्तर होते हैं तथा पत्रकारिता में डिप्लोमा या डिग्री रखते हैं और दूसरे कुछ ऐसे पत्रकार होते हैं जिनका किसी योग्यता की जरूरत नहीं होती, लेखन कला अच्छी होनी चाहिए। दोनों ही प्रकार के पत्रकार क्षेत्र में देखे जा सकते हैं। आजकल तीसरी एक और पत्रकारिता की जमात आ गई है कि अपना कैमरा लो वीडियो बनाओ और सोशल मीडिया पर डाल दो। आज के दिन तीसरी प्रकार के पत्रकार बहुत नाम कमा रहे हैं। प्रिंट मीडिया जिसमें समाचार पत्र आते हैं, ऐसे पत्रकार अब धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं और आने वाले समय में वे और भी कम हो जाएंगे। ऐसा भी समय आ सकता है कि ये प्रिंट मीडिया के पत्रकार देखने में भी नहीं मिलेंगे और तत्पश्चात कुछ पुस्तकों में ऐसे पत्रकारों का नाम पढऩे को मिलेगा। पत्रकारिता बहुत जटिल होती जा रही है, अनेकों लोगों के फोन मेरे पास समय-समय पर आते रहे हैं। करीब 1988 से लगातार पत्रकारिता में हूं इसलिए अनेक लोगों के फोन और कई जगह किसी सभा में भी मुझे बोलने का मौका दिया गया और मेरे से यही पूछा गया कि पत्रकारिता में क्या मिलता है?
 मैंने एक ही बात स्पष्ट कही है कि पत्रकारिता में वैसे तो कुछ भी नहीं मिलता लेकिन लोगों का बस चलता है लात, घूंसे, गाली, मारपीट, थप्पड़ चटेका आदि उपहार जरूर मुफ्त में मिल जाते हैं।
साथ में पत्रकारिता तनाव भरा पेशा बनता जा रहा है जिससे मुफ्त में बीपी, उच्च रक्तचाप, शुगर, की बीमारी, एल्जाइमर, तनाव, लकवा,दमा, खांसी आदि अनेक प्रकार की बीमारियां साथ में घर के खाने से दूरी, परिवार से दूर और समस्याएं भी मुफ्त में मिल जाती है। अखबार की बात करें तो एक युग था जब पत्रकारिता में कुछ पैसे मिलते थं जिसे पारिश्रमिक नाम दिया गया है परंतु धीरे-धीरे पारिश्रमिक भी बंद होता चला गया। विशेषकर कोरोना काल ऐसा राक्षस आया जिसमें सब कुछ तहस-नहश कर दिया। लोगों को तो खा ही गया वहीं पत्रकारों के पारिश्रमिक को ही खत्म कर दिया गया। महामारी के बाद से कोई पारिश्रमिक नहीं दिया जा रहा है। जहां तक कनीना के पत्रकार डा. होशियार सिंह की पत्रकारिता के बारे में कहना चाहूंगा कि कभी 100 रुपये प्रति माह मिलते थे जब दैनिक ट्रिब्यून में काम करता था। यूं तो दस से अधिक समाचारपत्रों में काम कर चुके हैं।
तत्पश्चात उन्होंने दैनिक जागरण में काम किया वहां 500 रुपये प्रतिमाह मिले, फिर बढ़ते गए और 1500 रुपये प्रतिमाह तक दिए गए। तत्पश्चात कोरोनाकाल में वो भी बंद हो गये। वर्तमान में एक नया पैसा भी नहीं मिलता। हां, विज्ञापन केा जरूर कमीशन मिलता हैं। अलग-अलग समाचारपत्रों में अलग-अलग विज्ञापन राशि का प्रतिशत दिया जाता हैं। अधिकतम 20 प्रतिशत तक कमीशन मिलता है। एक विज्ञापन अगर 100 रुपये का देते हैं तो करीब 20 रुपये मिलते हैं जिसमें पत्रकार को लिखना, पढऩा, नेट, अपना लेपटाप सब कुछ खर्चा अपना करना पड़ता है। अब इस विज्ञापन के जरिए कितने पत्रकार अपने पेट को तथा परिवार के पेट को पाल पाएंगे यह सभी के सामने स्पष्ट है। यह भी सत्य है कि कुछ लोगों का फोन आए कि अब तो चुनाव के समय काफी विज्ञापन मिल रहे होंगे, खुशी की बात है कि अभी तक डा. होशियार सिंह को महज दस हजार रुपये का विज्ञापन मिला है और यह भी कह पाना कठिन है की कोई और विज्ञापन मिलेगा। अन्य किसी पत्रकार को के बारे में चर्चा चलती है कि उसने 50 लाख के विज्ञापन मिले, किसी को 20 लाख रुपये के विज्ञापन मिले यह वो पत्रकार और उन्हें विज्ञापन देने वाले जाने परंतु अनेक आनलाइन समाचार पत्र, आफलाइन समाचारपत्र ,कनीना ब्लॉक आदि  होशियार सिंह के पास चल रहे हैं और बार-बार निवेदन करने पर भी कोई विज्ञापन नहीं मिल रहे है। यह सत्य है कि स्कूलों के विज्ञापन पिछले तीन सालों से एक भी नहीं मिला है। कोई क्षेत्र में उद्योग, फैक्ट्री आदि है नहीं जिससे विज्ञापन मिले। ऐसा क्यों कहा जा रहा है ताकि पता लग जाए की पत्रकारिता में कितनी आय होती है। यह सत्य है कि नारनौल, महेंद्रगढ़ और अन्य जिला मुख्यालयों पर जो पत्रकार होते हैं उनको 40 हजार से 50000 रुपये, किसी को कुछ कम और ज्यादा वेतन मिलता है परंतु ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकारों के साथ सदा ही अन्याय होता आया है और होता भी रहेगा जबकि सबसे अधिक मेहनत ग्रामीण पत्रकार ही करते हैं। से सबसे बड़ी बात है होशियार सिंह सुबह कंप्यूटर पर बैठते हैं और रात के 11 तक बज जाते हैं। ऐसे में खाना पीना, परिवार के साथ अधिक समय दे पाना असंभव हो पा रहा है। ऐसे में ऐसी पत्रकारिता को हम बेहतर नहीं कहेंगे। फिर भी लोगों के विचार हैं वो उनके अपने हैं।






पोलिंग पार्टियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम से गैर हाजिर रहने वाले 7 कर्मचारियों को नोटिस जारी
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कनीना की आवाज।
विधानसभा आम चुनाव के लिए नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र की पोलिंग पार्टियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम से गैर हाजिर रहने वाले सात कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
यह जानकारी देते हुए नांगल चौधरी के एसडीएम एवं रिटर्निंग अधिकारी रमित यादव ने बताया कि आज नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र की पोलिंग पार्टियों की द्वितीय ट्रेनिंग सभागार भवन नारनौल में आयोजित की गई थी। इस दौरान 7 कर्मचारी प्रशिक्षण में हाजिर नहीं हुए। इन सभी कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है। अगर इन्होंने निर्धारित समय सीमा में नोटिस का उचित जवाब सही कारण सहित नहीं दिया तो उनके खिलाफ आगामी कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में किसी कर्मचारी द्वारा की गई लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले में चुनाव आयोग बहुत ही सख्त है। इन सभी पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।






पगड़ी की मांग बढ़ी
- एक कार्यक्रम में कम से कम चाहिए  10 पगड़ी
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कनीना की आवाज।
 ज्यों ज्यों मतदान नजदीक आएगा नेताओं की जनसभाएं नुक्कड़ सभाएं बढ़ती जाएंगी। जिसके चलते पगडिय़ों की मांग भी बढ़ती ही जा रही है। कभी इक्का-दुक्का पगड़ी बिकती थी आज अनेक पगडिय़ां एक ही दिन में बिक जाती हैं। यही कारण है कि अब तो पगड़ी बेचने वाले खुश नजर आ रहे हैं।  अलग-अलग प्रकार की पगडिय़ों की मांग बढ़ी है। विवाह शादी में जो पगडिय़ां काम में लाई जाती थी वो भी अब तो प्रयोग में लाई जा रही है। पगड़ी विक्रेताओं से इस संबंध में बात हुई।
 पगड़ी विक्रेता देवकी, रानी, महेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह आदि ने बताया कि वो पगड़ी रखते हैं और दुकान पर बेचते हैं परंतु जैसे पगड़ी की मांग बढ़ी है उन्होंने भी पगड़ी के आदेश बढ़ा दिए हैं।
उधर रमेश कुमार ,दिनेश कुमार, महेश कुमार ने बताया कि एक-एक कार्यक्रम में कम से कम 10 पगडिय़ां चाहिए। पगडिय़ों की संख्या बढ़ भी सकती है। प्रतिदिन अटेली विधानसभा क्षेत्र से 8 प्रत्याशी खड़े हुए हैं और विभिन्न गांवों में दौरा कर रहे हैं। 109 गांव अटेली विधानसभा के हैं जिनमें प्रतिदिन कम से कम 10 गांवों का दौरा एक नेता करता है। इस प्रकार 80 जनसभाएं 8 प्रत्याशी करते हैं और उनमें 10 पगडिय़ां प्रत्येक कार्यक्रम में चाहिए। इस प्रकार 800 से 1000 पगडिय़ां प्रतिदिन एक विधानसभा क्षेत्र में बिक रही हैं। इस प्रकार पगडिय़ों की मांग बढ़ती ही जा रही है और विधानसभा क्षेत्र में पगडिय़ों का बोलबाला है। सभा में सम्मान बतौर नेता को पगड़ी जरूर पहनते हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में सम्मान का सूचक है। जहां भी सभा होती है वहां पहले पगडिय़ों और फूल मालाओं का प्रबंध किया जाता है ताकि नेता के आने पर उनका स्वागत पगड़ी और फूलमालाओं से किया जा सके।
 फोटो कैप्शन 10: नेताओं के लिए पगड़ी तैयार करते हुए उनके समर्थक



बढऩे लगी है बहस
चुनाव चर्चाएं जोरों पर
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कनीना की आवाज।
 ज्यों ज्यों मतदान की तिथि नजदीक आ रही है त्यों त्यों चुनावी चर्चाएं बढ़ रही है। हुक्के की गुडग़ुड़ाहट पर विशेष कर या फिर चाय की चुसकी पर आपस में  बहस देखी जा सकती है।  चुनावी चर्चा से कोई भी दूर नहीं है चाहे कोई महिला, पुरुष हो या फिर बच्चे एवं युवा हो इस बहस में शामिल हो रहे हैं। सुबह से शाम तक माइकों की गूंज या फिर आपसी बहस सुनाई देती है। माइकों पर बस वोट डालने की अपील कर रहे हैं। यही कारण है कि अब चुनावी चर्चा में गर्माहट आने लगी और आपस में चुनावी चर्चा इस कदर बढ़ जाती है कि हाथापाई की नौबत भी आ जाती है। जो चर्चा का विषय होता है उसमें महज तीन चार बातों पर ही चर्चा चलती है। सत्ता पक्ष ने अग्निवीर योजना चलाई जो क्षेत्र के लोगों को नहीं सुहाती। इस पर कुछ लोग चुनावी चर्चा में शामिल होकर अग्निवीर को अच्छी योजना नहीं बता रहे हैं। युवा बेरोजगार बढ़ते ही जा रहे हैं, रोजगार के कोई अधिक अवसर नहीं मिले हैं। सत्ता पक्ष में जहां यदि कर्मियों की बात की जाती है तो उन्हें पुरानी पेंशन बहाल न करने और स्टेट अवार्डी शिक्षकों की मांगों को अनदेखा करने की चर्चाएं आम हैं। जिसके चलते सत्ता पक्ष को खराब बताया जा रहा है। वहीं कुछ चुनावी चर्चा करने वालों का कहना है कि सरकार ने सत्ता में रहते हुए क्षेत्र के विकास कार्यों पर ध्यान देना चाहिए था किंतु अभी तक विकास कार्य नहीं हुए। कनीना के लोग तो यह भी कह रहे हैं कि बाई पास बनाने की योजना चली वह भी सिरे नहीं चढ़ाई। इस प्रकार में सत्ता पक्ष का विरोध कर रहे हैं। कनीना का मिनी बाईपास भी नहीं बनाया गया।  उधर कुछ लोगों का कहना है कि कनीना के विकास कार्यों में जिनका सबसे अधिक योगदान है उन्हें वोट मिलने चाहिए। इसी कड़ी में उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी ने जमकर विकास कार्य करवाए थे। कनीना को उपमंडल बनाया तथा कालेज बनवाया।  इसलिए उन्हें मौका मिलना चाहिए जबकि कुछ अन्य योजनाओं को भी अमली रूप कांग्रेस ने दिया था इसलिए कांग्रेस के पक्ष में भी है। कुछ लोग वो हैं जो यह कहते हैं कि हमारे बीच सुख-दुख में कौन अधिक भागीदारी निभा रहे हैं और इसमें भी लगभग सत्ता पक्ष और विपक्ष सभी का योगदान कम या अधिक रहा है। एक बात पर कुछ चर्चा करने वाले साफ कहते हैं कि अब तो भाजपा की ऐसी प्रत्याशी अटेली विस मैदान से खड़ी हुई है जो चुनाव जीत गई तो फुर्र हो जाएगी क्योंकि न तो यहां उनका गांव है न ससुराल है और वैसे भी उनके परिजन कभी किसी से अच्छे ढंग से नहीं मिलते हैं। इसलिए वोट देने चाहिए जो सबकी सुने, सभी के बीच में बैठा मिले। यही कारण है कि अटेली से तीन प्रत्याशियों के बीच जबरदस्त टक्कर बताई जा रही है। जिनमें भाजपा की आरती राव, कांग्रेस से अनीता यादव और बसपा प्रत्याशी के बीच तिकोना मुकाबला होने की चर्चा चलती है। कभी-कभी चर्चा इतनी गरमजोशी से होती है कि हाथापाई की नौबत आ जाती है परंतु आसपास के लोग इकट्ठे होकर समझ जाते हैं कि चुनावी चर्चा है ना कि आपस में लड़ रहे। ऐसा माहौल हर गली मोहल्ले, दुकान, संस्थान आदि में भी देखने को मिल रहा है।
 फोटो कैप्शन 09: चुनावी चर्चा की एक फोटो




अल्जाइमर रोग दिवस -21 सितंबर
 प्रारंभ में ही रोग का निदान संभव है बाद में नहीं -डा. मोरवाल
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कनीना की आवाज।
 अल्जाइमर जिसे भूलने का रोग नाम से जाना जाता है। इस बीमारी में याददाश्त कमजोर हो जाती है जिससे निर्णय नहीं ले पता। यहां तक की बोलने की क्षमता भी कम होती चली जाती है। यह वास्तव में एक पैतृक रोग माना गया है, इसके पीछे रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवन शैली आदि कारण हो सकते हैं।  60 वर्ष की उम्र में के आसपास होने वाली इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है। यदि की शुरुआती दौर में रोग पर काबू पाया जा सकता है जैसे-जैसे इंसान बूढ़ा होता जाता है याददाश्त कमजोर होती चली जाती है, दिमाग के काम करने की क्षमता में गंभीर बदलाव आ जाते हैं, इस समय दिमाग की कोशिकाएं नष्ट होनी शुरू हो जाती है, दिमाग में जो कोशिकाएं होती है वो अन्य कोशिकाओं से संवाद करके एक नेटवर्क बनाती है किंतु जब यह नेटवर्क नहीं बन पाती तो देखने, सुनने, सूंघने आदि में गिरावट आ जाती है।
   --इस बीमारी को डिमेंशिया नाम से जाना जाता है जो आयु के अनुसार बढ़ता चला जाता है। वास्तव में इसके पीछे मस्तिष्क की कोशिकाएं मरती चली जाती, खत्म होती चली जाती है। यदि प्रारंभ में इसको पकड़ लिया जाए तो इलाज संभव है। कुछ थेरेपी इसके लिए चलाई जाती है। यह एक पैैतृक बीमारी होती है जो अधिक उम्र के व्यक्तियों में अधिक मिलती है। इस रोग की सात स्टेज होती है। प्रारंभिक स्टेज में तो अक्सर अधिकांश व्यक्ति शामिल हो जाते हैं किंतु दूसरी और तीसरी स्टेज तक बहुत कम लोग पहुंचते हैं। यदि उसे समय इसे पकड़ लिया जाए तो निश्चित रूप से इसका कुछ समाधान हो सकता है। इस बीमारी में जहां बोलने धीरे-धीरे याददाश्त खत्म होने और तत्पश्चात एक ऐसी अवस्था आती है कि जब अपने पर ही काबू नहीं कर पाता। लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते यही कारण है कि बाद में यह बड़ी समस्या बनकर उभरती है। इस रोग में याददाश्त खत्म, सामान्य कामकाज करने में कठिनाई, भाषा के साथ समस्या, समय और स्थान में निर्णय लेने में कठिनाई,मूड में बदलाव, व्यक्तित्व में बदलाव, प्रयास करने में  अक्षमता आ जाती है।
    ---- डा. जितेंद्र मोरवाल, कनीना
फोटो कैप्शन:डा जितेंद्र मोरवाल





अन्तर्राष्ट्रीय शांति दिवस-21 सितंबर
व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास शांति के धरातल पर ही है संभव-अमृतलाल
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कनीना की आवाज।
शांति का वास्तविक स्नोत हमारे भीतर ही है। अपने मन को शांत करना ही आंतरिक शांति का सूत्र है। असल में ये सभी उत्प्रेरक तो हमारे अंतस को संतुलन प्रदान करने में सहायक मात्र बनते हैं। शांति हमारे जीवन में इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि शांत वातावरण में ही मनुष्य के रचनात्मक व्यक्तित्व का विकास होता है। शांति ही सकारात्मकता की वृद्धि करती है। शांति में ही प्रगति न केवल निहित होती है, अपितु उसे समृद्धि की पहली सीढ़ी भी माना जाता है। व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास शांति के धरातल पर ही संभव है। इसीलिए हमें यथासंभव शांति के सान्निध्य में रहने का प्रयास करना चाहिए। हमारी संस्कृति में तो पृथ्वी से लेकर समस्त अंतरिक्ष की शांति के लिए प्रार्थना की गई है। हमें उसी संस्कृति को समृद्ध करना है।
हम सभी जीवन में शांति की कामना करते हैं। शांति केवल संघर्ष या हिंसा के अभाव का नाम नहीं है। यह एक सकारात्मक आंतरिक घटना है। जब हम विश्व शांति की बात करते हैं, तो हम एक आवश्यक सत्य को भूल जाते हैं। विश्व शांति या बाहरी शांति, व्यक्तियों में स्वयं के साथ शांति के बिना होना असंभव है। एक शांतिपूर्ण दुनिया को आकार देने के लिए, नैतिक मूल्यों की ओर बढऩे का समय है जो किसी भी मानव समाज का आधार बनते हैं।
--- अमृतलाल, स्पेशल टीचर
आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में शांति और शकुन के लिए हम तरह-तरह के प्रयास करते हैं। असल में मानसिक शांति की अवस्था मस्तिष्क की तरंगों के स्वरूप को अल्फा स्तर पर ले आता है जिससे चिकित्सा की गति बढ़ जाती है। मस्तिष्क पहले से अधिक सुन्दर, नवीन और कोमल हो जाता है। मानसिक शांति मस्तिष्क के आतंरिक रूप को स्वच्छ व पोषण प्रदान करती है। जब भी आप व्यग्र, अस्थिर और भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं तब ध्यान के माध्यम से आप अपने आप को शांत कर सकते हैं और मानसिक विश्रांति की अवस्था में हमेशा नकारात्मक भावनाएं दूर होती हैं। मस्तिष्क और शरीर को आराम मिलता है। मानसिक क्षमता बढ़ती है। तनाव से राहत मिलती है। इसलिए हमें बारंबार ध्यान करना चाहिए और उससे प्राप्त उत्तरोत्तर शंति के प्रभाव को बनाए रखना चाहिए। हमें प्रेम, अच्छाई और सामंजस्यता के विचारों को अवश्य प्रसारित करते रहना चाहिए।
    शांति से ही आपसी भाईचारा कायम रह सकता है । विश्व के कल्याण में भी हमेशा शांति और सद्भाव की आवश्यकता पड़ती रही है । कई बार शांति स्थापित करने के लिए धर्म युद्ध का होना भी आवश्यक हो जाता है।
जैसा कि गीता में वर्णित है कि महाभारत के युद्ध के दौरान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए कहा था अगर तीनों लोक देने से शांति मिलती हो तो यह बहुत सस्ती रहेगी लेकिन तीनों लोक देने के बाद भी दुर्योधन क्या तुम्हें शांति से नहीं रहने देगा इसलिए युद्ध तो करना ही पड़ेगा।
   --लालदास महारज
फोटो कैप्शन: लालदास महाराज, अमृतलाल



 महेंद्रगढ़ पुलिस व आरपीएफ के जवानों ने कनीना क्षेत्र में निकाला फ्लैग मार्च
-नाकाबंदी कर वाहनों की चैकिंग की।
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कनीना की आवाज।
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर महेंद्रगढ़ पुलिस अलर्ट मोड़ पर है। पुलिस अधीक्षक अर्श वर्मा के दिशा निर्देशानुसार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कनीना क्षेत्र में फ्लैग मार्च निकाला गया। पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस टीम व आरपीएफ के जवानों ने आम नागरिकों को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं स्वतन्त्र रुप से चुनाव प्रक्रिया में पुलिस का सहयोग करने की अपील की। महेंद्रगढ़ पुलिस और आरपीएफ के जवानों ने नाकाबंदी कर वाहनों को चेक किया गया, उनके कागज भी चेक किए गए। इसके साथ ही संदिग्ध लगने वाली गाडिय़ों को साइड में खड़ी करवाकर उसको अंदर से पूरा जांचा गया ताकि किसी भी प्रकार के हथियार, मादक पदार्थ आदि को पकड़ा जा सके।
जिला महेंद्रगढ़ में विधानसभा चुनाव-2024 को शान्तिपूर्ण एवं निष्पक्ष करवाने तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने अर्धसैनिक बल के जवानों के साथ मिलकर कनीना क्षेत्र में फ्लैग मार्च निकाला। उन्होंने कहा कि मतदाता पूरी निडरता के साथ अपने विवेक व स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करें। जहां भी संवेदनशील मतदान केन्द्र हैं, वहां पर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं तथा संदिग्ध किस्म के लोगों पर पूरी निगरानी रखी जा रही है। पुलिस द्वारा बूथों को चेक कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया जा रहा है और इस दौरान मिली खामियों को दूर कराने के लिए संबंधित विभाग से पत्राचार किया जा रहा है।
पुलिस प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि यह फ्लैग मार्च कनीना के गांव मालङा, अगिहार, सेहलंग, बवाना, नौताना, स्याणा, पोता गांव के विभिन्न गलियों व मार्गों से होकर गुजरा। फ्लैग मार्च का उद्देश्य आमजन में सुरक्षा की भावना पैदा करना है, ताकि वे निर्भय होकर अपना मतदान कर सके। फ्लैग मार्च के दौरान पुलिस ने लोगों को बिना किसी डर भय के चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। फ्लैग मार्च के दौरान आमजन से यह भी अपील की गई कि मतदान के दौरान अगर कोई व्यक्ति उन्हें प्रभावित करे तो तुरंत उसकी सूचना पुलिस को दें, ताकि ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।
फोटो कैप्शन 05: वाहनों की चेकिंग करते हुए पुलिस



अशोक चक्र विजेता सूबेदार सज्जन सिंह को किया जाएगा याद
-26 सितंबर को होंगे कई कार्यक्रम
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कनीना की आवाज।
26 सितंबर को जलूरा शौर्य समिति के तत्वावधान में अमर शहीद सूबेदार सज्जन सिंह अशोक चक्र के बलिदान दिवस पर, 13 कुमाऊं ,रेजागला बटालियन द्वारा जलूरा शौर्य दिवस सूबेदार सज्जन सिंह पार्क कनीना में धूमधाम से मनाया जाएगा  ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर संजय कुमार यादव विशिष्ट सेवा मेडल होंगे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता वीर नारी शहीद सूबेदार सज्जन सिंह अशोक चक्र की धर्मपत्नी  कौशल्या देवी करेंगी। यह जानकारी देते हुए जलूरा शौर्य समिति के प्रधान कैप्टन बलबीर सिंह ने बताया की इस अवसर पर एक तरफ जहां रेजीमेंट से जुड़े सैनिकों की सेवा संबंधी शिकायतें चुनी जाएगी वहीं उपस्थित जन समूह को रेजांगला की शौर्य गाथा व राजकीय कन्या उच्च विद्यालय कनीना की छात्राओं द्वारा देशभक्ति से ओत प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे तथा मंच संचालन राजकीय कन्या उच्च विद्यालय कनीना के मुख्य अध्यापक नरेश कुमार कौशिक करेंगे। इस वर्ष जलवा शौर्य उत्सव के तीन थीम रखे गए हैं जिम समाज को जोडऩा ,नशा मुक्ति  व पर्यावरण संरक्षण शामिल है इसी कड़ी में एक पौधारोपण भी मुख्य अतिथि के कार्यक्रमों से करवाया जाएगा ।इस बारे में एक बैठक का आयोजन सूबेदार सज्जन सिंह पार्क में आयोजित किया गया जिसमें  शौर्य दिवस के आयोजन हेतु विभिन्न पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां सौंपी गई आज की बैठक में कैप्टन जगराम, कैप्टन बलबीर सिंह ,कैप्टन सुमर सिंह, कैप्टन लाल सिंह, कैप्टन चंदन सिंह कैप्टन विनोद सिंह कैप्टन देव पाल,राजेंद्र सिंह ,सूबेदार महेंद्र सिंह, सूबेदार धर्मदेव, सूबेदार रमेश, दीपचंद यादव, नरेश कौशिक हेड मास्टर, हवलदार रामकिशन ,रामावतार, राकेश कुमार डीपी, महेंद्र सिंह सहित शौर्य समिति के सभी सदस्यों उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 06: शहीद सज्जन सिंह की पुण्य तिथि मनाने के लिए आयोजित बैठक का नजारा।





एसडी की छात्रा अदिति आर्य बनी 60 मीटर दौड़ में चैम्पियन
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कनीना की आवाज।





























एथलेटिक्स फैडरेशन आफ इण्डिया द्वारा  जींद पांडुपिडारा में  खेलों का आयोजन किया गया जिसमें 60 मीटर दौड़ में अदिति आर्य गोल्ड मैडल जीतकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया और स्टेट चैम्पियन बनी। अदिति आर्य का नैशनल के लिए चयन हुआ जिसका आयोजन  07 व 08 अक्तूबर को नेहरू स्टेडियम दिल्ली में किया जाऐगा। चैयरमैन जगदेव यादव ने बेटी  अदिति आर्या के स्वस्थ्य व लंबी आयु की कामना की। पढ़ाई एवं खेल में विशेष सामंजस्य बनाने के लिए उनके माता-पिता का विशेष सहयोग रहता है। इस अवसर पर प्राचार्य ओमप्रकाश,  सीईओ आरएस यादव, उपप्राचार्य पूर्ण सिंह, सीएओ नरेन्द्र कुमार, सुनील कुमार ,सोनू कोच एवं सभी खेल प्रशिक्षक व समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित था।
फोटो कैप्शन : अदिति

 

 

 

अनीता यादव को मिल रहा है अपार जनसमर्थन
-जनसमूह जुटता है उनकी सभाओं में
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कनीना की आवाज।
 अटेली विधानसभा से देर से कांग्रेस की टिकट घोषणा के बाद अनीता यादव मैदान में उतरी है। सब कुछ बदल गया है। लोग पहले से ही अनीता यादव को टिकट दिये जाने की माांग कर रहे थे। जिस भी गांव में अनीता यादव जाती है अपार भीड़ जुट जाती है तथा पूरा जनसमर्थन देने का वादा कर रहे हैं। ऐसे में अनीता यादव का अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आने लगी है। तीन बार विधायक रह चुकी तथा अटेली की विकास महिला नाम से जाने जाने वाली अनीता यादव अब फिर से कांग्रेस की टिकट से मैदान में उतरी है। अपने विकास कार्यों का ब्यौरा देते हुए वोट मांग रही। है वैसे भी इस बार पूरे ही प्रदेश में कांग्रेस की लहर है जिसके चलते विपक्षी भी अब उनकी और टकटकी लगाए देख रहे हैं। अनीता यादव ने एक दर्जन गांवों का दौरा किया। जनसभाओं में हर जगह उन्हें फूल माला, पगड़ी, शाल आदि देकर सम्मानित किया तथा पूरा समर्थन देने का आश्वासन भी दिया।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 कनीना उप तहसील होता था जिसे उपमंडल का दर्जा दिलवाने में अहं रोल तत्कालीन विधायक एवं सीपीएस अनीता यादव का रहा था। वर्ष 2012 में पूर्व सीपीएस एवं पूर्व विधायक अटेली ने पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा था कि कनीना उपमंडल बनाने का प्रयास करेगी। उस वक्त कनीना महज उप-तहसील होता था। 12 मई 2013 को अटेली में आयोजित प्रगति रैली में पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कनीना को उपमंडल का दर्जा देने की घोषणा की थी। तत्पश्चात 2014 में कनीना उपमंडल संबंधित नोटिफिकेशन हो गया और 15 अगस्त 2014 में कनीना की प्रथम एसडीएम सुभीता ढाका ने अनीता यादव पूर्व सीपीएस के संग उपमंडल स्तर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस प्रकार कनीना को उपमंडल बनाने तथा उपमंडल कार्यालय एवं न्यायिक परिसर आदि निर्माण करवाने का श्रेय उन्हीं को जाता है। कनीना में सैकड़ों दुकानें तोडऩे की तैयारियां हो गई थी किंतु अनीता यादव ने आंदोलन छेड़ दुकानों को टूटने से बचाया।
  मतदाताओं से बात की तो उन्होंने बताया किबीजेपी के 10 साल के कार्यकाल से जनता त्रस्त है और लोगों ने कांग्रेस सरकार बनाने का मन बना लिया है। इस बात की पुष्टि लोकसभा चुनाव में हो चुकी है। ऐसे में जरूरी है कि हमारा राज में सीर हो। 8 अक्टूबर को कांग्रेस की सरकार बनेगी और हमारे हल्के से कांग्रेस उम्मीदवार की जीत का मतलब होगा कि विधानसभा में हमारी आवाज बुलंद होगी। अनीता की हरियाणा कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं से निकटता का बहुत फायदा मिलने वाला है। वो पहले भी सीपीएस रही हैं, इस बार उनका कद और बड़ा होगा।
 मतदाताओं का कहना है कि अनीता यादव हमारे बीच की नेता हैं। हमारी समस्याओं को समझती हैं, हमारे सुख-दुख में साथ रही हैं। बीजेपी ने कहीं बाहर से लाकर उम्मीदवार प्लांट कर दिया है जिसका हमारे हलके के लोगों से कोई जुड़ाव नहीं है। अनीता यादव बेबाकी से अपनी बात रखती हैं, ऐसा आदमी तभी करता है जब उसको लगता है कि वो अपने लोगों के बीच में है।
बीजेपी पार्टी ने अपने कार्यकाल के पहले 5 साल झूठे राष्ट्रवाद का माहौल बना के निकाले हैं, सेना के नाम पर वोट मांगे, वोट मिले भी, और बदले में हमारे इलाके के लोगों को क्या मिला - अग्निवीर। अग्निवीर योजना ने स्पष्ट कर दिया कि बीजेपी का सेना से कोई सरोकार नहीं है। सेना के नाम पर वोट तो चाहिए लेकिन सैनिक परिवारों को सुरक्षित करने की बजाय, अग्निवीर जैसी योजना लाकर हमारे नौजवानों का सेना में जाने के प्रति मनोबल गिराया है। कांग्रेस पार्टी को हरियाणा प्रदेश में मजबूती मिलने का मतलब होगा अग्निवीर योजना का खात्मा। इसी से जुड़ा मुद्दा है हमारी अहीर रेजिमेंट का। दीपेंद्र हुड्डा ने अहीर रेजिमेंट के मुद्दे को विभिन्न प्लेटफार्म पर अपना नैतिक समर्थन दिया है। अनीता यादव भी अहीर रेजिमेंट की मांग के प्रति प्रतिबद्ध हैं और इस मुहिम को और आगे ले जाने का काम करेंगी।
 कनीना के निजी पीके एसडी कालेज का सरकारीकरण करवाने का श्रेय भी अनीता यादव को जाता है। अनीता यादव ने अपने कार्यकाल में विधानसभा क्षेत्र के अनेक गांवों में गलियों एवं नालियों निर्माण के साथ कुछ गांव में हर्बल पार्क का निर्माण करवाया तो वहीं मोहनपुर के 132 केवी सब-स्टेशन का निर्माण करवाया। अनीता यादव ने अटेली के लोगों को भी बड़ा तोहफा देते हुए अटेली को तहसील बनवाने का कार्य किया। इसी प्रकार अटेली महिला महाविद्यालय को मंजूरी मिलने का कार्य भी अनीता यादव के कार्यकाल में हुआ। विधानसभा क्षेत्र के कई स्कूलों को अपग्रेड करवाने का कार्य किया। तो इस प्रकार विधायक के तौर पर अनीता यादव ने अपने विधानसभा क्षेत्र में काफी कार्य किये और इन्हीं की बदौलत अब एक बार फिर से आगामी विधानसभा से वोट मांग रही है।
फोटो कैप्शन 08: अनीता यादव गांवों में वोट मांगते हुए।


 




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