कुतरूं प्राचार्य के कारनामों की 17वीं कड़ी पढ़े 24 मार्च को
-कुतरूं का विरोध करने शिक्षकों को पढऩे वाले बच्चों एवं बच्चियों से आरोप लगवाकर करता था तंग
नहीं फेंकना चाहिए नवरात्रों में उगाए हुए जौ को
-ज्वारे रस बनाकर करें प्रयोग
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कनीना की आवाज। नवरात्रों पर जहां जौ उगाने की एक प्रथा है। करीब 9 दिनों में ये गेहूं और जौ बड़े हो जाते हैं जिन्हें पानी में बहा दिया जाता है। यद्यपि पानी में बहाने से जहां जल दूषित होता है वहीं अनेक विद्वान मानते हैं कि बहाने नहीं चाहिए। इनका उपयोग करना चाहिए। ये अनेक रोगों में काम आते हैं।
इस संबंध में विज्ञान के जानकार डा. होशियार सिंह यादव का कहना है कि ये जौ तथा गेहूं जब आठ दिन बाद काटे जाए तो इनसे ज्वारे रस प्राप्त किया जा सकता है। इसमें क्लोरोफिल आयोडीन, सेलेनियम, आयरन, विटामिन आदि अनेक पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए लाभप्रद है। इसलिए नवरात्रि संपन्न किए जाए इन का ऊपरी भाग काट कर पानी में मिलाकर जरूर व्रत खोलना चाहिए जिससे शरीर लंबे समय तक स्वस्थ रहेगा। उनका कहना है कि जहां करीब 350 के करीब बीमारियां ठीक हो जाती है वही कैंसर में भी लाभप्रद है। दांतों से खून आना, दांतो की समस्या को दूर करने के लिए ज्वारे रस पी लेना चाहिए।
फोटो कैप्शन 7: नवरात्रों में उगाया गया जौ जिससे बनता है ज्वारे रस।
स्कंदमाता की पूजा से मिलता है अमिट फल
-विधि विधान से करें पूजा-दीपक कौशिक
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कनीना की आवाज। नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप की पूजा की जाती है जिसका नाम स्कंदमाता है। कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता का नाम दिया गया है भगवान स्कंद बाल बाल रूप में माता की गोद में विराजमान है। ये विचार दीपक कौशिक ने व्यक्त किये।
दीपक कौशिक ने पूजा अर्चना की विधि बताते हुए कहा कि सबसे पहले माता के लिए चौकी पर स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए इसके बाद शुद्धिकरण करने के लिए पंचगव्य तैयार करना चाहिए जिसके लिए हमें गोमूत्र गाय का गोबर, गाय का घी, गाय का दही, गाय का दूध एक पात्र में एकत्रित करके पंचगव्य तैयार करें और जिस स्थान में पूजा कर रहे उस स्थान में भी इसका छिड़काव करें और माता रानी के लिए चौकी के बगल में चांदी या मिट्टी के घड़े में जल भरकर कलश की स्थापना करनी चाहिए। इसके बाद हमें मन में संकल्प लेना चाहिए कि है माता यथाशक्ति यथा भक्ति पूजा कर रहे हैं। जो हमारा सामर्थ है उस हिसाब से हम आपकी सेवा में हाजिर हुए हैं, अपना बालक मानकर हमें क्षमा करें। वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों के द्वारा स्कंदमाता सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें माता का आवाहन करना चाहिए। जिसके लिए हमें आसन, आचमन,स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, बिल पत्र, दूर्वा, सिंदूर, आभूषण, पुष्प हरा पुष्प माता को प्रिय है। हरा पुष्प चढ़ाना चाहिए सुगंधित द्रव्य धूप में फल और माता से क्षमा याचना करनी चाहिए तत्पश्चात वितरण करके पूजा संपन्न करें पंचमी तिथि की अष्टधातु देवी स्कंदमाता हैं जिन व्यक्तियों को संतान का अभाव हो वे माता की पूजन अर्चन तथा मंत्र जाप कर लाभ उठाएं। स्कंदमाता संतान को प्राप्ति देने वाली हैं। निश्चय ही स्कंदमाता की पूजा करने से हमारी मनोरथ सफल होती है। माता को भोग एवं प्रसाद स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद गौ ब्राह्मण को देना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है। हमारे मन को शांति मिलती है और माता रानी अति शीघ्र प्रसन्न होती हैं हमारे जीवन के सभी कष्टों को नाश करती हैं और हमारे परिवार का कल्याण करते हैं इसीलिए हमें स्कंदमाता की मन मानसिक शांत चित्त से स्थिर मन से माता की पूजा करनी चाहिए।
फोटो कैप्शन: दीपक कौशिक
श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में आमसभा आयोजित
-गोचर भूमि के संरक्षण हेतु प्रस्ताव पारित
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कनीना की आवाज। श्रीकृष्ण गौशाला कनीना के प्रांगण में एक महत्वपूर्ण आम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें गौशाला कार्यकारिणी, नगर पालिका अध्यक्ष, सभी पार्षद, कस्बे के समाजसेवी एवं गौभक्त बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता कप्तान सूबे सिंह ने की।
गोशाला प्रधान भगत सिंह ने बताया कि वर्ष 2003 में शुरू हुई थी। तभी से इसके साथ लगती नगर पालिका की लगभग 20 एकड़ भूमि का उपयोग गोचर उत्पादन के लिए किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि इस भूमि पर गौशाला द्वारा दो ट्यूबवेल स्थापित किए गए हैं, जिनसे फसल की सिंचाई होती है तथा गायों के लिए हरा चारा उगाया जाता है। इसके अतिरिक्त सांसद कोटे से एक कमरा तथा चारे के भंडारण के लिए एक बड़ा गोदाम भी बनाया गया है। वहीं नगर पालिका द्वारा पूर्व में लगभग 100 फीट लंबा टीन शेड भी निर्मित किया गया था जिनका प्रयोग गौशाला द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने इस भूमि को गौशाला की लाइफ लाइन बताते हुए कहा कि अब तक इस भूमि के उपयोग को लेकर नगर पालिका द्वारा गौशाला के पक्ष में कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है।
उन्होंने समस्त कस्बावासियों एवं नगर पालिका अध्यक्ष से आग्रह किया कि इस भूमि के उपयोग हेतु गोशाला के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया जाए। इस पर मुकेश नंबरदार, कुलदीप नंबरदार, दीपचंद यादव, कैलाश गुप्ता एवं राज यादव सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया। सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने बहुमत से प्रस्ताव का समर्थन किया।
बैठक के दौरान यह विषय भी सामने आया कि उक्त भूमि में से लगभग 5 एकड़ क्षेत्र उप मंडल प्रशासन द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आवास निर्माण हेतु लिए जाने की प्रक्रिया में है।
इस पर नगर पालिका प्रधान रिंपी यादव ने सभा को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनके संज्ञान में इस भूमि के किसी हिस्से के आवंटन का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में मिनी सचिवालय निर्माण के लिए जो भूमि चिह्नित की गई थी, उसी पर विचार चल रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका प्रयास रहेगा कि प्रशासन किसी अन्य स्थान पर आवासीय भवन बनाए तथा गोशाला की 20 एकड़ भूमि में से कोई भी हिस्सा आवंटित नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि इस विषय पर 24 मार्च को नगर पालिका हाउस की बैठक में विस्तृत चर्चा की जाएगी।
सभा में गौशाला प्रधान भगत सिंह, दीपक यादव, नितेश गुप्ता, राज यादव, विजय चेयरमैन, सुमेर सिंह चेयरमैन, अशोक ठेकेदार, सवाई सिंह पार्षद, राजेश एडवोकेट सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
फोटो केप्शन 05 व 06: बैठक से संबंधित हैं
बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेहलंग में ग्रेजुएशन डे एवं पुरस्कार वितरण समारोह धूमधाम से सम्पन्न
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कनीना की आवाज। बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेहलंग में आज प्री प्राइमरी के विद्यार्थियों के लिए ग्रेजुएशन डे एवं पुरस्कार वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम उत्साह, अनुशासन एवं अभिभावकों की गरिमामयी उपस्थिति के साथ सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में चेयरमैन हरिश भारद्वाज, अध्यक्षता वाइस चेयरमैन कृष्ण भारद्वाज द्वारा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज उपस्थित रहीं।
नन्हे-मुन्ने विद्यार्थी ग्रेजुएशन ड्रेस (गाउन एवं कैप) में मंच पर आए, जिसने उपस्थित अभिभावकों को भावुक और गर्व से भर दिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों की आत्मविश्वास पूर्ण प्रस्तुति ने विद्यालय की उत्कृष्ट शिक्षा व्यवस्था को प्रदर्शित किया।
इसके उपरांत शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अभिभावकों में विशेष उत्साह और प्रसन्नता देखने को मिली।
चेयरमैन हरिश भारद्वाज ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव होती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहयोग देने का आह्वान किया तथा कहा कि आज का यह ग्रेजुएशन उनके उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत है।
प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज ने अपने संबोधन में बच्चों को निरंतर सीखते रहने और आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया तथा अभिभावकों का धन्यवाद करते हुए विद्यालय द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं संस्कार प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम का समापन पुरस्कार वितरण समारोह एवं उसके पश्चात आयोजित अभिभावक-शिक्षक बैठक के साथ हुआ, जिसमें अभिभावकों ने शिक्षकों से अपने बच्चों की प्रगति पर चर्चा की।
फोटो कैप्शन 03: विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरण करते बीआर स्कूल के हरिश भारद्वाज, वाईस चेयरमैन कृष्ण भारद्वाज द्वारा तथा प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज
04: मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते नन्हे विद्यार्थी।
कनीना का मां शेरावाली मंदिर, नवरात्रों में आस्था का केंद्र
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कनीना की आवाज। नवरात्रों पर दूर दराज से भक्त आकर विधि विधान से पूजा करके ध्वजा को अर्पित कर देते हैं। करीब 61 फुट ऊंचे इस मंदिर में आकर पूजा अर्चना करते हैं। इस मंदिर की देखरेख का काम भी कनीना के संत शिरोमणि बाबा मोलडऩ़ाथ आश्रम पर रहने वाले संत ही करते हैं।
मंदिर का इंतिहास-
मंदिर की स्थापना करीब 18 वर्ष पूर्व हुई है। इसका निर्माण कार्य संजीत यादव कनीना के निवासी की देखरेख में संपन्न हुआ है। इस मंदिर के चारों ओर द्वार एवं विशाल सीढिय़ां हैं। दूर से ही आकर्षित करता हुआ माता मंदिर वर्तमान में विख्यात है। संत मोलडऩाथ आश्रम परिसर में ही यह मां का भव्य मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर के पास बाबा को ग्राउंड है जहां संतों को भोजन कराया जाता है।
मंदिर की भव्य मूर्ति 51 हजार रुपये में जयपुर के प्रसिद्ध कारीगरों द्वारा निर्मित करवाकर विधि विधान से इस मंदिर में स्थापित करवाई गई थी। प्रत्येक नवरात्रों के समय मां के मंदिर को सजाया जाता है। भारी संख्या में भक्तजन यहां आते हैं। इस मंदिर की भव्यता ही इसका आकर्षण है। सुमन रोहिल्ला ने बताया कि कि वो हर वर्ष मां को नवरात्रों में पोशाक पहनाती हैं।
कैसे पहुंचा जाए मंदिर-
शहर का यह एकमात्र मां शेरावाली का मंदिर है। इस मंदिर तक पहुंचना आसान है क्योंकि पास में सामान्य बस स्टैंड स्थित है। वर्ष में दो बार आने वाले नवरात्रों पर भीड़ एक मेले का रूप ले लेती है। महेंद्रगढ़ के कनीना कस्बे तक रेल सेवा या बस सेवा से पहुंचा जा सकता है। रेलवे स्टेशन से महज दो किमी बस स्टैंड के पास ही यह भव्य मंदिर दिखाई पड़ता है। रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनौल एवं चरखी दादरी से यहां बसों की सहायता से पहुंचा जा सकता है।
क्या कहते हैं भक्त.
भक्त दिनेश कुमार का कहना है कि कनीना क्षेत्र में यह विशाल मंदिर है जहां नवरात्रों में सुबह.शाम जोत जलती है और पूजा चलती है। भक्तजन भी यहां आकर जोत जलाते हैं। इस मंदिर में भक्तों का पूरे नवरात्रों में तांता लगा रहता है। दूर दराज से भक्त आते हैं और पूजा करते हैं।
क्या कहते हैं पुजारी-
पूजारी रामनिवास महंत का कहना है कि वर्ष में दो बार आने वाले इन नवरात्रों में वे मां के मदिर जाते हैं और पूजा अर्चना करके विशेष आनंद मिलता है। मां के नवरात्रों में वे व्रत रखते हैं और मां की पूजा अर्चना करने के लिए प्रसाद, नारियल एवं चुनरी ले जाते हैं। मां के चरणों में जोत जलाते हैं।
फोटो कैप्शन-01 मां मंदिर
02 मां की मूर्ति।
साथ में दिनेश एवं रामनिवास
विश्व मौसम विज्ञान दिवस -23 मार्च
आज के दिन उत्तम उपकरणों के चलते मौसम की भविष्यवाणी होती है सटीक-डा.देवराज
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कनीना की आवाज। 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया जाता है। 1950 में विश्व मौसम संगठन के रूप में स्थापित हुआ था तब से लेकर आज तक यह दिवस मनाया जाता रहा है। मौसम विज्ञान दिवस के रूप में मनाए जाने के पीछे मौसम की जानकारी देकर, उसका प्रचार और प्रचार करके देश और दुनिया के लोगों की जान माल की हानि को रोकना होता है। भारत में कलकत्ता मौसम विभाग विज्ञान में जान इलियट को प्रथम महानिदेशक नियुक्त किया गया था। तत्पश्चात पुणे, नई दिल्ली आदि स्थानों पर मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना की गई ।मौसम विज्ञान में वायुमंडल का अध्ययन किया जाता है और मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है। भारत में 6 क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र आते हैं। तत्पश्चात अनेकों मौसम विज्ञान केंद्र ब्लाक जिला और हर प्रांत में स्थापित किए गए हैं। मौसम की जानकारी के लिए विभिन्न आंकड़े इक_े किए जाते हैं उनका अध्ययन किया जाता है जिससे मौसम की भविष्य की जानकारी मिलती है।
क्या कहते हैं किसान-
मौसम विज्ञान का सबसे अधिक लाभ किसानों को होता है। इसलिए अधिकांश भविष्यवाणी किसने के दृष्टिगत की जाती है। वैसे तो हर व्यक्ति ,हर कर्मचारियों को इसका लाभ होता है किंतु किसान खेतों में अपनी फसल पैदा करते हैं और उनके लिए बहुत जरूरी है। कनीना का किसान का कहना है की मौसम की जानकारी सटीक होने के कारण किसान अपनी फसल पैदा करते हैं, फसल काटते हैं, पानी आदि देते हैं या अन्य कोई भी जानकारी प्राप्त होते ही फसलों को ध्यान में रखते हैं। उनका कहना है की मौसम विज्ञान की जानकारी के चलते उनके जान माल को काफी लाभ होता आ रहा है। पुराने समय में बुजुर्ग मौसम की सही जानकारी न मिलने के कारण अपनी फसल तबाह कर बैठते थे, यहां तक की बारिश आदि की जानकारी का सही अनुमान नहीं लगता था। अब उन बातों का सही अनुमान लगने लग गया है।
-- सूबे सिंह प्रगतिशील किसान कनीना
इस संबंध में पूर्व कृषि अधिकारी डा. देवराज ने बताया की पुराने समय में अत्यधिक आधुनिकी यंत्र नहीं होते थे जो मौसम की सटीक भविष्यवाणी कर सके। इसलिए लंबे समय के आंकड़े,कई सालों के आंकड़े इकट्ठा करके उनके आधार पर अनुमान लगाया जाता था किंतु आधुनिक उन्नत तकनीक के चलते एक सप्ताह एक या दो दिन आगे का भी सही-सही अनुमान लगाया जा सकता है और सूचना मिलती है जिससे खेती में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। अब तो जिला स्तर नहीं खंड स्तर पर भी मौसम की भविष्यवाणी मिल जाती है। कृषि विश्वविद्यालय हिसार से सटीक जानकारी मिलती है और उसी जानकारी के आधार पर किसान फसल में पानी लगाने, वर्षा या पाल या सूखा आदि से कैसे सुरक्षा करें, का पता लगा सकता है। इस प्रकार की सूचनाओं को क्राप एडवाइजरी नाम से जाना जाता है। न केवल किसान अपितु पशुपालन और आम आदमी को भी इसका लाभ होता है। किसी को अपना कार्यक्रम बना रखा है और यह पता लग जाए की वर्षा होगी तो वह आगे पीछे भी अपने कार्यक्रम को निर्धारित कर सकता है। आजकल एडवांस कृषि यंत्र आने से भविष्यवाणी ज्यादा सही मिल पाती है। कभी-कभार ही कोई भविष्यवाणी गलत हो सकती है।
-- डा. देवराज
फोटो कैप्शन: डा. देवराज और किसान सूबे सिंह
बाइक से 13वीं शहीद स्मारक की यात्रा 23 को
-कर चुके हैं देश के 85 से ज्यादा शहीद स्मारकों की यात्रा
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कनीना की आवाज। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में अंग्रेजी के प्रवक्ता एवं ग्राम झगड़ोली निवासी मदन मोहन कौशिक 23 मार्च को प्रात: 5 बजे अपनी 23वीं शहीद स्मारक यात्रा का शुभारंभ करेंगे। यह यात्रा महेंद्रगढ़ के राव तुलाराम चौक से शुरू होकर दोपहर बाद फिरोजपुर में हुसैनीवाला भारत पाक बार्डर पर पहुंचेगी जहां शहीदी दिवस पर आजादी के तीन महान नायकों सहित भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को श्रद्धाजलि अर्पित की जाएगी तथा शाम को भारत पाक बार्डर पर सीमा सुरक्षा बल की परेड का अवलोकन भी किया जाएगा। इससे पहले मदन मोहन कौशिक देश के 85 से ज्यादा शहीद स्मारकों का पूरे देश में भ्रमण कर चुके हैं, तीन बार लेह लद्दाख कारगिल तथा दुनिया के सबसे उंचे दर्रो,खरदूंगला, तंगलागला ,बरालाचला, चांगला व नमिकला सहित देश के 527 जिलों का भ्रमण भी अपनी स्प्लेंडर बाइक से कर चुके हैं।
उनकी यह यात्रा पांच राज्यों हरियाणा पंजाब गुजरात राजस्थान व मध्य प्रदेश होकर गुजरेगी जिसमें प्रमुख शहीद स्मारकों, ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के स्थलों का भ्रमण किया जाएगा 3200 किलोमीटर लंबी यह यात्रा राष्ट्रीय शहीद स्मारक हुसैनी वाला, बीकानेर में जूनागढ़ फोर्ट तथा करणी माता मंदिर, जैसलमेर का किला, थार का रेगिस्तान, भारत-पाक सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर, देश के सबसे बड़े जिले कच्छ के नमक के मैदान, गुजरात के पाटन जिले के ऐतिहासिक स्थल रानी की वाव, अहमदाबाद के साबरमती आश्रम,लौह पुरुष सरदार पटेल के पैतृक गांव करमसद खेड़ा,बड़ोदरा के स्टैचू आफ यूनिटी मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भावरा गांव में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद स्मारक, उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर, चित्तौडग़ढ़ के किले, हल्दी घाटी तथा अजमेर स्थित पृथ्वीराज चौहान स्मारक पर भी पहुंचेगी।
फोटो कैप्शन 01: मदनमोहन कौशिक बाइक से यात्रा की तैयारी करते हुए
मां मंदिर बसई
पहाड़ी पर स्थित है भव्य मंदिर
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कनीना की आवाज। बसई गांव की पहाड़ी पर 11 वर्ष पूर्व भव्य मंदिर का निर्माण किया गया था जो आज दूरदराज भक्तों के लिए आस्था श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। प्रतिवर्ष हजारों भक्तों ने आकर मन्नत मांगते हैं। जब जब नवरात्रे आते हैं यहां पर मेले लगते हैं और मेलों में अपार भीड़ जुटती है। ऊंची पहाड़ी पर रमणीक स्थान पर मां का मंदिर है।
स्थापना का इतिहास
इस मंदिर की स्थापना 11 वर्ष पूर्व माता मंदिर की भोलाराम जोशी, महाबीर जोशी एवं उनके परिजनों ने की करवाई थी। परिवार ने मां चिंतपूर्णी हिमाचल की देवी से प्रेरणा लेकर मंदिर का निर्माण करवाया है। इस मंदिर का निर्माण विशेष प्रकार के पत्थर को काटकर बनवाया गया है। करोड़ों रुपये की लागत से इस मंदिर का निर्माण किया गया है। यही कारण है कि इस मंदिर को देखने के लिए दूरदराज से भक्तजन आते हैं।
मंदिर की विशेषता-
माता मंदिर में प्रतिदिन भक्तों का ताता लगा रहता है किंतु वर्ष में दो बार नवरात्रों पर जहां भीड़ जुटती है वहीं मेले लगते हैं। भक्त मां दुर्गा का लेकर के तथा विभिन्न प्रकार का प्रसाद विशेष रूप से हलवा, चना, बूंदी आदि लेकर के पहुंचते हैं और माता के चरणों में अर्पित करके मन्नत मांगते हैं। माना जाता है कि उनकी मन्नत पूर्ण होती है। समय समय पर यहां भंडारे एवं हवन आयोजित होते हैं।
कैसे पहुंचा जाए मंदिर---
माता मंदिर में पहुंचने के लिए दादरी-महेंद्रगढ़ रोड पर आकोदा उतरकर दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। बसई की पहाड़ी पर मंदिर बना हुआ है जो आकर्षण का केंद्र है। कनीना से 17 किलोमीटर दूर पड़ता है। यहां पहाड़ी की चोटी पर रमणीक स्थान है। वही भव्य मंदिर देखकर सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। भक्तों के ठहरने का विशेष प्रबंध किया गया है।
चंद्र प्रकाश बसई भक्त-
चंद्र प्रकाश बसई जो फिल्मी हीरों भी हैं, का कहना है कि जब से मंदिर बना है तब से वे इस मंदिर जा रहे हैं। प्रतिदिन माता के चरणों में धोक लगाते और मन्नत मांगते हैं जिसके चलते फिल्म इंडस्ट्री में भी उनका नाम है। माता ने उनकी सभी मन्नत पूर्ण की है। उनका कहना है कि माता आने वाले सभी भक्तों पर दया बरसाती रहती है।
गोविंदराम जोशी पुजारी-
गोविंदराम जोशी का कहना है कि वे सुबह शाम माता की पूजा करते हैं। सुबह जब भी समय लगता हवन करते हैं तथा मंदिर में ही रहते हैं साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं। यात्रियों के मान सम्मान को देने में कोई कसर नहीं हो छोड़ते। यहां भक्त यहां आकर सारे कष्ट भुला देते हैं। मां के दर्शन कर प्रसन्न हो जाते और मन्नत मांग कर अपने अपने घरों में चले जाते हैं। उनका मानना है कि यहां पर मांगी गई मन्नत पूर्ण होती है।
फोटो कैप्शन गोविंदराम जोशी, चंद्र प्रकाश बसई तथा मां मंदिर।
























































