Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**: 2026

Sunday, March 22, 2026



 




कुतरूं प्राचार्य के कारनामों की 17वीं कड़ी पढ़े 24 मार्च को
   -कुतरूं का विरोध करने शिक्षकों को पढऩे वाले बच्चों एवं बच्चियों से आरोप लगवाकर  करता था तंग



नहीं फेंकना चाहिए नवरात्रों में उगाए हुए जौ को
-ज्वारे रस बनाकर करें प्रयोग
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कनीना की आवाज।
नवरात्रों पर जहां जौ उगाने की एक प्रथा है। करीब 9 दिनों में ये गेहूं और जौ बड़े हो जाते हैं जिन्हें पानी में बहा दिया जाता है। यद्यपि पानी में बहाने से जहां जल दूषित होता है वहीं अनेक विद्वान मानते हैं कि बहाने नहीं चाहिए। इनका उपयोग करना चाहिए। ये अनेक रोगों में काम आते हैं।
इस संबंध में विज्ञान के जानकार डा. होशियार सिंह यादव का कहना है कि ये जौ तथा गेहूं  जब आठ दिन बाद काटे जाए तो इनसे ज्वारे रस प्राप्त किया जा सकता है। इसमें क्लोरोफिल आयोडीन, सेलेनियम, आयरन, विटामिन आदि अनेक पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए लाभप्रद है। इसलिए नवरात्रि संपन्न किए जाए इन का ऊपरी भाग काट कर पानी में मिलाकर जरूर व्रत खोलना चाहिए जिससे शरीर लंबे समय तक स्वस्थ रहेगा। उनका कहना है कि जहां करीब 350 के करीब बीमारियां ठीक हो जाती है वही कैंसर में भी लाभप्रद है। दांतों से खून आना, दांतो की समस्या को दूर करने के लिए ज्वारे रस पी लेना चाहिए।
फोटो कैप्शन 7: नवरात्रों में उगाया गया जौ जिससे बनता है ज्वारे रस।






स्कंदमाता की पूजा से मिलता है अमिट फल
-विधि विधान से करें पूजा-दीपक कौशिक
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कनीना की आवाज।
नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप की पूजा की जाती है जिसका नाम स्कंदमाता है। कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता का नाम दिया गया है भगवान स्कंद बाल बाल रूप में माता की गोद में विराजमान है। ये विचार दीपक कौशिक ने  व्यक्त किये।
दीपक कौशिक ने पूजा अर्चना की विधि बताते हुए कहा कि सबसे पहले माता के लिए चौकी पर स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए इसके बाद शुद्धिकरण करने के लिए पंचगव्य तैयार करना चाहिए जिसके लिए हमें गोमूत्र गाय का गोबर, गाय का घी, गाय का दही, गाय का दूध एक पात्र में एकत्रित करके पंचगव्य तैयार करें और जिस स्थान में पूजा कर रहे उस स्थान में भी इसका छिड़काव करें और माता रानी के लिए चौकी के बगल में चांदी या मिट्टी के घड़े में जल भरकर कलश की स्थापना करनी चाहिए। इसके बाद हमें मन में संकल्प लेना चाहिए कि है माता यथाशक्ति यथा भक्ति पूजा कर रहे हैं। जो हमारा सामर्थ है उस हिसाब से हम आपकी सेवा में हाजिर हुए हैं, अपना बालक मानकर हमें क्षमा करें। वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों के द्वारा स्कंदमाता सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें माता का आवाहन करना चाहिए। जिसके लिए हमें आसन, आचमन,स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, बिल पत्र, दूर्वा, सिंदूर, आभूषण, पुष्प हरा पुष्प माता को प्रिय है। हरा पुष्प चढ़ाना चाहिए सुगंधित द्रव्य धूप में फल और माता से क्षमा याचना करनी चाहिए तत्पश्चात वितरण करके पूजा संपन्न करें पंचमी तिथि की अष्टधातु देवी स्कंदमाता हैं जिन व्यक्तियों को संतान का अभाव हो वे माता की पूजन अर्चन तथा मंत्र जाप कर लाभ उठाएं। स्कंदमाता संतान को प्राप्ति देने वाली हैं। निश्चय ही स्कंदमाता की पूजा करने से हमारी मनोरथ सफल होती है।  माता को भोग एवं प्रसाद स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद गौ ब्राह्मण को देना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है। हमारे मन को शांति मिलती है और माता रानी अति शीघ्र प्रसन्न होती हैं हमारे जीवन के सभी कष्टों को नाश करती हैं और हमारे परिवार का कल्याण करते हैं इसीलिए हमें स्कंदमाता की मन मानसिक शांत चित्त से स्थिर मन से माता की पूजा करनी चाहिए।
फोटो कैप्शन: दीपक कौशिक



श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में आमसभा आयोजित
-गोचर भूमि के संरक्षण हेतु प्रस्ताव पारित
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कनीना की आवाज।
श्रीकृष्ण गौशाला कनीना के प्रांगण में एक महत्वपूर्ण आम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें गौशाला कार्यकारिणी, नगर पालिका अध्यक्ष, सभी पार्षद, कस्बे के समाजसेवी एवं गौभक्त बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता कप्तान सूबे सिंह ने की।
गोशाला प्रधान भगत सिंह ने बताया कि वर्ष 2003 में शुरू हुई थी। तभी से इसके साथ लगती नगर पालिका की लगभग 20 एकड़ भूमि का उपयोग गोचर उत्पादन के लिए किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि इस भूमि पर गौशाला द्वारा दो ट्यूबवेल स्थापित किए गए हैं, जिनसे फसल की सिंचाई होती है तथा गायों के लिए हरा चारा उगाया जाता है। इसके अतिरिक्त सांसद कोटे से एक कमरा तथा चारे के भंडारण के लिए एक बड़ा गोदाम भी बनाया गया है। वहीं नगर पालिका द्वारा पूर्व में लगभग 100 फीट लंबा टीन शेड भी निर्मित किया गया था जिनका प्रयोग गौशाला द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने इस भूमि को गौशाला की लाइफ लाइन बताते हुए कहा कि अब तक इस भूमि के उपयोग को लेकर नगर पालिका द्वारा गौशाला के पक्ष में कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है।
उन्होंने समस्त कस्बावासियों एवं नगर पालिका अध्यक्ष से आग्रह किया कि इस भूमि के उपयोग हेतु गोशाला के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया जाए। इस पर मुकेश नंबरदार, कुलदीप नंबरदार, दीपचंद यादव, कैलाश गुप्ता एवं राज यादव सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया। सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने बहुमत से प्रस्ताव का समर्थन किया।
बैठक के दौरान यह विषय भी सामने आया कि उक्त भूमि में से लगभग 5 एकड़ क्षेत्र उप मंडल प्रशासन द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आवास निर्माण हेतु लिए जाने की प्रक्रिया में है।
इस पर नगर पालिका प्रधान रिंपी यादव ने सभा को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनके संज्ञान में इस भूमि के किसी हिस्से के आवंटन का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में मिनी सचिवालय निर्माण के लिए जो भूमि चिह्नित की गई थी, उसी पर विचार चल रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका प्रयास रहेगा कि प्रशासन किसी अन्य स्थान पर आवासीय भवन बनाए तथा गोशाला की 20 एकड़ भूमि में से कोई भी हिस्सा आवंटित नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि इस विषय पर 24 मार्च को नगर पालिका हाउस की बैठक में विस्तृत चर्चा की जाएगी।
सभा में गौशाला प्रधान भगत सिंह,  दीपक यादव, नितेश गुप्ता, राज यादव, विजय चेयरमैन, सुमेर सिंह चेयरमैन, अशोक ठेकेदार, सवाई सिंह पार्षद, राजेश एडवोकेट सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
फोटो केप्शन 05 व 06: बैठक से संबंधित हैं



बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेहलंग में ग्रेजुएशन डे एवं पुरस्कार वितरण समारोह धूमधाम से सम्पन्न
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कनीना की आवाज।
बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेहलंग में आज प्री प्राइमरी के विद्यार्थियों के लिए ग्रेजुएशन डे एवं पुरस्कार वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम उत्साह, अनुशासन एवं अभिभावकों की गरिमामयी उपस्थिति के साथ सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में चेयरमैन हरिश भारद्वाज, अध्यक्षता वाइस चेयरमैन कृष्ण भारद्वाज द्वारा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज उपस्थित रहीं।
नन्हे-मुन्ने विद्यार्थी ग्रेजुएशन ड्रेस (गाउन एवं कैप) में मंच पर आए, जिसने उपस्थित अभिभावकों को भावुक और गर्व से भर दिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों की आत्मविश्वास पूर्ण प्रस्तुति ने विद्यालय की उत्कृष्ट शिक्षा व्यवस्था को प्रदर्शित किया।
इसके उपरांत शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अभिभावकों में विशेष उत्साह और प्रसन्नता देखने को मिली।
चेयरमैन हरिश भारद्वाज ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव होती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहयोग देने का आह्वान किया तथा कहा कि आज का यह ग्रेजुएशन उनके उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत है।
प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज ने अपने संबोधन में बच्चों को निरंतर सीखते रहने और आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया तथा अभिभावकों का धन्यवाद करते हुए विद्यालय द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं संस्कार प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम का समापन पुरस्कार वितरण समारोह एवं उसके पश्चात आयोजित अभिभावक-शिक्षक बैठक के साथ हुआ, जिसमें अभिभावकों ने शिक्षकों से अपने बच्चों की प्रगति पर चर्चा की।
फोटो कैप्शन 03: विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरण करते बीआर स्कूल के हरिश भारद्वाज, वाईस चेयरमैन कृष्ण भारद्वाज द्वारा तथा प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज
04: मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते नन्हे विद्यार्थी।


कनीना का मां शेरावाली मंदिर, नवरात्रों में आस्था का केंद्र
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कनीना की आवाज।
नवरात्रों पर दूर दराज से भक्त आकर विधि विधान से पूजा करके ध्वजा को अर्पित कर देते हैं। करीब 61 फुट ऊंचे इस मंदिर में आकर पूजा अर्चना करते हैं।  इस मंदिर की देखरेख का काम भी कनीना के संत शिरोमणि बाबा मोलडऩ़ाथ आश्रम पर रहने वाले संत ही करते हैं।
मंदिर का इंतिहास-
मंदिर की स्थापना करीब 18 वर्ष पूर्व हुई है। इसका निर्माण कार्य संजीत यादव कनीना के निवासी की देखरेख में संपन्न हुआ है। इस मंदिर के चारों ओर द्वार एवं विशाल सीढिय़ां हैं। दूर से ही आकर्षित करता हुआ माता मंदिर वर्तमान में विख्यात है। संत मोलडऩाथ आश्रम परिसर में ही यह मां का भव्य मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर के पास बाबा को ग्राउंड है जहां संतों को भोजन कराया जाता है।
मंदिर की भव्य मूर्ति 51 हजार रुपये में जयपुर के प्रसिद्ध कारीगरों द्वारा निर्मित करवाकर विधि विधान से इस मंदिर में स्थापित करवाई गई थी। प्रत्येक नवरात्रों के समय मां के मंदिर को सजाया जाता है। भारी संख्या में भक्तजन यहां आते हैं। इस मंदिर की भव्यता ही इसका आकर्षण है। सुमन रोहिल्ला ने बताया कि कि वो हर वर्ष मां को नवरात्रों में पोशाक पहनाती हैं।
कैसे पहुंचा जाए मंदिर-
शहर का यह एकमात्र मां शेरावाली का मंदिर है। इस मंदिर तक पहुंचना आसान है क्योंकि पास में सामान्य बस स्टैंड स्थित है। वर्ष में दो बार आने वाले नवरात्रों पर भीड़ एक मेले का रूप ले लेती है। महेंद्रगढ़ के कनीना कस्बे तक रेल सेवा या बस सेवा से पहुंचा जा सकता है। रेलवे स्टेशन से महज दो किमी बस स्टैंड के पास ही यह भव्य मंदिर दिखाई पड़ता है। रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनौल एवं चरखी दादरी से यहां बसों की सहायता से पहुंचा जा सकता है।
क्या कहते हैं भक्त.
भक्त दिनेश कुमार का कहना है कि कनीना क्षेत्र में यह विशाल मंदिर है जहां नवरात्रों में सुबह.शाम जोत जलती है और पूजा चलती है। भक्तजन भी यहां आकर जोत जलाते हैं। इस मंदिर में भक्तों का पूरे नवरात्रों में तांता लगा रहता है। दूर दराज से भक्त आते हैं और पूजा करते हैं।
क्या कहते हैं पुजारी-
पूजारी रामनिवास महंत का कहना है कि वर्ष में दो बार आने वाले इन नवरात्रों में वे मां के मदिर जाते हैं और पूजा अर्चना करके विशेष आनंद मिलता है। मां के नवरात्रों में वे व्रत रखते हैं और मां की पूजा अर्चना करने के लिए प्रसाद, नारियल एवं चुनरी ले जाते हैं। मां के चरणों में जोत जलाते हैं।
फोटो कैप्शन-01 मां मंदिर
02 मां की मूर्ति।
साथ में दिनेश एवं रामनिवास


विश्व मौसम विज्ञान दिवस -23 मार्च
आज के दिन उत्तम उपकरणों के चलते मौसम की भविष्यवाणी होती है सटीक-डा.देवराज
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कनीना की आवाज।
23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया जाता है। 1950 में विश्व  मौसम संगठन के रूप में स्थापित हुआ था तब से लेकर आज तक यह दिवस मनाया जाता रहा है। मौसम विज्ञान दिवस के रूप में मनाए जाने के पीछे मौसम की जानकारी देकर, उसका प्रचार और प्रचार करके देश और दुनिया के लोगों की जान माल की हानि को रोकना होता है। भारत में कलकत्ता मौसम विभाग विज्ञान में जान इलियट को प्रथम महानिदेशक नियुक्त किया गया था।  तत्पश्चात पुणे, नई दिल्ली आदि स्थानों पर मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना की गई ।मौसम विज्ञान में वायुमंडल का अध्ययन किया जाता है और मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है। भारत में 6 क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र आते हैं। तत्पश्चात अनेकों मौसम विज्ञान केंद्र ब्लाक जिला और हर प्रांत में स्थापित किए गए हैं। मौसम की जानकारी के लिए विभिन्न आंकड़े इक_े किए जाते हैं उनका अध्ययन किया जाता है जिससे मौसम की भविष्य की जानकारी मिलती है।
क्या कहते हैं किसान-
 मौसम विज्ञान का सबसे अधिक लाभ किसानों को होता है। इसलिए अधिकांश भविष्यवाणी किसने के दृष्टिगत की जाती है। वैसे तो हर व्यक्ति ,हर कर्मचारियों को इसका लाभ होता है किंतु किसान खेतों में अपनी फसल पैदा करते हैं और उनके लिए बहुत जरूरी है। कनीना का किसान का कहना है की मौसम की जानकारी सटीक होने के कारण किसान अपनी फसल पैदा करते हैं, फसल काटते हैं, पानी आदि देते हैं या अन्य कोई भी जानकारी प्राप्त होते ही फसलों को ध्यान में रखते हैं। उनका कहना है की मौसम विज्ञान की जानकारी के चलते उनके जान माल को काफी लाभ होता आ रहा है। पुराने समय में बुजुर्ग मौसम की सही जानकारी न मिलने के कारण अपनी फसल तबाह कर बैठते थे, यहां तक की बारिश आदि की जानकारी का सही अनुमान नहीं लगता था। अब उन बातों का सही अनुमान लगने लग गया है।
-- सूबे सिंह प्रगतिशील किसान कनीना
इस संबंध में पूर्व कृषि अधिकारी डा. देवराज ने बताया की पुराने समय में अत्यधिक आधुनिकी यंत्र नहीं होते थे  जो मौसम की सटीक भविष्यवाणी कर सके। इसलिए लंबे समय के आंकड़े,कई सालों के आंकड़े इकट्ठा करके उनके आधार पर अनुमान लगाया जाता था किंतु आधुनिक उन्नत तकनीक के चलते एक सप्ताह एक या दो दिन आगे का भी सही-सही अनुमान लगाया जा सकता है और सूचना मिलती है जिससे खेती में  होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। अब तो जिला स्तर नहीं खंड स्तर पर भी मौसम की भविष्यवाणी मिल जाती है। कृषि विश्वविद्यालय हिसार से सटीक जानकारी मिलती है और उसी जानकारी के आधार पर किसान फसल में पानी लगाने, वर्षा या पाल या सूखा आदि से कैसे सुरक्षा करें, का पता लगा सकता है। इस प्रकार की सूचनाओं को क्राप एडवाइजरी नाम से जाना जाता है। न केवल किसान अपितु पशुपालन और आम आदमी को भी इसका लाभ होता है। किसी को अपना कार्यक्रम बना रखा है और यह पता लग जाए की वर्षा होगी तो वह आगे पीछे भी अपने कार्यक्रम को निर्धारित कर सकता है। आजकल एडवांस कृषि यंत्र आने से भविष्यवाणी ज्यादा सही मिल पाती है। कभी-कभार ही कोई भविष्यवाणी गलत हो सकती है।
-- डा. देवराज
फोटो कैप्शन: डा. देवराज और किसान सूबे सिंह


बाइक से 13वीं शहीद स्मारक की यात्रा 23 को
-कर चुके हैं देश के 85 से ज्यादा शहीद स्मारकों की यात्रा
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कनीना की आवाज।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में अंग्रेजी के प्रवक्ता एवं ग्राम झगड़ोली निवासी मदन मोहन कौशिक 23 मार्च को प्रात: 5 बजे अपनी 23वीं शहीद स्मारक यात्रा का शुभारंभ करेंगे। यह यात्रा महेंद्रगढ़ के राव तुलाराम चौक से शुरू होकर दोपहर बाद  फिरोजपुर में हुसैनीवाला भारत पाक बार्डर पर पहुंचेगी जहां शहीदी दिवस पर आजादी के तीन महान नायकों सहित भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को श्रद्धाजलि अर्पित की जाएगी तथा शाम को भारत पाक बार्डर पर सीमा सुरक्षा बल की  परेड का अवलोकन भी किया जाएगा।  इससे पहले मदन मोहन कौशिक देश के 85 से ज्यादा शहीद स्मारकों का पूरे देश में भ्रमण कर चुके हैं, तीन बार लेह लद्दाख कारगिल  तथा दुनिया के सबसे उंचे  दर्रो,खरदूंगला, तंगलागला ,बरालाचला, चांगला व नमिकला सहित देश के 527 जिलों का भ्रमण भी  अपनी स्प्लेंडर बाइक से कर चुके हैं।
 उनकी यह यात्रा पांच राज्यों हरियाणा पंजाब गुजरात राजस्थान व मध्य प्रदेश होकर गुजरेगी जिसमें प्रमुख शहीद स्मारकों, ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के स्थलों का भ्रमण किया जाएगा 3200 किलोमीटर लंबी यह यात्रा राष्ट्रीय शहीद स्मारक हुसैनी वाला, बीकानेर में जूनागढ़ फोर्ट तथा करणी माता मंदिर, जैसलमेर का किला, थार का रेगिस्तान, भारत-पाक सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर, देश के सबसे बड़े जिले कच्छ के नमक के मैदान, गुजरात के पाटन जिले के ऐतिहासिक स्थल रानी की वाव, अहमदाबाद के साबरमती आश्रम,लौह पुरुष सरदार पटेल के पैतृक गांव करमसद खेड़ा,बड़ोदरा के स्टैचू आफ यूनिटी मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के  भावरा गांव में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद स्मारक, उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर, चित्तौडग़ढ़ के किले, हल्दी घाटी तथा अजमेर स्थित पृथ्वीराज चौहान स्मारक पर भी पहुंचेगी।
फोटो कैप्शन 01: मदनमोहन कौशिक बाइक से यात्रा की तैयारी करते हुए






















मां मंदिर बसई
पहाड़ी पर स्थित है भव्य मंदिर
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कनीना की आवाज।
बसई गांव की पहाड़ी पर 11 वर्ष पूर्व भव्य मंदिर का निर्माण किया गया था जो आज दूरदराज भक्तों के लिए आस्था श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। प्रतिवर्ष हजारों भक्तों ने आकर मन्नत मांगते हैं। जब जब नवरात्रे आते हैं यहां पर मेले लगते हैं और मेलों में अपार भीड़ जुटती है। ऊंची पहाड़ी पर रमणीक स्थान पर मां का मंदिर है।
 स्थापना का इतिहास
 इस मंदिर की स्थापना 11 वर्ष पूर्व माता मंदिर की भोलाराम जोशी, महाबीर जोशी एवं उनके परिजनों ने की करवाई थी। परिवार ने मां चिंतपूर्णी हिमाचल की देवी से प्रेरणा लेकर मंदिर का निर्माण करवाया है। इस मंदिर का निर्माण विशेष प्रकार के पत्थर को काटकर बनवाया गया है। करोड़ों रुपये की लागत से इस मंदिर का निर्माण किया गया है। यही कारण है कि इस मंदिर को देखने के लिए दूरदराज से भक्तजन आते हैं।
 मंदिर की विशेषता-
 माता मंदिर में प्रतिदिन भक्तों का ताता लगा रहता है किंतु वर्ष में दो बार नवरात्रों पर जहां भीड़ जुटती है वहीं मेले लगते हैं। भक्त मां दुर्गा का लेकर के तथा विभिन्न प्रकार का प्रसाद विशेष रूप से हलवा, चना, बूंदी आदि लेकर के पहुंचते हैं और माता के चरणों में अर्पित करके मन्नत मांगते हैं। माना जाता है कि उनकी मन्नत पूर्ण होती है। समय समय पर यहां भंडारे एवं हवन आयोजित होते हैं।
कैसे पहुंचा जाए मंदिर---
 माता मंदिर में पहुंचने के लिए दादरी-महेंद्रगढ़ रोड पर आकोदा उतरकर दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। बसई की पहाड़ी पर मंदिर बना हुआ  है जो आकर्षण का केंद्र है। कनीना से 17 किलोमीटर दूर पड़ता है। यहां पहाड़ी की चोटी पर रमणीक स्थान है। वही भव्य मंदिर देखकर सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। भक्तों के ठहरने का विशेष प्रबंध किया गया है।
 चंद्र प्रकाश बसई भक्त-
चंद्र प्रकाश बसई जो फिल्मी हीरों भी हैं, का कहना है कि जब से मंदिर बना है तब से वे इस मंदिर जा रहे हैं। प्रतिदिन माता के चरणों में धोक लगाते और मन्नत मांगते हैं जिसके चलते फिल्म इंडस्ट्री में भी उनका नाम है। माता ने उनकी सभी मन्नत पूर्ण की है। उनका कहना है कि माता आने वाले सभी भक्तों पर दया बरसाती रहती है।
गोविंदराम जोशी पुजारी-
 गोविंदराम जोशी का कहना है कि वे सुबह शाम माता की पूजा करते हैं। सुबह जब भी समय लगता हवन करते हैं तथा मंदिर में ही रहते हैं साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं। यात्रियों के मान सम्मान को देने में कोई कसर नहीं हो छोड़ते। यहां भक्त  यहां आकर सारे कष्ट भुला देते हैं। मां के दर्शन कर प्रसन्न हो जाते और मन्नत मांग कर अपने अपने घरों में चले जाते हैं। उनका मानना है कि यहां पर मांगी गई मन्नत पूर्ण होती है।
 फोटो कैप्शन गोविंदराम जोशी, चंद्र प्रकाश बसई तथा मां मंदिर।

Saturday, March 21, 2026




 



कनीना में धूम धाम से मनाया गया गणगौर पर्व
-शनिवार को किया गया समापन
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कनीना की आवाज।
कनीना में गणगौर पूजन पर्व बड़ी धूम धाम से मनाया गया। गणगौर की 16 दिन तक पूजा चलती है। इसकी शुरुआत होली के दूसरे दिन हुई थी और समापन चैत शुक्ल पक्ष की तृतीय अर्थात शनिवार को कर दिया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि गणगौर पूजन भगवान शिव और पार्वती के विवाह से संबंधित है। और शिव और पार्वती को साक्षी मान कर पूजन किया जाता है। महिलाएं भगवान शिव और पार्वती के पुतले बनाती है और उनका शृंगार करती है। पुतलों सहित महिलाओं ने कनीना में चारों ओर चक्कर लगवाया तथा नृत्य किया। इस मौके पर शकुंतला शर्मा , सुशीला शर्मा ,स्नेह लता, रेनू शर्मा ,रूपाली, दीप्ति, हेमलता मौजूद थी।
क्या कहना है महिलाओं का-
गण का अर्थ है शिव तथा गौर का अर्थ है पार्वती। गणगौर का त्यौहार (चैत्र शुक्ल तृतीया) मुख्य रूप से माता पार्वती (गौर) और भगवान शिव (गण) को समर्पित है, जो अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने कठोर तपस्या से शिवजी को प्रसन्न कर पति के रूप में प्राप्त किया था। यह पर्व प्रेम, समर्पण और स्त्री शक्ति का उत्सव है, जिसमें महिलाएं सज-धजकर पूजा करती हैं।
गणगौर की पौराणिक कथा-
महिलाओं ने बताया कि कथा के अनुसार, माता पार्वती हिमालय की पुत्री थी और उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए बहुत कठिन तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
 एक बार शिव-पार्वती और नारद जी पृथ्वी पर भ्रमण कर रहे थे। गरीब स्त्रियों ने उन्हें भक्तिपूर्वक जो कुछ उपलब्ध था, भोग लगाया। माता पार्वती ने प्रसन्न होकर उन पर अपने सुहाग  के छींटे डाले, जिससे उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिला।
इसके बाद जब धनी स्त्रियों ने कीमती थाल सजाकर पूजा की, तो माता पार्वती ने अपनी उंगली चीरकर उनके ऊपर रक्त छिड़का और कहा कि सच्चा सुहाग समर्पण में है दिखावे में नहीं।
एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, एक वृद्धा मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। उसने माली के बगीचे से दूब/घास ली, तो माली ने उसे पकड़ लिया। तब माता पार्वती ने प्रसन्न होकर माली को सोने-चांदी के खजाने से भर दिया।
महिलाओं ने बताया कि सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
 इस दिन काला रंग वर्जित माना जाता है और लाल-गुलाबी रंग शुभ माना जाता है। मिट्टी से पार्वती और शिवजी की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा की जाती है। गणगौर का पर्व राजस्थान सहित उत्तर भारत में हर्षोल्लास से मनाया जाता है और यह वसंत ऋतु व अच्छी फसल की कामना का भी प्रतीक माना जाता है।
फोटो कैप्शन 07: शिव एवं पार्वती के पुतले सिर पर रखकर गणगौर पूजन करते हुए


कनीना में सुबह सवेरे छाया कोहरा
-बढ़ गई है ठंड, फिर से निकाले ऊनी वस्त्र
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में जहां गत दिनों से मौसम में बदलाव हुआ है, वर्षा हुई है। जिसके बाद मौसम ठंडा हो गया है। तापमान कम से कम 16 डिग्री अधिकतम 27 डिग्री पहुंच गया है। गर्मी में भी सर्दी का एहसास होने लगा है। लोग एक बार फिर से उन्हें कपड़े निकाल कर पहने हुए नजर आए।
 गर्मी पडऩे से लोगों ने ऊनी कपड़े रख दिए थे किंतु अचानक मौसम बदलने से फिर से निकालने पड़े हैं। उधर इस समय किसान अपनी सरसों की फसल सुखा रहे हैं। जहां तीन दिनों तक वर्षा होने के बाद अब किसान सरसों की फसल को सूखाने में लग गये हैं ताकि पैदावार ली जा सके।
 तीन दिन बूंदाबांदी के बाद में सूरज तेजी से चमकने लगा। किसान मौसम खुलते अपनी सरसों की फसल सूखने लग गये है और गेहूं फसल में जो नुकसान हुआ इसका जायजा भी ले रहे हैं।
फोटो कैप्शन 6: कनीना क्षेत्र में छाया कोहरा





कनीना खास रेलवे स्टेशन पर छाया रहता है अंधेरा
-ट्रेन आने पर दुर्घटना की आशंका
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कनीना की आवाज।
 कनीना खास रेलवे स्टेशन पर यूं तो ट्रेन न रुकने से  कनीनावासी परेशान हैं और उन्हें महेंद्रगढ़ या रेवाड़ी जाकर ट्रेन पकडऩी पड़ रही है। उपमंडल होते हुए भी कनीना की यह दुर्गति बनी हुई है।  वहीं रेलवे स्टेशन पर अंधेरा छाए रहने से लोग परेशान है।
जब ट्रेन आती है तब भी कुछ नहीं दिखाई देता जिससे कोई भी दुर्घटना घट सकती है। ट्रेन से सफर करने वाले यथार्थ, रमेश, सुरेश, दिनेश कुमार एवं अमीश कुमार आदि ने बताया कि वो शुक्रवार की सुबह सवेरे दिल्ली जाने के लिए तैयार थे किंतु पहले तो कनीना की बिजली सप्लाई बंद थी। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और वर्षा के कारण कीचड़ में पैर लग रहे थे।  तत्पश्चात बिजली सप्लाई होने के बाद भी कनीना खास रेलवे स्टेशन अंधेरे में डूबा रहा। ट्रेन भी मुश्किल से दिखाई दे रही थी। जब मौसम खराब होता है और अंधेरा छाए रहता है तो ऐसी स्थिति में ट्रेन से सफर करना जोखिम भरा कार्य बन जाता है। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि कम से कम कनीना खास रेलवे स्टेशन की शुद्ध ली जाए। सभी ट्रेनों का ठहराव भी किया जाए, लाइट की उचित व्यवस्था की जाए। फोटो कैप्शन 5: कनीना खास रेलवे स्टेशन पर छाया अंधेरा



  कुकिंग सिलिंडर जांच के लिए गठित टीम ने की विभिन्न गैस एजेंसियों की जांच
--सब कुछ ठीक-ठाक पाया गया
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कनीना की आवाज।
फूड सप्लाई इंस्पेक्टर ध्यान सिंह नेतृत्व में गठित टीम ने कनीना फूड सप्लाई इंस्पेक्टर के तहत आने वाली 7 विभिन्न गैस एजेंसी की जांच की। जिला उपयुक्त नारनौल के आदेश अनुसार सभी गैस एजेंसियों की जांच करने पर पाया कि सभी जगह बुकिंग सही चल रही है, सप्लाई भी सही चल रही है और किसी से अधिक पैसे भी नहीं लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बड़ा कनीना फूड सप्लाई के तहत भडफ़, कनीना, सेहलंग, बाघोत, पाथेड़ा, भोजावास एवं दौंगड़ा अहीर गैस एजेंसियां आती है। जहां पर गठित टीम ने जाकर हर पहलू को जांचा, सभी ठीक-ठाक पाए गए।
 फोटो कैप्शन 3: गठित टीम गैस एजेंसी का दौरा करते हुए



विश्व जल दिवस पर ......22 मार्च
जल नहीं बचाया तो होगा भविष्य अंधकारमय
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कनीना की आवाज।
पृथ्वी पर कहने को 71 प्रतिशत भू-भाग पर जल भरा हुआ है किंतु पीने योग्य जल 3 प्रतिशत से भी कम है। यदि जल का इसी प्रकार दोहन होता रहा तो आने वाले समय में जल गंभीर समस्या बन कर उभरेगा जिससे जीना मुश्किल हो जाएगा।
ऐसे मिल वर्षा जल संरक्षण करने, भूमिगत जल को बचाने, रिचार्ज करने आदि की बातें बार-बार उभर कर आ रही। इस संबंध में शिक्षाविद एवं विज्ञान के जानकार डा. होशियार सिंह यादव से बात की गई-
उनका कहना है कि जमीन के नीचे 1.6 प्रतिशत पानी और हवा में 0.001 प्रतिशत हवा में वाष्प के रूप में है। दिनोंदिन शुद्ध जल घटता जा रहा है। अगर जल का संरक्षण नहीं किया जाए तो भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्षा के जल को घरों में इकट्ठा करना चाहिए। वर्षा एवं घरेलू जल को भूमिगत भूमि में जाने दिया जाए। वर्षा जल सहेजकर जल से सब्जी और फल बनाने चाहिए।  उनका  कहना है क्या जल को जीवन का अमृत माना गया है। जल बिना बिना जीना दूभर हो जाएगा। ऐसे में उन्होंने जल को भविष्य के लिए बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल अधिक प्रयोग किया गया तो जल संकट निश्चित है। जल आवश्यकतानुसार प्रयोग करना चाहिए, जल को बहाने से रोकना बहने से रोकना चाहिए।
उनका कहना है कि जल है तो कल है। अगर इंसान को मौत से बचना है तो पानी का सोच समझकर प्रयोग किया जाना चाहिए। ऐसे में प्रत्येक जन को प्रतिदिन 2-4 लीटर पानी जरूर बचाना चाहिए। पूरे देश में प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन 2-4 लीटर पानी बचाएगा तो आने वाले समय में पानी की पूर्ति हो सकेगी। वरना आने वाले समय में पेट्रोल पंप की भांति उपलब्ध होगा।
डा. यादव का कहना है कि पीने योग्य पानी में से 2.4 प्रतिशत ग्लेशियर और उत्तरी दक्षिणी धु्रव पर जमा हुआ है। केवल 0.6 प्रतिशत पानी झीलों तालाबों में है जिसका उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि एक अनुमान अनुसार धरती पर 32 करोड़ 60 लाख खराब गैलन पानी है। अगर यह पानी इसी रफ्तार से प्रयोग किया जाता रहा तो अधिक दिनों तक नहीं चल पाएगा। ऐसे में उन्होंने कम पानी वाली फसलें उगाने, आवश्यकतानुसार पानी प्रयोग करने पर बल दिया।
उनका कहना है कि एक इंसान खाने पीने में नहाने में कपड़े धोने में प्रतिदिन 50 से 60 लीटर पानी प्रयोग कर लेता है। यही हाल चलता रहा तो भविष्य में पीने योग्य शुद्ध जल भी नहीं मिल पाएगा। ऐसे में सभी की छतों से निकलने वाला बारिश का जल तथा घरों से निकलने वाला जल रिचार्ज में मिलाना चाहिए ताकि भूमिगत जल में जाकर यह जल शुद्ध अवस्था में मिल सके।
 फोटो कैप्शन: होशियार सिंह



पदयात्रियों का दल पहुंचा माता मंदिर घड़ी
-5 घंटों में पहुंचा कनीना से महासर
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कनीना की आवाज।
 कनीना से 10 व्यक्तियों के पदयात्रियों का एक दल घड़ी महासर के लिए पदयात्रा पर रवाना हुआ और 5 घंटे में अपना सफर पूरा किया। इन दस व्यक्तियों में ओमप्रकाश बाबूजी, निरंजन, उदय सिंह प्रधान, सतीश कुमार ,शिवचरण, सुरेंद्र सिंह, सतवीर बोहरा, संजीव भारद्वाज, वेदपाल, श्रीकिशन शर्मा एवं डा. होशियार सिंह यादव प्रमुख थे। इनमें से 6 व्यक्ति करीरा से संबंध रखते हैं।
 उन्होंने बताया कि विभिन्न स्थानों पर वे पदयात्रा कर रहे हैं। इससे पहले भी बलवाड़ी के लिए पदयात्रा पर गए थे। अब 29 मार्च को भैंरू का बास पदयात्रा पर जाएंगे। महासर पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। डा. होशियार सिंह ने बताया कि वे कई बार कांवड़ हरिद्वार से लाकर बाघेश्वरधाम पर अर्पित कर चुके हैं वहीं खाटू श्याम भी जाते रहे हैं।
 उधर महासर माता मंदिर के पुजारी राकेश कुमार ने बताया कि माता मंदिर पर 25 मार्च को मेला लगेगा। इस बार पुष्करदत्त पुजारी की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्षभर माता मंदिर में भंडारा लगता है। प्रतिदिन सुबह 9 बजे भोग लगाकर भंडारे का शुभारंभ कर दिया जाता है। यह भंडारा कमेटी द्वारा लगाया जाता है।
राकेश कुमार पुजारी ने बताया कि भंडारे में कोई भी वक्ति आकर खाना खा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे संसार में जहां कहीं भी इस क्षेत्र के लोग बसे हैं वो  भी इस दिन महासर पहुंचते हैं। अमेरिका, जर्मन, हार्वर्ड आदि अनेक देशों से चलकर भक्त कुलदेवी पर आकर विवाह शादी जोड़े की जात लगाते हैं तथा बाल उतरवाते हैं। उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माता के यहां यहां पर हलवा, पूड़ी, चना का भोग लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि हर शुक्ल पक्ष सप्तमी को यहां हर मां छोटा मेला लगता है लेकिन दो बार वर्ष में नवरात्रों का मुख्य मेला लगता है। उन्होंने बताया इस पंचमी के दिन 23 मार्च को भारी संख्या में भक्तों का एक दल अटेली से चलकर आएगा। पुलिस का पूरा प्रबंध है।
फोटो कैप्शन 01: माता मंदिर में पैदल पहुंचे भक्त




डा. भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति की बैठक 22 को
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कनीना की आवाज।
रविवार  22 मार्च को डा. भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति कनीना की एक बैठक  महर्षि वाल्मीकि धर्मशाला कनीना में शाम 4:30 बजे बुलाई गई है। प्रधान कृष्ण कुमार पूनिया ने बताया, इस बैठक में कनीना ब्लाक के सभी सामाजिक बुद्धिजीवी लोग तथा ब्लाक कनीना की सभी समितियां ेके पदाधिकारी इस बैठक में शामिल होंगे। समिति के महासचिव राजेंद्र कपूरी ने बताया कि बैठक में विशेष मुद्दों पर विचार विमर्श किया जाएगा तथा समिति के सदस्यता बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। इसलिए सभी कनीना ब्लाक के क्षेत्रवासियों सभी समितियों के पदाधिकारी व सामाजिक बुद्धिजीवी लोगों से डॉ भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति की तरफ से अपील है कि इस बैठक में ज्यादा से ज्यादा लोग समय पर प












हुंच कर अपने अपने विचार रखें।


Friday, March 20, 2026




 


कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-16
-हाजिर को गैर हाजिर दर्शाकर काट लिया वेतन, लड़ते रहो न्यायालय में
-अंधेर नगरी चौपट राजा, टका सेर भाजी खा जा
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव ने बतौर विज्ञान अध्यापक एवं प्राध्यापक 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया है। उन्होंने स्कूल, कालेज निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य किया है। इस अवधि दौरान करीब 35 विभिन्न स्कूल प्राचार्यों के साथ काम किया और उनमें से चंद कुतरूं प्राचार्य निकले। जिनका नाम लेते ही तन मन में दर्द होता है। जिनकी भावना हीन रही है। किसी के काम को रोकने आए हैं। सच का साथ नहीं दिया और उन्होंने सदा ही अच्छे और स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों का विरोध किया। ऐसे ही कुतरूं प्राचार्य के कारनामे सामने आये हैं। आज एक कारनामा यहां उजागर किया जा रहा है।
कुतरूं प्राचार्य किस प्रकार कर्मचारियों को परेशान करते हैं कैसे उनको अनुपस्थित दर्शकर वेतन काट लेते हैं का एक बहुत सुंदर उदाहरण सामने आया है। होशियार सिंह की विज्ञान अध्यापक अनेकों बार तबादले किए गए। यहां तक की मेवात में दो बार तबादले करवाए गए और इन दौरान परेशानियां स्वाभाविक होती है। सबसे बड़ी परेशानी उसे समय आई जब होशियार सिंह की पत्नी कैंसर से पीडि़त थी और उस समय भी एक बार बदली हुई मेवात में करवा दी गई, परंतु सबसे बड़ा दुर्भाग्य उस वक्त का है जब एक कुतरूं प्राचार्य ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला से पहुंच बनाकर और किसी के जरिये पाठ खोरी, मेवाती में तबादला करवा दिया। यद्यपि 21 नवंबर को तबादले के आदेश आए। उस दिन होशियार सिंह ने पूरा दिन विद्यालय में काम किया और एक कुतरूं प्राचार्य ने जानबूझकर कार्यभार  मुक्त कर दिया। यद्यपि कुतरूं प्राचार्य से यह बात हुई थी कि आज यानी 21 नवंबर को उन्हें कार्यभार मुक्त मत करना किंतु उन्होंने किसी के दवाब में आकर झटपट ही कार्यभारमुक्त कर ही दिया। साथ में उस दिन को भी अनुपस्थित दर्शा दिया। जबकि हाजिरी रजिस्टर में 21 नवंबर के पूरे समय के हस्ताक्षर किए हुए हैं। यद्यपि वापस कार्यभार ग्रहण 15 दिसंबर को कर लिया गया किंतु 21 नवंबर से 15 दिसंबर तक कुतरूं प्राचार्य नेे अनुपस्थित दर्शाया है। जिससे समस्या बढ़ गई। एक दिन का वेतन काट लिया गया। अनावश्यक रूप से वेतन काट लिया गया। आश्चर्य तो तब हुआ कि न तो उच्च अधिकारियों ने इस संबंध में कोई बात सुनी। जिला शिक्षा अधिकारी, एसओ तथा जिस स्कूल से सेवानिवृत्त हुआ उन्होंने भी संबंध में कुछ नहीं सुना। इससे बुरी बात और क्या हो सकती है। यदि इन कुतरूं प्राचार्यों का एक दिन का वेतन जानबूझकर काटा जाए तो उनके साथ क्या बीतेगी? यह उनसे पता किया जाए जिनके चोट लगती है। अब कोर्ट कचहरी में लड़ते रहिए जो मिलने हैं उससे कहीं ज्यादा पैसे खर्च कीजिए। तब जाकर यह हक मिलेगा लेकिन अब यह निर्णय किया है कि चाहे एक रुपये लेने के लिए हजार रुपए खर्च करने पड़े किंतु उन कुतरूं प्राचार्यों से जो इसके लिए जिम्मेदार हैं,ब्याज सहित पैसे वसूलने का प्रयास किया जाएगा। न्यायालय की शरण ली जाएगी और चाहे सुप्रीम कोर्ट भी जाना पड़े तो जाने के लिए तैयार रहेंगे किंतु इन कुतरूं प्राचार्य को जिन्होंने इस प्रकार की चाल की चली और अब तक उस दिन का वेतन नहीं निकला उनको चैन से नहीं बैठने दिया जाएगा। कहावत है सांच को आंच नहीं लगता चूंकि यहां तो सांच ही जलती नजर आ रही है। एक कवि ने कहा है अंधेर नगरी चौपट राजा टका सेर भाजी खा जा वाली कहावत लागू हो रही है। फांसी का फंदा किसी को डालना चाहिए और डाल रहे किसी और को। एक सच को जानते हुए भी कितने कुतरूं प्राचार्य अनजान बन रहे हैं। इससे बुरी बात और क्या हो सकती है। लोग अक्सर कहते की सच्चाई की जीत होती है लेकिन पता नहीं सच्चाई की जीत कब होगी? इस प्रकरण में एक कुतरूं प्राचार्य नहीं कई कुतरूं प्राचार्यों का हाथ है स्पष्ट है कि उच्च अधिकारियों का भी हाथ है जो जानकर अनजान बने हुए हैं। आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं। हाजिरी रजिस्टर में हस्ताक्षर होते हुए भी फिर क्यों नहीं मान रहे? हैं ना, वो सभी कुतरूं जो सच को सच नहीं मान रहे।



सब्जी मंडी कनीना के व्यापारियों ने मंदिर निर्माण में दिये 21500
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कनीना की आवाज।
सब्जी मंडी कनीना के व्यापारियों ने मंदिर निर्माण में किया 21500 का सहयोग दिया है।
बाबा मोलडऩाथ मंदिर कमेटी प्रधान दिनेश यादव ने बताया कि व्यापारियों ने 21500 रुपए का सहयोग किया है। अनेक व्यापारी बाबा के धाम पर पहुंचे और इन्होंने अपनी श्रद्धा से राशि भेंट की। व्यापारियों में गोपी सेठ, गुड्डू चौधरी, विजय कुमार देवेंद्र ,छोटू, राहुल, विक्रम सिंह व अन्य लोगों का मंदिर कमेटी द्वारा फूल मला पहनकर सम्मान किया गया।
 इस मौके पर गुड्डू चौधरी ने कहा कि आगे भी हम मंदिर निर्माण में सहयोग करते रहेंगे और यह सभी व्यापारियों की सहमति से हमने राशि भेंट की है। नवरात्रों के शुभ अवसर पर यह दान करके हम बहुत ही खुशी और प्रसन्नता महसूस करते हैं। मंदिर कमेटी द्वारा जो हमारा सम्मान में स्वागत किया उसके लिए हम कमेटी के आभारी हैं। इस मौके पर प्रधान दिनेश यादव, रमेश कुमार, मास्टर अनिल कुमार, अशोक डीपी, बलबीर साहब, प्रकाश साहब, लाल सिंह, महंत रामनिवास, मुकेश शर्मा, शिवकुमार, शिवचरण, महेंद्र सिंह, अरविंद कुमार व अन्य लोग उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 05: व्यापारी मोलडऩाथ आश्रम निर्माण हेतु दान देते हुए।





होटलों और धर्मशालाओं के लिए हरसमय पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य, जिलाधीश कैप्टन मनोज कुमार ने जारी किए आदेश
-मेहमानों के विवरण का रियल-टाइम अपडेट होना जरूरी
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कनीना की आवाज।
जिला में चल रहे सभी होटलों, गेस्ट हाउसों, लाज, धर्मशालाओं और होमस्टे संचालकों के लिए अब हरसमय पोर्टल' पर पंजीकरण करना अनिवार्य कर दिया गया है। जिलाधीश कैप्टन मनोज कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत इस संबंध में कड़े आदेश जारी किए हैं। ये आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
जिला प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कई आवास प्रतिष्ठानों ने अभी तक इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण नहीं कराया है। नए निर्देशों के अनुसार, सभी मालिकों और प्रबंधकों को न केवल खुद को पोर्टल पर पंजीकृत करना होगा, बल्कि वहां रुकने वाले हर मेहमान और आगंतुक की पूरी जानकारी भी प्रतिदिन समय पर अपडेट करनी होगी।
इन आदेशों का मुख्य उद्देश्य जिले में अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाना और सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करना है। जिलाधीश ने स्पष्ट किया है कि मेहमानों के विवरण का रियल-टाइम अपडेट होना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की निगरानी और जांच प्रभावी ढंग से की जा सके। उचित दस्तावेजीकरण न होने से सुरक्षा में चूक की संभावना बनी रहती है, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इन आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा और दंडित किया जाएगा। जिले के सभी संबंधित संचालकों को हिदायत दी गई है कि वे बिना किसी देरी के इस प्रक्रिया को पूरा करें।



विश्व कविता दिवस -21 मार्च
-कविता के प्रति गहन लगाव होता है लोगों का
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कनीना की आवाज।
विश्व कविता दिवस  21 मार्च को मनाया जाता है  और इसे संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन द्वारा 1999 में काव्य अभिव्यक्ति के माध्यम से भाषाई विविधता का समर्थन करने और लुप्तप्राय भाषाओं को सुनने के अवसर बढ़ाने  के उद्देश्य से घोषित किया गया था।
कविता दिवस का उद्देश्य विश्व भर में कविता के पठन, लेखन, प्रकाशन और शिक्षण को बढ़ावा देना है और जैसा कि मूल यूनेस्को घोषणा में कहा गया है राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कविता आंदोलनों को नई पहचान और प्रोत्साहन देना है।  विभिन्न स्थानों पर कविता पाठ, प्रतियोगिताएं और शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें अक्सर अल्पसंख्यक भाषाओं की कविताओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
इस समाज में कवि और लेखक डा. होशियार सिंह यादव चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि कविता के प्रति यूं तो हर बच्चा, बूढ़ा ,महिला और पुरुष का लगाव होता है किंतु बेहतरीन कविता हो तो सभी को मन को लुभाती है। यदि कविता में कोई भाव हो या रोचक तथ्य शामिल हो तो उसकी और ध्यान अधिक दिया जाता है। यद्यपि गद्य लेखन और कविता लेखन दोनों ही मुश्किल काम है लेकिन कविता लिखने, पढऩे, सुनने की ओर अधिक रुझान होता है जबकि ले,ा आदि पढऩे में कम रुचि रखी जाती है। समाज भी कवियों की कवियों की बात को ध्यान से सुनता है और उनके विचारों को से प्रभावित होता है किंतु लेखक के विचारों को कम ध्यान देते हैं। यह स्वाभाविक बन गया है। आज किसी भी बच्चे से पूछा जाए तो कविता लिखने के लिए अधिक लालायित मिलता है और वो कवि कहलाने में खुशी महसूस करता है।
कविता लिखते समय हर पहलू को ध्यान में रखकर लिखा जाए तो रोचकता बढ़ जाती है और अधिक लोग पसंद करते हैं। वैसे तो आलेख और गद्य विधा को भी सुनने वाले और पढऩे वाले कम नहीं। गद्य में अग रोचकता अधिक पाई जाए ,उसमें यदि आंकड़े अधिक है और सारगर्भित हो तो अधिक पढ़ा जाएगा। ऐसे में चाहे विधा पद्य हो या गद्य उसमें आंकड़े और विचारों का समावेश किया जाए, कविता है तो वह गेय पद्धति पर आधारित हो तो अधिक उत्सुकता बनती है।
  फोटो कैप्शन: डा. होशियार सिंह यादव


4.23 करोड़ से अधिक की सरसों का हुआ
गबन
- एक व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर्ज, उन्हाणी हैफेड परिसर से हुआ है गबन, पुलिस मामले की जांच में जुटी
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कनीना की आवाज।
 कनीना से 3 किलोमीटर दूर उन्हाणी स्थित है हैफेड परिसर से करीब 4 करोड़ 23 लाख की सरसों का गबन कर दिया गया है। इस संबंध में जिला प्रबंधक हैफेड नारनौल द्वारा एक व्यक्ति के विरुद्ध गबन का मामला दर्ज करवाया है। कनीना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
 पुलिस में दी गई शिकायत में जिला प्रबंधक हैफेड, नारनौल ने कहा है कि आरएमएस/रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान सरसों खरीद से संबंधित स्टाक जो अप्रैल 2025 से जून 2025 तक हैफेड कांप्लेक्स उन्हाणी, कनीना के गोदाम में स्टोर किया गया था। ऋषिदेव पुत्र सतबीर सिंह निवासी कंवर सिंह कालोनी झज्जर को फील्ड इंस्पेक्टर, स्टोर कनीना के पद पर कार्यरत है, कि सुरक्षा में रखा गया था। कार्यालय के अभिलेखों के अनुसार उनके पास कुल 131635.50 क्विंटल सरसों जो 45 किलो ग्राम वाले 295483 बैगों में पैक थी और स्टाक थी।  6 मार्च 2026 को दो आरओ एक अलवर तथा दूसरा कोटा को हैफेड परिसर उन्हाणी से 2600 क्विंटल सरसों प्रत्येक आरओ डिलीवरी हेतु जारी किए थे। 12 मार्च 2026 को जब इस पार्टी के प्रतिनिधि हैफेड परिसर उन्हाणी में सरसों लिफ्ट करने आए तो वहां लोड करने के बाद उन्होंने कार्यालय को फोन पर सूचित किया कि अधिकांश स्टाक ढेर में बिखरे पड़े हैं और कुछ बैग कटे हुए हैं जिनकी डिलीवरी के लिए मात्रा कम हो सकती है। तुरंत हैफेड अधिकारी ने हैफेड परिसर उन्हाणी का दौरा किया और ऋषिदेव फील्ड इंस्पेक्टर को मोबाइल पर काल किया लेकिन काल नहीं उठाई गई। बाद में उन्होंने मोबाइल बंद कर दिया गया।
 इसके बाद वीरेंद्र कुमार केंद्र प्रभारी को भी गोदाम पर बुलाया गया। उस वक्त गोदाम स्टाक रजिस्टर उपलब्ध नहीं था और स्टाक की डिलीवरी सुरक्षा गार्ड द्वारा की जा रही थी। 12 मार्च 2026 तक उनके स्टाक में कुल 124033.90 क्विंटल सरसों जो की 280281 बैंगों में निजी पार्टियों तथा एचओएम रेवाड़ी एवं नारनौल को डिलीवरी की जा चुकी थी। ऐसे में कार्यालय के रिकार्ड अनुसार गोदाम में लगभग 16892 बैग सरसों के होने चाहिए था परंतु भौतिक सत्यापन दौरान गोदाम में लगभग 4600 बैग ही उपलब्ध हो पाए। इस प्रकार सरसों में लगभग 12292 बैग सरसों की कमी पाई गई। अधिकारी अनुसार करीब 5531.60 क्विंटल सरसों की कमी पाई गई है जिसका अनुमानित मूल्य 4 करोड़ 12 लाख 44 हजार 793 बनता है। इसी प्रकार कार्यालय रिकार्ड अनुसार उनके पास बारदाना भी विभिन्न ब्रांड के कम पाए गए जिनमें एक ब्रांड के 969 बैग/बारदाना कम पाए गये जिनकी कीमत करीब 91 हजार 842 रुपए बनती है। दूसरे ब्रांड के 12685 बैग/बसरदाना कम पाए गए जिनका मूल्य 10 लाख 32 हजार 940 है। इस प्रकार सरसों बारदाना कमी के कारण हरियाणा स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एवं मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड करो अनुमानित 4 करोड़ 23 लाख 69 हजार 575 रुपए की हानि हुई है। उन्होंने कहा एक ऋषिदेव फील्ड इंस्पेक्टर 12 मार्च 2026 को लगभग 3 बजे शाम से ड्यूटी स्थल से अनुपस्थित है। जिला प्रबंधक एवं केंद्र प्रभारी द्वारा उनसे लगातार फोन संपर्क करने का प्रयास किया, उनके निवास स्थान झज्जर पर भी जाकर देखा परंतु वह वहां नहीं मिले। यही नहीं वे अब तक संपर्क में नहीं आए हैं। समस्त स्टाक का रखरखाव एवं कस्टडी कार्य ऋषिदेव फील्ड इंस्पेक्टर हफ्टेड कांप्लेक्स उन्हाणी के पास थी। ऐसे में स्टाक में पाई गई सरसों एवं बारदाना कमी के लिए उपरोक्त पूर्ण जिम्मेदार है। और हरियाणा स्टेट कोआपरेटिव सप्लाई मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड को आर्थिक हानि हुई है। उन्होंने कहा कि गोदाम में रखे गए  स्टॉक रजिस्टर भी मौके पर उपलब्ध नहीं पाया गया। ऐसे में ऋषिदेव पुत्र सतवीर सिंह झज्जर निवासी, फील्ड इंस्पेक्टर के विरुद्ध मामला दर्ज करके कड़ी कार्रवाई की जाए। ऐसे में कनीना पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया और जांच अभी जारी है।
 इस मामले के संबंध में थाना शहर कनीना एसआई राकेश कुमार से बात हुई। उन्होंने बताया कि मामला एक व्यक्ति के विरुद्ध हो चुका है। मामले की जांच अपराध शाखा आर्थिक कर रहे हैं। उधर जिला प्रबंधक हैफेड नारनौल फोन नहीं उठा रहे हैं।






सदन में पार्षद महिला की जगह नहीं बैठ पाएंगे पार्षद पति...
-नगर निकाय बैठकों में महिला पार्षद की उपस्थिति अनिवार्य, नियम तोडऩे पर होगी कार्रवाई
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कनीना की आवाज।
हरियाणा में महिला सशक्तिकरण को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब प्रदेश की नगर पालिकाओं, नगर परिषदों और नगर निगमों की बैठकों में महिला पार्षदों की जगह उनके पति, भाई, बेटे या किसी भी पुरुष प्रतिनिधि के बैठने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग  की ओर से जारी नए निर्देशों के अनुसार, यदि कोई पुरुष प्रतिनिधि महिला पार्षद की जगह सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेता या हस्तक्षेप करता पाया गया तो संबंधित पार्षद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के संज्ञान में आया था कि च्प्रतिनिधि प्रथाज् के कारण महिला आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य कई जगहों पर पूरा नहीं हो पा रहा था। अक्सर महिलाएं चुनाव तो जीत जाती हैं, लेकिन सदन के भीतर उनके अधिकारों और शक्तियों का इस्तेमाल उनके परिवार के पुरुष सदस्य करते हैं। आम बोलचाल में इन्हें च्पार्षद पतिज् या च्सुपर पार्षदज् कहा जाता है।
इसी प्रथा को खत्म करने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि नगर निकायों की बैठकों में महिला पार्षद की स्वयं उपस्थिति अनिवार्य होगी। सरकार का मानना है कि इससे महिलाएं अपने वार्ड की समस्याओं को खुद सदन में रखेंगी, जिससे उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता भी विकसित होगी।
नए निर्देशों में यह भी कहा गया है कि नगर निगमों को हर महीने कम से कम एक बैठक और हर छह महीने में तीन दिन का विधिवत सत्र बुलाना अनिवार्य होगा।
वहीं नगर निगम गुरुग्राम  की अगली सदन बैठक 19 मार्च को प्रस्तावित है। निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस बैठक में किसी भी महिला पार्षद के प्रतिनिधि को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। साथ ही अब बैठकों की सूचना और कार्यवाही की रिपोर्ट संबंधित सांसदों और विधायकों को भेजना भी अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।


पिता की तेरहवीं पर पुत्री ने गौशाला को दिए 2.11 लाख रुपए
--आर्य समाज मंदिर को दिये 11 हजार रुपए
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कनीना की आवाज।
कनीना निवासी स्वर्गीय सूबेदार करतार सिंह की तेरहवीं पर उनकी पुत्री नीना यादव ने श्रीकृष्ण गौशाला, कनीना को 2 लाख 11 हजार रुपए का दान दिया है। यही नहीं अपितु आर्य समाज मंदिर में लगने वाले चिकित्सा शिविर के लिए भी 11 हजार रुपये का दान दिया है। नीना यादव अपने पिता की इकलौती संतान हैं। उन्होंने अपने पति पूर्व कालेज प्राचार्य पीके यादव के साथ मिलकर पिता की वृद्धावस्था में निरंतर सेवा की और अंतिम समय तक उनका पूरा ध्यान रखा। नीना यादव सेवानिवृत्त प्राध्यापिका हैं, जबकि उनके पति कालेज प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
गौरतलब है कि स्वर्गीय करतार सिंह ने भी गौसेवा के प्रति आस्था रखते हुए इस वर्ष अपने जन्मदिन के अवसर पर गौशाला को 51 हजार रुपये का सहयोग दिया था। इस अवसर पर गौशाला प्रधान भगत सिंह व कार्यकारिणी सदस्यों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए शांति पाठ किया और परिवार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्य समाज को सेवा और संस्कारों की प्रेरणा देते हैं। इस दौरान सचिव यश कनीनवाल, सह-सचिव रामपाल, बलवान सिंह आर्य, ओमप्रकाश आर्य, उप-प्रधान दिलावर सिंह, रविंद्र बंसल, मास्टर रामप्रताप, पूर्व पार्षद राजेंद्र, कृष्ण प्रकाश गुरुजी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02:पूर्व प्राध्यापिका नीना यादव गौशाला में दान देते हुए



कनीना क्षेत्र में दो दिनों से हुई 14 एमएम वर्षा
-गेहूं की फसल को हुआ है नुकसान
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में जहां विगत तीन दिनों से मौसम लगातार बदल रहा है और बूंदाबांदी रुक रुककर हो रही है। इससे पहले जहां गर्मी का माहौल रहा। जबकि तीन दिनों से गर्मी में भी सर्दी का एहसास हुआ है। फिर से लोगों को ऊनी कपड़े पहनने पड़े  हैंक्योंकि तापमान गिरता ही जा रहा है।
 जहां शुक्रवार को सुबह 7 एमएम वर्षा हुई । वर्षा सुबह 4बजे से पहले ही शुरू हो गई थी। धीरे-धीरे बूंदाबांदी चलती रही। दोपहर तक मौसम खराब रहा जिसके चलते सड़कों के किनारे पर पानी खड़ा हो गया। हर जगह कीचड़ और दलदल की हालत बन गई है। इस प्रकार के झड़ ने सावन को भी मात दे दी है। वहीं सबसे अधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ा है।
 इस समय किसानों ने सरसों की फसल को काटकर इक_ा कर रखा है जो तेज हवाएं चलने से उड़ गई वहीं लावणी में व्यवधान आ गया है। अभी गेहूं की फसल की लावणी होने में कुछ समय बाकी है किंतु सरसों की फसल में  दिक्कत आ गई है। किसान अब काटकर डाली गई फसल को सुखाएंगे तत्पश्चात ही पैदावार ले पाएंगे। उधर गेहूं की फसल वर्षा होने और तेज हवाएं चलने से धरती पर लेट गई। अधिकांश किसानों की गेहूं की फसल धरती पर लेट गई है। किसानों के अनुसार उसमें 10 से 20 प्रतिशत नुकसान होने का अंदेशा बन गया है क्योंकि धरती पर लेटी फसल की लावणी भी संभव नहीं और वह सही ढंग से पक भी नहीं पाएगी।
 उल्लेखनीय है कि कनीना क्षेत्र में करीब 20000 हेक्टेयर पर सरसों तथा करीब 9 हजार हेक्टेयर पर गेहूं की फसल उगाई गई है। किसान गेहूं की लावणी का इंतजार कर रहे है जबकि सरसों की लावणी त्वरित गति से चल रही है।
 इस संबंध में एसडीओ कृषि विभाग महेंद्रगढ़ डा. अजय यादव से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि सरसों की फसल में अभी तक कोई नुकसान नहीं हुआ है लेकिन गेहूं की फसल जो धरती पर लेट गई है उसमें नुकसान होने की पूरी संभावना बन गई है।
एसडीओ ने दी किसानों को हिदायत-
एसडीओ कृषि डा. अजय यादव अनुसार जिन किसानों को लगता है कि फसल में नुकसान हो गया है और उन्होंने फसल का बीमा करवा रखा है। उन्हें खेत में अपनी पालिसी ले जाकर खेत में खड़े होकर आनलाइन शिकायत दर्ज करवानी है। शिकायत में पालिसी नंबर होना बहुत जरूरी है। तत्पश्चात शिकायत पर सर्वे होगी और आगे की कार्रवाई चलेगी। ऐसे में उन्होंने कहा कि केवल वो किसान जिन्होंने अपनी फसल बीमा करवा रखा है और नुकसान हुआ है तो वे ही आनलाइन शिकायत दर्ज करवाये।
फोटो कैप्शन 04: गेहूं की फसल लेटी हुई दिखाता किसान
फोटो कैप्शन 3: सड़क के किनारे भरा हुआ वर्षा का जल



सूबेदार करतार सिंह की याद में दिए गौशाला को 2.11 लाख रुपए
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कनीना की आवाज।
 कनीना के सूबेदार करतार सिंह की पगड़ी के कार्यक्रम में उनकी पुत्री नीना यादव ने कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला को 2.11 लाख रुपए दिये हैं। उनका कहना है कि गायों के लिए चारे की जरूरत होती है। यही नहीं उन्होंने कनीना के आर्य समाज मंदिर में प्रतिदिन लगने वाले चिकित्सा शिविर हेतु भी 11000 रुपए दिए हैं। उल्लेखनीय यादव हिंदी प्रवक्ता से सेवानिवृत्त है तथा अपने पिता सूबेदार करतार सिंह की एकमात्र पुत्री है। उन्होंने कहा कि समाज में गायों की सेवा करना तथा मरीजों की सेवा करना हर इंसान का फर्ज होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह दान दिया है ताकि गायों और गरीबों की सेवा में कुछ राशि खर्च की जा सके।
इस मौके पर प्रधान भगत सिंह, नीना यादव, रीता देवी, पवन कुमार, प्रदीप, दिलावर सिंह, यश यादव, सह सचिव रामपाल यादव, विकास यादव, रविंद्र बंसल,होशियार सिंह सत्संगी, राजेंद्र पार्षद बलवान सिंह, अशोक कुमार, सतवीर गुगनवाला, राज सिंह प्रापर्टी डीलर ,महेंद्र सिंह साहब आदि उपस्थित रहे।
 फोटो कैप्शन 02: नीना यादव गौशाला में दान करते हुए







एलपीजी के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्त व हेल्पलाइन नंबर जारी
-उपभोक्ता 01282-251249 पर कर सकते हैं शिकायत
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कनीना की आवाज।
उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार के निर्देशानुसार जिला महेंद्रगढ़ में एलपीजी की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनाधिकृत उपयोग पर जिला प्रशासन सख्ती से कार्रवाई कर रहा है। विभाग ने इसके लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के साथ-साथ जिला स्तरीय हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है।
यह जानकारी देते हुए सहायक खाद्य एवं पूर्ति अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि प्रभावी निगरानी के लिए
सहायक खाद्य एवं पूर्ति अधिकारी नारनौल अरुण कुमार को नारनौल, अटेली व नांगल चौधरी तथा सहायक खाद्य एवं पूर्ति अधिकारी, सर्कल कार्यालय नारनौल पुरुषोत्तम को महेंद्रगढ़ कनीना तथा सतनाली के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।
उन्होंने बताया कि सर्कल कार्यालय नारनौल के लैंडलाइन नंबर 01282-251249 को उपभोक्ताओं की एलपीजी से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। यदि किसी भी उपभोक्ता को एलपीजी वितरण में अनियमितता, कालाबाजारी या जमाखोरी की जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत उपरोक्त हेल्पलाइन नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

 


कनीना का मां शेरावाली मंदिर जहां नवरात्रों में लगती है भीड़
-वर्ष में दो बार आते हें नवरात्रे
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कनीना की आवाज।
 मंदिर की स्थापना करीब 18 वर्ष पूर्व हुई है। इसका निर्माण कार्य संजीत यादव कनीना के निवासी की देखरेख में संपन्न हुआ है। इस मंदिर के चारों ओर द्वार एवं विशाल सीढिय़ां हैं। दूर से ही आकर्षित करता हुआ माता मंदिर वर्तमान में विख्यात है। संत मोलडऩाथ आश्रम परिसर में ही यह मां का भव्य मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर के पास बाबा को ग्राउंड है जहां संतों को भोजन कराया जाता है।
मंदिर की भव्य मूर्ति 51 हजार रुपये में जयपुर के प्रसिद्ध कारीगरों द्वारा निर्मित करवाकर विधि विधान से इस मंदिर में स्थापित करवाई गई थी। प्रत्येक नवरात्रों के समय मां के मंदिर को सजाया जाता है। भारी संख्या में भक्तजन यहां आते हैं। इस मंदिर की भव्यता ही इसका आकर्षण है। सुमन रोहिल्ला ने बताया कि कि वो हर वर्ष मां को नवरात्रों में पोशाक पहनाती हैं।
पूजा का विशेष विधान.
नवरात्रों पर समीपी गांवों के भक्तजन आते हैं और अपने साथ नारियल, मां की चुनरी, प्रसाद, मां की ध्वजा लेकर आते हैं और विधि विधान से पूजा करके ध्वजा को अर्पित कर देते हैं। करीब 61 फुट ऊंचे इस मंदिर में आकर पूजा अर्चना करते हैं।
शहर का एकमात्र मां मंदिर-
शहर का यह एकमात्र मां शेरावाली का मंदिर है। संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ आश्रम परिसर में बने इस मंदिर में भक्तजन अधिक आने के पीछे मंदिरों  का एक समूह विकसित होना है। पास में विभिन्न देवी देवताओं के एक दर्जन मंदिर बने हैं। आकर्षण का कारण शहीद प्रतिमाओं के पास होना भी है। पार्कों से सुसज्जित दस मंदिर को दूर दराज से भी देखा जा सकता है।
नवरात्रों के दिनों में यहां सैकड़ों भक्तजन आते हैं और मां के दर्शन करते हैं। इस मंदिर की देखरेख का काम भी कनीना के संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ आश्रम पर रहने वाले संत ही करते हैं। प्राचीन बाबा मोलडऩाथ आश्रम जोहड़ के किनारे पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचना आसान है क्योंकि पास में सामान्य बस स्टैंड स्थित है। वर्ष में दो बार आने वाले नवरात्रों पर भीड़ एक मेले का रूप ले लेती है।
 महेंद्रगढ़ के कनीना कस्बे तक रेल सेवा या बस सेवा से पहुंचा जा सकता है। रेलवे स्टेशन से महज दो किमी बस स्टैंड के पास ही यह भव्य मंदिर दिखाई पड़ता है। बाबा मोलडऩाथ आश्रम के पास मंदिर स्थित है। यहां पर कोई भी पुजारी नहीं रहता है। भक्तजन स्वयं यहां आकर धोक लगाकर अपने घरों को चले जाते हैं।
क्या कहते हैं भक्त.
भक्त दिनेश कुमार का कहना है कि कनीना क्षेत्र में यह विशाल मंदिर है जहां नवरात्रों में सुबह.शाम जोत जलती है और पूजा चलती है। भक्तजन भी यहां आकर जोत जलाते हैं। इस मंदिर में भक्तों का पूरे नवरात्रों में तांता लगा रहता है। दूर दराज से भक्त आते हैं और पूजा करते हैं।
क्या कहते हैं पुजारी-
पूजारी रामनिवास महंत का कहना है कि वर्ष में दो बार आने वाले इन नवरात्रों में वे मां के मदिर जाते हैं और पूजा अर्चना करके विशेष आनंद मिलता है। मां के नवरात्रों में वे व्रत रखते हैं और मां की पूजा अर्चना करने के लिए प्रसाद, नारियल एवं चुनरी ले जाते हैं। मां के चरणों में जोत जलाते हैं।
फोटो कैप्शन-01 मां मंदिर
02 मां की मूर्ति।
साथ में दिनेश एवं रामनिवास












पूर्व प्राध्यापिका ने मोलडऩाथ आश्रम को दिये 51 हजार
-मोलडऩाथ कमेटी ने किया उन्हें सम्मानित
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कनीना की आवाज।
बेटियां भी किसी से कम नहीं होती। ऐसा ही उदाहरण पेश किया आज स्व. करतार सिंह साहब की बेटी नीना यादव ने। पूर्व प्राध्यापिका नीना यादव बाबा मोलडऩाथ मंदिर अपनी चाची रीता देवी व चचेरे भाई पवन कुमार को साथ लेकर आई और संत के दर्शन करके  51000 रुपए की सहयोग राशि मंदिर निर्माण कार्य के लिए भेंट की। उन्होंने यह राशि अपने स्वर्गीय पिता करतार साहब की याद में दिये हैं। नीना यादव ने जहां पढ़ लिखकर एक ऊंचा मुकाम हासिल किया और बतौर प्राध्यापिका उन्होंने समाज की सेवा की। उन्होंने हर तरह से अपना फर्ज निभाया और अपने पिता को कभी यह महसूस होने ही नहीं दिया कि समाज में सिर्फ बेटे ही वह कार्य कर सकते हैं जो बेटियां नहीं कर सकती। वो अपने पिता करतार साहब की इकलौती पुत्री है। उन्होंने अपने हर कार्य को बखूबी निभाया है।
 प्रधान दिनेश यादव का मंदिर कमेटी की पूरी टीम ने उनका सम्मान किया। इस मौके पर प्रधान दिनेश यादव, सतबीर यादव, रमेश, मुकेश शर्मा, अशोक डीपी, प्रकाश साहब, बालवीर साहब, लाल सिंह, बाबा रामनिवास, शिवचरण, शिव कुमार, महेंद्र सिंह, अरविंद यादव ,मास्टर अनिल कुमार व अन्य लोग उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: नीना यादव संत मोलडऩाथ आश्रम कनीना को दान देते हुए।




Thursday, March 19, 2026



 





अन्तर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस-20 मार्च
-हंसने से मिट जाती हैं बीमारियां-यादव
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कनीना की आवाज।
इंसान धन दौलत से परिपूर्ण होते हुए भी प्रसन्न नहीं मिलता। प्रसन्न होना धन दौलत से हटकर होती है। प्रसन्नता का क्या आधार है, इस बारे में शिक्षाविद डा. एचएस यादव से चर्चा की गई। उनके विचार इस प्रकार रहे-   ***मौजूदा तनाव भरी जिंदगी में लोगों के चेहरे से खुशी गायब हो गई है। लोग खुश रहने के लिए लाफ्टर क्लब का सहारा लेने लगे हैं। भागमभाग जिंदगी में लोगों को अपने घर-परिवार के लिए समय ही नहीं है। लोगों के चेहरे की मुस्कराहट तनाव और अवसाद के चलते गायब होने लगी है। इससे शारीरिक और मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो समाज खुश रहता है वह समाज सबसे ज्यादा प्रगति करता है। जो देश सबसे ज्यादा खुशहाल है वह सबसे ज्यादा आर्थिक उन्नति भी करता है। अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस पर यह प्रण लें कि खुश रहने के लिए किसी एक दिन का इंतजार करने के बजाय हर पल में खुशी का क्षण तलाशने का प्रयास करें। उन्होंने बताया कि हंसने से जहां शरीर की अनेक बीमारियां गायब हो जाती हैं। इंसान को प्रतिदिन कुछ समय निकालकर हंसना चाहिए। बाबा रामदेव भी हंसने के लिए ठहाका लगवाते हैं। हंसने से दिनभर की थकान मिट जाती है। हंसना एक कला भी है। जो समाज में हंसना एवं मुस्कुराना जानते हैं वो जीवन में सफल होते हैं। अब तो डाक्टर भी मानते हैं कि दिल की बीमारियों में हंसना एक दवा का काम करती है। जो नहीं हंसते या जो नहीं रोते उनमें हृदयघात अधिक होने की संभावना होती है। ऐसे में खुलकर हंसना चाहिए।
  --डा. एचएस यादव



किसान सभी कार्य करवा रहे हैं मजदूरों से, हो गये हैं आलसी
--किसानों के पास वक्त का अभाव
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में सरसों की फसल कटाई शुरू हो गई हैं। किसान अपनी फसल कटाई स्वयं कम करते हैं और मजदूरों से अधिक करवा रहे हैं। दूसरे राज्यों से भारी संख्या में मजदूर आए हुए हैं जो 3500 प्रति एकड़ के हिसाब से फसल कटाई करते हैं। किसान अपने खेतों में फसल कटाई सरसों निकालना, यहां तक कि आने वाले समय में गेहूं की कटाई और भंडारण भूसे का भंडार आदि सभी कार्य इन मजदूरों से करवाते हैं। आलम यह है कि किसान अपने खेतों में जबसे फसल उगाता है तभी से उसकी रखवाली  का कार्य भी मजदूरों पर छोड़ता रहा है। मजदूर निश्चित राशि में फसलों की देखभाल करते हैं। फसलों की आवारा जंतुओं से देखरेख के लिए अलग से रखवाले भी रखे जाते हैं। ये रखवाले रात को आवारा जंतु जैसे नीलगाय से फसल की सुरक्षा करते हैं।
 किसानों ने बताया कि एक जमाना था जब परिवार के सदस्यों की संख्या अधिक होती थी उस समय मजदूरों की जरूरत कम पड़ती थी किंतु अब प्रत्येक घर में सदस्य की संख्या कम होती है। एक और जहां  चल रही हैं विद्यार्थी अपने स्कूल में परीक्षा देने जाते हैं वही किसान अपने खेतों में लावणी का कार्य करते हैं। लेकिन ऐसे बहुत कम किसान है जो अपने खेत की लावणी स्वयं करते हैं। मजदूरों पर ही लावणी का कार्य निर्भर करता है।
 मिली जानकारी अनुसार राजस्थान, बिहार ,उत्तर प्रदेश तथा अन्य राज्य से मजदूरों के ग्रुप आए हुए हैं। ये ग्रुप दस से लेकर के 30 की संख्या में मिलते हैं। एक साथ मिलकर कार्य करते हैं। फसल कटाई का काम जो दिनों में पूरा होना चाहिए कुछ ही घंटों में पूरा कर जाते हैं। यही कारण है किसान मौसम को देखते हुए तथा मौसम बदलाव के चलते हुए इन मजदूरों से कटाई करवाता है। यहां तक सरसों निकालना आदि का कार्य भी मजदूरों से करवा भंडारण तक का कार्य भी मजदूरों से करवाता है। एक और मजदूरों को अपनी रोटी रोजी मिल रही है वही किसान भी इन मजदूरों से काम करवा कर प्रसन्न नजर आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि घर गृहस्थी के काम में फुरसत नहीं मिलती जिसके चलते मजदूरों से काम करवाते हैं। दूसरे प्रांतों में दैनिक मजदूरी प्रदेश से कम है।
  कभी किसान खुशहाल होते थे। उसका सारा परिवार ही मेहनत करके लावणी आदि का काम कर लेता था जिससे कुछ पैसों की बचत होती थी किंतु अब पैसे भी नहीं बच पा रहे हैं। किसान की हालात बेहतर नहीं है।
फोटो कैप्शन 06: सरसों की लावणी का नजारा।



गर्मी में भी हुआ सर्दी का एहसास
-दो दिनों से हो रही है रुक-रुककर बूंदाबांदी 

-किसानों की चिंता बढ़ी
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कनीना की आवाज। 
कनीना और आसपास क्षेत्र में गर्मी में भी सर्दी का एहसास हो रहा है। मौसम बदलने, बूंदाबांदी होने से जहां सर्दी के कपड़े उतार दिए गए थे वो एक बार फिर से पहनने को मजबूर हो गए हैं क्योंकि तापमान घटता ही जा रहा है। कम से कम तापमान 17 डिग्री तो अधिकतम 24 डिग्री सेंटीग्रेड पहुंचा गया है। मौसम विभाग भविष्य में कुछ और दिनों तक भी इसी प्रकार मौसम रहने की संभावना जाता रहे हैं। परंतु सबसे बुरा हाल किसानों का है जो लगातार मौसम पर नजर टिकाए हुए हैं क्योंकि उनकी पकी पकाई फसल को नुकसान होने का अंदेशा बढ़ता ही जा रहा है। कनीना क्षेत्र में जहां 20,000 हेक्टेयर पर सरसों तो 9000 हेक्टेयर पर गेहूं उगाई गई है। गेहूं की फसल को अभी लावणी आने में 15 दिन बाकी है जबकि सरसों की त्वरित गति से लावणी  जारी है। कुछ किसानों ने तो सरसों की पैदावार भी ले ली है। किसान बेहद परेशान है क्योंकि लगातार मौसम बदलने से न केवल कृषि कार्य प्रभावित हो गए हैं अपितु सरसों की लावणी रुकी हुई है तथा नुकसान का अंदेशा बढ़ता जा रहा है। जहां दो दिनों से तेज हवा चलने से गेहूं की फसल गिर गई और गेहूं की फसल गिरने के बाद वह खड़ी नहीं हो सकती और उसमें नुकसान बढ़ता ही चला जाएगा। किसान मान्य अभी तक 10 प्रतिशत फसल में नुकसान हो चुका है।
 सरसों की फसल जो काट कर डाली गई उसमें भी नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। क्योंकि किसानों की वर्ष भर की आय इन्हीं फसलों से होती है और इनमें ही हर वर्ष इस प्रकार की समस्या आ जाती है। किसान अपनी फसलों को दिन रात मेहनत करके उगाते हैं और उनकी फसलों को ऐन मौके पर मौसमी समस्याएं नष्ट कर देती हैं। कृषि विभाग भी मानता है कि फसलों में नुकसान होगा। कुछ जगह तो ओले भी पड़े हैं वही फसल पक गई है उसमें अधिक नुकसान होने का अंदेशा है। सरसों की फलियां फट जाएगी जिससे सरसों मिट्टी में मिल जाएगी।
फोटो कैप्शन 06: गेहूं की गिरी हुई फसल




नव संवत्सर पर महाविद्यालय में वैदिक यज्ञ का भव्य आयोजन
-ताली बजाकर निरोग रहने के गुर सिखाए
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कनीना की आवाज।
राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हाणी में विक्रम संवत् 2083 के शुभारंभ के उपलक्ष्य में पवित्र यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ कंवर सिंह आर्य ने संपन्न कराया। उन्होंने यज्ञ की महिमा एवं उससे उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा के मानव जीवन पर पडऩे वाले प्रभावों पर भी प्रकाश डाला।
इस अवसर पर कृष्णानंद महाराज ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि बेटियां राष्ट्र की आधारशिला हैं। अत: स्त्री शिक्षा राष्ट्र के समग्र विकास के लिए न केवल आवश्यक, बल्कि अनिवार्य है। उन्होंने सनातन संस्कृति की महत्ता को भी विस्तारपूर्वक स्पष्ट किया।
हंसराज आर्य ने अपने वक्तव्य में आत्मसुधार पर बल देते हुए कहा कि व्यक्ति को सबसे पहले अपने अवगुणों को दूर करना चाहिए, तभी वह दूसरों को सही मार्ग दिखा सकता है।  इसके साथ ही उन्होंने 15 सेकंड तक ताली बजाने की सरल तकनीक के माध्यम से निरोग रहने के उपायों के बारे में भी छात्राओं को जानकारी दी, जिससे स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश मिला।  
प्राचार्य डा. विक्रम सिंह ने नव वर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसी पावन दिन भगवान श्रीराम, धर्मराज युधिष्ठिर एवं सम्राट विक्रमादित्य का राज्याभिषेक हुआ था तथा महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना भी इसी दिन की गई थी।
उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों को भी अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की वाहक बने।
फोटो कैप्शन 05: कालेज में यज्ञ करते हुए




झगड़े में एक घायल, पीजीआई रोहतक रेफर
-एक व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर्ज
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव सुंदरह में झगड़े में एक व्यक्ति घायल। कनीना पुलिस ने किया मामला दर्ज।
 देवकीनंदन गांव कटैया पनेहा,उत्तरप्रदेश हाल आबाद सुंदरह ने पुलिस में शिकायत दी है कि 11 मार्च को सुंदरह मेहनत मजदूरी के लिए महेंद्र सिंह सुंदराह के पास सरसों कटाई के लिए वह और उसके साथी आए हुए थे। सभी कुएं पर बने हुए कमरे में आराम कर रहे थे। शाम करीब 5:30 बजे अनिल उर्फ कालू भाड़ावास अपने तीन चार साथियों सहित आया और जबरदस्ती उसे उठाकर भाड़ावास लेकर जाना चाहा किंतु देवकीनंदन ने मना किया तो मारपीट करने और गाली-गलौज पर उत्तर आया। जबरदस्ती गाड़ी में डालने लगे तो शोर किया। अंदर से देवकीनंदन के साथी आ गए और उन्होंने छुड़वाया। जो जाते वक्त चाकू से वार कर उठा कर ले जाना चाहते थे और जान से मारना चाहते थे। उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। कनीना पुलिस ने एक व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर कर लिया है।




मां दुर्गा मंदिर कनीना में मनाया हिंदु नव वर्ष
-अखंड ज्योति की प्रज्वलित
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कनीना की आवाज।
बाबा मोलडऩाथ प्रांगण स्थित मां दुर्गा मंदिर में हिंदू नव वर्ष के शुभ अवसर पर नवरात्रों के अखंड ज्योति जलाकर व पूजा पाठ करके नए वर्ष की शुरुआत की। 9 दिन तक चलने वाली अखंड ज्योति को प्रवेश शर्मा द्वारा विधि विधान से प्रज्वलित किया गया।
इस मौके पर प्रधान दिनेश यादव ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नए साल की शुरुआत नवरात्रों के शुभ दिन से शुरू किया गया और 9 दिन तक जो जलेगी। उसके बाद विधि विधान से कन्या पूजन कर, प्रसाद वितरण किया जाएगा। दिनेश यादव ने बताया कि यह नव वर्ष हिंदू नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। पहले जब फसल काटते थे तो नया संवत भी इसको बोलते थे और घी-शक्कर खाकर इसकी शुरुआत करते थे। किसानों के लिए यह बहुत ही शुभ दिन माना जाता है कि नई फसल पककर तैयार हो जाती है और किसानों में इसके प्रति पूरा उत्साह देखने को मिलता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि नव वर्ष पर सभी मेलजोल मिलकर रहे और आपस में एक दूसरे से प्रेम भावना बनाए क्योंकि सनातन धर्म में यह पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। हम अंग्रेजी त्योहारों की तरह बढ़ गए और अपने पारंपरिक त्यौहारों को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वह हमेशा इस त्यौहार को बड़े हर्ष और उल्लास से मनाये।  
 इस मौके पर रमेश अनिल, मा.अशोक डीपी लाल सिंह, शिवचरण, अरविंद यादव, मुकेश शर्मा राजेंद्र सिंह, बलबीर साहब, प्रकाश साहब, बाबा रामनिवास, महेंद्र सिंह, सतवीर सिंह, विक्की शर्मा, आनंद शर्मा, पवन कुमार व अनेक महिलाएं विद्या देवी, सुमन रोहिल्ला, मुकेश देवी, संतोष देवी, लाली देवी आदि उपस्थित रही।
फोटो कैप्शन 03: नव वर्ष पर अखंड ज्योति जलाकर प्रसाद वितरित करते हुए




कनीना में प्रशासन का छापा, 8 अवैध सिलिंडर जब्त
--जिले में 4,614 सिलिंडर बैलेंस
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कनीना की आवाज।
जिला महेंद्रगढ़ में एलपीजी की सप्लाई को लेकर जिला प्रशासन सतर्क है। उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार के दिशा-निर्देशों पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की टीम ने आज कनीना क्षेत्र में छापेमारी की।
गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई के दौरान टीम ने मौके से 8 अवैध सिलिंडर जब्त किए हैं। इस सफल रेड का नेतृत्व निरीक्षक ध्यान सिंह, निरीक्षक रमेश और उप निरीक्षक संदीप की संयुक्त टीम ने किया।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की इस सक्रियता का मुख्य उद्देश्य घरेलू गैस के दुरुपयोग को जड़ से खत्म करना और आम उपभोक्ताओं के अधिकारों को सुरक्षित करना है।
सहायक खाद्य आपूर्ति अधिकारी अरुण सैनी ने बताया कि जिला में गैस की निर्बाध आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 18 मार्च की शाम तक जिले की विभिन्न गैस एजेंसियों के पास कुल 10,513 सिलेंडरों का स्टाक उपलब्ध रहा। उपभोक्ताओं की मांग को देखते हुए वितरण प्रक्रिया में भी तेजी लाई गई है, जिसके तहत आज 5,338 नई आनलाइन बुकिंग के मुकाबले कुल 5,899 सिलिंडरों की सफल डिलीवरी की गई। दिन भर के सुचारू वितरण के बाद जिले में 4,614 सिलिंडरों का मजबूत क्लोजिंग बैलेंस बचा है।
उन्होंने बताया कि आपूर्ति और मांग के बीच इस बेहतर तालमेल को बनाए रखने के लिए प्रशासन लगातार मानिटरिंग कर रहा है ताकि जिले के किसी भी कोने में गैस की किल्लत न हो।
फोटो कैप्शन 04:टीम द्वारा पकड़े गए अवैध सिलिंडर।




दृष्टांत के जन्मदिन पर गौशाला में किया दान-पुण्य
-5100 रुपये का दिया दान
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कनीना की आवाज।
गांव धवाना निवासी अशोक कुमार हाल आबाद कनीना ने अपने पुत्र दृष्टांत का जन्मदिन श्री कृष्ण गौशाला, कनीना में श्रद्धा एवं सेवा भाव के साथ मनाया। इस अवसर पर परिवार ने गौशाला पहुंचकर गौसेवा की तथा भगवान श्रीकृष्ण मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
जन्मदिन के उपलक्ष्य में परिवार द्वारा गोमाता की सेवा हेतु 5100 रुपए का सहयोग भी प्रदान किया गया। उल्लेखनीय है कि अशोक कुमार अपने पुत्र दृष्टांत का प्रत्येक जन्मदिन गौशाला में ही मनाते हैं और हर बार 5100 रुपए का योगदान देते आ रहे हैं, जो उनकी गोसेवा एवं गोमाता के प्रति अटूट आस्था को दर्शाता है।
अशोक कुमार भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के पश्चात वर्तमान में हरियाणा पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि दृष्टांत की माता सरिता देवी राजकीय माडल संस्कृति विद्यालय, कनीना में स्पेशल टीचर के पद पर कार्यरत हैं।
गौशाला प्रधान भगत सिंह ने दृष्टांत को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उसके दीर्घायु एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। गौशाला कार्यकारिणी ने परिवार के इस सराहनीय कार्य के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर होशियार सत्संगी, मास्टर रामप्रताप, ओमप्रकाश आर्य भडफ़, अमीर सिंह सुपरवाइजर तथा फूल सिंह यादव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: गौशाला में जन्म दिन मनाते हुए



वर्ष परिवर्तन का वास्तविक दिन वर्ष प्रतिपदा ही है -सत्यव्रत शास्त्री
-आज ही है सांस्कृतिक अहीरवाल संस्था के स्थापना दिवस
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कनीना की आवाज।
सांस्कृतिक अहीरवाल संस्था के स्थापना दिवस के अवसर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सत्यव्रत शास्त्री ने कहा वर्ष परिवर्तन का वास्तविक दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ही होता है क्योंकि आज ही के दिन ईश्वर ने इस सृष्टि की और रचना की थी । प्रकृति में इस समय जो परिवर्तन होता है वही इस बात का संकेत देता है। इस दिन को शुभ दिन मानकर अनेक महापुरुषों ने कुछ व्यवस्थाएं इस दिन के लिए ही रखी। जिसमें नवरात्रों को का शुभारंभ होता है ,श्रीराम का राज्याभिषेक के लिए भी  वर्ष प्रतिपदा के दिन को ही चुना गया था। उसके बाद महाभारत कालीन समय में महाराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक होना था तो उनके लिए भी इसी दिन के लिए चुनाव किया गया। जब इस देश पर शकों और हुणों का आतंक था तब महाराजा विक्रमादित्य ने उन विदेशी आक्रमणकारियों पर विजय प्राप्त की और और विजय दिवस के रूप में इसी वर्ष प्रतिपदा के दिन को ही चुना और उन्होंने आज से ही विक्रमी संवत का शुभारंभ किया।
  सत्यव्रत शास्त्री सांस्कृतिक अहीरवाल की स्थापना दिवस पर गोद गांव में आयोजित यज्ञ पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इसी दिन संत झूलेलाल का जन्मदिन भी वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में मनाया जाता था। गुरु अंगद देव का  जन्मदिन भी सिख परंपरा में इसी दिन मनाया जाता है। महर्षि दयानंद सरस्वती ने जब इस देश की परतंत्रता ,पाखंडवाद और घोर अंधकार के समय में जब कार्य करना शुरू किया तो उसके लिए आर्य समाज की स्थापना का दिन भी उन्होंने इसी दिन को चुना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डा. केशव राव बलिराम हेडगेवार का जन्मदिन भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसी दिन मनाता है। इन सब घटनाओं और महापुरुषों के कृत्य कार्यों से हम सबको यह ध्यान में आता है की युग युगांतरकारी परिवर्तन इसी दिन से शुरू होते हैं।
  इसलिए सांस्कृतिक अहीरवाल ट्रस्ट की स्थापना भी आज से 5 वर्ष पूर्व इसी दिन की थी? जिसका उद्देश्य अहीरवाल की प्राचीन संस्कृति व सभ्यता को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए एक कार्य योजना का निर्माण कर आगे बढ़ाना है।  सत्यव्रत शास्त्री ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक हम अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित मान्यताओं परंपराओं पर निर्विवाद रूप से चलते और मानते रहेंगे तो हमारे अंदर किसी प्रकार का दोष नहीं आएगा परिवार में गांव में देश में और समाज में जब भी कोई गलत काम करने का साहस करता है तो  उसका नाम दूसरी भाषा में होता है। इससे  हमें बचना चाहिए। कार्यक्रम संयोजक  केडी यादव ने उपस्थित लोगों का स्वागत व धन्यवाद किया । कार्यक्रम में सांस्कृतिक अहीरवाल के जिला मीडिया प्रभारी शीशपाल बदोपुर, विश्व हिंदू परिषद के जिला संयोजक सांवत सिंह, स्वदेशी जागरण के जिला संयोजक राजेश शास्त्री, काशीराम , अमरसिंह  भांखरी,रामौतार, शेर सिंह, राजेंद्र यादव, ओमप्रकाश यादव, बिल्लू, अभय सिंह यादव, नरेश मास्टर, इंद्रजीत मास्टर, सुरेश यादव, कर्ण सिंह यादव, राजेंद्र यादव डोहर कलां उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: हवन आयोजित करते हुए


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