कनीना में धूम धाम से मनाया गया गणगौर पर्व
-शनिवार को किया गया समापन
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कनीना की आवाज। कनीना में गणगौर पूजन पर्व बड़ी धूम धाम से मनाया गया। गणगौर की 16 दिन तक पूजा चलती है। इसकी शुरुआत होली के दूसरे दिन हुई थी और समापन चैत शुक्ल पक्ष की तृतीय अर्थात शनिवार को कर दिया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि गणगौर पूजन भगवान शिव और पार्वती के विवाह से संबंधित है। और शिव और पार्वती को साक्षी मान कर पूजन किया जाता है। महिलाएं भगवान शिव और पार्वती के पुतले बनाती है और उनका शृंगार करती है। पुतलों सहित महिलाओं ने कनीना में चारों ओर चक्कर लगवाया तथा नृत्य किया। इस मौके पर शकुंतला शर्मा , सुशीला शर्मा ,स्नेह लता, रेनू शर्मा ,रूपाली, दीप्ति, हेमलता मौजूद थी।
क्या कहना है महिलाओं का-
गण का अर्थ है शिव तथा गौर का अर्थ है पार्वती। गणगौर का त्यौहार (चैत्र शुक्ल तृतीया) मुख्य रूप से माता पार्वती (गौर) और भगवान शिव (गण) को समर्पित है, जो अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने कठोर तपस्या से शिवजी को प्रसन्न कर पति के रूप में प्राप्त किया था। यह पर्व प्रेम, समर्पण और स्त्री शक्ति का उत्सव है, जिसमें महिलाएं सज-धजकर पूजा करती हैं।
गणगौर की पौराणिक कथा-
महिलाओं ने बताया कि कथा के अनुसार, माता पार्वती हिमालय की पुत्री थी और उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए बहुत कठिन तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
एक बार शिव-पार्वती और नारद जी पृथ्वी पर भ्रमण कर रहे थे। गरीब स्त्रियों ने उन्हें भक्तिपूर्वक जो कुछ उपलब्ध था, भोग लगाया। माता पार्वती ने प्रसन्न होकर उन पर अपने सुहाग के छींटे डाले, जिससे उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिला।
इसके बाद जब धनी स्त्रियों ने कीमती थाल सजाकर पूजा की, तो माता पार्वती ने अपनी उंगली चीरकर उनके ऊपर रक्त छिड़का और कहा कि सच्चा सुहाग समर्पण में है दिखावे में नहीं।
एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, एक वृद्धा मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। उसने माली के बगीचे से दूब/घास ली, तो माली ने उसे पकड़ लिया। तब माता पार्वती ने प्रसन्न होकर माली को सोने-चांदी के खजाने से भर दिया।
महिलाओं ने बताया कि सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
इस दिन काला रंग वर्जित माना जाता है और लाल-गुलाबी रंग शुभ माना जाता है। मिट्टी से पार्वती और शिवजी की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा की जाती है। गणगौर का पर्व राजस्थान सहित उत्तर भारत में हर्षोल्लास से मनाया जाता है और यह वसंत ऋतु व अच्छी फसल की कामना का भी प्रतीक माना जाता है।
फोटो कैप्शन 07: शिव एवं पार्वती के पुतले सिर पर रखकर गणगौर पूजन करते हुए
कनीना में सुबह सवेरे छाया कोहरा
-बढ़ गई है ठंड, फिर से निकाले ऊनी वस्त्र . ****************************************
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जहां गत दिनों से मौसम में बदलाव हुआ है, वर्षा हुई है। जिसके बाद मौसम ठंडा हो गया है। तापमान कम से कम 16 डिग्री अधिकतम 27 डिग्री पहुंच गया है। गर्मी में भी सर्दी का एहसास होने लगा है। लोग एक बार फिर से उन्हें कपड़े निकाल कर पहने हुए नजर आए।
गर्मी पडऩे से लोगों ने ऊनी कपड़े रख दिए थे किंतु अचानक मौसम बदलने से फिर से निकालने पड़े हैं। उधर इस समय किसान अपनी सरसों की फसल सुखा रहे हैं। जहां तीन दिनों तक वर्षा होने के बाद अब किसान सरसों की फसल को सूखाने में लग गये हैं ताकि पैदावार ली जा सके।
तीन दिन बूंदाबांदी के बाद में सूरज तेजी से चमकने लगा। किसान मौसम खुलते अपनी सरसों की फसल सूखने लग गये है और गेहूं फसल में जो नुकसान हुआ इसका जायजा भी ले रहे हैं।
फोटो कैप्शन 6: कनीना क्षेत्र में छाया कोहरा
कनीना खास रेलवे स्टेशन पर छाया रहता है अंधेरा
-ट्रेन आने पर दुर्घटना की आशंका
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कनीना की आवाज। कनीना खास रेलवे स्टेशन पर यूं तो ट्रेन न रुकने से कनीनावासी परेशान हैं और उन्हें महेंद्रगढ़ या रेवाड़ी जाकर ट्रेन पकडऩी पड़ रही है। उपमंडल होते हुए भी कनीना की यह दुर्गति बनी हुई है। वहीं रेलवे स्टेशन पर अंधेरा छाए रहने से लोग परेशान है।
जब ट्रेन आती है तब भी कुछ नहीं दिखाई देता जिससे कोई भी दुर्घटना घट सकती है। ट्रेन से सफर करने वाले यथार्थ, रमेश, सुरेश, दिनेश कुमार एवं अमीश कुमार आदि ने बताया कि वो शुक्रवार की सुबह सवेरे दिल्ली जाने के लिए तैयार थे किंतु पहले तो कनीना की बिजली सप्लाई बंद थी। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और वर्षा के कारण कीचड़ में पैर लग रहे थे। तत्पश्चात बिजली सप्लाई होने के बाद भी कनीना खास रेलवे स्टेशन अंधेरे में डूबा रहा। ट्रेन भी मुश्किल से दिखाई दे रही थी। जब मौसम खराब होता है और अंधेरा छाए रहता है तो ऐसी स्थिति में ट्रेन से सफर करना जोखिम भरा कार्य बन जाता है। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि कम से कम कनीना खास रेलवे स्टेशन की शुद्ध ली जाए। सभी ट्रेनों का ठहराव भी किया जाए, लाइट की उचित व्यवस्था की जाए। फोटो कैप्शन 5: कनीना खास रेलवे स्टेशन पर छाया अंधेरा
कुकिंग सिलिंडर जांच के लिए गठित टीम ने की विभिन्न गैस एजेंसियों की जांच
--सब कुछ ठीक-ठाक पाया गया
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कनीना की आवाज। फूड सप्लाई इंस्पेक्टर ध्यान सिंह नेतृत्व में गठित टीम ने कनीना फूड सप्लाई इंस्पेक्टर के तहत आने वाली 7 विभिन्न गैस एजेंसी की जांच की। जिला उपयुक्त नारनौल के आदेश अनुसार सभी गैस एजेंसियों की जांच करने पर पाया कि सभी जगह बुकिंग सही चल रही है, सप्लाई भी सही चल रही है और किसी से अधिक पैसे भी नहीं लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बड़ा कनीना फूड सप्लाई के तहत भडफ़, कनीना, सेहलंग, बाघोत, पाथेड़ा, भोजावास एवं दौंगड़ा अहीर गैस एजेंसियां आती है। जहां पर गठित टीम ने जाकर हर पहलू को जांचा, सभी ठीक-ठाक पाए गए।
फोटो कैप्शन 3: गठित टीम गैस एजेंसी का दौरा करते हुए
विश्व जल दिवस पर ......22 मार्च
जल नहीं बचाया तो होगा भविष्य अंधकारमय
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कनीना की आवाज।पृथ्वी पर कहने को 71 प्रतिशत भू-भाग पर जल भरा हुआ है किंतु पीने योग्य जल 3 प्रतिशत से भी कम है। यदि जल का इसी प्रकार दोहन होता रहा तो आने वाले समय में जल गंभीर समस्या बन कर उभरेगा जिससे जीना मुश्किल हो जाएगा।
ऐसे मिल वर्षा जल संरक्षण करने, भूमिगत जल को बचाने, रिचार्ज करने आदि की बातें बार-बार उभर कर आ रही। इस संबंध में शिक्षाविद एवं विज्ञान के जानकार डा. होशियार सिंह यादव से बात की गई-
उनका कहना है कि जमीन के नीचे 1.6 प्रतिशत पानी और हवा में 0.001 प्रतिशत हवा में वाष्प के रूप में है। दिनोंदिन शुद्ध जल घटता जा रहा है। अगर जल का संरक्षण नहीं किया जाए तो भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्षा के जल को घरों में इकट्ठा करना चाहिए। वर्षा एवं घरेलू जल को भूमिगत भूमि में जाने दिया जाए। वर्षा जल सहेजकर जल से सब्जी और फल बनाने चाहिए। उनका कहना है क्या जल को जीवन का अमृत माना गया है। जल बिना बिना जीना दूभर हो जाएगा। ऐसे में उन्होंने जल को भविष्य के लिए बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल अधिक प्रयोग किया गया तो जल संकट निश्चित है। जल आवश्यकतानुसार प्रयोग करना चाहिए, जल को बहाने से रोकना बहने से रोकना चाहिए।
उनका कहना है कि जल है तो कल है। अगर इंसान को मौत से बचना है तो पानी का सोच समझकर प्रयोग किया जाना चाहिए। ऐसे में प्रत्येक जन को प्रतिदिन 2-4 लीटर पानी जरूर बचाना चाहिए। पूरे देश में प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन 2-4 लीटर पानी बचाएगा तो आने वाले समय में पानी की पूर्ति हो सकेगी। वरना आने वाले समय में पेट्रोल पंप की भांति उपलब्ध होगा।
डा. यादव का कहना है कि पीने योग्य पानी में से 2.4 प्रतिशत ग्लेशियर और उत्तरी दक्षिणी धु्रव पर जमा हुआ है। केवल 0.6 प्रतिशत पानी झीलों तालाबों में है जिसका उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि एक अनुमान अनुसार धरती पर 32 करोड़ 60 लाख खराब गैलन पानी है। अगर यह पानी इसी रफ्तार से प्रयोग किया जाता रहा तो अधिक दिनों तक नहीं चल पाएगा। ऐसे में उन्होंने कम पानी वाली फसलें उगाने, आवश्यकतानुसार पानी प्रयोग करने पर बल दिया।
उनका कहना है कि एक इंसान खाने पीने में नहाने में कपड़े धोने में प्रतिदिन 50 से 60 लीटर पानी प्रयोग कर लेता है। यही हाल चलता रहा तो भविष्य में पीने योग्य शुद्ध जल भी नहीं मिल पाएगा। ऐसे में सभी की छतों से निकलने वाला बारिश का जल तथा घरों से निकलने वाला जल रिचार्ज में मिलाना चाहिए ताकि भूमिगत जल में जाकर यह जल शुद्ध अवस्था में मिल सके।
फोटो कैप्शन: होशियार सिंह
पदयात्रियों का दल पहुंचा माता मंदिर घड़ी
-5 घंटों में पहुंचा कनीना से महासर
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कनीना की आवाज। कनीना से 10 व्यक्तियों के पदयात्रियों का एक दल घड़ी महासर के लिए पदयात्रा पर रवाना हुआ और 5 घंटे में अपना सफर पूरा किया। इन दस व्यक्तियों में ओमप्रकाश बाबूजी, निरंजन, उदय सिंह प्रधान, सतीश कुमार ,शिवचरण, सुरेंद्र सिंह, सतवीर बोहरा, संजीव भारद्वाज, वेदपाल, श्रीकिशन शर्मा एवं डा. होशियार सिंह यादव प्रमुख थे। इनमें से 6 व्यक्ति करीरा से संबंध रखते हैं।
उन्होंने बताया कि विभिन्न स्थानों पर वे पदयात्रा कर रहे हैं। इससे पहले भी बलवाड़ी के लिए पदयात्रा पर गए थे। अब 29 मार्च को भैंरू का बास पदयात्रा पर जाएंगे। महासर पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। डा. होशियार सिंह ने बताया कि वे कई बार कांवड़ हरिद्वार से लाकर बाघेश्वरधाम पर अर्पित कर चुके हैं वहीं खाटू श्याम भी जाते रहे हैं।
उधर महासर माता मंदिर के पुजारी राकेश कुमार ने बताया कि माता मंदिर पर 25 मार्च को मेला लगेगा। इस बार पुष्करदत्त पुजारी की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्षभर माता मंदिर में भंडारा लगता है। प्रतिदिन सुबह 9 बजे भोग लगाकर भंडारे का शुभारंभ कर दिया जाता है। यह भंडारा कमेटी द्वारा लगाया जाता है।
राकेश कुमार पुजारी ने बताया कि भंडारे में कोई भी वक्ति आकर खाना खा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे संसार में जहां कहीं भी इस क्षेत्र के लोग बसे हैं वो भी इस दिन महासर पहुंचते हैं। अमेरिका, जर्मन, हार्वर्ड आदि अनेक देशों से चलकर भक्त कुलदेवी पर आकर विवाह शादी जोड़े की जात लगाते हैं तथा बाल उतरवाते हैं। उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माता के यहां यहां पर हलवा, पूड़ी, चना का भोग लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि हर शुक्ल पक्ष सप्तमी को यहां हर मां छोटा मेला लगता है लेकिन दो बार वर्ष में नवरात्रों का मुख्य मेला लगता है। उन्होंने बताया इस पंचमी के दिन 23 मार्च को भारी संख्या में भक्तों का एक दल अटेली से चलकर आएगा। पुलिस का पूरा प्रबंध है।
फोटो कैप्शन 01: माता मंदिर में पैदल पहुंचे भक्त
डा. भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति की बैठक 22 को
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कनीना की आवाज। रविवार 22 मार्च को डा. भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति कनीना की एक बैठक महर्षि वाल्मीकि धर्मशाला कनीना में शाम 4:30 बजे बुलाई गई है। प्रधान कृष्ण कुमार पूनिया ने बताया, इस बैठक में कनीना ब्लाक के सभी सामाजिक बुद्धिजीवी लोग तथा ब्लाक कनीना की सभी समितियां ेके पदाधिकारी इस बैठक में शामिल होंगे। समिति के महासचिव राजेंद्र कपूरी ने बताया कि बैठक में विशेष मुद्दों पर विचार विमर्श किया जाएगा तथा समिति के सदस्यता बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। इसलिए सभी कनीना ब्लाक के क्षेत्रवासियों सभी समितियों के पदाधिकारी व सामाजिक बुद्धिजीवी लोगों से डॉ भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति की तरफ से अपील है कि इस बैठक में ज्यादा से ज्यादा लोग समय पर प
हुंच कर अपने अपने विचार रखें।














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