सरकारी दर पर 2961 क्विंटल खरीदी सरसों
-गेहूं की कुल खरीद पहुंची 74746 क्विंटल
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कनीना की आवाज। कनीना में सरकारी दर एवं निजी स्तर पर सरसों की खरीद जारी है। सरकारी तौर पर करीब 2961 क्विंटल सरसों 6200 प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी गई। । अब तक किसान प्राइवेट स्तर पर सरसों बेच रहे हैं। नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में निजी स्तर पर सरसों बेचने वाले भारी संख्या में किसान आ रहे हैं और निजी स्तर पर करीब 23886 क्विंटल सरसों खरीदी जा चुकी है। अब तक 19110 क्विंटल सरसों की लिफ्टिंग की जा चुकी है।
विस्तृत जानकारी देते हुए जगराम यादव सीनियर मैनेजर हैफेड ने बताया कि अब तक 2961 क्विंटल सरसों सरकारी तौर पर खरीदी गई है। अशोक कुमार डीइओ/डाटा इंट्री आपरेटर ने बताया कि कनीना की अनाज मंडी स्थित चेलावास में अब तक करीब 74746 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। सरकारी तौर पर यह गेहूं खरीदा गया है और अब तक करीब 55500 क्विंटल गेहूं का उठान किया जा चुका है।
फोटो कैप्शन 03: कनीना अनाज मंडी में सरसों की खरीद
धनौंदा में पंच के लिए आया एक नामांकन
-कनीना के पांच गांवों में होंगे पंचों के उप चुनाव
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कनीना की आवाज। कनीना उप-मंडल के पांच गांवों के पंचों के उप चुनाव होंगे जिनमें नामांकन का काम जारी है। ये पांच गांव हैं भोजावास,कपूरी, स्याणा, धनौंदा और छीथरोली प्रमुख हैं। अभी तक धनौंदा में पंच के लिए एक नामांकन भरा गया है। इस संबंध में एआरओ सोमवीर धनखड़ ने बताया कि एक नामांकन भरा जा चुका है। नामांकन भरने की अंतिम तिथि 25 अप्रैल है।
वार्ड 14 उपचुनाव
- सियासी सरगर्मियां तेज, चुनावी पारा चढ़ा
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कनीना की आवाज। कनीना कस्बे के वार्ड नंबर 14 में होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। बढ़ती गर्मी के बावजूद उम्मीदवारों की चुनावी दौड़-धूप और जनसंपर्क अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। विभिन्न गुटों और निर्दलीय संभावित प्रत्याशी घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं।
अभी तक एक भी नामांकन नहीं भरा है। नामांकन से पहले वोट मांगने की प्रक्रिया जारी है। अभी तक एक दर्जन के करीब संभावित प्रत्याशी वोट मांग रहे हैं। एक ओर तपती गर्मी उस पर चुनावी सरगर्मी और अब वोट मांगने की गर्मी वार्ड 14 के वोटरों को चैन की सांस नहीं लेने दे रही है।
चुनावी माहौल में इस बार मतदाता भी काफी जागरूक नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि नगरपालिका के प्रधान और उपप्रधान चुनाव के समय जितनी सक्रियता दिखा रहे हैं, यदि वही प्रतिबद्धता पिछले एक वर्ष के कार्यकाल में विकास कार्यों में दिखाई जाती तो आज इस तरह घर-घर जाकर वोट मांगने की जरूरत नहीं पड़ती।
इस उपचुनाव में कुछ दिलचस्प समीकरण भी देखने को मिल रहे हैं। एक निजी स्कूल संचालक द्वारा दो-दो प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारने की चर्चा जोरों पर है, जिस पर मतदाता अपने स्तर पर आकलन कर रहे हैं। जिन्होंने कस्बे के विकास के लिए कोई भी कार्य नहीं किया हो और पहले पार्षद आदि रह चुका हो किंतु अब चुनाव की तैयारी में जुटा हो उसको लेकर भी मतदाताओं के बीच मूल्यांकन का दौर जारी है। कुछ संभावित उम्मीदवारों के सामाजिक और व्यक्तिगत रिकार्ड को लेकर भी मतदाताओं में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह उपचुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बदलाव का संकेत भी दे सकता है। मतदाताओं की बढ़ती जागरूकता और मुद्दों पर केंद्रित चर्चा इस चुनाव को और अधिक रोचक बना रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे इस बार विकास, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। आने वाले दिनों में चुनावी गतिविधियों के और तेज होने की संभावना है, जिससे वार्ड 14 का यह उपचुनाव कस्बे की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
कनीना में उपचुनाव के मद्देनजर शस्त्र जमा कराने के आदेश
कनीना वार्ड-14 व विभिन्न गांवों में सुरक्षा के मद्देनजर धारा 163 लागू
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कनीना की आवाज। जिले के विभिन्न गांवों और कनीना नगर पालिका के वार्ड नंबर 14 में आगामी 10 मई को होने वाले उपचुनावों के दौरान शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। जिलाधीश अनुपमा अंजली ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जिला की सीमाओं के भीतर आग्नेयास्त्र और गोला-बारूद ले जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। चुनावी प्रक्रिया संपन्न होने तक प्रभावी रहने वाले इन आदेशों के तहत सभी शस्त्र लाइसेंस धारकों को अपने हथियार संबंधित पुलिस थानों या अधिकृत शस्त्र डीलरों के पास अनिवार्य रूप से जमा कराने होंगे।
यह निर्देश विशेष रूप से फतेहपुर, छिथरोली, स्याना, खुडाना, बुडवाल और कनीना वार्ड-14 सहित उन सभी क्षेत्रों के लिए जारी किए गए हैं जहां मतदान होना है।
प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल ड्यूटी पर तैनात वर्दीधारी पुलिस, सैन्य व अर्धसैनिक बलों के कर्मियों, बैंक सुरक्षा गार्डों और खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले अधिकृत खिलाडिय़ों को ही नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी। अन्य किसी भी स्थिति में हथियार रखने की आवश्यकता होने पर लाइसेंस धारक जिला प्रशासन द्वारा गठित विशेष स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
जिलाधीश ने स्पष्ट किया है कि संबंधित थाना प्रबंधक और शस्त्र डीलर जमा किए गए हथियारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी होंगे। आदेशों की अवहेलना या उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 तथा अन्य सुसंगत कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कनीना पुलिस की कामयाबी
राजस्थान के लूट के मामले में पीओ (कनीना थाने का हिस्ट्रीशीटर) पकड़ा
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कनीना की आवाज। जिला पुलिस द्वारा अपराधियों और भगोड़ों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत आज थाना शहर कनीना की पुलिस टीम ने सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए राजस्थान के सूरजगढ़ थाने के एक पुराने लूट के मामले में फरार चल रहे उद्घोषित अपराधी (पीओ) और थाना शहर कनीना के हिस्ट्रीशीटर मनजीत निवासी उन्हाणी को काबू कर लिया है।
आरोपी मनजीत थाना शहर कनीना का हिस्ट्रीशीटर है, जिसके खिलाफ अलग-अलग थानों में हत्या, लूट, मारपीट, लडाई–झगड़े, आर्म्स एक्ट के तहत करीब 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं। आरोपी राजस्थान के थाना सूरजगढ़ में वर्ष 2009 में दर्ज लूट और मारपीट के एक मामले में लंबे समय से उद्घोषित अपराधी (पीओ) चल रहा था। पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद आरोपी मनजीत को गहन पूछताछ के लिए थाना शहर कनीना लाया गया। यहां आवश्यक पूछताछ और कार्रवाई पूरी करने के उपरांत, आरोपी को आगामी कानूनी कार्रवाई के लिए थाना सूरजगढ़ (राजस्थान) की पुलिस टीम के हवाले कर दिया गया है।
इस गिरफ्तारी के माध्यम से जिला पुलिस ने यह कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है कि जिले में अपराध और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। जिला पुलिस अपराधियों, भगोड़ों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।
फोटो कैप्शन 02: पकड़ा गया पीओ
कनीना नगरपालिका में तीसरे दिन भी नहीं आया कोई नामांकन
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कनीना की आवाज। नगरपालिका कनीना के वार्ड संख्या 14 में होने वाले उपचुनाव को लेकर जारी नामांकन प्रक्रिया के तीसरे दिन भी नामांकन केंद्र पर कोई नामांकन पत्र नहीं आया।
चुनाव रिटर्निंग अधिकारी (नगरपालिका कनीना) एवं एसडीएम डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि नामांकन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है, परंतु आज शाम तक किसी भी उम्मीदवार द्वारा पर्चा नहीं भरा गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विस्तृत दैनिक रिपोर्ट जिला उपायुक्त तथा राज्य निर्वाचन आयोग, पंचकूला को प्रेषित कर दी गई है।
पंचायती-राज दिवस-24 अप्रैल
लोकतंत्र की बुनियादी संरचना है पंचायती राज-राधेश्याम
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कनीना की आवाज। पंचायती-राज दिन भारतीय लोकतंत्र की उस बुनियादी संरचना को समर्पित है, जो गांव-गांव में जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता और विकेंद्रीकरण की भावना को मजबूत करती है। पंचायती-राज केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है, जहां जनता स्वयं अपने विकास का निर्णय लेती है। ये विचार राष्ट्रीय पंचायती राज प्रशिक्षक, विशेषज्ञ राधेश्याम गोमला के हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में पंचायती व्यवस्था का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। वैदिक काल से ही ग्राम सभाओं और स्थानीय निकायों का उल्लेख मिलता है। ऋग्वेद में ग्रामीण व्यवस्था से जुड़े सभा, समिति, विदथ व ग्रामणि शब्दों का कई बार जिक्र आया है।
मौर्यकाल, गुप्तकाल, मुगलकाल और ब्रिटिश काल में शासकों ने इसका क्रियात्मक रूप अपने अनुरूप रखा । हालांकि ब्रिटिश काल में लॉर्ड रिपन को इसके सुधार का श्रेय दिया जाता है। यद्यपि भारत की आजादी के बाद कुछ समितियों का गठन कर सुधार के प्रयास हुए। हालांकि सन् 1959 में राजस्थान से इसकी शुरुआत हुई, मगर आधुनिक भारत में इसे संस्थागत रूप देने का महत्वपूर्ण कदम 1992 में उठाया गया, जब 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम पारित किया गया। यह संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ, इसलिए इस दिन को पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस संशोधन ने ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (ब्लॉक स्तर) और जिला परिषद की तीन-स्तरीय प्रणाली वाली पंचायतों को संवैधानिक दर्जा प्रदान कर वर्तमान पंचायती राज व्यवस्था को स्थापित किया। साथ ही, महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान भी किया गया, जिससे लोकतंत्र अधिक समावेशी बन सका।
पंचायती राज प्रणाली का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर शासन को प्रभावी और उत्तरदायी बनाना है। ग्राम सभा इसका सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जहां गाँव के सभी वयस्क नागरिक शामिल होते हैं। ग्राम सभा विकास योजनाओं की स्वीकृति, सामाजिक लेखा-जोखा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का कार्य करती है।
73वें संवैधानिक संशोधन की ग्यारहवीं अनुसूची के अंतर्गत पंचायतों को 29 विषयों पर कार्य करने का अधिकार दिया गया है, जिनमें कृषि, जल प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण सड़कें, आवास और सामाजिक कल्याण शामिल हैं। इससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन संभव होता है।
लोकतंत्र की जड़ों को मजबूती
पंचायती राज प्रणाली लोकतंत्र को केवल संसद और विधानसभाओं तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसे गांव के स्तर तक पहुँचाती है। इससे आम नागरिक को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलता है। यह व्यवस्था न केवल शासन को पारदर्शी बनाती है, बल्कि लोगों में जिम्मेदारी और अधिकारों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती है।
महिलाओं की भागीदारी पंचायती राज की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। आज लाखों महिलाएँ सरपंच और पंचायत सदस्य आदि के रूप में कार्य कर रही हैं, जिससे सामाजिक परिवर्तन की नई दिशा मिल रही है। यह नारी सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है।
हालाँकि पंचायती राज व्यवस्था ने कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं, फिर भी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
कई पंचायतों के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं होते।
प्रशासनिक अधिकारों का पूर्ण हस्तांतरण अभी भी अधूरा है।
कुछ स्थानों पर राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार भी देखने को मिलता है।
डिजिटल साक्षरता और तकनीकी संसाधनों की कमी भी कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
इन समस्याओं के कारण पंचायतों की प्रभावशीलता कई बार सीमित रह जाती है।
आज के समय में डिजिटल तकनीक पंचायती राज को नई दिशा दे रही है। ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी सूचना का प्रवाह तेज हुआ है और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगाने में मदद मिली है।
सरकार द्वारा डिजिटल पंचायत और स्वच्छ ग्राम जैसी पहले इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे पंचायतें अधिक सक्षम और आधुनिक बन रही हैं।
पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए
पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय स्वायत्तता दी जानी चाहिए। प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाए।
पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी साधनों का विस्तार किया जाए।
युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
यदि इन सुधारों को सही ढंग से लागू किया जाए, तो पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण भारत के समग्र विकास का मजबूत आधार बन सकती है।
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का अवसर है। यह हमें याद दिलाता है कि सच्चा लोकतंत्र तभी संभव है, जब सत्ता का विकेंद्रीकरण हो और हर नागरिक को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का अधिकार मिले।
आज आवश्यकता है कि हम पंचायती राज की भावना को समझें और इसे और अधिक सशक्त बनाने के लिए मिलकर प्रयास करें। जब गाव मजबूत होंगे, तभी भारत सशक्त बनेगा, और यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है।
फोटो कैप्शन: राधेश्याम गोमला
मिन्दरजीत यादव की जीत पर नारनौल के वकीलों ने बांटे लड्डू
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कनीना की आवाज। पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के चुनाव में एडवोकेट मिन्दरजीत यादव को मिली ऐतिहासिक जीत पर नारनौल बार के सदस्यों ने लड्डू बांटकर खुशी मनाई।
इस अवसर पर भेजे सन्देश में मिन्दरजीत यादव ने नारनौल बार एसोसिएशन के सभी अधिवक्ताओं, विशेषरूप से युवा साथियों का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और विश्वास दिलाया कि उनकी सभी लंबित मांगों को जल्दी ही पूरा करवाया जाएगा। अधिवक्ता सजीत यादव ने बताया कि मिन्दरजीत यादव जल्दी ही नारनौल बार का व्यक्तिगत रूप से दौरा करके सहयोग के लिए आभार प्रकट करेंगे और नारनौल बार के साथियों की भलाई के लिए हमेशा समर्पित रहेंगे।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 01: एडवोकेट मिन्दरजीत यादव की जीत पर लड्डू बांटकर खुशी मनाते नारनौल के अधिवक्तागण
कनीना अनाज मंडी में खोली जाए अटल कैंटीन
-मजदूर एवं किसान उठा सके लाभ
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कनीना की आवाज। बसपा नेता अतरलाल एडवोकेट ने हरियाणा सरकार से कनीना अनाज मंडी में अटल कैंटीन खोलने की मांग की है।
अतरलाल ने गांव भोजावास, गोमला, गोमली, मोड़ी, सुन्दरह में किसानों की समस्याएं सुनते हुए उक्त मांग उठाई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की अनेक अनाज मंडियों में अटल कैंटीन स्थापित की हुई है। जिसमें किसानों व श्रमिकों को रियायती दर पर भोजन उपलब्ध होता है परन्तु कनीना अनाज मंडी में अटल कैंटीन न होने के कारण यहाँ के किसान तथा श्रमिक इस सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कनीना के साथ भेदभाव कर रही है। बार-बार किसानों तथा श्रमिकों द्वारा मांग किए जाने के बावजूद भी कनीना अनाज मंडी में अटल कैंटीन का स्थापित न किया जाना यह सिद्ध करता है कि राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन को यहां के किसान व श्रमिक वर्ग की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि कनीना अनाज मंडी के अंतर्गत 50 से ज्यादा गांव लगते हैं। इसलिए यहाँ अटल कैंटीन स्थापित किया जाना जरूरी है। अटल कैंटीन स्थापित न होने के कारण किसानों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने कनीना अनाज मंडी में दूसरा टीन शेड स्थापित करने की मांग भी की। इस अवसर पर उनके साथ शेर सिंह यादव, राकेश यादव, भाग सिंह चेयरमैन, कैलाश सेठ, मदन, रणवीर आदि पदाधिकारी भी उपस्थित थे।










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