Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Thursday, June 23, 2022

 
 नशा शरीर को ही नहीं समाज को भी  बनाता है खोखला-मूलचंद तवर
*******************************************************
***************************************************
*****************************************
*************
कनीना की आवाज नशे से दूर रहना स्वास्थ्य के लिए तो अच्छा है ही, परिवार में भी सुख शांति तथा प्यार प्रेम और भाईचारा बना रहता है। ये विचार कनीना के सिटी थाना प्रबंधक मूलचंद तंवर ने आज स्थानीय बस स्टैंड में नशा मुक्ति अभियान को लेकर की गई बैठक में व्यक्त किए। इस अवसर पर बोलते हुए मूलचंद तंवर ने कहा नशा एक बहुत बुरी बीमारी है तथा जिस भी किसी को नशा लग जाता है वह अपना स्वयं का तो नाश करता ही है अपने परिवार व रिश्ते नातों को भी खत्म कर लेता है जिससे न तो उसे घर में ही सुख शांति मिलती और समाज भी उसको बुरी दृष्टि से देखता है। इसलिए हमें नशे के कार्यक्रम से दूर रहना चाहिए ताकि हम अपना व अपने समाज का उत्थान कर सकें उन्होंने यह भी कहा जिस घर में नशा होता है उस घर में रोज कलह वह अशांति बनी रहती है।
जिसके कारण उस परिवार का सर्वनाश हो जाता है और उसके बच्चे कुछ अच्छा बनने की बजाय सड़कों पर आ जाते हैं और वह अपने नशा करने वाले मां-बाप को कभी माफ नहीं करते और समाज उनको कुदृष्टि से देखता है वहीं उन्होंने बैठक में आए रोडवेज के चालक व परिचालकों से भी नशे से दूर रहने की बात कही और उन्होंने कहा कि चालक और परिचालक को भी नशे से दूर रहना चाहिए जिसके कारण उनका तो फायदा होता ही है साथ में उनके साथ चलने वाली सैकड़ों सवारियों का भी भला होता है। क्योंकि उनकी गाड़ी में बैठने वाले प्रत्येक महिला व पुरुष की जान चालक व परिचालक के हाथ में होती है। इसीलिए चालक परिचालक को नशे से दूर रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा नशा शरीर को ही नहीं समाज को भी खोखला बना देता है। इसलिए हमेशा नशे से दूर रहें अपने आप और परिवार समाज को सुख शांति से जीवन जीने का मौका दें। इस अवसर पर इनके साथ उप निरीक्षक यादराम व अन्य पुलिस स्टाफ तथा रोडवेज के बस स्टैंड  इंचार्ज कर्मवीर सिंह यादव वाहन चालक परिचालक के अलावा अन्य युवा उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 02:बस स्टैंड कनीना में नशे पर बैठक करते हुए सिटी इंचार्ज मूलचंद तवर बैठक को संबोधित करते हुए।





 आजादी के अमृत महोत्सव पर तुलसी वितरण कार्यक्रम का हुआ आयोजन
***********************************************************
****************************************
***********************
कनीना की आवाज आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आज कनीना के श्रीश्याम मंदिर में महेंद्रगढ़ निफा जिला इकाई के जिला अध्यक्ष दीपक कुमार वशिष्ठ ने तुलसी महोत्सव मनाया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को एकत्रित करके 35 पौधे तुलसी के बाटे। दीपक कुमार ने बताया कि जिले के हर घर तक तुलसी का पौधा पहुंचाया जाएगा ताकि सभी लोगों को बेहतर स्वास्थ्य मिले और कोरोना जैसी अन्य बीमारियों से लडऩे की क्षमता भी बढ़े।कोरोना के समय आयुर्वेद ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई है जिसको लेकर लोग भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुए हैं।निफा ने फैसला लिया है कि  जिले के प्रत्येक गांव में तुलसी के पौधे वितरित किए जाएंगे।ताकि लोग तुलसी के गुणों के फायदे ले सकें। इस मौके पर निफा के जिला अध्यक्ष दीपक कुमार वशिष्ठ,सदस्य कुसुमलता ने भी तुलसी पर बोलते हुए कहा कि जिस घर में तुलसी होती है उस घर में सुख शांति आती है व अन्य प्रकार की बीमारियों का मन हो जाता है श्रीश्याम मंदिर के पुजारी,अमित कुमार,सरला, उपदेश,पूनम,प्रेम, विमल, सुनीता, रीना आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 01:आजादी अमृत महोत्सव पर तुलसी वितरण करते हुए।




धरती के विनाश का कारण बन सकता है घटता पर्यावरण का स्तर ---नवीन कौशिक
*******************************************************************
****************************************
***************************
कनीना की आवाज समाजसेवी सामाजिक संस्था बीइंग ह्यूमन सेवा मंडल द्वारा पौधारोपण कर युवा पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हुए संस्था अध्यक्ष नवीन कौशिक समाजसेवी ने बताया कि पृथ्वी पर घटते पर्यावरण स्तर को देखते हुए हर दिन पर्यावरण दिवस मनाना चाहिए।  उन्होंने युवा वर्ग से अपील करते हुए कहा कि हमे हर दिन को पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने की आवश्यकता है तभी हम पृथ्वी से पर्यावरण के घटते स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं जिससे की भयंकर आपदाओं और बीमारियों से मानव जीवन को बचाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने किसानों और क्षेत्र के लोगों से भी अपील करते हुए कहा कि वो भी अपने खेतों से हरे पेड़ों की कटाई न करें। नवीन कौशिक ने गांव की बणी में पौधारोपण किये तथा अपने हाथों से उन्हें पानी भी दिया। इस अवसर पर उन्होंने ये भी बताया कि अगर किसी का जन्मदिन, सालगिरह या अपने बड़ों की बरसी पर पौधारोपण कर पुण्य का भागीदार बनना चाहते हैं, उन्हें संस्था द्वारा मुफ्त पौधे वितरण किए जाते रहे हैं। आज इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए गांव की बणी में पापड़ी के पौधे लगाए गए। इसके साथ ही उन्होंने बताया की पृथ्वी पर जीवन संकट में न पड़े इसके लिए पर्यावरण संरक्षण बहुत ही जरूरी है। इस अवसर पर विनोद, ललित, जीतू, बिक्रम, अभिनव, राकेश आदि युवा मौजूद रहें और पोधारोपण करने की शपथ ली।
फोटो कैप्शन 03: नवीन कौशिक साथियों सहित पौधारोपण करते हुए।




दो युवकों को सांपों ने काटा, दोनों को मिली अस्पताल से छुट्टी,खुशी का माहौल
**************************************************************
****************************************
************************
कनीना की आवाज कनीना कस्बे में वाटर सप्लाई के पास दो युवकों को अलग-अलग सांपों ने काट लिया, दोनों को निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां से उन्हें छुट्टी मिल गई है। गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
 मिली जानकारी अनुसार जितेंद्र नामक युवक ईंट हटा रहे थे तभी एक सांप ने में उनको  हाथ से काट लिया। उन्हें तुरंत अस्पताल भर्ती करवाया गया जहां इलाज चला और उन्हें उन्हें घर भेज दिया गया। वहीं दूसरी ओर सचिन नामक युवक को जो योग करके घर आया था, सांप ने काट लिया। उन्हें भी निजी अस्पताल भर्ती करवाया गया जहां उन्हें भी छुट्टी मिल गई है। कनीना क्षेत्र में दोनों युवकों के सांप काटने और सकुशल घर लौटने पर खुशी का माहौल है।




 आजीवन रोडवेज की बसों में सफर करने का मिला पास
************************************************
*****************************************
*****
कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के दो लोगों को हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आजीवन रोडवेज की बसों में हरियाणा ही नहीं हरियाणा से बाहर भी सफर करने का पास मिला है। दोनों की पुस्तकें हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा विगत वर्षों पुरस्कृत की गई थी।
 मिली जानकारी अनुसार कनीना की आशा यादव  मोहल्ला मोदीका लेखिका है जिन्होंने उपयोगी पेड़ पौधे और उनसे उपचार पर पुस्तक लिखी थी जो हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा विगत वर्षों पुरस्कृत की गई थी। अब उन्हें हरियाणा की रोडवेज बसों में हरियाणा और हरियाणा से बाहर सफर करने की के लिए आजीवन भर का मुक्त पास प्रदान किया है। यही नहीं उपमंडल के गांव स्याणा निवासी शमशेर सिंह कौसलिया को भी उनकी पुस्तक हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत किए जाने पर आजीवन हरियाणा रोडवेज की बसों में सफर करने का पास मिला है।  लोगों ने उन्हें बधाई दी है।




धारावाहिक-06
***************
********************************
********************************
 390 साल पहले कनीना में मठ भारती की  हुई थी स्थापना
- आज भी मत मोहल्ला उन्हीं के नाम पर आ रहा है चला
-डा.होशियार सिंह यादव/कनीना की आवाज
****************************
*****************************
***********************

 यूं तो कनीना का प्रादुर्भाव 800 वर्ष पुराना माना जाता है और यह भी सत्य है कि कनीना में जहां कान्ह सिंह कनीन ने आकर कनीना को बसाया और उनके गोत्र कनीन के आधार पर कनीना और कनीनवाल चलते आ रहे हैं। परंतु कनीना कस्बे में मठ भारती और मठ मोहल्ला 390 वर्षों पुराने हैं। कनीना में मठ भारती की स्थापना 1632 में की गई थी। वर्तमान में 13वां मठ गोसाई मंदिर की गद्दी को संभाल रहा है।
 कहां से आए थे मठ भारती-
 मठ भारती संत प्रकृति के थे जो 1632 में कनीना में आए थे। वास्तव में रोहतक के मातनहेल से आकर मठ भारती की स्थापना की थी और इसका श्रेय सूरतपुरी को जाता है जिन्होंने इसे आबाद किया था। तत्पश्चात नरहरपुर ,तत्पश्चात थानेश्वरपुरी,  मानकंठपुरी, भीखमपुरी,रमेतपुरी, भींवापुरी, भागीरथ ,पुरी, गोकलपुरी, गणेशपुरी, देवीपुरी, प्रभातपुरी, प्रभातीपुरी। श्यामपुरी जो वर्तमान गोंसाई मंदिर की गद्दीपर विराजमान हैं। वास्तव में गोसाई मंदिर स्थल पर आकर उन्होंने पूजा अर्चना एवं रहना शुरू किया था।  और जब जब उन्होंने प्राण त्यागे उन्हें मठ भारती स्थल मोहल्ला मठ में स्थित जमीन पर दफनाया गया था। इन सब में देवीपुरी वह शख्सियत है जिन्होंने राजा हीरा सिंह का भी मुकाबला किया था। हीरा सिंह देवीपुरी से बहुत अधिक प्रभावित हुए थे।
 वास्तव में गोसाई शब्द आते ही जेहन में विचार आता होगा कि यह कोई गोसाई जाति है जाति नहीं अपितु संत महात्मा,अराधक आदि को गोसाई कहते हैं। गोसाई वो पद है जो भारती गोसाई मंदिर में स्थापित गद्दी पर विराजमान रहे हर शख्स को दिया जाता है। अब तक 13 गासाई हुये हैं जो सभी यादव कुल के रहे हैं और यहां गोसाई मंदिर में वर्तमान में भी यादव गद्दी पर विराजमान है। यहां भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। सूरतपुरी की खड़ाऊ ,उनके द्वारा प्रयोग किया गया शंख तथा आसन पर बैठने की टेक आदि आज भी विराजमान है। जिन की विधि विधान से पूजा की जाती है। वास्तव में गोसाई 1632 में यहां आए थे जो गोसाई की ढाणी प्रेमचंद पुत्र बुधाराम भाट जागा उनके गुरु होते थे। जो वर्तमान में नवलगढ़ राजस्थान, डाकघर कारी में स्थित है। मठ भारती की वजह से ही यह मोहल्ला मठ कहलाता है।
मठ भारती आश्रम की देखरेख का कार्य पूर्व एक्स सर्विसमैन राम सिंह कर रहे हैं। उन्होंने बताया 1896 में जब प्लेग फैला था तो बहुत से लोग मर रहे थे। जब एक लाश को उठाकर ले जाते तो दूसरी लाश तैयार हो जाती थी। ऐसे समय में मठ भारती के मठाधीश ने कहा कि आप यहां शरण में आ जाओ। धन्नीका मोहल्ले से छोड़कर तब से रामसिंह परिवार यहां आ गए और इस मोहल्ले का विकास होता चला गया।
गोसाई क्या है-
गोसाई मंदिर में जो भी गद्दी पर बैठता है उसे गोसाई की संज्ञा दी जाती है। वह इस मंदिर और मठ की देखरेख का कार्य करता है। जब भी विवाह शादी आते हैं तो दोनों जगह धूम रहती है। सबसे सशक्त गोसाई देवीपुरी आए थे जिन्होंने राजा हीरा सिंह को भी अपने तेज से प्रभावित किया था। राजा हीरा सिंह 1845 से 1911 के बीच नाभा रियासत के महाराजा थे जब कनीना नाभा रियासत का एक हिस्सा होता था। देवीपुरी ने हीरा सिंह का मुकाबला किया और हीरा सिंह को भी उनके समक्ष झुकना पड़ा था। यही नहीं झुक कर उनकी मांगों को स्वीकार भी करना पड़ा था। देवीपुरी बाल ब्रह्मचारी थे, अच्छे हटते कट्टे नौजवान थे, जिनका माथा चौड़ा और देखने में हीरे की तरह चमकता था। जिनकी और देखने कठिन था। उनके तेज को देखने वाले की आंखें स्वत: बंद हो जाती थी, ऐसा रूप सलोना रूप ,ब्रह्मचारी देवीपुरी का था।
कैसे प्रभावित हुये राजा हीरा सिंह--
 एक बार करीब 1890 के आस पास राजा हीरा सिंह कनीना में आए थे। कनीना के लोगों से उन्होंने पूछा कि गांव में कोई प्रसिद्ध व्यक्ति है तो उससे मुझे बात करनी है। कुछ मुद्दों पर चर्चा करनी है। गांव वासियों ने उसे देवपुरी का नाम बताया। बस फिर क्या था राजा हीरा सिंह ने अपने सैनिकों को कहा कि जाइए और हीरा सिंह को बुलाकर लाइए। सैनिक और लोग देवीपुर के के पास वर्तमान गोसाई मंदिर में आए और कहा कि राजा उनसे मिलना चाहते हैं, आप राजा के पास चले। देवी पुरी का तपाक से जवाब था कि मुझे राजा की कोई जरूरत नहीं है। राजा को मेरी जरूरत है तो वह चल कर खुद आए और मुझसे मिल सकते हैं। उस समय देवीपुर वर्तमान गोसाई मंदिर स्थल पर बैठे थे। तभी राजा हीरा सिंह के पास सूचना पहुंची राजा हीरा सिंह भी क्रोध में नहीं आये और कहा कि अगर उनकी इच्छा यही है तो मैं उनसे मिलने के लिए जाता हूं और राजा की उनसे मिलने के लिए आया।
 जब राजा हीरा सिंह देवीपुरी से मिले तो सचमुच मन ही मन में उन्हें आभास हुआ कि ऐसे महान व्यक्ति शायद इस धरती पर नहीं हो सकते। तभी वार्तालाप चली और देवी पुरी ने कहा महाराज मैं आपके पास इसलिए नहीं आया कि मैं आपका दिया हुआ नहीं खाता, अभी तो आप ही मेरे दिए हुए पर निर्भर करते हो। महाराजा ने पूछा कि ऐसा क्या? देवीपुरी ने बताया कि उनकी भूमि का लगान राजा के पास जाता है जिससे वे अपना शासन चला रहे हैं। तभी महाराज ने कहा कि लगान और आप भी दे रहे हैं? उन्होंने कहा चलिए मैं आपसे बहुत प्रभावित हूं।  आपकी क्या मांग है? क्या चाहते हैं? तभी देवपुरी ने कहा कि उनकी पहली मांग है कि लगान माफ कर दिया जाए, दूसरी मांग वर्तमान में जहां उप-नागरिक अस्पताल है पर गायों के खड़ी होने की जगह निर्धारित की जाए तथा डाकोत गली से मठ होते हुये चौड़ा मार्ग बड़ी बणी तक गायों के आने जाने के लिए छोड़ा जाये। राजा ने तुरंत स्वीकार कर दिया और वे बहुत अधिक प्रभावित हुए। यहां तक कि राजा ने देवी पुरी से पूछा -क्या तुमने कहीं बीज डाला है? देवी पुरी का स्पष्ट जवाब था अभी तक भौम नहीं मिली है। राजा इतने अधिक प्रभावित हुए कि उनकी सभी मांगे पूरी करके वापिस नाभा रियासत में चले गए। ऐसे महान गोसाई मंदिर के गोसाई देवीपुरी हुये हैं।
  मठ भारती- 

मठ मोहल्ला के मध्य स्थित है। मठ भारतीय स्थल है करीब 2 कनाल जगह है जिस पर पुराने समय का कुआं आज भी उनकी याद दिलाता है। आज भी कुएं की पुराने समय की बुर्ज कौड़ चढ़ाने पत्थर लगा हुआ है। इस मठ भारती पर पुराने समय से कनीना गोत्र के लोग जो बाहर रहते हैं जैसे खायरा, मुंदीनांगल आदि से बाल उतरवाने के लिए आते हैं। चांदनी द्वादशी पर गोसाई के नाम की खीर बनती है और भोग लगाया जाता है। जब कोई संकट आता है तो इस क्षेत्र के लोग गोसाई का का प्रसाद बोलते हैं। गाय और भैंस का प्रथम दूध भी यहीं पर चढ़ाया जाता है। अक्सर यहां शक्कर का प्रसाद चढ़ाया जाता है। किसी समय यहां पर घोड़ों की समाधि तथा कुत्तों की समाधि भी होती थी किंतु अब पेड़ पौधों से आच्छादित यह जमीन जगह मन को मोह लेती है। यहां पर देवीपुरी प्रभाती पुरी और अन्य संतों की भी समाधियां हैं। जब कोई गोसाई प्राण त्यागता है तो उन्हें यहीं पर दफनाया जाता है। वर्तमान में मठ भारती का सवा लाख रुपए आज भी खातों में जमा है। पुराने समय का कुआं आज भी याद दिलाता है। 1988 में मठ भारती का जीर्णोद्धार किया गया था। पूजा अर्चना के लिए आज भी स्थल बना है। किसी समय करीब 21 किला से भी जमीन होती थी जो प्रभातपुरी गोसाई के समय बेच डाली। मंदिर के नीचे भी जगह होती थी, जो उस समय बेचकर सेठ साहूकारों को बेच दी गई।
 बुजुर्ग राम सिंह पूर्वसैनिक बताते हैं कि यह कुआं भारती मठ के पास बना कुआं भाट जाग्गा ने बनवाया था। वास्तव में वेसूरतपुरी के गुरु थे। यह कुआं बैलों से चलता था, इसके तहत भी 3 किला जमीन थी किंतु सूरतपुरी के चेले उसे भी बेच गए। कभी वर्तमान अस्पताल स्थल पर  गाय खड़ी होती थी बनी होती थी। यह भी देवीपुरी द्वारा गायों के लिए छुड़वाई जगह होती थी। और चौड़ा शेर अस्पताल से बड़ी बणी तक राजा हीरा सिंह के समय छुड़वाया हुआ है। अस्पताल के पास गायों की देखरेख डूगाराम व्यक्ति करते थे। महिला भजन मंडली और ग्राम वासियों ने 1988-89 में मठ का जीर्णोद्धार किया। वर्तमान में श्यामपुर गोसाई 70 वर्षीय विगत 40 सालों से मंदिर की सेवा कर रहे हैं।
क्या है गोसाई मंदिर-
 गोसाई मंदिर सबसे पुराना मंदिर तथा ठाकुर मंदिर के समकालीन का है। गोसाई मंदिर में जहां सबसे पहले गोसाई, सूरतपुरी की खड़ाऊं, शंख एवं टक छड़ी रखी हुई है जिनकी पूजा की जाती है। साथ में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। जन्माष्टमी के दिन अन्य पर्व या किसी विवाह शादी के समय यहां हाजिरी लगाई जाती है तथा पूजा-अर्चना की जाती है। गोरावड़ा गोसाई का मंदिर भी कनीना गोसाई मंदिर के तहत आता है। सूरतपुरी के समय इस मंदिर को वर्तमान रूप नहीं दिया गया था अपितु यहां छोटा आश्रम होता था जिसमें सूरतपुरी निवास करते थे। उनके बाद के गोसाई भी यहीं पर समय-समय पर रहकर चले गये। बाद में इसे विशालकाय रूप दिया गया जब सुरतापुरी ने प्राण त्याग दिए। उनके खड़ाऊ यहां रखे गए और विशाल मंदिर की स्थापना की गई थी। ऐसे में यहां मंदिर की स्थापना की गई जो आज तक चली आ रही है। इस समय भी गोसाई मंदिर लोगों को आकर्षित कर रहा है।
फोटो साथ हैं।


































सावधान--
यह आलेख कापीराइट के तहत है। किसी प्रकार की फोटो एवं टैक्सट कापी करना दंडनीय अपराध एवं कापी राइट एक्ट के तहत जुर्म होगा। यह ब्लाग रजिस्टर्ड ब्लाग है।
धारावाहिक -07
धारावाहिक -07 में पढ़ेंगे कनीनारियासत और सियासत का इतिहास। पढ़े आगामी अंक में।


No comments: