Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Wednesday, October 11, 2023


384 किसानों का 10266 क्विंटल बाजरा खरीदा गया
- नये किसानों का भी बाजरा बिका
********************************************************
******************************************************************
*****************************************
***************
कनीना की आवाज। चेलावास स्थित कनीना की नई अनाज मंडी में बुधवार को 384 किसानों का 10266 के क्विंटल बाजरा खरीदा गया। विस्तृत जानकारी देते हुए हेड मैनेजर वीरेंद्र को मारने बताया कि अब तक 138599 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है जबकि एक दिन में 15000 बैग की लिफ्टिंग की गई। कल 225000 बैग की लिफ्टिंग की जा चुकी है। आज कनीना अनाज मंडी में पुराने और नये किसानों का बाजरा खरीदा गया किंतु किसानों ने बताया की बाजरे की खरीद के बारे में उनके पास कोई सूचना नहीं आती। न तो हैफेड कार्यालय से और न ही मार्केट कमेटी किसानों को सही समय पर सूचना नहीं दे पाती जिसके कारण उन्हें पता ही नहीं चलता कि कब नये किसने की बाजरे की खरीद होगी और कब पहले से टोकन प्राप्त किसानों का बाजरे की खरीद हो पाएगी। अभी भी सैकड़ो की संख्या में किसान टोकन लिए बाजरा बिकने का इंतजार कर रहे हैं।
फोटो कैप्शन 05: कनीना अनाज मंडी में बाजरे के लगे ढेर।






विश्व गठिया दिवस -12 अक्टूबर
 हजारों व्यक्ति गठिया से पीडि़त मिलते हैं -डॉक्टर जितेंद्र
********************************************************
******************************************************************
***************************************
*****************
कनीना की आवाज। दुनिया भर में 12 अक्टूबर विश्व गठिया दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन लोगों में हड्डियों से जुड़ी गंभीर स्थिति के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। इसे अंग्रेजी में अर्थराइटिस कहते हैं। एक और जहां विगत वर्षों कोरोना से इंसान परेशान देखने को मिला वहीं अर्थराइटिस अनेक बीमारियों में से एक तेजी से फैलने वाली बीमारी है। गठिया के बारे डा जितेंद्र मोरवाल उप नागरिक अस्पताल कनीना से चर्चा हुई।
डॉक्टर जितेंद्र मोरवाल ने बताया कि गठिया एक जोड़ों में दर्द एवं जकडऩ का कारण बनता है। बड़ी उम्र के साथ-साथ यह स्थिति खराब होती चली जाती है। जागरूकता फैला कर ही इस रोग से बचा जा सकता है। 1996 से इस रोग से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता रहा है।
गठिया बीमारी विटामिन-सी, विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी से ज्यादा परेशान करती हैं। इन चीजों की कमी से हड्डियां कमजोर होती चली जाती है और अंदर से खोखली हो जाती है। गठिया का अर्थ जोड़ों में सूजन,दर्द एवं लालिमा उत्पन्न होना।  उसे स्थान पर गर्मी अनुभव होती है, हड्डी के जोड़ सूज जाते हैं जो  दर्द का कारण बनता है। गठिया के कारण होने वाली अधिकांश बीमारियां स्वप्रतिरक्षा के कारण होती है। उन्होंने बताया कि यह दर्द असहनीय होता है। आमतौर पर कई हफ्तों से कई महीनो में हाल होता है।
गठिया में विशेष कर आलू खाने का परहेज करना चाहिए, आलू में मौजूद केमिकल है जो गठिया रोग का कारण बनता है। गठिया को जड़ से खत्म करने के लिए आयुर्वेद की दवाई काफी लाभप्रद जिनमें अश्वगंधा आता है, ठंडी जगह जाने से परहेज करें, नशीले पदार्थ का सेवन न करें। उन्होंने बताया कि सेब खाने से इस रोग में सूजन में कमी आती है और गठिया के लक्षण कम होते हैं। साथ में एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल एवं सब्जियां ज्यादा खानी चाहिए जिनमें ब्रोकली, पपीता, शिमला मिर्च, संतरा, अंगूर, स्ट्राबेरी विटामिन-सी के स्रोत, पालक ,चेरी आदि खाने चाहिए। गठिया से छुटकारा पाने के लिए सर्दी के मौसम में अदरक के तेल अदरक का प्रयोग करें जोड़ों पर मालिश करनी चाहिए। गठिया वैसे तो 100 से अधिक प्रकार है पर डब्ल्यूएचओ अनुसार विश्व की लगभग एक प्रतिशत आबादी गठिया रोग से पीडि़त है। यह रोग 40 से 60 वर्ष की उम्र में शुरू हो जाता है पुरुषों की तुलना महिलाओं में अधिक होता है। गठिया के कारण दर्द ,कठोरता, सूजन तीन प्रमुख लक्षण होते हैं। गठिया रोग में शराब पीना, ग्लूटेन फूड, प्रोसेस्ड फूड, मीट वेजिटेबल ऑयल, नमक का सेवन कम करें,  गठिया में दूध नहीं पीना चाहिए।
 फोटो कैप्शन: डॉक्टर जितेंद्र मोरवाल






विश्व दृष्टि दिवस -12 अक्टूबर
अपनी आंखों की नियमित देखभाल करें -राजेश कुमार
********************************************************
******************************************************************
****************************************
****************
कनीना की आवाज। हर वर्ष अक्टूबर के दूसरे गुरुवार को विश्व दृष्टि दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2000 से इसकी शुरुआत हुई थी। दुनिया भर में आंखों की देखभाल के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए यह एक वार्षिक कार्यक्रम मनाया जाता है। पूरे विश्व में करीब 1.1 प्रतिशतलोगों में उपचार न किये जाने के कारण दृष्टि हानि होती है। दृष्टि दिवस पर कनीना उपनागरिक अस्पताल के आप्थाल्मिक अधिकारी राजेश कुमार से चर्चा की गई। राजेश कुमार ने बताया की 40 वर्ष की उम्र पार करते ही निकट दृष्टि दोष उत्पन्न होने लग जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए, आंखों की रोशनी और स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए स्वस्थ एवं संतुलित भोजन करना चाहिए। लव योर आइज इस वर्ष को मोटो है। अंधापन और दृष्टि हानि को बचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। बच्चा, परिवार और समुदाय में यह समस्या बनी रहती है जिसके कारण अनेक व्यक्तियों के बचपन में ही चश्मे लग जाते हैं और इन चश्मा से बचने का एकमात्र उपाय है स्वस्थ एवं संतुलित भोजन करें। स्वस्थ भोजन करने से आदमी इस रोगों से बच सकता है।
राजेश कुमार ने बताया की मोतियाबिंद, ट्रेकोमा, ग्लूकोमा, मधुमेह 70 प्रतिशत से अधिक आंखों के रोगों का जिम्मेदार है। इसकी रोकथाम के लिए रोग का समय पर पता लगाना जरूरी है। मोतियाबिंद आंख के लेंस का धुंधलापन है जिससे दृष्टि कम होती चली जाती है, मोतियाबिंद का कारण उम्र बढऩे की प्रक्रिया है। टे्रकोमा एक जीवाणु संक्रमण है जो आंख के बाहरी आवरण को खराब कर देता है वहीं आंख के रोग ग्लूकोमा के कारण भी धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर होती चली जाती है। मधुमेह रोग में आंखों की रोशनी कमजोर होती चली जाती है। ऐसे में प्रारंभ से ही अगर इन रोगों का पता लगा ले तो इन पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि स्वस्थ भोजन खाने से ही इस रोग से बचा जा सकता है। अक्सर लोग असंतुलित एवं फास्ट फूड पर जोर देते हैं जिसके कारण आंखों की रोशनी घटती चली जाती है। आंखों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। लगातार सिर दर्द, आंखों में जलन ,आंखों की थकान, धुंधली दृष्टि होती है तो इसमें आंखों संबंधित समस्या उत्पन्न हो सकती है। आंखों को समय-समय पर चेक करवाते रहना चाहिए वरना भविष्य में परिणाम अच्छे नहीं आते।
आजकल मोबाइल का युग है। इंसान कंप्यूटर और मोबाइल पर लंबे समय तक काम करता है जिसके कारण आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कमजोर पड़ी पड़ती चली जाती है।  प्रदूषण, रासायनिक प्रभाव, प्रकाश जोखिम, निर्जलीकरण, यूवी किरणे और बिना पलक झपक लगातार कंप्यूटर पर काम करना, संक्रमण, एलर्जी, विटामिनों की कमियां रोग के कारण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि लंबे समय टीवी और मोबाइल पर काम नहीं करना चाहिए। बच्चों का इनके कारण मायोपिया का खतरा बढ़ जाता है। 20 मिनट तक स्क्रीन पर काम करने के लिए के बाद 20 सेकंड 20 फीट दूर किस चीज को देखना चाहिए।  इसके अलावा विटामिन-ए,सी, फैटी एसिड, आदि पदार्थ प्रयोग करने चाहिए। जब कभी बाहर धूप में जाए तो धूप का चश्मा लगाना न भूले, नियमित व्यायाम करना चाहिए, निर्धारित किया हुआ चश्मा पहने, धूम्रपान से दूर, खूब सारा पानी पिएं, आंखों की चोट से बचेे, नियमित आंखों की सफाई करनी चाहिए और नेत्र रोग विशेषज्ञ से जरूर मिलना चाहिए।
 फोटो कैप्शन: राजेश कुमार आप्थेल्मिक अधिकारी।





कनीना स्कूल में मनाया गया विश्व बालिका दिवस
---बेटे बेटी में कोई भेद नहीं रह गया है
********************************************************
******************************************************************
*****************************************
***************
कनीना की आवाज। विश्व बालिका दिवस राजकीय कन्या उच्च विद्यालय कनीना में मनाया गया।
विद्यालय की छात्राओं व स्टाफ को संबोधित करते हुए विद्यालय के मुख्य अध्यापक नरेश कुमार कौशिक ने कहा कि आज के युग में बेटे बेटी में कोई भेद नहीं रह गया है तथा अनेक क्षेत्रों में तो बेटियां बेटों से कहीं आगे बढ़कर उपलब्धियां हासिल कर  रही है देश की तीनों सशस्त्र सेनओ में भी बेटियां आगे आ रही हैं।
इस अवसर पर सेव द गर्ल चाइल्ड विषय पर पेंटिंग प्रतियोगिता का  आयोजन किया गया जिसमें विद्यालय की 40 छात्राओं ने भाग लिया। प्रथम स्थान आठवीं कक्षा की छात्रा हर्षिता ने प्राप्त किया दूसरा स्थान इसी कक्षा की छात्रा रितिका ने पाया तीसरा स्थान सातवीं कक्षा की छात्रा रितु ने प्राप्त किया।
इस अवसर पर एमसी की सदस्य हेमलता ,अध्यापक संदीप कुमार, बस्तीराम, सत्यवीर सिंह ,कश्मीरी निर्मल ,राकेश कुमार डीपी सहित स्टाफ सदस्य उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 04: अव्वल रहे विद्यार्थी पोस्टर में बच्चियों को बचाने की गुहार लगाते हुए।




पोल गाडऩे के नाम पर बर्बाद कर दी बीजाई
-- किसानों में रोष
********************************************************
******************************************************************
**************************************
******************
कनीना की आवाज। बिजली विभाग ने एक तरफ जहां सभी लोहे के पोल को बदलकर उनके स्थान पर सीमेंट के पोल  लगाने की कार्रवाई शुरू कर रखी है जिसके तहत किसानों के खेतों में बिजाई की हुई सरसों आदि को खराब कर डाला है। पोल ट्रैक्टर में ले जाने तथा इंसानों के अधिक संख्या में पहुंचने पर बजाई खराब हो रही है।
 किसान सुनील कुमार, पंकज कुमार, रवि कुमार आदि ने बताया कि उनके खेतों में से पोल गाडऩे के लिए ट्रैक्टर व आदमी पहुंचे हैं जिनके चलते हैं उनके खेतों में सरसों की बिजाई बर्बाद कर दी है। बीजाई बर्बाद होने से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनकी मांग है की पोल उस समय बदले जाए जब खेतों में कोई फसल नहीं खड़ी हो। उन्होंने सरकार से मांग की है कि यदि बिजाई के समय पोल बदलते हैं तो उसका मुआवजा भी दिया जाए।
फोटो कैप्शन 01: लोहे के स्थान पर सीमेंट के पाइप गाडऩे से फसल बर्बाद का नजारा।






भोजावास गोशाला में लगाया भंडारा, पहुंचे हजारों भक्त
********************************************************
******************************************************************
***************************************
*****************
कनीना की आवाज। गोपालक संत बाबा हेमादास की बरसी पर भंडारा व जागरण में श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। बाबा हेमादास महान त्यागी, तपस्वी, समाज सुधारक तथा समर्पित गौ भक्त थे। उन्होंने अपना सारा जीवन गौ माताओं की सेवाओं में लगाया। उन्होंने भोजावास ग्रामवासियों तथा आस-पास के श्रद्धालु गौभक्त व मौजीजान का बाबा के नाम पर गांव में बाबा हेमादास गौशाला का बहुत अच्छे ढंग से संचालन करते आ रहे हंै। भाग सिंह चेयरमैन ने कहा कि अपने पूर्वजों, महान नायकों तथा लोक देवी देवताओं की याद में समारोह तथा जागरण आयोजित करने से समाज के लोगों में उत्साह तथा शक्ति का संचार होता है। जागरण में प्रसिद्ध कविवर इन्द्र शर्मा की पार्टी ने धु्रव भक्त के सांग से प्रसिद्ध रागिनियां सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर किया। महंत सीताराम, बाबा तूफान नाथ, भागसिंह चेयरमैन, कुलदीप, दानसिंह प्रजापत, आकाश, सुभाष नम्बरदार सहित सैकड़ों जन उपस्थित थे।






श्राद्ध के बनाए गए भोजन से पंचबलि जरूर दे -पंडित ऋषिराज
---आश्विन माह की अमावस्या 14 अक्टूबर
********************************************************
******************************************************************
***************************************
*****************
कनीना की आवाज। आश्विन माह की अमावस्या 14 अक्टूबर 2023 को है। इसे विसर्जनी अमावस्या भी कहते हैं। पितरों का श्राद्ध कर पितृऋण से मुक्ति के लिए इस दिन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
पंडित ऋषिराज शर्मा बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार आश्विन माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सर्व पितृ श्राद्ध तिथि भी कहा जाता है। इस दिन भूले-बिसरे पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। कहते हैं कि इस दिन अगर पूरे मन से और विधि-विधान से पितरों की आत्मा की शांति श्राद्ध किया जाए तो न केवल पितरों की आत्मा शांत होती है बल्कि उनके आशीर्वाद से घर-परिवार में भी सुख-शांति बनी रहती है।
पंडित ऋषि राज शर्मा ने कहा कि इस सर्व पितृ अमावस्या को मोक्षदायिनी अमावस्या भी कहते हैं। यह साल में आने वाली 12 अमावस्या में सबसे खास होती है। इस तिथि पर पितरों के लिए  श्राद्ध , तर्पण और पिंडदान करने से वे पूरी तरह तृप्त हो जाते हैं। इस तिथि पर पितृ पुन: अपने लोक में चले जाते हैं साथ ही वे अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
इस दिन अमावस्या शनिवार के दिन पडऩे से ये शनिश्चरी अमावस्या तो है ही साथ ही इस दिन साल का अंतिम सूर्य ग्रहण भी लग रहा है. इसके अलावा इस दिन शुभ इंद्र योग भी बन रहा है। मान्यतानुसार जो लोग इस दिन अपने पितरों का तर्पण करेंगे इससे उनके पितरों की आत्मा तृप्त हो जाएगी।
सर्वपितृ अमावस्या पर जो सूर्य ग्रहण लग रहा है वो रात 08.34 मिनट से शुरू होगा और रात 02.25 बजे तक रहेगा। इस बार वलयाकार सूर्य ग्रहण लगने वाला है जो भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. पंडित ऋषिराज शितिकंठा ने बताया कि घर में श्राद्ध के लिए बनाए गए भोजन से पंचबलि जरूर देनी चाहिए।
गौ बली अर्थात- पहला भोग पवित्रता की प्रतीक गाय माता को खिलाएं। कुक्कर बली अर्थात- दूसरा भोग कत्तव्र्यष्ठा के प्रतीक श्वान (कुत्ता) को खिलाएं। काक बली अर्थात- तीसरा भोग मलीनता निवारक काक (कौआ) को खिलाएं। देव बली अर्थात- चौथा भोग देवत्व संवधर्क शक्तियों के निमित्त- (यह भोग किसी छोटी कन्या या गाय माता को खिलाया जा सकता है)।पिपीलिकादि बली अर्थात- पांचवां भोग श्रमनिष्ठा एवं सामूहिकता की प्रतीक चींटियों को खिलाएं।
सर्वपितृ अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ को भी जल अर्पित करते हैं मान्यता है कि पीपल के पेड़ में पितरों का वास होता है।
फोटो कैप्शन: पंडित ऋषिराज शर्मा





















ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना 213 वें दिन रहा जारी
---कट बनने की आस लगाए हुये हैं किसान
********************************************************
******************************************************************
********************************************************
कनीना की आवाज। राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर सेहलंग -बाघोत के बीच कट के लिए ग्रामीणों में असंतोष पनप रहा है किंतु अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। धरने की अध्यक्षता ओमप्रकाश  सेहलंग ने की और उन्होंने बताया कि हम पक्के इरादे के साथ धरने पर बैठे हुए हैं, काम शुरू होने के बाद ही जगह को छोड़ेंगे।              
 धरना संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय सिंह चेयरमैन ने बताया की धरने को चलते 213 दिन हो गए हैं और केंद्र सरकार की तरफ से राष्ट्रीय राजमार्ग 152 डी पर बाघोत -सेहलंग के बीच कट के लिए कार्यवाही प्रगति पर है। किसानों को केंद्र सरकार पर पूरा भरोसा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर कट अवश्य बनवाया जाएगा, समय लग सकता है।
 रामकिशन बाघोत धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने बताया कि बाघेश्वर धाम में लोगों के बीच आम चर्चा है, बाबा शिव भोले हमारे नैया अवश्य पार लगाएंगे। गांव का आम आदमी बाबा शिव भोले का भक्त है और लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश और विदेशों से बाबा शिव भोले के दर्शन करने के लिए बाघेश्वर धाम पहुंचते हैं। बाबा शिव भोले भक्तों को कभी निराश नहीं करेंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर बाघोत -सेहलंग के बीच कट बनेगा और जल्दी बनेगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 152 डी पर बाघोत -सेहलंग के बीच कट के लिए केंद्र सरकार की तरफ से सकारात्मक कार्रवाई हो रही है और जल्दी ही धरातल पर काम शुरू होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इन 40-50 गांवों की पहले से योजना तैयार है, जब राष्ट्रीय राजमार्ग 152 डी पर  बाघोत-सेहलंग के बीच कट बन जाएगा तब यहां पर कृषि के क्षेत्र में,उद्योग के क्षेत्र में, शिक्षा के क्षेत्र में और रोजगार के लिए कौन-कौन से कदम उठाने हैं, भूमिका तैयार है।
इस मौके पर संघर्ष समिति के सदस्य नरेंद्र शास्त्री छिथरोली,पहलवान धर्मपाल सेहलंग, सरपंच हरिओम पोता, ओमप्रकाश , संजय, राज सिंह, सुरेंद्र सिंह, ठेकेदार शेर सिंह, मास्टर धर्मपाल सिंह , सूबेदार श्री राम, भरत सिंह ,   मास्टर विजय सिंह, जिला पार्षद लीलाराम, सत्यप्रकाश,चेयरमैन सतपाल,   मास्टर विजय पाल, डॉ राम भक्त,
डॉ लक्ष्मण सिंह, डॉ सुरेंद्र सिंह, सूबे सिंह पंच, हंस कुमार, रामकुमार,   करण सिंह, पंच कृष्ण कुमार,सतनारायण साहब,ओम प्रकाश, भोले राम साहब,  प्रधान कृष्ण कुमार,   बाबूलाल,वेद प्रकाश, सूबेदार हेमराज अत्री,   प्यारेलाल,  रोशन लाल आर्य, शेर सिंह, दाताराम, सीताराम, ईश्वर सिंह, सुंदर व गणमान्य लोग मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 02: धरने पर बैठे ग्रामीण।

No comments: