ताप बढऩे से सरसों आई लावणी, कुछ किसान लगे लावणी में
-दूसरे प्रांतों से आने लगे हैं मजदूर
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कनीना की आवाज। क्षेत्र में ताप बढ़ जाने से गेहूं की फसल पर कुप्रभाव पड़ेगा। गेहूं की कटाई अप्रैल के प्रथम सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है जबकि सरसों की लावणी के कार्य में कुछ किसान लगे। किंतु 15 मार्च से अधिकांश खेतों में लावणी के शुरू हो जाएगी। अभी गेहूं की बालियां आ चुकी हैं जिनमें गेहूं का दाना मिल्किंग स्टेज पर है जिसे ठंड की जरूरत होती है।
करीब 19500 हेक्टेयर पर उगाई गई सरसों की फसल पक चुकी है। कुछ किसान कटाई के काम में लग गये हैं। दिन के समय ताप बढ़ गया है।
किसान अजीत कुमार,कृष्ण कुमार, राजेंद्र सिंह से इस संबंध में चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि इस वक्त गेहूं की फसल की सिंचाई की जरूरत है। गत दिनों थोड़ी सी बूंदाबांदी हुई थी किंतु अब किसानों को सिंचाई की जरूरत पड़ रही है। करीब 9500 हेक्टेयर पर गेहूं की खेती की गई है।
अधिकांश मजदूर होली पर्व के बाद आते हैं। 13 मार्च की होली है। परंतु लावणी पहले ही कुछ खेतों में आ ख्ुकी है।
पहुंचने लगे हैं मजदूर-
सरसों एवं गेहूं की लावणी के दृष्टिगत मजदूर इस क्षेत्र में आने लग गये हैं। ये मजदूर अपनी रोटी रोजी लावणी से ही कमाते हैं। उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान आदि राज्यों से मजदूर चार माह के लिए इस क्षेत्र में आते हैं और रोटी रोजी कमाकर वापस अपने घरों को लौट जाते हैं।
क्या कहते हैं कृषि अधिकारी-
उधर इस संबंध में पूर्व कृषि अधिकारी डा. देवराज से बात हुई। उन्होंने बताया कि अकसर सरसों की लावणी 15 मार्च से ही शुरू होती है किंतु खेत के स्वभाव एवं वातावरण का भी प्रभाव पड़ता है। अगैती फसल पहले लावणी आ जाती है।
फोटो कैप्शन 04: कनीना के खेतों में पकी खड़ी फसल
दूसरे प्रांतों से आने लगे हैं मजदूर
-किरायेदार बढऩे लगे
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कनीना की आवाज। सरसों की लावणी आ जाने से मजदूर बढऩे लगे हैं। किसानों गजराज, अजय, महेंद्र, कांता का का कहना है कि गेहूं में अभी एक और सिंचाई की जरूरत है वहीं सरसों की कहीं कहीं पर लावणी शुरू कर दी है।
दुकानों से दरांती एवं बाकड़ी की बिक्री बढ़ गई है। वहीं किसान अपने कृषि के इन औजारों को साफ करके तैयारी में जुट गए हैं। सरसों फसल की कटाई के साथ साथ किसान सरसों के धांसे भी काटकर ईंधन के रूप में प्रयोग करते हैं। इस मौसम में लंबे समय तक ईंधन के विकल्प के रूप में काम आने वाले धांसों की मांग बढ़ जाती है।
दूसरे राज्यों से फसल कटाई के लिए मजदूर भारी संख्या में आएंगे। ये मजदूर किसान से निश्चित राशि लेकर कटाई करते हैं तथा वापस अपने प्रांत को चले जाते हैं। किसान आलसी होते जा रहे हैं और इन मजदूरों से ही कटाई करवाने लगे हैं। विभिन्न किसानों के पास मजदूरों के फोन नंबर होते हैं जिस पर वे फोन करके उन्हें फसल कटाई के समय बुला लेते हैं। धड़ाधड़ फोन करके उन्हें बुलाया जा रहा है। कृषि अधिकारी मानते हैं कि सरसों की कटाई का सही समय मार्च माह का तीसरा सप्ताह होता है वहीं गेहूं की कटाई का सही समय अप्रैल दूसरा सप्ताह होता है।
मिली जानकारी अनुसार राजस्थान, बिहार एवं उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश राज्यों के भारी संख्या में मजदूर लावणी के लिए पहुंचने लगे हैं। हजारों किसान इस क्षेत्र में आते हैं। किसान अपने खेतों से फसल की कटाई का इंतजार कर रहे हैं। मजदूर होली पर्व के बाद अधिक संख्या में आएंगे। इस बार कटाई होली पर्व से पहले शुरू हो गई है।
किरायेदार बढ़ेंगे---
इस क्षेत्र में यूं तो विगत कुछ समय से दूसरे राज्यों के किराएदारों की संख्या बढ़ती जा रही है वहीं अब फसल काटने के लिए राजस्थान, बिहार एवं एमपी के मजदूर भी आएंगे। ये मजदूर पूरे खेत की लावणी का ही काम ठेके पर लेते हैं। ऐसे में किसान धूप में तपने से बचने के लिए इन मजदूरों का सहारा ले रहे हैं। कुल मिलाकर किसान की फसल की कटाई, निकालने का काम और घर तक पहुंचाने का काम अब मजदूर ही करने लगे हैं। आज से चार-पांच वर्ष पहले क्षेत्र के किसान इन मजदूरों से काम नहीं लेते थे किंतु अब स्थिति यह बन गई है कि इन्हीं से अधिक काम लेने लगे हैं।
थ्रेसर और ट्रैक्टर भी साथ--
बाहर से आने वाले मजदूर अपने साथ थ्रेसर एवं ट्रैक्टर आदि भी रखते हैं ताकि फसल काटने के अलावा फसल निकालने का काम भी पूरा कर सके। राजस्थान में सरसों करीब एक माह पहले ही निकाली जा चुकी हैं।
अब ठेका लेते हैं बड़े किसान-
बड़े किसान अपने खेतों के ट्यूबवेलों पर दूसरे प्रांतों से मजदूरों को बुला लेते हैं जिनसे अपने खेत की लावणी के अतिरिक्त दूसरे किसानों की लावणी के लिए ठेका लेते हैं। मजदूरों को भी ये ही किसान भेजते हैं। कनीना में एक दर्जन के करीब ऐसे ठेकदार हैं जो हर गांव में मिलते हैं।
हर हर वर्ष बढ़ जाते हैं इनके रेट-
हर वर्ष इन मजदूरों के भी रेट बढ़ जाते हैं। विगत वर्ष जहां 5000 रुपये तक एक एकड़ गेहूं खेत की लावणी की गई। इस बार अनुमान है कि कम से कम 6000 रुपये प्रति एकड़ में लावणी करेंगे। लावणी के अतिरिक्त भी इन मजदूरों से खेती करने तथा मुर्गी फार्म में रखरखाव का काम करते हैं। सरसों की लावणी का रेट विगत वर्ष 2500 रुपये प्रति किला था किंतु इस बार यह कम से कम 3 हजार रुपये किला है।
नहीं है आत्मनिर्भर किसान-
किसानों ने बताया कि एक जमाना था जब परिवार के सदस्यों की संख्या अधिक होती थी उस समय मजदूरों की जरूरत कम पड़ती थी किंतु अब प्रत्येक घर में सदस्य की संख्या कम होती है। एक और जहां चल रही हैं विद्यार्थी अपने स्कूल में परीक्षा देने जाते हैं वही किसान अपने खेतों में लावणी का कार्य करते हैं। लेकिन ऐसे बहुत कम किसान है जो अपने खेत की लावणी स्वयं करते हैं। मजदूरों पर ही लावणी का कार्य निर्भर करता है।
मिली जानकारी अनुसार राजस्थान, बिहार ,उत्तर प्रदेश तथा अन्य राज्य से मजदूरों के ग्रुप आए हुए हैं। ये ग्रुप दस से लेकर के 30 की संख्या में मिलते हैं। एक साथ मिलकर कार्य करते हैं। फसल कटाई का काम जो दिनों में पूरा होना चाहिए कुछ ही घंटों में पूरा कर जाते हैं। यही कारण है किसान मौसम को देखते हुए तथा मौसम बदलाव के चलते हुए इन मजदूरों से कटाई करवाता है। यहां तक सरसों निकालने का कार्य भी मजदूरों से करवा भंडारण तक का कार्य भी मजदूरों से करवाता है।
फोटो कैप्शन 05: कुछ खेतों में लावणी का काम करते किसान।
जोधपुर से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन का हो कनीना में ठहराव
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कनीना की आवाज। हाल ही में रेलवे विभाग ने जोधपुर से गोरखपुर तक के ट्रेन 04829 का संचालन शुरू किया है वहीं यह ट्रेन 04830 गोरखपुर से जोधपुर के लिए जाती है। यह गाड़ी 6 मार्च से लगातार चल रही है किंतु कनीना होकर जाने पर भी इसका कनीना खास रेलवे स्टेशन पर कोई ठहराव नहीं है।
रेलवे विकास समिति के योगेश कुमार, मुकेश नंबरदार, राहुल, योगेश पंसारी, प्रेम सिंगला के अतिरिक्त बह्मदत्त जांगिड़ ने सरकार से और रेल मंत्री से प्रार्थना की है कि कनीना खास रेलवे स्टेशन पर इसका जरूर ठहराव किया जाए। वैसे भी जिला महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिलों के बीच की कड़ी का काम कनीना खास रेलवे स्टेशन करता है और कनीना खास रेलवे स्टेशन पर सभी सुविधाएं होते हुए भी एवं उपमंडल का दर्जा प्राप्त होते हुए भी ट्रेन का ठहराव नहीं किया गया है। उन्होंने सरकार को उन्होंने कहा कि वह सरकार को एक पत्र भी भेजेंगे ताकि इस प्रकार की ट्रेन का कनीना में जरूर ठहराव हो ताकि लोग अयोध्या, लखनऊ ,दिल्ली आदि स्थानों तक जा सके। यही नहीं लोग जोधपुर सादलपुर आदि स्टेशनों की ओर भी जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारियों द्वारा यह अनदेखी की जा रही है और यह मांग उनकी जायज है। विगत वर्षों जहां कनीनावासियों द्वारा बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद भी कनीना खास रेलवे स्टेशन पर सभी ट्रेनों का ठहराव नहीं होता है। उनका कहना है कि सभी ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित किया जाए ताकि लोगों की मांग पूरी हो सके।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस- 08 मार्चं
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी अब किसी से कम नहीं
-हर क्षेत्र में कमा रही हैं नाम
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कनीना की आवाज। यूं तो महिला को मातृशक्ति की संज्ञा दी गई है किंतु ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं और लड़कियां किसी से किसी प्रकार कम नहीं हैं। उनकी उपलब्धियों को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि ग्रामीण महिलाएं पुरुषों से किसी प्रकार कम हैं। एक वक्त था जब लोग लड़कियों को पढ़ाना-लिखाना कम चाहते थे किंतु आज लड़कियां पढ़ लिखकर लड़कों से भी आगे निकल चुकी है। नौकरी में हो या अंतरिक्ष में पहुंचने की बात हो या फिर किसी अन्य क्षेत्र की बातों लड़कियां और महिलाएं आगे मिलती हैं।
कनीना एवं आस पास क्षेत्र की अनेक महिलाएं /लड़कियां आज उच्च पदों पर नाम कमा रही है। यहां तक की हर कार्य को लड़कियां बखूबी से पूरा रही है। ऐसी कुछ महिलाएं और लड़कियां जो क्षेत्र में नाम कमा रही है, बातचीत हुई-
***रितिका ग्रामीण लड़की जो खेती-बाड़ी के काम में लगी रहती थी किंतु आज एमबीबीएस करके जन सेवा में जुट गई है। मां-बाप अधिक पढ़े-लिखे न होने के कारण भी लड़की ने नाम कमाया है और आज के दिन रोहतक से एमबीबीएस कर डाक्टर बन चुकी है। जनसेवा उनका ध्येय है। उनके पिता दिनेश कुमार एक किसान है।
-- डा. रितिका यादव, कनीना
** कृषि क्षेत्र में अग्रणी किसान भी महिलाएं है। मोड़ी की खेत के सभी कार्य अच्छे प्रकार कर लेती है तथा ट्रैक्टर चलाना सब्जी और फल पैदा करना यहां तक की अनाज पैदा करना सभी कार्यों में अग्रणी है। 25 सालों से कृषि कार्यों में जुटी हुई है और अपने इस क्षेत्र में नाम कमा रही है।
---कांता देवी, मोड़ी
अंशिका ग्रामीण क्षेत्र संबंध रखते हुए भी एमबीबीएस तृतीय वर्ष रोहतक कर रही है। उसमें सिद्ध कर दिया है कि घर परिवार में कोई बहुत पढ़ा लिखा न हो तब भी लड़कियां नाम कमा सकती है। यही कारण है कि अंशिका के मां-बाप को उन पर गर्व है और वह डाक्टरी का कोर्स कर रही है।
--अंशिका, कनीना
कनीना की एकता जो हाल ही में एसआई बनी है। घर परिवार के हालात बहुत बेहतरीन न होते हुए भी अपने ही दम पर इस पद तक पहुंची है। कड़ी मेहनत का परिणाम है जिसके कारण वह एसआई पद पर पहुंच पाई है। परिवार को उन पर नाज है। वर्तमान में अंबेडकर नगर साउथ दिल्ली में कार्यभार संभाल रखा है।
--एकता यादव,कनीना
प्रेरणा लेडी हार्डिंग कालेज नई दिल्ली से एमबीबीएस कर रही है। उनका चतुर्थ वर्ष चल रहा है। उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर नाम कमाया है तथा ग्रामीण क्षेत्र से होने पर भी दिल्ली से एमबीबीएस कर रही है।
----प्रेरणा, कनीना
आरजू माइनिंग इंस्पेक्टर है। अपने दम के चलते वह इस पद पर पहुंची है। ग्रामीण क्षेत्र से संबंध रखते हुए भी उन्होंने ऊंचा मुकाम हासिल किया है। परिवार की हालात चाहे अच्छी नहीं रही हो परंतु इस लड़की ने इस पद पर पहुंचकर सिद्ध कर दिया है की मेहनत के आगे सब कुछ शून्य हो जाता है और मेहनत करने वाला ऊंचाइयों को छूता है। वर्तमान में रेवाड़ी में कार्यरत है।
----आरजू,माइनिंग इंस्पेक्टर
रितिका यादव पुत्री सवाई सिंह ग्रामीण लड़की ने एमबीबीएस कर ली है तथा अब पीजी की तैयारियों में जुटी है। परिवार अधिक लिखा पढ़ा नहीं है तथापि उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर नाम कमाया है और डाक्टरी की पढ़ाई पूरी की है। अब पीजी की तैयारी में जुटी है।
--डा. रितिका यादव, कनीना
गरीब परिवार से उठकर कालेज के प्राध्यापक पद/सहायक प्रोफेसर पद तक कनीना की शर्मिला यादव पहुंची है। वर्तमान में रोहतक में शिक्षण का कार्य कर रही है। उनके पिता एक सामान्य दुकानदार हैं। उनकी मेहनत के बल पर ऐसा संभव हो पाया है।
डा. शर्मिला
फोटो कैप्शन: कांता, रितिका, डा शर्मिला, एकता ,प्रेरणा, आरजू, रितिका यादव और अंशिका।
श्याम बाबा की पहली पदयात्रा पहुंची जैतपुर
-8 मार्च को जाएगी दूसरी पदयात्रा, 400 के करीब भक्त हुए शामिल
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कनीना की आवाज। कनीना मंडी मंदिर से चलने वाली खाटू यात्रा जैतपुर पहुंची। सुबह भारी संख्या में भक्तजन अपना-अपना निशान लेकर खाटू मंदिर पहुंच गए जहां से सुबह यात्रा प्रारंभ हुई जो खाटू श्याम मंदिर जैतपुर पहुंची।
विधि विधान से भक्तजन अपने-अपने निशान को लेकर जगह-जगह रुकते हुए गीत, भजन गाते हुए जैतपुर पहुंची। इसके बाद क्षेत्र के विभिन्न शिविर धीरे-धीरे संपन्न होने लग जाते हैं तथा खाटू श्याम मंदिर कनीना पर लगाया गया शिविर भी समापन की ओर है। 8 मार्च को दूसरी यात्रा और अंतिम यात्रा जैतपुर जाएगी।
उल्लेखनीय है कि दो अलग-अलग सेवक मंडल इस प्रकार का आयोजन करवाते आ रहे हैं। इसके बाद कनीना के खाटू धाम पर भरने वाले तथा संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ आश्रम पर लगने वाले मेले की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। 10 मार्च से को यहां मेला लगेगा।
कनीना से करीब 30 किलोमीटर दूर राजस्थान के जैतपुर धाम पर विगत कुछ वर्षों से भक्तों की भीड़ बढऩे लगी है। 10 वर्षों से कनीना के खाटू श्याम मंदिर से एक निशान यात्रा जैतपुर धाम जाती रही है।
निशान यात्रा में महिला तथा पुरुष गाते नाचते हुए जैतपुर पहुंचे और वहां पर अपना अपना निशान अर्पित किया। विस्तृत जानकारी देते हुए रविंद्र बंसल, मनोज कुमार ने बताया कि हर वर्ष यह यात्रा कनीना मंडी से होकर गुजरते हुए तथा जैतपुर पहुंची। इसमें भक्त अपनी इच्छा से जाते हैं और इसी प्रकार की यात्रा श्री श्याम मित्र मंडल की ओर से 8 मार्च को रवाना होगी। दुलीचंद साहब, पाल्हाराम ने बताया कि खाटू श्याम से यात्रा 8 मार्च को सुबह चलेगी।
उल्लेखनीय यह है कि जो भक्त मुख्य खाटू धाम नहीं जा सकते वह इस खाटू धाम जैतपुर जाते हैं। यह यात्रा एक ही दिन में पूर्ण हो जाने से लोगों का उत्साह बढ़ा हुआ है।
फोटो कैप्शन 01: निशान यात्रा जैतपुर जाते हुए।
जीत हार के लगने लगे हैं सट्टे
-प्रधान पद के लिए लग रहे हैं सबसे अधिक सट्टे
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कनीना की आवाज। जहां रविवार को कनीना नगर पालिका के प्रधान पद तथा पार्षद पद के लिए चुनाव संपन्न हो गए। मतदान भी जहां करीब 86 प्रतिशत रहा किंतु विगत योजनाओं की तुलना में कुछ कम मतदान हुआ है। जहां चुनाव मैदान में 7 महिला प्रत्याशी थी और सातों ही अब अपनी-अपनी जीत के दावे जाता रही हैं। कोई अपने को किसी से कम नहीं आंक रही है। इस संबंध में कनीना में हार जीत के सट्टे लगने लग गये हैं। वार्ड एक, प्रधान पद, वार्ड नौ के सट्टे लग चुके हैं।
सातों प्रधान पद की दावेदार पहली बार प्रधान पद के लिए मैदान में उतरी हैं। ऐसे में त्रिकोणिये कड़ा मुकाबला प्रधान पद के लिए माना जा रहा है। यह सत्य है कि दो प्रधान पद की दावेदार पार्षद पद का चुनाव लड़ चुकी हैं जिनमें से संतोष यादव पार्षद भी रह चुकी है। अलग अलग वार्डों से विभिन्न प्रत्याशियों की जीत बताई जाने लगी है जिसके चलते सट्टों का बाजार गर्म है।
अब तो प्रत्याशी कम परेशान नजर आये अपितु समर्थक सबसे अधिक बेचैन एवं उम्र दिखाई दे रहे हैं। इन चुनावों में इस बार प्रत्येक प्रत्याशी हर परिवार में किसी न किसी का जानकार होने के कारण एक ही परिवार के वोट आपस में बंट गये हैं। ऐसे में साइलेंट वोटर अधिक होने के कारण हार जीत का सही सही आंकलन कर पाना कठिन हो चुला है। अब तो 12 मार्च को कनीना माडल स्कूल में होने वाली मतगणना के बाद ही पता चल पाएगा कि किसके हाथ कुर्सी लगती है। मास्टर गुट को कहीं हावी तो कहीं राजेंद्र गुट को बता रहे हैं हावी।
कनीना नगरपालिका चुनाव-2025
मतगणना 12 मार्च को, चुनावी चर्चा है जारी
-48 प्रत्याशियों का भाग्य बंद है ईवीएम में
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कनीना की आवाज। कनीना के राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 12 मार्च को 48 प्रत्याशियों का भाग्य खुलेगा। अभी तक यह भाग्य ईवीएम में बंद है। सबसे अधिक चर्चा का विषय कनीना नगर पालिका के प्रधान पद की है। इसके लिए सात महिलाएं आमने-सामने है और प्रमुख ममुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है। पहली बार तीसरा गुट उभरकर सामने आया है जिसने ममुकाबले को रोचक बना दिया है। यही कारण है कि आए दिन अब तो चर्चा बढ़ती ही जा रही है, बेसब्री से लोग इंतजार कर रहे हैं कि कब 12 मार्च का दिन आएगा। और कब उनके भाग्य का फैसला सुनने को मिलेगा क्योंकि एकमात्र जगह राजकीय माडल स्कूल में ही मतगणना केंद्र बनाया गया है जहां ईवीएम की कड़ी सुरक्षा की गई है। क्योंकि ईवीएम में किसको कितने वोट मिले हैं, यह पहले से ही ईवीएम में बंद हो चुका है। 48 प्रत्याशियों का भाग्य दो मार्च को ही ईवीएम में बंद हो चुका है। मतदान के 10 दिनों तक इंतजार करके ही ये ईवीएम खोली जाएगी क्योंकि 41 पार्षद प्रत्याशी तथा सात प्रधान प्रत्याशी चुनाव मैदान में है जिनके भाग्य का फैसला होगा। 14 वार्डों में 41 पार्षद प्रत्याशी खड़े हुए हैं जिनके भाग्य का फैसला कुछ ही मिनट में ईवीएम द्वारा कर दिया जाएगा लेकिन 14 वार्ड में प्रधान पद के लिए प्रत्याशियों के कुल मतों की गणना सभी वार्डों की मिलाकर की जाएगी। ऐसे प्रधान पद का निर्णय परिणाम में कुछ देरी लग सकती है, वरना पार्षद पद के प्रत्याशियों का भाग्य तुरंत बतला दिया जाएगा।
वार्डों पर नजर डाले तो वार्ड एक में दो प्रत्याशी मैदान में और यहां सीधा मुकाबला है। इसमें हार जीत के सट्टे भी लगे हुए हैं। इसी प्रकार वार्ड 2 में दो ही प्रत्याशी मैदान में है और सीधा मुकाबला है। यहां से एक एमएलए का चुनाव लउ़ चुका प्रत्याशी भी मैैदान में है। किंतु वार्ड 3 में 3 प्रत्याशी जिनके बीच त्रिकोणीय मुकाबला बना हुआ है। वार्ड चार में चार प्रत्याशी मैदान में है और सभी महिलाएं हैं, इनके भाग्य का फैसला 12 मार्च को होगा। वार्ड पांच में जहां तीन प्रत्याशी त्रिकोणीय मुकाबले में है वहीं वार्ड 6 में भी त्रिकोणीय मुकाबला है। वार्ड 7 में तीन महिलाएं त्रिकोणीय मुकाबले में खड़ी हुई है वहीं वार्ड आठ में सीधा मुकाबला दो महिलाओं के बीच है। वार्ड 9 में सबसे अधिक प्रत्याशी पांच है और इस पर सभी की नजरें टिकी हुई है क्योंकि सबसे अधिक प्रत्याशियों के बीच कौन बाजी मारता है, यह निर्णय ईवीएम करेंगी। वार्ड 10 में त्रिकोणीय मुकाबला है वही 11 में सीधा मुकाबला है। वार्ड 12 में जहां तीन महिलाएं आमने-सामने है वहीं वार्ड 13 चार प्रत्याशी मैदान में है। वार्ड 14 में सीधा मुकाबला है। इस पर भी नजरें टिकी हुई है क्योंकि एमएलए का चुनाव लडऩे वाला एक प्रत्याशी इस बार पार्षद के चुनाव में खड़ा हुआ है। और एक युवा के सामने खड़ा हुआ है। अब यह देखना है कि यह युवा बाजी मारता है या नहीं । उधर प्रधान पद के लिए 7 प्रत्याशी मैदान में है लेकिन प्रबल मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है। क्योंकि 10413 मतदाता कनीना नगर पालिका में हैं जिनमें से 8935 वोट पड़े हैं यद्यपि विगत योजना के मुकाबले इस बार वोट कम प्रतिशत में पड़े हैं किंतु प्रधान पद का सीधा मुकाबला होने से इस बार के चुनाव विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है। वैसे भी इस बार एक वार्ड विगत योजनाओं के मुकाबले अधिक है 14 वार्ड बनाए गए हैं और महिला के लिए आरक्षित है।
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस
पर आयोजित हुई कई प्रतियोगिताएं
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कनीना की आवाज। राजकीय कन्या महाविद्यालय उन्हाणी में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या के उपलक्ष्य में महिला प्रकोष्ठ के तत्वाधान में रंगोली एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्राचार्य डा. विक्रम यादव की अध्यक्षता एवं डा. अंकित यादव के निर्देशन में संपन्न इस कार्यक्रम में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्राचार्य ने छात्राओं को इन प्रतियोगिताओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रंगोली प्रतियोगिता छात्राओं की रचनात्मकता, सांस्कृतिक जागरूकता, टीमवर्क, सामाजिक कौशल और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक है। वहीं, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के माध्यम से छात्राओं को कलात्मक अभिव्यक्ति, विषय-विशेषज्ञता और स्पर्धात्मक भावना का विकास होता है। रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्रियंका, द्वितीय स्थान मोनिका व तृतीय स्थान रितु ने पाया तथा पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में प्रथम , द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर क्रमश: पीहू, मानसी व पूजा रही। प्राचार्य महोदय महिला शक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है जिसे हमें अपने जीवन में उतारना होगा।जब हम बेटियों को आगे बढऩे का मौका देते हैं, जब हम महिलाओं को निर्णय लेने का हक देते हैं, तभी असली समानता आती है। यह एक महत्वपूर्ण संदेश है जिसे हमें अपने समाज में फैलाना होगा।हम सभी यह प्रण लें कि हम महिलाओं का समर्थन करेंगे, उनके अधिकारों की रक्षा करेंगे और उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए प्रेरित करेंगे के बारे में ज्ञानवर्धक वक्तव्य दिया। उन्होंने डा.अंकिता यादव का इन प्रतियोगिताओं की सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया ।निर्णायक मंडल में डा. सीमा, डा. कविता एवं श्री अनिल कुमार ने अपनी प्रशंसनीय भूमिका निभाई। इन प्रतियोगिताओं में स्थान पाने वाली छात्राओं को पुरस्कृत कर सम्मानित करते हुए प्रोत्साहित किया गया।इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्य एवं छात्राएं उपस्थित रहीं।


















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